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  • सत्ता परिवर्तन के बाद बड़ा कदम: हाई-प्रोफाइल नेताओं की सुरक्षा में कमी, ममता बनर्जी की सुरक्षा बरकरार

    सत्ता परिवर्तन के बाद बड़ा कदम: हाई-प्रोफाइल नेताओं की सुरक्षा में कमी, ममता बनर्जी की सुरक्षा बरकरार

    नई दिल्ली ।
    पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया है, जिसने राज्य की वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से नए सिरे से परिभाषित कर दिया है। नई सरकार द्वारा की गई विस्तृत समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया कि अब सुरक्षा व्यवस्था को आवश्यकता और वास्तविक खतरे के आकलन के आधार पर पुनर्गठित किया जाएगा। इसी प्रक्रिया के तहत कई हाई-प्रोफाइल नेताओं, पूर्व मंत्रियों और कुछ पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण कटौती की गई है। इस बदलाव ने राजनीतिक हलकों में हलचल जरूर पैदा कर दी है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि यह कदम पूरी तरह से सुरक्षा मानकों और संसाधनों के उचित उपयोग को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

    प्रशासनिक समीक्षा के बाद सबसे बड़ा असर तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा पर देखने को मिला है, जिनकी पहले उपलब्ध कराई गई उच्च स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था को कम कर दिया गया है। उनके साथ-साथ कई अन्य सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की सुरक्षा में भी संशोधन किया गया है। पहले जहां इन नेताओं के आवासों और कार्यालयों के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहता था, अब उसे काफी हद तक घटा दिया गया है या मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार सीमित कर दिया गया है। इसके अलावा कुछ नेताओं को मिलने वाली विशेष सुविधाएं, जैसे अतिरिक्त सुरक्षा वाहन और पायलट व्यवस्था, भी अब वापस ले ली गई हैं।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार यह पूरा कदम एक व्यापक सुरक्षा समीक्षा का हिस्सा है, जिसमें यह आकलन किया गया कि किन व्यक्तियों को वास्तव में उच्च स्तर की सुरक्षा की आवश्यकता है और किन मामलों में सामान्य सुरक्षा पर्याप्त है। इसी समीक्षा के आधार पर यह निर्णय लिया गया कि कई पूर्व मंत्रियों और ऐसे नेताओं, जो अब सक्रिय पदों पर नहीं हैं, उनकी अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है। इसी कारण कई जगहों पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी कम कर दी गई है और उन्हें अन्य आवश्यक कार्यों में लगाया जा रहा है।

    हालांकि इस पूरे बदलाव के बीच राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उनकी सुरक्षा को लेकर जो मौजूदा प्रोटोकॉल है, वह पहले की तरह पूरी तरह प्रभावी रहेगा। यह निर्णय उनकी सुरक्षा से जुड़े खतरे के आकलन और वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखकर लिया गया है।

    सरकार का कहना है कि सुरक्षा बलों का उपयोग केवल वीआईपी संरक्षण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे आम जनता की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को मजबूत करने में भी लगाया जाना चाहिए। इसी दृष्टिकोण के तहत अतिरिक्त सुरक्षा बलों की पुनर्नियुक्ति की जा रही है ताकि राज्य में कानून व्यवस्था और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित की जा सके। इस फैसले के बाद जहां एक ओर प्रशासन इसे संसाधनों के बेहतर उपयोग के रूप में देख रहा है, वहीं राजनीतिक स्तर पर इसे लेकर चर्चाओं का दौर भी तेज हो गया है।

    कुल मिलाकर यह बदलाव राज्य की सुरक्षा नीति में एक बड़े पुनर्गठन की ओर संकेत करता है, जहां सुरक्षा को पद या राजनीतिक स्थिति से नहीं बल्कि वास्तविक जरूरत और खतरे के आधार पर तय किया जा रहा है।

  • केरल में सत्ता परिवर्तन: वी.डी. सतीशन बने 13वें मुख्यमंत्री, 21 सदस्यीय मंत्रिमंडल ने ली शपथ

