Category: National

  • वैज्ञानिकों के इस्तीफे से गगनयान पर नहीं पड़ेगा कोई असर, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने निजीकरण और ब्रेन-ड्रेन की अटकलों को किया खारिज

    वैज्ञानिकों के इस्तीफे से गगनयान पर नहीं पड़ेगा कोई असर, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने निजीकरण और ब्रेन-ड्रेन की अटकलों को किया खारिज

    नई दिल्ली । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) से वरिष्ठ वैज्ञानिकों के लगातार हो रहे इस्तीफों और कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में कथित डेटा लीक की खबरों पर केंद्र सरकार ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने देश के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रमों, विशेषकर गगनयान मिशन के भविष्य को लेकर उठ रहे सभी सवालों और चिंताओं को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने साफ किया है कि किसी भी शीर्ष वैज्ञानिक या प्रशासनिक बदलाव का असर इसरो की कार्यप्रणाली और देश के अंतरिक्ष अभियानों की निरंतरता पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा।

    अंतरिक्ष विभाग द्वारा हाल ही में जारी एक कड़े निर्देश के बाद यह विवाद सामने आया था, जिसमें गगनयान और अन्य संवेदनशील राष्ट्रीय मिशनों से जुड़े ‘ग्रुप ए’ के वैज्ञानिकों के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) और इस्तीफे के नियमों को पहले से अधिक सख्त कर दिया गया है। इस प्रशासनिक सख्ती के बीच यह रिपोर्ट आई थी कि लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (एलवीएम-3) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर विक्टर जोसेफ और चंद्रयान-3 मिशन से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिक आदित्य रल्लापल्ली सहित विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर और यूआर राव सैटेलाइट सेंटर के कई वैज्ञानिकों ने निजी क्षेत्र का रुख करने के लिए अपने इस्तीफे सौंपे हैं।

    केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इन अटकलों को शांत करते हुए इसरो प्रमुख वी. नारायणन के आधिकारिक बयान का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी की संरचना ऐसी है कि जितने पेशेवर बाहर जाएंगे, उतने ही नए प्रतिभावान लोग प्रणाली के भीतर शामिल होंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि पूर्व इसरो अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने जनवरी 2025 में अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद चेन्नई के एक निजी स्पेस स्टार्टअप में ऑब्जर्वर की भूमिका स्वीकार कर ली है, लेकिन उनके जाने से गगनयान परियोजना की रफ्तार धीमी नहीं हुई है। केंद्र सरकार द्वारा साल 2023 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद से वैज्ञानिकों के लिए निजी क्षेत्र में बेहतर अवसर और वेतन की राहें खुली हैं।

    देश से होने वाले प्रतिभा पलायन (ब्रेन-ड्रेन) के विषय पर बात करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि बेहतर सामाजिक सुरक्षा, शोध के नए अवसर, करों में राहत और सुलभ प्रवास नीतियों के कारण विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और चिकित्सा क्षेत्रों के विशेषज्ञ दूसरे देशों या निजी उद्योगों की ओर आकर्षित होते हैं। इसके बावजूद इसरो की अपनी एक अनूठी और सुदृढ़ कार्य संस्कृति है, जहां सेवानिवृत्त हो चुके वैज्ञानिक भी मार्गदर्शक और सलाहकार के रूप में देश की महत्वपूर्ण परियोजनाओं के साथ लगातार जुड़े रहते हैं। गगनयान के तहत मानव को सुरक्षित अंतरिक्ष में भेजने और वापस लाने के लिए आवश्यक क्रू मॉड्यूल की तकनीक पूरी तरह से तैयार की जा चुकी है।

    इसके साथ ही, तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट (केकेएनपीपी) में संवेदनशील डेटा की चोरी से जुड़ी रिपोर्ट्स पर भी सरकार ने स्थिति साफ की है। केंद्रीय मंत्री ने न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के बयानों की पुष्टि करते हुए कहा कि संयंत्र की किसी भी सामरिक या रणनीतिक डेटा प्रणाली में कोई सेंधमारी नहीं हुई है। उन्होंने इस विषय पर अनावश्यक विवाद पैदा करने की कोशिशों की निंदा की। वर्तमान में इस मामले की तकनीकी जांच एनपीसीआईएल और भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (सर्ट-इन) द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है, ताकि सुरक्षा मानकों को और अभेद्य बनाया जा सके।

  • तपती रातें बन रहीं गंभीर स्वास्थ्य संकट…. हर व्यक्ति सालाना गंवा रहा 93 घंटे की नींद

    तपती रातें बन रहीं गंभीर स्वास्थ्य संकट…. हर व्यक्ति सालाना गंवा रहा 93 घंटे की नींद

    नई दिल्ली। दिन के बढ़ते तापमान (Rising Temperatures) के साथ अब रातों की गर्मी (Heat) भी गंभीर स्वास्थ्य संकट (Health crisis) बनती जा रही है। क्लाइमेट सेंट्रल (Climate Central) की नई वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, गर्म और उमस भरी रातों के कारण देश के कई हिस्सों में लोग हर साल दर्जनों घंटे की नींद गंवा रहे हैं। दक्षिण भारत इस समस्या का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि जलवायु परिवर्तन अब केवल मौसम का विषय नहीं रह गया, बल्कि यह लोगों की नींद, स्वास्थ्य और कार्यक्षमता को प्रभावित कर रहा है।

    रिपोर्ट के मुताबिक पुडुचेरी के लोग वर्षभर में औसतन 92 घंटे की नींद खो रहे हैं। आंध्र प्रदेश में 88.6 घंटे और केरल में 88.3 घंटे की नींद का नुकसान दर्ज किया गया है। तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना में भी स्थिति चिंताजनक है, जहां लगातार बढ़ती रात्रिकालीन गर्मी लोगों को पर्याप्त आराम नहीं करने दे रही। तमिलनाडु में हर व्यक्ति की लगभग 7.9 घंटे और कर्नाटक में 7.8 घंटे की अतिरिक्त नींद केवल बदलती जलवायु के कारण कम हो रही है।


    बड़े शहरों में भी गर्म रातों का दिख रहा प्रभाव

    बड़े शहरों में भी गर्म रातों का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। चेन्नई इस सूची में सबसे ऊपर है, जहां एक व्यक्ति सालाना औसतन 93 घंटे तक कम सो पा रहा है। मुंबई में यह आंकड़ा 84 घंटे, कोलकाता में 80 घंटे और दिल्ली में 66 घंटे है। बंगलूरू में जलवायु परिवर्तन के कारण अतिरिक्त नींद की कमी सबसे अधिक दर्ज की गई है, जबकि हैदराबाद, अहमदाबाद और पुणे में भी इसका उल्लेखनीय प्रभाव सामने आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और कंक्रीट के फैलाव ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।

    नींद की कमी से हो सकती है गंभीर बीमारियां
    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वयस्कों के लिए प्रतिदिन 7 से 9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद आवश्यक है। जब रात का तापमान अधिक रहता है तो शरीर दिनभर की गर्मी से उबर नहीं पाता और गहरी नींद लेने में कठिनाई होती है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति बने रहने पर उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, स्ट्रोक, मधुमेह, मोटापा, मानसिक तनाव, अवसाद, याददाश्त में कमी तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। पर्याप्त नींद नहीं मिलने से कार्यक्षमता और निर्णय लेने की क्षमता भी प्रभावित होती है।


    पांच दशकों में तेजी से बढ़ा खतरा

    रिपोर्ट में भारत सहित दुनिया के 1,338 शहरों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन के अनुसार 1970 के दशक की तुलना में जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली नींद की कमी लगभग दोगुनी हो चुकी है। वर्ष 2020 से 2025 के बीच दुनिया भर में प्रत्येक व्यक्ति ने औसतन 56 घंटे की नींद गर्म रातों के कारण खोई, जिसमें 10 प्रतिशत से अधिक कमी का संबंध सीधे जलवायु परिवर्तन से पाया गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि जीवाश्म ईंधनों के बढ़ते उपयोग और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन ने तापमान में लगातार वृद्धि की है। यदि उत्सर्जन पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर होगी।

  • भाजपा में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी, नितिन नवीन की टीम में अनुभवी नेताओं को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी

    भाजपा में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी, नितिन नवीन की टीम में अनुभवी नेताओं को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी


    नई दिल्ली। भाजपा संगठन में जल्द ही बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिल सकता है। पार्टी नेतृत्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम को युवा चेहरों के साथ अनुभवी नेताओं के संतुलन से तैयार करने की कवायद में जुटा है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ केंद्रीय मंत्रियों, पूर्व केंद्रीय मंत्रियों और संगठन में लंबे समय तक काम कर चुके नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।

    भाजपा का फोकस आने वाले चुनावों को देखते हुए संगठन को और मजबूत करने पर है। अगले छह महीने में पार्टी को पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों का सामना करना है, जिनमें चार राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं। ऐसे में नेतृत्व संगठनात्मक ढांचे को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने की तैयारी कर रहा है। पार्टी की रणनीति नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने के साथ-साथ अनुभवी नेताओं के मार्गदर्शन में उन्हें तैयार करने की है। इसी दिशा में राज्यों में संगठनात्मक बदलाव के बाद अब राष्ट्रीय स्तर पर नई टीम के गठन की प्रक्रिया चल रही है।

    नितिन नवीन के साथ अनुभवी चेहरों को मिलेगी जगह
    भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन राष्ट्रीय राजनीति में अपेक्षाकृत नए हैं, इसलिए पार्टी उनके साथ संगठन का अनुभव रखने वाले नेताओं को जोड़ना चाहती है। सूत्रों के अनुसार, पूर्व में संगठन में जिम्मेदारी संभाल चुके कई सांसदों को भी राष्ट्रीय टीम में शामिल किया जा सकता है। मौजूदा संगठन में काम कर रहे करीब 4 से 5 नेताओं को पदोन्नति देकर नई जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। वहीं, लगभग आधा दर्जन ऐसे सांसदों पर भी विचार चल रहा है, जिनका संगठनात्मक अनुभव पार्टी के लिए उपयोगी हो सकता है।

    प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेताओं की नजर
    नई टीम को लेकर पार्टी के शीर्ष स्तर पर मंथन जारी है। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रक्रिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं। चूंकि आने वाले समय में सरकार में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है, इसलिए कुछ प्रमुख नेताओं को संगठन की जिम्मेदारी सौंपने की रणनीति पर भी विचार किया जा रहा है।

    महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
    भाजपा के नए संगठन में केंद्रीय पदाधिकारियों के साथ-साथ राज्यों के प्रभारी, मोर्चों के अध्यक्ष और राष्ट्रीय कार्यकारिणी का भी गठन किया जाना है। इसी वजह से नामों को अंतिम रूप देने में समय लग रहा है। भाजपा के संविधान के अनुसार राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कम से कम 25 प्रतिशत नए सदस्यों को शामिल करना होता है। हालांकि पार्टी इससे अधिक नए चेहरों को भी मौका दे सकती है।

    महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी पार्टी विशेष ध्यान दे रही है। भाजपा संविधान के अनुसार केंद्रीय पदाधिकारियों में 33 प्रतिशत महिलाओं की हिस्सेदारी का प्रावधान है। हालांकि यदि यह लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता है, तब भी इस बार पहले की तुलना में अधिक महिलाओं को जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। अनुमान है कि संगठन में महिलाओं की भागीदारी 20 से 25 प्रतिशत तक हो सकती है।

    नई टीम के गठन के जरिए भाजपा एक तरफ अनुभवी नेताओं का सहारा लेना चाहती है, वहीं दूसरी ओर भविष्य के नेतृत्व को तैयार करने की रणनीति पर भी काम कर रही है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: गणना टीम में शामिल होते ही मनीष बना गिरोह का सरगना, CCTV से खुल रहे राज

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: गणना टीम में शामिल होते ही मनीष बना गिरोह का सरगना, CCTV से खुल रहे राज


    अयोध्या। श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ ही आरोपियों की भूमिका को लेकर नए खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच में सामने आया है कि रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू का भतीजा मनीष यादव गणना टीम में शामिल होने के बाद चोरी करने वाले गिरोह का अहम हिस्सा बन गया था।

    एसआईटी जांच के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज में चढ़ावे की नोटों की गड्डियां ले जाते हुए तीन लोगों की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई है। इनमें अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं। आरोप है कि ये लोग चढ़ावे की रकम बाहर ले जाते थे, जबकि तीन अन्य लोग घेरा बनाकर सीसीटीवी कैमरों की नजर से बचाने में मदद करते थे।

    भर्ती के कुछ ही दिनों बाद CCTV में कैद हुआ मनीष
    एसआईटी रिपोर्ट के अनुसार, मनीष यादव की गणनाकर्मी पद पर नियुक्ति उसके ताऊ रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की सिफारिश पर हुई थी। बताया गया है कि टिन्नू ने मनीष की भर्ती के लिए दस्तावेज एसबीआई के रत्नेश चतुर्वेदी को उपलब्ध कराए थे। इसके बाद सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज के माध्यम से संविदा प्रक्रिया पूरी की गई। रिकॉर्ड के अनुसार, मनीष यादव की भर्ती 15 अप्रैल 2026 को हुई थी। इसके करीब 50 दिन के भीतर ही 11 मई 2026 की सीसीटीवी फुटेज में वह चढ़ावे की गड्डियां ले जाते हुए दिखाई दिया।

    50 दिन में मिली बड़ी भूमिका पर उठे सवाल
    जांच में यह भी सामने आया है कि रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू को सीधे तौर पर चोरी करते हुए नहीं पकड़ा गया है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि उसने अपने भतीजे मनीष को इस काम में आगे किया। जांच एजेंसियों का कहना है कि सामान्य तौर पर किसी नए कर्मचारी को किसी व्यवस्था को समझने में समय लगता है, लेकिन मनीष के मामले में भर्ती के कुछ ही दिनों बाद चोरी की गतिविधियों में शामिल होने के आरोप सामने आए हैं। इसी वजह से उसकी नियुक्ति को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

    अविनाश के पास मिली सबसे ज्यादा संपत्ति
    एसआईटी को 27 अप्रैल से 5 जून तक की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध हुई, जिसकी जांच के बाद चढ़ावा चोरी के कई पहलुओं का खुलासा हुआ। जांच के अनुसार, सबसे अधिक संपत्ति और नकदी अविनाश शुक्ला के पास से बरामद हुई।

    बताया गया है कि मनीष यादव अविनाश के सहयोगी के रूप में काम कर रहा था, जबकि अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय पर भी मदद करने का आरोप है। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, जांच से संकेत मिलते हैं कि मनीष को गणना कक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद गिरोह में शामिल किया गया और कुछ समय बाद उसने चोरी की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी।

    टिन्नू की भूमिका भी जांच के दायरे में
    जांच के मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां पहले रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास थीं। परिवारिक संबंधों के कारण मनीष की गणना कक्ष में पहुंच आसान हुई और पहले से सक्रिय आरोपियों के संपर्क में आने के बाद वह कथित तौर पर गिरोह का हिस्सा बन गया।

    टिन्नू और मनीष की पुलिस रिमांड की मांग
    अब पुलिस ने रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू और मनीष यादव की सात दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी है। मामले के विवेचक और अयोध्या क्षेत्राधिकारी आशुतोष तिवारी ने विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत में विशेष अभियोजन अधिकारी के माध्यम से आवेदन दिया है। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों से पूछताछ के दौरान मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों और संभावित बरामदगी की जानकारी मिल सकती है। अदालत ने इस आवेदन पर सुनवाई के लिए शुक्रवार की तारीख तय की है।

    79 लाख बरामदगी और 3 करोड़ की आशंका के बीच सवाल
    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बरामद रकम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शुरुआती जानकारी में करीब 79 लाख रुपये बरामद होने की बात सामने आई थी, जिसे पुलिस को सौंपा गया था। वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने बाद में करीब 3 करोड़ रुपये की चोरी की आशंका जताई थी। अब जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि तीन करोड़ रुपये के अनुमान का आधार क्या था।

    जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह आंकड़ा दानपात्र की गिनती, ऑडिट रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, आरोपियों से पूछताछ या किसी अन्य साक्ष्य के आधार पर सामने आया था। इस मामले में आगे की जांच के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।

  • दोबारा हुई नीट UG 2026 परीक्षा का रिजल्ट जारी, 11.21 लाख विद्यार्थी हुए सफल

    दोबारा हुई नीट UG 2026 परीक्षा का रिजल्ट जारी, 11.21 लाख विद्यार्थी हुए सफल


    नई दिल्ली।
    नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (National Testing Agency-NTA) ने गुरुवार देर शाम NEET UG 2026 का रिजल्ट घोषित कर दिया. रिजल्ट समय पर जारी होने से मेडिकल कॉलेजों (Medical colleges) में दाखिले और काउंसलिंग की प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार शुरू हो सकेगी. उम्मीदवार अपना स्कोरकार्ड आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाकर देख सकते हैं।

    दरअसल, इस वर्ष NEET UG 2026 परीक्षा लीक होने के कारण दोबारा कराई गई थी. री-नीट परीक्षा में देश और विदेश के करीब 20 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे. परीक्षा भारत के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में स्थित 5,440 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई थी. इनमें से 11.21 लाख उम्मीदवार एमबीबीएस, बीडीएस, आयुष और अन्य संबद्ध मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए क्वालिफाई हुए हैं।

    .NTA के अनुसार, क्वालिफाई करने वाले उम्मीदवारों में 58 प्रतिशत से अधिक छात्राएं शामिल हैं. छात्राओं की सफलता दर भी पुरुषों से बेहतर रही. परीक्षा में शामिल हुई 56.8 प्रतिशत छात्राएं सफल रहीं, जबकि छात्रों की सफलता दर 55.1 प्रतिशत रही।


    पंजाब के आर्यन और हरियाणा के पांशुल ने किया टॉप

    इस बार 138 उम्मीदवारों ने 720 में से 690 से अधिक अंक हासिल किए हैं. इनमें से 93 प्रतिशत से अधिक अभ्यर्थी पहली बार NEET परीक्षा में शामिल हुए थे, जबकि 99 प्रतिशत टॉपर्स की उम्र 17 से 19 वर्ष के बीच है. देशभर में 19 उम्मीदवारों ने 700 से अधिक अंक प्राप्त किए. सबसे अधिक 715 अंक पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने संयुक्त रूप से हासिल किए।

    वहीं, 1,492 उम्मीदवारों ने 650 या उससे अधिक, 10,160 उम्मीदवारों ने 600 या उससे अधिक और 90,780 उम्मीदवारों ने 500 या उससे अधिक अंक प्राप्त किए.

    सभी राज्यों से सफल अभ्यर्थी
    NTA के मुताबिक, सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से उम्मीदवार क्वालिफाई हुए हैं. उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक 1.7 लाख से ज्यादा उम्मीदवार सफल हुए, जबकि लक्षद्वीप से 43 उम्मीदवारों ने परीक्षा पास की. राज्यवार टॉपर्स में लद्दाख की जिग्मेट यांगचेन लामो (530 अंक), अंडमान-निकोबार के ध्रुव त्रिपाठी (606 अंक) और लक्षद्वीप की फहमीदा अनीस (573 अंक) शामिल हैं. कुल 17 राज्यों के टॉपर्स ने 700 या उससे अधिक अंक, जबकि 26 राज्यों के टॉपर्स ने 690 से अधिक अंक हासिल किए।


    श्रेणीवार सफल उम्मीदवार

    सामान्य वर्ग: 2.91 लाख
    OBC-NCL: 5.12 लाख
    SC: 1.59 लाख
    ST: 63,716
    EWS: 95,026
    PwBD: 3,666
    PwD: 303


    13 भाषाओं में हुई परीक्षा

    बता दें कि NEET UG 2026 का आयोजन 13 भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी, असमिया, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, ओड़िया, पंजाबी, तमिल, तेलुगु और उर्दू में कराया गया. NTA ने स्पष्ट किया है कि उसका काम परीक्षा आयोजित करना, परिणाम घोषित करना और ऑल इंडिया रैंक जारी करना है. MBBS और BDS की ऑल इंडिया कोटा काउंसलिंग मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) कराएगी, जबकि राज्य कोटे की काउंसलिंग संबंधित राज्य सरकारें आयोजित करेंगी।

    एजेंसी ने उम्मीदवारों को फर्जी कॉल, मैसेज और सीट दिलाने के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से सावधान रहने की सलाह दी है. NTA ने कहा है कि वह किसी भी उम्मीदवार से पैसे या व्यक्तिगत जानकारी नहीं मांगती।

  • राजस्थान: ओपन जेल में रचेगी शादी, उम्रकैद की सजा काट रहे दो बंदियों को हाई कोर्ट से मिली अनुमति

    राजस्थान: ओपन जेल में रचेगी शादी, उम्रकैद की सजा काट रहे दो बंदियों को हाई कोर्ट से मिली अनुमति


    जोधपुर। राजस्थान की जोधपुर स्थित मंडोर ओपन जेल जल्द एक अनोखे विवाह की साक्षी बनेगी। हत्या के अलग-अलग मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दो बंदी आपसी सहमति से विवाह बंधन में बंधेंगे। राजस्थान हाई कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद जेल प्रशासन ने विवाह की तैयारियां शुरू कर दी हैं।

    जानकारी के अनुसार, नागौर निवासी मूलाराम पड़ोसी की हत्या के मामले में दोषी है और 16 जनवरी 2017 से उम्रकैद की सजा काट रहा है। वर्तमान में वह मंडोर ओपन जेल में बंद है। वहीं सीमा अपने पति की हत्या के मामले में दोषी ठहराई जा चुकी है और फिलहाल 40 दिन की पैरोल पर जेल से बाहर है।

    पुनर्वास के आधार पर मांगी गई थी अनुमति
    मूलाराम की ओर से राजस्थान हाई कोर्ट में अस्थायी सजा निलंबन की याचिका दायर की गई थी। न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत को बताया गया कि मूलाराम और सीमा दोनों अपनी इच्छा से विवाह करना चाहते हैं।

    मूलाराम के अधिवक्ता कालूराम भाटी ने दलील दी कि विवाह से दोनों के पुनर्वास और सामाजिक सुधार की प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी तथा भविष्य में वे सामान्य पारिवारिक जीवन जी सकेंगे। उन्होंने बंदियों के वैवाहिक और संतानोत्पत्ति संबंधी अधिकारों से जुड़े हाई कोर्ट के एक पूर्व फैसले का भी हवाला दिया।

    सरकार ने भी नहीं जताई आपत्ति
    राज्य सरकार की ओर से अदालत में पेश रिपोर्ट में स्वीकार किया गया कि दोनों विवाह करना चाहते हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि दोनों पहले लिव-इन रिलेशनशिप में रह चुके हैं। सुनवाई के दौरान लोक अभियोजकों ने कहा कि ओपन जेल के नियमों के तहत यदि दोनों विवाह करना चाहते हैं तो सरकार को इस पर कोई आपत्ति नहीं है।

    कोर्ट ने दिए विवाह संबंधी निर्देश
    खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि विवाह समाज की एक महत्वपूर्ण संस्था है और केवल दोषसिद्धि के आधार पर किसी बंदी को उसकी सहमति से विवाह करने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने निर्देश दिया कि विवाह समारोह मंडोर ओपन जेल परिसर में ही आयोजित किया जाएगा। समारोह में दोनों पक्षों के अधिकतम 21-21 लोगों को शामिल होने की अनुमति होगी। विवाह संपन्न कराने के लिए एक पंडित भी मौजूद रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर मेहमानों की संख्या बढ़ाने का निर्णय जेल प्रशासन ले सकेगा।

    हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि विवाह की तिथि की सूचना पहले से जेल प्रशासन को देना अनिवार्य होगा, जबकि पूरे समारोह का खर्च मूलाराम वहन करेगा। अधिवक्ता कालूराम भाटी के अनुसार, यह विवाह 22 जुलाई को आयोजित किया जा सकता है।

  • फडणवीस और शिंदे से मुलाकात के बाद तेज हुई सियासी चर्चा, शरद गुट ने NDA में शामिल होने की अटकलों को बताया निराधार

    फडणवीस और शिंदे से मुलाकात के बाद तेज हुई सियासी चर्चा, शरद गुट ने NDA में शामिल होने की अटकलों को बताया निराधार


    मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल और जितेंद्र आव्हाड ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उनके सरकारी आवास ‘नंदनवन’ में करीब 45 मिनट तक बंद कमरे में मुलाकात की। इससे पहले जयंत पाटिल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी देर रात मुलाकात कर चुके थे।

    लगातार हुई इन बैठकों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या शरद पवार की पार्टी सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के करीब आ रही है। हालांकि दोनों नेताओं ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि मुलाकात का राजनीतिक गठबंधन से कोई संबंध नहीं है।

    जयंत पाटिल ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि उनकी शिंदे से मुलाकात क्षेत्र के विकास कार्यों और शहरी विकास विभाग से जुड़े लंबित मामलों को लेकर थी। उन्होंने बताया कि एक नगर परिषद अध्यक्ष की अयोग्यता के खिलाफ दायर अपील पर भी चर्चा की गई।

    वहीं, जितेंद्र आव्हाड ने भी कहा कि इतने लंबे राजनीतिक अनुभव वाला कोई भी नेता यदि किसी बड़े राजनीतिक गठबंधन पर चर्चा करना चाहता है, तो वह इस तरह सार्वजनिक रूप से मुलाकात नहीं करेगा। उनके मुताबिक, इन बैठकों को लेकर लगाए जा रहे राजनीतिक कयास बेबुनियाद हैं।

    आव्हाड ने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र के नगर परिषद अध्यक्ष को अयोग्य ठहराने की कार्रवाई सत्तारूढ़ गठबंधन की दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। उनका कहना है कि इस फैसले के जरिए उन्हें राजनीतिक रूप से झुकाने की कोशिश की जा रही है।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल जानबूझकर ऐसी अफवाहें फैला रहे हैं ताकि जयंत पाटिल की साफ-सुथरी छवि को नुकसान पहुंचे और पार्टी अध्यक्ष शरद पवार के प्रति उनकी निष्ठा पर सवाल खड़े किए जा सकें। आव्हाड ने कहा कि वे केवल इस पूरे मामले को राज्य के शीर्ष नेतृत्व के सामने रख रहे हैं, क्योंकि इतना बड़ा प्रशासनिक फैसला मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की जानकारी के बिना संभव नहीं हो सकता।

  • आज उत्तर से दक्षिण तक बारिश का दौर जारी, कई राज्यों में भारी वर्षा, आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट

    आज उत्तर से दक्षिण तक बारिश का दौर जारी, कई राज्यों में भारी वर्षा, आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट


    नई दिल्ली।
    देशभर में मानसून सक्रिय बना हुआ है और इसके प्रभाव से 17 जुलाई को कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। भारत मौसम विभाग (आईएमडी) ने उत्तर, मध्य, पूर्वोत्तर, पश्चिम और दक्षिण भारत के अनेक हिस्सों के लिए वर्षा, तेज हवाओं, आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। कुछ क्षेत्रों में अचानक बाढ़ की आशंका भी जताई गई है।

    उत्तर भारत में भारी बारिश की संभावना

    आईएमडी के अनुसार, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिमी एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहेगा। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर आंधी, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना है।

    मध्य भारत में भी अलर्ट

    पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश, विदर्भ तथा छत्तीसगढ़ में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। इन क्षेत्रों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, साथ ही गरज-चमक और बिजली गिरने की भी चेतावनी जारी की गई है।

    बिहार, ओडिशा और पूर्वोत्तर में तेज मानसून

    बिहार, ओडिशा, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भी अच्छी बारिश की संभावना है। वहीं अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कई स्थानों पर भारी वर्षा का पूर्वानुमान है। इन राज्यों में गरज-चमक और बिजली गिरने का भी खतरा बना रहेगा।

    पश्चिमी भारत में भी बारिश का असर

    कोंकण, गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, सौराष्ट्र और कच्छ में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है।

    दक्षिण भारत में बारिश के साथ हीटवेव का असर

    आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, कर्नाटक, केरल और लक्षद्वीप में भी वर्षा की संभावना है। तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, रायलसीमा और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में तेज हवाएं, गरज-चमक और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।

    हालांकि, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के कुछ इलाकों में बारिश के बावजूद हीटवेव जैसी परिस्थितियां भी बनी रह सकती हैं। वहीं दिल्ली, हरियाणा, पंजाब तथा पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में गर्म और उमस भरा मौसम रहने की संभावना जताई गई है।

    अगले सात दिन रहेगा मानसून का असर

    मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण अगले सात दिनों तक पूर्वी, पूर्वोत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून सक्रिय रहेगा। इसके अलावा 19 जुलाई से एक नया पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) भी प्रभावी होने की संभावना है, जिससे कई राज्यों में भारी से अत्यंत भारी वर्षा हो सकती है।

    बाढ़ का भी खतरा

    आईएमडी ने ओडिशा के कुछ हिस्सों में अत्यधिक वर्षा की संभावना जताते हुए चेतावनी दी है कि 23 जिलों तथा छत्तीसगढ़ के 13 जिलों के निचले इलाकों में 17 जुलाई की सुबह तक अचानक बाढ़ की स्थिति बन सकती है। लोगों को मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

  • री-नीट यूजी 2026 का परिणाम घोषित, आर्यन गुप्ता और पंशुल बंसल बने संयुक्त टॉपर

    री-नीट यूजी 2026 का परिणाम घोषित, आर्यन गुप्ता और पंशुल बंसल बने संयुक्त टॉपर


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने री-नीट यूजी 2026 का परिणाम घोषित कर दिया है। पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पंशुल बंसल ने 720 में से 715 अंक प्राप्त कर संयुक्त रूप से अखिल भारतीय प्रथम स्थान हासिल किया है। अभ्यर्थी अपना परिणाम आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं।

    इस वर्ष री-नीट परीक्षा में करीब 20 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जिनमें से 11.21 लाख उम्मीदवार परीक्षा में सफल रहे। सफल अभ्यर्थियों में छात्राओं की हिस्सेदारी लगभग 58 प्रतिशत रही, जिससे एक बार फिर महिला उम्मीदवारों का प्रदर्शन बेहतर रहा।

    19 छात्रों ने हासिल किए 700 से अधिक अंक

    एनटीए के अनुसार, कुल 19 अभ्यर्थियों ने 700 से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। वहीं, 705 से अधिक अंक हासिल करने वाले शीर्ष 17 रैंकधारी पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, तमिलनाडु और तेलंगाना सहित आठ राज्यों से हैं।

    पेपर लीक के बाद हुई थी दोबारा परीक्षा

    गौरतलब है कि 3 मई 2026 को आयोजित नीट यूजी परीक्षा पेपर लीक की पुष्टि के बाद रद्द कर दी गई थी। इसके बाद 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें देशभर के लगभग 20 लाख अभ्यर्थियों ने भाग लिया।

    उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक सफल अभ्यर्थी

    सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से उम्मीदवार परीक्षा में सफल हुए हैं। उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक 1.70 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा उत्तीर्ण की, जबकि लक्षद्वीप से 43 उम्मीदवार सफल रहे।


    प्रमुख आंकड़े

    • कुल सफल अभ्यर्थी : 11.21 लाख
    • सर्वोच्च अंक : 715/720 (आर्यन गुप्ता और पंशुल बंसल)
    • 700 से अधिक अंक : 19 उम्मीदवार
    • 690 से अधिक अंक : 138 उम्मीदवार
    • 650 या उससे अधिक अंक : 1,492 उम्मीदवार
    • 600 या उससे अधिक अंक : 10,160 उम्मीदवार
    • 500 या उससे अधिक अंक : 90,780 उम्मीदवार

    एनटीए के अनुसार, 690 से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 138 उम्मीदवार देश के 66 शहरों से हैं। इनमें 93 प्रतिशत से अधिक अभ्यर्थियों ने पहली बार परीक्षा दी, जबकि 99 प्रतिशत टॉप स्कोरर 17 से 19 वर्ष आयु वर्ग के हैं।

    श्रेणीवार सफल अभ्यर्थी

    • ओबीसी (नॉन-क्रीमी लेयर) : 5.12 लाख
    • सामान्य वर्ग : 2.91 लाख
    • अनुसूचित जाति (SC) : 1.59 लाख
    • सामान्य ईडब्ल्यूएस : 95,026
    • अनुसूचित जनजाति (ST) : 63,716
    • PwBD : 3,666
    • PwD : 303

    छात्राओं का प्रदर्शन रहा बेहतर

    इस वर्ष छात्राओं की सफलता दर 56.8 प्रतिशत रही, जबकि पुरुष अभ्यर्थियों की सफलता दर 55.1 प्रतिशत दर्ज की गई।

    अब शुरू होगी काउंसलिंग प्रक्रिया

    परिणाम जारी होने के साथ ही एनटीए ने विभिन्न श्रेणियों के लिए कट-ऑफ अंक भी घोषित कर दिए हैं। अब मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) जल्द ही अखिल भारतीय 15 प्रतिशत कोटा की सीटों के लिए काउंसलिंग कार्यक्रम जारी करेगी। वहीं, शेष 85 प्रतिशत राज्य कोटा सीटों के लिए संबंधित राज्य सरकारें अलग-अलग काउंसलिंग प्रक्रिया संचालित करेंगी।

    सफल अभ्यर्थियों को काउंसलिंग में भाग लेने के लिए अपना स्कोरकार्ड, 10वीं और 12वीं की अंकसूची, पहचान पत्र, जाति प्रमाणपत्र (यदि लागू हो), निवास प्रमाणपत्र तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज पहले से तैयार रखने की सलाह दी गई है।

  • यूपी आईटीआई में बिना परीक्षा मिलेगा दाखिला, 8वीं, 10वीं और 12वीं पास युवाओं के लिए शुरू हुई ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया

    यूपी आईटीआई में बिना परीक्षा मिलेगा दाखिला, 8वीं, 10वीं और 12वीं पास युवाओं के लिए शुरू हुई ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में तकनीकी शिक्षा और रोजगार से जुड़े अवसर तलाश रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। राज्य में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान यानी आईटीआई में वर्ष 2026-27 सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। खास बात यह है कि इस बार भी उम्मीदवारों को किसी लिखित प्रवेश परीक्षा से नहीं गुजरना होगा। छात्रों का चयन उनकी पिछली कक्षा के अंकों के आधार पर तैयार की जाने वाली मेरिट सूची के माध्यम से किया जाएगा।

    उत्तर प्रदेश के आईटीआई संस्थानों में 8वीं, 10वीं और 12वीं पास छात्र अपनी योग्यता के अनुसार विभिन्न तकनीकी ट्रेड में प्रवेश ले सकते हैं। इन संस्थानों में युवाओं को रोजगार से जुड़े व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए जाते हैं, जिससे वे कम समय में तकनीकी कौशल हासिल कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। आईटीआई में इलेक्ट्रीशियन, फिटर, वेल्डर, मैकेनिक, प्लंबर, वायरमैन, टर्नर, ड्राफ्ट्समैन और कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट जैसे कई ट्रेड उपलब्ध हैं।

    उत्तर प्रदेश में आईटीआई प्रवेश और प्रशिक्षण व्यवस्था का संचालन राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी), लखनऊ द्वारा किया जाता है। यह संस्था सरकारी और निजी दोनों तरह के आईटीआई संस्थानों की निगरानी करती है। इसके अलावा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत संचालित संस्थान भी प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होते हैं।

    वर्ष 2026-27 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 11 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 4 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है और इच्छुक अभ्यर्थियों को निर्धारित पोर्टल के माध्यम से ही अपना पंजीकरण कराना होगा। ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

    आईटीआई प्रवेश के लिए चयन प्रक्रिया पूरी तरह मेरिट आधारित होगी। उम्मीदवारों का चयन संबंधित ट्रेड और पाठ्यक्रम की योग्यता के अनुसार 8वीं, 10वीं या 12वीं कक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाएगा। किसी भी प्रकार की लिखित प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। मेरिट सूची जारी होने के बाद उपलब्ध सीटों के आधार पर काउंसलिंग और सीट आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    आवेदक सरकारी आईटीआई, निजी आईटीआई या दोनों विकल्पों के लिए आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 14 वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि अधिकतम आयु सीमा तय नहीं की गई है। अधिकांश तकनीकी ट्रेड के लिए 10वीं पास होना आवश्यक है, जबकि कुछ शुरुआती स्तर के ट्रेड में 8वीं पास उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं।

    प्रवेश के लिए उम्मीदवार का उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना जरूरी है। दस्तावेज सत्यापन के समय वैध निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक विवरण, श्रेणी संबंधी जानकारी, फोटो, हस्ताक्षर और अन्य जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने होंगे।

    आवेदन शुल्क के रूप में सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को 250 रुपये का ऑनलाइन भुगतान करना होगा। भुगतान नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या यूपीआई माध्यम से किया जा सकता है। आवेदन जमा करने और शुल्क भुगतान के बाद उम्मीदवारों को फॉर्म में सुधार के लिए 48 घंटे की अवधि भी उपलब्ध कराई जाएगी।

    प्रवेश प्रक्रिया में पहले ऑनलाइन पंजीकरण, मोबाइल सत्यापन, आवेदन फॉर्म भरना, दस्तावेज अपलोड करना और शुल्क भुगतान जैसे चरण पूरे किए जाएंगे। इसके बाद योग्यता परीक्षा के अंकों के आधार पर मेरिट सूची जारी होगी। सीट उपलब्धता के अनुसार कई चरणों में काउंसलिंग आयोजित की जाएगी, जिससे पहले चरण में सीट नहीं पाने वाले उम्मीदवारों को आगे के अवसर मिल सकें।

    आईटीआई प्रवेश प्रक्रिया में राज्य सरकार के नियमों के अनुसार आरक्षण व्यवस्था भी लागू होगी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को निर्धारित नियमों के तहत लाभ मिलेगा। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि आवेदन करने से पहले पात्रता, शुल्क और अन्य जरूरी जानकारियों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार जरूर कर लें, क्योंकि नियमों में समय-समय पर बदलाव संभव हैं।