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  • भारत-बांग्लादेश के बीच फिर रेल सेवा शुरू करने की तैयारी….इसी सप्ताह हो सकती है बड़ी बैठक

    भारत-बांग्लादेश के बीच फिर रेल सेवा शुरू करने की तैयारी….इसी सप्ताह हो सकती है बड़ी बैठक


    नई दिल्ली।
    भारत और बांग्लादेश (India and Bangladesh) के तनावपूर्ण संबंधों (Strained Relations) के बीच जल्द एक खुशखबरी मिलने के आसार हैं। खबर है कि भारत और बांग्लादेश (India and Bangladesh) इस हफ्ते सीमा पार यात्री ट्रेन (Passenger Train) सेवाओं को फिर से शुरू करने पर चर्चा कर सकते हैं। ये सेवाएं 2024 में बांग्लादेश में हुई हिंसक अशांति के बाद से बंद हैं जिसके कारण प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

    अधिकारियों के अनुसार, बांग्लादेश रेलवे के अधिकारी मंगलवार से ढाका में अपने भारतीय अधिकारियों के साथ दो दिन की बैठक करेंगे। इसमें मैत्री, बंधन और मिताली एक्सप्रेस सेवाओं को फिर से शुरू करने और एक नया रेलमार्ग शुरू करने की संभावना पर चर्चा होगी।


    जान ले स्टॉपेज

    इस मामले से अवगत बांग्लादेश रेलवे के एक अधिकारी ने कहा, ‘हम कल से शुरू होने वाली IGRM यानी अंतर-सरकारी रेलवे बैठक में मैत्री, बंधन और मिताली एक्सप्रेस जैसी रेलवे सेवाओं को फिर से शुरू करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने वाले हैं।’ मैत्री एक्सप्रेस ढाका को कोलकाता से जोड़ती है, बंधन एक्सप्रेस खुलना को कोलकाता से जोड़ती है जबकि मिताली एक्सप्रेस पहले ढाका को न्यू जलपाईगुड़ी से जोड़ती थी। कोलकाता और न्यू जलपाईगुड़ी, दोनों पश्चिम बंगाल में हैं।


    किस मूड में है बांग्लादेश

    नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा कि बांग्लादेश देश के उत्तर-पश्चिम में स्थित राजशाही को कोलकाता से जोड़ने वाले एक नए रेल मार्ग का प्रस्ताव रख सकता है। बांग्लादेश की ओर से यह प्रस्ताव दिए जाने की भी संभावना है कि मैत्री एक्सप्रेस जमुना ब्रिज के बजाय हाल में बने पद्मा ब्रिज से होकर ढाका और कोलकाता के बीच चले।

    अधिकारी ने कहा, ‘अगर दोनों पक्ष सहमत होते हैं तो मैत्री, बंधन और मिताली एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन अगले महीने से फिर शुरू हो सकता है।’ उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय रेलवे अधिकारी भी इन सेवाओं को फिर से शुरू करने में रुचि रखते हैं।


    अब कैसे हैं रिश्ते

    भारत और बांग्लादेश ने सोमवार को द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की और ‘पारस्परिक विश्वास एवं आपसी लाभ के आधार पर भविष्य को ध्यान में रखते हुए मिलकर काम करने’ पर सहमति जताई। बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने यहां प्रधानमंत्री के सलाहकार मो इस्माइल जबीउल्ला से मुलाकात की और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों पर चर्चा की।

    भारतीय उच्चायोग ने उम्मीद जताई कि दोनों संप्रभु देश पारस्परिक विश्वास और आपसी फायदे के आधार पर भविष्य को ध्यान में रखते हुए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।

  • दिल्ली में भवन गिरने की घटनाओं में कमेंटियां बनी, जांच हुई, पर जवाबदेही अब तक तय नहीं… MCD की व्यवस्था पर उठे सवाल

    दिल्ली में भवन गिरने की घटनाओं में कमेंटियां बनी, जांच हुई, पर जवाबदेही अब तक तय नहीं… MCD की व्यवस्था पर उठे सवाल


    नई दिल्ली।
    दिल्ली (Delhi) में भवन गिरने के हादसों (Building Collapse Accidents) के बाद जांच समितियां (Inquiry Committees) गठित करने और रिपोर्ट तैयार करने का सिलसिला पुराना है। जांच रिपोर्टों में कई बार एमसीडी की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे और अधिकारियों की लापरवाही सामने आई, लेकिन हर मामले में कार्रवाई का परिणाम एक जैसा नहीं रहा। कहीं अधिकारियों को निलंबित किया गया, कहीं विभागीय कार्रवाई शुरू हुई और कहीं पूरी जिम्मेदारी से ही मुक्त कर दिया गया। इससे हादसों के बाद जवाबदेही तय करने की एमसीडी की व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।

