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  • अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन कोर कमांडर वार्ता आज, वचा-दमाई में एलएसी तनाव घटाने पर होगी अहम चर्चा

    अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन कोर कमांडर वार्ता आज, वचा-दमाई में एलएसी तनाव घटाने पर होगी अहम चर्चा


    नई दिल्ली । 
    अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर हालिया तनाव के बीच भारत और चीन की सेनाओं के बीच आज 6 सितंबर को पहली बार कोर कमांडर स्तर की उच्चस्तरीय सैन्य वार्ता होने जा रही है। यह बैठक अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के ताकसिंग क्षेत्र में स्थित वचा-दमाई बॉर्डर मीटिंग पॉइंट पर आयोजित की जाएगी। दोनों पक्षों के बीच होने वाली इस बातचीत को पूर्वी सेक्टर में सीमा प्रबंधन और तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    अब तक भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की अधिकांश महत्वपूर्ण सैन्य वार्ताएं पूर्वी लद्दाख के चुशूल-मोल्दो बॉर्डर मीटिंग पॉइंट पर होती रही हैं। अरुणाचल प्रदेश में पहली बार इसी स्तर की बैठक होने से दोनों सेनाओं के बीच पूर्वी सेक्टर से जुड़े स्थानीय और परिचालन संबंधी मुद्दों पर सीधे संवाद का नया माध्यम स्थापित होगा।

    भारतीय पक्ष का नेतृत्व 3 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया करेंगे। रंगापहार स्थित 3 कोर, जिसे स्पीयर कोर के नाम से भी जाना जाता है, अरुणाचल प्रदेश में एलएसी के कई संवेदनशील और दुर्गम इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालती है। राज्य में एलएसी की सुरक्षा के लिए तेजपुर स्थित 4 कोर और रंगापहार स्थित 3 कोर की महत्वपूर्ण भूमिका है।

    बैठक की पृष्ठभूमि में ऊपरी सुबनसिरी जिले के ताकसिंग क्षेत्र में हालिया तनाव और दोनों पक्षों के बीच उत्पन्न गतिरोध को प्रमुख वजह माना जा रहा है। भारत और चीन के बीच एलएसी की स्थिति को लेकर अलग-अलग धारणाएं हैं। कई स्थानों पर इन्हीं मतभेदों के कारण सैनिक आमने-सामने आ जाते हैं और स्थानीय स्तर पर तनाव की स्थिति बनती है।

    ऐसे में सैन्य कमांडरों की सीधी बातचीत का उद्देश्य जमीन पर पैदा होने वाली गलतफहमियों को रोकना और मौजूदा मतभेदों का बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशना है। भारत की ओर से सीमा से जुड़े मामलों में स्पष्ट और दृढ़ रुख बनाए रखने के साथ सैन्य संपर्क के माध्यम से स्थिरता कायम करने पर जोर दिया जाता रहा है।

    अरुणाचल प्रदेश में होने वाली यह बैठक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की हालिया चीन यात्रा के बाद बने व्यापक कूटनीतिक माहौल में हो रही है। दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच सीमा प्रबंधन, शांति और सैन्य संपर्क को मजबूत करने को लेकर बातचीत हुई थी। इसी प्रक्रिया के तहत सीमा पर संवाद के अतिरिक्त तंत्र विकसित करने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं।

    भारत और चीन के संबंधों में वर्ष 2020 के गलवान संघर्ष के बाद एलएसी पर सैन्य तैयारियों को लेकर विशेष सतर्कता रही है। पूर्वी लद्दाख में लंबे समय तक चले गतिरोध के दौरान भारत ने सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी सैन्य मौजूदगी और परिचालन क्षमता को मजबूत किया। अब अरुणाचल सेक्टर में उच्चस्तरीय सैन्य संवाद शुरू होना सीमा प्रबंधन के दायरे के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।

    भारतीय सेना ने अरुणाचल क्षेत्र में अपनी परिचालन तैयारियों की भी समीक्षा की है। 3 कोर मुख्यालय में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की ओर से क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति, तैनाती और क्षमताओं को लेकर नियमित आकलन किया जाता रहा है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस क्षेत्र में सैन्य बुनियादी ढांचे और तैयारियों का महत्व भी काफी अधिक है।

    वचा-दमाई में होने वाली वार्ता से तत्काल किसी बड़े समाधान की अपेक्षा के बजाय दोनों सेनाओं के बीच संवाद को मजबूत करने, स्थानीय तनाव नियंत्रित करने और एलएसी पर स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों को आगे बढ़ाने की उम्मीद है। पूर्वी सेक्टर में इस नए सैन्य संपर्क तंत्र से भविष्य में सीमा से जुड़े मुद्दों पर सीधे बातचीत का रास्ता और मजबूत हो सकता है।

