Category: National

  • ऑपरेशन सिंदूर पर सियासी संग्राम तेज, कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस्तीफे की उठाई मांग; सरकार के बयान पर छिड़ी नई बहस

    ऑपरेशन सिंदूर पर सियासी संग्राम तेज, कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस्तीफे की उठाई मांग; सरकार के बयान पर छिड़ी नई बहस

    नई दिल्ली । ऑपरेशन सिंदूर को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए बयान पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने सैन्य अभियान के दौरान शहीद हुए जवानों की जानकारी समय पर सार्वजनिक नहीं की और संसद में तथ्यों को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया। वहीं केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि रक्षा मंत्री के बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया जा रहा है और शहीदों को पूरा सम्मान पहले ही दिया जा चुका था।

    विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब राष्ट्रीय समर स्मारक पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह सैन्यकर्मियों के नाम दर्ज किए गए। इसके बाद कांग्रेस ने दावा किया कि जुलाई 2025 में संसद के भीतर रक्षा मंत्री ने कहा था कि इस अभियान में कोई भारतीय सैनिक शहीद नहीं हुआ था। विपक्ष का आरोप है कि अब सामने आए तथ्यों से उस बयान पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं और सरकार को इस विषय पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

    कांग्रेस के पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ से जुड़े नेताओं ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि यदि सैन्य अभियान के दौरान जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था, तो इसकी जानकारी संसद और देश के सामने समय पर रखी जानी चाहिए थी। पार्टी ने रक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग करने के साथ उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की भी बात कही है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री और सरकार से शहीदों के परिवारों के प्रति सार्वजनिक रूप से संवेदना और स्पष्टीकरण देने की मांग भी दोहराई है।

    दूसरी ओर केंद्र सरकार ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया है। सरकार का कहना है कि संसद में दिया गया बयान विशेष संदर्भ में था और उसका संबंध उन दावों से था जिनमें भारतीय लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही थी। सरकार के अनुसार रक्षा मंत्री का आशय यह था कि अभियान के दौरान किसी भी पायलट की जान नहीं गई और किसी विमान को दुश्मन के कब्जे में नहीं जाने दिया गया। इसलिए बयान की गलत व्याख्या कर राजनीतिक विवाद खड़ा किया जा रहा है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सैन्य अभियानों से जुड़ी कई जानकारियां राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक कारणों से तत्काल सार्वजनिक नहीं की जातीं। उसके अनुसार ऑपरेशन से संबंधित संवेदनशील सूचनाओं का समय से पहले खुलासा करना सुरक्षा हितों के विपरीत हो सकता है। सरकार का कहना है कि शहीद सैनिकों का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया और संबंधित परिवारों को सभी औपचारिक सम्मान प्रदान किए गए थे।

    इस पूरे विवाद ने राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य गोपनीयता और लोकतांत्रिक जवाबदेही के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष का कहना है कि सैन्य रणनीति और परिचालन संबंधी गोपनीयता अलग विषय है, लेकिन शहीदों की जानकारी और संसद को दी जाने वाली सूचना में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। वहीं सरकार का तर्क है कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में सूचनाओं का सार्वजनिक समय और स्वरूप परिस्थितियों के अनुसार तय किया जाता है।

    फिलहाल भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस की इस्तीफे की मांग पर कोई विस्तृत राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वह आगामी संसदीय सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद केवल रक्षा मंत्री के बयान तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य अभियानों की सूचना नीति और संसद के प्रति सरकार की जवाबदेही जैसे व्यापक मुद्दों पर राजनीतिक और संसदीय बहस का केंद्र बन सकता है।

  • राम मंदिर दान विवाद पर कांग्रेस का केंद्र और यूपी सरकार पर तीखा प्रहार, SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने समेत कई सवालों पर मांगा जवाब

    राम मंदिर दान विवाद पर कांग्रेस का केंद्र और यूपी सरकार पर तीखा प्रहार, SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने समेत कई सवालों पर मांगा जवाब

    नई दिल्ली । राम मंदिर में कथित दान चोरी के मामले को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरते हुए मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है। पार्टी का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस प्रकरण में अब तक कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं। कांग्रेस ने विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट सार्वजनिक करने के साथ पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराने की मांग दोहराई है।

    कांग्रेस का कहना है कि यदि इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया था, तो उसकी रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। पार्टी के अनुसार, जब मामला देशभर के श्रद्धालुओं के विश्वास और दान से जुड़ा है, तब जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में किसी प्रकार की गोपनीयता नहीं बरती जानी चाहिए। कांग्रेस का दावा है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जांच के निष्कर्ष देश के सामने लाए जाने आवश्यक हैं।

    पार्टी ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय के दौरान राम मंदिर परिसर में चोरी की कई घटनाएं सामने आई हैं। कांग्रेस का कहना है कि यदि हाल के दिनों में बड़ी संख्या में चोरी के मामले सामने आए हैं, तो यह जानना भी जरूरी है कि पिछले वर्षों में कुल कितनी घटनाएं हुईं, कितना सामान गायब हुआ और दान में प्राप्त संपत्तियों की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई थी। पार्टी ने मांग की कि पूरे रिकॉर्ड का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए ताकि किसी भी तरह की आशंका समाप्त हो सके।

    जांच प्रक्रिया को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि कार्रवाई केवल सीमित स्तर तक की गई है, जबकि यदि किसी बड़े स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि जांच का दायरा व्यापक होना चाहिए और किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को केवल पद या प्रभाव के आधार पर जांच से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। पार्टी का कहना है कि जब मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए विभिन्न एजेंसियां और सुरक्षा कर्मी तैनात हैं, तब लगातार चोरी की घटनाओं के आरोप गंभीर चिंता का विषय हैं। कांग्रेस ने निजी सुरक्षा व्यवस्था की भूमिका और उसकी जवाबदेही तय करने की भी मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था में कहीं चूक हुई है तो उसकी स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

    कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि दान में प्राप्त आभूषणों, नकदी और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। पार्टी का कहना है कि श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित प्रत्येक वस्तु का व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए ताकि किसी प्रकार का संदेह उत्पन्न न हो। इसके साथ ही पूरे चढ़ावे का स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट कराने की मांग भी दोहराई गई है।

    पार्टी ने राज्य सरकार से SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आवश्यक होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। कांग्रेस का यह भी कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था या प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही हुई है तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार अब तक इस पूरे विवाद पर स्पष्ट स्थिति रखने से बच रही है।

    राम मंदिर को करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र बताते हुए कांग्रेस ने कहा कि इस तरह के किसी भी विवाद का समाधान केवल पारदर्शी जांच, जवाबदेही और तथ्यों को सार्वजनिक करने से ही संभव है। पार्टी का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होने और सभी संबंधित तथ्यों के सामने आने से ही श्रद्धालुओं का विश्वास और संस्थागत पारदर्शिता मजबूत हो सकेगी।

  • SIR विवाद पर विपक्ष की न्यायपालिका से दखल की मांग, 23 राजनीतिक दल और एक निर्दलीय सांसद एकजुट, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर जताई गहरी चिंता


    नई दिल्ली । देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन- SIR) अभियान को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी गठबंधन ‘INDIA जनबंधन’ से जुड़े 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को संयुक्त पत्र भेजकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची के सत्यापन की वर्तमान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और संवैधानिक मानकों के अनुरूप बनाए जाने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी पात्र मतदाता के अधिकार प्रभावित न हों।

    विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है और इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि या विवाद चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर सकता है। इसी कारण सभी दलों ने एकजुट होकर सर्वोच्च न्यायपालिका का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि इस विषय पर न्यायिक स्तर पर आवश्यक मार्गदर्शन और निगरानी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

    इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने पहले भी आपसी स्तर पर कई दौर की चर्चा की थी। हाल ही में आयोजित बैठक में विभिन्न दलों ने चुनाव आयोग द्वारा संचालित SIR प्रक्रिया और उससे जुड़े अन्य चुनावी विषयों पर साझा रणनीति तैयार की। बैठक में यह सहमति बनी कि इन चिंताओं को औपचारिक रूप से देश के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाए। बाद में इस पहल को व्यापक समर्थन मिला और संयुक्त पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले दलों की संख्या बढ़कर 23 हो गई।

    संयुक्त पत्र को कई प्रमुख विपक्षी नेताओं और राजनीतिक दलों का समर्थन मिला है। इसमें विभिन्न राज्यों के क्षेत्रीय दलों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के दल भी शामिल हैं। एक निर्दलीय सांसद ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का कहना है कि यह कदम किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    विवाद का केंद्र चुनाव आयोग द्वारा संचालित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन अभियान है। इस प्रक्रिया के तहत घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जा रहा है। साथ ही परिवार आधारित विवरण का मिलान, रिकॉर्ड का अद्यतन तथा फर्जी या डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाने की कार्रवाई भी की जा रही है। चुनाव आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना बताया जा रहा है, ताकि भविष्य में चुनाव प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय हो सके।

    हालांकि विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान कई स्थानों पर वैध मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। उनका कहना है कि यदि सत्यापन अभियान पूरी पारदर्शिता और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ नहीं चलाया गया तो बड़ी संख्या में पात्र नागरिक अपने मतदान अधिकार से वंचित हो सकते हैं। विपक्ष ने यह भी कहा है कि ऐसे मामलों की स्वतंत्र समीक्षा और प्रभावी निगरानी आवश्यक है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बहस का विषय बन सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजे गए इस संयुक्त पत्र पर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है और चुनाव आयोग इस संबंध में उठाई गई चिंताओं पर किस प्रकार अपनी प्रतिक्रिया देता है। आने वाले समय में यह मुद्दा चुनावी सुधार और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़ी चर्चा का प्रमुख केंद्र बना रह सकता है।

  • देश की सेवा जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य' कहकर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सौंपी जिम्मेदारी, संयुक्त सैन्य शक्ति पर दिया भविष्य का विजन

    देश की सेवा जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य' कहकर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सौंपी जिम्मेदारी, संयुक्त सैन्य शक्ति पर दिया भविष्य का विजन

    नई दिल्ली । भारतीय सेना में नेतृत्व परिवर्तन के महत्वपूर्ण चरण के तहत मंगलवार को जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सेना प्रमुख का पदभार जनरल धीरज सेठ को सौंप दिया। चार दशक से अधिक समय तक भारतीय सेना की सेवा करने वाले जनरल द्विवेदी ने अपने विदाई संबोधन में सैन्य जीवन को अपने जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बताया और कहा कि देश की रक्षा के लिए समर्पित प्रत्येक सैनिक का योगदान भारतीय सेना की सबसे बड़ी शक्ति है। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

    अपने विदाई संबोधन में जनरल द्विवेदी ने कहा कि सैनिक विद्यालय से लेकर भारतीय सेना के सर्वोच्च पद तक का उनका सफर अविस्मरणीय रहा। उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख के रूप में अपना कार्यकाल समाप्त करते हुए उनके मन में विनम्रता, कृतज्ञता, गर्व और संतोष की भावना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना की असली ताकत किसी एक व्यक्ति में नहीं, बल्कि उन लाखों सैनिकों, अधिकारियों, पूर्व सैनिकों, उनके परिवारों और देशवासियों के विश्वास में निहित है, जिन्होंने हमेशा सेना का मनोबल बढ़ाया है।

    उन्होंने उन सभी सैनिकों को विशेष श्रद्धांजलि दी जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना की परंपराएं, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा ही उसकी सबसे बड़ी पहचान हैं और यही मूल्य भविष्य में भी सेना का मार्गदर्शन करते रहेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि नया नेतृत्व भी इन्हीं आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए सेना को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

    अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि पिछले दो वर्षों में भारतीय सेना ने हर मोर्चे पर उच्च स्तर की तैयारी, सतर्कता और संतुलन बनाए रखा। उन्होंने उत्तरी सीमाओं पर संचालित ऑपरेशन स्नो लेपर्ड का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद सेना ने पूरी मजबूती और सजगता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। इसी प्रकार पश्चिमी मोर्चे पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी सेना ने अनुशासन, संयम और रणनीतिक दक्षता का प्रभावी प्रदर्शन किया।

    उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रत्येक निर्णय और कार्रवाई में भारतीय सेना ने स्पष्ट उद्देश्य, जिम्मेदारी और पेशेवर दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी। इसी सोच ने बदलते सुरक्षा परिदृश्य में देश के लिए एक नए सुरक्षा मानक को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुसार आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और भविष्य में संयुक्त सैन्य अभियानों का महत्व लगातार बढ़ेगा।

    जनरल द्विवेदी ने तीनों सेनाओं के बीच बढ़ते समन्वय को भी अपने कार्यकाल की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना ने साझा रणनीति, आपसी विश्वास और बेहतर समन्वय के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया है। उनका मानना है कि भविष्य के युद्ध अधिक एकीकृत, तकनीक आधारित और संयुक्त अभियान पर केंद्रित होंगे। इसलिए तीनों सेनाओं को एक साथ स्थिति का आकलन करने, संयुक्त रूप से निर्णय लेने और समन्वित कार्रवाई करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

    नई जिम्मेदारी संभालने वाले जनरल धीरज सेठ के नेतृत्व में भारतीय सेना अब बदलती सुरक्षा चुनौतियों और आधुनिक सैन्य आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी रणनीतियों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। नेतृत्व परिवर्तन के इस अवसर पर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय सेना अपनी गौरवशाली परंपराओं, पेशेवर उत्कृष्टता और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण के साथ भविष्य में भी देश की सुरक्षा सुनिश्चित करती रहेगी।

  • शामली धर्मांतरण विवाद में नया मोड़, आयुष मलिक ने दोबारा अपनाया हिंदू धर्म; परिवार से मांगी माफी, बोले- अपनी इच्छा से लौटा हूं

    शामली धर्मांतरण विवाद में नया मोड़, आयुष मलिक ने दोबारा अपनाया हिंदू धर्म; परिवार से मांगी माफी, बोले- अपनी इच्छा से लौटा हूं

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के शामली जिले में धर्मांतरण से जुड़ा चर्चित मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। कुछ समय पहले इस्लाम धर्म स्वीकार करने वाले आयुष मलिक ने अब दोबारा हिंदू धर्म अपनाने की घोषणा की है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में वह धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से हिंदू धर्म में वापसी करने का निर्णय लिया है और अब वह अपने परिवार के साथ रहकर उनकी देखभाल तथा सुरक्षा को प्राथमिकता देना चाहते हैं। इस घटनाक्रम के बाद यह मामला फिर चर्चा का विषय बन गया है।

    आयुष मलिक ने वीडियो संदेश में कहा कि उन्होंने पहले इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था, लेकिन परिवार की भावनाओं और परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने स्वेच्छा से सनातन धर्म में लौटने का फैसला किया है। उन्होंने अपने माता-पिता से क्षमा भी मांगी और भविष्य में परिवार के साथ रहने की बात दोहराई। वीडियो में धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उनकी घर वापसी की प्रक्रिया भी दिखाई गई है।

    आयुष के पिता देवराज मलिक ने भी पुष्टि की कि उनके बेटे ने औपचारिक रूप से दोबारा हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया है। उनका कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह स्वेच्छा से लिया गया है और परिवार ने इसका स्वागत किया है। उन्होंने पहले भी आरोप लगाया था कि उनके बेटे का योजनाबद्ध तरीके से ब्रेनवॉश किया गया और उसे धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया गया। परिवार का यह भी दावा रहा है कि पूरे मामले के पीछे आर्थिक हित और पारिवारिक संपत्ति से जुड़े उद्देश्य थे।

    धर्मांतरण विवाद को लेकर पहले दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। इसी मामले में फिजियोथेरेपिस्ट चांदनी कुरैशी और उनके पिता इस्लाम कुरैशी के खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी। पुलिस ने आरोपों की जांच के बाद दोनों को गिरफ्तार किया था और मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की थी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि धर्म परिवर्तन किन परिस्थितियों में हुआ और उसमें किसी प्रकार का दबाव, प्रलोभन या अन्य अवैध तत्व शामिल थे या नहीं।

    जांच से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार आयुष मलिक की मुलाकात वर्ष 2018 में पैर की चोट के इलाज के दौरान एक स्थानीय अस्पताल में चांदनी से हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और संबंध विकसित हुए। परिवार का आरोप है कि इसी दौरान आयुष पर धीरे-धीरे धर्म परिवर्तन का प्रभाव डाला गया। दूसरी ओर, मामले की कानूनी प्रक्रिया के तहत सभी आरोपों की जांच जारी है और संबंधित पक्षों के बयान भी दर्ज किए गए हैं।

    धर्मांतरण और पुनर्धर्म ग्रहण से जुड़ा यह मामला सामाजिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर आयुष ने सार्वजनिक रूप से अपनी इच्छा से हिंदू धर्म में लौटने की बात कही है, वहीं दूसरी ओर पहले दर्ज किए गए धर्मांतरण प्रकरण की जांच और उससे संबंधित न्यायिक प्रक्रिया भी जारी है। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा। फिलहाल आयुष की घर वापसी के बाद यह प्रकरण एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गया है।

  • गिरफ्तारी दस्तावेजों में गंभीर त्रुटि का मामला, हाईकोर्ट ने सोनम रघुवंशी को मिली जमानत रद्द करने से किया इनकार

    गिरफ्तारी दस्तावेजों में गंभीर त्रुटि का मामला, हाईकोर्ट ने सोनम रघुवंशी को मिली जमानत रद्द करने से किया इनकार

    शिलांग: मेघालय हाईकोर्ट ने हनीमून के दौरान अपने पति की कथित हत्या के मामले में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को निचली अदालत से मिली जमानत बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में गंभीर प्रक्रियागत कमियां थीं, जिनके आधार पर जमानत रद्द करने का पर्याप्त आधार नहीं बनता।

    एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि गिरफ्तारी के आधार तैयार करने की प्रक्रिया में आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई। अदालत के अनुसार, दस्तावेजों में यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया कि आरोपी के खिलाफ वास्तविक आरोप क्या हैं और किन तथ्यों के आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया। न्यायालय ने इसे न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर कमी माना।

    सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि गिरफ्तारी मेमो, औचित्य चेकलिस्ट, निरीक्षण मेमो और केस डायरी के कुछ हिस्सों सहित कई दस्तावेजों में हत्या से संबंधित भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के स्थान पर गलती से धारा 403(1) का उल्लेख किया गया था। अदालत ने कहा कि एक ही प्रकार की त्रुटि सभी दस्तावेजों में दोहराई गई है, इसलिए इसे केवल टाइपिंग या लिपिकीय गलती नहीं माना जा सकता।

    अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि किसी भी दस्तावेज में स्पष्ट रूप से यह दर्ज नहीं था कि आरोपी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया जा रहा है। साथ ही गिरफ्तारी के समय कथित अपराध से जुड़े विशिष्ट तथ्यों की जानकारी भी आरोपी को उचित तरीके से नहीं दी गई। न्यायालय ने माना कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया कानून के निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थी।

    राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में दलील दी कि दस्तावेजों में हुई गलती केवल टाइपिंग संबंधी त्रुटि थी, जिससे आरोपी को किसी प्रकार का वास्तविक नुकसान नहीं हुआ। सरकार का कहना था कि रिमांड आदेश, चार्जशीट और बाद की न्यायिक कार्यवाही में हत्या के आरोप का स्पष्ट उल्लेख मौजूद है, इसलिए केवल इस तकनीकी त्रुटि के आधार पर जमानत देना उचित नहीं माना जाना चाहिए।

    सरकार ने अपने पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी प्रक्रियागत कमियां, जिनसे आरोपी के अधिकारों पर वास्तविक असर न पड़े, बाद में सुधारी जा सकती हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने इन दलीलों से सहमति नहीं जताई और कहा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में आवश्यक कानूनी मानकों का पालन किया जाना अनिवार्य है।

    सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने राज्य सरकार की जमानत रद्द करने संबंधी याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही सोनम रघुवंशी को निचली अदालत से मिली जमानत फिलहाल बरकरार रहेगी और वह आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक जमानत पर बाहर रहेगी।

  • देवेंद्र फडणवीस को PM पद पर समर्थन देने का ऐलान उद्धव ठाकरे के बयान से सियासी पारा चढ़ा

    देवेंद्र फडणवीस को PM पद पर समर्थन देने का ऐलान उद्धव ठाकरे के बयान से सियासी पारा चढ़ा


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय नई हलचल पैदा हो गई जब शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर बड़ा बयान दिया। ठाकरे ने कहा कि यदि फडणवीस भविष्य में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी करते हैं तो उनकी पार्टी उनका समर्थन करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह फडणवीस के विरोधी नहीं बल्कि हितैषी हैं और महाराष्ट्र से यदि कोई नेता देश का प्रधानमंत्री बनता है तो उसका समर्थन किया जाना चाहिए।

    शिरडी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि कुछ राजनीतिक ताकतें ऐसी रणनीति बना रही हैं जिससे देवेंद्र फडणवीस 2029 में प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल न हो सकें। उन्होंने कहा कि अगर महाराष्ट्र का कोई नेता प्रधानमंत्री बनने की स्थिति में पहुंचता है तो उनकी पार्टी उसके साथ खड़ी होगी।

    हालांकि समर्थन की बात कहने के साथ ठाकरे ने भाजपा की आंतरिक राजनीति पर भी तंज कसा। उनका कहना था कि यदि फडणवीस सार्वजनिक रूप से प्रधानमंत्री पद की महत्वाकांक्षा जाहिर करते हैं तो यह उनके लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदायक साबित हो सकता है। ठाकरे ने सवाल उठाया कि ऐसी घोषणा के बाद क्या वह अपनी ही पार्टी में उसी स्थिति में बने रह पाएंगे।

    शिरडी में आयोजित रैली के दौरान ठाकरे ने हाल में दल बदलकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए सांसदों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के छह सांसदों के पाला बदलने के पीछे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका रही। ठाकरे ने यह भी कहा कि साईं बाबा के दर्शन के दौरान उन्होंने देवेंद्र फडणवीस की कुर्सी सुरक्षित रहने की प्रार्थना की।

    इससे पहले भी उद्धव ठाकरे ने ऑपरेशन टाइगर को लेकर बयान देते हुए दावा किया था कि इसका वास्तविक उद्देश्य ऑपरेशन देवेंद्र था। उनके अनुसार यह कथित रणनीति फडणवीस के राजनीतिक कद को सीमित रखने और उन्हें भविष्य में प्रधानमंत्री पद की दौड़ से दूर रखने के लिए बनाई गई थी।

    उधर देवेंद्र फडणवीस ने इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें महाराष्ट्र के 14 करोड़ लोगों और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व का आशीर्वाद प्राप्त है इसलिए कोई भी उनके राजनीतिक पंख नहीं काट सकता। उन्होंने हाल में उद्धव ठाकरे के साथ एक ही विमान में यात्रा करने को लेकर उठी अटकलों को भी महज संयोग बताया।

    महाराष्ट्र में हाल के दिनों में लगातार राजनीतिक उठापटक देखने को मिल रही है। शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में संभावित टूट तथा दल बदल की चर्चाओं के बीच उद्धव ठाकरे का यह बयान राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाओं को और तेज कर गया है।

  • क्या चीन बढ़ा रहा है सीमा पर कब्जा स्थानीय आरोपों के बाद जांच के आदेश सेना ने दावों को किया खारिज

    क्या चीन बढ़ा रहा है सीमा पर कब्जा स्थानीय आरोपों के बाद जांच के आदेश सेना ने दावों को किया खारिज


    नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की कथित घुसपैठ और पैतृक जमीन पर कब्जे के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय एक स्थानीय संगठन की शिकायत के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की जांच कराने का फैसला किया है। हालांकि भारतीय सेना ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें गलत और निराधार बताया है।

    ताकसिंग इलाके की नाह वेलफेयर सोसाइटी ने जिला प्रशासन को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि चीन पिछले कई वर्षों से भारतीय सीमा के भीतर अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है। संगठन के अनुसार स्थानीय लोगों की पैतृक जमीन पर कथित रूप से सैन्य शिविर बनाए गए हैं और वहां सड़क तथा पुल जैसी आधारभूत संरचनाएं भी तैयार की गई हैं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन इलाकों में पहले वे शिकार करने जाते थे और जहां उनके मवेशी चरते थे अब वे क्षेत्र चीन के नियंत्रण में बताए जा रहे हैं। संगठन का दावा है कि पिछले 10 से 15 वर्षों के दौरान सीमा पर चीन की गतिविधियों में तेजी आई है और स्थानीय समुदाय धीरे धीरे अपनी पारंपरिक जमीन खो रहा है। संगठन ने इसे गंभीर सुरक्षा और आजीविका का मुद्दा बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

    इन आरोपों के बाद अरुणाचल प्रदेश के गृह मंत्री मामा नटुंग ने कहा कि सरकार मामले को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि पहले जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। यह रिपोर्ट स्थानीय प्रशासन जनप्रतिनिधियों पंचायतों और क्षेत्र के लोगों से मिली जानकारी के आधार पर तैयार की जाएगी। यदि जांच में अतिक्रमण के दावे सही पाए जाते हैं तो सरकार विशेष जांच समिति गठित कर आगे की कार्रवाई करेगी।

    दूसरी ओर भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश में हालिया चीनी घुसपैठ और सैन्य शिविर स्थापित किए जाने संबंधी मीडिया रिपोर्ट तथ्यहीन हैं। सेना ने कहा कि ऐसे दावों का कोई प्रमाण नहीं है और इन्हें गलत तथा आधारहीन माना जाना चाहिए।

    गौरतलब है कि पिछले महीने भारत और चीन के बीच बीजिंग में सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय तंत्र की 35वीं बैठक हुई थी। दोनों देशों ने सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा करते हुए शांति और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में हुई प्रगति पर संतोष जताया था। ऐसे समय में अरुणाचल से सामने आए इन दावों ने सीमा सुरक्षा को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। फिलहाल राज्य सरकार जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है जबकि भारतीय सेना का कहना है कि घुसपैठ के दावों की पुष्टि नहीं होती।

  • नकली दवाओं पर सरकार का सबसे बड़ा वार अब फैक्ट्री से मरीज तक हर दवा की होगी लाइव ट्रैकिंग

    नकली दवाओं पर सरकार का सबसे बड़ा वार अब फैक्ट्री से मरीज तक हर दवा की होगी लाइव ट्रैकिंग


    नई दिल्ली। देश में नकली और घटिया दवाओं की समस्या लंबे समय से मरीजों और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। कई बार मरीज महंगी दवा खरीदने के बाद भी सही इलाज से वंचित रह जाते हैं क्योंकि बाजार में असली दवा की जगह नकली या मिलावटी दवा पहुंच जाती है। इसी खतरे को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने दवा निगरानी व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब कई महत्वपूर्ण दवाओं और टीकों पर क्यूआर कोड या बारकोड लगाना अनिवार्य होगा ताकि फैक्ट्री से लेकर मरीज तक हर दवा की पूरी यात्रा डिजिटल रूप से दर्ज हो सके।

    सरकार ने औषधि नियम 1945 में संशोधन करते हुए इस नई व्यवस्था का दायरा पहले से काफी बड़ा कर दिया है। पहले केवल देश के शीर्ष 300 दवा ब्रांड इस नियम के दायरे में आते थे लेकिन अब सभी वैक्सीन एंटीबायोटिक एंटीवायरल कैंसर रोधी दवाएं और एनडीपीएस कानून के तहत आने वाली मादक दवाओं को भी इस डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य दवा की पूरी सप्लाई चेन को पारदर्शी बनाना और मरीजों को सुरक्षित दवा उपलब्ध कराना है।

    नए नियम के तहत दवा बनाने वाली कंपनियों को हर दवा की पैकेजिंग पर क्यूआर कोड या बारकोड देना अनिवार्य होगा। यदि प्राथमिक पैक पर पर्याप्त जगह नहीं होगी तो यह कोड अंदर या बाहरी पैकेजिंग पर लगाया जा सकेगा। उपभोक्ता अपने मोबाइल से इस कोड को स्कैन करके दवा का ब्रांड नाम जेनेरिक नाम निर्माता का नाम बैच नंबर निर्माण तिथि एक्सपायरी डेट लाइसेंस नंबर और यूनिक पहचान संख्या जैसी महत्वपूर्ण जानकारी तुरंत देख सकेंगे। इससे ग्राहक खुद भी दवा की असलियत की जांच कर सकेंगे।

    पूरी व्यवस्था ट्रैक एंड ट्रेस तकनीक पर आधारित होगी। दवा बनने के बाद वह किस वितरक के पास गई किस थोक व्यापारी के जरिए मेडिकल स्टोर तक पहुंची और आखिर किस स्थान पर बेची गई इसकी पूरी जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज रहेगी। यदि सप्लाई चेन के किसी भी स्तर पर दवा से छेड़छाड़ होती है या नकली दवा बाजार में उतारने की कोशिश की जाती है तो सिस्टम तुरंत उसकी पहचान कर सकेगा। इससे जांच एजेंसियों को गड़बड़ी का स्रोत खोजने में काफी आसानी होगी।

    नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ नकली दवाओं के कारोबार पर सख्त रोक के रूप में सामने आएगा। कई मामलों में महंगी दवाओं की खाली शीशियों या डिब्बों में सस्ती दवा भरकर दोबारा बाजार में बेच दी जाती थी। अब प्रत्येक पैक का अलग यूनिक कोड होगा जिसे दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। यदि कोई पहले इस्तेमाल किए गए कोड को फिर से सक्रिय करने की कोशिश करेगा तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा और संदिग्ध दवा की पहचान हो जाएगी।

    यह प्रणाली दवा रिकॉल प्रक्रिया को भी तेज बनाएगी। यदि किसी बैच में गुणवत्ता संबंधी कमी या मिलावट सामने आती है तो अधिकारी तुरंत पता लगा सकेंगे कि वह बैच किन राज्यों किन अस्पतालों या किन मेडिकल स्टोर तक पहुंचा है। इससे खराब दवाओं को मरीजों तक पहुंचने से पहले ही वापस मंगाया जा सकेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम एंटीबायोटिक प्रतिरोध जैसी गंभीर समस्या से लड़ने में भी मदद करेगा क्योंकि नकली दवाओं के कारण कई बार मरीजों को पूरी और प्रभावी खुराक नहीं मिल पाती। वहीं नशीली दवाओं की डिजिटल निगरानी से इनके अवैध कारोबार और दुरुपयोग पर भी नियंत्रण मजबूत होगा। यदि सरकार उद्योग और सप्लाई चेन से जुड़े सभी पक्षों के सहयोग से इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने में सफल रहती है तो आने वाले समय में भारत की दवा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक सुरक्षित पारदर्शी और भरोसेमंद बन सकती है।

  • 100 साल में तीसरा सबसे सूखा रहा जून…. अल नीनो के असर से देश में बारिश में 42% की कमी

    100 साल में तीसरा सबसे सूखा रहा जून…. अल नीनो के असर से देश में बारिश में 42% की कमी


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में इस साल जून (June) का महीना पिछले 100 सालों में तीसरा सबसे सूखा जून (Third-driest June) साबित होने जा रहा है। महीने के खत्म होने में सिर्फ एक दिन बचा है और देशभर में बारिश में 42% की भारी कमी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा इस बात का सीधा संकेत है कि भारत में मॉनसून (Monsoon) को कमजोर करने में ‘अल नीनो’ (‘El Niño’) का प्रभाव शुरू हो चुका है।


    आंकड़ों में समझें सूखे की स्थिति

    देशभर में अब तक जून महीने में औसतन 92.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 157.7 मिमी होना चाहिए। अगर महीने के आखिरी दिन यानी मंगलवार को अच्छी बारिश हो भी जाती है, तो भी जून में कुल बारिश 100 मिमी के आसपास ही रहने का अनुमान है।

    पिछले 100 वर्षों (1927-2026) के इतिहास में, जून में इससे कम बारिश केवल दो बार हुई है- साल 2009 में (87.5 मिमी) और 2014 में (92.1 मिमी)। ये दोनों ही वर्ष पिछले दो दशकों के भीतर के हैं।

    4 जून को केरल में मॉनसून की कमजोर दस्तक के बाद से अब तक यह जोर नहीं पकड़ सका है। पूरे जून के दौरान देशभर में केवल एक ही दिन ऐसा रहा, जब रोजाना होने वाली बारिश का आंकड़ा सामान्य से अधिक दर्ज किया गया हो।


    मध्य भारत में सबसे ज्यादा बुरा हाल

    देश के सभी चार प्रमुख क्षेत्रों में बारिश की इतनी बड़ी कमी दर्ज होना एक दुर्लभ घटना है, जो अल नीनो के प्रभाव की ओर इशारा कर रही है। मध्य भारत के हालात सबसे ज्यादा खराब हैं और बारिश में 54% की कमी दर्ज की गई है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से 41% कम बारिश हुई है। उत्तर-पश्चिम भारत क्षेत्र में बारिश में 30% की कमी रही। दक्षिण भारत में 28% कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।


    अल नीनो का बढ़ता असर और जुलाई से उम्मीदें

    अल नीनो मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में सतह के पानी के गर्म होने की एक प्रक्रिया है, जिसका असर दुनिया भर के मौसम और विशेषकर भारतीय मॉनसून पर पड़ता है। अमेरिकी एजेंसी ‘इंटरनेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट एंड सोसाइटी’ ने पिछले हफ्ते अपने एक अपडेट में बताया था कि भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे तापमान के बीच अल नीनो ‘मध्यम ताकत’ तक पहुंचने के करीब है। अगले कुछ महीनों में इसके और मजबूत होने का अनुमान है, जिससे भारतीय मानसून पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

    हालांकि, इन सबके बीच एक राहत भरी खबर भी है। मौसम विभाग (IMD) के अनुमानों के मुताबिक, जुलाई के पहले हफ्ते में देश के ज्यादातर हिस्सों में अच्छी और व्यापक बारिश होने की उम्मीद है। इसका सबसे ज्यादा फायदा मध्य भारत को मिल सकता है, जहां अब तक बारिश की सबसे ज्यादा कमी रही है।