Category: National

  • ब्रिटिश कपल ने भारत के स्ट्रीट फूड को लेकर तोड़ा मिथक, बोले- डराया गया था लेकिन अनुभव शानदार रहा

    ब्रिटिश कपल ने भारत के स्ट्रीट फूड को लेकर तोड़ा मिथक, बोले- डराया गया था लेकिन अनुभव शानदार रहा




    नई दिल्ली। इंडियन स्ट्रीट फूड को लेकर फैली नकारात्मक धारणाओं पर ब्रिटेन के ट्रैवल कपल Hazel Lindsey और Martin Bailey ने बड़ा बयान दिया है। कपल का कहना है कि भारत आने से पहले उन्हें लगातार चेतावनियां दी गई थीं कि सड़क किनारे खाना खाने से बीमार पड़ सकते हैं, लेकिन उनका अनुभव इसके बिल्कुल उलट रहा।

    कपल ने बताया कि उन्होंने दिल्ली से लेकर केरल तक अलग-अलग जगहों पर स्ट्रीट फूड का स्वाद लिया और हर जगह उन्हें बेहतरीन अनुभव मिला। उनके मुताबिक, भारतीय स्ट्रीट फूड ही देश की असली संस्कृति और “सोल” को दिखाता है, जिसे किसी फाइव स्टार होटल में महसूस नहीं किया जा सकता।

    Hazel Lindsey ने कहा कि शुरुआत में मसालेदार खाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण जरूर था, लेकिन बाद में उन्होंने इसका पूरा आनंद लिया। कपल ने यह भी बताया कि पूरे ट्रिप के दौरान उन्हें किसी तरह की बड़ी स्वास्थ्य समस्या का सामना नहीं करना पड़ा।

    वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने भी भारत के स्ट्रीट फूड की तारीफ की और इसे दुनिया के बेहतरीन फूड कल्चर में से एक बताया।

  • नवी मुंबई एयरपोर्ट नाम विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI बोले- विरोध करें लेकिन आम लोगों को परेशानी न हो

    नवी मुंबई एयरपोर्ट नाम विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI बोले- विरोध करें लेकिन आम लोगों को परेशानी न हो

    नई दिल्ली । नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नामकरण को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया, जहां मंगलवार को इस मामले पर अहम सुनवाई हुई। अदालत ने एयरपोर्ट का नाम बदलने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए साफ कहा कि यह नीति निर्माण से जुड़ा विषय है और इसमें न्यायपालिका हस्तक्षेप नहीं कर सकती। सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की, जो अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गई है।

    मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार है, लेकिन किसी भी प्रदर्शन के कारण आम लोगों के जीवन में बाधा नहीं आनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील करते हुए कहा कि विरोध दर्ज कराने के नाम पर सड़कें जाम करना, कानून व्यवस्था प्रभावित करना या लोगों के लिए परेशानी खड़ी करना उचित नहीं है। अदालत की यह टिप्पणी उस समय आई जब एयरपोर्ट के नामकरण को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

    यह मामला नवी मुंबई एयरपोर्ट का नाम बदलकर एक क्षेत्रीय नेता के नाम पर रखने की मांग से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार से राज्य सरकार के प्रस्ताव पर जल्द निर्णय लेने की मांग की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने स्पष्ट किया कि नामकरण जैसे फैसले सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और अदालत ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

    सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि विरोध करने वाले लोगों को कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि कुछ प्रदर्शन अब आम जनता के लिए परेशानी का कारण बनने लगे हैं। अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान जरूरी है, लेकिन उसके साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

    इसी बीच मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत हाल के कुछ बयानों को लेकर भी चर्चा में रहे। उन्होंने हाल ही में स्पष्ट किया था कि उनके कुछ पुराने बयान संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किए गए थे। उनका कहना था कि उनका उद्देश्य किसी वर्ग या युवाओं का अपमान करना नहीं था, बल्कि उन लोगों की ओर ध्यान दिलाना था जो गलत तरीकों से विभिन्न पेशों में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं।