    केरल में सत्ता परिवर्तन: वी.डी. सतीशन बने 13वें मुख्यमंत्री, 21 सदस्यीय मंत्रिमंडल ने ली शपथ

    नई दिल्ली ।
    केरल की राजनीति में एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय तब जुड़ गया जब वी.डी. सतीशन ने राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। यह शपथ ग्रहण समारोह राजधानी तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में राजनीतिक प्रतिनिधि, कार्यकर्ता और विभिन्न वर्गों के लोग मौजूद रहे। राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की निर्णायक जीत के बाद यह सत्ता परिवर्तन हुआ है, जिसने प्रदेश की राजनीतिक दिशा को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।

    शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल ने वी.डी. सतीशन को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। इसके साथ ही एक व्यापक और संतुलित मंत्रिमंडल का भी गठन किया गया, जिसमें कुल 20 मंत्रियों ने भी एक साथ पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस तरह राज्य में मुख्यमंत्री सहित 21 सदस्यीय नई सरकार ने आधिकारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया है। यह कैबिनेट अपने गठन के तरीके को लेकर खास चर्चा में है, क्योंकि इसमें अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवाओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं।

    नई सरकार के गठन में सामाजिक संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को विशेष प्राथमिकता दी गई है। मंत्रिमंडल तैयार करते समय यह सुनिश्चित किया गया कि राज्य के हर हिस्से और विभिन्न सामाजिक वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिले। इससे न केवल राजनीतिक संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया गया है, बल्कि प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी इसे एक समावेशी मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

    शपथ ग्रहण समारोह को अत्यंत भव्य और सुव्यवस्थित रूप में आयोजित किया गया। सुबह से ही सेंट्रल स्टेडियम में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता और देश के कई प्रमुख राजनेता भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की मौजूदगी ने समारोह की राजनीतिक अहमियत को और अधिक बढ़ा दिया। मंच पर विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों और गठबंधन सहयोगियों की उपस्थिति ने इसे एक व्यापक राजनीतिक आयोजन का रूप दिया।

    शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने राज्य की जनता के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि उनकी प्राथमिकता विकास, स्थिरता और जनकल्याण होगी। उन्होंने नई कैबिनेट को एक संतुलित और विकासोन्मुख टीम बताया, जो आने वाले समय में राज्य की प्रगति को नई दिशा देने का कार्य करेगी।

    नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलकों में भी व्यापक चर्चा देखने को मिल रही है। जहां एक ओर समर्थक इसे जनादेश की जीत और विकास की नई शुरुआत बता रहे हैं, वहीं राजनीतिक विश्लेषक इसे राज्य की प्रशासनिक दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देख रहे हैं। कुल मिलाकर यह शपथ ग्रहण समारोह केवल सत्ता परिवर्तन का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि केरल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत के रूप में स्थापित हो गया है।

  • दिल्ली–गोवा में ED का बड़ा एक्शन, AAP नेता दीपक सिंगला और फाइनेंस ग्रुप के ठिकानों पर छापेमारी

    दिल्ली–गोवा में ED का बड़ा एक्शन, AAP नेता दीपक सिंगला और फाइनेंस ग्रुप के ठिकानों पर छापेमारी


    नई दिल्ली ।  दिल्ली और गोवा में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आम आदमी पार्टी के नेता दीपक सिंगला और बाबाजी फाइनेंस ग्रुप से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों की जांच के तहत की गई है। ईडी की टीम ने दोनों राज्यों में एक साथ कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया, जिससे राजनीतिक और कारोबारी हलकों में हलचल मच गई है।

    जानकारी के अनुसार, ईडी की जांच का मुख्य फोकस संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और बैंकिंग गड़बड़ियों पर है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वित्तीय लेनदेन के दौरान नियमों का किस तरह उल्लंघन किया गया और कथित तौर पर जुटाई गई रकम का इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया गया। छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

    दूसरी ओर, बाबाजी फाइनेंस ग्रुप से जुड़े मामलों में भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस ग्रुप पर लोगों से भारी मात्रा में धन एकत्र करने और बाद में उसे विभिन्न जगहों पर ट्रांसफर करने का संदेह है। अनुमान है कि यह राशि करीब 180 करोड़ रुपये तक हो सकती है। ईडी अब इस पूरे नेटवर्क और पैसों के प्रवाह की गहन जांच कर रही है।

