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  • सरकारी जमीन पर अवैध घोषित मस्जिद हटाई गई, सहारनपुर में पीएसी और आरआरएफ तैनाती के बीच प्रशासन ने कार्रवाई की

    सरकारी जमीन पर अवैध घोषित मस्जिद हटाई गई, सहारनपुर में पीएसी और आरआरएफ तैनाती के बीच प्रशासन ने कार्रवाई की


    नई दिल्ली । 
    उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शनिवार सुबह कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को प्रशासन ने अदालत के आदेश के अनुपालन में ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रखी गई। प्रशासन की ओर से पहले ही अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया था, ताकि कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था की स्थिति बनी रहे।

    मस्जिद को लेकर विवाद सरकारी जमीन पर निर्माण किए जाने के आरोप से जुड़ा था। नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को मामले की सुनवाई के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित इस निर्माण को अवैध घोषित किया था। अदालत ने संबंधित मामले में 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था। इसके बाद मस्जिद पक्ष की ओर से आदेश के खिलाफ जिला जज की अदालत में अपील दाखिल की गई थी।

    मस्जिद कमेटी ने 20 जुलाई 2026 को जिला जज की अदालत का रुख किया था। वहां से भी उसे राहत नहीं मिली। इसके बाद प्रशासन के सामने अदालत के आदेश को लागू करने का रास्ता साफ हुआ। शनिवार को सुबह प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई और मस्जिद का निर्माण हटा दिया गया।

    इस विवाद की शुरुआत 24 मार्च 2025 को हुई थी। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में सार्वजनिक परिसर में स्थित निर्माण को लेकर पीपी एक्ट के तहत याचिका दाखिल की थी। मामले की सुनवाई के दौरान निर्माण की वैधता और जमीन के स्वामित्व से जुड़े पहलुओं पर विचार किया गया। अदालत के आदेश के बाद यह मामला लगातार कानूनी प्रक्रिया में बना रहा।

    ध्वस्तीकरण से पहले सहारनपुर में सुरक्षा इंतजाम बढ़ा दिए गए थे। पांच कंपनी पीएसी और आरआरएफ के जवानों की तैनाती की गई। मिश्रित आबादी वाले इलाकों में पुलिस ने गश्त बढ़ाने के साथ फ्लैग मार्च भी किया। कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास आने-जाने वालों पर निगरानी रखी गई, जबकि संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बल को तैनात किया गया।

    इसी बीच कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर रोके जाने की जानकारी सामने आई। बताया गया कि वह सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं। इसी दौरान पुलिस की टीम उनके आवास पर पहुंची और उन्हें बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद उन्हें घर में नजरबंद रखा गया। सांसद के सहारनपुर जाने के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा संबंधी कदम उठाया गया।

    सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताया कि ध्वस्तीकरण से पहले नोटिस और अपील सहित निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाह पर भरोसा नहीं करने की अपील की। साथ ही सोशल मीडिया पर भ्रामक या अफवाह फैलाने वाली सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी।

    प्रशासन की कार्रवाई के बाद भी क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती जारी रखी गई है। अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील इलाकों में निगरानी बनाए रखी जा रही है। पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रशासन ने कार्रवाई को न्यायिक आदेश के अनुपालन से जुड़ा बताया है, जबकि मामले को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

  • अखिलेश यादव की पार्टी 5 से 11 सितंबर तक चलाएगी पीडीए जागरुकता अभियान, शिक्षा और रोजगार के मुद्दे होंगे केंद्र में

    अखिलेश यादव की पार्टी 5 से 11 सितंबर तक चलाएगी पीडीए जागरुकता अभियान, शिक्षा और रोजगार के मुद्दे होंगे केंद्र में


    नई दिल्ली । 
    उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी ने छात्र और युवा वर्ग के बीच अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने की दिशा में अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। शिक्षक दिवस के मौके पर पार्टी की छात्र सभा की ओर से 5 से 11 सितंबर तक छात्र, नौजवान एवं पीडीए जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान का नाम पाठशाला पुकारे रखा गया है।

    समाजवादी पार्टी के अनुसार, अभियान के दौरान प्रदेश में बंद किए गए प्राथमिक, जूनियर और हाईस्कूलों के बाहर शिक्षक सम्मान कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी का कहना है कि इन कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा और स्थानीय लोगों को भी संवाद का हिस्सा बनाया जाएगा।

    अभियान के तहत विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्र सम्मेलन तथा शिक्षक सम्मान समारोह भी आयोजित किए जाने हैं। बंद स्कूलों के परिसर के बाहर उपलब्ध स्थानों पर शिक्षक दिवस से जुड़े कार्यक्रम किए जाएंगे। इनमें स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ ग्रामीणों की भागीदारी भी प्रस्तावित है।

