Category: National

  • INSAT ने दिखाया मानसून का दम भारत के दो तिहाई हिस्से पर बादलों का कब्जा तेज बारिश और तूफान के संकेत

    INSAT ने दिखाया मानसून का दम भारत के दो तिहाई हिस्से पर बादलों का कब्जा तेज बारिश और तूफान के संकेत


    नई दिल्ली। देशभर में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। इसरो के मौसम उपग्रह INSAT 3DR से मिली ताजा तस्वीरों ने साफ संकेत दिए हैं कि भारत का लगभग दो तिहाई हिस्सा घने मानसूनी बादलों से ढक चुका है। जम्मू कश्मीर से लेकर गंगा के मैदानी इलाकों बिहार पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों तक बादलों का घना फैलाव दिखाई दे रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह स्थिति आने वाले दिनों में कई राज्यों में तेज बारिश आंधी और कहीं कहीं अत्यधिक वर्षा का कारण बन सकती है।

    19 जुलाई को जारी सैटेलाइट इमेज के विश्लेषण के अनुसार देश के करीब 60 से 70 प्रतिशत भूभाग पर बादलों का प्रभाव देखा गया। सबसे घने बादल पंजाब उत्तर प्रदेश बिहार और पश्चिम बंगाल के ऊपर मौजूद हैं जबकि पूर्वोत्तर के लगभग सभी राज्य बादलों की मोटी परत से ढके हुए हैं। दक्षिण भारत में भी अरब सागर से आने वाली नम हवाओं के कारण लंबी बादल पट्टियां सक्रिय दिखाई दे रही हैं। हालांकि पश्चिमी राजस्थान और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में अपेक्षाकृत साफ मौसम बना हुआ है।

    INSAT 3DR भारत का अत्याधुनिक मौसम निगरानी उपग्रह है जो पृथ्वी से लगभग 36 हजार किलोमीटर ऊपर भू स्थिर कक्षा में रहकर लगातार मौसम पर नजर रखता है। यह हर आधे घंटे में नई तस्वीरें भेजता है जिनका उपयोग भारतीय मौसम विभाग मौसम का पूर्वानुमान तैयार करने के लिए करता है। उपग्रह के विजिबल और थर्मल इंफ्रारेड सेंसर बादलों की मोटाई ऊंचाई और तापमान का विश्लेषण करते हैं जिससे यह पता लगाया जाता है कि किस क्षेत्र में सामान्य बादल हैं और कहां खतरनाक तूफानी बादल विकसित हो रहे हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार क्लाउड टॉप ब्राइटनेस टेम्परेचर यानी बादलों की ऊपरी सतह का तापमान मौसम का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक होता है। जितना अधिक ठंडा बादल का ऊपरी हिस्सा होगा उतना ही ऊंचा और शक्तिशाली वह बादल माना जाता है। माइनस 40 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान वाले बादल तेज बारिश और गरज चमक वाले तूफान का संकेत देते हैं जबकि माइनस 70 डिग्री सेल्सियस या उससे कम तापमान वाले बादल बेहद खतरनाक मौसम प्रणाली का हिस्सा माने जाते हैं। ताजा तस्वीरों में जम्मू कश्मीर के ऊपर माइनस 80 डिग्री सेल्सियस तक ठंडे बादल दर्ज किए गए हैं जबकि उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड और पूर्वोत्तर में भी अत्यधिक सक्रिय बादल मौजूद हैं।

    हालांकि मौसम विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि हर जगह बादल होने का मतलब भारी बारिश नहीं होता। हल्के मानसूनी बादल केवल सामान्य वर्षा या बूंदाबांदी करा सकते हैं जबकि अत्यधिक बारिश केवल उन क्षेत्रों में होती है जहां गहरे और ऊंचे तूफानी बादल विकसित होते हैं। फिलहाल उत्तरी भारत में सक्रिय मानसून ट्रफ और अरब सागर से आने वाली नमी भरी हवाओं के कारण जम्मू कश्मीर हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड पंजाब हरियाणा दिल्ली उत्तर प्रदेश बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और मैदानी क्षेत्रों में जलभराव तथा नदियों के जलस्तर बढ़ने का खतरा भी बना रहेगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कभी लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति बनती है तो कभी बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश हो जाती है। ऐसे समय में INSAT 3DR जैसे आधुनिक मौसम उपग्रह मौसम की सटीक निगरानी और समय रहते चेतावनी जारी करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के ताजा मौसम बुलेटिन पर नजर रखें और भारी बारिश वाले इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचें।