    इस कार्रवाई ने राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा तेज कर दी है, क्योंकि इससे पहले भी इसी तरह के मामलों में कुछ अन्य नेताओं और पूर्व सांसदों पर ईडी की जांच हो चुकी है। इसी क्रम में पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल से जुड़े मामलों में भी पहले छापेमारी की गई थी, जिसमें फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट के कथित उल्लंघन और फंड मैनेजमेंट में गड़बड़ी की जांच शामिल थी।

    ईडी की इस ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर राजनीतिक और आर्थिक जांच एजेंसियों की भूमिका को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

  • . विद्यार्थी केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के असली वाहक हैं: न्यायमूर्ति सौमित्र सैकिया का प्रेरक संदेश

    . विद्यार्थी केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के असली वाहक हैं: न्यायमूर्ति सौमित्र सैकिया का प्रेरक संदेश

    नई दिल्ली । गुवाहाटी स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के परिसर में आयोजित दीक्षांत समारोह में गुवाहाटी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सौमित्र सैकिया ने विद्यार्थियों को प्रेरक संदेश देते हुए कहा कि छात्र केवल डिग्री प्राप्त करने वाले व्यक्ति नहीं होते, बल्कि वे समाज में वास्तविक परिवर्तन लाने की क्षमता रखने वाले महत्वपूर्ण वाहक होते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल नौकरी या उपाधि प्राप्त करना नहीं है, बल्कि समाज की संरचना को बेहतर दिशा देना भी है।

    न्यायमूर्ति सैकिया ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि एक नैतिक अनुबंध है जो देश को एकता और न्याय के सूत्र में बांधता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने ज्ञान को केवल पुस्तकीय सीमाओं तक सीमित न रखें, बल्कि उसे समाज के वास्तविक जीवन से जोड़कर आगे बढ़ाएं। उनके अनुसार, संवैधानिक मूल्यों और स्थानीय ज्ञान के आधार पर किया गया नवाचार ही एक मजबूत और समावेशी समाज की नींव रख सकता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थित यह संस्थान शिक्षा और समाज के बीच सेतु का काम कर रहा है और इसका ऐतिहासिक महत्व काफी व्यापक है। उनके अनुसार, ऐसे शैक्षणिक संस्थान केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे सामाजिक सोच और विकास की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    समारोह में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी शिक्षा को समाज और समुदायों से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य तभी पूरा होता है जब वह वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान में उपयोगी साबित हो। इस अवसर पर यह भी बताया गया कि इस वर्ष कई विद्यार्थियों को शोध और स्नातक उपाधियाँ प्रदान की गईं, साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सम्मानित भी किया गया।

  • जालंधर ब्लास्ट की जांच में नया मोड़, दूर से मोबाइल सिग्नल से ट्रिगर किया गया IED हमला

    जालंधर ब्लास्ट की जांच में नया मोड़, दूर से मोबाइल सिग्नल से ट्रिगर किया गया IED हमला

    नई दिल्ली ।  जालंधर में बीएसएफ मुख्यालय के बाहर हुए धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले में अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क से जुड़े नए और गंभीर खुलासे सामने आ रहे हैं। शुरुआती जांच में यह संकेत मिला है कि इस विस्फोट के पीछे पाकिस्तान में बैठे एक आतंकी हैंडलर का हाथ हो सकता है, जिसने मोबाइल सिम आधारित आधुनिक तकनीक के जरिए इस घटना को अंजाम देने की योजना बनाई। इस पूरे मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता को और बढ़ा दिया है, क्योंकि यह हमला पारंपरिक तरीकों से हटकर अत्याधुनिक रिमोट ट्रिगरिंग सिस्टम के इस्तेमाल की ओर इशारा करता है।

