Category: National

  • 20 दिन की भूख हड़ताल के बीच सोनम वांगचुक का भावुक संदेश, बोले- ‘20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा, फिर जरूरत पड़ी तो भूत बनकर भी लौटूंगा’

    20 दिन की भूख हड़ताल के बीच सोनम वांगचुक का भावुक संदेश, बोले- ‘20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा, फिर जरूरत पड़ी तो भूत बनकर भी लौटूंगा’

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के समर्थन में पिछले 20 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। वीडियो में उन्होंने 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च का उल्लेख करते हुए हल्के-फुल्के और मजाकिया अंदाज में कहा कि वह किसी भी हालत में उस दिन तक जीवित रहने की कोशिश करेंगे और यदि मार्च सफल नहीं हुआ तो “भूत बनकर” लोगों के बीच वापस आएंगे। उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है।

    सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में शामिल हैं। यह प्रदर्शन शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा है। आंदोलन में शामिल विभिन्न संगठनों और समर्थकों के बीच वांगचुक की मौजूदगी लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उनसे मुलाकात कर आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है।

    वायरल वीडियो में वांगचुक ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि वह 20 जुलाई तक स्वस्थ रहकर प्रस्तावित संसद मार्च में शामिल हो सकें। उन्होंने आगे मुस्कुराते हुए कहा कि यदि किसी कारण से यह लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो वह “भूत बनकर” वापस आएंगे। उनका यह बयान गंभीर घोषणा के बजाय एक हल्का-फुल्का और प्रतीकात्मक संदेश माना जा रहा है, जिसे वहां मौजूद लोगों ने भी मुस्कुराते हुए सुना।

    लंबे समय से जारी भूख हड़ताल का असर उनके स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पिछले 20 दिनों में उनका वजन लगभग नौ किलोग्राम तक कम हो चुका है। बीते 24 घंटों में भी वजन में गिरावट दर्ज की गई है। चिकित्सकों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है और समय-समय पर आवश्यक जांच की जा रही है। डॉक्टरों ने लंबे समय तक भोजन न लेने के कारण शरीर पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक भूख हड़ताल जारी रहने पर शरीर में ऊर्जा की कमी, कमजोरी, डिहाइड्रेशन और अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि उपलब्ध चिकित्सकीय जानकारी के अनुसार वांगचुक के शरीर में पानी का स्तर फिलहाल नियंत्रित है, लेकिन हल्के डिहाइड्रेशन के संकेत भी सामने आए हैं। चिकित्सक लगातार उनकी स्थिति का आकलन कर रहे हैं और आवश्यक चिकित्सकीय सलाह दे रहे हैं।

    इस बीच 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च को लेकर आंदोलनकारी अपनी तैयारियां जारी रखे हुए हैं। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। आंदोलन के कारण जंतर-मंतर पर लगातार समर्थकों की आवाजाही बनी हुई है और विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि भी समय-समय पर वहां पहुंच रहे हैं।

    सोनम वांगचुक का ताजा वीडियो ऐसे समय सामने आया है जब उनके स्वास्थ्य और आंदोलन, दोनों पर लोगों की नजर बनी हुई है। उनका संदेश समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। वहीं, चिकित्सकीय निगरानी के बीच उनकी सेहत पर भी लगातार ध्यान दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में आंदोलन और प्रस्तावित संसद मार्च की दिशा पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

  • शहर के कमिश्नर तो हम ही हैं' कहकर बनाई वायरल रील पड़ी भारी, नागपुर पुलिस ने तीन युवकों को किया गिरफ्तार, माफी के बाद भी नहीं हटी कार्रवाई

    शहर के कमिश्नर तो हम ही हैं' कहकर बनाई वायरल रील पड़ी भारी, नागपुर पुलिस ने तीन युवकों को किया गिरफ्तार, माफी के बाद भी नहीं हटी कार्रवाई


    नई दिल्ली ।
    महाराष्ट्र के नागपुर में सोशल मीडिया पर फिल्मी डायलॉग के साथ बनाई गई एक रील तीन युवकों के लिए कानूनी परेशानी का कारण बन गई। पुलिस को चुनौती देने वाले अंदाज में तैयार किया गया यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए तीनों आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद आरोपियों ने सार्वजनिक रूप से कान पकड़कर माफी भी मांगी, लेकिन पुलिस ने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया अपने निर्धारित नियमों के अनुसार जारी रहेगी।

