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  • डेंगू से बचाव की दिशा में भारत की बड़ी उपलब्धि, DCGI ने QDENGA वैक्सीन को दी स्वीकृति, दो डोज से मिलेगी सुरक्षा

    डेंगू से बचाव की दिशा में भारत की बड़ी उपलब्धि, DCGI ने QDENGA वैक्सीन को दी स्वीकृति, दो डोज से मिलेगी सुरक्षा


    नई दिल्ली । 
    भारत में डेंगू की रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने जापानी दवा कंपनी टाकेडा द्वारा विकसित डेंगू वैक्सीन QDENGA को देश में उपयोग की मंजूरी दे दी है। यह भारत की पहली स्वीकृत डेंगू वैक्सीन है, जिसे 4 से 60 वर्ष की आयु के लोगों के लिए अनुमोदित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम देश में डेंगू संक्रमण की रोकथाम और गंभीर मामलों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    हर वर्ष मानसून के दौरान देश के विभिन्न राज्यों में डेंगू के मामलों में तेज वृद्धि देखने को मिलती है। हजारों लोग इस मच्छरजनित बीमारी से प्रभावित होते हैं, जबकि गंभीर संक्रमण के कारण कई मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है। ऐसे में प्रभावी वैक्सीन की उपलब्धता को सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

    QDENGA की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे लगवाने से पहले यह जांच कराने की आवश्यकता नहीं होगी कि संबंधित व्यक्ति को पहले कभी डेंगू हुआ है या नहीं। यह वैक्सीन उन लोगों को भी दी जा सकती है जिन्हें पहले डेंगू हो चुका है और उन्हें भी जो कभी इस संक्रमण से प्रभावित नहीं हुए। यही विशेषता इसे डेंगू नियंत्रण के लिए अधिक उपयोगी बनाती है।

    स्वीकृत दिशा-निर्देशों के अनुसार यह वैक्सीन 4 से 60 वर्ष तक की आयु के लोगों को दी जाएगी। टीकाकरण के लिए कुल दो डोज निर्धारित की गई हैं, जिनके बीच लगभग तीन महीने का अंतर रखा जाएगा। यह टीका त्वचा के नीचे लगाया जाएगा और दोनों डोज समय पर लेने पर बेहतर प्रतिरक्षा विकसित होने की संभावना बताई गई है।

    भारत उन देशों में शामिल है जहां डेंगू का संक्रमण लंबे समय से सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। पिछले दो दशकों में डेंगू के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में देशभर में एक लाख से अधिक मामलों की पुष्टि हुई थी, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है क्योंकि सभी मामलों का आधिकारिक पंजीकरण नहीं हो पाता।

    डेंगू वायरस के चार अलग-अलग सीरोटाइप होते हैं और एक प्रकार से संक्रमित होने के बाद भी व्यक्ति दूसरे प्रकार के वायरस की चपेट में आ सकता है। QDENGA को इस तरह विकसित किया गया है कि यह डेंगू वायरस के सभी प्रमुख प्रकारों के विरुद्ध प्रतिरक्षा विकसित करने में सहायता करे। इसी कारण इसे व्यापक सुरक्षा प्रदान करने वाली वैक्सीन माना जा रहा है।

    कंपनी के अनुसार इस वैक्सीन पर बड़े स्तर पर वैज्ञानिक अध्ययन और क्लीनिकल परीक्षण किए गए हैं। हजारों स्वयंसेवकों पर किए गए परीक्षणों में दूसरी डोज के लगभग एक वर्ष बाद डेंगू संक्रमण से बचाव में इसकी प्रभावशीलता 80 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई। वहीं गंभीर संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को भी उल्लेखनीय रूप से कम करने के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। लंबे समय तक किए गए अध्ययन में भी इसकी प्रभावशीलता बरकरार रहने के संकेत मिले हैं।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही डेंगू प्रभावित देशों के लिए इस वैक्सीन की उपयोगिता को स्वीकार कर चुका है। इसके अलावा दुनिया के कई देशों में इसका उपयोग शुरू हो चुका है और कुछ देशों ने इसे अपने सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा भी बनाया है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन डेंगू से बचाव का प्रभावी माध्यम है, लेकिन इसके साथ मच्छरों की रोकथाम और व्यक्तिगत सावधानी भी जरूरी है। घरों और आसपास पानी जमा न होने देना, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाना तथा डेंगू के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना संक्रमण के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

  • लखनऊ के जवाहर भवन में चौथी मंजिल पर लगी आग, समय रहते खाली कराई गई इमारत, दमकल ने बड़े हादसे को टाला