    जांच रिपोर्ट के अनुसार, विस्फोटक उपकरण को पहले से ही घटनास्थल के पास प्लांट किया गया था और उसमें एक सिम कार्ड को विशेष डिवाइस के साथ जोड़ा गया था। इसके बाद यह सिम नंबर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर को भेजा गया, जिसने कॉल या मैसेज के जरिए डिवाइस को सक्रिय किया। जैसे ही उस सिग्नल को सिस्टम ने रिसीव किया, एक इलेक्ट्रॉनिक रिले सर्किट सक्रिय हुआ और डेटोनेटर के जरिए विस्फोट हो गया। इस पूरी प्रक्रिया में किसी व्यक्ति की मौके पर मौजूदगी या किसी तार से कनेक्शन की आवश्यकता नहीं होती, जिससे इस तकनीक को बेहद खतरनाक माना जा रहा है।

    सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक आतंकवाद के नए डिजिटल स्वरूप को दर्शाती है, जिसमें साधारण मोबाइल नेटवर्क का उपयोग विस्फोटक को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। इसमें जीएसएम मॉड्यूल, सिम कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट का उपयोग कर हजारों किलोमीटर दूर बैठे व्यक्ति द्वारा भी विस्फोट को ट्रिगर किया जा सकता है। यह तरीका न केवल आसान है बल्कि इसे ट्रेस करना भी पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होता है।

    इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल नेटवर्क डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स की गहन जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि विस्फोटक सामग्री को मौके तक कैसे पहुंचाया गया और इसमें किन स्थानीय सहयोगियों की भूमिका रही।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस तरह की घटनाएं सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकी नेटवर्क की बदलती रणनीति को दर्शाती हैं, जहां अब तकनीक का इस्तेमाल हथियार के रूप में किया जा रहा है। यह हमला न केवल सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि आने वाले समय में आतंकवाद तकनीकी रूप से और अधिक उन्नत रूप ले सकता है।

    फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस हमले के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

  • अहमदाबाद में विकास की नई उड़ान: अमित शाह बोले- गुजरात को AI, सेमीकंडक्टर और सर्विस सेक्टर में बनाएंगे अग्रणी राज्य

    अहमदाबाद में विकास की नई उड़ान: अमित शाह बोले- गुजरात को AI, सेमीकंडक्टर और सर्विस सेक्टर में बनाएंगे अग्रणी राज्य


    नई दिल्ली ।  अहमदाबाद में विकास और तकनीक की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण किया, जिनमें ‘मिलियन माइंड्स टेक पार्क’ और ‘गणेश रियल एस्टेट मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट’ शामिल हैं। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि गुजरात अब केवल औद्योगिक उत्पादन का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में यह राज्य तकनीक, सेवा क्षेत्र और नवाचार की वैश्विक पहचान बनने की ओर अग्रसर है। उनके अनुसार राज्य की विकास यात्रा अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है, जहां डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में तेजी से विस्तार होगा।

    लोकार्पण कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि गुजरात ने हमेशा देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अब यही राज्य तकनीकी क्रांति का नेतृत्व भी करेगा। ‘मिलियन माइंड्स टेक पार्क’ को उन्होंने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई एक ऐसी परियोजना बताया, जो हजारों युवाओं को उच्च कौशल आधारित रोजगार उपलब्ध कराएगी। इस टेक पार्क में आधुनिक तकनीकी कंपनियों, अनुसंधान केंद्रों और स्टार्टअप्स के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा, जिससे नवाचार और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

    इसके साथ ही ‘गणेश रियल एस्टेट मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट’ को शहरी विकास और आधुनिक रियल एस्टेट प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया। यह संस्थान आधुनिक शहरी नियोजन, तकनीक आधारित शिक्षा और वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण देकर कुशल मानव संसाधन तैयार करेगा। इससे न केवल रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और पेशेवरता बढ़ेगी, बल्कि शहरी विकास योजनाओं को भी नई दिशा मिलेगी।

    कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि अहमदाबाद-गिफ्ट सिटी-गांधीनगर कॉरिडोर में विकसित हो रही यह टेक सिटी हजारों करोड़ रुपये के निवेश और लाखों रोजगार के अवसर पैदा करने की क्षमता रखती है। इस परियोजना के तहत ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस, आवासीय सुविधाएं और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है, जो भारत को वैश्विक टेक्नोलॉजी और वित्तीय सेवाओं के नक्शे पर और मजबूत स्थिति में लाएगा।

    अमित शाह ने यह भी कहा कि गुजरात पहले से ही मैन्युफैक्चरिंग, पोर्ट डेवलपमेंट, ग्रीन एनर्जी और फार्मा सेक्टर में अग्रणी रहा है, और अब यह राज्य आईटी और नॉलेज-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में गुजरात देश का प्रमुख टेक्नोलॉजी और सर्विस सेक्टर हब बनकर उभरेगा।

    कार्यक्रम में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य में विकसित हो रही सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और गिफ्ट सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स भारत को वैश्विक निवेश का आकर्षण केंद्र बना रहे हैं। इस दौरान यह संदेश भी सामने आया कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में गुजरात की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी और यह राज्य देश की विकास यात्रा का प्रमुख इंजन साबित होगा।

  • DU PG Admission 2026 शुरू, जानें आवेदन प्रक्रिया और जरूरी तारीखें

    DU PG Admission 2026 शुरू, जानें आवेदन प्रक्रिया और जरूरी तारीखें

    नई दिल्ली। देश की प्रतिष्ठित University of Delhi ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पोस्टग्रेजुएट कोर्सेज में दाखिले की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पीजी में एडमिशन लेने के इच्छुक छात्र अब कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम यानी CSAS पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस बार यूनिवर्सिटी ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के तहत एक वर्षीय और दो वर्षीय मास्टर डिग्री प्रोग्राम भी शुरू किए हैं, जिससे छात्रों को नए विकल्प मिलेंगे।

    7 जून तक भर सकेंगे फॉर्म
    दिल्ली यूनिवर्सिटी के अनुसार आवेदन प्रक्रिया 16 मई 2026 से शुरू हो चुकी है। छात्र 7 जून 2026 रात 11:59 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यूनिवर्सिटी ने छात्रों को सलाह दी है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।

    CUET PG स्कोर से होगा एडमिशन
    इस बार पीजी कोर्सेज में दाखिला केवल CUET PG 2026 स्कोर के आधार पर दिया जाएगा। यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है कि संबंधित कोर्स में एडमिशन के लिए छात्रों को उसी विषय में CUET PG परीक्षा देना जरूरी होगा। जो छात्र फिलहाल ग्रेजुएशन के तीसरे या चौथे वर्ष में पढ़ाई कर रहे हैं, वे भी आवेदन कर सकते हैं, लेकिन उन्हें पात्रता की सभी शर्तें पूरी करनी होंगी।

    DigiLocker फीचर से आसान होगी प्रक्रिया
    इस बार एडमिशन प्रक्रिया को ज्यादा आसान और डिजिटल बनाने के लिए DigiLocker/API Setu आधारित ऑटो-इंटीग्रेशन फीचर जोड़ा गया है। इसके जरिए छात्रों का नाम, जन्मतिथि, श्रेणी और CUET स्कोर जैसी जानकारी स्वतः पोर्टल पर अपडेट हो जाएगी। इससे दस्तावेज अपलोड करने में आसानी होगी और गलतियों की संभावना भी कम रहेगी।

    आवेदन शुल्क कितना है?
    यूनिवर्सिटी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार आवेदन शुल्क श्रेणी के अनुसार तय किया गया है-
    SC/ST/PwBD वर्ग : ₹100 प्रति प्रोग्राम
    UR/OBC-NCL/EWS वर्ग : ₹250 प्रति प्रोग्राम
    छात्र एक से अधिक कोर्स के लिए भी आवेदन कर सकते हैं, लेकिन प्रत्येक प्रोग्राम के लिए अलग शुल्क देना होगा।

    कौन-कौन से डॉक्यूमेंट होंगे जरूरी?
    आवेदन के दौरान छात्रों को कुछ जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे, जिनमें-
    CUET PG स्कोर कार्ड
    ग्रेजुएशन मार्कशीट
    पासपोर्ट साइज फोटो
    हस्ताक्षर
    कैटेगरी सर्टिफिकेट (यदि लागू हो)
    आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र

    छात्रों को दी गई खास सला
    दिल्ली यूनिवर्सिटी ने छात्रों से कहा है कि वे एडमिशन से जुड़ी हर अपडेट के लिए आधिकारिक CSAS पोर्टल नियमित रूप से चेक करते रहें। सोशल मीडिया पर कई छात्रों ने शुरुआती तकनीकी समस्याओं की जानकारी भी साझा की है। ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि आवेदन की अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय जल्द फॉर्म भरना बेहतर रहेगा।

    नए कोर्स और बढ़ते अवसर
    NEP के तहत शुरू किए गए नए मास्टर प्रोग्राम्स के चलते छात्रों को अब अधिक फ्लेक्सिबिलिटी और स्पेशलाइजेशन का मौका मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में दिल्ली यूनिवर्सिटी के ये नए कोर्स छात्रों के करियर को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएंगे।

  • 12वीं के बाद ऐसे बनें Architect, जानिए एंट्रेंस एग्जाम से लेकर सैलरी तक पूरी डिटेल

    12वीं के बाद ऐसे बनें Architect, जानिए एंट्रेंस एग्जाम से लेकर सैलरी तक पूरी डिटेल


    नई दिल्ली। अगर आप 12वीं के बाद ऐसा करियर चुनना चाहते हैं, जिसमें क्रिएटिविटी, टेक्नोलॉजी और शानदार कमाई तीनों का बेहतरीन कॉम्बिनेशन हो, तो आर्किटेक्चर आपके लिए शानदार विकल्प साबित हो सकता है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के दौर में प्रोफेशनल आर्किटेक्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। एक Architect सिर्फ इमारतों का डिजाइन तैयार नहीं करता, बल्कि स्पेस प्लानिंग, सुरक्षा, पर्यावरण और आधुनिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए पूरी संरचना की योजना बनाता है।

    आर्किटेक्ट बनने के लिए सबसे पहले 12वीं कक्षा PCM यानी Physics, Chemistry और Mathematics विषयों के साथ पास करना जरूरी होता है। इसके बाद छात्रों को B.Arch यानी बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर कोर्स में एडमिशन लेना होता है। यह 5 साल का प्रोफेशनल डिग्री कोर्स है, जिसे पूरा करने के बाद छात्र आर्किटेक्ट के रूप में करियर शुरू कर सकते हैं।

    देश के प्रतिष्ठित आर्किटेक्चर कॉलेजों में दाखिले के लिए NATA (National Aptitude Test in Architecture) और JEE Main Paper 2 जैसी प्रवेश परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। इन परीक्षाओं में छात्रों की ड्रॉइंग स्किल, क्रिएटिविटी, लॉजिकल सोच और गणितीय क्षमता का मूल्यांकन किया जाता है। अच्छे स्कोर के आधार पर छात्रों को टॉप सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में प्रवेश मिलता है।

    आर्किटेक्चर की पढ़ाई के दौरान छात्रों को बिल्डिंग डिजाइन, ड्राफ्टिंग, 3D मॉडलिंग, अर्बन प्लानिंग, इंटीरियर डिजाइन और कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी जैसी कई चीजें सिखाई जाती हैं। इसके साथ ही आज के डिजिटल दौर में AutoCAD, Revit, SketchUp, BIM और 3D Visualization जैसे सॉफ्टवेयर की जानकारी होना बेहद जरूरी माना जाता है। जिन छात्रों की डिजाइनिंग और टेक्निकल स्किल मजबूत होती है, उन्हें बेहतर अवसर आसानी से मिल जाते हैं।

    इस फील्ड में सिर्फ तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि कम्युनिकेशन स्किल, प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटी और क्रिएटिव सोच भी बेहद अहम होती है। एक सफल आर्किटेक्ट को क्लाइंट की जरूरत समझकर डिजाइन तैयार करना होता है, इसलिए प्रेजेंटेशन और प्लानिंग स्किल्स भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