    27 सितंबर 2011 को चांदनी महल में इमारत गिरने से सात लोगों की मौत और 23 लोग घायल हुए। एमसीडी की जांच रिपोर्ट में अनधिकृत निर्माण और भवन की उम्र से संरचना कमजोर होने की बात सामने आई। रिपोर्ट में आठ एमसीडी अधिकारियों को अनधिकृत निर्माण की अनुमति देने का दोषी माना गया और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई। रिपोर्ट में 30 साल से अधिक पुरानी इमारतों के लिए संरचनात्मक स्थिरता प्रमाणपत्र अनिवार्य करने और खतरनाक भवनों की पहचान के लिए नीति बनाने की सिफारिश भी की गई।

    तीन दिसंबर 2011 को उत्तम नगर में भवन गिरने से चार लोगों की मौत हुई। जांच में सामने आया कि पड़ोसी भूखंड में नींव के पास की गई खोदाई से ढांचे की नींव प्रभावित हुई थी। एमसीडी आयुक्त ने भवन विभाग के सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता को निलंबित कर सतर्कता जांच के आदेश दिए। वहीं 30 मार्च 2012 को करोलबाग के प्रसाद नगर में भवन गिरने से चार लोगों की मौत हुई। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की जांच में विशेषज्ञों ने हादसे का मुख्य कारण कमजोर संरचनात्मक डिजाइन और कंक्रीट की अपर्याप्त मजबूती बताया। आयोग ने एमसीडी अधिकारियों की लापरवाही, निष्क्रियता और निर्माण रोकने में विफलता को स्पष्ट रूप से दर्ज किया।

    18 जुलाई 2015 को विष्णु गार्डन में भवन गिरने से पांच लोगों की मौत हुई। शुरुआत में एमसीडी ने सीवर लाइन से रिसाव को नींव कमजोर होने का कारण बताया और तीन अभियंताओं को निलंबित किया। बाद की जांच में दो या उससे अधिक अतिरिक्त मंजिलों के निर्माण को लेकर भवन विभाग के जेई, एई और ईई को प्रथमदृष्टया लापरवाही और कर्तव्य में चूक के लिए जिम्मेदार माना गया। हालांकि अतिरिक्त मंजिलें किस अवधि में बनीं, यह निश्चित नहीं हो सका, इसलिए सतर्कता विभाग को आगे जांच की जिम्मेदारी दी गई।

    13 सितंबर 2021 को सब्जी मंडी-मलकागंज में भवन गिरने से दो बच्चों की मौत हुई। एमसीडी की तीन सदस्यीय जांच समिति ने उपायुक्त और तीन अभियंताओं समेत चार अधिकारियों को जिम्मेदार नहीं माना। रिपोर्ट के अनुसार भवन को पहले खतरनाक घोषित नहीं किया गया था। वहीं 30 मई 2026 को सैदुल्लाजाब में भवन गिरने से छह लोगों की मौत हुई और 14 लोग घायल हुए। मजिस्ट्रेट जांच की रिपोर्ट में हादसे को रोके जा सकने योग्य बताया गया। रिपोर्ट में अवैध निर्माण पर कार्रवाई न करने, शिकायतों पर ध्यान न देने और निरीक्षण से जुड़े रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए।

  • कोलकाता बुलाया, पेपर की जानकारी दी और लाखों वसूले, झारखंड CGL लीक केस में पटना से आरोपी गिरफ्तार

    कोलकाता बुलाया, पेपर की जानकारी दी और लाखों वसूले, झारखंड CGL लीक केस में पटना से आरोपी गिरफ्तार


    पटना। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा के पेपर लीक मामले (Paper leak cases) में जांच आगे बढ़ने के साथ एक और आरोपी पुलिस के शिकंजे में आ गया है। झारखंड CID की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने पटना से राजन कुमार को गिरफ्तार किया है। राजन पटना में कारोबार करता है। जांच के दौरान रैकेट से उसके कथित जुड़ाव के संकेत मिलने के बाद CID की टीम काफी समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थी।

    परीक्षार्थियों को कोलकाता बुलाने का आरोप
    जांच में सामने आया है कि राजन कुमार ने कथित तौर पर कई परीक्षार्थियों को कोलकाता बुलाया था। आरोप है कि वहां उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र से जुड़ी जानकारी दी गई और संभावित सवालों के जवाब बताए गए। इसके बदले परीक्षार्थियों से मोटी रकम वसूलने का भी आरोप है।

    CID को आशंका थी कि राजन पेपर लीक से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा है। टीम ने उसकी गतिविधियों पर निगरानी के साथ मामले से जुड़े सबूत जुटाए। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद SIT ने पटना पहुंचकर उसे हिरासत में लिया और पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया।

