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  • कनाडा के निवेशकों पर भारत की नजर, सीतारमण बोलीं- नीतियां अनुकूल और टैक्स व्यवस्था में बढ़ी निश्चितता

    कनाडा के निवेशकों पर भारत की नजर, सीतारमण बोलीं- नीतियां अनुकूल और टैक्स व्यवस्था में बढ़ी निश्चितता


    नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कनाडा के प्रमुख निवेशकों और कंपनियों को भारत में निवेश के बढ़ते अवसरों का लाभ उठाने का न्योता दिया है। टोरंटो में आयोजित हाई लेवल बिजनेस राउंडटेबल में वित्त मंत्री ने कनाडाई कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ भारत के निवेशक हितैषी नीतिगत माहौल टैक्स से जुड़ी निश्चितता और लगातार किए जा रहे आर्थिक सुधारों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत अलग अलग सेक्टर और क्षेत्रों में निवेश के लिए नए अवसर उपलब्ध करा रहा है और कनाडाई कंपनियां इन संभावनाओं के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत कर सकती हैं।

    राउंडटेबल में क्लीन टेक्नोलॉजी जरूरी खनिज रेयर अर्थ्स एनर्जी स्टोरेज सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर कृषि फूड प्रोसेसिंग ऑटोमोबाइल टेक्सटाइल्स ग्रीन स्टील एयरोस्पेस स्पेस साइबर सिक्योरिटी बायोटेक्नोलॉजी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एसेट मैनेजमेंट हायर एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के कारोबारी प्रतिनिधि शामिल हुए। इससे साफ है कि भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग को केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित रखने के बजाय भविष्य की तकनीकों और उभरते उद्योगों तक विस्तार देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    वित्त मंत्री ने ओंटारियो टीचर्स पेंशन प्लान की प्रेसिडेंट और सीईओ जो टेलर से भी मुलाकात की। उन्होंने भारत में ओटीपीपी के लंबे समय से जारी भरोसे और नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के साथ उसकी साझेदारी की सराहना की। दोनों पक्षों के बीच पार्टनरशिप और को इन्वेस्टमेंट के जरिए भारत में ओटीपीपी के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को बढ़ाने की संभावनाओं पर बातचीत हुई। ट्रांसमिशन ट्रांसपोर्ट शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों को खास तौर पर महत्वपूर्ण बताया गया।

    सीतारमण ने ग्लोबल निवेशकों के लिए गिफ्ट आईएफएससी को एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म के तौर पर पेश किया और ओटीपीपी को भारत के साथ अपने आर्थिक जुड़ाव को और मजबूत करने तथा बड़े निवेश अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके साथ ही उन्होंने ओएमईआरएस के प्रेसिडेंट और सीईओ ब्लेक हचेसन से भी मुलाकात की और भारत में संस्थान के लगातार भरोसे की सराहना की। बातचीत में इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट समेत कई क्षेत्रों में लंबे समय की साझेदारी को और गहरा करने के अवसरों पर चर्चा हुई।

    बैठक के दौरान ट्रांसपोर्टेशन ट्रांसमिशन रिन्यूएबल एनर्जी शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि बढ़ते मध्यम वर्ग और तेजी से बढ़ती इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों को विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया गया।

    वित्त मंत्री ने कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड के प्रेसिडेंट और सीईओ जॉन ग्राहम से भी मुलाकात की। उन्होंने भारत में सीपीपीआईबी के लंबे समय के भरोसे और एनआईआईएफ इंफ्रा फंड II में उसके निवेश की सराहना की। दोनों पक्षों के बीच ट्रांसमिशन रिन्यूएबल एनर्जी सड़कें बंदरगाह शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटरों में संस्थागत पूंजी के लिए नए अवसर बढ़ाने पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री का यह दौरा भारत में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और कनाडाई निवेशकों के साथ दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

  • बाढ़ और तबाही के बीच 6 कैलाश यात्री लापता, नेपाल आपदा का बिहार तक असर; परिवारों की बढ़ी चिंता

    बाढ़ और तबाही के बीच 6 कैलाश यात्री लापता, नेपाल आपदा का बिहार तक असर; परिवारों की बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली। नेपाल में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा का असर अब भारत के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है। बिहार के कई इलाकों में बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। भागलपुर के नौगछिया में गंगा नदी का तटबंध टूटने के बाद बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए हैं। पानी फैलने से लोगों का सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें राहत और बचाव अभियान में जुटी हैं। प्रभावित परिवारों के लिए मुफ्त कम्युनिटी किचन अस्थायी मेडिकल कैंप और राहत शिविर शुरू किए गए हैं ताकि उन्हें जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

