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  • राहुल गांधी ने कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव तेज किया, 120 युवा नेताओं के इंटरव्यू के बाद राष्ट्रीय सचिवों की नई टीम बनेगी

    राहुल गांधी ने कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव तेज किया, 120 युवा नेताओं के इंटरव्यू के बाद राष्ट्रीय सचिवों की नई टीम बनेगी

    नई दिल्ली । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। पार्टी के भीतर संगठन को पुराने तौर-तरीकों से बाहर निकालकर युवा, सक्रिय और जमीन से जुड़े नेतृत्व को आगे लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली नियुक्तियों में अब केवल राजनीतिक वरिष्ठता के बजाय नेताओं के संगठनात्मक काम, जमीनी सक्रियता और नेतृत्व क्षमता को अधिक महत्व देने की तैयारी है।

    कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव पद के लिए चयन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सोमवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने 30 नेताओं के इंटरव्यू लिए। इस प्रक्रिया में संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी शामिल हैं। चयन प्रक्रिया के तहत नेताओं को 10-10 के समूह में इंटरव्यू के लिए दिल्ली बुलाया जा रहा है।

    इंटरव्यू के दौरान राहुल गांधी उम्मीदवारों से उनके पिछले संगठनात्मक काम, राजनीतिक अनुभव और भविष्य की रणनीति से जुड़े सवाल कर रहे हैं। चयन प्रक्रिया में नेताओं के कामकाज और उनकी संगठनात्मक भूमिका को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। शॉर्टलिस्ट किए गए नेताओं का विस्तृत कामकाजी रिपोर्ट कार्ड पहले से ही पार्टी नेतृत्व के पास मौजूद है।

    कांग्रेस राष्ट्रीय सचिवों की मौजूदा टीम में भी बड़े फेरबदल की तैयारी कर रही है। पार्टी की योजना मौजूदा 60 फीसदी से अधिक सचिवों को बदलकर नए चेहरों को जिम्मेदारी देने की है। कुल 120 नेताओं के इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रीय सचिवों की नियुक्ति की जाएगी। इससे राष्ट्रीय संगठन में बड़ी संख्या में नए और अपेक्षाकृत युवा चेहरों के आने की संभावना है।

    चयन प्रक्रिया में ‘संगठन सृजन’ अभियान के दौरान ऑब्जर्वर के तौर पर काम कर चुके नेताओं को विशेष प्राथमिकता मिलने की बात सामने आई है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व ऐसे नेताओं को आगे लाना चाहता है, जिन्होंने संगठन के साथ सीधे जमीन पर काम किया है और अलग-अलग क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों को करीब से समझा है।

    राहुल गांधी लंबे समय से कांग्रेस में युवा नेतृत्व और प्रतिभा आधारित चयन की पैरवी करते रहे हैं। यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई में इंटरव्यू आधारित चयन की प्रक्रिया इसी सोच का हिस्सा रही है। अब प्रदेश और जिला स्तर पर युवा चेहरों को जिम्मेदारी देने के बाद राष्ट्रीय संगठन में भी इसी मॉडल को आगे बढ़ाने की तैयारी है।

    कांग्रेस का लक्ष्य अलग-अलग राज्यों और सामाजिक वर्गों से आने वाले ऐसे नेताओं की टीम तैयार करना है, जो सक्रिय हों, संगठन को मजबूत करने की क्षमता रखते हों और जमीनी स्तर पर काम का अनुभव रखते हों। राष्ट्रीय संगठन में प्रस्तावित बदलाव को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    करीब दो दशक से राहुल गांधी कांग्रेस में नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे लाने की जरूरत पर जोर देते रहे हैं। राष्ट्रीय सचिवों की नई टीम के चयन की मौजूदा प्रक्रिया को उनके इसी ‘जनरेशन चेंज’ अभियान को संगठनात्मक रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में नए चेहरों को जिम्मेदारी मिलने और कामकाज के तरीके में बदलाव की उम्मीद बढ़ी है।

  • मिशन-2027: भाजपा ने यूपी में बूथवार माइक्रोमैनेजमेंट का खाका खींचा, तावड़े के मंत्र पर बनेगी रणनीति

    मिशन-2027: भाजपा ने यूपी में बूथवार माइक्रोमैनेजमेंट का खाका खींचा, तावड़े के मंत्र पर बनेगी रणनीति

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भाजपा ने जमीनी स्तर पर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी का फोकस अब बूथवार संगठन को मजबूत करने के साथ मतदाताओं तक सीधी पहुंच बनाने पर है। दो दिवसीय यूपी दौरे पर आए भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर संगठन और जनसंपर्क मजबूत करने का जो मंत्र दिया, उसी के आधार पर माइक्रोमैनेजमेंट की रणनीति तैयार की जाएगी।

    पार्टी हर बूथ का अलग सामाजिक प्रोफाइल तैयार करने की योजना पर काम कर रही है। इसमें बूथ पर अलग-अलग जातियों और सामाजिक समूहों की हिस्सेदारी, पार्टी के मजबूत आधार वाले वर्ग और उन समुदायों की पहचान की जाएगी, जहां संगठन को अपनी पहुंच बढ़ाने की जरूरत है। इस आकलन के बाद संबंधित जातियों और सामाजिक समूहों के बीच संपर्क के लिए अलग-अलग टीमें बनाई जाएंगी।

