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  • सिद्धिविनायक मंदिर के चढ़ावे को लेकर राज ठाकरे के आरोप से महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई, जांच की मांग तेज

    सिद्धिविनायक मंदिर के चढ़ावे को लेकर राज ठाकरे के आरोप से महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई, जांच की मांग तेज

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर मंदिरों के चढ़ावे और ट्रस्टों की कार्यप्रणाली को लेकर बहस तेज हो गई है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने मुंबई स्थित प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर के दान को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि मंदिर में आने वाले दान में हर वर्ष लगभग 18 करोड़ रुपये की कथित चोरी होती है। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है और विभिन्न दलों की ओर से इस पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

    राज ठाकरे ने अपनी पार्टी की छात्र इकाई के स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान की पारदर्शिता सुनिश्चित होना आवश्यक है। उनका आरोप है कि सिद्धिविनायक मंदिर के दान प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक संस्थानों में आने वाले धन का सही उपयोग और उसका पारदर्शी लेखा-जोखा सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के लिए जरूरी है।

    एमएनएस प्रमुख ने दावा किया कि सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कुछ ट्रस्टियों ने राज्य के उपमुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उनके अनुसार, पत्र में यह आशंका जताई गई है कि मंदिर के दान से जुड़े वित्तीय मामलों में अनियमितताएं हुई हैं और कुछ कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    अपने संबोधन के दौरान राज ठाकरे ने अयोध्या के राम मंदिर के दान से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं का भी उल्लेख किया और कहा कि धार्मिक संस्थानों से जुड़े ऐसे मामलों पर व्यापक स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से भी इस प्रकार के आरोपों पर स्पष्ट रुख अपनाने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना था कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े किसी भी संस्थान में वित्तीय पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

    राज ठाकरे के आरोपों के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक ने उनके बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रसिद्ध गणेश मंदिर के बारे में इस तरह के आरोप लगाने से पहले ठोस प्रमाण सामने आने चाहिए। उनका कहना था कि धार्मिक संस्थानों की प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी और संयम के साथ बयान दिए जाने चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत न हों।

    सिद्धिविनायक मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध और समृद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में हर वर्ष करोड़ों रुपये का दान प्राप्त होता है, जिसके प्रबंधन की जिम्मेदारी ट्रस्ट के पास होती है। ऐसे में मंदिर के वित्तीय संचालन को लेकर लगाए गए आरोप स्वाभाविक रूप से सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गए हैं।

    फिलहाल इन आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो उससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। तब तक यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर चल रही बहस का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।

  • राज्यसभा और विधान परिषद के फैसलों से तेज हुई सियासी बहस, क्या गठबंधन संतुलन साधने में भाजपा की नई रणनीति?

    राज्यसभा और विधान परिषद के फैसलों से तेज हुई सियासी बहस, क्या गठबंधन संतुलन साधने में भाजपा की नई रणनीति?

    नई दिल्ली । बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के हालिया राजनीतिक फैसलों ने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। राज्यसभा और विधान परिषद की दो सीटों से जुड़े निर्णयों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भाजपा गठबंधन सहयोगियों को मजबूत करने की रणनीति के तहत अपने परंपरागत समर्थक वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में संतुलन बनाने की चुनौती का सामना कर रही है। इन घटनाक्रमों को आगामी चुनावी रणनीति और सामाजिक समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    चर्चा की शुरुआत उस समय हुई जब नवादा से लोकसभा सदस्य चुने जाने के बाद विवेक ठाकुर द्वारा खाली की गई राज्यसभा सीट पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को भेजा गया। इसके बाद विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार के इस्तीफे के पश्चात सहयोगी दल के नेता और मंत्री दीपक प्रकाश के लिए विधान परिषद पहुंचने का मार्ग प्रशस्त हुआ। लगातार दो महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर सहयोगी दल के नेताओं को मिलने के बाद विभिन्न राजनीतिक हलकों में इस रणनीति पर चर्चा शुरू हो गई।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा लंबे समय से बिहार में अपने पारंपरिक सामाजिक आधार के साथ-साथ व्यापक सामाजिक संतुलन की रणनीति पर काम करती रही है। ऐसे में पिछड़े वर्ग के प्रभावशाली समुदायों को प्रतिनिधित्व देना आगामी विधानसभा चुनाव के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपेंद्र कुशवाहा की राजनीतिक भूमिका को भी इसी व्यापक सामाजिक और गठबंधन समीकरण का हिस्सा माना जा रहा है।

