Category: National

  • बिहार में गंगा के तेज बहाव में मजदूरों से भरी नाव डूबी, 19 ने तैरकर बचाई जान, 2 लापता

    बिहार में गंगा के तेज बहाव में मजदूरों से भरी नाव डूबी, 19 ने तैरकर बचाई जान, 2 लापता


    पटना। बिहार के नवगछिया स्थित राघोपुर में गंगा के तेज बहाव के बीच तटबंध मरम्मत में लगी बालू से लदी नाव पलटकर डूब गई। नाव में कुल 21 मजदूर सवार थे। हादसे के बाद 19 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि दो मजदूर अब भी लापता हैं। दोनों की तलाश में एसडीआरएफ की टीम गंगा में सर्च ऑपरेशन चला रही है।

    हादसे का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें तेज बहाव के बीच नाव अचानक पलटती और देखते ही देखते नदी में समाती दिखाई दे रही है। हादसे के बाद कुछ मजदूर तैरकर बाहर निकले, जबकि मौके पर पहुंची एसडीआरएफ टीम ने भी रेस्क्यू कर लोगों को सुरक्षित निकाला।

    किन लोगों की तलाश जारी
    चश्मदीद वेदानंद कुमार के मुताबिक, नाव को किनारे लाया जा रहा था, लेकिन तेज धारा उसे फिर बीच नदी में खींच ले गई। इसी दौरान नाव पलट गई। नाव में मजदूरों के अलावा दो मांझी भी मौजूद थे। लापता लोगों की पहचान भागलपुर के लोदीपुर निवासी मजदूर बादल मंडल और नवगछिया के तीनटंगा निवासी मांझी सिकंदर मंडल के रूप में हुई है।

    डीएम अलंकृता पांडे ने बताया कि 19 लोगों को बचा लिया गया है और दो की तलाश जारी है। प्रारंभिक तौर पर नदी में भंवर बनने से नाव पलटने की आशंका है। उन्होंने यह भी कहा कि मजदूरों के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य होने के निर्देश के पालन में चूक हुई।

    नाव से काम पर रोक, ट्रैक्टर से जारी रहेगा काम

    डीएम के मुताबिक, मामले में संबंधित वेंडर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी जिन कॉन्ट्रैक्टर्स की थी, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल नावों से काम रोक दिया गया है और ट्रैक्टरों के जरिए तटबंध का सुरक्षा कार्य जारी रखा जाएगा।

    दो दिन पहले टूटा था तटबंध
    राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध दो दिन पहले सुबह करीब 3 बजे टूट गया था। यह स्थान बिहार के ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल के आवास से करीब 300 मीटर दूर है। तटबंध टूटने के बाद मंत्री के आवास समेत आसपास के सैकड़ों घरों में बाढ़ का पानी घुस गया।

    तटबंध के टूटे हिस्से को बंद करने और कटाव रोकने के लिए जल संसाधन विभाग ने 300 से ज्यादा मजदूरों को लगाया है। बालू की बोरियों, बांस-बल्लियों और हाथी पांव की मदद से नदी के दबाव को कम करने की कोशिश की जा रही है।

    खतरे के निशान से ऊपर गंगा
    गंगा का जलस्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। नदी 33.68 मीटर के खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और जलस्तर 33.95 मीटर तक पहुंच गया है। तेज करंट और जगह-जगह मिट्टी दरकने के कारण तटबंध की मरम्मत में मुश्किलें आ रही हैं। हालांकि, फरक्का बैराज के सभी फाटक खोल दिए गए हैं। इससे आने वाले दिनों में गंगा के जलस्तर में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट में 31 सीटों का मुद्दा उठा, हटाए गए वोट और जीत के अंतर पर मांगा गया विस्तृत डेटा

    बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट में 31 सीटों का मुद्दा उठा, हटाए गए वोट और जीत के अंतर पर मांगा गया विस्तृत डेटा

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब विधानसभा चुनाव के नतीजों तक पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान 31 विधानसभा सीटों का मुद्दा सामने आया, जहां भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों की जीत का अंतर उन मतदाताओं की संख्या से कम बताया गया है, जिनके नाम SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए गए थे।

    मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि 31 सीटों पर जीत का अंतर और हटाए गए मतदाताओं की संख्या के बीच महत्वपूर्ण अंतर है। इसी संदर्भ में मुख्य न्यायाधीश ने सवाल किया कि क्या ऐसी स्थिति में अदालत नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश दे सकती है।

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी पश्चिम बंगाल में दोबारा विधानसभा चुनाव कराने का कोई आदेश नहीं दिया है। अदालत ने संबंधित पक्ष को इस मुद्दे पर औपचारिक आवेदन दाखिल करने को कहा है। साथ ही चुनाव आयोग से SIR से जुड़ी अपीलों का विस्तृत और श्रेणीवार आंकड़ा पेश करने को कहा गया है।

