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  • तपिश से मिली बड़ी राहत, दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाओं संग हुई बारिश; मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के लिए जारी किया अलर्ट

    तपिश से मिली बड़ी राहत, दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाओं संग हुई बारिश; मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के लिए जारी किया अलर्ट

    नई दिल्ली । कई दिनों से भीषण गर्मी और उमस का सामना कर रहे दिल्ली-एनसीआर के लोगों को सोमवार शाम मौसम ने बड़ी राहत दी। अचानक तेज हवाएं चलने के बाद राजधानी और आसपास के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जिससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आई और वातावरण सुहावना हो गया। लंबे समय से गर्मी से परेशान लोगों ने राहत महसूस की और शाम के समय मौसम पूरी तरह बदला हुआ नजर आया।

    दिनभर तेज धूप और उमस के बाद शाम होते-होते आसमान में बादल छा गए। इसके बाद तेज हवा चलने लगी और कई स्थानों पर बारिश शुरू हो गई। मौसम में आए इस बदलाव से गर्मी का असर काफी कम हो गया। बारिश के चलते सड़कों पर लोगों की आवाजाही भी बढ़ी और कई इलाकों में लोगों ने खुले मौसम का आनंद लिया। हालांकि कुछ स्थानों पर तेज हवाओं के कारण यातायात की रफ्तार भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुई।

    मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को भी राजधानी में राहत का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। पूरे दिन आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। दोपहर या रात के समय हल्की बारिश के साथ गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है, जबकि हवा के झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।

    मंगलवार को अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। सुबह पश्चिमी दिशा से हवाएं लगभग 20 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलेंगी, जो दोपहर के समय बढ़ सकती हैं। शाम और रात के दौरान हवा की रफ्तार कुछ कम होने का अनुमान है, लेकिन मौसम में नमी बनी रहेगी।

    बुधवार, 1 जुलाई को भी मौसम का मिजाज लगभग इसी तरह रहने की संभावना जताई गई है। दिनभर बादल छाए रहने के साथ कुछ स्थानों पर हल्की बारिश और गरज-चमक हो सकती है। तेज हवाओं का दौर भी जारी रह सकता है और हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की संभावना है। कुछ इलाकों में हवा के झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं, जिससे मौसम और अधिक सुहावना बना रहेगा।

    एक जुलाई को अधिकतम तापमान 37 से 39 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 27 से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। सुबह उत्तर-पश्चिम दिशा से हवाएं चलेंगी, जबकि दोपहर और शाम के दौरान पश्चिमी हवाओं का प्रभाव बना रहेगा। मौसम विभाग का मानना है कि बादलों की आवाजाही और हल्की वर्षा के कारण तापमान सामान्य के आसपास बना रह सकता है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश और तेज हवाओं की वजह से लोगों को फिलहाल भीषण गर्मी से राहत मिल सकती है। हालांकि गरज-चमक और तेज हवा के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों तथा कमजोर ढांचों के आसपास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। आने वाले दिनों में मानसूनी गतिविधियां और सक्रिय होने की संभावना है, जिससे राजधानी और एनसीआर के कई हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी रह सकता है। इससे न केवल तापमान नियंत्रित रहेगा बल्कि लंबे समय से पड़ रही गर्मी और उमस से भी लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

  • दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा जल्द होगा शुरू, वडोदरा से मुंबई सिर्फ 4 घंटे में पहुंचेंगे यात्री

    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा जल्द होगा शुरू, वडोदरा से मुंबई सिर्फ 4 घंटे में पहुंचेंगे यात्री

    नई दिल्ली: देश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का वडोदरा-मुंबई सेक्शन 31 अगस्त 2026 तक यातायात के लिए खोले जाने की संभावना है। इस हिस्से के शुरू होने के बाद वडोदरा और मुंबई के बीच यात्रा का समय लगभग 8 घंटे से घटकर करीब 4 घंटे रह जाएगा। इससे यात्रियों के साथ-साथ उद्योग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

    निर्माण कार्य की समीक्षा के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर परियोजना पूरी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं करने पर जोर दिया गया है, ताकि एक्सप्रेसवे सुरक्षित और टिकाऊ बन सके।

    करीब 1,400 किलोमीटर लंबा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश का सबसे लंबा एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है। यह हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र को जोड़ता है। इस परियोजना पर लगभग एक लाख करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इसका उद्देश्य दिल्ली और मुंबई के बीच तेज, सुरक्षित और निर्बाध सड़क संपर्क उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देना भी है।