  • BS-III और BS-IV डीजल वाहनों के लिए उम्मीद, चार से पांच हजार रुपये में लग सकती है उत्सर्जन नियंत्रण डिवाइस

    BS-III और BS-IV डीजल वाहनों के लिए उम्मीद, चार से पांच हजार रुपये में लग सकती है उत्सर्जन नियंत्रण डिवाइस

    नई दिल्ली । पुराने डीजल वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने और उन्हें सीधे कबाड़ में भेजने की जरूरत घटाने के लिए नई तकनीक पर जोर दिया जा रहा है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली द्वारा विकसित रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइस यानी आरईसीडी इसी दिशा में तैयार की गई तकनीक है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इसके परीक्षण को सफल बताते हुए पुराने वाहनों के लिए संभावित राहत का संकेत दिया है।

    राजधानी दिल्ली समेत देश के कई शहरों में पुराने डीजल वाहनों के उत्सर्जन को लेकर लंबे समय से चिंता बनी हुई है। बढ़ते प्रदूषण के बीच वाहनों के उत्सर्जन मानकों को सख्त करने पर लगातार जोर दिया जाता रहा है। दूसरी ओर, पुराने वाहन मालिकों, खासकर व्यावसायिक वाहन संचालकों के लिए नया वाहन खरीदना अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकता है। ऐसे में रेट्रोफिट तकनीक को एक वैकल्पिक समाधान के तौर पर देखा जा रहा है।

    आईआईटी दिल्ली की विकसित आरईसीडी का उद्देश्य डीजल इंजन से निकलने वाले प्रदूषक कणों को नियंत्रित करना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह उपकरण पार्टिकुलेट मैटर के उत्सर्जन को 90 प्रतिशत तक कम करने में सक्षम होने का दावा करता है। इसके अलावा नाइट्रोजन ऑक्साइड के उत्सर्जन में भी करीब 60 प्रतिशत तक कमी लाने की बात कही गई है।

    नितिन गडकरी के अनुसार, यदि बीएस-III और बीएस-IV श्रेणी के डीजल वाहनों में यह उपकरण प्रभावी ढंग से लगाया जाता है, तो उनके उत्सर्जन प्रदर्शन में बीएस-VI मानकों के करीब सुधार लाया जा सकता है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर पुराना वाहन स्वतः बीएस-VI वाहन की श्रेणी में आ जाएगा। इसके लिए निर्धारित तकनीकी और नियामकीय मानकों का पालन जरूरी होगा।

    इस तकनीक की एक खास बात इसकी संभावित कम लागत बताई जा रही है। गडकरी के अनुसार, आरईसीडी की कीमत लगभग चार हजार से पांच हजार रुपये के बीच रह सकती है। यदि अंतिम उत्पाद इसी दायरे में उपलब्ध होता है और नियामकीय स्वीकृति मिलती है, तो पुराने वाहनों के मालिकों के लिए यह नई गाड़ी खरीदने की तुलना में कम खर्च वाला विकल्प हो सकता है।

    सरकार की ओर से इस तकनीक के लिए ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड 228 के तहत ड्राफ्ट नोटिफिकेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की संभावना है। किसी भी व्यापक इस्तेमाल से पहले उपकरण की कार्यक्षमता, सुरक्षा, टिकाऊपन और वास्तविक उत्सर्जन नियंत्रण क्षमता का मानकों के अनुरूप परीक्षण आवश्यक होगा। इसके बाद ही इसके उपयोग को लेकर अंतिम नियम स्पष्ट होंगे।

    आरईसीडी का संभावित इस्तेमाल केवल वाहनों तक सीमित नहीं रहने की बात कही गई है। डीजल से संचालित जनरेटरों में भी इस तकनीक को अपनाने की संभावना बताई गई है। इससे ऐसे उपकरणों से निकलने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है, हालांकि इसके लिए अलग-अलग परिस्थितियों में तकनीकी उपयुक्तता और नियामकीय आवश्यकताओं का परीक्षण जरूरी होगा।

    गडकरी पहले भी वाहन स्क्रैपिंग को बढ़ावा देने और पुराने वाहनों को हटाने के लिए प्रोत्साहनों पर जोर दे चुके हैं। उनका तर्क रहा है कि पुराने वाहनों की जगह नए वाहन आने से वाहन उद्योग की बिक्री और उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है। लेकिन नई उत्सर्जन नियंत्रण तकनीक से स्क्रैपिंग और प्रदूषण नियंत्रण के बीच संतुलन बनाने का विकल्प सामने आ सकता है।