    सपा छात्र सभा के कार्यक्रम को अलग अलग चरणों में आयोजित करने की योजना बनाई गई है। 7 सितंबर को पीडीए वृक्षारोपण और पर्चा वितरण का कार्यक्रम होगा। इसके बाद 8 सितंबर को विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिविर लगाकर छात्रों से संपर्क किया जाएगा।

    9 सितंबर को छात्रों से सुझाव लिए जाएंगे और उनकी समस्याओं को सुना जाएगा। इस दौरान उनसे संकल्प पत्र भी भरवाए जाने की योजना है। पार्टी का उद्देश्य छात्रों से सीधे संवाद स्थापित करके शिक्षा, रोजगार और अन्य संबंधित विषयों पर उनकी प्राथमिकताओं को समझना बताया गया है।

    10 सितंबर को छात्र छात्राओं और युवाओं की राजनीति में भूमिका को लेकर चर्चा की जाएगी। इसके बाद 11 सितंबर को मेधावी छात्रों और टॉपर्स के सम्मान के साथ अभियान का समापन किया जाएगा। पार्टी ने इस कार्यक्रम को छात्र और युवा वर्ग से जुड़ने के अपने प्रयास के तौर पर सामने रखा है।

    अभियान में शिक्षा और युवाओं से जुड़े कई मुद्दों को प्रमुखता दी गई है। इनमें पेपर लीक, समान पाठ्यक्रम, बढ़ती फीस, रोजगार, आरक्षण और उच्च शिक्षण संस्थानों में नियुक्तियों में कथित भ्रष्टाचार जैसे विषय शामिल हैं। पार्टी आरक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता और रोस्टर प्रणाली को लेकर भी सवाल उठाने की तैयारी में है।

    इसके अलावा मुफ्त शिक्षा, छात्रों को डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराने, पुस्तकालयों की व्यवस्था मजबूत करने तथा नए विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के निर्माण जैसे मुद्दों को भी अभियान में शामिल किया गया है। सपा का कहना है कि इन विषयों के माध्यम से छात्रों और युवाओं की वास्तविक समस्याओं को राजनीतिक विमर्श में प्रमुखता दी जाएगी।

    यह अभियान ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी गतिविधियां तेज कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के लिए छात्र और युवा वर्ग महत्वपूर्ण राजनीतिक आधार माना जाता है। ऐसे में शिक्षा, रोजगार और आरक्षण जैसे मुद्दों के जरिए पार्टी इस वर्ग के साथ संपर्क बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

    पाठशाला पुकारे अभियान के माध्यम से बंद सरकारी स्कूलों और ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा भी राजनीतिक बहस में लाने की तैयारी है। अभियान के दौरान सामने आने वाली छात्र समस्याओं और सुझावों को पार्टी किस तरह अपने आगामी राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल करती है, इस पर भी नजर रहेगी।

  • मुरादाबाद सर्किट हाउस में नमाज पढ़ने के मामले में सपा विधायक के चाचा पर मुकदमा दर्ज, वीडियो वायरल

    मुरादाबाद सर्किट हाउस में नमाज पढ़ने के मामले में सपा विधायक के चाचा पर मुकदमा दर्ज, वीडियो वायरल

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में सर्किट हाउस परिसर में नमाज पढ़ने से जुड़े मामले में समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद उस्मान के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। मोहम्मद उस्मान बिलारी से सपा विधायक मोहम्मद फहीम के चाचा बताए जा रहे हैं और पार्टी में जिला उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालते हैं। मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस तक पहुंचा।

    वायरल वीडियो में मोहम्मद उस्मान के सर्किट हाउस परिसर में सड़क पर नमाज पढ़ने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि इस दौरान सड़क पर वाहन खड़ा किया गया था, जिससे वहां से आने-जाने वाले लोगों को परेशानी हुई। वीडियो सामने आने के बाद मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा शुरू हुई और पुलिस से कार्रवाई की मांग की गई।

    पुलिस के अनुसार, सर्किट हाउस के प्रभारी अवर अभियंता अनिल कुमार की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर मझोला थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि शिकायत में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और वायरल वीडियो से जुड़े तथ्यों की भी पड़ताल की जा रही है।

    मुरादाबाद के पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कुछ हिंदू संगठन के लोगों ने भी इस मामले में पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद शिकायत और उपलब्ध जानकारी के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। पुलिस का कहना है कि मामले में जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यह मामला उस समय सामने आया जब सर्किट हाउस में समाजवादी पार्टी के नेताओं की राजनीतिक गतिविधियां चल रही थीं। जानकारी के मुताबिक, विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव गुरुवार को एमएलसी चुनाव से संबंधित कार्यक्रम के लिए सर्किट हाउस पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने सपा नेताओं के साथ चुनाव को लेकर बैठक भी की थी।