    वडोदरा-मुंबई कॉरिडोर का महाराष्ट्र वाला हिस्सा लगभग 157 किलोमीटर लंबा है, जिसका निर्माण करीब 24 हजार करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। इस सेक्शन को सात निर्माण पैकेजों में विभाजित किया गया है। इनमें से पांच पैकेज का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष दो पैकेज अगस्त के अंत तक पूरे होने की उम्मीद है। इनके चालू होने के बाद इस पूरे सेक्शन पर निर्बाध यातायात संभव हो सकेगा।

    इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ माल ढुलाई क्षेत्र को मिलने की उम्मीद है। एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद उत्तर भारत से आने वाला माल मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक पहुंचने के लिए भीड़भाड़ वाले मार्गों से नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे परिवहन में लगने वाला समय कम होगा, ईंधन की बचत होगी और लॉजिस्टिक्स लागत में भी कमी आएगी। इसका सीधा फायदा निर्यात और औद्योगिक गतिविधियों को मिलेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से उत्तर और पश्चिम भारत के औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही नए उद्योगों की स्थापना और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। तेज और आधुनिक परिवहन नेटवर्क देश की आर्थिक गतिविधियों को गति देने के साथ-साथ व्यापारिक प्रतिस्पर्धा को भी मजबूत करेगा।

    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का यह नया सेक्शन केवल यात्रा का समय कम करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के सड़क परिवहन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को अधिक आधुनिक, तेज और किफायती बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • यमुना के पानी पर हरियाणा-राजस्थान में बनी सहमति, लाखों लोगों को मिलेगा पीने का पानी, तीन दशक पुरानी समस्या खत्म

    यमुना के पानी पर हरियाणा-राजस्थान में बनी सहमति, लाखों लोगों को मिलेगा पीने का पानी, तीन दशक पुरानी समस्या खत्म

    नई दिल्ली। हरियाणा और राजस्थान के बीच लंबे समय से चली आ रही पानी की समस्या के समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों राज्यों ने यमुना जल परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन को लेकर महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते की मौजूदगी में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस समझौते को जल प्रबंधन और सहकारी संघवाद की दिशा में अहम उपलब्धि माना जा रहा है।

    समझौते के तहत मानसून के दौरान जुलाई से अक्टूबर के बीच हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान को उसके हिस्से का पानी भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। योजना के अनुसार लगभग 580 एमसीएम पानी तीन बड़ी भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए राजस्थान तक पहुंचाया जाएगा। इन पाइपलाइनों का व्यास 3.6 मीटर से अधिक होगा, जिससे पानी की सुरक्षित और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

    सरकार का कहना है कि इस परियोजना से राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनू जिलों के साथ-साथ हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद क्षेत्रों में पेयजल उपलब्ध कराने में बड़ी मदद मिलेगी। लंबे समय से पानी की कमी झेल रहे इन इलाकों में इस परियोजना से लाखों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा जल संरक्षण और भूजल स्तर में सुधार की दिशा में भी यह योजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    समझौते में लागत साझा करने, वित्तीय जिम्मेदारियों, जल आवंटन, जल छोड़ने की प्रक्रिया, रखरखाव और निगरानी तंत्र से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है। इसके साथ ही पारदर्शिता बनाए रखने और भविष्य में किसी भी विवाद के समाधान के लिए स्पष्ट व्यवस्था भी तय की गई है। सरकार का दावा है कि वैज्ञानिक आधार पर तैयार यह मॉडल आने वाले वर्षों में भी प्रभावी ढंग से काम करेगा।

    केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह समझौता सहकारी संघवाद की भावना का मजबूत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य आपसी सहयोग और संवाद की भावना से कार्य करें तो वर्षों पुराने विवादों का भी स्थायी समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने परियोजना को दोनों राज्यों के लिए लाभकारी बताते हुए इसे जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

