Category: National

  • UP: ईडी की जांच में सामने आया घुसपैठ नेटवर्क, विदेशी फंडिंग और बिना KYC खातों को लेकर बड़े खुलासे

    UP: ईडी की जांच में सामने आया घुसपैठ नेटवर्क, विदेशी फंडिंग और बिना KYC खातों को लेकर बड़े खुलासे


    लखनऊ। बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की अवैध घुसपैठ तथा फर्जी दस्तावेज तैयार कराने से जुड़े नेटवर्क की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को कई अहम सुराग मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, एटीएस की कार्रवाई के बाद भी पश्चिम बंगाल में यह नेटवर्क सक्रिय बना रहा और विदेश से मिलने वाली फंडिंग के जरिए अपनी गतिविधियां संचालित करता रहा।

    ईडी की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि कुछ गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को विदेश से प्राप्त धनराशि को जांच एजेंसियों की नजर से बचाने के लिए दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया।

    कई राज्यों में ईडी की छापेमारी
    प्रवर्तन निदेशालय ने पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में 17 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दायरे में कई एनजीओ भी शामिल रहे। ईडी के अनुसार, तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज मिले हैं। एजेंसी का दावा है कि जांच में संकेत मिले हैं कि कुछ संस्थाएं अब भी विदेश से फंडिंग प्राप्त कर रही हैं।

    FCRA खातों और बैंकों की होगी जांच
    ईडी के मुताबिक, अब इस मामले में आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। एजेंसी उन बैंकों से भी जवाब मांगेगी, जहां संबंधित एनजीओ के एफसीआरए (Foreign Contribution Regulation Act) खाते खोले गए थे और जिनके माध्यम से विदेश से धनराशि प्राप्त की जाती थी।

    इसके अलावा, जांच एजेंसी उन छोटे बैंकों की भूमिका की भी पड़ताल करेगी, जिन पर बिना आवश्यक केवाईसी (KYC) प्रक्रिया पूरी किए खाते खोलने का संदेह है। यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    यूपी में नेटवर्क की गहरी पैठ का दावा
    जांच एजेंसियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों के नेटवर्क की जड़ें गहरी रही हैं। खास तौर पर सहारनपुर का देवबंद इस मामले में जांच एजेंसियों के रडार पर रहा है। बीते पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश एटीएस ने ऐसे तीन मॉड्यूल के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें से एक मामले में हाल ही में राजधानी की एक अदालत ने 15 आरोपियों को सजा सुनाई है। राज्य सरकार ने भी अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया के तहत डिटेंशन सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई थी।

  • J&K: सुरक्षा बलों ने LoC पर घुसपैठ की कोशिश को किया नाकाम… आतंकियों को खदेड़ा

    J&K: सुरक्षा बलों ने LoC पर घुसपैठ की कोशिश को किया नाकाम… आतंकियों को खदेड़ा


    श्रीनगर।
    जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के राजौरी जिले (Rajouri district) में नियंत्रण रेखा (LoC) पर शनिवार को सुरक्षा बलों ने मुस्तैदी दिखाते हुए घुसपैठ (Infiltration) की एक संभावित कोशिश को नाकाम कर दिया। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, सीमा पर तैनात सेना के जवानों ने एक संदिग्ध गतिविधि देखने के बाद फायरिंग शुरू कर दी। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह घटना शुक्रवार रात करीब 10 बजे राजौरी के तारकुंडी फॉरवर्ड एरिया में हुई।

    सीमा की रखवाली कर रहे सतर्क जवानों ने कुछ संदिग्ध आतंकवादियों को भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश करते देखा, जिसके बाद सैनिकों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए छोटे हथियारों से फायरिंग शुरू कर दी। भारतीय सेना की इस कार्रवाई के बाद सीमा पार पाकिस्तान की ओर से भी जवाबी फायरिंग की गई। दोनों तरफ से यह गोलाबारी करीब डेढ़ घंटे तक रुक-रुक कर चलती रही। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस पूरी घटना में भारतीय पक्ष की ओर से किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है।


    इलाके में हाई अलर्ट, तलाशी अभियान शुरू

    शनिवार सुबह होते ही सेना ने पूरे तारकुंडी और उसके आस-पास के इलाकों की घेराबंदी कर एक बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रात के अंधेरे और गोलीबारी का फायदा उठाकर कोई घुसपैठिए भारतीय क्षेत्र में छिपने में कामयाब तो नहीं रहा। फिलहाल पूरे इलाके को कड़े पहरे में रखा गया है और आधुनिक उपकरणों के जरिए निगरानी को काफी बढ़ा दिया गया है।