    बताया गया कि लाल बिहारी यादव शुक्रवार को सर्किट हाउस से रवाना हो गए थे। इसके बाद नमाज से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगा। वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर ध्यान खींचा। हालांकि वीडियो में दिखाई दे रही घटना के सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना किस समय हुई, उस दौरान वहां यातायात और आवाजाही की वास्तविक स्थिति क्या थी तथा वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति और घटनास्थल से जुड़े अन्य तथ्यों की पुष्टि कैसे होती है। जांच में शिकायत, वीडियो और मौके से संबंधित जानकारी को आधार बनाया जा रहा है।

    सर्किट हाउस सरकारी उपयोग का महत्वपूर्ण परिसर होता है, जहां अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और अन्य विशिष्ट लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे स्थान पर किसी गतिविधि से यातायात या आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की शिकायत मिलने पर प्रशासन और पुलिस द्वारा संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जाती है।

    मामले में पुलिस की ओर से मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद अब जांच आगे बढ़ रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे। वहीं सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर भी लोगों से बिना पुष्टि के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की अपील की जा सकती है, क्योंकि वीडियो के आधार पर घटना के पूरे संदर्भ का निर्धारण हमेशा संभव नहीं होता।

    फिलहाल मोहम्मद उस्मान के खिलाफ मझोला थाने में दर्ज मामले को लेकर पुलिस जांच कर रही है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि और घटना की परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों की जांच में जुटी है।

  • दिल्ली में भारी बारिश से हवाई यातायात प्रभावित, आईजीआई एयरपोर्ट पर 200 से अधिक उड़ानें हुईं लेट, यात्रियों को एडवाइजरी जारी

    दिल्ली में भारी बारिश से हवाई यातायात प्रभावित, आईजीआई एयरपोर्ट पर 200 से अधिक उड़ानें हुईं लेट, यात्रियों को एडवाइजरी जारी

    नई दिल्ली । दिल्ली में शनिवार को तेज बारिश और खराब मौसम का असर हवाई यातायात पर भी देखने को मिला। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 5 सितंबर को 200 से अधिक उड़ानों के देरी से संचालित होने की जानकारी सामने आई। मौसम की स्थिति के कारण आने और जाने वाली कई उड़ानों के समय में बदलाव हुआ, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    खराब मौसम के चलते कुछ उड़ानों के दिल्ली पहुंचने में एक घंटे से अधिक की देरी हुई, जबकि कई प्रस्थान करने वाली उड़ानें करीब डेढ़ घंटे तक विलंबित रहीं। बारिश की स्थिति को देखते हुए एयरलाइंस की ओर से यात्रियों को यात्रा से पहले अपनी उड़ान की ताजा स्थिति जांचने की सलाह दी गई है।

    एयरलाइंस ने यात्रियों से कहा है कि वे घर से एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर देख लें। मौसम में बदलाव के कारण उड़ानों के समय में अचानक परिवर्तन हो सकता है। ऐसे में यात्रियों को एयरपोर्ट पहुंचने से पहले संबंधित एयरलाइन की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर जानकारी हासिल करने की सलाह दी गई है।

    इंडिगो ने भी खराब मौसम को लेकर यात्रियों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की। एयरलाइन ने बताया कि दिल्ली से आने-जाने वाली उड़ानों पर मौसम का असर पड़ सकता है और कुछ फ्लाइट्स देरी से संचालित हो सकती हैं। यात्रियों से अपील की गई कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की पुष्टि कर लें।

    बारिश का असर केवल एयरपोर्ट के रनवे और हवाई संचालन तक सीमित नहीं है। दिल्ली में कई इलाकों में तेज बारिश के कारण सड़कों पर यातायात की रफ्तार भी प्रभावित हुई है। एयरपोर्ट की ओर जाने वाले रास्तों पर वाहनों की संख्या बढ़ने और ट्रैफिक धीमा होने की स्थिति में यात्रियों को सामान्य से अधिक समय लग सकता है।

    यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे एयरपोर्ट के लिए घर से पर्याप्त समय लेकर निकलें। रास्ते में बारिश और ट्रैफिक के कारण होने वाली संभावित देरी को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त समय रखना जरूरी है। इससे उड़ान के लिए निर्धारित चेक-इन और बोर्डिंग समय पर एयरपोर्ट पहुंचने में मदद मिल सकती है।

    एयरलाइंस और एयरपोर्ट से जुड़ी टीमें मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। परिस्थितियों के अनुसार उड़ानों के संचालन और समय में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं। खराब मौसम की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उड़ानों के संचालन से जुड़े फैसले लिए जाते हैं।

    दिल्ली में बारिश के कारण शनिवार को हवाई यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सलाह यही है कि वे केवल टिकट पर दिए गए निर्धारित समय के आधार पर यात्रा की योजना न बनाएं। एयरपोर्ट रवाना होने से पहले फ्लाइट का लाइव स्टेटस जांचना और मौसम तथा सड़क यातायात की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।

    यात्रियों से एयरलाइंस ने सहयोग और धैर्य बनाए रखने की अपील की है। मौसम सामान्य होने के साथ उड़ानों का संचालन भी धीरे-धीरे नियमित होने की उम्मीद है, लेकिन जिन यात्रियों की शनिवार को दिल्ली से उड़ान है, उन्हें एयरपोर्ट जाने से पहले ताजा अपडेट जरूर देखना चाहिए।

  • गोरखपुर स्टेशन पर DRI की कार्रवाई, अमरनाथ एक्सप्रेस से 5.88 किलोग्राम चरस बरामद, दो महिलाओं समेत तीन गिरफ्तार

    गोरखपुर स्टेशन पर DRI की कार्रवाई, अमरनाथ एक्सप्रेस से 5.88 किलोग्राम चरस बरामद, दो महिलाओं समेत तीन गिरफ्तार

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर राजस्व खुफिया निदेशालय यानी डीआरआई ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दो महिलाओं समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से 5.88 किलोग्राम चरस बरामद हुई है। बरामद मादक पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में अनुमानित कीमत करीब 5.88 करोड़ रुपये बताई गई है। तीनों आरोपी अमरनाथ एक्सप्रेस से बिहार से पंजाब की ओर जा रहे थे।

    डीआरआई को सूचना मिली थी कि कुछ लोग बिहार के सुगौली से ट्रेन में सवार हुए हैं और उनके पास बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ है। इन लोगों का कथित गंतव्य पंजाब का लुधियाना बताया गया था। सूचना मिलने के बाद डीआरआई की टीम गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर पहुंची और ट्रेन के आने का इंतजार करने लगी।

    ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचने के बाद टीम संबंधित कोच में पहुंची। संदेह के आधार पर दो महिलाओं और एक पुरुष को हिरासत में लेकर पूछताछ और तलाशी की गई। जांच के दौरान महिलाओं के पास से कुल 11 पैकेट बरामद किए गए। इन पैकेटों में मौजूद काले रंग के पदार्थ की जांच की गई तो वह चरस पाया गया।

    जांच एजेंसी के अनुसार, महिलाओं ने मादक पदार्थ को शरीर के आसपास छिपाकर रखा था। चरस के पैकेट जांघों के चारों ओर घुटने के कैप में लपेटकर और कपड़ों के भीतर छिपाए गए थे। तलाशी के दौरान बरामद सभी पैकेटों को जब्त कर लिया गया। बरामदगी के बाद तीनों आरोपियों को मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

    डीआरआई ने बरामद चरस को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटांसेज यानी एनडीपीएस अधिनियम के तहत जब्त किया। अधिकारियों ने मामले में आगे की जांच शुरू करते हुए यह पता लगाने का प्रयास किया कि मादक पदार्थ कहां से हासिल किया गया था और इसे पंजाब तक पहुंचाने की जिम्मेदारी किसे दी गई थी।

    गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ तस्करी से संबंधित मामला दर्ज किया गया। शुक्रवार को उन्हें न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया। जांच एजेंसी अब कथित तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और मादक पदार्थ की आपूर्ति के स्रोत की जानकारी जुटा रही है।

    मामला ऐसे समय सामने आया है जब पूर्वी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में विभिन्न सामानों की अवैध आवाजाही को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बढ़ा रही हैं। सिद्धार्थनगर जिले में भारत-नेपाल सीमा से जुड़े कुछ इलाकों में यूरिया खाद और चीनी समेत अन्य सामानों की कथित तस्करी की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

    मोहाना थाना क्षेत्र के ककरहवा पुलिस चौकी के आसपास के गांवों से सीमापार सामान पहुंचाने की गतिविधियों की जानकारी पुलिस और सुरक्षा बलों को मिलती रही है। सीमा क्षेत्र में कई पगडंडी मार्ग होने के कारण निगरानी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनी रहती है। आरोप है कि तस्कर जवानों की गश्त के बीच खाली समय का फायदा उठाकर पहले से जमा सामान सीमापार पहुंचाने का प्रयास करते हैं।

    स्थानीय पुलिस के अनुसार, तस्करी पर रोक लगाने के लिए सिविल पुलिस और सशस्त्र सीमा बल की संयुक्त गश्त की जाती है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अवैध सामान के साथ पकड़े जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। गोरखपुर की कार्रवाई के बाद जांच एजेंसियों का ध्यान मादक पदार्थों की आपूर्ति और परिवहन से जुड़े नेटवर्क पर भी है।

  • विवाद के बाद अधिवक्ता से मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, पुलिस ने दो नामजद समेत सात अज्ञात पर केस दर्ज किया

    विवाद के बाद अधिवक्ता से मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, पुलिस ने दो नामजद समेत सात अज्ञात पर केस दर्ज किया

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के महोबा में एक अधिवक्ता के साथ कथित मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। करीब दो मिनट से अधिक समय के इस वीडियो में कुछ युवतियां और महिलाएं एक अधिवक्ता को घेरती और पकड़ती दिखाई दे रही हैं। वीडियो में उनके साथ जूते-चप्पलों से मारपीट किए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    मामले में अधिवक्ता की ओर से पुलिस को दी गई तहरीर के आधार पर दो नामजद युवतियों और सात अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपितों की पहचान और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, यह मामला किसी पुराने विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है।

    कोतवाली प्रभारी निरीक्षक बीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि अधिवक्ता की शिकायत के आधार पर कुल नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इनमें दो लोगों को नामजद किया गया है, जबकि सात अन्य की पहचान अभी की जानी है। पुलिस मामले की जांच के साथ आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए भी प्रयास कर रही है।

    पुलिस के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच पहले भी विवाद हुआ था। उस समय दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था और मामला शांत हो गया था। आरोप है कि बाद में उसी पुराने विवाद को लेकर दोबारा कहासुनी हुई। इसके बाद स्थिति बिगड़ गई और अधिवक्ता के साथ कथित तौर पर मारपीट की घटना हुई।

    घटना से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया। वीडियो में कई महिलाएं और युवतियां अधिवक्ता के आसपास दिखाई देती हैं। कुछ लोग उन्हें पकड़ते हुए नजर आते हैं और उनके साथ जूते-चप्पलों से मारपीट किए जाने का दृश्य भी दिखाई देता है। वीडियो की अवधि करीब दो मिनट 12 सेकेंड बताई गई है। पुलिस अब वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान और घटना की वास्तविक परिस्थितियों की जांच कर रही है।

    सोशल मीडिया पर किसी घटना का वीडियो तेजी से प्रसारित होने के बाद पुलिस के सामने उसकी सत्यता और घटनाक्रम की पुष्टि करना महत्वपूर्ण हो जाता है। इसी वजह से पुलिस वायरल वीडियो के साथ शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    मामले में पुलिस ने अभी घटना के पीछे के पूरे विवाद और मारपीट की वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक स्तर पर पुराने विवाद के बाद दोबारा कहासुनी होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस दोनों पक्षों से संबंधित तथ्यों को जांच में शामिल कर रही है।

    वहीं, महोबा के अलावा जालौन में भी दो परिवारों के बीच मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। कोतवाली जालौन क्षेत्र के मोहल्ला पहलवान बड़ा में दो परिवारों के बीच पुरानी रंजिश को लेकर कथित तौर पर लाठी-डंडों और रॉड से मारपीट हुई। पीड़ित सुलखान यादव ने पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया कि उसके साथ और बीच-बचाव करने पहुंचे उसके भतीजे के साथ भी मारपीट की गई।

    शिकायत के अनुसार घटना रात करीब 10 बजे हुई। आरोप है कि गाली-गलौज के बाद विवाद बढ़ा और दोनों पर हमला किया गया। पीड़ित ने गंभीर चोट लगने और जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

  • ईओएस-05 की सफलता के बाद इसरो ने गगनयान की तैयारी तेज की, इसी साल पहले मानवरहित मिशन के प्रक्षेपण की योजना

    ईओएस-05 की सफलता के बाद इसरो ने गगनयान की तैयारी तेज की, इसी साल पहले मानवरहित मिशन के प्रक्षेपण की योजना


    नई दिल्ली ।
    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने ईओएस-05 उपग्रह के सफल प्रक्षेपण के बाद अपने अगले बड़े लक्ष्य की दिशा में तैयारियां तेज कर दी हैं। इसरो प्रमुख वी नारायणन ने कहा है कि इसी कैलेंडर वर्ष में देश के पहले मानवरहित गगनयान मिशन के प्रक्षेपण के लिए व्यवस्थित तरीके से काम किया जा रहा है। इस मिशन को भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

    ईओएस-05 को जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट तक पहुंचाने में मिली सफलता इसरो के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट ने प्रक्षेपण के करीब 18 मिनट बाद उपग्रह को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया। यह कक्षा निर्धारित जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से लगभग 5,000 किलोमीटर नीचे है। यहां से उपग्रह अपने निर्धारित अंतिम कक्षीय स्थान तक पहुंचने की प्रक्रिया पूरी करेगा।

    इस मिशन में रॉकेट ने निर्धारित लक्ष्य से अधिक ऊंचाई हासिल की। उसे जीटीओ में 28,934 किलोमीटर के उच्चतम बिंदु तक पहुंचना था, लेकिन वह 31,026 किलोमीटर तक पहुंचा। इस तरह रॉकेट ने तय ऊंचाई से 2,092 किलोमीटर अधिक दूरी तय की।

    ईओएस-05 का वजन 2,367 किलोग्राम है और यह जीएसएलवी रॉकेट से प्रक्षेपित किया गया अब तक का सबसे भारी पेलोड बताया गया है। इस उपलब्धि से इसरो की भारी उपग्रहों को निर्धारित कक्षाओं में स्थापित करने की क्षमता को मजबूती मिली है।

    इसरो प्रमुख वी नारायणन ने बताया कि पहले मानवरहित गगनयान मिशन की तैयारी में संगठन के साथ उद्योग जगत और अन्य संस्थाएं भी काम कर रही हैं। उन्होंने इस वित्त वर्ष में नौवहन उपग्रह एनवीएस-03 सहित छह और प्रक्षेपणों का लक्ष्य भी बताया। उन्होंने ईओएस-05 को जासूसी उपग्रह बताए जाने की धारणा को खारिज किया।

    गगनयान की तैयारी ऐसे समय आगे बढ़ रही है जब इसरो को पिछले कुछ वर्षों में कुछ मिशनों में तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। जीएसएलवी-एफ10 और ईओएस-03 मिशन अगस्त 2021 में क्रायोजेनिक चरण में तकनीकी समस्या के कारण सफल नहीं हो सका था। इसके बाद जनवरी 2026 में पीएसएलवी-सी62 और ईओएस-एन1 मिशन भी तीसरे चरण के अंत में नियंत्रण प्रणाली में आई खराबी के कारण निर्धारित उड़ान पथ से भटक गया था।

    इन घटनाओं के बाद इसरो ने जांच और तकनीकी समीक्षा के आधार पर आवश्यक बदलाव किए। ईओएस-05 का सफल प्रक्षेपण इसी सुधार प्रक्रिया के बाद हासिल हुई महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। इससे आगामी अभियानों के लिए संगठन का आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है।

    गगनयान मिशन के तहत भारत का उद्देश्य मानव अंतरिक्ष उड़ान की क्षमता विकसित करना है। उससे पहले मानवरहित मिशनों के माध्यम से रॉकेट, अंतरिक्ष यान, जीवन समर्थन प्रणाली और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों का परीक्षण किया जाना है। इसलिए पहला मानवरहित मिशन आगे के मानवयुक्त मिशन की तैयारी में अहम भूमिका निभाएगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईओएस-05 के सफल प्रक्षेपण को भारत की अंतरिक्ष क्षमता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उन्होंने इस सफलता को नवाचार, तकनीकी दक्षता और देश के बढ़ते अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ा।

    ईओएस-05 मिशन की सफलता के बाद इसरो के सामने अब लगातार सफल प्रक्षेपण बनाए रखने और गगनयान की समयसीमा के अनुसार तैयारियां पूरी करने की चुनौती है। यदि मानवरहित गगनयान मिशन इस वर्ष सफलतापूर्वक पूरा होता है, तो यह भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को अगले महत्वपूर्ण चरण की ओर ले जाएगा।

  • पीएम मोदी के जन्मदिन से भाजपा का सेवा संकल्प अभियान, एक महीने में 13 कार्यक्रमों के जरिए देशभर में जनसंपर्क की तैयारी

    पीएम मोदी के जन्मदिन से भाजपा का सेवा संकल्प अभियान, एक महीने में 13 कार्यक्रमों के जरिए देशभर में जनसंपर्क की तैयारी

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से भारतीय जनता पार्टी देशभर में एक महीने का सेवा संकल्प अभियान शुरू करने जा रही है। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलाने की योजना है। पार्टी के अनुसार, इसके जरिए सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण, विकास और विकसित भारत से जुड़े संदेशों को जनता तक पहुंचाया जाएगा। अभियान को प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से भी जोड़ा गया है।

    भाजपा सामान्य तौर पर प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर सेवा पखवाड़े का आयोजन करती रही है, लेकिन इस बार कार्यक्रम का विस्तार एक महीने तक किया गया है। नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली थी। इस आधार पर अक्टूबर 2026 में उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। पार्टी इस अवसर को भी व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से रेखांकित करने की तैयारी कर रही है।

    अभियान के तहत करीब 13 प्रमुख कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इसकी शुरुआत 17 सितंबर को आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम से होगी। इसके माध्यम से देशभर में विभिन्न स्थानों और घरों में दीप प्रज्वलन किया जाएगा। बच्चों के लिए चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन भी प्रस्तावित है, जिनका विषय देश के भविष्य और सपनों से जुड़ा होगा।

    नमो सेवा गाथा के तहत नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों तक विभिन्न संदेश पहुंचाने की योजना है। वहीं कहानी बदलाव की कार्यक्रम में सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाले लोगों की सफलता की कहानियां सामने रखी जाएंगी। इसका उद्देश्य कल्याणकारी योजनाओं के असर को सीधे लाभार्थियों के अनुभवों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना है।

    अभियान में आंगन का उत्सव भी शामिल किया गया है। इसके तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थी माताओं को सम्मानित करने के साथ पोषण तथा मातृ कल्याण से जुड़े विषयों पर संवाद की योजना है। भाजपा का लक्ष्य देशभर में करीब 14 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तक पहुंच बनाने का है।

    प्रधानमंत्री मोदी की जन्मभूमि गुजरात के वडनगर और उनकी संसदीय कर्मभूमि वाराणसी को भी अभियान में विशेष स्थान दिया गया है। जल, जन और सेवा संकल्प यात्रा के जरिए दोनों स्थानों से जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। गुजरात में वडनगर से वाराणसी और फिर वापस वडनगर तक बाइक यात्राओं की भी योजना है। इन यात्राओं के दौरान जनसंवाद के साथ सेवा और सांस्कृतिक गतिविधियां होंगी।

    सेवा मेरा योगदान कार्यक्रम के तहत रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, पौधरोपण और डिजिटल साक्षरता जैसी गतिविधियां प्रस्तावित हैं। सेवा सेतु अभियान के जरिए ब्लॉक और विधानसभा स्तर पर शिविर लगाए जाएंगे, जहां लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सहायता दी जाएगी। संबंधित विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में पात्र लोगों के दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी कराने की योजना है।

    अभियान के दौरान 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जयंती और 7 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष कार्यक्रम होंगे। अंतिम चरण में जनसेवा महाकुंभ आयोजित करने की योजना है, जिसमें जनप्रतिनिधियों और पार्टी कार्यकर्ताओं की भागीदारी होगी।

    भाजपा इस अभियान को केवल सेवा गतिविधियों तक सीमित नहीं रखना चाहती। पार्टी सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के साथ विपक्ष के राजनीतिक मुद्दों का जवाब देने के लिए भी इसका इस्तेमाल कर सकती है। इस तरह अभियान को संगठनात्मक जनसंपर्क, लाभार्थी संपर्क और राजनीतिक संवाद के संयुक्त कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

  • जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज को जस्टिस उज्जल भुइयां ने बताया चिंताजनक, पुलिस से निष्पक्षता और संयम बरतने की अपील

    जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज को जस्टिस उज्जल भुइयां ने बताया चिंताजनक, पुलिस से निष्पक्षता और संयम बरतने की अपील

    नई दिल्ली ।जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों और युवाओं पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्जल भुइयां ने चिंता जताई है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज को परेशान करने वाली घटना बताया और कहा कि अलग विचार रखने वाले छात्रों के खिलाफ दंडात्मक रवैया नहीं अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने पुलिस की भूमिका को लेकर निष्पक्षता, संयम और जनता के भरोसे को बेहद महत्वपूर्ण बताया।

    जस्टिस भुइयां ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों और युवाओं को अपने विचार रखने तथा विरोध दर्ज कराने का अधिकार है। यदि कोई छात्र किसी मुद्दे पर अलग राय रखता है तो उसके साथ ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, जिससे उसके अधिकार प्रभावित हों। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ कथित कठोर व्यवहार को निराशाजनक बताया।

    उन्होंने पुलिस अधिकारियों की निष्पक्षता को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उनके मुताबिक पुलिस से यह अपेक्षा की जाती है कि वह कानून को समान रूप से लागू करे और किसी भी परिस्थिति में निष्पक्षता बनाए रखे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पुलिस की इस भूमिका पर सवाल उठना गंभीर चिंता का विषय है।

    जस्टिस भुइयां ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके लिए जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। पुलिस को परिस्थितियों को समझते हुए संयमित तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पुलिस और आम नागरिकों के बीच विश्वास बना रहना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है।

    उन्होंने कहा कि आम लोगों के लिए वर्दी पहने पुलिसकर्मी सरकार की शक्ति और अधिकार का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि होता है। जब किसी नागरिक को परेशानी होती है तो वह सहायता के लिए पुलिस के पास जाता है। ऐसे में पुलिस की विश्वसनीयता कमजोर होना समाज और कानून व्यवस्था दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

    जस्टिस भुइयां ने यह भी कहा कि यदि सरकार के अधिकारी ही कानून का उल्लंघन करने लगें तो इसका व्यापक असर पड़ता है। ऐसी स्थिति में लोगों के बीच कानून के प्रति सम्मान कम हो सकता है और अराजकता को बढ़ावा मिलने का खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्य लोकतांत्रिक देश में सरकारी अधिकारियों से कानून का पालन करने की अपेक्षा की जाती है।

    उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में पीड़ितों को मुआवजा दिए जाने की आवश्यकता को स्वीकार किया है। उनके मुताबिक, राज्य की संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा हो सके।

    जस्टिस भुइयां ने ये बातें पूर्व सुरक्षा सचिव यशोवर्धन आजाद की पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में कहीं। राजधानी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा के युवा अधिकारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब ऐसे अधिकारी प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट करते दिखाई देते हैं तो यह निराशाजनक स्थिति होती है।

    छात्रों के विरोध के अधिकार को लेकर इससे पहले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत भी टिप्पणी कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि छात्रों को किसी भी मुद्दे पर विरोध करने का अधिकार है। लॉ संस्थान के छात्रों के पंजीकरण पर रोक लगाने से जुड़े एक मामले में भी उन्होंने छात्रों के अधिकारों के संरक्षण पर जोर दिया था।

    जस्टिस भुइयां की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की भूमिका, बल प्रयोग और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को लेकर बहस जारी है। उनकी टिप्पणियों में कानून व्यवस्था और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने तथा पुलिस की निष्पक्षता पर विशेष जोर दिया गया।

  • जबरन धर्मांतरण के आरोपों के बीच बंगाल में प्रार्थना सभाओं को लेकर विवाद बढ़ा, सरकार ने कानून के अनुसार कार्रवाई का भरोसा दिया

    जबरन धर्मांतरण के आरोपों के बीच बंगाल में प्रार्थना सभाओं को लेकर विवाद बढ़ा, सरकार ने कानून के अनुसार कार्रवाई का भरोसा दिया

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के कई जिलों में घरों के भीतर आयोजित होने वाली ईसाई प्रार्थना सभाओं को लेकर विवाद बढ़ गया है। प्रार्थना सभाओं पर कथित हमले, मारपीट और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद ईसाई समूहों ने कुछ इलाकों में ऐसी बैठकें और लोगों से नियमित मुलाकात का सिलसिला फिलहाल रोक दिया है। दूसरी ओर, कुछ संगठनों ने इन गतिविधियों के दौरान जबरन धर्मांतरण किए जाने के आरोप लगाए हैं। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक प्रार्थना निजी आस्था का विषय है, लेकिन जबरन धर्मांतरण की पुष्टि होने पर कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    हावड़ा जिले के उलूबेरिया में 23 अगस्त को एक किराए के मकान में रविवार की प्रार्थना सभा के दौरान विवाद की शुरुआत हुई। वहां करीब 60 पुरुष और महिलाएं मौजूद थे। पादरी मिथुन हाजरा के अनुसार, दोपहर करीब तीन बजे नारे लगाती हुई भीड़ मकान में पहुंची और वहां मौजूद लोगों पर जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया। इसके बाद कथित तौर पर मारपीट और तोड़फोड़ हुई।

    हाजरा ने आरोप लगाया कि उनके साथ भी मारपीट की गई। प्रार्थना स्थल पर रखा साउंड सिस्टम, पोडियम, मेज, कुर्सियां और पंखे क्षतिग्रस्त कर दिए गए। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने पादरी और अन्य लोगों को वहां से सुरक्षित निकाला तथा उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। इलाज के बाद शिकायत दर्ज कराई गई। हावड़ा ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक अमित वर्मा ने प्राथमिकी दर्ज होने और जांच जारी रहने की पुष्टि की है। इस मामले में उस समय तक किसी गिरफ्तारी की जानकारी नहीं थी।

    ईसाई संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि उलूबेरिया की घटना अकेली नहीं है। उनके अनुसार, 30 अगस्त को हावड़ा के जगतबल्लवपुर और उत्तर 24 परगना के हिंगलगंज में भी घरों में चल रही प्रार्थना सभाओं के दौरान विवाद की घटनाएं सामने आईं। 25 अगस्त को हावड़ा के घुसुड़ी में आयोजित प्रार्थना सभा में कथित मारपीट की शिकायत सामने आई, जबकि 26 अगस्त को पूर्व मेदिनीपुर के चेक माइलपोस्ट गांव में पादरी और उनकी पत्नी के साथ कथित मारपीट का आरोप लगाया गया।

    पूर्व बर्धमान जिले के सहानगर में 14 अगस्त को अंतिम संस्कार को लेकर भी विवाद हुआ। चर्च के प्रभारी पादरी सैमुअल हेम्ब्रम के अनुसार, कुछ लोगों ने दफन स्थल से संबंधित दस्तावेज मांगे और अंतिम संस्कार रोक दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि दफनाए जाने के बाद शव को कब्र से बाहर निकाल दिया गया और बाद में दूसरे कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार करना पड़ा।

    पूर्व बर्धमान की पुलिस अधीक्षक पुष्पा ने बताया कि मृत महिला स्थानीय निवासी नहीं थी और स्थानीय लोगों ने दफन स्थल को लेकर आपत्ति जताई थी। उनका दावा था कि संबंधित जमीन निजी है और कब्रिस्तान नहीं है। पुलिस जमीन के रिकॉर्ड की जांच कर रही है। शोक मनाने आए लोगों के साथ मारपीट के आरोप की भी स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है।

    हिंदू संगठन सिंघा वाहिनी के अध्यक्ष देबदत्त माझी ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर पैसे का लालच देकर धर्मांतरण कराया जा रहा है। वहीं राज्य के आदिवासी विकास और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री क्षुदिराम टुडू ने कहा कि प्रार्थना करना व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि अगर किसी मामले में जबरन धर्मांतरण साबित होता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।

    सीपीआई(एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की बात कही। टीएमसी प्रवक्ता प्रदीप्त मुखर्जी ने भाजपा पर डर की राजनीति करने का आरोप लगाया। वहीं भाजपा के राज्यसभा सांसद राहुल सिन्हा ने कहा कि उन्हें इन घटनाओं की जानकारी नहीं है और उन्होंने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया।