Category: Religious Astrology

  • 29 मई का राशिफल: किस राशि की चमकेगी किस्मत और किसे बरतनी होगी सावधानी

    29 मई का राशिफल: किस राशि की चमकेगी किस्मत और किसे बरतनी होगी सावधानी


    नई दिल्ली। 29 मई 2026 शुक्रवार का दिन कई राशियों के लिए नई संभावनाएं और सकारात्मक बदलाव लेकर आने वाला है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति जहां कुछ राशियों को आर्थिक लाभ और करियर में सफलता दिलाएगी, वहीं कुछ लोगों को लेनदेन और रिश्तों में सतर्क रहने की जरूरत होगी। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल।

    मेष राशि के जातकों के लिए दिन व्यापार और साझेदारी के मामलों में लाभकारी रहेगा। रुके हुए काम पूरे होंगे और भूमि-भवन से जुड़े मामलों में सफलता मिल सकती है। नेतृत्व क्षमता मजबूत होगी और आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।

    वृष राशि वालों को आज अपने बजट पर विशेष ध्यान देना होगा। खर्चों में संतुलन बनाए रखना जरूरी रहेगा। किसी भी प्रकार के उधार लेनदेन से दूरी बनाकर रखें। कार्यक्षेत्र में कला और कौशल के दम पर पहचान मजबूत होगी।

    मिथुन राशि के लोगों के लिए दिन उत्साह से भरा रहेगा। मित्रों और करीबियों का सहयोग मिलेगा। आर्थिक लाभ के नए अवसर बनेंगे और कार्यक्षेत्र में नए प्रस्ताव मिल सकते हैं। सीखने और सिखाने की दिशा में भी प्रगति होगी।

    कर्क राशि वालों का ध्यान घर-परिवार और निजी सुख-सुविधाओं पर रहेगा। पारिवारिक रिश्तों में मजबूती आएगी। कार्यक्षेत्र में संयम और सम्मानजनक व्यवहार आपको लाभ दिलाएगा।

    सिंह राशि के जातकों को पद और प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं। सामाजिक दायरा बढ़ेगा और प्रभावशाली लोगों से संपर्क मजबूत होंगे। कार्यक्षेत्र में आपकी दूरदर्शिता लाभ दिलाएगी।

    कन्या राशि वालों के लिए दिन रिश्तों को मजबूत करने वाला रहेगा। पुराने मतभेद दूर होंगे और प्रियजनों से मुलाकात संभव है। सामाजिक सम्मान बढ़ेगा और लोग आपकी बातों को महत्व देंगे।

    तुला राशि के जातक अपने काम और व्यापार में नया प्रयोग कर सकते हैं। साझेदारी के व्यवसाय में सफलता मिलेगी और आय के नए स्रोत बनेंगे। रचनात्मकता से लाभ होगा।

    वृश्चिक राशि वालों को आर्थिक मामलों में बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। लेनदेन में लापरवाही नुकसान पहुंचा सकती है। खर्चों पर नियंत्रण रखें और बजट बनाकर आगे बढ़ें।

    धनु राशि वालों के लिए दिन सबसे ज्यादा लाभकारी साबित हो सकता है। आर्थिक लाभ उम्मीद से बेहतर रहेगा। पढ़ाई और करियर से जुड़ी योजनाओं को गति मिलेगी। आत्मविश्वास के दम पर आप नई उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

    मकर राशि के लोगों को कार्यक्षेत्र में अनुशासन और बेहतर प्रबंधन का फायदा मिलेगा। वाहन और सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी के संकेत हैं। वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा।

    कुंभ राशि वालों का भाग्य पक्ष मजबूत रहेगा। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। लंबी दूरी की यात्रा के योग बन सकते हैं। करियर में नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के अवसर मिलेंगे।

    मीन राशि के जातकों को अपनी वाणी और व्यवहार में संतुलन बनाए रखना होगा। आर्थिक मामलों में अचानक बदलाव संभव हैं। किसी भी निर्णय में जल्दबाजी से बचें और अपनों की सलाह को नजरअंदाज न करें।

    सभी राशियों के लिए आज मां दुर्गा की पूजा और ‘ओम् शुं शुक्राय नमः’ मंत्र का जाप शुभ फल देने वाला माना गया है। मीठा बांटने और विनम्र व्यवहार रखने से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी।

  • Hast Rekha: हथेली के सूर्य पर्वत पर हों ये 5 निशान तो मिलती है खूब प्रसिद्धि, धन-दौलत की भी नहीं रहती कमी

    Hast Rekha: हथेली के सूर्य पर्वत पर हों ये 5 निशान तो मिलती है खूब प्रसिद्धि, धन-दौलत की भी नहीं रहती कमी


    नई दिल्ली। हस्तरेखा शास्त्र में हथेली की रेखाओं और पर्वतों का विशेष महत्व बताया गया है। इनमें सूर्य पर्वत को बेहद प्रभावशाली माना जाता है। यह पर्वत अनामिका यानी रिंग फिंगर के नीचे स्थित होता है और व्यक्ति की प्रसिद्धि, आत्मविश्वास, मान-सम्मान, सरकारी सफलता और कला के क्षेत्र में उपलब्धियों का संकेत देता है। हस्तरेखा विशेषज्ञों के मुताबिक सूर्य पर्वत पर बने कुछ खास चिह्न जीवन में बड़ी सफलता और आर्थिक समृद्धि का संकेत माने जाते हैं।

    अगर किसी व्यक्ति की हथेली में सूर्य पर्वत उभरा हुआ और साफ दिखाई देता है तो यह शुभ माना जाता है। वहीं इस पर्वत पर मौजूद कुछ विशेष निशान भविष्य के कई गहरे राज खोलते हैं। आइए जानते हैं सूर्य पर्वत पर बनने वाले उन 5 शुभ चिह्नों के बारे में जो व्यक्ति को प्रसिद्धि और धन लाभ दिला सकते हैं।

    सबसे पहले बात करते हैं वर्ग यानी चौकोर निशान की। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार सूर्य पर्वत पर वर्ग का निशान होना बेहद शुभ माना जाता है। ऐसे लोग समाज में अलग पहचान बनाते हैं और उन्हें खूब सम्मान मिलता है। ये लोग सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहते हैं और सरकारी क्षेत्र से भी लाभ प्राप्त करते हैं। इनका जीवन आमतौर पर सुख-सुविधाओं से भरपूर रहता है।

    सूर्य पर्वत पर वृत्त यानी गोल निशान भी खास महत्व रखता है। यह चिह्न बहुत कम लोगों की हथेली में दिखाई देता है। जिन लोगों के हाथ में यह निशान होता है, उन्हें जीवन में विदेश यात्रा के कई अवसर मिलते हैं। साथ ही ऐसे लोग मेहनत के दम पर बड़ी सफलता हासिल करते हैं और धीरे-धीरे उनका भाग्योदय होता है।

    त्रिकोण का निशान भी सूर्य पर्वत पर अत्यंत शुभ माना गया है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की हथेली में यह चिह्न होता है, वे कला, संगीत, अभिनय या रचनात्मक क्षेत्रों में खूब नाम कमाते हैं। उनकी प्रतिभा लोगों को आकर्षित करती है और समाज में उनकी विशेष पहचान बनती है।

    इसके अलावा सूर्य पर्वत पर नक्षत्र जैसा चिह्न होना भी बेहद शुभ संकेत माना जाता है। ऐसे लोगों के सरकारी नौकरी पाने की संभावना काफी मजबूत मानी जाती है। ये लोग प्रशासनिक या सरकारी क्षेत्र में ऊंचे पद तक पहुंच सकते हैं। साथ ही इन्हें जीवन में धन, प्रतिष्ठा और सामाजिक सम्मान भी भरपूर मिलता है।

    हस्तरेखा शास्त्र में सूर्य पर्वत पर कई सीधी रेखाओं का होना भी शुभ संकेत माना गया है। यह व्यक्ति के मजबूत करियर और मेहनत से सफलता पाने की ओर इशारा करता है। ऐसे लोग जिम्मेदारियों को अच्छी तरह निभाते हैं और अपने कार्यक्षेत्र में ऊंचा मुकाम हासिल करते हैं।

    हालांकि हस्तरेखा शास्त्र को आस्था और पारंपरिक मान्यताओं से जोड़कर देखा जाता है। इसे वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जाता, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में लोग हस्तरेखा के जरिए अपने भविष्य और व्यक्तित्व को समझने की कोशिश करते हैं।

  • चारधाम यात्रा पर भारी पड़ रही ऊंचाई और गर्मी, 39 दिन में 105 श्रद्धालुओं की मौत

    चारधाम यात्रा पर भारी पड़ रही ऊंचाई और गर्मी, 39 दिन में 105 श्रद्धालुओं की मौत


    नई दिल्ली । उत्तराखंड की चारधाम यात्रा इस बार आस्था के साथ-साथ चिंता का विषय भी बनती जा रही है। यात्रा शुरू होने के महज 39 दिनों के भीतर 105 से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। इनमें ज्यादातर मौतें हार्ट अटैक, हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, सांस की तकलीफ और पुरानी बीमारियों के कारण हुई हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार मौतों का आंकड़ा कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ा है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और यात्रा प्रबंधन पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल 14 मई तक 40 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी, लेकिन इसके बाद बढ़ती गर्मी और लगातार बढ़ती भीड़ के बीच सिर्फ 14 दिनों में 65 और लोगों ने जान गंवा दी। सबसे ज्यादा 50 मौतें केदारनाथ धाम में हुई हैं, जबकि बद्रीनाथ में 30, यमुनोत्री में 15 और गंगोत्री-गौमुख क्षेत्र में 10 श्रद्धालुओं की मौत दर्ज की गई है।

    हाल ही में टिहरी जिले के देवप्रयाग में महाराष्ट्र से आए दो श्रद्धालुओं की हार्ट अटैक से मौत हो गई। मृतकों में 49 वर्षीय किशन नरहरि और 81 वर्षीय विमल ज्ञानोबा शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ज्यादातर श्रद्धालु ऊंचाई वाले इलाकों में शरीर पर पड़ने वाले दबाव को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका खामियाजा जान गंवाकर भुगतना पड़ रहा है।

    चारधाम यात्रा में इस बार रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिल रही है। अब तक 23 लाख से ज्यादा श्रद्धालु गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम पहुंच चुके हैं, जबकि रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा 42 लाख के पार पहुंच गया है। सबसे ज्यादा भीड़ केदारनाथ धाम में उमड़ी है, जहां 9 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। बद्रीनाथ में 6 लाख 42 हजार, यमुनोत्री और गंगोत्री में 4-4 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच चुके हैं।

    सरकार लगातार दावा कर रही है कि यात्रा मार्ग पर पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। मेडिकल कैंप, डॉक्टर, एम्बुलेंस और स्वास्थ्य टीमों की तैनाती की गई है। यात्रा शुरू होने से पहले एडवाइजरी जारी कर बुजुर्गों, हृदय रोगियों, हाई ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई थी। बावजूद इसके लगातार बढ़ रही मौतों ने यात्रा की चुनौतियों को उजागर कर दिया है।

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सुबोध उनियाल ने कहा कि कई श्रद्धालु अति उत्साह में शरीर के संकेतों को नजरअंदाज कर तेजी से यात्रा पूरी करने की कोशिश करते हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की कमी और लगातार चढ़ाई की वजह से हार्ट अटैक और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि अगर सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द या कमजोरी महसूस हो तो तुरंत यात्रा रोककर चिकित्सकीय मदद लें।

    चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हुई थी। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। कपाट खुलने के बाद से ही चारों धामों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।

    आस्था के इस महापर्व में जहां करोड़ों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, वहीं लगातार बढ़ती मौतों ने यह साफ कर दिया है कि पहाड़ी और ऊंचाई वाले इलाकों की यात्रा को हल्के में लेना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

  • व्रत-त्योहारों का विशेष संगम बनेगा जून 2026, निर्जला एकादशी और कामाख्या अंबुबाची मेला रहेंगे मुख्य आकर्षण

    व्रत-त्योहारों का विशेष संगम बनेगा जून 2026, निर्जला एकादशी और कामाख्या अंबुबाची मेला रहेंगे मुख्य आकर्षण

    नई दिल्ली । जून 2026 का महीना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस दौरान कई प्रमुख व्रत, पर्व और धार्मिक आयोजन एक साथ देखने को मिलेंगे। पूरे महीने श्रद्धालुओं के लिए उपवास, पूजा-पाठ और तीर्थ से जुड़े अवसरों की श्रृंखला रहेगी, जिससे यह अवधि भक्ति और परंपरा का विशेष संगम बन जाएगी। इस महीने का धार्मिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसमें कई ऐसे व्रत और पर्व शामिल हैं जिनका पालन देशभर में बड़ी आस्था के साथ किया जाता है।

    जून की शुरुआत से ही विभिन्न मासिक व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हो जाएगा। श्रद्धालु इस दौरान उपवास रखकर भगवान की आराधना करेंगे और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होगा। महीने के मध्य में एकादशी, प्रदोष व्रत और अमावस्या जैसे महत्वपूर्ण पर्वों का संयोग देखने को मिलेगा, जिन्हें हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इन अवसरों पर भक्तगण आध्यात्मिक शुद्धि और मन की शांति के लिए विशेष साधना करते हैं।

    मध्य जून में ज्येष्ठ मास से जुड़ी धार्मिक परंपराओं का विशेष महत्व रहेगा, जिसमें दान-पुण्य और व्रत का पालन प्रमुख रूप से किया जाता है। इस अवधि में विभिन्न देवताओं की आराधना के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है। यह समय आध्यात्मिक दृष्टि से आत्मचिंतन और साधना का माना जाता है, जिसमें लोग अपने जीवन में सकारात्मकता और संतुलन लाने का प्रयास करते हैं।

    जून 2026 का सबसे महत्वपूर्ण व्रत निर्जला एकादशी रहेगा, जिसे वर्ष की सबसे कठिन एकादशियों में से एक माना जाता है। इस व्रत में श्रद्धालु बिना जल ग्रहण किए उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु की विशेष आराधना करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत के पालन से सभी एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है।

    इसी महीने असम के गुवाहाटी स्थित कामाख्या मंदिर में प्रसिद्ध अंबुबाची मेला भी आयोजित होगा, जो शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यह मेला 22 जून से 26 जून तक आयोजित होने की संभावना है, जिसमें देश-विदेश से श्रद्धालु शामिल होते हैं। मान्यता के अनुसार इस दौरान देवी कामाख्या का वार्षिक रजस्वला काल माना जाता है, जिसके चलते मंदिर कुछ दिनों के लिए बंद रहता है और बाद में विशेष पूजा के साथ पुनः दर्शन शुरू होते हैं। यह आयोजन तांत्रिक साधना और शक्ति आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है।

    महीने के अंत में वट पूर्णिमा व्रत और शनि प्रदोष जैसे कई अन्य धार्मिक पर्व भी मनाए जाएंगे, जिनका विशेष महत्व परिवारिक सुख-समृद्धि और आस्था से जुड़ा होता है। वट पूर्णिमा विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला व्रत है, जिसमें वे वट वृक्ष की पूजा कर अपने परिवार की दीर्घायु और खुशहाली की कामना करती हैं। इस दौरान मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना का माहौल रहता है।

    इस प्रकार जून 2026 का पूरा महीना धार्मिक गतिविधियों, व्रत-त्योहारों और आध्यात्मिक आयोजनों से परिपूर्ण रहेगा, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था, परंपरा और भक्ति का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।

  • पद्मिनी एकादशी आज….. तीन साल में एक बार आता है ये व्रत… जानें इसके नियम एवं विधि

    पद्मिनी एकादशी आज….. तीन साल में एक बार आता है ये व्रत… जानें इसके नियम एवं विधि


    नई दिल्ली।
    पद्मिनी एकादशी (Padmini Ekadashi 2026)/ कमला एकादशी (Kamala Ekadashi) का व्रत अधिक मास में किया जाता है। पुरुषोत्तम मास (Purushottam month) में एकादशी तिथि होने के कारण पद्मिनी एकादशी का व्रत तीन साल में एक बार ही आता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की अधिक कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत की महिमा का वर्णन पद्म पुराण में भी किया गया है।

    मान्यता है कि श्रद्धा भाव से जो कोई भी इस व्रत को करेगा उसे जन्म जन्म के पापों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही वह व्यक्ति अक्षय पुण्य प्राप्त करता है। इस व्रत को करने वालों को विशेष नियमों का पालन करना चाहिए। साथ ही इस दिन दान पुण्य करने से व्यक्ति की सारी इच्छाएं पूरी होती हैं। आइए जानते हैं पद्मिनी एकादशी पर किन किन चीजों का दान करना चाहिए साथ ही जानें व्रत का नियम।


    पद्मिनी एकादशी व्रत के नियम

    पद्म पुराण में बताया गया है कि इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए। साथ ही हाथ में थोड़ा जल लेकर व्रत का संकल्प लें। इस दिन विशेष रुप से पीले रंग के वस्त्र धारण करें। एकादशी के दिन अन्न का त्याग करना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन ही करना शुभ फलदायी माना गया है। एकादशी के व्रत में नमक नहीं खाना चाहिए। पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही इस दिन बाल आदि कटवाना नहीं चाहिए।

    पद्म पुराण में बताया गया है कि पद्मिनी एकादशी के दिन जो व्यक्ति घर पर भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करता है उसे एक गुना फल मिलता है। वहीं, नदी के तट पर जप करने से दो गुना, गोशाला में जाकर जप करने से सहस्त्र गुना, अग्निहोत्र गृहं में जप करने से एक हजार गुना, भगवान शिव के मंदिर में जप करने और तुलसी के पास जप करने से लाख गुना फल मिलता है।


    पद्मिनी एकादशी पर क्या दान करें

    पद्मिनी एकादशी के दिन अन्न और फल का दान करना बहुत ही पुण्य फलदायी माना गया है। इस दिन अन्न और फल का दान करना चाहिए। पुरुषोत्तम मास के दौरान अधिक गर्मी के चलते जल से भरा घड़ा, मौसमी फल जैसे आम, खरबूजा, तरबूज और बाकी फलों का दान करना चाहिए। अधिक मास के दौरान गुड़ और तिल का दान करना भी सर्वोत्तम माना गया है। इस दिन जरुरतमंद लोगों को चप्पल, वस्त्र और छाता आदि चीजों का दान करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है।

    पुरुषोत्तम मास की यह पद्मिनी एकादशी तीन साल में एक बार आती है इसलिए इस दिन दान के अलावा मंदिरों में दीप दान भी करना चाहिए। मंदिर में घी के कम से कम पांच दीपक जरुर जलाने चाहिए।

  • घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए जानिए तुलसी रखने की 3 सबसे शुभ जगहें

    घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए जानिए तुलसी रखने की 3 सबसे शुभ जगहें


    नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति में तुलसी के पौधे को विशेष महत्व दिया जाता है। यह केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं माना जाता, बल्कि वास्तु शास्त्र में भी इसे सकारात्मक ऊर्जा और शुभ प्रभाव से जोड़कर देखा जाता है। कई घरों में तुलसी का पौधा नियमित पूजा और परंपराओं का हिस्सा होता है। मान्यता है कि सही स्थान पर रखा गया तुलसी का पौधा घर के वातावरण को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है और परिवार में सुख-शांति बनाए रखने में योगदान दे सकता है।

    घर के वातावरण पर विशेष प्रभाव
    वास्तु शास्त्र के अनुसार तुलसी के पौधे को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां उसे पर्याप्त धूप और स्वच्छ वातावरण मिल सके। माना जाता है कि स्वस्थ और हरा-भरा तुलसी का पौधा घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाने का काम करता है। इसी वजह से लोग तुलसी को केवल सजावट का हिस्सा नहीं बल्कि शुभता से जुड़ी मान्यताओं का केंद्र भी मानते हैं।

    पूर्व दिशा को माना गया शुभ स्थान
    तुलसी रखने के लिए घर की पूर्व दिशा को काफी शुभ माना जाता है। यह दिशा नई शुरुआत और प्रकाश का प्रतीक मानी जाती है। सुबह की पहली धूप इस दिशा में आसानी से पहुंचती है, जिससे पौधे को प्राकृतिक ऊर्जा मिलती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिशा में रखा गया तुलसी का पौधा घर के वातावरण को शांत और सकारात्मक बनाए रखने में मदद करता है।

    उत्तर-पूर्व दिशा का भी है विशेष महत्व

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार उत्तर-पूर्व दिशा को आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति की दिशा माना जाता है। इसलिए इस हिस्से में तुलसी रखने को भी शुभ बताया जाता है। कहा जाता है कि यह स्थान घर में संतुलन और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने से जुड़ा माना जाता है। कई लोग इसी कारण घर के इस हिस्से में तुलसी स्थापित करना पसंद करते हैं।

    उत्तर दिशा से जुड़ी समृद्धि की मान्यता
    कुछ वास्तु मान्यताओं में उत्तर दिशा को धन और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इस कारण कई लोग तुलसी को इस दिशा में रखने को लाभकारी मानते हैं। हालांकि इसके साथ यह भी जरूरी माना जाता है कि पौधे की नियमित देखभाल हो और उसे पर्याप्त पानी व धूप मिलती रहे। पौधे की स्वच्छता और देखरेख को भी उतना ही महत्वपूर्ण बताया जाता है।
    तुलसी का पौधा केवल धार्मिक परंपरा का हिस्सा नहीं बल्कि भारतीय जीवनशैली में एक विशेष स्थान रखता है। चाहे इसे आस्था के रूप में देखा जाए या सकारात्मक वातावरण से जोड़कर, लोग आज भी इसे घर की शुभता और शांति का प्रतीक मानते हैं।

  • जून 2026 का धार्मिक कैलेंडर तैयार परमा एकादशी से संत कबीर जयंती तक पूरे महीने रहेंगे पर्व और पूजा के खास संयोग

    जून 2026 का धार्मिक कैलेंडर तैयार परमा एकादशी से संत कबीर जयंती तक पूरे महीने रहेंगे पर्व और पूजा के खास संयोग


    नई दिल्ली । जून 2026 का महीना धार्मिक दृष्टि से बेहद खास और पुण्यदायी माना जा रहा है। इस महीने एक साथ कई बड़े व्रत त्योहार और धार्मिक आयोजन होने जा रहे हैं जिनका इंतजार श्रद्धालु पूरे साल करते हैं। ज्येष्ठ मास और अधिक मास के विशेष संयोग के कारण इस बार परमा एकादशी सोमवती अमावस्या निर्जला एकादशी वट पूर्णिमा और संत कबीर जयंती जैसे पर्व पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाए जाएंगे। वहीं असम के प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर में लगने वाला अंबुबाची मेला भी लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा।

    जून महीने की शुरुआत ही धार्मिक अनुष्ठानों के माहौल के साथ होगी। 11 जून को परमा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। अधिक मास में आने वाली इस एकादशी को अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और व्यक्ति को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

    इसके बाद 15 जून को सोमवती अमावस्या का विशेष संयोग बन रहा है। सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण दान और स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख समृद्धि बनी रहती है। इसी दिन पुरुषोत्तम मास का समापन भी होगा।

    17 जून को रंभा तृतीया व्रत रखा जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए यह व्रत करती हैं जबकि अविवाहित कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की इच्छा लेकर पूजा करती हैं।

    20 जून को मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर की पूजा का विशेष पर्व मनाया जाएगा। मान्यता है कि मां विंध्यवासिनी अपने भक्तों को भय और संकटों से मुक्ति दिलाती हैं। इस दिन देवी की पूजा अर्चना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

    22 जून को दुर्गाष्टमी और धूमावती जयंती का पर्व मनाया जाएगा। इसी दिन से 26 जून तक असम के प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर में अंबुबाची मेले का आयोजन होगा। यह मेला शक्ति साधना और देवी उपासना का सबसे बड़ा आयोजन माना जाता है जहां देश विदेश से साधु संत और श्रद्धालु पहुंचते हैं।

    25 जून को साल की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में शामिल निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इसे भीमसेनी एकादशी और पांडव एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन बिना जल ग्रहण किए उपवास करने से सभी एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त होता है। भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए यह व्रत विशेष माना गया है।

    महीने के अंत में 29 जून को वट पूर्णिमा व्रत और संत कबीर दास जयंती मनाई जाएगी। वट पूर्णिमा पर सुहागन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी उम्र की कामना करेंगी। वहीं संत कबीर जयंती पर देशभर में भजन सत्संग और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। पूरे जून महीने में मंदिरों में विशेष पूजा पाठ भजन कीर्तन और धार्मिक आयोजनों की धूम देखने को मिलेगी। श्रद्धालुओं के लिए यह महीना भक्ति साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहने वाला है।

  • टैरो राशिफल 27 मई 2026: कर्क और मकर राशि वालों के लिए राहत भरा दिन, कई राशियों के इमोशंस रहेंगे भारी

    टैरो राशिफल 27 मई 2026: कर्क और मकर राशि वालों के लिए राहत भरा दिन, कई राशियों के इमोशंस रहेंगे भारी




    नई दिल्ली। 27 मई 2026 का टैरो राशिफल संकेत देता है कि आज का दिन कई राशियों के लिए इमोशनल उतार-चढ़ाव से भरा रह सकता है। किसी पुरानी याद, अचानक बातचीत या रिश्तों से जुड़ी स्थिति मन पर असर डाल सकती है। वहीं कुछ राशियों को करियर और भविष्य को लेकर क्लैरिटी मिलने के संकेत हैं। दिन के दूसरे हिस्से में कई लोग खुद को थोड़ा स्थिर और शांत महसूस कर सकते हैं।

    कुल मिलाकर टैरो कार्ड्स बताते हैं कि आज छोटी-छोटी बातें भी ज्यादा असर डाल सकती हैं, इसलिए बिना सोचे-समझे रिएक्शन देने से बचना बेहतर रहेगा। कुछ राशियों के लिए यह दिन धीरे-धीरे चीजों के बेहतर होने और सुकून पाने का संकेत भी दे रहा है।

    राशिवार टैरो संकेत
    मेष
    आज मन पूरी तरह शांत नहीं रहेगा, लेकिन धीरे-धीरे हालात में सुधार दिखेगा। पुरानी बातें बीच-बीच में परेशान कर सकती हैं, लेकिन कोई छोटी अच्छी खबर या बातचीत राहत दे सकती है।

    वृषभ
    दिन काफी व्यस्त रह सकता है। आप अपने शांत और मैच्योर व्यवहार से लोगों का ध्यान खींचेंगे। पुरानी गलतफहमियां अब धीरे-धीरे खत्म होती दिख सकती हैं।
    मिथुन
    रिश्तों और इमोशंस को लेकर ज्यादा सोच सकते हैं। जल्दबाजी से बचें, चीजें समय के साथ साफ होंगी।

    कर्क
    चीजें धीरे-धीरे बेहतर होती नजर आएंगी। मानसिक बोझ हल्का होगा और फ्यूचर को लेकर क्लैरिटी मिलेगी। अंदर से सुकून महसूस होगा।
    सिंह
    आज मानसिक तनाव बढ़ सकता है। काम और रिश्तों में थोड़ी थकान महसूस होगी, इसलिए खुद को आराम देना जरूरी है।

    कन्या
    मूड में उतार-चढ़ाव रहेगा, लेकिन पहले से बेहतर स्थिति दिखेगी। किसी करीबी की बातचीत राहत दे सकती है।

    तुला
    पुरानी यादें मन को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन दिन आगे बढ़ने के साथ नया फोकस मिलेगा और मन हल्का होगा।

    वृश्चिक
    इमोशंस अस्थिर रह सकते हैं। कुछ दूरी बनाकर रखना आपके लिए बेहतर रहेगा।

    धनु
    काम में देरी या कम मोटिवेशन से थोड़ी निराशा हो सकती है, लेकिन दिन के अंत में क्लैरिटी मिलेगी।

    मकर
    चीजें धीरे-धीरे बेहतर दिशा में जाएंगी। मन अब ज्यादा प्रैक्टिकल और शांत महसूस करेगा, सुकून मिलेगा।

    कुंभ
    पुरानी बातें अब उतनी भारी नहीं लगेंगी। कॉन्फिडेंस धीरे-धीरे वापस आएगा।

    मीन
    इमोशंस और थॉट्स ज्यादा रहेंगे, लेकिन दिन के अंत में किसी की सराहना मन को राहत दे सकती है।आज का टैरो राशिफल बताता है कि दिन इमोशनली एक्टिव रहेगा, लेकिन कई राशियों के लिए यह धीरे-धीरे सुधार और मानसिक शांति की ओर बढ़ने का संकेत भी दे रहा है।

  • चौथा बड़ा मंगल आज, हनुमान जी की आराधना का विशेष दिन, जाने पूजा-व्रत और मांगलिक दोष से राहत के उपाय

    चौथा बड़ा मंगल आज, हनुमान जी की आराधना का विशेष दिन, जाने पूजा-व्रत और मांगलिक दोष से राहत के उपाय


    नई दिल्‍ली । ज्‍येष्‍ठ अधिकमास चल रहा है, इसके मंगलवार बहुत खास होते हैं. बड़ा मंगल का व्रत रखना, हनुमान जी की पूजा करना और उपाय करना बहुत लाभ देगा. इससे तमाम तरह की समस्‍याओं का अंत होता है और जीवन में सुख-सम‍ृद्धि आती है.

    जिन लड़के-लड़कियों को मंगल दोष है, वो बड़ा मंगल के दिन गुड़, चने, लाल मसूर की दाल दान करें. ऐसा करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होंगी. साथ ही चौथे बड़ा मंगल पर सुंदरकांड का पाठ करें. यहां देखिए आज की तिथि, योग, नक्षत्र, राहुकाल समेत पूरा पंचाग.
    जिन लड़के-लड़कियों को मंगल दोष है, वो बड़ा मंगल के दिन गुड़, चने, लाल मसूर की दाल दान करें. ऐसा करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होंगी. साथ ही चौथे बड़ा मंगल पर सुंदरकांड का पाठ करें. यहां देखिए आज की तिथि, योग, नक्षत्र, राहुकाल समेत पूरा पंचाग.

    26 मई 2026 का पंचांग
    आज की तिथि – सुबह 05:11 बजे से ज्‍येष्‍ठ शुक्‍ल एकादशी तिथि प्रारंभ होगी, जो अगले दिन 27 मई तक रहेगी. लिहाजा एकादशी तिथि का व्रत 27 मई को रखा जाएगा.

    आज का वार – मंगलवार.
    आज के ग्रह गोचर – आज चंद्रमा कन्‍या राशि में गोचर करेंगे.
    आज का नक्षत्र – 26 मई 04:08 बजे से हस्‍त नक्षत्र रहेगा और पूरा दिन रहेगा.
    आज के योग – 03:15 बजे से सिद्धि योग प्रारंभ होगा और पूरे दिन रहेगा.

    सूर्य व चंद्रमा का समय
    सूर्योदय – सुबह 05:46 बजे
    सूर्यास्त – शाम 07:01 बजे
    चन्द्रोदय – दोपहर 02:54 बजे
    चन्द्रास्त – 26 व 27 मई की तड़के सुबह 02:46 बजे
    (शहर के हिसाब से उदय व अस्त के समय में कुछ मिनट या सेकेंड का अंतर देखा जा सकता है)

    आज के शुभ काल
    ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04:09 बजे से 04:57 बजे तक
    अभिजीत मुहूर्त – सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक
    अमृत काल – रात 11:28 बजे से 01:11 बजे तक

    आज के अशुभ काल
    राहुकाल – दोपहर 03:42 बजे से शाम 05:22 बजे तक
    यम गण्ड – सुबह 09:04 बजे से 10:44 बजे तक
    कुलिक – दोपहर 12:23 बजे से 02:03 बजे तक
    दुर्मुहूर्त – सुबह 08:25 बजे से 09:18 बजे तक, रात 11:19 बजे से 12:02 बजे तक
    वर्ज्यम् – दोपहर 01:09 बजे से 02:52 बजे तक

  • 12 मंजिला भव्य मंदिर से सोने की आंखों वाले हनुमान जी तक, बोकारो के इन अद्भुत मंदिरों में बसती है गहरी आस्था

    12 मंजिला भव्य मंदिर से सोने की आंखों वाले हनुमान जी तक, बोकारो के इन अद्भुत मंदिरों में बसती है गहरी आस्था


    नई दिल्ली। झारखंड का Bokaro जिला अपनी औद्योगिक पहचान के साथ-साथ धार्मिक आस्था के लिए भी जाना जाता है। यहां स्थित कई हनुमान मंदिर अपनी भव्यता, विशाल प्रतिमाओं और अनोखी बनावट के कारण विशेष पहचान रखते हैं। इन मंदिरों में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कई मंदिर ऐसे हैं जो केवल पूजा का केंद्र नहीं बल्कि पर्यटन आकर्षण के रूप में भी प्रसिद्ध हो चुके हैं।

    विशाल संरचनाओं ने बनाई अलग पहचान
    बोकारो के कई हनुमान मंदिर अपनी ऊंचाई और अनूठी वास्तुकला के कारण लोगों का ध्यान खींचते हैं। यहां बने कुछ मंदिर दूर से ही दिखाई देते हैं और पहली नजर में अपनी भव्यता से प्रभावित कर देते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि इन मंदिरों में दर्शन करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव मिलता है।

    आस्था का प्रमुख केंद्र बने संकटमोचन मंदिर
    जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित कई मंदिर वर्षों से लोगों की आस्था से जुड़े हुए हैं। इनमें संकटमोचन मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध माना जाता है। यहां हर मंगलवार और शनिवार बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। परिवार की सुख-शांति और जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना लेकर लोग यहां पूजा-अर्चना करते हैं।

    विशाल हनुमान प्रतिमाएं बनीं आकर्षण

    बोकारो में कई स्थानों पर भगवान हनुमान की विशाल प्रतिमाएं स्थापित हैं। कुछ प्रतिमाएं इतनी ऊंची हैं कि दूर से ही नजर आने लगती हैं। इनकी भव्यता के कारण केवल श्रद्धालु ही नहीं बल्कि घूमने आने वाले पर्यटक भी यहां पहुंचते हैं। लोग दर्शन के साथ-साथ इन स्थानों की सुंदरता को भी करीब से देखना पसंद करते हैं।

    12 मंजिला मंदिर बना विशेष आकर्षण
    बोकारो के सबसे चर्चित धार्मिक स्थलों में एक भव्य 12 मंजिला हनुमान मंदिर भी शामिल है। यह मंदिर अपनी विशाल संरचना और विशेष निर्माण शैली के लिए जाना जाता है। यहां स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी रहती है। कहा जाता है कि इस मंदिर के निर्माण में कई वर्ष लगे और इसकी भव्यता दूर-दूर से आने वाले लोगों को प्रभावित करती है।

    सोने की आंखों वाली प्रतिमा बनी चर्चा का विषय
    इस मंदिर की सबसे अनोखी बात यहां स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा को माना जाता है। प्रतिमा की आंखों को विशेष रूप से तैयार किया गया है, जिसने लोगों की जिज्ञासा और आस्था दोनों को बढ़ाया है। यही वजह है कि यह स्थान धार्मिक महत्व के साथ-साथ अपनी विशेष पहचान के लिए भी चर्चा में रहता है।