Category: Religious Astrology

  • आज का राशिफल: मेष, मिथुन और कर्क राशि पर रहेगी ग्रहों की विशेष कृपा, जानें किन राशियों को मिलेगा लाभ

    आज का राशिफल: मेष, मिथुन और कर्क राशि पर रहेगी ग्रहों की विशेष कृपा, जानें किन राशियों को मिलेगा लाभ

    नई दिल्ली । 4 अगस्त 2026, मंगलवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से कई राशियों के लिए विशेष शुभ फल देने वाला माना जा रहा है। पंचांग के अनुसार इस दिन चंद्रमा पहले रेवती नक्षत्र और फिर अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। दिन के दौरान चंद्रमा और गुरु के बीच नवम-पंचम संबंध रहेगा, जबकि शाम के समय चंद्रमा के मेष राशि में प्रवेश करने से गजकेसरी योग का प्रभाव और अधिक मजबूत होगा। इसके साथ ही मंगलवार के स्वामी मंगल मिथुन राशि में बुध के साथ युति बनाएंगे। इन ग्रह स्थितियों का सकारात्मक प्रभाव विशेष रूप से मेष, मिथुन, कर्क, तुला और कुंभ राशि के जातकों पर देखने को मिल सकता है।

    मेष राशि के जातकों के लिए मंगलवार उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला दिन रहेगा। दिन की शुरुआत में कुछ मानसिक उलझन या सुस्ती महसूस हो सकती है, लेकिन समय के साथ परिस्थितियां अनुकूल होती जाएंगी। चंद्रमा के मेष राशि में आने से मनोबल मजबूत होगा और कार्यक्षेत्र में बेहतर निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी। आर्थिक लाभ के नए अवसर मिल सकते हैं और व्यापार में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। पारिवारिक संबंध मधुर रहेंगे तथा अचानक किसी लाभदायक समाचार से खुशी मिल सकती है। उपाय के रूप में हनुमानजी को लाल सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित कर ॐ हं हनुमते नमः मंत्र का जप करना शुभ माना गया है।

    मिथुन राशि के लिए मंगल और बुध की युति करियर और व्यवसाय में उन्नति के संकेत दे रही है। कार्यस्थल पर आपकी कार्यक्षमता और नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और नई जिम्मेदारियां भी मिल सकती हैं। निवेश संबंधी मामलों में लाभ मिलने की संभावना है। भाई-बहनों का सहयोग प्राप्त होगा और प्रेम संबंधों में मधुरता बनी रहेगी। इस दिन भगवान शिव और शिव परिवार की पूजा कर ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करना लाभकारी रहेगा।

    कर्क राशि के जातकों के लिए यह दिन आर्थिक प्रगति और सम्मान बढ़ाने वाला रहेगा। चंद्रमा के गोचर और गजकेसरी योग के प्रभाव से नौकरी और व्यवसाय दोनों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। सरकारी कार्यों में सफलता मिलने की संभावना है और प्रबंधन क्षमता के कारण कार्यस्थल पर प्रशंसा मिलेगी। वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा तथा परिवार के साथ किसी शुभ कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिल सकता है। विद्यार्थियों के लिए भी दिन अनुकूल रहेगा। भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करना शुभ माना गया है।

    तुला राशि के लिए मंगलवार का दिन सहयोग और सफलता लेकर आएगा। चंद्रमा का सप्तम भाव में गोचर संबंधों को मजबूत करेगा। कार्यस्थल पर अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और व्यापार में नई साझेदारी या लाभदायक समझौते हो सकते हैं। कला, शिक्षा और रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को विशेष सफलता मिलने की संभावना है। प्रेम संबंधों में विश्वास और निकटता बढ़ेगी। दिन के दूसरे भाग में कोई महत्वपूर्ण कार्य पूरा होने से संतोष मिलेगा। उपाय के रूप में दुर्गा चालीसा का पाठ करना लाभदायक रहेगा।

    कुंभ राशि के जातकों को भी मंगलवार को सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। लंबे समय से अटके कार्य पूरे होने की संभावना है और करियर तथा कारोबार में नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। संपत्ति, लेखा-जोखा और कानूनी मामलों में स्थिति आपके पक्ष में रह सकती है। तकनीकी और उच्च शिक्षा से जुड़े लोगों को नई उपलब्धियां मिल सकती हैं। साहसिक निर्णय भविष्य में लाभ दिला सकते हैं। इस दिन कुत्ते को मीठी रोटी खिलाना शुभ माना गया है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहों की ये अनुकूल स्थितियां कई राशियों के लिए प्रगति, आर्थिक लाभ और आत्मविश्वास बढ़ाने वाली साबित हो सकती हैं। हालांकि व्यक्तिगत कुंडली और दशा के अनुसार फल अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए इसे सामान्य ज्योतिषीय अनुमान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