    पुलिस के अनुसार यह मामला सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो से जुड़ा है, जिसमें तीन युवक फिल्मी डायलॉग बोलते हुए स्वयं को शहर का वास्तविक “कमिश्नर” बताते दिखाई दे रहे थे। वीडियो में प्रयुक्त संवाद को पुलिस ने कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की छवि को प्रभावित करने वाला माना। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि यह सामग्री सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच चुकी थी और इसे व्यापक रूप से साझा भी किया गया था।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वायरल वीडियो पिछले कुछ समय से विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहा था। वीडियो में शामिल तीनों युवकों की पहचान शाहिद अब्जल शकील खान, मोहम्मद साहिल मोहम्मद शकील शेख और रिजवान मोहम्मद अजीज के रूप में की गई। पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों और उपलब्ध तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपियों का पता लगाकर उन्हें हिरासत में लिया और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से ऐसी सामग्री तैयार करना, जो कानून व्यवस्था या सरकारी संस्थाओं की प्रतिष्ठा को प्रभावित करे, गंभीर विषय है। अधिकारियों के अनुसार इस प्रकार के वीडियो कुछ लोगों को व्यवस्था के प्रति गलत संदेश दे सकते हैं और कानून का सम्मान कम करने वाली मानसिकता को बढ़ावा दे सकते हैं। इसी कारण मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई।

    पुलिस उपनिरीक्षक की शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि डिजिटल सामग्री, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

    कार्रवाई के बाद तीनों आरोपियों का एक और वीडियो सामने आया, जिसमें वे कान पकड़कर माफी मांगते दिखाई दिए। उन्होंने अपने व्यवहार पर खेद जताया और भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न करने की बात कही। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केवल माफी मांगने से दर्ज आपराधिक मामला स्वतः समाप्त नहीं हो जाता। कानून के अनुसार जांच और न्यायिक प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत आगे बढ़ेगी।

    यह घटना सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले लोगों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मंचों पर मनोरंजन या लोकप्रियता के उद्देश्य से बनाई जाने वाली सामग्री भी कानूनी दायरे में आती है। यदि किसी पोस्ट, वीडियो या रील से सार्वजनिक व्यवस्था, सरकारी संस्थाओं की प्रतिष्ठा या सामाजिक शांति प्रभावित होने की आशंका हो, तो संबंधित एजेंसियां कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर सामग्री साझा करते समय जिम्मेदारी और कानूनी सीमाओं का ध्यान रखना आवश्यक है।

  • कोलकाता एयरपोर्ट परिसर की मस्जिद में जुमे की नमाज पर रोक से बढ़ा विवाद, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, प्रशासन और धार्मिक संगठनों के बीच बढ़ी तनातनी

    कोलकाता एयरपोर्ट परिसर की मस्जिद में जुमे की नमाज पर रोक से बढ़ा विवाद, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, प्रशासन और धार्मिक संगठनों के बीच बढ़ी तनातनी

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एयरपोर्ट परिसर स्थित गौरीपुर मस्जिद को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्रशासन ने मस्जिद में जुमे की नमाज पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिसके बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बन गई है। एहतियात के तौर पर बड़ी संख्या में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है तथा पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है।

    प्रशासन के अनुसार, एयरपोर्ट परिसर में स्थित इस मस्जिद के आसपास अगले कुछ दिनों तक निर्माण और सुरक्षा संबंधी कार्य किए जाने हैं। अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद दो रनवे के बीच स्थित होने के कारण यहां लोगों की आवाजाही से सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा हो सकता है। इसी वजह से सीमित अवधि के लिए नमाज के लिए लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला पूरी तरह सुरक्षा और संचालन संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    मस्जिद को स्थानांतरित किए जाने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि मस्जिद प्रबंधन के कुछ सदस्य इस विषय पर प्रशासन के साथ बातचीत के पक्ष में हैं और किसी सहमति वाले समाधान की संभावना तलाश रहे हैं। हालांकि, दूसरे पक्ष ने इस प्रस्ताव का विरोध जताया है और मस्जिद को उसके वर्तमान स्थान पर बनाए रखने की मांग की है। इसी मतभेद के कारण विवाद और अधिक बढ़ गया है।

    इस बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद से जुड़े नेता सिद्दिकुल्लाह चौधरी ने पहले मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने की बात कही थी। उन्होंने यह भी कहा कि जब इस विषय पर प्रशासन के साथ बातचीत जारी है, तब नमाज पर रोक लगाने की आवश्यकता नहीं थी। बाद में उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात के लिए जाने की जानकारी दी। उनके बयान के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सख्त कर दी तथा पूरे इलाके में निगरानी बढ़ा दी।