    लखनऊ के जवाहर भवन में चौथी मंजिल पर लगी आग, समय रहते खाली कराई गई इमारत, दमकल ने बड़े हादसे को टाला

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित जवाहर भवन में सोमवार सुबह आग लगने की घटना से कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सरकारी कार्यालयों वाली इस बहुमंजिला इमारत की चौथी मंजिल पर आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस और राहत एजेंसियां तत्काल मौके पर पहुंच गईं। अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई के चलते पूरी इमारत को खाली कराया गया और सभी कर्मचारियों तथा अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या घायल होने की सूचना नहीं है।

    घटना की जानकारी मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। आग को फैलने से रोकने के लिए इमारत के विभिन्न हिस्सों को तत्काल खाली कराया गया। कई घंटों की मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया। राहत कार्य के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि भवन के भीतर कोई व्यक्ति फंसा न रह जाए।

    उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने घटनास्थल की स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि आग भवन की चौथी मंजिल पर स्थित कैंटीन क्षेत्र से शुरू हुई थी। उन्होंने कहा कि दमकल विभाग ने समय रहते आग पर काबू पा लिया और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच कराई जाएगी। प्रारंभिक स्तर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, हालांकि इसकी पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही की जाएगी।

    जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर ने बताया कि सुबह लगभग 10 बजे आग लगने की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना मिलते ही फायर सर्विस की टीमें बिना विलंब मौके पर पहुंचीं और राहत कार्य शुरू कर दिया। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे भवन को खाली कराया गया और इमारत के अंदर मौजूद सभी लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। अधिकारियों के अनुसार राहत अभियान के दौरान किसी व्यक्ति के अंदर फंसे होने की पुष्टि नहीं हुई।

    फायर सर्विस के अधिकारियों ने बताया कि आग पर नियंत्रण पाने के लिए 10 से अधिक फायर टेंडरों की सहायता ली गई। दमकल कर्मियों ने समन्वित तरीके से काम करते हुए आग को अन्य मंजिलों तक फैलने से रोका। आग बुझने के बाद भवन के प्रभावित हिस्से का निरीक्षण किया गया ताकि किसी संभावित खतरे को समाप्त किया जा सके।

    घटना के बाद जवाहर भवन परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई और संबंधित विभागों को एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए। प्रशासन अब आग से प्रभावित हिस्से की तकनीकी जांच कराने के साथ-साथ भवन की सुरक्षा व्यवस्था का भी आकलन करेगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

    जवाहर भवन में राज्य सरकार के कई महत्वपूर्ण विभाग संचालित होते हैं, इसलिए घटना के बाद प्रशासन ने प्राथमिकता के आधार पर राहत, सुरक्षा और जांच की प्रक्रिया शुरू की। समय पर की गई कार्रवाई और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय के कारण एक संभावित बड़ा हादसा टल गया। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर आग लगने के कारणों का पता लगाया जाएगा और आवश्यक सुरक्षा उपायों को और मजबूत किया जाएगा।

  • जजों पर बेबुनियाद आरोपों के गंभीर परिणाम, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी; गुलशन पाहुजा को राहत के लिए हाई कोर्ट जाने की सलाह

    जजों पर बेबुनियाद आरोपों के गंभीर परिणाम, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी; गुलशन पाहुजा को राहत के लिए हाई कोर्ट जाने की सलाह

    नई दिल्ली । यूट्यूबर गुलशन पाहुजा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका के खिलाफ बिना ठोस आधार लगाए जाने वाले आरोपों पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी न्यायिक अधिकारी पर भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप बिना पर्याप्त साक्ष्य के लगाना उचित नहीं है। साथ ही सर्वोच्च अदालत ने इस स्तर पर किसी भी प्रकार की तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को राहत के लिए पहले दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी।

    मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायिक अधिकारियों के विरुद्ध लगाए जाने वाले आरोपों का व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ता है। अदालत ने टिप्पणी की कि जब किसी जज या न्यायिक अधिकारी पर बिना प्रमाण के भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाते हैं तो इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, बल्कि पूरे न्यायिक तंत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी और तथ्यों का विशेष महत्व होता है।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह फिलहाल मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है। अदालत का कहना था कि याचिकाकर्ता पहले ही आपराधिक अवमानना के मामले में दोषी ठहराए जा चुके हैं और न्यायिक प्रक्रिया के तहत आत्मसमर्पण भी कर चुके हैं। ऐसे में वर्तमान परिस्थिति में तत्काल राहत प्रदान करना उचित नहीं माना जा सकता।

