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  • रांची में 'जंतर-मंतर' जैसा आंदोलन: JPSC-JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप पर छात्रों का उग्र प्रदर्शन

    रांची में 'जंतर-मंतर' जैसा आंदोलन: JPSC-JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप पर छात्रों का उग्र प्रदर्शन


    रांची। झारखंड की राजधानी रांची में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। जयपाल सिंह स्टेडियम में चल रहा धरना अब राष्ट्रीय स्तर के आंदोलनों जैसी तस्वीर पेश कर रहा है। छात्र दिन-रात प्रदर्शन कर रहे हैं और एक छात्र नेता आमरण अनशन पर बैठ चुके हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि बेरोजगारी ने उनकी नींद पहले ही छीन ली है, अब वे सरकार को जगाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

    बारिश और रातभर प्रदर्शन के बीच कायम रहा आंदोलन
    जयपाल सिंह स्टेडियम में छात्र लगातार धरना दे रहे हैं। बारिश और खराब मौसम के बावजूद प्रदर्शन जारी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं होती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन नहीं रुकेगा। आमरण अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने मांग की है कि 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

    क्या हैं छात्रों के आरोप?
    प्रदर्शन का मुख्य कारण 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम है। छात्रों का आरोप है कि कटऑफ तय करने में गंभीर अनियमितताएं हुईं। मेरिट सूची पर जिम्मेदार अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं थे। OMR शीट में हेरफेर की आशंका है। परीक्षा आयोजित करने वाली TDPL कंपनी को परीक्षा से पहले राज्य में ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था, फिर भी उसे जिम्मेदारी दी गई। अभ्यर्थियों का कहना है कि केवल राज्य स्तर की जांच पर्याप्त नहीं है और पूरे मामले की CBI से जांच कराई जानी चाहिए।

    OMR में नए विकल्प की भी मांग
    छात्र भविष्य में विवाद रोकने के लिए OMR शीट में ‘Not Attempted’ (प्रश्न नहीं किया) का अलग विकल्प जोड़ने की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ की संभावना कम होगी और मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।

    आंदोलन पर सियासत भी तेज
    छात्रों के प्रदर्शन के बीच झारखंड की राजनीति भी गर्मा गई है। सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने सरकार के रुख का समर्थन किया, जबकि विपक्ष ने पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग उठाई है। विपक्ष का कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामले में निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

    छात्रों को मिला CJP का समर्थन
    भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ चल रहे आंदोलन को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का भी समर्थन मिला है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आंदोलनरत छात्रों से बातचीत कर उनकी मांगों का समर्थन किया। वहीं, पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी सोशल मीडिया के जरिए छात्रों के साथ खड़े रहने की बात कही।

    मशाल मार्च से बढ़ा दबाव
    करीब एक सप्ताह से जारी सत्याग्रह के बीच छात्रों ने रविवार को मशाल मार्च भी निकाला। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने हाथों में जलती मशालें लेकर विरोध प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि जब तक पूरे मामले की CBI जांच का निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

  • तमिलनाडुः पोल्लाची के पास खड़े ट्रक से टकराई कार, एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत

    तमिलनाडुः पोल्लाची के पास खड़े ट्रक से टकराई कार, एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत


    कोयंबटूर।
    तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले में पोल्लाची के निकट सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से कार की जोरदार टक्कर होने से एक ही परिवार के पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार किसी भी व्यक्ति को बचाया नहीं जा सका।

    पुलिस के अनुसार, कोयंबटूर जिले के मदुक्करई एमएलए स्ट्रीट निवासी कनकराज एक निजी कंपनी में कार्यरत थे। उनके परिवार में पत्नी उमा महेश्वरी, बड़ी बेटी आरती और छोटी बेटी नर्मदा थीं। रविवार को कनकराज अपने परिवार तथा दूर के रिश्तेदार रामन के साथ कार से उदुमलपेट स्थित अपने कुलदेवता मंदिर में दर्शन कर वापस घर लौट रहे थे। कार कनकराज स्वयं चला रहे थे।

    दोपहर के समय जब उनकी कार पोल्लाची के पास नल्लाम्पल्ली इलाके से गुजर रही थी, तभी वह अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से जा टकराई। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। हादसे में कनकराज, उनकी पत्नी उमा महेश्वरी, दोनों बेटियां आरती और नर्मदा तथा रिश्तेदार रामन की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

