Category: National

  • बुलंदशहर में प्रसव के बाद महिला की मौत, परिजनों का आरोप अस्पताल ने मृत अवस्था में स्वस्थ बताकर किया डिस्चार्ज

    बुलंदशहर में प्रसव के बाद महिला की मौत, परिजनों का आरोप अस्पताल ने मृत अवस्था में स्वस्थ बताकर किया डिस्चार्ज

    नई दिल्ली । बुलंदशहर नगर के भूड़ चौराहा स्थित प्रगति मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं। शनिवार दोपहर एक मृत महिला को स्वस्थ बताकर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। परिजनों को महिला के मृत होने की जानकारी लगी तो उन्होंने विरोध जताकर हंगामा किया। वहीं, अस्पताल स्टाफ मौके से भाग गया। हंगामे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर शांत किया। हालांकि, परिजन बिना पोस्टमार्टम कराए कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन देकर परिजनों को घर भेज दिया।

    चोला क्षेत्र के गांव कौराली निवासी शमी आलम की 23 वर्षीय पत्नी मुस्कान को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने बृहस्पतिवार रात भूड़ चौराहा स्थित प्रगति मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया। शनिवार को मृत महिला को स्वस्थ बताकर घर भेजे जाने के बाद परिजनों ने स्टाफ पर डिलीवरी में लापरवाही बरतने का आरोप लगाकर हंगामा किया।

    परिजनों का हंगामा देख अस्पताल स्टाफ और भर्ती अन्य मरीज भाग गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझाकर शांत कराया और तहरीर देने की मांग की। परिजन तत्काल कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। बाद में बिना पोस्टमार्टम कराए शव को घर ले गए। देवर जान आलम ने बताया कि उनकी भाभी को जब भर्ती कराया गया था, वह बिल्कुल ठीक थीं।

    शुक्रवार को उन्होंने पुत्री को जन्म दिया। परिजनों का आरोप है कि डिलीवरी में स्टाफ की लापरवाही से ब्लीडिंग होती रही। स्टाफ ने ब्लड कम होने की बात कहकर करीब तीन यूनिट ब्लड मांगा, जिसे तत्काल उपलब्ध करवा दिया गया। शनिवार सुबह अस्पताल स्टाफ ने छुट्टी करने से पूर्व पैसा जमा करवाने की बात कही। इसके बाद वह पिता शमी खां के साथ बैंक से रुपये निकालने के लिए चले गए।

    इसी बीच परिजनों के अनुसार भाभी को मृत अवस्था में सही बताकर अस्पताल से बाहर कर दिया गया और घर ले जाने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि मां ने डिस्चार्ज की बात बताई तो वह अस्पताल पहुंचे। उनके पहुंचने से पूर्व अस्पताल का स्टाफ जा चुका था और भाभी को देखा तो वह मृत अवस्था में थीं।

    घटना के बाद अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई। परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर प्रसव के दौरान लापरवाही बरतने और महिला की स्थिति के संबंध में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि महिला को अस्पताल में भर्ती कराते समय उसकी हालत ठीक थी और प्रसव के बाद सामने आई स्थिति ने पूरे परिवार को झकझोर दिया।

    हंगामे की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने परिजनों से तहरीर देने को कहा, जबकि परिजन तत्काल कार्रवाई की मांग करते रहे। परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से भी इनकार किया और शव को अपने साथ घर ले गए। पुलिस की ओर से कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद परिजन घर लौट गए।

    घटना के बाद अस्पताल स्टाफ के मौके से चले जाने की बात भी सामने आई है। पूरे मामले में परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और अस्पताल की ओर से इलाज तथा डिस्चार्ज प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं। फिलहाल घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और प्रसव के दौरान मरीज की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • राज्यसभा नहीं मिलने पर स्मृति ईरानी का जवाब, अमेठी चुनाव हार और भाजपा में संगठनात्मक भूमिका पर खुलकर बोलीं

    राज्यसभा नहीं मिलने पर स्मृति ईरानी का जवाब, अमेठी चुनाव हार और भाजपा में संगठनात्मक भूमिका पर खुलकर बोलीं

    नई दिल्ली । पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भाजपा की केंद्रीय टीम में वापसी के बाद कई मुद्दों पर बात की है। एक पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव में अमेठी से मिली हार के बाद राज्यसभा न भेजे जाने को लेकर कहा कि भारतीय जनता पार्टी के संगठन में पद कोई पहचान नहीं होती है, वह एक मौका होता है। उन्होंने कहा, “अगर राजनीतिक ताकत महत्वपूर्ण होती, तो मैं कभी भी अमेठी नहीं जाती। क्योंकि अमेठी ऐतिहासिक रूप से भाजपा के लिए एक ‘लूजिंग सीट’ रही है।” बता दें स्मृति ईरानी 2011 से 2019 तक राज्यसभा सांसद रही थीं। इस दौरान ही उन्होंने 2019 के चुनाव में अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। बाद में 2024 लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

    टाइम्स नाऊ से बात करते हुए स्मृति ईरानी ने 2024 लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी द्वारा वापस राज्यसभा न भेजे जाने के सवाल पर भी विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह जहां से आई हैं, वहां पर कभी नहीं सोचा था कि वह इस मुकाम पर पहुंचेंगी।