    सरकार के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य पश्चिमी यमुना नहर से राजस्थान के हिस्से का पानी भूमिगत पाइपलाइन के जरिए पहुंचाना है, ताकि वर्ष 1994 के जल बंटवारा समझौते के तहत मिले पानी का प्रभावी उपयोग किया जा सके। इससे विशेष रूप से सूखे और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता बढ़ेगी और सामाजिक व आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना के पूरा होने के बाद जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी। साथ ही यह मॉडल भविष्य में राज्यों के बीच जल प्रबंधन से जुड़े अन्य मामलों के समाधान के लिए भी एक प्रभावी उदाहरण बन सकता है। सरकार का विश्वास है कि सभी संबंधित एजेंसियों के सहयोग से इस परियोजना को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कर लाखों लोगों को इसका लाभ पहुंचाया जाएगा।

  • सरला भट मर्डर केस में 36 साल बाद चार्जशीट दाखिल, पांच आरोपी नामजद, गवाहों और फोरेंसिक साक्ष्यों पर टिका पूरा मामला

    सरला भट मर्डर केस में 36 साल बाद चार्जशीट दाखिल, पांच आरोपी नामजद, गवाहों और फोरेंसिक साक्ष्यों पर टिका पूरा मामला

    नई दिल्ली। वर्ष 1990 में कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट की हत्या से जुड़े बहुचर्चित मामले में 36 साल बाद महत्वपूर्ण कानूनी प्रगति हुई है। जम्मू-कश्मीर की जांच एजेंसी ने विशेष अदालत में 737 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल करते हुए अलगाववादी नेता यासीन मलिक को इस हत्या का मुख्य साजिशकर्ता बताया है। एजेंसी का दावा है कि यह हत्या घाटी में भय का माहौल बनाने और कश्मीरी पंडित समुदाय को पलायन के लिए मजबूर करने की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा थी।

    चार्जशीट के अनुसार, सरला भट श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में नर्स के रूप में कार्यरत थीं। उन्हें लगातार नौकरी छोड़ने और घाटी से बाहर जाने की धमकियां मिल रही थीं, लेकिन उन्होंने अपना कार्य जारी रखा। आरोप है कि 14 अप्रैल 1990 को उनका अपहरण किया गया और कुछ दिनों बाद उनका शव गोलियों से छलनी अवस्था में बरामद हुआ। जांच एजेंसी का कहना है कि यह कोई सामान्य हत्या नहीं बल्कि पूर्व नियोजित आतंकी वारदात थी।

    मामले में कुल पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें यासीन मलिक, अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी उर्फ इदरीस, गुलाम मोहम्मद टपलू और खुर्शीद अहमद चाल्कू के नाम शामिल हैं। इनमें से तीन आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि खुर्शीद अहमद चाल्कू को फरार बताया गया है। यासीन मलिक फिलहाल एक अन्य मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है।

    जांच एजेंसी का दावा है कि सरला भट को पहले झूठा पुलिस मुखबिर बताकर निशाना बनाया गया। चार्जशीट के अनुसार उनका अपहरण अस्पताल के पास से किया गया, जिसके बाद उन्हें कथित रूप से प्रताड़ित किया गया और अंत में गोली मारकर हत्या कर दी गई। एजेंसी का कहना है कि पूरी वारदात एक संगठित आतंकी नेटवर्क के निर्देश पर अंजाम दी गई थी।

    चार्जशीट में कई प्रत्यक्षदर्शियों के बयान शामिल किए गए हैं। जांच के अनुसार, गवाहों ने अपहरण से पहले सरला भट को आरोपियों के साथ देखा था और बाद की घटनाओं का भी विस्तृत विवरण दिया है। कई स्वतंत्र गवाहों ने भी कथित आरोपियों की पहचान की है। इसके अलावा घटनास्थल और अपहरण के रास्ते से जुड़े दस्तावेज तथा पहचान संबंधी रिकॉर्ड भी अदालत में पेश किए गए हैं।

    मेडिकल और फोरेंसिक रिपोर्ट को भी अभियोजन पक्ष का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है। जांच में सरला भट के शरीर पर कई गोली लगने के निशान, गंभीर चोटें और यातना के संकेत मिलने का उल्लेख किया गया है। बैलिस्टिक जांच में घटनास्थल से बरामद कारतूसों के एक ही हथियार से चलाए जाने की पुष्टि होने का दावा किया गया है, जिसे प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से भी जोड़ा गया है।

    चार्जशीट में घटनास्थल से बरामद कथित संगठनात्मक दावा-पत्र, अस्पताल कर्मचारियों के बयान और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का भी उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि इन सभी साक्ष्यों से यह मामला एक सुनियोजित आतंकी साजिश की ओर संकेत करता है। अब विशेष अदालत चार्जशीट पर संज्ञान लेने के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय करेगी। साथ ही एजेंसी का मानना है कि इस जांच से उस दौर में कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाकर की गई अन्य घटनाओं की जांच में भी नए तथ्य सामने आ सकते हैं।

  • केतन अग्रवाल हत्याकांड में कानूनी लड़ाई तेज, आरोपी सिया के वकील ने कोर्ट से जताई उम्मीद, परिवार ने दूसरे वकील से किया किनारा

    केतन अग्रवाल हत्याकांड में कानूनी लड़ाई तेज, आरोपी सिया के वकील ने कोर्ट से जताई उम्मीद, परिवार ने दूसरे वकील से किया किनारा

    नई दिल्ली। केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच लगातार आगे बढ़ रही है और अब मामले का कानूनी पक्ष भी स्पष्ट होने लगा है। आरोपी सिया गोयल की ओर से अदालत में पेश होने वाले अधिवक्ता ने कहा है कि मामला अभी शुरुआती चरण में है और जांच की दिशा को देखते हुए अदालत में कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष मजबूती से रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल पुलिस रिमांड से जुड़े मुद्दों पर अदालत में आवश्यक दलीलें प्रस्तुत की जाएंगी।

    मामले में उस समय नया मोड़ आया जब सिया गोयल के परिवार की ओर से एक अन्य अधिवक्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई। सिया के भाई साहिल ने कहा कि जिस वकील के नाम की चर्चा की जा रही है, उन्हें परिवार ने नियुक्त नहीं किया है। उन्होंने कहा कि परिवार की ओर से अधिकृत कानूनी प्रतिनिधित्व अलग अधिवक्ता कर रहे हैं और दूसरे व्यक्ति के दावों से उनका कोई संबंध नहीं है।

    इस बीच सिया गोयल के भाई और उनके अधिवक्ता को पुलिस स्टेशन पहुंचते हुए भी देखा गया, जहां जांच से जुड़े आवश्यक दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों के साथ बातचीत हुई। पुलिस पूरे मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और बयानों की जांच कर रही है तथा आगे की कार्रवाई अदालत के निर्देशों के अनुसार की जाएगी।

    जांच के दौरान दर्ज एफआईआर से भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। शिकायत के अनुसार, घटना से पहले के दिनों में सिया गोयल का व्यवहार बदला हुआ बताया गया है। परिवार का दावा है कि केतन अग्रवाल ने अपने परिजनों से बातचीत के दौरान बताया था कि दोनों के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर अक्सर विवाद होने लगे थे और व्यवहार में असामान्य परिवर्तन दिखाई दे रहा था।

    एफआईआर के अनुसार, घटना से एक दिन पहले सिया गोयल ने अपने जन्मदिन का हवाला देते हुए केतन अग्रवाल को यात्रा के लिए राजी किया था। अगले दिन दोनों निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार लोहागढ़ किले की ओर रवाना हुए। आरोप है कि वहीं पर कथित रूप से एक सुनियोजित साजिश के तहत केतन अग्रवाल को ऊंची चट्टान से धक्का दिया गया, जिससे उनकी मौत हो गई।

    दस्तावेजों के मुताबिक, घटना के बाद सिया गोयल ने केतन अग्रवाल के परिवार को फोन कर उनके खाई में गिरने की जानकारी दी। सूचना मिलने के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस ने तुरंत बचाव अभियान चलाया और घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस अब घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल फोन की लोकेशन, कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी सबूतों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है और अदालत में प्रस्तुत होने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच एजेंसियां हर तथ्य का गहन परीक्षण कर रही हैं और आने वाले दिनों में इस प्रकरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना है।

  • राम मंदिर दान गबन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, बोला- नियमित प्रक्रिया से होगी सुनवाई, जल्दबाजी की कोई जरूरत नहीं

    राम मंदिर दान गबन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, बोला- नियमित प्रक्रिया से होगी सुनवाई, जल्दबाजी की कोई जरूरत नहीं

    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले को नियमित न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही सुना जाएगा और तत्काल सुनवाई की आवश्यकता नहीं है। सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणी, “क्या बाद में सुनवाई होने से कोई आसमान टूट जाएगा”, सबसे अधिक चर्चा में रही। अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार ही आगे बढ़ेगी और किसी भी मामले में केवल आग्रह के आधार पर तत्काल सुनवाई नहीं की जा सकती।

    सोमवार को यह याचिका जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष प्रस्तुत की गई। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अनुरोध किया कि राम मंदिर में दान राशि के कथित दुरुपयोग की गंभीरता को देखते हुए मामले की तत्काल सुनवाई की जाए और इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की निगरानी में कराई जाए। हालांकि पीठ ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और कहा कि अदालत के नियमित कामकाज शुरू होने के बाद इस मामले पर सुनवाई करना पर्याप्त होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका को जुलाई के दूसरे सप्ताह, 12 से 17 जुलाई के बीच सूचीबद्ध किया जाएगा।

    जनहित याचिका दो अधिवक्ताओं की ओर से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर के लिए श्रद्धालुओं से प्राप्त दान राशि के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच पर उन्हें पूरा भरोसा नहीं है क्योंकि महत्वपूर्ण साक्ष्यों के संरक्षण और निष्पक्ष जांच को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इसी आधार पर उन्होंने मामले की स्वतंत्र जांच सीबीआई से कराने की मांग की है ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष पड़ताल हो सके।

    इस बीच पुलिस की जांच लगातार जारी है। अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच के दौरान दान राशि की गिनती और प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ की गई है। पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान भी दर्ज किया है। आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों, जिनमें ट्रस्टी अनिल मिश्रा भी शामिल हैं, से पूछताछ की जा सकती है। चंपत राय के ट्रस्ट से इस्तीफा देने के बाद इस पूरे मामले को लेकर चर्चाएं और तेज हुई हैं, हालांकि जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं।

    राम मंदिर दान विवाद उस समय सामने आया जब मंदिर के दान पात्र से नकदी चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के बाद पुलिस ने मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की, जिसमें कुछ संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं। इसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने दान राशि की गणना से जुड़े कुछ कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की और बाद में उनकी गिरफ्तारी भी की। जांच एजेंसियां अब वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों का मिलान कर पूरे मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।

    सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि अदालत ने मामले की गंभीरता को नकारा नहीं है, बल्कि केवल तत्काल सुनवाई की मांग को अस्वीकार किया है। अब इस जनहित याचिका पर नियमित सूची के अनुसार जुलाई के दूसरे सप्ताह में सुनवाई होने की संभावना है। उस दौरान अदालत यह तय करेगी कि उपलब्ध तथ्यों, जांच की स्थिति और याचिका में उठाए गए मुद्दों के आधार पर आगे किस प्रकार की न्यायिक कार्रवाई की जानी चाहिए।

  • यूपी चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस का बड़ा दावा, सपा से बराबर सीटों की हिस्सेदारी की मांग, विपक्षी एकता पर भी दिया जोर

    यूपी चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस का बड़ा दावा, सपा से बराबर सीटों की हिस्सेदारी की मांग, विपक्षी एकता पर भी दिया जोर

    नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच विपक्षी राजनीति में सीट बंटवारे को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस के नव नियुक्त प्रदेश प्रभारी राजेंद्र गौतम ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि राज्य में विपक्षी दलों के बीच गठबंधन होता है, तो कांग्रेस बराबरी की भागीदारी की अपेक्षा करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और उत्तर प्रदेश में उसे सम्मानजनक तथा समान हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।

    राजेंद्र गौतम ने कहा कि कांग्रेस का देश के राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की मजबूत पहचान है। उनके अनुसार भारतीय जनता पार्टी का प्रभावी मुकाबला केवल एक मजबूत राष्ट्रीय दल ही कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय दलों की अपनी भूमिका है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की स्थिति अलग है। इसी आधार पर उन्होंने संभावित गठबंधन में बराबरी की भागीदारी की बात कही।

    उन्होंने विपक्षी दलों के बीच व्यापक एकजुटता की भी वकालत की। उनका कहना था कि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाली सभी राजनीतिक शक्तियों को एक मंच पर आने की आवश्यकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी सहित उन सभी दलों के साथ सहयोग की संभावना जताई जो भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति बनाने के पक्षधर हैं।

    कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए राज्यभर में अपने संगठन को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देगी। उन्होंने घोषणा की कि जुलाई से प्रदेशव्यापी दौरा शुरू किया जाएगा, जिसके दौरान कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करने के साथ संगठन विस्तार पर भी काम किया जाएगा। उनका कहना था कि जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत बनाना प्राथमिकता होगी, ताकि चुनावी तैयारी प्रभावी ढंग से की जा सके।

    राजेंद्र गौतम ने राज्य सरकार पर भी कई राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और विभिन्न सरकारी निर्णयों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरेगी और जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्षी गठबंधन का स्वरूप तय होता है, तो सभी सहयोगी दलों से चर्चा के बाद साझा घोषणापत्र तैयार किया जाएगा। उनके अनुसार गठबंधन की राजनीति में सभी दलों की राय और प्राथमिकताओं को शामिल किया जाएगा, ताकि जनता के सामने एक साझा और स्पष्ट एजेंडा रखा जा सके।

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के इस रुख को आगामी चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। सीट बंटवारे को लेकर दिए गए इस बयान के बाद विपक्षी दलों के बीच आगे होने वाली बातचीत पर राजनीतिक हलकों की नजरें टिक गई हैं। आने वाले महीनों में गठबंधन की संभावनाएं, सीटों का फार्मूला और साझा चुनावी रणनीति प्रदेश की राजनीति का प्रमुख विषय बनने की संभावना है।

  • जम्मू-कश्मीर का 'धदकई' गांव बना भारत का 'साइलेंट विलेज', जेनेटिक म्यूटेशन के कारण सन्नाटे के साए में जीने को मजबूर हैं ग्रामीण

    जम्मू-कश्मीर का 'धदकई' गांव बना भारत का 'साइलेंट विलेज', जेनेटिक म्यूटेशन के कारण सन्नाटे के साए में जीने को मजबूर हैं ग्रामीण

    नई दिल्ली। भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले की सुदूर और बर्फीली पहाड़ियों के बीच बसा ‘धदकई’ गांव इन दिनों अपनी एक बेहद अनोखी और संवेदनशील भौगोलिक एवं चिकित्सीय स्थिति के कारण वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस गांव को देश में ‘द साइलेंट विलेज ऑफ इंडिया’ यानी भारत का शांत गांव कहा जाता है। प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत दिखने वाले इस गांव की असल हकीकत यह है कि यहां की एक बहुत बड़ी आबादी जन्मजात रूप से न तो सुन सकती है और न ही बोल सकती है। इस छोटे से पर्वतीय क्षेत्र में पसरी यह खामोशी कोई प्राकृतिक सन्नाटा नहीं, बल्कि एक गंभीर अनुवांशिक बीमारी का नतीजा है।

    भौगोलिक दृष्टि से यह गांव जम्मू से लगभग 260 किलोमीटर दूर दुर्गम पहाड़ी इलाके में स्थित है, जहां मुख्य रूप से अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग से ताल्लुक रखने वाले गुज्जर मुस्लिम समुदाय के लोग निवास करते हैं। करीब 2,000 की कुल आबादी वाले इस गांव में वर्तमान में 90 से अधिक लोग पूरी तरह से मूक-बधिर हैं। गांव की सामाजिक संरचना के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां के कुल 105 परिवारों में से 55 से अधिक परिवार ऐसे हैं, जिनके घर में कम से कम एक या उससे अधिक सदस्य इस शारीरिक अक्षमता के साथ जीने को मजबूर हैं। कई घरों में स्थिति इतनी गंभीर है कि सात में से छह बच्चे मूक-बधिर पैदा हुए हैं।

    इस अनोखी चुनौती से निपटने के लिए ग्रामीणों ने आपस में संवाद का एक अनूठा तरीका खोज निकाला है। धदकई गांव के लोगों ने अपनी एक स्थानीय सांकेतिक भाषा (लोकल साइन लैंग्वेज) विकसित कर ली है। खास बात यह है कि गांव के जो लोग सामान्य रूप से सुन और बोल सकते हैं, वे भी इस इशारों की भाषा में पूरी तरह पारंगत हैं। इसके चलते पूरा गांव बिना किसी बाहरी रुकावट या हिचकिचाहट के आपस में रोजमर्रा की बातें बेहद आसानी से साझा कर लेता है। स्थानीय रिकॉर्ड्स के अनुसार, गांव में मूक-बधिर बच्चे के जन्म का पहला आधिकारिक मामला वर्ष 1901 में दर्ज किया गया था, जो समय के साथ लगातार बढ़ता चला गया।

    लंबे समय तक स्थानीय समाज इस स्थिति को दैवीय अभिशाप या वहां की मिट्टी-पानी का दोष मानता रहा, लेकिन हालिया वर्षों में जब वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की विभिन्न टीमों ने इस पर व्यापक शोध किया, तो एक चौंकाने वाली चिकित्सीय वजह सामने आई। मेडिकल साइंस की भाषा में इसे ‘जेनेटिक क्लस्टर’ या ‘फाउंडर्स इफेक्ट’ कहा जाता है। अनुसंधान में पाया गया कि गुज्जर समुदाय के लोग सदियों से अपनी ही जनजाति और बेहद करीबी रिश्तेदारों के भीतर शादियां करते आ रहे हैं। इस सीमित जेनेटिक पूल (डीएनए संरचना) के कारण मानव शरीर के ‘ओटीओएफ’ (ओटोफर्लिन) नामक जीन में गंभीर विकृति आ गई है, जो कान से दिमाग तक आवाज के सिग्नल भेजने में असमर्थ हो जाता है।

    चिकित्सीय विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि इस अनुवांशिक चक्रव्यूह को तोड़ने का एकमात्र व्यावहारिक उपाय यह है कि गांव की युवा पीढ़ी अपने रिश्तेदारों या अंतर्जातीय कम्युनिटी से बाहर शादियां करना शुरू करे। इसके अलावा, वैज्ञानिकों ने शादी से पहले जेनेटिक रिस्क की जांच के लिए ‘कलर-कोडेड कार्ड्स’ बनाने की वकालत की है। वर्तमान में भारतीय सेना और विभिन्न गैर-सरकारी सामाजिक संस्थाओं द्वारा इस शांत वादी में उम्मीद की नई किरण जगाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके तहत यहां के युवाओं को ‘इंडियन साइन लैंग्वेज’ सिखाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम तेज कर दी गई है।

  • असम-अरुणाचल में बारिश बनी आफत, बाढ़ से 22 हजार से अधिक लोग प्रभावित, 60 साल पुराना रेलवे पुल ढहने से रेल सेवा ठप

    असम-अरुणाचल में बारिश बनी आफत, बाढ़ से 22 हजार से अधिक लोग प्रभावित, 60 साल पुराना रेलवे पुल ढहने से रेल सेवा ठप

    नई दिल्ली। पूर्वोत्तर भारत में लगातार हो रही भारी बारिश ने असम और अरुणाचल प्रदेश में हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। कई जिलों में आई बाढ़ और भूस्खलन से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। असम में हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं, जबकि अरुणाचल प्रदेश में बादल फटने के बाद कई क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटा है तथा मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश जारी रहने की चेतावनी दी है।

    असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार राज्य के धेमाजी, नलबाड़ी, डिब्रूगढ़, चिरांग, लखीमपुर और कोकराझार समेत कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं। अब तक 22 हजार से अधिक लोग इस आपदा से प्रभावित हो चुके हैं। सबसे अधिक असर धेमाजी जिले में देखा गया है, जहां बड़ी संख्या में लोगों के घरों में पानी घुस गया है। बाढ़ का पानी दर्जनों गांवों तक पहुंच चुका है और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जिससे किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।

    लगातार बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी किनारे बसे गांवों में खतरा बढ़ने के बाद प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहा है। राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। इस प्राकृतिक आपदा का असर पशुधन पर भी पड़ा है और हजारों मवेशी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

    इसी बीच धेमाजी जिले में लगभग छह दशक पुराना रेलवे पुल क्षतिग्रस्त होकर आंशिक रूप से ढह गया। बताया गया कि लगातार बारिश और नदी किनारे तेज कटाव के कारण पुल का एक पिलर कमजोर हो गया, जिससे उसका एक हिस्सा टूट गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय पुल से कोई ट्रेन नहीं गुजर रही थी, इसलिए किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। पुल को नुकसान पहुंचने के बाद संबंधित रेलवे खंड पर ट्रेन सेवाएं एहतियातन रोक दी गई हैं और तकनीकी टीमें मरम्मत कार्य में जुट गई हैं।

    अरुणाचल प्रदेश में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। हाल ही में बादल फटने की घटनाओं के बाद कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन से भारी नुकसान हुआ है। अब तक कई लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कुछ लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार खोज अभियान चला रहे हैं। लेकू नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है, जिससे सीमावर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है।

    मौसम विभाग ने 1 जुलाई तक असम और अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश, तेज आंधी और बिजली गिरने की संभावना जताई है। इसे देखते हुए प्रशासन ने लोगों को नदी किनारे, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और आपदा प्रबंधन दलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

    बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार भी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। केंद्रीय गृह मंत्री ने राज्य सरकार से स्थिति की जानकारी लेकर हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है। राज्य सरकार, आपदा प्रबंधन एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन मिलकर राहत एवं पुनर्वास कार्य को तेज गति से आगे बढ़ा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि मौसम सामान्य होने तक सतर्कता बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि अगले कुछ दिन पूर्वोत्तर के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।

  • अमरनाथ यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में, पहली पूजा के साथ सुरक्षा व्यवस्था हुई मजबूत, 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने कराया पंजीकरण

    अमरनाथ यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में, पहली पूजा के साथ सुरक्षा व्यवस्था हुई मजबूत, 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने कराया पंजीकरण

    नई दिल्ली। अमरनाथ यात्रा 2026 की शुरुआत से पहले सोमवार को बाबा बर्फानी की पहली पूजा विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल एवं श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज सिन्हा ने पूजा-अर्चना कर यात्रा के सफल और सुरक्षित संचालन की कामना की। इस वर्ष पवित्र यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त यानी रक्षाबंधन तक चलेगी। कुल 57 दिनों तक चलने वाली इस धार्मिक यात्रा के लिए प्रशासन ने लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

    इस बार श्रद्धालु पारंपरिक पहलगाम मार्ग और बालटाल मार्ग दोनों से बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रवाना होंगे। प्रशासन के अनुसार 15 अप्रैल से अब तक चार लाख से अधिक श्रद्धालु यात्रा के लिए अपना पंजीकरण करा चुके हैं। यात्रा का पहला जत्था 2 जुलाई को जम्मू स्थित भगवती नगर बेस कैंप से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रवाना किया जाएगा।

    यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया है। बालटाल और चंदनवाड़ी में बेस अस्पताल शुरू कर दिए गए हैं, जबकि दोनों यात्रा मार्गों पर चिकित्सा सुविधाएं और आपातकालीन सहायता केंद्र भी स्थापित किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं को किसी भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का तुरंत उपचार मिल सके, इसके लिए डॉक्टरों और मेडिकल टीमों की तैनाती भी की गई है।

    प्रशासन का कहना है कि यात्रा मार्गों पर बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है। हालांकि महागणेश टॉप के पास जमी बर्फ को हटाने का कार्य अंतिम चरण में है। अधिकारियों के मुताबिक अगले दो से तीन दिनों में यह काम भी पूरा कर लिया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही पूरी तरह सुगम हो सकेगी।

    यात्रा के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को भी अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रोड ओपनिंग पार्टी लगातार गश्त कर रही है। इसके साथ ही इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को सक्रिय कर पूरे यात्रा मार्ग की निगरानी की जा रही है। पुलिस, अर्धसैनिक बलों और प्रशासनिक एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों पर मॉक ड्रिल और सुरक्षा अभ्यास भी आयोजित किए गए हैं। यात्रा मार्ग और बेस कैंपों पर आने वाले श्रद्धालुओं तथा साधु-संतों की नियमित जांच भी की जा रही है।

    अमरनाथ यात्रा के लिए दो प्रमुख मार्ग निर्धारित किए गए हैं। पारंपरिक पहलगाम मार्ग लगभग 41 किलोमीटर लंबा है, जहां से पवित्र गुफा तक पहुंचने में सामान्यतः तीन से चार दिन का समय लगता है। यह मार्ग अपेक्षाकृत आसान माना जाता है और ऊंचाई धीरे-धीरे बढ़ने के कारण श्रद्धालुओं को अनुकूल वातावरण मिलता है। वहीं बालटाल मार्ग करीब सात किलोमीटर लंबा है, लेकिन इसकी चढ़ाई अधिक खड़ी और कठिन होने के कारण यह अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

    यात्रा शुरू होने से पहले जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रायल काफिले का सफल ड्राई रन भी किया गया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, आपातकालीन प्रतिक्रिया और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का परीक्षण किया गया। ट्रायल काफिला तय समय के भीतर रामबन पहुंचा, जिससे प्रशासन ने यात्रा की तैयारियों पर संतोष जताया। अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।