    आपको बता दें कि जैसलमेर जिला प्रशासन ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में सरकारी जमीन पर बनी छह कथित अवैध मस्जिदों और मदरसों की इमारतों को अतिक्रमण रोधी अभियान के तहत हटा दिया। यह कार्रवाई बीते गुरुवार को प्रशासन के ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत नाचना, तनोट और शाहगढ़ इलाकों में की गई। अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान मीरपुर, हिंदोलों की ढाणी, अहमदपुरा और धानाना जैसे गांवों में चलाया गया। राजस्व, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में जेसीबी का इस्तेमाल कर इन ढांचों को हटा दिया गया।

    प्रशासन के अनुसार, जिन निर्माण या ढांचों को ढहाया गया वे सरकारी जमीन पर बनाए गए थे, जिसमें पोंग बांध परियोजना से विस्थापित परिवारों के लिए आरक्षित जमीन भी शामिल है। इसने कहा कि जिन गांवों या ढाणियों में अभियान चला गया वे अंतरराष्ट्रीय सीमा के लगभग 50 किलोमीटर के दायरे में आते हैं। सीमावर्ती क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए ‘ऑपरेशन’ के दौरान पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की भारी तैनाती रही।

  • भारत में पहली बार निजी कंपनी का ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च, जानिए क्या है मिशन आगमन ?

    भारत में पहली बार निजी कंपनी का ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च, जानिए क्या है मिशन आगमन ?


    नई दिल्ली। भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक पल आने वाला है। पहली बार कोई भारतीय निजी कंपनी अपने स्वदेशी ऑर्बिटल रॉकेट के जरिए उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने का प्रयास करेगी। हैदराबाद की स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस अपने पहले ऑर्बिटल क्लास लॉन्च व्हीकल विक्रम-1 का परीक्षण मिशन ‘मिशन आगमन’ लॉन्च करने जा रही है।

    यह मिशन इसलिए खास है क्योंकि अब तक भारत में उपग्रहों को कक्षा में भेजने का काम मुख्य रूप से इसरो के रॉकेटों के जरिए होता रहा है। विक्रम-1 की सफलता के साथ निजी कंपनियों के लिए व्यावसायिक अंतरिक्ष लॉन्च सेवाओं का नया रास्ता खुल सकता है।

    क्या है मिशन आगमन?
    मिशन आगमन, विक्रम-1 रॉकेट की पहली परीक्षण उड़ान है। इसका प्रक्षेपण सुबह 11:30 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया जाना है। इस मिशन के जरिए स्काईरूट एयरोस्पेस अपने पूरी तरह स्वदेशी तरीके से विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल की क्षमता, तकनीक और प्रदर्शन का परीक्षण करेगी।

    विक्रम-1 रॉकेट की खासियत
    विक्रम-1 का नाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है।

    इस रॉकेट की प्रमुख विशेषताएं-
    – विक्रम-1 करीब 24 मीटर लंबा ऑर्बिटल क्लास रॉकेट है।
    – इसे छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है।
    – इसका ढांचा हल्के कार्बन-कॉम्पोजिट स्ट्रक्चर से तैयार किया गया है।
    – कार्बन फाइबर मजबूत स्टील की तुलना में लगभग पांच गुना हल्का होता है, जिससे रॉकेट की दक्षता बढ़ती है।
    – इसमें तीन सॉलिड प्रोपल्शन स्टेज हैं।
    – रॉकेट के ऊपरी हिस्से में ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल लगाया गया है, जो एक ही मिशन में कई उपग्रहों को अलग-अलग कक्षाओं में स्थापित करने में मदद करेगा।
    – विक्रम-1 को 450 किलोमीटर की लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में करीब 350 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने के लिए तैयार किया गया है।

    विक्रम-1 में कौन-सी नई तकनीकें?
    विक्रम-1 में कई अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इसके लिक्विड इंजन पूरी तरह धातु से बने 3डी-प्रिंटेड इंजन हैं। 3डी प्रिंटिंग तकनीक के जरिए ऐसे इंजन बनाए जा सकते हैं जिनके निर्माण में पहले सैकड़ों अलग-अलग पुर्जों की जरूरत पड़ती थी। इससे निर्माण प्रक्रिया तेज होती है और लागत भी कम होती है। इसके अलावा स्काईरूट ने अपना खुद का न्यूमेटिक स्टेज सेपरेशन सिस्टम विकसित किया है, जो मॉड्यूलर और परीक्षण योग्य है। कंपनी के अनुसार इन तकनीकों से रॉकेट को हल्का, अधिक भरोसेमंद और किफायती बनाया गया है।

    विक्रम-1 के साथ अंतरिक्ष में क्या जाएगा?
    – मिशन आगमन में कई खास पेलोड भेजे जाएंगे।
    – इनमें बेंगलुरु की कंपनी कॉसमॉस डायमंड्स द्वारा तैयार किया गया लैब-निर्मित डायमंड लोटस शामिल है।

    इसके अलावा अजय कुमार मट्टेवाड़ा की बनाई गई माइक्रोआर्ट भी अंतरिक्ष में भेजी जाएगी। इसमें 18 कैरेट सोने से बना एक छोटा रॉकेट है, जिसके अंदर भारत के तीन महान वैज्ञानिकों सर सीवी रमन, डॉ. विक्रम साराभाई, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की बेहद सूक्ष्म मूर्तियां बनाई गई हैं। इन मूर्तियों का आकार चावल के एक दाने से भी छोटा है।

    इस मिशन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हस्तलिखित पोस्टकार्ड भी भेजा जाएगा, जिस पर ‘वंदे मातरम’ लिखा है। इसके अलावा स्काईरूट की टीम, निवेशकों, नीति-निर्माताओं और दुनिया भर के समर्थकों के संदेश भी अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे।

    क्यों महत्वपूर्ण है मिशन आगमन?
    – अगर विक्रम-1 सफल होता है तो भारत की निजी कंपनियां भी स्वतंत्र रूप से व्यावसायिक लॉन्च सेवाएं दे सकेंगी।
    – आईएन-स्पेस के तकनीकी निदेशक राजेश जोथी के अनुसार, यह मिशन छोटे उपग्रहों और छोटे लॉन्च व्हीकल के वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति मजबूत कर सकता है।
    – वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधार लागू होने के बाद निजी कंपनियों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है।

    स्काईरूट एयरोस्पेस की शुरुआत
    स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी। कंपनी का लक्ष्य दुनिया भर के उपग्रह संचालकों को किफायती, भरोसेमंद और जरूरत के अनुसार लॉन्च सेवाएं उपलब्ध कराना है। कंपनी को इसरो की परीक्षण सुविधाओं और लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच मिलने से विकास में तेजी मिली और लागत कम रखने में मदद मिली।

    विक्रम-एस से विक्रम-1 तक का सफर
    स्काईरूट ने 18 नवंबर 2022 को अपना पहला निजी सब-ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-एस सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। ‘प्रारंभ’ नाम के इस मिशन ने भारत के पहले निजी रॉकेट लॉन्च का इतिहास बनाया। यह रॉकेट करीब 88.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा और अपने निर्धारित मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए बंगाल की खाड़ी में उतरा। इस मिशन में सॉलिड प्रोपल्शन, कार्बन-कॉम्पोजिट स्ट्रक्चर, एवियोनिक्स और टेलीमेट्री जैसी तकनीकों का परीक्षण किया गया था, जिनका आधार अब विक्रम-1 में इस्तेमाल किया गया है।

    भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को कैसे मिला बढ़ावा?
    सरकार ने स्पेस स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं—

    2023
    – भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 लागू की गई।
    – इन-स्पेस सीड फंड योजना शुरू की गई।

    2024
    – अंतरिक्ष क्षेत्र में एफडीआई नियमों को आसान बनाया गया।
    – एनजीपी-2024 के जरिए मंजूरी प्रक्रिया को सरल किया गया।
    – इन-स्पेस प्री-इन्क्यूबेशन उद्यमिता कार्यक्रम शुरू किया गया।
    – स्पेस स्टार्टअप्स के लिए 1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड बनाया गया।

    2025
    – नई अंतरिक्ष तकनीकों के लिए 500 करोड़ रुपये का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड बनाया गया।
    – एसएसएलवी तकनीक हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को हस्तांतरित की गई।

    2026
    – पीपीपी मॉडल के तहत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह नेटवर्क विकसित करने की पहल शुरू की गई।

    भारत में स्पेस स्टार्टअप्स की स्थिति
    सरकार के अनुसार, वर्ष 2014 में देश में केवल एक पंजीकृत स्पेस स्टार्टअप था, जबकि फरवरी 2026 तक इनकी संख्या 400 से अधिक हो चुकी है।

    भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स में अब तक 50 करोड़ डॉलर (500 मिलियन डॉलर) से अधिक का निवेश हो चुका है। अकेले 2025 में करीब 15 करोड़ डॉलर (150 मिलियन डॉलर) का निवेश आया।

    पिक्सेल, ध्रुव स्पेस, स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस और बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस जैसी कंपनियां भारत के नए अंतरिक्ष युग की प्रमुख कंपनियों के रूप में उभर रही हैं।

    अगर मिशन आगमन सफल रहता है, तो यह केवल स्काईरूट एयरोस्पेस की उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक नए दौर की शुरुआत साबित हो सकती है।

  • बिहार पर्यटन विभाग की अनोखी प्रतियोगिता, श्रावणी मेले पर बनाएं रील्स और जीतें ₹3 लाख तक का इनाम

    बिहार पर्यटन विभाग की अनोखी प्रतियोगिता, श्रावणी मेले पर बनाएं रील्स और जीतें ₹3 लाख तक का इनाम


    पटना। बिहार के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले श्रावणी मेला 2026 को देश-दुनिया तक डिजिटल माध्यम से पहुंचाने के लिए बिहार पर्यटन विभाग ने एक खास पहल शुरू की है। विभाग ने सोशल मीडिया क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स के लिए राष्ट्रव्यापी वीडियो-मेकिंग प्रतियोगिता लॉन्च की है।

    इस प्रतियोगिता का उद्देश्य कांवड़िया परंपरा और श्रावणी मेले की आध्यात्मिक व सांस्कृतिक छवि को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए व्यापक स्तर पर प्रचारित करना है। पर्यटन सचिव लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि इस प्रतियोगिता का नाम “श्रावणी मेला 2026: एन इन्फ्लुएंसर्स पर्सपेक्टिव” रखा गया है।

    कौन ले सकता है हिस्सा?
    प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए कुछ जरूरी पात्रताएं तय की गई हैं।
    – प्रतिभागी के फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) और यूट्यूब अकाउंट को मिलाकर कम से कम 25,000 फॉलोअर्स होना जरूरी है।
    – आवेदक का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है।
    – प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।

    विजेता को मिलेगा ₹3 लाख का पुरस्कार
    प्रतिभागियों को श्रावणी मेले और मुंगेर, बांका व भागलपुर से गुजरने वाले कांवड़िया रूट पर आधारित वीडियो या रील्स तैयार करनी होगी। वीडियो की अवधि 30 सेकंड से 2 मिनट के बीच होनी चाहिए। बिहार पर्यटन विभाग ने प्रतियोगिता के लिए आकर्षक नकद पुरस्कारों की घोषणा की है।

    प्रथम पुरस्कार: ₹3 लाख
    द्वितीय पुरस्कार: ₹2 लाख
    तृतीय पुरस्कार: ₹1 लाख
    चौथा पुरस्कार: ₹50,000-₹50,000 (दो विजेताओं को)
    सांत्वना पुरस्कार: ₹25,000-₹25,000 (पांच विजेताओं को)

    AI से बनाई गई वीडियो होगी अमान्य
    पर्यटन विभाग के अनुसार, श्रावणी मेला 2026 का आयोजन 30 जुलाई से 28 अगस्त 2026 तक किया जाएगा। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को पहली सोमवारी 3 अगस्त 2026 के बाद अपनी वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करनी होगी।

    इसके बाद दूसरी सोमवारी के दो दिनों के भीतर वीडियो को विभाग के पोर्टल पर अपलोड करना होगा। प्रतियोगिता के लिए अंतिम सबमिशन तारीख 13 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है।

    विभाग ने स्पष्ट किया है कि वीडियो पूरी तरह मौलिक, एचडी क्वालिटी और जियो-टैग्ड होना चाहिए। किसी भी तरह का आपत्तिजनक कंटेंट, वॉटरमार्क या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जाएगा। AI से तैयार या एडिट की गई वीडियो मिलने पर प्रविष्टि को तुरंत रद्द कर दिया जाएगा।

    ऐसे होगा विजेताओं का चयन
    विजेताओं का चयन पर्यटन विभाग की ओर से गठित जूरी और सोशल मीडिया पर वीडियो को मिलने वाली प्रतिक्रिया के आधार पर किया जाएगा। इसमें 45 दिनों के दौरान मिलने वाली रीच, लाइक्स और शेयर्स को भी ध्यान में रखा जाएगा।

  • तिरुवनंतपुरम में होटल की लिफ्ट में 15 मिनट तक फंसे शशि थरूर, हाइड्रोलिक स्प्रेडर से सुरक्षित निकाला बाहर

    तिरुवनंतपुरम में होटल की लिफ्ट में 15 मिनट तक फंसे शशि थरूर, हाइड्रोलिक स्प्रेडर से सुरक्षित निकाला बाहर


    तिरुवनंतपुरम। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद शशि थरूर शुक्रवार शाम केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम स्थित एक निजी होटल की लिफ्ट में करीब 15 मिनट तक फंस गए। वह यहां ‘रोटरी क्लब ऑफ त्रिवेंद्रम ईस्ट’ के स्थापना समारोह में शामिल होने पहुंचे थे।

    घटना की जानकारी मिलते ही होटल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर फायर एंड रेस्क्यू सर्विसेज की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और आधुनिक उपकरणों की मदद से शशि थरूर समेत लिफ्ट में मौजूद सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

    अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शाम 7:37 बजे सूचना मिली कि सांसद होटल की लिफ्ट में फंस गए हैं। इसके बाद रेस्क्यू टीम तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हुई। शुरुआती प्रयासों में होटल स्टाफ और अन्य लोगों ने लोहे की रॉड से लिफ्ट का दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। यहां तक कि लिफ्ट मैकेनिक भी तकनीकी खराबी दूर कर दरवाजा नहीं खोल सके।

    बताया गया कि तकनीकी खराबी के कारण लिफ्ट निर्धारित मंजिल तक नहीं पहुंच पाई, जिससे उसका ऑटोमैटिक डोर लॉक सक्रिय हो गया और अंदर मौजूद लोग बाहर नहीं निकल सके।

    हाइड्रोलिक स्प्रेडर से खोला गया दरवाजा
    मौके पर पहुंची फायर फोर्स की टीम ने आधुनिक हाइड्रोलिक स्प्रेडर का इस्तेमाल किया और कुछ ही मिनटों में शाम 7:51 बजे लिफ्ट के दरवाजे को खोल दिया। दरवाजा खुलते ही शशि थरूर मुस्कुराते हुए बाहर आए और राहत की सांस ली।

    बाहर निकलने के बाद उन्होंने रेस्क्यू टीम का आभार जताते हुए कहा, “आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद। वेल डन! आपने बेहतरीन काम किया है।” अधिकारियों द्वारा उनका हालचाल पूछे जाने पर थरूर ने बताया कि लिफ्ट में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं।

    रेस्क्यू अभियान के बाद शशि थरूर ने फायर विभाग के अधिकारियों की तत्परता और पेशेवर कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने टीम को चाय के लिए आमंत्रित भी किया, लेकिन अधिकारियों ने मुस्कुराते हुए हाथ मिलाकर उनका धन्यवाद किया और अपनी ड्यूटी पर लौट गए। बाद में थरूर ने त्वरित कार्रवाई के लिए अग्निशमन कर्मियों को सम्मानित भी किया।

  • शनिवार को कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, तेज हवाएं भी बढ़ाएंगी मुश्किलें

    शनिवार को कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, तेज हवाएं भी बढ़ाएंगी मुश्किलें


    नई दिल्ली।
    भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, 18 जुलाई (शनिवार) को देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून सक्रिय रहेगा। उत्तर, मध्य, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कई राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। वहीं, कई इलाकों में गरज-चमक और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है।

    उत्तर भारत में कैसा रहेगा मौसम?

    आईएमडी के अनुसार जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होगी, जबकि कुछ स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने के आसार हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है, जबकि पूर्वी राजस्थान में भी अच्छी बारिश की संभावना है। पश्चिमी राजस्थान में छिटपुट वर्षा का अनुमान है।

    मध्य और पूर्वी भारत में बारिश का दौर

    मध्य प्रदेश के कई जिलों में शनिवार को बारिश होने की संभावना है। छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने किसानों और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    पश्चिम और दक्षिण भारत में भी सक्रिय रहेगा मानसून

    गोवा, गुजरात के कुछ हिस्सों, मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। तटीय कर्नाटक, केरल और माहे में व्यापक वर्षा जारी रह सकती है। आंतरिक कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। तमिलनाडु और पुडुचेरी के कुछ क्षेत्रों में भी हल्की वर्षा हो सकती है। कई स्थानों पर 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है।

    पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश की आशंका

    अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ इलाकों में भारी वर्षा हो सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और तेज बहाव वाले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

    पंजाब में फिलहाल कमजोर पड़ा मानसून

    पंजाब और चंडीगढ़ में मानसून की गतिविधियां फिलहाल कमजोर पड़ गई हैं, जिससे गर्मी और उमस बढ़ गई है। मौसम विभाग ने फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, श्री मुक्तसर साहिब, मोगा, बठिंडा, बरनाला और मानसा के लिए गर्मी और उमस का येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं, पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, फतेहगढ़ साहिब, रूपनगर और मोहाली के कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