    डिग्री पूरी करने के बाद छात्र आर्किटेक्चर फर्म, रियल एस्टेट कंपनियों, सरकारी विभागों, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में नौकरी कर सकते हैं। कई छात्र अनुभव लेने के बाद अपना खुद का आर्किटेक्चर स्टूडियो या डिजाइन कंसल्टेंसी भी शुरू करते हैं।

    अगर सैलरी की बात करें तो शुरुआती दौर में एक फ्रेशर आर्किटेक्ट को सालाना 3 लाख से 6 लाख रुपए तक का पैकेज मिल सकता है। वहीं अनुभव और विशेषज्ञता बढ़ने के साथ यह कमाई 10 लाख रुपए सालाना या उससे भी अधिक पहुंच सकती है। विदेशों में भी भारतीय आर्किटेक्ट्स की काफी डिमांड रहती है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले वर्षों में ग्रीन बिल्डिंग, सस्टेनेबल डिजाइन और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ते ट्रेंड के कारण आर्किटेक्चर सेक्टर में करियर के अवसर तेजी से बढ़ने वाले हैं। ऐसे में क्रिएटिव और टेक्निकल सोच रखने वाले छात्रों के लिए यह फील्ड सुनहरा भविष्य साबित हो सकती है।

  • आत्मनिर्भरता की नई उड़ान: महिला उद्यमियों के लिए दिल्ली सरकार का ऐतिहासिक आर्थिक पैकेज

    आत्मनिर्भरता की नई उड़ान: महिला उद्यमियों के लिए दिल्ली सरकार का ऐतिहासिक आर्थिक पैकेज

    नई दिल्ली ।  दिल्ली सरकार ने राजधानी की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने घोषणा की है कि महिला स्वयं सहायता समूहों और स्टार्टअप्स को अब 10 करोड़ रुपये तक का बिना गिरवी ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इस ऋण की पूरी गारंटी स्वयं दिल्ली सरकार लेगी, जिससे महिलाओं को बिना किसी संपत्ति के जोखिम के बड़ा वित्तीय सहयोग मिल सकेगा।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पहल को महिलाओं की उद्यमिता को नई दिशा देने वाला कदम बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि राजधानी की हर महिला केवल घरेलू कार्यों तक सीमित न रहे, बल्कि अपने कौशल और क्षमता के आधार पर एक सफल उद्यमी बन सके। इसके लिए वित्तीय सहायता सबसे महत्वपूर्ण आधार है, जिसे मजबूत करने के लिए यह योजना लागू की जा रही है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि महिला स्वयं सहायता समूहों और स्टार्टअप्स को केवल ऋण ही नहीं दिया जाएगा, बल्कि उनके उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए भी व्यापक मंच उपलब्ध कराया जाएगा। इसके तहत बड़े मॉल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्सों में स्वदेशी उत्पादों के लिए नियमित प्रदर्शन और बिक्री के अवसर दिए जाएंगे, ताकि स्थानीय उत्पादों को एक स्थायी और मजबूत बाजार मिल सके।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश में ‘स्वदेशी अपनाओ’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे विचार तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और दिल्ली सरकार भी उसी दिशा में काम कर रही है। उनका कहना है कि भारत में बने हस्तशिल्प, खादी, घरेलू उत्पाद और अन्य स्थानीय वस्तुएं किसी भी विदेशी उत्पाद से कम नहीं हैं, जरूरत केवल उन्हें सही पहचान और बाजार देने की है।

    इस अवसर पर यह भी बताया गया कि सरकार बैंकिंग संस्थानों के साथ मिलकर महिलाओं को आसान और सरल ऋण प्रक्रिया उपलब्ध कराने पर काम कर रही है। स्वयं सहायता समूहों की वित्तीय पहुंच को मजबूत करने के लिए बैंकिंग व्यवस्था को और अधिक सक्रिय बनाया जा रहा है, ताकि महिलाओं को किसी भी स्तर पर आर्थिक बाधाओं का सामना न करना पड़े।

    सरकार का मानना है कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होंगी तो समाज और परिवार दोनों की स्थिति मजबूत होगी। इसी उद्देश्य से महिलाओं को छोटे उद्योगों, हस्तनिर्मित उत्पादों और स्टार्टअप गतिविधियों से जोड़ने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं। इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिलेगी।

