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  • NEET-UG पेपर लीक केस में CBI का बड़ा खुलासा: NTA के पेपर-सेटर पर सवाल, आरोपी के फोन में मिले 111 मैचिंग प्रश्न

    NEET-UG पेपर लीक केस में CBI का बड़ा खुलासा: NTA के पेपर-सेटर पर सवाल, आरोपी के फोन में मिले 111 मैचिंग प्रश्न


    नई दिल्ली। NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसी ने विशेष अदालत को बताया कि पेपर लीक के तार कथित तौर पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के उस पैनल तक पहुंच रहे हैं, जो परीक्षा के प्रश्न तैयार करता है।

    CBI के अनुसार, लातूर के एक कोचिंग सेंटर संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर ने NTA के पेपर-सेटर पैनल में शामिल पी वी कुलकर्णी से केमिस्ट्री के प्रश्न हासिल करने के लिए 5 लाख रुपये दिए थे। इस खुलासे के बाद परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

    आरोपी के मोबाइल से मिले 36 फोटो, 111 सवाल परीक्षा से मैच
    CBI ने आरोपी मोटेगांवकर की जमानत याचिका का विरोध करते हुए अदालत में डिजिटल सबूत पेश किए। जांच के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन की जांच में गैलरी से केमिस्ट्री के हाथ से लिखे हुए प्रश्नों की 36 तस्वीरें मिलीं।

    इन तस्वीरों में कुल 132 सवाल लिखे हुए थे। CBI ने जब इन प्रश्नों का मिलान NTA के मास्टर क्वेश्चन बैंक से किया तो इनमें से 111 सवाल NEET-UG परीक्षा के प्रश्नपत्र से हूबहू मैच पाए गए। जांच एजेंसी के मुताबिक, मोबाइल फोन के मेटाडेटा विश्लेषण से पता चला कि ये तस्वीरें 3 मई को आयोजित परीक्षा से करीब 10 दिन पहले खींची गई थीं। CBI का कहना है कि ये हस्तलिखित नोट्स कथित तौर पर मोटेगांवकर की लिखावट में हैं।

    5 लाख रुपये की डील और रकम बरामद
    CBI ने अदालत को बताया कि कथित पेपर लीक की कड़ी मोटेगांवकर के बेटे के जरिए जुड़ी, जो आरोपी पेपर-सेटर पी वी कुलकर्णी की केमिस्ट्री ट्यूटोरियल क्लास में पढ़ता था। जांच के अनुसार, इसी दौरान गोपनीय प्रश्न उपलब्ध कराए गए।

    जांच एजेंसी ने बताया कि प्रश्न हासिल करने के लिए हुई 5 लाख रुपये की डील की रकम एक अन्य आरोपी मनोज भगवानराव शिरुरे की निशानदेही पर बरामद कर ली गई है। इस मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

    विवाद के बाद रद्द हुई थी परीक्षा
    NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद NTA ने 12 मई को 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा को रद्द कर दिया था। बाद में मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए 21 जून को दोबारा परीक्षा (Re-exam) आयोजित की गई थी। CBI की जांच में सामने आए इन नए तथ्यों के बाद परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है।

  • महाराष्ट्र: उल्हास नदी पर बन रहे बुलेट ट्रेन पुल के बहने की खबर वायरल, NHSRCL ने बताया क्या है सच्‍चाई

    महाराष्ट्र: उल्हास नदी पर बन रहे बुलेट ट्रेन पुल के बहने की खबर वायरल, NHSRCL ने बताया क्या है सच्‍चाई


    मुंबई। महाराष्ट्र के ठाणे जिले में भारी बारिश के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुई उस खबर का नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने खंडन किया है, जिसमें दावा किया गया था कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत उल्हास नदी पर बन रहा पुल बह गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कोई भी स्थायी पुल क्षतिग्रस्त या बहा नहीं है।

    NHSRCL ने बुधवार को जारी बयान में बताया कि भारी बारिश और उल्हास नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण केवल निर्माण कार्य के लिए बनाया गया अस्थायी एक्सेस मार्ग प्रभावित हुआ है। यह मार्ग मजदूरों, मशीनरी और निर्माण सामग्री के आवागमन के लिए तैयार किया गया था और इसका मुख्य पुल की संरचना से कोई संबंध नहीं था।

    निर्माण कार्य पर नहीं पड़ा कोई असर
    अधिकारियों के अनुसार, इस घटना का पुल के डिजाइन, सुरक्षा या निर्माण कार्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। परियोजना का निर्माण कार्य तय योजना के अनुसार जारी है और सभी गतिविधियां सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं।

    भारी बारिश के बाद फैली थी भ्रम की स्थिति
    हाल ही में ठाणे जिले में हुई तेज बारिश के कारण उल्हास नदी उफान पर आ गई थी, जिससे आसपास के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। इसी दौरान कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि निर्माणाधीन पुल बह गया है। हालांकि, NHSRCL ने स्पष्ट किया कि प्रभावित हिस्सा केवल अस्थायी निर्माण मार्ग था, स्थायी पुल नहीं।

    1.08 लाख करोड़ रुपये की है परियोजना
    मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है और इसे करीब 1.08 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित किया जा रहा है।

    NHSRCL ने लोगों से अपील की है कि परियोजना से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें और सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक या अपुष्ट खबरों से बचें। निगम के अनुसार, ठाणे सहित सभी निर्माण स्थलों पर परियोजना का कार्य पारदर्शिता के साथ लगातार जारी है।

  • एलपीजी डिलीवरी में बड़ा बदलाव, अब ऐप से 10 मिनट में मिलेगा गैस सिलेंडर, देश की पहली ऑन-डिमांड सेवा शुरू

    एलपीजी डिलीवरी में बड़ा बदलाव, अब ऐप से 10 मिनट में मिलेगा गैस सिलेंडर, देश की पहली ऑन-डिमांड सेवा शुरू

    नई दिल्ली । देश में रसोई गैस की डिलीवरी व्यवस्था अब एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। पहली बार क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑन-डिमांड एलपीजी सिलेंडर डिलीवरी सेवा शुरू की गई है। इस नई सुविधा के तहत ग्राहक मोबाइल ऐप के जरिए गैस सिलेंडर ऑर्डर कर सकेंगे और निर्धारित क्षेत्र में कम समय के भीतर उसकी डिलीवरी प्राप्त कर सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य घरेलू एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता को पहले से अधिक तेज, सुविधाजनक और आधुनिक बनाना है। फिलहाल इस सेवा की शुरुआत बेंगलुरु से की गई है और आने वाले समय में इसे देश के अन्य शहरों तक विस्तार देने की योजना बनाई गई है।

    नई सेवा के तहत क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के साथ साझेदारी की है। कंपनी का दावा है कि यह भारत की पहली ऐसी ऑन-डिमांड एलपीजी डिलीवरी सेवा है, जिसमें ग्राहक ऐप के माध्यम से सीधे गैस सिलेंडर मंगा सकते हैं। शुरुआती चरण में ग्राहकों को 10 किलोग्राम का एचपी नव्या कंपोजिट एलपीजी सिलेंडर और 5 किलोग्राम का मेटल सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा। कंपनी का कहना है कि भविष्य में सेवा का दायरा बढ़ने के साथ अधिक शहरों और उत्पादों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

    एचपीसीएल का एचपी नव्या कंपोजिट सिलेंडर पारंपरिक गैस सिलेंडरों की तुलना में कई मायनों में अलग है। यह वजन में हल्का होने के साथ जंग-रोधी भी है। इसकी पारदर्शी बाहरी संरचना के कारण उपभोक्ता आसानी से सिलेंडर में बची हुई गैस का स्तर देख सकते हैं। इससे गैस खत्म होने का अनुमान पहले से लगाया जा सकता है और समय पर नया सिलेंडर मंगाने में सुविधा मिलती है। इस सिलेंडर को विशेष रूप से छोटे परिवारों, छात्रों, अकेले रहने वाले लोगों और अपार्टमेंट में रहने वाले उपभोक्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

    इस सेवा की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि नया सिलेंडर लेने के लिए पहले से घरेलू एलपीजी कनेक्शन होना अनिवार्य नहीं होगा। पहली बार ऑर्डर करने वाले ग्राहकों को इसे नए कनेक्शन की तरह उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद जब सिलेंडर खाली हो जाएगा तो उपभोक्ता उसे वापस देकर रिफिल सिलेंडर मंगा सकेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य गैस सिलेंडर खरीदने और दोबारा भरवाने की पूरी प्रक्रिया को सरल और अधिक सुविधाजनक बनाना है, ताकि उपभोक्ताओं को आवश्यकता के समय लंबा इंतजार न करना पड़े।

    कंपनी के अनुसार सभी सिलेंडरों की डिलीवरी एचपीसीएल के अधिकृत वितरकों और प्रशिक्षित कर्मचारियों के माध्यम से की जाएगी। इससे सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित होगा और उपभोक्ताओं को प्रमाणित सेवा मिलेगी। साथ ही डिलीवरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने के कारण ऑर्डर ट्रैकिंग और समयबद्ध आपूर्ति जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। यह मॉडल पारंपरिक गैस वितरण व्यवस्था के साथ आधुनिक तकनीक का प्रभावी समन्वय प्रस्तुत करता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऑन-डिमांड एलपीजी डिलीवरी की यह पहल शहरी उपभोक्ताओं के लिए बड़ी सुविधा साबित हो सकती है। तेज डिलीवरी, हल्के कंपोजिट सिलेंडर और डिजिटल ऑर्डरिंग जैसी सुविधाएं गैस वितरण प्रणाली को अधिक आधुनिक और उपभोक्ता केंद्रित बनाएंगी। यदि यह मॉडल सफल रहता है तो आने वाले समय में देश के अन्य शहरों में भी इसी प्रकार की सेवाओं का विस्तार देखने को मिल सकता है, जिससे घरेलू एलपीजी वितरण व्यवस्था में व्यापक बदलाव आने की संभावना है।

  • सेमिकॉन 2.0 से लेकर वाराणसी एलिवेटेड कॉरिडोर तक, केंद्रीय कैबिनेट ने विकास की रफ्तार बढ़ाने वाले छह बड़े फैसलों को दी मंजूरी

    सेमिकॉन 2.0 से लेकर वाराणसी एलिवेटेड कॉरिडोर तक, केंद्रीय कैबिनेट ने विकास की रफ्तार बढ़ाने वाले छह बड़े फैसलों को दी मंजूरी

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश के औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे, रेल नेटवर्क, उर्वरक उत्पादन और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। इन निर्णयों का उद्देश्य घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाना, बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना, रोजगार के नए अवसर सृजित करना और भारत को रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी लाना है। कैबिनेट के फैसलों में वाराणसी के लिए नई आधारभूत परियोजनाएं, सेमीकंडक्टर मिशन का दूसरा चरण, मोबाइल निर्माण प्रोत्साहन योजना, रेलवे विस्तार और यूरिया उत्पादन क्षमता बढ़ाने जैसी प्रमुख घोषणाएं शामिल हैं।

    मंत्रिमंडल ने भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ को 1.27 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूरी दी है। इस योजना के तहत चिप डिजाइन, विनिर्माण, कच्चे माल की आपूर्ति और संपूर्ण वैल्यू चेन को विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य घरेलू स्तर पर सेमीकंडक्टर उत्पादन को बढ़ावा देना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और आने वाले वर्षों में देश को चिप निर्माण के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के माध्यम से बड़े निवेश और उच्च तकनीक आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई है।

    मोबाइल विनिर्माण को गति देने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के दूसरे चरण को भी मंजूरी दी गई है। इस योजना पर 62,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे अगले पांच वर्षों तक लागू किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य भारत में मोबाइल निर्माण क्षमता का विस्तार करना, निर्यात बढ़ाना, घरेलू ब्रांडों को प्रोत्साहित करना और बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराना है। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप विकसित करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    वाराणसी में बढ़ती आबादी और पर्यटन गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को भी स्वीकृति मिली है। राष्ट्रीय राजमार्गों और रिंग रोड को जोड़ने वाली इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर में यातायात दबाव कम करना, आवागमन को तेज बनाना और धार्मिक पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को आधुनिक स्वरूप देना है। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद शहर में ट्रैफिक प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।

    उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत प्राकृतिक गैस आधारित आठ से नौ नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे देश में अतिरिक्त यूरिया उत्पादन क्षमता विकसित होगी। सरकार का लक्ष्य आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना और कृषि क्षेत्र की आवश्यकताओं को घरेलू उत्पादन के माध्यम से पूरा करना है।

    रेलवे क्षेत्र में भी दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इनमें पारादीप-हरिदासपुर रेलखंड का दोहरीकरण तथा राजखरसावां-डांगोआपोसी रेलखंड पर चौथी रेल लाइन का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं से रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी, माल और यात्री ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम होगी तथा भीड़भाड़ कम होने के साथ समयबद्ध संचालन को भी मजबूती मिलेगी। सरकार का मानना है कि इन सभी फैसलों से औद्योगिक विकास, निवेश, रोजगार, परिवहन और तकनीकी आत्मनिर्भरता को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा तथा देश की आर्थिक प्रगति को नई गति प्राप्त होगी।

  • टीएमसी में बगावत गहराई, बागी गुट में शामिल होने के बाद मदन मित्रा बोले- ममता बनर्जी के प्रति सम्मान कायम, लेकिन पार्टी की दिशा पर उठाए गंभीर सवाल

    टीएमसी में बगावत गहराई, बागी गुट में शामिल होने के बाद मदन मित्रा बोले- ममता बनर्जी के प्रति सम्मान कायम, लेकिन पार्टी की दिशा पर उठाए गंभीर सवाल


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी उठापटक के बीच वरिष्ठ नेता और विधायक मदन मित्रा के बागी गुट में शामिल होने से राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। बागी खेमे में जाने के बाद मदन मित्रा ने पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ममता बनर्जी के प्रति उनका सम्मान पहले की तरह कायम है, लेकिन पार्टी की वर्तमान स्थिति और नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर उनके मन में गंभीर असहमति है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने संगठन से जुड़े सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, हालांकि विधायक के रूप में अपनी सदस्यता बरकरार रखेंगे।

    मदन मित्रा ने कहा कि ममता बनर्जी उनके लिए हमेशा सम्माननीय नेता रही हैं और उनका स्थान उनके दिल में है। इसके बावजूद उन्होंने दावा किया कि पार्टी की वर्तमान परिस्थितियों ने उन्हें अलग रास्ता चुनने के लिए मजबूर किया। उनका कहना था कि संगठन के भीतर कई नेताओं ने समय रहते पार्टी को संभालने और आंतरिक मतभेद दूर करने के सुझाव दिए थे, लेकिन उन पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।

    उन्होंने अपने बयान में पार्टी नेतृत्व के कुछ फैसलों पर भी सवाल उठाए। मदन मित्रा का आरोप था कि संगठन के भीतर संवाद की कमी और निर्णय प्रक्रिया में असंतुलन के कारण पार्टी लगातार कमजोर होती गई। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सभी नेताओं को साथ लेकर निर्णय लिए जाते तो मौजूदा स्थिति से बचा जा सकता था। उनके अनुसार, व्यक्तिगत नेतृत्व को प्राथमिकता दिए जाने से संगठनात्मक ढांचा प्रभावित हुआ।

    बागी गुट में शामिल होने के बाद मदन मित्रा ने कहा कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से जुड़े सभी संगठनात्मक दायित्वों को छोड़ दिया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह फिलहाल विधायक बने रहेंगे। उनका कहना था कि संगठनात्मक पदों से हटने का फैसला सोच-समझकर लिया गया है और इसका उद्देश्य अपनी राजनीतिक सोच के अनुरूप आगे की भूमिका तय करना है।

    उन्होंने ममता बनर्जी से अपील करते हुए कहा कि राजनीति को लंबी दौड़ की तरह देखा जाना चाहिए, जहां समय के साथ परिस्थितियां बदलती रहती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में राजनीतिक घटनाक्रम नई दिशा ले सकते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत सम्मान और राजनीतिक शिष्टाचार बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था की आवश्यकता है।

    पश्चिम बंगाल में हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं के अलग रुख अपनाने से राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेद आने वाले समय में राज्य की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि इन घटनाक्रमों पर पार्टी की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

    मदन मित्रा के इस फैसले और उनके बयानों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी नेतृत्व इन घटनाक्रमों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है और आगे संगठनात्मक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में नए घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।

  • एक्सपायर्ड नूडल्स बेचने पर विशाल मेगा मार्ट पर उपभोक्ता आयोग सख्त, 2.80 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश

    एक्सपायर्ड नूडल्स बेचने पर विशाल मेगा मार्ट पर उपभोक्ता आयोग सख्त, 2.80 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश


    नई दिल्ली ।
    आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में एक ग्राहक को एक्सपायर्ड खाद्य उत्पाद बेचना एक रिटेल स्टोर को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक्सपायर्ड नूडल्स बेचने के मामले में विशाल मेगा मार्ट के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए मुआवजे और जनहित राशि सहित कुल 2.80 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने इसे उपभोक्ता सेवा में गंभीर कमी और सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही माना है।

    मामला 20 मार्च 2025 का है, जब कुरनूल जिले के येमिगनूर निवासी पी. श्रवण कुमार ने विशाल मेगा मार्ट से दो पैकेट आटा नूडल्स खरीदे थे। घर पहुंचने के बाद उन्होंने उसी रात एक पैकेट तैयार कर उसका सेवन किया। कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तेज बुखार, उल्टी और पेट दर्द की शिकायत हुई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में उपचार कराना पड़ा। चिकित्सकीय जांच में इसे फूड पॉइजनिंग का मामला बताया गया।

    स्वास्थ्य खराब होने के बाद श्रवण कुमार ने घर में रखे दूसरे नूडल्स पैकेट की जांच की। इस दौरान उन्हें पता चला कि उस उत्पाद की एक्सपायरी तिथि 18 मार्च 2025 थी, जबकि खरीदारी 20 मार्च को की गई थी। यानी संबंधित उत्पाद की वैध अवधि समाप्त होने के दो दिन बाद भी उसे बिक्री के लिए रखा गया था। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले को कानूनी रूप से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

    पीड़ित ने दिसंबर 2025 में स्टोर प्रबंधन को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन निर्धारित समय में कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने मामले की सुनवाई के लिए स्टोर को नोटिस जारी किया, लेकिन सुनवाई के दौरान स्टोर का कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। शिकायतकर्ता ने खरीद का बिल, मेडिकल रिपोर्ट और एक्सपायर्ड उत्पाद का पैकेट आयोग के समक्ष साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया, जिन्हें आयोग ने महत्वपूर्ण प्रमाण माना।

    आयोग ने अपने फैसले में कहा कि एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री की बिक्री उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है और यह सेवा में स्पष्ट कमी की श्रेणी में आता है। आयोग का मानना था कि ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि इससे आम लोगों के जीवन और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। आयोग ने यह भी कहा कि व्यवसायिक संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे बिक्री से पहले प्रत्येक खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता और वैधता सुनिश्चित करें।

    अपने आदेश में आयोग ने विशाल मेगा मार्ट को शिकायतकर्ता को मानसिक पीड़ा के लिए 25 हजार रुपये तथा मुकदमे के खर्च के रूप में 5 हजार रुपये देने का निर्देश दिया। इसके अलावा जनहित को ध्यान में रखते हुए 2.50 लाख रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराने का भी आदेश दिया गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह पूरी राशि 45 दिनों के भीतर जमा करनी होगी। निर्धारित समय सीमा का पालन नहीं होने पर संबंधित राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

    यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही यह सभी खुदरा दुकानों और सुपरमार्केट के लिए स्पष्ट संदेश है कि खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और एक्सपायरी तिथि की अनदेखी गंभीर कानूनी परिणाम ला सकती है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि उपभोक्ताओं को किसी भी खाद्य उत्पाद की खरीदारी से पहले उसकी निर्माण और एक्सपायरी तिथि अवश्य जांचनी चाहिए, ताकि इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सके।

  • रेलवे के हरित भविष्य की ओर ऐतिहासिक कदम, 17 जुलाई को हरियाणा से दौड़ेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, पीएम मोदी ने साझा की तस्वीरें

    रेलवे के हरित भविष्य की ओर ऐतिहासिक कदम, 17 जुलाई को हरियाणा से दौड़ेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, पीएम मोदी ने साझा की तस्वीरें


    नई दिल्ली ।
    भारतीय रेलवे हरित परिवहन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। 17 जुलाई को देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन से संचालित ट्रेन हरियाणा के जींद से अपनी पहली यात्रा शुरू करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इसके साथ ही भारतीय रेलवे स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन प्रणाली की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाएगा। यह ट्रेन शुरुआती चरण में जींद और सोनीपत के बीच संचालित होगी और इसे भारतीय रेलवे की भविष्य की पर्यावरण-अनुकूल परिवहन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना की तस्वीरें साझा करते हुए इसे भारतीय रेलवे के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा से अपनी यात्रा शुरू करने जा रही है। इस घोषणा के बाद देशभर में इस परियोजना को लेकर उत्साह बढ़ गया है। रेलवे का मानना है कि हाइड्रोजन आधारित तकनीक भविष्य में परिवहन क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    यह ट्रेन भारतीय रेलवे की ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ पहल के तहत विकसित की गई है। इस योजना का उद्देश्य उन रेल मार्गों पर डीजल इंजनों का विकल्प तैयार करना है, जहां विद्युतीकरण करना कठिन या अत्यधिक खर्चीला है। रेलवे आने वाले समय में देशभर में 35 और हाइड्रोजन ट्रेनों को शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इन ट्रेनों के माध्यम से विरासत और ग्रामीण रेल मार्गों पर स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ परिचालन लागत में भी दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

    नई हाइड्रोजन ट्रेन को 10 कोच वाले डीईएमयू सेट के रूप में तैयार किया गया है। इसमें 682 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है, जबकि कुल लगभग 2,600 यात्रियों को ले जाने की क्षमता है। नियमित परिचालन के दौरान इसकी अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। परीक्षण के दौरान ट्रेन ने इससे अधिक गति हासिल की थी, लेकिन सुरक्षा और परिचालन मानकों को ध्यान में रखते हुए शुरुआती चरण में नियंत्रित गति पर संचालन किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना फिलहाल पायलट आधार पर शुरू की जा रही है, जिसके अनुभव के आधार पर भविष्य में इसका विस्तार किया जाएगा।

    हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्वच्छ ऊर्जा तकनीक है। इसमें हाइड्रोजन गैस और वातावरण से प्राप्त ऑक्सीजन को फ्यूल सेल में रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से मिलाया जाता है, जिससे बिजली उत्पन्न होती है। यही बिजली ट्रेन के इलेक्ट्रिक मोटरों को संचालित करती है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार का धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता। इसके स्थान पर केवल जलवाष्प और ऊष्मा निकलती है, जिससे यह तकनीक पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में कहीं अधिक पर्यावरण-अनुकूल मानी जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेनें भारतीय रेलवे को कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण बढ़त देंगी। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां ओवरहेड बिजली लाइनें बिछाना व्यावहारिक नहीं है, वहां यह तकनीक प्रभावी विकल्प साबित हो सकती है। कम समय में ईंधन भरने की सुविधा, स्वच्छ संचालन और बेहतर ऊर्जा दक्षता जैसी विशेषताएं इसे भविष्य के रेल परिवहन का महत्वपूर्ण माध्यम बना सकती हैं। भारतीय रेलवे की यह पहल देश में हरित ऊर्जा आधारित परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ टिकाऊ विकास की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

  • कम सीटों के बावजूद संसद में सरकार को घेरने की तैयारी, INDIA गठबंधन ने बनाई आक्रामक रणनीति

    कम सीटों के बावजूद संसद में सरकार को घेरने की तैयारी, INDIA गठबंधन ने बनाई आक्रामक रणनीति


    नई दिल्ली। संसद में विपक्ष की संख्या भले ही पहले के मुकाबले कम हो गई हो, लेकिन मॉनसून सत्र में INDIA गठबंधन सरकार को घेरने के लिए ज्यादा आक्रामक रणनीति के साथ उतरने की तैयारी कर रहा है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) में हुई टूट के साथ ही डीएमके की नाराजगी के बीच विपक्षी गठबंधन ने अपनी आगे की रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है।

    कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों से विपक्षी एकजुटता पर असर पड़ा है, लेकिन गठबंधन अपनी उपलब्ध ताकत के साथ सरकार की नीतियों का विरोध करेगा। विपक्ष का फोकस आम जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने और सरकार से जवाब मांगने पर रहेगा।

    खरगे की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक
    मॉनसून सत्र की रणनीति तय करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। इसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार, बैठक में संसद सत्र की तैयारियों, विपक्षी दलों के बीच तालमेल और संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।

    बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे को उठाते हुए इसे भ्रष्टाचार का बड़ा मामला बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि लोगों की आस्था से जुड़ा विषय भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में संघ और विश्व हिंदू परिषद की भूमिका है। विपक्ष इस मुद्दे को संसद में प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रहा है।

    डीएमके की नाराजगी के बावजूद एकजुटता की उम्मीद
    कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, INDIA गठबंधन के कई सहयोगी दल लगातार डीएमके के संपर्क में हैं। पार्टी को उम्मीद है कि तमिलनाडु की राजनीतिक नाराजगी के बावजूद डीएमके गठबंधन के सामूहिक फैसलों के खिलाफ नहीं जाएगी। विपक्षी नेताओं का मानना है कि संसद सत्र के दौरान सरकार को घेरने के लिए सभी दलों के बीच समन्वय बनाए रखना जरूरी होगा।

    एक समय में एक मुद्दे पर रहेगा विपक्ष का फोकस
    मॉनसून सत्र में विपक्ष सभी मुद्दों को एक साथ उठाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से सरकार को घेरने की रणनीति अपना सकता है। विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि संसद में कई महत्वपूर्ण विषय उठाए जाने हैं, लेकिन उन्हें क्रमवार तरीके से रखा जाएगा। इससे पूरे सत्र के दौरान सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखने में मदद मिलेगी।

    इसके अलावा विपक्ष कई मुद्दों पर सदन में विस्तृत चर्चा की मांग भी करेगा। रणनीति यह है कि जनता से जुड़े विषयों को प्रमुखता देकर सरकार से जवाब मांगा जाए और संसद में विपक्ष की भूमिका को प्रभावी बनाया जाए।

  • UP: सावन में कांवड़ियों का होगा खास स्वागत, रूट पर नॉनवेज-अंडे की बिक्री पर रोक, प्रसाद में मिलेंगे पौधे

    UP: सावन में कांवड़ियों का होगा खास स्वागत, रूट पर नॉनवेज-अंडे की बिक्री पर रोक, प्रसाद में मिलेंगे पौधे


    बरेली। सावन महीने में होने वाली कांवड़ यात्रा को लेकर बरेली प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार कांवड़ियों के स्वागत के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। प्रमुख शिव मंदिरों और कांवड़ यात्रा मार्गों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की जाएगी, वहीं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में पौधे भी बांटे जाएंगे।

    प्रशासन की ओर से पिछले वर्ष भी कांवड़ियों और नाथ नगरी के प्रमुख शिव मंदिरों पर हेलीकॉप्टर से फूलों की बारिश की गई थी। इस बार भी अलखनाथ मंदिर, त्रिवटीनाथ मंदिर, धोपेश्वरनाथ मंदिर, तपेश्वरनाथ मंदिर और वनखंडीनाथ मंदिर समेत अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पुष्पवर्षा की योजना बनाई गई है। इसके अलावा कांवड़ यात्रा के प्रमुख मार्गों, खासतौर पर रामगंगा पुल पर भी आसमान से फूल बरसाए जाएंगे।

    कांवड़ मार्गों पर मांसाहार और अंडे की बिक्री पर रोक
    कांवड़ यात्रा को देखते हुए प्रशासन ने यात्रा मार्गों पर खान-पान व्यवस्था को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की जिला स्तरीय समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि कांवड़ मार्गों पर किसी भी तरह के मांसाहारी उत्पाद और अंडे की बिक्री नहीं की जाए। साथ ही सभी खाद्य प्रतिष्ठानों पर ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ एप के स्टीकर लगाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कांवड़ियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके।

    बैठक में लोगों को सुरक्षित खाद्य पदार्थ और जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी चर्चा हुई। बिना औषधि लाइसेंस चल रहे प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

    खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में खाद्य कारोबारियों के लाइसेंस और पंजीकरण में एक सप्ताह के भीतर 20 प्रतिशत वृद्धि करने का लक्ष्य दिया गया है। इसके अलावा दुकानों और प्रतिष्ठानों की अचानक जांच कर साफ-सफाई और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की निगरानी करने को कहा गया है।

    बरेली-बदायूं रोड पर जल्द सुधार के निर्देश
    सावन से पहले कांवड़ियों की सुविधा को देखते हुए बरेली-बदायूं राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। इस मार्ग पर चौड़ीकरण का काम चल रहा है, जिसके कारण कई जगह डायवर्जन और निर्माण सामग्री फैली हुई है।

    कमिश्नर ने हाल ही में सड़क का निरीक्षण कर एनएचएआई अधिकारियों को निर्देश दिए कि सावन शुरू होने से पहले सड़क को इस स्थिति में लाया जाए कि कांवड़ियों को परेशानी का सामना न करना पड़े। जहां यातायात अधिक प्रभावित हो रहा है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा गया है। प्रशासन के अनुसार, सावन शुरू होने से दो दिन पहले से डायवर्जन लागू कर दिया जाएगा। लोगों से अपील की गई है कि घर से निकलने से पहले रूट डायवर्जन की जानकारी जरूर ले लें।

    पुष्पवर्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
    कमिश्नर भूपेंद्र एस चौधरी ने बताया कि सावन के पवित्र महीने में कांवड़ियों का सम्मान विशेष तरीके से किया जाएगा। पुष्पवर्षा के साथ उन्हें प्रसाद के रूप में पौधे भी वितरित किए जाएंगे।

    इस पहल का उद्देश्य कांवड़ियों के स्वागत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के प्रति लोगों को जागरूक करना है। वन विभाग मंदिरों से संपर्क कर पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा और पौधरोपण से जुड़ी स्वयंसेवी संस्थाओं की भी मदद ली जाएगी।

  • सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट रूम में हंगामा और मुख्य न्यायाधीश से अभद्रता करने वाले लॉ के दो छात्र गिरफ्तार, दिल्ली पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी

    सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट रूम में हंगामा और मुख्य न्यायाधीश से अभद्रता करने वाले लॉ के दो छात्र गिरफ्तार, दिल्ली पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी

    नई दिल्ली । देश की सर्वोच्च अदालत के भीतर एक बेहद चौंकाने वाली घटना में न्यायिक कार्यवाही को बाधित करने, फाइलों को हवा में उछालने और देश के मुख्य न्यायाधीश के प्रति अत्यंत अभद्र व असंसदीय भाषा का प्रयोग करने वाले कानून के दो छात्रों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सुरक्षाकर्मियों के साथ हाथापाई और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में इन छात्रों के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी के तिलक मार्ग थाने में एक आपराधिक प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की वैधानिक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

    सुरक्षा अधिकारियों द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों की पहचान लखनऊ विश्वविद्यालय में विधि संकाय के छात्रों के रूप में की गई है। इनमें से एक आरोपी का नाम प्रबल प्रताप सिंह है, जो कानून के तीसरे वर्ष का छात्र है और मूल रूप से उत्तर प्रदेश के इटावा का निवासी है। वहीं, दूसरे आरोपी की पहचान चंद्र भान के रूप में हुई है, जो इसी विश्वविद्यालय में विधि द्वितीय वर्ष का छात्र है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि यह पूरी कानूनी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट परिसर की सुरक्षा में तैनात सुरक्षा स्टाफ के लिखित बयान और शिकायत के आधार पर अमल में लाई गई है।

    यह अभूतपूर्व घटना सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 13 के भीतर घटित हुई, जब अदालत में एक विशेष अनुमति याचिका पर नियमित सुनवाई चल रही थी। अदालत के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस याचिका का शीर्षक ‘प्रबल प्रताप व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार’ था। इस संवेदनशील मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी प्रबल प्रताप सिंह किसी अधिवक्ता के माध्यम से पेश होने के बजाय खुद ही याचिकाकर्ता-इन-पर्सन के रूप में न्यायाधीशों के समक्ष उपस्थित होकर अपनी दलीलें रख रहा था।

    दर्ज की गई प्राथमिकी के विवरण के मुताबिक, न्यायिक कार्यवाही के दौरान दलीलें खारिज होने या किसी अन्य कारण से आरोपी प्रबल प्रताप सिंह अचानक उग्र हो गया और उसने पूरी तरह से सोची-समझी रणनीति के तहत अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाना शुरू कर दिया। उसने जजों के सामने बेहद अमर्यादित, अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। अपना आपा खोते हुए उसने कोर्ट रूम के भीतर मौजूद महत्वपूर्ण अदालती कागजात और कानूनी फाइलों को हवा में उछाल दिया, जिससे वे पूरे कोर्ट रूम में बिखर गईं। इस हिंसक आचरण से अदालत कक्ष के भीतर पूरी तरह से अव्यवस्था और अशांति का माहौल पैदा हो गया।

    घटना के वक्त कोर्ट रूम में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और सुरक्षाकर्मियों के अनुसार, आरोपी छात्र यहीं नहीं रुका, बल्कि उसने देश के मुख्य न्यायाधीश के प्रति भी सीधे तौर पर अमर्यादित शब्दों और गालियों का प्रयोग किया। जब कोर्ट रूम की सुरक्षा में तैनात ऑन-ड्यूटी सुरक्षाकर्मियों और प्रशासनिक स्टाफ ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उसे पकड़ने तथा शांत करने का प्रयास किया, तो दोनों आरोपी छात्र और अधिक हिंसक हो गए। उन्होंने सुरक्षा स्टाफ के साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू कर दी, जिससे ऑन-ड्यूटी कर्मचारियों को अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करने में गंभीर बाधा का सामना करना पड़ा।

    न्यायालय परिसर के भीतर इस प्रकार के अप्रत्याशित हंगामे को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल को तुरंत मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों उपद्रवी छात्रों को काबू में किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट प्रशासन की लिखित शिकायत पर तिलक मार्ग थाना पुलिस ने विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर दोनों को विधिवत गिरफ्तार कर लिया। इस घटना ने देश की सबसे बड़ी अदालत की सुरक्षा व्यवस्था और कोर्ट रूम के भीतर वकीलों व याचिकाकर्ताओं के आचरण को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, जिस पर आने वाले दिनों में और सख्त रुख अपनाए जाने की संभावना है।