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  • तेज रफ्तार और लापरवाही बनी काल, पालघर सड़क हादसे में 100 लोगों से भरे ट्रक का दर्दनाक अंत

    तेज रफ्तार और लापरवाही बनी काल, पालघर सड़क हादसे में 100 लोगों से भरे ट्रक का दर्दनाक अंत


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के पालघर जिले में मुंबई-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुआ भीषण सड़क हादसा कई परिवारों के लिए जीवनभर का दर्द छोड़ गया। सोमवार की रात यह हादसा उस समय हुआ जब एक ट्रक में सवार होकर 100 से अधिक लोग एक सगाई समारोह में शामिल होने के लिए जा रहे थे। खुशियों से भरा यह सफर कुछ ही पलों में मौत और तबाही के मंजर में बदल गया, जब सामने से आ रहे एक तेज रफ्तार कंटेनर ने ट्रक को जोरदार टक्कर मार दी। इस दर्दनाक टक्कर में 13 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 25 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा इतना भयानक था कि दोनों वाहन टक्कर के बाद सड़क पर बुरी तरह पलट गए और ट्रक में बैठे कई लोग नीचे दब गए। चीख-पुकार और अफरा-तफरी के बीच घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की। ट्रक में क्षमता से कहीं अधिक लोग सवार थे, जिसके कारण टक्कर का असर और भी भयावह हो गया। कई महिलाएं और बच्चे भी इस हादसे की चपेट में आ गए, जिनमें से कुछ की हालत अत्यंत गंभीर बताई जा रही है।

    हादसे के बाद पूरा हाईवे कुछ समय के लिए जाम में बदल गया। सड़क पर फैले मलबे और पलटे वाहनों के कारण यातायात पूरी तरह ठप हो गया। पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और क्रेन की मदद से वाहनों को हटाने का काम शुरू किया गया। घंटों की मशक्कत के बाद ही यातायात सामान्य हो सका। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार कई घायलों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

    प्रारंभिक जांच में इस भीषण दुर्घटना के पीछे तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग और चालक की लापरवाही को मुख्य कारण माना जा रहा है। ट्रक में सवार लोगों की संख्या निर्धारित सीमा से काफी अधिक थी, जिससे दुर्घटना के समय नियंत्रण पूरी तरह बिगड़ गया। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन की गंभीर आवश्यकता को उजागर करता है।

    इस घटना ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है। खुशियों के माहौल में निकला यह सफर अचानक चीखों और दर्द की कहानी बन गया। जिन परिवारों ने एक साथ सगाई समारोह में शामिल होने की योजना बनाई थी, उन्हें अब अपनों के खोने का असहनीय दुख झेलना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है, जबकि घायलों के इलाज की व्यवस्था युद्ध स्तर पर की जा रही है। यह हादसा लंबे समय तक लोगों के दिलों में एक कड़वी याद बनकर रहेगा।

  • NEET पेपरलीक: आरोपी कुलकर्णी को लेकर जांच एजेंसियां सक्रिय

    NEET पेपरलीक: आरोपी कुलकर्णी को लेकर जांच एजेंसियां सक्रिय


    नई दिल्ली। देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 में सामने आए पेपर लीक मामले ने जांच एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अब एक बड़े नाम का खुलासा किया है पी.वी. कुलकर्णी, जिन्हें इस पूरे रैकेट का अहम आरोपी बताया जा रहा है।

    CBI की जांच के मुताबिक, कुलकर्णी मूल रूप से महाराष्ट्र के लातूर के रहने वाले हैं और एक समय में NTA से जुड़े हुए थे, जहां उन्हें परीक्षा प्रक्रिया और प्रश्नपत्र निर्माण से जुड़ी जिम्मेदारी मिली हुई थी। इसी कारण उनकी पहुंच सीधे फाइनल परीक्षा पेपर तक थी।

    जांच एजेंसियों का दावा है कि कुलकर्णी ने इस संवेदनशील जानकारी का गलत इस्तेमाल किया और परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्रों को एक संगठित नेटवर्क के जरिए छात्रों तक पहुंचाना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि उन्होंने पुणे और आसपास के इलाकों में गुप्त कोचिंग क्लासेस का आयोजन किया, जहां चयनित छात्रों को परीक्षा से पहले ही ‘लीक हुए प्रश्न’ पढ़ाए जाते थे।

    इसी नेटवर्क के खुलासे के बाद CBI ने कार्रवाई तेज करते हुए उन्हें जयपुर से गिरफ्तार किया। उनके खिलाफ यह भी आरोप है कि वह इस पूरे ऑपरेशन में “मास्टरमाइंड” की भूमिका निभा रहे थे और कई अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर यह रैकेट चला रहे थे।

    जांच में यह भी सामने आया है कि इस मामले में केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक पूरा नेटवर्क सक्रिय था, जिसमें कोचिंग सेंटर संचालक और अन्य शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े लोग भी शामिल हो सकते हैं। फिलहाल एजेंसी ने कई दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच जारी है।

    इस खुलासे के बाद परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लाखों छात्रों की मेहनत और भविष्य से जुड़े इस मामले ने एक बार फिर परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

    CBI अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पेपर लीक का दायरा कितना बड़ा था और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

  • पासपोर्ट विवाद में बढ़ी कांग्रेस नेताओं की मुश्किलें, पवन खेड़ा के बाद अब रणदीप सुरजेवाला को समन

    पासपोर्ट विवाद में बढ़ी कांग्रेस नेताओं की मुश्किलें, पवन खेड़ा के बाद अब रणदीप सुरजेवाला को समन



    नई दिल्ली। असम में कथित पासपोर्ट विवाद को लेकर कांग्रेस नेताओं की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। गुवाहाटी पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। उन्हें 23 मई को क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में उपस्थित होने को कहा गया है।

    यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के पासपोर्ट से जुड़े आरोपों से संबंधित है। असम पुलिस के अनुसार, इस प्रकरण में लगाए गए आरोपों की जांच क्राइम ब्रांच द्वारा की जा रही है।

    इससे पहले कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को भी इसी मामले में समन भेजा गया था। दरअसल, अप्रैल 2026 में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास भारत के अलावा यूएई, मिस्र और एंटीगुआ जैसे देशों के पासपोर्ट भी हैं। साथ ही उन्होंने सरमा परिवार पर विदेशों में अघोषित संपत्ति रखने का आरोप लगाया था।

    इन आरोपों के बाद रिनिकी भुइयां सरमा ने गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में पवन खेड़ा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में धोखाधड़ी, जालसाजी, चुनाव के दौरान भ्रामक बयान देने और मानहानि जैसे आरोप लगाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने के बाद पवन खेड़ा को जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए थे।

    पवन खेड़ा 13 मई 2026 को गुवाहाटी क्राइम ब्रांच के सामने पेश हुए थे, जहां उनसे पहले दिन 10 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई। इसके अगले दिन 14 मई को भी उनसे करीब 8 घंटे तक सवाल-जवाब किए गए। अब उन्हें आगे की जांच के लिए 25 मई 2026 को फिर से पेश होने का निर्देश दिया गया है।

  • मेडिकल फील्ड में अवसर, NHM चंडीगढ़ में संविदा आधार पर डॉक्टरों की भर्ती घोषित

    मेडिकल फील्ड में अवसर, NHM चंडीगढ़ में संविदा आधार पर डॉक्टरों की भर्ती घोषित

    नई दिल्ली ।राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, चंडीगढ़ ने चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर जारी किया है। विभाग ने मेडिकल ऑफिसर के कुल 5 रिक्त पदों पर संविदा आधार पर भर्ती की घोषणा की है, जिसके लिए चयन प्रक्रिया सीधे वॉक-इन इंटरव्यू के माध्यम से पूरी की जाएगी। यह भर्ती विभिन्न मेडिकल कैटेगरी के अंतर्गत की जा रही है, जिसमें आपातकालीन चिकित्सा, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े पद शामिल हैं।

    इन पदों पर चयन पूरी तरह से इंटरव्यू और दस्तावेज़ सत्यापन के आधार पर किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को प्रति माह लगभग 72 हजार रुपये का मानदेय प्रदान किया जाएगा। इस भर्ती में आवेदन करने के लिए अधिकतम आयु सीमा 60 वर्ष निर्धारित की गई है, जिससे अनुभवी चिकित्सा पेशेवरों को भी अवसर प्राप्त हो सके।

    योग्यता की बात करें तो उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से एमबीबीएस की डिग्री होना अनिवार्य है, साथ ही एक वर्ष की रोटेटरी इंटर्नशिप भी पूरी की होनी चाहिए। इसके अलावा उम्मीदवार का संबंधित राज्य चिकित्सा परिषद या राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग में पंजीकरण होना जरूरी है। अनुभव के आधार पर उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी, खासकर उन लोगों को जिनके पास स्त्री रोग, प्रसूति या बाल रोग जैसे विभागों में कार्य अनुभव है।

    इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को 25 मई को निर्धारित समय पर इंटरव्यू स्थल पर पहुंचना होगा। यह इंटरव्यू सुबह 9:30 बजे से आयोजित किया जाएगा, जबकि पंजीकरण प्रक्रिया उसी दिन सुबह 10:30 बजे तक चलेगी। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे सभी आवश्यक दस्तावेजों की मूल प्रति और उनकी फोटोकॉपी साथ लेकर आएं ताकि सत्यापन प्रक्रिया में किसी प्रकार की समस्या न हो।

    चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति संविदा आधार पर की जाएगी, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के विभिन्न कार्यक्रमों और सेवाओं में योगदान देंगे। यह अवसर उन चिकित्सा पेशेवरों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली में अनुभव प्राप्त करना चाहते हैं या अपने करियर को एक स्थिर दिशा देना चाहते हैं।

    चंडीगढ़ में आयोजित होने वाला यह वॉक-इन इंटरव्यू चिकित्सा क्षेत्र में रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर माना जा रहा है, जिसमें बिना लंबी परीक्षा प्रक्रिया के सीधे चयन की संभावना मौजूद है।

  • पुणे में चलती कार में महिला से दरिंदगी: पार्टी से लौटते वक्त घर छोड़ने के बहाने किया दुष्कर्म

    पुणे में चलती कार में महिला से दरिंदगी: पार्टी से लौटते वक्त घर छोड़ने के बहाने किया दुष्कर्म



    नई दिल्ली।
    महाराष्ट्र के पुणे शहर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कोरेगांव पार्क इलाके में एक महिला के साथ चलती कार में कथित दुष्कर्म का मामला सामने आया है। आरोप है कि होटल पार्टी में हुई पहचान के बाद युवक ने महिला को घर छोड़ने का भरोसा दिलाया और रास्ते में उसके साथ जबरदस्ती की।

    पार्टी में हुई थी पहचान
    जानकारी के मुताबिक, पीड़िता पुणे के एक होटल में आयोजित पार्टी में शामिल होने पहुंची थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात आरोपी युवक से हुई। पार्टी खत्म होने के बाद युवक ने महिला को सुरक्षित घर छोड़ने की बात कही। महिला ने उस पर भरोसा किया और उसके साथ कार में बैठ गई।

    आरोप है कि रास्ते में आरोपी ने चलती कार में महिला के साथ जबरदस्ती की और उसका यौन उत्पीड़न किया। घटना के बाद पीड़िता किसी तरह पुलिस तक पहुंची और शिकायत दर्ज कराई।

    कोरेगांव पार्क थाने में मामला दर्ज
    पीड़िता की शिकायत के आधार पर कोरेगांव पार्क पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और अन्य संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और आरोपी की तलाश जारी है।

    CCTV और तकनीकी साक्ष्यों की जांच
    घटना के बाद पुलिस आसपास के इलाकों के CCTV फुटेज खंगाल रही है। साथ ही तकनीकी सबूतों और मोबाइल लोकेशन की मदद से आरोपी तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

    पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। जांच टीम होटल, पार्टी में मौजूद लोगों और कार की जानकारी भी जुटा रही है।

    महिलाओं की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
    पुणे में हाल के दिनों में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराध के कई मामले सामने आए हैं। नसरापुर में एक बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद अब कोरेगांव पार्क की इस वारदात ने शहर में लोगों का गुस्सा बढ़ा दिया है।

  • PM मोदी का करीबी बनकर करोड़ों की ठगी करने वाले आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, तीन साल जेल में बिताने के बाद मिली जमानत

    PM मोदी का करीबी बनकर करोड़ों की ठगी करने वाले आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, तीन साल जेल में बिताने के बाद मिली जमानत

    नई दिल्ली में सामने आए एक चर्चित मनी लॉन्ड्रिंग और ठगी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी काशिफ को जमानत देकर बड़ी राहत प्रदान की है। आरोपी पर आरोप है कि उसने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई केंद्रीय मंत्रियों का करीबी बताकर लोगों को प्रभाव में लिया और सरकारी नौकरी, ठेके तथा सरकारी विभागों में मदद दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी की। यह मामला लंबे समय से जांच एजेंसियों की निगरानी में था और आरोपी बीते लगभग तीन वर्षों से जेल में बंद था। सुप्रीम कोर्ट ने इसी लंबी न्यायिक हिरासत को ध्यान में रखते हुए जमानत मंजूर की है।

    सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी की जमानत याचिका पहले खारिज कर दी गई थी। अदालत ने माना कि आरोपी काफी लंबा समय जेल में गुजार चुका है और मामले की सुनवाई अभी जारी है। इसी आधार पर उसे सशर्त जमानत देने का फैसला लिया गया। हालांकि अदालत ने आरोपी को सख्त चेतावनी भी दी कि वह भविष्य में किसी भी संवैधानिक या सरकारी अधिकारी के नाम का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए नहीं करेगा।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरोपी किसी भी शर्त का उल्लंघन करता है या जांच प्रक्रिया में सहयोग नहीं करता, तो प्रवर्तन निदेशालय उसकी जमानत रद्द कराने के लिए दोबारा अदालत का रुख कर सकता है। अदालत ने आरोपी को जांच और ट्रायल की हर प्रक्रिया में पूरा सहयोग देने का निर्देश दिया है।

    यह मामला अप्रैल 2023 में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा हुआ है, जिसमें धोखाधड़ी, जालसाजी और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत गंभीर आरोप लगाए गए थे। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी ने सोशल मीडिया पर अपनी कई एडिट और मॉर्फ की गई तस्वीरें साझा की थीं, जिनमें वह प्रधानमंत्री और कई बड़े नेताओं के साथ दिखाई दे रहा था। इन तस्वीरों के जरिए उसने लोगों के बीच यह संदेश देने की कोशिश की कि उसकी पहुंच सत्ता के सबसे ऊंचे स्तर तक है।

    जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने, बड़े सरकारी ठेके हासिल कराने और विभिन्न सरकारी विभागों में प्रभाव का इस्तेमाल कर काम करवाने का भरोसा देता था। इसके बदले वह लोगों से मोटी रकम वसूलता था। एजेंसियों का दावा है कि आरोपी ने अपनी फर्जी पहचान और प्रभाव का इस्तेमाल कर कई लोगों को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाया।

    प्रवर्तन निदेशालय ने आरोपी से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी भी की थी, जहां से लगभग 1.10 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बरामद होने का दावा किया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि यह रकम कथित तौर पर अपराध से अर्जित की गई कमाई का हिस्सा थी। मामले की जांच अभी भी जारी है और एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं।

    इस मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए बनाई जा रही फर्जी छवि और प्रभाव के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत ने अपने आदेश के जरिए साफ संकेत दिया है कि कानून ऐसे मामलों को गंभीरता से देखता है, लेकिन लंबे समय तक जेल में रहने और ट्रायल में देरी जैसे पहलुओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

  • पाकिस्तान के आतंकी ने ही खोल दी ‘आतंकिस्तान’ की पोल, कश्मीर पहुंचते ही बदला लश्कर के खूंखार गुर्गे का इरादा

    पाकिस्तान के आतंकी ने ही खोल दी ‘आतंकिस्तान’ की पोल, कश्मीर पहुंचते ही बदला लश्कर के खूंखार गुर्गे का इरादा

    नई दिल्ली । पाकिस्तान द्वारा वर्षों से कश्मीर को लेकर फैलाए जा रहे प्रोपेगेंडा को इस बार किसी भारतीय एजेंसी या नेता ने नहीं, बल्कि खुद पाकिस्तान से भेजे गए एक आतंकी ने ही कठघरे में खड़ा कर दिया। घाटी में आतंक फैलाने के मकसद से भेजा गया लश्कर-ए-तैयबा का प्रशिक्षित आतंकी मोहम्मद उस्मान जट्ट उर्फ ‘चाइनीज’ अब ऐसे खुलासे कर रहा है, जिसने पाकिस्तान के झूठे दावों की परतें उधेड़ दी हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस आतंकी को कश्मीर में हिंसा फैलाने की जिम्मेदारी दी गई थी, वही वहां की वास्तविक स्थिति देखकर अपना इरादा बदल बैठा।