    मैं और देवेंद्र फडणवीस मिलकर, पुराने दिनों को याद करके हंसते हैं- स्मृति ईरानी

    इंटरव्यू के दौरान स्मृति ईरानी ने भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा में काम करने वाले दिनों को याद किया। उन्होंने कहा, “मैं पहली बार 2003 में युवा मोर्चा महाराष्ट्र में पदाधिकारी बनी थी। मेरे साथ जो उपाध्यक्ष थे, व देवेंद्र फडणवीस थे। उस समय हम लोगों ने कभी नहीं सोचा था कि यहां तक पहुंचेंगे। मैं और देवेंद्र फडणवीस जब की मिलते हैं, तो इस बात पर हंसते हैं। उस समय हम लोग प्रमोद महाजन, गोपीनाथ मुंडे को देखा करते थे। मैंने जीवन में कभी नहीं सोचा था कि हम यहां तक पहुंचेंगे।” उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से सार्वजनिक रूप से की गई तारीफ उनके लिए एक उपलब्धि है।

    ‘घर से पेट्रोल, पानी के पैसे मांगते थे’

    भाजपा नेता स्मृति ईरानी युवा मोर्चा के दिनों को याद करते हुए कहा कि वह एक पक्की भाजपा कार्यकर्ता हैं। युवा मोर्चा के दिनों में वह अपने साथी लोगों की मदद करने के लिए घर से पेट्रोल पानी के पैसे तक लेती थी। इस पर उनके घर वाले भी कई बार टोका करते थे। उन्होंने कहा, “उस समय हम लोग ऐसे ही घूमा करते थे। घर से पेट्रोल पानी के पैसे भी लिया करते थे। घरवाले कहते थे कि अरे तुम युवा मोर्चा में हो और अभी पैसे लेते हो। तब हम कहते थे कि ‘हां, ताकि हम अपने साथियों की मदद कर सकें।’ उस वक्त हमारे जो संगठन मंत्री थे वह वी. सतीश जी थे। वह आज संसद में हैं। वह बैठकर हमें बताते थे कि जो गरीब कार्यकर्ता है उसकी मदद कैसे करनी है। उसको भी अपने साथ लेकर चलना है।” उन्होंने कहा कि जब संगठन में इस तरीके की मजबूती के साथ तैयारी की जाती है और ऐसे बैकग्राउंड से आप आते हैं, तो आपके लिए पद कोई ज्यादा मायने नहीं रखता।

    पीएम के इग्नोर करने वाले वीडियो पर भी दिया स्मृति ईरानी का जवाब

    इंटरव्यू के दौरान जब स्मृति ईरानी से बंगाल में एक कार्यक्रम के दौरान वायरल हुए वीडियो पर भी सवाल पूछा गया। विपक्ष की तरफ से आरोप लगाया जाता है कि पीएम मोदी ने इस कार्यक्रम में स्मृति ईरानी को इग्नोर किया था। इसका जवाव देते हुए ईरानी ने कहा, “हां, उस समय मैं और दादा (मिथुन) एक साथ ही बैठे हुए थे। वीडियो में पीएम मोदी की पीठ दिखाई दे रही है। किसको पता है कौन किसको हाथ जोड़ रहा है। वह पल बेहद भावुक करने वाला था। वहां जितने भी लोग मंच पर थे, सबकी अपनी कहानी थी। बंगाल में कार्यकर्ताओं ने काफी कुछ झेला है।”

    उन्होंने जोर देकर कहा कि उस समय मंच पर पुराने से पुराना कार्यकर्ता मौजूद था। प्रधानमंत्री मोदी उन लोगों का अभिवादन कर रहे थे। हमने पीएम के लिए बंगाल में गालियां सुनी हैं। ऐसे में यह सारी चीजें मायने नहीं रखतीं। मायने रखती है, तो केवल जीत और वह सुखद थी। मायने रखता है, तो बंगाल का कार्यकर्ता और उसे मिलने वाला न्याय।

  • हनुमान भक्ति, सादगी और रहस्यमयी किस्से… क्यों दुनिया भर में प्रसिद्ध हुए बाबा नीम करौली, जानिए उनकी पूरी कहानी

    हनुमान भक्ति, सादगी और रहस्यमयी किस्से… क्यों दुनिया भर में प्रसिद्ध हुए बाबा नीम करौली, जानिए उनकी पूरी कहानी


    नई दिल्ली । बाबा नीम करौली का नाम आज सिर्फ एक संत के रूप में नहीं बल्कि गहरी आस्था और आध्यात्मिक प्रेरणा के प्रतीक के तौर पर लिया जाता है। उत्तराखंड के कैंची धाम से लेकर देश विदेश तक उनके अनुयायियों की बड़ी संख्या है। कंबल ओढ़े रहने वाले बाबा को भक्त प्यार से महाराजजी कहकर बुलाते थे। उनकी सादगी हनुमान भक्ति और मानव सेवा से जुड़ी शिक्षाओं ने उन्हें दूसरे संतों से अलग पहचान दी। हाल के समय में फिल्म हनुमान अंश की चर्चा के बीच एक बार फिर बाबा नीम करौली के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा को जानने में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है।

    बाबा नीम करौली का मूल नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा बताया जाता है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के टुंडला क्षेत्र के अकबरपुर गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बाद में उनका संबंध फर्रुखाबाद जिले के नीब करोरी गांव से जुड़ा और इसी वजह से उन्हें बाबा नीब करोरी के नाम से जाना जाने लगा। समय के साथ नीब करोरी का प्रचलित रूप नीम करौली हो गया और आज दोनों नाम इसी संत के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। कहा जाता है कि उन्होंने नीब करोरी में गुफा के भीतर कठिन साधना की थी और बाद में उसी स्थान पर हनुमान मंदिर का निर्माण हुआ।

    बाबा के जीवन से जुड़ी ट्रेन वाली कहानी भी बेहद प्रसिद्ध है। भक्तों के बीच प्रचलित कथा के अनुसार बाबा बिना टिकट ट्रेन के फर्स्ट क्लास डिब्बे में यात्रा कर रहे थे। टिकट जांच के दौरान उन्हें नीब करोरी के पास ट्रेन से उतार दिया गया। बाबा पास ही एक नीम के पेड़ के नीचे जाकर बैठ गए। मान्यता है कि इसके बाद ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। कई कोशिशों के बाद भी इंजन नहीं चला तो अधिकारियों और यात्रियों ने बाबा से क्षमा मांगी और उन्हें वापस ट्रेन में बैठाया गया। बाबा के ट्रेन में बैठने के बाद ट्रेन चल पड़ी। इस घटना को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं और इसे बाबा से जुड़े चमत्कारों में गिना जाता है।

    बाबा का बचपन और गृहस्थ जीवन भी उनकी कहानी का अहम हिस्सा है। बताया जाता है कि कम उम्र में ही उनका विवाह हुआ था और आध्यात्म के प्रति गहरा आकर्षण होने के कारण उन्होंने घर छोड़ दिया था। इसके बाद उन्होंने अलग अलग स्थानों पर साधना की। गुजरात के बावनिया गांव में तालाब के पास साधना करने के कारण उन्हें तलैया बाबा भी कहा गया। बाद में वे परिवार के पास लौटे और गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियां निभाईं। उनके दो बेटे और एक बेटी होने की जानकारी मिलती है।

    बाबा नीम करौली की सबसे बड़ी पहचान उनकी हनुमान भक्ति रही। उनके भक्त उन्हें हनुमान जी का अंश या अवतार तक मानते हैं। हालांकि यह आस्था और धार्मिक मान्यता का विषय है इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। बाबा की शिक्षाओं में प्रेम सेवा सादगी और सभी को समान दृष्टि से देखने का भाव प्रमुख था। वे लोगों को ईश्वर का स्मरण करने दूसरों की सेवा करने और सत्य के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देते थे। उनका संदेश सब एक यानी सभी में एक ही ईश्वर का अंश देखने की भावना से जुड़ा माना जाता है।

    बाबा से जुड़े अनेक चमत्कारिक किस्से भी भक्तों के बीच प्रचलित रहे हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि वे लोगों की परेशानियों को बिना बताए समझ लेते थे और कई बार अलग अलग स्थानों पर एक साथ दिखाई देने जैसी घटनाओं का भी उल्लेख मिलता है। इन कथाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है लेकिन उनके अनुयायियों की आस्था में इनका विशेष स्थान है। अमीर हो या गरीब अलग धर्म का हो या अलग सामाजिक वर्ग का बाबा के पास आने वाले लोगों के साथ समान व्यवहार की बातें उनके संस्मरणों में मिलती हैं।

    यही वजह है कि बाबा नीम करौली की लोकप्रियता केवल भारत तक सीमित नहीं रही। कैंची धाम आज उनकी सबसे प्रसिद्ध पहचान बन चुका है जहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। उनकी सादगी हनुमान भक्ति और प्रेम सेवा का संदेश आज भी लोगों को आकर्षित करता है। बाबा का जीवन इस बात का उदाहरण माना जाता है कि किसी संत की पहचान केवल उसके चमत्कारों की कहानियों से नहीं बल्कि उसकी शिक्षाओं और लोगों के जीवन पर पड़े प्रभाव से भी बनती है।

  • BJP : संगठन में फेरबदल के बाद मंत्रिमंडल में विस्तार की उम्मीद… सांसदों ने दिल्ली में डाला डेरा

    BJP : संगठन में फेरबदल के बाद मंत्रिमंडल में विस्तार की उम्मीद… सांसदों ने दिल्ली में डाला डेरा


    नई दिल्ली।
    भाजपा संगठन (BJP Organization) की टीम गठन के बाद केंद्र सरकार (Central Government) में संभावित विस्तार और फेरबदल (Reshuffle) को लेकर उम्मीद लगाए सांसदों की ऊहापोह बढ़ती जा रही है। सांसद अपने क्षेत्रों से ज्यादा दिल्ली में समय बिता रहे हैं। संसद के मॉनसून सत्र (Monsoon Session) का अभी तक सत्रावसान भी नहीं हुआ है, ऐसे में सत्र के फिर से कभी भी आहूत होने की संभावना है। दूसरी तरफ मंत्रिमंडल विस्तार की भी संभावना बनी हुई है।


    मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें

    भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन (BJP President Nitin Navin) की टीम के गठन के बाद से ही इस बात की अटकलें रही हैं कि केंद्रीय मंत्रिपरिषद का भी अब जल्द ही विस्तार किया जाएगा। सरकार में कई मंत्री पद खाली भी हैं। संगठन की टीम से बाहर हुए और उसमें जगह न पा सके नेताओं को अब सरकार के विस्तार को लेकर काफी उम्मीदें हैं। अटकलों के बाजार में कोई न कोई तारीख के आ जाने से इन सांसदों की उम्मीदें भी बढ़ जाती हैं।


    संसद का सत्र भी बुलाया जा सकता है

    संगठन और सरकार में किसका पहले विस्तार होगा, पहले इसकी चर्चा थी, तो अब संसद सत्र को फिर से बुलाने और सरकार के विस्तार में क्या पहले होगा, इसकी अटकलें लगाई जा रही हैं। इस बात की संभावना बनी हुई है कि कभी भी फिर से संसद सत्र आयोजित हो सकता है। इसमें महिला आरक्षण संशोधन और परिसीमन विधेयक लाए जा सकते हैं। ये विधेयक पिछले बजट सत्र में सरकार पारित नहीं करा सकी थी। चूंकि, इसके लिए सरकार को अन्य दलों का भी समर्थन जरूरी है।

    2027 की शुरुआत में उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में विधानसभा के चुनाव भी होने हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार में भी यूपी का ध्यान रखा जाएगा। फिलहाल अगर पीएम मोदी को भी जोड़ लें तो उत्तर प्रदेश से 11 मंत्री हैं। लखनऊ से सांसद राजनाथ सिंह रक्षा मंत्रालय की बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसके अलावा पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी भी उत्तर प्रदेश से ही चुनकर राज्यसभा आए हैं। इस लिस्ट में बीएल वर्मा, एसपी सिंह बघेल, अनुप्रिया पटेल, जितिन प्रसाद, पंकज चौधरी, कमलेश पासवान और कीर्तिवर्धन सिंह का नाम है।

    पार्टी में चर्चा यही है कि जिन बड़े नेताओं को केंद्रीय कार्यकारिणी में जगह नहीं मिल पाई हैं, उन्हें मंत्रिमंडल में मौका मिल सकता है। कयास लगाए जा रहे हैं कि यूपी से लक्ष्मीकांत वाजपेयी को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। कयास पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को लेकर भी थे। हालांकि अब उन्हें अडमान निकोबार का उपराज्यपाल नियुक्त कर दिया गया है।

  • देशभर में 11 सितंबर तक भारी बारिश के आसार… उत्तराखंड-हिमाचल में फ्लैश फ्लड की चेतावनी

    देशभर में 11 सितंबर तक भारी बारिश के आसार… उत्तराखंड-हिमाचल में फ्लैश फ्लड की चेतावनी


    नई दिल्ली।
    देशभर में मौसम प्रणालियों (Weather systems) की सक्रियता के चलते उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्व, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के तमाम हिस्सों में 11 सितंबर तक तेज बारिश (Heavy rain), आंधी-तूफान की संभावना है। कुछ इलाकों में बिजली भी गिर सकती है। पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड (Uttarakhand) के आठ और हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के एक जिले में अगले 24 घंटे के दौरान अचानक बाढ़ (Flash flood) का खतरा है। बिहार में प्रमुख नदियों के खतरे के निशान से ऊपर बहने से बाढ़ का कहर बरकरार है और 16 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। वहीं, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की ऊंची चोटियों पर सीजन की पहली बर्फबारी हुई है।


    आईएमडी की बुलेटिन में क्या?

    भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से शनिवार को जारी बुलेटिन के अनुसार, उत्तराखंड के बागेश्वर, चमोली, चंपावत, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल और उत्तरकाशी जिलों व हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में 6 सितंबर सुबह 11:30 बजे तक अचानक बाढ़ आ सकती है। पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 6 सितंबर और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 8 सितंबर तक व्यापक वर्षा के आसार हैं।

    एमपी में बारिश का कहर जारी: आज 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
    मध्यप्रदेश में मानसून अब बाढ़ और उफनती नदियों वाला दौर दिखा रहा है। पूर्वी हिस्से में लगातार बारिश के बाद अब पश्चिम और उत्तरी जिलों में भी मानसून सक्रिय है। नर्मदा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। भोपाल के भदभदा और कलियासोत के साथ बरगी बांध के गेट भी खोले गए हैं। नदी-नालों के उफान और बांधों से छोड़े जा रहे पानी के कारण कई इलाकों में लोगों को सतर्क किया गया है। मौसम केंद्र ने रविवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, पन्ना और सतना में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, इंदौर, धार, उज्जैन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, श्योपुर, जबलपुर, मंडला, रीवा, सीधी, सिंगरौली समेत कई जिलों में हल्की से तेज बारिश हो सकती है।


    राजस्थान में मानसून फिर एक्टिव, 20 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट

    राजस्थान में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। शनिवार को जयपुर समेत कई जिलों में दिनभर बारिश हुई। आज भी 20 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट है। लगातार बारिश के कारण कई नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ गया है। सवाई माधोपुर, बारां, बूंदी और कोटा में कई जगह नदी की रपट डूब गईं। बारिश के कारण पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में दिन के तापमान में 6 डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई। जयपुर, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, दौसा और सवाई माधोपुर समेत कई जिलों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री से नीचे रहा। इससे दिन में भी मौसम ठंडा हो गया। मौसम विभाग के अनुसार बारिश का दौर 8 सितंबर तक जारी रह सकता है। इसके बाद करीब एक सप्ताह तक प्रदेश में बारिश की गतिविधियां कम रहने की संभावना है।


    हिमाचल में परियोजना को नुकसान

    हिमाचल प्रदेश में शिमला जिले के काशापाट पंचायत के कंडे में शुक्रवार रात बादल फटने से नोगली खड्ड में बाढ़ आ गई। इससे सेरीपुल स्थित गंगाधारी जलविद्युत परियोजना के भारी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ का पानी अपने साथ बड़ी मात्रा में मलबा लेकर आया, जो प्रोजेक्ट की संरचनाओं के आसपास जमा हो गया है। प्रदेश में 85 सड़कें, 51 पेयजल योजनाएं और 29 बिजली ट्रांसफार्मर भी बारिश और बाढ़ से प्रभावित हैं। वहीं, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के ऊंचे इलाकों में शनिवार को मौसम की पहली बर्फबारी हुई। गुमरी-जोजिला मार्ग के ऊंचे पहाड़ों, गुलमर्ग के ऊंचे इलाकों और पीर पंजाल रेंज में ऊंचे इलाके बर्फ से चमक उठे। ताटाकूटी पीक की चोटी और ऊपरी ढलानों पर भी हल्की बर्फबारी दर्ज की गई।


    मध्य और पूर्वी भारत में बढ़ा खतरा

    आईएमडी के अनुसार, मध्य भारत में पश्चिमी मध्य प्रदेश में 6-7 सितंबर को भारी बारिश की संभावना है, जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश में 5-8 सितंबर, छत्तीसगढ़ में 8-11 सितंबर और विदर्भ में 11 सितंबर को व्यापक वर्षा का अनुमान है। पूर्वी भारत के अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 11 सितंबर तक व्यापक वर्षा होगी। बिहार में 7 से 11 सितंबर तक भारी बारिश होगी।


    क्यों हो रही है इतनी बारिश?

    मौसम विज्ञानियों के अनुसार, उत्तरी मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र शनिवार सुबह कमजोर होकर उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश व दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर स्थित हो गया है, जिसके अगले दो दिनों में पूर्व-उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही निचले क्षोभमंडल में दक्षिणी हरियाणा से दक्षिणी असम तक और दक्षिणी गुजरात से उत्तरी बांग्लादेश तक दो अलग-अलग निम्न दबाव के क्षेत्र सक्रिय हैं।

  • PM मोदी का आलोचकों पर पलटवार…. बोले- होम्योपैथी की गोली दी.. सारे दिमागी नक्सल बाहर आ गए…

    PM मोदी का आलोचकों पर पलटवार…. बोले- होम्योपैथी की गोली दी.. सारे दिमागी नक्सल बाहर आ गए…


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) पर दिए गए भाषण में दिमागी नक्सल (‘Urban Naxal’) शब्द के इस्तेमाल को लेकर जमकर विवाद हुआ था. अब पीएम मोदी ने अपने उस बयान का जिक्र करते हुए आलोचकों पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ नाम से जो होम्योपैथिक गोली दी थी, उसका असर अब साफ दिखने लगा है।

    दरअसल पीएम मोदी शनिवार को श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (Shri Ram College of Commerce- SRCC) के शताब्दी समारोह में पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने होम्योपैथी के सिद्धांत का उदाहरण देते हुए अपनी बात रखी. पीएम मोदी ने कहा, ‘आज 2013 के मुकाबले, देश आर्थिक रूप से, सामाजिक रूप से कहीं ज्यादा सुरक्षित है. लेकिन ये देखकर कुछ लोगों की छटपटाहट बढ़ रही है, बौखलाहट बढ़ रही है।

    उन्होंने आगे कहा, ‘अभी 15 अगस्त का मेरा भाषण आपने सुना होगा, ऐसे लोगों के लिए अभी मैंने लाल किले से, एक होम्योपैथी का डोज दिया था. होम्योपैथी की गोली एक छोटी सी गोली दी थी लाल किले से।


    ‘जैसे ही मैंने दिमागी नक्सल की होम्योपैथिक गोली…’

    प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आप जानते हैं होम्योपैथी के लिए कहते हैं कि इसका स्वभाव ऐसा है कि जब होम्योपैथी की दवाई शुरू करते हैं, तो शुरू के दौर में बीमारी एक दम से ज्यादा बढ़ जाती है, ये होम्योपैथी का स्वभाव है. ठीक वैसे ही, जैसे ही मैंने दिमागी नक्सल की होम्योपैथिक गोली दी, सारे दिमागी नक्सल एक-एक करके बाहर आने लगे. अब देश की जनता भी इस बीमारी को बढ़ावा देने वालों का असली चेहरा देख रही है।


    पुरानी सरकारों पर हमला

    इस दौरान पीएम मोदी ने देश की पुराने हालात का जिक्र किया. उन्होंने पिछली सरकारों पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘कुछ लोगों को लग सकता है कि ये 140 करोड़ लोगों का देश है, सब बहुत आसान था और मोदी ने नया क्या किया? लेकिन क्या ये सच में इतना आसान था? मैं आपको पुराने दिनों में ले जाना चाहता हूं. साल 2013 में जब केदारनाथ में आपदा आई थी, तब पूरी सरकार हिल गई थी. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें और कैसे निपटे।

    प्रधानमंत्री ने 2008 के दौर को याद दिलाते हुए कहा कि जब 2008 में बैंकिंग संकट आया, तो उस समय की सरकार सालों तक उसके पीछे छुपती रही. संकट से निपटने का साहस उनमें नहीं था, जिससे देश का पूरा बैंकिंग सिस्टम तबाही के कगार पर पहुंच गया था. साल 2008 में ही मुंबई में भयानक आतंकी हमला हुआ. तब की सरकार बाहरी दबाव में आ गई और पाकिस्तान को सबक सिखाने की हिम्मत नहीं जुटा सकी।

  • सिंधु के पानी के इस्तेमाल की भारत की नई तैयारी, लद्दाख में पहला रॉक चेक डैम तैयार, पाक को दिया झटका

    सिंधु के पानी के इस्तेमाल की भारत की नई तैयारी, लद्दाख में पहला रॉक चेक डैम तैयार, पाक को दिया झटका


    लेह। सिंधु नदी के पानी का स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक उपयोग करने की दिशा में लद्दाख में एक अहम परियोजना शुरू की गई है। उपशी में सिंधु नदी पर देश का पहला रॉक चेक डैम तैयार किया गया है। डैम में फिलहाल 10 फीट तक पानी जमा हो चुका है। परियोजना का उद्देश्य लद्दाख में जल उपलब्धता बढ़ाने के साथ खेती और स्थानीय जरूरतों के लिए पानी का बेहतर इस्तेमाल करना है।

    यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। इसके बाद भारत संधि के तहत आने वाली छह नदियों के जल का अपने हिस्से में अधिकतम उपयोग करने की दिशा में काम कर रहा है। सिंधु नदी भी इन्हीं नदियों में शामिल है।

    उपशी में तैयार डैम के जरिए स्थानीय स्तर पर पानी रोककर उसे लद्दाख की जरूरतों में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है और नदी का जो पानी बहाव के जरिए आगे चला जाता था, उसका एक हिस्सा स्थानीय उपयोग में आ सकेगा।

    56 करोड़ से ज्यादा की लागत, 36 और डैम प्रस्तावित

    उपशी का प्रोजेक्ट लद्दाख में प्रस्तावित बड़े जल संरक्षण अभियान का शुरुआती मॉडल है। सूत्रों के मुताबिक, सिंधु नदी पर 36 और रॉक चेक डैम बनाए जाने की योजना है। इसके लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है।

    प्रस्तावित परियोजना के तहत लेह में 7 हिमालयन रॉक चेक डैम और कारगिल में 29 चेक डैम बनाए जाएंगे। कारगिल जिले में सिंधु नदी बटालिक सेक्टर से होकर गुजरती है। सभी प्रस्तावित परियोजनाओं पर 56 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होने का अनुमान है।

    सीमेंट-चूने के बजाय नदी के पत्थरों से निर्माण

    उपशी के रॉक चेक डैम की निर्माण तकनीक इसे पारंपरिक बांधों से अलग बनाती है। इसे तैयार करने में सीमेंट या चूने का इस्तेमाल नहीं किया गया है। नदी के तल से निकाले गए बड़े प्राकृतिक पत्थरों को आपस में इंटरलॉक कर संरचना तैयार की गई है।

    इस डैम की पानी जमा करने की क्षमता करीब 4 करोड़ लीटर है। अधिकारियों के मुताबिक, स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल कर तैयार की गई ऐसी संरचनाएं लद्दाख जैसे क्षेत्र में जल संरक्षण के लिए उपयोगी मॉडल साबित हो सकती हैं।

    10 फीट पानी जमा, नहर से खेतों तक पहुंचेगा

    लद्दाख में खेती के लिए पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती रही है। खासकर वसंत ऋतु में बुवाई के दौरान किसानों को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है।

    उपशी डैम में जलस्तर 10 फीट तक पहुंचने के बाद इसे इगू फे नहर के जरिए आसपास के खेतों तक पहुंचाने की योजना है। इससे सिंचाई की सुविधा बढ़ेगी और खेती योग्य जमीन को पर्याप्त पानी मिलने की उम्मीद है।

    परियोजना के आगे बढ़ने के साथ लद्दाख के दूसरे इलाकों में भी इसी तरह की जल संरक्षण संरचनाएं विकसित करने की तैयारी है।

    पानी के स्थानीय इस्तेमाल पर बढ़ा फोकस

    उपशी का यह डैम केवल एक स्थानीय जल संरक्षण परियोजना नहीं, बल्कि सिंधु नदी तंत्र में भारत के अपने हिस्से के पानी के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम भी है। आने वाले समय में प्रस्तावित 36 अन्य डैमों पर काम आगे बढ़ता है तो लद्दाख में सिंचाई, स्थानीय जल उपलब्धता और कृषि गतिविधियों को इसका लाभ मिल सकता है।

  • दिनेश शर्मा को अंडमान-निकोबार का LG बनाकर BJP ने साधे कई निशाने, यूपी चुनाव से पहले खेला बड़ा दांव

    दिनेश शर्मा को अंडमान-निकोबार का LG बनाकर BJP ने साधे कई निशाने, यूपी चुनाव से पहले खेला बड़ा दांव


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से शनिवार देर रात जारी आदेश के मुताबिक उनकी नियुक्ति उस दिन से प्रभावी होगी, जिस दिन वे पदभार संभालेंगे। 62 वर्षीय दिनेश शर्मा फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं और उनका कार्यकाल नवंबर 2026 में खत्म होना था। ऐसे में उच्च सदन का कार्यकाल पूरा होने से पहले उन्हें उपराज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी दिया जाना राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    योगी सरकार में डिप्टी सीएम रह चुके हैं
    दिनेश शर्मा का उत्तर प्रदेश की राजनीति और भाजपा संगठन में लंबा अनुभव रहा है। 2017 से 2022 के बीच योगी आदित्यनाथ की पहली सरकार में वे उपमुख्यमंत्री रहे। इस दौरान माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे महत्वपूर्ण विभाग उनके पास थे।

    सक्रिय राजनीति में आने से पहले वे लखनऊ विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग में प्रोफेसर थे। इसके बाद वे लखनऊ के दो बार महापौर बने। 2008 में पहली बार मेयर चुने जाने के बाद 2012 में उन्होंने दोबारा यह जिम्मेदारी संभाली। संगठन में भी उनका कद लगातार बढ़ा। 2014 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया और वे गुजरात के पार्टी प्रभारी की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। 2023 में दिनेश शर्मा उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। उनकी राज्यसभा सदस्यता नवंबर 2026 तक थी।

    2027 के यूपी चुनाव से जोड़कर क्यों देखा जा रहा फैसला?
    दिनेश शर्मा को नई जिम्मेदारी ऐसे वक्त मिली है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसलिए उनकी नियुक्ति को सामान्य प्रशासनिक फेरबदल से आगे राजनीतिक संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

    भाजपा ने हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश को लेकर संगठनात्मक स्तर पर भी कई बदलाव किए हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में यूपी से आठ नेताओं को जगह मिली है। पार्टी के इस कदम को विधानसभा चुनाव से पहले संगठन मजबूत करने और अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच पहुंच बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

    ब्राह्मण चेहरे के तौर पर भी अहम
    दिनेश शर्मा ब्राह्मण समुदाय से आते हैं और उत्तर प्रदेश भाजपा में इस समुदाय के प्रमुख चेहरों में रहे हैं। ऐसे में अंडमान-निकोबार जैसे महत्वपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश की जिम्मेदारी मिलने को यूपी के सामाजिक समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

    हालांकि, इस नियुक्ति को केवल जातीय समीकरणों के चश्मे से देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। दिनेश शर्मा के पास विश्वविद्यालय, संगठन, राज्य सरकार और संसद—चारों स्तरों पर काम करने का लंबा अनुभव है। यही प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव भी उनकी नई जिम्मेदारी के लिए महत्वपूर्ण आधार माना जा सकता है।

    हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाना भी इसी कड़ी में
    यूपी में ब्राह्मण प्रतिनिधित्व को लेकर भाजपा की रणनीति की चर्चा के बीच पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी मिलना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नितिन नवीन की नई टीम में उन्हें राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है।

    हरीश द्विवेदी बस्ती से दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और लंबे समय तक संगठन में सक्रिय रहे हैं। उनका राजनीतिक सफर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू हुआ था। भाजपा संगठन में भी वे कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। ब्राह्मण समुदाय से आने वाले द्विवेदी का उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक आधार भी रहा है।

    भाजपा की मौजूदा रणनीति हालांकि सिर्फ ब्राह्मण या सवर्ण समीकरण तक सीमित नहीं दिखाई देती। पार्टी ने OBC, दलित और मुस्लिम समुदायों से जुड़े नेताओं को भी संगठन में महत्वपूर्ण स्थान दिया है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी 2027 से पहले सामाजिक समीकरणों के व्यापक संतुलन पर काम कर रही है।

    राज्यसभा में 94% उपस्थिति, 226 सवाल पूछे
    नई संवैधानिक जिम्मेदारी संभालने जा रहे दिनेश शर्मा का राज्यसभा में भी सक्रिय रिकॉर्ड रहा है। अगस्त 2026 तक सदन में उनकी उपस्थिति 94 प्रतिशत रही। इस दौरान उन्होंने 226 सवाल पूछे और 34 बहसों में हिस्सा लिया।

    अब उनके सामने अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। खास बात यह है कि वे ऐसे समय राज्यसभा से उपराज्यपाल की भूमिका में जा रहे हैं, जब उनका उच्च सदन का कार्यकाल समाप्त होने वाला था।

    2024 के झटके के बाद 2027 पर BJP का फोकस
    उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए 2027 का विधानसभा चुनाव बेहद अहम है। 2024 के लोकसभा चुनाव में राज्य में पार्टी के प्रदर्शन को अपेक्षाकृत झटका लगा था। इसके बाद संगठन में चुनावी प्रदर्शन, कार्यकर्ताओं की नाराजगी और सामाजिक समीकरणों को लेकर मंथन हुआ।

    अब एक तरफ यूपी के नेताओं को केंद्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, वहीं दिनेश शर्मा जैसे अनुभवी और बड़े ब्राह्मण चेहरे को संवैधानिक पद पर भेजा गया है। इन फैसलों को साथ रखकर देखें तो भाजपा की रणनीति में दो समानांतर लक्ष्य नजर आते हैं—OBC, दलित और अन्य सामाजिक समूहों के बीच आधार मजबूत करना और अपने पारंपरिक सवर्ण समर्थन को भी मजबूती से साथ बनाए रखना।

    इस लिहाज से दिनेश शर्मा की नियुक्ति सिर्फ अंडमान-निकोबार के प्रशासनिक बदलाव तक सीमित नहीं है। यह भाजपा के लिए संगठन, सामाजिक संतुलन और 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारी—तीनों स्तरों पर महत्व रखने वाला फैसला है।

  • एमपी में बारिश से नदियां उफान पर, तीन डैम के गेट खुले, आज 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    एमपी में बारिश से नदियां उफान पर, तीन डैम के गेट खुले, आज 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून का असर अब पूर्वी हिस्से से आगे बढ़कर पश्चिमी क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। लगातार बारिश से कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं और नर्मदा समेत प्रदेश की कई नदियां उफान पर हैं। बरगी, भदभदा और कलियासोत डैम के गेट खोले जा चुके हैं। प्रदेश के 12 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है, जबकि सीजन में अब तक बारिश का आंकड़ा 30 इंच से ज्यादा पहुंच गया है।

    रविवार को ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग के 15 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी है। मौसम का असर जनजीवन पर भी पड़ा है। शनिवार को सीधी के कैमूर पहाड़ स्थित मूड़ा घाटी में लैंडस्लाइड के बाद सीधी-उत्तर प्रदेश मार्ग बंद हो गया। बारिश के कारण सड़क पर बड़े पत्थर और पेड़ गिर गए। सड़क के नीचे 100 फीट से ज्यादा गहरी खाई होने के कारण इस हिस्से में दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया है।

    छतरपुर में स्कूल बंद, उमरिया में महिला बही

    लगातार मूसलाधार बारिश के चलते छतरपुर में सभी स्कूल बंद रहे। लवकुशनगर में एक कच्चा मकान बारिश के बीच ढह गया। उमरिया में बाढ़ के पानी में एक महिला के बहने की घटना सामने आई है। मैहर में पुलों के ऊपर से पानी बहने के कारण मुकुंदपुर मार्ग बंद है।

    भोपाल में पहले भदभदा डैम के गेट खोले गए और अब कलियासोत डैम से भी पानी छोड़ा जा रहा है। इसके बाद कलियासोत नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    इन 15 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

    मौसम केंद्र भोपाल (IMD) ने रविवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, पन्ना और सतना में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने का अनुमान है।

    6 सितंबर को भी सक्रिय रहेगा सिस्टम

    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 6 सितंबर को भी मानसूनी सिस्टम सक्रिय रहेगा। हालांकि इंदौर में इस दौरान तेज बारिश की संभावना नहीं है। इसके बाद 7, 8 और 9 सितंबर को भी प्रदेश के कुछ हिस्सों में तेज बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।

    23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD के आंकड़ों के अनुसार अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से अधिक बारिश दर्ज हुई है।

    पूर्वी हिस्से में सुधरा बारिश का आंकड़ा

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब 1% कम बताया गया है। वहीं बालाघाट, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 1% से 22% तक कम बारिश हुई है।

    हालांकि पिछले एक सप्ताह में स्थिति में काफी सुधार आया है। बीते सात दिनों से पूर्वी हिस्से के कई जिलों में लगातार बारिश और बाढ़ के हालात बने हुए हैं। इसका असर सीजन के आंकड़ों पर भी पड़ा है और पहली बार पूर्वी हिस्सा बारिश के मामले में बेहतर स्थिति में आया है। यहां बारिश का आंकड़ा अब सामान्य से 3% ज्यादा हो गया है।

    पश्चिमी हिस्से में 53% तक कम बारिश

    इसके उलट पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई जिले अब भी बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य के मुकाबले 2% से 53% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

  • कंगना रनौत ने अधिकारियों को दी नसीहत, कहा जनता के पैसे का दुरुपयोग रोककर योजनाओं का लाभ व्यक्ति तक पहुंचाएं

    कंगना रनौत ने अधिकारियों को दी नसीहत, कहा जनता के पैसे का दुरुपयोग रोककर योजनाओं का लाभ व्यक्ति तक पहुंचाएं

    नई दिल्ली । हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत ने जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति यानी दिशा की बैठक में अधिकारियों के कामकाज को लेकर सख्त रुख अपनाया। केंद्र प्रायोजित योजनाओं और सांसद निधि से जुड़े विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान उन्होंने सरकारी धन के इस्तेमाल, योजनाओं की प्रगति और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर अधिकारियों से स्पष्ट जवाब मांगा।

    बैठक के दौरान कंगना रनौत ने इस बात पर जोर दिया कि जनता से जुड़े विकास कार्य केवल सरकारी रिकॉर्ड और कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि केंद्र सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ पात्र और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए योजनाओं की नियमित निगरानी और जमीनी स्तर पर प्रगति की समीक्षा जरूरी है।

    सांसद ने सरकारी धन के उपयोग को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जनता का पैसा गलत हाथों में नहीं जाना चाहिए और किसी भी स्तर पर धन के दुरुपयोग या अनियमितता की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। बैठक में उन्होंने व्यवस्था में निगरानी को मजबूत करने की जरूरत बताई और अधिकारियों से विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखने को कहा।

    कंगना ने अधिकारियों से कहा कि सांसद निधि और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत स्वीकृत कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। उनके मुताबिक विकास कार्यों की गति के साथ उनकी गुणवत्ता पर भी बराबर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह सुनिश्चित करने को कहा कि योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे और किसी पात्र व्यक्ति को केवल प्रशासनिक देरी के कारण परेशानी न हो।

    बैठक में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति पर चर्चा के दौरान सांसद ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की साझा जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से होने वाले हर काम में जवाबदेही जरूरी है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।

    कंगना रनौत का रुख इस बात पर केंद्रित रहा कि विकास योजनाओं की निगरानी केवल बैठकों तक सीमित न रहे। उन्होंने अधिकारियों से जमीनी स्थिति की जानकारी लेने, लंबित कार्यों की समीक्षा करने और निर्धारित समयसीमा के भीतर काम पूरा कराने पर ध्यान देने को कहा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ पहुंचाने की कोशिश को गति मिल सकती है।

    सांसद ने बैठक में यह भी संकेत दिया कि प्रशासनिक स्तर पर काम में ढिलाई को लेकर जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही बढ़ती है। उनका कहना था कि लोगों को यह भरोसा होना चाहिए कि उनके लिए स्वीकृत धन और योजनाओं का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के लिए ही किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से समन्वय बनाकर काम करने और विकास कार्यों की नियमित समीक्षा की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया।

    कंगना रनौत इससे पहले भी मंडी की दिशा बैठकों में अधिकारियों के कामकाज को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुकी हैं। अक्टूबर 2025 में हुई बैठक के दौरान भी उन्होंने अधिकारियों को विकास कार्यों को गंभीरता से लेने और लापरवाही से बचने की नसीहत दी थी। इस बार की बैठक में भी उनका मुख्य जोर सरकारी योजनाओं की निगरानी, सांसद निधि के प्रभावी इस्तेमाल और प्रशासनिक जवाबदेही पर रहा।