  • जबलपुर में स्कूल-कॉलेजों के बाहर छात्राओं से छेड़छाड़ के मामलों पर मानवाधिकार आयोग सख्त, एसपी से मांगी रिपोर्ट

    जबलपुर में स्कूल-कॉलेजों के बाहर छात्राओं से छेड़छाड़ के मामलों पर मानवाधिकार आयोग सख्त, एसपी से मांगी रिपोर्ट


    जबलपुर।
    शहर के स्कूलों और कॉलेजों के बाहर छात्राओं से छेड़छाड़ और उत्पीड़न की लगातार मिल रही शिकायतों को लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने गंभीर रुख अपनाया है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जबलपुर पुलिस अधीक्षक से मामले की जांच कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

    छात्राओं को बनाया जा रहा निशाना

    जानकारी के अनुसार, कई शिक्षण संस्थानों के बाहर छुट्टी के समय असामाजिक तत्व और मनचले छात्राओं का पीछा करते हैं, उन पर फब्तियां कसते हैं, मोबाइल नंबर मांगते हैं और उनकी बिना अनुमति तस्वीरें भी खींचते हैं। इन घटनाओं से छात्राएं मानसिक रूप से परेशान हो रही हैं और खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं।

    बताया जा रहा है कि लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के कारण कुछ छात्राओं ने स्कूल-कॉलेज जाना भी छोड़ दिया है। वहीं, विरोध करने पर अभिभावकों को भी धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।

    मानवाधिकार आयोग ने लिया स्वत: संज्ञान

    मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के क्षेत्रीय कार्यालय प्रभारी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, आयोग की मुख्य पीठ भोपाल में अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह की एकल पीठ ने मामले को प्रथम दृष्टया मानवाधिकार हनन का मामला माना है।

    आयोग ने जबलपुर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें तथा दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें।

    सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    लगातार सामने आ रही घटनाओं ने स्कूल और कॉलेज परिसरों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित पुलिस गश्त, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और मनचलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

  • पन्ना की एनएमडीसी खदान में मिला 13.16 कैरेट का दुर्लभ हीरा, कीमत करीब एक करोड़ रुपये आंकी गई

    पन्ना की एनएमडीसी खदान में मिला 13.16 कैरेट का दुर्लभ हीरा, कीमत करीब एक करोड़ रुपये आंकी गई


    पन्ना।
    मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की रत्नगर्भा धरती ने एक बार फिर अपनी समृद्ध खनिज संपदा का प्रमाण दिया है। मझगवां स्थित एनएमडीसी लिमिटेड की हीरा खदान से 13.16 कैरेट का उच्च गुणवत्ता वाला प्राकृतिक जेम श्रेणी का हीरा मिला है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार इसकी कीमत करीब एक करोड़ रुपये हो सकती है, हालांकि इसका वास्तविक मूल्य आगामी खुली नीलामी में तय होगा।

    यह वर्ष 2024 में खदान का संचालन दोबारा शुरू होने के बाद अब तक का सबसे बड़ा हीरा माना जा रहा है। इससे पहले मार्च 2024 में इसी परियोजना से 10.04 कैरेट का हीरा मिला था, लेकिन 13.16 कैरेट का यह नया रत्न उस रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ गया है।

    नीलामी में तय होगी वास्तविक कीमत

    एनएमडीसी अधिकारियों के अनुसार हीरे की अंतिम कीमत उसकी गुणवत्ता, चमक, शुद्धता और नीलामी के दौरान मिलने वाली बोली पर निर्भर करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च गुणवत्ता के कारण इस हीरे को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अच्छी मांग मिल सकती है।

    एशिया की प्रमुख यंत्रीकृत हीरा खदान

    पन्ना की मझगवां हीरा खदान भारत ही नहीं, बल्कि एशिया की एकमात्र संगठित और पूर्णतः यंत्रीकृत हीरा खदानों में शामिल है। यह खदान वर्षों से कई दुर्लभ और बहुमूल्य हीरे देने के लिए जानी जाती रही है और देश के हीरा उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

