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  • छह साल बाद भी नहीं भरे दिल्ली दंगों के जख्म: नाले को देखकर आज भी कांप उठती है रूह, आईबी अधिकारी अंकित शर्मा के भाई ने की सभी दोषियों के लिए फांसी की मांग

    छह साल बाद भी नहीं भरे दिल्ली दंगों के जख्म: नाले को देखकर आज भी कांप उठती है रूह, आईबी अधिकारी अंकित शर्मा के भाई ने की सभी दोषियों के लिए फांसी की मांग

    नई दिल्ली । वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के भीषण सांप्रदायिक दंगों के दौरान देश को झकझोर देने वाले इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विशेष अदालत के न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने इस नृशंस हत्याकांड में आम आदमी पार्टी के पूर्व स्थानीय पार्षद ताहिर हुसैन सहित पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए अन्य अपराधियों में हसीन उर्फ मुल्लाजी, नजीम, कासिम और समीर खान शामिल हैं। इस न्यायिक फैसले से पीड़ित परिवार को एक कानूनी राहत तो जरूर मिली है, लेकिन उनके जीवन में आया खालीपन और अपनों को खोने का गहरा दर्द आज छह साल बाद भी उतना ही ताजा और तकलीफदेह बना हुआ है।

    न्यायालय के इस बड़े फैसले के बाद अंकित शर्मा के परिवार की वह खौफनाक यादें एक बार फिर जीवंत हो गई हैं, जिन्होंने उनके हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह उजाड़ दिया था। सुरक्षा कारणों और उस डरावने घटनाक्रम के मानसिक आघात के चलते पीड़ित परिवार उत्तर-पूर्वी दिल्ली के खजूरी खास स्थित अपने पैतृक मकान को हमेशा के लिए छोड़कर जा चुका है और तब से एक किराए के मकान में रहने को विवश है। अंकित शर्मा के बड़े भाई अंकुर शर्मा ने एक साक्षात्कार में अपने दिल का गुबार निकालते हुए न्याय व्यवस्था से मांग की है कि उनके भाई की हत्या करने वाले सभी दोषियों को कानूनन फांसी की सजा मिलनी चाहिए ताकि पीड़ित आत्मा को सच्ची शांति मिल सके।

    घटनाक्रम के अनुसार, 25 फरवरी 2020 को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा घर का कुछ जरूरी सामान लेने के लिए बाहर निकले थे, जिसके बाद वह अचानक लापता हो गए। जांच एजेंसियों और पुलिस के मुताबिक, उग्र दंगाइयों की एक हिंसक भीड़ ने अंकित को अगवा कर लिया था और बेहद क्रूरतापूर्वक उन पर धारदार हथियारों से हमला किया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था कि देश की सुरक्षा एजेंसी में कार्यरत इस युवा अधिकारी को अपराधियों ने 52 बार चाकू से गोदा था। इस वीभत्स वारदात को अंजाम देने के बाद हत्यारों ने साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से उनके खून से लथपथ शव को पास के ही एक गंदे नाले में फेंक दिया था, जिसे अगली सुबह पुलिस ने बरामद किया था।

    अंकित शर्मा के परिजनों ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अंकित को केवल उनकी धार्मिक पहचान यानी हिंदू होने के कारण सोची-समझी साजिश के तहत निशाना बनाया गया था। उनके भाई अंकुर ने बताया कि अंकित एक बेहद मिलनसार और धर्मनिरपेक्ष सोच वाले व्यक्ति थे, जिनके मित्रों में हिंदू और मुसलमान दोनों ही समुदायों के लोग शामिल थे। दुःख की बात यह रही कि जब दंगाइयों की भीड़ ने उन पर हमला किया, तो उनके कुछ स्थानीय मुस्लिम दोस्तों ने भी अंकित को बचाने के बजाय कातिलों का साथ दिया। इस खौफनाक मंजर की यादें परिवार को इस कदर प्रताड़ित करती हैं कि आज भी दंगों के क्षेत्र या उस नाले के पास से गुजरते समय उनका दिल भारी हो जाता है।

    इस भयावह त्रासदी का अंकित शर्मा के माता-पिता के स्वास्थ्य पर अत्यंत प्रतिकूल और गंभीर प्रभाव पड़ा है। जवान बेटे की इस तरह हुई असमय और क्रूर मौत के सदमे के कारण उनके माता-पिता गंभीर रूप से उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) और मानसिक तनाव का शिकार हो चुके हैं। अदालती कार्यवाही या दंगों से जुड़ी किसी भी चर्चा मात्र से ही उनका पूरा परिवार भारी अवसाद और तनाव की स्थिति में आ जाता है। पीड़ित परिवार का स्पष्ट रूप से मानना है कि उनके साथ पूर्ण और वास्तविक न्याय तभी होगा जब देश के लिए बलिदान देने वाले उनके बेटे के हत्यारों को कानून के तहत अधिकतम और कठोरतम संभव दंड दिया जाएगा।

  • मेलबर्न मीट्स मोदी कार्यक्रम में नहीं थी भाड़े की भीड़…. आयोजक बोले… माफी मांगे राहुल गांधी और खरगे

    मेलबर्न मीट्स मोदी कार्यक्रम में नहीं थी भाड़े की भीड़…. आयोजक बोले… माफी मांगे राहुल गांधी और खरगे


    नई दिल्ली।
    ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न (Melbourne, Australia) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के स्वागत के लिए आयोजित ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ (Melbourne Meets Modi) कार्यक्रम के आयोजकों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) को एक खुला खत लिखा है. इस खत में उन्होंने कांग्रेस नेताओं की तरफ से लगाए गए उन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है, जिसमें कार्यक्रम में शामिल लोगों को ‘पेड क्राउड’ यानी पैसे देकर जुटाई गई भीड़ बताया गया था. आयोजकों ने दोनों नेताओं से यह आरोप वापस लेने के साथ ही सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।

    यह खुला खत उन कम्युनिटी वॉलंटियर्स की तरफ से जारी किया गया है, जिन्होंने 9 जुलाई को मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में हुए कार्यक्रम के लिए सिडनी से मेलबर्न तक ‘मोदी एयरवेज’ नाम की चार्टर्ड फ्लाइट का इंतजाम किया था. आयोजकों का साफ कहना है कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के आने-जाने और रहने का खर्च बीजेपी, भारत सरकार या ऑस्ट्रेलिया सरकार ने नहीं उठाया था. उन्होंने बताया कि सभी लोगों ने अपना खर्च खुद उठाया, जबकि कुछ लोग सामुदायिक सहयोग से इस कार्यक्रम में पहुंचे थे।

    आयोजकों में से एक, अमित कारंत ने कहा कि कांग्रेस नेताओं की ऐसी टिप्पणी बेहद निराशाजनक है. उनके मुताबिक सिडनी, एडिलेड, पर्थ और ब्रिस्बेन समेत ऑस्ट्रेलिया के अलग-अलग शहरों से लोग अपनी मर्जी से मेलबर्न पहुंचे थे. किसी भी सरकारी एजेंसी या राजनीतिक दल ने उनके आने-जाने पर एक भी पैसा खर्च नहीं किया. यह पूरी व्यवस्था स्थानीय वॉलंटियर्स ने आपस में मिलकर संभाली थी।

    आयोजकों का कहना है कि कांग्रेस से जुड़े नेताओं ने कार्यक्रम को ‘प्रायोजित’ बताकर वहां पहुंचे हजारों भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की ईमानदारी और उनकी स्वतंत्र सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस चार्टर्ड फ्लाइट से सफर करने वालों में ऑस्ट्रेलियाई नागरिक, वहां के पक्के निवासी, कामकाजी पेशेवर, कारोबारी, छात्र और बुजुर्ग शामिल थे.

    खत में लिखा गया है कि इन लोगों को भाड़े की राजनीतिक भीड़ कहना सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करना नहीं है, बल्कि यह उन हजारों प्रवासियों की गरिमा का अपमान है. ऑस्ट्रेलिया में रहने वाला भारतीय समुदाय किसी एक राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ा है. वहां कांग्रेस को पसंद करने वाले लोग भी हैं, बीजेपी को चाहने वाले भी और ऐसे भी कई लोग हैं जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।


    महीनों की कड़ी मेहनत पर कांग्रेस ने फेरा पानी

    आयोजकों ने बताया कि इस चार्टर्ड फ्लाइट का इंतजाम करने में महीनों की प्लानिंग लगी थी, जिसके लिए यात्रियों से तालमेल बिठाने से लेकर कागजी कार्रवाई तक पर दिन-रात काम किया गया. कई वॉलंटियर्स ने अपने बिजनेस समेत परिवारों को छोड़कर इस कार्यक्रम को सफल बनाने में पूरा योगदान दिया. इसी आधार पर उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व के सामने तीन बड़ी मांगें रखी हैं. पहली, ये कि सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया जाए कि इस फ्लाइट के लिए बीजेपी या भारत सरकार ने कोई फंडिंग नहीं की थी. दूसरी, ‘पेड क्राउड’ वाले आरोप वापस लिए जाएं. वहीं, तीसरी मांग यह है कि सभी वॉलंटियर्स, यात्रियों सहित पूरे भारतीय समुदाय से सार्वजनिक माफी मांगी जाए।


    मार्वल स्टेडियम में जुटे थे 30 हजार लोग

    मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में 9 जुलाई को आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में करीब 30 हजार लोग शामिल हुए थे. इस दौरान पीएम मोदी के साथ ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और विक्टोरिया की प्रीमियर जैसिंटा एलन भी मंच पर मौजूद थीं. आयोजकों ने साफ कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन भारत की घरेलू राजनीति के चक्कर में विदेश में रह रहे भारतीय समुदाय को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

  • Survey: एथेनॉल मिक्स E 20 पेट्रोल से सहज नहीं लोग…. NDA के 53% वोटर्स भी हिचक रहे

    Survey: एथेनॉल मिक्स E 20 पेट्रोल से सहज नहीं लोग…. NDA के 53% वोटर्स भी हिचक रहे


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) देशभर में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिक्स E20 पेट्रोल (E20 Ethanol-Blended Petrol) को बढ़ावा दे रही है. सरकार का कहना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी, प्रदूषण कम होगा और गन्ना किसानों को फायदा मिलेगा. हालांकि, C-Voter के हालिया सर्वे से सामने आया है कि बड़ी संख्या में लोग अभी भी E20 पेट्रोल को लेकर सहज नहीं हैं. सर्वे के मुताबिक, आधे से अधिक लोग न केवल E20 पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं करना चाहते, बल्कि उन्हें यह भी डर है कि इससे उनकी गाड़ी की माइलेज कम हो सकती है और इंजन को नुकसान पहुंच सकता है।


    NDA समर्थकों में भी E20 को लेकर हिचक

    सर्वे में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सत्ता पर काबिज NDA के समर्थकों में भी E20 पेट्रोल को लेकर उत्साह नहीं दिखा. सर्वे के अनुसार, 52.5 प्रतिशत NDA समर्थकों ने कहा कि वे अपनी गाड़ियों में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं करना चाहेंगे. केवल 18.1 प्रतिशत लोगों ने इसका समर्थन किया, जबकि 29.5 प्रतिशत लोग अभी भी इस मुद्दे पर फैसला नहीं कर पाए हैं. विपक्षी दलों के समर्थकों में E20 के प्रति विरोध और ज्यादा देखने को मिला।


    E20 से बचने का महंगा रास्ता चुन रहे लोग, 5 गुना बढ़ी प्रीमियम पेट्रोल की मांग

    57.9 प्रतिशत विपक्षी समर्थकों ने कहा कि वे अपनी गाड़ियों में E20 पेट्रोल नहीं डलवाना चाहते. वहीं, अन्य राजनीतिक दलों के समर्थकों में भी 55 प्रतिशत लोगों ने इसे अस्वीकार किया. कुल मिलाकर 55.1 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे E20 पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं करना चाहते, जबकि केवल 17.1 प्रतिशत लोगों ने इसका समर्थन किया।


    गडकरी के बयान के बाद बढ़ी चर्चा

    यह सर्वे ऐसे समय सामने आया है जब केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने E20 पेट्रोल के विरोधियों को चुनौती देते हुए कहा था कि वे ऐसा एक भी व्यक्ति सामने लाएं जिसकी गाड़ी को एथेनॉल मिक्स पेट्रोल से नुकसान हुआ हो. इसके जवाब में प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि उनके पास ऐसे छह लोग हैं, जिनकी गाड़ियों पर E20 का प्रतिकूल असर पड़ा है. उन्होंने कहा कि वे मीडिया के सामने आने से पहले गडकरी से मिलना चाहते हैं।

    सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि E20 पूरी तरह सुरक्षित है और विशेषज्ञों की राय भी इसी के पक्ष में है. दूसरी ओर, कई वाहन मालिकों का कहना है कि E20 पेट्रोल से माइलेज कम हो जाती है और खासकर E10 या उससे पुराने मानकों के लिए बनी गाड़ियों में इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।


    सरकार की नीति को भी सीमित समर्थन

    सर्वे में केवल E20 पेट्रोल ही नहीं, बल्कि एथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी पर भी लोगों की राय ली गई. इसमें 52 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की सरकारी पॉलिसी का समर्थन नहीं करते. इसके मुकाबले सिर्फ 22 प्रतिशत लोगों ने इस नीति का समर्थन किया, जबकि बाकी लोग असमंजस में रहे. NDA समर्थकों में भी 48.2 प्रतिशत लोगों ने इस नीति का विरोध किया. केवल 24.4 प्रतिशत लोगों ने इसका समर्थन किया, जबकि 27.4 प्रतिशत लोग निर्णय नहीं ले सके।


    माइलेज घटने और इंजन खराब होने की चिंता

    सर्वे के अनुसार, लोगों की सबसे बड़ी चिंता वाहन की परफॉर्मेंस को लेकर है. 52.8 प्रतिशत लोगों का मानना है कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों की माइलेज कम हो जाती है. NDA समर्थकों में 51.2 प्रतिशत और विपक्षी समर्थकों में 55.4 प्रतिशत लोगों ने भी यही चिंता जताई. इंजन को नुकसान पहुंचने को लेकर भी लोगों की आशंकाएं काफी मजबूत हैं. 54.2 प्रतिशत लोगों का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल अधिकांश वाहनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है. NDA समर्थकों में यह आंकड़ा 49.9 प्रतिशत रहा, जबकि विपक्षी समर्थकों में 60.2 प्रतिशत लोगों ने ऐसा माना।

    इसके अलावा 14.3 प्रतिशत लोगों का मानना है कि E20 केवल कुछ विशेष प्रकार के वाहनों को नुकसान पहुंचा सकता है. वहीं, केवल 10.9 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इससे वाहनों को कोई नुकसान नहीं होता।


    पुराने वाहनों के मालिकों की चिंता

    सर्वे में यह भी सामने आया कि 56.3 प्रतिशत लोगों का मानना है कि E20 पेट्रोल को अनिवार्य बनाना पुराने वाहनों के मालिकों के साथ अन्याय होगा. NDA समर्थकों में 49.2 प्रतिशत और विपक्षी समर्थकों में 65.8 प्रतिशत लोगों ने इस राय से सहमति जताई।


    लोग चाहते हैं विकल्प मिले

    हालांकि E20 को लेकर विरोध काफी अधिक है, लेकिन सर्वे में एक बात पर लगभग सभी वर्गों में सहमति दिखाई दी. 75.9 प्रतिशत लोगों ने कहा कि बाजार में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल और सामान्य पेट्रोल दोनों उपलब्ध रहने चाहिए, ताकि उपभोक्ता अपनी जरूरत और वाहन के अनुसार विकल्प चुन सकें. NDA समर्थकों में भी 72.4 प्रतिशत लोगों ने इस मांग का समर्थन किया. इसी तरह 74.5 प्रतिशत लोगों का मानना है कि यदि E20 पेट्रोल बेचा जाता है तो इसकी कीमत सामान्य पेट्रोल से कम होनी चाहिए. NDA समर्थकों में 75.6 प्रतिशत लोगों ने भी यही राय दी।

    हालांकि कीमत कम होने पर भी लोगों का भरोसा पूरी तरह नहीं बनता दिखा. केवल 40.8 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अगर E20 सस्ता होगा तो वे इसका इस्तेमाल करेंगे, जबकि 40.4 प्रतिशत लोगों ने साफ कहा कि कम कीमत होने के बावजूद वे इसे नहीं अपनाएंगे।


    सरकार के दावे पर बंटी राय

    केंद्र सरकार का कहना है कि E20 नीति से भारत का कच्चे तेल का आयात कम होगा. इस दावे पर 37.2 प्रतिशत लोगों ने पूरी तरह सहमति जताई, जबकि 19.5 प्रतिशत लोगों ने आंशिक सहमति व्यक्त की. दूसरी ओर, 17.1 प्रतिशत लोगों ने इस दावे से पूरी तरह असहमति जताई और 14.1 प्रतिशत लोगों ने आंशिक असहमति व्यक्त की. जब लोगों से पूछा गया कि सरकार E20 पेट्रोल को बढ़ावा क्यों दे रही है, तो 27.5 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल के आयात को कम करना है. 21.3 प्रतिशत लोगों का मानना था कि सरकार गन्ना किसानों को लाभ पहुंचाना चाहती है, जबकि 11 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इसका प्रमुख उद्देश्य प्रदूषण कम करना है।


    कैसे हुआ सर्वे?

    यह सर्वे C-Voter ने 8 और 9 जुलाई के बीच Computer Assisted Telephone Interviewing (CATI) पद्धति से कराया. इसमें देशभर के 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के 1,641 लोगों से बातचीत की गई. C-Voter के अनुसार, सर्वे के आंकड़ों को जनगणना और चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के आधार पर देश की जनसांख्यिकीय संरचना के अनुरूप वेटेज दिया गया. सर्वे का मार्जिन ऑफ एरर मैक्रो स्तर पर ±3 प्रतिशत और माइक्रो स्तर पर ±5 प्रतिशत बताया गया है।

  • बिहार-बंगाल समेत पूर्वोत्तर में आज भारी बारिश का अलर्ट… अन्य हिस्सों में साफ रहेगा मौसम

    बिहार-बंगाल समेत पूर्वोत्तर में आज भारी बारिश का अलर्ट… अन्य हिस्सों में साफ रहेगा मौसम


    नई दिल्ली।
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मंगलवार, 14 जुलाई को पूर्वोत्तर भारत (Northeast India), बिहार (Bihar) और पश्चिम बंगाल (West Bengal) में एक और दिन भारी बारिश (Heavy rain) का अनुमान लगाया है. वहीं उत्तर-पश्चिम, मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के ज्यादातर हिस्सों में मॉनसून की गतिविधियां कमजोर रहने की उम्मीद है।

    मौसम का यह पैटर्न दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में चल रहे ठहराव को दिखाता है, जिसमें मॉनसून ट्रफ हिमालय की तलहटी के करीब खिसक रही है. नतीजतन, भारी बारिश की गतिविधियां देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्सों में केंद्रित हो गई हैं, जबकि अन्य बड़े हिस्सों में बारिश कमजोर पड़ गई है।

    IMD के अनुसार, अगले तीन से चार दिनों तक पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल और बिहार में कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश जारी रहेगी।

    सबसे अधिक बारिश मेघालय में होने की उम्मीद जताई जा रही है, जहां कुछ जगहों पर 20 सेमी से अधिक बारिश हो सकती है. उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ हिस्सों में भी तेज बारिश की संभावना है.

    यह अनुमान पिछले 24 घंटों में हुई भारी बारिश के बाद लगाया गया है. उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बहुत ज़्यादा बारिश दर्ज की गई, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, मेघालय और त्रिपुरा में बहुत भारी बारिश हुई है. अरुणाचल प्रदेश, गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से भी 7 से 11 सेमी के बीच भारी बारिश की सूचना मिली है.

    IMD ने इस लगातार बारिश का कारण कई सक्रिय मौसम प्रणालियों को बताया है, जिनमें श्री गंगानगर से मणिपुर तक फैली मॉनसून ट्रफ, दक्षिण बांग्लादेश, उत्तरी बंगाल की खाड़ी और पूर्वी बांग्लादेश के ऊपर साइक्लोनिक सर्कुलेशन, और उत्तर-पश्चिम बिहार से मणिपुर तक फैली एक ट्रफ शामिल हैं. मध्य पाकिस्तान के ऊपर बना एक पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) भी उत्तरी भारत के मौसम को प्रभावित कर रहा है.

  • सुनेत्रा पवार के NCP अध्यक्ष पद पर उठे सवाल, पार्टी नेता ने चुनाव प्रक्रिया को दी चुनौती

    सुनेत्रा पवार के NCP अध्यक्ष पद पर उठे सवाल, पार्टी नेता ने चुनाव प्रक्रिया को दी चुनौती


    मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में एक बार फिर आंतरिक विवाद सामने आता दिखाई दे रहा है। महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और NCP अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के नेतृत्व को लेकर पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि अध्यक्ष पद के लिए कराया गया चुनाव पार्टी संविधान के नियमों के अनुसार नहीं हुआ।

    पार्टी नेता की ओर से सुनेत्रा पवार के अध्यक्ष पद के चुनाव को चुनौती देते हुए कानूनी नोटिस जारी किया गया है। हालांकि, इस मामले पर अभी तक उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    26 फरवरी के चुनाव पर उठाई गई आपत्ति
    दिल्ली स्थित विधि फर्म एआरएस एसोसिएट्स ने NCP के राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह की ओर से 9 जुलाई को यह कानूनी नोटिस जारी किया। इसमें दावा किया गया है कि 26 फरवरी को हुआ पार्टी अध्यक्ष का चुनाव असंवैधानिक था और इसे अमान्य घोषित किया जाना चाहिए। यह नोटिस सुनेत्रा पवार, NCP के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव को भेजा गया है।

    चुनाव प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन का आरोप
    नोटिस में आरोप लगाया गया है कि चुनाव प्रक्रिया शुरू करने से पहले पार्टी संविधान में तय अनिवार्य नियमों का पालन नहीं किया गया। इसमें दावा किया गया कि पार्टी प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों को चुनाव की जानकारी भी विधिवत नहीं दी गई।

    नोटिस के अनुसार, तत्कालीन NCP अध्यक्ष अजित पवार के 28 जनवरी को निधन के बाद पार्टी ने निर्वाचन आयोग को जानकारी दी थी कि नए अध्यक्ष के चुनाव तक प्रफुल्ल पटेल कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका निभाएंगे। आरोप है कि इसके बावजूद महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव ने बिना संवैधानिक अधिकार के राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया और चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी।

    नामांकन और मतदान प्रक्रिया पर भी सवाल
    सच्चिदानंद सिंह की ओर से जारी नोटिस में दावा किया गया है कि पार्टी संविधान के मुताबिक न तो केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण का गठन किया गया, न ही निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया और न ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया गया। नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रतिनिधियों को उम्मीदवारों के नामांकन, चुनाव लड़ने और मतदान करने का उचित अवसर नहीं दिया गया।

    चुनाव आयोग को भेजे पत्र वापस लेने की मांग
    सिंह ने निर्वाचन आयोग को भेजे गए 28 फरवरी, 10 मार्च और 29 अप्रैल के पार्टी पत्रों को वापस लेने की मांग की है। इन पत्रों में चुनाव और पार्टी पदाधिकारियों से जुड़ी जानकारी दर्ज की गई थी।

    उन्होंने स्वतंत्र चुनाव प्राधिकरण की निगरानी में नए सिरे से संगठनात्मक चुनाव कराने की मांग की है। नोटिस में पार्टी नेतृत्व को मांगों पर कार्रवाई के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। ऐसा नहीं होने पर आगे कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखने की बात कही गई है।

    NCP ने आरोपों को बताया गलत
    वहीं, NCP प्रवक्ता सूरज चव्हाण ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि सच्चिदानंद सिंह 26 फरवरी को आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में मौजूद थे और उन्होंने हाथ उठाकर सुनेत्रा पवार के पक्ष में मतदान किया था। चव्हाण ने दावा किया कि सुनेत्रा पवार का चुनाव सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कराया गया था। फिलहाल NCP में अध्यक्ष पद को लेकर उठे इस विवाद पर आगे की स्थिति कानूनी प्रक्रिया और पार्टी के रुख पर निर्भर करेगी।

  • आगरा में फ्रिज की बर्फ में दिखी शिवलिंग जैसी आकृति, दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, लोग कर रहे पूजा-अर्चना

    आगरा में फ्रिज की बर्फ में दिखी शिवलिंग जैसी आकृति, दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, लोग कर रहे पूजा-अर्चना


    आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में एक घर के फ्रिज के फ्रीजर में जमी बर्फ की शिवलिंग जैसी दिखाई देने वाली आकृति इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। आकृति की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग घर पहुंचने लगे और कई श्रद्धालुओं ने इसे भगवान शिव का प्रतीक मानते हुए पूजा-अर्चना शुरू कर दी। घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही हैं।

    यह मामला आगरा के खेरिया मोड़ स्थित नगला भुजा क्षेत्र का बताया जा रहा है। जहां एक ओर कई लोग इसे आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे बर्फ के प्राकृतिक जमाव का परिणाम मान रहे हैं।

    फ्रीजर में नजर आई शिवलिंग जैसी आकृति
    परिवार के सदस्यों के अनुसार, जब उन्होंने फ्रिज खोला तो फ्रीजर में जमी बर्फ के बीच एक ऐसी आकृति दिखाई दी, जो देखने में शिवलिंग जैसी प्रतीत हो रही थी। इसकी सूचना पड़ोसियों और परिचितों तक पहुंची तो लोगों का वहां आना शुरू हो गया।

    देखते ही देखते घर के बाहर श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई। कई लोगों ने हाथ जोड़कर भगवान शिव का स्मरण किया, जबकि कुछ श्रद्धालुओं ने जल, फूल और बेलपत्र अर्पित कर पूजा की। पूरे इलाके में ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारे भी सुनाई दिए। स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह से शाम तक बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते रहे।

    अमरनाथ हिमलिंग से की जा रही तुलना
    घटना के बाद कुछ श्रद्धालुओं ने इस आकृति की तुलना जम्मू-कश्मीर स्थित अमरनाथ गुफा में बनने वाले प्राकृतिक हिमलिंग से की। इसी दौरान मोहल्ले के एक बाबा भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने उपस्थित लोगों को अमरनाथ गुफा से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं तथा वहां रहने वाले कबूतरों के जोड़े की कथा सुनाई। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग वहां मौजूद रहे।

    पूजा-अर्चना और चढ़ावा भी शुरू
    स्थानीय लोगों के मुताबिक, घटना की जानकारी फैलने के बाद श्रद्धालुओं ने मौके पर पूजा-पाठ शुरू कर दिया। कई लोगों ने जलाभिषेक किया, फूल और प्रसाद अर्पित किए। बताया जा रहा है कि श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ावा भी चढ़ाया जा रहा है। हालांकि यह पूरी गतिविधि स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था के आधार पर हो रही है।

    वैज्ञानिक नजरिए से क्या है वजह?
    विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रिज या फ्रीजर के भीतर तापमान, नमी, हवा के प्रवाह और पानी के जमने की प्रक्रिया के कारण बर्फ कई तरह की आकृतियां बना सकती है। कई बार ये आकृतियां किसी परिचित वस्तु, चेहरे या धार्मिक प्रतीक जैसी दिखाई देती हैं।

    मनोविज्ञान में इस प्रवृत्ति को ‘पैरेडोलिया (Pareidolia)’ कहा जाता है, जिसमें मानव मस्तिष्क अनियमित आकृतियों में परिचित चेहरे, आकृतियां या धार्मिक प्रतीकों जैसी छवि पहचान लेता है। वैज्ञानिक दृष्टि से ऐसी आकृतियों का बनना असामान्य नहीं माना जाता।

    सोशल मीडिया पर दो राय
    घटना के वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस विषय पर बहस छिड़ गई है। एक वर्ग इसे भगवान शिव से जुड़ा चमत्कार मान रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे प्राकृतिक प्रक्रिया का परिणाम बता रहा है। कई लोगों ने धार्मिक आस्था का सम्मान करने की बात कही है, वहीं कुछ लोगों का मानना है कि ऐसे मामलों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी समझना जरूरी है। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने यह भी सुझाव दिया कि यदि यह केवल बर्फ का प्राकृतिक जमाव है, तो समय के साथ उसके पिघलने से स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी।

  • 'वक्फ बोर्ड की जांच हो तो सामने आएगा बड़ा घोटाला', मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने सीएम योगी को लिखा पत्र

    'वक्फ बोर्ड की जांच हो तो सामने आएगा बड़ा घोटाला', मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने सीएम योगी को लिखा पत्र


    बरेली। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बोर्ड में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि वक्फ बोर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो अरबों-खरबों रुपये की कथित अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर विस्तृत जांच की मांग की है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौलाना रिजवी ने कहा कि केवल बरेली जिले में ही वक्फ की जमीनों से जुड़े करोड़ों और अरबों रुपये के कथित घोटाले हुए हैं। उनका आरोप है कि वक्फ संपत्तियों का उपयोग जनकल्याण के बजाय निजी हितों के लिए किया गया और सरकार को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।

    गरीबों के लिए बनी थी वक्फ संपत्ति
    मौलाना ने कहा कि वक्फ की जमीनें गरीब मुसलमानों, महिलाओं, बच्चों, जरूरतमंदों और बेसहारा लोगों की मदद के उद्देश्य से दान की गई थीं। इन संपत्तियों से होने वाली आय का उपयोग इन्हीं वर्गों के कल्याण पर होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। उनका दावा है कि आज भी बड़ी संख्या में गरीब मुसलमान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, जबकि वक्फ की जमीनों से कुछ लोग करोड़ों रुपये का कारोबार कर रहे हैं।

    समाजवादी पार्टी के कार्यकाल पर लगाए आरोप
    मौलाना रिजवी ने आरोप लगाया कि वक्फ की जमीनों की कथित खरीद-फरोख्त समाजवादी पार्टी की सरकारों के दौरान सबसे अधिक हुई। उनके अनुसार, जब-जब समाजवादी पार्टी की सरकार सत्ता में रही, तब सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड के जिम्मेदार लोगों ने सरकारी संरक्षण में वक्फ संपत्तियों के सौदे किए।

    उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव 1989-91, 1993-95 और 2003-07 तक मुख्यमंत्री रहे, जबकि अखिलेश यादव 2012 से 2017 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। मौलाना का दावा है कि इन चारों कार्यकालों में अधिकांश समय आजम खान के पास अल्पसंख्यक, वक्फ और हज मंत्रालय की जिम्मेदारी रही।

    चेयरमैनों की नियुक्ति और कार्यशैली पर भी सवाल
    मौलाना ने आरोप लगाया कि आजम खान की पसंद के लोगों को वक्फ बोर्ड में चेयरमैन और सदस्य बनाया गया। उन्होंने बताया कि जुफर अहमद फारूकी वर्ष 2000-01 तक, अमीर आलम 2001-03 तक, हाफिज उस्मान 2004-09 तक और इसके बाद जुफर अहमद फारूकी 2010 से 2026 तक सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन रहे। उनके अनुसार, इन कार्यकालों में बोर्ड के भीतर मनमाने ढंग से काम हुआ और कई कथित अनियमितताएं हुईं।

    ‘वक्फ की जमीनों का हुआ बंटवारा’
    मौलाना ने दावा किया कि सुन्नी और शिया दोनों वक्फ बोर्डों के कई जिम्मेदार पदाधिकारियों ने वक्फ की जमीनों का दुरुपयोग किया। उनका आरोप है कि जो भी व्यक्ति बोर्ड में सदस्य या पदाधिकारी बना, उसने अपने क्षेत्र में वक्फ की जमीनों का बंटवारा कराया। उन्होंने कहा कि पूर्वजों ने वक्फ संपत्तियां इसलिए दान की थीं ताकि उनकी आय से गरीबों, यतीमों और जरूरतमंद लोगों की सहायता की जा सके, लेकिन इस उद्देश्य को पूरा नहीं किया गया।

    स्कूल, अस्पताल और मदरसे बनाने का उद्देश्य अधूरा
    मौलाना ने कहा कि वक्फ संपत्तियों पर स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और मदरसे विकसित किए जाने थे, लेकिन कथित वक्फ माफिया के कारण यह उद्देश्य पूरा नहीं हो सका। उनका आरोप है कि इन संपत्तियों का लाभ आम लोगों के बजाय सीमित लोगों तक ही पहुंचा।

    मुख्यमंत्री से की कार्रवाई की मांग
    मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि वक्फ बोर्ड द्वारा बेची गई सभी जमीनों की जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने दावा किया कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले से भी बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। उनका यह भी कहना है कि यदि वक्फ की आय का सही उपयोग गरीब मुसलमानों के कल्याण पर किया जाए तो उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार संभव है।

  • लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन, कल से दौड़ेंगे वाहन, 35-45 मिनट में पूरा होगा सफर

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन, कल से दौड़ेंगे वाहन, 35-45 मिनट में पूरा होगा सफर

    लखनऊ। लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा करने वाले लाखों लोगों के लिए मंगलवार, 14 जुलाई से सफर आसान होने जा रहा है। करीब 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को आम वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा। लगभग 4,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह छह-लेन एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की प्रमुख हाई-स्पीड सड़क परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना का लोकार्पण सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में किया।

    उन्नाव में हुआ लोकार्पण, तकनीकी प्रदर्शनी भी देखी
    उन्नाव के झाऊखेड़ा गांव में आयोजित कार्यक्रम में एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया गया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे। कार्यक्रम से पहले अतिथियों ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा लगाई गई तकनीकी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। एनएचएआई अधिकारियों ने एक्सप्रेसवे के निर्माण में उपयोग की गई आधुनिक तकनीक, सुरक्षा मानकों और भविष्य की विस्तार योजनाओं की जानकारी भी दी।

    टोल वसूली शुरू, इन वाहनों के प्रवेश पर रोक
    एक्सप्रेसवे पर मंगलवार से टोल वसूली भी शुरू हो गई है। चूंकि यह एक नियंत्रित (कंट्रोल्ड एक्सेस) हाई-स्पीड कॉरिडोर है, इसलिए सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केवल कार, जीप, बस, ट्रक और अन्य मोटर चालित वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई है। वहीं बाइक, स्कूटर, ऑटो, विक्रम, साइकिल, ट्रैक्टर, ई-रिक्शा, पशु चालित वाहन और अन्य धीमी गति वाले वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है।

    डेढ़-दो घंटे की जगह 35 से 45 मिनट में पहुंचेगा सफर
    अब तक लखनऊ और कानपुर के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर ट्रैफिक और जाम के कारण यात्रा में करीब डेढ़ से दो घंटे का समय लग जाता था। नए एक्सप्रेसवे के शुरू होने से यही दूरी अब महज 35 से 45 मिनट में तय की जा सकेगी। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर यातायात का दबाव कम होगा और उन्नाव सहित आसपास के क्षेत्रों में लगने वाले जाम से भी राहत मिलने की उम्मीद है।

    उन्नाव को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ
    एक्सप्रेसवे को उन्नाव-लालगंज मार्ग और कानपुर-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ा गया है। इसके अलावा गंगाघाट, करेर पतारी, कोरारी और अमरसस के पास इंटरचेंज बनाए गए हैं, जिससे उन्नाव, रायबरेली, कानपुर और लखनऊ के बीच आवागमन अधिक सुगम होगा।

    उद्योग और व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार
    यह एक्सप्रेसवे कानपुर के औद्योगिक क्षेत्र और लखनऊ के प्रशासनिक व आईटी केंद्र के बीच तेज कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएगा। इससे माल ढुलाई की लागत और समय दोनों में कमी आएगी, जिससे उद्योगों और व्यापार को लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही शिक्षा, चिकित्सा और नौकरी के लिए रोजाना आने-जाने वाले लोगों को भी समय और ईंधन की बचत का सीधा फायदा मिलेगा।

    एक्सप्रेसवे की प्रमुख विशेषताएं
    लंबाई: 63 किलोमीटर का छह-लेन एक्सप्रेसवे।
    लागत: लगभग 4,200 करोड़ रुपये।
    यात्रा समय: लखनऊ से कानपुर की दूरी अब 35 से 45 मिनट में पूरी होगी।
    बेहतर कनेक्टिविटी: उन्नाव, रायबरेली, कानपुर और लखनऊ को आधुनिक इंटरचेंज से जोड़ा गया।
    सुरक्षा नियम: बाइक, ऑटो, ट्रैक्टर, साइकिल और ई-रिक्शा सहित धीमी गति वाले वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध।

  • 24.90 लाख की लूट में तीन सिपाही गिरफ्तार, झांसी लाकर पूछताछ, छह लोगों पर दर्ज हुई FIR

    24.90 लाख की लूट में तीन सिपाही गिरफ्तार, झांसी लाकर पूछताछ, छह लोगों पर दर्ज हुई FIR


    झांसी। सूरत के एक ड्राई फ्रूट कारोबारी के मुंशी से 24.90 लाख रुपये की कथित लूट के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया है। शनिवार देर रात जालौन में दबिश देकर तीनों को हिरासत में लिया गया, जिसके बाद रविवार शाम उन्हें पूछताछ के लिए झांसी लाया गया।

    कोतवाली थाना पुलिस ने इस मामले में तीन सिपाहियों समेत छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप सामने आने के बाद जालौन के पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने तीनों सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

    झांसी के तीन युवकों की भी तलाश
    जांच में झांसी के तीन युवकों की कथित संलिप्तता भी सामने आई है। पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, लूटी गई रकम का बड़ा हिस्सा इन्हीं के पास होने की आशंका जताई जा रही है।

    कारोबारी के मुंशी का किया था अपहरण
    पुलिस के मुताबिक, सूरत निवासी ड्राई फ्रूट कारोबारी जितेंद्र पटेल के मुंशी किशन पांचाल (30) का गुरुवार शाम काले रंग की क्रेटा कार में आए आरोपियों ने कथित रूप से अपहरण कर लिया था। आरोप है कि तीन सिपाहियों ने अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर रुपये से भरा बैग लूट लिया और बाद में किशन पांचाल को कानपुर बाईपास के पास छोड़कर फरार हो गए।

    CCTV फुटेज से हुई पहचान
    घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच में तीन पुलिसकर्मी वर्दी में दिखाई दिए। उनकी पहचान राघवेंद्र राजपूत, नीरज राजपूत और मनोज के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद तीनों झांसी-कानपुर हाईवे से उरई की ओर भाग गए थे।

    लोकेशन ट्रैक कर हुई गिरफ्तारी
    मामले के खुलासे के लिए स्वॉट टीम सहित चार पुलिस टीमें गठित की गई थीं। तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने शनिवार देर रात उरई में दबिश देकर तीनों आरोपियों को हिरासत में लिया। रविवार शाम उन्हें झांसी लाकर क्राइम ब्रांच कार्यालय में पूछताछ की गई। पुलिस अब पूछताछ के आधार पर पूरी साजिश और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।

    झांसी में हुई थी तीनों की दोस्ती
    जांच में सामने आया है कि मनोज, राघवेंद्र और नीरज पिछले तीन वर्षों से जालौन पुलिस लाइन में तैनात थे। इससे पहले तीनों पीएसी के माध्यम से झांसी पुलिस लाइन में साथ कार्य कर चुके थे, जहां उनकी आपस में दोस्ती हुई थी। पुलिस का कहना है कि आरोपियों को पहले से जानकारी थी कि मुंशी किशन पांचाल बड़ी नकदी लेकर आने वाला है। वारदात वाले दिन राघवेंद्र और मनोज बिना सूचना झांसी पहुंचे थे, जबकि नीरज छुट्टी लेकर आया था।

    लूटी गई रकम की बरामदगी के प्रयास जारी
    पुलिस झांसी के तीन अन्य संदिग्ध युवकों की तलाश के साथ-साथ 24.90 लाख रुपये की लूटी गई रकम बरामद करने का प्रयास भी कर रही है। झांसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बीबीजीटीएस मूर्ति ने बताया कि तीनों गिरफ्तार सिपाहियों से पूछताछ जारी है। साथ ही मामले में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और लूटी गई राशि की बरामदगी के लिए पुलिस टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं।

  • बजट की कमी से थमी 'ड्रोन दीदी' योजना की रफ्तार, प्रशिक्षण के एक साल बाद भी नहीं मिले कृषि ड्रोन

    बजट की कमी से थमी 'ड्रोन दीदी' योजना की रफ्तार, प्रशिक्षण के एक साल बाद भी नहीं मिले कृषि ड्रोन

    झांसी। महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई ड्रोन दीदी योजना झांसी में बजट के अभाव में आगे नहीं बढ़ पा रही है। बड़ागांव ब्लॉक की तीन महिला किसानों ने एक वर्ष पहले लखनऊ में ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण पूरा किया था, लेकिन अब तक उन्हें कृषि ड्रोन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। ऐसे में प्रशिक्षण के बावजूद वे स्वरोजगार की शुरुआत नहीं कर सकी हैं।

    प्रशिक्षण पूरा, लेकिन संसाधनों का इंतजार
    योजना के तहत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं का चयन कर उन्हें ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के बाद कृषि कार्यों के लिए ड्रोन उपलब्ध कराया जाता है, ताकि महिलाएं खेतों में उर्वरक और कीटनाशक के छिड़काव जैसी सेवाएं देकर आय अर्जित कर सकें।

    पिछले वर्ष बड़ागांव ब्लॉक की तीन महिलाओं को लखनऊ में प्रशिक्षण दिलाया गया था। हालांकि, प्रशिक्षण पूरा हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन बजट जारी न होने के कारण उन्हें अब तक ड्रोन नहीं मिल पाए हैं। इससे वे सीखी गई तकनीक का व्यावहारिक उपयोग नहीं कर पा रही हैं।

    एक ड्रोन की लागत करीब 10 लाख रुपये
    एनआरएलएम के तहत चयनित महिलाओं को लगभग 10 लाख रुपये लागत का कृषि ड्रोन उपलब्ध कराया जाता है। इन ड्रोन की मदद से वे किसानों के खेतों में उर्वरक, कीटनाशक और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव कर नियमित आय अर्जित कर सकती हैं।

    पहले चयनित महिलाओं ने पेश की मिसाल
    योजना के सफल परिणाम भी सामने आ चुके हैं। करीब दो वर्ष पहले बड़ागांव क्षेत्र के गड़मऊ गांव की रानी देवी और हेमवती को हैदराबाद में ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण के बाद दोनों को ड्रोन उपलब्ध कराए गए और वर्तमान में वे किसानों के खेतों में ड्रोन के माध्यम से छिड़काव कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि नई चयनित महिलाओं को भी समय पर ड्रोन उपलब्ध करा दिए जाएं तो वे भी इसी तरह अपना स्वरोजगार स्थापित कर सकेंगी।

    क्या है ड्रोन दीदी योजना?
    ड्रोन दीदी योजना का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ना है। इसके तहत महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जाता है और बाद में कृषि ड्रोन उपलब्ध कराया जाता है। इन ड्रोन की मदद से कम समय में उर्वरक, कीटनाशक और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव किया जा सकता है। इससे किसानों का समय और लागत दोनों बचते हैं, जबकि प्रशिक्षित महिलाओं के लिए आय का नया स्रोत तैयार होता है।

    बजट मिलते ही दिए जाएंगे ड्रोन
    एनआरएलएम, झांसी के प्रभारी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि बजट उपलब्ध होते ही ड्रोन दीदी योजना के तहत चयनित महिला किसानों को कृषि ड्रोन उपलब्ध करा दिए जाएंगे, ताकि वे जल्द से जल्द कृषि सेवाएं शुरू कर सकें।