    सुनवाई में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में SIR से संबंधित करीब 38.1 लाख अपीलें दाखिल हुई हैं। इनमें लगभग 7 लाख अपीलें ऐसे लोगों से जुड़ी हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। दूसरी ओर करीब 31 लाख अपीलें मतदाता सूची में लोगों के नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति से संबंधित बताई गई हैं।

    सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा उन अपीलों का है जिन पर अब तक फैसला हो चुका है। अदालत को बताया गया कि करीब 83 हजार अपीलों का निपटारा हुआ है। इनमें 75,443 मामलों में मतदाताओं के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल किए गए। इसका अर्थ है कि निपटाए गए मामलों में 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में बाहर किए गए मतदाताओं को राहत मिली।

    यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि SIR के दौरान हटाए गए नामों को लेकर पहले से राजनीतिक और कानूनी विवाद चल रहा है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि 90 प्रतिशत का आंकड़ा पूरे SIR के तहत हटाए गए मतदाताओं पर लागू नहीं होता। यह केवल अब तक निपटाई गई उन अपीलों से संबंधित है, जिनमें नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई थी।

    न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने सुनवाई के दौरान चुनाव परिणाम और मतदाता सूची के बीच संभावित संबंध को समझाने के लिए एक उदाहरण रखा। उन्होंने कहा कि यदि किसी सीट पर जीत का अंतर 50 वोट हो और 100 मतदाताओं के नाम हटाए गए हों, तो बाद में इनमें से बड़ी संख्या में नाम हटाया जाना गलत पाए जाने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।

    यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से लंबित और निपटाई गई अपीलों का विस्तृत विवरण मांगा है। अदालत यह जानना चाहती है कि कितने मामले नाम जोड़ने और कितने मामले नाम हटाने से संबंधित हैं तथा अब तक उनके संबंध में क्या कार्रवाई हुई है।

    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 80 सीटें मिलीं। सरकार बनाने के लिए 148 सीटों की जरूरत होती है। चुनाव परिणाम के बाद SIR से जुड़ी मतदाता सूची में बदलाव को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हुआ।

    अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का केंद्र यह तय करना नहीं है कि चुनाव स्वतः रद्द होंगे या नहीं, बल्कि यह देखना भी महत्वपूर्ण है कि मतदाता सूची से जुड़े विवादों का वास्तविक चुनावी परिणामों पर कितना प्रभाव पड़ा। अदालत के सामने चुनाव आयोग का विस्तृत डेटा आने के बाद इस मामले की कानूनी दिशा और स्पष्ट हो सकती है।

  • इंडिगो उड़ान 6ई321 बेंगलुरु एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतरी, सीआईएसएफ जांच के बाद बम धमकी फर्जी निकली

    इंडिगो उड़ान 6ई321 बेंगलुरु एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतरी, सीआईएसएफ जांच के बाद बम धमकी फर्जी निकली

    नई दिल्ली ।लखनऊ से बेंगलुरु जा रही इंडिगो की उड़ान 6ई321 में बम की धमकी मिलने से बुधवार को सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। विमान के बेंगलुरु एयरपोर्ट पहुंचने के बाद इस धमकी की जानकारी सामने आई। इसके बाद तय सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत विमान की व्यापक जांच की गई।

    फ्लाइट के बेंगलुरु पहुंचने के बाद विमान को सुरक्षित तरीके से उतारा गया और ग्राउंड स्टाफ की सहायता से सभी यात्रियों को बाहर निकाला गया। यात्रियों को सुरक्षित निकालने के बाद सुरक्षा अधिकारियों ने विमान की गहन तलाशी शुरू की।

    जांच प्रक्रिया में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल और संबंधित सुरक्षा अधिकारियों ने विमान के विभिन्न हिस्सों की बारीकी से जांच की। सुरक्षा जांच के दौरान किसी तरह की संदिग्ध वस्तु अथवा विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई। इसके बाद बम की धमकी को फर्जी पाया गया।

    जांच पूरी होने के बाद विमान को दोबारा उड़ान भरने की अनुमति दे दी गई। इस घटनाक्रम के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की। किसी भी संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए विमान और उससे जुड़े सामान की जांच पूरी होने तक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई।

    महत्वपूर्ण बात यह रही कि धमकी का मामला लखनऊ एयरपोर्ट पर विमान के रवाना होने के समय सामने नहीं आया था। यह जानकारी बेंगलुरु एयरपोर्ट पर विमान के पहुंचने के बाद मिली। इसलिए इस घटना का लखनऊ एयरपोर्ट के संचालन अथवा वहां की सुरक्षा व्यवस्था से सीधा संबंध नहीं बताया गया है।

    विमान में बम की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता यात्रियों और विमान की सुरक्षा सुनिश्चित करना रही। जांच के दौरान किसी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक के नहीं मिलने के बाद स्थिति सामान्य हुई और विमान को आगे की प्रक्रिया के लिए मंजूरी प्रदान की गई।

    विमानन क्षेत्र में बम की झूठी धमकियां सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती मानी जाती हैं। ऐसी सूचना मिलने पर वास्तविक खतरे की पुष्टि होने तक सुरक्षा एजेंसियों को निर्धारित सभी प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है। इसके कारण यात्रियों और विमान संचालन पर अस्थायी असर पड़ सकता है।

    इससे पहले 18 अगस्त को भी इंडिगो की हैदराबाद से विशाखापत्तनम जाने वाली उड़ान 208 को बम की धमकी मिली थी। ईमेल के जरिए मिली सूचना के बाद सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हुई थीं और विमान की व्यापक तलाशी ली गई थी। उस जांच में भी कोई संदिग्ध सामग्री नहीं मिली थी।

    मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 2 पर भी बम संबंधी गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी के कारण सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई थी। एक यात्री द्वारा अपने बैग में बम होने की बात कहे जाने के बाद दिल्ली जाने वाली इंडिगो उड़ान को उड़ान भरने से पहले रोक दिया गया था। सुरक्षा एजेंसियों ने यात्री को विमान से उतारकर हिरासत में लिया था।

    लखनऊ-बेंगलुरु उड़ान की ताजा घटना में जांच के बाद कोई विस्फोटक नहीं मिलने से यात्रियों और विमान की सुरक्षा को लेकर तत्काल खतरा समाप्त हो गया। सुरक्षा एजेंसियां अब धमकी की सूचना के स्रोत और परिस्थितियों से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं।

  • हैदराबाद विजयवाड़ा हाईवे पर भीषण बस हादसा, कंटेनर की लोहे की छड़ों ने मचाई तबाही, प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुख

    हैदराबाद विजयवाड़ा हाईवे पर भीषण बस हादसा, कंटेनर की लोहे की छड़ों ने मचाई तबाही, प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुख

    नई दिल्ली ।तेलंगाना के सूर्यपेट जिले में बुधवार को हैदराबाद विजयवाड़ा नेशनल हाईवे पर एक भीषण सड़क हादसा हुआ। यात्रियों से भरी बस की कंटेनर ट्रक से जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर के बाद ट्रक में लदी लोहे की लंबी छड़ें बस के अगले हिस्से को चीरती हुई अंदर तक घुस गईं। हादसे में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 यात्री घायल हुए हैं।

    बताया गया कि बस में कुल 42 यात्री सवार थे। हादसा इतना गंभीर था कि बस के आगे के हिस्से में बैठे यात्रियों को संभलने या बाहर निकलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल सका। लोहे की छड़ें सीधे बस के अगले हिस्से में घुसने के कारण वहां बैठे यात्रियों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा।

    हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा तफरी का माहौल बन गया। पुलिस के साथ स्थानीय लोगों ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया। बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया। घायल यात्रियों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। अधिकारियों के अनुसार घायलों में कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    पुलिस ने हादसे में छह लोगों की मौत की पुष्टि की है। वहीं 20 अन्य यात्रियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घायलों का अस्पताल में उपचार जारी है। हादसे में जान गंवाने वाले और घायल हुए यात्रियों की विस्तृत पहचान तथा अन्य संबंधित जानकारी अधिकारियों की प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होने की उम्मीद है।

    घटना की जानकारी सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताया। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री ने हादसे को बेहद दुखद बताते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं।

    पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू करते हुए दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी में बस की तेज रफ्तार और चालक को स्टीयरिंग पर झपकी आने की संभावना की चर्चा है। हालांकि पुलिस की जांच पूरी होने से पहले हादसे की वास्तविक वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

    दुर्घटना की परिस्थितियों को समझने के लिए पुलिस घटनास्थल का निरीक्षण कर रही है। बस और कंटेनर की स्थिति, सड़क पर वाहनों की गति तथा हादसे से पहले दोनों वाहनों की गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। इसके अलावा चालक की स्थिति और अन्य परिस्थितियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

    हैदराबाद विजयवाड़ा नेशनल हाईवे पर वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है। ऐसे मार्गों पर भारी वाहनों और यात्री वाहनों के बीच सुरक्षित दूरी तथा सावधानी बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस हादसे में कंटेनर में लदी लोहे की छड़ों के बस में घुसने से दुर्घटना की गंभीरता और बढ़ गई।

    फिलहाल पुलिस हादसे की सटीक वजह पता लगाने में जुटी है। अधिकारियों की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर तेज रफ्तार, चालक की थकान और भारी वाहनों में लदे सामान की सुरक्षित व्यवस्था से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है।

  • कॉकरोच जनता पार्टी नेताओं ने पीड़ित परिवारों को एक करोड़ मुआवजे और छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी की मांग उठाई

    कॉकरोच जनता पार्टी नेताओं ने पीड़ित परिवारों को एक करोड़ मुआवजे और छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी की मांग उठाई

    नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी ने छात्रों से जुड़े मुद्दों और कथित तौर पर प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग को लेकर पांच सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने की घोषणा की है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि मार्च इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक निकाला जाएगा। उनके अनुसार, इस कार्यक्रम के जरिए छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और प्रभावित परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग उठाई जाएगी।