    पेपर सेट करने वाली एजेंसी से कनेक्शन की जांच
    पूरे मामले में ICN एजेंसी का नाम भी सामने आया है, जिसे परीक्षा का पेपर सेट करने वाली एजेंसी बताया जा रहा है। जांच के मुताबिक, राजन कुमार को ICN एजेंसी से जुड़े मिथिलेश सिंह का करीबी माना जाता है। इसी कथित संपर्क के जरिए राजन तक परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

    अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर लीक के इस नेटवर्क में राजन के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही CID मिथिलेश सिंह की कथित भूमिका और राजन के साथ उसके संबंधों की भी पड़ताल कर रही है।

    नेटवर्क के दूसरे लोगों तक पहुंचने की कोशिश
    CID की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र की जानकारी किस स्तर से बाहर निकली और इसे परीक्षार्थियों तक पहुंचाने में किन लोगों ने मदद की। जांच एजेंसी को आशंका है कि रैकेट का नेटवर्क राजन कुमार और मिथिलेश सिंह तक सीमित नहीं है। पूछताछ और आगे की जांच के आधार पर इस मामले में आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।

  • ‘बंगाली अपनी पसंद का खाना खाएंगे’, धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर BJP प्रदेश अध्यक्ष का पलटवार

    ‘बंगाली अपनी पसंद का खाना खाएंगे’, धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर BJP प्रदेश अध्यक्ष का पलटवार


    नई दिल्ली। दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन को लेकर बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि बंगाल से बाहर का कोई व्यक्ति राज्य के लोगों के खान-पान और पहनावे को लेकर फैसला नहीं सुना सकता। उनके मुताबिक बंगाल की अपनी सांस्कृतिक परंपराएं हैं और लोगों की भोजन संबंधी आदतों को किसी के कहने पर नहीं बदला जा सकता।

    धीरेंद्र शास्त्री ने हाल में कहा था कि जो लोग खुद को धार्मिक बताते हैं, लेकिन दुर्गा पूजा पंडाल के पीछे मांसाहारी भोजन बनाते हैं, उन्हें धार्मिक नहीं बल्कि पाखंडी कहा जाना चाहिए। उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान बंगालियों से मांसाहारी भोजन छोड़ने की अपील भी की थी। इसी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए समिक भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल की परंपराओं और खान-पान को बाहर से आकर तय नहीं किया जा सकता।

    ‘बंगाली वही खाएंगे जो खाते आए हैं’

    समिक भट्टाचार्य ने कहा, “मुझे अपनी मर्जी से जीने दें, बंगाली वहीं खाएंगे जो वे खाते आए हैं। क्या बंगाली मछली और मांस नहीं खा सकते?”

    उन्होंने बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि मां काली को बकरे और मांस का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा रही है। उनके मुताबिक अष्टमी पर लुची (पूरी) और नवमी पर बकरे का मांस खाने की भी बंगाल में पुरानी सांस्कृतिक परंपरा है।

    भट्टाचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम अष्टमी पर लुची (पूरी) और नवमी पर बकरे का मांस खाना जारी रखेंगे। कोई भी बंगाल के लोगों को ये नहीं बता सकता कि उन्हें क्या खाना चाहिए।”

    धीरेंद्र शास्त्री का सम्मान, लेकिन राय थोपने के खिलाफ

    बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वह धीरेंद्र शास्त्री का सम्मान करते हैं, लेकिन उनकी व्यक्तिगत राय को पूरे बंगाली समाज पर लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कोई संत या डॉक्टर लोगों को शाकाहारी भोजन अपनाने की सलाह दे सकता है, लेकिन किसी बाहरी व्यक्ति को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि बंगाल के लोग क्या खाएं या क्या पहनें।

    इस बयान के साथ ही दुर्गा पूजा के दौरान खान-पान को लेकर शुरू हुई बहस ने बंगाल की स्थानीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को लेकर राजनीतिक रंग भी ले लिया है।

  • ‘स्वच्छ वायु’ में दिल्ली ने मारी बड़ी छलांग, श्रीनगर-बेंगलुरु समेत कई बड़े शहर पीछे, इंदौर दूसरे स्‍थान पर

    ‘स्वच्छ वायु’ में दिल्ली ने मारी बड़ी छलांग, श्रीनगर-बेंगलुरु समेत कई बड़े शहर पीछे, इंदौर दूसरे स्‍थान पर


    नई दिल्ली।
    सर्दियों में जहरीली हवा और 400 के पार पहुंचने वाले AQI के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाली दिल्ली ने ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026’ में चौंकाने वाला प्रदर्शन किया है। 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों की श्रेणी में राजधानी ने 172 अंक के साथ 21वां स्थान हासिल किया है। खास बात यह है कि इस रैंकिंग में दिल्ली ने श्रीनगर, बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे कई बड़े शहरों को पीछे छोड़ दिया।

    केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जारी सर्वेक्षण में दिल्ली और विशाखापत्तनम को संयुक्त रूप से 21वां स्थान मिला। श्रीनगर 162.6 अंक के साथ 26वें, जबकि बेंगलुरु 152.6 अंक के साथ 32वें स्थान पर रहा। मुंबई को 160.8 अंक मिले और वह 28वें स्थान पर रही। चेन्नई 35वें और कोलकाता 38वें स्थान पर रहा।

    हालांकि, दिल्ली की बेहतर रैंकिंग का मतलब यह नहीं है कि राजधानी की हवा इन शहरों से ज्यादा साफ हो गई है। दरअसल, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में केवल वास्तविक वायु गुणवत्ता को नहीं देखा जाता, बल्कि प्रदूषण कम करने के लिए शहरों की ओर से किए जा रहे प्रयासों और उनके अमल का भी मूल्यांकन किया जाता है।

    प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों पर मिलते हैं अंक

    सर्वेक्षण में सड़क की धूल पर नियंत्रण, ठोस कचरा प्रबंधन, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के उपाय, औद्योगिक उत्सर्जन की निगरानी, निर्माण एवं ध्वस्तीकरण से निकलने वाले मलबे के प्रबंधन और जन-जागरूकता जैसे कई मानकों को शामिल किया जाता है।

    यही कारण है कि किसी शहर की हवा खराब होने के बावजूद यदि वह प्रदूषण नियंत्रण के लिए बेहतर योजनाएं लागू करता है तो उसे रैंकिंग में फायदा मिल सकता है। इसलिए दिल्ली की 21वीं रैंक को उसकी वायु गुणवत्ता का सीधा प्रमाण मानना सही नहीं होगा।

    लखनऊ नंबर-1, इंदौर दूसरे और जबलपुर तीसरे नंबर पर

    10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की सूची में लखनऊ 198 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा। मध्य प्रदेश का इंदौर 197 अंक लेकर दूसरे और जबलपुर 195 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

    भोपाल और आगरा दोनों को 192-192 अंक मिले और वे संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर रहे। यहां यह समझना जरूरी है कि स्वच्छता सर्वेक्षण और स्वच्छ वायु सर्वेक्षण अलग-अलग मानकों पर आधारित होते हैं। इसलिए किसी शहर की दोनों रैंकिंग की सीधे तुलना नहीं की जा सकती।

    इन शहरों से आगे निकली दिल्ली

    दिल्ली की 21वीं रैंकिंग कई प्रमुख शहरों से बेहतर रही। पटना 178 अंकों के साथ 16वें और हैदराबाद 19वें स्थान पर रहा। विशाखापत्तनम दिल्ली के साथ संयुक्त रूप से 21वें स्थान पर रहा।

    इसके बाद मुंबई 28वें, बेंगलुरु 32वें, चेन्नई 35वें और कोलकाता 38वें स्थान पर रहा। यानी राजधानी ने मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता को पीछे छोड़ दिया, हालांकि पटना और हैदराबाद उससे आगे रहे।

    एक साल में 11 पायदान ऊपर पहुंची राजधानी

    दिल्ली के प्रदर्शन में पिछले साल के मुकाबले भी सुधार दर्ज हुआ है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2025 में दिल्ली 32वें स्थान पर थी और उसका स्कोर 157.3 था। इस बार राजधानी का स्कोर बढ़कर 172 हो गया और रैंकिंग 21वें स्थान तक पहुंच गई।

    इस तरह दिल्ली ने एक साल में 11 पायदान की छलांग लगाई है। यह प्रदूषण नियंत्रण के उपायों में सुधार का संकेत जरूर है, लेकिन राजधानी की वास्तविक वायु गुणवत्ता अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

    PM2.5 और PM10 की स्थिति अब भी चिंताजनक

    केंद्र सरकार ने 2025 को दिल्ली के लिए 2018 के बाद का सबसे बेहतर साल बताया था, हालांकि कोविड-19 से प्रभावित 2020 को इसमें अलग रखा गया था। इसके बावजूद राजधानी में वार्षिक औसत PM10 का स्तर 198 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और PM2.5 का स्तर 97 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया।

    इसके मुकाबले राष्ट्रीय वार्षिक मानक PM10 के लिए 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और PM2.5 के लिए 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। यानी रैंकिंग में सुधार के बावजूद दिल्ली में प्रदूषण का स्तर निर्धारित मानकों से काफी ऊपर बना हुआ है।

    सर्दियों में फिर लागू करना पड़ा था GRAP-IV

    दिल्ली की प्रदूषण समस्या की गंभीरता 2025-26 की सर्दियों में भी देखने को मिली। जनवरी 2026 में वायु गुणवत्ता बेहद खराब होने के बाद राजधानी में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज-IV लागू करना पड़ा था।

    राजधानी में वायु प्रदूषण के पीछे कई कारण एक साथ काम करते हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियां, सड़क की धूल, मौसम की स्थिति और पराली का धुआं मिलकर सर्दियों में स्थिति को और गंभीर बना देते हैं।

    रैंकिंग बढ़ी, लेकिन साफ हवा की चुनौती कायम

    स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में दिल्ली की 21वीं रैंक निश्चित रूप से यह बताती है कि प्रदूषण से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों और उनके क्रियान्वयन में सुधार हुआ है। लेकिन इसे राजधानी की हवा साफ होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    असल कामयाबी तब होगी, जब दिल्ली का PM2.5 और PM10 स्तर लगातार राष्ट्रीय मानकों के करीब पहुंचे और सर्दियों में AQI 400 के पार जाने वाली स्थिति पर प्रभावी तरीके से रोक लगे। फिलहाल दिल्ली ने रैंकिंग में जरूर छलांग लगाई है, लेकिन राजधानी के सामने स्वच्छ हवा की असली परीक्षा अभी बाकी है।

  • अदाणी पावर का ईएसजी स्कोर बढ़कर 66 अंक हुआ, एनएसई सस्टेनेबिलिटी ने कंपनी की ‘एस्पायरिंग’ रेटिंग बरकरार रखी

    अदाणी पावर का ईएसजी स्कोर बढ़कर 66 अंक हुआ, एनएसई सस्टेनेबिलिटी ने कंपनी की ‘एस्पायरिंग’ रेटिंग बरकरार रखी

    नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी निजी ताप विद्युत उत्पादक कंपनी अदाणी पावर लिमिटेड ने सोमवार को बताया कि उसके पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन यानी ईएसजी प्रदर्शन में सुधार दर्ज किया गया है। कंपनी का ईएसजी स्कोर पिछले मूल्यांकन के 65 अंक से बढ़कर 66 अंक हो गया है। कंपनी के अनुसार, इस सुधार के साथ उसने भारतीय ताप विद्युत, मिश्रित ईंधन और एकीकृत ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के बीच अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखी है।

    कंपनी को एनएसई सस्टेनेबिलिटी के नवीनतम आकलन में एक बार फिर ‘एस्पायरिंग’ श्रेणी में रखा गया है। एनएसई सस्टेनेबिलिटी सेबी-पंजीकृत ईएसजी रेटिंग प्रदाता और एनएसई इंडिसीज की सहायक कंपनी है। यह सूचीबद्ध कंपनियों के पर्यावरणीय, सामाजिक और प्रशासनिक प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है।

    अदाणी पावर के अनुसार, ईएसजी स्कोर में हुआ सुधार स्थिरता से जुड़ी पहलों और परिचालन दक्षता बढ़ाने के प्रयासों का परिणाम है। कंपनी ने बताया कि उसने अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक वाले कम उत्सर्जन संयंत्रों के उपयोग को बढ़ाया है। इसके साथ लगातार उत्सर्जन की निगरानी करने वाली प्रणालियों, ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों, जल संरक्षण उपायों और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी पहलों को भी मजबूत किया गया है।

    सामाजिक क्षेत्र में कंपनी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास पर केंद्रित कई कार्यक्रम चलाए हैं। इनमें आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य शिविर और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका बढ़ाने वाली परियोजनाएं शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक इन पहलों का उद्देश्य उसके परिचालन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले समुदायों के जीवन स्तर में सुधार करना है।

    एनएसई सस्टेनेबिलिटी हर वर्ष भारत की 500 सूचीबद्ध कंपनियों का मूल्यांकन करता है। इसके माध्यम से निवेशकों और अन्य हितधारकों को कंपनियों की दीर्घकालिक मूल्य सृजन क्षमता तथा ईएसजी प्रदर्शन का स्वतंत्र आकलन उपलब्ध कराया जाता है।

    सुशासन के क्षेत्र में अदाणी पावर ने बताया कि उसकी विभिन्न बोर्ड समितियों में स्वतंत्र निदेशकों का प्रतिनिधित्व नियामकीय आवश्यकताओं से अधिक है। कंपनी ने अपनी आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े आपूर्तिकर्ताओं और ठेकेदारों के लिए भी ईएसजी मानकों को अपनाने की बात कही है। इसके पीछे पूरे कारोबारी तंत्र में जिम्मेदार कारोबारी प्रथाओं को बढ़ावा देने का उद्देश्य बताया गया है।

    कंपनी को हाल के वर्षों में कई अन्य वैश्विक और घरेलू स्थिरता रेटिंग्स भी मिली हैं। अदाणी पावर को एसएंडपी ग्लोबल कॉरपोरेट सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट में 100 में से 71 अंक मिले हैं। वहीं एफटीएसई रसेल ने कंपनी को 5 में से 4.3 अंक की रेटिंग दी है।

    इसके अलावा वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केयरएज ईएसजी रेटिंग्स ने अदाणी पावर को 100 में से 80 अंक दिए हैं। इस स्कोर के आधार पर कंपनी को एजेंसी की ‘लीडरशिप’ श्रेणी में रखा गया है, जिसे उद्योग के औसत स्तर से ऊपर माना जाता है।

    अदाणी पावर के अनुसार ये रेटिंग्स उसके कारोबार और दीर्घकालिक विकास रणनीति में स्थिरता संबंधी सिद्धांतों को शामिल करने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। वहीं शेयर बाजार में सोमवार को एनएसई पर अदाणी पावर का शेयर 204.40 रुपये पर बंद हुआ।

  • राजनीतिक मतभेदों के बीच महिलाओं के सम्मान पर समझौता नहीं, तृषा विवाद के बाद विजय ने आपत्तिजनक भाषा के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया

    राजनीतिक मतभेदों के बीच महिलाओं के सम्मान पर समझौता नहीं, तृषा विवाद के बाद विजय ने आपत्तिजनक भाषा के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया

    नई दिल्ली । तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने महिलाओं के खिलाफ की जाने वाली अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। विधानसभा में सोमवार को उन्होंने स्पष्ट कहा कि राजनीति में विचारों और नीतियों को लेकर तीखी बहस हो सकती है, लेकिन किसी महिला के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली भाषा को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा और सफलता में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में महिलाओं के खिलाफ गलत, गंदी या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल उन्हें स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने राजनीतिक विरोध और व्यक्तिगत अपमान के बीच अंतर बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।

    विजय का यह बयान अभिनेत्री तृषा कृष्णन से जुड़े हालिया विवाद के बीच सामने आया है। इस विवाद ने तमिलनाडु की राजनीति में भी काफी चर्चा पैदा की है। मामले को लेकर विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम यानी टीवीके की ओर से विरोध दर्ज कराया गया था।

    विवाद की शुरुआत कावेरी नदी के पानी के बंटवारे से जुड़े राजनीतिक मुद्दे को लेकर हुई बहस के दौरान हुई। डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने तमिलनाडु सरकार को इस मुद्दे पर घेरा था। इसी दौरान अभिनेत्री तृषा कृष्णन को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी ने राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया।

    इसके बाद टीवीके कार्यकर्ताओं ने मामले के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया था। बाद में इस कार्रवाई को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी और संबंधित लोगों की रिहाई हुई। पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक बयानबाजी में भाषा और मर्यादा को लेकर नई बहस छेड़ दी।

    मुख्यमंत्री विजय ने अपने बयान के जरिए यह संकेत देने की कोशिश की कि राजनीतिक असहमति लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन महिलाओं को निशाना बनाकर आपत्तिजनक टिप्पणी करना अलग विषय है। उनका कहना है कि राजनीतिक नेताओं के बीच आलोचना और बहस हो सकती है, मगर व्यक्तिगत गरिमा और महिलाओं के सम्मान की सीमा नहीं टूटनी चाहिए।

    इसी विवाद से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने उद्यमी प्रवीन गणेशन को गिरफ्तार किया है। 35 वर्षीय गणेशन हांगकांग से भारत लौट रहे थे। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया, जिसके बाद उन्हें पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

    गणेशन ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उनके खिलाफ जून में किए गए एक पोस्ट को लेकर लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया था। उनका कहना है कि संबंधित पोस्ट बाद में हटा दिया गया था। इसके बावजूद मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

    तृषा कृष्णन से जुड़ा विवाद अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि साइबर अपराध और कानूनी कार्रवाई का विषय भी बन चुका है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच विजय का विधानसभा में दिया गया बयान महिलाओं के सम्मान को लेकर उनकी पार्टी और सरकार के रुख को सामने रखता है।

    तमिलनाडु की राजनीति में टीवीके के सत्ता में आने के बाद राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का माहौल भी तेज हुआ है। ऐसे में महिला सम्मान, सार्वजनिक बयानबाजी और सोशल मीडिया पर की जाने वाली टिप्पणियों को लेकर नेताओं तथा राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भूमिका पर भी नजर बनी हुई है। मुख्यमंत्री विजय ने साफ किया है कि राजनीतिक संघर्ष अपनी जगह है, लेकिन महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।

  • सत्य निकेतन इमारत हादसे में मृतकों की संख्या सात पहुंची, मालिक गिरफ्तार, MCD के पांच अधिकारी निलंबित हादसे के बाद

    सत्य निकेतन इमारत हादसे में मृतकों की संख्या सात पहुंची, मालिक गिरफ्तार, MCD के पांच अधिकारी निलंबित हादसे के बाद

    नई दिल्ली । दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने की दर्दनाक घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। मलबा हटाने के दौरान एक और शव बरामद होने के बाद मौतों का आंकड़ा सात पहुंचा। हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी रहा। मलबे के नीचे फंसे लोगों की तलाश और घटनास्थल को सुरक्षित करने के लिए बचाव दलों ने काफी प्रयास किया।

    जानकारी के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वालों में मध्य प्रदेश के दो छात्र भी शामिल हैं। कटनी निवासी 18 वर्षीय अक्षत यादव दिल्ली में रहकर PGDI कोर्स कर रहा था। हादसे के बाद उसका शव मलबे से बरामद किए गए पांचवें शव के रूप में पहचाना गया। अक्षत की मौत की खबर सामने आने के बाद उसके परिवार में मातम छा गया। परिजन दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं और पहचान तथा अन्य जरूरी प्रक्रियाओं के लिए मध्य प्रदेश पुलिस की टीम भी अस्पताल पहुंची।

    हादसे में अर्पित नाम के एक अन्य छात्र की भी मौत हुई है। दोनों छात्रों के परिवारों के लिए यह घटना बेहद दुखद रही। हादसे के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश और चिंता का माहौल है। प्रशासन की ओर से बचाव कार्य के साथ मृतकों की पहचान और उनके परिवारों तक सूचना पहुंचाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई।

    शुरुआती जांच में पुलिस को आशंका है कि इमारत के बेसमेंट में चल रहे निर्माण कार्य के कारण उसकी नींव कमजोर हुई होगी। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस निर्माण गतिविधियों, भवन की स्थिति और उससे जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही है। यह भी देखा जा रहा है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

    मामले में पुलिस ने फरार चल रहे इमारत मालिक हरिराम बंसल गुप्ता को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे हादसे से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ कर रही है। जांच में निर्माण कार्य की प्रकृति और इमारत की संरचनात्मक स्थिति से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है।

    हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने भी प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की है। MCD के पांच अधिकारियों को निलंबित किया गया है। निलंबित अधिकारियों में डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, SE रणवीर सिंह और EE ललित कुमार गोयल समेत पांच अधिकारी शामिल हैं। अधिकारियों के खिलाफ यह कार्रवाई हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    सत्य निकेतन की घटना ने निर्माणाधीन या पुराने भवनों में सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण गतिविधियों की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रशासन अब हादसे की परिस्थितियों की जांच के साथ यह भी पता लगाने में जुटा है कि निर्माण कार्य के दौरान निर्धारित नियमों और सुरक्षा प्रावधानों का पालन किया गया था या नहीं। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद हादसे के लिए जिम्मेदारी और आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला, सत्य निकेतन हादसे के बाद बिना मंजूरी बनी पांच मंजिला इमारतों पर कार्रवाई तय

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला, सत्य निकेतन हादसे के बाद बिना मंजूरी बनी पांच मंजिला इमारतों पर कार्रवाई तय

    नई दिल्ली । दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए बिल्डिंग हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे के बाद बड़ा आदेश जारी करते हुए बिना मंजूरी के पांच मंजिला बनी इमारतों को सील करने के निर्देश दिए हैं। सरकार के इस फैसले के बाद ऐसी इमारतों पर कार्रवाई की जाएगी, जिनका पांच मंजिला निर्माण बिना आवश्यक मंजूरी के किया गया है।

    सत्य निकेतन में हुए बिल्डिंग हादसे के बाद राजधानी में इमारतों के निर्माण और मंजूरी से जुड़े नियमों को लेकर प्रशासन की कार्रवाई तेज होने की बात सामने आई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बिना मंजूरी बनी पांच मंजिला इमारतों को सील करने का आदेश दिया है।

    सरकार के आदेश के मुताबिक जिन इमारतों का निर्माण बिना मंजूरी के पांच मंजिल तक किया गया है, उन्हें अब सील किया जाएगा। इस कार्रवाई का सीधा संबंध सत्य निकेतन में हुए बिल्डिंग हादसे के बाद सामने आई स्थिति से है। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद बिना मंजूरी तैयार की गई ऐसी इमारतों की पहचान कर उन्हें सील करने की कार्रवाई की जाएगी।

    सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद यह सरकारी कदम सामने आया है। घटना ने इमारतों के निर्माण से जुड़े नियमों और आवश्यक मंजूरी के पालन को लेकर गंभीरता बढ़ा दी है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बिना मंजूरी के पांच मंजिला बनी इमारतों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

    सरकार की ओर से लिए गए इस फैसले में विशेष रूप से उन इमारतों को शामिल किया गया है, जो बिना मंजूरी के पांच मंजिला बनाई गई हैं। ऐसी इमारतों को सील करने के आदेश के बाद संबंधित स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। सत्य निकेतन हादसे के बाद सरकार का यह कदम भवन निर्माण से जुड़े नियमों के पालन को लेकर सख्त रुख के तौर पर सामने आया है।

    सत्य निकेतन में हुए बिल्डिंग हादसे के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट रूप से कार्रवाई का आदेश दिया है। हादसे से जुड़ी स्थिति के बीच सरकार ने बिना मंजूरी के तैयार पांच मंजिला इमारतों पर कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। इसके तहत ऐसी इमारतों को सील किया जाएगा।

    इस आदेश के बाद राजधानी में बिना आवश्यक मंजूरी के पांच मंजिला बनी इमारतों को लेकर कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। सरकार का यह निर्णय सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद लिया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार बिना मंजूरी बनी ऐसी इमारतों को सील किया जाना है।

    सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार की ओर से उठाया गया यह कदम फिलहाल बिना मंजूरी के पांच मंजिला बनी इमारतों पर केंद्रित है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के आदेश के तहत संबंधित इमारतों को सील करने की कार्रवाई की जाएगी। हादसे के बाद सरकार ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए यह निर्णय लिया है।

  • गुवाहाटी में पत्नी की हत्या के बाद सिर फ्रिज में छिपाने का मामला, रिया तालुकदार की मौत की जांच में जुटी पुलिस

    गुवाहाटी में पत्नी की हत्या के बाद सिर फ्रिज में छिपाने का मामला, रिया तालुकदार की मौत की जांच में जुटी पुलिस

    नई दिल्ली । असम की राजधानी गुवाहाटी के हाटीगांव इलाके से महिला की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक महिला की हत्या के बाद उसके सिर को अलग कर फ्रिज में छिपाए जाने की बात सामने आई है। महिला की उंगलियां भी काटे जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में पुलिस ने आरोपी पति रामानुजन गोस्वामी को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल हत्या के पीछे की सटीक वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है और पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

    पूरा मामला गुवाहाटी के हाटीगांव इलाके के बसिष्ठपुर बाइलेन का बताया गया है। मृतका की पहचान नूनमती की रहने वाली रिया तालुकदार के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार रामानुजन गोस्वामी ने पहले पत्नी की हत्या की और इसके बाद उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। सिर को काले पॉलीथीन में रखकर फ्रिज के भीतर छिपा दिया गया था। महिला की उंगलियां भी काटे जाने की बात सामने आई है।

    पुलिस के शुरुआती अनुमान के मुताबिक महिला की हत्या शव बरामद होने से करीब 24 से 48 घंटे पहले की गई थी। हालांकि, हत्या की वास्तविक वजह अभी साफ नहीं हुई है। पुलिस आरोपी पति की भूमिका सहित घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही है। महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच की आगे की कार्रवाई के बाद मामले में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

    पुलिस के अनुसार मृतका रिया फैंसी बाजार के एसी मार्केट इलाके में स्थित एक बुटीक में काम करती थी। उसके माता-पिता नहीं थे और परिवार में उसका केवल एक भाई है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि सोमवार को रिया और उसके पति के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस हुई थी। इसके बाद रामानुजन रात करीब आठ बजे घर से निकल गया था।

    मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब पड़ोसियों को घर से तेज दुर्गंध आने लगी। उन्हें शक हुआ तो उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घर की तलाशी ली। तलाशी के दौरान महिला की हत्या से जुड़ी भयावह जानकारी सामने आई।

    पुलिस के अनुसार महिला की हत्या बेहद क्रूर तरीके से की गई थी। हत्या के बाद उसके सिर को धड़ से अलग कर दिया गया था। इसके बाद सिर को काले पॉलीथीन बैग में रखकर फ्रिज के अंदर छिपाया गया था। महिला की उंगलियां भी काटे जाने की बात सामने आई है।

    फिलहाल पुलिस घटना की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। हत्या के पीछे क्या कारण था, इसे लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और उपलब्ध जानकारी के आधार पर घटना से जुड़े सभी पहलुओं को समझने का प्रयास किया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ जांच आगे बढ़ने पर हत्या की परिस्थितियों और इसके कारण को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।