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  • ‘आप लड़िए, हम उम्मीदवार नहीं उतारेंगे’: नंदीग्राम से ममता बनर्जी को TMC के बागी गुट की खुली चुनौती

    ‘आप लड़िए, हम उम्मीदवार नहीं उतारेंगे’: नंदीग्राम से ममता बनर्जी को TMC के बागी गुट की खुली चुनौती


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रही सियासी लड़ाई अब नंदीग्राम उपचुनाव तक पहुंच गई है। टीएमसी के बागी खेमे ने बुधवार को पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को नंदीग्राम से चुनाव लड़ने की खुली चुनौती दी। बागी गुट का कहना है कि यदि ममता बनर्जी इस सीट से मैदान में उतरती हैं तो वह उनके खिलाफ अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगा।

    पश्चिम बंगाल विधानसभा के बाहर बागी टीएमसी के प्रवक्ता रिजु दत्ता ने कहा कि उनका गुट चाहता है कि ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव लड़ें, जीतें और विधानसभा में वापस लौटें। उन्होंने स्पष्ट किया कि ममता के सामने उनका गुट प्रत्याशी नहीं उतारेगा।

    ‘भाजपा विरोधी वोट नहीं बंटने देंगे’

    बागी टीएमसी विधायक मदन मित्रा ने कहा कि ममता बनर्जी के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला भाजपा विरोधी वोटों को विभाजित होने से रोकने के लिए लिया गया है।

    मदन मित्रा ने कहा कि अगर उनका गुट भाजपा की ‘बी टीम’ होता तो विपक्षी वोटों को बांटने के लिए दो के बजाय तीन या चार उम्मीदवार मैदान में उतार सकता था। उनके मुताबिक नंदीग्राम में ममता को वॉकओवर देने का फैसला यह दिखाएगा कि उनका गुट भाजपा के इशारे पर काम नहीं कर रहा है।

    नंदीग्राम में पहले हार चुकी हैं ममता

    नंदीग्राम ममता बनर्जी के राजनीतिक सफर में बेहद महत्वपूर्ण सीट रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने तत्कालीन करीबी सहयोगी और भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ यहां से चुनाव लड़ा था। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

    2026 के विधानसभा चुनाव में भी शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से जीत हासिल की। उन्होंने ममता बनर्जी को उनके गृह क्षेत्र भवानीपुर में भी हराया। इस चुनाव के बाद शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम विधानसभा सीट खाली कर दी। इसी वजह से अब नंदीग्राम में उपचुनाव कराया जा रहा है।

    पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर भी घमासान

    बागी गुट का यह ऐलान ऐसे समय हुआ है, जब टीएमसी के दोनों धड़ों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अधिकार को लेकर विवाद चल रहा है। चुनाव आयोग ने अभी फैसला नहीं किया है कि आधिकारिक नाम और चुनाव चिन्ह किस गुट को मिलेगा।

    रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी गुट पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना दावा कर रहा है। उसका कहना है कि अगर नामांकन की अंतिम तारीख से पहले चुनाव आयोग उसके पक्ष में फैसला नहीं करता है तो वह निर्दलीय उम्मीदवारों के तौर पर चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहा है।

    6 अक्टूबर को नंदीग्राम में वोटिंग

    नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। बुधवार से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर है। 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 19 सितंबर तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे। मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।

  • तमिलनाडु में नवजात बच्चों को सोने की अंगूठी देने की योजना टली, मुख्यमंत्री विजय के विदेश दौरे से बदली शुरुआत की तारीख

    तमिलनाडु में नवजात बच्चों को सोने की अंगूठी देने की योजना टली, मुख्यमंत्री विजय के विदेश दौरे से बदली शुरुआत की तारीख

    नई दिल्ली । तमिलनाडु में नवजात शिशुओं के लिए शुरू की जाने वाली एक खास सरकारी योजना की शुरुआत फिलहाल टाल दी गई है। मुख्यमंत्री विजय थलापति की सरकार ने सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को सोने की अंगूठी देने की योजना बनाई थी। ‘थाइमामन थंगा मोथिरम थिट्टम’ नाम की इस योजना को पहले 15 सितंबर 2026 से शुरू किया जाना था, लेकिन मुख्यमंत्री विजय के विदेश दौरे के कारण तय कार्यक्रम को आगे बढ़ा दिया गया है।

    सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि योजना को रद्द नहीं किया गया है। इसमें केवल शुरुआत की तारीख में बदलाव किया गया है। योजना की नई तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। मुख्यमंत्री के विदेश दौरे को राज्य में नए निवेश लाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण बताया गया है। इसी वजह से वह 15 सितंबर को तमिलनाडु में मौजूद नहीं रहेंगे और योजना के निर्धारित कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे।

