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  • हरिद्वार में पुलिस ने धार्मिक स्थलों से हटाए 94 लाउडस्पीकर, दोबारा उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

    हरिद्वार में पुलिस ने धार्मिक स्थलों से हटाए 94 लाउडस्पीकर, दोबारा उल्लंघन पर होगी कार्रवाई


    देहरादून। ध्वनि प्रदूषण को लेकर हरिद्वार पुलिस ने जिलेभर में विशेष अभियान चलाते हुए धार्मिक स्थलों से 94 लाउडस्पीकर हटाए हैं। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान ये लाउडस्पीकर निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज में संचालित पाए गए थे, जो ध्वनि प्रदूषण नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन था।

    पुलिस की टीमों ने अभियान के तहत हरिद्वार जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग थाना क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले धार्मिक स्थलों का निरीक्षण किया। जहां भी नियमों का उल्लंघन मिला, वहां कार्रवाई करते हुए लाउडस्पीकर हटाए गए। अभियान के दौरान शहरी क्षेत्रों से 31 लाउडस्पीकर और ग्रामीण इलाकों से 63 लाउडस्पीकर हटाए गए। इस तरह पूरे जिले में कुल 94 लाउडस्पीकरों पर कार्रवाई की गई।

    नियमों की जानकारी भी दी गई
    हरिद्वार पुलिस ने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लोगों को ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों के प्रति जागरूक करना भी है। इस दौरान धार्मिक स्थलों के प्रबंधन और संबंधित समितियों को नियमों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि बिना अनुमति लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जा सकता। वहीं, अनुमति मिलने के बाद भी निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन करना अनिवार्य है।

    उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई
    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि कोई व्यक्ति या संस्था बिना अनुमति लाउडस्पीकर चलाती है या तय मानकों से अधिक आवाज में इसका इस्तेमाल करती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    आगे भी जारी रहेगा अभियान
    दरअसल, ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार की ओर से समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। इन्हीं नियमों के तहत स्थानीय प्रशासन और पुलिस सार्वजनिक व धार्मिक स्थलों पर ध्वनि उपकरणों के इस्तेमाल की निगरानी करते हैं।

    हरिद्वार पुलिस के अनुसार, यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और जहां भी नियमों का उल्लंघन सामने आएगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी में बताया गया है कि कार्रवाई विभिन्न धार्मिक स्थलों पर नियमों के उल्लंघन के मामलों में की गई।

  • ट्रंप के चुनावी दावों पर व्हाइट हाउस में बढ़ी सियासी हलचल, पीटर नवारो बोले- अमेरिकी चुनावी व्यवस्था की कमजोरियां सामने आईं

    ट्रंप के चुनावी दावों पर व्हाइट हाउस में बढ़ी सियासी हलचल, पीटर नवारो बोले- अमेरिकी चुनावी व्यवस्था की कमजोरियां सामने आईं


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका में चुनावी सुरक्षा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चुनावी सुरक्षा से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने और वर्ष 2020 के चुनाव को लेकर गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद व्हाइट हाउस और अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। इस बीच राष्ट्रपति के काउंसलर पीटर नवारो ने ट्रंप के दावों का समर्थन करते हुए कहा कि यह मुद्दा किसी विदेशी देश से अधिक अमेरिकी चुनावी व्यवस्था की कमजोरियों और उसे सुरक्षित बनाने की आवश्यकता से जुड़ा है।

    पीटर नवारो ने कहा कि यदि ‘सेव अमेरिका एक्ट’ लागू होता है तो चुनाव प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बन सकती है। उनके अनुसार प्रस्तावित कानून में मतदाता पहचान पत्र, नागरिकता का प्रमाण और अनुपस्थित मतदान की प्रक्रिया को अधिक सख्त बनाने जैसे प्रावधान शामिल हैं। उनका कहना है कि ऐसे कदमों से चुनावी प्रणाली में जनता का विश्वास बढ़ेगा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता मजबूत होगी।