    मौसम विभाग के अनुसार, पंजाब में 19 जुलाई से मानसून फिर सक्रिय होने की संभावना है। 20 से 22 जुलाई के बीच राज्य के कई हिस्सों में अच्छी बारिश और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है। लोगों को स्थानीय मौसम चेतावनियों पर नजर रखने और खराब मौसम के दौरान आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

  • जब सड़कें और पुल बह गए तो हाथियों ने संभाली जिम्मेदारी, अरुणाचल के बाढ़ प्रभावित गांवों तक राहत पहुंचाने की बनी अनोखी जीवनरेखा

    जब सड़कें और पुल बह गए तो हाथियों ने संभाली जिम्मेदारी, अरुणाचल के बाढ़ प्रभावित गांवों तक राहत पहुंचाने की बनी अनोखी जीवनरेखा

    नई दिल्ली । अरुणाचल प्रदेश के लोअर सियांग जिले में आई भीषण बाढ़ ने जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। लगातार बारिश और फ्लैश फ्लड के कारण कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे एक दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से पूरी तरह टूट गया। ऐसे हालात में प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों ने राहत पहुंचाने के लिए ऐसा तरीका अपनाया है, जिसने संकट की घड़ी में मानव और प्रकृति के सहयोग की मिसाल पेश की है। दुर्गम इलाकों तक जरूरी सामान पहुंचाने के लिए हाथियों की मदद ली जा रही है।

    बाढ़ का सबसे अधिक असर नारी-कोयू विधानसभा क्षेत्र के कोयू सर्कल के गांवों पर पड़ा है। यहां सड़क संपर्क टूटने के कारण सामान्य वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है। कई गांवों तक न तो खाद्यान्न पहुंच पा रहा था और न ही दवाइयों तथा ईंधन जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति संभव हो रही थी। ऐसे में प्रभावित परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों का संकट गहराने लगा।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने स्थानीय समुदाय के सहयोग से हाथियों के माध्यम से राहत सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था शुरू की। हाथियों की पीठ पर राशन, दवाइयां, ईंधन और अन्य जरूरी सामान लादकर उन रास्तों से भेजा जा रहा है, जहां वाहन तो दूर, कई स्थानों पर पैदल पहुंचना भी बेहद कठिन है। पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप चलने की उनकी क्षमता राहत कार्यों में बेहद उपयोगी साबित हो रही है।

    यह अभियान आसान नहीं है। हाथियों को तेज बहाव वाली नदियों, कीचड़ से भरे रास्तों, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी मार्गों और बड़े-बड़े पत्थरों के बीच कई किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है। इसके बावजूद राहत कार्य लगातार जारी है। प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी गांव में आवश्यक वस्तुओं की कमी न होने पाए और सभी प्रभावित परिवारों तक समय पर मदद पहुंच सके।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हाथियों की सहायता नहीं ली जाती तो कई गांवों तक राहत सामग्री पहुंचाना लगभग असंभव हो जाता। कई स्थानों पर सड़कें पूरी तरह बह चुकी हैं और अस्थायी रास्ते भी सुरक्षित नहीं हैं। ऐसे में हाथी ही एकमात्र भरोसेमंद माध्यम बनकर उभरे हैं, जिनकी मदद से लगातार राहत सामग्री गांवों तक पहुंच रही है। इससे सैकड़ों लोगों को भोजन, दवा और अन्य जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं।

    प्राकृतिक आपदाओं के दौरान वैकल्पिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग किस तरह राहत कार्यों को गति दे सकता है, इसका यह उदाहरण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय प्रशासन के साथ ग्रामीणों की भागीदारी और प्रशिक्षित हाथियों का सहयोग राहत अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बना सकता है।

    अरुणाचल प्रदेश में राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी हैं और प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की मरम्मत की दिशा में भी काम शुरू किया गया है, ताकि जल्द से जल्द गांवों का संपर्क फिर से स्थापित हो सके। तब तक हाथियों के जरिए राहत सामग्री पहुंचाने का यह अभियान प्रभावित लोगों के लिए उम्मीद की सबसे मजबूत कड़ी बना हुआ है। यह पहल केवल राहत वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि कठिन समय में मानव, स्थानीय समुदाय और प्रकृति के बीच सहयोग की प्रेरक मिसाल भी प्रस्तुत करती है।

  • बदायूं में संदिग्ध बुखार का कहर: चार दिन में दो सगे भाइयों की मौत, गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात

    बदायूं में संदिग्ध बुखार का कहर: चार दिन में दो सगे भाइयों की मौत, गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात


    बदायूं। उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में संदिग्ध बुखार ने एक ही परिवार के दो युवकों की जान ले ली। दहगवां स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के नसीरपुर टप्पा मलसई गांव में चार दिनों के भीतर दो सगे भाइयों की मौत से पूरे गांव में भय का माहौल है। घटना की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और अधिकारियों के निर्देश पर मेडिकल टीम ने गांव पहुंचकर जांच और उपचार का अभियान शुरू कर दिया।

    तेज बुखार के बाद बिगड़ी हालत
    जानकारी के अनुसार, गांव निवासी होरीलाल के 20 वर्षीय बेटे मोरपाल और 18 वर्षीय बेटे ब्रजेश को करीब चार दिन पहले अचानक तेज बुखार आया था। परिजनों का कहना है कि दोनों को बुखार के साथ अत्यधिक कमजोरी और उल्टी की शिकायत भी थी।

    शुरुआत में स्थानीय स्तर पर इलाज कराया गया, लेकिन दोनों की तबीयत लगातार बिगड़ती गई और उपचार के बावजूद उनकी मौत हो गई। एक ही परिवार के दो जवान बेटों के निधन से घर में मातम पसरा है।

    गांव में मेडिकल कैंप, घर-घर सर्वे शुरू
    ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में कई अन्य लोग भी बुखार से पीड़ित हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने गांव में तत्काल मेडिकल कैंप लगाने और घर-घर सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं।

    दहगवां स्वास्थ्य केंद्र की टीम शुक्रवार सुबह से गांव में मौजूद है। स्वास्थ्यकर्मी बीमार लोगों की जांच, रक्त के नमूने लेने और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने में जुटे हैं।

    स्वास्थ्य विभाग ने जारी की सलाह
    स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अफवाहों से बचने और घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि बुखार या अन्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत सरकारी अस्पताल में चिकित्सकीय जांच कराएं और झोलाछाप या अप्रमाणित उपचार से बचें।

    इसके साथ ही लोगों को उबालकर पानी पीने, घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने तथा जलभराव नहीं होने देने की सलाह दी गई है, ताकि संक्रमण फैलने का खतरा कम किया जा सके। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और संक्रमण के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अंतरिम रिपोर्ट पेश करेगी SIT, सरकार से मांग सकती है और समय

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अंतरिम रिपोर्ट पेश करेगी SIT, सरकार से मांग सकती है और समय


    लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। सूत्रों के मुताबिक, शीर्ष अदालत के निर्देशों के तहत यह रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाएगी। साथ ही, जांच पूरी करने के लिए एसआईटी उत्तर प्रदेश सरकार से अतिरिक्त समय की मांग भी कर सकती है।

    जानकारी के अनुसार, जांच अभी कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर जारी है। एसआईटी चढ़ावा गणना प्रणाली, कथित वित्तीय अनियमितताओं, बैंकिंग लेनदेन, आरोपियों की भूमिका और संबंधित दस्तावेजों की विस्तार से जांच कर रही है। हाल में पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान हुई पूछताछ और बरामदगी से मिले नए सुरागों का भी सत्यापन किया जा रहा है। इन सभी बिंदुओं की जांच पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट अदालत में पेश की जाएगी।

    23 जून को शासन को सौंपी गई थी प्रारंभिक रिपोर्ट


    एसआईटी ने 23 जून को राम मंदिर की व्यवस्थाओं और दानराशि प्रबंधन से संबंधित अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी। सूत्रों के अनुसार, इस रिपोर्ट में मंदिर की प्रशासनिक, वित्तीय और संचालन व्यवस्था से जुड़ी पांच प्रमुख खामियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में दानराशि की सुरक्षा, कर्मचारियों की नियुक्ति, खरीद प्रक्रिया, प्रसाद वितरण व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

    दानराशि की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल


    जांच में पाया गया कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई नकदी को मंदिर परिसर से बैंक तक पहुंचाने और गणना कक्ष में उसकी गिनती के दौरान पर्याप्त सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था नहीं थी। एसआईटी का मानना है कि इसी वजह से दानराशि प्रबंधन प्रणाली में कई स्तरों पर सुधार की आवश्यकता है।

    सोने-चांदी के आभूषणों का रिकॉर्ड भी अधूरा


    रिपोर्ट के अनुसार, श्रद्धालुओं की ओर से भेंट किए गए सोने और चांदी के आभूषणों का समुचित अभिलेखीकरण नहीं किया जा रहा था। जांच में ऐसे कई उदाहरण सामने आए, जहां मूल्यवान धातुओं के संग्रहण और रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।

