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  • सीजेआई सूर्यकांत ने ब्रिक्स देशों में कारोबारी विवाद निपटाने के लिए मध्यस्थता और सुलह का साझा मंच बनाने का प्रस्ताव दिया

    सीजेआई सूर्यकांत ने ब्रिक्स देशों में कारोबारी विवाद निपटाने के लिए मध्यस्थता और सुलह का साझा मंच बनाने का प्रस्ताव दिया

    नई दिल्ली ।ब्रिक्स देशों के बीच न्यायिक सहयोग को मजबूत करने और व्यापार तथा निवेश के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने की दिशा में भारत ने महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने ब्रिक्स चीफ जस्टिस फोरम में वाणिज्यिक विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता और सुलह का साझा मंच बनाने की जरूरत बताई।

    शुक्रवार को आयोजित फोरम में ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ सहयोगी देशों के मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष और वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी शामिल हुए। सम्मेलन के दौरान न्यायपालिका की भूमिका को केवल अदालती मामलों के निपटारे तक सीमित रखने के बजाय देशों के बीच सहयोग और आपसी संबंधों को मजबूत करने के व्यापक माध्यम के रूप में देखने पर जोर दिया गया।

    जस्टिस सूर्यकांत ने फोरम के दौरान विभिन्न देशों के न्यायिक प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। इन बैठकों में न्यायिक सहयोग से जुड़े समझौतों, व्यापारिक और कॉरपोरेट विवादों के समाधान तथा मध्यस्थता और सुलह-समझौते जैसे वैकल्पिक विवाद निपटारा तरीकों पर चर्चा हुई।

    वाणिज्यिक गतिविधियों के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय स्वरूप को देखते हुए अलग-अलग देशों की न्यायिक व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीमा पार कारोबार में विवाद उत्पन्न होने पर उनके शीघ्र और प्रभावी समाधान से कंपनियों तथा निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है। इसी संदर्भ में साझा मध्यस्थता और सुलह मंच का प्रस्ताव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    फोरम में विदेशी निवेशकों के विश्वास को मजबूत करने के लिए कुशल वाणिज्यिक अदालतों की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। कारोबार से जुड़े विवादों का समयबद्ध निपटारा निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके साथ ही विभिन्न देशों में दिए गए न्यायिक फैसलों और आदेशों को आपसी स्तर पर मान्यता देने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

    बैठकों में न्यायिक सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिए समझौता ज्ञापनों की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य न्यायिक संस्थानों के बीच संवाद और अनुभव साझा करने की प्रक्रिया को मजबूत करना है। न्यायिक अधिकारियों के बीच नियमित संपर्क से अलग-अलग देशों की कानूनी व्यवस्थाओं और विवाद समाधान प्रक्रियाओं को समझने में मदद मिल सकती है।

    फोरम के दौरान प्रोफेशनल एक्सचेंज कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का मुद्दा भी सामने आया। इसके लिए भोपाल स्थित नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी जैसे संस्थानों के इस्तेमाल की संभावनाओं पर चर्चा हुई। ऐसे कार्यक्रमों के जरिए विभिन्न देशों के न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण, अनुभव और कार्यप्रणाली साझा करने का अवसर मिल सकता है।

    ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार और निवेश लगातार सहयोग का प्रमुख क्षेत्र रहा है। ऐसे में कारोबारी विवादों के निपटारे के लिए प्रभावी न्यायिक तंत्र आर्थिक संबंधों को सुगम बनाने में मदद कर सकता है। मध्यस्थता और सुलह जैसे तरीकों से लंबे समय तक चलने वाली अदालती प्रक्रिया के विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।

    तीन दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन जस्टिस सूर्यकांत ने रूस, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण अफ्रीका, बेलारूस, कजाकिस्तान, ईरान और उज्बेकिस्तान के न्यायिक अधिकारियों से मुलाकात की। इन बैठकों में न्यायिक सहयोग के साथ व्यापार, कॉरपोरेट विवाद और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अनुकूल वातावरण जैसे विषय प्रमुख रहे।

    फोरम के प्रस्तावों का व्यापक उद्देश्य ब्रिक्स देशों की न्यायिक व्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाना और कारोबारी संबंधों को अधिक भरोसेमंद कानूनी आधार देना है। साझा विवाद समाधान व्यवस्था पर आगे की चर्चा से विभिन्न देशों के बीच व्यापारिक विवादों के निपटारे की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में रास्ता खुल सकता है।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन में संजय कुमार से मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार, एससी-एसटी और पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई

    जंतर-मंतर प्रदर्शन में संजय कुमार से मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज गिरफ्तार, एससी-एसटी और पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर 23 जून को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प के मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को पुलिस ने बुलंदशहर से गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के सिर में चोट लगी थी। इस घटना के बाद से ही स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही थी।

    बताया गया है कि झड़प के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज के हाथ में पहने कड़े से संजय कुमार के सिर पर चोट लगी। चोट लगने के बाद उन्हें उपचार के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया था। घटना को लेकर पुलिस ने मामला दर्ज किया था और इसके बाद जांच आगे बढ़ाई जा रही थी।

    मामले में उस समय नया मोड़ आया जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक पॉडकास्ट वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। वीडियो में वह जंतर-मंतर पर हुई घटना और संजय कुमार को लगी चोट का जिक्र करता नजर आया। वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद मामले में आरोपी की गिरफ्तारी की मांग फिर तेज हो गई।

    शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं ने स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन करीब दो घंटे तक चला। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से आरोपी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की मांग की और मामले में देरी पर सवाल उठाए।

    पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों को कार्रवाई के लिए 72 घंटे का भरोसा दिया गया था। हालांकि इसके बाद स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच में तेजी आने की उम्मीद है और पुलिस अब घटना से जुड़े तथ्यों तथा उपलब्ध साक्ष्यों को खंगालेगी।

    स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में कई कानूनी प्रावधान शामिल किए गए हैं। इनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के साथ भारतीय न्याय संहिता के तहत पीछा करने और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने से संबंधित धाराएं शामिल हैं। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है।

    आरोपी के खिलाफ पॉक्सो कानून के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं के आधार पर पुलिस मामले के अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही है। सीजेपी के सह संयोजक सौरभ दास ने भी आरोपी के खिलाफ दर्ज मामलों और गिरफ्तारी की जानकारी दी है।

    हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर पुलिस पहले मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुकी है। 3 सितंबर को पुलिस ने बताया था कि प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति की मेडिकल रिपोर्ट में सिर की हड्डी में फ्रैक्चर या किसी गंभीर चोट की पुष्टि नहीं हुई थी। पुलिस ने कार्रवाई में देरी के पीछे किसी राजनीतिक दबाव से भी इनकार किया था।

    अब गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला चरण शुरू होगा। पुलिस घटना के दौरान मौजूद लोगों के बयान, उपलब्ध वीडियो और चिकित्सकीय दस्तावेजों समेत अन्य साक्ष्यों की जांच कर सकती है। इसके आधार पर आरोपों की स्थिति और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।

    घटना के बाद से प्रदर्शन से जुड़े पक्ष स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। गिरफ्तारी के साथ अब यह मामला जांच और कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है।

  • चंपत राय से हुई पहचान की चूक? राम मंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव ने बताई गलती, अब व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव

    चंपत राय से हुई पहचान की चूक? राम मंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव ने बताई गलती, अब व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव


    उत्तर प्रदेश। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में नई जिम्मेदारी संभालने के बाद महासचिव गोविंद देव गिरि महाराज ने मंदिर की व्यवस्था और भविष्य की प्राथमिकताओं को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने पूर्व महासचिव चंपत राय के कामकाज और व्यक्तित्व पर भी अपनी राय रखी। गोविंद देव गिरि ने कहा कि उनके अनुभव के आधार पर चंपत राय बेदाग और निष्कलंक व्यक्ति हैं। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि उनका भोलापन उनके लिए परेशानी का कारण बना और सब पर विश्वास करने की वजह से लोगों को पहचानने में उनसे चूक हुई। उनके मुताबिक ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में कुछ कमियां रही हैं और इन्हीं कमियों को दूर करने की जरूरत है।

    चढ़ावे की कथित चोरी के मामले पर गोविंद देव गिरि ने साफ कहा कि यदि घटना हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और चोरी करने वालों को सजा मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को जिस तरह सामने रखा गया उस पर भी गंभीरता से विचार करने की बात कही। उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले में किसी संभावित षड्यंत्र की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की गुंजाइश खत्म करने के लिए व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाएगा।

    महासचिव के रूप में अपनी प्राथमिकताओं को बताते हुए उन्होंने तीन प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया। पहला मंदिर को देव सेवा का ऐसा केंद्र बनाना है जिससे देश के दूसरे मंदिर भी प्रेरणा ले सकें। दूसरी प्राथमिकता मंदिर की पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है। तीसरी चुनौती अयोध्या के लोगों और मंदिर के बीच संवाद को मजबूत करना है। उनका मानना है कि स्थानीय लोगों की भावनाओं और अपेक्षाओं को समझकर बेहतर संवाद व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए।

    गोविंद देव गिरि इससे पहले ट्रस्ट में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। महासचिव का पद संभालने के बाद उनकी भूमिका और समय दोनों बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि उनके लिए पद से ज्यादा महत्वपूर्ण रामलला की सेवा है। सालभर पहले से तय कार्यक्रमों के बीच अयोध्या के लिए समय निकालना चुनौती जरूर है लेकिन उन्होंने इसे अपनी जिम्मेदारी मानकर स्वीकार किया है।

    ट्रस्ट में पहली बार निर्मला यादव को महिला ट्रस्टी बनाए जाने पर भी उन्होंने सकारात्मक रुख जताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को साथ लेकर चलना जरूरी है और निर्मला यादव का शिक्षा क्षेत्र में अनुभव ट्रस्ट के काम आ सकता है। उनकी संस्कृत और हिंदी की शैक्षणिक पृष्ठभूमि और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए काम को भी उन्होंने उपयोगी बताया।

    मंदिर में आने वाले चढ़ावे की निगरानी और पारदर्शिता के सवाल पर उन्होंने बताया कि कई बैंकों के प्रतिनिधियों ने ट्रस्ट को सुझाव दिए हैं। विचार-विमर्श के बाद नई व्यवस्था तय की जाएगी। उनकी योजना है कि श्रद्धालुओं की संख्या और मंदिर में आने वाले चढ़ावे की जानकारी रोजाना वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए काम चल रहा है और आने वाले समय में व्यवस्थाओं को लगातार अपडेट किया जाएगा।

    ट्रस्ट में पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को CEO बनाए जाने को लेकर भी उन्होंने भूमिका स्पष्ट की। उनके मुताबिक महासचिव और CEO की जिम्मेदारियां अलग होंगी लेकिन दोनों का लक्ष्य एक ही रहेगा। नीति और निर्णय ट्रस्ट लेगा जबकि उसे जमीन पर लागू कराने की जिम्मेदारी CEO की होगी। ऐसे में दोनों पदों के बीच बेहतर तालमेल को जरूरी माना गया है।

    गोविंद देव गिरि ने संकेत दिया कि आने वाले समय में राम मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्थाएं अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित दिखाई देंगी। चढ़ावे से लेकर श्रद्धालुओं की संख्या और खर्च से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जाएगा। उनका जोर यही है कि राम मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं बल्कि देशभर के मंदिरों के लिए व्यवस्था और पारदर्शिता का आदर्श भी बने।

  • गंगा उफनीं तो डूबे 84 घाट, आगरा में चारपाई बनी सहारा… यूपी में बारिश-बाढ़ ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें

    गंगा उफनीं तो डूबे 84 घाट, आगरा में चारपाई बनी सहारा… यूपी में बारिश-बाढ़ ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में मानसूनी बारिश का दौर लगातार लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। शनिवार सुबह राजधानी लखनऊ समेत नोएडा और गोरखपुर सहित कई शहरों में रुक-रुककर बारिश होती रही। कहीं हल्की बूंदाबांदी हुई तो कहीं आसमान में बादल छाए रहे। मौसम विभाग ने प्रदेश के 71 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में जनजीवन प्रभावित है। वाराणसी और प्रयागराज समेत 26 जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं और करीब 3.53 लाख लोग इससे प्रभावित बताए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से अब तक 17 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है जबकि करीब 5 हजार लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं।
    आगरा में बारिश के बाद जलभराव ने स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को मुश्किल बना दिया। शुक्रवार देर रात पानी में एक एंबुलेंस फंस गई। इसी दौरान प्रसव पीड़ा से जूझ रही गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने की जरूरत पड़ी तो स्थानीय लोगों ने मदद के लिए चारपाई का सहारा लिया। लोगों ने महिला को चारपाई पर लादकर करीब 500 मीटर तक पानी और जलभराव के बीच पहुंचाया जिसके बाद उसे एंबुलेंस तक ले जाया जा सका। यह तस्वीर बताती है कि कई इलाकों में बारिश के बाद सड़क और आवागमन की स्थिति कितनी चुनौतीपूर्ण हो गई है।

    उधर मेरठ और बाराबंकी में भी भारी बारिश के बीच मकान गिरने की घटनाएं सामने आईं। इन हादसों में दो बच्चों समेत तीन लोगों के घायल होने की जानकारी है। महोबा में लगातार बारिश के कारण कच्चे मकानों पर खतरा बढ़ गया है। कुड़ार गांव में एक कच्चा मकान देखते ही देखते ढह गया। बताया गया कि मकान कुछ ही सेकंड में जमींदोज हो गया और पास से गुजर रहा एक युवक बाल-बाल बच गया।

    वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। शहर के सभी 84 घाट पानी में डूब गए हैं और घाटों के बीच संपर्क प्रभावित हुआ है। मणिकर्णिका घाट का शवदाह गृह भी जलमग्न होने के कारण अंतिम संस्कार के लिए लोगों को अलग व्यवस्था करनी पड़ रही है। कई जगह लोग कमर तक पानी के बीच से गुजरते नजर आए।

    ललितपुर में गोविंद सागर बांध से पानी छोड़े जाने के बाद शहजाद नदी का जलस्तर बढ़ गया। छोटे पुलों के ऊपर से पानी बहने लगा जिससे आवागमन प्रभावित हुआ। रामपुर में भी बाढ़ से घिरे भैया नगला गांव का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। पुल टूटने के बाद ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी जोखिम उठाने की मजबूरी बनी हुई है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर अब घटने लगा है लेकिन पानी उतरने के बाद कीचड़ और कचरे ने नई चुनौती खड़ी कर दी है। प्रशासन सफाई अभियान में जुटा है।

    मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अगले कुछ दिनों तक पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का असर बना रह सकता है। 6 से 8 सितंबर के बीच कुछ इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना है। इसके बाद बारिश कराने वाला सिस्टम कमजोर पड़ने का अनुमान है। हालांकि प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की बारिश और बौछारों का सिलसिला इसके बाद भी जारी रह सकता है। ऐसे में प्रशासन के सामने राहत और बचाव के साथ जलभराव वाले इलाकों में आवागमन और स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने की बड़ी चुनौती बनी हुई है।

  • सड़क-लाइट के फंड पर कमीशन की मांग? भास्कर के स्टिंग में कैश लेनदेन और विधायक निधि की डील का दावा

    सड़क-लाइट के फंड पर कमीशन की मांग? भास्कर के स्टिंग में कैश लेनदेन और विधायक निधि की डील का दावा


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश में विधायक निधि से विकास कार्य कराने की व्यवस्था को लेकर दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सड़क नाली स्ट्रीट लाइट और दूसरे विकास कार्यों के लिए विधायक निधि जारी कराने के बदले कमीशन मांगने के आरोप सामने आए हैं। दैनिक भास्कर ने दो विधायकों पर स्टिंग ऑपरेशन के जरिए कमीशन की डील करने और कैश लेने के बाद अनुशंसा-पत्र जारी करने का दावा किया है। इन विधायकों में एक भाजपा और एक समाजवादी पार्टी से जुड़े हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

    रिपोर्ट के मुताबिक भास्कर की टीम ने NGO मैनेजर बनकर पहले भाजपा विधायक जय मंगल कन्नौजिया से संपर्क किया। सोलर लाइट लगाने के लिए विधायक निधि से राशि स्वीकृत कराने की बात हुई। इसके बाद कई दौर की बातचीत के बाद कथित तौर पर 35 प्रतिशत कमीशन पर सहमति बनने का दावा किया गया। रिपोर्ट में बातचीत का हवाला देते हुए बताया गया कि 10.50 लाख रुपए के प्रस्ताव पर कमीशन की रकम को लेकर चर्चा हुई और बाद में कैश लेनदेन भी हुआ।

    इन्वेस्टिगेशन के अनुसार पहले 50 हजार रुपए दिए गए और इसके बाद बाकी रकम को लेकर बातचीत हुई। रिपोर्ट में दावा है कि बाद की मुलाकात में अतिरिक्त रकम भी दी गई। कुल मिलाकर 83 हजार 500 रुपए लिए जाने का दावा किया गया है। इसके अगले दिन विधायक की ओर से 10.50 लाख रुपए की सोलर लाइट के काम के लिए अनुशंसा-पत्र दिए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है। इस पूरे मामले ने विधायक निधि से जुड़े कामों में पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इसके बाद भास्कर की टीम ने आजमगढ़ जिले की मेंहनगर सीट से सपा विधायक पूजा सरोज से जुड़े मामले की पड़ताल की। रिपोर्ट के मुताबिक सोलर लाइट और वाटर कूलर लगाने का प्रस्ताव लेकर विधायक से संपर्क किया गया। कई दौर की बातचीत के बाद कथित तौर पर कमीशन को लेकर चर्चा हुई। रिपोर्ट में विधायक के हवाले से 50 प्रतिशत कमीशन एडवांस लेने की मांग किए जाने का दावा किया गया है। प्रस्तावित कामों का कुल बजट करीब 31 लाख रुपए बताया गया और 35 प्रतिशत कमीशन के हिसाब से रकम का हिसाब लगाया गया।

    रिपोर्ट के अनुसार विधायक की ओर से पहले करीब पांच लाख रुपए देने की मांग की गई। बातचीत के दौरान एक लाख रुपए दिए जाने का भी दावा किया गया है लेकिन कथित तौर पर पूरी रकम एक साथ देने की बात कहते हुए वह पैसा वापस कर दिया गया। बाद में विधायक के प्रतिनिधि की ओर से चार अनुशंसा-पत्र भेजे जाने का दावा किया गया। रिपोर्ट में इन पत्रों में कुल 81 लाख रुपए के कामों की विधायक निधि से स्वीकृति का उल्लेख किया गया है। हालांकि भास्कर टीम का दावा है कि स्टिंग के बाद इन अनुशंसा-पत्रों की हार्ड कॉपी लेने के लिए वह वापस नहीं गई।

    इन दोनों मामलों में सिर्फ विधायकों पर ही नहीं बल्कि उनके करीबी लोगों पर भी कथित रूप से पैसे लेने के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक एक विधायक के प्रतिनिधि ने अलग-अलग मौकों पर रकम ली जबकि दूसरे मामले में विधायक के करीबी व्यक्ति पर भी पैसे लेने का आरोप है। इससे यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि अगर विधायक निधि के कामों में इस तरह का कथित कमीशन तंत्र मौजूद है तो विकास कार्यों की गुणवत्ता और वास्तविक लागत पर इसका क्या असर पड़ सकता है।

    उत्तर प्रदेश में प्रत्येक विधायक को हर साल विधायक निधि के तौर पर पांच करोड़ रुपए उपलब्ध होने की बात रिपोर्ट में कही गई है। इस राशि का इस्तेमाल सड़क नाली पेयजल स्ट्रीट लाइट सामुदायिक भवन और अन्य स्थानीय विकास कार्यों में किया जा सकता है। ऐसे में इस फंड से जुड़ी किसी भी कथित अनियमितता का असर सीधे जनता के विकास कार्यों पर पड़ता है।

    कानूनी जानकारों के मुताबिक सरकारी काम के बदले रिश्वत या कमीशन लेना गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है और भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत कार्रवाई संभव है। अब इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि स्टिंग में सामने आए कथित लेनदेन की आधिकारिक जांच होती है या नहीं और संबंधित विधायकों पर क्या कार्रवाई की जाती है। दैनिक भास्कर ने इस इन्वेस्टिगेशन के अगले हिस्से में CDO कार्यालय में कथित कमीशन व्यवस्था से जुड़े और खुलासे करने की बात कही है। ऐसे में इस मामले की अगली कड़ी पर भी नजर रहेगी।

  • जन्माष्टमी पर था द्वापर जैसा नजारा…. मध्यरात्रि मथुरा में जन्मे भगवान श्रीकृष्ण, देशभर में गूंज उठे जयकारे

    जन्माष्टमी पर था द्वापर जैसा नजारा…. मध्यरात्रि मथुरा में जन्मे भगवान श्रीकृष्ण, देशभर में गूंज उठे जयकारे


    मथुरा।
    इस भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी (Krishna Paksha, Ashtami) तिथि की मध्यरात्रि नजारा बिल्कुल द्वापर (Dvapar) सरीखा ही था। दिन में खूब बदरा बरसे और रात को भी काली घटाएं छाईं थीं। हर पल जोर जोर से बरसने को आतुर। आसमान में बिजली भी खूब चमकी। जैसे ही घड़ी की सुइयों ने शुक्रवार को रात के 12 बजाए, संपूर्ण ब्रजमंडल नंद घर आनंद भए, जय कन्हैया लाल की के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। अलौकिक आभा, अपार जनसैलाब, ढोल-नगाड़ों की थाप और घंटे-घड़ियालों की गूंज के बीच भगवान श्रीकृष्ण (Lord Sri Krishna) का घर-घर और मंदिरों में जन्म हुआ। लाखों श्रद्धालु इसके साक्षी बने।

    मुख्य आयोजन श्रीकृष्ण जन्मस्थान (Shri Krishna Janmasthan) पर हुआ। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भक्तों का उल्लास देखते ही बन रहा था। घड़ी में जैसे ही 11 बजे तत्काल नवगृह स्थापना के साथ पूजन शुरू हो गया। 11.55 बजे तक कमल पुष्प एवं तुलसीदल से सहस्त्रार्चन हुआ। 11.59 बजते ही भागवत भवन स्थित युगल सरकार के पट बंद हो गए।

    इस एक मिनट के पल में श्रद्धालुओं को लगा मानो घंटों बीत रहे हों। ठीक 12 बजे लीलाधर के चलित श्रीविग्रह को भागवत भवन लाया गया। यहां रजत कमल पुष्प में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक किया गया। श्रीकृष्ण जन्मस्थान के ट्रस्टी अनुराग डालमिया, सचिव कपिल शर्मा और सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने सोने-चांदी से निर्मित 100 किग्रा की कामधेनु गाय की मूर्ति में गंगाजल सहित पंचामृत भरकर लल्ला का अभिषेक किया।

    इस दौरान जन्मस्थान पर ढोल-नगाड़े और घंटे-घड़ियाल गूंजते रहे। झांझ-मजीरे, मृदंग और शंख की मंगलध्वनि के बीच कान्हा के बधाई गीत गुंजायमान हो उठे। दर्शन का दौर 1:30 बजे तक चलता रहा।

    श्रीकृष्ण के 5253वें जन्मोत्सव पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थित मूल श्रीगर्भगृह (कारागार) से अभिषेक व पूजा-अर्चना की लाइव स्ट्रीमिंग कराई गई। गर्भगृह में श्रीकृष्ण बाल-गोपाल रूप में विराजते हैं। अब तक केवल भागवत भवन से ही लाइव प्रसारण होता रहा है, शुक्रवार मध्यरात्रि करोड़ों श्रद्धालुओं ने घर बैठे टीवी स्क्रीन पर सीधा प्रसारण देखा। इसके लिए श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान द्वारा अत्याधुनिक कैमरे लगाकर डिजिटल प्रसारण की व्यवस्था की गई।

  • BRICS Summit: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पूरे लाव-लश्कर के साथ आएंगे दिल्ली….

    BRICS Summit: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पूरे लाव-लश्कर के साथ आएंगे दिल्ली….


    नई दिल्ली।
    भारत (India) की अध्यक्षता में 12-13 सितंबर को हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) दिल्ली आएंगे। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति जिनपिंग की यात्रा का आधिकारिक कार्यक्रम अभी नहीं आया है लेकिन उनके दौरे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वे एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आ रहे हैं।

    जिनपिंग की भारत यात्रा करीब सात सालों के बाद हो रही है। इससे पहले वे अक्तूबर 2019 में द्विपक्षीय वार्ता के लिए भारत आए थे। सूत्रों ने कहा कि जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों में द्विपक्षीय वार्ता भी होगी जिसमें सीमा से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा होगी। ब्रिक्स में प्रमुख हस्तियों में जिनपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन होंगे। चुनाव के चलते ब्राजील के राष्ट्रपति लूला हिस्सा नहीं लेंगे। उसके भी विदेश मंत्री आएंगे। जबकि ईरान, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के हिस्सा लेने की संभावना है।


    बांग्लादेशी पीएम के आने की संभावना नहीं

    बिम्स्टेक के अध्यक्ष के रूप में ब्रिक्स में आमंत्रित बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सम्मेलन में आने के आसार नही हैं। संभावना है कि विदेश मंत्री बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। आपको बता दें कि बांग्लादेश शेख हसीना को वापस भेजने की मांग कर रहा है। इस वजह से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव बढ़ा है।

    तारिक रहमान की यात्रा को लेकर राष्ट्रपति भवन ने एक बार बयान भी जारी कर दिया था जिसे बाद में वापस लेना पड़ा। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि तारिक रहमान की यात्रा के लिए अनुकूल माहौल बनाने की जरूरत है। इस दौरे के रद्द होने के बाद कहा जा रहा था कि रहमान ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत आ सकते हैं।हालांकि वह ब्रिक्स शिखऱ सम्मेलन में हिस्सा लेने भी नहीं आ रहे हैं।


    ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीशों की बैठक शुरू

    ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने वाणिज्यिक विवादों को सुलझाने के लिए मध्यस्थता एवं सुलह के लिए एक साझा मंच बनाने का प्रस्ताव भी रखा। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यहां ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक का आयोजन किया। इसमें ब्रिक्स के सदस्य देशों और सहयोगी देशों के प्रधान न्यायाधीश, शीर्ष अदालतों के प्रमुख और वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी शामिल हुए।

    ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच की बैठक के उद्घाटन के दिन प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायिक प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के साथ कई द्विपक्षीय बैठकें कीं।सीजेआई ने तीन दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन रूस, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बेलारूस, कजाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, ईरान और उज्बेकिस्तान के न्यायिक प्रमुखों से मुलाकात की।

  • देश में अस्पृश्यता के 891 केस लंबित…. इनमें आधे UP में, महाराष्ट्र दूसरे और गुजरात तीसरे नंबर पर

    देश में अस्पृश्यता के 891 केस लंबित…. इनमें आधे UP में, महाराष्ट्र दूसरे और गुजरात तीसरे नंबर पर


    नई दिल्ली।
    देशभर में अनुसूचित जाति (scheduled caste) के खिलाफ अस्पृश्यता (Untouchability) के 891 से ज्यादा मुकदमे (891 Cases) लंबित हैं। इन मामलों में किसी को कोई सजा नहीं हुई। जबकि 13 मामलों में आरोपी अपराध मुक्त हो गए। सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

    इसमें साल 2024 के मामलों की स्थिति बताई गई है। इसके मुताबिक 886 मामले 2023 में लंबित हैं जबकि पांच मामले 2024 में और दर्ज हो गए। यह मामले विभिन्न अदालतों (Courts) में अंतिम निर्णय के लिए लंबित हैं। इनमें किसी को कोई सजा तब तक नहीं हो पाई थी। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में अस्पृश्यता से जुड़े 426, महाराष्ट्र 166 व गुजरात में 98 मामले दर्ज हैं। यह मामले विभिन्न अदालतों में अंतिम निर्णय के लिए लंबित हैं। अनुसूचित जाति के लोगों के खिलाफ हुए अपराधिक मामलों की बात की जाए तो 2024 में पुलिस द्वारा ऐसे 48 मामले दर्ज हुए। इनमें केवल पांच मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई। बाकी मामले पुलिस की जांच के स्तर पर लंबित हैं। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे द्वारा इस्तेमाल मंच के शुद्धीकरण का मामला उत्तराखंड में इन दिनों सुर्खियां बना हुआ है। इस राज्य में कोई केस दर्ज नहीं है।


    केस दर्ज करने में महाराष्ट्र दूसरे और गुजरात तीसरे नंबर पर

    दोषियों को सजा दिलाने के लिए विशेष न्यायालय मौजूद : अस्पृश्यता से उत्पन्न किसी भी प्रकार की अक्षमता के शिकार व्यक्तियों को कानूनी सहायता दिलाने, अभियोजन शुरू करने अथवा अभियोजन की निगरानी करने के लिए अधिकारियों की नियुक्ति करना जैसे उपाय शामिल हैं। दोषियों को सजा दिलाने के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना भी की गई है। कई राज्य सरकारों ने समितियों का गठन किया है।


    शुद्धीकरण मामले में उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष समेत कई नेताओं पर केस दर्ज

    कर्नाटक में बंगलूरू के विधान सौध पुलिस थाने में उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट समेत कई नेताओं के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की गई। यह मामला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की 8 अगस्त को हल्द्वानी में हुई रैली स्थल के शुद्धीकरण से जुड़ा हुआ है। कांग्रेस के एसटी विभाग के पूर्व उपाध्यक्ष टीआर रामप्पा ने 31 अगस्त को दी गई शिकायत में कहा कि खरगे की रैली के बाद भाजपा के कुछ सदस्यों और पदाधिकारियों ने 10 अगस्त को जनसभा स्थल का शुद्धीकरण किया। इसका मकसद आपत्तिजनक, अपमानजनक और जातिवादी सोच दिखाना था कि अनुसूचित जाति के मल्लिकार्जुन खरगे की मौजूदगी ने जगह को अपवित्र कर दिया। इसलिए इस जगह को रस्म के जरिये शुद्ध करने की जरूरत थी। शिकायत में कहा है कि यह न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि खरगे की गरिमा के खिलाफ है। 

  • 11 सितंबर के बाद मुंबई में फिर जुटेगा मराठा समाज, मनोज जरांगे ने सरकार को दी आर-पार की चेतावनी

    11 सितंबर के बाद मुंबई में फिर जुटेगा मराठा समाज, मनोज जरांगे ने सरकार को दी आर-पार की चेतावनी


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर तेजी से गरमा गया है। जालना के अंतरवाली सराटी गांव में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे ने सरकार को अब साफ तौर पर अल्टीमेटम दे दिया है। जरांगे ने कहा है कि सरकार के पास 11 सितंबर तक का समय है। अगर इस अवधि में उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया गया तो 12 सितंबर को आंदोलन मुंबई की ओर कूच करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि मांगें पूरी होने तक उनका अनशन खत्म नहीं होगा।

    मनोज जरांगे पिछले कई दिनों से मराठा समुदाय को आरक्षण देने और पात्र मराठों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं। लगातार अनशन के कारण उनकी तबीयत को लेकर भी चिंता बढ़ी है। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद डॉक्टरों ने उन्हें ड्रिप यानी आईवी फ्लूइड लेने की सलाह दी लेकिन जरांगे ने इसे लेने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है और सरकार पर मांगों को जल्द पूरा करने का दबाव बनाया है।
    मनोज जरांगे पिछले कई दिनों से मराठा समुदाय को आरक्षण देने और पात्र मराठों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं। लगातार अनशन के कारण उनकी तबीयत को लेकर भी चिंता बढ़ी है। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद डॉक्टरों ने उन्हें ड्रिप यानी आईवी फ्लूइड लेने की सलाह दी लेकिन जरांगे ने इसे लेने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है और सरकार पर मांगों को जल्द पूरा करने का दबाव बनाया है।

    गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार की ओर से मंत्रियों और विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल भी जरांगे से मिलने पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और उदय सामंत के साथ एमएलसी प्रसाद लाड और विधायक मकरंद पाटिल शामिल थे। सरकार की ओर से जरांगे की बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए उनसे अनशन खत्म करने या कुछ समय के लिए स्थगित करने की अपील की गई। सरकार ने यह भी बताया कि करीब 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड अब तक खोजे जा चुके हैं और कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। हालांकि इन आश्वासनों के बावजूद जरांगे अपने आंदोलन को खत्म करने के लिए तैयार नहीं हुए।

    जरांगे ने मराठा समुदाय के लोगों से 4 सितंबर से कुनबी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने की अपील भी की है। उनका कहना है कि पुराने पारिवारिक रिकॉर्ड खून के रिश्तों और वंशावली से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर पात्र लोग प्रमाणपत्र के लिए आवेदन कर सकते हैं। कुनबी समुदाय अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी के अंतर्गत आता है। जरांगे की प्रमुख मांग है कि पात्र मराठों को कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए ताकि उन्हें ओबीसी आरक्षण का लाभ मिल सके।

    इसके अलावा जरांगे की मांगों में सतारा गजट के आधार पर आरक्षण लागू करना आंदोलन के दौरान दर्ज पुलिस मामलों को वापस लेना और आंदोलन में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी तथा आर्थिक सहायता देना भी शामिल है। इन मांगों को लेकर सरकार और जरांगे के बीच बातचीत जारी है लेकिन फिलहाल किसी अंतिम समाधान तक बात नहीं पहुंची है।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि सरकार संविधान और कानून के दायरे में आने वाली मांगों पर बातचीत के लिए तैयार है। वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी कहा है कि सरकार मराठा समुदाय को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन किसी दूसरे वर्ग के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। ऐसे में सरकार के सामने मराठा आरक्षण की मांग को लेकर संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती है।

    अब सबकी नजर 11 सितंबर पर टिकी है। जरांगे इसे अपना आखिरी भूख हड़ताल बता चुके हैं। उनका साफ कहना है कि अगर तय समय तक मांगों पर अमल नहीं हुआ तो 12 सितंबर को मुंबई में आंदोलन किया जाएगा। इस ऐलान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है और क्या 11 सितंबर से पहले कोई समाधान निकलता है इस पर पूरे महाराष्ट्र की नजर रहेगी।

  • गुरु के सम्मान में समर्पित है 5 सितंबर, शिक्षक दिवस पर जानिए इस दिन की पूरी कहानी और डॉ. राधाकृष्णन का योगदान

    गुरु के सम्मान में समर्पित है 5 सितंबर, शिक्षक दिवस पर जानिए इस दिन की पूरी कहानी और डॉ. राधाकृष्णन का योगदान


    नई दिल्ली । भारत में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन देश के उन शिक्षकों को सम्मान देने के लिए समर्पित है जो विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं देते बल्कि उन्हें जीवन में सही दिशा दिखाने और बेहतर इंसान बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षक दिवस का यह अवसर गुरु और शिष्य के बीच के उस रिश्ते को याद करने का दिन है जिसकी नींव ज्ञान संस्कार अनुशासन और मार्गदर्शन पर टिकी होती है। स्कूलों कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और विद्यार्थी अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करते हैं।

    भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाने के पीछे देश के महान शिक्षाविद दार्शनिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का महत्वपूर्ण योगदान है। उनका जन्म 5 सितंबर 1888 को हुआ था। वे शिक्षा और दर्शन के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए पूरे देश में सम्मानित रहे। जब वे भारत के राष्ट्रपति बने तो उनके कुछ विद्यार्थियों और प्रशंसकों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई। इस पर उन्होंने अपने जन्मदिन को अलग तरीके से मनाने की बात कहते हुए इसे शिक्षकों के सम्मान के दिन के रूप में मनाने का सुझाव दिया। इसके बाद 5 सितंबर को भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई।

    शिक्षक दिवस केवल एक उत्सव नहीं बल्कि शिक्षा के महत्व को समझने का अवसर भी है। किसी भी समाज के निर्माण में शिक्षक की भूमिका बेहद अहम होती है क्योंकि शिक्षक ही नई पीढ़ी को ज्ञान के साथ सोचने समझने और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में मदद करते हैं। विद्यार्थी के जीवन में माता पिता के बाद शिक्षक का स्थान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। एक अच्छा शिक्षक अपने विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है और असफलता के समय उनका हौसला भी बढ़ाता है।

    इस दिन विद्यार्थी अपने शिक्षकों के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करते हैं। कई स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रम भाषण प्रतियोगिता और विशेष प्रस्तुतियां आयोजित की जाती हैं। विद्यार्थी अपने शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हैं और कई जगह उन्हें उपहार देकर सम्मानित भी किया जाता है। कुछ शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थी एक दिन के लिए शिक्षक की भूमिका निभाते हैं और कक्षाओं का संचालन करते हैं। इससे उन्हें शिक्षक की जिम्मेदारियों और चुनौतियों को करीब से समझने का अवसर मिलता है।

    आज के बदलते दौर में शिक्षक की भूमिका भी लगातार बदल रही है। तकनीक और डिजिटल माध्यमों ने शिक्षा के तरीकों को काफी बदल दिया है लेकिन शिक्षक का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है। इंटरनेट से जानकारी आसानी से मिल सकती है लेकिन उस जानकारी को सही तरीके से समझना उसका उपयोग करना और सही दिशा में आगे बढ़ना शिक्षक के मार्गदर्शन से ही बेहतर तरीके से संभव होता है।

    शिक्षक दिवस इसलिए भी खास है क्योंकि यह विद्यार्थियों को अपने शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। जीवन में सफलता हासिल करने वाले कई लोग अपनी उपलब्धियों का श्रेय अपने शिक्षकों को देते हैं। वास्तव में शिक्षक वह व्यक्ति होता है जो विद्यार्थी के भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानकर उसे उड़ान भरने का आत्मविश्वास देता है। 5 सितंबर का दिन इसी सम्मान और कृतज्ञता की भावना को मजबूत करता है और हमें याद दिलाता है कि एक अच्छे शिक्षक का प्रभाव विद्यार्थी की पूरी जिंदगी पर दिखाई दे सकता है।