    नवी मुंबई एयरपोर्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने यह साफ कर दिया है कि अदालत नीति निर्माण के मामलों में सीमित दखल ही देती है। साथ ही अदालत ने यह भी संदेश दिया कि विरोध लोकतंत्र का अहम हिस्सा है, लेकिन उसका तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे आम नागरिकों को कठिनाई का सामना न करना पड़े।

  • 93 साल के हुए पहाड़ों के जादूगर रस्किन बॉन्ड, देहरादून में सादगी से मनाया जन्मदिन, मसूरी ने महसूस की कमी

    93 साल के हुए पहाड़ों के जादूगर रस्किन बॉन्ड, देहरादून में सादगी से मनाया जन्मदिन, मसूरी ने महसूस की कमी



    नई दिल्ली। पहाड़ों की रानी मसूरी को अपनी कहानियों और शब्दों से दुनिया भर में पहचान दिलाने वाले विश्वप्रसिद्ध लेखक Ruskin Bond मंगलवार को 93 वर्ष के हो गए। इस खास मौके पर उनका जन्मदिन बेहद सादगी के साथ देहरादून स्थित आवास पर परिवार के बीच मनाया गया। हालांकि इस बार स्वास्थ्य कारणों से वह मसूरी नहीं पहुंच सके, जिससे उनके हजारों प्रशंसकों में मायूसी देखने को मिली।

    रस्किन बॉन्ड का नाम आते ही लोगों के मन में मसूरी की धुंध भरी वादियां, देवदार के जंगल, बारिश की बूंदें और पहाड़ी जीवन की सादगी जीवंत हो उठती है। उन्होंने अपनी लेखनी से सिर्फ कहानियां नहीं लिखीं, बल्कि पहाड़ों की आत्मा को शब्दों में ढालकर दुनिया के सामने पेश किया। यही वजह है कि आज भी बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक उनकी रचनाओं को बेहद पसंद करते हैं।

    पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें मसूरी से देहरादून शिफ्ट किया गया है। परिवार के मुताबिक उनका स्वास्थ्य फिलहाल स्थिर है और वह लगातार चिकित्सकीय निगरानी में हैं। उनके बेटे राकेश बॉन्ड ने बताया कि इस बार जन्मदिन घर पर ही बेहद सादगी से मनाया गया।

    हर साल उनके जन्मदिन पर मसूरी के माल रोड स्थित प्रसिद्ध बुक स्टोर में खास आयोजन होता था। देशभर से साहित्य प्रेमी सिर्फ उनकी एक झलक पाने, किताबों पर ऑटोग्राफ लेने और उनसे मिलने मसूरी पहुंचते थे। रस्किन बॉन्ड भी अपने प्रशंसकों से बेहद आत्मीयता से मिलते और खासकर बच्चों के साथ समय बिताना पसंद करते थे। लेकिन इस बार उनके मसूरी नहीं आने से पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने उनकी कमी महसूस की।

    सोशल मीडिया पर भी दिनभर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देने का सिलसिला चलता रहा। साहित्य प्रेमियों ने उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना की।

    19 मई 1934 को Kasauli में जन्मे रस्किन बॉन्ड का बचपन पहाड़ों के बीच बीता। उन्होंने शिमला और देहरादून में शिक्षा प्राप्त की और कम उम्र में ही लेखन शुरू कर दिया था। उनकी कहानियों में प्रकृति, अकेलापन, दोस्ती, मासूमियत और इंसानी रिश्तों की गहराई साफ दिखाई देती है।

    उनकी चर्चित रचनाओं में The Blue Umbrella, Time Stops at Shamli, A Flight of Pigeons और “दिल्ली इज़ नॉट फार” जैसी किताबें शामिल हैं। उनकी कई कहानियों पर फिल्में और टीवी सीरीज भी बन चुकी हैं, जिन्होंने नई पीढ़ी तक उनकी लेखनी को पहुंचाया।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि रस्किन बॉन्ड केवल लेखक नहीं, बल्कि मसूरी की सांस्कृतिक पहचान हैं। उनकी वजह से दुनिया भर के लोग मसूरी को करीब से जान पाए। साहित्य प्रेमियों का मानना है कि उनकी कहानियां आने वाली पीढ़ियों को भी प्रकृति, संवेदनशीलता और इंसानी रिश्तों की अहमियत सिखाती रहेंगी।

