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  • दफ्तरों में फिर नौकरियों की बहार…., अगस्त माह में भर्तियों में हुआ 14 फीसदी का इजाफा

    दफ्तरों में फिर नौकरियों की बहार…., अगस्त माह में भर्तियों में हुआ 14 फीसदी का इजाफा


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में पिछले माह कार्यालय आधारित नौकरियों (Office-Based Jobs) में सालाना आधार पर 14 फीसदी की बढ़ोतरी (Office Jobs Rise 14 Percent) दर्ज की गई। इसमें ऑटो, स्वास्थ्य सेवा और रिटेल जैसे सेक्टरों का अहम योगदान रहा। नौकरी.डॉम (Naukri.com) की रिपोर्ट के मुताबिक, कुल नौकरी जॉबस्पीक इंडेक्स पिछले साल अगस्त के 2,664 के मुकाबले बढ़कर 3,028 पर पहुंच गया। यह एक मासिक सूचकांक है, जो देश में व्हाइट-कॉलर (कार्यालय आधारित) नौकरियों के बाजार और भर्ती गतिविधियों की स्थिति को ट्रैक करता है।

    रिपोर्ट के अनुसार, वाहन क्षेत्र में भर्ती 19 फीसदी बढ़ी जबकि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में 16 प्रतिशत और खुदरा क्षेत्र में 15 फीसदी की वृद्धि हुई। इनके अलावा, बीमा क्षेत्र में 12 प्रतिशत, आईटी में 11 प्रतिशत, बैंकिंग व दैनिक उपभोग की वस्तुओं से जुड़े क्षेत्र में 10-10 प्रतिशत तथा बीपीओ/आईटीईएस, तेल एवं गैस और रियल एस्टेट क्षेत्र में 8-8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं, दवा/जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भर्ती स्थिर रही, जबकि आतिथ्य एवं यात्रा क्षेत्र में भर्ती 4%घटी और शिक्षा क्षेत्र में 8 फीसदी की गिरावट आई।

    रिपोर्ट में 14 फीसदी वृद्धि को त्योहारी सीजन के कैलेंडर के संदर्भ में देखने की बात कही गई है, क्योंकि पिछले साल त्योहारी अवधि का बड़ा हिस्सा अगस्त में था, जबकि इस साल यह सितंबर में आ गया है। इन्फो एज (इंडिया) के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ हितेश ओबेरॉय ने कहा, त्योहारों वाली तिमाही के दौरान आगे बढ़ने के साथ हमें भर्ती के अंतर्निहित रुझान की अधिक स्पष्ट तस्वीर मिलेगी। नौकरी.कॉम इन्फो एज का प्रमुख ब्रांड है।


    नए स्नातकों की भर्ती 15% बढ़ी

    रिपोर्ट के अनुसार, सभी अनुभव स्तरों पर भर्ती में वृद्धि रही। नए स्नातकों की भर्ती सालाना आधार पर 15 फीसदी बढ़ी, जबकि चार से सात वर्ष के अनुभव वाले लोगों के लिए इसमें 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मध्यम से वरिष्ठ अनुभव वाले वर्गों में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। आठ से 12 वर्ष के अनुभव वालों के लिए भर्ती 16 प्रतिशत, 13 से 16 वर्ष के लिए 18 प्रतिशत और 16 वर्ष से अधिक अनुभव वालों के लिए 13 प्रतिशत बढ़ी।

  • जेन-जी बनी देश की सबसे बड़ी उपभोक्ता शक्ति, बदली बाजार की तस्वीर….860 अरब डॉलर की खपत

    जेन-जी बनी देश की सबसे बड़ी उपभोक्ता शक्ति, बदली बाजार की तस्वीर….860 अरब डॉलर की खपत


    नई दिल्ली
    । देश की सबसे युवा पीढ़ी (Younger Generation) यानी जेन-जी (Gen Z) अब सिर्फ सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स (Digital Trends) की ताकत नहीं, बल्कि भारत की सबसे बड़ी उपभोक्ता शक्ति बन चुकी है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) (Boston Consulting Group – BCG) और स्नैप इंक की एक संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की करीब 37.7 करोड़ जेन-जी आबादी की देश के कुल खपत में हिस्सा 43% है, जिसकी कीमत करीब 860 अरब डॉलर है।

    दावा है कि 1997 से 2012 के बीच जन्मे जेन-जी का खर्च 2035 तक दोगुने से ज्यादा बढ़कर करीब 2 लाख करोड़ डॉलर हो सकता है। यह उस समय भारत के अनुमानित 3.9 लाख करोड़ डॉलर की कुल खपत का करीब आधा होगा। यानी आगामी दशक में बाजार की दिशा तय करने में जेन-जी की भूमिका निर्णायक होगी।


    अभी माता-पिता की कमाई, कल अपनी जेब

    जेन-जी की आर्थिक ताकत का एक दिलचस्प पहलू यह है कि अभी इसकी बड़ी आबादी खुद कमाने वाली नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल इस पीढ़ी का केवल एक चौथाई हिस्सा काम कर रहा है। इसके बावजूद 860 अरब डॉलर के खर्च में करीब 660 अरब डॉलर ‘इन्फ्लुएंस्ड स्पेंडिंग’ है यानी ब्रांड, एप या उत्पाद का चुनाव जेन-जी करता है, लेकिन भुगतान अक्सर माता-पिता करते हैं। 2035 तक तस्वीर पूरी तरह बदलने की उम्मीद है। तब जेन-जी की 93% खपत सीधे उसकी अपनी कमाई से होने का अनुमान है।


    लाइफस्टाइल और टेक पर भी खर्च

    सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023.24 के अनुसार, शहरी परिवारों के कुल खर्च में गैर- खाद्य वस्तुओं की हिस्सेदारी 60.32% पहुंच गई है, जो 2011-12 में 57.38% थी। यह बदलाव बताता है कि भारतीय उपभोक्ता अब सिर्फ जरूरी सामान पर नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल, टेक्नोलॉजी, मनोरंजन, फैशन और अन्य गैर-खाद्य श्रेणियों पर भी ज्यादा खर्च कर रहा है।

  • ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ का पहला इम्तिहान आज, राजस्थान के 162 निकायों में मतदान शुरू

    ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ का पहला इम्तिहान आज, राजस्थान के 162 निकायों में मतदान शुरू


    नई दिल्ली। राजस्थान में ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ की अवधारणा के तहत नगरीय निकाय चुनाव का पहला चरण आज शुरू हो गया है। पहले चरण में 39 जिलों के 162 नगरीय निकायों के 5,393 वार्डों में वोट डाले जा रहे हैं। इनमें 4 नगर निगम, 27 नगर परिषद और 131 नगर पालिकाएं शामिल हैं। इस चरण में 20,623 प्रत्याशियों की चुनावी किस्मत का फैसला 57,52,278 मतदाता करेंगे।

    राज्य में कुल 309 नगरीय निकायों के चुनाव प्रस्तावित हैं। मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया है। साथ ही सीसीटीवी कैमरों के जरिए वेबकास्टिंग की व्यवस्था भी की गई है।

    चार नगर निगमों में भी आज वोटिंग

    पहले चरण में अलवर, भरतपुर, बीकानेर और भीलवाड़ा नगर निगमों के वार्डों में भी पार्षदों के चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। वहीं जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे बड़े शहरों के प्रमुख नगर निगमों में मतदान दूसरे चरण में कराया जाएगा।

    हालांकि जयपुर जिले की चौमूं, बगरू, शाहपुरा, चाकसू समेत 18 अन्य नगरीय निकायों में पहले चरण में ही मतदान हो रहा है।

    27 नगर परिषदों में मुकाबला

    पहले चरण में नागौर, ब्यावर, कोटपूतली, चूरू, सुजानगढ़, धौलपुर, सवाई माधोपुर, शाहपुरा, चौमूं, फतेहपुर, झुंझुनूं, जालोर, बारां, बूंदी, झालावाड़, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, डीडवाना-कुचामन सिटी, करौली, भिवाड़ी, खैरथल-तिजारा, जैसलमेर और बाड़मेर समेत 27 नगर परिषदों के वार्डों में चुनाव हो रहे हैं।

    इसके अलावा 131 नगर पालिकाओं के वार्डों में भी पार्षद पद के लिए मतदान कराया जा रहा है। इनमें केकड़ी, पीसांगन, सरवाड़, नसीराबाद, सावर, तांतोटी, जायल, मूंडवा, बासनी, कुचेरा, निवाई, पीपलू, देवली, उनियारा, दूनी, विजयनगर, मसूदा, बीगोद, पावटा-प्रागपुरा, विराटनगर, नारायणपुर, बानसूर, सूरतगढ़, श्रीविजयनगर, रायसिंहनगर, अनूपगढ़, घड़साना, नोहर, भादरा, संगरिया, टिब्बी, रावतसर, राजगढ़, रतननगर, छापर, भुसावर, रूपवास, राजाखेड़ा, मनियां, सैपऊ, बौंली और खंडार समेत कई निकाय शामिल हैं।

    जयपुर जिले के बगरू, चाकसू, जोबनेर, किशनगढ़-रेनवाल, फुलेरा, सांभर, बस्सी, दूदू, जमवारामगढ़, कालाडेरा, कानोता, खेजरोली, मनोहरपुर, नारायणा, फागी और वाटिका नगर पालिकाओं में भी पहले चरण में मतदान हो रहा है।

    BJP के सामने शहरी किला बचाने की चुनौती

    इन चुनावों में सत्तारूढ़ भाजपा के लिए दांव बड़ा है। दिसंबर 2023 में भजनलाल शर्मा सरकार के सत्ता संभालने के बाद शहरी मतदाताओं के बीच यह सरकार की पहली बड़ी चुनावी परीक्षा है। ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के तहत कराए जा रहे इन चुनावों के नतीजों को राज्य सरकार के कामकाज और नीतियों के प्रति जनता की राय से जोड़कर भी देखा जाएगा।

    राजस्थान के नगरीय निकायों में भाजपा को पारंपरिक रूप से मजबूत माना जाता है। बीकानेर, भीलवाड़ा, अलवर और भरतपुर जैसे शहरों में पार्टी के सामने अपने शहरी आधार को बनाए रखने की चुनौती है।

    भाजपा ने इस बार बड़ी संख्या में पुराने पार्षदों के टिकट काटकर नए चेहरों को मैदान में उतारा है। इससे पार्टी के भीतर टिकट से नाराज नेताओं और निर्दलीय प्रत्याशियों के रूप में मैदान में उतरे बागियों को साधना संगठन के लिए चुनौती है। इसके साथ ही भितरघात रोकना भी अहम होगा।

    कांग्रेस के लिए खोई जमीन वापस पाने का मौका

    विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद कांग्रेस के लिए निकाय चुनाव शहरी इलाकों में अपना जनाधार मजबूत करने का अवसर हैं। प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में पार्टी ने स्थानीय मुद्दों को चुनावी अभियान का आधार बनाया है।

    सफाई व्यवस्था, सड़क, बिजली और स्थानीय प्रशासन की कथित विफलताओं को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरने की कोशिश की है। ऐसे में नतीजे यह भी बताएंगे कि शहरी मतदाताओं के बीच कांग्रेस अपनी स्थिति कितनी मजबूत कर पाती है।

    58 लाख युवा वोटरों पर नजर

    इस चुनाव में युवा मतदाता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। 18 से 25 वर्ष की आयु के करीब 21.30 लाख मतदाता हैं, जबकि 26 से 35 वर्ष के बीच करीब 36.60 लाख वोटर हैं। यानी 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग में करीब 58 लाख मतदाता हैं।

    वहीं 18 से 29 वर्ष के Gen-Z वोटरों की संख्या करीब 35 लाख बताई गई है। कुल मतदाताओं में उनकी हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी है। इसलिए राजनीतिक दलों के लिए युवा वोटरों को अपने पक्ष में करना खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    पहले चरण के मतदान के बाद नतीजे 14 सितंबर को सामने आएंगे। इसके साथ ही यह भी साफ होगा कि ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के तहत हुए इस पहले प्रयोग में शहरी राजस्थान ने किस पार्टी के पक्ष में अपना भरोसा जताया।

  • 2018 की टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में हाई कोर्ट ने मजिस्ट्रेट अदालत की कार्यवाही रद्द करने से किया इनकार, छह सप्ताह की राहत जारी

    2018 की टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में हाई कोर्ट ने मजिस्ट्रेट अदालत की कार्यवाही रद्द करने से किया इनकार, छह सप्ताह की राहत जारी



    नई दिल्ली ।
    कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ 2018 में की गई टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने उनके खिलाफ मजिस्ट्रेट अदालत की ओर से जारी समन और मामले की आगे की कार्यवाही को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। हालांकि, राहुल गांधी को तत्काल राहत देते हुए अदालत ने 2021 में जारी अंतरिम आदेश को छह सप्ताह के लिए बढ़ा दिया है।

    पूरा मामला सितंबर 2018 का है। उस समय राजस्थान में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी ने राफेल डील का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। अपने भाषण में उन्होंने प्रधानमंत्री के लिए ‘कमांडर-इन-चीफ’ और ‘चौकीदार चोर है’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। इसके बाद उन्होंने भाषण का वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किया था।

    राहुल गांधी की इस टिप्पणी को लेकर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने वर्ष 2019 में मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता की ओर से तर्क दिया गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। ऐसे में उनके खिलाफ चोरी से जुड़ी आपत्तिजनक टिप्पणी से पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।

    शिकायत पर कार्रवाई करते हुए अगस्त 2019 में मजिस्ट्रेट अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी किया था। इसके बाद राहुल गांधी ने समन को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने अदालत से मानहानि मामले की कार्यवाही के साथ मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा जारी समन को भी रद्द करने का अनुरोध किया था।

    राहुल गांधी के वकीलों ने हाई कोर्ट में दलील दी कि शिकायत दर्ज कराने वाला व्यक्ति इस मामले में सीधे तौर पर पीड़ित पक्ष नहीं है। उनका कहना था कि राहुल गांधी की टिप्पणी किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि एक व्यक्ति विशेष को लेकर थी। इसी आधार पर वकीलों ने दावा किया कि किसी पार्टी कार्यकर्ता को इस तरह की टिप्पणी के आधार पर मानहानि का मुकदमा दायर करने का कानूनी अधिकार नहीं बनता।

    इस दलील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एन. आर. बोरकर की एकल पीठ ने राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने शशि थरूर से संबंधित पुराने फैसले का भी संदर्भ दिया। कोर्ट ने कहा कि भाजपा एक पंजीकृत और पहचान योग्य राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी है तथा प्रधानमंत्री उसके प्रमुख प्रतिनिधि हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणी से पार्टी के कार्यकर्ताओं की मानहानि होने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

    हाई कोर्ट ने यह भी माना कि मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश में ऐसा कोई गैर-कानूनी या अनुचित आधार नहीं है, जिसके चलते उसे रद्द किया जाए। इसी कानूनी आधार पर राहुल गांधी की याचिका को खारिज कर दिया गया।

    हालांकि, फैसले के बावजूद राहुल गांधी को छह सप्ताह की अंतरिम राहत मिली है। उनके वकीलों के अनुरोध पर अदालत ने 2021 में जारी अंतरिम आदेश की अवधि बढ़ा दी है। इसके तहत अगले छह सप्ताह तक मजिस्ट्रेट अदालत में मामले की सुनवाई स्थगित रहेगी और राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने से भी छूट मिलेगी। इस अवधि में वह हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं।

  • नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होगा ब्रिक्स सम्मेलन, पुतिन-मोदी मुलाकात में भारत-रूस सहयोग और वैश्विक हालात पर चर्चा संभव

    नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होगा ब्रिक्स सम्मेलन, पुतिन-मोदी मुलाकात में भारत-रूस सहयोग और वैश्विक हालात पर चर्चा संभव

    नई दिल्ली । रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आएंगे। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के दौरान भारत और रूस के बीच उच्चस्तरीय संपर्क भी देखने को मिलेगा। पुतिन 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस मुलाकात में दोनों देशों के आपसी संबंधों और व्यापक अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

    रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा की पुष्टि क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को की। उन्होंने कहा कि पुतिन कुछ ही दिनों में भारत की यात्रा शुरू करेंगे। पेसकोव के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच लंबे समय से करीबी और व्यावहारिक संबंध रहे हैं। दोनों नेता द्विपक्षीय एजेंडे से जुड़े संवेदनशील विषयों पर भी खुले और रचनात्मक तरीके से बातचीत करने में सक्षम हैं।

    रूस की ओर से पुतिन की इस यात्रा को भारत के साथ सहयोग को आगे बढ़ाने के महत्वपूर्ण अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, रक्षा, तकनीक और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में लंबे समय से सहयोग रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर विचार किया जा सकता है।

    18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और उसने समूह के लिए लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर आधारित व्यापक प्राथमिकताएं तय की हैं। सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा।

    ब्रिक्स सहयोग को रूस मुख्य रूप से तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित मानता है। इनमें राजनीति और सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वित्त तथा सांस्कृतिक और मानवीय सहयोग शामिल हैं। रूस समूह के विस्तार और अलग-अलग प्रारूपों में नए देशों की भागीदारी को भी समर्थन देता रहा है। ऐसे में सम्मेलन में ब्रिक्स के भविष्य और वैश्विक स्तर पर इसकी भूमिका से जुड़े मुद्दे भी अहम रह सकते हैं।

    पुतिन और मोदी की इससे पहले 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में मुलाकात हुई थी। दोनों नेता शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन से इतर मिले थे। उस बातचीत के दौरान रूस और भारत के संबंधों को लगातार मजबूत बताते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई थी।

    बिश्केक बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारत का रुख भी स्पष्ट किया था। उन्होंने शत्रुता समाप्त करने और शांति की दिशा में प्रयासों को समर्थन देने की बात कही थी। भारत लगातार यह रुख दोहराता रहा है कि संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए।

    इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि 2026 में संगठन की स्थापना के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं। भारत की अध्यक्षता के दौरान व्यापार, कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, शहरी विकास, स्टार्टअप और जलवायु कार्रवाई जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुतिन की मौजूदगी से सम्मेलन में भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ ब्रिक्स के व्यापक एजेंडे को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

  • मुंबई में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम स्थल से दो संदिग्ध हिरासत में, फर्जी PMO आईडी और बंदूक मिलने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

    मुंबई में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम स्थल से दो संदिग्ध हिरासत में, फर्जी PMO आईडी और बंदूक मिलने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

    नई दिल्ली ।मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम से पहले दो संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस के अनुसार, दोनों की गतिविधियां संदिग्ध पाए जाने के बाद उन्हें पूछताछ के लिए पकड़ा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई क्राइम ब्रांच आगे की जांच में जुटी है।

    पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हिरासत में लिए गए दो लोगों में से एक ने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO का अधिकारी बताया था। जांच के दौरान उसके पास से प्रधानमंत्री कार्यालय की फर्जी आईडी मिलने की बात सामने आई है। इस पहचान पत्र को लेकर पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इसे किस उद्देश्य से तैयार किया गया और इसका इस्तेमाल कहां-कहां किया गया।

    दूसरे संदिग्ध को लेकर भी पुलिस ने गंभीर जानकारी सामने आने की बात कही है। उसके पास से एक बंदूक बरामद होने की जानकारी है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि वह हथियार लेकर कार्यक्रम स्थल तक कैसे पहुंचा और उसके पास हथियार रखने का उद्देश्य क्या था।

    हिरासत में लिए गए दोनों युवकों के संबंध और कार्यक्रम स्थल पर उनकी मौजूदगी की वजह भी जांच का अहम हिस्सा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों किसी विशेष उद्देश्य से वहां पहुंचे थे या उनकी मौजूदगी के पीछे कोई अन्य कारण था। फर्जी पहचान पत्र और हथियार मिलने के बाद सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    मुंबई पुलिस के मुताबिक, दोनों संदिग्धों को नीता अंबानी कल्चरल सेंटर से हिरासत में लिया गया है। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम प्रस्तावित था। हिरासत में लिए गए लोगों में से एक की पहचान 24 वर्षीय रोहन पारेख के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, रोहन पारेख ने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय का अधिकारी बताया था।

    पुलिस के मुताबिक, रोहन पारेख के साथ एक व्यक्ति बॉडीगार्ड के रूप में मौजूद था। उसके पास बंदूक मिली है। इस व्यक्ति की भूमिका और दोनों संदिग्धों के बीच संबंध को लेकर भी जांच की जा रही है। पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

    दोनों संदिग्धों को आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत मुंबई के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किए जाने की बात कही गई है। कोर्ट में पेशी के बाद जांच की दिशा और आगे की कार्रवाई से जुड़ी जानकारी सामने आ सकती है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार, 8 सितंबर को मुंबई के जियो वर्ल्ड सेंटर में ग्लोबल फिनटेक टेस्ट 2026 का शुभारंभ करने वाले हैं। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से पहले कार्यक्रम स्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से ही विशेष सतर्कता बरती जा रही थी। इसी दौरान दो संदिग्धों को हिरासत में लिए जाने से सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल भी सामने आए हैं।

    फिलहाल मुंबई क्राइम ब्रांच दोनों संदिग्धों से पूछताछ कर रही है। जांच का मुख्य फोकस फर्जी PMO पहचान पत्र हासिल करने, हथियार के साथ कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने और दोनों की वास्तविक मंशा का पता लगाने पर है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • भारतीय सेना की आर्मरी से हथियार और गोला-बारूद गायब, रिकॉर्ड में खामियों ने चोरी की जांच को बनाया पेचीदा

    भारतीय सेना की आर्मरी से हथियार और गोला-बारूद गायब, रिकॉर्ड में खामियों ने चोरी की जांच को बनाया पेचीदा


    नई दिल्ली । 
    सिकंदराबाद कैंट में भारतीय सेना के हथियार चोरी होने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। सेना और तेलंगाना पुलिस की जांच में अब एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी से पूछताछ की गई है। जांच के दौरान आर्मरी में रखे हथियारों और गोला-बारूद से जुड़े रिकॉर्ड में भी कई खामियां सामने आने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि संबंधित रजिस्टर कई महीनों से ठीक तरीके से मेंटेन नहीं किए गए थे।

    इस मामले में सिकंदराबाद कैंट की 20 मद्रास रेजिमेंट की एक यूनिट से जुड़े हथियार गायब पाए गए हैं। चोरी हुए सामान में चार AK-203 असॉल्ट राइफल, सात पिस्टल और एक INSAS राइफल शामिल हैं। इसके अलावा एक हजार से अधिक राउंड गोला-बारूद और पैसिव नाइट-विजन बाइनोकुलर्स की एक जोड़ी भी गायब मिली है। हथियारों की संख्या और उनकी संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए जांच एजेंसियां हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं।

    मामले की जांच के दौरान 20 मद्रास रेजिमेंट की संबंधित यूनिट के एक वरिष्ठ अधिकारी से सेना के अधिकारियों ने पूछताछ की है। तेलंगाना पुलिस ने भी उनसे जानकारी ली है। पूछताछ का एक प्रमुख आधार आर्मरी के रिकॉर्ड से जुड़ी कथित लापरवाही बताई जा रही है। जांच में सामने आया है कि हथियारों से संबंधित बही-खाते या रजिस्टर कई महीनों तक सही तरीके से अपडेट नहीं किए गए थे।

    हथियार चोरी का मामला 31 अगस्त की सुबह करीब 7:50 बजे सामने आया था। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी की ओर से मलकाजगिरी कमिश्नरेट के बोल्लाराम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत के अनुसार, जब हथियार और गोला-बारूद रखने की जगह खोली गई तो वहां के ताले टूटे हुए मिले। इसके बाद सामान और उससे जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई।

    हथियारों और गोला-बारूद की आखिरी भौतिक गिनती 30 अगस्त को शाम करीब छह बजे की गई थी। इसके बाद संबंधित भंडारण स्थान को बंद कर दिया गया था। शुरुआती जांच में पुलिस ने अनुमान लगाया था कि चोरी 30 और 31 अगस्त की दरम्यानी रात हुई होगी।

    हालांकि, अब जांच की दिशा कुछ बदलती नजर आ रही है। पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि हथियार ताले टूटे मिलने की घटना से पहले ही गायब हो चुके हों। आर्मरी के रिकॉर्ड में पर्याप्त जानकारी नहीं होने के कारण यह स्पष्ट करना मुश्किल हो रहा है कि 30 अगस्त की शाम को वास्तविक रूप से सभी हथियार वहां मौजूद थे या नहीं।

    एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, हथियारों के भंडारण वाले स्थान की सुरक्षा नियमित रूप से की जाती है। वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने भी किसी तरह की सेंधमारी देखने से इनकार किया है। उनके बयानों को जांच का हिस्सा बनाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, हथियारों का हिसाब नियमित रूप से किया जाना जरूरी है, लेकिन रिकॉर्ड में मिली कथित खामियां जांच के लिए महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर रही हैं।

    फिलहाल सेना और तेलंगाना पुलिस चोरी हुए हथियारों, गोला-बारूद और अन्य सामान का पता लगाने के साथ यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि वे आखिर कब और किन परिस्थितियों में गायब हुए। रिकॉर्ड में कमी, सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों की भूमिका समेत विभिन्न पहलुओं की जांच जारी है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय की जाएगी।

  • मुरादाबाद में सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद को हटाने का 15 दिन का अल्‍टीमेटम, नहीं हटाया तो चलेगा बुलडोजर!

    मुरादाबाद में सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद को हटाने का 15 दिन का अल्‍टीमेटम, नहीं हटाया तो चलेगा बुलडोजर!

    मुरादाबाद। सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर स्थित पुरानी मस्जिद को लेकर विवाद के बीच मुरादाबाद में भी सरकारी जमीन पर धार्मिक निर्माण का मामला सामने आया है। दिल्ली रोड पर पाकबड़ा थाना क्षेत्र में करीब 300 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद को मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने अवैध निर्माण माना है। प्राधिकरण ने मस्जिद के मुतवल्ली को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर निर्माण स्वयं हटाने के निर्देश दिए हैं।

    एमडीए के मुताबिक, तय समय सीमा में निर्माण नहीं हटाया गया तो प्राधिकरण की टीम नियमानुसार कार्रवाई करेगी। नोटिस में निर्माण के सरकारी जमीन पर होने का उल्लेख किया गया है। कार्रवाई का नोटिस जारी होने के बाद मस्जिद कमेटी में हलचल बढ़ गई है। कमेटी से जुड़े लोगों का कहना है कि मस्जिद काफी पुरानी है।

    सड़क किनारे निर्माण से यातायात प्रभावित होने का भी हवाला
    एमडीए का कहना है कि जमीन सरकारी होने की स्थिति में वहां किए गए निर्माण को नियमों के तहत वैध नहीं माना जा सकता। प्राधिकरण ने यह भी कहा है कि सड़क किनारे निर्माण होने से यातायात प्रभावित हो रहा है। अब 15 दिन की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद एमडीए की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी। फिलहाल प्राधिकरण की ओर से निर्माण स्वयं हटाने के लिए नोटिस दिया गया है।

    मुरादाबाद में पहले भी हटाए गए धार्मिक निर्माण
    सरकारी जमीन और सड़क किनारे धार्मिक निर्माण को लेकर मुरादाबाद में पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। कांठ रोड पर सिद्ध अस्पताल के पास सड़क किनारे बने मस्जिदनुमा निर्माण को पुलिस की मौजूदगी में बुलडोजर से हटाया गया था। इसी तरह एमडीए की सेक्टर-10 योजना में पार्क की जमीन पर बनी मीनार को भी हटाकर जमीन खाली कराई गई थी।

    एमडीए उपाध्यक्ष बोले- सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण स्वीकार नहीं
    एमडीए उपाध्यक्ष अनुभव सिंह ने कहा कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि संबंधित मामले में नोटिस जारी करने की कार्रवाई की गई है। अब नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • यूपी में समग्र शिक्षा के संविदा कर्मियों का मानदेय 25% बढ़ेगा, 11,902.85 करोड़ का बजट मंजूर

    यूपी में समग्र शिक्षा के संविदा कर्मियों का मानदेय 25% बढ़ेगा, 11,902.85 करोड़ का बजट मंजूर


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में समग्र शिक्षा के तहत सेवा प्रदाता के माध्यम से काम कर रहे संविदा कर्मियों के मानदेय में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में हुई समग्र शिक्षा कार्यकारी समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, उपलब्ध संसाधनों के इस्तेमाल, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और समग्र शिक्षा की स्वीकृत कार्ययोजना के क्रियान्वयन की समीक्षा भी की गई।

    राज्य परियोजना कार्यालय के साथ समग्र शिक्षा (प्रारंभिक शिक्षा) और समग्र शिक्षा (माध्यमिक) के जिला परियोजना कार्यालयों में सेवा प्रदाता के जरिए कार्यरत कार्मिकों के मानदेय में यह वृद्धि होगी। बैठक में बताया गया कि इन कर्मचारियों के मानदेय में वर्ष 2020 के बाद से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी।

    यूनिफॉर्म की रकम का उसी काम में इस्तेमाल हो

    मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि विद्यार्थियों की यूनिफॉर्म के लिए डीबीटी के जरिए अभिभावकों को दी जा रही राशि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के लिए ही हो। अभिभावकों को इसके लिए जागरूक करने के साथ बच्चों को तय यूनिफॉर्म में स्कूल भेजना भी सुनिश्चित करने को कहा गया।

    उन्होंने सरकारी स्कूलों में मौजूद स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब की नियमित निगरानी के निर्देश दिए। साथ ही उपलब्ध तकनीकी उपकरणों और अन्य संसाधनों का अधिकतम एवं प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

    पढ़ाई के साथ खेल और प्रयोगशालाओं पर फोकस

    एसपी गोयल ने कहा कि विद्यार्थियों के विकास को केवल कक्षा में होने वाली पढ़ाई तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। खेलकूद और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को भी शिक्षा का अहम हिस्सा बनाया जाए।

    उन्होंने शासकीय विद्यालयों की भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान की प्रयोगशालाओं में आवश्यक उपकरण पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखने और विद्यार्थियों से उनका नियमित व प्रभावी उपयोग कराने के निर्देश दिए।

    2025-26 में 92.46% बजट खर्च

    बैठक में समग्र शिक्षा के वित्तीय उपयोग की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि वर्ष 2025-26 में बजट के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों के बाद 9,425.21 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह उपलब्ध कुल धनराशि का 92.46 प्रतिशत था। इसके मुकाबले वर्ष 2024-25 में उपलब्ध धनराशि का 69.60 प्रतिशत ही खर्च हो सका था।

    वर्ष 2026-27 के लिए भारत सरकार के प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड ने समग्र शिक्षा के तहत 11,902.85 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को इस राशि का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करने के लिए सघन और लक्षित प्रयास करने के निर्देश दिए।

    बाल वाटिका से कक्षा-2 तक निपुण भारत पर जोर

    बैठक में निपुण भारत मिशन की प्रगति की भी जानकारी दी गई। इसके तहत बाल वाटिका से कक्षा-2 तक के विद्यार्थियों की बुनियादी भाषायी और गणतीय क्षमताओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    परिषदीय विद्यालयों में इस पहल को कक्षा-3 से 5 तक भी विस्तारित किया गया है। इन कक्षाओं के लिए हिंदी, गणित, अंग्रेजी और पर्यावरण विषयों में सीखने के लक्ष्य तय किए गए हैं।

    टाटा टेक्नोलॉजी और यास्कावा के साथ एमओयू

    बैठक में बताया गया कि मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद ड्रीम लैब की स्थापना के लिए टाटा टेक्नोलॉजी, जापानी कंपनी यास्कावा और अन्य उद्योग समूहों के साथ विभाग की ओर से एमओयू किया जा चुका है। वहीं, राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के स्कूल सेफ्टी ऑडिट के लिए कार्यदायी संस्था का चयन भी पूरा हो गया है।

    बैठक में अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा, अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष, प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण संयुक्ता समद्दार, महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी समेत संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

  • यूपी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का बढ़ेगा मानदेय, अब 12 हजार रुपए मिलेंगे, सहायिकाओं को 6 हजार

    यूपी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का बढ़ेगा मानदेय, अब 12 हजार रुपए मिलेंगे, सहायिकाओं को 6 हजार

    अयोध्या। उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी की जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में आयोजित कार्यक्रम में इसका ऐलान किया। उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मौजूदा 8 हजार रुपए का मानदेय बढ़ाकर 12 हजार रुपए किया जाएगा। वहीं, सहायिकाओं को अब 4 हजार रुपए की जगह 6 हजार रुपए मानदेय मिलेगा।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को 5 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जाएगा। इसके अलावा अतिरिक्त साड़ी के लिए भी राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

    अयोध्या के राजकीय इंटर कॉलेज में हुआ कार्यक्रम

    सीएम योगी ने अयोध्या के राजकीय इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति खराब थी और केंद्रों के लिए भेजे जाने वाले पैसे का दुरुपयोग होता था।

    उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उनकी सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका और कामकाज को व्यवस्थित करने का प्रयास किया है। उनके मुताबिक, जिस तरह अयोध्या की तस्वीर बदली है, उसी तरह आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की स्थिति में भी सुधार हुआ है।

    ‘पहले अयोध्या में सड़क-बिजली की स्थिति खराब थी’

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा के शासन में अयोध्या के विकास पर ध्यान नहीं दिया गया। उनके मुताबिक, पहले शहर में बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति खराब थी। उन्होंने कहा कि आज अयोध्या सोलर सिटी बन चुकी है और विकास के नए काम हो रहे हैं।

    योगी ने कहा कि पहले अयोध्या में सिर्फ दो-तीन घंटे बिजली आती थी, जबकि अब शहर रोशन हो गया है। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में अयोध्या में जिस तरह बदलाव आया है, उसी अवधि में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के काम और सुविधाओं में भी सुधार किया गया है।
    योगी ने कहा कि पहले अयोध्या में सिर्फ दो-तीन घंटे बिजली आती थी, जबकि अब शहर रोशन हो गया है। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में अयोध्या में जिस तरह बदलाव आया है, उसी अवधि में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के काम और सुविधाओं में भी सुधार किया गया है।

    राम मंदिर और अयोध्या के विकास का मुद्दा उठाया

    सीएम योगी ने कांग्रेस और सपा पर राम मंदिर के निर्माण का विरोध करने और अयोध्या के विकास में बाधा डालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विकास के लिए इच्छाशक्ति जरूरी होती है और इसी इच्छाशक्ति के कारण अयोध्या में लगातार विकास हुआ।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अब देश और दुनिया के लोग अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन कर रहे हैं। उनके मुताबिक, अयोध्या में हुए बदलाव ने शहर को नई पहचान दी है।