    एनएमडीसी में खुशी का माहौल

    इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के बाद पन्ना स्थित माइनिंग प्रोजेक्ट से लेकर हैदराबाद स्थित एनएमडीसी मुख्यालय तक उत्साह का माहौल है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की खोज से खदान की संभावनाओं को नया बल मिला है और भविष्य में भी उच्च गुणवत्ता वाले हीरे मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

  • री-नीट में समान अंक के बावजूद अलग मिली AIR, जानिए कैसे एनटीए के टाई-ब्रेकिंग नियम ने तय की आर्यन और पांशुल की रैंक

    री-नीट में समान अंक के बावजूद अलग मिली AIR, जानिए कैसे एनटीए के टाई-ब्रेकिंग नियम ने तय की आर्यन और पांशुल की रैंक

    नई दिल्ली । री-नीट परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल चर्चा का केंद्र बन गए हैं। दोनों अभ्यर्थियों ने 720 में से 715 अंक हासिल किए, लेकिन इसके बावजूद मेरिट सूची में आर्यन गुप्ता को ऑल इंडिया रैंक-1 और पांशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक-2 प्रदान की गई। समान अंक होने के बावजूद अलग-अलग रैंक मिलने से अभ्यर्थियों और अभिभावकों के बीच यह सवाल उठने लगा कि आखिर ऐसी स्थिति में रैंक किस आधार पर तय की जाती है।

    दरअसल, मेडिकल प्रवेश परीक्षा में केवल कुल अंक ही अंतिम रैंक का आधार नहीं होते। जब दो या अधिक अभ्यर्थियों के कुल अंक समान होते हैं, तब एनटीए की निर्धारित टाई-ब्रेकिंग प्रक्रिया लागू की जाती है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य समान अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों के बीच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से मेरिट तय करना होता है। इसी नियम के कारण समान अंक होने के बावजूद दोनों अभ्यर्थियों की ऑल इंडिया रैंक अलग-अलग निर्धारित की गई।

    टाई-ब्रेकिंग प्रक्रिया के पहले चरण में अभ्यर्थियों के बायोलॉजी विषय के अंक देखे जाते हैं। इसमें बॉटनी और जूलॉजी दोनों के संयुक्त प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाता है। जिस उम्मीदवार के बायोलॉजी में अधिक अंक होते हैं, उसे बेहतर रैंक दी जाती है। यदि इस स्तर पर भी दोनों के अंक समान हों, तो अगले चरण में केमिस्ट्री के अंकों की तुलना की जाती है। यदि केमिस्ट्री में भी बराबरी बनी रहती है, तब फिजिक्स के अंकों के आधार पर रैंक तय की जाती है।

    यदि तीनों प्रमुख विषयों में भी दोनों अभ्यर्थियों का प्रदर्शन समान हो, तो आगे उत्तर देने के पैटर्न का विश्लेषण किया जाता है। इसमें सही और गलत उत्तरों के अनुपात को देखा जाता है। जिस अभ्यर्थी ने अपेक्षाकृत कम गलत उत्तर दिए होते हैं या जिसका गलत उत्तरों का अनुपात बेहतर होता है, उसे मेरिट सूची में प्राथमिकता दी जाती है। यह व्यवस्था परीक्षा की गुणवत्ता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।

    इसके बाद भी यदि बराबरी बनी रहती है, तो अंतिम निर्णय एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति की निगरानी में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि किसी भी उम्मीदवार के साथ अन्याय न हो और पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे। यही कारण है कि समान अंक प्राप्त करने वाले सभी उम्मीदवारों की रैंक हमेशा एक जैसी नहीं होती।

    आर्यन गुप्ता और पांशुल बंसल के मामले में भी यही प्रक्रिया लागू की गई। दोनों के कुल अंक 715 रहे, लेकिन विषयवार प्रदर्शन और टाई-ब्रेकिंग के शुरुआती चरणों में आर्यन गुप्ता का प्रदर्शन बेहतर पाया गया। इसी आधार पर उन्हें ऑल इंडिया रैंक-1 और पांशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक-2 प्रदान की गई। यह निर्णय निर्धारित नियमों के अनुसार लिया गया और मेरिट सूची उसी आधार पर तैयार की गई।

    गौरतलब है कि पहले समान अंक की स्थिति में अभ्यर्थियों की आयु को भी रैंक निर्धारण का आधार बनाया जाता था। अधिक आयु वाले उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाती थी। हालांकि बाद में इस नियम को लेकर विवाद सामने आने के बाद इसे समाप्त कर दिया गया। वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह विषयवार प्रदर्शन और निर्धारित टाई-ब्रेकिंग प्रक्रिया पर आधारित है, जिससे मेरिट सूची अधिक पारदर्शी और समान अवसर के सिद्धांत के अनुरूप तैयार की जा सके।

  • बैंक फ्रॉड की जांच तेज, 1109 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में सीबीआई ने चार राज्यों के छह ठिकानों पर चलाया सर्च अभियान

    बैंक फ्रॉड की जांच तेज, 1109 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में सीबीआई ने चार राज्यों के छह ठिकानों पर चलाया सर्च अभियान


    नई दिल्ली ।
    देश के बड़े बैंक धोखाधड़ी मामलों में शामिल 1109 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय अनियमितता प्रकरण में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने जांच को तेज करते हुए चार राज्यों में एक साथ व्यापक तलाशी अभियान चलाया है। इस कार्रवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य सामग्री जब्त की गई है, जिन्हें जांच के लिए अहम माना जा रहा है। एजेंसी अब इन दस्तावेजों के आधार पर पूरे लेनदेन, कर्ज के उपयोग और कथित धोखाधड़ी की प्रक्रिया की विस्तार से जांच कर रही है।

    जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला एक निजी कंपनी द्वारा बैंक से वित्तीय सुविधाएं प्राप्त करने के दौरान कथित रूप से गलत और भ्रामक जानकारी प्रस्तुत करने से जुड़ा है। आरोप है कि कंपनी ने फंड आधारित और नॉन-फंड आधारित ऋण सुविधाएं हासिल करने के लिए अपने वित्तीय रिकॉर्ड में हेरफेर किया। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी ने स्टॉक का मूल्य वास्तविक से अधिक दर्शाया, व्यापारिक बकाया को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया और वित्तीय स्थिति को वास्तविकता से बेहतर दिखाकर अधिक क्रेडिट सीमा प्राप्त करने का प्रयास किया।

    सीबीआई का कहना है कि बैंक से प्राप्त ऋण राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप नहीं किया गया। जांच में यह आशंका भी व्यक्त की गई है कि धनराशि को अन्य संस्थाओं अथवा अलग-अलग व्यावसायिक गतिविधियों में स्थानांतरित किया गया। साथ ही खातों को नियमित दर्शाने के लिए कथित रूप से एवरग्रीनिंग जैसी वित्तीय प्रक्रिया अपनाई गई। इन अनियमितताओं के कारण संबंधित बैंक को लगभग 1109 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान होने का आरोप है।

    विशेष अदालत से प्राप्त तलाशी वारंट के आधार पर सीबीआई ने ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और उत्तराखंड में कुल छह स्थानों पर एक साथ कार्रवाई की। इस दौरान कंपनी से जुड़े निदेशकों के आवासों, पंजीकृत कार्यालय तथा विभिन्न विनिर्माण इकाइयों की तलाशी ली गई। तलाशी अभियान के दौरान एजेंसी ने कई दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य अपने कब्जे में लिए हैं, जिनका परीक्षण किया जा रहा है।

    जांच अधिकारियों के अनुसार जब्त किए गए रिकॉर्ड से यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि बैंक से प्राप्त ऋण राशि का वास्तविक उपयोग किन गतिविधियों में हुआ, वित्तीय लेनदेन की प्रकृति क्या रही और कथित धोखाधड़ी में किन व्यक्तियों अथवा संस्थाओं की भूमिका रही। एजेंसी संबंधित वित्तीय दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का मिलान भी कर रही है ताकि पूरे मामले की सटीक तस्वीर सामने लाई जा सके।

    वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े बैंक ऋण मामलों में कथित अनियमितताओं की समयबद्ध और विस्तृत जांच बैंकिंग प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में दस्तावेजी साक्ष्य, धन के प्रवाह और वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण जांच का प्रमुख आधार बनता है। सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और जांच के दौरान प्राप्त होने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एजेंसी का उद्देश्य पूरे प्रकरण में कथित वित्तीय अनियमितताओं की परत-दर-परत जांच कर जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट करना और बैंकिंग प्रणाली को हुए संभावित नुकसान के सभी पहलुओं का तथ्यात्मक आकलन करना है।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामले पर राहुल गांधी-खरगे का प्रधानमंत्री को संयुक्त पत्र, ट्रस्ट की स्वतंत्र जांच और वित्तीय रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की उठी मांग

    राम मंदिर चढ़ावा मामले पर राहुल गांधी-खरगे का प्रधानमंत्री को संयुक्त पत्र, ट्रस्ट की स्वतंत्र जांच और वित्तीय रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की उठी मांग

    नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले राम मंदिर में चढ़ावे और दान के प्रबंधन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त पत्र भेजकर पूरे मामले में स्वतंत्र और व्यापक जांच की मांग की है। दोनों नेताओं ने कहा है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस विषय पर पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

    पत्र में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण और उससे जुड़े दान में देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आर्थिक सहयोग दिया है। ऐसे में मंदिर को प्राप्त नकद राशि, सोना, चांदी और अन्य प्रकार के चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर उठ रहे सवालों का निष्पक्ष तरीके से समाधान होना आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता के आरोप सामने आए हैं तो उनकी स्वतंत्र जांच कराकर तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

    राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इतने गंभीर आरोपों के बीच सरकार की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आने से लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं पैदा हो रही हैं। उन्होंने लिखा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत हैं और सरकार को इस मामले में भी उसी भावना के अनुरूप कार्रवाई करनी चाहिए।

    पत्र में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का भी उल्लेख किया गया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि ट्रस्ट के कामकाज को लेकर उठे सवालों का निष्पक्ष परीक्षण होना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की आशंका या भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। उनका मानना है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष होनी चाहिए, जिससे सभी पक्षों के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

    कांग्रेस ने अपने पत्र में यह भी मांग की है कि जांच केवल वित्तीय दस्तावेजों तक सीमित न रहे, बल्कि मंदिर को प्राप्त सभी प्रकार के दान और चढ़ावे के संग्रह, रखरखाव, लेखा-जोखा और उपयोग की पूरी प्रक्रिया का भी विस्तार से परीक्षण किया जाए। उनका कहना है कि इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए योगदान का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप हुआ है या नहीं।

    विपक्ष का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सभी वित्तीय रिकॉर्ड और खातों को भी सार्वजनिक किया जाए, ताकि देश और विदेश में रहने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को यह जानकारी मिल सके कि उनके द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे का उपयोग किस प्रकार किया गया। कांग्रेस का मानना है कि पारदर्शिता से न केवल लोगों का विश्वास मजबूत होगा बल्कि भविष्य में इस प्रकार के विवादों की संभावना भी कम होगी।

    इस मुद्दे के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। संसद के मानसून सत्र से पहले विपक्ष इस विषय को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है, जबकि सरकार की ओर से इस संबंध में क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में इस विषय पर राजनीतिक और संसदीय स्तर पर बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

  • अस्पताल से सोनम वांगचुक का देश के नाम संदेश, ‘चलो संसद’ मार्च को बताया दूसरा आजादी आंदोलन, हिरासत और स्वास्थ्य को लेकर बढ़ा विवाद

    अस्पताल से सोनम वांगचुक का देश के नाम संदेश, ‘चलो संसद’ मार्च को बताया दूसरा आजादी आंदोलन, हिरासत और स्वास्थ्य को लेकर बढ़ा विवाद

    नई दिल्ली । सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल से देशवासियों के नाम संदेश जारी करते हुए 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च को सफल बनाने की अपील की है। उन्होंने अपने संदेश में इसे भय और अन्याय के खिलाफ जनभागीदारी का अभियान बताते हुए नागरिकों से बड़ी संख्या में शामिल होने का आग्रह किया। उनका संदेश उनकी पत्नी गीतांजलि जे आंग्मो के माध्यम से सार्वजनिक किया गया, जिसमें उन्होंने इसे देश के लिए महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक पहल बताया और लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की।