    जांच एजेंसियों की गिरफ्त में आए मोहम्मद उस्मान जट्ट ने पूछताछ के दौरान बताया कि उसे पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ट्रेनिंग कैंपों में कश्मीर को लेकर एक अलग तस्वीर दिखाई गई थी। उसे यह भरोसा दिलाया गया था कि घाटी में हालात बेहद खराब हैं और वहां के लोग भारत के खिलाफ खड़े हैं। लेकिन जब वह घुसपैठ के जरिए जम्मू-कश्मीर पहुंचा और उसने आम लोगों की जिंदगी को करीब से देखा, तो उसकी सोच पूरी तरह बदल गई। उसने माना कि उसे जो बताया गया था, वास्तविकता उससे बिल्कुल अलग थी।

    सूत्रों के मुताबिक, लाहौर निवासी यह आतंकी उत्तरी कश्मीर के रास्ते भारत में दाखिल हुआ था। उसे कई आतंकी हमलों को अंजाम देने के निर्देश दिए गए थे। शुरुआती दिनों में उसने कुछ संदिग्ध गतिविधियों में हिस्सा भी लिया, लेकिन धीरे-धीरे उसका फोकस बदलने लगा। घाटी में सामान्य जनजीवन, बाजारों की रौनक और लोगों की दिनचर्या देखने के बाद वह खुद दुविधा में पड़ गया। यही कारण था कि उसने अपने मिशन से दूरी बनानी शुरू कर दी।

    जांच के दौरान सामने आई सबसे हैरान करने वाली जानकारी यह रही कि आतंकी ‘चाइनीज’ अपने पुराने शौक को पूरा करने में लग गया था। बताया जा रहा है कि वह श्रीनगर में हेयर ट्रांसप्लांट करवाने पहुंचा था, जहां सुरक्षा एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया। एक तरफ जहां उसे बड़े आतंकी मिशन के लिए भेजा गया था, वहीं दूसरी तरफ वह अपनी निजी इच्छाओं में उलझ गया। इसी लापरवाही ने आखिरकार उसे जांच एजेंसियों के शिकंजे तक पहुंचा दिया।

    पूछताछ में आतंकी ने यह भी स्वीकार किया कि पाकिस्तान में युवाओं को कश्मीर के नाम पर भड़काया जाता है और उन्हें गलत सूचनाएं देकर आतंकी संगठनों में शामिल किया जाता है। उसने माना कि वास्तविकता देखने के बाद उसे महसूस हुआ कि घाटी के लोग शांति और सामान्य जिंदगी चाहते हैं, जबकि सीमा पार बैठे संगठन अपने फायदे के लिए युवाओं का इस्तेमाल करते हैं।

    इस पूरे मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई नेताओं ने इसे पाकिस्तान के झूठे नैरेटिव की सबसे बड़ी हार बताया। उनका कहना है कि जब खुद पाकिस्तान से भेजा गया आतंकी ही वहां के प्रोपेगेंडा को झूठा बता रहा है, तो यह पूरी दुनिया के सामने एक बड़ा संदेश है। फिलहाल जांच एजेंसियां आतंकी से जुड़े नेटवर्क, उसके संपर्कों और भारत में उसकी गतिविधियों को लेकर गहन पूछताछ कर रही हैं।

  • आंध्र प्रदेश की नई पॉपुलेशन पॉलिसी पर विवाद, महिलाओं की स्वायत्तता को लेकर सीपीएम का बड़ा सवाल

    आंध्र प्रदेश की नई पॉपुलेशन पॉलिसी पर विवाद, महिलाओं की स्वायत्तता को लेकर सीपीएम का बड़ा सवाल


    नई दिल्ली
    /आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा ज्यादा बच्चे पैदा करने पर कैश इंसेंटिव देने की नई योजना ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की इस घोषणा पर अब विपक्षी दलों ने खुलकर हमला बोलना शुरू कर दिया है। खासकर सीपीएम नेता बृंदा करात ने इस नीति को महिलाओं की स्वतंत्रता और निजी अधिकारों में हस्तक्षेप बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के निजी फैसलों पर प्रभाव डालने की कोशिश कर रही है, जो बेहद चिंताजनक है।

    दरअसल, राज्य सरकार ने तीसरे बच्चे के जन्म पर 30 हजार रुपये और चौथे बच्चे के जन्म पर 40 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। सरकार का कहना है कि राज्य में लगातार गिर रही जनसंख्या वृद्धि दर को देखते हुए यह कदम जरूरी हो गया है। सरकार का उद्देश्य जनसंख्या संतुलन बनाए रखना और भविष्य में संभावित जनसांख्यिकीय चुनौतियों से निपटना बताया जा रहा है।