    जेन जी से जुड़े एक कार्यक्रम में अभिजीत दीपके के साथ आशुतोष रांका और सौरव दास भी मौजूद थे। बातचीत के दौरान दीपके ने कहा कि संगठन लंबे समय से संबंधित परिवारों के लिए मुआवजे और छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि इन मांगों को लेकर पांच सितंबर को मार्च निकाला जाएगा।

    दीपके ने मुआवजे की मांग के पीछे परिवारों की आर्थिक स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों में कई लोग सीमित आय वाले हैं और बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज तक लेते हैं। उन्होंने आकांक्षा चतुर्वेदी के परिवार का उदाहरण देते हुए दावा किया कि उनके पिता ने बेटी की पढ़ाई के लिए कर्ज लिया था और अब परिवार आर्थिक तथा पारिवारिक संकट से गुजर रहा है।

    उनका कहना था कि शिक्षा हासिल करने के लिए कोचिंग और अन्य खर्चों में बड़ी रकम लगती है। ऐसे में किसी परिवार के बच्चे के खोने के बाद आर्थिक सहायता उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। संगठन इसी आधार पर प्रत्येक प्रभावित परिवार को एक करोड़ रुपये की सहायता देने की मांग कर रहा है।

    दूसरी प्रमुख मांग छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की है। दीपके ने कहा कि छात्र शिक्षा से जुड़े अपने अधिकारों की मांग करने के लिए सामने आए थे। संगठन का दावा है कि ऐसे मामलों में दर्ज प्राथमिकी वापस होनी चाहिए। पांच सितंबर के प्रस्तावित मार्च में इन्हीं दोनों मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की बात कही गई है।

    कार्यक्रम के दौरान जयपुर में हुई घटना के संदर्भ में भी नेताओं से सवाल किया गया। आशुतोष रांका ने कहा कि ऐसी घटनाओं को लेकर उन्हें अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों से पीछे हटने की चिंता नहीं है। उन्होंने बताया कि संबंधित घटनाक्रम के बाद भी संगठन के लोग राजस्थान के विभिन्न इलाकों में गए और आगे भी लोगों के बीच जाने की योजना है।

    रांका ने यह भी कहा कि संगठन का उद्देश्य चुनाव में लोगों से वोट मांगना नहीं है। उन्होंने राजस्थान में स्कूलों की स्थिति सुधारने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए और स्कूलों का संचालन उचित परिस्थितियों में होना चाहिए।

    हिंसा की आशंका से जुड़े सवाल पर अभिजीत दीपके ने अपने और आशुतोष रांका के साथ पहले हुई कथित मारपीट का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वे विरोध के दौरान मारपीट का सामना कर चुके हैं और अब सौरव दास की बारी आने की बात कही। हालांकि, संगठन ने पांच सितंबर के कार्यक्रम को शांतिपूर्ण मार्च बताया है।

    सौरव दास ने चर्चा के दौरान सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों की ओर से पहले किए गए वादों और अदालत में हुई कार्यवाही को संगठन महत्वपूर्ण मानता है। उनका दावा है कि छात्रों से जुड़े मामलों की प्राथमिकी और प्रभावित परिवारों के मुआवजे को लेकर अभी उनकी अपेक्षाएं पूरी नहीं हुई हैं।

    अब पांच सितंबर का प्रस्तावित मार्च संगठन की अगली बड़ी गतिविधि होगी। इसमें छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी और प्रभावित परिवारों को एक करोड़ रुपये की सहायता की मांग प्रमुख रहेगी। कार्यक्रम के दौरान संगठन अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार और प्रशासन के सामने रखने की बात कह रहा है।

  • भारत चीन संबंधों पर डोभाल और वांग यी की अहम वार्ता, सीमा विवाद सुलझाने और शांति बनाए रखने पर बनी सहमति

    भारत चीन संबंधों पर डोभाल और वांग यी की अहम वार्ता, सीमा विवाद सुलझाने और शांति बनाए रखने पर बनी सहमति

    नई दिल्ली ।भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच महत्वपूर्ण बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने भारत चीन संबंधों के साथ सीमा विवाद और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने से जुड़े मुद्दों पर विचार किया। बातचीत ऐसे समय हुई है जब दोनों देश लंबे समय से चले आ रहे सीमा तनाव को कम करने और आपसी संबंधों को स्थिर करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

    वांग यी ने बातचीत के दौरान कहा कि चीन भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाने और दोनों देशों के बीच समझ बढ़ाने के लिए काम करने को तैयार है। उन्होंने भारत चीन संबंधों को दोनों देशों के लोगों के हितों के साथ ही व्यापक वैश्विक संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच स्वस्थ और स्थिर संबंध वैश्विक दक्षिण की साझा आकांक्षाओं के लिए भी उपयोगी हैं।