    बगहा में भी नेपाल में आई भारी आपदा के बाद गंडक नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों को नदी का जलस्तर बढ़ने का डर सता रहा है। कई लोग संभावित खतरे को देखते हुए रातभर जागते रहे। प्रशासन की ओर से हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और निचले इलाकों के लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। पटना के आसपास के क्षेत्रों में भी बाढ़ का पानी कई घरों तक पहुंचने से परेशानी बढ़ गई है। कई परिवार अपने मवेशियों के साथ सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर चले गए हैं।

    बिहार के साथ उत्तर प्रदेश में भी गंगा के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ाई है। रायबरेली में गंगा का पानी चेतावनी के निशान से ऊपर पहुंच गया है। इसके चलते कटरा क्षेत्र के गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। कई जगह जलभराव की स्थिति बन गई है और खेतों में खड़ी धान गन्ने और अरहर की फसलें पानी में डूब गई हैं। किसानों को फसल बर्बाद होने के साथ आर्थिक नुकसान की आशंका सता रही है।

    नेपाल की आपदा का असर उन भारतीय परिवारों पर भी पड़ा है जिनके परिजन वहां यात्रा पर गए हैं। जम्मू में गोरखा समुदाय के लोगों ने नेपाल त्रासदी में जान गंवाने वालों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इसके साथ ही नेपाल में लापता भारतीय और विदेशी नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए भी प्रार्थना की गई।

    इसी बीच पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर से नेपाल गए छह कैलाश यात्री 25 अगस्त की रात से संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए एक ट्रैवल ग्रुप के साथ नेपाल गए थे। यात्रियों के संपर्क में नहीं आने के बाद उनके परिवारों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। लापता यात्रियों में अरिंदम गांगुली और मौसुमी गांगुली के नाम सामने आए हैं।

    अरिंदम की दोस्त सुजाता बनर्जी के मुताबिक यात्रियों से पहले बातचीत हुई थी लेकिन इसके बाद उनसे संपर्क नहीं हो सका। ट्रैवल एजेंसी से संपर्क करने पर परिवारों को बताया गया कि पिछली रात और सुबह यात्रियों से बात हुई थी लेकिन इसके बाद उनकी स्थिति की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई। इससे परिजन और अधिक चिंतित हैं।

    अब परिवारों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से नेपाल में फंसे छह यात्रियों की तत्काल तलाश शुरू करने और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की अपील की है। एक ओर नेपाल में प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है तो दूसरी ओर उसके प्रभाव से बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। ऐसे हालात में राहत और बचाव एजेंसियों के सामने प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ नेपाल में संपर्क से बाहर हुए भारतीय यात्रियों की जानकारी जुटाने की चुनौती भी बनी हुई है।

  • भारत-पनामा कारोबार में आएगी नई रफ्तार! 600 मिलियन डॉलर के व्यापार को 1.2 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य

    भारत-पनामा कारोबार में आएगी नई रफ्तार! 600 मिलियन डॉलर के व्यापार को 1.2 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य


    नई दिल्ली। भारतीय कंपनियों के लिए पनामा आने वाले समय में सिर्फ एक निर्यात गंतव्य नहीं बल्कि लैटिन अमेरिका कैरिबियन और अमेरिका के कई बाजारों तक पहुंच बनाने का महत्वपूर्ण बिजनेस गेटवे बन सकता है। भारत में पनामा के राजदूत अलोंसो कोरिया मिगुएल ने मुंबई में आयोजित एक हाई लेवल कारोबारी बातचीत के दौरान भारतीय उद्योग जगत के सामने पनामा की कारोबारी संभावनाओं को रखा। उन्होंने कहा कि पनामा की भौगोलिक स्थिति और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क भारतीय कंपनियों को क्षेत्रीय स्तर पर अपने कारोबार का विस्तार करने में बड़ी मदद दे सकते हैं।

    राजदूत के मुताबिक पनामा नहर के कारण देश को वैश्विक समुद्री व्यापार में महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त हासिल है। इसके अलावा मजबूत समुद्री और लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम स्पेशल इकोनॉमिक जोन और कोलोन फ्री ट्रेड जोन जैसी सुविधाएं भारतीय कंपनियों के लिए वेयरहाउसिंग डिस्ट्रीब्यूशन मैन्युफैक्चरिंग और व्यावसायिक गतिविधियों के लिहाज से उपयोगी साबित हो सकती हैं। उनका कहना था कि भारतीय कंपनियां पनामा में अपनी क्षेत्रीय मौजूदगी स्थापित करके आसपास के कई बाजारों को एक साथ कवर कर सकती हैं।

    खास तौर पर फार्मास्यूटिकल्स केमिकल्स ऑटोमोबाइल मोटरसाइकिल इंजीनियरिंग कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी सेक्टर में अवसरों की बड़ी संभावना बताई गई है। कंपनियां पनामा को रीजनल हेडक्वार्टर या डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर के तौर पर विकसित कर सकती हैं। इससे अलग अलग देशों में कारोबार शुरू करने के दौरान आने वाली लॉजिस्टिक्स स्थानीय नियमों डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और बाजार की जरूरतों से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में मदद मिल सकती है।

    मुंबई में हुई इस बातचीत में भारत और पनामा के बीच मौजूदा व्यापार को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। एमवीआईआरडीसी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मुंबई के चेयरमैन और ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष डॉ. विजय कलंत्री ने बताया कि दोनों देशों के बीच फिलहाल वस्तुओं का व्यापार करीब 600 मिलियन डॉलर का है। उन्होंने कहा कि मजबूत बी2बी संपर्क बाजार की बेहतर जानकारी और संभावनाओं वाले क्षेत्रों में केंद्रित सहयोग के जरिए अगले दो वर्षों में इस व्यापार को दोगुना कर 1.2 बिलियन डॉलर से ज्यादा तक पहुंचाया जा सकता है।

    उन्होंने कहा कि पनामा की रणनीतिक लोकेशन और अमेरिका के साथ उसकी कनेक्टिविटी भारतीय कंपनियों को क्षेत्रीय विस्तार के लिए प्रभावी मंच दे सकती है। वहीं मुंबई में पनामा के कॉन्सल जनरल रॉबर्टो रोड्रिग्ज प्राडा ने भी दोनों देशों के कारोबारियों के बीच सीधे संपर्क बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने फार्मास्यूटिकल्स केमिकल्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में विशेष संभावनाएं गिनाईं। उनके मुताबिक पनामा के स्पेशल इकोनॉमिक रिजीम के तहत वेयरहाउसिंग और डिस्ट्रीब्यूशन से लेकर असेंबली टेस्टिंग फिनिशिंग और मैन्युफैक्चरिंग तक भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं। ऐसे में भारत और पनामा के बीच कारोबारी रिश्ते आने वाले समय में एक नए क्षेत्रीय विस्तार की नींव रख सकते हैं।

  • ‘जो खेले वो खिले’… PM मोदी ने युवाओं में भरा जोश, कहा- हर जिले में दुनिया के नक्शे पर चमकने की ताकत

    ‘जो खेले वो खिले’… PM मोदी ने युवाओं में भरा जोश, कहा- हर जिले में दुनिया के नक्शे पर चमकने की ताकत


    नई दिल्ली। ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को खेलो इंडिया संवाद के दौरान देश के युवा खिलाड़ियों और एथलीटों से संवाद करते हुए भारत के खेल भविष्य को लेकर बड़ा विजन सामने रखा। उन्होंने कहा कि उन्हें देश के युवाओं की शक्ति और सामर्थ्य पर पूरा भरोसा है और भारत को खेलों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर से तैयार करना जरूरी है। पीएम मोदी ने 29 अगस्त को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय खेल दिवस का जिक्र करते हुए महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को भी याद किया और कहा कि उनका जीवन देश की खेल परंपरा और प्रेरणा का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने खेल को केवल पदक जीतने का माध्यम मानने के बजाय व्यक्तित्व निर्माण और राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि जो खेले वो खिले। उनके मुताबिक मैदान पर खेलने से केवल खिलाड़ी की क्षमता नहीं बढ़ती बल्कि उसके परिवार का गौरव बढ़ता है और उसके स्कूल कॉलेज जिले तथा पूरे राज्य की पहचान मजबूत होती है।