  • ओस्लो में पीएम मोदी से सवाल पूछकर घिरीं नॉर्वे की पत्रकार, राहुल गांधी ने भी साधा निशाना

    ओस्लो में पीएम मोदी से सवाल पूछकर घिरीं नॉर्वे की पत्रकार, राहुल गांधी ने भी साधा निशाना



    नई दिल्ली। ओस्लो में भारत-नॉर्डिक समिट के दौरान नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग ने पीएम नरेंद्र मोदी से प्रेस सवालों पर तीखा सवाल किया, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया।ओस्लो में भारत-नॉर्डिक समिट के दौरान नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग ने पीएम नरेंद्र मोदी से प्रेस सवालों पर तीखा सवाल किया, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया।

    नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे की संयुक्त प्रेस इंटरैक्शन के दौरान पत्रकार हेले लिंग ने पीएम मोदी से सवाल पूछते हुए प्रेस से दूरी बनाने पर तीखी टिप्पणी की। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रधानमंत्री ने उनका सवाल नहीं लिया और उन्होंने प्रेस स्वतंत्रता के संदर्भ में नॉर्वे और भारत की रैंकिंग का भी जिक्र किया।

    विवाद बढ़ने पर हेले लिंग ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब दिया और कहा कि वह किसी भी तरह की “विदेशी जासूस” नहीं हैं। उनका कहना था कि पत्रकारिता का काम सत्ता से सवाल पूछना है और पहले से तैयार जवाबों को मान लेना नहीं।

    इसी बीच भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में भी इसी मुद्दे पर सवाल उठे। भारतीय राजनयिक सिबी जॉर्ज ने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मीडिया परिदृश्य का बचाव करते हुए कहा कि भारत दुनिया की आबादी का बड़ा हिस्सा है, लेकिन उसके बारे में बाहरी समझ अक्सर सीमित होती है; उन्होंने यह भी कहा कि अकेले दिल्ली में ही करीब 200 टीवी चैनल चल रहे हैं।

    अब इस पूरे मामले में राजनीति भी जुड़ गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए पीएम मोदी पर निशाना साधा और लिखा कि “nothing to hide, nothing to fear” यानी छिपाने को कुछ नहीं हो तो डरने की जरूरत नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि जब दुनिया एक “compromised PM” को कुछ सवालों से घबराकर पीछे हटते देखती है, तो भारत की छवि पर असर पड़ता है।

    यह पूरा विवाद अब प्रेस स्वतंत्रता, विदेश नीति और भारत की सार्वजनिक छवि को लेकर नई बहस छेड़ रहा है। एक तरफ नॉर्वेजियन पत्रकार अपने सवाल को पत्रकारिता का हिस्सा बता रही हैं, तो दूसरी तरफ भारतीय पक्ष इसे भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं के गलत आकलन से जोड़ रहा है।

  • 10 अरब डॉलर के निवेश से अमेरिका में नई आर्थिक हलचल, अदाणी ग्रुप को मिली बड़ी कानूनी राहत के बाद बढ़ा भरोसा

    10 अरब डॉलर के निवेश से अमेरिका में नई आर्थिक हलचल, अदाणी ग्रुप को मिली बड़ी कानूनी राहत के बाद बढ़ा भरोसा

     नई दिल्ली । Adani Group के अमेरिका में प्रस्तावित 10 अरब डॉलर के निवेश को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। भारतीय-अमेरिकी समुदाय के कई प्रमुख नेताओं और व्यापारिक विशेषज्ञों ने इसे भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंधों के लिए एक बड़ा मोड़ बताया है। उनका मानना है कि यह निवेश केवल व्यापारिक विस्तार नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक ताकत और कॉर्पोरेट प्रभाव का बड़ा संकेत है।

    भारतीय-अमेरिकी समुदाय के वरिष्ठ नेता और पूर्व सलाहकार Ajay Bhutoria ने इस निवेश को अमेरिका के इन्फ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए गेम चेंजर बताया है। उनके अनुसार यह कदम अमेरिका में रोजगार बढ़ाने, ऊर्जा ढांचे को मजबूत करने और नई तकनीकों के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस निवेश से दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा मिलेगी।

    हाल के घटनाक्रमों में अदाणी समूह को कानूनी मोर्चे पर भी राहत मिलने की खबरों ने निवेशकों और उद्योग जगत के बीच सकारात्मक माहौल बनाया है। इसे कंपनी के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर उसकी विश्वसनीयता और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेशों के लिए कानूनी स्पष्टता बेहद महत्वपूर्ण होती है और इस घटनाक्रम से निवेश माहौल को मजबूती मिल सकती है।

    अमेरिका में यह प्रस्तावित निवेश कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर असर डाल सकता है। माना जा रहा है कि इससे हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। निर्माण, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नई परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े क्षेत्रों में इस निवेश को भविष्य की जरूरतों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर के तेजी से विस्तार के कारण अमेरिका में ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बड़े पैमाने पर ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की जरूरत महसूस की जा रही है। इस संदर्भ में अदाणी समूह की विशेषज्ञता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कंपनी पहले से ही ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़े प्रोजेक्ट्स संचालित कर चुकी है।

    यह निवेश भारत-अमेरिका संबंधों के राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण को भी प्रभावित कर सकता है। लंबे समय से विदेशी निवेश और रोजगार को लेकर चल रही बहस के बीच इस पहल को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय कंपनियों की बढ़ती वैश्विक भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत अब केवल बाजार नहीं बल्कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में निवेश करने वाली ताकत के रूप में भी उभर रहा है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह निवेश योजना पूरी तरह लागू होती है तो आने वाले वर्षों में यह दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग का एक ऐतिहासिक उदाहरण बन सकती है। इससे न केवल व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे बल्कि तकनीकी और रणनीतिक साझेदारी को भी नया विस्तार मिलेगा। कुल मिलाकर यह घटनाक्रम वैश्विक निवेश जगत में भारत की बढ़ती भूमिका को और अधिक मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

  • बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने वालों के लिए बड़ा मौका, SBI में 7,150 पदों पर वैकेंसी

    बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने वालों के लिए बड़ा मौका, SBI में 7,150 पदों पर वैकेंसी

    नई दिल्ली । देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा अवसर पेश किया है। बैंक की ओर से अप्रेंटिस के 7,150 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण मौका माना जा रहा है। बड़ी संख्या में निकली इस भर्ती ने नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के बीच उत्साह बढ़ा दिया है।

    एसबीआई की इस भर्ती प्रक्रिया के तहत देशभर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियुक्तियां की जाएंगी। उम्मीदवारों का चयन क्षेत्रीय भाषा और संबंधित राज्य के आधार पर किया जाएगा। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित अंतिम तिथि तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।

    इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री होना जरूरी है। बैंक की ओर से जारी जानकारी के अनुसार चयनित उम्मीदवारों को एक वर्ष की अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसके दौरान उन्हें हर महीने स्टाइपेंड भी प्रदान किया जाएगा।

    आयु सीमा की बात करें तो आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम उम्र 20 वर्ष और अधिकतम उम्र 28 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट भी दी जाएगी। इससे बड़ी संख्या में युवा इस भर्ती प्रक्रिया का लाभ उठा सकेंगे।

    चयन प्रक्रिया को कई चरणों में पूरा किया जाएगा। उम्मीदवारों को सबसे पहले ऑनलाइन लिखित परीक्षा देनी होगी। इसके बाद स्थानीय भाषा की परीक्षा, मेडिकल टेस्ट और मेरिट सूची के आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा। माना जा रहा है कि लिखित परीक्षा जुलाई महीने में आयोजित की जा सकती है।

    आवेदन शुल्क भी श्रेणी के अनुसार तय किया गया है। सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को निर्धारित शुल्क जमा करना होगा, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग वर्ग के उम्मीदवारों को शुल्क में छूट दी गई है। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है ताकि देशभर के उम्मीदवार आसानी से इसमें हिस्सा ले सकें।

    भर्ती प्रक्रिया के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले अप्रेंटिस पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा। इसके बाद बैंक की आधिकारिक प्रक्रिया के अनुसार आवेदन फॉर्म भरना होगा। फॉर्म भरते समय सभी जरूरी दस्तावेज सही तरीके से अपलोड करना अनिवार्य होगा।

    बैंकिंग सेक्टर में स्थिर और बेहतर करियर की तलाश कर रहे युवाओं के लिए यह भर्ती एक बड़ा अवसर मानी जा रही है। बड़ी संख्या में पद होने के कारण उम्मीदवारों के पास चयन का अच्छा मौका रहेगा। ऐसे में योग्य अभ्यर्थियों को समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी जा रही है।

  • पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी को राष्ट्र ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, नेताओं ने बताया जनसेवा का प्रतीक

    पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी को राष्ट्र ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, नेताओं ने बताया जनसेवा का प्रतीक

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ राजनेता मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी के निधन से देशभर में शोक की लहर फैल गई है। राजनीतिक और सामाजिक जीवन में अपनी सादगी, अनुशासन और ईमानदार छवि के लिए पहचाने जाने वाले खंडूरी के जाने को सार्वजनिक जीवन की बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनके निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सहित देश के कई वरिष्ठ नेताओं ने गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए उन्हें राष्ट्रसेवा और सुशासन का प्रतीक बताया।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि भुवन चंद्र खंडूरी ने अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, पारदर्शिता और विकास की राजनीति का आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सेना में उत्कृष्ट सेवाएं देने के बाद उन्होंने राजनीति में भी जनहित और सुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। राष्ट्रपति ने उनके योगदान को देश और विशेष रूप से उत्तराखंड के विकास के लिए अविस्मरणीय बताया।

    देश के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी खंडूरी के निधन को अपूरणीय क्षति करार दिया। नेताओं ने कहा कि उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में अनुशासन और राष्ट्रहित को हमेशा सर्वोपरि रखा। उनकी साफ-सुथरी छवि और जनसेवा के प्रति समर्पण उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान दिलाता था। उत्तराखंड में उनके कार्यकाल को सुशासन और विकास के लिए आज भी याद किया जाता है।

    भुवन चंद्र खंडूरी केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक पूर्व सैनिक भी थे जिन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दीं। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और सार्वजनिक जीवन में भी उसी अनुशासन और ईमानदारी को बनाए रखा। उनके नेतृत्व में कई विकास कार्यों को गति मिली और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए गए।

    राजनीतिक जीवन में उनकी छवि एक सादगीपूर्ण और कर्मठ नेता की रही। उन्होंने हमेशा साफ राजनीति और जनहित को प्राथमिकता दी। यही वजह रही कि अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोग भी उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली का सम्मान करते थे। उनके निधन के बाद देशभर से श्रद्धांजलियों का सिलसिला लगातार जारी है।

    उत्तराखंड की राजनीति में भुवन चंद्र खंडूरी का नाम एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाएगा जिन्होंने विकास, पारदर्शिता और जनकल्याण को अपनी राजनीति का आधार बनाया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा और सार्वजनिक जीवन में उनकी सादगी तथा ईमानदारी हमेशा उदाहरण के रूप में याद की जाएगी।

  • औरत ही औरत की दुश्मन टिप्पणी से गरमाया विवाद, ट्विशा शर्मा केस में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

    औरत ही औरत की दुश्मन टिप्पणी से गरमाया विवाद, ट्विशा शर्मा केस में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

    भोपाल से जुड़े मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले ने अब एक नया राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है, जहां इस संवेदनशील प्रकरण पर बयानबाजी तेज हो गई है। मामले को लेकर सार्वजनिक मंचों पर उठी टिप्पणियों ने विवाद को और गहरा कर दिया है और विभिन्न पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

    इस पूरे मामले में सबसे ताजा प्रतिक्रिया शिवसेना (यूबीटी) की सांसद Priyanka Chaturvedi की ओर से आई है, जिन्होंने ट्विशा शर्मा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि “औरत ही औरत की दुश्मन होती है” का कोई चेहरा होता, तो वह इस मामले में सामने आए बयान से जुड़ा हो सकता है। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

