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  • संसद मार्च पर बवाल के बीच सरकार की सक्रियता तेज, आरएमएल अस्पताल पहुंचे जेपी नड्डा, लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष ने घेरा

    संसद मार्च पर बवाल के बीच सरकार की सक्रियता तेज, आरएमएल अस्पताल पहुंचे जेपी नड्डा, लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष ने घेरा

    नई दिल्ली । संसद मार्च के दौरान हुई झड़प और उसके बाद उपजे राजनीतिक विवाद के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति पर सक्रियता बढ़ा दी है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राजधानी स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचकर उन प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों का हालचाल जाना, जो प्रदर्शन के दौरान घायल हुए थे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती लोगों से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और उपचार कर रहे चिकित्सकों से भी पूरे घटनाक्रम तथा इलाज की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। इस मुलाकात को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब संसद मार्च को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है।

    संसद की ओर निकाले गए मार्च के दौरान बड़ी संख्या में युवा राजधानी की सड़कों पर पहुंचे थे। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज तथा आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए, वहीं ड्यूटी पर तैनात कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं। झड़प के दौरान कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे राजधानी के प्रमुख इलाकों में कुछ समय के लिए सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।

    घटनाक्रम के बाद सरकार की ओर से लगातार संवाद स्थापित करने की कोशिशें भी देखने को मिलीं। जेपी नड्डा ने अस्पताल पहुंचने से पहले संगठन के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी मांगों और शिकायतों को भी सुना था। इसके बाद घायलों से सीधे मिलना सरकार की ओर से संवेदनशीलता दिखाने की पहल माना जा रहा है। अस्पताल में उन्होंने चिकित्सकों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सभी घायलों को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं और उनके उपचार में किसी प्रकार की कमी न रहे।

    इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष ने प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि इस विषय पर संसद में चर्चा होनी चाहिए थी और सरकार को पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उनका आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर बल प्रयोग उचित नहीं था और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज दबाने का प्रयास किया गया। विपक्ष ने यह भी कहा कि यदि संसद में ऐसे मुद्दों पर चर्चा नहीं होगी तो लोकतांत्रिक विमर्श कमजोर होगा।

    वहीं सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भीड़ को नियंत्रित करना आवश्यक था ताकि किसी बड़े नुकसान से बचा जा सके। प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़े प्रभाव की भी समीक्षा की जा रही है। राजधानी में सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम का आकलन कर रही हैं और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक कदमों पर भी विचार किया जा रहा है।

    संसद मार्च के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक बहस का भी प्रमुख विषय बन चुका है। एक ओर सरकार घायलों के उपचार और संवाद के जरिए स्थिति सामान्य करने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे को संसद और जनता के बीच उठाकर जवाबदेही की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

  • मल्लिकार्जुन खरगे के जन्मदिन पर राजनीतिक दलों ने जताया सम्मान, प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेताओं ने की दीर्घायु व उत्तम स्वास्थ्य की कामना

    मल्लिकार्जुन खरगे के जन्मदिन पर राजनीतिक दलों ने जताया सम्मान, प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेताओं ने की दीर्घायु व उत्तम स्वास्थ्य की कामना


    नई दिल्ली । 
    कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के 84वें जन्मदिन पर देशभर से उन्हें शुभकामनाएं मिलीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु जीवन की कामना की। राजनीतिक मतभेदों से इतर कई नेताओं ने सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे अनुभव और योगदान का उल्लेख करते हुए उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि ईश्वर उन्हें स्वस्थ और लंबा जीवन प्रदान करें। प्रधानमंत्री का यह संदेश सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना और अनेक लोगों ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं का सकारात्मक उदाहरण बताया।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उनके सुखद, स्वस्थ और मंगलमय जीवन की कामना करते हुए सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान की सराहना की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें बधाई देते हुए स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएं व्यक्त कीं।

    कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के जन्मदिन पर विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें शुभकामनाएं दीं। पार्टी नेताओं ने उनके लंबे राजनीतिक जीवन, संगठनात्मक अनुभव और सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा जनसेवा के प्रति उनके समर्पण को याद किया। कई नेताओं ने कहा कि उनके नेतृत्व में पार्टी लगातार जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने का प्रयास कर रही है।

    उत्तर प्रदेश कांग्रेस सहित विभिन्न प्रदेश इकाइयों ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। पार्टी की ओर से जारी संदेशों में उन्हें अनुभवी नेता, कुशल संगठनकर्ता और करोड़ों कार्यकर्ताओं के प्रेरणास्रोत के रूप में बताया गया। साथ ही उनके स्वस्थ और सक्रिय जीवन की कामना भी की गई।

    सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। समाजवादी पार्टी ने भी अपने शुभकामना संदेश में मल्लिकार्जुन खरगे के स्वस्थ, प्रसन्न और दीर्घायु जीवन की कामना की। विभिन्न दलों के नेताओं की ओर से आए इन संदेशों ने राजनीतिक शिष्टाचार और लोकतांत्रिक परंपराओं को भी रेखांकित किया।

    मल्लिकार्जुन खरगे भारतीय राजनीति के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने लंबे समय तक राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं। संगठन और संसदीय राजनीति दोनों में उनका अनुभव व्यापक माना जाता है। वर्तमान में वह कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ-साथ राज्यसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका भी निभा रहे हैं।

    उनके जन्मदिन के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी कार्यक्रम आयोजित किए। कई स्थानों पर सामाजिक सेवा गतिविधियां, पौधारोपण, रक्तदान शिविर और जरूरतमंदों की सहायता जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके नेतृत्व में संगठन को और मजबूत बनाने का संकल्प भी दोहराया।

  • J&K में भयंकर बाढ़ से बिगड़े हालात …. लाल चौक समेत कई इलाके हुए जलमग्न

    J&K में भयंकर बाढ़ से बिगड़े हालात …. लाल चौक समेत कई इलाके हुए जलमग्न


    श्रीनगर।
    जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में सोमवार सुबह हुई भारी बारिश के बाद हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। श्रीनगर (Srinagar) के मुख्य और ऐतिहासिक लाल चौक (Historic Lal Chowk) समेत कई इलाके पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग लापता हैं। खराब मौसम और बाढ़ के खतरे को देखते हुए श्री अमरनाथ यात्रा को भी अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। इस बीच केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला दिल्ली में बताए जा रहे हैं।

    स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की खुली पोल
    अनुच्छेद 370 हटने के बाद पर्यटकों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरे लाल चौक और घंटाघर की बाढ़ वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। जलभराव के बाद श्रीनगर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट सवालों के घेरे में आ गया है।

    ड्रेनेज सिस्टम के फेल होने पर आम लोग और इंटरनेट यूजर्स प्रशासन को घेर रहे हैं। श्रीनगर नगर निगम (SMC) का कहना है कि करीब दो घंटे तक हुई भारी बारिश के कारण ड्रेनेज सिस्टम ओवरफ्लो हो गया। जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने के लिए पंप लगाए गए हैं। SMC का यह भी दावा है कि अप्रैल 2017 में शुरू हुए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत मंजूर सभी काम पूरे हो चुके हैं।

    कंजर्वेशन आर्किटेक्ट हाकिम समीर हमदानी ने इस प्रोजेक्ट को ‘आत्माविहीन और फोटोशॉप’ बताते हुए कहा कि बारिश के पानी को प्रबंधित करने और ग्राउंडवॉटर को रिचार्ज करने के लिए शहर में कोई एकीकृत और उचित सिस्टम मौजूद नहीं है।


    सीएम उमर अब्दुल्ला ने दिए ऑडिट के आदेश

    जलभराव की स्थिति पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि थोड़ी सी बारिश से लाल चौक समेत शहर का बड़ा हिस्सा डूब गया, जो स्पष्ट रूप से ड्रेनेज सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। सीएम ने कहा कि सरकार यह जानना चाहती है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर अब तक वास्तव में क्या हासिल किया गया है। कैबिनेट ने स्मार्ट सिटी पहल के तहत दिए गए ठेकों और प्रोजेक्ट्स के क्रियान्वयन पर चिंता जताते हुए इसकी विफलता की जांच के लिए बाहरी ऑडिट के आदेश दे दिए हैं। गौरतलब है कि पिछले साल लोकसभा में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने बताया था कि श्रीनगर में 3,634 करोड़ रुपये की लागत से 161 स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पूरे किए जाने थे।


    अमरनाथ यात्रा निलंबित, 23 जुलाई तक स्कूल बंद

    19 जुलाई से श्री अमरनाथ यात्रा को बालटाल और पहलगाम, दोनों मार्गों से अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। हालात को देखते हुए सरकार ने राज्य भर में स्कूलों की छुट्टियां 23 जुलाई तक के लिए बढ़ा दी हैं।


    अगले तीन दिन कैसा रहेगा मौसम?

    IMD के निदेशक मुख्तार अहमद ने चेतावनी दी है कि कश्मीर में अगले तीन दिनों तक व्यापक बारिश का दौर जारी रहेगा। इस दौरान भूस्खलन और अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का भारी खतरा है। लोगों से अपील की गई है कि वे सतर्क रहें और पहाड़ी ढलानों, नदियों व नालों के पास बिल्कुल न जाएं।


    राहत-बचाव कार्य तेज, एलजी ने की समीक्षा

    उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा ने सबसे अधिक प्रभावित राजौरी और पुंछ समेत अन्य जिलों में हालात की समीक्षा की है। डोडा में दो लोगों की जान जाने पर एलजी ने गहरा दुख जताया है। NDRF, SDRF, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना की टीमें तैनात कर दी गई हैं और संवेदनशील इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। पुंछ, राजौरी, रियासी और उधमपुर में प्रमुख सड़कों को आवाजाही के लिए फिर से खोल दिया गया है। कई इलाकों में पानी की आपूर्ति बहाल करने का काम युद्धस्तर पर जारी है। फील्ड टीमों को घरों और सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान का तत्काल आकलन करने का निर्देश दिया गया है।


    दिल्ली में नेशनल कॉन्फ्रेंस का प्रदर्शन

    जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दर्जे को लेकर जारी सियासी टकराव के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, मंत्रियों, विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शन किया और केंद्र शासित प्रदेश के लिए राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग की।

    संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन आयोजित यह प्रदर्शन हालांकि कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संसद मार्च के कारण सुर्खियों में पीछे रह गया। उमर अब्दुल्ला सुबह जम्मू से दिल्ली पहुंचे थे, लेकिन कॉजपा के प्रदर्शन के मद्देनजर भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण वह जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल तक नहीं पहुंच सके।

    नेकां के लगभग 100 प्रदर्शनकारी हाथों में ”अपना वादा पूरा करो” और ”पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करो” लिखी तख्तियां लिए हुए थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाल करने में देरी को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए। बाद में मुख्यमंत्री कॉन्स्टिट्यूशन क्लब पहुंचने का प्रयास कर रहे थे, जहां जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य के दर्जे की मांग को लेकर एक संगोष्ठी आयोजित की जानी थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया।

    ”रिस्टोर स्टेटहुड” लिखी जैकेट पहने उमर अशोक रोड पर सड़क किनारे बैठ गए। इस दौरान कॉजपा के प्रदर्शन में शामिल कुछ युवा भी उनके साथ बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने ”मोदी का वादा, क्यों रहा आधा?” जैसे नारे भी लगाए। पुलिस ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के पास बढ़ती भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े, जबकि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और उनके समर्थक धरने पर बैठे हुए थे।

    बाद में पत्रकारों से बातचीत में उमर ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा, ”यहां बाकी लोगों के साथ हमें भी आंसू गैस का निशाना बनाया गया। यह बेहद शर्मनाक है।” उमर ने कहा, ”हम अपने करीब 100 समर्थकों के साथ दिल्ली आए थे ताकि केंद्र से जल्द राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर सकें, लेकिन यहां भी हमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई। लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है।” उन्होंने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से न्याय की मांग को लेकर आए युवाओं पर भी आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।

  • Ayodhya : राम मंदिर ट्रस्ट अब हर माह वेबसाइट पर अपलोड करेगा ऑडिट रिपोर्ट, चढ़ावा चोरी के बाद बदली कार्यप्रणाली..

    Ayodhya : राम मंदिर ट्रस्ट अब हर माह वेबसाइट पर अपलोड करेगा ऑडिट रिपोर्ट, चढ़ावा चोरी के बाद बदली कार्यप्रणाली..


