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  • सेब की तुलना सेब से करना नहीं जानते और देश की जनता को कर रहे गुमराह : पीयूष गोयल

    सेब की तुलना सेब से करना नहीं जानते और देश की जनता को कर रहे गुमराह : पीयूष गोयल


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने बुधवार को 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि (7.8 Percent GDP Growth) पर टिप्पणी को लेकर विपक्षी दलों और पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग (Subhash Garg) की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि आलोचक ‘सेब की तुलना सेब से करना’ भी नहीं जानते और देश की जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

    गौरतलब है कि संशोधित जीडीपी श्रृंखला के तहत, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर वास्तविक आधार पर 7.8 प्रतिशत रही। गोयल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी उथल-पुथल के बीच भारत ‘रेगिस्तान में नखलिस्तान’ की तरह है और देश दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से बढ़ता रहा है।

    क्या बोले गोयल?
    पीयूष गोयल ने कहा, “नकारात्मक बातें करने वाले लोग कुछ भी कहें, लेकिन 7.8 प्रतिशत की वृद्धि वास्तविकता है। जब मैं टेलीविजन पर कुछ विपक्षी नेताओं को देखता हूं,… किसी पूर्व वित्त सचिव या पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर को भी शामिल कर लें, जो दोनों ही उचित कारणों से भारत या सरकार में अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके।” गोयल ने कहा, वे सेब की तुलना सेब से करना भी नहीं जानते। वे पुरानी श्रृंखला की वृद्धि दर की तुलना नई श्रृंखला से करके भारत की जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि नई श्रृंखला में आधार वर्ष ही बदल गया है।

    उन्होंने आगे कहा कि आलोचक वृद्धि के आंकड़ों में कमियां निकालने की कोशिश कर रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि ठीक है, 7.8 प्रतिशत की वृद्धि है, लेकिन रोजगार कहां हैं? हालांकि उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कपड़ा क्षेत्र में श्रमिकों की मांग मजबूत है। उन्होंने तिरुपुर के उद्योग से अधिक श्रमिकों की मांग का उल्लेख करते हुए कहा, “तिरुपुर में एक लाख लोग भेज दीजिए, हम उन्हें काम देंगे।”


    जानिए कुछ अहम सवालों के जवाब-

    – सरकार ने जीडीपी आंकड़े का बचाव क्यों किया?
    2.6% वृद्धि का दावा पुरानी और नई जीडीपी श्रृंखला के आंकड़ों को मिलाकर किया गया है, जो सही तुलना नहीं है।

    – पुरानी-नई श्रृंखला में क्या अंतर?
    पुरानी जीडीपी श्रृंखला में 2011-12 को आधार वर्ष बनाया गया था, जबकि फरवरी 2026 से नई श्रृंखला में 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है।

    – पिछले साल की जीडीपी का आंकड़ा क्यों बदला गया?
    सरकार के अनुसार आंकड़ों में बदलाव सामान्य संशोधन प्रक्रिया का हिस्सा है। नई आधार श्रृंखला, बेहतर आंकड़ा स्रोत, नई आईआईपी और पीपीआई श्रृंखला और अतिरिक्त जानकारी मिलने के बाद आंकड़ों को संशोधित किया गया।

    – फिर 7.8 प्रतिशत वास्तविक वृद्धि कैसे निकली?
    आर्थिक वृद्धि की तुलना स्थिर कीमतों पर की जाती है। इससे कीमतों में बदलाव का असर हट जाता है और वास्तविक उत्पादन वृद्धि का पता चलता है। अप्रैल-जून तिमाही में इस्पात, सीमेंट और वाहनों समेत कई क्षेत्रों के उत्पादन में मजबूत वृद्धि हुई।

    – विनिर्माण क्षेत्र में नकारात्मक डिफ्लेटर क्यों आया?
    विनिर्माण क्षेत्र का वास्तविक जीवीए 9.2% बढ़ा, जबकि मौजूदा कीमतों पर वृद्धि 7.7% रही। डबल-डिफ्लेशन पद्धति में उत्पादन और कच्चे माल की कीमतों को अलग-अलग समायोजित किया जाता है। कच्चे माल की कीमतें ज्यादा तेजी से बढ़ती हैं तो नकारात्मक डिफ्लेटर आ सकता है।

    – जीडीपी डिफ्लेटर और महंगाई दर अलग क्यों है?
    जीडीपी डिफ्लेटर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव को दर्शाता है। खुदरा महंगाई घरेलू खपत की वस्तुओं और सेवाओं के एक निर्धारित समूह को मापता है, जबकि थोक महंगाई मुख्य रूप से वस्तुओं की थोक कीमतों पर आधारित है।


    सरकार ने 2.6 प्रतिशत वृद्धि के दावे को नकारा

    सरकार ने आर्थिक वृद्धि दर 2.6 प्रतिशत रहने के दावे को खारिज करते हुए कहा कि वृद्धि दर का आंकड़ा अर्थव्यवस्था के ठोस उत्पादन आंकड़ों पर आधारित है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने यह स्पष्टीकरण पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग की टिप्पणी के बाद दिया है। पूर्व वित्त सचिव का दावा है कि अगर पिछले साल की जून तिमाही की जीडीपी को करीब 86 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 80 लाख करोड़ रुपये नहीं किया जाता तो वृद्धि करीब 2.6 प्रतिशत ही रहती।