    पीठ ने सुनवाई के दौरान यह भी उल्लेख किया कि पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी सजा के निलंबन से जुड़ी अर्जी पर विचार किया था। हालांकि बाद में आत्मसमर्पण की समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने न्यायिक आदेश का पालन करते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यदि सजा के निलंबन या अन्य अंतरिम राहत की आवश्यकता है तो इसके लिए संबंधित हाई कोर्ट के समक्ष आवेदन करना उचित कानूनी प्रक्रिया होगी।

    अदालत ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ता द्वारा आपराधिक अवमानना की दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली अपील अभी नियमित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो सकी है। इसके पीछे याचिका में मौजूद कुछ तकनीकी कमियों का समय पर निराकरण नहीं होना बताया गया। अदालत ने संकेत दिया कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अपील पर आगे विचार किया जा सकेगा।

    मामला उन वीडियो से जुड़ा है जिन्हें यूट्यूबर गुलशन पाहुजा ने अपने डिजिटल मंच पर प्रकाशित किया था। आरोप था कि इन वीडियो में न्यायपालिका और कुछ न्यायिक अधिकारियों के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं। इस मामले में कुछ न्यायिक अधिकारियों ने अदालत का रुख करते हुए आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की मांग की थी। सुनवाई के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए छह महीने के कारावास की सजा सुनाई थी।

    सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि संबंधित वीडियो में शामिल दो अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष बिना शर्त माफी मांग ली थी। उन्होंने कहा था कि वीडियो के प्रकाशन और उसके साथ लगाए गए शीर्षकों की जानकारी उन्हें नहीं थी। अदालत ने उनकी माफी स्वीकार करते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त कर दी थी, जबकि मुख्य मामले में यूट्यूबर के खिलाफ कार्रवाई जारी रही।

    यह मामला एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, न्यायपालिका की गरिमा और सोशल मीडिया पर सार्वजनिक बयानों की जिम्मेदारी जैसे महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों को सामने लेकर आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मंचों पर किए जाने वाले दावों और आरोपों के लिए तथ्यात्मक आधार और कानूनी जिम्मेदारी दोनों का पालन आवश्यक है, ताकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायिक संस्थाओं की गरिमा के बीच संतुलन बना रहे।

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  • NEET-UG 2026 की वायरल OMR शीट्स पर NTA का बड़ा खुलासा, डिजिटल छेड़छाड़ वाले दस्तावेज बताए, परिणामों को पूरी तरह सही ठहराया

    NEET-UG 2026 की वायरल OMR शीट्स पर NTA का बड़ा खुलासा, डिजिटल छेड़छाड़ वाले दस्तावेज बताए, परिणामों को पूरी तरह सही ठहराया


    नई दिल्ली ।
    नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने नीट-यूजी 2026 परीक्षा की ओएमआर उत्तर-पत्रिकाओं को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि जिन ओएमआर शीट्स को अभ्यर्थियों की वास्तविक उत्तर-पत्रिका बताकर साझा किया जा रहा है, वे एनटीए द्वारा जारी आधिकारिक दस्तावेज नहीं हैं। प्रारंभिक जांच में इन्हें डिजिटल रूप से छेड़छाड़ कर तैयार किए गए फर्जी दस्तावेज पाया गया है और घोषित परीक्षा परिणामों में किसी प्रकार की त्रुटि नहीं मिली है।

    एनटीए के अनुसार हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कुछ अभ्यर्थियों की कथित ओएमआर उत्तर-पत्रिकाओं की तस्वीरें साझा कर यह दावा किया गया कि उनके परीक्षा परिणाम गलत घोषित किए गए हैं। एजेंसी ने इन सभी मामलों की अलग-अलग जांच की और रिकॉर्ड में सुरक्षित मूल दस्तावेजों का मिलान किया। जांच के बाद यह निष्कर्ष निकला कि आधिकारिक रिकॉर्ड में उपलब्ध वास्तविक ओएमआर उत्तर-पत्रिकाएं घोषित परिणामों का पूरी तरह समर्थन करती हैं और मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने नहीं आई।