    घटना की सूचना मिलते ही गोमंगलम पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की सहायता से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद क्षतिग्रस्त कार में फंसे शवों को बाहर निकाला गया और पोस्टमार्टम के लिए पोल्लाची सरकारी अस्पताल भेजा गया।

    प्रारंभिक जांच में पुलिस को पता चला है कि सड़क के बीच बने डिवाइडर पर लगे पौधों में पानी देने के लिए ट्रक सड़क किनारे खड़ा किया गया था। इसी दौरान कार अनियंत्रित होकर ट्रक से टकरा गई। हालांकि दुर्घटना की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है।

    एन्नोर में ट्रेन की चपेट में आने से व्यक्ति की मौत

    इधर, चेन्नई के एन्नोर रेलवे स्टेशन के पास भी रविवार को एक हादसा हुआ। रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान कन्नन नामक व्यक्ति ट्रेन की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    घटना के बाद स्थानीय लोगों ने शोक व्यक्त करते हुए बताया कि इस क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पार करते समय होने वाले हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लोगों ने रेलवे प्रशासन से मांग की कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यहां जल्द से जल्द फुटओवर ब्रिज या अन्य सुरक्षित पारपथ का निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

  • दिल्ली में 22वीं कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस चैंपियनशिप का भव्य समापन, भारत के खाते में 16 पदक

    दिल्ली में 22वीं कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस चैंपियनशिप का भव्य समापन, भारत के खाते में 16 पदक


    नई दिल्ली।
    दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित 22वीं कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस चैंपियनशिप 2026 का रविवार को भव्य समापन हुआ। समापन समारोह में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मुख्य अतिथि के रूप में विजेता खिलाड़ियों को पदक एवं सम्मान प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार का संकल्प है कि राष्ट्रीय राजधानी को केवल देश की राजनीतिक राजधानी ही नहीं, बल्कि भारत की ‘स्पोर्ट्स कैपिटल’ के रूप में भी स्थापित किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 27 जुलाई से आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में 25 कॉमनवेल्थ देशों के खिलाड़ियों की भागीदारी ने दिल्ली की विश्वस्तरीय खेल आयोजनों की मेजबानी क्षमता को एक बार फिर साबित किया है। उन्होंने इसे खेल उत्कृष्टता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का उत्सव बताया।

    समारोह में शिक्षा एवं खेल मंत्री आशीष सूद, कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस फेडरेशन और टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया के पदाधिकारी, विभिन्न देशों के खिलाड़ी, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल तथा खेल जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। समापन समारोह में कलारीपयट्टू, फ्लाइंग ड्रमर्स, विशेष बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और मेडल सेरेमनी ने आकर्षण का केंद्र बनाया।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थियों को प्रतियोगिता देखने के लिए आमंत्रित किया गया, ताकि वे विश्वस्तरीय खिलाड़ियों से प्रेरणा लेकर खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने कहा कि खेल अनुशासन, नेतृत्व, टीम भावना और राष्ट्रभक्ति जैसे मूल्यों का विकास करते हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत न केवल अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, बल्कि विश्वस्तरीय खेल आयोजनों की सफल मेजबानी भी कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2027 में दिल्ली आईएसएफ वर्ल्ड स्कूल रेसलिंग चैंपियनशिप और आईएसएफ वर्ल्ड स्कूल बैडमिंटन चैंपियनशिप की मेजबानी करेगी। इसके अलावा दिल्ली सरकार ने नेशनल गेम्स और खेलो इंडिया गेम्स की मेजबानी के लिए भी दावेदारी पेश की है।

    मुख्यमंत्री ने भारतीय टीम को विशेष रूप से बधाई देते हुए कहा कि पुरुष और महिला दोनों टीम स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर खिलाड़ियों ने देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने आयोजन समिति, तकनीकी अधिकारियों, स्वयंसेवकों, सुरक्षा एजेंसियों और सभी सहभागी देशों का सफल आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया।

    शिक्षा एवं खेल मंत्री आशीष सूद ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली को इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की मेजबानी का अवसर मिला, जिसने राजधानी को वैश्विक खेल मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन युवाओं को खेलों में आगे बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित करेंगे।

    भारत का शानदार प्रदर्शन

    चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 16 पदक अपने नाम किए। भारत ने पुरुष और महिला टीम स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतने के अलावा पुरुष एवं महिला एकल, महिला युगल, मिश्रित युगल तथा पुरुष युगल स्पर्धाओं में भी स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक हासिल कर प्रतियोगिता में अपना दबदबा कायम रखा। भारतीय खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने विश्व मंच पर भारतीय टेबल टेनिस की बढ़ती ताकत को एक बार फिर साबित किया।

  • पाकिस्‍तान को एक और झटका: सिंधु जल संधि के बाद रावी पर भारत का फोकस, उझ परियोजना को मिली रफ्तार

    पाकिस्‍तान को एक और झटका: सिंधु जल संधि के बाद रावी पर भारत का फोकस, उझ परियोजना को मिली रफ्तार


    नई दिल्ली।
    सिंधु जल संधि को लेकर भारत के सख्त रुख के बीच जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से लंबित उझ बहुउद्देश्यीय परियोजना को गति देने की कवायद तेज हो गई है। केंद्र सरकार का जोर रावी नदी के भारत के हिस्से के जल का अधिकतम उपयोग देश में ही सुनिश्चित करने पर है। परियोजना के पूरा होने से सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन के क्षेत्र में लाभ मिलने की उम्मीद है।

    केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को उझ परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उन राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जो लंबे समय से लंबित हैं और जिनकी देरी से देश को नुकसान उठाना पड़ा है।

    उझ और शाहपुरकंडी परियोजना पर जोर

    डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि उझ मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट और शाहपुरकंडी परियोजना केवल विकास से जुड़ी योजनाएं नहीं हैं, बल्कि देश के जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और रणनीतिक हितों से भी इनका संबंध है। लंबे समय तक परियोजनाओं के अटके रहने के कारण रावी और उसकी सहायक नदियों का उपलब्ध पानी पर्याप्त मात्रा में उपयोग नहीं किया जा सका।

    उन्होंने बताया कि उझ परियोजना की कल्पना करीब 100 वर्ष पहले की गई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह आगे नहीं बढ़ सकी। इसी तरह शाहपुरकंडी परियोजना भी करीब चार दशक तक लंबित रही।

    जमीन उपलब्ध होते ही शुरू होगा काम

    सरकार अब परियोजना के निर्माण को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि पूरी जमीन के अधिग्रहण का इंतजार किए बिना जहां जमीन उपलब्ध है, वहां निर्माण कार्य शुरू किया जाए। बाकी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया इसके साथ ही चलती रहेगी।

    सरकार का मानना है कि इस तरीके से परियोजना को पूरा करने में लगने वाला समय कम किया जा सकेगा और इसके लाभ लोगों तक जल्द पहुंचेंगे।

    गुणवत्ता और समयसीमा पर जोर

    केंद्रीय मंत्री ने परियोजना से जुड़ी एजेंसियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने के साथ गुणवत्ता, सुरक्षा और दक्षता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने नई तकनीक और बेहतर कार्यप्रणाली अपनाकर परियोजना को तय समयसीमा में पूरा करने पर जोर दिया।

    सिंचाई और बिजली उत्पादन को मिलेगा लाभ

    उझ और शाहपुरकंडी परियोजनाओं के माध्यम से भारत के हिस्से के जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग किए जाने की योजना है। इससे क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के साथ पेयजल उपलब्धता और बिजली उत्पादन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास में भी इन परियोजनाओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि शाहपुरकंडी परियोजना को वर्ष 2019 में दोबारा गति दी गई थी और अब यह लगभग पूरी होने की स्थिति में है। वहीं, उझ परियोजना को 2026 में फिर से गति देने का उद्देश्य वर्षों से लंबित परियोजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारना है। सरकार का कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर उनका लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंचाना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

  • बारिश से जूझते केरल में राजनीतिक घमासान, CPIM सांसद ने मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं पर उठाए सवाल

    बारिश से जूझते केरल में राजनीतिक घमासान, CPIM सांसद ने मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।केरल में लगातार हो रही भारी बारिश ने कई जिलों में जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। राज्य के अनेक हिस्सों में जलभराव, बाढ़ जैसी स्थिति और भूस्खलन की आशंका के बीच प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा हुआ है। इसी बीच राज्य की राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। माकपा के राज्यसभा सांसद ए.ए. रहीम ने मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि आपदा की इस घड़ी में उन्हें राहत कार्यों का नेतृत्व करने पर पूरा ध्यान देना चाहिए था।

    राजनीतिक विवाद उस समय शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री मलप्पुरम जिले के पोन्नानी क्षेत्र में यूथ लीग के एक नेता के घर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस कार्यक्रम की तस्वीरें सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। ए.ए. रहीम ने कहा कि जब राज्य के कई जिले प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे हैं और हजारों लोग कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, तब मुख्यमंत्री की उपस्थिति ऐसे कार्यक्रम में उचित संदेश नहीं देती।

    रहीम ने कहा कि राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष होने के नाते मुख्यमंत्री की सबसे बड़ी जिम्मेदारी राहत एवं बचाव कार्यों का प्रभावी समन्वय करना है। उनके अनुसार ऐसे समय में प्रशासनिक नेतृत्व का सक्रिय रूप से मैदान में दिखाई देना लोगों के बीच भरोसा पैदा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आपदा की गंभीर स्थिति के दौरान निजी कार्यक्रमों में शामिल होना जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

    उन्होंने यह भी कहा कि जब पूरा राज्य भारी बारिश, बाढ़ और अनिश्चितता के माहौल से गुजर रहा हो, तब सरकार का पूरा ध्यान प्रभावित लोगों की सुरक्षा, राहत सामग्री की उपलब्धता और बचाव अभियान को तेज करने पर होना चाहिए। रहीम ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे अन्य सभी गतिविधियों को पीछे छोड़कर राज्य में चल रहे राहत कार्यों की निगरानी स्वयं करें ताकि प्रभावित लोगों तक सहायता तेजी से पहुंच सके।

    दूसरी ओर, केरल में लगातार हो रही वर्षा के कारण कई जिलों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। नदियों का जलस्तर बढ़ने, निचले इलाकों में जलभराव और कुछ स्थानों पर भूस्खलन की घटनाओं ने प्रशासन की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। कई सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ है और स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    राज्य सरकार और जिला प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रभावित इलाकों में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए लोगों के भोजन, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन आपदा प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए हुए है और मौसम की स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम उठा रहा है।

    अब तक राज्य में बारिश से जुड़ी घटनाओं में छह लोगों की मृत्यु की पुष्टि हुई है, जबकि छह अन्य लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। विभिन्न जिलों में कुल 65 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां 1400 से अधिक लोगों को सुरक्षित ठहराया गया है। प्रशासन का कहना है कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त राहत उपाय भी लागू किए जाएंगे। इस बीच, आपदा के बीच शुरू हुआ राजनीतिक विवाद भी राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • पीएम मोदी पर टिप्पणी करने वाली नाबालिग की माफी के बाद कंगना रनौत ने माता-पिता से की बच्चों को वैचारिक प्रभाव से बचाने की अपील

    पीएम मोदी पर टिप्पणी करने वाली नाबालिग की माफी के बाद कंगना रनौत ने माता-पिता से की बच्चों को वैचारिक प्रभाव से बचाने की अपील

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में माफी मांगने वाली 15 वर्षीय नाबालिग लड़की से जुड़ा विवाद अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया देते हुए अभिभावकों से अपने बच्चों के मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किशोर उम्र के बच्चों को गलत संगत और ऐसे वैचारिक प्रभावों से बचाने की आवश्यकता है, जो उन्हें भड़काऊ या अनुचित व्यवहार की ओर ले जा सकते हैं।

    कंगना रनौत ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा कि संबंधित किशोरी स्वयं यह स्वीकार कर रही है कि वह पहले कभी प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई पोस्ट या टिप्पणी नहीं करती थी, लेकिन विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों के कहने पर उसने आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों के सामाजिक और वैचारिक परिवेश पर ध्यान दें तथा उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए सही दिशा प्रदान करें। उन्होंने अपने संदेश में कुछ वैचारिक समूहों की आलोचना करते हुए समाज से आत्ममंथन की भी अपील की।

    यह विवाद उस समय सामने आया जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में एक नाबालिग लड़की प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करती दिखाई दी। वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और इसके संबंध में कानूनी कार्रवाई भी शुरू हुई।

    मामले में नोएडा के एक्सप्रेसवे थाना क्षेत्र में एक महिला की शिकायत पर जीरो एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक और सार्वजनिक शांति को प्रभावित करने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया। बाद में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मामला दिल्ली पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया, जहां संबंधित तथ्यों और शिकायत की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।

    विवाद के बीच 15 वर्षीय लड़की ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उसने कहा कि वह अपने दोस्तों के साथ कनॉट प्लेस गई थी, जहां कुछ लोगों ने उसे आपत्तिजनक नारे और शब्द दोहराने के लिए उकसाया। उसने स्वीकार किया कि उससे गंभीर गलती हुई और वह अपने व्यवहार को लेकर बेहद शर्मिंदा है। किशोरी ने देशवासियों से क्षमा मांगते हुए भरोसा दिलाया कि भविष्य में वह ऐसी गलती दोबारा नहीं करेगी।

    इस पूरे घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके साथ-साथ उनकी दिवंगत मां के लिए भी अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे उन्हें दुख पहुंचा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई बच्चा गुमराह होकर ऐसी गलती करता है तो उसे सही मार्ग दिखाने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने ऐसे बच्चों को माफ करने और उन्हें सकारात्मक दिशा देने की बात कही।

    दूसरी ओर, विरोध प्रदर्शन से जुड़े संगठन के प्रतिनिधियों ने इस मामले में दर्ज शिकायत पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि अपमानजनक भाषा के मामलों में कानूनी कार्रवाई की जा रही है, तो सभी पक्षों के लिए समान मानदंड अपनाए जाने चाहिए। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और संबंधित एजेंसियां उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी कर रही हैं। इस बीच, नाबालिग की माफी, कंगना रनौत की प्रतिक्रिया और प्रधानमंत्री की अपील ने इस मुद्दे को सामाजिक, राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना दिया है।

  • अभिजीत दिपके के पिता की संपत्ति और CJP फंड पर उठे सवाल, वित्तीय जांच की मांग तेज

    अभिजीत दिपके के पिता की संपत्ति और CJP फंड पर उठे सवाल, वित्तीय जांच की मांग तेज

    नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके और उनके संगठन से जुड़े वित्तीय एवं कानूनी मामलों को लेकर नया विवाद सामने आया है। गुजरात के सूरत निवासी एक RTI कार्यकर्ता ने चुनाव आयोग और संबंधित कर अधिकारियों से कई बिंदुओं पर विस्तृत जांच कराने की मांग की है। शिकायत में अभिजीत दिपके के पिता की संपत्ति, पार्टी की वैधानिक स्थिति तथा हाल ही में घोषित लीगल डिफेंस फंड के वित्तीय और कर संबंधी पहलुओं की निष्पक्ष जांच का आग्रह किया गया है।

    शिकायत में कहा गया है कि अभिजीत दिपके के पिता महाराष्ट्र सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारी रहे हैं। ऐसे में यह जानने की आवश्यकता बताई गई है कि परिवार की आय और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर विदेश में उच्च शिक्षा के लिए होने वाले खर्च का प्रबंध किस प्रकार किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि इस संबंध में सभी वित्तीय स्रोत वैध हैं तो जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, जबकि किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

    विवाद केवल व्यक्तिगत संपत्ति तक सीमित नहीं है। शिकायत में कॉकरोच जनता पार्टी की कानूनी स्थिति पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि संगठन राजनीतिक दल की तरह सक्रिय दिखाई देता है, इसलिए यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या उसका पंजीकरण जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत राजनीतिक दल के रूप में हुआ है या नहीं। शिकायतकर्ता ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि संगठन की वैधानिक स्थिति की आधिकारिक जांच कर आवश्यक तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि कोई संगठन राजनीतिक गतिविधियों के नाम पर धन जुटा रहा है या बड़े पैमाने पर आर्थिक सहायता प्राप्त कर रहा है, तो उसके कानूनी स्वरूप और नियामकीय अनुपालन की पुष्टि होना आवश्यक है। उनका तर्क है कि इससे राजनीतिक वित्तपोषण की पारदर्शिता बनी रहती है और आम नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होता है।

    इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू लीगल डिफेंस फंड से भी जुड़ा है। यह फंड उन लोगों की कानूनी सहायता के लिए घोषित किया गया था जो विभिन्न मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। इसी संदर्भ में वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा एक करोड़ रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा चर्चा का विषय बनी। अब शिकायतकर्ता ने इस राशि पर लागू होने वाले कर नियमों और GST अनुपालन की भी जांच कराने की मांग की है।

    कर अधिकारियों को भेजे गए पत्र में यह आग्रह किया गया है कि संबंधित राशि पर वस्तु एवं सेवा कर के प्रावधान लागू होते हैं या नहीं, तथा यदि लागू होते हैं तो निर्धारित नियमों का पालन किया गया है या नहीं, इसकी जांच की जाए। शिकायतकर्ता का मानना है कि बड़ी वित्तीय घोषणाओं के मामलों में कर संबंधी सभी औपचारिकताओं का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

    फिलहाल संबंधित संस्थाओं की ओर से इस शिकायत पर कोई आधिकारिक निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है। यदि चुनाव आयोग और कर विभाग इस मामले में जांच प्रारंभ करते हैं, तो उसके निष्कर्षों से संगठन की वैधानिक स्थिति, वित्तीय पारदर्शिता और कर अनुपालन से जुड़े कई प्रश्नों पर स्पष्टता आ सकती है। वहीं, मामले में लगाए गए सभी आरोप अभी जांच और आधिकारिक पुष्टि के अधीन हैं तथा संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • पीएम मोदी की अपील के बाद नाबालिग लड़की की मां ने जताया आभार, एफआईआर वापस लेने की लगाई गुहार

    पीएम मोदी की अपील के बाद नाबालिग लड़की की मां ने जताया आभार, एफआईआर वापस लेने की लगाई गुहार

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र नारेबाजी करने के आरोप में चर्चा में आई 15 वर्षीय नाबालिग लड़की की मां ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि उनकी बेटी को सुधार का अवसर देकर नया जीवन मिला है। उन्होंने कहा कि कठोर कार्रवाई की बजाय क्षमा और मार्गदर्शन का संदेश समाज के लिए सकारात्मक उदाहरण है। साथ ही उन्होंने बेटी के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की भी अपील की है।

    यह मामला उस समय चर्चा में आया जब एक प्रदर्शन के दौरान नाबालिग लड़की का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें वह प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाती दिखाई दी। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया शुरू की और इस संबंध में मामला दर्ज किया गया। बाद में यह मामला संबंधित थाने को स्थानांतरित कर दिया गया, जहां आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    इस घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश साझा करते हुए कहा कि प्रदर्शनों के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले कई बच्चे परिस्थितियों और बहकावे का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि गाली-गलौज या अपमानजनक भाषा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। समाज को ऐसे बच्चों को अपराधी की तरह देखने के बजाय उन्हें सही दिशा दिखाने का प्रयास करना चाहिए ताकि वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

    प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद संबंधित नाबालिग लड़की ने भी सार्वजनिक रूप से हाथ जोड़कर माफी मांगी। उसने कहा कि वह अपने दोस्तों के साथ दिल्ली के कनॉट प्लेस घूमने गई थी और वहीं पास में चल रहे प्रदर्शन के दौरान दूसरों के प्रभाव में आकर आपत्तिजनक नारे लगाने लगी। लड़की ने स्वीकार किया कि उससे गंभीर गलती हुई और उसने इसे अपने जीवन की पहली तथा अंतिम भूल बताते हुए देशवासियों से क्षमा मांगी।

    लड़की की मां ने भावुक होकर कहा कि संयोग से जिस दिन प्रधानमंत्री ने क्षमा का संदेश दिया, उसी दिन उनकी बेटी का जन्मदिन भी था। उनके अनुसार यह उनकी बेटी के लिए सबसे बड़ा उपहार है, क्योंकि उसे अपनी गलती सुधारने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि परिवार अपनी भूल स्वीकार करता है और चाहता है कि गलत नाम और उम्र के साथ दर्ज एफआईआर को निरस्त किया जाए, ताकि उनकी बेटी सामान्य जीवन की ओर लौट सके और अपनी पढ़ाई तथा भविष्य पर ध्यान दे सके।

    मां ने इस पूरे घटनाक्रम के बाद सरकार से एक व्यापक नीति बनाने की भी मांग की। उनका कहना है कि कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए सख्त नियम बनाए जाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि नाबालिगों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रभावी नियंत्रण हो और उन्हें राजनीतिक प्रदर्शनों में शामिल होने से भी रोका जाए, क्योंकि कम उम्र में बच्चे आसानी से दूसरों के प्रभाव में आ सकते हैं।

    इस बीच पूरे घटनाक्रम को लेकर सार्वजनिक स्तर पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री के सुधारवादी दृष्टिकोण की सराहना की है, जबकि कुछ ने कानूनी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। फिलहाल संबंधित एफआईआर और मामले की आगे की कार्रवाई पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार जारी है। यह प्रकरण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सोशल मीडिया की भूमिका, नाबालिगों की जिम्मेदारी और कानून के बीच संतुलन को लेकर भी नई चर्चा का विषय बन गया है।

  • तस्लीमा नसरीन की कोलकाता वापसी पर शुभेंदु अधिकारी बोले, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ राज्य आने के लिए हमेशा स्वागत

    तस्लीमा नसरीन की कोलकाता वापसी पर शुभेंदु अधिकारी बोले, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ राज्य आने के लिए हमेशा स्वागत

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में लंबे अंतराल के बाद निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन की सार्वजनिक मौजूदगी एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। करीब 19 वर्ष बाद कोलकाता में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उनका स्वागत करते हुए भरोसा दिलाया कि जब भी वह पश्चिम बंगाल आना चाहेंगी, उन्हें पूरी सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। इस अवसर को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

    कोलकाता के रवींद्र सदन में आयोजित धार्मिक कट्टरवाद के विरोध पर केंद्रित साहित्यिक कार्यक्रम में तस्लीमा नसरीन ने हिस्सा लिया। लंबे समय बाद शहर में उनकी सार्वजनिक उपस्थिति ने साहित्य, समाज और राजनीति से जुड़े लोगों का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक लेखक और विचारक के अभिव्यक्ति के अधिकार का सम्मान करती है। उन्होंने तस्लीमा नसरीन को आश्वस्त किया कि वह अपनी इच्छा के अनुसार जितनी बार चाहें पश्चिम बंगाल आ सकती हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि तस्लीमा नसरीन की रचनाओं को बड़ी संख्या में पाठक पढ़ते हैं और साहित्य के क्षेत्र में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि एक लोकतांत्रिक समाज में लेखकों और बुद्धिजीवियों को अपने विचार रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। इसी भावना के तहत राज्य सरकार उनकी यात्रा और सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक इंतजाम करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए तस्लीमा नसरीन ने अपनी वापसी को प्रतीकात्मक बताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद कोलकाता लौटना इस बात का संकेत है कि अन्याय हमेशा कायम नहीं रहता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध का नहीं, बल्कि धार्मिक कट्टरता, असहिष्णुता और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आधारित रहा है। उनके अनुसार समाज में स्वतंत्र सोच और अभिव्यक्ति के लिए सुरक्षित वातावरण आवश्यक है।

    तस्लीमा नसरीन वर्ष 1994 से निर्वासन का जीवन जी रही हैं। अपनी लेखनी और विचारों के कारण उन्हें कट्टरपंथी संगठनों की ओर से लगातार धमकियां मिलने के बाद बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था। बाद के वर्षों में वह भारत सहित विभिन्न देशों में रहीं। वर्ष 2007 में कोलकाता में उनके लेखन को लेकर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद उन्हें शहर छोड़ना पड़ा था। इसके बाद उनकी सार्वजनिक रूप से कोलकाता वापसी नहीं हो सकी थी।

    करीब दो दशक बाद उनकी यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने भविष्य के लिए ऐसी दुनिया की उम्मीद जताई, जहां किसी लेखक को अपने विचार व्यक्त करने के कारण अपना घर या देश छोड़ने के लिए मजबूर न होना पड़े। उन्होंने कहा कि साहित्य का उद्देश्य समाज में संवाद और विचारों का विस्तार करना है, न कि भय का वातावरण बनाना।

    तस्लीमा नसरीन की कोलकाता वापसी और राज्य सरकार की ओर से दिए गए सुरक्षा आश्वासन ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लेखकों की सुरक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों पर नई चर्चा को जन्म दिया है। आने वाले समय में यह मुद्दा साहित्यिक और सामाजिक विमर्श के साथ-साथ सार्वजनिक बहस का भी महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है।

  • दिल्ली के सरकारी अस्पताल ने बनाया विश्व रिकॉर्ड, दुर्लभ हृदय रोगी की रोबोटिक वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी से नई मिसाल

    दिल्ली के सरकारी अस्पताल ने बनाया विश्व रिकॉर्ड, दुर्लभ हृदय रोगी की रोबोटिक वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी से नई मिसाल

    नई दिल्ली । भारत ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली है। दिल्ली स्थित वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (वीएमएमसी) और सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सकों ने दुनिया की पहली रोबोटिक लेफ्ट सिस्टमिक एट्रियोवेंट्रिकुलर (एवी) वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक कर वैश्विक स्तर पर नई पहचान बनाई है। इस उपलब्धि को आधुनिक कार्डियक सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि यह प्रक्रिया एक ऐसे मरीज पर की गई जो जन्म से ही दो अत्यंत दुर्लभ और जटिल हृदय संबंधी विकृतियों से पीड़ित था।

    अस्पताल प्रशासन के अनुसार यह जटिल ऑपरेशन संस्थान की निदेशक डॉ. कविता शर्मा की देखरेख में संपन्न हुआ। कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग की विशेषज्ञ टीम ने प्रोफेसर डॉ. अनुभव गुप्ता के नेतृत्व में इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को सफल बनाया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उपलब्धि केवल एक सफल ऑपरेशन नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में अत्याधुनिक तकनीक और उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाओं की क्षमता का भी प्रमाण है।

    जिस मरीज का ऑपरेशन किया गया, वह जन्मजात रूप से ‘कंजेनिटली करेक्टेड ट्रांसपोजिशन ऑफ द ग्रेट आर्टरीज’ (ccTGA) और ‘डेक्स्ट्रोकार्डिया’ जैसी दुर्लभ बीमारियों से प्रभावित था। ccTGA ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय की संरचना सामान्य से भिन्न होती है और शरीर में रक्त प्रवाह बनाए रखने के लिए हृदय के हिस्सों को अतिरिक्त दबाव में कार्य करना पड़ता है। वहीं डेक्स्ट्रोकार्डिया में हृदय सामान्य स्थिति के विपरीत छाती के दाईं ओर स्थित होता है, जिससे किसी भी प्रकार की सर्जरी अत्यधिक जटिल हो जाती है।

    इन दोनों स्थितियों के कारण पारंपरिक सर्जरी की तकनीक अपनाना संभव नहीं था। आमतौर पर रोबोटिक माइट्रल वाल्व रिप्लेसमेंट छाती के दाईं ओर से किया जाता है, लेकिन इस मरीज में हृदय की स्थिति अलग होने के कारण चिकित्सकों ने पूरी प्रक्रिया के लिए बाईं ओर से प्रवेश का नया तरीका विकसित किया। यह तकनीक पहले कभी इस प्रकार उपयोग में नहीं लाई गई थी और इसी कारण इसे विश्व की पहली रोबोटिक लेफ्ट सिस्टमिक एवी वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी माना जा रहा है।

    विशेषज्ञ टीम ने ऑपरेशन के दौरान छाती की हड्डी को काटने के बजाय छोटे-छोटे पोर्ट के माध्यम से रोबोटिक उपकरणों का उपयोग किया। इस मिनिमली इनवेसिव तकनीक के कारण मरीज के शरीर को कम नुकसान पहुंचा और ऑपरेशन अधिक सटीकता के साथ पूरा किया गया। चिकित्सकों के अनुसार इस पद्धति से रक्तस्राव और संक्रमण का खतरा काफी कम रहता है, ऑपरेशन के बाद दर्द भी अपेक्षाकृत कम होता है तथा मरीज सामान्य जीवन में जल्दी लौट सकता है।

    चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता भविष्य में जटिल जन्मजात हृदय रोगों के उपचार के लिए नई संभावनाएं खोल सकती है। रोबोटिक तकनीक की मदद से कठिन सर्जरी को अधिक सुरक्षित, सटीक और कम जोखिम वाला बनाया जा सकता है। इससे ऐसे मरीजों को भी लाभ मिलेगा जिनके लिए पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी चुनौतीपूर्ण मानी जाती है।

    यह उपलब्धि भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र, चिकित्सा अनुसंधान और आधुनिक सर्जिकल तकनीकों की बढ़ती क्षमता को भी रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का विश्वास है कि इस सफलता के बाद देश में रोबोटिक कार्डियक सर्जरी के क्षेत्र में नए अनुसंधान और उन्नत उपचार पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही भारत वैश्विक चिकित्सा समुदाय में नवाचार आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के एक मजबूत केंद्र के रूप में अपनी पहचान और अधिक सुदृढ़ करेगा।