    इसके अलावा सरकार ने यह भी बताया कि स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न मेलों और प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाएगा, जहां महिला उद्यमियों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। ऐसे आयोजनों से उन्हें न केवल बाजार मिलेगा, बल्कि अपने व्यवसाय को विस्तार देने का अनुभव भी प्राप्त होगा।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नागरिकों को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे विदेशी वस्तुओं की बजाय स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें, जिससे देश के छोटे उद्योगों और कारीगरों को सीधा लाभ मिल सके।

    यह नई योजना महिलाओं के लिए केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का एक बड़ा अवसर भी है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में दिल्ली की महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करें, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

  • तकनीक और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम: गुजरात में स्व-गणना शुरू, राज्यभर में जनगणना प्रक्रिया को मिला नया आयाम

    तकनीक और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम: गुजरात में स्व-गणना शुरू, राज्यभर में जनगणना प्रक्रिया को मिला नया आयाम

    नई दिल्ली ।  गुजरात में जनगणना-2027 की तैयारियों के बीच एक नए डिजिटल युग की शुरुआत देखने को मिल रही है, जहां स्व-गणना प्रक्रिया को औपचारिक रूप से शुरू कर दिया गया है और राज्य सरकार ने नागरिकों से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की है। इस पहल के तहत लोगों को यह सुविधा दी गई है कि वे अपने घर और परिवार से जुड़ी आवश्यक जानकारी स्वयं ऑनलाइन माध्यम से दर्ज कर सकें, जिससे न केवल प्रक्रिया तेज होगी बल्कि डेटा संग्रह अधिक सटीक और पारदर्शी भी बन सकेगा। इस महत्वपूर्ण अभियान की शुरुआत राज्य के शीर्ष नेतृत्व द्वारा स्वयं अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर की गई, जिससे यह संदेश दिया गया कि यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी है जिसमें हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि नागरिकों के पास एक निश्चित अवधि के भीतर अपनी जानकारी दर्ज करने का अवसर होगा, जिसके बाद फील्ड स्तर पर घर-घर जाकर सत्यापन और विस्तृत सर्वेक्षण का कार्य किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है और पहली बार जनगणना को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अधिक आधुनिक स्वरूप दिया गया है, जिससे डेटा संग्रह की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार की उम्मीद है।

    इस व्यवस्था के तहत लोगों से उनके आवास, परिवार के सदस्यों, उपलब्ध सुविधाओं और जीवन स्तर से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी ली जा रही है, ताकि नीति निर्माण और विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। सरकार का मानना है कि जब वास्तविक और सटीक डेटा उपलब्ध होगा, तो सामाजिक कल्याण योजनाओं को अधिक लक्षित और प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा। इसी के साथ पारंपरिक घर-घर सर्वेक्षण की प्रक्रिया भी जारी रखी गई है ताकि उन लोगों तक भी पहुंच सुनिश्चित हो सके जो डिजिटल माध्यम का उपयोग करने में सक्षम नहीं हैं। फील्ड स्तर पर नियुक्त कर्मचारी मोबाइल तकनीक के माध्यम से डेटा एकत्र करेंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और त्रुटियों की संभावना कम होगी।

    राज्य में इस स्व-गणना प्रक्रिया को लेकर लोगों में जागरूकता और भागीदारी बढ़ रही है, और बड़ी संख्या में परिवार इस डिजिटल पहल से जुड़कर अपनी जानकारी दर्ज कर रहे हैं। यह कदम न केवल प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाता है बल्कि नागरिकों को भी एक सरल और सुरक्षित माध्यम प्रदान करता है जिसके जरिए वे सीधे इस राष्ट्रीय प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं। जनगणना को लेकर यह नया दृष्टिकोण आने वाले समय में देशभर में डेटा प्रबंधन और नीति निर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है, क्योंकि यह पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक तकनीक का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करता है और विकास योजनाओं को अधिक वास्तविक आधार प्रदान करता है।