    एजेंसी ने बताया कि प्रत्येक अभ्यर्थी की वास्तविक ओएमआर उत्तर-पत्रिका उसके सुरक्षित रिकॉर्ड में उपलब्ध है। इन उत्तर-पत्रिकाओं पर सही रोल नंबर, टेस्ट बुकलेट नंबर, बारकोड, क्रम संख्या, टेस्ट बुकलेट कोड, अभ्यर्थी और अभिभावकों का विवरण, अभ्यर्थी के हस्ताक्षर, अंगूठे का निशान तथा परीक्षा कक्ष के निरीक्षकों के हस्ताक्षर दर्ज हैं। यही प्रमाणित ओएमआर उत्तर-पत्रिकाएं रिस्पॉन्स-की चैलेंज अवधि के दौरान संबंधित अभ्यर्थियों के पंजीकृत ई-मेल पते पर भेजी गई थीं और पोर्टल पर भी उपलब्ध कराई गई थीं।

    एनटीए ने कहा कि जांच के दौरान यह भी पाया गया कि सोशल मीडिया पर वायरल दस्तावेजों में कई प्रकार की डिजिटल छेड़छाड़ की गई है। कुछ मामलों में अतिरिक्त उत्तर चिह्न जोड़ दिए गए, कहीं नाम बदल दिए गए, जबकि कुछ दस्तावेजों में निरीक्षकों के प्रमाणित हस्ताक्षरों और अन्य विवरणों में भी फेरबदल किया गया। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि ऐसे दस्तावेजों को आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं माना जा सकता और इनका उद्देश्य अभ्यर्थियों तथा अभिभावकों को भ्रमित करना है।

    एजेंसी ने अवनीश श्रीवास्तव से जुड़े वायरल दावों पर भी विस्तार से स्पष्टीकरण दिया। एनटीए के अनुसार उसके रिकॉर्ड में सुरक्षित वास्तविक ओएमआर उत्तर-पत्रिका पर अभ्यर्थी का सही नाम, अभिभावकों का विवरण, हस्ताक्षर और अन्य सभी आवश्यक विवरण दर्ज हैं। जबकि सोशल मीडिया पर प्रसारित दस्तावेज में अलग नाम और अभिभावकों की जानकारी दिखाई गई है, जो नीट-यूजी 2026 के किसी भी पंजीकृत अभ्यर्थी से मेल नहीं खाती। इसी प्रकार प्रतिभा त्रिवेदी, अभय यादव और लक्ष्य सिंह से जुड़े मामलों की भी जांच की गई, जिनमें घोषित परिणाम आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुरूप पाए गए।

    एनटीए ने चेतावनी दी है कि किसी फर्जी, जाली या डिजिटल रूप से परिवर्तित ओएमआर उत्तर-पत्रिका का निर्माण, प्रसार या उपयोग सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत संज्ञेय अपराध है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के तहत भी संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    एजेंसी ने सभी अभ्यर्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अप्रमाणित सामग्री पर भरोसा न करें। यदि किसी अभ्यर्थी को अपने परिणाम या ओएमआर उत्तर-पत्रिका को लेकर वास्तविक शिकायत है तो वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करे। एनटीए ने दोहराया कि परीक्षा परिणाम आधिकारिक रिकॉर्ड, उत्तर-कुंजी और मूल्यांकन प्रक्रिया के अनुरूप हैं तथा केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास किया जाना चाहिए।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन के लाठीचार्ज के बाद केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मिलने पहुंचे CJP प्रतिनिधि, समाधान की उम्मीदें बढ़ीं

    जंतर-मंतर प्रदर्शन के लाठीचार्ज के बाद केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मिलने पहुंचे CJP प्रतिनिधि, समाधान की उम्मीदें बढ़ीं


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के तीन छात्रों ने सोमवार को अपना अनशन समाप्त कर दिया। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया, जब संसद मार्च को लेकर राजधानी में प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। छात्रों ने स्पष्ट किया कि भूख हड़ताल समाप्त होने का अर्थ आंदोलन का अंत नहीं है, बल्कि यह संघर्ष के अगले चरण की शुरुआत है।

    जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से विभिन्न मांगों को लेकर छात्र और सामाजिक संगठन प्रदर्शन कर रहे थे। इसी क्रम में AISA से जुड़े तीन छात्र लगातार भूख हड़ताल पर थे। सोमवार को सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र संगठनों और विभिन्न जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया। इस दौरान आंदोलन से जुड़े कई लोगों ने छात्रों के लंबे संघर्ष और धैर्य की सराहना की।

    प्रदर्शन स्थल पर दिनभर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रही। संसद मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच तनाव की स्थिति भी देखने को मिली। प्रशासन ने हालात को नियंत्रित रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ने की बात कहते रहे।