    इस योजना का लाभ 22 जून 2026 यानी मुख्यमंत्री विजय के जन्मदिन से सरकारी अस्पतालों में पैदा हुए नवजात बच्चों को देने का फैसला किया गया है। योजना के तहत पात्र बच्चों को एक ग्राम वजन की हॉलमार्क सोने की अंगूठी दी जाएगी। सरकार के अनुसार इस पहल का उद्देश्य नवजात बच्चों वाले परिवारों को सहायता देना है।

    इसके साथ ही योजना के पीछे सरकारी अस्पतालों को लेकर लोगों का भरोसा बढ़ाने का उद्देश्य भी बताया गया है। सरकार चाहती है कि अधिक संख्या में लोग बच्चों की डिलीवरी के लिए सरकारी अस्पतालों का इस्तेमाल करें। इस पहल के जरिए सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत करने की कोशिश की जाएगी।

    योजना में तारीख के अलावा किसी अन्य नियम में बदलाव नहीं किया गया है। यानी जिन बच्चों को निर्धारित अवधि के अनुसार योजना का लाभ मिलना है, उनके लिए एक ग्राम हॉलमार्क सोने की अंगूठी देने का प्रावधान पहले की तरह ही रहेगा। कार्यक्रम की नई तारीख तय होने के बाद योजना को उसी व्यवस्था के अनुसार आगे बढ़ाया जाएगा।

    राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. जी अरुणराज ने योजना के टलने की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विजय विदेश यात्रा पर जाने वाले हैं और यह दौरा राज्य में नए निवेश आकर्षित करने के लिए जरूरी है। इसी कारण 15 सितंबर को योजना की शुरुआत संभव नहीं होगी।

    मुख्यमंत्री के विदेश दौरे और योजना के कार्यक्रम की तारीख के बीच पैदा हुई स्थिति के कारण अब राज्य सरकार को नई तारीख तय करनी होगी। हालांकि अभी तक यह जानकारी सामने नहीं आई है कि कार्यक्रम किस दिन आयोजित किया जाएगा। सरकार ने यह जरूर साफ किया है कि योजना की मूल व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    इस योजना को लेकर नवजात बच्चों के परिवारों के बीच भी उम्मीद बनी हुई है, क्योंकि पात्र बच्चों को एक ग्राम की हॉलमार्क सोने की अंगूठी देने का प्रावधान पहले से तय है। अब निगाहें सरकार की ओर से घोषित होने वाली नई शुरुआत की तारीख पर रहेंगी।

  • कोलकाता में दुर्गा पूजा से पहले KMC की बड़ी कार्रवाई, 592 प्रतिष्ठानों की जांच में 40 रेस्टोरेंट और स्वीट शॉप के लाइसेंस निलंबित

    कोलकाता में दुर्गा पूजा से पहले KMC की बड़ी कार्रवाई, 592 प्रतिष्ठानों की जांच में 40 रेस्टोरेंट और स्वीट शॉप के लाइसेंस निलंबित

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा से पहले खाद्य सुरक्षा को लेकर नगर निगम ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की है। कोलकाता नगर निगम की टीम ने शहर में खाद्य कारोबार से जुड़े 592 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान कई जगहों पर खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, लाइसेंस और रसोई की स्वच्छता से संबंधित अनियमितताएं सामने आईं। कार्रवाई के बाद 40 रेस्टोरेंट और स्वीट शॉप के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं।

    नगर निगम प्रशासन के अनुसार यह अभियान ‘फूड सेफ्टी वीक’ के तहत चलाया गया। इसका उद्देश्य दुर्गा पूजा से पहले शहर में खाद्य प्रतिष्ठानों की व्यवस्था और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच करना था। अभियान के दायरे में होटल, क्लब, रेस्टोरेंट, बाजार और बाजारों में संचालित अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों को शामिल किया गया। अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान खाद्य सामग्री के भंडारण, निर्माण, बिक्री, गुणवत्ता और प्रतिष्ठानों की साफ-सफाई जैसे कई पहलुओं की जांच की।

    निरीक्षण के दौरान करीब 1,224 किलोग्राम खाद्य सामग्री को नष्ट किया गया। अधिकारियों को कई स्थानों पर ऐसी खाद्य सामग्री मिली, जिसे खाने के लिए उपयुक्त नहीं माना गया। कुछ प्रतिष्ठानों में भंडारित छेना में फफूंद पाई गई, जबकि कुछ जगहों पर बड़ी मात्रा में खराब मांस बरामद हुआ। एक बड़े स्वीट शॉप के रेफ्रिजरेटर के अंदर कॉकरोच मिलने की बात भी सामने आई। इन स्थितियों को देखते हुए संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

