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  • नेपाल में फिर बाढ़ का खतरा बढ़ा, त्रिशूली परियोजना के लापता कर्मियों की तलाश में भारतीय और नेपाली दल जुटे

    नेपाल में फिर बाढ़ का खतरा बढ़ा, त्रिशूली परियोजना के लापता कर्मियों की तलाश में भारतीय और नेपाली दल जुटे

    नई दिल्ली ।नेपाल में आई भीषण बाढ़ और अचानक आई जल आपदा के बाद हालात अब भी बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार गुरुवार तक मृतकों की संख्या बढ़कर 1252 हो गई और करीब 5083 लोगों के लापता होने का अनुमान है। शव नहीं मिलने या पहचान नहीं होने के कारण कई परिवार प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी कर रहे हैं।

    त्रिशूली पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कई कर्मचारी भी बाढ़ के बाद से लापता बताए जा रहे हैं। इसी बीच परियोजना में काम करने वाले एक कर्मचारी ने आरोप लगाया कि बाढ़ आने से पहले चीन की कंपनी के एक सुपरवाइजर ने 265 कर्मचारियों को सुरंग के भीतर छोड़ दिया और खुद बाहर निकल गया।

    कर्मी के अनुसार सुरंग के अंदर मौजूद मजदूरों ने एक तेज आवाज सुनी थी। इसके बाद उन्होंने अपने सुपरवाइजर से सुरंग से बाहर निकलने की अनुमति मांगी थी। इस घटना से परियोजना में काम कर रहे लोगों की सुरक्षा और आपदा के समय प्रबंधन की तैयारियों को लेकर सवाल उठे हैं।

    लापता लोगों की तलाश में भारत भी नेपाल की मदद कर रहा है। भारतीय सुरंग बचाव दल नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे पावर हाउस में बचाव अभियान चला रहा है। भारतीय दूत ने स्याब्रूबेसी स्थित भारतीय टनल बचाव दल के आधार शिविर का दौरा किया और अभियान की प्रगति की जानकारी ली।

    बचाव दलों ने विशेष उपकरणों की मदद से सुरंग के भीतर करीब 100 मीटर तक का निरीक्षण किया है। अब सुरंग के और अंदर जाने के लिए भारी उपकरण लाने की तैयारी की जा रही है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारतीय और नेपाली दल बचाव कार्य जारी रखे हुए हैं।

    इस बीच नेपाल के उत्तरी हिस्सों में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। भोटेकोशी नदी के ऊपरी इलाकों में लगातार बारिश होने के कारण जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई गई है। इसका असर भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के अलावा रसुवा और नुवाकोट जिलों से होकर बहने वाली छोटी नदियों और जलधाराओं पर भी पड़ सकता है।

    नेपाल में हालिया तबाही के बाद हिमनदों की स्थिति को लेकर भी चिंता बढ़ी है। तिब्बती पठार के ग्लेशियरों में बदलाव और उनके अस्थिर होने की आशंका को भविष्य में अचानक बाढ़ के संभावित कारणों से जोड़ा जा रहा है। पिछले कुछ दशकों में इस क्षेत्र के ग्लेशियरों में उल्लेखनीय कमी आने की बात भी सामने आई है।

    26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आई थी। इससे उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी नुकसान हुआ। मौजूदा परिस्थितियों में लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता फिर बढ़ा दी है।

    राहत सामग्री के वितरण को व्यवस्थित करने के लिए नेपाल सरकार ने सिंगल विंडो व्यवस्था लागू की है। इसके तहत निजी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को नेपाल में राहत सामग्री सीधे भेजने या ले जाने से पहले अनुमति लेना जरूरी होगा। सीमा पर राहत सामग्री के लिए निर्धारित कस्टम प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही उसे आगे ले जाने की अनुमति दी जाएगी।

    बाढ़ के बाद जारी बचाव अभियान में भारत की सहायता से सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। वहीं नेपाल में दोबारा बढ़ते जलस्तर और संभावित आपदा को देखते हुए स्थानीय प्रशासन तथा बचाव एजेंसियां सतर्क हैं। लगातार निगरानी, समय पर चेतावनी और प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।

  • यूनिसेफ की रिपोर्ट में खुलासा, एक साल में करीब दो करोड़ बच्चों ने ऑनलाइन यौन शोषण का सामना किया

    यूनिसेफ की रिपोर्ट में खुलासा, एक साल में करीब दो करोड़ बच्चों ने ऑनलाइन यौन शोषण का सामना किया

    नई दिल्ली ।इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के बीच बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार बीते एक साल में दुनियाभर के करीब दो करोड़ बच्चों को ऑनलाइन यौन शोषण या उससे जुड़े अनुचित व्यवहार का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है।

    यह रिपोर्ट 21 देशों में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले करीब 21 हजार बच्चों से जुटाए गए सर्वे पर आधारित है। इसके लिए 2020 से 2025 के बीच जानकारी एकत्र की गई। अध्ययन में ब्राजील और पाकिस्तान समेत कई देश शामिल रहे। केन्या और सर्बिया भी सर्वे का हिस्सा थे, जबकि भारत को इस अध्ययन में शामिल नहीं किया गया।

    रिपोर्ट के मुताबिक 12 से 17 वर्ष की उम्र के करीब 1.5 करोड़ बच्चे अनचाहे और आपत्तिजनक यौन कंटेंट के संपर्क में आए। वहीं लगभग 90 लाख बच्चों ने ऐसी यौन प्रकृति की बातचीत या संपर्क के लिए दबाव का सामना करने की जानकारी दी।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाले गलत व्यवहार में सोशल मीडिया की भूमिका प्रमुख रही। रिपोर्ट में सामने आया कि दर्ज किए गए ऐसे व्यवहारों में लगभग 60 प्रतिशत मामले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हुए। इनमें फेसबुक, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म शामिल रहे।

    ऑनलाइन गेमिंग भी बच्चों के लिए जोखिम का एक क्षेत्र सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार करीब 14 प्रतिशत गलत व्यवहार के मामले ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े थे। इससे संकेत मिलता है कि बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए केवल सोशल मीडिया पर निगरानी पर्याप्त नहीं है, बल्कि अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा उपायों की जरूरत है।

    रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। बच्चों के ऑनलाइन यौन उत्पीड़न से जुड़े आधे से अधिक मामलों में कथित रूप से ऐसा व्यक्ति शामिल था, जिसे बच्चा पहले से जानता था। इनमें दोस्त, रिश्तेदार या पार्टनर जैसे लोग शामिल थे। यानी बच्चों के लिए ऑनलाइन खतरा हमेशा किसी अनजान व्यक्ति से ही नहीं आता।

    अध्ययन के अनुसार करीब 38 प्रतिशत बच्चों ने बताया कि वे पहली बार ऑनलाइन इस तरह की यौन गतिविधि या उत्पीड़न के शिकार हुए। अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और पूर्वी यूरोप के सर्वेक्षण वाले देशों में 12 से 17 वर्ष की उम्र के पांच में से एक से अधिक बच्चों ने ऑनलाइन यौन शोषण के कम से कम एक रूप का अनुभव बताया।

    रिपोर्ट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से जुड़े खतरे को लेकर भी चिंता जताई गई है। नौ देशों से जुटाए गए आंकड़ों में अनुमानित 11 लाख बच्चों ने बताया कि उनकी एआई से तैयार की गई आपत्तिजनक तस्वीरें या वीडियो बनाए गए थे। ऐसे अनुभवों से बच्चों में चिंता और मानसिक दबाव का स्तर भी बढ़ा हुआ पाया गया।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म संचालित करने वाली कंपनियों की ओर से सुरक्षा उपायों में सुधार किए जाने की बात कही गई है। किशोरों के अकाउंट को अधिक निजी बनाने और वयस्कों के लिए किशोरों को संदेश भेजने की क्षमता सीमित करने जैसे कदम उठाए गए हैं। हालांकि बच्चों के ऑनलाइन शोषण के सामने आए आंकड़े लगातार सतर्कता की जरूरत बताते हैं।

    बच्चों को डिजिटल खतरों की जानकारी देने के साथ अभिभावकों और स्कूलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। बच्चों को अनचाहे संपर्क, आपत्तिजनक सामग्री और दबाव वाली बातचीत की पहचान करने के बारे में जागरूक करना जरूरी है। किसी संदिग्ध स्थिति में भरोसेमंद व्यक्ति से मदद लेने की जानकारी भी उन्हें दी जानी चाहिए।

    रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि इंटरनेट पर बच्चों की सुरक्षा एक व्यापक चुनौती बन चुकी है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और एआई आधारित सामग्री के बढ़ते इस्तेमाल के बीच तकनीकी सुरक्षा, जागरूकता और प्रभावी निगरानी को साथ लेकर चलना जरूरी है।

  • नेपाल बाढ़ के बाद हिमालयी राज्यों में ग्लेशियल झीलों और हिमस्खलन के खतरे पर केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कीं

    नेपाल बाढ़ के बाद हिमालयी राज्यों में ग्लेशियल झीलों और हिमस्खलन के खतरे पर केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कीं

    नई दिल्ली ।नेपाल में पिछले सप्ताह आई भयावह बाढ़ के बाद भारत सरकार ने हिमालयी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में संभावित प्राकृतिक आपदाओं को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। ग्लेशियल झीलों के फटने से आने वाली बाढ़ और हिमस्खलन के खतरे को देखते हुए केंद्र ने बचाव और तैयारी की मौजूदा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की है।

    गुरुवार को केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसमें हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद संवेदनशील स्थानों की पहचान, निगरानी व्यवस्था और किसी संभावित आपदा से पहले चेतावनी जारी करने के उपायों पर चर्चा की गई।

    बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिवों तथा संबंधित राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसके अलावा केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों और वैज्ञानिक संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी तैयारियों की जानकारी साझा की।

    ग्लेशियल झीलों की लगातार निगरानी को बैठक में प्रमुख प्राथमिकता के तौर पर रखा गया। अधिकारियों से संवेदनशील ग्लेशियल झीलों और बर्फ से ढके क्षेत्रों पर लगातार नजर रखने को कहा गया, ताकि वहां होने वाले बदलावों का समय रहते पता लगाया जा सके।

    हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियल झीलों के फटने से अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर आने का खतरा रहता है। ऐसे में प्रभावित होने वाले संभावित क्षेत्रों और पानी के प्रवाह के रास्तों की पहले से पहचान करना आपदा प्रबंधन की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया।

    बैठक में अत्यधिक जोखिम वाले स्थानों को चिह्नित करने और संभावित जलप्रवाह मार्गों का निर्धारण करने पर भी जोर दिया गया। इसका उद्देश्य खतरे की स्थिति में संबंधित प्रशासन को समय रहते सूचना देना और प्रभावित आबादी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई शुरू करना है।

    केंद्रीय गृह सचिव ने जोखिम बढ़ने की स्थिति में संवेदनशील ग्लेशियल झीलों और हिमस्खलन संभावित क्षेत्रों की सक्रिय निगरानी को जरूरी बताया। समय पर चेतावनी मिलने से प्रशासन को राहत और बचाव के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने तथा निकासी की प्रक्रिया शुरू करने का अवसर मिल सकता है।

    बैठक में राज्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में आपदा से निपटने की तैयारियों और रणनीतियों की जानकारी दी। इसके बाद राज्य एजेंसियों, जिला प्रशासन तथा वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि संभावित ग्लेशियल झील विस्फोट या हिमस्खलन जैसी घटनाओं से निपटने की तैयारी केवल आपदा आने के बाद राहत और बचाव तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जोखिम की पहले पहचान, निवारक कदम और स्थानीय समुदायों की तैयारी को भी योजना का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

    राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अपनी आपदा प्रबंधन तैयारियों की नियमित समीक्षा करने की सलाह दी गई। साथ ही प्रारंभिक चेतावनी और निकासी व्यवस्था में मौजूद कमियों को पहचानकर उनमें समय रहते सुधार करने को कहा गया।

    इस पूरी कवायद का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के संभावित प्रभाव को कम करना और प्रशासन की प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना है। खास तौर पर संवेदनशील इलाकों में निगरानी, चेतावनी और स्थानीय स्तर पर समन्वित कार्रवाई को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

  • MP-UP से लेकर दिल्ली- NCR तक…… आज कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी…. अलर्ट जारी

    MP-UP से लेकर दिल्ली- NCR तक…… आज कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी…. अलर्ट जारी


    नई दिल्ली।
    देश के कई हिस्सों में 4 सितंबर को जन्मष्टामी (Janmashtami) के दिन मॉनसूनी गतिविधियां (Monsoon activities) तेज रहने का अनुमान है. मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर, मध्य, पूर्वोत्तर और पश्चिम भारत के कई इलाकों में भारी बारिश (Heavy rain) की चेतावनी जारी की है. मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. वहीं, दिल्ली-NCR, हरियाणा और चंडीगढ़ में भी बारिश और गरज-चमक का एक और दौर देखने को मिल सकता है।

    मौसम विभाग के मुताबिक, पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश और आसपास के इलाकों में बना कम दबाव का क्षेत्र अगले 24 घंटों में दक्षिणी उत्तर प्रदेश और उससे सटे उत्तरी मध्य प्रदेश की ओर बढ़ सकता है. इसके बाद इसके पश्चिम-उत्तर पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है. इस सिस्टम के असर से मध्य और उत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं।


    दिल्ली-NCR में पड़ सकते हैं बारिश के दौर

    दिल्ली-NCR में शुक्रवार को ज्यादातर समय आसमान में बादल छाए रहने और बीच-बीच में बारिश के साथ गरज-चमक होने का अनुमान है. दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में कुछ जगहों पर भारी बारिश भी हो सकती है. राजधानी के कई हिस्सों में बुधवार शाम हुई बारिश से उमस भरे मौसम से राहत मिली थी. बारिश के बाद कई इलाकों में तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई. हालांकि, 4 सितंबर को भी अचानक तेज बौछार, आंधी-तूफान और बिजली गिरने जैसी स्थिति बन सकती है. मौसम विभाग के मुताबिक, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में 9 सितंबर तक कहीं-कहीं से लेकर बिखरी हुई बारिश जारी रह सकती है. इस दौरान कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश भी हो सकती है।


    मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा बारिश के आसार

    मध्य प्रदेश बारिश के प्रमुख केंद्रों में रह सकता है. पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कहीं-कहीं बेहद भारी बारिश भी हो सकती है. पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है. इससे पहले 3 सितंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश में जोरदार बारिश हुई. कई जगहों पर 10 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की गई. राजनगर में 19 सेंटीमीटर और खजुराहो में 18 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई. मध्य प्रदेश के अलावा विदर्भ और छत्तीसगढ़ में भी 9 सितंबर तक व्यापक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है. पश्चिमी और पूर्वी मध्य प्रदेश में 3 से 5 सितंबर के दौरान गरज-चमक के साथ भारी बारिश की संभावना है।


    यूपी में भारी बारिश, फ्लैश फ्लड का खतरा

    उत्तर प्रदेश में भी 4 सितंबर को मौसम खराब रहने के आसार हैं. पूर्वी उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर बारिश, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में काफी बड़े से लेकर व्यापक इलाके में बारिश हो सकती है. कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। आईएमडी ने पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जलग्रहण क्षेत्रों में अचानक बाढ़ के कम से मध्यम खतरे की भी चेतावनी दी है. यह खतरा खासतौर पर उन इलाकों में ज्यादा हो सकता है जहां जमीन पहले से गिली है और लगातार बारिश हो रही है।


    उत्तर भारत के इन राज्यों में भी है रेन अलर्ट

    जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है. पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी बारिश की गतिविधियां तेज रहने की संभावना है. उत्तराखंड में भारी बारिश के साथ पहाड़ी इलाकों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाओं का जोखिम भी बढ़ सकता है. ऐसे में स्थानीय स्तर पर मौसम विभाग की चेतावनियों को ध्यान में रखने की सलाह दी गई है।


    पूर्वोत्तर भारत में भी सक्रिय रहेगा मॉनसून

    पूर्वोत्तर भारत में भी 4 सितंबर को बारिश का दौर तेज रह सकता है. अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भारी बारिश की संभावना है. पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है. कई इलाकों में गरज और बिजली चमकने की स्थिति बन सकती है।


    पश्चिम और दक्षिण भारत में होगी बारिश

    पश्चिमी भारत में कोंकण और गोवा में व्यापक बारिश जारी रहने का अनुमान है. गुजरात, महाराष्ट्र और सौराष्ट्र-कच्छ के कुछ हिस्सों में अलग-अलग से लेकर छिटपुट स्थानों पर बारिश हो सकती है. दक्षिण भारत में फिलहाल बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत सीमित रहने की संभावना है. हालांकि, तटीय कर्नाटक में कई जगहों से लेकर व्यापक इलाकों में बारिश हो सकती है. आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, रायलसीमा और तेलंगाना में गरज-चमक के साथ 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाएं चलने की संभावना भी जताई गई है।

  • नेपाल बाढ़ में भारत के लापता लोगों के परिजनों की बनेगी DNA प्रोफाइल… अज्ञात शवों से होगा मिलान

    नेपाल बाढ़ में भारत के लापता लोगों के परिजनों की बनेगी DNA प्रोफाइल… अज्ञात शवों से होगा मिलान


    नई दिल्ली।
    नेपाल (Nepal) में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ (Devastating floods) के बाद अपनों की तलाश कर रहे परिवारों के लिए भारत सरकार (India Government ) ने अहम कदम उठाया है. बाढ़ में लापता लोगों की पहचान के लिए अब भारत (India) में उनके करीबी रिश्तेदारों की DNA प्रोफाइल तैयार की जाएगी. इसके बाद इन DNA प्रोफाइल का मिलान नेपाल में मिले अज्ञात शवों से किया जाएगा।

    विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, भारत में रहने वाले लापता लोगों के फर्स्ट-डिग्री जैविक रिश्तेदारों के सैंपल लेकर DNA प्रोफाइल तैयार की जाएगी. इनमें माता-पिता, बेटा, बेटी और भाई-बहन शामिल हैं. इसके लिए भारत की केंद्रीय और राज्य स्तरीय फॉरेंसिक लैब की सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

    DNA प्रोफाइल बनाने के लिए अब सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैब (CFSL), राज्य फॉरेंसिक साइंस लैब (SFSL), नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी की लैब और NABL से मान्यता प्राप्त उन लैब्स का इस्तेमाल किया जा सकेगा, जहाँ डीएनए प्रोफाइलिंग की सुविधा उपलब्ध है।


    नेपाल पुलिस से होगा DNA का मिलान

    मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स (MEA) ने बताया कि नेपाल पुलिस की सलाह के मुताबिक पहचान के लिए Autosomal STR DNA profiling कराई जा सकती है.इसके लिए नेपाल पुलिस ने तकनीकी जरूरतों की जानकारी भी साझा की है .DNA प्रोफाइल तैयार होने के बाद उसे जरूरी शुरुआती जानकारी के साथ नेपाल पुलिस को भेजा जा सकेगा।

    इन DNA प्रोफाइल को नेपाल पुलिस के ईमेल [email protected] पर भेजा जा सकता है. इससे नेापल में मिले अज्ञात शवों के DNA प्रोफाइल के साथ इनका मिलान और पहचान की जाएगी. भारत सरकार ने समन्वय के लिए एक और व्यवस्था की है. DNA प्रोफाइल की कॉपी काठमांडू के भारतीय दूतावास को [email protected] पर भेजी जा सकती है। इसके साथ ही लोगों की सहायता के लिए पुलिस का हेल्पलाइन नंबर +977 9841 6160 95 भी जारी किया गया है।


    1,259 लोगों की मौत, 5 हजार अब भी लापता

    नेपाल में पिछले हफ्ते आई त्रासदी से कई घर उजड़ गए. नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,259 हो गई है.राहत और बचाव टीमों ने अब तक 12 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला है, जबकि करीब 5 हजार लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

    भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि काठमांडू के भारतीय दूतावास ने मंगलवार को पीड़ितों के शवों की पहचान से जुड़ी जानकारी और प्रक्रिया साझा की थी. अब गृह मंत्रालय की पहल से भारत में DNA प्रोफाइलिंग की सुविधा उपलब्ध कराकर पहचान की प्रक्रिया को और आसान बनाने की कोशिश की जा रही है।

    बता दें कि 26 अगस्त को आया यह फ्लैश फ्लड नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुए बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन के बाद आई थी. इसने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों को भारी नुकसान पहुंचाया है.अब DNA जांच की यह व्यवस्था उन परिवारों के लिए उम्मीद के नए रास्ते खोलेगी जो अपने लापता परिजनों की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।

  • देशभर में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम…. जानिए क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त

    देशभर में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम…. जानिए क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली।
    आज देशभर में जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2026) का महापर्व मनाया जा रहा है। जन्माष्टमी को कृष्णाष्टमी, गोकुलाष्टमी, कृष्ण जयंती, श्रीकृष्ण जयंती, यदुकुलाष्टमी और अष्टमी रोहिणी के नामों से भी जाना जाता है. हर साल यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. यह पर्व भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के आठवें अवतार श्री कृष्ण के जन्मोत्सव (Krishna Janmashtami 2026) के रूप में मनाया जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, यह भगवान कृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव है।

    जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की उपासना की जाती है. भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और विधि-विधान से भगवान का श्रृंगार करते हैं. लड्डू गोपाल को पंचामृत से स्नान कराया जाता है, सुंदर वस्त्र और आभूषण पहनाए जाते हैं और उन्हें पालने में बैठाकर झुलाया जाता है. तो आइए जानते हैं कि कृष्ण जन्माष्टमी पर आज रात लड्डू गोपाल के पूजन का क्या मुहूर्त (Muhurat) रहेगा।


    कृष्ण जन्माष्टमी 2026 शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)

    भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की तिथि 4 सितंबर यानी आज अर्धरात्रि में 2 बजकर 25 मिनट पर शुरू हो चुकी है, जो कि 5 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी. आज श्रीकृष्ण की पूजा का मुहूर्त रात 11 बजकर 57 मिनट से लेकर 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा, जिसके लिए कुल 45 मिनट मिलेंगे. इसी अवधि में लड्डू गोपाल का जन्म होगा और जन्मोत्सव मनाया जाएगा.

    भगवान कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था और इसलिए, कृष्ण जन्माष्टमी हमेशा रोहिणी नक्षत्र में ही मनाई जाती है. रोहिणी नक्षत्र अर्धरात्रि में 12 बजकर 29 मिनट पर लग चुका है और इसका समापन आज रात 11 बजकर 4 मिनट पर होगा.


    कृष्ण जन्माष्टमी की पूजन सामग्री (Janmashtami Puja Samagri)

    जन्माष्टमी के दिन श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर लड्डू गोपाल के पूजन और भव्य श्रृंगार के लिए मुख्य रूप से बाल गोपाल की मूर्ति, झूला, नए वस्त्र, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, चंदन, रोली, अक्षत, दीपक, धूप, कपूर और ताजे फूलों की आवश्यकता होती है. इसके साथ ही भगवान के अभिषेक के लिए पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) और उनके प्रिय भोग के रूप में माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, ऋतुफल, मिठाई तथा पान-सुपारी तैयार की जाती है, जिसमें तुलसी दल मिलाना अत्यंत अनिवार्य माना गया है।


    कृष्ण जन्माष्टमी पर ऐसे करें श्रीकृष्ण की पूजा

    कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप ‘लड्डू गोपाल’ की पूजा के लिए सबसे पहले सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूरे दिन सात्विक रहते हुए व्रत का संकल्प लें. पूजन स्थल एवं मंदिर को अच्छे से साफ कर सजाएं और बाल गोपाल के लिए एक सुंदर झूला तैयार करें. मुख्य पूजा मध्यरात्रि 12 बजे की जाती है, जब भगवान का जन्म हुआ था; इस समय लड्डू गोपाल को पहले गंगाजल और फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान कराकर नए वस्त्र, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और चंदन से उनका दिव्य श्रृंगार करें।

    इसके बाद उन्हें झूले में विराजमान कराकर प्रेमपूर्वक झूला झुलाएं और उनके अत्यंत प्रिय माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, पंचामृत एवं फलों का भोग लगाएं, जिसमें तुलसी दल मिलाना अनिवार्य माना गया है. अंत में धूप-दीप जलाकर श्रद्धापूर्वक आरती करें, अनजाने में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें और सभी में प्रसाद बांटकर अपना व्रत खोलें।


    इन दिव्य मंत्रों का करें जाप (Sri Krishna Mantra)

    – कृं कृष्णाय नमः
    – ऊं देविकानन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण:प्रचोदयात
    – ओम क्लीम कृष्णाय नमः
    – गोकुल नाथाय नमः
    – ऊं नमो भगवते श्रीगोविन्दाय नम:

    कृष्ण जन्माष्टमी उपाय (Krishna Janmashtami Upay)

    1. जन्माष्टमी की रात 12 बजे लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव के बाद केसर मिश्रित दूध से उनका अभिषेक करें. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली का वास होता है.

    2. जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण को पान का पत्ता अर्पित करना भी शुभ माना जाता है. मान्यता है कि अगले दिन उस पत्ते पर रोली से श्री यंत्र बनाकर उसे तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखने से आर्थिक परेशानियों से राहत मिल सकती है।

  • 5 माह भी नहीं चली कॉकरोच जनता पार्टी….. मई में बनी और सितंबर में टूट गई, दीपके पर गंभीर आरोप

    5 माह भी नहीं चली कॉकरोच जनता पार्टी….. मई में बनी और सितंबर में टूट गई, दीपके पर गंभीर आरोप

    नई दिल्ली। राजनीति के दलदल से दूर रहने की बात करने वाले अभिजीत दीपके (Abhijeet Deepke) अब उसमें फंसते हुए नजर आ रहे हैं। अभिजीत दीपके (Abhijeet Deepke) की कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party) में बगावत हो गई है। कॉकरोच पार्टी के एक सदस्य ने ना सिर्फ दीपके का साथ छोड़ा है, बल्कि एक नई पार्टी बनाने का भी ऐलान कर दिया है। यही नहीं इस नेता ने अभिजीत दीपके और उनके साथियों पर कई बड़े आरोप भी लगाए हैं।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक पेपर लीक आंदोलन से जुड़े रहे कॉकरोच पार्टी के सदस्य मनीष ब्रह्मभट्ट ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुद को CJP से अलग कर लिया। साथ ही उन्होंने एक अलग गुट, ‘कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक’ (CJP-D) बनाने का ऐलान कर दिया है। ब्रह्मभट्ट ने पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आंदोलन की सफलता के बाद जमीनी कार्यकर्ताओं और छात्रों का सौदा कर दिया गया और संगठन अब ‘टीम केजरीवाल’ में बदल गया है।


    मनीष ब्रह्मभट्ट क्या-क्या बोल गए?

    मनीष ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि आंदोलन के सफल होने के बाद जो 12 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम बनाई गई, उसके लिए किसी भी जमीनी कार्यकर्ता, छात्र या सोशल मीडिया वॉलंटियर से सलाह नहीं ली गई। ब्रह्मभट्ट ने कहा, “आंदोलन देश का था, लेकिन सफलता मिलते ही इसे बेच दिया गया। नई टीम के 8 सदस्य आम आदमी पार्टी से जुड़े हैं। यह पूरी टीम अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।”

    उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन में शिवसेना, सपा, राजद, बीजेपी, कांग्रेस और एनसीपी से जुड़े युवाओं ने भी हिस्सा लिया था, लेकिन नई टीम में किसी को जगह नहीं मिली। साथ ही महिला, सिख और मुस्लिम चेहरों को भी दरकिनार कर दिया गया। ब्रह्मभट्ट ने कहा कि जिस आंदोलन की नींव पेपर लीक के खिलाफ पड़ी थी, उसी आंदोलन के नेतृत्व ने अब मेरिट को किनारे कर दिया है।


    ‘CJP-D में सबको मिलेगी जगह’

    इस दौरान मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा है कि CJP-D को एक सच्चा लोकतांत्रिक और राष्ट्रव्यापी संगठन बनाया जाएगा। इसके तहत हर राज्य के स्थानीय आंदोलनकारियों और वॉलंटियर्स में से 5-5 प्रतिनिधियों को चुना जाएगा, ताकि हर जगह की आवाज को बराबर जगह मिल सके।


    क्या कह रहे हैं अभिजीत दीपके?

    दूसरी तरफ केजरीवाल से सांठ-गांठ जैसे आरोपों को अभिजीत दीपके ने सिरे से खारिज किया है। एक बयान में उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी सिर्फ छात्रों की A टीम है और किसी भी अन्य किसी भी CJP का कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री कहते हैं कि हम कांग्रेस की ‘B’ टीम हैं, कुछ लोग हमें आम आदमी पार्टी की ‘B’ टीम बताते हैं। मुझे लगता है कि इन नेताओं को एक साथ बैठकर तय कर लेना चाहिए। हमारी तरफ से बात साफ है। हम सिर्फ और सिर्फ छात्रों की ‘A’ टीम हैं।”


    दीपके ने बनाई थी कॉकरोच पार्टी

    इससे पहले देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के एक बयान के विरोध में महाराष्ट्र के अभिजीत दीपके ने कॉकरोच जनता पार्टी की मुहिम शुरू की थी। देखते ही देखते इस ऑनलाइन मुहिम से लाखों लोग जुड़ गए। इसके बाद पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई की थी। आंदोलन की सफलता के बाद पार्टी चर्चा में है।

  • वृंदावन जाने से पहले कर लें पूरी तैयारी मंदिर में क्या ले जाएं और बंदरों से कैसे बचें जानें जरूरी Travel Tips

    वृंदावन जाने से पहले कर लें पूरी तैयारी मंदिर में क्या ले जाएं और बंदरों से कैसे बचें जानें जरूरी Travel Tips


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां बांके बिहारी मंदिर इस्कॉन मंदिर प्रेम मंदिर निधिवन और रंगनाथ मंदिर जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं। खासतौर पर जन्माष्टमी और होली जैसे बड़े त्योहारों के दौरान यहां देश के अलग अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। अगर आप भी वृंदावन जाने की तैयारी कर रहे हैं तो यात्रा शुरू करने से पहले कुछ जरूरी बातों की जानकारी रखना बेहद फायदेमंद रहेगा।

    वृंदावन घूमने के लिए मौसम का ध्यान रखना भी जरूरी है। अक्टूबर से मार्च के बीच मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहता है और इस दौरान घूमना आसान हो सकता है। वहीं जन्माष्टमी और होली जैसे अवसरों पर धार्मिक उत्साह अपने चरम पर होता है लेकिन भारी भीड़ के कारण यात्रा चुनौतीपूर्ण भी हो सकती है। ऐसे समय में होटल परिवहन और मंदिर दर्शन की योजना पहले से बनाना बेहतर रहता है।

    यात्रा पर निकलते समय अपने साथ जरूरत से ज्यादा सामान ले जाने से बचें। हल्का बैग रखें जिसमें पानी की बोतल मोबाइल चार्जर जरूरी दवाइयां पहचान पत्र और कुछ नकद पैसे जैसी आवश्यक चीजें हों। भारी सामान के साथ मंदिरों और भीड़भाड़ वाली गलियों में घूमना मुश्किल हो सकता है।

    वृंदावन के मंदिरों में स्थानीय धार्मिक परंपराओं और व्यवस्थाओं का सम्मान करना जरूरी है। अलग अलग मंदिरों के अपने नियम हो सकते हैं। कुछ स्थानों पर मोबाइल फोन कैमरा या बैग ले जाने पर पाबंदी हो सकती है। इसलिए जिस मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे हैं वहां के मौजूदा नियमों की जानकारी पहले ले लेना बेहतर होगा।

    अगर पहली बार वृंदावन जा रहे हैं तो प्रमुख धार्मिक स्थलों की सूची पहले से बना लें। बांके बिहारी मंदिर के अलावा इस्कॉन मंदिर प्रेम मंदिर निधिवन और रंगनाथ मंदिर जैसे स्थानों को अपनी यात्रा योजना में शामिल किया जा सकता है। भीड़ वाले दिनों में सभी जगहों पर जाना आसान नहीं होता इसलिए प्राथमिकता के हिसाब से प्लान बनाना ज्यादा बेहतर रहेगा।

    लंबी यात्रा और भीड़भाड़ के बीच स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें। सिरदर्द पेट की परेशानी या दूसरी सामान्य दिक्कतों के लिए डॉक्टर द्वारा बताई गई जरूरी दवाइयां साथ रखना उपयोगी हो सकता है। बुजुर्गों बच्चों और ज्यादा देर तक चलने में परेशानी वाले लोगों के लिए पर्याप्त आराम की व्यवस्था करना भी जरूरी है।

    वृंदावन में बंदरों की मौजूदगी भी यात्रियों के लिए चुनौती बन सकती है। बंदर अक्सर खाने पीने की चीजों या हाथ में मौजूद सामान की तरफ आकर्षित हो सकते हैं। इसलिए उनके सामने खाना न दिखाएं और मोबाइल चश्मा पर्स या दूसरी जरूरी वस्तुएं संभालकर रखें। बंदरों के बहुत करीब जाने या उन्हें छेड़ने से भी बचना चाहिए।

    भीड़भाड़ वाले धार्मिक आयोजनों के दौरान अपने सामान और साथ आए लोगों पर नजर बनाए रखें। बच्चों को अकेला न छोड़ें और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन या पुलिस की मदद लें। मंदिर परिसर में धक्का मुक्की से बचते हुए कतार और सुरक्षा व्यवस्था का पालन करें।

    वृंदावन की यात्रा सिर्फ दर्शन तक सीमित नहीं होती बल्कि यहां की गलियों और धार्मिक माहौल का अनुभव भी लोगों को आकर्षित करता है। हालांकि त्योहारों के दौरान भीड़ और यातायात व्यवस्था को देखते हुए धैर्य रखना जरूरी है। समय का अतिरिक्त मार्जिन रखें और प्रशासन की ओर से जारी ट्रैफिक डायवर्जन या यात्रा संबंधी ताजा निर्देशों का पालन करें। थोड़ी सी तैयारी और सावधानी के साथ वृंदावन की धार्मिक यात्रा को सुरक्षित और यादगार बनाया जा सकता है।

  • गेटवे ऑफ इंडिया के पास समंदर में फेरी का इंजन हुआ खराब, दूसरी नाव से किया सभी यात्रियों का सुरक्षित रेस्क्यू

    गेटवे ऑफ इंडिया के पास समंदर में फेरी का इंजन हुआ खराब, दूसरी नाव से किया सभी यात्रियों का सुरक्षित रेस्क्यू


    मुंबई। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में गुरुवार रात गेटवे ऑफ इंडिया के पास समुद्र में एक फेरी का इंजन अचानक खराब हो गया। बीच समुद्र में फेरी के रुकने से उसमें सवार यात्रियों में अफरातफरी मच गई। पुलिस और स्थानीय नाव संचालक की मदद पहुंचने तक यात्रियों की सांसें अटकी रहीं।

    हालांकि, राहत की बात रही कि स्थानीय पुलिस और एक अन्य लोकल बोट ऑपरेटर ने फेरी में सवार 34 यात्रियों और चार चालक दल के सदस्यों समेत सभी 38 लोगों को सुरक्षित बचा लिया। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, घटना गुरुवार रात करीब 8:30 बजे की है।

    लौटते वक्त बीच समुद्र में बंद हुआ इंजन
    ‘अनवारी’ नाम की यह फेरी यात्रियों को करीब आधे घंटे की समुद्री सैर कराती है। गेटवे ऑफ इंडिया लौटते समय समुद्र तट से करीब 1.5 नॉटिकल मील दूर अचानक उसका इंजन खराब हो गया। उस समय फेरी पर 34 यात्री और चालक दल के चार सदस्य मौजूद थे।

    फेरी के खराब होने की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को मिली। इसके बाद कांस्टेबल अभिजीत शिंदे और अन्य पुलिसकर्मियों ने आसपास मौजूद नावों की जानकारी जुटानी शुरू की।

    पास में मौजूद थी दूसरी नाव
    पुलिस को पता चला कि समुद्री सैर कराने वाली एक अन्य नाव ‘आजाद हिंद’ खराब फेरी के पास ही मौजूद है। पुलिस अधिकारियों ने नाव के मालिक जुनैद मुल्ला से संपर्क कर तत्काल मदद मांगी।

    इसके बाद ‘आजाद हिंद’ मौके पर पहुंची और खराब पड़ी ‘अनवारी’ को खींचकर सुरक्षित गेटवे ऑफ इंडिया की जेट्टी नंबर 2 तक ले आई। करीब रात 9:30 बजे फेरी को जेट्टी तक पहुंचाया गया। सभी 34 यात्रियों और चालक दल के चारों सदस्यों को बिना किसी चोट के सुरक्षित तट पर उतार लिया गया। इसके बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली।

  • अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर IRGC के ठिकानों पर हमला ट्रंप बोले- पलटवार की भारी कीमत चुकानी होगी

    अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर IRGC के ठिकानों पर हमला ट्रंप बोले- पलटवार की भारी कीमत चुकानी होगी


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बेहद गंभीर दौर में पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के ठिकानों को निशाना बनाकर सैन्य कार्रवाई की है। हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि अगर ईरान ने अमेरिकी हमले का जवाब देने की कोशिश की तो वाशिंगटन की ओर से पहले से कहीं ज्यादा जोरदार कार्रवाई की जा सकती है।

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से बताया गया कि स्थानीय समय के अनुसार दोपहर करीब 12 बजे अमेरिकी बलों ने ईरान में IRGC से जुड़े ठिकानों पर हमले शुरू किए। अमेरिकी पक्ष के मुताबिक यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ IRGC की ओर से किए गए कथित हमलों के प्रयासों के बाद की गई है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। सोमवार रात दोनों पक्षों के बीच हमलों का आदान प्रदान भी हुआ था। बताया जा रहा है कि एक महीने से अधिक समय के बाद दोनों देशों के बीच फिर से इस तरह की सीधी सैन्य कार्रवाई हुई है। नए हमले ने क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंका को और बढ़ा दिया है।

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भी अमेरिकी कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के आसपास मौजूद ईरानी ठिकानों को निशाना बना रहा है। ट्रंप ने इस कार्रवाई को बड़ा और शक्तिशाली बताया। उनके मुताबिक ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री माइन बिछाने की कथित कोशिश और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर आठ मिसाइल दागे जाने के बाद यह कदम उठाया गया।

    दूसरी तरफ ईरान ने भी अमेरिकी हमले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। IRGC के प्रवक्ता सरदार मोहेबी ने कहा कि अमेरिका को ईरान पर किए गए ताजा हमले पर पछताना पड़ेगा और उसे कठोर जवाब का सामना करना होगा। ईरानी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ और खातम अल-अनबिया मुख्यालय की ओर से भी अमेरिकी कार्रवाई की निंदा की गई है।

    ईरानी पक्ष ने कहा है कि अमेरिकी सेना की ओर से की जा रही कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। ईरानी बयान में अमेरिका को क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाने के खिलाफ चेतावनी दी गई है। इससे दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

    इस बीच अमेरिका ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी कदम उठाया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। लोगों को ज्यादा सतर्क रहने और संभावित उड़ान रद्द होने तथा हवाई क्षेत्र बंद होने जैसी परिस्थितियों के लिए तैयार रहने को कहा गया है। यात्रा में बाधा आने की आशंका के बीच क्षेत्र में रह रहे अमेरिकी नागरिकों को स्थानीय परिस्थितियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

    अमेरिकी हमले और ईरान की जवाबी धमकी के बाद अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि दोनों देशों के बीच तनाव आगे किस दिशा में जाता है। होर्मुज स्ट्रेट की रणनीतिक अहमियत को देखते हुए किसी भी नए सैन्य टकराव का असर पूरे मध्य पूर्व के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।