    जिस समाज की जिम्मेदारी, उसी के कार्यकर्ता करेंगे संपर्क

    भाजपा की रणनीति में सबसे अहम पहलू यह है कि किसी समुदाय तक पहुंच बनाने के लिए उसी समाज के पार्टी कार्यकर्ताओं को आगे किया जाएगा। ये कार्यकर्ता अपने-अपने सामाजिक समूह के लोगों से घर-घर जाकर संवाद करेंगे। संपर्क के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ, स्थानीय विकास कार्य और सरकार की उपलब्धियां बताई जाएंगी। इसके साथ ही विपक्ष की ओर से किए जा रहे कथित भ्रामक प्रचार का जवाब भी लोगों के बीच देने की तैयारी है।

    सिर्फ प्रचार नहीं, लोगों की राय भी संगठन तक पहुंचेगी

    भाजपा के बूथ अभियान में फीडबैक को भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। कार्यकर्ता घर-घर संपर्क के दौरान केवल सरकार की उपलब्धियां बताने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि स्थानीय समस्याओं, जनता के मुद्दों और सरकार को लेकर लोगों की राय भी जानेंगे। यह जानकारी संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी।

    इस फीडबैक के आधार पर बूथ स्तर पर पार्टी की स्थिति का आकलन किया जाएगा। जहां संगठन कमजोर दिखाई देगा, वहां समय रहते सुधारात्मक कदम उठाने और अतिरिक्त जनसंपर्क गतिविधियां चलाने की योजना है।

    विपक्ष के नैरेटिव का जवाब बूथ से देने की तैयारी

    पार्टी का जोर चुनावी नैरेटिव को केवल सोशल मीडिया या बड़े राजनीतिक मंचों तक सीमित रखने के बजाय सीधे मतदाताओं तक पहुंचाने पर है। बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों से जुड़े तथ्य उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि स्थानीय स्तर पर विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले सवालों का जवाब दिया जा सके।

    प्रदेश संगठन रखेगा हर बूथ की निगरानी
    पूरे अभियान की मॉनिटरिंग प्रदेश संगठन करेगा। बूथवार टीमों की सक्रियता, घर-घर संपर्क और जनता से मिले फीडबैक की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। जिन इलाकों में संगठन की गतिविधियां कमजोर मिलेंगी, वहां अतिरिक्त संपर्क अभियान चलाए जाएंगे। इस तरह भाजपा मिशन-2027 के लिए अपनी पुरानी ‘बूथ जीतो, चुनाव जीतो’ रणनीति को सामाजिक संपर्क और फीडबैक सिस्टम के साथ जोड़कर जमीनी स्तर पर मजबूत करने की तैयारी में है।

  • BRICS सम्मेलन में भारत-चीन के बीच कारोबार पर अहम बातचीत, तकनीक और निवेश से जुड़ी अड़चनें उठाएगा भारत

    BRICS सम्मेलन में भारत-चीन के बीच कारोबार पर अहम बातचीत, तकनीक और निवेश से जुड़ी अड़चनें उठाएगा भारत

    नई दिल्ली । में 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले भारत और चीन के बीच आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत अहम हो सकती है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है और उनके साथ बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी आ सकता है। ऐसे में भारत चीन से आने वाली हाईटेक वस्तुओं के आयात में आ रही अड़चनों और चीन में भारतीय कंपनियों के निवेश से जुड़े प्रतिबंधों का मुद्दा उठा सकता है।

    भारत सरकार की ओर से चीनी तकनीक और महत्वपूर्ण सामान के आयात से जुड़ी परेशानियों पर उद्योग संगठनों के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है। सरकार ने चीन की ओर से प्रमुख तकनीकी उत्पादों पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी अध्ययन किया है। भारतीय उद्योग जगत का मानना है कि इन प्रतिबंधों का असर देश की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।

    चीन की ओर से कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निर्यात संबंधी प्रतिबंध लगाए गए हैं। इनमें इंगट और वेफर तकनीक, बैटरी सेल और उससे जुड़ी तकनीक, हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट यानी HVDC उपकरण तथा कुछ विशेष ट्रांसमिशन कंपोनेंट्स शामिल हैं। HVDC तकनीक लंबी दूरी तक बिजली पहुंचाने में महत्वपूर्ण होती है और इससे ट्रांसमिशन के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलती है। यह रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड से जोड़ने और बिजली व्यवस्था को स्थिर रखने में भी उपयोगी मानी जाती है।

    भारत की चिंता यह है कि महत्वपूर्ण तकनीक और कच्चे माल की आपूर्ति में लगातार अड़चनें आने से घरेलू विनिर्माण को नुकसान हो सकता है। इससे बैकवर्ड इंटीग्रेशन की प्रक्रिया भी प्रभावित होने की आशंका है। भारत बातचीत के दौरान प्रक्रियागत बाधाओं और सोर्सिंग से जुड़े नियमों में राहत के साथ पारस्परिकता का मुद्दा उठा सकता है, यानी दोनों देशों की कंपनियों को समान स्तर की सुविधा मिले।