    जांच में लाइसेंस से जुड़ी अनियमितताएं भी सामने आईं। कुछ प्रतिष्ठानों के पास खाद्य सामग्री बेचने के लिए रिटेल लाइसेंस मौजूद था, लेकिन जरूरी मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस नहीं था। इसका मतलब था कि संबंधित प्रतिष्ठान खाद्य सामग्री की बिक्री के लिए अधिकृत थे, लेकिन उसके निर्माण से जुड़ी आवश्यक अनुमति उनके पास नहीं थी। अधिकारियों ने ऐसी कमियों को भी निरीक्षण और कार्रवाई का हिस्सा बनाया।

    नगर निगम प्रशासन की ओर से बताया गया कि निलंबित किए गए प्रतिष्ठानों को नियमों का पालन करना होगा। यदि संबंधित प्रतिष्ठान आवश्यक मानकों को पूरा करते हैं और कमियों को दूर करते हैं, तो उनके लाइसेंस की स्थिति की दोबारा समीक्षा की जाएगी। कार्रवाई का उद्देश्य खाद्य कारोबारियों को नियमों के पालन के लिए जिम्मेदार बनाना भी है।

    नगर निगम की म्यूनिसिपल एडमिनिस्ट्रेटर स्मिता पांडे ने कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि पहले लाइसेंस निलंबित करने जैसी कार्रवाई नियमित रूप से नहीं की जाती थी, लेकिन अब विभाग को ऐसी कार्रवाई करने की पूरी छूट है। उनके अनुसार शहर में खाद्य कारोबार से जुड़े लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों को अभियान में शामिल किया गया।

    दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता में बड़ी संख्या में लोग रेस्टोरेंट, मिठाई की दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों का रुख करते हैं। ऐसे में त्योहार से पहले खाद्य सुरक्षा को लेकर की गई यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नगर निगम को उम्मीद है कि कार्रवाई के बाद खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठान खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, भंडारण और रसोई की स्वच्छता को लेकर अधिक सावधानी बरतेंगे।

  • भारत से हजारों किलोमीटर दूर ज्वालामुखी के किनारे 700 साल पुरानी गणेश प्रतिमा, इंडोनेशिया में आज भी निभाई जाती है अनोखी आस्था

    भारत से हजारों किलोमीटर दूर ज्वालामुखी के किनारे 700 साल पुरानी गणेश प्रतिमा, इंडोनेशिया में आज भी निभाई जाती है अनोखी आस्था

    नई दिल्ली । गणेश चतुर्थी के अवसर पर भारत में भगवान गणेश की भक्ति का रंग दिखाई देता है, लेकिन गणपति बप्पा की आस्था केवल भारत तक सीमित नहीं है। भारत से हजारों किलोमीटर दूर इंडोनेशिया में भी भगवान गणेश को ज्ञान, बुद्धि और समृद्धि का प्रतीक मानकर पूजा जाता है। पूर्वी जावा में स्थित माउंट ब्रोमो पर गणेश जी की एक ऐसी प्रतिमा विराजमान है, जिसे स्थानीय लोग सदियों पुरानी आस्था और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में देखते हैं।

    माउंट ब्रोमो इंडोनेशिया के प्रमुख सक्रिय ज्वालामुखियों में शामिल है। प्राकृतिक सुंदरता, विशाल रेत के मैदान और सूर्योदय के आकर्षक दृश्य के लिए प्रसिद्ध यह क्षेत्र धार्मिक मान्यताओं के कारण भी विशेष महत्व रखता है। इसी ज्वालामुखी के किनारे भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह प्रतिमा करीब 700 साल पुरानी है और इसे क्षेत्र में रहने वाले तेंगर समुदाय के पूर्वजों ने स्थापित किया था।

    तेंगर समुदाय की धार्मिक परंपराओं में हिंदू मान्यताओं की गहरी छाप दिखाई देती है। पीढ़ियों से चली आ रही इस आस्था में भगवान गणेश को विशेष स्थान प्राप्त है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि गणेश जी आसपास के गांवों को ज्वालामुखी के खतरे से बचाते हैं। इसी वजह से प्रतिमा को केवल पूजा का केंद्र नहीं, बल्कि क्षेत्र के संरक्षक के रूप में भी देखा जाता है।

