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  • सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट मास्टर के 20 पदों पर भर्ती, ग्रेजुएट उम्मीदवार 15 नवंबर तक कर सकते हैं आवेदन

    सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट मास्टर के 20 पदों पर भर्ती, ग्रेजुएट उम्मीदवार 15 नवंबर तक कर सकते हैं आवेदन

    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में नौकरी पाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए भर्ती का अवसर सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट मास्टर (शॉर्टहैंड) के 20 संभावित रिक्त पदों पर सीधी भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 25 अक्टूबर 2026 से शुरू हो चुकी है। इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी 15 नवंबर 2026 को रात 11:55 बजे तक आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों को निर्धारित समयसीमा के भीतर आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

    इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से स्नातक की डिग्री होना आवश्यक है। इसके साथ ही अंग्रेजी शॉर्टहैंड में 120 शब्द प्रति मिनट की गति और कंप्यूटर संचालन का ज्ञान होना चाहिए। उम्मीदवार की कंप्यूटर पर अंग्रेजी टाइपिंग स्पीड कम से कम 40 शब्द प्रति मिनट होनी जरूरी है।

    शैक्षणिक योग्यता और तकनीकी दक्षता के अलावा संबंधित पदों पर कार्य अनुभव भी अनिवार्य रखा गया है। अभ्यर्थियों के पास सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों या वैधानिक निकायों में प्राइवेट सेक्रेटरी, सीनियर पर्सनल असिस्टेंट, पर्सनल असिस्टेंट या सीनियर स्टेनोग्राफर के पद पर कम से कम पांच वर्ष की नियमित सेवा का अनुभव होना चाहिए। आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे निर्धारित शैक्षणिक, तकनीकी और अनुभव संबंधी शर्तों को पूरा करते हैं।

    भर्ती के लिए न्यूनतम आयु सीमा 30 वर्ष और अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना 1 अक्टूबर 2026 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित श्रेणियों से संबंधित उम्मीदवारों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा। अभ्यर्थियों को आवेदन करने से पहले अपनी आयु और श्रेणी से संबंधित पात्रता की जांच कर लेनी चाहिए।

    उम्मीदवारों का चयन कई चरणों में किया जाएगा। सबसे पहले प्राप्त आवेदनों की स्क्रीनिंग होगी। इसके बाद वस्तुनिष्ठ प्रकार की परीक्षा, अंग्रेजी शॉर्टहैंड परीक्षा, कंप्यूटर पर अंग्रेजी टाइपिंग स्पीड टेस्ट और व्यक्तिगत साक्षात्कार आयोजित किया जाएगा। चयन प्रक्रिया के सभी निर्धारित चरणों को पूरा करने वाले उम्मीदवारों के आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा।

    कोर्ट मास्टर पद पर चयनित उम्मीदवारों को 67,700 रुपये से लेकर 2,08,700 रुपये प्रतिमाह तक वेतन मिलेगा। इसके अतिरिक्त नियमानुसार अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे। वेतनमान को देखते हुए यह भर्ती उन योग्य अभ्यर्थियों के लिए अवसर है, जिनके पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता के साथ शॉर्टहैंड, टाइपिंग और संबंधित कार्य का अनुभव है।

    आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को अपनी श्रेणी के अनुसार निर्धारित शुल्क ऑनलाइन जमा करना होगा। सामान्य और अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए आवेदन शुल्क 1,500 रुपये और बैंक शुल्क निर्धारित है। वहीं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग की नॉन-क्रीमी लेयर श्रेणी और पूर्व सैनिकों के लिए आवेदन शुल्क 750 रुपये तथा बैंक शुल्क देना होगा।

    सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट मास्टर के इन पदों पर आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवारों को 15 नवंबर की अंतिम समयसीमा का ध्यान रखना होगा। आवेदन से पहले पात्रता,

  • खड़गे की टिप्पणी पर एनडीए नेताओं का विरोध, प्रधानमंत्री मोदी के दिवंगत पिता पर बयान को लेकर माफी की मांग तेज

    खड़गे की टिप्पणी पर एनडीए नेताओं का विरोध, प्रधानमंत्री मोदी के दिवंगत पिता पर बयान को लेकर माफी की मांग तेज


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले समेत एनडीए के कई नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। इन नेताओं ने टिप्पणी को अनुचित बताते हुए खड़गे से माफी मांगने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री और उनके परिवार से जुड़े विषयों पर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने नागपुर में बातचीत के दौरान कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे एक ऐसी राजनीतिक पार्टी के अध्यक्ष हैं, जो लगभग 60 से 70 वर्षों तक सत्ता में रही है। ऐसे में पार्टी के प्रमुख का प्रधानमंत्री का अपमान करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां करना गलत है और इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    आठवले ने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उनके पद के प्रति सम्मान से जुड़ा विषय है। उन्होंने खड़गे की टिप्पणी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह के बयान से प्रधानमंत्री का अपमान हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनडीए नेता ऐसी टिप्पणियों को सहन नहीं करेंगे।

    उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी इस मामले में कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि खड़गे और राहुल गांधी सहित कांग्रेस के नेताओं की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के माता-पिता को लेकर समय-समय पर की गई टिप्पणियां भारतीय संस्कृति और मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं। पाठक ने कहा कि देश की जनता इस तरह के बयानों को स्वीकार नहीं करेगी और संबंधित नेताओं को माफी मांगनी चाहिए।

    पाठक ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल सत्ता से बाहर रहने के कारण निराश हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेताओं के बयानों का असर चुनावों में भी दिखाई दे सकता है। उनके मुताबिक, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ आचरण करने वाले नेताओं को जनता चुनाव के दौरान जवाब देती है।

    मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने भी खड़गे की टिप्पणी पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत माता-पिता को लेकर लगातार अनुचित टिप्पणियां कर रहे हैं और उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। सारंग ने कहा कि लोकतंत्र में इस तरह की भाषा के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

    सारंग ने कहा कि भारतीय परंपराओं में दिवंगत व्यक्तियों के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करना उचित नहीं माना जाता। उन्होंने राहुल गांधी और सोनिया गांधी का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता पहले भी इस तरह के बयान देते रहे हैं। सारंग के अनुसार, यदि कोई बात अनजाने में एक बार कही जाती है, तो उसे अलग तरह से देखा जा सकता है, लेकिन उन्होंने दावा किया कि खड़गे ने तीन बार ऐसी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जनता इस मामले पर अपना जवाब देगी।

    महाराष्ट्र भाजपा विधायक राम कदम ने भी खड़गे से माफी की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी नेता के दिवंगत माता-पिता को राजनीतिक विवाद का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। कदम ने कहा कि खड़गे को अपने बयान के लिए हाथ जोड़कर माफी मांगनी चाहिए।

    राम कदम ने यह भी पूछा कि यदि किसी नेता के अपने पिता के बारे में इसी तरह की अभद्र टिप्पणी की जाए, तो उसे कैसा महसूस होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास राजनीतिक मुद्दों की कमी है और इसी कारण इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि टिप्पणी से प्रधानमंत्री के साथ देश के लोगों की भावनाएं भी आहत हुई हैं।

    भाजपा विधायक पलटू राम ने भी खड़गे की टिप्पणी को निंदनीय बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं के बीच प्रधानमंत्री मोदी और एनडीए नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल को लेकर प्रतिस्पर्धा चल रही है। उन्होंने खड़गे और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सार्वजनिक संवाद में मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।

  • जामिया विवाद पर इमरान मसूद का प्रशासन पर हमला, बोले- छात्रों की समस्याएं सुनने के बजाय दर्ज हो रही एफआईआर

    जामिया विवाद पर इमरान मसूद का प्रशासन पर हमला, बोले- छात्रों की समस्याएं सुनने के बजाय दर्ज हो रही एफआईआर

    नई दिल्ली ।जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रों के विरोध प्रदर्शन और अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की समस्याओं को सुनने और उनका समाधान करने के बजाय उनके खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। मसूद ने परिसर की सुरक्षा व्यवस्था, अधिकारियों की नियुक्ति और छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े मामलों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एफआईआर दर्ज होने से वह डरने वाले नहीं हैं और छात्रों के मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

    अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर के संदर्भ में मसूद ने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन उनकी मांगों और परेशानियों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहा है। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में प्रशासन की प्राथमिकता छात्रों से बातचीत कर समस्याओं का समाधान निकालना होनी चाहिए। उन्होंने प्रॉक्टर और रजिस्ट्रार की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए। मसूद ने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी की नियुक्ति गैरकानूनी है और उनके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने बातचीत के दौरान कोई विस्तृत दस्तावेजी जानकारी नहीं दी।

    विश्वविद्यालय परिसर में कश्मीर से संबंधित नारे लिखे जाने के मामले पर भी कांग्रेस सांसद ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि आईटीबीपी की फर्जी वर्दी पहनकर एक व्यक्ति को पकड़ा गया था और छात्रों ने उसे पकड़ा था। मसूद ने कहा कि परिसर में निगरानी की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए थी। उन्होंने सवाल किया कि जब विश्वविद्यालय में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, तो संबंधित घटना की फुटेज सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है। उनके बयान में सुरक्षा व्यवस्था और घटना की जानकारी सामने लाने की मांग प्रमुख रही।

    मसूद ने प्रॉक्टर मेहताब रिजवी की नियुक्ति का जिक्र करते हुए प्रशासन के रवैये की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जब छात्र भूख हड़ताल पर बैठे थे, तब उनकी समस्याओं को सुनना और उन पर ध्यान देना जरूरी था। उनके अनुसार, छात्रों की शिकायतों के बीच प्रशासन की ओर से की जा रही कार्रवाई से विवाद बढ़ रहा है।

    विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश के लिए दीवार फांदने के सवाल पर भी मसूद ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि रास्ते बंद कर दिए गए थे, जिसके कारण अंदर जाने के लिए दूसरा विकल्प नहीं बचा था। उन्होंने सवाल किया कि परिसर के चारों ओर रास्ते बंद करने की जरूरत क्यों पड़ी और लोगों को अपने बच्चों से मिलने से क्यों रोका गया। इस मुद्दे पर उन्होंने प्रशासन से व्यवस्था और निर्णयों को लेकर जवाब मांगा।

    जामिया विवाद के अलावा मसूद ने लखनऊ में गठबंधन को लेकर लगाए गए पोस्टरों और होर्डिंग पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि ऐसे पोस्टर भाजपा के डर को दर्शाते हैं। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि पोस्टर किसने लगवाए और उनके लिए धन किसने उपलब्ध कराया। मसूद ने कहा कि गठबंधन मजबूत है और पोस्टरों के जरिए उसमें दरार पैदा नहीं की जा सकती। सीटों के बंटवारे पर भी उचित समय पर फैसला हो जाएगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की विवादित टिप्पणी पर मसूद ने खड़गे का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि खड़गे ने सही जवाब दिया है और आगे भी इसी तरह जवाब देते रहेंगे। मसूद ने सरकार पर गुंडागर्दी का आरोप लगाते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज होने से वह पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने दोहराया कि जामिया के छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय प्रशासन को उनकी बात सुननी चाहिए।

  • चक्रवात अर्नब का बिहार के मौसम पर दिखेगा असर, 28 अक्टूबर से बारिश और तेज हवाओं का अनुमान, ऑरेंज अलर्ट जारी

    चक्रवात अर्नब का बिहार के मौसम पर दिखेगा असर, 28 अक्टूबर से बारिश और तेज हवाओं का अनुमान, ऑरेंज अलर्ट जारी


    नई दिल्ली । 
    बंगाल की खाड़ी के ऊपर विकसित हो रहा चक्रवाती तूफान अर्नब बिहार के मौसम को प्रभावित कर सकता है। इसके असर से 28 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच राज्य के कई हिस्सों में बारिश होने का अनुमान है। इस दौरान तेज हवाएं चलने, आंधी-तूफान आने और कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है। मौसम में बदलाव को देखते हुए 28 और 29 अक्टूबर के लिए अलग-अलग स्तर के अलर्ट जारी किए गए हैं।

    मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, चक्रवात अर्नब के 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि, बिहार में इस तूफान के सीधे पहुंचने या लैंडफॉल होने का अनुमान नहीं है, लेकिन इससे जुड़ी मौसमी गतिविधियां राज्य के कई जिलों में असर डाल सकती हैं। इसके कारण बारिश के साथ तेज हवाएं और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है।

    बिहार में पूर्वी हवाओं की गति बढ़ने और वातावरण में नमी का स्तर ऊपर जाने के संकेत मिले हैं। इसी बदलाव के कारण आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। पूर्वानुमान के मुताबिक, 29 अक्टूबर को कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। उत्तर बिहार के जिलों में मौसम का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक रहने का अनुमान है।

    मौसम विभाग ने 28 अक्टूबर को कुछ जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इसके अगले दिन यानी 29 अक्टूबर को पूरे बिहार के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। इस दौरान हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। तेज हवाओं के साथ आंधी-तूफान और बिजली गिरने की आशंका भी है। ऐसे मौसम में लोगों को सतर्क रहने और स्थानीय स्तर पर जारी चेतावनियों पर ध्यान देने की जरूरत होगी।

    हालांकि, 26 और 27 अक्टूबर को राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम सामान्य और शुष्क रहने की संभावना है। पटना, मुजफ्फरपुर सहित कई क्षेत्रों में धूप निकल सकती है। सुबह और शाम के समय हल्की ठंडक महसूस होने का अनुमान है। इन दो दिनों के दौरान फिलहाल बारिश की संभावना नहीं जताई गई है।

    तापमान की बात करें तो अधिकतम तापमान लगभग 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। वातावरण में नमी का स्तर 55 से 75 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। मौसम प्रणाली के आगे विकसित होने के साथ नमी में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं।

    संभावित बारिश और तेज हवाओं का असर खेती और आम जनजीवन पर भी पड़ सकता है। खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। फलों के पेड़ों पर भी तेज हवाओं का असर हो सकता है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम से जुड़ी सूचनाओं पर नजर रखें और अपनी फसलों के साथ कृषि उपकरणों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम उठाएं।

    आंधी-तूफान के दौरान बिजली गिरने से लोगों, पशुओं और संपत्ति को खतरा हो सकता है। अस्थायी ढांचे, टीन की छत वाले घरों और कच्चे मकानों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। लोगों को पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचने तथा बिजली कड़कने पर किसी मजबूत इमारत के भीतर सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी गई है।

    बारिश और तेज हवाओं के कारण कुछ जिलों में सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। लोगों और किसानों को मौसम संबंधी आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करने तथा खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

  • दिल्ली में बिल्डिंग ऑडिट के नाम पर वसूली का आरोप, सौरभ भारद्वाज ने रेखा गुप्ता सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

    दिल्ली में बिल्डिंग ऑडिट के नाम पर वसूली का आरोप, सौरभ भारद्वाज ने रेखा गुप्ता सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा जांच और सरकारी निरीक्षण व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राजधानी में इमारतों से जुड़े हादसों के बाद ऑडिट के आदेश तो जारी किए जाते हैं, लेकिन इसके बाद निरीक्षण के नाम पर कथित वसूली का सिलसिला शुरू हो जाता है। उन्होंने सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण को लेकर सवाल उठाए हैं।

    भारद्वाज के मुताबिक, दिल्ली में जब भी कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तब इमारतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जांच और ऑडिट कराने के निर्देश दिए जाते हैं। उनका आरोप है कि इन निर्देशों के बाद कुछ विभागों के अधिकारी निरीक्षण प्रक्रिया का कथित तौर पर दुरुपयोग करते हैं। उन्होंने दावा किया कि जांच और ऑडिट के नाम पर कारोबारियों से अवैध रूप से पैसे वसूलने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

    आप नेता ने कहा कि यह समस्या केवल एक विभाग तक सीमित नहीं है। उन्होंने नगर निगम दिल्ली और पुलिस पर पहले से लगते रहे भ्रष्टाचार तथा वसूली के आरोपों का उल्लेख करते हुए अग्निशमन विभाग और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि होटल, रेस्टोरेंट, जिम, नर्सिंग होम, कोचिंग सेंटर और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को निरीक्षण के दौरान कथित वसूली का सामना करना पड़ रहा है।

    भारद्वाज ने इस मुद्दे को कारोबारियों के सामने आने वाली गंभीर समस्या के रूप में पेश किया। उनके अनुसार, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भवन सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन जरूरी है। नियमित निरीक्षण और ऑडिट लोगों की जान-माल की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि यदि इन्हीं प्रक्रियाओं का इस्तेमाल रिश्वत लेने के लिए किया जाता है, तो कारोबारियों पर अनावश्यक दबाव बढ़ता है और सरकारी व्यवस्था के प्रति उनका भरोसा कमजोर होता है।

    उन्होंने व्यापारी समुदाय का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वर्ग ऐतिहासिक रूप से जनसंघ और भाजपा का समर्थक रहा है। इसके बावजूद, उनके आरोप के अनुसार, मौजूदा सरकार के कार्यकाल में कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर व्यापारियों की परेशानियां बढ़ रही हैं। भारद्वाज ने दिल्ली की भाजपा सरकार को घेरते हुए ट्रिपल इंजन सरकार की अवधारणा पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि सत्ता के विभिन्न स्तरों पर एक ही राजनीतिक दल के होने के बावजूद भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने की जरूरत बनी हुई है।

    आप नेता ने यह सवाल भी उठाया कि जब हर बड़ी दुर्घटना के बाद इमारतों के ऑडिट और निरीक्षण के आदेश दिए जाते हैं, तो ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम क्यों पर्याप्त रूप से दिखाई नहीं देते। उन्होंने सरकारी विभागों की जवाबदेही और निरीक्षण व्यवस्था की पारदर्शिता को महत्वपूर्ण बताया।

    दिल्ली में भवन सुरक्षा का मुद्दा सार्वजनिक सुरक्षा से सीधे जुड़ा है। होटल, अस्पताल, नर्सिंग होम, जिम और कोचिंग सेंटर जैसे स्थानों पर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके लिए नियमित जांच के साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई भी जरूरी है। वहीं, निरीक्षण प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करना भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।

    फिलहाल, सौरभ भारद्वाज के बयान में लगाए गए आरोप राजनीतिक आरोप हैं। इन आरोपों के समर्थन में किसी जांच के निष्कर्ष या संबंधित विभागों की आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मामले में तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया और जांच से जुड़ी जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

  • असम में दोषसिद्धि दर में बड़ा सुधार, 2021 के 6.1 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर 2026 में 30.88 प्रतिशत पहुंची

    असम में दोषसिद्धि दर में बड़ा सुधार, 2021 के 6.1 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर 2026 में 30.88 प्रतिशत पहुंची

    नई दिल्ली ।असम में आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि दर पिछले पांच वर्षों के दौरान लगातार बढ़ी है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के अनुसार, राज्य में यह दर 2021 में 6.1 प्रतिशत थी, जो सितंबर 2026 तक बढ़कर 30.88 प्रतिशत हो गई। राज्य सरकार ने इस प्रगति का श्रेय बेहतर पुलिस जांच, अभियोजन प्रक्रिया को प्रभावी बनाने और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाने को दिया है। इस बदलाव को राज्य की आपराधिक न्याय व्यवस्था के प्रदर्शन से जोड़कर देखा जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने इस संबंध में साझा किए गए आंकड़ों के जरिए बताया कि असम में दोषसिद्धि दर में हर साल वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 6.1 प्रतिशत था। इसके बाद 2022 में बढ़कर 13.5 प्रतिशत और 2023 में 16.4 प्रतिशत हो गया। वर्ष 2024 में यह दर 22.6 प्रतिशत तक पहुंची, जबकि 2025 में बढ़कर 25.80 प्रतिशत दर्ज की गई। सितंबर 2026 तक इसमें और वृद्धि हुई और यह 30.88 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई।

    इन आंकड़ों के मुताबिक, 2021 से सितंबर 2026 के बीच दोषसिद्धि दर में 24.78 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी हुई है। यह अंतर राज्य में दर्ज की गई लगातार वृद्धि को दर्शाता है। हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर न्याय व्यवस्था के समग्र प्रदर्शन का आकलन करते समय मामलों की प्रकृति और गणना की पद्धति जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।

    मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि दोषसिद्धि दर में सुधार के पीछे जांच की गुणवत्ता, प्रभावी अभियोजन और अधिक जवाबदेही की भूमिका है। उन्होंने राज्य में आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत करने और अपराध से जुड़े मामलों में दोषियों को कानून के दायरे में लाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। सरकार का जोर कानून के प्रभावी पालन और न्याय दिलाने की प्रक्रिया को मजबूत बनाने पर है।

    दोषसिद्धि दर किसी आपराधिक मामले में आरोपी के दोषी ठहराए जाने से संबंधित आंकड़ा है। इसे अक्सर आपराधिक न्याय व्यवस्था के प्रदर्शन का आकलन करने वाले संकेतकों में शामिल किया जाता है। हालांकि, इस दर की व्याख्या करते समय यह समझना जरूरी है कि किन मामलों को आंकड़ों में शामिल किया गया है, मामलों की गिनती किस चरण पर की गई है और संबंधित आंकड़े किस पद्धति से तैयार हुए हैं। अलग-अलग राज्यों या अवधियों के आंकड़ों की तुलना में ये अंतर महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

    असम में दोषसिद्धि दर में हुई वृद्धि के संदर्भ में पुलिस जांच और अभियोजन की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। किसी आपराधिक मामले में साक्ष्य जुटाने, जांच पूरी करने और अदालत में प्रभावी ढंग से पक्ष रखने की प्रक्रिया न्यायिक परिणाम को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में जांच एजेंसियों और अभियोजन से जुड़े अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना आपराधिक न्याय व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    राज्य सरकार की ओर से जारी आंकड़े 2021 से सितंबर 2026 तक दोषसिद्धि दर में बढ़ोतरी का क्रम दिखाते हैं। मुख्यमंत्री ने इस प्रगति को कानून लागू करने और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से जोड़ा है। आने वाले समय में इन आंकड़ों का व्यापक आकलन करने के लिए मामलों की श्रेणियों, निपटारे की स्थिति और गणना के आधार जैसी जानकारियां भी उपयोगी होंगी।

  • खरगे की टिप्पणी पर राजनाथ सिंह का पलटवार, बोले- प्रधानमंत्री मोदी को विचलित नहीं कर सकती ऐसी बयानबाजी

    खरगे की टिप्पणी पर राजनाथ सिंह का पलटवार, बोले- प्रधानमंत्री मोदी को विचलित नहीं कर सकती ऐसी बयानबाजी

    नई दिल्ली । केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता को लेकर की गई टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियों से प्रधानमंत्री मोदी विचलित नहीं होंगे और न ही जनसेवा के प्रति उनका संकल्प कमजोर पड़ेगा। राजनाथ सिंह ने इस बयान को सार्वजनिक जीवन की मर्यादा के अनुरूप नहीं बताते हुए राजनीतिक विरोध और व्यक्तिगत टिप्पणी के बीच अंतर बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।

    राजनाथ सिंह ने सोमवार को इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रविवार को पटना में खरगे की ओर से की गई टिप्पणी से उन्हें गहरा आघात पहुंचा है। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण में सबसे अधिक चिंताजनक बात यह है कि ऐसी टिप्पणी किसी सामान्य कार्यकर्ता या युवा नेता की ओर से नहीं, बल्कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से की गई है। उनके मुताबिक, इतने वरिष्ठ पद पर बैठे व्यक्ति से सार्वजनिक जीवन में अधिक संयम और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है।

    रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि खरगे के बयान से देश के करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि टिप्पणी के बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उसके शब्दों को उचित ठहराने की कोशिश की। राजनाथ सिंह के अनुसार, इस मामले में गलती स्वीकार कर खेद व्यक्त करने के बजाय बयान का बचाव करना लोगों की भावनाओं को और ठेस पहुंचा सकता है।

    उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर आसीन व्यक्ति के व्यवहार में गंभीरता, संयम और मर्यादा दिखाई देनी चाहिए। यदि किसी राजनीतिक दल का शीर्ष नेतृत्व ही ऐसी भाषा का इस्तेमाल करता है, तो इससे उस पद की गरिमा और पार्टी की राजनीतिक संस्कृति पर सवाल उठते हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से सार्वजनिक बहस में जिम्मेदार आचरण बनाए रखने की अपेक्षा जताई।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध स्वाभाविक है और सरकार की नीतियों की आलोचना भी की जा सकती है। विपक्ष को नीतियों, फैसलों और कामकाज पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन असहमति को व्यक्तिगत अपमान में बदलना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री और उनके परिवार को निशाना बनाकर की जाने वाली टिप्पणियां राजनीतिक विमर्श की मर्यादा को प्रभावित करती हैं।

    रक्षा मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले भी पार्टी के कुछ नेताओं की ओर से प्रधानमंत्री की साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर टिप्पणियां की जाती रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री की मां के प्रति कथित अभद्र भाषा के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया। राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि इस तरह की राजनीति अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गई है और इससे राजनीतिक संवाद का स्तर प्रभावित हो रहा है।

    उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेदों को व्यक्तिगत हमलों में बदलना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुकूल नहीं है। राजनीतिक दलों को सरकार के कामकाज की आलोचना करते समय शब्दों और व्यवहार की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। राजनाथ सिंह के अनुसार, किसी व्यक्ति या परिवार को अपमानित करने के बजाय नीतिगत मुद्दों पर चर्चा करना लोकतंत्र के लिए अधिक महत्वपूर्ण है।

    रक्षा मंत्री ने अपने बयान में कहा कि लोकतंत्र में जनता राजनीतिक दलों और नेताओं के व्यवहार पर नजर रखती है। उनके मुताबिक, सार्वजनिक जीवन में दिए गए बयानों और अपनाए गए आचरण का जवाब समय आने पर जनता देती है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा कि राजनीतिक असहमति के दौरान भी भाषा की मर्यादा और जिम्मेदारी बनाए रखना आवश्यक है।

    यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि इस तरह की टिप्पणियों से प्रधानमंत्री के जनसेवा के संकल्प पर असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे वैचारिक विरोध को व्यक्तिगत टिप्पणी का रूप देने से बचें और लोकतांत्रिक संवाद की गरिमा बनाए रखें।

  • खड़गे की टिप्पणी पर देशभर में भाजपा का प्रदर्शन, पटना में पुतला दहन कर कांग्रेस अध्यक्ष से माफी की मांग

    खड़गे की टिप्पणी पर देशभर में भाजपा का प्रदर्शन, पटना में पुतला दहन कर कांग्रेस अध्यक्ष से माफी की मांग

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इस बयान के विरोध में भारतीय जनता पार्टी ने 26 अक्टूबर को देशभर में प्रदर्शन शुरू किए। पार्टी ने सभी राज्यों के मुख्यालयों पर विरोध जताने का ऐलान किया है। बिहार की राजधानी पटना में भाजपा कार्यकर्ताओं ने खड़गे का पुतला जलाकर कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी की और उनसे बिना शर्त माफी मांगने की मांग की।

    यह विवाद रविवार को पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान खड़गे के भाषण से जुड़ा है। कार्यक्रम में भीड़ की ओर से आई एक आवाज के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता को लेकर खड़गे की टिप्पणी का वीडियो सामने आया। इसके बाद भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। भाजपा नेताओं ने इसे व्यक्तिगत मर्यादा और सार्वजनिक जीवन में सम्मान से जुड़ा मामला बताया है।

    भाजपा ने इस टिप्पणी के खिलाफ देशभर में विरोध दर्ज कराने का फैसला किया है। पटना में हुए प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ नारे लगाए। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के दिवंगत माता-पिता को लेकर बार-बार अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना कांग्रेस की वैचारिक स्थिति और हताशा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब तक खड़गे बिना शर्त माफी नहीं मांगते, तब तक पार्टी का विरोध जारी रहेगा।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी खड़गे की टिप्पणी पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल किसी व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भारत और लोकतांत्रिक राजनीति की गरिमा का सवाल जुड़ा है। राजनाथ सिंह के मुताबिक, लोकतंत्र में विपक्ष को सरकार की नीतियों की आलोचना करने और सवाल उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन राजनीतिक विरोध के दौरान व्यक्तिगत मर्यादा का ध्यान रखना भी जरूरी है। उन्होंने कांग्रेस पर वैचारिक रूप से कमजोर होने का आरोप लगाया और कहा कि जनता ऐसे व्यवहार का जवाब देगी।

    जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी को देश की जनता ने तीसरी बार प्रधानमंत्री चुना है और वे करोड़ों लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। झा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास ठोस राजनीतिक मुद्दों की कमी है, जिसके कारण ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस में पहले राजनीतिक मर्यादा का महत्व था, लेकिन राहुल गांधी के नेतृत्व में कटुता और गाली-गलौज की संस्कृति बढ़ी है।

    पूर्व भारतीय क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने भी टिप्पणी पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और उनके दिवंगत पिता के बारे में अपमानजनक बातें कहना राजनीतिक बहादुरी नहीं है। उनके अनुसार, जनप्रतिनिधियों की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन आलोचना के नाम पर व्यक्तिगत हमले और दिवंगत परिजनों को निशाना बनाना उचित नहीं है।

    खड़गे की टिप्पणी को लेकर भाजपा और एनडीए नेताओं की नाराजगी के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ गया है। भाजपा ने माफी की मांग को अपने विरोध का प्रमुख मुद्दा बनाया है और देशभर में प्रदर्शन की घोषणा की है। इस विवाद ने कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी को और तेज कर दिया है।

  • रक्षा निर्यात में तेजी से आगे बढ़ रहा भारत….. यूरोप को सबसे ज्यादा हथियार देने वाला तीसरा देश बना

    रक्षा निर्यात में तेजी से आगे बढ़ रहा भारत….. यूरोप को सबसे ज्यादा हथियार देने वाला तीसरा देश बना


    नई दिल्ली।
    भारत (India) रक्षा निर्यात (Defence Exports) के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब यूरोप (Europe) का तीसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश बन गया है. पिछले वित्त वर्ष में भारत ने 38,424 करोड़ रुपये मूल्य के रक्षा सामान का निर्यात किया. यह उपलब्धि मुख्य रूप से यूरोप की बढ़ती मांग से जुड़ी है. रूस ने 2022 में यूक्रेन पर हमला किया था, उसके बाद यूरोपीय देशों ने अपनी सेनाओं को मजबूत करने की होड़ शुरू कर दी।

    गोला-बारूद, तोपखाने और विस्फोटक पदार्थों की जरूरत अचानक बहुत बढ़ गई. भारत ने इस मौके का फायदा उठाया और यूरोपीय खरीदारों को गोले, मोर्टार और विस्फोटक पदार्थों की बड़ी मात्रा में आपूर्ति शुरू कर दी. इन वस्तुओं की खेप में 1,600 प्रतिशत से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी हुई है।

    यूरोपीय संघ ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को फिर से मजबूत करने का फैसला लिया है. कई यूरोपीय देशों के पास पुराने स्टॉक खत्म हो गए थे और नए उत्पादन में समय लग रहा था. ऐसे में भारत जैसे देश ने तेज आपूर्ति की क्षमता दिखाई. भारत के रक्षा उद्योग ने ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत उत्पादन क्षमता बढ़ाई है.

    सरकारी और निजी कंपनियां मिलकर गोला-बारूद और तोपखाने के सिस्टम बना रही हैं. इससे न सिर्फ घरेलू जरूरतें पूरी हो रही हैं बल्कि निर्यात भी तेजी से बढ़ रहा है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल में कहा कि आगे और ज्यादा संयुक्त उद्यम बनाए जाएंगे. इससे तकनीक साझा होगी और उत्पादन और बढ़ेगा।

    भारत अब सिर्फ छोटे हथियार नहीं बल्कि तोपखाने के सिस्टम, मिसाइल सिस्टम और अन्य रक्षा उपकरण भी निर्यात कर रहा है. ये सामान 80 से ज्यादा देशों तक पहुंच रहे हैं. यूरोप के अलावा अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका के देशों में भी भारतीय रक्षा उत्पादों की मांग बढ़ रही है. यह बदलाव भारत की छवि को हथियार आयातक से निर्यातक देश के रूप में बदल रहा है।

    ‘मेक इन इंडिया’ अभियान ने रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया है. पहले भारत ज्यादातर हथियार विदेश से खरीदता था, लेकिन अब घरेलू कंपनियां आधुनिक हथियार बनाने में सक्षम हो रही हैं. कई निजी कंपनियों ने भी इस क्षेत्र में निवेश किया है. इससे रोजगार बढ़े हैं और विदेशी मुद्रा भी कमाई जा रही है. यूरोप की मांग ने भारतीय कंपनियों को बड़े ऑर्डर दिए हैं, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता और बेहतर हुई है।

    हालांकि चुनौतियां भी हैं. गुणवत्ता मानकों को बनाए रखना, डिलीवरी समय पर करना और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सामना करना जरूरी है. अमेरिका, रूस और फ्रांस जैसे पारंपरिक हथियार निर्यातक देशों के मुकाबले भारत को अपनी जगह और मजबूत करनी होगी. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर भारत संयुक्त उद्यमों पर जोर देता रहा और नई तकनीक अपनाता रहा तो आने वाले सालों में निर्यात और तेजी से बढ़ सकता है।

    इस पूरे विकास से साफ है कि भू-राजनीतिक तनावों ने भारत के लिए नए मौके खोले हैं. यूक्रेन युद्ध ने यूरोप को हथियारों की जरूरत बढ़ा दी और भारत ने अपनी क्षमता का सही इस्तेमाल किया. अब भारत रक्षा निर्यात में वैश्विक खिलाड़ी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. यह उपलब्धि न सिर्फ आर्थिक बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

  • यूपी में विद्युत सखियों ने जमा कराए 3,720 करोड़ रुपये के बिजली बिल, कमीशन से कमाए 47 करोड़ रुपये

    यूपी में विद्युत सखियों ने जमा कराए 3,720 करोड़ रुपये के बिजली बिल, कमीशन से कमाए 47 करोड़ रुपये

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में विद्युत सखी योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रही है। इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने अब तक 3,720 करोड़ रुपये से अधिक के बिजली बिल जमा कराए हैं। इसके बदले उन्हें 47 करोड़ रुपये से ज्यादा कमीशन मिला है। इन महिलाओं ने करीब 1.80 करोड़ उपभोक्ताओं के बिजली बिलों के भुगतान में भूमिका निभाई है।

    उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के समन्वय से संचालित इस योजना में अब तक 31 हजार से अधिक महिलाओं का पंजीकरण किया जा चुका है। इनमें 16 हजार से ज्यादा महिलाएं सक्रिय रूप से बिजली बिल जमा कराने का काम कर रही हैं। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आय अर्जित करने का अवसर उपलब्ध कराने के साथ उपभोक्ताओं के लिए बिजली बिल भुगतान की सुविधा बढ़ाना है।

    योजना के माध्यम से महिलाएं अपने गांव और आसपास के इलाकों में रहकर ही काम कर सकती हैं। उन्हें रोजगार के लिए शहरों की ओर जाने की आवश्यकता नहीं होती। घरेलू जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी का अवसर मिलने से महिलाएं परिवार की आमदनी में योगदान दे पा रही हैं। यह व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

    विद्युत सखियों के काम से बिजली उपभोक्ताओं को भी सुविधा मिल रही है। ग्रामीणों को बिल जमा कराने के लिए दूर स्थित बिजली कार्यालयों या भुगतान केंद्रों तक जाने की जरूरत कम होती है। गांव में ही भुगतान की सुविधा मिलने से उनके समय और आने-जाने के खर्च की बचत हो सकती है। इस तरह योजना महिलाओं की आमदनी बढ़ाने के साथ ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए सेवा को अधिक सुलभ बनाने का प्रयास करती है।

    विद्युत सखियों को काम शुरू करने से पहले प्रशिक्षण दिया जाता है और डिजिटल भुगतान प्रणाली से जोड़ा जाता है। वे ई-वॉलेट के माध्यम से उपभोक्ताओं के बिजली बिल जमा करती हैं। इस काम के बदले उन्हें निर्धारित दर के अनुसार कमीशन मिलता है। योजना के तहत 2,000 रुपये तक का बिजली बिल जमा कराने पर 20 रुपये तक कमीशन दिया जाता है।

    डिजिटल भुगतान व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन को बढ़ावा देने में भी मदद मिल रही है। विद्युत सखियां उपभोक्ताओं और बिजली विभाग के बीच एक संपर्क माध्यम के रूप में काम करती हैं। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर बिल भुगतान की सुविधा मिलती है, जबकि बिजली विभाग को राजस्व संग्रह के लिए अतिरिक्त माध्यम उपलब्ध होता है।

    राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के मुताबिक, प्रदेश में 16 हजार से अधिक सक्रिय विद्युत सखियां ग्रामीण उपभोक्ताओं तक बिजली बिल भुगतान की सुविधा पहुंचा रही हैं। इस पहल से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और समाज में उनकी भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

    विद्युत सखी योजना महिला सशक्तीकरण, ग्रामीण रोजगार और जनसेवा को एक साथ जोड़ती है। अब तक 3,720 करोड़ रुपये से अधिक के बिजली बिल जमा कराने और 47 करोड़ रुपये से ज्यादा कमीशन अर्जित करने के आंकड़े इस योजना के दायरे को दर्शाते हैं। पंजीकृत महिलाओं में से 16 हजार से अधिक के सक्रिय होने के साथ यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में बिल भुगतान की सुविधा और महिलाओं के लिए आय के अवसर उपलब्ध करा रही है।