    हालांकि भारत-चीन व्यापार की तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून अवधि में चीन को भारत का निर्यात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 28 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 5.55 अरब डॉलर हो गया। अमेरिकी टैरिफ के कारण कुछ क्षेत्रों में निर्यात प्रभावित होने के बीच चीन को बढ़े निर्यात ने भारत को कुछ राहत दी।

    भारत और चीन के संबंधों में हाल के महीनों में कुछ नरमी भी दिखाई दी है। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों की बहाली, नाथू ला के रास्ते सीमा व्यापार फिर शुरू होना और लोगों के बीच संपर्क बढ़ना इसी बदलाव के संकेत हैं। इसके अलावा, लैंड बॉर्डर साझा करने वाले देशों से FDI से जुड़े नियमों में भी कुछ बदलाव किए गए हैं।

    बिजली क्षेत्र में भी भारत ने चीन के साथ कुछ मामलों में नियमों में ढील दी है। मार्च में सरकारी बिजली उपकरण कंपनी BHEL को चीन से 21 महत्वपूर्ण वस्तुओं की खरीद पांच साल तक करने की अनुमति दी गई। जून में भारत में कारखाने रखने वाली चार चीनी बिजली उपकरण कंपनियों को महत्वपूर्ण बिजली परियोजनाओं से जुड़े सरकारी टेंडरों में भाग लेने की अनुमति मिली।

    2020 में LAC पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद चीनी कंपनियों के लिए सरकारी खरीद और निवेश से जुड़े नियम कड़े किए गए थे। अब कुछ क्षेत्रों में सीमित राहत से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में व्यावहारिक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

    BRICS सम्मेलन भारत-चीन के बीच इन आर्थिक मुद्दों पर उच्चस्तरीय बातचीत का अवसर बन सकता है। भारत की प्राथमिकता हाईटेक सामान और जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति आसान कराने के साथ भारतीय कंपनियों के लिए चीन में निवेश का माहौल बेहतर करना हो सकती है। ऐसे में शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर होने वाली बातचीत पर खास नजर रहेगी।

  • भारत-अफगानिस्तान क्रिकेट सीरीज से पहले नक्शे को लेकर विवाद, वीडियो में गिलगित-बाल्टिस्तान और पीओके भारत का हिस्सा दिखाया गया

    भारत-अफगानिस्तान क्रिकेट सीरीज से पहले नक्शे को लेकर विवाद, वीडियो में गिलगित-बाल्टिस्तान और पीओके भारत का हिस्सा दिखाया गया


    नई दिल्ली ।
    भारत और अफगानिस्तान के बीच आगामी क्रिकेट सीरीज से पहले जारी एक प्रमोशनल वीडियो को लेकर पाकिस्तान में नाराजगी सामने आई है। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के इस वीडियो में भारत का नक्शा दिखाया गया, जिसमें गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भारत का हिस्सा दर्शाया गया है। वीडियो सामने आने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इस पर आपत्ति जताई है।

    अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने रविवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर यह प्रमोशनल वीडियो साझा किया था। इसमें भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाली आगामी सीरीज को लेकर उत्साह दिखाने की कोशिश की गई। हालांकि वीडियो में इस्तेमाल किए गए नक्शे को लेकर पाकिस्तान में विवाद खड़ा हो गया।

    पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पिछले कुछ समय से संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच कई बार झड़प और गोलीबारी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान पर यह आरोप भी लगाया जाता रहा है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के हमलों के लिए किया जाता है। अफगानिस्तान इन आरोपों को लेकर अलग रुख रखता है।

    ऐसे माहौल में अफगान क्रिकेट बोर्ड के वीडियो में भारत का नक्शा दिखाया जाना पाकिस्तान के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बन गया है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इस वीडियो पर आपत्ति जताई है। हालांकि इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने को लेकर पाकिस्तान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    भारत और अफगानिस्तान के संबंधों की बात करें तो दोनों देशों के बीच क्रिकेट के साथ आर्थिक और अन्य क्षेत्रों में भी संपर्क बना हुआ है। भारत और तालिबान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंधों की स्थिति अलग होने के बावजूद दोनों देशों के बीच संपर्क और सहयोग के रास्ते खुले हुए हैं। भारत अफगानिस्तान में आर्थिक विकास से जुड़े प्रयासों में भी सहयोग करता रहा है।

    जानकारों के अनुसार, अफगानिस्तान के इस कदम को उसकी स्वतंत्र विदेश नीति के संकेत के तौर पर भी देखा जा सकता है। भारत के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश के बीच अफगानिस्तान पाकिस्तान की आपत्तियों से अलग अपनी प्राथमिकताएं दिखाना चाहता है।

    अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने वीडियो के साथ जारी संदेश में भारत और अफगानिस्तान की आगामी सीरीज को दोनों देशों के बीच संबंधों से जोड़ते हुए उत्साह व्यक्त किया। बोर्ड के अनुसार, यह सीरीज दोनों देशों को करीब लाने वाली है और दोनों देशों के साझा इतिहास तथा संस्कृति से भी जुड़ी है।

    भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की यह सीरीज 13, 15 और 17 सितंबर को दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेली जानी है। सीरीज को लेकर दोनों देशों के क्रिकेट प्रशंसकों में भी उत्सुकता है।

    इसी बीच भारत और अफगानिस्तान के बीच आर्थिक सहयोग को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ी है। दोनों पक्षों ने व्यापार और आर्थिक सहयोग से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में संस्थागत सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई है। इसमें सीमा शुल्क और डेटा साझा करने से जुड़े सहयोग को बढ़ाना, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि क्षेत्र में नियामक सहयोग, व्यापार संपर्क बेहतर करना तथा निवेश और व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देना शामिल है।

    इस पूरे घटनाक्रम में क्रिकेट सीरीज के प्रचार के लिए जारी एक वीडियो ने भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच पहले से संवेदनशील क्षेत्रीय मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। फिलहाल विवाद का केंद्र वीडियो में दिखाया गया नक्शा और उस पर पाकिस्तान की आपत्ति है।

  • कर्नाटक में एक सप्ताह में तीन करोड़ रुपये के खाद्य उत्पाद और दवाइयां जब्त, स्वास्थ्य मंत्री ने सतर्क रहने को कहा

    कर्नाटक में एक सप्ताह में तीन करोड़ रुपये के खाद्य उत्पाद और दवाइयां जब्त, स्वास्थ्य मंत्री ने सतर्क रहने को कहा


    नई दिल्ली ।कर्नाटक के स्वास्थ्य अधिकारियों ने मंगलवार को बेंगलुरु में स्विगी इंस्टामार्ट के एक डार्क स्टोर पर छापेमारी की। यह कार्रवाई एक्सपायर हो चुके खाने-पीने के सामान और दवाओं के भंडारण तथा बिक्री के खिलाफ राज्य में तेज किए गए अभियान का हिस्सा थी। बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा विभाग तथा औषधि सुरक्षा विभाग की ओर से यह अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि, डार्क स्टोर पर हुई कार्रवाई से जुड़ी विस्तृत जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

    इस कार्रवाई के बीच कर्नाटक के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री यू.टी. खादर ने लोगों से सामान खरीदते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि खाने-पीने की चीजें और दवाइयां खरीदने से पहले उनकी एक्सपायरी डेट जरूर जांचनी चाहिए। ग्राहकों को किसी उत्पाद में संदिग्ध स्थिति नजर आने पर उसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को देने की भी अपील की गई है।

    बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में पूरे कर्नाटक में करीब तीन करोड़ रुपये मूल्य के खाद्य उत्पाद और दवाइयां जब्त की गई हैं। जब्त किए गए सामान में एक्सपायर हो चुके प्रोडक्ट और दवाइयां भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, कुछ ऐसे उत्पाद कथित तौर पर बिक्री के लिए स्टोर किए गए थे, जिन पर नए लेबल लगाए गए थे।

    खादर ने ग्राहकों से खाना, दवाइयां और अन्य उत्पाद खरीदते समय उनकी जानकारी अच्छी तरह जांचने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रोडक्ट को खरीदने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट देखना जरूरी है। साथ ही, यदि किसी व्यक्ति को किसी उत्पाद में कोई छोटा सुराग या संदिग्ध बात दिखाई देती है तो उसकी रिपोर्ट करने की अपील की गई है।

    मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने ग्राहकों को उत्पादों की जांच करने में सहायता देने के लिए क्यूआर कोड और बारकोड की व्यवस्था शुरू की है। उन्होंने सोशल एक्टिविस्ट से भी अपील की कि सार्वजनिक स्थानों पर इस व्यवस्था की जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाए, ताकि ग्राहक इसका इस्तेमाल कर सकें और उत्पादों के संबंध में अधिक जागरूक हो सकें।

    खादर के मुताबिक, ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों के जरिए ग्राहकों तक एक्सपायर हो चुके तथा गलत लेबल वाले खाद्य उत्पाद और दवाइयां पहुंचने से रोकने के लिए लगातार निगरानी जरूरी है। उन्होंने इस प्रक्रिया में आम लोगों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। सरकार की ओर से चलाए जा रहे अभियान के तहत उत्पादों की जांच के साथ संदिग्ध सामान की पहचान और उसे जब्त करने की कार्रवाई की जा रही है।

    स्वास्थ्य मंत्री ने होसकोटे में हुई जांच का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अधिकारियों को वहां डार्क स्टोर्स पर करीब 45 लाख रुपये मूल्य की दवाइयां मिलीं। उनके अनुसार, कुछ उत्पादों के लेबल बदले गए थे। इन उत्पादों को अधिकारियों ने अपनी कस्टडी में ले लिया है और मामले में आगे की जांच जारी है।

    राज्य में चल रही कार्रवाई के बीच स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्राहकों को भी सतर्क रहने का संदेश दिया गया है। अधिकारियों की जांच में सामने आए एक्सपायर और गलत लेबल वाले उत्पादों को लेकर लोगों से खरीदारी के समय जानकारी जांचने और किसी भी संदिग्ध उत्पाद की सूचना देने की अपील की गई है। कर्नाटक सरकार की ओर से क्यूआर कोड और बारकोड के जरिए उत्पादों की जांच को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

  • उपचुनाव की तारीखों का ऐलान, 9 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी और 9 अक्टूबर को सभी सीटों के नतीजे आएंगे

    उपचुनाव की तारीखों का ऐलान, 9 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी और 9 अक्टूबर को सभी सीटों के नतीजे आएंगे

    नई दिल्ली । भारतीय निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी की विधानसभा सीटों के साथ असम की एक लोकसभा सीट पर उपचुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। घोषित कार्यक्रम के अनुसार इन सभी सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा, जबकि मतगणना के बाद 9 अक्टूबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे। चुनाव की अधिसूचना 9 सितंबर को जारी होगी और उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर निर्धारित की गई है।

    उपचुनाव के तहत तमिलनाडु की मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। पुडुचेरी की थट्टानचावड़ी विधानसभा सीट और पश्चिम बंगाल की रेजीनगर तथा नंदीग्राम विधानसभा सीट भी इस चुनाव में शामिल हैं। इसके अलावा असम की नगांव लोकसभा सीट पर भी उपचुनाव कराया जाएगा। निर्वाचन आयोग के अनुसार चुनाव की पूरी प्रक्रिया 11 अक्टूबर 2026 से पहले पूरी कर ली जाएगी।

    उपचुनाव की घोषणा के साथ ही संबंधित जिलों में चुनावी आचार संहिता लागू हो गई है। आयोग ने मतदाता सूची को लेकर भी जानकारी दी है। उसके मुताबिक नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख तक मतदाता सूची को लगातार अपडेट किया जाएगा। इसके लिए जरूरी है कि संबंधित आवेदन नामांकन की समयसीमा से कम से कम 10 दिन पहले प्राप्त हो जाएं।

    मतदान के दौरान एपिक कार्ड मुख्य पहचान दस्तावेज बना रहेगा। इसके साथ मतदाता आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर कार्ड और पासपोर्ट का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। सभी मतदान केंद्रों पर ईवीएम और वीवीपेट के जरिए मतदान कराया जाएगा।

    असम की नगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के कारण हो रहा है। इस सीट की अंतिम मतदाता सूची 10 फरवरी को जारी की गई थी। पश्चिम बंगाल की रेजीनगर विधानसभा सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई है, जबकि नंदीग्राम विधानसभा सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई। दोनों सीटों की अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की गई थी।

    तमिलनाडु की मदुरांतकम विधानसभा सीट मरागथम कुमारवेल के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। वहीं धारापुरम विधानसभा सीट पी. सत्यबामा के इस्तीफे के चलते रिक्त हुई। इन दोनों सीटों की अंतिम मतदाता सूची 23 फरवरी को प्रकाशित की गई थी।

    पुडुचेरी की थट्टानचावड़ी विधानसभा सीट एन. रंगासामी के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। इस सीट की अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को जारी की गई थी। अब निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार इन सभी रिक्त सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा और 9 अक्टूबर को परिणाम सामने आएंगे।

    नामांकन प्रक्रिया 9 सितंबर को अधिसूचना जारी होने के साथ शुरू होगी और 16 सितंबर तक उम्मीदवार अपने नामांकन दाखिल कर सकेंगे। आयोग ने चुनाव प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी करने का कार्यक्रम तय किया है। इसके साथ ही संबंधित क्षेत्रों में आचार संहिता प्रभावी हो चुकी है और मतदान के लिए ईवीएम तथा वीवीपेट का इस्तेमाल किया जाएगा।

  • पलियक्कारा टोल प्लाजा पर जाम में फंसे सुरेश गोपी, पुलिस ने काफिला निकाला और मंत्री ने सभी गेट खुलवाए

    पलियक्कारा टोल प्लाजा पर जाम में फंसे सुरेश गोपी, पुलिस ने काफिला निकाला और मंत्री ने सभी गेट खुलवाए

    नई दिल्ली । केरल के त्रिशूर में शनिवार को पलियक्कारा टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। सड़क के दोनों तरफ गाड़ियों की लाइन करीब दो किलोमीटर से अधिक तक पहुंच गई थी। इसी दौरान त्रिशूर के सांसद और केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी भी इस जाम में फंस गए। वह त्रिशूर से एर्नाकुलम की ओर जा रहे थे। शाम करीब 5:45 बजे उनका काफिला इस रास्ते से गुजर रहा था।

    जाम की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने मंत्री के काफिले को वहां से आगे निकाल दिया। इसके बाद सुरेश गोपी ने पलियक्कारा टोल प्लाजा के सभी 12 गेट खोलने का आदेश दिया। उनका कहना था कि सड़क पर इतनी लंबी कतार देखकर लोगों को हो रही परेशानी पर ध्यान देना जरूरी था। इसी वजह से उन्होंने तत्काल मामले में हस्तक्षेप करने का फैसला किया।

    सुरेश गोपी ने बताया कि जब उन्होंने सड़क पर वाहनों की लंबी लाइन देखी तो उन्हें लगा कि इस स्थिति में कुछ कदम उठाना जरूरी है। उनका कहना था कि गाड़ियां लंबे समय तक खड़ी रहती हैं तो इससे ईंधन की खपत होती है और धुआं भी निकलता है। ऐसे हालात में टोल गेट खोलकर वाहनों को आगे जाने देना चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने सभी 12 गेट खोलने का निर्देश दिया था।

    केंद्रीय मंत्री ने टोल प्लाजा पर काम करने वाले कर्मचारियों को जाम के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया। उन्होंने कहा कि वहां तैनात कर्मचारी अपना काम कर रहे थे और टोल लेना उनकी जिम्मेदारी है। हालांकि, जब एक साथ बड़ी संख्या में वाहन टोल प्लाजा पर पहुंचते हैं तो टोल लेने की प्रक्रिया में समय लग सकता है। इस वजह से सड़क पर वाहनों की कतार बढ़ने लगती है और जाम की स्थिति पैदा हो सकती है।

    सुरेश गोपी ने आगे कहा कि ऐसे दिनों में जिला प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों को पुलिस के साथ मिलकर काम करना चाहिए। उनका कहना था कि प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय से लोगों को जाम की परेशानी से राहत दिलाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने यातायात की स्थिति को संभालने के लिए इस तरह के सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।

    इस बीच जाम के दौरान पुलिस द्वारा मंत्री के काफिले को आगे निकालने पर कुछ वाहन चालक नाराज भी हुए। सुरेश गोपी ने माना कि कई लोगों को उनका काफिला आगे जाता देखकर गुस्सा आया था। उन्होंने कहा कि कुछ वाहन चालक उन्हें आगे निकलते देखकर नाराज नजर आए। हालांकि, बाद में जब टोल प्लाजा के गेट खोले गए और वाहनों की आवाजाही शुरू हुई तो स्थिति में सुधार होने लगा और लोगों को राहत मिली।

    पुलिस के मुताबिक, करीब 30 मिनट के भीतर टोल प्लाजा के दोनों तरफ यातायात की स्थिति काफी बेहतर हो गई थी। वाहनों की लंबी कतार कम होने लगी और गाड़ियां आगे बढ़ने लगीं। इसके बाद सुरेश गोपी भी वहां से आगे रवाना हो गए।

    पूरी घटना के दौरान सुरेश गोपी ने लंबे समय से जाम में फंसे वाहनों को आगे बढ़ाने के लिए टोल प्लाजा के सभी गेट खोलने का निर्देश दिया। उन्होंने टोल कर्मचारियों को दोषी नहीं माना और कहा कि बड़ी संख्या में वाहन एक साथ पहुंचने पर टोल प्रक्रिया में समय लगना जाम की वजह बन सकता है। साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन, स्थानीय अधिकारियों और पुलिस के बीच समन्वय की जरूरत बताई।

  • वडोदरा में पीएम मोदी का जेन-जी से संवाद, ‘धुरंधर’ के गाने पर रैंप वॉक और राहुल गांधी पर तीखा तंज

    वडोदरा में पीएम मोदी का जेन-जी से संवाद, ‘धुरंधर’ के गाने पर रैंप वॉक और राहुल गांधी पर तीखा तंज


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात के वडोदरा में जेन-जी युवाओं के साथ करीब 25 मिनट तक संवाद किया। कार्यक्रम में करीब छह हजार युवाओं को शामिल किया गया था। इस दौरान प्रधानमंत्री ने युवाओं से झूठे दावों और भ्रामक बातों से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोग झूठ की गूंज के जरिए युवाओं को गुमराह करने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन उन्हें सच्चाई के साथ खड़ा रहना चाहिए। उनके इस बयान को राहुल गांधी और कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान पर तंज के तौर पर देखा गया।

    युवाओं के बीच पहुंचने के लिए कार्यक्रम स्थल पर खास तौर पर Y आकार का रैंप तैयार किया गया था। भाषण से पहले प्रधानमंत्री इसी रैंप पर चलते हुए युवाओं के बीच पहुंचे। मंच पर पहुंचते ही क्वीन का लोकप्रिय गीत ‘वी विल रॉक यू’ बजाया गया। इसके बाद फिल्म ‘धुरंधर’ का गीत ‘आरी आरी’ भी सुनाई दिया। कार्यक्रम के दौरान एक छात्र ने प्रधानमंत्री को तस्वीर भेंट की, जबकि युवाओं ने मोबाइल फोन से उनका वीडियो भी बनाया।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को तेजी से विकसित हो रहे भारत की जीवनरेखा बताया। उन्होंने कहा कि पहले यात्री और मालगाड़ियां एक ही ट्रैक पर चलती थीं, जिससे दोनों की गति प्रभावित होती थी। अब अलग ट्रैक की व्यवस्था से माल परिवहन को गति मिली है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर रोज करीब 430 मालगाड़ियां चल रही हैं।

    उन्होंने मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट से डबल कंटेनर मालगाड़ी के संचालन का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे एक बार में 250 से अधिक ट्रकों के बराबर माल मुंबई से वडोदरा पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रकों से सामान पहुंचाने में करीब 30 घंटे लग सकते हैं, जबकि फ्रेट कॉरिडोर के जरिए यह दूरी करीब 10 घंटे में पूरी हो सकती है।