  • सावन सोमवार पर मनोकामना अनुसार करें शिवलिंग का अभिषेक, शास्त्रों में बताए गए हैं विशेष धार्मिक उपाय

    सावन सोमवार पर मनोकामना अनुसार करें शिवलिंग का अभिषेक, शास्त्रों में बताए गए हैं विशेष धार्मिक उपाय

    नई दिल्ली । श्रावण मास के पवित्र सोमवार के अवसर पर देश भर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। सनातन धर्म और धार्मिक मान्यताओं में सावन सोमवार का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस पावन अवधि में शिवलिंग का अलग-अलग पवित्र द्रव्यों से अभिषेक करने पर साधक को उसकी विशिष्ट मनोकामनाओं के अनुसार फलों की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

    शिवपुराण के अनुसार, मनोकामना पूर्ति के लिए अभिषेक की सामग्री का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि कोई भक्त मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति की कामना रखता है, तो उसे शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करना चाहिए। वहीं, मानसिक शांति और विचारों की शुद्धता प्राप्त करने के लिए साधारण जल से अभिषेक करने का विधान बताया गया है। उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और गंभीर रोगों से मुक्ति पाने के लिए कच्चे दूध से जलाभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

    पारिवारिक सुख, शांति और समृद्धि की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए दूध में शक्कर मिलाकर अर्पित करने का सुझाव दिया गया है। इसके अतिरिक्त, वंश वृद्धि, उत्तम संतान की प्राप्ति तथा शारीरिक शक्ति और ऊर्जा में वृद्धि के लिए देसी गाय के शुद्ध घी से अभिषेक करने का महत्व है। कर्ज की समस्या से निजात पाने, वैवाहिक जीवन में मधुरता लाने और कुंडली में शुक्र ग्रह को मजबूत करने के लिए शहद से अभिषेक करना शुभ माना जाता है।

    आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों के लिए शास्त्रों में गन्ने के रस से अभिषेक करने का विधान है। मान्यता है कि गन्ने के रस से जलाभिषेक करने पर घर में धन-धान्य, संपत्ति और यश की वृद्धि होती है। वहीं, जिन युवाओं के विवाह में बाधाएं आ रही हों, वे दूध या जल में थोड़ा केसर मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित कर सकते हैं। इसके साथ ही बेलपत्र अर्पित करने से तीनों जन्मों के पापों का नाश होता है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

    मध्य प्रदेश सहित देश के सभी प्रमुख ज्योतिर्लिंगों और शिवालयों में सावन सोमवार के दिन तड़के से ही पंचामृत और विभिन्न पवित्र नदियों के जल से रुद्रभिषेक का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालु अपनी-अपनी आस्था और इच्छाओं के अनुसार पूजन सामग्री लेकर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने मंदिरों में पहुंच रहे हैं। संपूर्ण वातावरण हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से गुंजायमान हो रहा है।

  • जामनगर के बाल हनुमान मंदिर में 60 वर्षों से अविरल जारी है राम नाम का अखंड जाप, गिनीज बुक में दर्ज हुआ नाम

    जामनगर के बाल हनुमान मंदिर में 60 वर्षों से अविरल जारी है राम नाम का अखंड जाप, गिनीज बुक में दर्ज हुआ नाम

    नई दिल्ली । भारतीय अध्यात्म और सांस्कृतिक धरोहर की दुनिया में गुजरात का जामनगर शहर एक अनूठी आस्था का केंद्र बना हुआ है। शहर की प्रसिद्ध लखोटा झील के समीप स्थित श्री बाल हनुमान संकीर्तन मंदिर अपने आप में एक अद्भुत और ऐतिहासिक रिकॉर्ड समेटे हुए है। इस पावन धाम में पिछले छह दशकों से बिना एक सेकंड रुके भगवान श्री राम का संकीर्तन निरंतर जारी है, जिसे देखने और सुनने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु खींचे चले आते हैं।

    मंदिर में अखंड जाप की यह पावन परंपरा 1 अगस्त 1964 को शुरू की गई थी। तब से लेकर आज तक, दिन हो या रात, श्री राम, जय राम, जय जय राम की रामधुन निरंतर गूंज रही है। इस संकीर्तन को निर्बाध रूप से चलाने के लिए साधक, पुजारी और श्रद्धालु बारी-बारी से बैठते हैं, जिससे जाप की गति एक क्षण के लिए भी धीमी या बंद नहीं होती। चौबीसों घंटे चलने वाले इस सबसे लंबे अखंड कीर्तन के कारण मंदिर का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया जा चुका है।

    इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अनुष्ठान की नींव महान संत श्री प्रेमभिक्षुजी महाराज ने रखी थी। उन्होंने समाज में आध्यात्मिक चेतना और ईश्वर भक्ति के विस्तार के लिए इस निरंतर संकीर्तन की शुरुआत की थी। स्थानीय निवासियों का यह अटूट विश्वास है कि इस मंदिर में गूंजने वाले राम नाम के महामंत्र और दिव्य वातावरण के प्रभाव से ही जामनगर शहर हमेशा बड़ी प्राकृतिक आपदाओं और संकटों से सुरक्षित रहता है।

    संत प्रेमभिक्षुजी महाराज द्वारा शुरू की गई यह पावन परंपरा केवल जामनगर तक ही सीमित नहीं रही। उनकी प्रेरणा से गुजरात के द्वारका, राजकोट, पोरबंदर, जूनागढ़ और महुवा के साथ-साथ बिहार के मुजफ्फरपुर में भी इसी तरह के मंदिरों की स्थापना की गई, जहां 24 घंटे अखंड रामधुन का गायन होता है। देश के 40 से अधिक छोटे-बड़े शहरों में रोजाना विशेष संकीर्तन सभाओं का आयोजन किया जाता है।

    मध्य प्रदेश और देश के विभिन्न प्रांतों से आने वाले श्रद्धालु इस मंदिर में पहुंचकर अद्भुत मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं। मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए दिन-रात खुले रहते हैं, जिससे दूर-दराज से आने वाले भक्त किसी भी समय रात्रि में रुककर संकीर्तन का हिस्सा बन सकते हैं। रामनवमी, हनुमान जयंती और विजयदशमी जैसे बड़े पर्वों पर यहां आस्था का भारी सैलाब उमड़ता है।

  • सावन में इन 5 छिपे हुए पावन शिव धामों में सुकून से होते हैं दर्शन… यहां नहीं मिलती लंबी कतारें…

    सावन में इन 5 छिपे हुए पावन शिव धामों में सुकून से होते हैं दर्शन… यहां नहीं मिलती लंबी कतारें…


    नई दिल्ली।
    सावन (Sawan) का महीना आते ही देशभर के मशहूर शिव मंदिरों (Famous Shiva temples) में भक्तों का तांता लग जाता है. महाकाल, काशी विश्वनाथ और देवघर जैसे धामों में घंटों लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ता है. कई बार बुजुर्गों और बच्चों के लिए इतनी भारी भीड़ में दर्शन करना काफी मुश्किल हो जाता है।

    अगर आप भी इस सावन में शांति से भगवान शिव (Lord Shiva) की पूजा करना चाहते हैं, तो देश में कई ऐसे पावन और खूबसूरत शिव मंदिर हैं जहां भारी भीड़ नहीं मिलती. इन जगहों पर आप परिवार के साथ सुकून से बैठकर भोलेनाथ का ध्यान लगा सकते हैं।


    तुंगनाथ मंदिर, उत्तराखंड

    उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित तुंगनाथ मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है. यह मंदिर पंच केदार में से एक है और हिमालय की गोद में बसा है. यहां पहुंचने के लिए चोपता से करीब चार किलोमीटर की पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है।

    शांत वादियों, ठंडी हवाओं और घने जंगलों के बीच यहां का माहौल बहुत आध्यात्मिक लगता है. यहां आने वाले भक्तों को शिव भक्ति के साथ साथ प्रकृति का एक अद्भुत नजारा भी देखने को मिलता है।


    नीलकंठ महादेव मंदिर, ऋषिकेश

    ऋषिकेश के पास मणिकूट पर्वत पर बसा नीलकंठ महादेव मंदिर एक बेहद पवित्र और शांत धाम है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले विष को पीने के बाद भगवान शिव ने इसी स्थान पर विश्राम किया था।

    चारों ओर ऊंचे पहाड़ों और घने जंगलों से घिरे इस मंदिर में बहुत सुकून मिलता है. सावन के मुख्य दिनों को छोड़ दें, तो यहां आम दिनों में आप बहुत आराम से जल चढ़ा सकते हैं और दर्शन कर सकते हैं।


    भूतनाथ मंदिर, हिमाचल प्रदेश

    हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर को छोटी काशी भी कहा जाता है. मंडी के बीचों बीच स्थित भूतनाथ मंदिर सदियों पुराना और ऐतिहासिक स्थल है. यह मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है. यहां सावन के दौरान स्थानीय भक्त तो आते हैं, लेकिन बड़े ज्योतिर्लिंगों जैसी दम घोटने वाली भीड़ नहीं होती. यहां आप बिना किसी भागदौड़ के मंदिर प्रांगण में बैठकर भगवान शिव की आराधना कर सकते हैं।


    कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कर्नाटक

    दक्षिण भारत के कर्नाटक में स्थित कोटिलिंगेश्वर मंदिर अपनी तरह का एक अनोखा और भव्य शिव धाम है. इस मंदिर परिसर में कोटि यानी करोड़ों की संख्या में छोटे बड़े शिवलिंग स्थापित हैं। इसके साथ ही यहां 108 फीट ऊंचा एक विशाल शिवलिंग भी बना हुआ है, जो देखते ही बनता है. इतने विशाल परिसर में फैला होने की वजह से यहां भीड़ महसूस नहीं होती और भक्त आराम से एक एक शिवलिंग के दर्शन कर सकते हैं।


    यात्रा की योजना और जरूरी सुझाव

    सावन के दौरान इन शांत शिव मंदिरों की यात्रा पर जाने से पहले थोड़ी तैयारी जरूर कर लें. पहाड़ी इलाकों में जाते समय मौसम का हाल पहले ही चेक कर लें और साथ में जरूरी दवाएं जरूर रखें। मंदिरों में दर्शन के समय स्थानीय नियमों और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें. सुबह सुबह या दोपहर की आरती के समय जाने से दर्शन आसानी से हो जाते हैं. इन पावन धामों में बिताया समय आपकी आत्मा को एक नई ऊर्जा और असीम शांति देगा।

  • 19 अगस्त से बदलेगी इन 4 राशियों की किस्मत! बुध के नक्षत्र में होगा गुरु का प्रवेश

    19 अगस्त से बदलेगी इन 4 राशियों की किस्मत! बुध के नक्षत्र में होगा गुरु का प्रवेश


    नई दिल्ली। अगस्त का महीना ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान कई प्रमुख ग्रहों की चाल बदलने वाली है। द्रिक पंचांग के अनुसार, 19 अगस्त को देवगुरु बृहस्पति (गुरु) बुध के स्वामित्व वाले अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, यह परिवर्तन कुछ राशियों के लिए करियर, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है।

    क्यों खास है गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश?
    ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि, संवाद, व्यापार और तर्क का कारक माना जाता है, जबकि गुरु ज्ञान, भाग्य, समृद्धि और विस्तार के प्रतीक हैं। गुरु के बुध के नक्षत्र में प्रवेश से निर्णय क्षमता मजबूत होने, नए अवसर मिलने, व्यापार में वृद्धि और रिश्तों में बेहतर तालमेल बनने की संभावना मानी जाती है।

    मिथुन राशि
    19 अगस्त के बाद मिथुन राशि के जातकों के रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। नौकरी में नई जिम्मेदारियां मिलने और व्यापार में नई डील मिलने के योग बन सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का अवसर भी मिल सकता है।

    कन्या राशि
    कन्या राशि के लोगों के लिए यह गोचर लाभकारी माना जा रहा है। कार्यक्षेत्र में मेहनत की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है। नई नौकरी के अवसर बनने, व्यापार के विस्तार और नए संबंध स्थापित होने के संकेत हैं, जिससे पारिवारिक माहौल भी सकारात्मक रह सकता है।

    तुला राशि
    तुला राशि के जातकों के लिए यह समय राहत देने वाला माना गया है। आर्थिक परेशानियां धीरे-धीरे कम हो सकती हैं। नया काम शुरू करने के लिए अनुकूल समय रहेगा। परिवार का सहयोग मिलेगा और आत्मविश्वास के साथ मानसिक शांति में भी वृद्धि हो सकती है।

    मकर राशि
    मकर राशि के लिए गुरु का यह नक्षत्र परिवर्तन शुभ फलदायी माना जा रहा है। नौकरी में पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। व्यापार में लाभ, रुका हुआ धन वापस मिलने और महत्वपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता में सुधार के संकेत मिल सकते हैं। करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर भी प्राप्त हो सकते हैं।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार करें ये उपाय
    – भगवान विष्णु की पूजा करें।
    – पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
    – पीली दाल, हल्दी और केले का दान करें।
    – ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः’ मंत्र का नियमित जाप करें।
    – गाय को हरा चारा खिलाएं।
    – वाणी में मधुरता रखें और किसी की भावनाओं को आहत करने से बचें।

  • सोमवार के दिन ऐसे करें शिव पूजा भोलेनाथ की कृपा से दूर होंगे संकट खुलेगा सुख समृद्धि और सफलता का मार्ग

    सोमवार के दिन ऐसे करें शिव पूजा भोलेनाथ की कृपा से दूर होंगे संकट खुलेगा सुख समृद्धि और सफलता का मार्ग


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। विशेष रूप से सावन के सोमवार का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विधि विधान से भगवान भोलेनाथ की पूजा करने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं और सुख समृद्धि आरोग्य तथा मनचाही सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई शिव आराधना से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी उचित मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

    सोमवार की पूजा की शुरुआत प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने से करनी चाहिए। स्नान के बाद साफ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करें तथा पूजा स्थान की सफाई कर भगवान शिव का ध्यान करें। यदि संभव हो तो शिव मंदिर जाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करें। घर में पूजा करने वाले श्रद्धालु भी तांबे के पात्र में जल भरकर उसमें गंगाजल मिलाएं और श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर अर्पित करें।

    जलाभिषेक के बाद भगवान शिव को दूध दही शहद घी और शक्कर से पंचामृत अर्पित किया जा सकता है। इसके बाद पुनः स्वच्छ जल से अभिषेक करें। पूजा के दौरान बेलपत्र धतूरा आक के फूल सफेद पुष्प भस्म चंदन और मौसमी फल अर्पित करना शुभ माना जाता है। बेलपत्र चढ़ाते समय यह ध्यान रखें कि पत्तियां साफ और खंडित न हों तथा उनका चिकना भाग शिवलिंग की ओर रहे।

    पूजा के समय भगवान शिव के साथ माता पार्वती गणेश जी और नंदी महाराज का भी स्मरण करना चाहिए। इसके बाद धूप दीप जलाकर शिव चालीसा रुद्राष्टक शिव तांडव स्तोत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। ओम नमः शिवाय मंत्र का कम से कम 108 बार जप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। श्रद्धा और एकाग्रता के साथ किया गया मंत्र जाप मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

    यदि सोमवार का व्रत रखा गया है तो दिनभर सात्विक आहार ग्रहण करें या फलाहार करें। क्रोध असत्य और नकारात्मक विचारों से दूर रहना भी इस दिन विशेष महत्व रखता है। जरूरतमंद लोगों को भोजन वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने से पुण्य फल प्राप्त होता है। गाय को हरा चारा खिलाना और गरीबों की सहायता करना भी भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ उपाय माना गया है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख शांति आती है। अविवाहित युवक युवतियों को योग्य जीवनसाथी मिलने की कामना पूरी होती है। नौकरी व्यापार और करियर में आ रही बाधाएं दूर होने के साथ आर्थिक स्थिति में भी सुधार होने के संकेत मिलते हैं। परिवार में खुशहाली बनी रहती है और मानसिक तनाव कम होता है।

    पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित करें। पूरे दिन शिव नाम का स्मरण करते हुए सदाचार और संयम का पालन करें। ऐसा माना जाता है कि भगवान भोलेनाथ केवल भक्ति और सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होते हैं इसलिए पूजा में दिखावे से अधिक मन की पवित्रता और विश्वास का महत्व होता है। सोमवार के दिन विधि विधान से की गई शिव आराधना जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली मानी जाती है।

  • Aaj Ka Rashifal 3 August 2026: जानें किस राशि को मिलेगा लाभ और किसे रहना होगा सतर्क

    Aaj Ka Rashifal 3 August 2026: जानें किस राशि को मिलेगा लाभ और किसे रहना होगा सतर्क


    नई दिल्ली। 3 अगस्त 2026 सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है। सावन का पावन प्रभाव कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। विशेष रूप से मीन राशि के जातकों पर भोलेनाथ की विशेष कृपा बनी रहेगी और लंबे समय से रुके हुए कार्यों में सफलता मिलने के संकेत हैं। हालांकि कुछ राशियों को आर्थिक मामलों और स्वास्थ्य को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी। आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन तक सभी 12 राशियों का आज का राशिफल।

    मेष राशि के जातकों के लिए दिन नई ऊर्जा लेकर आएगा। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। पारिवारिक माहौल सुखद रहेगा तथा आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी।

    वृषभ राशि वालों को आज खर्चों पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता है। किसी पुराने मित्र से मुलाकात हो सकती है जो भविष्य में लाभदायक साबित होगी। निवेश सोच समझकर करें और जल्दबाजी से बचें।

    मिथुन राशि के लिए आज का दिन करियर के लिहाज से अच्छा रहेगा। नए अवसर मिल सकते हैं और रुके हुए काम पूरे होने की संभावना है। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा जिससे मन प्रसन्न रहेगा।

    कर्क राशि के लोगों को आज धैर्य बनाए रखने की सलाह है। किसी महत्वपूर्ण निर्णय में जल्दबाजी नुकसान पहुंचा सकती है। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें और खानपान संतुलित रखें।

    सिंह राशि के जातकों को आज सम्मान और सफलता मिलने के योग हैं। व्यापार में लाभ होगा और नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। आत्मविश्वास बढ़ेगा।

    कन्या राशि वालों के लिए दिन मिश्रित फल देने वाला रहेगा। आर्थिक मामलों में सतर्क रहें और अनावश्यक विवादों से दूरी बनाए रखें। परिवार का सहयोग मनोबल बढ़ाएगा।

    तुला राशि के लोगों को आज भाग्य का साथ मिलेगा। नए संपर्क भविष्य में लाभ पहुंचा सकते हैं। विद्यार्थियों के लिए समय अनुकूल रहेगा और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के संकेत हैं।

    वृश्चिक राशि वालों को आज मानसिक शांति बनाए रखने की जरूरत है। कार्यस्थल पर जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं लेकिन आपकी मेहनत की सराहना भी होगी। यात्रा के योग बन सकते हैं।

    धनु राशि के लिए आज का दिन शुभ रहेगा। आर्थिक लाभ के नए अवसर मिलेंगे और रुके हुए धन की प्राप्ति हो सकती है। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा।

    मकर राशि के जातकों को आज संयम से काम लेना होगा। कार्यक्षेत्र में छोटी चुनौतियां सामने आ सकती हैं लेकिन सूझबूझ से उनका समाधान निकल जाएगा। सेहत पर ध्यान दें।

    कुंभ राशि वालों के लिए दिन सामान्य रहेगा। नौकरी और व्यापार में स्थिरता बनी रहेगी। किसी पुराने विवाद का समाधान निकल सकता है और पारिवारिक रिश्तों में मधुरता आएगी।

    मीन राशि के लिए सोमवार बेहद शुभ संकेत लेकर आया है। भगवान शिव की विशेष कृपा से लंबे समय से अटके कार्य पूरे हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और करियर में उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे। परिवार में सुख शांति बनी रहेगी तथा धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। शिव पूजा और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना विशेष फलदायी रहेगा।

    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा अर्चना करने जलाभिषेक करने और जरूरतमंदों की सहायता करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए शुभ कार्य कई बाधाओं को दूर कर सफलता का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

  • रोज सुबह सूर्य देव को अर्घ्य देने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, तभी मिलेगा पूर्ण फल और दूर होंगी जीवन की बाधाएं

    रोज सुबह सूर्य देव को अर्घ्य देने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, तभी मिलेगा पूर्ण फल और दूर होंगी जीवन की बाधाएं


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है क्योंकि वे प्रतिदिन सभी को अपने प्रकाश और ऊर्जा से जीवन प्रदान करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य देव की नियमित पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आत्मविश्वास के साथ कार्यक्षमता भी बढ़ती है। यही कारण है कि प्राचीन काल से ही सुबह उगते सूर्य को जल अर्पित करने और आदित्य हृदय स्तोत्र तथा गायत्री मंत्र का जाप करने की परंपरा चली आ रही है। माना जाता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक सूर्य उपासना करने से व्यक्ति को मानसिक शांति उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में उन्नति प्राप्त होती है।

    सूर्य पूजा का सबसे उपयुक्त समय सूर्योदय के तुरंत बाद माना जाता है। इस समय वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा अधिक होती है और सूर्य की कोमल किरणें शरीर के लिए भी लाभकारी मानी जाती हैं। पूजा से पहले स्नान करके स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। इसके बाद तांबे के लोटे में स्वच्छ जल भरकर उसमें लाल फूल अक्षत और यदि संभव हो तो थोड़ा सा रोली या लाल चंदन डालकर सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। अर्घ्य देते समय जल की धारा के बीच से सूर्य के दर्शन करना शुभ माना जाता है। इस दौरान ॐ सूर्याय नमः या ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप किया जा सकता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव की पूजा करते समय मन और वचन की पवित्रता का विशेष महत्व होता है। पूजा केवल दिखावे के लिए नहीं बल्कि सच्ची श्रद्धा और सकारात्मक भाव से करनी चाहिए। यदि संभव हो तो रविवार के दिन विशेष रूप से सूर्य उपासना करें और जरूरतमंद लोगों को गेहूं गुड़ लाल वस्त्र या तांबे से जुड़ी वस्तुओं का दान करें। इसे पुण्यदायी माना गया है।

    सूर्य पूजा के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक माना जाता है। सूर्य को अर्घ्य हमेशा खड़े होकर देना चाहिए और जल धीरे धीरे अर्पित करना चाहिए। पूजा करते समय क्रोध न करें और किसी के प्रति द्वेष की भावना न रखें। धार्मिक मान्यता है कि सकारात्मक विचारों के साथ की गई उपासना अधिक फलदायी होती है। साथ ही पूजा के बाद माता पिता और गुरुजनों का आशीर्वाद लेना भी शुभ माना जाता है।

    ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा सम्मान नेतृत्व क्षमता और सफलता का कारक ग्रह माना गया है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य कमजोर हो तो उसे नियमित सूर्य उपासना करने की सलाह दी जाती है। हालांकि किसी भी ज्योतिषीय उपाय को अपनाने से पहले योग्य विद्वान से सलाह लेना उचित माना जाता है। नियमित सूर्य नमस्कार करना भी शरीर को स्वस्थ रखने और मन को संतुलित बनाने में सहायक माना जाता है। इससे शारीरिक ऊर्जा बढ़ती है और दिनभर कार्य करने की क्षमता में सुधार आता है।

    धार्मिक दृष्टि से सूर्य देव की कृपा पाने के लिए सत्य का पालन ईमानदारी अनुशासन और परिश्रम को भी उतना ही महत्वपूर्ण माना गया है जितना पूजा पाठ को। केवल पूजा करने से ही नहीं बल्कि अच्छे कर्मों से भी जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। इसलिए सूर्य उपासना के साथ सदाचार और सेवा की भावना अपनाना भी आवश्यक माना जाता है।

    यदि नियमित रूप से श्रद्धा और नियमों के साथ सूर्य देव की आराधना की जाए तो जीवन में आत्मविश्वास सकारात्मक सोच और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है। धार्मिक आस्था के अनुसार ऐसी उपासना व्यक्ति को सफलता की ओर प्रेरित करती है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार करती है।

  • सावन में दक्षिण काली पीठ का मध्यरात्रि अनुष्ठान बना आस्था का केंद्र, गंगा स्नान और रुद्राभिषेक के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु

    सावन में दक्षिण काली पीठ का मध्यरात्रि अनुष्ठान बना आस्था का केंद्र, गंगा स्नान और रुद्राभिषेक के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु

    नई दिल्ली । सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना, तप और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष महत्व रखता है। इसी दौरान हरिद्वार स्थित दक्षिण काली पीठ श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। यहां प्रतिदिन मध्यरात्रि से पहले शुरू होने वाला विशेष धार्मिक अनुष्ठान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। स्थानीय भक्तों के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालु भी इस आध्यात्मिक आयोजन में शामिल होकर पूजा-अर्चना और साधना का हिस्सा बन रहे हैं।

    मंदिर परिसर में प्रतिदिन देर रात तक भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहता है। आधी रात से पहले पवित्र गंगा में स्नान करने के बाद मौन साधना और भगवान शिव के विशेष पूजन का क्रम प्रारंभ होता है। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से रुद्राभिषेक संपन्न कराया जाता है। इस संपूर्ण धार्मिक प्रक्रिया को देखने और उसमें सहभागी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में उपस्थित रहते हैं।

    धार्मिक परंपरा के अनुसार आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज प्रतिदिन निर्धारित समय पर गंगा स्नान कर मौन व्रत धारण करते हैं। इसके बाद भगवान शिव का अभिषेक, पूजन और वैदिक विधियों के अनुसार विशेष अनुष्ठान संपन्न कराया जाता है। अनुष्ठान पूर्ण होने पर उपस्थित श्रद्धालुओं को आशीर्वाद भी प्रदान किया जाता है। मंदिर परिसर में गूंजते मंत्रों और शांत वातावरण के कारण श्रद्धालु इसे आध्यात्मिक अनुभूति का विशेष अवसर मानते हैं।

    सावन के दौरान दक्षिण काली पीठ में केवल हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों से ही नहीं बल्कि कई अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। भक्तों का कहना है कि यहां की पूजा-पद्धति, अनुशासित व्यवस्था और आध्यात्मिक वातावरण उन्हें हर वर्ष इस सिद्धपीठ तक आने के लिए प्रेरित करता है। कई श्रद्धालु गंगा स्नान और रुद्राभिषेक में भाग लेने को अपने धार्मिक जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव बताते हैं।

    मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि रात्रिकालीन साधना और भगवान शिव की आराधना से उन्हें मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। कुछ श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठान के दौरान नाग देवता के दर्शन होने की बात भी साझा की। हालांकि ऐसे अनुभव व्यक्तिगत आस्था और धार्मिक विश्वास से जुड़े हैं, जिन्हें श्रद्धालु दिव्य अनुभूति के रूप में देखते हैं। मंदिर प्रशासन की ओर से भी श्रद्धालुओं को श्रद्धा और अनुशासन के साथ पूजा में भाग लेने की सलाह दी जाती है।

    मंदिर के सेवादारों के अनुसार दक्षिण काली पीठ को एक सिद्ध धार्मिक स्थल माना जाता है, जहां सावन के महीने में विशेष धार्मिक आयोजन नियमित रूप से संपन्न होते हैं। प्रतिदिन होने वाले रुद्राभिषेक, वैदिक मंत्रोच्चार और सामूहिक आराधना से पूरे परिसर में भक्ति का वातावरण बना रहता है। यही कारण है कि हर वर्ष सावन के दौरान यहां श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि देखने को मिलती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है। इस अवधि में रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, महामृत्युंजय जाप और मौन साधना का विशेष महत्व बताया गया है। दक्षिण काली पीठ में इन परंपराओं का नियमित पालन होने से यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक आकर्षण का केंद्र बन गया है। शांत रात्रिकालीन वातावरण, गंगा स्नान और वैदिक अनुष्ठानों का समन्वय भक्तों को आध्यात्मिक साधना का विशिष्ट अनुभव प्रदान करता है।

  • गजानन संकष्टी चतुर्थी आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय समय और दिनभर का पूरा पंचांग

    गजानन संकष्टी चतुर्थी आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय समय और दिनभर का पूरा पंचांग


    नई दिल्ली ।
    आज सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गजानन संकष्टी चतुर्थी का पावन व्रत रखा जा रहा है। भगवान गणेश को समर्पित यह व्रत विघ्नों के नाश, सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक गणपति की पूजा करने और चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। श्रद्धालु सुबह से ही पूजा-अर्चना और व्रत की तैयारियों में जुटे हुए हैं।

    पंचांग के अनुसार आज सावन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। यह तिथि 1 अगस्त की रात्रि 11 बजकर 7 मिनट पर प्रारंभ हुई थी और 2 अगस्त की रात्रि 11 बजकर 15 मिनट तक रहेगी। इसके बाद पंचमी तिथि का आरंभ होगा। आज रविवार का दिन है तथा पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र और अतिगंड योग का संयोग बना हुआ है। दिनभर पंचक का प्रभाव भी रहेगा, इसलिए कई लोग शुभ कार्यों में पंचांग के अनुसार समय का विशेष ध्यान रखेंगे।

    आज सूर्य का उदय सुबह 5 बजकर 56 मिनट पर हुआ, जबकि सूर्यास्त शाम 7 बजकर 11 मिनट पर होगा। गजानन संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रोदय का विशेष महत्व होता है। आज चंद्रमा का उदय रात 9 बजकर 44 मिनट पर होगा। व्रत रखने वाले श्रद्धालु भगवान गणेश की पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करेंगे और इसके पश्चात ही व्रत का पारण करेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्रदर्शन के बिना संकष्टी चतुर्थी का व्रत पूर्ण नहीं माना जाता।

    पूजा और शुभ कार्यों के लिए आज सुबह का चौघड़िया सुबह 5 बजकर 56 मिनट से 10 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। वहीं शाम का चौघड़िया शाम 5 बजकर 32 मिनट से 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। दूसरी ओर राहुकाल शाम 5 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा, इसलिए इस अवधि में नए या मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। यमगण्ड काल दोपहर 12 बजकर 44 मिनट से 2 बजकर 24 मिनट तक तथा गुलिक काल शाम 4 बजकर 5 मिनट से 5 बजकर 45 मिनट तक रहेगा।

    ग्रहों की वर्तमान स्थिति के अनुसार सूर्य और बुध कर्क राशि में, चंद्रमा तथा राहु कुंभ राशि में, मंगल वृषभ राशि में, गुरु मिथुन राशि में, शुक्र कन्या राशि में, शनि मीन राशि में और केतु सिंह राशि में विराजमान हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से इन ग्रह स्थितियों का प्रभाव विभिन्न राशियों पर अलग-अलग रूप में देखा जाता है। हालांकि किसी भी निर्णय से पहले व्यक्तिगत कुंडली का विचार करना अधिक उचित माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गजानन संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश को 11 अथवा 21 गांठ वाली दूर्वा अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु मोदक, लड्डू और अन्य प्रिय नैवेद्य अर्पित कर विघ्नहर्ता से सुख, समृद्धि और सफलता की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से किया गया यह व्रत जीवन की बाधाओं को दूर करने और परिवार में सुख-शांति बनाए रखने में सहायक माना जाता है।