    माउंट ब्रोमो पर पहुंचने वाले श्रद्धालु भगवान गणेश को फूल, फल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करते हैं। लोग इलाके की खुशहाली और सुरक्षा की कामना करते हैं। ज्वालामुखी के सक्रिय होने के बावजूद उसके समीप गणेश प्रतिमा का मौजूद होना स्थानीय धार्मिक विश्वास को और खास बनाता है। यह आस्था लंबे समय से समुदाय की परंपराओं का हिस्सा बनी हुई है।

    इंडोनेशिया में हिंदू संस्कृति की जड़ें काफी पुरानी हैं। आज देश की कुल आबादी में हिंदुओं की संख्या सीमित है, लेकिन बाली और जावा के कुछ हिस्सों में हिंदू धार्मिक परंपराओं, मंदिरों और देवी-देवताओं की पूजा का प्रभाव आज भी दिखाई देता है। तेंगर समुदाय भी इसी ऐतिहासिक सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने वाले समुदायों में शामिल है।

    माउंट ब्रोमो का क्षेत्र धार्मिक और प्राकृतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जाता है। स्थानीय हिंदू मान्यताओं में ब्रह्मा, विष्णु और शिव सहित कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। माउंट ब्रोमो करीब 800 वर्ग किलोमीटर में फैले क्षेत्र का हिस्सा है और इसकी ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 2,392 मीटर बताई जाती है। यहां का ज्वालामुखीय परिदृश्य और प्राकृतिक वातावरण बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करता है।

    इंडोनेशिया प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर क्षेत्र में स्थित है। इस वजह से यहां भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियां लगातार देखी जाती हैं। ऐसे प्राकृतिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में भगवान गणेश की प्रतिमा का सदियों से मौजूद रहना स्थानीय लोगों के लिए धार्मिक विश्वास का महत्वपूर्ण प्रतीक है। तेंगर समुदाय के लिए यह प्रतिमा पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा, आस्था और संरक्षण की भावना को दर्शाती है।

  • मायावती की शर्त- अशोक सिद्धार्थ लें राजनीति से संन्यास, तभी आकाश आनंद की वापसी पर होगा विचार

    मायावती की शर्त- अशोक सिद्धार्थ लें राजनीति से संन्यास, तभी आकाश आनंद की वापसी पर होगा विचार

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही बहुजन समाज पार्टी ने संगठन और नेतृत्व को लेकर अपना रुख साफ करना शुरू कर दिया है। बसपा प्रमुख मायावती की ओर से जारी बयान में पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ को लेकर कड़ा संदेश दिया गया है। पार्टी ने कहा कि अशोक सिद्धार्थ के पास अब भी राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेकर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा छोड़ने का विकल्प है। ऐसा होने पर उनके दामाद आकाश आनंद के पार्टी में स्वतंत्र रूप से काम करने और उन्हें पुरानी जिम्मेदारियां सौंपने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता है।

    अशोक सिद्धार्थ पर निजी स्वार्थ का आरोप

    बसपा ने आरोप लगाया कि अशोक सिद्धार्थ को पार्टी की ओर से खुद में सुधार करने के कई मौके दिए गए, लेकिन उन्होंने बहुजन मिशन की अपेक्षा निजी और पारिवारिक हितों को प्राथमिकता दी। पार्टी का कहना है कि इसका असर न केवल अशोक सिद्धार्थ पर पड़ा, बल्कि उनके दामाद आकाश आनंद को भी इसका नुकसान उठाना पड़ा।

    बयान में दावा किया गया कि अशोक सिद्धार्थ ने अपने निजी स्वार्थ के चलते आकाश आनंद और बसपा मूवमेंट के हितों को भी पर्याप्त महत्व नहीं दिया। पार्टी के अनुसार, उनसे अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा त्याग, तपस्या और कुर्बानी की उम्मीद थी, लेकिन वे उस कसौटी पर खरे नहीं उतरे।

    तीन राज्यों के चुनाव पर नजर

    मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा चुनाव करीब हैं और ये तीनों राज्य बहुजन समाज तथा बहुजन आंदोलन के लिए विशेष महत्व रखते हैं। पार्टी के कार्यकर्ता, पदाधिकारी, समर्थक और शुभचिंतक इन राज्यों में सत्ता हासिल करने के लक्ष्य के साथ पूरी ताकत से जुटे हुए हैं।
    मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा चुनाव करीब हैं और ये तीनों राज्य बहुजन समाज तथा बहुजन आंदोलन के लिए विशेष महत्व रखते हैं। पार्टी के कार्यकर्ता, पदाधिकारी, समर्थक और शुभचिंतक इन राज्यों में सत्ता हासिल करने के लक्ष्य के साथ पूरी ताकत से जुटे हुए हैं।