    स्थानीय पुलिस ने मस्जिद से जुड़े धार्मिक प्रतिनिधियों को सूचित किया कि क्षेत्र में भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 लागू है और फिलहाल मस्जिद में सामूहिक नमाज की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बाद कुछ स्थानीय धार्मिक प्रतिनिधियों ने वैकल्पिक स्थान पर नमाज अदा करने की बात कही। इसके बावजूद प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पूरी तरह सतर्क बना हुआ है।

    एयरपोर्ट परिसर की ओर जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों, गलियों और प्रवेश बिंदुओं पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। पुरुष और महिला पुलिसकर्मियों के अलावा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान भी लगातार निगरानी कर रहे हैं। आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो और एयरपोर्ट का संचालन सामान्य रूप से जारी रह सके।

    फिलहाल प्रशासन का कहना है कि उसकी प्राथमिकता सार्वजनिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और एयरपोर्ट संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा को रोकना है। दूसरी ओर, मस्जिद से जुड़े पक्षों और प्रशासन के बीच बातचीत की संभावनाएं भी बनी हुई हैं। ऐसे में सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संवाद के जरिए इस विवाद का शांतिपूर्ण और सर्वसम्मत समाधान किस प्रकार निकाला जाता है।

  • दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मिली नई रफ्तार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 45 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का किया शुभारंभ

    दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मिली नई रफ्तार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 45 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का किया शुभारंभ

    नई दिल्ली ।राजधानी दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सरकार ने 45 नए आयुष्मान जन आरोग्य मंदिरों को जनता के लिए समर्पित किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शकूरपुर से इन स्वास्थ्य केंद्रों का शुभारंभ करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को उसके घर और कॉलोनी के नजदीक बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। नए केंद्रों के शुरू होने से राजधानी में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और क्षमता दोनों में विस्तार होगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को केवल बड़े अस्पतालों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्थानीय स्तर तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। इसी सोच के तहत आयुष्मान जन आरोग्य मंदिरों का लगातार विस्तार किया जा रहा है, ताकि लोगों को छोटी बीमारियों और नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े। उन्होंने विश्वास जताया कि इन केंद्रों के माध्यम से समय पर उपचार और बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    सरकार के अनुसार, राजधानी में वर्तमान समय में 415 से अधिक आयुष्मान जन आरोग्य मंदिर संचालित हो रहे हैं। आने वाले समय में इनकी संख्या बढ़ाकर 1,100 से अधिक करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस योजना के विस्तार के साथ दिल्ली के अधिक से अधिक क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं का मजबूत नेटवर्क विकसित करने की तैयारी की जा रही है।

    इन स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी सेवाओं के साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल, टीकाकरण, आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता तथा लगभग 80 प्रकार की निशुल्क जांच जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा सामान्य बीमारियों का उपचार, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए आवश्यक परामर्श भी दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर ऐसी सुविधाएं उपलब्ध होने से बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव भी कम होगा।

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर केवल उपचार केंद्र नहीं होंगे, बल्कि बीमारी की रोकथाम, स्वास्थ्य जागरूकता और शुरुआती स्तर पर रोगों की पहचान के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने बताया कि इन केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को समय पर चिकित्सा सलाह और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे गंभीर बीमारियों की संभावना को शुरुआती स्तर पर ही कम किया जा सके।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक स्थापित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में बड़ी संख्या में अर्बन सब हेल्थ सेंटर और अर्बन प्राइमरी हेल्थ सेंटर शामिल हैं। इन केंद्रों का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को प्रत्येक मोहल्ले और कॉलोनी तक पहुंचाना है, ताकि लोगों को रोजमर्रा की स्वास्थ्य जरूरतों के लिए दूरस्थ अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े। इससे बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।

    सरकार का कहना है कि दिल्ली में आधुनिक, समावेशी और नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने के लिए लगातार बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जा रहा है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का नेटवर्क इसी व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुलभ और भरोसेमंद बनाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इन केंद्रों का विस्तार राजधानी की प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती देगा और लोगों को उनके घर के आसपास ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

  • पूर्वी यूरोप से रिश्तों को नई मजबूती देने निकलेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, तीन देशों के ऐतिहासिक दौरे में व्यापार, निवेश और सहयोग पर रहेगा विशेष जोर

    पूर्वी यूरोप से रिश्तों को नई मजबूती देने निकलेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, तीन देशों के ऐतिहासिक दौरे में व्यापार, निवेश और सहयोग पर रहेगा विशेष जोर

    नई दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 19 से 25 जुलाई 2026 तक मोल्दोवा, उत्तरी मैसेडोनिया और रोमानिया के महत्वपूर्ण राजकीय दौरे पर जाएंगी। यह यात्रा भारत की पूर्वी यूरोप के देशों के साथ बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता और बहुआयामी सहयोग को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इस दौरान राष्ट्रपति विभिन्न देशों के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगी और राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक तथा सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा करेंगी।