    अयोध्या।
    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) ने चढ़ावा चोरी प्रकरण (Offering Theft Incident) के बाद अपनी कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। अब ट्रस्ट प्रत्येक माह की ऑडिट रिपोर्ट अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करेगा, ताकि देश-विदेश के करोड़ों रामभक्त मंदिर की आय-व्यय और ट्रस्ट की गतिविधियों की जानकारी सीधे देख सकें। इसके साथ ही वेबसाइट पर ट्रस्ट के प्रशासनिक निर्णयों, निर्माण कार्यों और अन्य प्रमुख गतिविधियों का भी नियमित अपडेट किया जाएगा।

    अब तक ट्रस्ट की वित्तीय ऑडिट वर्ष में केवल एक बार वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद तैयार की जाती थी। यह रिपोर्ट ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्टियों के समक्ष प्रस्तुत की जाती थी, लेकिन आम श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध नहीं होती थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद हर महीने की आय, व्यय, दान, खर्च और वित्तीय स्थिति का विवरण वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाएगा। इससे ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

    सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय हाल ही में सामने आए चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद लिया गया है। ट्रस्ट चाहता है कि श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो तथा मंदिर के संचालन और वित्तीय व्यवस्था को लेकर किसी प्रकार की शंका की स्थिति न बने। इसी उद्देश्य से वेबसाइट को सूचना का प्रमुख माध्यम बनाया जा रहा है।

    नई व्यवस्था के तहत वेबसाइट पर केवल ऑडिट रिपोर्ट ही नहीं, बल्कि ट्रस्ट की प्रमुख बैठकों, प्रशासनिक फैसलों, निर्माण कार्यों की प्रगति, नई सुविधाओं, धार्मिक आयोजनों और अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की जानकारी भी नियमित रूप से अपडेट की जाएगी। इससे देश-विदेश में बैठे श्रद्धालु भी ट्रस्ट की कार्यप्रणाली से सीधे जुड़ सकेंगे।

  • CJP का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी, दिपके फिर धरने पर बैठे, घायल प्रदर्शनकारियों से मिलेंगे केजरीवाल

    CJP का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी, दिपके फिर धरने पर बैठे, घायल प्रदर्शनकारियों से मिलेंगे केजरीवाल


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का ‘संसद चलो’ आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहा। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन वापस नहीं लिया जाएगा और संसद तक मार्च का प्रयास जारी रहेगा। सोमवार को हुए हिंसक घटनाक्रम के बाद प्रदर्शनकारी एक बार फिर जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल पर लौट आए।

    सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आयोजित यह प्रदर्शन नीट (NEET) पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर किया गया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसमें पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और हल्का बल प्रयोग किया।

    दिपके बोले- आंदोलन जारी रहेगा
    सोमवार देर रात अभिजीत दिपके ने कहा कि आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना था कि प्रदर्शनकारी फिर से संसद की ओर मार्च करेंगे और धरना स्थल नहीं छोड़ेंगे। सोमवार को पुलिस द्वारा मंच हटाए जाने के बाद भी प्रदर्शनकारी दोबारा जंतर-मंतर पहुंच गए।

    सोमवार को हुआ था हिंसक टकराव
    दिल्ली पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर से संसद तक निकाला गया मार्च हिंसक हो गया था। पुलिस का दावा है कि इस दौरान 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी भी शामिल हैं। वहीं प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया, लाठीचार्ज किया और 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। कुछ पुलिस वाहनों के शीशे टूटने की भी घटनाएं सामने आईं।

    सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति स्थिर
    सफदरजंग अस्पताल की ओर से मंगलवार सुबह जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार, सोनम वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर है। हालांकि उनका ब्लड शुगर स्तर अभी भी कम है। मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, सीरम पोटेशियम 3.2 mEq/L दर्ज किया गया है तथा एनीमिया और कम ल्यूकोसाइट काउंट की समस्या बनी हुई है।

    डॉक्टरों ने उन्हें ओआरएस और ओरल पोटेशियम दिया है, लेकिन चिकित्सकीय सलाह के बावजूद उन्होंने ड्रिप और ग्लूकोज लेने से इनकार किया है। लंबे अनशन के कारण डिहाइड्रेशन और कमजोरी बनी हुई है, इसलिए उन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।

    दिलजीत दोसांझ ने जताया समर्थन
    गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया के जरिए प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन जताया। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों पर विचार करने की अपील करते हुए कहा कि छात्रों की आवाज सुनी जानी चाहिए।