    पीएम मोदी ने कहा कि देश को 2036 ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए अभी से ऐसी प्रतिभाओं की तलाश करनी होगी जो आने वाले वर्षों में भारत का प्रतिनिधित्व कर सकें। उन्होंने 5 से 15 साल की उम्र के बच्चों के लिए बड़े टैलेंट हंट अभियान की बात कही। इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ बच्चों की खेल में रुचि जानना नहीं बल्कि यह पहचानना भी होगा कि कौन सा बच्चा किस खेल के लिए स्वाभाविक रूप से बेहतर है। इसके आधार पर उन्हें प्रशिक्षण देने की व्यवस्था तैयार की जाएगी। प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार हर संभव सहयोग करेगी।

    उन्होंने भारत की ओलंपिक भागीदारी को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। पीएम मोदी के अनुसार भारत कई ऐसे खेलों में हिस्सा ही नहीं लेता जिनमें दुनिया के दूसरे देश पदक जीत रहे हैं। ऐसे में देश को सर्फिंग स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग वॉटर स्पोर्ट्स और विंटर स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में संभावनाएं तलाशनी होंगी। उन्होंने कहा कि भारत के पास अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में इन खेलों के लिए अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं। जरूरत सिर्फ स्थानीय प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें सही दिशा और प्रशिक्षण देने की है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार देश में 21वीं सदी का आधुनिक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम तैयार करने के लिए काम कर रही है। खेल विश्वविद्यालयों से लेकर प्रशिक्षण केंद्रों तक ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है जिसमें प्रतिभा की पहचान से लेकर उसे शीर्ष स्तर तक पहुंचाने तक सहयोग मिले। उन्होंने खेलों को फिटनेस और बेहतर जीवनशैली से भी जोड़ा और कहा कि खेल युवाओं को नशे से दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उनके मुताबिक खेल अब केवल शौक नहीं बल्कि करियर का भी मजबूत विकल्प बनकर उभर रहे हैं।

    पीएम मोदी ने पैरा एथलीटों की उपलब्धियों को भी प्रेरणा का बड़ा स्रोत बताया। उन्होंने शीतल देवी अवनी लेखरा सुमित अंतिल और नितेश कुमार जैसे खिलाड़ियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत और जज्बे से देश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि खेल हमें जीत के साथ हार के बाद दोबारा उठना भी सिखाता है और यही खेल भावना जीवन को मजबूत बनाती है। अंत में प्रधानमंत्री ने युवाओं से स्क्रीन टाइम कम करने और मैदान से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि प्ले स्टेशन से ज्यादा प्ले ग्राउंड की अहमियत है। उनके मुताबिक खेल के मैदान में हो या समाज के किसी अन्य क्षेत्र में युवाओं की सक्रिय भागीदारी ही भारत की असली शक्ति है।

  • 5 दशकों तक राष्ट्रसेवा में समर्पित रहे ए. बालकृष्णन का निधन, PM मोदी बोले पूर्वोत्तर के विकास में उनका योगदान हमेशा याद रहेगा

    5 दशकों तक राष्ट्रसेवा में समर्पित रहे ए. बालकृष्णन का निधन, PM मोदी बोले पूर्वोत्तर के विकास में उनका योगदान हमेशा याद रहेगा


    नई दिल्ली। विवेकानंद शिला स्मारक और विवेकानंद केंद्र के अध्यक्ष रहे ए. बालकृष्णन के निधन से देशभर में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में उनके लंबे योगदान को याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ए. बालकृष्णन ने अपने जीवन के पांच दशकों से अधिक समय स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने विवेकानंद केंद्र के शुरुआती जीवनव्रतियों में शामिल होकर देश के अलग अलग हिस्सों में लगातार काम किया और विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत के साथ उनका गहरा जुड़ाव रहा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ए. बालकृष्णन के साथ अपनी पुरानी तस्वीर साझा करते हुए उनके निधन पर संवेदना व्यक्त की। पीएम मोदी ने कहा कि विवेकानंद केंद्र के अध्यक्ष के रूप में सेवा देने वाले ए. बालकृष्णन के निधन से उन्हें अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में शिक्षा सामाजिक जागरण और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कई कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री ने विवेकानंद केंद्र परिवार उनके कार्यकर्ताओं और बालकृष्णन से जुड़े सभी प्रशंसकों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त कीं।

    ए. बालकृष्णन का जीवन स्वामी विवेकानंद के विचारों को समाज तक पहुंचाने और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित रहा। विवेकानंद केंद्र से जुड़े उनके कार्यकाल में शिक्षा सामाजिक गतिविधियों और संगठन निर्माण को विशेष महत्व दिया गया। पूर्वोत्तर भारत में उनकी भूमिका को खास तौर पर याद किया जा रहा है। अरुणाचल प्रदेश समेत पूर्वोत्तर के कई क्षेत्रों में शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़े प्रयासों में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह है कि उनके निधन पर देश के अलग अलग हिस्सों से नेताओं और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने श्रद्धांजलि दी।

    केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी ए. बालकृष्णन के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनकी निस्वार्थ सेवा और खासकर अरुणाचल प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए काम को वहां के लोग और पूरा देश लंबे समय तक याद रखेगा। रिजिजू ने उन्हें सच्चा कर्मयोगी बताते हुए कहा कि उनका जीवन सेवा भावना का प्रतीक था। उन्होंने उनके परिवार और करीबियों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी बालकृष्णन के निधन को अत्यंत पीड़ादायक बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को जीवन का ध्येय बनाकर बालकृष्णन ने पांच दशकों से अधिक समय तक राष्ट्रकार्य समाज जागरण शिक्षा और संगठन निर्माण के लिए खुद को समर्पित रखा। उन्होंने पूर्वोत्तर भारत में बालकृष्णन के योगदान को राष्ट्रसेवा की प्रेरक परंपरा बताया और उनके लिए श्रद्धांजलि अर्पित की।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी ए. बालकृष्णन को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें सच्चा कर्मयोगी और जीवनव्रती कार्यकर्ता बताया। उन्होंने कहा कि बालकृष्णन ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया। कन्याकुमारी से लेकर असम और पूर्वोत्तर भारत तक विवेकानंद केंद्र के काम को आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियां भी याद करेंगी। ए. बालकृष्णन का निधन समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में एक ऐसी कमी छोड़ गया है जिसे भरना आसान नहीं होगा। उनके जीवन और कार्यों को स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से प्रेरित सेवा की लंबी यात्रा के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।

  • दिल्ली में मॉडल की सनसनीखेज हत्या से हड़कंप, जिम ट्रेनर पर गंभीर शक; CCTV खंगाल रही पुलिस

    दिल्ली में मॉडल की सनसनीखेज हत्या से हड़कंप, जिम ट्रेनर पर गंभीर शक; CCTV खंगाल रही पुलिस


    नई दिल्ली। पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर इलाके में एक युवती की घर में घुसकर हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मृतका की पहचान मुस्कान के रूप में हुई है जो पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम मॉडलिंग भी करती थी। बताया जा रहा है कि वारदात के समय मुस्कान घर में अकेली थी तभी एक हमलावर उसके घर में दाखिल हुआ और उस पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल युवती को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

    शुरुआती जांच और परिवार के लोगों से मिली जानकारी के आधार पर एक जिम ट्रेनर इमरान पर मुख्य रूप से शक जताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि मुस्कान जिस जिम में जाती थी वहां इमरान ट्रेनर के तौर पर काम करता था और वह युवती को पहले से जानता था। परिवार और उसके दोस्तों की ओर से यह दावा भी किया गया है कि इमरान काफी समय से मुस्कान को परेशान कर रहा था। हालांकि हत्या की असली वजह क्या थी और वारदात के पीछे आरोपी का मकसद क्या था इसकी पुष्टि पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    मुस्कान के भाई आकाश ने पुलिस और परिवार के लोगों को बताया कि इमरान ने उसकी बहन पर चाकू से हमला किया। परिवार के करीबियों के मुताबिक वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। बताया जा रहा है कि CCTV फुटेज में संदिग्ध को देखा गया है और मुस्कान के भाई ने भी उसकी पहचान इमरान के तौर पर की है। पुलिस अब इसी CCTV फुटेज और दूसरे सुरागों की मदद से आरोपी तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

    मृतका के दोस्त अमन ने भी घटना को लेकर कई अहम बातें बताईं। उसके मुताबिक मुस्कान तीन बहनों में सबसे छोटी थी और उसका कोई विवाह नहीं हुआ था। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार के लोगों ने उसे तत्काल घर पहुंचने के लिए फोन किया। जब वह वहां पहुंचा तब तक एंबुलेंस आ चुकी थी और मुस्कान को अस्पताल ले जाया जा रहा था। इसके बाद वह भी अस्पताल पहुंचा लेकिन युवती की जान नहीं बचाई जा सकी।