    नवारो ने यह भी कहा कि हाल में सार्वजनिक की गई जानकारी का उद्देश्य उन तथ्यों को सामने लाना था, जिन्हें पहले गोपनीय रखा गया था। उनके अनुसार अमेरिकी नागरिकों को चुनावी प्रणाली की कमजोरियों के बारे में जानकारी होना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी खामियों को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें। उन्होंने इसे चुनाव सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में दावा किया कि चुनावी सुरक्षा से जुड़े दस्तावेजों में चीन द्वारा अमेरिकी मतदाता डेटा तक कथित पहुंच और चुनावी व्यवस्था को प्रभावित करने के प्रयासों का उल्लेख है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं का व्यक्तिगत डेटा अवैध रूप से प्राप्त किया गया और संबंधित सूचनाएं समय रहते राष्ट्रपति तथा कांग्रेस के साथ साझा नहीं की गईं। ट्रंप ने कहा कि इन तथ्यों के सार्वजनिक होने के बाद चुनावी सुरक्षा कानूनों को और मजबूत करना आवश्यक हो गया है।

    दूसरी ओर, ट्रंप के इन दावों को लेकर डेमोक्रेटिक नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है और आरोपों पर सवाल उठाए हैं। अमेरिकी राजनीति में चुनावी सुरक्षा पहले से ही संवेदनशील मुद्दा रही है और वर्ष 2020 के चुनाव को लेकर दोनों प्रमुख दलों के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में हालिया बयानबाजी ने इस बहस को फिर से केंद्र में ला दिया है।

    नवारो ने कहा कि इस पूरे विवाद को केवल चीन के संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार मूल प्रश्न यह है कि अमेरिकी चुनावी व्यवस्था संभावित जोखिमों से खुद को किस हद तक सुरक्षित रख पाई। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव प्रणाली में किसी प्रकार की कमजोरी मौजूद है तो उसे दूर करना लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में चुनावी सुरक्षा, मतदाता पहचान और मतदान प्रक्रिया से जुड़े प्रस्तावित सुधार अमेरिकी राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल रह सकते हैं। वहीं ट्रंप के दावों और उन पर उठे सवालों को लेकर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर बहस जारी रहने की संभावना है। इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका में चुनावी पारदर्शिता, संस्थागत जवाबदेही और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर चर्चा को एक बार फिर तेज कर दिया है।

  • सीतापुर में रिश्तों का खौफनाक अंत, शराब के विवाद में 65 वर्षीय मां की हत्या, आरोपी बेटा गिरफ्तार

    सीतापुर में रिश्तों का खौफनाक अंत, शराब के विवाद में 65 वर्षीय मां की हत्या, आरोपी बेटा गिरफ्तार

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है। इमलिया सुल्तानपुर थाना क्षेत्र के बेनियापुर गांव में शराब पीने के लिए पैसे नहीं मिलने पर एक बेटे पर अपनी 65 वर्षीय मां की हत्या करने का आरोप लगा है। प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी ने पहले मां के साथ मारपीट की और फिर उनका सिर दीवार से टकरा दिया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और उनकी मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी पूरी रात घर में शव के पास बैठा रहा और सुबह स्वयं ग्राम प्रधान को फोन कर मां की मौत की सूचना दी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस के अनुसार मृतका की पहचान सावित्री देवी के रूप में हुई है, जो अपने बेटे त्रिभुवन के साथ रहती थीं। उनके पति का कई वर्ष पहले निधन हो चुका था। ग्रामीणों के मुताबिक त्रिभुवन लंबे समय से शराब का आदी था और इसी वजह से करीब दस वर्ष पहले उसकी पत्नी भी उसे छोड़कर चली गई थी। बताया जा रहा है कि घटना वाली रात वह नशे की हालत में घर पहुंचा और मां से शराब पीने के लिए पैसे मांगने लगा। सावित्री देवी द्वारा पैसे देने से इनकार किए जाने पर दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया, जो देखते ही देखते हिंसक रूप ले बैठा।

    आरोप है कि विवाद के दौरान त्रिभुवन ने अपनी मां के साथ बेरहमी से मारपीट की और उनका सिर दीवार से टकरा दिया। गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी ने किसी को सूचना नहीं दी और पूरी रात घर में ही मौजूद रहा। अगले दिन सुबह उसने गांव के प्रधान को फोन कर बताया कि उसकी मां की मौत हो गई है और अंतिम संस्कार कराने की बात कही।

    ग्राम प्रधान जब मौके पर पहुंचे तो उन्होंने सावित्री देवी का शव आंगन में पड़ा देखा। शव के सिर के पास खून के निशान थे, जिससे मामला संदिग्ध लगा। इसके बाद प्रधान ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और घर की दीवार पर भी खून के निशान पाए, जिससे यह आशंका और मजबूत हुई कि महिला का सिर दीवार से टकराया गया था।

    प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले भी शराब के नशे में अपनी मां के साथ मारपीट करता था। पुलिस को जानकारी मिली है कि घटना से दो दिन पहले भी उसने कथित रूप से सावित्री देवी के साथ हिंसा की थी। महिला के शरीर पर पुराने चोटों के निशान मिलने की बात भी सामने आई है, जिनकी पुष्टि पोस्टमार्टम और चिकित्सकीय जांच के आधार पर की जाएगी।

    पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आरोपी त्रिभुवन को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि होगी। साथ ही घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों, फोरेंसिक जांच और आरोपी से पूछताछ के आधार पर मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • राम मंदिर दान चोरी प्रकरण: टिन्नू यादव और मनीष से 39 घंटे की पुलिस रिमांड में होगी पूछताछ, खुलेंगे अहम राज

    राम मंदिर दान चोरी प्रकरण: टिन्नू यादव और मनीष से 39 घंटे की पुलिस रिमांड में होगी पूछताछ, खुलेंगे अहम राज


    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दान प्रबंधन से जुड़े कथित गबन मामले में पुलिस ने आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और उसके भतीजे मनीष यादव से पूछताछ शुरू कर दी है। विशेष न्यायाधीश (एंटी करप्शन) की अदालत द्वारा मंजूर 39 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड शनिवार सुबह से लागू हो गई, जिसके तहत दोनों आरोपी रविवार रात 11 बजे तक पुलिस हिरासत में रहेंगे।

    शनिवार सुबह पुलिस दोनों को जेल से अपनी अभिरक्षा में लेकर पुलिस लाइन पहुंची, जहां उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसके बाद दोनों से पूछताछ शुरू हुई। जांच अधिकारी इस दौरान मामले से जुड़े कई अहम पहलुओं और पहले गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारियों का मिलान कर रहे हैं।

    दो स्तर पर चल रही है जांच
    मामले की जांच दो अलग-अलग स्तरों पर जारी है। एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) पूरे प्रकरण की पड़ताल कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अयोध्या पुलिस आपराधिक पहलुओं की जांच में जुटी है।

    राज्य सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था, जिसमें लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ आईजी किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल हैं। समिति को मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद दान की गणना के दौरान कथित गबन के आरोपों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

    एसआईटी ने 23 जून को प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच के लिए उसका कार्यकाल 15 जुलाई तक बढ़ाया गया। जांच के दौरान समिति ने केवल कथित दान गबन ही नहीं, बल्कि मंदिर की प्रशासनिक और व्यवस्थागत प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की।

    पुलिस जोड़ रही है सबूतों की कड़ियां
    अयोध्या पुलिस इससे पहले छह अन्य आरोपियों को भी पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ कर चुकी है। जांच के दौरान कई नए तथ्य सामने आने का दावा किया गया है और कथित रूप से नकदी, सोना, वाहन, निवेश से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। जांच के क्रम में कई बैंक खातों को भी फ्रीज किया गया है।

    अब पुलिस टिन्नू यादव और मनीष यादव से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ कर रही है, ताकि कथित धन के स्रोत, उसके उपयोग और पूरे मामले में अन्य लोगों की भूमिका को स्पष्ट किया जा सके। साथ ही जांच एजेंसी कथित गबन की कुल राशि और पूरे नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

    एसआईटी रिपोर्ट पर टिकी नजर
    सूत्रों के अनुसार, एसआईटी अपनी अंतरिम रिपोर्ट जल्द सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर सकती है। यह भी चर्चा है कि अंतिम रिपोर्ट तैयार है और कुछ बिंदुओं के सत्यापन के बाद उसे औपचारिक रूप से सरकार को सौंपा जाएगा। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट में कथित लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के सुझाव शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद हुई थीं गिरफ्तारियां
    एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर अयोध्या पुलिस ने 25 जून को रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय और रामाशंकर मिश्रा सहित आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। बाद में सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। फिलहाल मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों की रिपोर्ट तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

  • CM योगी ने दी 574 करोड़ की 57 परियोजनाओं की सौगात, बोले- 'अब न कर्फ्यू, न दंगा, बुलंदशहर चंगा'

    CM योगी ने दी 574 करोड़ की 57 परियोजनाओं की सौगात, बोले- 'अब न कर्फ्यू, न दंगा, बुलंदशहर चंगा'


    बुलंदशहर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बुलंदशहर दौरे के दौरान जिले को 574 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात दी। उन्होंने नुमाइश ग्राउंड में आयोजित जनसभा में बुलंदशहर और सिकंदराबाद विधानसभा क्षेत्रों की 57 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों को लेकर सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं।

    सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी, जबकि अब प्रदेश विकास और सुशासन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “आज न कर्फ्यू है, न दंगा है, अब बुलंदशहर चंगा है।”

    किसानों के लिए मुआवजा बढ़ाने और रिंग रोड की घोषणा
    मुख्यमंत्री ने गंगा एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट को जोड़ने वाले लिंक एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित किसानों की भूमि का मुआवजा बढ़ाने की घोषणा की। इसके साथ ही बुलंदशहर नगर में रिंग रोड निर्माण को भी मंजूरी देने का ऐलान किया।

    रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर पहुंचे मुख्यमंत्री
    जनसभा से पहले मुख्यमंत्री शिकारपुर स्थित रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण प्रदेश की जनता के विश्वास और समर्थन का परिणाम है। विद्यालय में छात्राओं के प्रवेश की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने उनके लिए प्रदेश सरकार की ओर से छात्रावास बनवाने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने रज्जू भैया की माताजी के नाम पर छात्रों के लिए भी छात्रावास बनाने की बात कही।

    2047 तक विकसित भारत का लिया संकल्प
    मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित और समृद्ध राष्ट्र बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि देशवासियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत और महापुरुषों पर गर्व होना चाहिए। सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि छुआछूत, जाति, क्षेत्र और भाषा जैसे भेदभाव से ऊपर उठकर कार्य करने से ही राष्ट्र का समग्र विकास संभव है।

    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को दुनिया का सबसे बड़ा सामाजिक संगठन बताया और रज्जू भैया के योगदान को याद करते हुए कहा कि शिक्षा, संस्कार और सामाजिक एकता राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव हैं, जिन पर प्रदेश सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

  • पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी के पांच मंजिला कार्यालय पर प्रशासन की कार्रवाई, सुरक्षा के बीच चला बुलडोजर

    पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी के पांच मंजिला कार्यालय पर प्रशासन की कार्रवाई, सुरक्षा के बीच चला बुलडोजर

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को उस समय हलचल मच गई जब दक्षिण 24 परगना जिले के अमताला-बारुईपुर रोड स्थित तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के कथित अवैध रूप से निर्मित सांसद कार्यालय पर प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी। पांच मंजिला इमारत को गिराने के लिए प्रशासन ने भारी मशीनरी और तीन बुलडोजर तैनात किए। कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और बड़ी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी रही ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

    जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार संबंधित भवन को अवैध निर्माण की श्रेणी में पाया गया था। प्रशासन का कहना है कि भवन स्वामी और संबंधित पक्ष को पहले नोटिस जारी कर निर्माण से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था। अधिकारियों के मुताबिक निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक दस्तावेज या संतोषजनक जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके बाद नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का निर्णय लिया गया। प्रशासन का दावा है कि पूरी प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के तहत की जा रही है।

    शनिवार सुबह जैसे ही बुलडोजर कार्यालय परिसर पहुंचे, बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर एकत्र होने लगे। कुछ ही देर में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता भी घटनास्थल पर पहुंच गए, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ा दी गई। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और प्रशासनिक कार्रवाई में सहयोग करने की अपील की।

    जानकारी के अनुसार यह कार्यालय पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद से बंद पड़ा था। इससे पहले डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र से जुड़े कई संगठनात्मक कार्यक्रम, बैठकों और राजनीतिक गतिविधियों का संचालन इसी कार्यालय से किया जाता था। स्थानीय स्तर पर यह भवन तृणमूल कांग्रेस की महत्वपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है।

    इस कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासन जहां इसे अवैध निर्माण के विरुद्ध सामान्य कानूनी कार्रवाई बता रहा है, वहीं राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना जताई जा रही है। मामले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं पर भी नजर बनी हुई है। फिलहाल प्रशासन की निगरानी में भवन को ध्वस्त करने का कार्य जारी है और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सख्त रखी गई है। संबंधित पक्ष की ओर से इस कार्रवाई पर आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।

  • सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद जंतर-मंतर पर नया विवाद, अभिजीत दीपके पर स्याही फेंके जाने से बढ़ा राजनीतिक तनाव

    सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद जंतर-मंतर पर नया विवाद, अभिजीत दीपके पर स्याही फेंके जाने से बढ़ा राजनीतिक तनाव

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताओं के बीच पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। इस कार्रवाई के बाद प्रदर्शन स्थल पर नया घटनाक्रम सामने आया, जब कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वांगचुक के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू की और इसी दौरान एक महिला ने उन पर स्याही फेंक दी। इस घटना के बाद प्रदर्शन स्थल पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई।

    जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह पुलिस की एक टीम सिविल ड्रेस में जंतर-मंतर पहुंची। चिकित्सकीय सलाह और बिगड़ती सेहत को देखते हुए सोनम वांगचुक को एंबुलेंस के माध्यम से सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। इस दौरान वहां मौजूद समर्थकों और प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया। मौके पर कुछ देर तक बहस और नारेबाजी भी हुई, हालांकि बाद में पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया।

    अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक की हालत पर डॉक्टर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। प्रारंभिक चिकित्सकीय जांच में उनके शरीर में डिहाइड्रेशन, पोटैशियम की कमी और कीटोन का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक भोजन नहीं लेने की स्थिति में शरीर में कीटोन बढ़ना सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि इसके साथ गंभीर डिहाइड्रेशन भी हो तो किडनी और शरीर की चयापचय प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। इसी कारण चिकित्सकों ने तत्काल उपचार की आवश्यकता पर जोर दिया है।

    अस्पताल प्रशासन ने वांगचुक के परिजनों से भी उपचार शुरू करने की अनुमति देने का आग्रह किया है। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप से संभावित जटिलताओं को रोका जा सकता है। अस्पताल में उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यक परीक्षण किए जा रहे हैं।

    इस बीच जंतर-मंतर पर वांगचुक के समर्थन में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके भूख हड़ताल पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान एक महिला अचानक उनके पास पहुंची और उन पर स्याही फेंक दी। घटना के बाद वहां मौजूद लोगों ने तुरंत स्थिति संभाली। इस घटनाक्रम का वीडियो कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जाने लगा।

    घटना के बाद अभिजीत दीपके ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर स्याही से रंगे कपड़ों की तस्वीर और वीडियो साझा करते हुए लिखा, “नीला मेरा रंग है… जय भीम।” उनके इस संदेश पर सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। समर्थकों ने घटना की आलोचना की, जबकि अन्य लोगों ने पूरे घटनाक्रम पर अलग-अलग राजनीतिक टिप्पणियां कीं।

    पूरे घटनाक्रम ने जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शन स्थल पर हुई स्याही फेंकने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और विरोध प्रदर्शन के स्वरूप को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी जारी है और प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

  • जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर बढ़ा सियासी विवाद, CJP ने पीएम मोदी के इस्तीफे की उठाई मांग

    जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर बढ़ा सियासी विवाद, CJP ने पीएम मोदी के इस्तीफे की उठाई मांग

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 दिनों से जारी अनशन के बीच शनिवार को उस समय नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया, जब पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को धरनास्थल से हटाकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा दिया। लंबे समय से भोजन नहीं करने के कारण उनकी सेहत लगातार कमजोर हो रही थी। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद आंदोलन से जुड़े संगठनों और समर्थकों ने विरोध जताया, जबकि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग कर दी।

    सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनका अनशन देश में पेपर लीक की घटनाओं के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन के समर्थन में चल रहा था। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई थी।

    शनिवार सुबह पुलिस ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए वांगचुक को धरनास्थल से हटाकर अस्पताल पहुंचाया। अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय तक अनशन के कारण उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर हो रही थी और चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक थी। इससे पहले न्यायालय की ओर से भी उनके स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता पर टिप्पणी की गई थी। पुलिस का कहना है कि यह कदम उनकी सुरक्षा और उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया।

    वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद आंदोलन से जुड़े लोगों ने इस कार्रवाई का विरोध किया। कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस्तीफे की मांग की। पार्टी ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से चल रहे आंदोलन के साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया। इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई।

    इसी बीच CJP के संस्थापक अभिजी दीपके ने घोषणा की कि वह स्वयं भूख हड़ताल पर बैठेंगे। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए इसकी आलोचना की। दीपके ने एक वीडियो संदेश जारी कर आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ बल प्रयोग किया गया और उनके साथ भी मारपीट हुई। उन्होंने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए लोगों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रखने की अपील की।

    घटना के बाद जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। दूसरी ओर, आंदोलन से जुड़े लोग अपनी मांगों पर कायम हैं और उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर शांतिपूर्ण विरोध, प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और प्रशासन की जिम्मेदारी को लेकर बहस को तेज कर दिया है। जहां एक ओर पुलिस का कहना है कि स्वास्थ्य कारणों से यह कदम उठाना आवश्यक था, वहीं आंदोलन से जुड़े संगठन इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हस्तक्षेप बता रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं जारी रहने की संभावना है, जबकि सभी की नजर सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और आंदोलन की आगामी दिशा पर बनी हुई है।

  • मेरठ छात्रा हत्याकांड: पीड़ित परिवार से मिले CM योगी, बोले- दोषियों को नहीं बख्शेंगे, आर्थिक सहायता का किया ऐलान

    मेरठ छात्रा हत्याकांड: पीड़ित परिवार से मिले CM योगी, बोले- दोषियों को नहीं बख्शेंगे, आर्थिक सहायता का किया ऐलान


    गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को मेरठ छात्रा हत्याकांड के पीड़ित परिवार से गाजियाबाद स्थित पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए परिवार को हरसंभव न्याय दिलाने का भरोसा दिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस जघन्य अपराध में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत सभी आरोपियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    लापरवाही पर भी होगी कार्रवाई
    मुख्यमंत्री ने मामले की जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही पुलिस अधिकारियों को अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए सभी आवश्यक कानूनी कदम उठाने का निर्देश भी दिया।

    पीड़ित परिवार के लिए राहत पैकेज
    मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को तत्काल राहत देने के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।

    इसके अलावा उन्होंने मृतका के पिता और परिवार के एक अन्य पात्र सदस्य को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। इस दौरान समाज कल्याण मंत्री एवं मेरठ के जिला प्रभारी मंत्री असीम अरुण के साथ वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे।

  • सपा सांसद दरोगा प्रसाद सरोज पर जमीन कब्जाने के आरोप, ग्रामीणों ने दी आत्मदाह करने की चेतावनी

    सपा सांसद दरोगा प्रसाद सरोज पर जमीन कब्जाने के आरोप, ग्रामीणों ने दी आत्मदाह करने की चेतावनी


    आजमगढ़। जिले के लालगंज तहसील क्षेत्र स्थित मोहनपुर पटवास गांव में सार्वजनिक तालाब और ग्रामीणों की जमीन पर कथित अवैध कब्जे को लेकर विवाद गहरा गया है। गांव के कई लोगों ने मंडलायुक्त को शिकायत पत्र सौंपते हुए समाजवादी पार्टी के सांसद दरोगा प्रसाद सरोज और उनके परिजनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, सांसद ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए किसी भी स्तर की जांच कराने की बात कही है।

    ग्रामीणों की ओर से शिकायत करने वाली गीता सरोज ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह करने के लिए मजबूर होंगी।

    तालाब और ग्रामीणों की जमीन पर कब्जे का आरोप
    शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि गांव की आराजी संख्या 137, जिसका क्षेत्रफल 7.798 हेक्टेयर है और जो राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है, उस पर फार्म हाउस बना दिया गया है। उनका कहना है कि वहां खेती और मछली पालन किया जा रहा है, जबकि पहले इस तालाब का उपयोग ग्रामीण और पशु करते थे। गीता सरोज का आरोप है कि सांसद ने करीब 50 बीघे तालाब क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के गरीब ग्रामीणों की जमीनों पर भी कब्जा कर लिया है।

    धमकी और अवैध गतिविधियों के भी आरोप
    शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि फार्म हाउस के चारों ओर बिजली के तार लगाए गए हैं, कई बोरिंग कराई गई हैं तथा वहां अवैध मछली पालन और पेड़ों की कटाई की जा रही है। ग्रामीणों ने सांसद के बेटे मनोज सरोज, प्रमोद सरोज और पोते अभिषेक सरोज पर शराब के नशे में हंगामा करने और लोगों को धमकाने का भी आरोप लगाया है।

    गीता सरोज का कहना है कि उनकी एक बीघा जमीन पर भी कब्जा कर पोखरा पाट दिया गया। उन्होंने एसडीएम, तहसीलदार समेत अन्य अधिकारियों से कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

    सांसद ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
    सांसद दरोगा प्रसाद सरोज ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने संबंधित जमीन का बैनामा शारदा विश्वकर्मा से करीब 3.5 से 4 बीघा कराया था और प्रशासन द्वारा कराई गई पैमाइश में उनकी भूमि सही पाई गई है। उन्होंने बताया कि अन्य जमीनें भी उन्होंने संबंधित मालिकों से नियमानुसार खरीदी हैं और किसी की भूमि पर अवैध कब्जा नहीं किया है।

    सांसद ने अपने परिजनों पर लगाए गए मारपीट और धमकी के आरोपों को भी झूठा बताया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन, मंडलायुक्त या तहसील प्रशासन निष्पक्ष जांच कराए। उनका दावा है कि यदि एक इंच भी अवैध कब्जा साबित होता है तो वे लाखों रुपये का जुर्माना भरने के लिए तैयार हैं।