    यह विवाद तब और बढ़ गया जब गिरिबाला सिंह द्वारा मीडिया से बातचीत में दिए गए बयान सार्वजनिक हुए। उन्होंने दावा किया कि ट्विशा शर्मा गर्भावस्था से जुड़ी स्थिति के कारण मानसिक तनाव में थीं और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी की प्रक्रिया शुरू करने के बाद वह अपने फैसले को लेकर असमंजस में थीं। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार ने स्थिति को संभालने की कोशिश की थी, लेकिन परिस्थितियां जटिल थीं। उनके इन बयानों के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    प्रियंका चतुर्वेदी ने इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सार्वजनिक रूप से बयान देना, जो अब इस दुनिया में नहीं है, उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ बयान दिए जाने चाहिए, ताकि पीड़ित पक्ष की छवि पर अनावश्यक प्रभाव न पड़े। उनके अनुसार, एक पूर्व न्यायिक पद पर रह चुकी व्यक्ति से अधिक संतुलित बयान की अपेक्षा की जाती है।

    इस बीच मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा तेज हो गई है, और लोग इस बात पर भी बहस कर रहे हैं कि व्यक्तिगत मामलों को सार्वजनिक मंचों पर किस हद तक लाया जाना चाहिए। यह घटना न केवल एक कानूनी और पारिवारिक विवाद बन गई है, बल्कि अब सामाजिक संवेदनशीलता और सार्वजनिक संवाद के स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुकी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में बयानबाजी से स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है, खासकर तब जब मामला पहले से ही न्यायिक या जांच प्रक्रिया के दायरे में हो। सार्वजनिक बयानों का प्रभाव न केवल कानूनी प्रक्रिया पर पड़ सकता है, बल्कि संबंधित परिवारों और व्यक्तियों की सामाजिक छवि पर भी असर डाल सकता है।

    फिलहाल इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, जिससे स्थिति और अधिक उलझती दिख रही है। राजनीतिक प्रतिक्रिया के जुड़ने के बाद यह मुद्दा अब केवल एक निजी विवाद न रहकर व्यापक सामाजिक और राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका है।

  • भारत-पाक बयानबाज़ी तेज: पाकिस्तान की गीदड़भभकी, आर्मी चीफ ने ऑपरेशन को बताया रणनीतिक शक्ति का उदाहरण

    भारत-पाक बयानबाज़ी तेज: पाकिस्तान की गीदड़भभकी, आर्मी चीफ ने ऑपरेशन को बताया रणनीतिक शक्ति का उदाहरण


    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर बयानबाज़ी का तनाव तेज हो गया है, जिसमें दोनों देशों की ओर से तीखी टिप्पणियां सामने आई हैं। हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री की ओर से दिए गए बयान ने माहौल को और अधिक गर्म कर दिया, जिसमें भारत के खिलाफ कड़ी भाषा का इस्तेमाल करते हुए चेतावनी दी गई। इस बयान को क्षेत्रीय राजनीति में बढ़ते तनाव के रूप में देखा जा रहा है, जहां दोनों देशों के बीच शब्दों की जंग एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।

    पाकिस्तान की ओर से दिए गए बयान में भारत की नीतियों और सैन्य रुख पर सवाल उठाए गए और कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी गई। इस दौरान यह भी दावा किया गया कि पिछले तनावपूर्ण हालात में पाकिस्तान ने भारत को जवाब दिया था और अपनी स्थिति मजबूत दिखाई थी। साथ ही भारत की विदेश नीति और पड़ोसी देशों के साथ उसके संबंधों पर भी टिप्पणी की गई, जिससे कूटनीतिक स्तर पर चर्चा और बढ़ गई है।

    इसके जवाब में भारत की ओर से सैन्य और रणनीतिक नेतृत्व ने अपने दृष्टिकोण को मजबूती से सामने रखा है। भारतीय सेना प्रमुख ने हालिया संदर्भों में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए इसे आधुनिक रणनीति का एक उदाहरण बताया, जिसमें सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ सूचना प्रबंधन, कूटनीतिक संकेत और आर्थिक दबाव जैसे कई पहलुओं का संतुलित उपयोग किया गया। इस दृष्टिकोण को उन्होंने ‘स्मार्ट पावर’ की अवधारणा से जोड़ा, जो यह दर्शाता है कि आज की सुरक्षा रणनीति केवल सैन्य बल पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि बहुआयामी होती है।