    राष्ट्रपति अपने दौरे की शुरुआत 20 जुलाई को मोल्दोवा से करेंगी। यह किसी भारतीय राष्ट्रपति की मोल्दोवा की पहली आधिकारिक यात्रा होगी, जिससे दोनों देशों के संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने की उम्मीद है। यात्रा के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मोल्दोवा की राष्ट्रपति माइया सैंडू के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगी। इसके अलावा वह वहां की संसद के अध्यक्ष इगोर ग्रोसु से मुलाकात करेंगी और भारत-मोल्दोवा संसदीय मैत्री समूह के सदस्यों से भी संवाद करेंगी। राष्ट्रपति बिजनेस फोरम को संबोधित करने के साथ भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगी।

    भारत और मोल्दोवा के बीच कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, औषधि उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। सरकार का मानना है कि यह यात्रा इन क्षेत्रों में नए समझौतों और व्यावहारिक सहयोग का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। साथ ही दोनों देशों के बीच आर्थिक और निवेश संबंधों को भी नई मजबूती मिलने की संभावना है।

    इसके बाद राष्ट्रपति 21 और 22 जुलाई को उत्तरी मैसेडोनिया की यात्रा करेंगी। यह भी किसी भारतीय राष्ट्रपति का पहला आधिकारिक दौरा होगा। इस दौरान वह राष्ट्रपति गोरडाना सिलजानोव्स्का-दावकोवा के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री ह्रिस्टिजान मिकोस्की तथा वहां की संसद के शीर्ष नेतृत्व से भी उनकी मुलाकात निर्धारित है। राष्ट्रपति उत्तरी मैसेडोनिया की संसद को संबोधित करेंगी और भारत-उत्तरी मैसेडोनिया बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगी।

    दोनों देशों के बीच कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी तथा आईटी आधारित सेवाओं में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दोनों पक्ष आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और निवेश के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए भी आपसी सहयोग मजबूत करने पर विचार करेंगे।

    दौरे के अंतिम चरण में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 से 25 जुलाई तक रोमानिया की यात्रा करेंगी। तीन दशक से अधिक समय बाद किसी भारतीय राष्ट्रपति का यह पहला आधिकारिक दौरा होगा। इस दौरान वह रोमानिया के राष्ट्रपति निकुशोर डैन, अंतरिम प्रधानमंत्री इली बोलोजान, सीनेट के अध्यक्ष, चैंबर ऑफ डेप्युटीज के अध्यक्ष और भारत-रोमानिया संसदीय मैत्री समूह के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगी। राष्ट्रपति भारत-रोमानिया बिजनेस फोरम को संबोधित करने के साथ वहां रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी संवाद करेंगी।

    रोमानिया को यूरोपीय संघ में भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, शिक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते से भविष्य में आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिलने की संभावना भी जताई जा रही है। राष्ट्रपति का यह तीन देशों का राजकीय दौरा भारत की सक्रिय कूटनीति, पूर्वी यूरोप के साथ गहरे होते संबंधों और वैश्विक स्तर पर रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • 'सेमिकॉन 2.0' से भारत के टेक सेक्टर को नई रफ्तार, अगले पांच वर्षों में 2 लाख तक रोजगार और वैश्विक चिप हब बनने की मजबूत उम्मीद

    'सेमिकॉन 2.0' से भारत के टेक सेक्टर को नई रफ्तार, अगले पांच वर्षों में 2 लाख तक रोजगार और वैश्विक चिप हब बनने की मजबूत उम्मीद

    नई दिल्ली । भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग को नई दिशा देने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘सेमिकॉन 2.0’ योजना को उद्योग जगत ने रोजगार, निवेश और तकनीकी विकास के लिहाज से एक महत्वपूर्ण पहल बताया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस योजना के प्रभाव से अगले पांच वर्षों में देश में 1.5 लाख से 2 लाख तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके साथ ही भारत केवल इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली तक सीमित न रहकर वैश्विक चिप डिजाइन, इंजीनियरिंग और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर सकता है।

    उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि सेमिकॉन 2.0 का दायरा केवल सेमीकंडक्टर निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा। इसके माध्यम से चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर वेरिफिकेशन, एम्बेडेड सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उत्पादन, एडवांस्ड पैकेजिंग और आधुनिक सप्लाई चेन जैसी उच्च तकनीक वाली गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे देश में एक व्यापक और आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

