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  • UP : गाजियाबाद पुलिस का बड़ा एक्शन, सूर्या मर्डर केस का मुख्य आरोपी एनकाउंटर में ढेर

    UP : गाजियाबाद पुलिस का बड़ा एक्शन, सूर्या मर्डर केस का मुख्य आरोपी एनकाउंटर में ढेर


    लखनऊ । गाजियाबाद के खोड़ा में बकरीद पर 17 साल के सूर्या चौहान की हत्या कर दी गई थी. अब इस मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. पुलिस ने मुठभेड़ के बाद मुख्य आरोपी असद को पकड़ लिया था. हालांकि, मुठभेड़ के दौरान लगी गोली के कारण अस्पताल में इलाज के दौरान असद की मौत हो गई है.

    पुलिस को बीती देर रात एक पुख्ता सूचना मिली थी. जानकारी के मुताबिक, इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी असद अपने किसी दोस्त से पैसे लेने के लिए खोड़ा इलाके में आने वाला था. पैसे लेने के बाद उसका प्लान शहर छोड़कर भागने का था. सूचना मिलते ही गाजियाबाद पुलिस ने असद को दबोचने के लिए इलाके में एक जाल बिछाया और घेराबंदी की. कुछ ही समय बाद असद एक दूसके व्यक्ति के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर वहां पहुंचा और पुलिस ने उसे दबोच लिया.

    एनकाउंटर में एक पुलिस कॉन्स्टेबल भी घायल
    पुलिस ने दावा किया है कि उन्होंने उसे रुकने का इशारा किया. हालांकि, असद ने रुकने के बजाय ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर सीधे फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस ने भी आत्मरक्षा में तुरंत जवाबी कार्रवाई की. दोनों तरफ से हुई इस फायरिंग में असद को गोली लग गई और वो गंभीर रूप से घायल हो गया. उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया. इस मुठभेड़ में एक पुलिस कॉन्स्टेबल भी घायल हुआ है.

    पिस्तौल और बाइक बरामद, दूसरा आरोपी फरार
    गाजियाबाद पुलिस ने घटनास्थल से वो मोटरसाइकिल बरामद कर ली है जिससे आरोपी आया था. इसके साथ ही असद के पास से एक देसी पिस्तौल भी बरामद की गई है, जिसका इस्तेमाल उसने पुलिस पर फायरिंग के लिए किया था. हालांकि, इस मुठभेड़ के दौरान मोटरसाइकिल पर असद के साथ मौजूद उसका दोस्त मौके से भागने में कामयाब रहा. पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार तलाश कर रही है.

    सूर्या की हत्या का सीसीटीवी वीडियो भी आया था सामने
    सूर्या चौहान की हत्या का एक सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया था जिसमें कुछ युवक उस पर चाकू से हमला करते दिखाई दिए थे. पुलिस ने इस मामले में पहले ही 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था और दो आरोपी फरार थे. असद इस हत्याकांड का चौथा और मुख्य आरोपी था, जिसपर पुलिस ने 50 हजार का ईनाम भी घोषित किया था. अब पुलिस को पांचवें आरोपी की तलाश है.

    सूर्या के परिजनों ने आरापियों के एनकाउंटर और बुलडोजर एक्शन की मांग भी की थी. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए भारी सुरक्षा के बीच सूर्या का अंतिम संस्कार किया गया था.

  • राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह से की भेंट, पंजाब से जुड़े मुद्दों पर केंद्र से सहयोग का आग्रह

    राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह से की भेंट, पंजाब से जुड़े मुद्दों पर केंद्र से सहयोग का आग्रह

    नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से राज्यसभा सांसद और पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने शनिवार को नई दिल्ली में मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच पंजाब से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। मुलाकात को राज्य के विकास, जनकल्याण और कानून-व्यवस्था की स्थिति को मजबूत करने के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। हरभजन सिंह ने इस मुलाकात की जानकारी स्वयं साझा करते हुए बताया कि उन्होंने केंद्र सरकार से पंजाब के हितों की रक्षा और विकास कार्यों को गति देने के लिए सहयोग की अपील की है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब हरभजन सिंह के राजनीतिक रुख को लेकर भी चर्चा बनी हुई है और उनकी यह मुलाकात राजनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    हरभजन सिंह भारतीय क्रिकेट टीम के एक सफल और अनुभवी खिलाड़ी रहे हैं, जिन्होंने अपनी गेंदबाजी से देश को कई महत्वपूर्ण जीत दिलाने में योगदान दिया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और राज्यसभा सांसद के रूप में पंजाब के मुद्दों को उठाने का कार्य किया। हाल के वर्षों में वे पंजाब से जुड़े विभिन्न सामाजिक और प्रशासनिक विषयों पर सक्रिय रूप से अपनी राय रखते रहे हैं। अमित शाह से उनकी यह मुलाकात ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य में सुरक्षा व्यवस्था, विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को लेकर केंद्र और राज्य के बीच समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान पंजाब की वर्तमान परिस्थितियों, कानून-व्यवस्था की चुनौतियों और विकास परियोजनाओं को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। हरभजन सिंह ने राज्य के हितों को प्राथमिकता देने की बात रखते हुए केंद्र से सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब के विकास के लिए मजबूत समन्वय और प्रभावी नीतियों की आवश्यकता है, जिससे आम जनता को सीधे लाभ मिल सके। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी विभिन्न मुद्दों को ध्यान से सुना और आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।

    यह मुलाकात इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि राजनीतिक हलकों में हरभजन सिंह के हालिया रुख को लेकर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। पंजाब में कुछ राजनीतिक समूहों द्वारा इस मुलाकात को लेकर अलग-अलग राय व्यक्त की जा रही है, जबकि समर्थक इसे विकास के दृष्टिकोण से एक सकारात्मक कदम मान रहे हैं। राज्यसभा सांसद के रूप में हरभजन सिंह लगातार पंजाब से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर उठाने का प्रयास कर रहे हैं और यह मुलाकात भी उसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है।

    कुल मिलाकर यह बैठक पंजाब की राजनीति और विकास के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखी जा रही है, जिसमें केंद्र और राज्य के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया गया है।

  • बंगाल चुनाव में बड़ा उलटफेर: बूथ-स्तरीय डेटा से खुलासा, टीएमसी के कई दिग्गज अपने ही क्षेत्रों में कमजोर साबित

    बंगाल चुनाव में बड़ा उलटफेर: बूथ-स्तरीय डेटा से खुलासा, टीएमसी के कई दिग्गज अपने ही क्षेत्रों में कमजोर साबित

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में बूथ-स्तरीय आंकड़ों ने एक बार फिर चुनावी समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं के प्रदर्शन से जुड़े डेटा में सामने आया है कि कई बड़े नेता अपने ही क्षेत्रों में अपेक्षित समर्थन हासिल करने में असफल रहे। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य की राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी प्रतिस्पर्धा बनी हुई है और हर चुनावी आंकड़ा राजनीतिक विश्लेषण का महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है।

    बूथ स्तर के विस्तृत आंकड़ों के अनुसार, कई वरिष्ठ टीएमसी नेताओं ने अपनी सीटें जीतने के बावजूद अधिकांश मतदान केंद्रों पर अपेक्षित वोट शेयर हासिल नहीं किया। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कुछ नेताओं को अपने ही घरेलू पोलिंग बूथों पर भी कमजोर प्रदर्शन का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी राजनीतिक पकड़ को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि कुछ नेता मजबूत समर्थन के साथ विजयी भी रहे, लेकिन समग्र तस्वीर मिश्रित परिणामों को दर्शाती है।

    विश्लेषण में यह भी देखा गया कि कई सीटों पर जीत-हार का अंतर केवल कुछ बूथों के प्रदर्शन पर निर्भर रहा। कुछ क्षेत्रों में उम्मीदवारों ने सीमित बूथों पर ही मजबूत प्रदर्शन किया, जबकि अन्य स्थानों पर वे अपेक्षाकृत कमजोर रहे। इसके बावजूद, कुल वोटों के संतुलन ने कई नेताओं को जीत दिलाई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि चुनावी परिणाम केवल बूथ स्तर की संख्या पर निर्भर नहीं करते, बल्कि व्यापक वोट वितरण का भी बड़ा प्रभाव होता है।

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस तरह के बूथ डेटा से यह समझने में मदद मिलती है कि किसी पार्टी की जमीनी पकड़ कितनी मजबूत है। पश्चिम बंगाल जैसे राजनीतिक रूप से सक्रिय राज्य में बूथ स्तर का प्रदर्शन अक्सर भविष्य की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि पार्टियां अब इन आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण कर अपनी रणनीतियों को पुनर्गठित करने में लगी हुई हैं।

    हालांकि, चुनावी परिणाम यह भी दिखाते हैं कि कई सीटों पर स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों की छवि और क्षेत्रीय समीकरणों ने अंतिम नतीजों को प्रभावित किया। कुछ वरिष्ठ नेताओं ने सीमित बूथों पर मजबूत प्रदर्शन के बावजूद सीट जीत ली, जबकि कुछ अन्य अपेक्षाकृत अधिक बूथों पर बढ़त के बावजूद हार गए। यह स्थिति बताती है कि चुनावी राजनीति में मतदाता व्यवहार काफी जटिल और बहुआयामी होता है।

    राज्य की राजनीति में यह डेटा आने वाले समय में रणनीतिक बदलावों का संकेत माना जा रहा है। पार्टियां अब बूथ स्तर पर संगठनात्मक मजबूती और स्थानीय संपर्क को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर सकती हैं। फिलहाल यह बूथ-स्तरीय विश्लेषण राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है और इसके आधार पर भविष्य की चुनावी रणनीतियों में बदलाव की संभावना भी जताई जा रही है।

  • धार्मिक मुद्दों के राजनीतिक इस्तेमाल पर ओवैसी ने उठाए सवाल, UCC, NEET और महंगाई पर सरकारों को घेरा

    धार्मिक मुद्दों के राजनीतिक इस्तेमाल पर ओवैसी ने उठाए सवाल, UCC, NEET और महंगाई पर सरकारों को घेरा

    नई दिल्ली/ हैदराबाद में आयोजित ईद मिलाप कार्यक्रम के दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर कई राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अजान और नमाज जैसे धार्मिक विषयों को अक्सर राजनीतिक रूप से इस तरह उठाया जाता है, जिससे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने का माहौल बनता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक बहसों में ऐसे मुद्दों को आवश्यकता से अधिक महत्व दिया जाता है, जबकि देश के असली मुद्दे रोजगार, शिक्षा और महंगाई हैं, जिन पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो पाती।

    ओवैसी ने अपने भाषण में सड़क पर नमाज पढ़ने के मुद्दे का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कोई रोजमर्रा की स्थिति नहीं होती, बल्कि केवल कुछ विशेष अवसरों जैसे जुमे या ईद पर सीमित समय के लिए होता है। इसके बावजूद इसे लगातार एक बड़े विवाद के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। उन्होंने कहा कि देश में विभिन्न धार्मिक आयोजनों और जुलूसों के दौरान भी सड़कें अस्थायी रूप से बंद की जाती हैं और व्यवस्था बनाई जाती है, लेकिन उन मामलों पर विवाद उतना नहीं होता जितना नमाज को लेकर देखा जाता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर कोई नियम बनाया जाता है, तो वह सभी धर्मों और समुदायों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उनके अनुसार किसी भी प्रकार की असमानता समाज में भ्रम और असंतोष पैदा करती है। उन्होंने तर्क दिया कि लोगों को धार्मिक मुद्दों की बजाय उन विषयों पर अधिक ध्यान देना चाहिए जो उनके दैनिक जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं, जैसे महंगाई और बेरोजगारी।

    अपने संबोधन में ओवैसी ने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के कई महत्वपूर्ण मुद्दे, जैसे परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवाद और छात्रों की समस्याएं, अक्सर उतनी गंभीरता से नहीं उठाई जातीं जितनी धार्मिक बहसें दिखाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों पर असर डालने वाले विषयों को अधिक प्राथमिकता मिलनी चाहिए, क्योंकि ये सीधे भविष्य से जुड़े मुद्दे हैं।

    यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर भी उन्होंने अपनी आपत्तियां दोहराईं और कहा कि किसी भी कानून को समानता के नाम पर लागू करते समय सभी समुदायों के साथ एक जैसा व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी नीति में चयनात्मक तरीके से छूट या सख्ती अपनाई जाती है, तो यह सामाजिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है।

    हिंदू त्योहारों के दौरान मांस और अंडे की बिक्री पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों का उल्लेख करते हुए ओवैसी ने कहा कि यदि धार्मिक भावनाओं के आधार पर ऐसे कदम उठाए जाते हैं, तो सभी समुदायों के लिए एक समान दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी धर्म की आलोचना करना नहीं, बल्कि सभी के लिए समान व्यवहार की मांग करना है।

    महंगाई और बढ़ती ईंधन कीमतों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आम लोगों की सबसे बड़ी समस्या रोजमर्रा के खर्चों में बढ़ोतरी है, जो सीधे पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर गंभीर और निरंतर चर्चा की आवश्यकता है, क्योंकि यही विषय आम नागरिक के जीवन को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं।

  • दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का बड़ा ऑपरेशन, आतंकी हमले की साजिश विफल, जांच एजेंसियां अलर्ट

    दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का बड़ा ऑपरेशन, आतंकी हमले की साजिश विफल, जांच एजेंसियां अलर्ट

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े आतंकी हमले की साजिश को समय रहते नाकाम करते हुए महत्वपूर्ण कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिसमें कथित रूप से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से जुड़े नेटवर्क और अंडरवर्ल्ड कनेक्शन वाले एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया है। इस कार्रवाई के तहत दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 9 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से हथियार, हैंड ग्रेनेड और विस्फोटक सामग्री बरामद होने की पुष्टि की गई है। यह गिरफ्तारी कई दिनों की निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर की गई है, जिसके बाद राजधानी के विभिन्न इलाकों में एक साथ छापेमारी अभियान चलाया गया।

    जांच एजेंसियों के अनुसार प्रारंभिक जानकारी में यह सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए संदिग्ध लंबे समय से एक संगठित नेटवर्क के तहत सक्रिय थे और दिल्ली में बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। इस कथित साजिश में मंत्रालयों, सुरक्षा बलों के प्रतिष्ठानों, संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों और प्रमुख धार्मिक स्थलों को निशाना बनाए जाने की आशंका जताई गई है। अगर यह योजना सफल होती तो राजधानी में गंभीर सुरक्षा संकट पैदा हो सकता था, हालांकि समय रहते कार्रवाई होने से संभावित खतरे को टाल दिया गया।

    सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ समय से सुरक्षा एजेंसियों को संदिग्ध गतिविधियों और डिजिटल संपर्कों की जानकारी मिल रही थी, जिसके बाद तकनीकी निगरानी और खुफिया नेटवर्क को सक्रिय किया गया। जांच के दौरान कुछ संदिग्ध लेन-देन और ऑनलाइन संचार के संकेत मिले, जिनके आधार पर इस पूरे मॉड्यूल तक पहुंच बनाई गई। इसके बाद विभिन्न स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई और पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

    बरामद हथियारों और विस्फोटक सामग्री की फॉरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि इनका उपयोग किस प्रकार की संभावित गतिविधियों के लिए किया जाना था। इसके साथ ही जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि आरोपियों को किस प्रकार का प्रशिक्षण दिया गया और उनके संपर्क किन अंतरराष्ट्रीय या घरेलू नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। डिजिटल उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक डाटा की जांच भी की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की संरचना को समझा जा सके।

    इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी जांच में शामिल हो गई हैं और विभिन्न पहलुओं पर संयुक्त रूप से काम किया जा रहा है। विशेष रूप से वित्तीय लेन-देन, विदेशी संपर्कों और डिजिटल फंडिंग के स्रोतों की गहन जांच की जा रही है। प्रारंभिक संकेतों के अनुसार कुछ संदिग्ध लिंक पाकिस्तान आधारित नेटवर्क और मुंबई अंडरवर्ल्ड से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी।

    दिल्ली जैसे उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में इस तरह की साजिश का सामने आना एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है। राजधानी में मौजूद संवेदनशील संस्थानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की पहचान होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • पीएम स्वनिधि योजना की बड़ी उपलब्धि, 55 लाख से अधिक लाभार्थी डिजिटल सिस्टम से जुड़े, 9 लाख करोड़ के लेनदेन दर्ज

    पीएम स्वनिधि योजना की बड़ी उपलब्धि, 55 लाख से अधिक लाभार्थी डिजिटल सिस्टम से जुड़े, 9 लाख करोड़ के लेनदेन दर्ज

    नई दिल्ली । देश में असंगठित क्षेत्र के आर्थिक सशक्तिकरण और शहरी गरीब तबके के लिए चलाई जा रही पीएम स्वनिधि योजना लगातार महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज कर रही है। इस योजना के तहत अब तक 55 लाख से अधिक लाभार्थियों को डिजिटल भुगतान प्रणाली से जोड़ा जा चुका है, जिससे रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के कारोबार में पारदर्शिता और स्थिरता बढ़ी है। योजना के तहत किए गए प्रयासों का व्यापक असर यह रहा है कि लाभार्थियों द्वारा अब तक 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए गए हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग 8.96 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

    इस योजना की शुरुआत वर्ष 2020 में की गई थी, जिसका उद्देश्य छोटे और असंगठित व्यापारियों को बिना गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराना था। समय के साथ यह योजना केवल ऋण सुविधा तक सीमित नहीं रही, बल्कि डिजिटल समावेशन और वित्तीय साक्षरता का एक मजबूत माध्यम बन गई है। इसके तहत लाभार्थियों को तीन चरणों में ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को विस्तार दे सकें। योजना की खास बात यह है कि इसमें सरकारी गारंटी के साथ ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे बैंकों और लाभार्थियों दोनों का जोखिम कम होता है।

    आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस योजना के लगभग 95 प्रतिशत लाभार्थी पहली बार औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जुड़े हैं, जो देश में वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसके साथ ही लाभार्थियों की औसत आय में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार देखा गया है। कई लाभार्थियों ने बेहतर आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक अपनी पहुंच को भी मजबूत किया है।

    डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए इस योजना में कैशबैक प्रोत्साहन जैसी सुविधाएं भी शामिल की गई हैं, जिसके तहत लाभार्थियों को डिजिटल लेनदेन पर वित्तीय लाभ दिया जाता है। इससे छोटे व्यापारी भी डिजिटल ट्रांजैक्शन अपनाने के लिए प्रेरित हुए हैं और देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। लगभग 46 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं, जो इस योजना की सामाजिक समावेशिता को दर्शाता है, जबकि बड़ी संख्या में लाभार्थी वंचित और कमजोर वर्गों से आते हैं।

    सरकार ने इस योजना की उपलब्धियों को देखते हुए इसके विस्तार की घोषणा की है, जिसके तहत इसे अब मार्च 2030 तक जारी रखा जाएगा। इससे अधिक से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को योजना का लाभ मिल सकेगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। साथ ही, यूपीआई आधारित क्रेडिट कार्ड सुविधा भी योजना के अगले चरण में शामिल की गई है, जिससे छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिल सकेगी।

    कुल मिलाकर पीएम स्वनिधि योजना देश में सूक्ष्म ऋण प्रणाली और डिजिटल भुगतान के विस्तार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह न केवल आर्थिक मजबूती का माध्यम बन रही है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में भी प्रभावी साबित हो रही है।

  • सरकारी नौकरी अलर्ट: DRDO-RAC ने निकाली साइंटिस्ट भर्ती, 19 जून तक करें आवेदन, जानें पूरी प्रक्रिया

    सरकारी नौकरी अलर्ट: DRDO-RAC ने निकाली साइंटिस्ट भर्ती, 19 जून तक करें आवेदन, जानें पूरी प्रक्रिया


    नई दिल्ली ।
    देश की रक्षा अनुसंधान एवं विकास से जुड़ी प्रमुख संस्था डीआरडीओ-आरएसी ने वैज्ञानिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो इंजीनियरिंग और विज्ञान क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 33 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी, जिनमें वैज्ञानिक-ई, वैज्ञानिक-डी और वैज्ञानिक-सी स्तर के पद शामिल हैं। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और योग्य उम्मीदवार निर्धारित अंतिम तिथि तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    इस भर्ती में विभिन्न तकनीकी और वैज्ञानिक क्षेत्रों के लिए पदों का वितरण किया गया है। वैज्ञानिक-ई के दो पदों में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार इंजीनियरिंग तथा मैकेनिकल, प्रोडक्शन और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों के उम्मीदवारों के लिए अवसर उपलब्ध हैं। इसके अलावा वैज्ञानिक-डी के 11 पद कंप्यूटर विज्ञान, एयरोस्पेस, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, भौतिकी, रासायनिक इंजीनियरिंग और अन्य संबंधित क्षेत्रों के लिए निर्धारित किए गए हैं। वहीं वैज्ञानिक-सी के 20 पदों में इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस, गणित, समुद्र विज्ञान, रिमोट सेंसिंग, फार्माकोलॉजी, फिजियोलॉजी और अन्य वैज्ञानिक विषयों से जुड़े उम्मीदवारों को मौका दिया गया है।

    इन पदों के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास संबंधित विषय में इंजीनियरिंग या विज्ञान में प्रथम श्रेणी स्नातक या मास्टर डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही उम्मीदवारों के पास निर्धारित क्षेत्र में अनुभव और अन्य आवश्यक योग्यताएं भी होनी चाहिए, जो पद के अनुसार अलग-अलग तय की गई हैं। आयु सीमा की बात करें तो अधिकतम आयु 35 से 45 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है, जिसकी गणना आवेदन की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी। आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी।

    चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्टिंग के बाद व्यक्तिगत साक्षात्कार, दस्तावेज़ सत्यापन और अन्य मूल्यांकन चरणों से गुजरना होगा। अंतिम चयन पूरी तरह से उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और इंटरव्यू प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार आकर्षक वेतनमान प्रदान किया जाएगा, जो लगभग 67,700 रुपये से लेकर 1,23,100 रुपये प्रति माह तक होगा। यह वेतन सरकारी वैज्ञानिक पदों के स्तर के अनुसार तय किया गया है और इसके साथ अन्य भत्ते भी लागू हो सकते हैं।

    आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से की जा रही है। उम्मीदवारों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आधिकारिक पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा और सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे। सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के पुरुष उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 100 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि एससी, एसटी, दिव्यांग और महिला उम्मीदवारों को शुल्क में छूट दी गई है।

    इस भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 19 जून तय की गई है और उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम समय का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। यह अवसर उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो देश की रक्षा अनुसंधान परियोजनाओं में वैज्ञानिक के रूप में योगदान देना चाहते हैं और एक प्रतिष्ठित सरकारी संस्थान में करियर बनाना चाहते हैं।

  • राजधानी की जल आपूर्ति व्यवस्था पर हाई लेवल मीटिंग, सीएम रेखा गुप्ता ने तेज राहत और दीर्घकालिक योजना पर जोर

    राजधानी की जल आपूर्ति व्यवस्था पर हाई लेवल मीटिंग, सीएम रेखा गुप्ता ने तेज राहत और दीर्घकालिक योजना पर जोर

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में भीषण गर्मी के बीच उत्पन्न जल संकट और पेयजल आपूर्ति की चुनौतियों को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार हर नागरिक तक पर्याप्त पेयजल पहुंचाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य कर रही है और इसके लिए तत्काल राहत उपायों के साथ-साथ दीर्घकालिक समाधान पर भी समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल वर्तमान संकट को संभालना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी स्थिति को स्थायी रूप से नियंत्रित करना भी है, ताकि राजधानी में जल सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि भीषण गर्मी के कारण जल आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है, लेकिन हरियाणा सरकार से मुनक नहर के माध्यम से न्यूनतम 1,000 क्यूसेक जल आपूर्ति बनाए रखने का आश्वासन मिला है, जिससे स्थिति को संतुलित रखने में मदद मिल रही है। इसके अलावा दिल्ली जल बोर्ड द्वारा 980 से अधिक जल टैंकरों के माध्यम से प्रतिदिन हजारों ट्रिप संचालित किए जा रहे हैं, ताकि घनी आबादी और संकरी गलियों वाले क्षेत्रों में भी पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन ने छोटे टैंकरों की तैनाती भी बढ़ाई है, जिससे दूरस्थ और कठिन क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो सके।

    बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि यमुना में वजीराबाद क्षेत्र के पास जल स्तर में गिरावट के कारण आपूर्ति पर असर पड़ा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री ने हरियाणा के मुख्यमंत्री से चर्चा की, जिसके बाद जल आपूर्ति को बनाए रखने का आश्वासन प्राप्त हुआ। साथ ही यमुना खादर क्षेत्र में अतिरिक्त बोरवेल स्थापित कर प्रतिदिन 10.5 एमजीडी अतिरिक्त जल उत्पादन की क्षमता विकसित की गई है, जिससे आपूर्ति प्रणाली को मजबूत करने में मदद मिली है।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जल रिसाव और बर्बादी की घटनाओं को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए और कहा कि जल की हर बूंद मूल्यवान है। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और अधिकारी स्वयं फील्ड में जाकर स्थिति का निरीक्षण करें। हाल के आंकड़ों के अनुसार जल बोर्ड हेल्पलाइन पर हजारों शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से अधिकांश का समाधान किया जा चुका है, जबकि शेष पर तेजी से कार्य जारी है।

    दीर्घकालिक समाधान के तहत सरकार पाइपलाइन आधारित जल आपूर्ति, नए जल शोधन संयंत्रों की स्थापना, यमुना की सफाई और डी-सिल्टिंग जैसे कार्यों पर भी तेजी से काम कर रही है। इसके साथ ही जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वर्षा जल संचयन संरचनाओं का विस्तार किया जा रहा है और ड्यूल वाटर सप्लाई सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है, ताकि शोधन जल का उपयोग गैर-पेय कार्यों में किया जा सके।

    मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने पर जोर देते हुए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि केवल आपूर्ति बढ़ाने से नहीं, बल्कि जिम्मेदार उपयोग और संरक्षण से ही जल संकट का स्थायी समाधान संभव है।

  • सिंगूर में टाटा ग्रुप की वापसी को लेकर सियासत तेज, समिक भट्टाचार्य बोले—बंगाल में निवेश का नया दौर शुरू हो सकता है

    सिंगूर में टाटा ग्रुप की वापसी को लेकर सियासत तेज, समिक भट्टाचार्य बोले—बंगाल में निवेश का नया दौर शुरू हो सकता है

    नई दिल्ली ।  पश्चिम बंगाल की सिंगूर राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है, जहां भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने टाटा समूह की संभावित वापसी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सिंगूर या पश्चिम बंगाल में किसी भी रूप में टाटा समूह की वापसी राज्य के औद्योगिक भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है और इससे निवेश का माहौल मजबूत होगा। उनके अनुसार राज्य को लंबे समय से औद्योगिक विकास में जो नुकसान हुआ है, उसे सुधारने के लिए बड़े और भरोसेमंद औद्योगिक समूहों की वापसी आवश्यक है।

    समिक भट्टाचार्य ने सिंगूर विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2008 में टाटा मोटर्स की नैनो परियोजना का राज्य से बाहर जाना पश्चिम बंगाल की औद्योगिक छवि पर गहरा असर छोड़ गया था। उनके मुताबिक उस समय बने माहौल ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता पैदा की, जिसका प्रभाव आज भी कहीं न कहीं देखा जाता है। उन्होंने दावा किया कि टाटा समूह जैसी प्रतिष्ठित कंपनी की वापसी से यह संदेश जाएगा कि बंगाल फिर से बड़े उद्योगों के लिए तैयार है।

    भाजपा नेता ने यह भी कहा कि टाटा समूह देश के सबसे पुराने और भरोसेमंद औद्योगिक घरानों में से एक है, और उनकी मौजूदगी किसी भी राज्य के लिए विकास की दृष्टि से सकारात्मक संकेत मानी जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि भूमि और निवेश से जुड़ी नीतियों में स्पष्टता और स्थिरता लाई जाए, तो बंगाल में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश संभव है।

    सिंगूर प्रकरण पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। नैनो परियोजना के दौरान हुए भूमि अधिग्रहण विवाद ने राज्य में व्यापक आंदोलन को जन्म दिया था, जिसका राजनीतिक असर भी दूरगामी साबित हुआ। उसी दौर में राज्य की औद्योगिक नीति और निवेश माहौल को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हुई थीं, जिनका प्रभाव वर्षों तक बना रहा।

    समिक भट्टाचार्य ने कहा कि वर्तमान समय में आवश्यकता इस बात की है कि राज्य में उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जाए। उन्होंने संकेत दिया कि स्पष्ट भूमि नीति के बिना बड़े उद्योगों का आना कठिन है, क्योंकि कंपनियां स्थिर और भरोसेमंद नियमों की अपेक्षा करती हैं। उनके अनुसार केवल राजनीतिक घोषणाओं से नहीं, बल्कि व्यावहारिक सुधारों से ही औद्योगिक पुनर्जागरण संभव है।

    इस पूरे मुद्दे पर एक बार फिर बंगाल की राजनीति में बहस तेज हो गई है, जहां सिंगूर न केवल एक ऐतिहासिक विवाद का प्रतीक है, बल्कि राज्य के औद्योगिक भविष्य की दिशा तय करने वाला विषय भी बना हुआ है।

  • पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों पर सख्ती, 11 होल्डिंग सेंटरों में 335 लोग रखे गए, पहचान प्रक्रिया तेज

    पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों पर सख्ती, 11 होल्डिंग सेंटरों में 335 लोग रखे गए, पहचान प्रक्रिया तेज

    नई दिल्ली । देश के विभिन्न हिस्सों में अवैध प्रवासन और सीमा सुरक्षा को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पश्चिम बंगाल से एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है, जहां राज्य सरकार ने संदिग्ध अवैध प्रवासियों की पहचान और उनके कानूनी सत्यापन के लिए 11 होल्डिंग सेंटर स्थापित किए हैं। इन सेंटरों में फिलहाल कुल 335 लोगों को रखा गया है, जिनके दस्तावेजों और नागरिकता से जुड़ी स्थिति की जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम पूरी तरह से निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत उठाया गया है और इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर नियंत्रण रखते हुए व्यवस्था को मजबूत करना है।

    अधिकारियों के अनुसार इन होल्डिंग सेंटरों का संचालन राज्य के अलग-अलग जिलों में किया जा रहा है, जहां पुलिस और जिला प्रशासन की निगरानी में लोगों को अस्थायी रूप से रखा गया है। इनमें बड़ी संख्या उन क्षेत्रों से सामने आई है जो अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब स्थित हैं, जहां अवैध घुसपैठ की आशंका अधिक मानी जाती है। इन केंद्रों में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को अलग-अलग परिस्थितियों में रखा गया है और उनके रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा रहा है ताकि उनकी वास्तविक पहचान स्पष्ट हो सके।

    प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जा रही है, जिसमें संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान, उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखना और आवश्यक जांच पूरी होने तक निगरानी में रखना शामिल है। राज्य स्तर पर इस व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई जिलों में विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो दस्तावेजों की जांच और स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने का कार्य कर रही हैं।

    इस बीच राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है, जहां अवैध घुसपैठ और सीमा सुरक्षा को लेकर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। कुछ पक्ष इसे सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक कदम बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे मानवीय दृष्टिकोण से जोड़कर देखने की बात कह रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति के साथ अनावश्यक कठोरता नहीं बरती जाएगी और पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर ही आगे बढ़ाई जाएगी।

    फिलहाल सभी होल्डिंग सेंटरों में रखे गए लोगों के दस्तावेजों की जांच, उनके मूल देश की पुष्टि और अन्य कानूनी औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि किन लोगों को देश से वापस भेजने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी और किन मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है। प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और नियमों के अनुरूप की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि की संभावना न रहे और कानून व्यवस्था मजबूत बनी रहे।