    फ्रेट कॉरिडोर के इतिहास का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस परियोजना पर 2004 में विचार शुरू हुआ था और 2006 में विशेष कंपनी बनाई गई थी। उनके अनुसार, 2014 तक फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल तक जाती रहीं। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद सरकार ने परियोजना को गति दी और करीब 2,000 किलोमीटर फ्रेट कॉरिडोर का काम पूरा किया।

    प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भारत को सुपरपावर बनाने के लिए पूरे इकोसिस्टम की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इसके लिए यूरेनियम और रेयर अर्थ मटेरियल की उपलब्धता बढ़ाने के साथ युवाओं की स्किल ट्रेनिंग और अपग्रेडेशन पर भी काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब केवल डिग्री नहीं, बल्कि कौशल पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।

    जेन-जी से संवाद को लेकर प्रधानमंत्री पिछले कुछ समय से युवाओं के बीच सक्रिय नजर आए हैं। जुलाई में उन्होंने सेल्फी वीडियो के जरिए युवाओं से संवाद किया था। इसके बाद उन्होंने युवाओं के सुझावों पर प्रतिक्रिया दी और सोशल मीडिया के अनौपचारिक अंदाज में भी उनसे जुड़ने की कोशिश की। अगस्त में मंत्रियों को विश्वविद्यालयों में छात्रों के साथ समय बिताने और सरकारी स्कूलों का दौरा करने का निर्देश दिया गया था।

    देश की राजनीति में जेन-जी की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान 18 से 29 वर्ष आयु के मतदाताओं की हिस्सेदारी 22.78 प्रतिशत थी। ऐसे में भाजपा, कांग्रेस और आरएसएस तीनों ही युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। प्रधानमंत्री के वडोदरा कार्यक्रम में इसी व्यापक प्रयास की झलक दिखाई दी।

  • सेना की बढ़ेगी ताकत, करोड़ों के रक्षा खरीद को मंजूरी; 98 प्रतिशत खरीद स्वदेशी कंपनियों से

    सेना की बढ़ेगी ताकत, करोड़ों के रक्षा खरीद को मंजूरी; 98 प्रतिशत खरीद स्वदेशी कंपनियों से

    नई दिल्ली। भारतीय सशस्त्र सेनाओं की युद्धक क्षमता और परिचालन तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने थलसेना, नौसेना और वायुसेना के लिए करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी है। प्रस्तावों में हेलीकॉप्टर, रडार, सीबीआरएन टोही वाहन, माइन लेयर, मोबाइल ब्रिजिंग सिस्टम और विभिन्न आधुनिक सैन्य उपकरण शामिल हैं।

    इस खरीद प्रक्रिया में स्वदेशी रक्षा उद्योग को प्राथमिकता दी गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि मंजूर किए गए बजट का करीब 98 प्रतिशत हिस्सा भारतीय कंपनियों से खरीद पर खर्च किया जाएगा। इससे घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा देने और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    थलसेना के लिए हेलीकॉप्टर और आधुनिक सैन्य प्रणालियां

    थलसेना के लिए स्वदेशी एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) ध्रुव/रुद्र की अतिरिक्त खरीद को मंजूरी दी गई है। इनका इस्तेमाल कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सैनिकों की आवाजाही, रसद और आपात अभियानों में किया जा सकेगा।

    सेना के लिए हाई मोबिलिटी व्हीकल्स भी खरीदे जाएंगे, जिनका इस्तेमाल पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में सैन्य रसद पहुंचाने के लिए किया जाएगा।

    इसके अलावा रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु खतरों से निपटने के लिए CBRN रिकॉनिसेंस व्हीकल्स शामिल किए जाएंगे। ये वाहन संभावित खतरनाक पदार्थों और प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, निगरानी तथा टोही में मदद करेंगे।

    माइंस से निपटने और नदी-नालों को पार करने की क्षमता बढ़ेगी

    थलसेना के लिए सेल्फ-प्रोपेल्ड मैकेनिकल माइन लेयर्स की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। इन प्रणालियों के जरिए जरूरत के मुताबिक तेजी से बारूदी सुरंगें बिछाई जा सकेंगी।

    वहीं, दुश्मन की ओर से बिछाई गई माइंस को हटाकर बख्तरबंद वाहनों और टैंकों के लिए सुरक्षित रास्ता बनाने के उद्देश्य से ट्रॉल टैंक सिस्टम शामिल किया जाएगा।

    नदियों और नालों को पार करने के लिए सेना की भारी गाड़ियों की क्षमता बढ़ाने के लिहाज से मोबाइल ब्रिजिंग सिस्टम ‘सर्वत्र’ भी खरीदा जाएगा। इससे अभियान के दौरान तेजी से अस्थायी पुल तैयार कर सैन्य वाहनों की आवाजाही सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

    नौसेना में आधुनिक रडार और स्वदेशी मरीन गैस टर्बाइन

    नौसेना के लिए भी कई महत्वपूर्ण प्रणालियों की खरीद को मंजूरी मिली है। इसके तहत ‘अरुधरा’ रडार को शामिल किया जाएगा। नौसैनिक एयर स्टेशनों पर मौजूद पुराने एयर रूट सर्विलांस रडार को आधुनिक प्रणाली से बदलने की योजना है। इससे हवाई निगरानी और एयर ट्रैफिक मॉनिटरिंग क्षमता मजबूत होगी।