    नई श्रृंखला ज्यादा मजबूत और विश्वसनीय

    15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एन. के. सिंह ने इस मुद्दे पर कहा कि नई जीडीपी श्रृंखला ज्यादा विश्वसनीय है। यह वैश्विक मानकों के अनुरूप है और इसमें उत्पादक मूल्य सूचकांक की नई श्रृंखला का इस्तेमाल किया गया है। जीडीपी अनुमान तैयार करने में 300 से अधिक अलग-अलग मूल्य डिफ्लेटर का इस्तेमाल किया जाता है। अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों और उत्पादों की कीमतों में बदलाव को ज्यादा बारीकी से शामिल किया जा सकता है और सटीकता बढ़ती है।

  • ऑपरेशन अयोध्या’: राम मंदिर के मैनेजमेंट की कमान एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को ही क्यों?

    ऑपरेशन अयोध्या’: राम मंदिर के मैनेजमेंट की कमान एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को ही क्यों?


    नई दिल्ली। अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर का दायरा और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या देखते हुए अब इसके प्रबंधन में सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था के बजाय सख्त अनुशासन और स्पष्ट जवाबदेही की जरूरत महसूस की जा रही है। इसी सोच के तहत श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को अपना पहला सीईओ नियुक्त किया है। इसे मंदिर प्रबंधन में नए दौर की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। हाल के दिनों में चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उठे सवालों के बीच मंदिर की व्यवस्था और श्रद्धालुओं के भरोसे को मजबूत करना उनके सामने बड़ी चुनौती होगी।

    उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में मंदिर परिसर में स्पष्ट कमांड स्ट्रक्चर, पारदर्शी डिजिटल ऑडिट और कड़े अनुशासन वाली व्यवस्था विकसित की जाएगी। सैन्य पृष्ठभूमि वाले अधिकारी की नियुक्ति से यह भी उम्मीद की जा रही है कि मंदिर प्रबंधन रोजमर्रा की राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप से अलग पेशेवर तरीके से काम कर सकेगा।

    भव्य मंदिर के साथ बढ़ी प्रबंधन की चुनौती
    अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर के निर्माण के साथ ही यहां देश-विदेश से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ने लगा। लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही, रोजाना आने वाला भारी चढ़ावा और मंदिर पर देश-दुनिया की निगाहों ने इसके प्रबंधन को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया। ऐसे में चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद मंदिर व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठे।

    इन घटनाओं ने ट्रस्ट के सामने यह चुनौती रखी कि मंदिर जैसे बड़े धार्मिक केंद्र का संचालन ऐसी व्यवस्था से हो, जिसमें अनियमितता की गुंजाइश न्यूनतम हो, हर स्तर पर जवाबदेही तय हो और वित्तीय लेन-देन में पूरी पारदर्शिता बनी रहे।

    एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र ही पहली पसंद क्यों?
    ट्रस्ट जब अपने पहले सीईओ की तलाश कर रहा था, तब उम्मीदवार के लिए कुछ स्पष्ट मापदंड तय किए गए थे। उम्मीदवार के पास 20 साल से अधिक का प्रशासनिक अनुभव, सनातनी आचरण और रामभक्त होने के साथ उम्र 50 से 70 वर्ष के बीच होना अपेक्षित था। वरिष्ठ नौकरशाहों और प्रशासनिक अधिकारियों के पास इनमें से कई योग्यताएं थीं, लेकिन पेशेवर अनुशासन, ईमानदारी और कठोर निर्णय क्षमता के लिहाज से सैन्य पृष्ठभूमि को प्राथमिकता मिली।

    सेना की कार्यशैली में स्पष्ट जिम्मेदारी, नियमों का पालन और निर्धारित लक्ष्य के लिए जवाबदेही पर विशेष जोर रहता है। यही गुण मंदिर जैसे बड़े संस्थान के संचालन में भी उपयोगी माने जा रहे हैं।

    एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के पक्ष में उनका अयोध्या क्षेत्र से जुड़ाव भी महत्वपूर्ण माना गया। वे अयोध्या के पास स्थित देवरिया जिले के मूल निवासी हैं। इससे स्थानीय भाषा, संस्कृति और सरयू पार के क्षेत्र से उनका पुराना संबंध रहा है। वे ब्राह्मण परिवार से आते हैं और धार्मिक परंपराओं, कर्मकांडों तथा सनातन मर्यादाओं की समझ को भी उनके चयन के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना गया।

    इसके अलावा पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेनाओं के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने वायुसेना के वेस्टर्न कमांड का नेतृत्व किया था। इस अभियान में उनके लड़ाकू विमानों ने बहावलपुर और मुरीदके जैसे आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। साथ ही पाकिस्तान के 300 किलोमीटर भीतर S-400 एयर डिफेंस सिस्टम से पाकिस्तानी विमान को मार गिराने का रिकॉर्ड भी उनके कार्यकाल से जोड़ा गया।

    इन सभी पहलुओं को देखते हुए ट्रस्ट के सामने मौजूद विकल्पों में एयर मार्शल मिश्र का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरा। उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    सैन्य प्रबंधन से कैसे बदल सकती है मंदिर की व्यवस्था?
    सैन्य प्रबंधन की खासियत स्पष्ट जिम्मेदारी, तेज निर्णय और कड़े अनुशासन में मानी जाती है। ऐसे में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के नेतृत्व में मंदिर की मौजूदा व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

    स्पष्ट कमांड स्ट्रक्चर और जवाबदेही
    सैन्य व्यवस्था में हर अधिकारी और कर्मचारी की भूमिका पहले से तय होती है और किसी भी स्तर पर हुई चूक की जिम्मेदारी निर्धारित की जा सकती है। मंदिर प्रबंधन में भी सुरक्षा, साफ-सफाई, पुजारी वर्ग, आईटी सेल और अकाउंट्स जैसे विभागों की जिम्मेदारियां स्पष्ट की जा सकती हैं। इससे किसी चूक की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना आसान होगा और विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने से बचेंगे। प्रत्येक प्रमुख विभाग की सीधे सीईओ को रिपोर्टिंग व्यवस्था भी बनाई जा सकती है।

    चढ़ावे का डिजिटल रिकॉर्ड और ऑडिट
    चढ़ावा चोरी के मामले के बाद वित्तीय पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल है। सैन्य संस्थानों में इस्तेमाल होने वाले स्टॉक और फंड मैनेजमेंट मॉडल की तर्ज पर मंदिर में भी व्यवस्था मजबूत की जा सकती है।

    दानपेटियों को खोलने से लेकर चढ़ावे की गिनती और उसे जमा करने तक की पूरी प्रक्रिया हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों और बायोमेट्रिक निगरानी के दायरे में लाने का सुझाव पहले ही दिया जा चुका है। प्रत्येक दान का रिकॉर्ड डिजिटल सिस्टम में दर्ज होने और नियमित रीयल-टाइम वित्तीय ऑडिट की व्यवस्था से गड़बड़ी की आशंका कम की जा सकती है।

    जीरो टॉलरेंस और सख्त आचार संहिता
    सैन्य अनुशासन में सिफारिश और लापरवाही के लिए सीमित गुंजाइश होती है। इसी तर्ज पर मंदिर में काम करने वाले कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों के लिए सख्त आचार संहिता लागू की जा सकती है। किसी भी अनैतिक गतिविधि, वित्तीय गड़बड़ी या श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार की स्थिति में त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था मंदिर प्रशासन को अधिक प्रभावी बना सकती है।

    चुनौती सीमा की नहीं, व्यवस्था को दुरुस्त करने की
    एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के सामने ‘ऑपरेशन अयोध्या’ के तहत सबसे बड़ी चुनौती मंदिर की विशाल व्यवस्था को अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ संचालित करने की होगी। उनका सैन्य अनुभव सुरक्षा और प्रबंधन के साथ-साथ संकट की स्थिति में त्वरित निर्णय लेने में भी मददगार हो सकता है।

    देवरिया से जुड़े इस पूर्व एयर मार्शल के लिए अयोध्या में रामलला के मंदिर की प्रशासनिक कमान संभालना महज एक नई जिम्मेदारी नहीं, बल्कि बड़ी संस्थागत चुनौती है। यहां मुकाबला किसी सीमा पर नहीं, बल्कि व्यवस्था के भीतर मौजूद खामियों, लापरवाही और अनियमितताओं को दूर करने का है।

  • अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी पर लगाया TMC दफ्तर में घुसकर तोड़फोड़ का आरोप, बोले- कार्यकर्ताओं को पीटा, फोन छीने

    अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी पर लगाया TMC दफ्तर में घुसकर तोड़फोड़ का आरोप, बोले- कार्यकर्ताओं को पीटा, फोन छीने


    कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित पार्टी कार्यालय में तड़के हमला और तोड़फोड़ किए जाने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि सुबह करीब 4:30 बजे हथियारों से लैस हमलावर कार्यालय में घुसे और वहां मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की। उन्होंने घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सोशल मीडिया पर साझा किया है।

    अभिषेक बनर्जी ने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि कैमक स्ट्रीट पर सुबह हुई घटना कानून के शासन पर शर्मनाक हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के गुंडों ने हथियारों के साथ पार्टी कार्यालय पर धावा बोला। इस दौरान कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया, उनके फोन छीन लिए गए, फर्नीचर तोड़ा गया, परिसर में तोड़फोड़ की गई और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नुकसान पहुंचाया गया।

    कोलकाता पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल
    अभिषेक बनर्जी ने घटना को लेकर कोलकाता पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं और वकीलों की ओर से लगातार फोन कॉल और ईमेल किए जाने के बावजूद करीब दो घंटे तक पुलिस की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। बनर्जी ने इसे बेहद चौंकाने वाला और पूरी तरह अस्वीकार्य बताया।

    उन्होंने सवाल किया कि अगर सुबह 4:30 बजे हथियारों से लैस लोग किसी राजनीतिक दल के कार्यालय में घुसकर मारपीट और तोड़फोड़ कर सकते हैं और उस दौरान पुलिस मौजूद नहीं होती, तो पश्चिम बंगाल में कानून के शासन का क्या अर्थ रह जाता है।

    ‘हथियारबंद गुंडों का समूह कानून से ऊपर नहीं’
    टीएमसी नेता ने प्रशासन से मामले में तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल या हथियारबंद गुंडों का समूह कानून से ऊपर नहीं हो सकता। अभिषेक बनर्जी ने हमले में शामिल सभी लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए यह भी जांच कराने की बात कही कि हिंसा की साजिश किसने रची।

    उन्होंने कहा कि बार-बार सूचना दिए जाने के बावजूद पुलिस कार्रवाई करने में क्यों नाकाम रही, इसकी भी जांच होनी चाहिए। बनर्जी ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है।

  • वोटर लिस्ट से नाम कटा तो भड़के राघव चड्ढा: बोले- ‘AAP छोड़ने के बाद बौखलाई पार्टी’, आप ने भी किया पलटवार

    वोटर लिस्ट से नाम कटा तो भड़के राघव चड्ढा: बोले- ‘AAP छोड़ने के बाद बौखलाई पार्टी’, आप ने भी किया पलटवार


    चंडीगढ़। पंजाब में चुनाव आयोग के SIR अभियान के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम हटाए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। 13 अगस्त 2026 को जारी ड्राफ्ट सूची में चड्ढा के नाम के आगे ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ (Permanently Shifted) दर्ज है। उनका नाम ‘अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लिकेट’ (ASDD) सूची में शामिल किया गया है।

    चड्ढा ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर प्रशासन और पुलिस के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। वहीं आम आदमी पार्टी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR की प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधीन है और राज्य सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है।

    चड्ढा बोले- यह कोई लिपिकीय गलती नहीं
    मोहाली से पंजीकृत अपने वोटर आईडी का जिक्र करते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि उन्हें ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ के तौर पर किसने चिह्नित किया और इसकी पुष्टि किसने की, इन सभी प्रक्रियाओं में पंजाब सरकार के अधिकारी शामिल रहे हैं।

    उन्होंने आरोप लगाया कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) तक प्रक्रिया में राज्य के कर्मचारी और अधिकारी जुड़े हैं। चड्ढा के मुताबिक चुनावी ड्यूटी के बाद अधिकारियों के तबादले, पोस्टिंग और करियर पर राज्य सरकार का नियंत्रण रहता है और इसी प्रशासनिक दबाव के जरिए उनके खिलाफ राजनीतिक बदला लिया जा रहा है।

    ‘AAP छोड़ने वाले नेताओं को बनाया जा रहा निशाना’
    चड्ढा ने आरोप लगाया कि उनके और अन्य नेताओं के आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद से पार्टी नेतृत्व बौखलाया हुआ है। उनका कहना है कि जो नेता चुप रहने को तैयार नहीं हैं, उनके खिलाफ पंजाब पुलिस और प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि दूसरे पूर्व आप सांसदों और नेताओं को भी इसी तरह निशाना बनाया जा रहा है।

    SIR की गाइडलाइन का भी दिया हवाला
    राघव चड्ढा ने चुनाव आयोग की SIR गाइडलाइंस के पैरा 4(d) का हवाला देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों के लिए ‘संरक्षित सूची’ का प्रावधान है। उनके मुताबिक इसमें सांसदों, विधायकों और न्यायाधीशों जैसे जनप्रतिनिधियों के नाम शामिल हैं।

    चड्ढा का दावा है कि यदि किसी जनप्रतिनिधि का नाम डेटाबेस में फ्लैग भी होता है, तब भी उसे ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल रखा जाना चाहिए, ताकि दावे और आपत्तियों की अवधि में जरूरी दस्तावेज जमा किए जा सकें। उनका आरोप है कि वर्तमान सांसद होने के बावजूद उनके मामले में इन निर्देशों का जानबूझकर पालन नहीं किया गया।

    अंतिम सूची अक्टूबर में होगी जारी
    चड्ढा ने कहा कि अभी यह ड्राफ्ट वोटर लिस्ट है और अंतिम सूची अक्टूबर 2026 में जारी होगी। उन्होंने बताया कि SIR के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया के जरिए वह अपना नाम दोबारा सही कराने की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं।

    SIR के तहत पंजाब में अब तक 20.66 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह पुनरीक्षण से पहले राज्य के कुल मतदाताओं का करीब 9.7% है। चड्ढा भी हटाए गए नामों में शामिल हैं।

    AAP का पलटवार- SIR में राज्य सरकार का कोई दखल नहीं
    आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि SIR की पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग यानी ECI कराता है। पार्टी के मुताबिक मतदाता सूची में किसका नाम जोड़ा या हटाया जाएगा, इसमें पंजाब सरकार की कोई भूमिका नहीं है।

    AAP ने दावा किया कि चड्ढा दिल्ली में रह रहे हैं और पंजाब में नहीं। ऐसे में पंजाब की मतदाता सूची में अपना पंजीकरण बनाए रखना या उसे दूसरी जगह ट्रांसफर कराना उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी थी। पार्टी ने कहा कि इसके लिए पंजाब सरकार या AAP को जिम्मेदार ठहराना गलत है।

    AAP का दावा- दिल्ली में बैकडेट से वोट बनवाने की कोशिश
    AAP ने यह भी आरोप लगाया कि राघव चड्ढा दिल्ली के राजेंद्र नगर से बैकडेट प्रक्रिया के जरिए अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी ने कहा कि यदि किसी तरह की गैरकानूनी या बैकडेट एंट्री कराई गई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए। AAP नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि भाजपा या किसी अन्य व्यक्ति ने ऐसी बैकडेट एंट्री में मदद की है तो पार्टी मामले को उसके अंजाम तक पहुंचाएगी।

    2022 में पंजाब से राज्यसभा पहुंचे, अप्रैल 2026 में BJP में शामिल हुए
    राघव चड्ढा वर्ष 2022 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर पंजाब से राज्यसभा सांसद चुने गए थे। इसके बाद अप्रैल 2026 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ले ली।

    चुनाव आयोग के मुताबिक ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद अभी दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, वे 12 सितंबर 2026 तक फॉर्म-6 भरकर अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

  • शिवपुरी में राशन की मांग पर बिफरे ज्योतिरादित्य सिंधिया; बोले- 'नेतागिरी नहीं चलेगी', फिर खुद को बताया परिवार का मुखिया

    शिवपुरी में राशन की मांग पर बिफरे ज्योतिरादित्य सिंधिया; बोले- 'नेतागिरी नहीं चलेगी', फिर खुद को बताया परिवार का मुखिया

    ​शिवपुरी। जिले की पिछोर तहसील अंतर्गत ग्राम राजपुर में आयोजित विकास कार्यों के शिलान्यास एवं लोकार्पण समारोह के दौरान उस समय असहज स्थिति बन गई, जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जनसमूह में मौजूद कुछ ग्रामीणों द्वारा राशन वितरण को लेकर की गई नारेबाजी पर उखड़ गए। हालांकि, स्थिति को भांपते हुए उन्होंने तत्काल अपने वक्तव्य को भावनात्मक मोड़ दिया और खुद को नेता के बजाय क्षेत्र का मुखिया बताया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है।
    ​राशन के मुद्दे पर नारेबाजी से बिगड़ा माहौल
    समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री सिंधिया जब मंच से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी और विकासात्मक परियोजनाओं का ब्यौरा दे रहे थे, तभी भीड़ में मौजूद कुछ ग्रामीणों ने राशन वितरण में आ रही दिक्कतों को लेकर आवाज उठाई और नारेबाजी शुरू कर दी। अचानक हुए इस विरोध से सिंधिया भाषण के बीच में ही नाराज हो गए। उन्होंने कड़े शब्दों में टोकते हुए कहा, “शांति बनाए रखिए… यहां नेतागिरी नहीं चलेगी। यदि नेतागिरी करनी है तो किसी नेता के पास जाइए।”
    ​नाराजगी के बाद तुरंत संभाला मंच
    मंच से दिखाई गई इस तल्खी के बाद सभा स्थल पर कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया। इसके तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री ने अपना रुख बदलते हुए संवाद को सहज बनाने की कोशिश की। उन्होंने मंच से कहा कि वे यहां किसी राजनेता की हैसियत से नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के एक अभिभावक और परिवार के मुखिया के नाते उपस्थित हैं, और हर नागरिक की समस्या का समाधान उनकी प्राथमिकता है।

    ​प्रीतम लोधी के बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल
    कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेता प्रीतम सिंह लोधी के एक बयान ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी। सभा को संबोधित करते हुए लोधी ने कहा कि महाराज (सिंधिया) की यह तो महज शुरुआत है, असली फिल्म एक साल बाद सामने आएगी। इस बयान के बाद स्थानीय राजनीतिक गलियारों में आगामी समीकरणों को लेकर कयासबाजी शुरू हो गई है।
    ​जनसभा में घटे इस घटनाक्रम और केंद्रीय मंत्री के तल्ख तेवरों की क्लिप अब इंटरनेट मीडिया पर जमकर साझा की जा रही है, जिस पर विभिन्न राजनीतिक दलों और आमजन की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

  • मंदाकिनी फिर उफान पर, खतरे के निशान से 4.5 मीटर ऊपर पहुंचा पानी, रामघाट जलमग्न

    मंदाकिनी फिर उफान पर, खतरे के निशान से 4.5 मीटर ऊपर पहुंचा पानी, रामघाट जलमग्न

    चित्रकूट। मध्य प्रदेश और पहाड़ी इलाकों में हुई तेज बारिश के बाद मंदाकिनी नदी एक बार फिर उफान पर आ गई। मंगलवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान 126.50 मीटर को पार कर करीब 4.5 मीटर ऊपर पहुंच गया। इसके चलते रामघाट सहित आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी फिर भर गया। घाट किनारे बनी दुकानें, मकान, आश्रम और होटल जलमग्न हो गए। रामघाट से कामतानाथ, आरोग्यधाम और जानकीकुंड जाने वाली सड़कें भी पानी में डूब गईं, जिससे इन मार्गों पर नाव चलानी पड़ी।

    कुछ घंटों में बिगड़े हालात, फिर डूबीं दुकानें
    मंगलवार सुबह करीब 4 बजे मंदाकिनी का जलस्तर 126.40 मीटर था, जो खतरे के निशान से सिर्फ 10 सेंटीमीटर नीचे था। इसके बाद मध्य प्रदेश और चित्रकूट क्षेत्र में रातभर हुई तेज बारिश के कारण नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और कुछ ही घंटों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई।

    रामघाट में दोबारा पानी भरने से दुकानदारों की परेशानी बढ़ गई। एक दिन पहले ही की गई साफ-सफाई भी बाढ़ के पानी में बह गई। घरों और दुकानों में पानी घुसने के बाद कई लोग ऊपरी मंजिलों पर चले गए। होटल और आश्रमों में ठहरे लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़कें जलमग्न होने से लोगों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया।

    भरत मंदिर में पुजारी समेत 15 लोग फंसे
    रामघाट स्थित भरत मंदिर में पुजारी श्यामजी पांडेय समेत करीब 15 लोग पानी के बीच फंसे हुए हैं। पुजारी के मुताबिक मंदिर के सभी कमरे पानी में डूब गए हैं और वहां रखा राशन भी खराब हो गया है। उनका कहना है कि अब तक मदद के लिए कोई नहीं पहुंचा है।

    डीएम पुलकित गर्ग ने बताया कि तेज बारिश के कारण मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ा है। प्रशासन की ओर से लाउडस्पीकर के जरिए लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई थी। कई लोगों के लिए रैन बसेरों में ठहरने और भोजन-पानी की व्यवस्था की गई है। डीएम ने कहा कि किसी भी मंदिर में पुजारी या अन्य लोग रुके हैं तो उन्हें भी सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा।

    29 अगस्त की बाढ़ में 563 घर क्षतिग्रस्त
    चित्रकूट में 29 अगस्त को आई बाढ़ को अब तक की सबसे बड़ी बाढ़ बताया गया था। इस दौरान करीब 563 घरों के क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट सामने आई है। टीमें लगातार नुकसान का आकलन कर रही हैं। मंगलवार सुबह फिर आई बाढ़ से रामघाट, तरौंहा सहित कई गांव प्रभावित हुए हैं। प्रशासन अब तक 700 से अधिक राशन किट बांट चुका है।

    कानपुर और आसपास के जिलों में 4 मौतें
    लगातार बारिश के बीच पिछले 24 घंटे में कानपुर और आसपास के जिलों में कच्चे मकान और दीवार गिरने की घटनाओं में चार लोगों की मौत हो गई। कई लोग घायल भी हुए हैं।

    कानपुर के महाराजपुर में मंगलवार सुबह कच्चा मकान गिरने से मलबे में दबकर शकुंतला विश्वकर्मा (56) की मौत हो गई। हरदोई के बेनीगंज में सोमवार रात कच्ची दीवार गिरने से हरिपाल (72) की जान चली गई। लोनार में कच्ची कोठरी ढहने से दंपती समेत चार लोग घायल हुए हैं।

    बांदा के मरका क्षेत्र में सोमवार को कच्चे मकान की दीवार गिरने से हिमांशु (7) की मौत हो गई। वहीं कानपुर देहात के शिवली में मंगलवार सुबह कच्चा घर ढहने से सात माह की मासूम शानवी की मौत हो गई। हादसे में बुजुर्ग दंपती समेत चार लोग घायल हुए हैं।

  • कानपुर में BSF परीक्षा में बवाल: सिस्टम बंद, बिना चेकिंग एंट्री और पेपर लीक का आरोप, एग्जाम रद्द

    कानपुर में BSF परीक्षा में बवाल: सिस्टम बंद, बिना चेकिंग एंट्री और पेपर लीक का आरोप, एग्जाम रद्द

    कानपुर। कानपुर के चकेरी थाना क्षेत्र के श्याम नगर स्थित एमडी इन्फोटेक परीक्षा केंद्र पर बुधवार को आयोजित BSF कांस्टेबल (मिनिस्ट्रियल) की परीक्षा हंगामे और बवाल की भेंट चढ़ गई। तकनीकी खामियों, बिना चेकिंग परीक्षार्थियों को प्रवेश देने और पेपर लीक होने के आरोपों के बाद परीक्षार्थियों ने केंद्र पर जमकर हंगामा किया और तोड़फोड़ की। करीब चार घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद प्रशासन और BSF अधिकारियों के हस्तक्षेप से परीक्षा रद्द कर दी गई। अब यह परीक्षा 18 सितंबर को आयोजित की जाएगी।

    40 मिनट तक बंद रहे सिस्टम, कीबोर्ड-माउस ने भी दिया जवाब
    परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थियों का आरोप था कि पहली पाली शुरू होते ही करीब 40 मिनट तक कंप्यूटर सिस्टम बंद रहे। सिस्टम चालू होने के बाद भी कई कंप्यूटरों में कीबोर्ड और माउस काम नहीं कर रहे थे, जबकि केवल CPU चालू था। परीक्षार्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि परीक्षा हॉल में बिजली की समस्या के कारण लाइट और पंखे तक नहीं चल रहे थे। बारिश और उमस के बीच जब छात्रों ने इन समस्याओं को लेकर शिकायत की तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

    मुंबई से आई छात्रा ने लगाया बिना चेकिंग प्रवेश का आरोप
    मुंबई से परीक्षा देने पहुंची छात्रा शालिनी बागुन ने आरोप लगाया कि परीक्षा केंद्र पर परीक्षार्थियों को बिना किसी चेकिंग के सीधे अंदर प्रवेश दिया गया था। तकनीकी समस्याओं और बिजली कटौती के बीच छात्रों का गुस्सा बढ़ता गया। इसके बाद आक्रोशित परीक्षार्थियों ने परीक्षा केंद्र के सिस्टम में तोड़फोड़ शुरू कर दी।

    मौके पर भारी पुलिस फोर्स तैनात
    हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। एडीसीपी पूर्वी शिवा सिंह, एसीपी चकेरी आशुतोष कुमार सिंह के साथ चकेरी, कैंट, जाजमऊ, नौबस्ता और रेलबाजार थानों की पुलिस फोर्स को भी मौके पर तैनात किया गया। प्रदर्शन कर रहे परीक्षार्थियों की मांग थी कि जब तक BSF के आधिकारिक पोर्टल पर अगली परीक्षा की तारीख जारी नहीं होती, तब तक वे प्रदर्शन खत्म नहीं करेंगे।

    ADG BSF से बात के बाद रद्द हुई परीक्षा
    बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने तत्काल ADG BSF मकरंद देवेशकर से संपर्क किया। इसके बाद परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया और अगली परीक्षा की तारीख 18 सितंबर तय की गई।

    ACM बोलीं- ऐसे सेंटरों को ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए
    मौके पर पहुंचीं ACM-2 कैंट शिखा शुक्ला ने स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की लापरवाही करने वाले परीक्षा केंद्रों को पूरी तरह ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में जिलाधिकारी को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने की बात कही।

    उल्लेखनीय है कि राजस्थान और जयपुर के परीक्षा केंद्रों पर भी इसी तरह की गड़बड़ियों की खबरें सामने आई हैं। फिलहाल कानपुर में पेपर लीक के आरोपों समेत परीक्षा केंद्र पर हुई अव्यवस्थाओं की जांच को लेकर भी निगाहें टिकी हैं।

  • UP के 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात, सैलरी में 7 हजार रुपए तक बढ़ोतरी, बीमा कवर भी

    UP के 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात, सैलरी में 7 हजार रुपए तक बढ़ोतरी, बीमा कवर भी

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश के करीब साढ़े तीन लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी है। सरकार ने उनकी सैलरी में 7 हजार रुपए तक की बढ़ोतरी की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकोस) की वेबसाइट और लोगो लॉन्च किया। इस दौरान आउटसोर्स कर्मचारियों को चेक भी वितरित किए गए। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे।

    सरकार के मुताबिक, आउटसोर्स कर्मचारियों को 50 लाख रुपए तक का बीमा कवर दिया जाएगा। इसके अलावा आकस्मिक दवा के लिए 5 लाख रुपए और एयर एंबुलेंस के लिए 10 लाख रुपए तक की सहायता का प्रावधान किया गया है।

    एक ही पोर्टल पर होगा सभी आउटसोर्स कर्मचारियों का रिकॉर्ड
    यूपीकोस के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग सरकारी विभागों में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों का एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। अभी कर्मचारियों से संबंधित जानकारी अलग-अलग विभागों और आउटसोर्स एजेंसियों के स्तर पर रखी जाती है। नई व्यवस्था में इन सभी रिकॉर्ड को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इससे कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध हो सकेगी।

    भर्ती से लेकर भुगतान तक की जानकारी पोर्टल पर दर्ज होगी
    यूपीकोस के पोर्टल पर कर्मचारी की भर्ती, तैनाती, उपस्थिति और भुगतान से संबंधित जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि किस विभाग में कितने आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं और उन्हें कितना भुगतान किया जा रहा है। कर्मचारियों की सेवा से संबंधित रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा। जरूरत पड़ने पर किसी कर्मचारी की तैनाती, भुगतान या सेवा रिकॉर्ड की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म से देखी जा सकेगी।

    एजेंसियों की प्रक्रिया पर भी होगी निगरानी
    नई व्यवस्था लागू होने के बाद आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, तैनाती और भुगतान की प्रक्रिया पर निगरानी आसान होने की उम्मीद है। अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से होने वाली प्रक्रिया में रिकॉर्ड और भुगतान से जुड़ी गड़बड़ियों की गुंजाइश कम करने में भी मदद मिलेगी। प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में कर्मचारी आउटसोर्स के माध्यम से काम कर रहे हैं। नई व्यवस्था का सीधा असर इन कर्मचारियों की भर्ती, सेवा शर्तों और भुगतान व्यवस्था से जुड़े प्रबंधन पर पड़ेगा।

  • बुलंदशहर के शिकारपुर विधायक अनिल शर्मा का निधन, दिल्ली के अस्पताल में ली अंतिम सांस

    बुलंदशहर के शिकारपुर विधायक अनिल शर्मा का निधन, दिल्ली के अस्पताल में ली अंतिम सांस

    बुलंदशहर। शिकारपुर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक और पूर्व राज्यमंत्री अनिल शर्मा का बुधवार को दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और कैंसर का इलाज करा रहे थे। उनके निधन की खबर से बुलंदशहर जिले और शिकारपुर क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। अनिल शर्मा योगी सरकार में वन राज्य मंत्री भी रह चुके थे। इलाज के दौरान दिल्ली के अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।

    कम उम्र में निर्विरोध ग्राम प्रधान चुने गए थे
    अनिल शर्मा बुलंदशहर के शिकारपुर विधानसभा क्षेत्र के सुरजावली गांव के रहने वाले थे। उन्होंने कम उम्र में ही राजनीति में कदम रखा और ग्राम सुरजावली के निर्विरोध प्रधान चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में आगे बढ़ते हुए विधानसभा चुनाव लड़ा।

    2002 में पहली बार बने विधायक
    अनिल शर्मा ने वर्ष 2002 में खुर्जा विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। इसके बाद 2007 में भी उन्होंने खुर्जा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और लगातार दूसरी बार विधायक बने। वर्ष 2012 में उन्होंने शिकारपुर विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया।

    2017 में भाजपा के टिकट पर जीते, योगी सरकार में बने मंत्री
    भाजपा में शामिल होने के बाद अनिल शर्मा ने वर्ष 2017 में शिकारपुर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसके बाद उन्हें प्रदेश की योगी सरकार में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी गई। वर्ष 2022 में भी उन्होंने भाजपा के टिकट पर शिकारपुर सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इस तरह वह शिकारपुर से भाजपा विधायक के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा कर रहे थे। अनिल शर्मा के निधन से भाजपा कार्यकर्ताओं, समर्थकों और क्षेत्र के लोगों में शोक की लहर है।

  • अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक, 3 नए सदस्य बनाए गए, CEO के नाम पर मंथन जारी

    अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक, 3 नए सदस्य बनाए गए, CEO के नाम पर मंथन जारी

    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक अयोध्या की मणिरामदास छावनी में चल रही है। बैठक में ट्रस्ट के लिए तीन नए सदस्यों की घोषणा की गई है। इनमें अयोध्या के मदन मोहन पांडेय, दिल्ली के महेश भागचंदका और अयोध्या की निर्मला यादव शामिल हैं। बैठक में अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन, कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि, ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास, शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती सहित अन्य ट्रस्टी मौजूद हैं।

    राम मंदिर के पहले CEO के नाम पर अंतिम मंथन
    बैठक का सबसे अहम एजेंडा राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) की नियुक्ति है। CEO के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप चुकी है। बताया जा रहा है कि कमेटी ने तीन नामों का पैनल ट्रस्ट के सामने रखा है। अब ट्रस्ट इन नामों पर चर्चा कर अंतिम नाम तय कर सकता है। बैठक के दूसरे चरण में ट्रस्ट से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श होगा।

    पूर्व IPS राजेश पांडेय की दावेदारी सबसे मजबूत बताई जा रही
    CEO पद की चर्चा में पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। उनकी दावेदारी की खास वजह सिर्फ पुलिस और प्रशासनिक अनुभव नहीं है। वह लखनऊ के अलीगंज स्थित ऐतिहासिक हनुमान मंदिर ट्रस्ट के सचिव भी हैं। इस वजह से उन्हें मंदिर प्रशासन और धार्मिक संस्थान के प्रबंधन का प्रत्यक्ष अनुभव भी हासिल है। राम मंदिर CEO के लिए यह अनुभव उनकी प्रोफाइल को अलग महत्व देता है।

    CEO के सामने होंगी कई बड़ी जिम्मेदारियां
    राम मंदिर CEO की भूमिका केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं होगी। अयोध्या में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या के बीच सुरक्षा व्यवस्था, विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय, VIP और आम श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं तथा मंदिर से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स का प्रबंधन जैसी जिम्मेदारियां भी CEO के सामने रहेंगी।

    इसी वजह से सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था की जटिलताओं का अनुभव रखने वाले राजेश पांडेय की दावेदारी को खास माना जा रहा है। हालांकि अंतिम फैसला ट्रस्ट को ही करना है।

    बैठक में ये प्रमुख ट्रस्टी और आमंत्रित सदस्य मौजूद
    1. महंत नृत्य गोपाल दास
    2. कमलनयन दास
    3. स्वामी गोविंद देव गिरी
    4. डॉ. कृष्ण मोहन
    5. दिनेंद्र दास जी महाराज
    6. दिनेश चंद्र जी
    7. बजरंग बांगड़ा
    8. जगदीश आफले
    9. राज गोपाल मिनियार
    10. समीर पांडा

    ट्रस्ट डीड और नियमावली में संशोधन पर भी चर्चा
    CEO की नियुक्ति के अलावा ट्रस्ट की डीड और न्यास नियमावली में संशोधन सहित कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी बैठक में चर्चा होने की संभावना है। बैठक दोपहर 3 बजे ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में होनी है। अधिकांश ट्रस्टी अयोध्या पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ सदस्य ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल होंगे।

    बैठक से पहले ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि और अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन ने रामलला के दरबार में पहुंचकर दर्शन-पूजन किया। दोनों ने मंदिर की मौजूदा व्यवस्थाओं का जायजा लेने के बाद बैठक की तैयारियों में हिस्सा लिया।

    चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र की वापसी पर भी नजर
    बैठक में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र को लेकर भी निर्णय अहम माना जा रहा है। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद दोनों ने अपने पदों से इस्तीफा दिया था। हालांकि पिछले कुछ समय में दोनों की सामाजिक गतिविधियां बढ़ी हैं।

    ऐसे में ट्रस्ट में उनकी संभावित वापसी को लेकर अटकलें भी तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच की मौजूदा स्थिति में चंपत राय को लेकर राहत की बात सामने आने के बाद उनके दोबारा ट्रस्ट से जुड़ने की संभावना पर चर्चा हो सकती है। डॉ. अनिल मिश्र को लेकर ट्रस्ट क्या फैसला करता है, इस पर भी नजर रहेगी। अंतिम तस्वीर बैठक के बाद ही साफ होगी।

    संघ और VHP पदाधिकारियों के अयोध्या पहुंचने से बढ़ी हलचल
    बैठक से पहले संघ और विश्व हिंदू परिषद के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के भी अयोध्या पहुंचने की सूचना है। VHP महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा, संरक्षक दिनेश चंद्र और संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल सिंह के अयोध्या पहुंचने की जानकारी है। संघ और VHP पदाधिकारियों ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि से मुलाकात भी की। बंद कमरे में हुई इस बैठक के बाद ट्रस्ट की अहम बैठक को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।