    दूसरी ओर, पार्टी के परंपरागत समर्थक माने जाने वाले भूमिहार समाज को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह समुदाय कई दशकों से भाजपा के प्रमुख समर्थक वर्गों में शामिल रहा है और राज्य के अनेक विधानसभा क्षेत्रों में उसका प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में पार्टी के कुछ निर्णयों को लेकर समर्थकों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों के बीच प्रतिनिधित्व संबंधी सवाल उठ रहे हैं।

    हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के विभागीय बदलाव और अन्य संगठनात्मक फैसलों को भी कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसी बहस से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इन निर्णयों को लेकर कोई सार्वजनिक असहमति या आधिकारिक विवाद सामने नहीं आया है। वहीं पार्टी के भीतर भी किसी बड़े नेता ने इन फैसलों पर खुलकर विरोध दर्ज नहीं कराया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार जैसे सामाजिक रूप से विविध राज्य में चुनावी सफलता केवल किसी एक समुदाय के समर्थन पर निर्भर नहीं होती। गठबंधन की मजबूती, विभिन्न सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व और सहयोगी दलों के बीच समन्वय चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसी कारण कई बार राजनीतिक दल अपने संगठनात्मक हितों के साथ-साथ गठबंधन की आवश्यकताओं को भी प्राथमिकता देते हैं।

    फिलहाल यह स्पष्ट संकेत नहीं हैं कि इन फैसलों का पार्टी के परंपरागत वोट बैंक पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा है। हालांकि राजनीतिक चर्चाओं और सामाजिक स्तर पर इस विषय पर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और सीटों के वितरण से इस बहस की दिशा काफी हद तक तय होगी।

    बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती गठबंधन सहयोगियों और अपने पारंपरिक समर्थक वर्ग के बीच संतुलन बनाए रखने की होगी। आने वाले समय में टिकट वितरण, चुनावी अभियान और सामाजिक समीकरणों के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि पार्टी अपनी चुनावी रणनीति को किस प्रकार आगे बढ़ाती है और इन राजनीतिक फैसलों का चुनावी परिदृश्य पर कितना प्रभाव पड़ता है।

  • विकसित भारत के संकल्प से जोड़ा नशा मुक्ति अभियान, युवाओं से नेतृत्व संभालने का पीएम मोदी का आह्वान

    विकसित भारत के संकल्प से जोड़ा नशा मुक्ति अभियान, युवाओं से नेतृत्व संभालने का पीएम मोदी का आह्वान

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ की शुरुआत करते हुए देशभर के युवाओं से नशे के खिलाफ व्यापक जनभागीदारी का आह्वान किया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत में ड्रग्स की आपूर्ति केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह देश के खिलाफ रची जा रही एक बड़ी साजिश का हिस्सा भी है। उन्होंने कहा कि दुश्मन देश भारतीय युवाओं को नशे के जाल में फंसाकर देश की ऊर्जा और क्षमता को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे समाज और सरकार को मिलकर विफल करना होगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश का युवा शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से सशक्त होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे की बढ़ती प्रवृत्ति केवल एक व्यक्ति के जीवन को प्रभावित नहीं करती, बल्कि पूरे परिवार और समाज पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें।

    अभियान के तहत अगले 100 सप्ताह तक प्रत्येक रविवार देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें खेल, कला, संस्कृति, जनजागरूकता गतिविधियों और सामुदायिक अभियानों के माध्यम से नशा मुक्ति का संदेश लोगों तक पहुंचाया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी से चलने वाला राष्ट्रीय अभियान है, जिसका उद्देश्य नशे के खिलाफ जनचेतना को मजबूत करना है।

    कार्यक्रम की शुरुआत में देशभर के युवाओं ने एक साथ नशा मुक्त भारत की शपथ ली। यह आयोजन 28 हजार से अधिक स्थानों पर एक साथ आयोजित किया गया, जिसमें एक करोड़ से अधिक युवाओं ने भागीदारी की। कार्यक्रम में कई आध्यात्मिक गुरुओं ने भी वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की और युवाओं को सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। इसके अलावा विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और अन्य जनप्रतिनिधि भी इस अभियान से जुड़े।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत के युवा स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विज्ञान, अंतरिक्ष और नवाचार जैसे क्षेत्रों में वैश्विक पहचान बना रहे हैं। ऐसे समय में यदि कोई युवा नशे की गिरफ्त में आता है तो उसका व्यक्तिगत भविष्य ही नहीं, बल्कि परिवार की उम्मीदें और राष्ट्र की प्रगति भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति के आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और जीवन के लक्ष्यों को कमजोर कर देता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि सरकार नशे के अवैध कारोबार और तस्करी के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है। बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों की जब्ती, तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने इसे सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि ड्रग्स माफिया और तस्करों के खिलाफ अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि नशे की लत से बाहर निकलने वाले लोगों का समाज को सम्मान करना चाहिए, क्योंकि उनका संघर्ष दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकता है। उन्होंने इस अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देने पर बल देते हुए कहा कि स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, सामाजिक संस्थाएं, उद्योग जगत और आध्यात्मिक संगठन मिलकर युवाओं को जागरूक करें। उनके अनुसार, सामूहिक प्रयासों और जनसहभागिता के माध्यम से ही नशा मुक्त भारत और विकसित भारत के लक्ष्य को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकता है।

  • उत्तराखंड में मुख्यमंत्री राहत कोष समेत दस प्रमुख विभागों की वेबसाइट पर साइबर हमला..

    उत्तराखंड में मुख्यमंत्री राहत कोष समेत दस प्रमुख विभागों की वेबसाइट पर साइबर हमला..


    नई दिल्ली ।
    उत्तराखंड में मुख्यमंत्री राहत कोष समेत दस प्रमुख सरकारी विभागों की आधिकारिक वेबसाइटों पर अचानक हुए एक बड़े मालवेयर हमले के बाद हड़कंप मच गया। शनिवार को हुए इस साइबर हमले के तुरंत बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत प्रभावित सभी वेबसाइटों को बंद करना पड़ा, ताकि डेटा की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। साइबर सुरक्षा से जुड़ी तकनीकी टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला और कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद डेटा सेंटर में रखे गए बैकअप की मदद से अधिकांश वेबसाइटों का संचालन सुचारू कर दिया। हालांकि मुख्यमंत्री राहत कोष की वेबसाइट को पूरी तरह से सुरक्षित कर बहाल करने का काम देर तक जारी रहा।

    साइबर हमले की जानकारी मिलते ही सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी की विशेष टीम तुरंत हरकत में आई। तकनीकी विशेषज्ञों ने नेटवर्क में सेंध लगाने वाले मालवेयर को डिटेक्ट कर स्थिति को नियंत्रित किया। जिन प्रमुख विभागों के डिजिटल पोर्टल इस हमले से प्रभावित हुए, उनमें मुख्यमंत्री राहत कोष के अलावा लोक निर्माण विभाग, खाद्य आपूर्ति विभाग, उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा अभिकरण, राज्य कर विभाग, ईएसआईसी, परिवहन विभाग और पर्यटन विभाग शामिल हैं। शुरुआती तकनीकी पड़ताल में इस मालवेयर के तार विदेशी सर्वर से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    डिजिटल सेवाओं को सुरक्षित रखने के लिए अपनाई गई दूरदर्शी रणनीति इस संकट के समय बेहद कारगर साबित हुई। पूर्व में हुए सुरक्षा अनुभवों से सबक लेते हुए एजेंसी ने पहले ही सभी महत्वपूर्ण विभागों के डेटा का नियमित बैकअप सुरक्षित रखना शुरू कर दिया था। इसी बैकअप प्रणाली की वजह से साइबर हमलावरों के मंसूबे पूरी तरह कामयाब नहीं हो सके और महज कुछ ही घंटों के भीतर ज्यादातर वेबसाइटों को पुरानी स्थिति में लाकर शुरू कर दिया गया। सुरक्षा एजेंसियां अब इस हमले के स्रोत और हैकर्स के तरीकों का गहराई से विश्लेषण कर रही हैं।

    उत्तराखंड में सरकारी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले वर्ष 2024 के अक्टूबर महीने में राज्य में एक बहुत बड़ा साइबर हमला हुआ था, जिसकी वजह से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन समेत करीब 90 सरकारी वेबसाइटें पूरी तरह ठप हो गई थीं। उस समय व्यवस्था को सामान्य करने में कई दिनों का समय लग गया था। उसी घटना के बाद प्रशासनिक स्तर पर साइबर सुरक्षा ढांचे को काफी मजबूत किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले हमले के बाद लागू किए गए कड़े सुरक्षा मानकों के कारण ही इस बार नुकसान को सीमित रखा जा सका।

    फिलहाल साइबर सुरक्षा विंग राज्य के पूरे डेटा सेंटर और सर्वर नेटवर्क पर पैनी नजर बनाए हुए है। किसी भी अन्य संभावित खतरे को रोकने के लिए फायरवॉल को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। डिजिटल सिस्टम की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह के मालवेयर अटैक को समय रहते नाकाम किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन सरकारी सेवाओं और आम जनता के डेटा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसके लिए सभी आवश्यक तकनीकी उपाय निरंतर किए जा रहे हैं।

  • हमारी छोटी-छोटी लापहवाहियां देश पर बढ़ा रही आर्थिक बोझ…. 3 साल में खराब हो गए 62.13 अरब नोट

    हमारी छोटी-छोटी लापहवाहियां देश पर बढ़ा रही आर्थिक बोझ…. 3 साल में खराब हो गए 62.13 अरब नोट


    कानपुर।
    जेब से निकला मुड़ा नोट… उस पर लिखा मोबाइल नंबर… कोने पर लगी स्टेपल… या पर्स में ठूंसकर रखा गया गंदा नोट। ये ऐसे दृश्य हैं जो रोज दिखाई देते हैं, लेकिन यही छोटी-छोटी लापरवाहियां (Negligence) देश पर बड़ा आर्थिक बोझ (Heavy Economic Burden) डाल रही हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) (Reserve Bank of India – RBI) के आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ तीन वर्षों में 62.13 अरब नोट घिसने, फटने और गंदे होने के कारण चलन से बाहर करने पड़े। विशेषज्ञों का कहना है कि नोटों को संभालकर रखने की आदत न सिर्फ उनकी उम्र बढ़ा सकती है, बल्कि नए नोट छापने पर होने वाला भारी खर्च भी घटा सकती है।

    रिजर्व बैंक की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक , वर्ष 2024-25 नोटों के खराब होने के मामले में सबसे भारी साल रहा। इस एक वर्ष में ही 23.86 अरब नोट चलन से बाहर करने पड़े। 2025-26 में खराब होने के कारण चलन से बाहर होने वाले नोटों की संख्या घटकर 17.02 अरब रही। खराब होने की वजह से वर्ष 2023-24 में 21.25 अरब नोट बाजार से हटाने पड़े। यह संख्या बताती है कि नोटों की देखभाल को लेकर लोगों में अभी भी पर्याप्त जागरूकता नहीं है।

    500 के नोटों पर मार अधिक
    आरबीआई के अनुसार, सबसे ज्यादा मार 500 रुपये के नोटों पर पड़ी। तीन वर्षों में 21.30 अरब नोट खराब होने के कारण चलन से हटाने पड़े। इसके बाद 100 रुपये के 17.67 अरब नोट भी वापस लेने पड़े। 200, 50, 20, 10 और 5 रुपये के करोड़ों नोट भी घिसने, फटने और गंदे होने की वजह से बेकार हो गए। इससे साफ है कि सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले नोट सबसे पहले खराब हो रहे हैं।

    ऐसे बढ़ सकती है नोटों की उम्र
    – नोटों पर कुछ भी न लिखें।
    – स्टेपल, पिन या टेप का इस्तेमाल न करें
    – नोटों को मोड़कर रखने के बजाय सीधा रखें
    – गीले और तेल लगे हाथों से नोट पकड़ने से बचें
    – फटे या क्षतिग्रस्त नोट बैंक में बदलवाएं।

  • केंद्र सरकार की जुलाई में बंपर कमाई…. GST कलेक्‍शन 15.4% बढ़कर ₹2.11 करोड़ पहुंचा

    केंद्र सरकार की जुलाई में बंपर कमाई…. GST कलेक्‍शन 15.4% बढ़कर ₹2.11 करोड़ पहुंचा


    नई दिल्‍ली।
    जुलाई महीने (July Month) में केंद्र सरकार (Central Government) को बंपर कमाई हुई है. सरकारी कोष में जीएसटी (GST) और टैक्‍स (Tax) से मोटी रकम शामिल हुई है. शनिवार को जारी सरकार के मंथली जीएसटी राजस्व आंकड़ों के अनुसार, घरेलू खपत में मजबूती, उच्च अनुपालन और आयात से टैक्‍स कलेक्‍शन (Tax collection) में तेज बढ़ोतरी के कारण जुलाई 2026 में भारत के सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) कलेक्‍शन में साल-दर-साल 15.4% की बढ़ोतरी हुई और यह 2.11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

    वैश्विक अनिश्चितताओं और वेस्‍ट एशिया में भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद मजबूत आर्थिक गतिविधि को दर्शाते हुए, कलेक्‍शन लगातार दूसरे महीने 2 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े से ऊपर बना रहा. घरेलू ट्रांजैक्‍शन से मिले सकल जीएसटी कलेक्‍शन जुलाई में पिछले साल के ₹1.31 लाख करोड़ से 10.1% बढ़कर ₹1.45 लाख करोड़ हो गया।

    आयात से मिले जीएसटी कलेक्‍शन में 28.8% की कहीं ज्‍यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो बढ़कर ₹66,511 करोड़ हो गया, जिससे कुल कलेक्‍शन ₹2.11 लाख करोड़ तक पहुंच गया. रिफंड को ध्‍यान में रखते हुए नेट जीएसटी कलेक्‍शन ₹1.81 लाख करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में 15.8% अधिक है।

    रिफंड अमाउंट भी बढ़ रहा
    इसी महीने जीएसटी रिफंड में भी दो अंकों की बढ़ोतरी देखी गई है. कुल रिफंड में साल-दर-साल 13.1% की वृद्धि हुई और यह ₹29,968 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि ICEGATE सिस्‍टम के माध्यम से संसाधित निर्यात रिफंड में 22.7% की वृद्धि हुई और यह ₹12,288 करोड़ तक पहुंच गया, जो निर्यातकों के लिए निरंतर सपोर्ट का संकेत देता है।

    वित्त वर्ष 2027 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में सकल जीएसटी कलेक्‍शन ₹8.43 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले साल की इसी अवधि में मिले ₹7.66 लाख करोड़ से 10.1% अधिक है. इस अवधि के दौरान नेट जीएसटी कलेक्‍शन में 9.2% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹7.21 लाख करोड़ तक पहुंच गया।

    बड़े राज्यों में मजबूत ग्रोथ
    हरियाणा में जीएसटी कलेक्‍शन में सबसे अधिक 25% की वृद्धि दर्ज की गई, इसके बाद गुजरात और तेलंगाना का स्थान रहा, जिनमें से प्रत्येक में 19% की वृद्धि हुई. पंजाब और केरल में 16% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि उत्तर प्रदेश में 15% की वृद्धि हुई।

    भारत में जीएसटी राजस्व का सबसे बड़ा योगदान देने वाले महाराष्ट्र राज्य में कलेक्‍शन में 13% की वृद्धि देखी गई, जबकि कर्नाटक में 12% की वृद्धि दर्ज की गई. दिल्ली में कलेक्‍शन पिछले साल जुलाई की तुलना में 8% बढ़ा. हालांकि, कुछ राज्यों में कलेक्‍शन में गिरावट दर्ज की गई. हिमाचल प्रदेश में सबसे अधिक 22% की गिरावट दर्ज की गई, इसके बाद उत्तराखंड (18%), पुडुचेरी (17%), मध्य प्रदेश (10%), आंध्र प्रदेश (5%) और तमिलनाडु में 1% की गिरावट आई।

  • कच्चे तेल की खोज….. समुद्र मंथन योजना पर 84084 करोड़ खर्च करेगा भारत

    कच्चे तेल की खोज….. समुद्र मंथन योजना पर 84084 करोड़ खर्च करेगा भारत


    नई दिल्‍ली।
    भारत (India) एनर्जी निर्भरता (Energy Dependence) को कम करने के लिए कई बड़े कदम उठा रहा है. अब भारत ने समुद्र से कच्‍चे तेल (Crude Oil) को निकालने के लिए एक योजना शुरू किया है. इस योजना के तहत समुद्र के नीचे अधिक तेल और प्राकृतिक गैस की खोज की जाएगी. यह एक लॉन्‍गटर्म स्‍कीम है. इस प्रोग्राम का नाम ‘समुद्र मंथन’ रखा गया है.

    नेशनल आफसोर एक्‍सप्‍लोरेशन योजना (समुद्र मंथन) के तहत 84,084 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी गई है. यह खर्च वित्त वर्ष 2030-31 तक चलेगा, जिसका लक्ष्य गहरे जल क्षेत्रों में घरेलू तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है. समुद्र में उन जगहों पर तेल और गैस की खोज की जाएगी, जहां पर विशाल संसाधन मौजूद हैं और अभी तक किसी ने खोज नहीं की है।

    सरकार के अनुसार, यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस नजरिए को दर्शाती है, जिसे उन्होंने पहली बार 2025 के स्वतंत्रता दिवस भाषण में चर्चा की थी, जिसमें भारत की ऊर्जा क्षमता को उजागर करने के लिए आधुनिक युग के समुद्र मंथन का संचालन करने की बात कही गई थी।

    यह कार्यक्रम ऐसे समय में शुरू किया गया है जब भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 88-89% और प्राकृतिक गैस का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है. यानी देश की ऊर्जा की बढ़ती मांग विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर है और जियो-पॉलिटिक तनाव के कारण भारत के लिए एनर्जी सप्‍लाई प्रभावित हुई है।


    इस योजना के तहत क्‍या होगा?

    भारत में कई आफशोर सेमीडेंट्र्री बेसिन हैं, जिनमें तेल और प्राकृतिक गैस मौजूद हो सकती है, लेकिन इनमें से कई अभी भी बड़े पैमाने पर अनछुए हैं क्योंकि वहां से तेल निकालना कठिन और महंगा है. इस योजना के तहत, सरकार बड़े पैमाने पर सर्वे, भूवैज्ञानिक अध्ययन, ड्रिलिंग और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे प्रमुख प्रारंभिक चरण के कार्यों के लिए धन उपलब्ध कराएगी।

    इसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले भूवैज्ञानिक डेटा का उत्पादन करना है जो आशाजनक हाइड्रोकार्बन संसाधनों की पहचान कर सके और तेल-गैस निकालने में मदद कर सके. भारत के इस कदम से घरेलू स्‍तर पर तेल और गैस में बड़ा निवेश आ सकता है. साथ ही भारत का एनर्जी क्षमता मजबूत हो सकती है।


    समुद्र मंथन आखिर करेगा क्या?

    इस योजना के तहत आधुनिक टेक्‍नोलॉजी का उपयोग करते हुए उन जगहों की पहचानल की जाएगी, जहां पर तेल और गैस के होने की संभावना है. इसके बाद आशाजनक गहरे पानी और अति-गहरे पानी के क्षेत्रों में ड्रिलिंग की जाएगी. इस योजना के तहत सीमावर्ती जगहों में वैज्ञानिक ड्रिलिंग, सामान्य उत्पादन और निकासी, तेल और गैस विनिर्माण और सेवा क्षेत्र, आधुनिक टेक, डिजिटल प्रोगाम मैनेजमेंट और क्षमता निर्माण भी शामिल हैं।

    इससे क्‍या लाभ हो सकता है?
    सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से समय के साथ तेल और गैस भंडार में 600 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक तेल के बराबर मात्रा जुड़ जाएगी. हालांकि व्यावसायिक उत्पादन में अभी कई साल लगेंगे, लेकिन सफल खोजों से भारत की ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम हो सकती है, लॉन्‍गटर्म ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है, निवेश आकर्षित हो सकता है, रोजगार पैदा हो सकते हैं और देश की ऊर्जा क्षमताओं को बढ़ावा मिल सकता है।

  • गुजरात से असम तक… भारी बारिश से कई राज्यों में तबाही…केन्द्र ने जारी किए 2,117 करोड़ रुपये

    गुजरात से असम तक… भारी बारिश से कई राज्यों में तबाही…केन्द्र ने जारी किए 2,117 करोड़ रुपये


    नई दिल्ली।
    मूसलाधार मानसूनी बारिश (Monsoon rains), बादल फटने, अचानक बाढ़ आने और भूस्खलन की घटनाओं से देशभर में तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार ने राज्य आपका राहत कोष से बाढ़ प्रभावित सात राज्यों के लिए 2,117 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh), ओडिशा (Odisha), नगालैंड (Nagaland), अरुणाचल प्रदेश, असम, गुजरात और महाराष्ट्र शामिल हैं।

    जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ के छात्रू इलाके में शुक्रवार की देर रात बादल फटने के बाद पहाड़ी से आए मलबे और पत्थरों से आबादी वाले क्षेत्र में कई दुकानों, घरों को नुकसान पहुंचा और वाहन दब गए।मलबा आने से किश्तवाड़-अनंतनाग राष्ट्रीय राजमार्ग भी कुछ देर के लिए बंद रहा। अमरनाथ यात्रा भी बंद है। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के बंद होने से फंसे 2,200 लोगों को तीन विशेष ट्रेनें चलाकर निकाला गया।

    केरल में भारी बारिश के बाद कई जगह हुए भूस्खलन में छह लोगों की मौत हो गई है और छह लोग लापता हैं। राज्य भर में 65 राहत शिविर खोले गए हैं, जिनमें 1,465 लोगों ने शरण ली है। 12 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जिसको देखते हुए 2 अगस्त को होने वाली राज्य पात्रता परीक्षा को स्थगित कर दिया गया है।


    पूरब से पश्चिम तक तबाही का मंजर

    हिमाचल प्रदेश: कुमारसैन में भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन से एक मकान क्षतिग्रस्त हो गया। धर्मशाला के समीप भूस्खलन की चपेट में आने से दो युवक घायल हो गए, जिनमें एक की हालत गंभीर है।
    – मणिपुर-असम: चुराचांदपुर जिले में भारी बारिश के बाद लानवा नदी आई बाढ़ में एक व्यक्ति बह गया। असम में बाढ़ से अब तक 82 लोगों की मौत हुई है और 1.93 लाख लोग प्रभावित।
    – गुजरात: दक्षिण और मध्य गुजरात में मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। कई क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति के बाद 27 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
    – ओडिशा: महानदी का जल स्तर बढ़ने के बाद हीराकुंड बांध के 22 गेट खोल दिए गए हैं और 10 जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। बाढ़ से 8 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।

  • विदेशी फंडिंग और डिजिटल कैंपेन की जांच तेज, जंतर मंतर प्रदर्शन मामले में पांच कंपनियां एजेंसियों के निशाने पर

    विदेशी फंडिंग और डिजिटल कैंपेन की जांच तेज, जंतर मंतर प्रदर्शन मामले में पांच कंपनियां एजेंसियों के निशाने पर


    नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए विवादित प्रदर्शन को लेकर जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे मामले में कथित विदेशी फंडिंग डिजिटल कैंपेन और सोशल मीडिया नेटवर्क की गहन पड़ताल कर रही हैं। शुरुआती जांच के आधार पर पांच से अधिक कंपनियां एजेंसियों के रडार पर बताई जा रही हैं। इनमें कुछ ऐसी कंपनियां भी शामिल हैं जो डिजिटल मार्केटिंग सोशल मीडिया कैंपेन और इंफ्लूएंसर मैनेजमेंट से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रदर्शन से जुड़ी गतिविधियों के लिए धन किस माध्यम से जुटाया गया और उसका इस्तेमाल किस प्रकार किया गया।

    सूत्रों के अनुसार बीते तीन दिनों के दौरान दिल्ली गुरुग्राम मुंबई और बेंगलुरु स्थित कई कार्यालयों और परिसरों में तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज डिजिटल कैंपेन का रिकॉर्ड सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर के साथ हुए समझौते और अन्य महत्वपूर्ण कागजात की जांच की गई। एजेंसियों ने कई डिजिटल उपकरण भी अपने कब्जे में लिए हैं जिनकी फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा सके।

    जांच में कुछ संदिग्ध वित्तीय लेनदेन भी सामने आने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन लेनदेन के माध्यम से सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार के प्रचार अभियान चलाए गए हो सकते हैं। इसी कारण कई सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर भी जांच के दायरे में आए हैं। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या किसी प्रकार के भुगतान के बदले सोशल मीडिया पर विशेष अभियान संचालित किए गए थे। जांच पूरी होने और पर्याप्त दस्तावेजी तथा डिजिटल साक्ष्य मिलने के बाद संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।

    जांच एजेंसियों ने सोशल मीडिया गतिविधियों की भी विस्तृत समीक्षा शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में करीब दो हजार संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान किए जाने का दावा किया गया है। इनमें से कई अकाउंट विदेशों से संचालित बताए जा रहे हैं जबकि लगभग सात सौ अकाउंट भारत से सक्रिय होने की जानकारी सामने आई है। जांच का फोकस इन खातों के संचालन भुगतान और डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने पर भी है ताकि पूरे डिजिटल नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट की जा सके।

    इसी बीच पश्चिम बंगाल एसटीएफ की जांच में गिरफ्तार जैश ए मोहम्मद के संदिग्ध आतंकी हामिम मंडल से जुड़े मामले ने भी जांच को नया आयाम दिया है। सूत्रों के अनुसार पूछताछ में यह जानकारी सामने आई है कि उसने कथित रूप से जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान पुलिस की वर्दी पहनकर तोड़फोड़ करने की साजिश रची थी। साथ ही कुछ पुलिस अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी निशाना बनाने की योजना होने की बात सामने आई है। हालांकि इन दावों की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं।

    इसके अलावा कई यूट्यूबर और ऑनलाइन कंटेंट क्रिएटर भी जांच एजेंसियों की निगरानी में हैं। जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि प्रदर्शन और उससे जुड़े डिजिटल प्रचार अभियान में उनकी भूमिका क्या थी और क्या किसी प्रकार का आर्थिक लेनदेन या संगठित अभियान चलाया गया था। फिलहाल एजेंसियां सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने तक मामले की विस्तृत पड़ताल जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित वित्तीय नेटवर्क और डिजिटल गतिविधियों में किसकी क्या भूमिका रही।

  • 19 साल बाद कोलकाता लौटीं तसलीमा नसरीन, बोलीं- अन्याय लंबा चल सकता है, लेकिन हमेशा नहीं रहता

    19 साल बाद कोलकाता लौटीं तसलीमा नसरीन, बोलीं- अन्याय लंबा चल सकता है, लेकिन हमेशा नहीं रहता


    कोलकाता। करीब 19 वर्ष बाद पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता पहुंचीं निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने कहा कि उनकी वापसी इस बात का प्रतीक है कि अन्याय लंबे समय तक चल सकता है, लेकिन हमेशा के लिए नहीं रहता। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में किसी लेखक को अपने विचारों के कारण अपना देश छोड़ने के लिए मजबूर नहीं होना पड़े।

    रवींद्र सदन में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में तसलीमा ने कहा कि कोलकाता लौटकर उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है, जैसे वह अपने जीवन के उसी हिस्से में वापस आ गई हैं, जिसे वर्षों पहले यहीं छोड़ना पड़ा था। कार्यक्रम के दौरान मंच पर पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े एक नेता को आमंत्रित किए जाने को लेकर कुछ देर विवाद और हंगामे की स्थिति भी बनी।

    ‘मैं राजनीति नहीं, महिलाओं के अधिकारों की बात करने आई हूं’
    तसलीमा नसरीन ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में बोलना नहीं है। उन्होंने कहा कि वह केवल महिलाओं के अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में अपनी बात रखने आई हैं।

    उन्होंने कहा कि यूरोप ने उन्हें नागरिकता और रहने का स्थान दिया, लेकिन बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में उन्हें स्थायी ठिकाना नहीं मिल सका। तसलीमा ने यह भी कहा कि किसी अदालत ने उन्हें कभी दोषी नहीं ठहराया, लेकिन कट्टरपंथी ताकतों के विरोध के कारण उन्हें निर्वासन का जीवन जीना पड़ा।

    सुरक्षा का मिला आश्वासन
    कार्यक्रम में मौजूद पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने तसलीमा नसरीन का स्वागत करते हुए कहा कि जब भी वह राज्य आएंगी, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल आने पर उन्हें किसी तरह की असुरक्षा महसूस नहीं होने दी जाएगी।

    2007 में छोड़ना पड़ा था कोलकाता
    तसलीमा नसरीन वर्ष 2004 से 2007 के बीच कोलकाता में रही थीं। उनकी आत्मकथा ‘द्विखंडितो’ के कुछ अंशों को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने पुस्तक पर प्रतिबंध लगा दिया था। कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए नवंबर 2007 में उन्हें कोलकाता छोड़ना पड़ा।

    इससे पहले वर्ष 1994 में बांग्लादेश में अपनी लेखनी को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों की धमकियों के बाद उन्होंने अपना देश छोड़ दिया था। तब से वह निर्वासन का जीवन जी रही हैं।