    इसके साथ ही युद्धपोतों में इस्तेमाल होने वाली मरीन गैस टर्बाइन को देश में ही डिजाइन और निर्मित करने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य नौसैनिक प्रणालियों में स्वदेशी तकनीक की हिस्सेदारी बढ़ाना और विदेशी निर्भरता कम करना है।

    वायुसेना के सुखोई और हेलीकॉप्टर होंगे और सक्षम

    वायुसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए सुखोई लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और परिवहन विमानों से संबंधित अपग्रेड और प्रणालियों को भी खरीद प्रस्तावों में शामिल किया गया है।

    इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता को मजबूत करने के लिए जैमर तथा रक्षा बलों के सुरक्षित प्रवेश और पहचान से जुड़ा सिक्योर एक्सेस कार्ड सिस्टम भी शामिल किया जाएगा।

    आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा

    करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये के इन रक्षा खरीद प्रस्तावों में घरेलू कंपनियों से 98 प्रतिशत खरीद का प्रावधान भारत के स्वदेशी रक्षा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे देश में सैन्य उपकरणों के उत्पादन, अनुसंधान एवं विकास तथा रक्षा क्षेत्र से जुड़े औद्योगिक आधार को विस्तार मिलने की उम्मीद है।

    सरकार का जोर आधुनिक सैन्य तकनीक हासिल करने के साथ-साथ रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर है। नई खरीद से तीनों सेनाओं की परिचालन तैयारियों और विभिन्न परिस्थितियों में तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता को मजबूत करने का लक्ष्य है।

  • पीएम मोदी के कार्यक्रम में पहली बार डिजिटल एंट्री, लाइव QR कोड से मिलेगा प्रवेश; एक घंटे में बुक हुईं सभी सीटें

    पीएम मोदी के कार्यक्रम में पहली बार डिजिटल एंट्री, लाइव QR कोड से मिलेगा प्रवेश; एक घंटे में बुक हुईं सभी सीटें


    वडोदरा
    ।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गुजरात दौरे के दौरान वडोदरा में होने वाला ‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम डिजिटल व्यवस्था के कारण खास चर्चा में है। कार्यक्रम में प्रवेश के लिए न तो कोई लाइन लगेगी और न ही कागजी पर्ची की जरूरत होगी। पहली बार कार्यक्रम के लिए पंजीकरण और टिकट व्यवस्था निजी डिजिटल मनोरंजन मंच बुक माय शो के जरिए की गई है।

    कार्यक्रम के लिए नि:शुल्क पंजीकरण शुरू होते ही लोगों की भारी प्रतिक्रिया देखने को मिली। स्थिति यह रही कि रजिस्ट्रेशन विंडो खुलने के करीब एक घंटे के भीतर सभी सीटें बुक हो गईं। इसके बाद पंजीकरण बंद करना पड़ा, जबकि 42 हजार से अधिक लोगों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया है।

    निजी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पंजीकरण

    कार्यक्रम के आयोजन में वडोदरा नगर निगम (VMC) ने पंजीकरण के लिए पहली बार किसी निजी डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया है। लोगों को घर बैठे ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने और कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अपनी सीट बुक करने की सुविधा दी गई।

    रजिस्ट्रेशन शुरू होते ही बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन किया। तेजी से सीटें भरने के बाद बुकिंग बंद करनी पड़ी। बड़ी संख्या में लोगों का वेटिंग लिस्ट में शामिल होना कार्यक्रम के प्रति स्थानीय लोगों की रुचि को दर्शाता है।

    M-टिकट में मिलेगा लाइव QR कोड

    कार्यक्रम में रजिस्टर्ड लोगों को उनके बुक माय शो अकाउंट पर डिजिटल M-टिकट उपलब्ध कराया जाएगा। इस टिकट में सुरक्षित लाइव QR कोड होगा। कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश के दौरान इसी QR कोड को स्कैन कर टिकट का सत्यापन किया जाएगा।

    इस व्यवस्था में कागजी टिकट या अलग से प्रवेश पर्ची की आवश्यकता नहीं होगी।

    रजिस्ट्रेशन से प्रवेश और सीट तक डिजिटल सिस्टम

    कार्यक्रम की डिजिटल व्यवस्था केवल ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन तक सीमित नहीं है। टिकट जारी करने, टिकट सत्यापन, कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश और बैठने की व्यवस्था को भी डिजिटल तरीके से संचालित किया जा रहा है।

    आयोजकों का उद्देश्य प्रवेश के दौरान लोगों के इंतजार का समय कम करना और कार्यक्रम स्थल पर भीड़ की आवाजाही को व्यवस्थित रखना है। डिजिटल सत्यापन के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को तेजी से प्रवेश देने की व्यवस्था की गई है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह कार्यक्रम ऐसे समय में हो रहा है, जब युवाओं से जुड़े मुद्दों और सरकार के साथ सीधे संवाद को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। ऐसे में वडोदरा का यह डिजिटल पंजीकरण और प्रवेश मॉडल प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ जनभागीदारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।