    सोनम वांगचुक ने अपने संदेश में कहा कि देश को अन्याय और भय से मुक्त बनाने के लिए जनभागीदारी आवश्यक है। उन्होंने विभिन्न सार्वजनिक मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार है और इसी भावना के साथ 20 जुलाई के कार्यक्रम को व्यापक समर्थन मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनका संदेश अस्पताल से भेजा गया है, जहां उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध रखा गया है।

    सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से एक जनआंदोलन के समर्थन में भूख हड़ताल पर थे। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद से उनके स्वास्थ्य, इलाज और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है। इस बीच उनके समर्थक भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं।

    दूसरी ओर, उनकी पत्नी गीतांजलि जे आंग्मो ने वांगचुक को किसी अन्य अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति देने की मांग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उनका कहना है कि उन्हें वर्तमान अस्पताल की व्यवस्था पर भरोसा नहीं रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वांगचुक को परिवार, वकीलों और निजी चिकित्सकों से पर्याप्त रूप से मिलने नहीं दिया जा रहा है, जिससे उनकी चिंता लगातार बढ़ रही है। याचिका में अस्पताल बदलने की अनुमति देने और मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध भी किया गया है।

    गीतांजलि ने यह भी दावा किया कि अस्पताल की ओर से उन्हें बताया गया कि सोनम वांगचुक के शरीर में पोटैशियम का स्तर काफी नीचे चला गया है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर स्थिति मानी जाती है। उनका आरोप है कि स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सार्वजनिक रूप से पूरी स्पष्टता के साथ साझा नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उन्हें अपनी पसंद के निजी अस्पताल में स्थानांतरण की अनुमति नहीं मिली है।

    परिवार का कहना है कि अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं, जिससे मुलाकात और सामान्य आवाजाही प्रभावित हो रही है। उन्होंने इसे सामान्य चिकित्सीय व्यवस्था के बजाय प्रतिबंधात्मक स्थिति बताया है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि स्वास्थ्य संबंधी कोई गंभीर स्थिति उत्पन्न होती है तो संबंधित प्रशासनिक पक्षों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च पर भी सभी की नजरें टिकी हैं। एक ओर आंदोलन के समर्थक इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा अभियान बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति और उनके अस्पताल में भर्ती रहने को लेकर कानूनी और प्रशासनिक पहलू भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई, चिकित्सकीय निर्णय और आंदोलन की दिशा इस मामले के आगे के घटनाक्रम को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • संसद सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में बागी सांसदों की मौजूदगी पर बढ़ा विवाद, विपक्ष ने जताया विरोध, सहमति की कोशिशों के बीच फिर लौटी बैठक

    संसद सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में बागी सांसदों की मौजूदगी पर बढ़ा विवाद, विपक्ष ने जताया विरोध, सहमति की कोशिशों के बीच फिर लौटी बैठक

    नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में रविवार को उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब विपक्षी दलों ने तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों को बैठक में आमंत्रित किए जाने का विरोध करते हुए सांकेतिक वॉकआउट कर दिया। हालांकि यह विरोध अधिक देर तक नहीं चला और बातचीत के बाद विपक्षी नेता दोबारा बैठक में लौट आए। इस घटनाक्रम ने मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही सदन के भीतर संभावित राजनीतिक टकराव के संकेत दे दिए हैं।

    संसद भवन परिसर में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, आम आदमी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, वाम दलों सहित कई विपक्षी दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक का उद्देश्य आगामी मानसून सत्र के दौरान संसद के सुचारु संचालन के लिए सभी दलों के बीच संवाद स्थापित करना और विधायी कार्यों को लेकर सहमति बनाना था। लेकिन बैठक शुरू होने के कुछ ही समय बाद विपक्ष ने बागी सांसदों की मौजूदगी को लेकर आपत्ति दर्ज कराई और विरोध स्वरूप बाहर निकल गया।

    विपक्ष का कहना था कि जिन सांसदों ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर अलग राजनीतिक समूह का दावा किया है, उन्हें अभी तक लोकसभा अध्यक्ष की ओर से औपचारिक मान्यता नहीं मिली है। साथ ही उनके खिलाफ दायर अयोग्यता संबंधी याचिकाएं भी लंबित हैं। ऐसे में उन्हें सर्वदलीय बैठक में अलग इकाई के रूप में आमंत्रित करना संसदीय परंपराओं और स्थापित प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़ा विषय बताते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।

    विरोध दर्ज कराने के बाद विपक्षी दलों ने कुछ समय के लिए बैठक का बहिष्कार किया, लेकिन बाद में संवाद की आवश्यकता को देखते हुए सभी दल फिर से बैठक में शामिल हो गए। बैठक के दौरान सरकार ने सभी राजनीतिक दलों से संसद के सुचारु संचालन में सहयोग की अपील की। साथ ही आगामी सत्र के दौरान प्रस्तावित विधेयकों, विधायी कार्यक्रम और विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए सभी पक्षों से सकारात्मक भूमिका निभाने का आग्रह किया गया।

    इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि हाल में हुए राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़ी हुई है। तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 सांसदों को लोकसभा में अलग बैठने की अनुमति मिलने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई थी। विपक्ष का तर्क है कि अलग बैठने की अनुमति और किसी नए समूह को औपचारिक मान्यता दिए जाने की प्रक्रिया अलग-अलग विषय हैं। इसी कारण सर्वदलीय बैठक में उनकी भागीदारी को लेकर सवाल उठाए गए। इसी तरह अन्य दलों से जुड़े कुछ बागी सांसदों की संसदीय स्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

    संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा, जिसमें कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। इस दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक और नीतिगत प्रस्ताव सदन के समक्ष रख सकती है, जबकि विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में सत्र शुरू होने से पहले सर्वदलीय बैठक में सामने आया यह विवाद संकेत देता है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है। इसके बावजूद बैठक में सभी दलों की वापसी इस बात का संकेत भी मानी जा रही है कि संवाद की प्रक्रिया को जारी रखने और संसदीय कार्यवाही को आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक दलों ने बातचीत का रास्ता खुला रखा है।

  • जम्मू-कश्मीर में बारिश बनी आफत, राजौरी में अचानक आई बाढ़ से 200 से अधिक वाहन बहे, बस स्टैंड और निचले इलाके जलमग्न

    जम्मू-कश्मीर में बारिश बनी आफत, राजौरी में अचानक आई बाढ़ से 200 से अधिक वाहन बहे, बस स्टैंड और निचले इलाके जलमग्न

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने कई क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सबसे अधिक असर राजौरी जिले में देखने को मिला, जहां अचानक आई बाढ़ और तेज बहाव ने भारी तबाही मचा दी। लगातार वर्षा के कारण नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया, जिससे शहर के कई हिस्सों में पानी भर गया और बड़ी संख्या में लोगों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा। प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव के प्रयास जारी हैं।

    राजौरी जिले में धरहाल नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने के बाद आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया। तेज बहाव की चपेट में आकर 200 से अधिक वाहन बह गए या मलबे में दब गए। कई स्थानों पर सड़कें कीचड़ और मलबे से भर गईं, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। कई वाहन एक-दूसरे के ऊपर फंस गए, जबकि कुछ पूरी तरह पानी में समा गए। इससे स्थानीय लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

    भारी बारिश के कारण शहर का प्रमुख बस स्टैंड भी बाढ़ की चपेट में आ गया। पूरे परिसर में पानी और मलबा भर जाने से उसकी पहचान तक मुश्किल हो गई। बस स्टैंड के आसपास का निचला इलाका पूरी तरह जलमग्न हो गया, जिससे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई। कई दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी पानी घुस गया, जिसके कारण सामान खराब हो गया और व्यापारियों को नुकसान का सामना करना पड़ा।

    रिहायशी इलाकों में भी बाढ़ का असर स्पष्ट दिखाई दिया। कई घरों में पानी भर जाने से घरेलू सामान, फर्नीचर और जरूरी वस्तुएं खराब हो गईं। कुछ मकानों को संरचनात्मक क्षति पहुंची, जबकि दो मकान पूरी तरह ढह गए। लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा और कई परिवारों ने ऊंचे इलाकों में अस्थायी रूप से शरण ली। जलभराव और मलबे के कारण सामान्य गतिविधियां पूरी तरह प्रभावित हो गईं।

    लगातार बारिश के चलते जिले के कई हिस्सों में सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है। नदियों और नालों के उफान पर होने से कई मार्गों पर आवाजाही मुश्किल हो गई। प्रशासनिक टीमें प्रभावित इलाकों का लगातार निरीक्षण कर रही हैं और जहां आवश्यकता है वहां राहत कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। स्थानीय स्तर पर जलनिकासी और मलबा हटाने का कार्य भी शुरू किया गया है ताकि सामान्य स्थिति जल्द बहाल की जा सके।

    मौसम विभाग ने क्षेत्र में अगले 48 घंटे तक भारी वर्षा की संभावना जताते हुए रेड अलर्ट जारी किया है। इसके मद्देनजर लोगों को नदी, नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने भी नागरिकों से सतर्क रहने और आवश्यक होने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने का आग्रह किया है। आपदा की इस स्थिति ने एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा के दौरान सतर्कता, मजबूत आपदा प्रबंधन व्यवस्था और समय पर राहत कार्यों की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

  • राम मंदिर दान विवाद के बीच शिंदे-उद्धव में बढ़ी सियासी तल्खी, हिंदुत्व की विरासत और ‘राम रक्षा’ अभियान पर छिड़ा नया संग्राम

    राम मंदिर दान विवाद के बीच शिंदे-उद्धव में बढ़ी सियासी तल्खी, हिंदुत्व की विरासत और ‘राम रक्षा’ अभियान पर छिड़ा नया संग्राम

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में हिंदुत्व और राम मंदिर का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उनकी राजनीति अब सिद्धांतों के बजाय राजनीतिक सुविधा पर आधारित हो गई है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने पहले हिंदुत्व की विचारधारा से दूरी बना ली थी, वे अब राजनीतिक परिस्थितियों के बदलने पर भगवान राम का नाम लेकर अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

    एकनाथ शिंदे ने कहा कि हिंदुत्व किसी अवसर के अनुसार अपनाई या छोड़ी जाने वाली विचारधारा नहीं है। उनके अनुसार यह एक स्थायी आस्था और जीवन मूल्यों से जुड़ा विषय है, जिसे राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार बदला नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद शिवसेना (यूबीटी) ने अपनी मूल विचारधारा से समझौता किया और अब जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता बनाए रखने के लिए राम और हिंदुत्व का सहारा लिया जा रहा है।

    राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे पर महाराष्ट्र में राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है। इसी विषय को लेकर शिवसेना (यूबीटी) ने राज्यभर में ‘राम रक्षा आंदोलन’ शुरू करने की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    इसी घटनाक्रम के बीच नागपुर में एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद उद्धव ठाकरे ने भी राज्य सरकार और अपने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधा। उन्होंने हिंदुत्व और भगवान राम के नाम पर राजनीति करने वालों की आलोचना करते हुए कहा कि धार्मिक आस्था को राजनीतिक लाभ का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके बयान के बाद दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए।

    उद्धव ठाकरे की टिप्पणियों का जवाब देते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि जब राजनीतिक आधार कमजोर पड़ने लगा तो भगवान राम का नाम लिया जाने लगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “जब भगवा लगा घटने तब राम का नाम लगे रटने।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति भगवान राम के आदर्शों से दूर है, वह जनता के विश्वास पर भी खरा नहीं उतर सकता। उनके इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में हिंदुत्व, राम मंदिर और धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दे राज्य की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। विभिन्न दल इन विषयों पर अपनी-अपनी राजनीतिक रणनीति के तहत जनता के बीच संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में बयानबाजी और वैचारिक टकराव का दौर आगे भी जारी रहने की संभावना है।

    महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में यह विवाद केवल नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंदुत्व की विरासत, राजनीतिक पहचान और जनसमर्थन की प्रतिस्पर्धा का भी प्रतीक बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों की रणनीति और जनता की प्रतिक्रिया राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।