    अनशन समाप्त करने के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि आंदोलन अब नए स्वरूप में जारी रहेगा। उनका कहना था कि पिछले 23 दिनों के संघर्ष ने विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक समूहों और विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका दावा है कि इस आंदोलन ने शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा का विषय बनाया है।

    आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल पर रहना केवल व्यक्तिगत संकल्प का नहीं, बल्कि सामूहिक उद्देश्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान देशभर से छात्रों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों का समर्थन मिला, जिससे उनकी मांगों को और मजबूती मिली।

    अनशन समाप्त होने के अवसर पर कई सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी प्रदर्शन स्थल का दौरा किया। उन्होंने छात्रों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखने के अधिकार का समर्थन किया। साथ ही आंदोलन को शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

    छात्र नेताओं ने कहा कि आने वाले दिनों में आंदोलन को विभिन्न कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। उनका उद्देश्य अधिक से अधिक छात्रों और युवाओं को अपनी मांगों से जोड़ना तथा संबंधित मुद्दों पर व्यापक संवाद स्थापित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन भविष्य की रणनीति पर विचार कर जल्द ही अगले चरण की घोषणा करेगा।

    जंतर-मंतर पर समाप्त हुई यह भूख हड़ताल भले ही अपने निर्धारित स्वरूप में खत्म हो गई हो, लेकिन आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर अभियान जारी रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में राजधानी में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज होने की संभावना बनी हुई है।

  • संसद मार्च के बीच AISA के तीन छात्रों ने समाप्त किया अनशन, संघर्ष जारी रखने का किया एलान, जंतर-मंतर पर बदली आंदोलन की दिशा

    संसद मार्च के बीच AISA के तीन छात्रों ने समाप्त किया अनशन, संघर्ष जारी रखने का किया एलान, जंतर-मंतर पर बदली आंदोलन की दिशा

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के तीन छात्रों ने सोमवार को अपना अनशन समाप्त कर दिया। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया, जब संसद मार्च को लेकर राजधानी में प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। छात्रों ने स्पष्ट किया कि भूख हड़ताल समाप्त होने का अर्थ आंदोलन का अंत नहीं है, बल्कि यह संघर्ष के अगले चरण की शुरुआत है।

    जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से विभिन्न मांगों को लेकर छात्र और सामाजिक संगठन प्रदर्शन कर रहे थे। इसी क्रम में AISA से जुड़े तीन छात्र लगातार भूख हड़ताल पर थे। सोमवार को सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र संगठनों और विभिन्न जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया। इस दौरान आंदोलन से जुड़े कई लोगों ने छात्रों के लंबे संघर्ष और धैर्य की सराहना की।

    प्रदर्शन स्थल पर दिनभर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रही। संसद मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच तनाव की स्थिति भी देखने को मिली। प्रशासन ने हालात को नियंत्रित रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ने की बात कहते रहे।

    अनशन समाप्त करने के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि आंदोलन अब नए स्वरूप में जारी रहेगा। उनका कहना था कि पिछले 23 दिनों के संघर्ष ने विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक समूहों और विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका दावा है कि इस आंदोलन ने शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा का विषय बनाया है।

    आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल पर रहना केवल व्यक्तिगत संकल्प का नहीं, बल्कि सामूहिक उद्देश्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान देशभर से छात्रों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों का समर्थन मिला, जिससे उनकी मांगों को और मजबूती मिली।

    अनशन समाप्त होने के अवसर पर कई सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी प्रदर्शन स्थल का दौरा किया। उन्होंने छात्रों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखने के अधिकार का समर्थन किया। साथ ही आंदोलन को शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

    छात्र नेताओं ने कहा कि आने वाले दिनों में आंदोलन को विभिन्न कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। उनका उद्देश्य अधिक से अधिक छात्रों और युवाओं को अपनी मांगों से जोड़ना तथा संबंधित मुद्दों पर व्यापक संवाद स्थापित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन भविष्य की रणनीति पर विचार कर जल्द ही अगले चरण की घोषणा करेगा।

    जंतर-मंतर पर समाप्त हुई यह भूख हड़ताल भले ही अपने निर्धारित स्वरूप में खत्म हो गई हो, लेकिन आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर अभियान जारी रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में राजधानी में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज होने की संभावना बनी हुई है।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन को तुषार गांधी का समर्थन, बोले- आंदोलन अब नई पीढ़ी का बन चुका है, परिवार के सदस्य भी मार्च में हुए शामिल

    जंतर-मंतर प्रदर्शन को तुषार गांधी का समर्थन, बोले- आंदोलन अब नई पीढ़ी का बन चुका है, परिवार के सदस्य भी मार्च में हुए शामिल


    नई दिल्ली ।
    राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी CJP के प्रदर्शन को सोमवार को महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी का समर्थन मिला। उन्होंने आंदोलन के समर्थन में सार्वजनिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह अभियान अब केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश की नई पीढ़ी भी इससे जुड़ रही है। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि उनकी बेटी कस्तूरी और दामाद हर्ष भी संसद तक प्रस्तावित मार्च में शामिल होकर इस आंदोलन का हिस्सा बने हैं।

    तुषार गांधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। उनके अनुसार यह अब केवल सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक या CJP तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में युवा इसमें भागीदारी कर रहे हैं। उन्होंने इसे नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी का उदाहरण बताते हुए कहा कि आंदोलन का स्वरूप लगातार व्यापक होता जा रहा है।

    उन्होंने अपने परिवार की भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि उनकी बेटी कस्तूरी और दामाद हर्ष संसद मार्च में शामिल हुए। उनके अनुसार दोनों ने परिवार का प्रतिनिधित्व करते हुए शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध में भाग लिया। तुषार गांधी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रयोग का हिस्सा बताया और कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी किसी भी जन आंदोलन को व्यापक स्वरूप देती है।

    तुषार गांधी ने अपने वक्तव्य में केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन के प्रति संवेदनशील रुख अपनाने के बजाय उसे नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का उल्लेख किया और कहा कि उस समय भी नेतृत्व की गिरफ्तारी के बावजूद जनभागीदारी के कारण आंदोलन जारी रहा था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और असहमति व्यक्त करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।

    अपने वक्तव्य में तुषार गांधी ने अभिनेता आमिर खान और फिल्म निर्देशक राजकुमार हिरानी की फिल्म “3 इडियट्स” का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें फिल्म पसंद आई थी, लेकिन उन्हें यह अच्छा नहीं लगा कि सोनम वांगचुक के संदर्भ में “इडियट” शब्द का उपयोग किया गया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निर्माताओं द्वारा यह स्पष्ट किया जाना उचित था कि फिल्म सीधे तौर पर सोनम वांगचुक के जीवन पर आधारित नहीं थी।

    दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन को लेकर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। समर्थक इसे लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का माध्यम बता रहे हैं, जबकि राजनीतिक स्तर पर भी इसे लेकर अलग-अलग मत व्यक्त किए जा रहे हैं। तुषार गांधी के समर्थन और उनके परिवार की भागीदारी ने इस आंदोलन को लेकर चर्चा को और तेज कर दिया है।

    फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और इससे जुड़े घटनाक्रमों पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया पर राजनीतिक तथा सामाजिक स्तर पर बहस जारी रहने की संभावना है।

  • संसद मार्च के दौरान प्रदर्शन पर बवाल, लाठीचार्ज के बाद सरकार पर बरसे शशि थरूर, विपक्ष ने संसद में चर्चा की उठाई मांग

    संसद मार्च के दौरान प्रदर्शन पर बवाल, लाठीचार्ज के बाद सरकार पर बरसे शशि थरूर, विपक्ष ने संसद में चर्चा की उठाई मांग


    नई दिल्ली ।
    संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राजधानी में हुए प्रदर्शन और उसके दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान हुई झड़प और पुलिस द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किए जाने के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखे सवाल उठाए। इस घटनाक्रम को लेकर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

    प्रदर्शनकारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज तथा आंसू गैस का इस्तेमाल किया। घटना के बाद कई प्रदर्शनकारी मौके से हट गए, जबकि पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया।

    कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन करने वालों की बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार के पास पर्याप्त बहुमत है तो फिर चर्चा से परहेज क्यों किया जा रहा है। थरूर ने कहा कि संसद का उद्देश्य जनहित के मुद्दों पर विचार-विमर्श करना है और लोकतांत्रिक संस्थाओं का महत्व संवाद से ही मजबूत होता है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालने की आवश्यकता पर बल दिया।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस घटनाक्रम पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को अधिक संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। उनका कहना था कि यदि परीक्षा व्यवस्था और उससे जुड़े मामलों में लगातार विवाद सामने आ रहे हैं तो सरकार को इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए इस पूरे मामले पर जवाबदेही तय करने की मांग की।

    इधर, संसद के मानसून सत्र के दौरान भी विपक्ष ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। विपक्षी दलों ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा संबंधी विवादों और युवाओं से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि ऐसे विषय सीधे लाखों छात्रों और उनके भविष्य से जुड़े हैं, इसलिए सरकार को इन पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

    इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। मुलाकात को लेकर विभिन्न तरह की राजनीतिक चर्चाएं शुरू हुईं, हालांकि आधिकारिक तौर पर बैठक के एजेंडे या किसी संभावित निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई। वहीं, प्रदर्शन से जुड़े कुछ प्रमुख प्रतिनिधियों ने अपने आंदोलन की आगामी रणनीति पर भी विचार किया। आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की, जबकि पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी अपनी ओर से आंदोलन को लेकर आगे की रूपरेखा साझा की और सरकार के सामने रखी गई मांगों का उल्लेख किया।

    संसद सत्र के साथ ही यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बन गया है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस पर तीखी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। विपक्ष सरकार से इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत जवाब और संबंधित मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

  • सिर्फ कुछ सेंटीमीटर ऊंची यह पहाड़ी बनी दुनिया भर में चर्चा का विषय बिना ट्रेनिंग हर कोई बन जाता है पर्वतारोही

    सिर्फ कुछ सेंटीमीटर ऊंची यह पहाड़ी बनी दुनिया भर में चर्चा का विषय बिना ट्रेनिंग हर कोई बन जाता है पर्वतारोही


    नई दिल्ली। दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वतों का नाम आते ही लोगों के मन में माउंट एवरेस्ट हिमालय और कंचनजंगा जैसी विशाल चोटियों की तस्वीर उभर आती है। इन पर्वतों पर चढ़ना साहस धैर्य और कठिन प्रशिक्षण की मांग करता है। लेकिन इन सबके बीच एक ऐसी जगह भी चर्चा में है जिसे दुनिया की सबसे छोटी पहाड़ी कहा जा रहा है। यह जगह अपने आकार से ज्यादा अपने अनोखे दावे और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की वजह से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।

    सोशल मीडिया पर इसे माउंट पॉल्ट्री के नाम से प्रचारित किया जा रहा है। दावा किया जाता है कि इसकी ऊंचाई केवल कुछ सेंटीमीटर है और कई पोस्ट में इसे लगभग सात सेंटीमीटर ऊंचा बताया गया है। यही वजह है कि यहां पहुंचने वाले लोग मजाकिया अंदाज में खुद को दुनिया की सबसे छोटी पहाड़ी का विजेता बताते हुए फोटो और वीडियो साझा करते हैं। हालांकि इस दावे की किसी आधिकारिक भूगोल या वैज्ञानिक संस्था द्वारा पुष्टि नहीं की गई है और इसे अधिकतर इंटरनेट पर वायरल सामग्री के रूप में ही देखा जाता है।

    इस कथित पहाड़ी की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां किसी विशेष प्रशिक्षण या पर्वतारोहण उपकरण की जरूरत नहीं पड़ती। जहां बड़े पर्वतों पर चढ़ने में कई दिन लग जाते हैं वहीं इस छोटे प्राकृतिक उभार को बच्चे बुजुर्ग और यहां तक कि पालतू जानवर भी कुछ ही कदमों में पार कर लेते हैं। यही सरलता इसे लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनाती है और परिवारों के लिए यह एक मनोरंजक अनुभव बन जाता है।

    पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में क्वर्की टूरिज्म यानी अनोखी और अलग तरह की जगहों पर घूमने का चलन तेजी से बढ़ा है। लोग अब केवल प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं रहना चाहते बल्कि ऐसी जगहों की तलाश करते हैं जिनकी कहानी रोचक हो और जिसे सोशल मीडिया पर साझा किया जा सके। माउंट पॉल्ट्री भी इसी वजह से चर्चा में आया है। यहां आने वाले पर्यटक कुछ सेकंड की चढ़ाई को भी खास उपलब्धि की तरह पेश करते हैं और मजेदार कैप्शन के साथ अपनी तस्वीरें साझा करते हैं।

    हालांकि भूगोल के विशेषज्ञ किसी स्थान को पहाड़ या पर्वत मानने के लिए उसकी ऊंचाई प्राकृतिक संरचना और भौगोलिक विशेषताओं का अध्ययन करते हैं। ऐसे में इतनी कम ऊंचाई वाले प्राकृतिक उभार को अधिकतर विशेषज्ञ पहाड़ी की बजाय छोटा टीला या प्राकृतिक उभार मानते हैं। इसलिए माउंट पॉल्ट्री को दुनिया की सबसे छोटी पहाड़ी कहना एक लोकप्रिय दावा जरूर है लेकिन इसे स्थापित भौगोलिक तथ्य नहीं माना जाता।

    फिर भी इस अनोखी जगह ने यह साबित कर दिया है कि किसी स्थान की लोकप्रियता केवल उसके आकार से तय नहीं होती। जहां एक ओर दुनिया की ऊंची चोटियां साहस और रोमांच का प्रतीक हैं वहीं दूसरी ओर इस तरह की छोटी और अनोखी जगहें लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने का काम करती हैं। यही कारण है कि इंटरनेट पर माउंट पॉल्ट्री लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे देखने तथा अपनी यादगार तस्वीरें लेने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

  • मानसून सत्र से पहले स्पीकर का बड़ा फैसला टीएमसी के बागी सांसद अब अलग बैठेंगे कई दिग्गज नेताओं की सीट भी बदली

    मानसून सत्र से पहले स्पीकर का बड़ा फैसला टीएमसी के बागी सांसद अब अलग बैठेंगे कई दिग्गज नेताओं की सीट भी बदली


    नई दिल्ली। लोकसभा के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले संसद की बैठने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 बागी सांसदों को सदन में अलग बैठने की अनुमति देते हुए उनके लिए नई सीटें आवंटित कर दी हैं। इस फैसले का असर केवल इन सांसदों तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे सीटिंग प्लान में बदलाव करना पड़ा जिसके चलते कुल 39 सांसदों की सीटें बदल दी गईं। नई व्यवस्था सोमवार से शुरू होने वाले मानसून सत्र से लागू होगी और सभी सांसद अपने नए डिवीजन नंबर तथा नई सीटों के साथ सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे।

    लोकसभा सचिवालय के अनुसार टीएमसी से अलग हुए सांसदों को एक साथ बैठाने के लिए सदन की पूरी बैठने की व्यवस्था में बदलाव करना आवश्यक था। इसी कारण कई अन्य सांसदों की सीटें भी बदलनी पड़ीं। संसद में सीटों का निर्धारण डिवीजन नंबर के आधार पर किया जाता है और यही नंबर किसी सांसद की पहचान तथा उसकी निर्धारित सीट तय करता है। संसदीय कार्यवाही के दौरान मतदान दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और अन्य आधिकारिक प्रक्रियाओं में भी इसी डिवीजन नंबर का उपयोग किया जाता है।

    इस फेरबदल का असर कई प्रमुख नेताओं पर भी पड़ा है। लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी की सीट बदल दी गई है। इसके अलावा वाईएसआर कांग्रेस के पी वी मिधुन रेड्डी और शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल को भी नई सीटें आवंटित की गई हैं। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुदीप बंदोपाध्याय की सीट भी बदलकर 354 कर दी गई है जबकि पहले उनका सीट नंबर 280 था। इन बदलावों के साथ संसद की नई बैठक व्यवस्था मानसून सत्र में पहली बार देखने को मिलेगी।

    लोकसभा अध्यक्ष द्वारा शनिवार को दो महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। पहला फैसला शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को स्वीकार करने से जुड़ा था। दूसरा फैसला टीएमसी के 20 बागी सांसदों को सदन में अलग बैठने की अनुमति देने का था। जानकारी के अनुसार ये सभी सांसद अब नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई से जुड़े हुए हैं और इसी आधार पर उन्होंने अलग बैठने की मांग की थी।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव केवल बैठने की व्यवस्था तक सीमित नहीं है बल्कि इसका राजनीतिक संदेश भी काफी महत्वपूर्ण है। संसद में किसी समूह को अलग सीटें मिलना उसकी अलग पहचान को भी दर्शाता है। ऐसे में इस फैसले को पश्चिम बंगाल की राजनीति और विपक्ष की रणनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। मानसून सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है जबकि विपक्ष भी विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। ऐसे समय में सीटिंग प्लान में यह बदलाव राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है।

    नई व्यवस्था लागू होने के बाद सांसद अपने नए डिवीजन नंबर के अनुसार सदन में बैठेंगे और संसदीय कार्यवाही में भाग लेंगे। माना जा रहा है कि मानसून सत्र के दौरान इस फैसले पर राजनीतिक बहस भी देखने को मिल सकती है क्योंकि विपक्ष पहले ही कई मुद्दों पर सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी कर चुका है।