    फिलहाल आरईसीडी को लेकर सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका आधिकारिक नियामकीय ढांचे में शामिल होना है। यदि परीक्षणों और निर्धारित मानकों में तकनीक सफल रहती है तथा इसे व्यापक मंजूरी मिलती है, तो पुराने डीजल वाहनों को लेकर नीति में बदलाव की संभावना बन सकती है। इससे प्रदूषण घटाने के साथ वाहन मालिकों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है।

  • चेन्नई में TVK नेता कन्नन की सड़क पर हत्या, छह हमलावरों ने धारदार हथियारों से किया हमला, पुलिस ने जांच तेज की

    चेन्नई में TVK नेता कन्नन की सड़क पर हत्या, छह हमलावरों ने धारदार हथियारों से किया हमला, पुलिस ने जांच तेज की


    नई दिल्ली ।
    तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में शनिवार रात एक व्यक्ति की सरेराह हत्या से सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान कन्नन के रूप में हुई है, जो हाल ही में TVK से जुड़े थे। पुलिस के मुताबिक, छह लोगों के एक समूह ने उन पर धारदार हथियारों से हमला किया। गंभीर हमले के कारण कन्नन की मौके पर ही मौत हो गई।

    घटना चेन्नई के वन्ननदुरई इलाके में हुई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कन्नन अपने घर से निकलकर रामास्वामी एवेन्यू स्थित अपने कार्यालय की ओर जा रहे थे। इसी दौरान हमलावरों ने उन्हें घेर लिया और हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों में भी दहशत का माहौल बन गया।

    बताया जा रहा है कि हमलावरों की संख्या छह थी। उन्होंने कन्नन पर धारदार हथियारों से कई वार किए। हमले के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घटना की पूरी वारदात आसपास लगे CCTV कैमरों में कैद होने की बात सामने आई है। पुलिस अब इन फुटेज को जांच का अहम हिस्सा मानकर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।

    घटना की सूचना मिलते ही शास्त्री नगर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ पुलिस ने आसपास के इलाकों से भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। मामले में हत्या का केस दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए विशेष टीमें गठित की हैं। CCTV फुटेज के अलावा पुलिस घटना से जुड़े अन्य संभावित साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। अधिकारियों की कोशिश है कि हमले में शामिल सभी लोगों की पहचान जल्द की जाए और उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की जाए।

    अब तक पांच संदिग्धों से पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, पूछताछ के आधार पर किसी आरोपी की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।

    जांच में मृतक कन्नन की आपराधिक पृष्ठभूमि भी सामने आई है। बताया गया है कि करीब आठ वर्ष पहले इसी इलाके में शिवा और वेलु नाम के दो लोगों की हत्या से जुड़े एक मामले में कन्नन के खिलाफ मुकदमा चल रहा था। पुलिस अब इस पुराने मामले और मौजूदा हत्या के बीच किसी संभावित संबंध की भी जांच कर सकती है।

    कन्नन के हाल ही में TVK में शामिल होने की जानकारी के बाद मामले का राजनीतिक पहलू भी चर्चा में है। हालांकि, फिलहाल पुलिस ने हत्या के पीछे राजनीतिक कारण होने की पुष्टि नहीं की है। जांच एजेंसियां सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की पड़ताल कर रही हैं।

    इस घटना ने चेन्नई में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। सरेराह हुई हत्या के बाद स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच जारी है।

    फिलहाल मामले में हत्या का कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। पुलिस CCTV फुटेज, संदिग्धों से पूछताछ और मृतक की पृष्ठभूमि से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के बाद हत्या की परिस्थितियों और इसके पीछे की वजह को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • संयुक्त राष्ट्र के नए मानचित्र प्रस्ताव पर भारत का स्पष्ट रुख, कहा संप्रभु क्षेत्र को गलत दिखाना किसी कीमत पर स्वीकार्य नहीं

    संयुक्त राष्ट्र के नए मानचित्र प्रस्ताव पर भारत का स्पष्ट रुख, कहा संप्रभु क्षेत्र को गलत दिखाना किसी कीमत पर स्वीकार्य नहीं

    नई दिल्ली । संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया के नक्शे को अधिक वास्तविक क्षेत्रफल के साथ प्रस्तुत करने वाले Equal Earth Projection को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव पर भारत ने अपना रुख स्पष्ट किया है। भारत ने प्रस्ताव के मूल उद्देश्य का समर्थन करते हुए कहा है कि दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व वास्तविक क्षेत्रफल के अनुरूप होना चाहिए। साथ ही भारत ने यह भी साफ किया कि उसके संप्रभु क्षेत्र को किसी भी गलत या भ्रामक तरीके से दिखाना स्वीकार्य नहीं है।

