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  • PNB करेंसी चेस्ट में नकली नोट: CCTV में हाउस कीपर गड्डी से नोट निकालता दिखा, डेढ़ साल से यहीं था तैनात

    PNB करेंसी चेस्ट में नकली नोट: CCTV में हाउस कीपर गड्डी से नोट निकालता दिखा, डेढ़ साल से यहीं था तैनात


    सहारनपुर। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की घंटाघर स्थित करेंसी चेस्ट में मिले नकली नोटों की रकम बढ़कर 17 करोड़ 29 लाख रुपए हो गई है। मामले में पार्ट टाइम हाउस कीपर विशाल पर भी पुलिस की जांच का शिकंजा कस गया है। उसके परिजनों का दावा है कि मंगलवार देर रात पुलिस उसे पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। हालांकि, पुलिस ने उसकी हिरासत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    जांच के दौरान बालेली गांव निवासी विशाल की एक CCTV फुटेज सामने आई है, जिसमें वह करेंसी की गड्डी से नोट निकालता हुआ दिखाई दे रहा है। विशाल करीब चार साल से पीएनबी में सफाई कर्मचारी के तौर पर काम कर रहा था और पिछले डेढ़ साल से करेंसी चेस्ट में पार्ट टाइम हाउस कीपर के रूप में तैनात था।

    दो FIR में दर्ज हुआ मामला
    करेंसी चेस्ट में हुई गड़बड़ी को लेकर सदर थाने में दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कराई गई हैं। एक FIR में नकली नोट मिलने का मामला है, जबकि दूसरी में 4.30 लाख रुपए गायब होने की जानकारी दी गई है।

    विशाल के पिता बीरम सिंह के मुताबिक, मंगलवार देर रात पुलिस टीम उनके घर पहुंची और विशाल को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। उन्होंने बताया कि परिवार की ओर से बार-बार पूछने के बावजूद पुलिस टीम ने ज्यादा जानकारी नहीं दी।

    परिवार के कई सदस्य बैंकिंग क्षेत्र में
    बीरम सिंह ने बताया कि उनका परिवार खेती-बाड़ी करता है। उनका बड़ा बेटा और बहू पीएनबी की सहारनपुर शाखा में तैनात हैं। उनसे छोटा बेटा ग्रामीण बैंक में काम करता है, जबकि एक अन्य बेटा निजी नौकरी करता है। विशाल परिवार का सबसे छोटा बेटा है।

    परिजनों के अनुसार, विशाल करीब चार साल से पीएनबी में सफाई कर्मचारी के पद पर काम कर रहा था। करीब डेढ़ साल पहले उसकी तैनाती करेंसी चेस्ट में की गई थी।

    29 लाख के नकली नोट और मिले
    पीएनबी की करेंसी चेस्ट में नकली नोट मिलने का आंकड़ा बुधवार को करीब 29 लाख रुपए और बढ़ गया। इससे नकली नोटों की कुल रकम अब 17 करोड़ 29 लाख रुपए तक पहुंच गई है।

    शुरुआत में करेंसी चेस्ट से 7 करोड़ 40 लाख रुपए के नोट नकली पाए गए थे। इसके बाद यह आंकड़ा बढ़कर 17 करोड़ रुपए हुआ और अब करीब 29 लाख रुपए के नकली नोट और मिलने के बाद कुल रकम 17.29 करोड़ रुपए हो गई है।

    मामले की जांच के लिए बुधवार को लखनऊ से आरबीआई के कई अधिकारी और पांच सदस्यीय फॉरेंसिक टीम भी सहारनपुर पहुंची। टीम करीब 11 बजे सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट शाखा पहुंची और अन्य जांच टीमों के साथ मिलकर देर शाम तक नोटों की गिनती और जांच करती रही।

    एसपी सिटी व्योम बिंदल ने बताया कि बैंक की ओर से मिली जानकारी के अनुसार नकली नोटों की कुल संख्या 17 करोड़ 29 लाख रुपए तक पहुंच गई है। मामले की गहन जांच की जा रही है और फरार आरोपियों के घर भी खंगाले गए हैं।

    आरबीआई, पीएनबी, SIT और फॉरेंसिक टीम जांच में जुटी
    करेंसी चेस्ट में नकली नोट मिलने के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। आरबीआई, पीएनबी, एसआईटी और फॉरेंसिक टीम अपने-अपने स्तर पर मामले की जांच कर रही हैं। जिन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी, उनके स्थान पर नया स्टाफ भी तैनात किया गया है।

    पार्ट टाइम हाउस कीपर विशाल से पूछताछ किए जाने की बात सामने आ रही है, हालांकि पुलिस की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वहीं, मामले की जांच के लिए बृहस्पतिवार को एनआईए की टीम के भी पहुंचने की संभावना जताई गई है।

    मेरठ के पीएनबी हेड ऑफिस में भी जांच
    सहारनपुर करेंसी चेस्ट में मिले नकली नोटों की जांच का दायरा मेरठ तक पहुंच गया है। बुधवार को मेरठ बाईपास स्थित वेदव्यासपुरी के पीएनबी हेड ऑफिस का मुख्य द्वार बंद कर शाम तक जांच की गई। पीएनबी के जीएम अजय कुमार टिबरेवाल के पीए सचिन बिश्नोई ने कहा कि मामले से जुड़ी सभी जानकारी सहारनपुर से ही दी जा सकती है।

    स्ट्रांग रूम में प्रवेश की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में
    फॉरेंसिक टीम करेंसी चेस्ट में मौजूद फिंगरप्रिंट, CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच इस बिंदु पर भी केंद्रित है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट स्ट्रांग रूम तक कैसे पहुंचे।

    बताया गया है कि करेंसी चेस्ट के स्ट्रांग रूम में प्रवेश के लिए कई औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। प्रवेश से पहले फिंगरप्रिंट स्कैन किया जाता है और सत्यापन के बाद ही आगे की प्रक्रिया होती है। स्ट्रांग रूम की दो चाबियां अलग-अलग लोगों के पास रहती हैं और उसे खोलने के लिए दोनों चाबियों का इस्तेमाल जरूरी होता है।

    दोनों चाबियां लगाए जाने और दोनों संबंधित व्यक्तियों के फिंगरप्रिंट स्कैन होने के बाद ही स्ट्रांग रूम में प्रवेश संभव होता है। फॉरेंसिक टीम यह पता लगाने में जुटी है कि नकली नोट रखने के लिए इस पूरी सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की छेड़छाड़ तो नहीं की गई।

    इसके अलावा नकली नोटों में इस्तेमाल कागज, स्याही और प्रिंटर की भी जांच की जा रही है। जांच की जिम्मेदारी पीएनबी हेड ऑफिस और आरबीआई की टीम ने संभाली हुई है।

    नोडल अधिकारी की शिकायत पर दर्ज हुई थीं FIR
    करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ रुपए के जाली नोट मिलने के मामले में नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे की ओर से सदर थाने में दो अलग-अलग मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।

    इन मामलों में वरिष्ठ प्रबंधक मंडल कार्यालय रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट प्रबंधक शर्मा, करेंसी चेस्ट खरा बाजार जगाधरी के प्रबंधक अमित कुमार और पार्ट टाइम हाउस कीपर विशाल को आरोपी बनाया गया है।

  • मायावती ने आकाश आनंद से छीनी राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी, बताया राजनीतिक रूप से अपरिपक्व

    मायावती ने आकाश आनंद से छीनी राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी, बताया राजनीतिक रूप से अपरिपक्व

    लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी की बड़ी जिम्मेदारियों से दूर रखने का फैसला किया है। मायावती ने कहा कि आकाश आनंद को अभी राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की जरूरत है। इसी के साथ आकाश आनंद से राष्ट्रीय संयोजक का पद भी हटा दिया गया है। उन्होंने अपने एक्स प्रोफाइल में भी बदलाव करते हुए ‘राष्ट्रीय संयोजक’ की जगह खुद को बसपा कार्यकर्ता बताया है। इस फैसले से आकाश के समर्थकों में निराशा है।

    कांशीराम के सिद्धांतों का दिया हवाला
    मायावती ने मान्यवर कांशीराम के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने परिवार को पार्टी के काम में सहयोग करने की अनुमति दी थी, लेकिन परिवार के सदस्यों को चुनाव लड़ाने या पार्टी में महत्वपूर्ण पद देने के पक्ष में नहीं थे।

    मायावती ने कहा कि वह भी इसी संकल्प पर आगे बढ़ रही हैं। आकाश आनंद को पार्टी में काम करने की अनुमति रहेगी, लेकिन फिलहाल उन्हें कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।

    ‘अभी और परिपक्वता की जरूरत’
    मायावती के मुताबिक आकाश आनंद को राजनीतिक तौर पर अभी और परिपक्व होने की जरूरत है। उनका मानना है कि विरोधी दल चुनाव के दौरान साम, दाम, दंड और भेद जैसे हथकंडों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में राजनीतिक अनुभव और परिपक्वता की कमी के कारण पार्टी को संभावित चुनावी नुकसान से बचाना जरूरी है।

    आकाश आनंद के एक्स प्रोफाइल में बदलाव भी इसी फैसले के बाद सामने आया है। अब उनकी पहचान राष्ट्रीय संयोजक के बजाय बसपा कार्यकर्ता के रूप में दिखाई जा रही है।

    लखनऊ में हुई बसपा की अहम बैठक
    मायावती ने लखनऊ में पार्टी की ऑल इंडिया स्तर की महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में संगठन को मजबूत करने और विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर पार्टी का रुख स्पष्ट करने को लेकर निर्देश दिए गए। इस दौरान पिछले कार्यों की समीक्षा भी की गई।

    मायावती ने पार्टी के छोटे-बड़े सभी पदाधिकारियों को संगठन की कमियों को दूर करने और पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ पार्टी के दिशा-निर्देशों का पालन करने की सख्त हिदायत दी।

    कांशीराम के संघर्षों का किया जिक्र
    मायावती ने कांशीराम के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि शोषित वर्ग को शासक वर्ग बनाना ही बहुजन आंदोलन का मुख्य उद्देश्य है। इसके लिए सत्ता हासिल करना जरूरी है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने और इस लक्ष्य की दिशा में लगातार काम करने का आह्वान किया।

    RSS और मोहन भागवत के बयानों पर भी निशाना
    बैठक में मायावती ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए बयानों का भी संज्ञान लिया। उन्होंने संघ की कथनी और करनी में भारी अंतर होने का आरोप लगाया।

    मायावती ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने समानता के लिए जीवनभर संघर्ष किया। वहीं आरक्षण, मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक वर्गों की सुरक्षा तथा महिला अधिकारों जैसे मुद्दों पर आरएसएस के दावों में उन्हें सच्चाई की कमी नजर आती है। उन्होंने आरएसएस को सलाह दी कि वह बाबा साहेब के मानवतावादी और समतामूलक संविधान का ईमानदारी से पालन करे और अपने लोगों से भी उसका पालन करवाए।

  • अयोध्या: राम मंदिर ट्रस्ट के नए पदाधिकारियों की हुई पहली बैठक, जानिए क्‍या बोले सीईओ जितेंद्र मिश्रा ?

    अयोध्या: राम मंदिर ट्रस्ट के नए पदाधिकारियों की हुई पहली बैठक, जानिए क्‍या बोले सीईओ जितेंद्र मिश्रा ?

    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में नई जिम्मेदारियां तय होने के बाद गुरुवार को नवनियुक्त पदाधिकारियों की पहली बैठक हुई। रामघाट स्थित कार्यशाला के श्रीराम जन्मभूमि क्षेत्र कार्यालय में हुई इस बैठक में ट्रस्ट की नई प्रशासनिक व्यवस्था और कामकाज को लेकर चर्चा की गई।

    बैठक के बाद बाहर आए नवनियुक्त सीईओ और पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि आज सभी ने एक-दूसरे से परिचय किया और कई मुद्दों पर चर्चा हुई। आगे भी कई बैठकें होंगी, ताकि वे यहां की पूरी कार्यप्रणाली को समझ सकें। इसके बाद वे अपना कार्यभार ग्रहण करेंगे। जितेंद्र मिश्रा ने कहा, “मैं बहुत सौभाग्यशाली हूं कि मुझे प्रभु श्रीराम और रामभक्तों की सेवा करने का अवसर मिला है।”

    बैठक में ये पदाधिकारी रहे मौजूद
    बैठक में नवनियुक्त सीईओ जितेंद्र मिश्रा के अलावा ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देवगिरी, कोषाध्यक्ष महेश भागचंद, ट्रस्टी मदन मोहन पांडे सहित अकाउंटिंग व्यवस्था से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

    नई जिम्मेदारियां तय होने के बाद हुई यह पहली बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें ट्रस्ट के कामकाज और वित्तीय व्यवस्था को लेकर आगे की कार्ययोजना पर चर्चा की गई। सभी पदाधिकारियों के एक-दूसरे से परिचय के बाद लेखा-जोखा, अकाउंटिंग सिस्टम और ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज से जुड़े विषयों की जानकारी भी साझा की गई।

    कार्यभार संभालने से पहले व्यवस्था समझेंगे सीईओ
    नवनियुक्त सीईओ जितेंद्र मिश्रा के पदभार ग्रहण करने से पहले हुई इस बैठक को ट्रस्ट की नई प्रशासनिक व्यवस्था की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आगे होने वाली बैठकों के जरिए ट्रस्ट और मंदिर से जुड़े कामकाज को विस्तार से समझेंगे, इसके बाद औपचारिक रूप से जिम्मेदारी संभालेंगे।

    माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मंदिर और ट्रस्ट से जुड़े प्रशासनिक कार्यों, लेखा-जोखा और वित्तीय व्यवस्था को लेकर नई कार्ययोजना का खाका इन्हीं बैठकों के जरिए तैयार किया जाएगा।

  • जम्मू-कश्मीर में धमकियों पर फारूक का बड़ा बयान बोले राज्य का दर्जा रोकने की साजिश

    जम्मू-कश्मीर में धमकियों पर फारूक का बड़ा बयान बोले राज्य का दर्जा रोकने की साजिश


    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को कथित तौर पर मिल रही धमकियों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने इन धमकियों को लेकर उपराज्यपाल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि घाटी में कश्मीरी पंडितों को डराने का काम कराया जा रहा है ताकि जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा देने की प्रक्रिया को टाला जा सके। उनके इस बयान के बाद भाजपा और कश्मीरी पंडित समुदाय की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।

    अनंतनाग में पत्रकारों से बातचीत के दौरान फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीरी पंडितों को मिल रही धमकियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि घाटी में अब कश्मीरी पंडितों की संख्या बेहद कम है। उन्होंने तर्क दिया कि जम्मू-कश्मीर में कई बड़े प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी हिंदू समुदाय से हैं। ऐसे में अगर हिंदुओं को निशाना बनाकर धमकियां दी जा रही हैं तो इन वरिष्ठ अधिकारियों को इस तरह की धमकियां क्यों नहीं मिल रही हैं। इसी सवाल के आधार पर उन्होंने मौजूदा प्रशासन की भूमिका पर संदेह जताया।

    फारूक अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि इन धमकियों के पीछे उपराज्यपाल प्रशासन का हाथ हो सकता है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी उपराज्यपाल प्रशासन के पास है इसलिए उसे यह बताना चाहिए कि धमकियां कहां से आ रही हैं और इनके पीछे कौन लोग हैं। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया। उनका बयान फिलहाल राजनीतिक आरोप के तौर पर सामने आया है।

    फारूक अब्दुल्ला ने इस पूरे विवाद को जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे से भी जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर पहले जो आश्वासन दिए गए थे उन्हें पूरा नहीं किया गया है। उनके मुताबिक पहले परिसीमन होगा फिर विधानसभा चुनाव होंगे और उसके बाद राज्य का दर्जा बहाल करने की बात कही गई थी। लेकिन उनका आरोप है कि इस दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए।

    उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई मुलाकात का भी जिक्र किया। फारूक के मुताबिक उनके सांसदों को भरोसा दिया गया था कि राज्य के दर्जे से जुड़ा फैसला जल्द लिया जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि उस आश्वासन के बाद काफी समय बीत चुका है लेकिन अब तक स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं हुई है। इसी मुद्दे को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

    फारूक अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 और 35ए के मुद्दे पर भी अपने राजनीतिक विरोधियों को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने पहले भाजपा के साथ मिलकर इन प्रावधानों को हटाने में मदद की थी वही अब राज्य के दर्जे और अनुच्छेद 370 की बहाली की बात कर रहे हैं। उन्होंने इसे जनता को भ्रमित करने की कोशिश बताया।

    वहीं भाजपा ने फारूक अब्दुल्ला के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी प्रवक्ता अंकुर शर्मा ने उनके बयान को चौंकाने वाला बताते हुए आरोप लगाया कि वह कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और उनके दर्द को नकारने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा का कहना है कि कश्मीरी पंडितों से जुड़े मुद्दे को राजनीतिक साजिश के रूप में पेश करने के बजाय उनकी सुरक्षा और सम्मान पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

    इस पूरे घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा और राज्य के दर्जे के सवाल को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। एक ओर फारूक अब्दुल्ला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं तो दूसरी ओर भाजपा उनके बयान को कश्मीरी पंडित समुदाय के प्रति असंवेदनशील बता रही है। अब इस विवाद में प्रशासन की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।

  • पुजारी से अलग अफसर संभालते हैं प्रशासन जानिए बड़े मंदिरों में कैसे चलता है CEO सिस्टम

    पुजारी से अलग अफसर संभालते हैं प्रशासन जानिए बड़े मंदिरों में कैसे चलता है CEO सिस्टम


    नई दिल्ली। अयोध्या के राम मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO की नियुक्ति के बाद मंदिर प्रशासन की व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में आ गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की अहम बैठक में रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र को ट्रस्ट का पहला CEO नियुक्त करने को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही राम मंदिर उन प्रमुख धार्मिक संस्थानों की श्रेणी में शामिल हो गया है जहां धार्मिक गतिविधियों के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियों को अलग स्तर पर संभालने की व्यवस्था है।

    देश के कई बड़े और प्रसिद्ध मंदिरों में पहले से ही इसी तरह का प्रशासनिक ढांचा मौजूद है। कहीं एग्जीक्यूटिव ऑफिसर तो कहीं चीफ एडमिनिस्ट्रेटर जैसे पदों पर अधिकारी रोजमर्रा के कामकाज की जिम्मेदारी संभालते हैं। इसका उद्देश्य बड़े स्तर पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं से लेकर वित्तीय व्यवस्था सुरक्षा स्वच्छता और मंदिर की संपत्तियों के प्रबंधन तक सभी कामों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करना होता है।

    आंध्र प्रदेश का तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम इस व्यवस्था का बड़ा उदाहरण है। यहां मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को CEO के बजाय एग्जीक्यूटिव ऑफिसर कहा जाता है। यही अधिकारी मंदिर प्रशासन के रोजमर्रा के संचालन की जिम्मेदारी संभालता है। उसके साथ ज्वाइंट एग्जीक्यूटिव ऑफिसर वित्त और लेखा से जुड़े अधिकारी मुख्य अभियंता तथा सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी काम करते हैं। इस पूरी व्यवस्था में बोर्ड नीतिगत फैसलों से जुड़ी भूमिका निभाता है जबकि अधिकारी उन फैसलों को जमीन पर लागू कराने का काम करते हैं।

    उत्तराखंड के बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के प्रशासन में भी CEO की अहम भूमिका है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अंतर्गत दोनों प्रमुख धामों की व्यवस्थाएं संचालित होती हैं। समिति में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष जैसे पदों के साथ CEO का प्रशासनिक ढांचा भी मौजूद है। CEO के अधीन अलग-अलग अधिकारी मंदिर व्यवस्था से जुड़े कार्यों को देखते हैं। यहां भी धार्मिक परंपराओं और प्रशासनिक कामकाज के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन देखने को मिलता है।

    ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में पद का नाम CEO नहीं बल्कि चीफ एडमिनिस्ट्रेटर है। यह अधिकारी मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में केंद्रीय भूमिका निभाता है। उसके जिम्मे मंदिर की संपत्ति श्रद्धालुओं की सुविधाएं साफ-सफाई अनुशासन सुरक्षा और धन तथा आभूषणों की सुरक्षित देखरेख जैसे महत्वपूर्ण काम होते हैं। कानून के तहत चीफ एडमिनिस्ट्रेटर मंदिर प्रबंध समिति के सचिव और मुख्य कार्यकारी अधिकारी की भूमिका भी निभाता है।

    जम्मू स्थित माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड में भी CEO का पद मौजूद है। यहां बोर्ड नीतिगत स्तर पर फैसले करता है जबकि CEO और उनकी टीम श्रद्धालुओं की सुविधाओं यात्रा व्यवस्था सुरक्षा और रोजमर्रा के प्रशासन को संचालित करती है।

    दरअसल बड़े मंदिरों में CEO जैसी व्यवस्था का मकसद धार्मिक परंपराओं को बदलना नहीं बल्कि विशाल स्तर पर होने वाले प्रशासनिक काम को पेशेवर तरीके से चलाना है। लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही दान और चढ़ावे का प्रबंधन सुरक्षा साफ-सफाई तकनीकी व्यवस्था और मंदिर की संपत्तियों की देखरेख जैसे कामों के लिए एक मजबूत प्रशासनिक ढांचा जरूरी होता है। अयोध्या के राम मंदिर में CEO की नियुक्ति के बाद अब इस व्यवस्था को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है।

  • 60 घंटे पाकिस्तान की कैद में रहे अभिनंदन का नया सफर IAF के बाद प्राइवेट एयरलाइंस से जुड़े

    60 घंटे पाकिस्तान की कैद में रहे अभिनंदन का नया सफर IAF के बाद प्राइवेट एयरलाइंस से जुड़े


    नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के जांबाज अधिकारी ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। 2019 में पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमान को मार गिराने के बाद देशभर में चर्चा में आए अभिनंदन ने कथित तौर पर भारतीय वायुसेना की सेवा से विदाई ले ली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब वह निजी विमानन कंपनी Fly91 के साथ जुड़ गए हैं। हालांकि इस बदलाव को लेकर भारतीय वायुसेना या अभिनंदन वर्धमान की तरफ से आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की गई है।

    हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया है कि अभिनंदन ने 31 मार्च को भारतीय वायुसेना से विदाई ली थी। इसके बाद उन्होंने निजी एयरलाइंस Fly91 के साथ काम शुरू किया है। एयरलाइन की ओर से भी अभिनंदन की नियुक्ति या उनकी भूमिका को लेकर कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। कंपनी ने कर्मचारियों से जुड़ी व्यक्तिगत जानकारी को निजी मामला बताया है।

    गोवा स्थित Fly91 ने मार्च 2024 में अपना परिचालन शुरू किया था। कंपनी क्षेत्रीय हवाई संपर्क पर ध्यान देती है और उसके बेड़े में ATR 72-600 विमान शामिल हैं। फिलहाल कंपनी के परिचालन केंद्र गोवा और हैदराबाद में हैं। अभिनंदन जैसे अनुभवी लड़ाकू पायलट का निजी विमानन क्षेत्र में जाना उनके करियर का एक नया अध्याय माना जा रहा है।

    अभिनंदन वर्धमान का नाम देश को 2019 में हुए भारत और पाकिस्तान के बीच हवाई टकराव के दौरान खास तौर पर याद है। पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण ठिकाने को निशाना बनाकर एयरस्ट्राइक की थी। इसके अगले दिन भारत और पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों के बीच हवाई मुठभेड़ हुई थी।

    उस समय विंग कमांडर रहे अभिनंदन वर्धमान ने MiG-21 Bison से पाकिस्तान के F-16 विमान को निशाना बनाया था। हालांकि इसी कार्रवाई के दौरान उनका विमान भी दुश्मन के निशाने पर आ गया और वह पाकिस्तान की सीमा में जा गिरे। इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। करीब 60 घंटे बाद उन्हें भारत को सौंप दिया गया था। उनकी वापसी के बाद देशभर में उनके साहस और जज्बे की चर्चा हुई थी।

    अभिनंदन को उनकी बहादुरी के लिए वर्ष 2021 में वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। वीर चक्र युद्धकाल में दिया जाने वाला भारत का तीसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। सम्मान के दौरान हवाई मुठभेड़ में उनके असाधारण साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण को विशेष रूप से रेखांकित किया गया था।

    अब वायुसेना की वर्दी छोड़कर निजी विमानन क्षेत्र में कदम रखने की खबर ने एक बार फिर अभिनंदन को चर्चा में ला दिया है। हालांकि उनकी नई भूमिका को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। यदि रिपोर्ट्स की पुष्टि होती है तो यह भारतीय वायुसेना के एक चर्चित फाइटर पायलट के सैन्य सेवा से नागरिक विमानन क्षेत्र की ओर बढ़ने का अहम बदलाव होगा।

  • गत वर्ष सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार की 70 हजार शिकायतें… बैंक-रेलवे सबसे आगे: CVC

    गत वर्ष सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार की 70 हजार शिकायतें… बैंक-रेलवे सबसे आगे: CVC


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) (Central Vigilance Commission – CVC) की वार्षिक रिपोर्ट 2025 (Report 2025) के अनुसार, पिछले साल सरकारी विभागों के खिलाफ कुल 70,584 भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलीं। शिकायतों के मामले में बैंक और रेलवे (Banks and Railways) शीर्ष पर रहे। मुख्य सतर्कता अधिकारियों (सीवीओ) ने इनमें से 64,905 शिकायतों का निपटारा 31 दिसंबर 2025 तक कर दिया था।

    रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक 5,679 शिकायतें प्रक्रिया में थीं। इनमें से 2,002 मामले तीन महीने से अधिक समय से लंबित थे। नियमों के तहत, सीवीओ को तीन महीने के अंदर जांच पूरी करनी होती है। आयोग इनकी त्वरित निपटारे के लिए नियमित समीक्षा करता है। सर्वाधिक 9,933 शिकायतें बैंकों से मिलीं, जिनमें 9,520 निस्तारित कर दी गईं। वहीं रेलवे से जुड़ी 9,381 शिकायतें दर्ज हुईं, 8,754 को निस्तारित किया गया है।

    आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की 6,531 शिकायतें हैं। स्थानीय निकाय (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सरकार यानी जीएनसीटीडी को छोड़कर) में 4,834 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इसमें दिल्ली जल बोर्ड, एमसीडी, एनडीएमसी और डीएसआईआईडीसी शामिल हैं।

    इन विभागों में शिकायतें
    मानव संसाधन विकास में 2,030, श्रम मंत्रालय में 1,894 बीमा कंपनियां की 1,536 दूरसंचार की 1,469, रक्षा मंत्रालय में 1,410, उपभोक्ता मामले में 1,123, इस्पात मंत्रालय में 1,023 और डाक विभाग में 1,003 शिकायतें दर्ज की गईं हैं।

  • देश के कई हिस्सों में भारी बारिश से जनजीवन बेहाल…. अगले 4 दिन तक इन राज्यों में अलर्ट

    देश के कई हिस्सों में भारी बारिश से जनजीवन बेहाल…. अगले 4 दिन तक इन राज्यों में अलर्ट


    नई दिल्ली।
    मध्य भारत (Central India) के ऊपर बने निम्न दबाव के क्षेत्र और उत्तर भारत (North India) में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से पहाड़ से लेकर मैदान तक मूसलाधार बारिश (Torrential rain) का दौर शुरू हो गया है। नदियों में उफान से ज्यादातर इलाके बाढ़ की चपेट में हैं, भूस्खलन (Landslide) होने से 200 से अधिक सड़कें बंद हैं और कई इलाकों से संपर्क कट गया है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई है और 12 से अधिक राज्यों के लिए अलर्ट जारी किया है।

    उत्तराखंड में भारी बारिश के चलते आदि कैलाश और चीन सीमा को जोड़ने वाली तवाघाट-गुंजी सड़क दो दिन से बंद है इससे व्यास घाटी का संपर्क कटा है। दारमा और चौदास घाटी को जोड़ने वाली धारचूला-तवाघाट बॉर्डर रोड पर भी आठ घंटे यातायात ठप रहा। राज्य में भूस्खलन के चलते 150 से ज्यादा सड़कों पर यातायात बाधित रहा, जिसके चलते लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बुधवार को मूसलाधार बारिश से चार धाम यात्रा मार्ग पर भी दिन भर यातायात बाधित होता रहा। कई लिंक मार्गों के बंद होने से कई गांवों अलग-थलग पड़ गए हैं।


    अनंतनाग : गाड़ी पर गिरा पत्थर, एक पर्यटक की मौत

    जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में भारी बारिश से सहार खड्ड में बाढ़ आ गई और आसपास के दर्जनों गांवों का जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क कट गया। कठुआ में 101.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। अनंतनाग जिले में पहाड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में एक इनोवा गाड़ी के आने से ओडिशा के एक पर्यटक की मौत हो गई।


    हरियाणा में भारी बारिश

    पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से हरियाणा के अंबाला, रोहतक, फरीदाबाद, पलवल, कुरुक्षेत्र, कैथल व जींद के कुछ एरिया में बारिश हुई। वहीं, यमुनानगर में हथिनीकुंड बैराज के पास लापता हुए नाहन की पैराट्रूप यूनिट के दो कमांडो में से एक कमांडों का शव देर शाम बरामद कर लिया है। दूसरे का अभी तक सुराग नहीं लगा। सर्च टीम दो हेलिकॉप्टरों की मदद से लगातार तलाश में जुटी है। 


    बिहार में नदियां उफनाई

    बिहार और नेपाल में लगातार हो रही तेज बारिश के कारण राज्य की प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। प्रशासन ने पूरे राज्य में अलर्ट जारी किया है। रोहतास जिले के इंद्रपुरी में सोन बैराज के सभी 69 फाटक खोल दिए गए हैं, जिससे भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है।

  • सरकार की सख्ती के बाद नरम पड़े शक्कर के थोक भाव….फिर भी फुटकर रेट नहीं हुए कम

    सरकार की सख्ती के बाद नरम पड़े शक्कर के थोक भाव….फिर भी फुटकर रेट नहीं हुए कम


    नई दिल्ली।
    चीनी (Sugar) के थोक भाव (Wholesale Prices) सरकार की सख्ती के बाद काफी नरम हुए, लेकिन रिटेल प्राइस (Retail Prices) में अभी बहुत अधिक नरमी देखने को नही मिल रही है। दिल्ली से गुवाहाटी तक जहां मंडी में चीनी सस्ती हुई है, वहीं खुदरा बाजार (Retail Market) में पिछले दो दिन से भाव स्थिर हैं। चीनीमंडी के मुताबिक मुंबई में 22 अगस्त को 1 क्विंटल चीनी का भाव 6750 रुपये था और अब ये 5200 रुपये पर आ गए हैं। दिल्ली में ऑल टाइम हाई (All-time High) 6600 से 2 सितंबर को चीनी के दाम 5700 रुपये क्विंटल ही रह गए।

    इसी तरह कानपुर में थोक चीनी के लेटेस्ट भाव 5650 रुपये, रायपुर, रांची और कोलकाता में 5400 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया है। गुवाहटी में 5450 रुपये है तो हैदराबाद में 5300 और चेन्नई में 5900 रुपये क्विंटल। इन रेट्स में जीएसटी जुड़ा हुआ है।


    रिटेल प्राइस में बदलाव नहीं

    दो सितंबर को मुंबई, गुवाहटी में चीनी का रिटेल भाव 62 रुपये प्रति किलो था। रांची, दिल्ली, कानुपर, रायपुर, मुंबई, कोलकाता और हैदराबाद में 1 किलो चीनी का भाव 61 रुपये पर टिका था। जबकि, चेन्नई में यह 63 रुपये किलो थी। इन शहरों में एक सितंबर को भी खुदरा बाजार में चीनी के रेट यही थे।


    कितनी सस्ती हो चुकी है चीनी

    सरकार की सख्ती और उपायों के चलते दिल्ली में 12 दिन में चीनी 7 रुपये सस्ती हुई है। कानपुर में चीन के भाव इस अवधि में 9 रुपये, रायपुर में 8 रुपये, मुंबई में 6 रुपये गिरे हैं। रांची में चीनी 70 रुपये से 61 रुपये पर आ गई है। गुवाहटी में 71 से 62 और कोलकाता में 70 से 61 रुपये पर आ गई है चीनी। हैदराबाद और चेन्नई में भी चीनी 22 अगस्त को 70 रुपये पर पहुंच गई थी।


    सरकार ने क्या-क्या उठाए हैं कदम

    कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़े उपभोक्ताओं और डीलरों के लिए स्टॉक रखने की सीमा तय की। सरकार ने चीनी की जमाखोरी और स्टॉक छिपाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी तेज कर दी है।

    सरकार ने 21 अगस्त को 10 लाख मीट्रिक टन चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी थी। निर्यातक देशों से करीब 70-80 हजार टन चीनी वाली 3-4 खेपें पहले ही रवाना हो चुकी हैं। इसके अलावा भारतीय बंदरगाहों पर ही करीब 3-4 लाख टन चीनी रिफाइन होकर बाजार के लिए उपलब्ध होने की उम्मीद है।

    खासकर त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार की कोशिश बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने की है। अगर ये सभी कदम उम्मीद के मुताबिक काम करते हैं, तो आने वाले हफ्तों में चीनी के भाव में और नरमी देखने को मिल सकती है।

  • दुनिया में बढ़ी भारत की साख…. 35 साल बाद जापान ने रेटिंग को एक पायदान बढ़ाकर A किया

    दुनिया में बढ़ी भारत की साख…. 35 साल बाद जापान ने रेटिंग को एक पायदान बढ़ाकर A किया


    नई दिल्ली।
    जापान (Japan) की साख निर्धारण एजेंसी जेसीआर (Credit rating agency JCR) ने बुधवार को स्थिर परिदृश्य के साथ भारत (India) की रेटिंग एक पायदान बढ़ाकर ‘ए-’ कर दी। एजेंसी ने रेटिंग बढ़ाने के पीछे भारत की ‘मजबूत’ आर्थिक वृद्धि (‘Robust’ Economic Growth) और वित्तीय स्थिति में सुधार को प्रमुख कारण बताया।

    जेसीआर ने कहा कि 140 करोड़ से अधिक की आबादी और मौजूदा मूल्य पर 3.9 लाख करोड़ डॉलर की जीडीपी वाली भारतीय अर्थव्यवस्था के चालू वित्त वर्ष में छह प्रतिशत से अधिक की उच्च वृद्धि दर बनाए रखने की उम्मीद है। निजी खपत और निवेश के मजबूत समर्थन से भारतीय अर्थव्यवस्था हाल के वर्षों में ऊंची वृद्धि दर बनाए हुए है।

    15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह ने कहा 35 से ज्यादा वर्षों बाद भारत को फिर ‘ए’ रेटिंग मिली है। यह भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, संरचनात्मक सुधारों और केंद्र-राज्य साझेदारी की मजबूती की मान्यता है। इससे पहले भारत को ‘ए’ श्रेणी की रेटिंग मूडीज ने 1988 में ए2 दी थी। हालांकि, 1990-91 के भुगतान संतुलन संकट के दौरान यह रेटिंग चली गई थी।


    क्या मिलेगा फायदा

    आम आदमी को सीधे नहीं, बल्कि धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था के जरिए फायदा मिल सकता है। बेहतर रेटिंग से कंपनियों के लिए विदेशों से कर्ज सस्ता होगा। इससे भविष्य में होम लोन, कार लोन और कारोबार के कर्ज की ब्याज दरों पर सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। विदेशी निवेश भी आकर्षित होगा। इससे कारखाने, नए कारोबार बढ़ने पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।


    बेल्जियम से बढ़ेगा व्यापार

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को भारत की यात्रा पर आए बेल्जियम के प्रधानमंत्री बर्ट दे वेवर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान व्यापार और निवेश बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। ऊर्जा, रक्षा, जलवायु परिवर्तन, प्रौद्योगिकी आदि के क्षेत्रों में भी कई समझौते की उम्मीद है। यूरोपीय संघ के देश के रूप में बेल्जियम भारत में निवेश और व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है।

    बेल्जियम के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा दो दशक के अंतराल के बाद हो रही है। इससे दोनों देशों के बीच संबंधों के एक नए युग की शुरूआत होने की उम्मीद है। बेल्जियम उन यूरोपीय देशों में शामिल है, जिसने भारत के आजाद होने के तुरंत बाद राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 में बेल्जियम की यात्रा की थी।

    बेल्जियम के प्रधानमंत्री के साथ वहां के रक्षा और विदेश व्यापार मंत्री भी भारत आए हैं। संभावना है कि रक्षा उद्योगों के बीच सह उत्पादन को लेकर कुछ समझौते हो सकते हैं। वहीं, बीते वर्ष विभिन्न क्षेत्रों में 40 से अधिक समझौते हुए थे।


    18 अरब डॉलर का व्यापार

    भारत और बेल्जियम के बीच मौजूदा व्यापार 13 अरब डॉलर सालाना है। हाल में यूरोपीय संघ के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते के बाद इसमें बढ़ोतरी की उम्मीद है। इतना ही नहीं भारत में विदेशी निवेश का भी बेल्जियम एक महत्वपूर्ण स्रोत है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2000-2025 के दौरान बेल्जियम से 4.2 अरब डॉलर का निवेश भारत में आया। अब इसमें बढ़ोतरी की संभावना है।