    दोस्त ने यह भी दावा किया कि इमरान काफी समय से मुस्कान के पीछे पड़ा हुआ था और उसे परेशान करता था। उसके मुताबिक इमरान पहले भी इस तरह की हरकत कर चुका था। इसी वजह से वारदात के बाद परिवार और परिचितों का शक सबसे पहले उसी पर गया। हालांकि पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है।

    बताया जा रहा है कि आरोपी करीब शाम 5 बजकर 40 मिनट के आसपास मुस्कान के घर में दाखिल हुआ था। पुलिस अब आसपास लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाल रही है ताकि आरोपी के आने और वारदात के बाद भागने की दिशा का पता लगाया जा सके। साथ ही पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आरोपी और मुस्कान के बीच किस तरह का संबंध था और आखिर किस वजह से उसने इतना बड़ा कदम उठाया।

    इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल आरोपी फरार बताया जा रहा है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। पुलिस की जांच में CCTV फुटेज के साथ परिवार और दोस्तों के बयान भी अहम कड़ी साबित हो सकते हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पुलिस आरोपी को कब तक गिरफ्तार करती है और पूछताछ में हत्या की असली वजह क्या सामने आती है।

  • सरकार की सख्ती का असर…..4 दिन में 8 रुपये सस्ती हुई शक्कर, ₹51 प्रति किलो पर आए दाम

    सरकार की सख्ती का असर…..4 दिन में 8 रुपये सस्ती हुई शक्कर, ₹51 प्रति किलो पर आए दाम


    नई दिल्ली।
    चीनी (Sugar) की बढ़ती कीमतों (Rising Prices) को काबू में करने के लिए सरकार (Government) की ओर से उठाए गए कई कदमों का असर अब बाजार में दिखाई देने लगा है। देश के कई हिस्सों में चीनी के भाव नरम हुए हैं। दक्षिण महाराष्ट्र (Southern Maharashtra) में जहां चीनी का भाव करीब 62 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था, वहीं अब महाराष्ट्र में मिल स्तर पर यह करीब 51-52 रुपये प्रति किलो में कारोबार कर रही है। कोलकाता में थोक भाव करीब 53 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है। कोलकाता पूर्वोत्तर राज्यों के लिए चीनी का प्रमुख आपूर्ति केंद्र है।

    ChiniMandi के सूत्रों के मुताबिक, थोक और मिल स्तर पर आई इस नरमी का असर अगले 3-5 दिनों में खुदरा बाजार में भी दिखाई दे सकता है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।


    रिटेल मार्केट में 8 रुपये तक सस्ती हुई चीनी

    ChiniMandi के ताजा रेट्स के मुताबिक दिल्ली में बुधवार को चीनी 62 रुपये किलो बिकी। इसका हाई 68 रुपये था। वहीं, कानपुर में चीनी की कीमत अब 69 की जगह 62 रुपये पर आ गई है। मुंबई में चीनी का भाव अब 68 रुपये से घटकर 61 रुपये, गुवाहटी में 71 से घटकर 63, हैदराबाद में 70 से घटकर 62 और चेन्नई में 70 रुपये से घटकर 65 रुपये किलो रह गई।


    चीनी के थोक भाव में बड़ी गिरावट

    अगर होलसेल प्राइस की बात करें तो मुंबई में चीनी अपने हाई से 950 रुपये प्रति क्विंटल सस्ती हो चुकी है। मुंबई में चीनी 5800 रुपये पर आ गई है जबकि, 22 अगस्त को 6750 रुपये के ऑल टाइम हाई पर थी। दिल्ली में चीनी 6000 रुपये प्रति क्विंटल पर ही टिकी है। यह 6600 रुपये पर पहुंच गई थी। चार दिन में कानपुर में भी चीनी के दाम में भी 600 रुपये की बड़ी गिरावट है। यहां एक क्विंटल चीनी 6050 रुपये पर आ गई है।


    सरकार ने क्या-क्या उठाए हैं कदम

    स्टॉक लिमिट: कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़े उपभोक्ताओं और डीलरों के लिए स्टॉक रखने की सीमा तय की। इससे इनके पास जमा अतिरिक्त चीनी बाजार में आने लगी और उपलब्धता बढ़ी। सप्लाई सुधरने के साथ ही कीमतों पर दबाव कम हुआ है।

    जमाखोरी पर छापेमारी: सरकार ने चीनी की जमाखोरी और स्टॉक छिपाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी तेज कर दी है। देशभर में अब तक 1,000 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी या निरीक्षण किए जाने की बात सामने आई है। इसके साथ ही चीनी मिलों को निर्देश दिया गया है कि अगस्त का निर्धारित कोटा जिन मिलों ने अभी तक बाजार में नहीं उतारा है, उसे जल्द से जल्द बेचें। इससे आने वाले दिनों में बाजार में चीनी की उपलब्धता और बढ़ सकती है।

    ड्यूटी-फ्री आयात: सरकार ने 21 अगस्त को 10 लाख मीट्रिक टन चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी थी। सूत्रों के मुताबिक, निर्यातक देशों से करीब 70-80 हजार टन चीनी वाली 3-4 खेपें पहले ही रवाना हो चुकी हैं। इनके सितंबर के मध्य से अंत तक भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है।

    त्योहारों से पहले सरकार की नजर कीमतों पर
    अगस्त के बचे हुए कोटे की चीनी बाजार में आने, आयातित चीनी की खेपों के पहुंचने और बंदरगाहों पर रिफाइन होने वाली चीनी की उपलब्धता बढ़ने से प्रमुख खपत वाले इलाकों में सप्लाई बेहतर होने की उम्मीद है।

    खासकर त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार की कोशिश बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने की है। अगर ये सभी कदम उम्मीद के मुताबिक काम करते हैं, तो आने वाले हफ्तों में चीनी के भाव में और नरमी देखने को मिल सकती है।

  • देश में बनेगा संक्रामक रोगों की जांच का मजबूत नेटवर्क, अगले 5 साल में 732.304 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार

    देश में बनेगा संक्रामक रोगों की जांच का मजबूत नेटवर्क, अगले 5 साल में 732.304 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार


    नई दिल्ली।
    देश में नई और तेजी से फैलने वाली संक्रामक बीमारियों (Infectious Disease) की पहचान अब दूरदराज के इलाकों में भी पहले से जल्दी हो सकेगी। सरकार (Government) ने अगले पांच साल में 732.304 करोड़ रुपये से देश के हर हिस्से में वायरल बीमारियों (Viral Diseases) की जांच के लिए नेटवर्क बनाने का फैसला लिया है। केंद्र सरकार उन इलाकों में नई प्रयोगशालाएं (New Laboratories) स्थापित करने पर जोर दे रही है, जहां अभी संक्रामक बीमारियों की उन्नत जांच की पर्याप्त सुविधा नहीं है।

    अब तक इस नेटवर्क में मेडिकल कॉलेजों और शोध संस्थानों की बड़ी भूमिका रही है। अब सरकार व्यवस्था को जिला स्तर तक ले जाने की संभावना पर काम कर रही है। हालांकि, भी संख्या तय नहीं हुई है। स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में 167 वायरस अनुसंधान एवं निदान प्रयोगशालाएं काम कर रही हैं।

    सीमावर्ती इलाकों पर नजर
    सरकार दूरदराज और कम सुविधा वाले क्षेत्रों को लेकर खासतौर पर चिंतित है। पूर्वोत्तर राज्यों, लद्दाख और लक्षद्वीप जैसे इलाकों में अब भी जांच सुविधा के विस्तार की जरूरत बताई गई है। इन क्षेत्रों में संस्थानों की उपलब्धता कम होने पर मौजूदा नियमों में विशेष प्रावधान करने की सिफारिश की गई है। स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अनुसार, इन क्षेत्रों में प्रयोगशालाओं के लिए प्रस्ताव मिल रहे हैं। लेह, दादरा एवं नगर हवेली और नागालैंड के प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन हैं।

  • बैंकिंग सेवाओं बनेंगी सुरक्षित… डिजिटल फ्रॉड रोकने के लिए बैंकों में लागू होगा AI मॉडल

    बैंकिंग सेवाओं बनेंगी सुरक्षित… डिजिटल फ्रॉड रोकने के लिए बैंकों में लागू होगा AI मॉडल


    नई दिल्ली।
    बैंकिंग सेवाओं (Banking services) को सुरक्षित (Safe) बनाने और डिजिटल फ्रॉड (Digital fraud) रोकने के लिए बैंकों में एआई मॉडल (AI Model) जल्द लागू होगा। धोखाधड़ी को समय रहते पहचानने के लिए डिजिटल पेमेंट्स इंटलीजेंस प्लेटफार्म सिस्टम (Digital Payments Intelligence Platform System) बड़े पैमाने पर लागू होगा।

    सरकार सामाजिक कल्याण योजनाओं से लेकर एमएसएमई ऋण बाजार तक डिजिटल धोखाधड़ी की रोकथाम की कोशिश कर रही है। इससे वित्तीय क्षेत्र में एआई और मशीन लर्निंग के जरिये जवाबदेही, पारदर्शिता और साइबर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

    आरबीआई एआई और मशीन लर्निंग से जुड़े सभी सुरक्षा मॉडलों को इसमें शामिल करने की तैयारी में है। थर्ड पार्टी एआई से उत्पन्न जोखिम को भी ध्यान में रखा जाएगा। ग्राहकों के सीधे संपर्क में आने वाली एआई प्रणालियों के लिए अतिरिक्त साइबर सुरक्षा उपाय लागू होंगे।

  • ‘ब्रालेट तो छोटी-सी बात थी…’ कृति सेनन के राखी विज्ञापन पर बोलीं कंगना, राहुल गांधी पर भी साधा निशाना

    ‘ब्रालेट तो छोटी-सी बात थी…’ कृति सेनन के राखी विज्ञापन पर बोलीं कंगना, राहुल गांधी पर भी साधा निशाना


    नई दिल्ली। भाजपा सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने रक्षाबंधन को लेकर कृति सेनन के विवादित ज्वैलरी विज्ञापन पर एक बार फिर प्रतिक्रिया दी है। कंगना ने कहा कि उनकी आपत्ति केवल कृति के कपड़ों को लेकर नहीं थी, बल्कि विज्ञापन में रक्षाबंधन जैसे त्योहार को जिस तरह पेश किया गया, उससे थी। विवाद बढ़ने के बाद संबंधित ज्वैलरी ब्रांड ने विज्ञापन वापस ले लिया था।

    ‘किसने रोका है कुछ भी पहनने से?’
    कृति सेनन के आउटफिट पर सवाल उठाए जाने को लेकर कंगना ने कहा कि किसी को भी अपनी पसंद के कपड़े पहनने से रोकने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि मुद्दा यह नहीं है कि कृति ने क्या पहना था, बल्कि यह है कि रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक त्योहार को विज्ञापन में किस रूप में दिखाया गया।

    कंगना से जब पूछा गया कि क्या कृति ईद के मौके पर भी इसी तरह के कपड़ों में पोस्ट कर सकती हैं, तो उन्होंने इस पर भी टिप्पणी की और हिंदू पारिवारिक रिश्तों में मर्यादा और सीमाओं का जिक्र किया।

    राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
    ‘डिकोड’ को दिए इंटरव्यू में कंगना ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा कृति सेनन के समर्थन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की पोस्ट में रक्षाबंधन का जिक्र नहीं था।

    कंगना ने कहा कि एक महिला रक्षाबंधन पर अपनी पसंद के कपड़े पहन सकती है, लेकिन रक्षाबंधन केवल कपड़ों या फैशन का मामला नहीं, बल्कि एक सभ्यता और धार्मिक परंपरा की अभिव्यक्ति है।

    उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह अपने नजरिए को लेकर भ्रमित हैं। कंगना ने सनातन धर्म को लेकर राहुल गांधी की सोच पर भी सवाल उठाए और कहा कि उनका नजरिया सनातन धर्म के प्रति अलग तरह का है।

    ‘ब्रालेट तो छोटी-सी चीज थी’
    कंगना ने साफ किया कि उनके मुताबिक विज्ञापन में ब्रालेट सबसे बड़ा मुद्दा नहीं था। उन्होंने कहा कि असली सवाल यह था कि विज्ञापन में रक्षाबंधन से जुड़े पारंपरिक तत्व लगभग नजर नहीं आए।

    उन्होंने माता-पिता, घर, हलवा-पूरी, भगवान, टीका, अक्षत, धूप और दीप जैसे पारंपरिक प्रतीकों का जिक्र करते हुए कहा कि रक्षाबंधन को केवल आधुनिक एस्थेटिक्स के जरिए पेश नहीं किया जा सकता।

    कंगना के मुताबिक, “एक त्योहार किसी संस्कृति और सभ्यता का एस्थेटिक एक्सप्रेशन होता है।” उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन में टीका और राखी जैसे पारंपरिक प्रतीकों का अपना महत्व है। अब कंगना की इन टिप्पणियों पर कृति सेनन और राहुल गांधी की ओर से किसी प्रतिक्रिया का इंतजार है।