    नियुक्तियों और खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल


    एसआईटी ने अपनी जांच में यह भी पाया कि कुछ पदों पर नियुक्तियां तय प्रक्रिया और योग्यता के बजाय सिफारिशों के आधार पर की गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हुई। इसके अलावा सामग्री खरीद की प्रक्रिया को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट में उल्लेख है कि कुछ मामलों में टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं थी और कुछ खरीद में कमीशनखोरी तथा निर्धारित नियमों के पालन में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।

    प्रसाद वितरण और सीता रसोई में भी मिलीं कमियां


    एसआईटी की जांच में प्रसाद वितरण व्यवस्था और सीता रसोई के संचालन में भी कई कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य सामग्री और अन्य सामानों की खरीद कई बार बाजार मूल्य से अधिक दरों पर की गई, जिससे वित्तीय अनुशासन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं।

    सुधारात्मक कदमों की सिफारिश


    सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में वित्तीय व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी बनाने, जवाबदेही तय करने और प्रशासनिक सुधार लागू करने की सिफारिश की है। राज्य सरकार रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है और इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
  • सीएम योगी का विपक्ष पर हमला, बोले- 'उन्हें जिन्ना पसंद, हमें गन्ना'; विकास परियोजनाओं की दी सौगात

    सीएम योगी का विपक्ष पर हमला, बोले- 'उन्हें जिन्ना पसंद, हमें गन्ना'; विकास परियोजनाओं की दी सौगात


    बिजनौर/शामली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को शामली और बिजनौर का दौरा कर कई विकास परियोजनाओं की सौगात दी। शामली में उन्होंने 617.70 करोड़ रुपये की लागत वाली 90 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया, जबकि बिजनौर में जनसभा को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखा राजनीतिक हमला बोला और प्रदेश सरकार की विकास योजनाओं का उल्लेख किया।

    ‘समाज को बांटने वालों से रहें सतर्क’
    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कुछ राजनीतिक दल जाति और वर्ग के आधार पर समाज को बांटने का प्रयास करते हैं। उन्होंने लोगों से ऐसे तत्वों से सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता समाज को जोड़ना, सामाजिक समरसता को मजबूत करना और सभी वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।

    बिजनौर-चांदपुर के लिए करीब 1000 करोड़ की परियोजनाएं
    सीएम योगी ने कहा कि महात्मा विदुर की धरती बिजनौर लगातार विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि बिजनौर और चांदपुर विधानसभा क्षेत्रों के लिए करीब 1000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया जा रहा है।

    विस्थापित परिवारों का भी किया जिक्र
    मुख्यमंत्री ने अपने पिछले दौरे को याद करते हुए कहा कि पड़ापुर क्षेत्र में पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए करीब 3000 विस्थापित लोगों को जमीन के पट्टे दिए गए थे। उन्होंने कहा कि वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे इन परिवारों को सरकार ने अधिकार दिलाने का काम किया है।

    2017 से पहले की कानून-व्यवस्था पर साधा निशाना
    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले बिजनौर में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी और अपराधियों व माफिया का प्रभाव था। उन्होंने दावा किया कि सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के चलते अब जिले में कानून का राज स्थापित हुआ है और विकास कार्यों को गति मिली है।

    इसी दौरान उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “कुछ लोग ऐसा बिजनौर चाहते थे, जहां गुंडों और माफियाओं का कब्जा हो। वे समाज को बांटने की राजनीति करते हैं। उन्हें जिन्ना पसंद है, लेकिन हमें गन्ना पसंद है। हमारी सरकार की प्राथमिकता गन्ना किसानों का हित और गन्ने का बेहतर मूल्य सुनिश्चित करना है।”

    गंगा एक्सप्रेसवे हरिद्वार तक बढ़ाने की घोषणा
    मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने घोषणा की कि गंगा एक्सप्रेसवे का विस्तार हरिद्वार तक किया जाएगा, जिससे बिजनौर सहित आसपास के क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क का लाभ मिलेगा।

    बिजनौर में बनेगा नर्सिंग कॉलेज
    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मेडिकल कॉलेज के बाद अब बिजनौर में नर्सिंग कॉलेज का निर्माण भी तेजी से कराया जा रहा है। इससे जिले की बेटियों को नर्सिंग की पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा और स्थानीय स्तर पर शिक्षा के साथ रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे।