Category: National

  • हैदराबाद में कार्रवाई तेज: बंडी संजय के बेटे पर POCSO आरोप, पुलिस ने किया गिरफ्तार

    हैदराबाद में कार्रवाई तेज: बंडी संजय के बेटे पर POCSO आरोप, पुलिस ने किया गिरफ्तार

    नई दिल्ली । देश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में उस समय हलचल तेज हो गई जब केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार के बेटे भगीरथ से जुड़े एक गंभीर मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यह मामला कथित रूप से POCSO कानून से संबंधित आरोपों से जुड़ा हुआ है, जिसमें एक नाबालिग से जुड़े प्रकरण की शिकायत के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई है। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई कई दिनों से चल रही जांच और तकनीकी व भौतिक साक्ष्यों के आधार पर की गई है, जिसमें आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।

    सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में अलग-अलग टीमों का गठन कर विभिन्न स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। आरोपित की लोकेशन का पता लगाने के लिए लगातार निगरानी की जा रही थी और अंततः एक विशेष सूचना के आधार पर उसे हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को प्रारंभिक पूछताछ के लिए संबंधित थाने ले जाया गया, जहां पंच गवाहों की मौजूदगी में बयान दर्ज किए गए। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने कुछ तथ्यों पर अपना पक्ष रखा, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई की गई।

    इसके बाद आरोपी को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए ले जाया गया और फिर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को भी कड़ा रखा गया ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। पुलिस अधिकारियों ने यह भी बताया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच को बेहद सावधानी और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ाया जा रहा है।

    इस बीच, आरोपी पक्ष की ओर से यह दावा किया गया है कि मामला पूरी तरह से गलत समझ और व्यक्तिगत विवाद का परिणाम है। उनके अनुसार, आरोपों के पीछे कुछ पारिवारिक और वित्तीय विवाद भी हो सकते हैं, जिनकी जांच आवश्यक है। वहीं शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि मामले में गंभीर आरोप हैं और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

    घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, जहां कुछ नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं प्रशासनिक स्तर पर यह स्पष्ट किया गया है कि कानून सभी के लिए समान है और जांच प्रक्रिया बिना किसी दबाव के पूरी की जाएगी।

    इस मामले में आगे की सुनवाई और जांच रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। पुलिस का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों, बयान और अन्य पहलुओं की गहन जांच की जा रही है ताकि मामले की सच्चाई को पूरी तरह स्पष्ट किया जा सके। फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में है और मामला न्यायालय की निगरानी में आगे बढ़ रहा है।

  • सड़क विकास को मिली रफ्तार, बंगाल ने सात हाईवे खंड केंद्र को ट्रांसफर करने का रास्ता साफ किया

    सड़क विकास को मिली रफ्तार, बंगाल ने सात हाईवे खंड केंद्र को ट्रांसफर करने का रास्ता साफ किया

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सड़क ढांचे को मजबूत करने और लंबित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों के सात प्रमुख खंडों को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड को सौंपने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद लंबे समय से अटके हुए बुनियादी ढांचा विकास कार्यों के तेजी से आगे बढ़ने की संभावना बन गई है।

    इन सात खंडों का संचालन अब तक राज्य के लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के अंतर्गत किया जा रहा था। केंद्र सरकार की ओर से लगातार अनुरोध किए जाने के बावजूद इन मार्गों के हस्तांतरण में देरी हो रही थी, जिससे कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं ठप पड़ी थीं। अब इस मंजूरी के साथ केंद्रीय एजेंसियों को इन मार्गों पर बिना किसी बाधा के कार्य शुरू करने का अवसर मिल सकेगा।

    एनएचएआई को जिन प्रमुख खंडों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उनमें एनएच-312 का वह महत्वपूर्ण हिस्सा शामिल है जो जंगीपुर, उमरपुर, कृष्णानगर, बनगांव और बसीरहाट को जोड़ते हुए भारत-बांग्लादेश सीमा तक जाता है। इसके अलावा बिहार से पश्चिम बंगाल सीमा को जोड़ने वाले एनएच-31 और फरक्का तक पहुंचने वाले एनएच-33 के हिस्से भी इसमें शामिल हैं। ये सभी मार्ग व्यापार और सीमा कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद अहम माने जाते हैं।

    वहीं दूसरी ओर, एनएचआईडीसीएल को जिन खंडों की जिम्मेदारी दी गई है, उनमें सेवक आर्मी कैंटोनमेंट से लेकर कोरोनेशन ब्रिज, कालिम्पोंग और पश्चिम बंगाल-सिक्किम सीमा तक जाने वाला नया एनएच-10 मार्ग शामिल है। इसके अलावा भारत-भूटान सीमा तक जाने वाला हासिमारा-जयगांव मार्ग, बांग्लादेश सीमा तक पहुंचने वाला बारादिघी-मैनागुड़ी-चांगराबंधा कॉरिडोर और सिलीगुड़ी-कुर्सियांग-दार्जिलिंग का पहाड़ी मार्ग भी इस सूची में शामिल हैं।

    इन परियोजनाओं के शुरू होने से न केवल राज्य के भीतर सड़क संपर्क बेहतर होगा, बल्कि पड़ोसी देशों जैसे भूटान और बांग्लादेश के साथ कनेक्टिविटी भी मजबूत होने की उम्मीद है। उत्तरी बंगाल, दुआर क्षेत्र और पहाड़ी इलाकों में परिवहन व्यवस्था में सुधार से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना है। इसके साथ ही मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया और उत्तर 24 परगना जैसे जिलों में भी आवागमन सुगम होगा।

    राज्य सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के माध्यम से क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी और लंबे समय से लंबित बुनियादी ढांचा कार्यों को नई दिशा मिलेगी। केंद्रीय एजेंसियों की तकनीकी क्षमता और संसाधनों के साथ इन राजमार्गों का विकास अधिक तेजी और प्रभावशीलता के साथ किया जा सकेगा।

    यह निर्णय राज्य और केंद्र के बीच समन्वय को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल सड़क नेटवर्क का विस्तार होगा, बल्कि व्यापार, पर्यटन और सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा एवं संपर्क व्यवस्था भी पहले से अधिक मजबूत हो सकेगी।

  • आम आदमी पर बढ़ा बोझ: दिल्ली-एनसीआर में CNG के दाम बढ़े, कई शहरों में असर..

    आम आदमी पर बढ़ा बोझ: दिल्ली-एनसीआर में CNG के दाम बढ़े, कई शहरों में असर..


    नई दिल्ली ।
    दिल्ली-एनसीआर में एक बार फिर आम जनता को महंगाई का झटका लगा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब CNG के दाम भी 2 रुपये प्रति किलो तक बढ़ा दिए गए हैं। इस फैसले के बाद दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम समेत पूरे एनसीआर क्षेत्र में ईंधन के खर्च में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की जिंदगी और परिवहन लागत पर पड़ने की संभावना है।

    नई दरों के अनुसार, दिल्ली में CNG की कीमत बढ़कर लगभग 79 रुपये प्रति किलो के करीब पहुंच गई है। वहीं नोएडा और गाजियाबाद में यह दर बढ़कर करीब 87.70 रुपये प्रति किलो हो गई है। गुरुग्राम में भी कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यहां CNG लगभग 84 रुपये प्रति किलो के आसपास बिक रही है। इसके अलावा आसपास के कई शहरों में भी अलग-अलग दरों में बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में ईंधन की लागत बढ़ गई है।

    उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर और शामली जैसे शहरों में भी CNG के दाम बढ़कर लगभग 87 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गए हैं। वहीं कानपुर, हमीरपुर और फतेहपुर जैसे क्षेत्रों में यह कीमत 90 रुपये प्रति किलो से भी ऊपर जा चुकी है। राजस्थान और यूपी के अन्य कई शहरों में भी 85 से 88 रुपये प्रति किलो के बीच नई दरें लागू हो गई हैं।

    इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक गैस की कीमतों में बदलाव बताया जा रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित गैस से पूरा करता है और वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में कमी तथा मांग में वृद्धि के कारण लागत बढ़ गई है। इसी कारण इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड और महानगर गैस लिमिटेड जैसी कंपनियों की खरीद लागत बढ़ी, जिसका असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। हाल के समय में वैश्विक तनाव और आपूर्ति संबंधी बाधाओं के कारण ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है, जिससे ईंधन महंगा हो रहा है।

    सरकार की ओर से हालांकि यह कहा गया है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार मौजूद है और एलपीजी की आपूर्ति स्थिर बनी हुई है। लेकिन CNG की कीमतों में यह बढ़ोतरी आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है, खासकर उन लोगों पर जो रोजाना सार्वजनिक परिवहन या गैस आधारित वाहनों का उपयोग करते हैं।

    इस बढ़ोतरी के बाद आने वाले दिनों में परिवहन लागत और सेवाओं के दामों पर भी असर पड़ सकता है, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • Weather: केरल में इस दिन दस्तक देगा मानसून, दक्षिण में भारी और उत्तर-मध्य में सामान्य से कम बारिश का अनुमान

    Weather: केरल में इस दिन दस्तक देगा मानसून, दक्षिण में भारी और उत्तर-मध्य में सामान्य से कम बारिश का अनुमान


    नई दिल्ली।
    इस मानसून सत्र (Monsoon Session) में देश के लगभग आधे हिस्से, उत्तर और मध्य भारत (North and Central India) में भीषण सूखा पड़ने की आशंका है। जून से सितंबर के बीच होने वाली मानसूनी बारिश (Monsoon Rains) के भी सामान्य से कम रहने का अनुमान है। इसका प्रमुख कारण प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में बन रहा शक्तिशाली अल नीनो है। इसकी वजह से दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों में भीषण बाढ़ का खतरा भी है। कृषि प्रधान भारत के लिए मानसून की यह स्थिति बहुत भयावह है, जो बहुत हद तक मानसूनी वर्षा पर निर्भर है।

    भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अल नीनो तेजी से आकार ले रहा है। भारत के लिए अल नीनो हमेशा से ही खराब रहा है। इस बार मजबूत अल नीनो बन रहा है, जिसका भयावह परिणाम हो सकता है। मजबूत अल नीनो दक्षिण पश्चिम मानसून की हवाओं को कमजोर कर देता है। इसका नतीजा यह होता है कि देश के अधिकांश हिस्से में बारिश कम होती है और सूखे जैसे हालात पैदा हो जाता हैं। इस बार उत्तर और मध्य भारत में कुछ ऐसी ही स्थिति की आशंका है। दूसरी तरफ, तमिनलाडु, आंध्र प्रदेश जैसे तटीय राज्यों में तबाही वाली बढ़ आ सकती है। आईएमडी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार सामान्य तिथि से करीब चार दिन पहले, यानी 26 मई के आसपास केरल तट पर दस्तक दे सकता है। शनिवार को यह दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान- निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में और आगे बढ़ा है। इसके आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।


    यूपी, हरियाणा-पंजाब में सबसे ज्यादा असर

    शक्तिशाली अल नीनो का सबसे अधिक उत्तर और मध्य भारत पर प्रभाव पड़ने की आशंका है। पश्चिम भारत के कुछ हिस्से भी प्रभावित हो सकते हैं। इनमें पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे कृषि प्रधान राज्यों पर बुरा असर पड़ सकता है। दिल्ली-एनसीआर के लिए गर्मी और सूखे के दोहरे संकट का सामना करना पड़ सकता है।

    मानसूनी बारिश कम होने से प्रमुख फसलों को नुकसान हो सकता है। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों, बिजली आपूर्ति और ग्रामीण आय पर दबाव बढ़ सकता है। भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 70 फीसदी मानसून से आता है और लगभग आधी आबादी कृषि पर निर्भर है, ऐसे में कम बारिश वाला वर्ष भी व्यापक आर्थिक प्रभाव डाल सकता है।


    आईओडी कम कर सकता है असर

    इस भयावह आशंका के बीच इंडियन ओशन डिपोल’ (आईओडी) के रूप में एक उम्मीद की किरण भी नजर आ रही है। जलवायु मॉडल के अनुसार मानसून के आखिरी महीनों में आईओडी सकाकात्मक हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो यह अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकता है। मानसूनी हवाओं को थोड़ी मजबूती मिल सकती है जिससे कुछ इलाकों में बारिश की वापसी संभव है।


    लू घोषित करने के मापदंडों में बदलाव करेगा आईएमडी

    आईएमडी अपने विशेषज्ञों के साथ मिलकर जल्द ही देश में लू की स्थिति घोषित करने के मानदंडों में संशोधन करेगा। मौजूदा मापदंड भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल नहीं हैं। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को बताया कि इस गर्मी के मौसम में लोगों को भीषण गर्मी और उमस का सामना करना पड़ा तथा पहली बार कर्नाटक-महाराष्ट्र तट के पास बने चक्रवाती तंत्र के आधार पर मौसम पूर्वानुमान जारी किए गए। इससे पहले कभी भी दक्षिण के इतने करीब कोई चक्रवाती तंत्र नहीं बना था और इस बार हमें इसी के आधार पर मौसम का पूर्वानुमान लगाना पड़ा।


    870 मिलीमीटर होनी चाहिए औसत बारिश

    आईएमडी के पूर्वानुमान एक अनुसार, इस साल मानसूनी बारिश दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के केवल 92 फीसदी होने की संभावना है। एलपीए का यह स्तर सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में आता है। साल 1971 से 2020 के डाटा के आधार पर भारत में औसत बारिश 870 मिलीमीटर होनी चाहिए, लेकिन इस बार इससे कम बारिश होने की आशंका है। आंकड़ों के मुताबिक इस बार सूखे की स्थिति बनने की संभावना 35% है। यह सामान्य वर्षों की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है। जून या जुलाई में अल नीनो के पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है।


    44.8 डिग्री पर तपा बांदा

    उत्तर प्रदेश में भी भीषण गर्मी पड़ रही है। शनिवार को राज्य में अधिकतम स्थानों पर पारा 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर ही रहा। बांदा में सबसे अधिक तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं, झांसी में 44.1 डिग्री, प्रयागराज में 44 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान रहा। आगरा में 43 डिग्री सेल्सियस, गाजीपुर में 42 डिग्री सेल्सियस और वाराणसी हवाई अड्डे पर 41.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया।

  • कोविड और युद्ध ने किए-धरे पर फेरा पानी… गरीबी लौटी, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट: PM मोदी

    कोविड और युद्ध ने किए-धरे पर फेरा पानी… गरीबी लौटी, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट: PM मोदी


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र (Prime Minister Narendra) ने इस समय को तबाही का दशक घोषित करते हुए बड़ी बात कह दी है। शनिवार को नीदरलैंड्स (Netherlands) में भारतीयों से बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड (Covid) और मध्य एशिया (Central Asia) में छिड़े युद्ध ने सारे किए धरे पर पानी फेर दिया और दुनिया एक बार फिर गरीबी के गड्ढे में जा गिरी। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बड़े संकट से जूझ रही है। पीएम मोदी इस समय पांच देशों के दौरे पर हैं। यूएई के बाद वह नीदरलैंड्स पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि, विश्व के सामने अब नई चुनौतियां हैं और इनसे निपटना आसान नहीं है।


    पहले कोरोना फिर युद्ध ने मचाई तबाही

    पीएम मोदीने कहा कि यह दशक प्रलयंकारी साबित हो रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि अगर हालात जल्द नहीं संभले तो बीते कई दशकों के काम पर पानी फिर जाएगा और दुनिया का एक बड़ा हिस्सा गरीब हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के लोगों को पहले ही सावधान कर चुके हैं। उन्होंने लोगों से पेट्रोल और डीजल के कम इस्तेमाल की सलाह दी है। पीएम मोदी ने सरकारी खर्च पर भी नियंत्रण करने के निर्देश दे दिए हैं।


    पीएम मोदी की लोगों को सलाह

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों हैदराबाद में कहा था कि लोगों को जितना हो सके वर्क फ्रॉम होम करना चाहिए और आना जाना कम कर देना चाहिए। इसके अलावा कम से कम एक साल तक सोना खरीदने से बचना चाहिए ताकि विदेशी मुद्रा को बचाया जा सके। पीएम मोदी ने कहा कि विदेशी मुद्रा को बचाना भी एक तरह की देशभक्ति है। इसके अलावा आने-जाने के लिए कार पूल करें और खेतों में उर्वरकों का इस्तेमाल भी कम करें। प्रधानमंत्री ने कहा था कि लोगों को एसी का भी इस्तेमाल कर देना चाहिए जिससे ऊर्जा संकट से निपटा जा सके।


    पेट्रोल डीजल में लगी आग

    देश में पिछले चार साल से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजापा नहीं हुआ था। हालांकि ईरान संकट की वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि कर दी गई है। इसके साथ ही राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपये का और डीजल 90.67 रुपये का हो गया है। जानकारों का कहना है कि इस वृद्धि का असर सीधा-सीधा आपकी रसोईऔर रोजमर्रा की जिंदगी पर होने वाला है। अमूल कंपनी ने अपने दूध की कीमत में भी वृद्धि की है।


    ऊर्जा संकट से निपटने का प्रयास

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को यहां नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के साथ ऊर्जा, बंदरगाह, स्वास्थ्य, कृषि व्यापार और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख डच कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ चर्चा की तथा उनसे भारत में निवेश करने का आह्वान किया।

  • PM मोदी का नीदरलैंड दौरा… यूरोप की सबसे बड़ी कंपनी ASML से टाटा की डील, खुलेंगे रोजगार के अवसर

    PM मोदी का नीदरलैंड दौरा… यूरोप की सबसे बड़ी कंपनी ASML से टाटा की डील, खुलेंगे रोजगार के अवसर


    दिल्ली।
    एएसएमएल और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (ASML and Tata Electronics) के बीच हुए समझौते से भारत (India) में सेमीकंडक्टर उत्पादन (Semiconductor production) को बड़ा बढ़ावा मिलेगा.प्रधानमंत्री मोदी (Prime Minister Modi) की नीदरलैंड्स यात्रा (Netherlands trip) के दौरान हुए इस करार से तकनीक, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है.नीदरलैंड्स की प्रमुख तकनीकी कंपनी एएसएमएल ने शनिवार को टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ एक समझौते पर दस्तखत किए हैं, जिसके तहत भारत में सेमीकंडक्टर संयंत्र के निर्माण और विस्तार में सहयोग किया जाएगा.

    यह समझौता प्रधान/मंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड्स यात्रा के दौरान हुआ और इसे उनकी मौजूदगी में अंतिम रूप दिया गया.एएसएमएल सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए अत्याधुनिक मशीनें बनाती है. कंपनी ने कहा कि वह भारत के पश्चिमी राज्य गुजरात में स्थित धोलेरा संयंत्र की स्थापना और उसकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद करेगी. यह संयंत्र प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य में बनाया जा रहा है.

    कंपनी ने बताया कि वह इस परियोजना में अपनी अत्याधुनिक लिथोग्राफी तकनीक का इस्तेमाल करेगी.ये उपकरण हाई टेक माइक्रोचिप के तेज और बड़े पैमाने पर उत्पादन में काम आते हैं, जो कारों से लेकर मोबाइल फोन तक, कई आधुनिक उपकरणों में उपयोग किए जाते हैं.भारत‑नीदरलैंड्स आर्थिक साझेदारीयह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब भारत और नीदरलैंड्स ने आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए एक नया समझौता किया है.

    हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता हुआ था, जिसे यूरोपीय संघ प्रमुख उर्सुला फोन डेर लाएन ने “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा था.बाजार पूंजीकरण के हिसाब से यूरोप की सबसे बड़ी तकनीकी कंपनी एएसएमएल ने कहा कि उसे भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में “कई महत्वपूर्ण अवसर” दिखाई दे रहे हैं.कंपनी के सीईओ क्रिस्टोफ फूके ने एक बयान में कहा कि एएसएमएल इस क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदारी स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है.टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का यह संयंत्र लगभग 11 अरब डॉलर के निवेश से विकसित किया जा रहा है.इसमें तैयार होने वाले सेमीकंडक्टर चिप्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमोबाइल उद्योग और अन्य आर्थिक क्षेत्रों में उपयोग किए जाएंगे.

    यूरोपीय संघ को भारत उन्नत तकनीक और निवेश का एक महत्वपूर्ण स्रोत मानता है, जिसका इस्तेमाल वह अपने यहां तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए करना चाहता है.दूसरी ओर, यूरोपीय संघ भारत को एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश के रूप में एक बड़े बाजार के रूप में देखता है.

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की प्रगति देश के युवाओं के लिए बड़े अवसर पैदा कर रही है.उन्होंने कहा, “यह ऐसा क्षेत्र है जिसमें हम आने वाले समय में और अधिक ऊर्जा जोड़ते रहेंगे”

    नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री रोब येटेन ने कहा कि डच कंपनियां आने वाले वर्षों में भारत में बड़े पैमाने पर निवेश कर सकती हैं और वहां रोजगार के अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.उन्होंने कहा, “यह डच कंपनियों के लिए भारत में निवेश करने के लिए अवसर देता है और साथ ही भारतीय प्रतिभाओं को नीदरलैंड्स आकर्षित करने के मौका भी पैदा करता है”

  • “सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार ने खुद चुना उत्तराधिकारी”, ललन सिंह के बयान से बिहार की राजनीति में हलचल

    “सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार ने खुद चुना उत्तराधिकारी”, ललन सिंह के बयान से बिहार की राजनीति में हलचल


    पटना। बिहार की राजनीति में शनिवार को उस समय हलचल तेज हो गई, जब जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने मुख्यमंत्री पद और राजनीतिक उत्तराधिकार को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने सार्वजनिक मंच से कहा कि सम्राट चौधरी केवल बीजेपी की पसंद नहीं हैं, बल्कि उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वयं अपना उत्तराधिकारी चुना है।

    ललन सिंह के इस बयान के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसे जदयू-बीजेपी गठबंधन के भीतर सत्ता हस्तांतरण और नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को लेकर अहम संकेत माना जा रहा है।

    लखीसराय में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ललन सिंह ने कहा, “जब नीतीश कुमार जी ने पद छोड़ने का निर्णय लिया, तब उन्होंने अपने उत्तराधिकारी के रूप में सम्राट चौधरी जी को चुना। सम्राट चौधरी ने यह संकल्प लिया है कि वे नीतीश कुमार द्वारा दिखाए गए विकास के रास्ते पर आगे बढ़ते हुए विकसित बिहार के निर्माण का काम करेंगे।”

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान उन अटकलों का जवाब है, जिनमें कहा जा रहा था कि सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाना बीजेपी का एकतरफा फैसला था। ललन सिंह के बयान ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि इस बदलाव को नीतीश कुमार की सहमति और समर्थन प्राप्त था।

    बिहार की राजनीति में लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार के विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए तैयार किया जा रहा है। हालांकि, जदयू के किसी वरिष्ठ नेता की ओर से पहली बार इतनी स्पष्टता के साथ यह बात सार्वजनिक रूप से कही गई है।

    इससे पहले उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी भी यह संकेत दे चुके थे कि सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार का आशीर्वाद प्राप्त है, लेकिन उन्होंने उन्हें सीधे तौर पर राजनीतिक उत्तराधिकारी नहीं बताया था।

    ललन सिंह ने अपने संबोधन में यह भी दोहराया कि सम्राट चौधरी “विकसित बिहार” के विजन को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और नीतीश कुमार के शासन मॉडल को जारी रखने का संकल्प ले चुके हैं। उनके इस बयान को राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे सम्राट चौधरी को औपचारिक तौर पर नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत का चेहरा बताने की कोशिश साफ दिखाई देती है।

  • Europe Tour: नीदरलैंड में समकक्ष रॉब-शाही परिवार से मिले PM Modi…. अब जाएंगे स्वीडन

    Europe Tour: नीदरलैंड में समकक्ष रॉब-शाही परिवार से मिले PM Modi…. अब जाएंगे स्वीडन


    एम्स्टर्डम।
    चार यूरोपीय देशों के दौरे (Europe Tour) पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अपनी यात्रा के पहले चरण में नीदरलैंड (Netherlands) में हैं। पीएम मोदी (PM Modi ) ने यहां के राजा विलियम (King William) और रानी मैक्सिमा (Queen Maxima) से मुलाकात के बाद डच प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की। उन्होंने भारतीय प्रवासियों को भी संबोधित किया। नीदरलैंड के बाद पीएम मोदी स्वीडन जाएंगे, जहां उनके स्वागत की तैयारियां शुरू हो गई हैं।

    भारत और नीदरलैंड के बीच रक्षा उद्योग, समुद्री सुरक्षा से लेकर अंतरिक्ष तक सहयोग पर बातचीत
    प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ हुई विस्तृत बातचीत को पीएम मोदी ने सफल करार दिया। उन्होंने एक्स हैंडल पर द्विपक्षीय वार्ता और जेटेन के साथ अलग से हुई चर्चाओं की झलकियों को साझा कर लिखा, ‘कई विषयों पर चर्चा हुई। इनमें से एक विषय रक्षा और सुरक्षा था। मैंने रक्षा उद्योग के लिए जल्द से जल्द एक कार्य योजना तैयार करने की संभावना पर चर्चा की।’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और नीदरलैंड अंतरिक्ष यात्रा, समुद्री प्रणालियों और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग कर सकते हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड यात्रा की झलकियों को एक्स पर साझा करते हुए एक अन्य पोस्ट में लिखा, ‘भारत-नीदरलैंड साझेदारी का जीवंत सेतु भारतीय प्रवासी हैं। सूरीनामी हिंदुस्तानी समुदाय के लिए ओसीआई कार्ड की पात्रता को चौथी पीढ़ी से छठी पीढ़ी तक बढ़ाने का फैसला लिया गया है। हमारे निर्णय का नीदरलैंड में प्रवासी समुदाय ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया है!’


    पीएम के नीदरलैंड दौरे के बाद दोनों देशों में क्या बदलेगा?

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हुए। तकनीक, शिक्षा, सेहत और खनिज के अलावा नवाचार को लेकर भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। नीदरलैंड दौरे पर सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पर भी साझेदारी का निर्णय हुआ है। इसके तहत डच कंपनी ASPL और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स आपसी सहयोग बढ़ाएंगी। पीएम मोदी ने दोनों देशों के बीच हुए फैसलों को ठोस और महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के विकास और समृद्धि को भी बढ़ावा मिलेगा।


    पिछले एक दशक में भारत-नीदरलैंड संबंधों में काफी प्रगति हुई है: पीएम मोदी

    डच प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत-नीदरलैंड संबंधों में काफी प्रगति हुई है। उन्होंने कहा, ‘हम नीदरलैंड को भारत के सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक मानते हैं।लोकतांत्रिक मूल्य, बाजार अर्थव्यवस्था और जिम्मेदार व्यवहार भारत और नीदरलैंड के साझा दृष्टिकोण का हिस्सा हैं।’

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हमें हर क्षेत्र में नीदरलैंड की विशेषज्ञता और भारत की गति और कौशल को शामिल करना चाहिए। नवाचार और निवेश का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘हमें इनोवेशन, निवेश, स्थिरता और रक्षा के क्षेत्रों में भारत-नीदरलैंड सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की जरूरत है। हमारे साझा दृष्टिकोण के तहत, हम भारत-नीदरलैंड संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जा रहे हैं।’


    पीएम मोदी उम्र में दोगुने, लेकिन उत्साह युवाओं से कम नहीं

    नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ मुलाकात और द्विपक्षीय वार्ता के समय पीएम मोदी को अपनी ट्रेडमार्क परिधान कुर्ते और पायजामे और हाफ जैकेट के साथ शॉल लिए देखा गया। उनकी उम्र की तुलना में लगभग आधे, 38 साल के जेटेन कोर्ट-पैंट और टाई लगाए दिखे। दोनों की मुताकाल के कई वीडियो सामने आए हैं, इसमें देखा जा सकता है कि पीएम मोदी अपने डच समकक्ष की तुलना में भले ही उम्र में दोगुने बड़े हैं, लेकिन उनका उत्साह युवाओं से कम नहीं है।


    पीएम मोदी ने नीदरलैंड के 38 वर्षीय समकक्ष से की मुलाकात

    पीएम मोदी ने नीदरलैंड के शाही परिवार से मुलाकात के बाद 38 वर्षीय डच समकक्ष से भी मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड में अपने समकक्ष रॉब जेटेन के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान कई अहम मुद्दों पर बातचीत की। दोनों की मुलाकात का वीडियो भी सामने आया है।


    नीदरलैंड के शाही परिवार से मिले पीएम मोदी, द्विपक्षीय संबंधों पर हुई चर्चा

    अपनी पांच देशों की विदेश यात्रा के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द हेग में नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से मुलाकात की, जहां दोनों देशों के बीच मजबूत होते कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों पर चर्चा हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और जल प्रबंधन जैसे भविष्य के क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने पर विशेष जोर दिया गया।


    भारतीय राजदूत पीएम मोदी के स्वीडन आगमन पर क्या बोले?

    स्वीडन में भारत के राजदूत अनुराग भूषण ने पीएम मोदी के दौरे पर कहा, स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री रविवार को आ रहे हैं। दोनों की मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्य भी मौजूद रहेंगे। इस औपचारिक चर्चा के बाद शाम को प्रधानमंत्री दो व्यावसायिक कार्यक्रमों में भी शामिल होंगे। वे स्वीडन के चुनिंदा सीईओ के एक समूह के साथ दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा करेंगे। इसके अलावा, यूरोपियन राउंडटेबल ऑफ इंडस्ट्रीज का एक कार्यक्रम भी निर्धारित है। ये यूरोप के 60 शीर्ष सीईओ का एक समूह है। प्रधानमंत्री भारत और यूरोप के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सीईओ के समूह के साथ भी बातचीत करेंगे।


    पीएम के आगमन पर गोथेनबर्ग में विशेष उत्साह

    उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री स्वीडन में बेहद लोकप्रिय हैं। विशेष रूप से गोथेनबर्ग में बहुत ऊर्जा महसूस हो रही है क्योंकि प्रधानमंत्री पहली बार गोथेनबर्ग आ रहे हैं। भारतीय प्रवासियों का केंद्र होने के अलावा गोथेनबर्ग स्वीडिश उद्योग का केंद्र और नवाचार आधारित पारिस्थितिकी तंत्र भी है। यहां कई विश्वविद्यालय, संस्थान, विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रतिष्ठान हैं।

    पीएम मोदी स्वीडन दौरे पर वोल्वो के मुख्यालय जा सकते हैं
    यूरोप दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वीडन के समकक्ष उल्फ क्रिस्टर्सन के निमंत्रण पर इस देश का दौरा करेंगे। अपनी विदेश यात्रा के तीसरे चरण में स्वीडन आगमन के बाद पीएम मोदी गोथेनबर्ग में वोल्वो के मुख्यालय भी जा सकते हैं। दोनों देशों के बीच अहम समझौते होने की उम्मीद है। भारतीय प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर वोल्वो ग्रुप के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) जेन्स होल्टिंगर ने कहा, पीएम मोदी की यात्रा हमारे लिए बहुत सम्मान की बात है। यह स्वीडन और भारत के बीच मजबूत संबंधों को दिखाने का भी अवसर है। वोल्वो ग्रुप पिछले 25 वर्षों से भारत में कार्यरत है… भारत में हमारे लगभग 5,000 सहकर्मी हैं, जो विश्व में हमारा दूसरा सबसे बड़ा अनुसंधान केंद्र है।


    मित्रता का एक प्रमुख स्तंभ आर्थिक सहयोग भी है

    पीएम मोदी ने एक अन्य एक्स पोस्ट में लिखा कि भारत और नीदरलैंड के बीच मित्रता का एक प्रमुख स्तंभ आर्थिक सहयोग भी है। उन्होंने कहा, ‘भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अनगिनत अवसर प्रदान करता है। फिनटेक, महत्वपूर्ण खनिजों, सेमीकंडक्टर, हरित हाइड्रोजन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। हमने सांस्कृतिक सहयोग और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा की।

  • कर्नाटक में CM पद पर सस्पेंस बरकरार: सिद्धारमैया बनाम डीके शिवकुमार की खींचतान तेज, कांग्रेस हाईकमान पर बढ़ा दबाव

    कर्नाटक में CM पद पर सस्पेंस बरकरार: सिद्धारमैया बनाम डीके शिवकुमार की खींचतान तेज, कांग्रेस हाईकमान पर बढ़ा दबाव



    नई दिल्ली। कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस के भीतर अंदरूनी टकराव एक बार फिर खुलकर सामने आता दिख रहा है। एक तरफ मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अपनी सरकार को मजबूत करने और कैबिनेट विस्तार पर जोर दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी नेतृत्व परिवर्तन की अपनी दावेदारी को लेकर सक्रिय हैं। इस पूरे मामले ने कांग्रेस हाईकमान के सामने एक नई राजनीतिक दुविधा खड़ी कर दी है।

    पार्टी के अंदर चल रही चर्चाओं के मुताबिक, सिद्धारमैया खेमे का फोकस कैबिनेट फेरबदल और खाली मंत्रिपदों को भरने पर है, जिससे सरकार और संगठन दोनों पर उनकी पकड़ मजबूत हो सके। उनका मानना है कि प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखना अभी प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी तरह के नेतृत्व बदलाव को फिलहाल टाल देना चाहिए।

    दूसरी ओर, डीके शिवकुमार खेमे का दावा है कि संगठन को मजबूत करने और विधानसभा चुनाव में जीत दिलाने में उनकी भूमिका अहम रही है, इसलिए उन्हें भी मुख्यमंत्री पद पर अवसर मिलना चाहिए। उनके समर्थक लगातार “अगले मुख्यमंत्री” जैसे पोस्टर और सार्वजनिक कार्यक्रमों के जरिए दबाव बना रहे हैं।

    कांग्रेस आलाकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि किसी एक पक्ष के समर्थन से दूसरे खेमे में असंतोष पैदा हो सकता है, जिससे राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ने का खतरा है। यही वजह है कि पार्टी फिलहाल “इंतजार करो और देखो” की रणनीति पर काम कर रही है।

    हालांकि, हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि इस मुद्दे पर लंबे समय तक टालमटोल करना मुश्किल हो सकता है। आने वाले दिनों में कांग्रेस हाईकमान को यह तय करना होगा कि सिद्धारमैया के नेतृत्व को जारी रखा जाए या फिर डीके शिवकुमार को कमान सौंपकर सत्ता संतुलन बदला जाए।

  • पीएम मोदी की अपील का असर: CRPF-ITBP ने शुरू की ईंधन बचत मुहिम, पेट्रोल-डीजल बजट में 10% कटौती

    पीएम मोदी की अपील का असर: CRPF-ITBP ने शुरू की ईंधन बचत मुहिम, पेट्रोल-डीजल बजट में 10% कटौती



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर अब सुरक्षा बलों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने ईंधन की खपत कम करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं, जिनमें वाहनों के उपयोग से लेकर प्रशासनिक यात्राओं तक में सख्त बदलाव शामिल हैं।

    CRPF ने सबसे बड़ा फैसला लेते हुए अपने पूरे वाहनों के ईंधन बजट में 10 प्रतिशत की कटौती लागू कर दी है। इसके तहत अब किसी भी अधिकारी को एक से अधिक सरकारी वाहन उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। साथ ही मुख्यालय ने सभी इकाइयों से ईंधन बचत के नए सुझाव भी मांगे हैं ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सके।

    सबसे दिलचस्प बदलाव ग्राउंड लेवल पर देखने को मिल रहा है, जहां CRPF ने तय किया है कि जिन इलाकों में संभव होगा, वहां मोटरसाइकिल पेट्रोलिंग की जगह साइकिल से गश्त की जाएगी। इसका उद्देश्य न सिर्फ ईंधन की बचत करना है, बल्कि जवानों की फिटनेस को भी बेहतर बनाना है। हालांकि यह नियम संवेदनशील और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में लागू नहीं होगा।

    इसी तरह ITBP ने भी सख्त कदम उठाते हुए अपने अधिकारियों के सभी विदेशी दौरों पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही प्रशासनिक कार्यों और स्थिर तैनाती वाले क्षेत्रों में वाहनों के उपयोग को भी सीमित करने का निर्देश जारी किया गया है, ताकि अनावश्यक ईंधन खपत को रोका जा सके।

    दोनों सुरक्षा बलों ने यह स्पष्ट किया है कि ईंधन बचत के इन उपायों का असर किसी भी हालत में देश की सुरक्षा और ऑपरेशनल तैयारियों पर नहीं पड़ेगा। आतंकवाद-रोधी अभियानों और सीमा सुरक्षा जैसी अहम ड्यूटी में लगे वाहनों को इस कटौती से पूरी तरह बाहर रखा गया है।