    भारतीय सैन्य नेतृत्व का कहना है कि इस तरह की रणनीतियां न केवल सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी जवाब देती हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती हैं कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा व्यापक स्तर पर हो सके। यह दृष्टिकोण आधुनिक युद्ध और कूटनीति के बदलते स्वरूप को दर्शाता है, जहां निर्णय केवल मैदान तक सीमित नहीं रहते बल्कि सूचना और अंतरराष्ट्रीय संदेश भी उतने ही महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम में दोनों देशों की ओर से दिए गए बयानों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्रीय संबंधों में स्थिरता अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। जहां एक ओर तीखे शब्दों का आदान-प्रदान जारी है, वहीं दूसरी ओर रणनीतिक और सैन्य स्तर पर अपने-अपने दृष्टिकोण को मजबूत करने की कोशिश भी दिखाई दे रही है। इस स्थिति ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है, जहां हर बयान और हर प्रतिक्रिया का व्यापक प्रभाव देखने को मिलता है।

  • कोलकाता में बड़ा मामला: फरार आरोपी सोना पप्पू ईडी दफ्तर पहुंचा, लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार

    कोलकाता में बड़ा मामला: फरार आरोपी सोना पप्पू ईडी दफ्तर पहुंचा, लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार


    नई दिल्ली । कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के तहत एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां पिछले तीन महीनों से फरार चल रहा बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू अचानक सॉल्ट लेक स्थित ईडी कार्यालय पहुंच गया। उसके इस अचानक कदम ने जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया, क्योंकि लंबे समय से वह लगातार फरार चल रहा था और कई बार समन जारी होने के बावजूद पेश नहीं हुआ था।

    सूत्रों के अनुसार, सोमवार सुबह सोना पप्पू ईडी कार्यालय पहुंचा और अंदर प्रवेश करते समय उसने खुद को व्यवसायी बताते हुए कहा कि वह कोई अपराधी नहीं है। हालांकि इसके बाद शुरू हुई पूछताछ कई घंटों तक चली, जिसमें जांच अधिकारियों ने उससे विभिन्न मामलों को लेकर सवाल-जवाब किए। करीब नौ घंटे से अधिक चली इस लंबी पूछताछ के बाद उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

    जांच एजेंसियों का कहना है कि सोना पप्पू पर जबरन वसूली, जमीन हड़पने और अवैध वित्तीय लेनदेन से जुड़े गंभीर आरोप हैं। उसके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज होने की बात भी सामने आई है, जिनमें प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों को धमकाकर पैसे वसूलने और संपत्ति पर अवैध कब्जे जैसे आरोप शामिल हैं।

    इस मामले में यह भी जानकारी सामने आई है कि हाल के महीनों में पुलिस और ईडी की संयुक्त कार्रवाई के दौरान उसके कई ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जहां से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद की गई थी। इसके बाद से ही वह लगातार फरार चल रहा था और उसकी तलाश तेज कर दी गई थी।

    जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि फरारी के दौरान भी सोना पप्पू सोशल मीडिया के जरिए अपनी मौजूदगी का संकेत देता रहा और खुद को निर्दोष बताने की कोशिश करता रहा। हालांकि जांच एजेंसियों के पास मौजूद साक्ष्यों के आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ती रही।

    ईडी सूत्रों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ यह भी संदेह है कि वह कोलकाता के विभिन्न इलाकों में सक्रिय कई नेटवर्क और सिंडिकेट्स के जरिए अवैध गतिविधियों को संचालित करता था। इन नेटवर्क्स के जरिए कथित रूप से वसूली और संपत्ति से जुड़े मामलों को नियंत्रित किया जाता था, जिससे कई लोगों पर दबाव बनाए जाने की बात सामने आई है।

    फिलहाल गिरफ्तारी के बाद उसे मंगलवार को अदालत में पेश किए जाने की तैयारी है, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम ने कोलकाता में प्रॉपर्टी और वित्तीय अपराधों से जुड़े नेटवर्क पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित कर दिया है और जांच एजेंसियां अब मामले की गहराई से जांच में जुट गई हैं।