    संयुक्त राष्ट्र महासभा में शुक्रवार को पेश किए गए प्रस्ताव के पक्ष में भारत समेत 164 देशों ने मतदान किया। छह देश मतदान से दूर रहे, जबकि अमेरिका ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। प्रस्ताव का उद्देश्य ऐसे मानचित्र प्रक्षेपण को बढ़ावा देना है, जिसमें विभिन्न महाद्वीपों और क्षेत्रों के क्षेत्रफल को पारंपरिक नक्शों की तुलना में वास्तविक अनुपात के अधिक करीब दिखाया जा सके।

    भारत के विदेश मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को लेकर स्पष्ट किया कि इसका संबंध किसी विशेष राजनीतिक मानचित्र को स्वीकार करने से नहीं है। भारत के अनुसार, समान-क्षेत्र वाले मानचित्र प्रक्षेपण का मूल उद्देश्य दुनिया के विभिन्न हिस्सों, विशेष रूप से अफ्रीका जैसे बड़े भूभागों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के अनुरूप बेहतर प्रतिनिधित्व देना है।

    भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है, लेकिन इसके साथ अपनी स्थिति भी स्पष्ट की। भारत ने जोर दिया कि प्रस्ताव किसी विशेष मानचित्र, मानचित्र प्रक्षेपण या किसी देश की अंतरराष्ट्रीय सीमा के चित्रण को प्रमाणित नहीं करता। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से भौगोलिक क्षेत्रफल के प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित बनाना है।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि देश के आधिकारिक मानचित्र और संप्रभु क्षेत्र से जुड़े विषयों पर भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट है। भारत के अनुसार, जम्मू-कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख समेत उसका संपूर्ण संप्रभु क्षेत्र आधिकारिक भारतीय मानचित्र के अनुरूप ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए।

    भारत ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच, प्रकाशन या मानचित्र में उसके क्षेत्र को गलत तरीके से प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए। भारत का कहना है कि गलत या भ्रामक नक्शे उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े गंभीर विषय हैं। ऐसे चित्रण को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    इस पूरे मामले में मानचित्रों के राजनीतिक और भौगोलिक इस्तेमाल के बीच अंतर भी महत्वपूर्ण है। Equal Earth Projection जैसे मानचित्र प्रक्षेपण मुख्य रूप से पृथ्वी के अलग-अलग क्षेत्रों के आकार को तुलनात्मक रूप से सही ढंग से दिखाने पर केंद्रित होते हैं। इसके विपरीत राजनीतिक मानचित्र देशों की सीमाओं, विवादित क्षेत्रों और स्थानों के नामों को प्रदर्शित करते हैं।

    भारत ने इसी अंतर को रेखांकित करते हुए कहा है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा का प्रस्ताव किसी राजनीतिक सीमा या विवादित क्षेत्र की स्थिति तय नहीं करता। इसलिए प्रस्ताव के समर्थन को भारत की सीमाओं से संबंधित किसी अलग राजनीतिक स्थिति के समर्थन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

    प्रस्ताव के पारित होने के बाद दुनिया के नक्शे में बदलाव को लेकर चर्चा तेज हुई है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं बदल गई हैं। यह पहल मुख्य रूप से मानचित्र प्रक्षेपण और भौगोलिक क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व से संबंधित है।

    भारत का संदेश इस मामले में दो हिस्सों में स्पष्ट है। एक ओर उसने वास्तविक क्षेत्रफल को बेहतर तरीके से दर्शाने वाले मानचित्र प्रक्षेपण के सिद्धांत का समर्थन किया है, वहीं दूसरी ओर अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े आधिकारिक मानचित्रण पर किसी भी तरह की गलत प्रस्तुति को अस्वीकार किया है। इसी रुख के साथ भारत ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए अपनी सीमा संबंधी स्थिति दोहराई है।

  • सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मस्जिद हटाने के बाद जमीन के नीचे मिला कुआं, प्रशासन ने जांच के लिए तकनीकी टीम बुलाने की तैयारी की

    सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मस्जिद हटाने के बाद जमीन के नीचे मिला कुआं, प्रशासन ने जांच के लिए तकनीकी टीम बुलाने की तैयारी की

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद हटाए जाने के बाद जमीन के नीचे एक कुएं जैसी संरचना मिलने से प्रशासन की सक्रियता बढ़ गई है। मलबा हटाने के दौरान जमीन के भीतर ईंटों से बनी संरचना दिखाई दी, जिसे शुरुआती तौर पर कुआं माना जा रहा है। हालांकि, इसकी वास्तविक प्रकृति, आकार और गहराई के बारे में अभी कोई अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है।

    मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने मौके पर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों के अनुसार, संरचना की तकनीकी जांच कराई जाएगी। विशेषज्ञों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन के नीचे मिली संरचना वास्तव में कुआं है या किसी अन्य प्रकार का पुराना निर्माण। फिलहाल प्रशासन ने इसे ढक दिया है और मौके पर निगरानी रखी जा रही है।

    कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को हटाने की कार्रवाई अदालत के आदेश के आधार पर की गई थी। एसडीएम सदर सुबोध कुमार के अनुसार, प्रशासन ने न्यायालय के आदेश के तहत कार्रवाई की और इसके बाद परिसर की सफाई कराई गई। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं तथा आगे की प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है।

    मस्जिद हटाए जाने के बाद वहां मौजूद मलबे को भी हटाकर दूसरी जगह भेज दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, मलबे को सहारनपुर से करीब 10 किलोमीटर दूर निर्धारित स्थान पर डाला गया। इसी दौरान जमीन के नीचे ईंटों से बनी संरचना सामने आई। इसके बाद प्रशासन ने मौके की स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल ढक दिया और तकनीकी जांच कराने का निर्णय लिया।

    अधिकारियों के सामने फिलहाल सबसे बड़ा सवाल इस संरचना की वास्तविक बनावट और स्थिति को लेकर है। यह कितनी गहरी है, इसका व्यास कितना है और इसका निर्माण किस उद्देश्य से किया गया था, इन सभी पहलुओं की जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। प्रशासन जल्द तकनीकी टीम के माध्यम से इसकी जांच कराने की तैयारी में है।

    इस मामले को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल रविवार को सहारनपुर पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेने वाला है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर गठित दल स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और संबंधित लोगों से जानकारी जुटाएगा।

    समाजवादी पार्टी की ओर से दावा किया गया है कि 4 सितंबर की शाम प्रशासन की ओर से मस्जिद को सील किए जाने की बात कही गई थी और उसे नहीं हटाने का भरोसा दिया गया था। पार्टी के अनुसार, इसके बाद अदालत के आदेश का हवाला देते हुए मस्जिद को बुलडोजर की मदद से हटा दिया गया।

    प्रशासन और राजनीतिक दलों के दावों के बीच अब जमीन के नीचे मिली संरचना की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही इसके बारे में स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी। फिलहाल प्रशासन ने मौके पर सुरक्षा और निगरानी बढ़ाते हुए किसी भी तरह की अफवाह से बचने तथा तथ्य सामने आने तक स्थिति को नियंत्रित रखने पर जोर दिया है।

    घटना के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में प्रशासनिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। तकनीकी जांच पूरी होने के बाद संरचना की प्रकृति, उसकी गहराई और संभावित पुराने निर्माण से संबंध जैसी जानकारियां सामने आने की उम्मीद है। तब तक इसे लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

  • SRCC समारोह में पीएम मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, 2013 के दौर को याद कर महंगाई और घोटालों का किया जिक्र

    SRCC समारोह में पीएम मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, 2013 के दौर को याद कर महंगाई और घोटालों का किया जिक्र

    नई दिल्ली । दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक इमारत अचानक ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया। इमारत के मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत एवं बचाव दलों ने तत्काल अभियान शुरू कर दिया। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना दोपहर करीब 1:30 बजे के आसपास हुई। इमारत के अचानक गिरने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग को अलर्ट किया गया। इसके बाद दमकल की कई टीमें घटनास्थल के लिए रवाना हुईं और मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने तथा उसमें फंसे लोगों की तलाश शुरू की। बचावकर्मी बेहद सावधानी के साथ मलबे की जांच कर रहे हैं, ताकि अंदर मौजूद लोगों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचा जा सके।

    हादसे की गंभीरता को देखते हुए मौके पर राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। मलबे के नीचे कितने लोग फंसे हैं, इसकी सटीक संख्या फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रशासन और आपातकालीन टीमें स्थिति का लगातार आकलन कर रही हैं। जैसे-जैसे मलबा हटाया जाएगा, अंदर फंसे लोगों की स्थिति और हादसे में हुए नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

    सत्य निकेतन राजधानी दिल्ली का ऐसा इलाका है जहां बड़ी संख्या में छात्र और अन्य लोग रहते हैं। शुरुआती रिपोर्टों में इमारत में लोगों की मौजूदगी की बात सामने आई है, जिसके कारण बचाव अभियान को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौके पर मौजूद टीमें प्राथमिकता के आधार पर उन स्थानों की पहचान कर रही हैं जहां से किसी व्यक्ति के फंसे होने की संभावना अधिक है।

    बचाव कार्य के दौरान स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। हालांकि, मलबे को हटाने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है, क्योंकि किसी भी तरह की जल्दबाजी से फंसे लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है। आपातकालीन दल घटनास्थल पर लगातार काम कर रहे हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

    हादसे के कारणों को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इमारत की संरचनात्मक स्थिति, निर्माण कार्य या अन्य संभावित वजहों की जांच के बाद ही दुर्घटना का वास्तविक कारण सामने आएगा। लगातार बारिश के बीच दिल्ली में भवनों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है, हालांकि इस हादसे के लिए बारिश को जिम्मेदार मानना अभी जल्दबाजी होगी।

    प्रशासन की ओर से आसपास के क्षेत्र में भी सुरक्षा का जायजा लिया जा रहा है। बचाव अभियान पूरा होने के बाद इमारत के ढहने से हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर संबंधित विभागों की ओर से आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। दमकल और अन्य राहत दल लगातार अभियान में जुटे हैं। अधिकारियों की ओर से विस्तृत जानकारी मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे में कितने लोग प्रभावित हुए और कितने लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

  • दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में इमारत गिरने से मचा हड़कंप, दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं, मलबे में दबे लोगों की तलाश तेज

    दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में इमारत गिरने से मचा हड़कंप, दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं, मलबे में दबे लोगों की तलाश तेज

    नई दिल्ली । दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक इमारत अचानक ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया। इमारत के मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत एवं बचाव दलों ने तत्काल अभियान शुरू कर दिया। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना दोपहर करीब 1:30 बजे के आसपास हुई। इमारत के अचानक गिरने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग को अलर्ट किया गया। इसके बाद दमकल की कई टीमें घटनास्थल के लिए रवाना हुईं और मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने तथा उसमें फंसे लोगों की तलाश शुरू की। बचावकर्मी बेहद सावधानी के साथ मलबे की जांच कर रहे हैं, ताकि अंदर मौजूद लोगों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचा जा सके।

    हादसे की गंभीरता को देखते हुए मौके पर राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। मलबे के नीचे कितने लोग फंसे हैं, इसकी सटीक संख्या फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रशासन और आपातकालीन टीमें स्थिति का लगातार आकलन कर रही हैं। जैसे-जैसे मलबा हटाया जाएगा, अंदर फंसे लोगों की स्थिति और हादसे में हुए नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

    सत्य निकेतन राजधानी दिल्ली का ऐसा इलाका है जहां बड़ी संख्या में छात्र और अन्य लोग रहते हैं। शुरुआती रिपोर्टों में इमारत में लोगों की मौजूदगी की बात सामने आई है, जिसके कारण बचाव अभियान को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौके पर मौजूद टीमें प्राथमिकता के आधार पर उन स्थानों की पहचान कर रही हैं जहां से किसी व्यक्ति के फंसे होने की संभावना अधिक है।

    बचाव कार्य के दौरान स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। हालांकि, मलबे को हटाने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है, क्योंकि किसी भी तरह की जल्दबाजी से फंसे लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है। आपातकालीन दल घटनास्थल पर लगातार काम कर रहे हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

    हादसे के कारणों को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इमारत की संरचनात्मक स्थिति, निर्माण कार्य या अन्य संभावित वजहों की जांच के बाद ही दुर्घटना का वास्तविक कारण सामने आएगा। लगातार बारिश के बीच दिल्ली में भवनों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है, हालांकि इस हादसे के लिए बारिश को जिम्मेदार मानना अभी जल्दबाजी होगी।

    प्रशासन की ओर से आसपास के क्षेत्र में भी सुरक्षा का जायजा लिया जा रहा है। बचाव अभियान पूरा होने के बाद इमारत के ढहने से हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर संबंधित विभागों की ओर से आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। दमकल और अन्य राहत दल लगातार अभियान में जुटे हैं। अधिकारियों की ओर से विस्तृत जानकारी मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे में कितने लोग प्रभावित हुए और कितने लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

  • आरा जंक्शन पर महानंदा एक्सप्रेस की तीन बोगियां पटरी से उतरीं, यात्रियों में मची अफरातफरी, अप लाइन का परिचालन प्रभावित

    आरा जंक्शन पर महानंदा एक्सप्रेस की तीन बोगियां पटरी से उतरीं, यात्रियों में मची अफरातफरी, अप लाइन का परिचालन प्रभावित


    नई दिल्ली । बिहार के भोजपुर जिले में आरा स्टेशन पर बड़ा ट्रेन हादसा टल गया। यहां महानंदा एक्सप्रेस की तीन बोगियां बेपटरी हो गईं। अलीपुरद्वार जंक्शन-दिल्ली जाने वाली 15483 महानंदा एक्सप्रेस आरा जंक्शन पर करीब सवा चार बजे प्लेटफार्म नम्बर दो पर पहुंची थी। इसके बाद यहां से पं दीनदयाल उपाध्याय के रास्ते दिल्ली की ओर रवाना हुई।

    कुछ ही देर में महानंदा एक्सप्रेस के इंजन समेत तीन बोगियां अचानक पटरी से उतर गईं। इस हादसे के बाद रेलवे स्टाफ और ट्रेन में सवार यात्रियों के बीच अफरातफरी मच गई। बताया जा रहा है कि समस्या के कारण ट्रेन का सिग्नल सासाराम लाइन की ओर चले जाने की बात सामने आ रही है। इसके बाद इंजन समेत एसएलआर और एच-1 कोच पटरी से उतर गए।

    करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद पटरी से उतरे तीनों कोच को दोबारा ट्रैक पर चढ़ा दिया गया है। हालांकि अप लाइन पर परिचालन अब तक शुरू नहीं हो सका है।

    घटना के बाद रेलवे की तकनीकी टीम मौके पर पहुंची और ट्रैक व सिग्नल सिस्टम की जांच शुरू कर दी है। रेलवे अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि सिग्नल सासाराम लाइन की ओर क्यों गया और इस कारण ट्रेन गलत दिशा में कैसे चली गई। हादसे के कारण रेल परिचालन प्रभावित होने की सूचना है। रेलवे की ओर से परिचालन को सामान्य करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है।

    यात्रियों में मची अफरातफरी

    सुबह-सुबह हुई घटना से ट्रेन में सवार यात्रियों के बीच कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया। हालांकि, हादसे में किसी यात्री के हताहत होने की सूचना नहीं है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, घटना के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल तकनीकी टीम ट्रैक, सिग्नल और परिचालन व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

  • जोमैटो से मंगाई पाव भाजी में प्याज के बीच मिली जली हुई बीड़ी, ग्राहक ने फोटो साझा कर उठाए खाने की गुणवत्ता पर सवाल

    जोमैटो से मंगाई पाव भाजी में प्याज के बीच मिली जली हुई बीड़ी, ग्राहक ने फोटो साझा कर उठाए खाने की गुणवत्ता पर सवाल


    नई दिल्ली । बेंगलुरु में ऑनलाइन खाना मंगाने वाला व्यक्ति उस समय हैरान रह गया, जब उसके पाव भाजी के साथ प्याज के बीच बीड़ी भी मिली। सामान्य तौर पर खाने के साथ प्याज और चटनी मिलने की उम्मीद होती है, लेकिन इस ऑर्डर में बीड़ी देखकर ग्राहक ने अपना अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर किया। लिंक्डइन यूजर प्रियम ने पोस्ट में बताया कि उन्होंने जोमैटो से पाव भाजी मंगाई थी और खाने के साथ उन्हें बीड़ी भी मिली। उन्होंने फोटो साझा करते हुए लिखा कि उन्हें मुफ्त में बीड़ी मिली है, लेकिन इस तरह की चीज की उन्हें बिल्कुल उम्मीद नहीं थी। बीड़ी पूरी तरह जली हुई थी और कटे हुए प्याज के बीच रखी हुई दिखाई दे रही थी।

    प्रियम ने अपनी पोस्ट में जोमैटो को भी टैग किया, जिसके बाद कंपनी की ओर से प्रतिक्रिया दी गई। जोमैटो ने कमेंट करते हुए ग्राहक से ऑर्डर की जानकारी शेयर करने को कहा, ताकि मामले की जांच की जा सके। कंपनी ने लिखा, ‘होले प्रियम, कृपया हमें अपना ऑर्डर आईडी प्राइवेट मैसेज के जरिए भेजें, ताकि हम इस मामले को देख सकें।’ इसके बाद ग्राहक ने एक और अपडेट साझा करते हुए बताया कि जोमैटो ने उन्हें अगली खरीदारी के लिए 100 रुपये का कूपन दिया है।

    भोजन की क्वालिटी पर उठे सवाल

    अभी तक यह साफ नहीं है कि बीड़ी खाने की पैकिंग के दौरान किस स्तर पर पैकेट में पहुंची। मामले को लेकर कंपनी की ओर से जांच या कार्रवाई की जानकारी भी सामने नहीं आई है। इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे लेकर मजाक किया और किसी ने इसे एक्स्ट्रा धुएं का स्वाद बताया। एक अन्य यूजर ने इसे मजाकिया अंदाज में सीजनल ऑफर तक कह दिया।

    यूजर्स ने गंभीर मामला बताया

    कई लोगों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए खाने की साफ-सफाई और स्वच्छता पर सवाल उठाए। एक यूजर ने कहा कि ऐसी घटनाओं के बाद घर का बना खाना खाना ही बेहतर है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि खाने की पैकिंग आमतौर पर रेस्तरां की जिम्मेदारी होती है और जोमैटो मुख्य रूप से डिलीवरी प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करता है। हालांकि, ग्राहक के अनुभव ने ऑनलाइन खाना मंगाने के दौरान साफ-सफाई और पैकेजिंग की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • 11 दिन बाद भी नेपाल में तबाही का असर बरकरार, चीन-नेपाल व्यापार मार्ग तबाह होने से आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव

    11 दिन बाद भी नेपाल में तबाही का असर बरकरार, चीन-नेपाल व्यापार मार्ग तबाह होने से आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव

    नई दिल्ली । नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और हिमस्खलन के 11 दिन बाद भी तबाही का मंजर जारी है। चीन-नेपाल के बीच जमीनी व्यापार का प्रमुख केंद्र ग्यिरोंग पोर्ट और उससे जुड़ी सीमा चौकी पूरी तरह तबाह हो चुकी है। लगातार सामने आ रहीं तस्वीरें इसकी भयावह स्थिति बयां कर रही हैं। चीन ने नेपाल में हुई इस तबाही से हुए नुकसान पर भले ही चुप्पी साध रखी हो, लेकिन इस आर्थिक गलियारे के ठप होने से नेपाल की अर्थव्यवस्था और आपूर्ति शृंखला पर असर साफ दिखने लगा है। भारत के जाने-माने भू-रणनीतिकार और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक ब्रह्मा चेलानी का कहना है कि इस रास्ते होने वाला व्यापार पूरी तरह ठप होने से काठमांडो को अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए भारत पर और अधिक निर्भर होना पड़ेगा।

    महंगाई का दिखने लगा असर

    बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत ट्रांस-हिमालय कनेक्टिविटी नेटवर्क में चीन ग्यिरोंग क्रॉसिंग को एक रणनीतिक केंद्र मानता है। ग्यिरोंग बंद होने से आपूर्ति शृंखला बाधित हो गई है। इससे चीनी सामानों की कमी हो रही है और नेपाल के घरेलू बाजार में महंगाई का दबाव बढ़ रहा है। यहां दोनों देशों के बीच ट्रकों की आवाजाही, माल की चेकिंग, क्लियरेंस और स्टोरेज के लिए बड़े ड्राई पोर्ट और गोदाम बने थे।

    लाखों टन मलबा साफ करने के बाद ही शुरू हो पाएगा मार्ग

    तबाही के बाद व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह बहाल करने में अभी काफी समय लगेगा। भारी मालवाहक ट्रैफिक सुरक्षित रूप से फिर से शुरू होने से पहले इंजीनियरों को लाखों टन मलबा साफ करना होगा, ऊंचे पहाड़ी रास्तों को स्थिर करना होगा, हिमस्खलन के कारण ऊपर की ओर बनी झीलों के खतरे को कम करना होगा और बह चुके पुलों का पुनर्निर्माण करना होगा।

    चमत्कार: दो और जिंदगियां बचाई गईं

    अब इसे कुदरत का करिश्मा कहें या चमत्कार, नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के 11वें दिन शनिवार को मलबे में दबे एक चार मंजिला मकान से एक बुजुर्ग महिला को जिंदा निकाला गया। परिजनों ने महिला के जीवित मिलने की उम्मीद छोड़ दी थी और उनका प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी कर दिया था। वहीं, बचाव दलों ने अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना से जुड़ी एक सुरंग से एक चीनी नागरिक को भी सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की है। नेपाल सशस्त्र पुलिस बल के अनुसार, नुवाकोट जिले के बिदुर शहर में 60 वर्षीय चंडिका श्रेष्ठ एक चार मंजिला इमारत की सबसे ऊपरी मंजिल पर कीचड़ और मलबे के नीचे फंसी हुई थीं।

    अब तक 1,344 की मौत

    26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा पर आए हिमस्खलन के बाद भोटेकोशी नदी में आई इस विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। देश भर में मृतकों का आंकड़ा 1,344 तक पहुंच गया है, जबकि 589 विदेशी नागरिकों सहित लगभग 5,000 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें भारत के भी 250 से अधिक नागरिक शामिल हैं। तेज धारा देख पहाड़ की ओर भागे 130 लोग, सामने ही बह गया एक साथी… गोरखपुर। पिपराइच निवासी आशुतोष उपाध्याय हाइड्रो पावर में काम कर रहे थे। बचकर किसी तरह पहुंचे हैं। बताया अचानक सभी लोग भागने लगे। नदी की तेज होती धारा देखकर मैं और करीब 130 लोग जान बचाने के लिए पहाड़ की ओर भागे। हम लोग तो बच गए पर एक साथी सामने ही बह गया।