    बसपा के मुताबिक, मौजूदा समय में पार्टी और बहुजन समाज के सामने विरोधी दलों के साथ-साथ जातिवादी तत्वों की भी कई चुनौतियां हैं। पार्टी ने सर्वसमाज के लोगों से सहयोग की अपील की है। साथ ही दलित समाज सहित बहुजन समाज के सभी वर्गों से निजी या पारिवारिक हित में ऐसा कोई कदम नहीं उठाने को कहा गया है, जिससे आंदोलन के हित प्रभावित हों।

    अनुशासन पर मायावती का सख्त संदेश

    मायावती ने कहा कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ऐसे लोगों को संगठन में दोबारा जगह दे रहा है, जो अपने आचार-व्यवहार को सुधारते हैं। वहीं, संगठन और मिशन के रास्ते में बाधा बनने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा रही है। बसपा ने अशोक सिद्धार्थ के मामले को इसी नीति का प्रमुख उदाहरण बताया है।

    आकाश आनंद की वापसी पर संकेत

    बसपा के बयान में आकाश आनंद की भविष्य की भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत दिया गया है। पार्टी के मुताबिक, अगर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास लेकर निजी हित और राजनीतिक महत्वाकांक्षा से ऊपर उठते हैं, तो आकाश आनंद के लिए संगठन में स्वतंत्र रूप से काम करने का रास्ता साफ हो सकता है।

    ऐसी स्थिति में बसपा आकाश आनंद को उनकी पुरानी जिम्मेदारियां वापस सौंपने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर सकती है। इससे आकाश आनंद के एक बार फिर संगठन में सक्रिय भूमिका में लौटने की संभावना बन सकती है।

  • रायबरेली में राहुल गांधी की दिशा बैठक से पहले सपा विधायकों का प्रदर्शन, पोस्टर-बैनर लहराकर की नारेबाजी

    रायबरेली में राहुल गांधी की दिशा बैठक से पहले सपा विधायकों का प्रदर्शन, पोस्टर-बैनर लहराकर की नारेबाजी


    रायबरेली।
    कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की दिशा (जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति) की बैठक से पहले बुधवार को रायबरेली में सियासी माहौल गरमा गया। बैठक शुरू होने से पहले सपा विधायक राहुल लोधी और श्याम सुंदर भारती ने पोस्टर-बैनर लहराकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। विधायकों ने सवाल उठाया कि जब आम लोगों की समस्याएं अब भी बनी हुई हैं तो दिशा की बैठक आयोजित करने का क्या फायदा है।

    राहुल गांधी के बैठक स्थल पर पहुंचने से पहले पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे दोनों विधायकों से पोस्टर और बैनर ले लिए। इसके बाद राहुल गांधी बैठक में पहुंचे, जहां डीएम सरनीत कौर और एसपी रवि कुमार ने उनका स्वागत किया। बैठक के दौरान राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह और कैबिनेट मंत्री मनोज पांडे राहुल गांधी के अगल-बगल बैठे नजर आए।

    भुएमऊ गेस्ट हाउस में लगाया जनता दरबार
    दिशा बैठक से पहले राहुल गांधी भुएमऊ गेस्ट हाउस पहुंचे। यहां जनता दरबार आयोजित किया गया, जहां सपा नेताओं समेत अन्य लोगों ने उनसे मुलाकात की। इस दौरान कांग्रेस की एक महिला नेता ने राहुल गांधी को राखी बांधी और टीका लगाया। अपने दो दिवसीय यूपी दौरे के आखिरी दिन राहुल गांधी ने सांसद निधि से करीब तीन करोड़ रुपए की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया।

    पहली कोशिश में नहीं उतर सकी फ्लाइट
    राहुल गांधी मंगलवार को दिल्ली से एयर इंडिया की फ्लाइट AI-1717 से लखनऊ पहुंचे थे। लखनऊ एयरपोर्ट पर विमान की पहली कोशिश में लैंडिंग नहीं हो सकी। करीब 25 मिनट तक विमान हवा में चक्कर लगाता रहा। इसके बाद दूसरी कोशिश में विमान की सफल लैंडिंग हुई। 2024 में सांसद बनने के बाद रायबरेली का यह राहुल गांधी का आठवां दौरा है। इससे पहले वे 19-20 मई को दो दिवसीय उत्तर प्रदेश दौरे पर रायबरेली पहुंचे थे।

  • मेरठ के आसमान में 19-20 सितंबर को वायुसेना के नौ हॉक विमान दिखाएंगे हैरतअंगेज करतब

    मेरठ के आसमान में 19-20 सितंबर को वायुसेना के नौ हॉक विमान दिखाएंगे हैरतअंगेज करतब

    मेरठ। मेरठ के लिए 19 और 20 सितंबर 2026 ऐतिहासिक होने जा रहे हैं। भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम (SKAT) पहली बार शहर में हवाई प्रदर्शन करेगी। नौ लाल-सफेद हॉक एमके-132 विमान एक साथ आसमान में उतरेंगे और सटीक फॉर्मेशन के साथ लूप, बैरल रोल, उल्टी उड़ान और चर्चित ‘डीएनए’ फॉर्मेशन जैसे एरोबैटिक करतब दिखाएंगे। शहरवासियों को दो दिन आसमान में भारतीय वायुसेना की ताकत, अनुशासन और रोमांच का अनोखा नजारा देखने को मिलेगा।

    पांच मीटर से भी कम दूरी पर उड़ेंगे विमान
    सूर्यकिरण टीम के प्रदर्शन की सबसे बड़ी खासियत विमानों के बीच सटीक तालमेल है। नौ हॉक एमके-132 विमान बेहद कम दूरी पर एक साथ उड़ान भरते हुए फॉर्मेशन बनाएंगे। कई करतबों के दौरान विमानों के बीच की दूरी पांच मीटर से भी कम रहती है। इतनी कम दूरी पर उड़ान के लिए पायलटों के बीच जबरदस्त समन्वय, अनुशासन और भरोसे की जरूरत होती है।

    इन हॉक विमानों का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भारत में लाइसेंस के तहत किया है।

    तिरंगे के रंगों से रंगेगा आसमान

    मेरठ एयर शो का एक खास आकर्षण रंगीन धुएं से बनने वाली तिरंगे की छटा होगी। हॉक एमके-132 विमानों में भारतीय वायुसेना के नासिक स्थित बेस रिपेयर डिपो में विकसित किए गए स्मोक पॉड्स लगाए गए हैं। इनके जरिए विमान आसमान में केसरिया, सफेद और हरे रंग की धुएं की लकीरें छोड़ते हुए फॉर्मेशन बनाएंगे।

    1996 में हुआ था सूर्यकिरण का गठन

    सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम का गठन 1996 में हुआ था। टीम अब तक देशभर में 800 से ज्यादा हवाई प्रदर्शन कर चुकी है। इसके अलावा चीन, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, सिंगापुर, यूएई और दुबई के एयर शो में भी टीम भारतीय वायुसेना की पेशेवर क्षमता का प्रदर्शन कर चुकी है।

    सूर्यकिरण को भारतीय वायुसेना का ‘एंबेसडर’ भी कहा जाता है। इसके प्रदर्शन का उद्देश्य सिर्फ लोगों को रोमांचित करना नहीं, बल्कि युवाओं को वायुसेना और अन्य रक्षा सेवाओं में करियर बनाने के लिए प्रेरित करना भी है।

    ग्रुप कैप्टन अजय दशरथी संभालेंगे कमान

    सूर्यकिरण टीम की कमान Su-30 MKI पायलट ग्रुप कैप्टन अजय दशरथी संभाल रहे हैं। टीम के हर प्रदर्शन में उड़ान की सटीकता, अनुशासन, टीमवर्क और उत्कृष्टता को प्राथमिकता दी जाती है।

    अपने ही शहर के ऊपर उड़ेंगे मेरठ के पायलट

    मेरठ में होने वाला प्रदर्शन टीम के कुछ पायलटों के लिए व्यक्तिगत तौर पर भी बेहद खास होगा। मेरठ के रहने वाले स्क्वाड्रन लीडर अमन गोयल और स्क्वाड्रन लीडर राहुल सिंह अपने ही शहर के आसमान में सूर्यकिरण फॉर्मेशन का हिस्सा बनकर उड़ान भरेंगे।

    टीम के सदस्य स्क्वाड्रन लीडर शरद गोयल भी इस प्रदर्शन में उनके साथ मौजूद रहेंगे। अपने शहर के ऊपर सूर्यकिरण के फॉर्मेशन में उड़ान भरना इन पायलटों के लिए गौरव का क्षण होगा।

    युवाओं को मिलेगा वायुसेना को करीब से समझने का मौका

    सूर्यकिरण का प्रदर्शन केवल हवाई करतबों तक सीमित नहीं रहेगा। सशस्त्र बलों में करियर बनाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह भारतीय वायुसेना की कार्यशैली, अनुशासन और पेशेवर मानकों को करीब से समझने का अवसर भी होगा।

    दो दिन याद रखेगा मेरठ

    19 और 20 सितंबर को नौ हॉक विमान एक साथ आसमान में सटीक फॉर्मेशन बनाएंगे और तिरंगे के रंगों से आसमान को सजाएंगे। मेरठ में पहली बार होने वाला सूर्यकिरण का यह प्रदर्शन शहरवासियों के लिए यादगार अनुभव बनने की उम्मीद है।

    यह आयोजन मेरठ के लिए सिर्फ एक एयर शो नहीं होगा, बल्कि भारतीय वायुसेना के साहस और उत्कृष्टता के साथ शहर से जुड़े पायलटों की उपलब्धि का भी जश्न होगा।

  • मुजफ्फरनगर में रोडवेज बस ने 2 बाइकों को मारी टक्कर, 3 की मौत, 2 गंभीर घायल

    मुजफ्फरनगर में रोडवेज बस ने 2 बाइकों को मारी टक्कर, 3 की मौत, 2 गंभीर घायल


    मुजफ्फरनगर।
    मुजफ्फरनगर में बुढ़ाना थाना क्षेत्र के भैसाना के पास बड़ौत मार्ग पर बुधवार को भीषण सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार और अनियंत्रित रोडवेज बस ने आगे चल रही दो बाइकों को टक्कर मार दी। हादसे में दोनों बाइकों पर सवार पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान तीन लोगों की मौत हो गई। दो घायलों का उपचार जारी है। इनमें एक बच्चा भी है, जिसकी हालत नाजुक बताई जा रही है।

    टक्कर के बाद पांचों बाइक सवार घायल
    हादसा भैसाना के पास बड़ौत मार्ग पर हुआ। बताया जा रहा है कि रोडवेज बस अनियंत्रित होकर आगे चल रही दो बाइकों से जा भिड़ी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों बाइकों पर सवार पांचों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर आसपास के लोग जुट गए और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने एंबुलेंस की मदद से घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया। यहां उपचार के दौरान तीन घायलों ने दम तोड़ दिया।

    बच्चे की हालत गंभीर
    हादसे में घायल दो लोगों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। इनमें एक बच्चे की हालत गंभीर बनी हुई है। डॉक्टर उसकी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जानकारी में मृतकों के कांधला क्षेत्र के निवासी होने की बात सामने आई है। फिलहाल पुलिस उनकी पहचान की पुष्टि करने में जुटी है। पहचान सुनिश्चित होने के बाद परिजनों को सूचना दी जाएगी।

    बस चालक और हादसे की परिस्थितियों की जांच
    पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। टीम रोडवेज बस चालक से पूछताछ करने के साथ दुर्घटना की वजह और घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है। हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी भी जांच की जा रही है।

  • पटना में कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी कर रही युवती शराब की बोतलों के साथ पकड़ी गई, यूपी से ट्रेन में लाई थी खेप

    पटना में कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी कर रही युवती शराब की बोतलों के साथ पकड़ी गई, यूपी से ट्रेन में लाई थी खेप

    नई दिल्ली । बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद दूसरे राज्यों से शराब लाकर यहां पहुंचाने और बेचने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। इसी क्रम में राजधानी पटना में पुलिस ने शराब की बोतलों के साथ रिया नाम की एक युवती को पकड़ा है। पुलिस के मुताबिक, रिया कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी कर रही है और आरोप है कि वह उत्तर प्रदेश से ट्रेन के जरिए शराब लेकर पटना पहुंची थी। स्टेशन से बाहर निकलने के बाद वह बाइक से कहीं जा रही थी, इसी दौरान पुलिस ने उसे रोककर तलाशी ली।

    यह मामला पटना के कोतवाली थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। पुलिस को पहले ही सूचना मिली थी कि पटना जंक्शन के आसपास शराब की एक खेप पहुंचने वाली है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने स्टेशन और उसके आसपास निगरानी शुरू कर दी। कुछ समय बाद पुलिस ने बाइक से जा रही रिया और उसके साथ मौजूद युवकों को रोक लिया। तलाशी के दौरान रिया के हैंड बैग और शोल्डर बैग से अंग्रेजी शराब की कई बोतलें बरामद की गईं।

    पुलिस के अनुसार, बरामद शराब की कीमत करीब 14 हजार रुपये बताई जा रही है। उसके बैग से अलग-अलग ब्रांड की शराब की बोतलें मिलीं। शराब बरामद होने के बाद पुलिस ने युवती को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ शुरू की। पूछताछ में रिया ने कथित तौर पर बताया कि एक जानने वाले युवक ने उसे पैसे देने की बात कही थी। उसी के कहने पर वह उत्तर प्रदेश गई और वहां से शराब लेकर ट्रेन से पटना आई थी।

    रिया के अनुसार, शराब को पटना तक पहुंचाने के बदले उसे रुपये मिलने थे। हालांकि, पुलिस उसके इस बयान की भी जांच कर रही है। जांच का मुख्य बिंदु यह पता लगाना है कि शराब की खेप आखिर किस व्यक्ति तक पहुंचाई जानी थी और इस काम के पीछे कौन लोग जुड़े हुए हैं। पुलिस उस व्यक्ति की तलाश में भी जुटी है, जिसने कथित तौर पर रिया को शराब लाने का काम दिया था।

    पुलिस के मुताबिक, रिया पटना की रहने वाली है और कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी कर रही है। पूछताछ के दौरान उसने दावा किया कि वह पहली बार इस तरह के काम में शामिल हुई है। पुलिस अब उसके संपर्क में रहने वाले लोगों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

    शराब तस्करी से जुड़ा ऐसा ही एक मामला इससे पहले समस्तीपुर में भी सामने आया था। वहां नेहा नाम की एक युवती को शराब के साथ पकड़े जाने की बात सामने आई थी। आरोप था कि वह दिल्ली से ट्रेन के जरिए शराब लेकर बिहार पहुंच रही थी। पुलिस के अनुसार, उस समय उसके साथ उसका जीजा भी मौजूद था। जांच के दौरान शराब की सप्लाई से जुड़े कई लोगों के बारे में जानकारी सामने आने की बात कही गई थी। पटना के मौजूदा मामले में भी पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि रिया के जरिए शराब की खेप किस तक पहुंचाई जानी थी और उसके पीछे कौन लोग सक्रिय हैं।

  • कर्नाटक मंत्री सतीश जारकीहोली के परिसरों पर ED तलाशी से विवाद गहराया, डीके शिवकुमार ने एजेंसी के इस्तेमाल पर उठाए सवाल

    कर्नाटक मंत्री सतीश जारकीहोली के परिसरों पर ED तलाशी से विवाद गहराया, डीके शिवकुमार ने एजेंसी के इस्तेमाल पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।कर्नाटक में मंत्री सतीश जारकीहोली से जुड़े कई ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय की तलाशी के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए जांच एजेंसियों के कथित राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ईडी को जांच करनी है तो वह अपनी कार्रवाई कर सकती है और कांग्रेस इस तरह के कदमों से डरने वाली नहीं है।

    डीके शिवकुमार ने कार्रवाई के समय को लेकर भी सवाल उठाए। मुख्यमंत्री के मुताबिक, सरकार के 100 दिन पूरे होने से ठीक पहले सतीश जारकीहोली से जुड़े परिसरों पर यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसी की कार्रवाई का समय राजनीतिक लाभ को ध्यान में रखकर तय किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सतीश जारकीहोली जांच में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि ईडी को मामले की जांच करनी है तो वह अपना काम कर सकती है। शिवकुमार ने आरोप लगाया कि भाजपा जांच एजेंसियों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर रही है और इस तरह की कार्रवाई कांग्रेस को दबाव में नहीं ला सकती।

    ईडी की टीम ने सतीश जारकीहोली, उनकी बेटी और सांसद प्रियंका जारकीहोली सहित कुछ अन्य लोगों से जुड़े करीब 18 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इन परिसरों में बेंगलुरु और बेलगावी स्थित स्थान भी शामिल बताए गए हैं। तलाशी के दौरान अधिकारियों की ओर से दस्तावेजों और अन्य सामान की जांच की जा रही है।

    कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों की तैनाती भी की गई। अलग-अलग स्थानों पर चल रही तलाशी के बीच राज्य में इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री की ओर से भाजपा पर लगाए गए आरोपों के बाद मामला कर्नाटक की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।

    अधिकारियों के अनुसार, ईडी की मौजूदा कार्रवाई विदेशी मुद्रा से जुड़े नियमों के तहत दर्ज जांच से संबंधित है। यह जांच विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम यानी फेमा के प्रावधानों के तहत की जा रही है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई का संबंध किसी पुराने धनशोधन मामले से नहीं है।

    तलाशी अभियान के दौरान ईडी की टीम संबंधित परिसरों में उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य सामग्री की जांच कर रही है। जांच का केंद्र विदेशी मुद्रा से जुड़े नियमों के संभावित उल्लंघन से संबंधित पहलुओं पर है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार कार्रवाई के संबंध में सतीश जारकीहोली के परिवार या कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई अलग प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

    मामले ने कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को एक बार फिर तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कार्रवाई को राजनीतिक संदर्भ में देखते हुए भाजपा पर हमला बोला, जबकि ईडी की ओर से इसे फेमा के तहत चल रही जांच का हिस्सा बताया गया है। अब इस कार्रवाई से जुड़े दस्तावेजों और जांच के आगे बढ़ने के साथ मामले की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।