    हालांकि इस योजना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। बृंदा karat ने कहा कि महिलाओं के शरीर और मातृत्व से जुड़े फैसले पूरी तरह व्यक्तिगत होने चाहिए। सरकार द्वारा आर्थिक लालच देकर महिलाओं को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित करना उनकी स्वायत्तता पर सीधा हमला है। उनका कहना है कि गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में इस योजना का दबाव सबसे अधिक महिलाओं पर पड़ेगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि कई परिवारों में महिलाएं दो बच्चों के बाद परिवार पूरा मानती हैं, लेकिन अतिरिक्त आर्थिक सहायता के लालच में उन पर तीसरे और चौथे बच्चे के लिए दबाव बनाया जा सकता है। ऐसे मामलों में निर्णय लेने की स्वतंत्रता महिलाओं के हाथ में नहीं रह जाती और परिवार या समाज का दबाव बढ़ जाता है। बृंदा करात ने आशंका जताई कि सरकार द्वारा दिए जाने वाले पैसों पर भी महिलाओं का वास्तविक नियंत्रण नहीं होगा।

    वहीं सरकार का पक्ष इससे बिल्कुल अलग है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का कहना है कि दक्षिणी राज्यों में जनसंख्या वृद्धि दर लगातार घट रही है, जिसका असर भविष्य में राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आर्थिक संतुलन पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में कामकाजी आबादी घटने से आर्थिक गतिविधियों और विकास पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से राज्य सरकार लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा केवल जनसंख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे भविष्य के परिसीमन और संसदीय सीटों के संतुलन को लेकर भी चिंताएं जुड़ी हुई हैं। दक्षिणी राज्यों में लंबे समय से यह आशंका जताई जाती रही है कि कम जनसंख्या वृद्धि के कारण भविष्य में उनकी संसदीय सीटों का अनुपात प्रभावित हो सकता है।

    फिलहाल इस योजना ने देशभर में नई बहस को जन्म दे दिया है। एक तरफ सरकार इसे जनसंख्या संतुलन बनाए रखने की दिशा में जरूरी कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे महिलाओं के अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता में दखल करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में और ज्यादा गर्मा सकता है।

  • मुख्यमंत्री योगी का जनता से सीधा संवाद, फरियादियों को दिया भरोसा- हर पीड़ित को मिलेगा न्याय

    मुख्यमंत्री योगी का जनता से सीधा संवाद, फरियादियों को दिया भरोसा- हर पीड़ित को मिलेगा न्याय

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर अपनी जनसुनवाई व्यवस्था ‘जनता दर्शन’ के माध्यम से आम लोगों से सीधा संवाद स्थापित किया। व्यस्त सरकारी कार्यक्रमों के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने हर व्यक्ति की बात गंभीरता से सुनी और भरोसा दिलाया कि सरकार जनता की सेवा, सुरक्षा और सुशासन के संकल्प के साथ पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का संवेदनशील और सहज व्यवहार लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।

    जनता दर्शन में पहुंचे फरियादियों ने भूमि विवाद, कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकारी योजनाओं से जुड़ी समस्याएं मुख्यमंत्री के सामने रखीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी शिकायतों का तय समय सीमा के भीतर निष्पक्ष और प्रभावी समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी पीड़ित व्यक्ति को न्याय के लिए भटकना नहीं पड़ना चाहिए और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि हर जरूरतमंद तक राहत पहुंचे। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को व्यक्तिगत रूप से मामलों की निगरानी करने के निर्देश भी दिए।

    कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा भावुक क्षण भी सामने आया जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया। बिहार से आई एक महिला मुख्यमंत्री से मिलने पहुंची थीं। जब मुख्यमंत्री उनके पास पहुंचे और उनकी समस्या के बारे में पूछा तो महिला ने बताया कि उन्हें कोई परेशानी नहीं है, वह केवल मुख्यमंत्री के दर्शन करने आई हैं। महिला की इस बात पर मुख्यमंत्री मुस्कुराए और आत्मीयता के साथ उनका अभिवादन किया। इसके बाद उन्होंने महिला और वहां मौजूद अन्य लोगों से भीषण गर्मी में सावधानी बरतने और अपने परिवार का विशेष ध्यान रखने की अपील की। मुख्यमंत्री का यह सहज व्यवहार कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि गरीबों, जरूरतमंदों और पात्र लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के पहुंचना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से भूमि कब्जाने वाले भू-माफियाओं और दबंग तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक मशीनरी का उद्देश्य केवल फाइलों का निस्तारण नहीं बल्कि लोगों को वास्तविक राहत पहुंचाना होना चाहिए।

    जनता दर्शन कार्यक्रम लंबे समय से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली का अहम हिस्सा रहा है। इस मंच के जरिए आम नागरिक सीधे मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचा पाते हैं। कार्यक्रम में अक्सर ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं जहां लोग अपनी समस्याओं के साथ-साथ मुख्यमंत्री के प्रति विश्वास और समर्थन भी व्यक्त करते हैं। यही कारण है कि जनता दर्शन केवल शिकायत सुनने का मंच नहीं बल्कि सरकार और जनता के बीच संवाद का एक मजबूत माध्यम बन चुका है।

    सोमवार को आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सरकार प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता बनाए रखने के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को भी प्राथमिकता दे रही है। जनता की समस्याओं के समाधान के साथ मुख्यमंत्री का सहज व्यवहार और संवेदनशील संवाद लोगों के बीच सकारात्मक संदेश छोड़ गया।

  • गोल्ड खरीदारी को लेकर बदल रही सोच: सर्वे में सामने आया पीएम मोदी की अपील का प्रभाव

    गोल्ड खरीदारी को लेकर बदल रही सोच: सर्वे में सामने आया पीएम मोदी की अपील का प्रभाव

    नई दिल्ली । देश में बढ़ती आर्थिक चुनौतियों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने की खरीदारी को लेकर लोगों की सोच में बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में हुए एक सर्वे में यह सामने आया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर अब आम लोगों के व्यवहार पर भी दिखाई देने लगा है। बड़ी संख्या में भारतीयों ने अगले एक साल तक गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की बात कही है।

    कुछ समय पहले प्रधानमंत्री ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और अनावश्यक सोने की खरीद पर नियंत्रण रखने की अपील की थी। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करना बताया गया था। अब एक सर्वे रिपोर्ट में सामने आया है कि लोगों ने इस अपील को गंभीरता से लिया है और अपनी खरीदारी की आदतों पर पुनर्विचार शुरू कर दिया है।

    सर्वे में शामिल लोगों में से लगभग 61 प्रतिशत ने कहा कि वे अगले एक वर्ष तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने का प्रयास करेंगे। इनमें कई ऐसे लोग भी शामिल हैं जो नियमित रूप से सोना खरीदते रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक परिस्थितियों और वैश्विक बाजार में अस्थिरता के चलते लोग अब खर्च को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं।

    भारत में सोने की खरीदारी केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सांस्कृतिक और पारिवारिक महत्व भी काफी गहरा है। शादियों, त्योहारों और पारंपरिक आयोजनों में सोना खरीदना लंबे समय से भारतीय समाज का हिस्सा रहा है। इसके बावजूद सर्वे में बड़ी संख्या में लोगों का सोना खरीदने को लेकर संयम दिखाना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बीते वित्तीय वर्ष में भारत का सोना आयात बिल काफी बढ़ गया। वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में तेज उछाल के कारण आयात की कुल लागत रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। हालांकि आयात की मात्रा में बहुत ज्यादा वृद्धि नहीं हुई, लेकिन ऊंची कीमतों ने विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव पैदा किया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग गैर-जरूरी सोना खरीदने में कमी करते हैं तो इससे देश की आर्थिक स्थिति को कुछ हद तक राहत मिल सकती है। विदेशी मुद्रा की बचत होने से आयात संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी और आर्थिक दबाव कम किया जा सकेगा।

    हालांकि सर्वे में यह भी सामने आया कि सभी लोग अपनी पारंपरिक आदतें बदलने के लिए तैयार नहीं हैं। करीब 19 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे शादियों और पारिवारिक जरूरतों के लिए सोना खरीदना जारी रखेंगे। कई लोगों का यह भी मानना है कि आर्थिक अस्थिरता के दौर में सोना अब भी सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में से एक है।

    इस सर्वे ने यह साफ कर दिया है कि देश में आर्थिक मुद्दों को लेकर लोगों की जागरूकता बढ़ रही है और सरकारी अपीलों का असर अब आम नागरिकों की सोच और फैसलों में भी दिखाई देने लगा है।