    RML अस्पताल जाएंगे अरविंद केजरीवाल
    आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की है कि वह आंदोलन के दौरान घायल हुए प्रदर्शनकारियों से मिलने राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल जाएंगे। उन्होंने बताया कि इससे पहले सुबह 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटना पर अपनी प्रतिक्रिया भी देंगे।

    दिल्ली पुलिस ने पांच राज्यों से मांगा सहयोग
    सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और राजस्थान के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को पत्र भेजा है। पत्र में संसद सत्र के दौरान जंतर-मंतर पहुंचने वाली भीड़ को नियंत्रित करने और आवश्यकता पड़ने पर राज्य की सीमा पर ही रोकने के लिए सहयोग मांगा गया है। पुलिस का कहना है कि संसद सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    धरना स्थल पर फिर जुटे प्रदर्शनकारी
    सोमवार शाम पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से हट गए थे और अभिजीत दिपके केरल हाउस के बाहर धरने पर बैठ गए थे। हालांकि मंगलवार सुबह प्रदर्शनकारी फिर से निर्धारित धरना स्थल पर लौट आए। फिलहाल वहां करीब 100 प्रदर्शनकारी मौजूद बताए जा रहे हैं।

  • TMC को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, ईडी द्वारा फ्रीज किए गए तीन बैंक खाते फिलहाल रहेंगे बंद

    TMC को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, ईडी द्वारा फ्रीज किए गए तीन बैंक खाते फिलहाल रहेंगे बंद


    नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा फ्रीज किए गए पार्टी के तीन बैंक खातों के संचालन की अंतरिम अनुमति देने से इनकार कर दिया। इन खातों में कुल 440.42 करोड़ रुपये जमा बताए गए हैं।

    ईडी ने यह कार्रवाई राज्य पुलिस की एफआईआर के आधार पर शुरू की गई जांच के तहत की है। जांच एजेंसी कथित वित्तीय अनियमितताओं, अवैध धन जुटाने और पार्टी के कुछ बैंक खातों के माध्यम से हुए संदिग्ध लेनदेन की पड़ताल कर रही है।

    हाईकोर्ट ने खारिज की अंतरिम राहत की मांग
    मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने 13 जुलाई को अंतरिम आदेश सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए टीएमसी की अंतरिम राहत की मांग खारिज कर दी। इसके साथ ही पार्टी के तीनों बैंक खाते फिलहाल फ्रीज ही रहेंगे।

    जांच में क्या सामने आया?
    रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी की प्रारंभिक जांच में दावा किया गया है कि अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच टीएमसी के बैंक खातों से करीब 160 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी एक अन्य इकाई को ट्रांसफर किए गए। जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि संबंधित कंपनी ने 2023 से 2026 के बीच 82.96 करोड़ रुपये एक अन्य नई कंपनी को भेजे। अधिकारियों के अनुसार, इस धनराशि का आगे भी लेनदेन किया गया।

    जेट और हेलीकॉप्टर खरीद की जांच
    ईडी के अनुसार, जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कथित लेनदेन में से 112 करोड़ रुपये का उपयोग एम्ब्रेयर लेगेसी 600 बिजनेस जेट और अगस्तावेस्टलैंड 109SP हेलीकॉप्टर की खरीद में किया गया। एजेंसी इस पूरे वित्तीय लेनदेन और धन के स्रोत की जांच कर रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और अदालत में इस संबंध में आगे की सुनवाई होना बाकी है।

  • 'संसद चलो' मार्च में बवाल: 118 पुलिसकर्मी घायल, 70 प्रदर्शनकारी हिरासत में, 20 सरकारी वाहनों को नुकसान

    'संसद चलो' मार्च में बवाल: 118 पुलिसकर्मी घायल, 70 प्रदर्शनकारी हिरासत में, 20 सरकारी वाहनों को नुकसान


    नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान व्यापक हंगामा देखने को मिला। जंतर-मंतर, जनपथ और रायसीना रोड सहित कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। दिनभर तनावपूर्ण माहौल के बीच पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर से हटाया, लेकिन देर रात वे दोबारा वहां पहुंच गए।

    दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने प्रशासन की चेतावनियों की अनदेखी करते हुए लागू धारा 163 का उल्लंघन किया और हालात हिंसक हो गए।

    118 पुलिसकर्मी घायल, सरकारी वाहनों में तोड़फोड़
    पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की और सुरक्षा बलों पर पथराव किया। इस दौरान 15 से 20 सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा, जबकि जनपथ क्षेत्र में कुछ दुकानों में भी तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं।

    हिंसा में स्पेशल सीपी, जॉइंट सीपी, एडिशनल सीपी, डीसीपी, एडिशनल डीसीपी और एसीपी स्तर के पांच से अधिक आईपीएस अधिकारियों सहित 118 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए। घायलों में महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। वहीं, झड़प के दौरान करीब 60 प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी सूचना है।

    एक घायल पुलिस अधिकारी ने बताया कि जनपथ स्थित क्लैरिजेस होटल के पास तैनाती के दौरान अचानक भीड़ की ओर से पथराव शुरू हो गया। उनके अनुसार, ऐसा प्रतीत हो रहा था कि पत्थरों की पहले से व्यवस्था की गई थी और प्रदर्शन समाप्त होने के बाद भीड़ ने अचानक हिंसक रूप ले लिया।

    70 प्रदर्शनकारी हिरासत में
    स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस ने करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। पुलिस सूत्रों का दावा है कि हिरासत में लिए गए कई लोग छात्र नहीं हैं। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

    अभिजीत दिपके ने समाप्त किया अनशन
    CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोमवार को अपना ढाई दिन पुराना भूख हड़ताल समाप्त कर दिया। उन्होंने 18 जुलाई को सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाए जाने के बाद अनशन शुरू किया था।

    जेपी नड्डा से दो दौर की बातचीत
    प्रदर्शन के बीच CJP प्रतिनिधि सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से दो बार मुलाकात की। पहली बैठक सुबह करीब 11:50 बजे हुई, जिसमें नड्डा ने संगठन की मांगों की जानकारी लेकर लिखित ज्ञापन देने को कहा। इसके बाद दोपहर करीब 4 बजे प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। हालांकि, सरकारी सूत्रों के अनुसार बैठक में संगठन की तीनों प्रमुख मांगों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया। केंद्रीय मंत्री ने प्रतिनिधियों से आंदोलन समाप्त कर शांति बनाए रखने की अपील की।

    सरकार ने हालात पर रखी नजर
    दिनभर चले घटनाक्रम पर केंद्र सरकार लगातार नजर बनाए रही। गृह मंत्री अमित शाह वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क में रहे। पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों को निर्देश दिए गए कि स्थिति नियंत्रित करने के दौरान बल प्रयोग केवल अत्यंत आवश्यक होने पर और न्यूनतम स्तर पर ही किया जाए।

    आज भी जारी रहेगा प्रदर्शन
    सोमवार को लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बावजूद प्रदर्शनकारी देर रात फिर जंतर-मंतर पहुंच गए। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने घोषणा की कि मंगलवार को भी ‘संसद चलो’ मार्च जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी अपना धरना समाप्त नहीं करेंगे और संसद की ओर मार्च का प्रयास जारी रखेंगे।

  • 542 करोड़ की परियोजनाओं के लोकार्पण के बीच सीएम योगी का बड़ा राजनीतिक संदेश, सनातन और विकास को लेकर विपक्ष पर साधा निशाना

    542 करोड़ की परियोजनाओं के लोकार्पण के बीच सीएम योगी का बड़ा राजनीतिक संदेश, सनातन और विकास को लेकर विपक्ष पर साधा निशाना

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में सोमवार को आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास परियोजनाओं के उद्घाटन के साथ-साथ विपक्ष पर भी तीखा राजनीतिक हमला बोला। 542 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 82 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के बाद आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सनातन, विकास और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर अपनी सरकार की नीतियों का उल्लेख किया और समाजवादी पार्टी तथा कांग्रेस की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि सनातन परंपरा देश की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का आधार है। उन्होंने कहा कि जब तक सनातन सुरक्षित रहेगा, तब तक समाज और राष्ट्र भी सुरक्षित रहेंगे। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि यदि सनातन पर किसी प्रकार का खतरा उत्पन्न होता है तो उसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ेगा। अपने भाषण में उन्होंने विपक्षी दलों पर सनातन विरोधी राजनीति करने का आरोप भी लगाया।

    मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि पहले धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास की उपेक्षा की जाती थी। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने आस्था स्थलों के विकास, पर्यटन और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने महादेवा स्थित लोधेश्वर महादेव मंदिर और अयोध्या सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर कराए जा रहे विकास कार्यों का भी उल्लेख किया।

    अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निवेश का माहौल बेहतर हुआ है और उद्योगों को बढ़ावा मिलने से रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में महिलाओं, व्यापारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि कानून व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा और उपद्रव करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

    विकास परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार निवेश किया जा रहा है। उन्होंने रक्षा उत्पादन, औद्योगिक विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदेश को निवेश और रोजगार का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए कई योजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने देश के प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी बाबू केडी सिंह की विरासत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनकी ऐतिहासिक हवेली के संरक्षण के लिए सरकार आवश्यक कदम उठाएगी ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान से प्रेरणा ले सकें। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि इस धरोहर को संरक्षित रखते हुए खेल और सांस्कृतिक विरासत दोनों को सम्मान देने का प्रयास किया जाएगा।

    बाराबंकी में आयोजित इस कार्यक्रम ने विकास और राजनीति दोनों को एक साथ केंद्र में ला दिया। एक ओर सरकार ने विभिन्न विकास परियोजनाओं को जनता को समर्पित किया, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री के राजनीतिक बयान भी चर्चा का विषय बने। आगामी समय में इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

  • बांग्लादेश में बढ़ता बाल श्रम बना गंभीर सामाजिक चुनौती, शोषण और कार्यस्थल पर दुर्व्यवहार के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता

    बांग्लादेश में बढ़ता बाल श्रम बना गंभीर सामाजिक चुनौती, शोषण और कार्यस्थल पर दुर्व्यवहार के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता

    नई दिल्ली । बांग्लादेश में बाल श्रम और उससे जुड़े शोषण के मामलों में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय बनती जा रही है। हाल ही में सामने आए सरकारी हेल्पलाइन आंकड़ों और विभिन्न सामाजिक अध्ययनों से संकेत मिले हैं कि बड़ी संख्या में बच्चे आज भी असुरक्षित कार्यस्थलों पर कठिन परिस्थितियों में काम करने को मजबूर हैं। बच्चों के अधिकारों से जुड़े संगठनों का कहना है कि आर्थिक चुनौतियों और प्रभावी निगरानी की कमी के कारण स्थिति पहले की तुलना में अधिक गंभीर होती जा रही है।

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जनवरी से 10 जून के बीच सरकारी चाइल्ड सपोर्ट हेल्पलाइन 1098 पर बच्चों के शोषण से संबंधित 101 शिकायतें दर्ज की गईं। वहीं आपातकालीन हेल्पलाइन 999 पर मई तक कार्यस्थलों पर बाल श्रमिकों के साथ दुर्व्यवहार और शोषण से जुड़ी 33 शिकायतें प्राप्त हुईं। इन मामलों ने बाल सुरक्षा व्यवस्था और कार्यस्थलों की निगरानी को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

    राजधानी ढाका में घरेलू काम करने वाले बच्चों पर किए गए एक सर्वे में सामने आया कि लगभग आधे बच्चों को किसी न किसी प्रकार के शोषण का सामना करना पड़ता है। वहीं बड़ी संख्या में बच्चों पर अत्यधिक काम का बोझ भी पाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू कार्यों में लगे बच्चों की स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है क्योंकि ऐसे कार्यस्थलों की नियमित निगरानी करना कठिन होता है।

    बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों का कहना है कि होटल, रेस्तरां, परिवहन, ईंट भट्टों और अन्य असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत बच्चों को लंबे समय तक काम करना पड़ता है। कई मामलों में उन्हें शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है, जबकि कुछ बच्चों को निर्धारित मेहनताना भी नहीं मिल पाता। सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

    सामाजिक संगठनों का यह भी कहना है कि बाल श्रमिकों को अक्सर इसलिए काम पर रखा जाता है क्योंकि उन्हें आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है और वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की स्थिति में नहीं होते। असंगठित क्षेत्रों में निगरानी की सीमित व्यवस्था के कारण ऐसे मामलों का समय पर पता लगाना और प्रभावी कार्रवाई करना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

    घरेलू कामगारों के अधिकारों के लिए कार्यरत संगठनों ने भी बच्चों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार के अनेक मामलों पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि वर्षों से स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है और आज भी कम उम्र के बच्चे घरेलू कार्यों में लगे हुए शोषण का सामना कर रहे हैं। कई मामलों में मानसिक, शारीरिक और यौन उत्पीड़न जैसी गंभीर शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

    हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार, पिछले छह वर्षों में बांग्लादेश में बाल श्रम करने वाले बच्चों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2019 की तुलना में अब अधिक बच्चे कार्यबल का हिस्सा बन चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक कठिनाइयों, बढ़ती महंगाई और पारिवारिक आय में कमी के कारण अनेक बच्चों को पढ़ाई छोड़कर रोजगार की ओर जाना पड़ रहा है।

    बाल अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि बाल श्रम की समस्या से निपटने के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए शिक्षा तक आसान पहुंच, गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार और असंगठित क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है। उनका मानना है कि सरकार, सामाजिक संस्थाओं और समुदायों के संयुक्त प्रयासों से ही बच्चों को सुरक्षित वातावरण और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराया जा सकता है।

  • क्वाड मंत्रीस्तरीय बैठक से पहले अमेरिका का बड़ा संदेश, हिंद-प्रशांत में भारत समेत साझेदार देशों की भूमिका को बताया रणनीतिक रूप से अहम

    क्वाड मंत्रीस्तरीय बैठक से पहले अमेरिका का बड़ा संदेश, हिंद-प्रशांत में भारत समेत साझेदार देशों की भूमिका को बताया रणनीतिक रूप से अहम

    नई दिल्ली । फिलीपींस में आयोजित होने वाली क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले अमेरिका ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत सहित अपने रणनीतिक साझेदार देशों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिका एक स्वतंत्र, मुक्त और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा इस उद्देश्य की प्राप्ति में क्वाड देशों की साझेदारी निर्णायक महत्व रखती है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री स्थिरता से जुड़े मुद्दे वैश्विक स्तर पर लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं।

    अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो फिलीपींस में आयोजित आसियान से जुड़ी विभिन्न बैठकों और क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए रवाना हो चुके हैं। उनके दौरे के दौरान आसियान पोस्ट-मिनिस्ट्रियल कॉन्फ्रेंस, ईस्ट एशिया समिट विदेश मंत्रियों की बैठक और आसियान रीजनल फोरम की बैठकों में भी हिस्सा लेने का कार्यक्रम है। इस दौरान उनकी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय वार्ताएं भी प्रस्तावित हैं।

    अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत करना, रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देना तथा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से जुड़े साझा प्रयासों को आगे बढ़ाना है। अमेरिका ने दोहराया है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था, समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और सभी देशों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना उसकी प्रमुख विदेश नीति प्राथमिकताओं में शामिल है।

    क्वाड समूह भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक मंच है। यह समूह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, आर्थिक सहयोग, आपदा प्रबंधन, समुद्री सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियों और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर मिलकर काम करता है। पिछले कुछ वर्षों में क्वाड की गतिविधियों का दायरा लगातार बढ़ा है और इसे क्षेत्रीय सहयोग के महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है।

    इससे पहले आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में चारों देशों ने स्वतंत्र, मुक्त और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी। साथ ही सदस्य देशों ने क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत करने तथा ऐसी साझा पहलों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी, जिनका लाभ हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों को सीधे तौर पर मिल सके। बैठक में समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया था।

    पिछली बैठक के संयुक्त वक्तव्य में पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की गई थी। सदस्य देशों ने किसी भी ऐसे एकतरफा कदम का विरोध दोहराया था, जो बल प्रयोग, दबाव या सैन्य गतिविधियों के माध्यम से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को प्रभावित करता हो। साथ ही नौवहन की स्वतंत्रता, हवाई आवाजाही की सुरक्षा और समुद्री क्षेत्रों में बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई गई थी।

    फिलीपींस में होने वाली इस बैठक पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, सामरिक सहयोग, समुद्री चुनौतियों और आर्थिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी। भारत सहित सभी सदस्य देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, संतुलन और सहयोग को मजबूत करने की दिशा में साझा रणनीति पर आगे बढ़ने का प्रयास करेंगे।