    हाल ही में केंद्र सरकार ने 1.27 लाख करोड़ रुपये के बजट परिव्यय के साथ सेमिकॉन 2.0 योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन, निर्माण, अनुसंधान और प्रतिभा विकास को नई गति देना है, ताकि देश वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके। सरकार का मानना है कि इस पहल से घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता कम करने में भी सहायता मिलेगी।

    विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2030 तक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग से जुड़े अधिकांश पदों की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। नई तकनीकों के बढ़ते उपयोग के कारण चिप डिजाइन, रिसर्च, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और इंजीनियरिंग से जुड़े उच्च कौशल वाले पेशेवरों की मांग तेजी से बढ़ेगी। इससे तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और उद्योग को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होगा।

    उद्योग जगत का यह भी मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़े ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इससे देश को इंजीनियरिंग, अनुसंधान और नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित होने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही घरेलू कंपनियों को भी उच्च मूल्य वाले उत्पादों और बौद्धिक संपदा के विकास का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग मुख्य रूप से असेंबली आधारित उत्पादन पर केंद्रित रहा है, लेकिन सेमिकॉन 2.0 के माध्यम से देश चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, टेस्टिंग और एडवांस्ड पैकेजिंग जैसे उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति मजबूत कर सकेगा। इससे न केवल नई तकनीकों का विकास होगा, बल्कि दीर्घकाल में भारतीय उद्योग को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त भी मिलेगी।

    सरकार ने इस योजना के तहत चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग उपकरण एवं सामग्री, फैब्रिकेशन सुविधाएं, एटीएमपी और ओसैट यूनिट्स, अनुसंधान एवं विकास तथा प्रतिभा विकास जैसे छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने का लक्ष्य रखा है। अब तक 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उद्योग जगत का मानना है कि इन पहलों से भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में भरोसेमंद भागीदार के रूप में अपनी स्थिति और अधिक मजबूत कर सकेगा।

  • बेंगलुरु एयरपोर्ट पर उड़ान से पहले सुरक्षा अलर्ट, इंडिगो विमान के शौचालय में मिला धमकी भरा नोट; एफआईआर दर्ज कर जांच तेज

    बेंगलुरु एयरपोर्ट पर उड़ान से पहले सुरक्षा अलर्ट, इंडिगो विमान के शौचालय में मिला धमकी भरा नोट; एफआईआर दर्ज कर जांच तेज

    नई दिल्ली । बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से अहमदाबाद के लिए रवाना होने वाली इंडिगो की एक उड़ान में बम की धमकी वाला हस्तलिखित नोट मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। उड़ान भरने से कुछ समय पहले विमान के शौचालय में मिले इस नोट ने एयरपोर्ट प्रशासन, एयरलाइन और सुरक्षा अधिकारियों को तुरंत सक्रिय कर दिया। घटना के बाद मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए और विमान को उड़ान भरने से पहले विस्तृत जांच के लिए रोक दिया गया।

    जानकारी के अनुसार यह घटना इंडिगो की फ्लाइट 6ई-6423 में हुई, जो शाम के समय अहमदाबाद के लिए निर्धारित थी। उड़ान से करीब 25 मिनट पहले विमान के आगे वाले शौचालय में एक हस्तलिखित पर्ची मिली, जिस पर बम होने की चेतावनी लिखी गई थी। नोट मिलने की सूचना मिलते ही चालक दल ने तत्काल एयरपोर्ट अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों को जानकारी दी, जिसके बाद विमान को अलग स्थान पर ले जाकर सुरक्षा जांच शुरू की गई।

    सुरक्षा एजेंसियों ने विमान के प्रत्येक हिस्से की गहन तलाशी ली। इस दौरान यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया। विमान के अंदर मौजूद सामान और अन्य हिस्सों की सावधानीपूर्वक जांच की गई, लेकिन किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि बम की धमकी झूठी थी और विमान में कोई सुरक्षा जोखिम मौजूद नहीं था।

    घटना के बाद एयरलाइन ने एयरपोर्ट पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि इस तरह की झूठी धमकी से उड़ान संचालन प्रभावित हुआ और यात्रियों के साथ-साथ चालक दल की सुरक्षा को लेकर अनावश्यक चिंता उत्पन्न हुई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि विमान के शौचालय में यह नोट किसने रखा और इसके पीछे उसका उद्देश्य क्या था। अधिकारियों का मानना है कि विमान में मौजूद यात्रियों, चालक दल और एयरपोर्ट परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच के साथ अन्य तकनीकी साक्ष्यों का भी विश्लेषण किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित लोगों से पूछताछ भी की जाएगी ताकि घटना की पूरी सच्चाई सामने आ सके।

    यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब हाल के महीनों में देश के विभिन्न हवाई अड्डों और उड़ानों में बम की झूठी धमकियों के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं। पिछले महीने भी लखनऊ से दिल्ली जाने वाली इंडिगो की एक उड़ान में शौचालय के भीतर टिश्यू पेपर पर बम से संबंधित संदेश लिखा मिला था। उस समय भी सुरक्षा एजेंसियों ने विमान को उड़ान से पहले रोककर पूरी जांच की थी और अंततः कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली थी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की झूठी धमकियां केवल सुरक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव ही नहीं डालतीं, बल्कि उड़ानों के संचालन, यात्रियों की यात्रा और एयरपोर्ट की सामान्य गतिविधियों को भी प्रभावित करती हैं। इसलिए ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए हर सूचना की पूरी जांच की जाती है। फिलहाल बेंगलुरु की इस घटना में पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और नोट रखने वाले व्यक्ति की पहचान करने के प्रयास जारी हैं। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एयरपोर्ट और एयरलाइन की ओर से सभी आवश्यक सुरक्षा उपायों का पालन किया गया।

  • पीएम मोदी की उड़ान योजना का बड़ा विस्तार, दमन को मिली दिल्ली के लिए पहली सीधी हवाई सेवा, पर्यटन, उद्योग और निवेश को मिलेगी नई रफ्तार

    पीएम मोदी की उड़ान योजना का बड़ा विस्तार, दमन को मिली दिल्ली के लिए पहली सीधी हवाई सेवा, पर्यटन, उद्योग और निवेश को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना के तहत दमन को पहली बार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से जोड़ने वाली सीधी हवाई सेवा की शुरुआत हो गई है। इस नई सेवा के शुरू होने के साथ ही केंद्र शासित प्रदेश दमन देश के प्रमुख शहरों से बेहतर हवाई संपर्क वाले क्षेत्रों में शामिल हो गया है। सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल यात्रियों की आवाजाही आसान होगी, बल्कि पर्यटन, व्यापार, उद्योग और निवेश गतिविधियों को भी उल्लेखनीय बढ़ावा मिलेगा। यह कदम क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देने की सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    नई हवाई सेवा का शुभारंभ दमन स्थित नवनिर्मित नमो एयरपोर्ट से किया गया, जहां से दिल्ली के लिए पहली नियमित उड़ान रवाना हुई। इस अवसर पर केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि उड़ान योजना का उद्देश्य छोटे शहरों और दूरस्थ क्षेत्रों को देश के प्रमुख आर्थिक और प्रशासनिक केंद्रों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि दमन को पहली बार राजधानी से सीधा हवाई संपर्क मिलने से यहां के नागरिकों, व्यापारियों और पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलेगी।

    नई उड़ान सेवा शुरू होने के बाद दमन और दिल्ली के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। सड़क मार्ग से जहां यह सफर पहले लगभग आठ से दस घंटे में पूरा होता था, वहीं अब हवाई यात्रा के माध्यम से यह दूरी करीब ढाई घंटे में तय की जा सकेगी। इससे समय की बचत के साथ व्यावसायिक यात्राएं भी अधिक सुविधाजनक होंगी और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है।

    दमन का नमो एयरपोर्ट आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित दोहरे उपयोग वाला हवाई अड्डा है, जिसे भारतीय तटरक्षक बल के एयर स्टेशन परिसर में विकसित किया गया है। लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में निर्मित इस एयरपोर्ट का आधुनिक टर्मिनल प्रतिदिन कई एटीआर विमानों के संचालन में सक्षम है। इसकी वार्षिक यात्री क्षमता लगभग 3.67 लाख यात्रियों की रखी गई है, जिससे भविष्य में बढ़ती हवाई मांग को भी आसानी से पूरा किया जा सकेगा।

    सरकार का मानना है कि दमन, दीव, दादरा और नगर हवेली औद्योगिक दृष्टि से तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र हैं। यहां हजारों उद्योग संचालित हो रहे हैं, जबकि आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में कारोबारी गतिविधियां जुड़ी हुई हैं। बेहतर हवाई संपर्क उपलब्ध होने से निवेशकों, उद्योगपतियों और उद्यमियों की आवाजाही आसान होगी, जिससे नए निवेश, औद्योगिक विस्तार और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होने की उम्मीद है।

    पर्यटन के क्षेत्र में भी इस नई सेवा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समुद्री तटों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध दमन हर वर्ष लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है। अब दिल्ली से सीधी हवाई सेवा उपलब्ध होने के बाद पर्यटकों की संख्या में और बढ़ोतरी की संभावना है, जिसका सीधा लाभ स्थानीय होटल, परिवहन, रेस्तरां और अन्य पर्यटन आधारित व्यवसायों को मिलेगा।

    केंद्र सरकार भविष्य में नमो एयरपोर्ट के रनवे का विस्तार करने की योजना पर भी काम कर रही है ताकि यहां से बड़े यात्री विमानों का संचालन संभव हो सके। इसके बाद मुंबई, सूरत, अहमदाबाद और पटना सहित अन्य प्रमुख शहरों के लिए भी सीधी उड़ानें शुरू करने की तैयारी की जाएगी। साथ ही सरकार ने उड़ान योजना को अगले दस वर्षों के लिए विस्तारित करते हुए देशभर में नए एयरपोर्ट और हेलीपैड विकसित करने का लक्ष्य तय किया है। इससे क्षेत्रीय हवाई संपर्क को और मजबूत करने के साथ देश के छोटे शहरों को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होने की उम्मीद है।

  • गुजरात में कुपोषण के खिलाफ बड़ा कदम, राज्य के सभी आदिजाति आईसीडीएस ब्लॉकों तक पहुंची दूध संजीवनी योजना..

    गुजरात में कुपोषण के खिलाफ बड़ा कदम, राज्य के सभी आदिजाति आईसीडीएस ब्लॉकों तक पहुंची दूध संजीवनी योजना..


    नई दिल्ली ।
    गुजरात सरकार ने आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में कुपोषण को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ‘दूध संजीवनी योजना’ का विस्तार राज्य के सभी आदिजाति आईसीडीएस ब्लॉकों तक कर दिया है। इस फैसले के बाद अब प्रदेश के उन सभी क्षेत्रों में भी योजना का लाभ मिलेगा, जहां अब तक इसका संचालन नहीं हो रहा था। सरकार का उद्देश्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं तक अधिक पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण पोषण पहुंचाकर कुपोषण की समस्या को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना है।

    महिला एवं बाल विकास विभाग की मंजूरी के बाद शेष 53 आईसीडीएस ब्लॉकों को योजना में शामिल कर लिया गया है। इसके साथ ही पहली बार चयनित जिलों में अधिक फैट वाले फोर्टिफाइड दूध के पायलट प्रोजेक्ट को भी स्वीकृति दी गई है। इस पहल के माध्यम से लाभार्थियों को पहले की तुलना में अधिक पोषणयुक्त दूध उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे बच्चों के शारीरिक विकास और माताओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

    दूध संजीवनी योजना की शुरुआत वर्ष 2009 में सीमित स्तर पर छह आदिजाति जिलों में की गई थी। योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को 200 मिलीलीटर फोर्टिफाइड फ्लेवर्ड दूध उपलब्ध कराया जाता है। योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद इसका दायरा लगातार बढ़ाया गया और कुछ वर्षों के भीतर इसे राज्य के कई अन्य आदिवासी बहुल जिलों तक विस्तारित किया गया।

    योजना के विस्तार के दौरान सहकारी डेयरी संस्थाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। विभिन्न डेयरियों ने फोर्टिफाइड दूध के उत्पादन और आपूर्ति की जिम्मेदारी संभालकर इस व्यवस्था को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाया। इससे लाभार्थियों तक नियमित रूप से गुणवत्तापूर्ण दूध पहुंचाने में सुविधा मिली और योजना का संचालन अधिक मजबूत हुआ।

    सरकार ने अब योजना की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए दूध में फैट की मात्रा बढ़ाने का भी निर्णय लिया है। अब तक लाभार्थियों को कम फैट वाला फोर्टिफाइड दूध दिया जाता था, लेकिन पायलट परियोजना के तहत चयनित जिलों में तीन प्रतिशत और साढ़े चार प्रतिशत फैट वाला दूध उपलब्ध कराया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार अधिक फैट वाला दूध बच्चों की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति, शारीरिक विकास तथा पोषण स्तर को बेहतर बनाने में सहायक साबित हो सकता है।

    योजना के विस्तार और हाई-फैट पायलट प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार ने अलग-अलग वित्तीय प्रावधान भी किए हैं। पूरा खर्च राज्य सरकार स्वयं वहन करेगी, जिससे योजना के प्रभावी संचालन में किसी प्रकार की वित्तीय बाधा न आए। इसके साथ ही सभी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था, सरकारी खरीद प्रणाली, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, सोशल ऑडिट और थर्ड पार्टी सत्यापन जैसी व्यवस्थाओं को भी लागू किया जाएगा।

    सरकार का मानना है कि यह पहल केवल दूध वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण सुरक्षा में दीर्घकालिक निवेश है। योजना का राज्य के सभी आदिजाति आईसीडीएस ब्लॉकों तक विस्तार होने से हजारों नए बच्चे और माताएं इसके दायरे में आएंगे। इससे आदिवासी क्षेत्रों में पोषण संबंधी असमानताओं को कम करने, कुपोषण के खिलाफ अभियान को गति देने और महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य को मजबूत आधार प्रदान करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलने की उम्मीद है।

  • वैज्ञानिकों के इस्तीफे से गगनयान पर नहीं पड़ेगा कोई असर, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने निजीकरण और ब्रेन-ड्रेन की अटकलों को किया खारिज

    वैज्ञानिकों के इस्तीफे से गगनयान पर नहीं पड़ेगा कोई असर, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने निजीकरण और ब्रेन-ड्रेन की अटकलों को किया खारिज

    नई दिल्ली । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) से वरिष्ठ वैज्ञानिकों के लगातार हो रहे इस्तीफों और कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में कथित डेटा लीक की खबरों पर केंद्र सरकार ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने देश के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रमों, विशेषकर गगनयान मिशन के भविष्य को लेकर उठ रहे सभी सवालों और चिंताओं को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने साफ किया है कि किसी भी शीर्ष वैज्ञानिक या प्रशासनिक बदलाव का असर इसरो की कार्यप्रणाली और देश के अंतरिक्ष अभियानों की निरंतरता पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा।

    अंतरिक्ष विभाग द्वारा हाल ही में जारी एक कड़े निर्देश के बाद यह विवाद सामने आया था, जिसमें गगनयान और अन्य संवेदनशील राष्ट्रीय मिशनों से जुड़े ‘ग्रुप ए’ के वैज्ञानिकों के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) और इस्तीफे के नियमों को पहले से अधिक सख्त कर दिया गया है। इस प्रशासनिक सख्ती के बीच यह रिपोर्ट आई थी कि लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (एलवीएम-3) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर विक्टर जोसेफ और चंद्रयान-3 मिशन से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिक आदित्य रल्लापल्ली सहित विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर और यूआर राव सैटेलाइट सेंटर के कई वैज्ञानिकों ने निजी क्षेत्र का रुख करने के लिए अपने इस्तीफे सौंपे हैं।

    केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इन अटकलों को शांत करते हुए इसरो प्रमुख वी. नारायणन के आधिकारिक बयान का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी की संरचना ऐसी है कि जितने पेशेवर बाहर जाएंगे, उतने ही नए प्रतिभावान लोग प्रणाली के भीतर शामिल होंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि पूर्व इसरो अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने जनवरी 2025 में अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद चेन्नई के एक निजी स्पेस स्टार्टअप में ऑब्जर्वर की भूमिका स्वीकार कर ली है, लेकिन उनके जाने से गगनयान परियोजना की रफ्तार धीमी नहीं हुई है। केंद्र सरकार द्वारा साल 2023 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद से वैज्ञानिकों के लिए निजी क्षेत्र में बेहतर अवसर और वेतन की राहें खुली हैं।

    देश से होने वाले प्रतिभा पलायन (ब्रेन-ड्रेन) के विषय पर बात करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि बेहतर सामाजिक सुरक्षा, शोध के नए अवसर, करों में राहत और सुलभ प्रवास नीतियों के कारण विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और चिकित्सा क्षेत्रों के विशेषज्ञ दूसरे देशों या निजी उद्योगों की ओर आकर्षित होते हैं। इसके बावजूद इसरो की अपनी एक अनूठी और सुदृढ़ कार्य संस्कृति है, जहां सेवानिवृत्त हो चुके वैज्ञानिक भी मार्गदर्शक और सलाहकार के रूप में देश की महत्वपूर्ण परियोजनाओं के साथ लगातार जुड़े रहते हैं। गगनयान के तहत मानव को सुरक्षित अंतरिक्ष में भेजने और वापस लाने के लिए आवश्यक क्रू मॉड्यूल की तकनीक पूरी तरह से तैयार की जा चुकी है।

    इसके साथ ही, तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट (केकेएनपीपी) में संवेदनशील डेटा की चोरी से जुड़ी रिपोर्ट्स पर भी सरकार ने स्थिति साफ की है। केंद्रीय मंत्री ने न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के बयानों की पुष्टि करते हुए कहा कि संयंत्र की किसी भी सामरिक या रणनीतिक डेटा प्रणाली में कोई सेंधमारी नहीं हुई है। उन्होंने इस विषय पर अनावश्यक विवाद पैदा करने की कोशिशों की निंदा की। वर्तमान में इस मामले की तकनीकी जांच एनपीसीआईएल और भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (सर्ट-इन) द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है, ताकि सुरक्षा मानकों को और अभेद्य बनाया जा सके।