    चीनी विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की कजान तथा तियानजिन में हुई मुलाकातों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को रणनीतिक दृष्टिकोण से संबंधों को आगे बढ़ाने, संवाद मजबूत करने और मतभेदों को उचित तरीके से दूर करने की दिशा में प्रयास जारी रखने चाहिए। उन्होंने भारत और चीन को अच्छे पड़ोसी, मित्र तथा पारस्परिक सफलता के साझेदार के रूप में आगे बढ़ाने की इच्छा जताई।

    वांग यी ने विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ताओं में बनी सहमतियों को क्रमबद्ध तरीके से लागू करने की बात भी कही। दोनों पक्ष सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई दिए। सीमा विवाद के समाधान के लिए निष्पक्ष, उचित और दोनों देशों को स्वीकार्य रास्ता तलाशने पर भी जोर दिया गया।

    अजीत डोभाल ने भारत और चीन को प्राचीन सभ्यताओं तथा महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्थाओं वाला देश बताते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने भारत चीन संबंधों को सही दिशा में लौटने की बात कही और रणनीतिक संवाद को मजबूत करने, पारस्परिक लाभ वाले सहयोग को आगे बढ़ाने तथा बहुपक्षीय स्तर पर समन्वय बढ़ाने का समर्थन किया।

    दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधि के रूप में डोभाल और वांग यी सीमा संबंधी वार्ता के प्रमुख माध्यम हैं। यह व्यवस्था भारत चीन सीमा विवाद के व्यापक समाधान के उद्देश्य से वर्ष 2003 में शुरू की गई थी। सीमा विवाद का अंतिम समाधान अब तक नहीं निकल पाया है, लेकिन विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत दोनों देशों के बीच संवेदनशील मुद्दों पर संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई है।

    डोभाल की बीजिंग यात्रा के दौरान चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग के साथ भी बातचीत हुई। इसमें सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता मजबूत करने तथा दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी सहमति के अनुरूप आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय क्षेत्रों में संबंध सुधारने के उपायों पर चर्चा हुई।

    भारत और चीन के रिश्तों में वर्ष 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद गंभीर तनाव पैदा हुआ था। पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक सैन्य गतिरोध रहने के बाद दोनों देशों ने तनाव कम करने और सीमा पर स्थिति को स्थिर करने के लिए कई स्तरों पर बातचीत की है। ऐसे में विशेष प्रतिनिधि वार्ता को आगे बढ़ाना दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने का महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

    आने वाले समय में सीमा प्रबंधन, विश्वास बढ़ाने वाले उपाय और द्विपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दे बातचीत के केंद्र में रह सकते हैं। दोनों देशों के बीच संवाद का यह दौर संबंधों को स्थिर करने की कोशिश के तौर पर महत्वपूर्ण है। हालांकि, सीमा विवाद का स्थायी समाधान अभी भी एक जटिल चुनौती बना हुआ है और आगे की प्रगति दोनों पक्षों की बातचीत तथा जमीन पर शांति बनाए रखने की क्षमता पर निर्भर करेगी।

  • बांग्लादेश चीन से J-10CE लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में, रक्षा आधुनिकीकरण से बदलेगा क्षेत्रीय सामरिक संतुलन

    बांग्लादेश चीन से J-10CE लड़ाकू विमान खरीदने की तैयारी में, रक्षा आधुनिकीकरण से बदलेगा क्षेत्रीय सामरिक संतुलन


    नई दिल्ली ।
    बांग्लादेश अपनी वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए चीन निर्मित J-10CE मल्टीरोल लड़ाकू विमानों की खरीद की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रस्तावित सौदे को देश के व्यापक रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा बताया जा रहा है। इसके साथ ही अटैक हेलीकॉप्टर, वीआईपी हेलीकॉप्टर और ड्रोन प्रणालियां खरीदने की योजना पर भी काम चल रहा है।

    बांग्लादेश सरकार के अनुसार, J-10CE और अटैक हेलीकॉप्टरों से संबंधित प्रस्ताव पर खरीद समितियों ने मसौदा तैयार कर लिया है। अब इन दस्तावेजों को सशस्त्र बल प्रभाग और संबंधित मंत्रालयों से मंजूरी मिलने का इंतजार है। सरकार की योजना उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के आधार पर खरीद को मौजूदा वित्तीय वर्ष में आगे बढ़ाने या अगले बजट में शामिल करने की है।

    J-10CE चीन का चौथी पीढ़ी का मल्टीरोल लड़ाकू विमान है। यह अलग-अलग प्रकार के हवाई अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। बांग्लादेश की ओर से विमान की क्षमताओं और लागत को खरीद प्रक्रिया में महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। सरकार का तर्क है कि समान श्रेणी के कुछ पश्चिमी लड़ाकू विमानों की तुलना में चीनी विकल्प अपेक्षाकृत कम लागत में उपलब्ध हो सकते हैं।

    बांग्लादेश के सूचना एवं प्रसारण सलाहकार जाहेद उर रहमान ने J-10CE के युद्ध प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य संघर्ष का हवाला दिया। हालांकि, किसी राफेल विमान को J-10CE द्वारा मार गिराए जाने की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस दावे को लेकर अलग-अलग विरोधाभासी बातें सामने आती रही हैं, इसलिए इसे प्रमाणित तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं है।

    ढाका की प्रस्तावित खरीद केवल लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है। सरकार अटैक हेलीकॉप्टर, वीआईपी परिवहन के लिए हेलीकॉप्टर और मानव रहित हवाई प्रणालियों यानी ड्रोन की क्षमता बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। इसका उद्देश्य बांग्लादेश की वायुसेना और व्यापक सुरक्षा ढांचे को आधुनिक तकनीक से मजबूत करना बताया गया है।

    J-10CE की संभावित खरीद का क्षेत्रीय प्रभाव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बांग्लादेश भारत का पड़ोसी देश है और दोनों देशों के बीच लंबे समय से राजनीतिक, आर्थिक तथा सुरक्षा संबंध रहे हैं। ऐसे में ढाका की सैन्य खरीद में चीन की भूमिका बढ़ने पर दक्षिण एशिया के सामरिक समीकरणों पर चर्चा स्वाभाविक है।

    हालांकि, प्रस्तावित खरीद को अभी अंतिम सौदा नहीं माना जा सकता। मसौदा समझौतों को विभिन्न सरकारी स्तरों पर मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना है। इसके बाद ही विमान और अन्य रक्षा उपकरणों की वास्तविक खरीद, संख्या, कीमत तथा आपूर्ति से जुड़ी शर्तें स्पष्ट हो सकेंगी।

    बांग्लादेश सरकार इस रक्षा योजना को अपनी रणनीतिक निर्णय क्षमता से भी जोड़ रही है। सरकार के प्रतिनिधियों का कहना है कि देश अब अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर विदेश और रक्षा नीति से जुड़े फैसले लेने पर अधिक जोर दे रहा है। इसी संदर्भ में चीन से लड़ाकू विमान खरीदने की चर्चा को स्वतंत्र रणनीतिक विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

    J-10CE सौदा आगे बढ़ता है तो यह बांग्लादेश की वायुसेना के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। हालांकि इसकी वास्तविक सामरिक उपयोगिता विमान की संख्या, हथियार प्रणाली, प्रशिक्षण, रखरखाव और परिचालन क्षमता पर निर्भर करेगी। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ढाका ने खरीद प्रक्रिया को औपचारिक स्तर पर आगे बढ़ा दिया है और संबंधित प्रस्ताव मंजूरी के चरण में पहुंच चुके हैं।

  • गया में भैंस के असली मालिक का दावा विवादित, पहचान तय करने के लिए डीएनए जांच का आईजी ने दिया आदेश

    गया में भैंस के असली मालिक का दावा विवादित, पहचान तय करने के लिए डीएनए जांच का आईजी ने दिया आदेश

    नई दिल्ली:  बिहार के गया जिले के अतरी थाना क्षेत्र में एक भैंस के मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद ने पुलिस जांच का नया रूप ले लिया है। दोनों पक्ष भैंस पर अपना अधिकार जता रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मगध प्रक्षेत्र के आईजी विकास वैभव ने भैंस की डीएनए जांच कराने का निर्देश दिया है। जांच की जिम्मेदारी ग्रामीण एसपी दिव्यांजलि जायसवाल को दी गई है।

    मामला मोहड़ा क्षेत्र के सेउतर गांव निवासी सूरज यादव की भैंस से जुड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ दिन पहले सूरज यादव की भैंस कहीं चली गई थी। बाद में उसके उपथू क्षेत्र के महाचक गांव पहुंचने की जानकारी मिली। वहां नौरंगा टोली में रहने वाले प्रकाश मांझी ने भैंस को अपने पास रख लिया।

    इसके बाद सूरज यादव को जानकारी मिली कि उसकी भैंस नौरंगा में है। वह भैंस की तलाश में वहां पहुंचे और उसके चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद अतरी थाना पुलिस ने भैंस को थाने बुलाया। प्रारंभिक कार्रवाई के बाद भैंस सूरज यादव को सौंप दी गई।

    हालांकि, इसके बाद मामले में विवाद और बढ़ गया। अतरी थाना प्रभारी पर एक पक्ष की मदद करने का आरोप लगाया गया। विवाद की स्थिति को देखते हुए भैंस को दोबारा थाने बुलाया गया। कुछ समय तक उसे थाना परिसर में रखा गया। बाद में फिलहाल भैंस को फिर सूरज यादव को सौंप दिया गया।

    दूसरी ओर प्रकाश मांझी के पक्ष के लोगों का दावा है कि जिस भैंस को लेकर विवाद चल रहा है, वह करीब चार वर्ष पहले उनके यहां से चोरी हुई थी। उनका कहना है कि भैंस को अपने पुराने घर की पहचान थी और इसी वजह से वह वापस उनके क्षेत्र में पहुंच गई। इस दावे के बाद दोनों पक्षों के बीच स्वामित्व को लेकर स्थिति और जटिल हो गई।

    मामले की जानकारी मिलने के बाद मगध प्रक्षेत्र के आईजी विकास वैभव ने इसे गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामीण एसपी को जांच में तेजी लाने और दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र रूप से पड़ताल करने को कहा है।

    पुलिस के सामने मुख्य चुनौती यह निर्धारित करना है कि भैंस वास्तव में किस पक्ष की है। दोनों पक्ष अपने दावे के समर्थन में अलग-अलग बातें सामने रख रहे हैं। ऐसे में केवल मौखिक दावों के आधार पर स्वामित्व तय करने के बजाय वैज्ञानिक जांच का सहारा लेने का फैसला किया गया है।

    आईजी के निर्देश के अनुसार भैंस की डीएनए जांच कराई जाएगी। इसके लिए संबंधित पक्षों के दावों और जांच में सामने आने वाले तथ्यों को आधार बनाया जाएगा। डीएनए परीक्षण के परिणाम के बाद ही भैंस के वास्तविक मालिक की पहचान स्पष्ट होने की उम्मीद है।

    अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने तक मामले में किसी भी पक्ष के दावे को अंतिम नहीं माना जाएगा। डीएनए रिपोर्ट के आधार पर स्वामित्व से संबंधित स्थिति स्पष्ट होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर भी लोगों का ध्यान खींचा है, क्योंकि पशु के मालिकाना विवाद को सुलझाने के लिए पुलिस ने वैज्ञानिक परीक्षण का रास्ता अपनाया है।

  • फरीदाबाद मर्डर केस में पत्नी और प्रेमी गिरफ्तार, पति की हत्या कर घर के पास जमीन में दबाया शव, पुलिस ने खोला राज

    फरीदाबाद मर्डर केस में पत्नी और प्रेमी गिरफ्तार, पति की हत्या कर घर के पास जमीन में दबाया शव, पुलिस ने खोला राज

    नई दिल्ली ।फरीदाबाद के तिगांव थाना क्षेत्र के गांव मोजाबाद में 42 वर्षीय श्यामवीर की हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, हत्या में उसकी पत्नी और उसके साथ रहने वाले एक व्यक्ति की भूमिका सामने आई है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने मिलकर श्यामवीर की हत्या करने के बाद शव को घर के पास जमीन में दबा दिया। मामले का खुलासा सूचना मिलने के बाद पुलिस की जांच में हुआ और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

    पुलिस के मुताबिक, श्यामवीर गांव मोजाबाद स्थित मकान में रहता था। उसके साथ कामत नाम का व्यक्ति भी रहता था। इसी दौरान कामत के मृतक की पत्नी केशव के साथ संबंध बन गए। जांच में सामने आया कि श्यामवीर को दोनों के संबंधों की जानकारी हो गई थी। इसे लेकर घर में विवाद की स्थिति बनने लगी थी।

    पुलिस का कहना है कि श्यामवीर पत्नी और कामत के संबंधों का विरोध करता था। वह शराब के नशे में पत्नी के साथ अक्सर विवाद करता था। इसी वजह से दोनों आरोपियों ने उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाई। पुलिस जांच के अनुसार, हत्या की साजिश के तहत श्यामवीर को पहले शराब पिलाई गई।

    घटना 16 अगस्त की शाम की बताई गई है। पुलिस के अनुसार, कामत ने श्यामवीर को शराब पिलाने के बाद उसके नशे में होने का इंतजार किया। इसके बाद इंटरलॉकिंग टाइल से उसके सिर पर वार किया गया। गंभीर चोट लगने के कारण उसकी मौत हो गई। आरोप है कि उस समय पत्नी ने भी वारदात में सहयोग किया और बाहर से दरवाजा बंद कर दिया, जिससे घर के भीतर की आवाज बाहर नहीं जा सके।

    हत्या के बाद दोनों ने शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, घर के पास एक गड्ढा खोदा गया और श्यामवीर के शव को उसमें दबाकर मिट्टी डाल दी गई। इस तरह आरोपियों ने हत्या के बाद शव को छिपाने का प्रयास किया।

    24 अगस्त को फरीदाबाद कंट्रोल रूम के माध्यम से तिगांव थाना पुलिस को जमीन में एक व्यक्ति के दबे होने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और निर्धारित प्रक्रिया के तहत जमीन की खुदाई कर शव बाहर निकाला। इसके बाद मृतक की पहचान श्यामवीर के रूप में हुई।

    मामले में मृतक के भाई रामबीर की शिकायत पर तिगांव थाना पुलिस ने केस दर्ज किया। इसके बाद अपराध शाखा की टीम ने जांच को आगे बढ़ाया। पुलिस ने घटनास्थल, परिस्थितियों और आरोपियों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की। पूछताछ के दौरान पुलिस को हत्या की साजिश और शव को जमीन में दबाने से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिली।

    पुलिस ने पत्नी केशव और कामत को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपियों को बुधवार को अदालत में पेश किया जाएगा। हत्या में इस्तेमाल किए गए सामान और वारदात से जुड़े अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

    पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते मामले का खुलासा 24 घंटे के भीतर किए जाने का दावा किया गया है। फिलहाल जांच का केंद्र हत्या की पूरी साजिश, दोनों आरोपियों की भूमिका और वारदात से जुड़े अन्य संभावित तथ्यों पर है। पुलिस मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

  • वैवाहिक विवाद में हर अपमान आपराधिक क्रूरता नहीं, झारखंड हाईकोर्ट ने 498A की कानूनी सीमा स्पष्ट की

    वैवाहिक विवाद में हर अपमान आपराधिक क्रूरता नहीं, झारखंड हाईकोर्ट ने 498A की कानूनी सीमा स्पष्ट की

    नई दिल्ली । झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पति के खिलाफ धारा 498A के तहत चल रही आपराधिक कार्रवाई रद्द कर दी। पत्नी ने आरोप लगाया था कि पति उसके रंग, शर्मीले स्वभाव, समझ और बातचीत करने के तरीके को लेकर लगातार ताने देता था। अदालत ने माना कि इस तरह की टिप्पणियां अनुचित और दुख पहुंचाने वाली हो सकती हैं, लेकिन केवल इन्हीं आरोपों के आधार पर धारा 498A के तहत आपराधिक क्रूरता का मामला नहीं बनता।

    मामला एक ऐसे दंपती से जुड़ा है, जिनकी शादी ऑनलाइन मैट्रिमोनियल वेबसाइट के माध्यम से हुई थी। विवाह के कुछ समय बाद दोनों के बीच मतभेद शुरू हो गए। पत्नी का आरोप था कि पति उसके रंग को लेकर टिप्पणी करता था और उसके व्यक्तित्व, कम IQ तथा बातचीत करने के तरीके का मजाक उड़ाता था। विवाद बढ़ने के बाद पति ने उसे अलग रहने के लिए कहा।

    इसके बाद पत्नी पहले बेंगलुरु में अपनी छोटी बहन के पास रहने लगी और बाद में कोलकाता में अपनी बड़ी बहन के पास चली गई। इसी दौरान पति ने रांची की फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दाखिल की। वैवाहिक संबंधों में बढ़ते विवाद के बीच पत्नी ने भी पति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की।

    पत्नी ने धारा 498A के तहत क्रूरता का आरोप लगाने के अलावा करीब 35 लाख रुपये के स्त्रीधन को वापस नहीं करने की शिकायत भी की। उसका कहना था कि पति ने वैवाहिक जीवन जारी रखने में भी बाधा डाली। दूसरी ओर, पति ने अपने बचाव में पत्नी पर एक बीमारी से संबंधित आरोप लगाया और कहा कि विवाद के कारण परिस्थितियां खराब हुईं।

    11 जून 2024 को रांची की निचली अदालत ने शिकायत और उपलब्ध सामग्री के आधार पर पति को समन जारी किया। इसके बाद पति ने इस कार्रवाई को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी और आपराधिक कार्यवाही समाप्त करने की मांग की।

    मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की पीठ ने की। अदालत ने धारा 498A में परिभाषित क्रूरता की कानूनी कसौटी पर आरोपों को परखा। कोर्ट ने कहा कि इस प्रावधान के तहत ऐसे जानबूझकर किए गए व्यवहार को देखा जाता है, जिससे महिला आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो सकती हो या उसके जीवन, शरीर अथवा स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता हो। इसके अलावा गैरकानूनी संपत्ति या दहेज की मांग से जुड़ा उत्पीड़न भी इस प्रावधान के दायरे में आता है।

    अदालत ने पाया कि शिकायत में पति की ओर से किसी गैरकानूनी संपत्ति या दहेज की मांग का आरोप नहीं था। साथ ही ऐसे व्यवहार का स्पष्ट आरोप भी नहीं था, जिससे पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर होने या गंभीर शारीरिक अथवा स्वास्थ्य संबंधी खतरे का सामना करना पड़ा हो।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी के रंग, IQ और बातचीत करने की क्षमता पर टिप्पणी करना अपने आप में उचित व्यवहार नहीं माना जा सकता। हालांकि, केवल इन आरोपों को धारा 498A के तहत आपराधिक क्रूरता मानने के लिए कानून में निर्धारित आवश्यक तत्वों का पूरा होना जरूरी है।

    अदालत ने कहा कि आरोपों को पूरी तरह सही मान लेने के बाद भी इस मामले में धारा 498A के तहत अपराध स्थापित नहीं होता। ऐसे में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत का समन आदेश और पति के खिलाफ संबंधित आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

    फैसले का मुख्य संदेश यह है कि वैवाहिक जीवन में अपमानजनक व्यवहार और आपराधिक क्रूरता के बीच कानूनी अंतर होता है। हर वैवाहिक विवाद या ताने को स्वतः धारा 498A के अपराध के रूप में नहीं देखा जा सकता। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि पति-पत्नी के बीच अपमानजनक या असम्मानजनक व्यवहार उचित है। अदालत ने इस मामले में केवल यह तय किया कि उपलब्ध आरोप धारा 498A की कानूनी कसौटी पर आपराधिक कार्यवाही जारी रखने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं।