Category: Religious Astrology

  • घर में सुख समृद्धि के लिए रखें इन बातों का ध्यान, मुख्य द्वार से बेडरूम तक ये Vastu Tips आएंगे काम

    घर में सुख समृद्धि के लिए रखें इन बातों का ध्यान, मुख्य द्वार से बेडरूम तक ये Vastu Tips आएंगे काम


    नई दिल्ली। घर को केवल रहने की जगह नहीं बल्कि परिवार की खुशियों और सुकून से जुड़ा स्थान माना जाता है। वास्तु शास्त्र में भी घर के अलग अलग हिस्सों की दिशा और वहां रखी जाने वाली चीजों को लेकर कई मान्यताएं बताई गई हैं। वास्तु के अनुसार घर में सामान का सही स्थान और साफ सफाई का ध्यान रखने से सकारात्मक वातावरण बनाने में मदद मिल सकती है। आधुनिक घरों में हर वास्तु नियम को पूरी तरह अपनाना संभव नहीं होता इसलिए बिना किसी बड़े बदलाव के भी कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखा जा सकता है।

    वास्तु में घर के मुख्य द्वार को खास महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि प्रवेश द्वार घर के वातावरण पर प्रभाव डालने वाला प्रमुख स्थान है। इसलिए इसे साफ सुथरा और व्यवस्थित रखना चाहिए। दरवाजे के आसपास अनावश्यक सामान जूते चप्पल और कबाड़ जमा करने से बचने की सलाह दी जाती है। प्रवेश स्थान पर पर्याप्त रोशनी होना भी जरूरी माना जाता है। वास्तु परंपरा में उत्तर पूर्व और पूर्व दिशा के प्रवेश द्वार को अनुकूल माना गया है हालांकि किसी घर का प्रवेश द्वार दूसरी दिशा में होने का मतलब यह नहीं है कि वहां जरूरी तौर पर कोई समस्या होगी।

    रसोई को लेकर भी वास्तु में कई नियम बताए गए हैं। दक्षिण पूर्व दिशा को अग्नि तत्व से जुड़ा माना जाता है इसलिए इस दिशा को रसोई के लिए उपयुक्त माना जाता है। उत्तर पश्चिम को भी कुछ परिस्थितियों में विकल्प माना जाता है। रसोई में चूल्हे और सिंक को बिल्कुल साथ रखने से बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि वास्तु में अग्नि और जल को अलग तत्व माना गया है। खाना बनाते समय पूर्व दिशा की ओर मुंह करके खाना बनाना भी कई वास्तु परंपराओं में शुभ माना जाता है। साथ ही रसोई में साफ सफाई और पर्याप्त वेंटिलेशन रखना व्यावहारिक रूप से भी महत्वपूर्ण है।

    बेडरूम की बात करें तो मास्टर बेडरूम के लिए दक्षिण पश्चिम दिशा को वास्तु में स्थिरता से जोड़ा जाता है। सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर रखने की सलाह भी कई वास्तु परंपराओं में दी जाती है। बेडरूम में अनावश्यक सामान जमा करने से बचना चाहिए और सोने की जगह को शांत तथा व्यवस्थित रखना बेहतर माना जाता है। आईने को सीधे बेड के सामने रखने से बचने की सलाह भी कुछ वास्तु गाइड में दी जाती है।

    घर के उत्तर पूर्व हिस्से को भी वास्तु में महत्वपूर्ण माना जाता है। इस हिस्से को हल्का साफ और व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। पूजा स्थान को लेकर भी इसी दिशा को कई वास्तु परंपराओं में उपयुक्त माना गया है। घर के बीच के हिस्से में भारी सामान का जमाव कम रखना और आने जाने का रास्ता खुला रखना भी वास्तु आधारित सुझावों में शामिल है।

    वास्तु से जुड़े नियमों को अपनाते समय यह समझना भी जरूरी है कि अलग अलग परंपराओं और विशेषज्ञों की सलाह में अंतर हो सकता है। खासकर फ्लैट या किराए के मकान में घर की दिशा बदलना संभव नहीं होता। ऐसे में सफाई रोशनी हवा का बेहतर आवागमन सामान को व्यवस्थित रखना और रास्तों को खुला रखना जैसे आसान उपाय किए जा सकते हैं। ये बदलाव घर को अधिक आरामदायक और व्यवस्थित बनाने में भी मदद करते हैं। इसलिए वास्तु को लेकर डरने के बजाय इसे पारंपरिक मान्यताओं और बेहतर घरेलू व्यवस्था के संदर्भ में समझना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

  • तुला राशि में बुध का प्रवेश बदल सकता है इन 3 राशियों का हाल खर्च से लेकर करियर तक बढ़ेंगी उलझनें

    तुला राशि में बुध का प्रवेश बदल सकता है इन 3 राशियों का हाल खर्च से लेकर करियर तक बढ़ेंगी उलझनें


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राशि परिवर्तन को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि ग्रहों की चाल में बदलाव का प्रभाव अलग अलग राशियों पर अलग तरीके से पड़ सकता है। बुध को बुद्धि संवाद तर्क व्यापार और निर्णय क्षमता का कारक माना जाता है। ऐसे में बुध का राशि परिवर्तन ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। 26 सितंबर 2026 को बुध तुला राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस गोचर का प्रभाव तीन राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकता है। इन राशि वालों को धन नौकरी व्यापार और महत्वपूर्ण निर्णयों के मामलों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    इस गोचर का असर वृषभ राशि के जातकों पर दिखाई देने की संभावना बताई गई है। इस दौरान पहले से लंबित कामों को पूरा करने में उम्मीद से अधिक समय लग सकता है। किसी काम को लेकर जल्दबाजी करने के बजाय धैर्य के साथ आगे बढ़ना जरूरी रहेगा। परिवार में छोटी छोटी बातों को लेकर मतभेद की स्थिति भी बन सकती है। ऐसे में बातचीत के दौरान संयम बनाए रखना फायदेमंद रहेगा। यदि आप किसी नई योजना या समझौते पर आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं तो उसके सभी पहलुओं की अच्छी तरह जांच करना जरूरी होगा। आर्थिक मामलों में खर्च बढ़ने की संभावना के चलते बजट पर नियंत्रण रखना महत्वपूर्ण रहेगा। निवेश से जुड़े किसी फैसले में भी जल्दबाजी से बचने की सलाह दी गई है।

    कर्क राशि वालों के लिए भी बुध का यह गोचर कुछ मामलों में सावधानी की मांग कर सकता है। इस दौरान आत्मविश्वास में कमी महसूस होने के साथ कामकाज में बार बार अड़चन आने की स्थिति बन सकती है। आर्थिक पक्ष की बात करें तो अचानक कुछ खर्च सामने आ सकते हैं। इसके अलावा कहीं फंसा हुआ धन वापस मिलने में देरी होने की संभावना भी बताई गई है। नौकरी करने वाले लोगों को कार्यस्थल पर अधिकारियों के साथ बातचीत करते समय अपने शब्दों पर विशेष ध्यान देना चाहिए और संयम बनाए रखना चाहिए। वहीं कारोबार से जुड़े लोगों के लिए बड़े निवेश और महत्वपूर्ण फैसलों में सोच विचार करना जरूरी रहेगा।

    धनु राशि के जातकों के लिए बुध का तुला राशि में गोचर करियर और शिक्षा से जुड़े मामलों में धैर्य रखने का संकेत दे रहा है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को मनपसंद अवसर हासिल करने के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। विद्यार्थियों का ध्यान पढ़ाई से भटकने की स्थिति बन सकती है इसलिए एकाग्रता बनाए रखना जरूरी होगा। व्यापार में नई साझेदारी या किसी बड़े सौदे पर आगे बढ़ने से पहले दस्तावेजों और आर्थिक पक्ष की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए। अटके हुए कार्यों को पूरा होने में भी अपेक्षा से अधिक समय लग सकता है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बुध से संबंधित परेशानियों को कम करने के लिए भगवान गणेश की उपासना को शुभ माना जाता है। गणेश मंत्र का जाप करने और उन्हें हरे रंग की मिठाई अर्पित करने की परंपरा बताई गई है। जरूरतमंद लोगों को हरी वस्तुओं का दान करने और पशुओं को हरा चारा खिलाने की सलाह भी दी जाती है। हालांकि ये उपाय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

  • मां लक्ष्मी की कृपा पाने का खास उपाय, शुक्रवार को पढ़ें शीला की व्रत कथा, बदल सकती है जीवन की दिशा

    मां लक्ष्मी की कृपा पाने का खास उपाय, शुक्रवार को पढ़ें शीला की व्रत कथा, बदल सकती है जीवन की दिशा


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन कई श्रद्धालु मां लक्ष्मी के वैभव लक्ष्मी स्वरूप की पूजा करते हैं और सुख समृद्धि धन वैभव तथा परिवार की खुशहाली की कामना से व्रत रखते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार शुक्रवार के दिन श्रद्धा के साथ मां लक्ष्मी का पूजन करने और व्रत कथा का श्रवण करने से मन को शांति मिलती है। वैभव लक्ष्मी व्रत की प्रचलित कथा में शीला नाम की एक महिला की कहानी बताई जाती है जिसके जीवन में कठिन परिस्थितियों के बीच मां लक्ष्मी का मार्गदर्शन आता है।

    कथा के अनुसार एक नगर में शीला नाम की महिला अपने पति के साथ रहती थी। शुरुआत में उसका परिवार सुखी था लेकिन समय के साथ पति गलत संगति में पड़ गया। धीरे धीरे घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी और परिवार में परेशानियां बढ़ती चली गईं। पति के व्यवहार में भी बदलाव आ गया। इन परिस्थितियों से शीला काफी दुखी रहने लगी लेकिन उसने भगवान पर अपना विश्वास नहीं छोड़ा।

    एक दिन शीला को एक वृद्ध महिला मिली। उस महिला ने उसके दुख को समझा और उसे शुक्रवार को मां लक्ष्मी का वैभव लक्ष्मी व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि श्रद्धा और नियम के साथ यह व्रत किया जाता है और व्रत के दौरान मां लक्ष्मी का ध्यान तथा कथा का पाठ किया जाता है। धार्मिक कथा के अनुसार वृद्ध महिला ने शीला को व्रत की विधि और संकल्प के बारे में भी बताया।

    शीला ने उनकी बातों को ध्यान से सुना और मां लक्ष्मी के सामने व्रत करने का संकल्प लिया। कथा में बताया जाता है कि जब उसने आंखें खोलीं तो वह वृद्ध महिला वहां नहीं थीं। शीला को विश्वास हुआ कि स्वयं मां लक्ष्मी उसके मार्गदर्शन के लिए उस रूप में आई थीं। इसके बाद उसने श्रद्धा के साथ शुक्रवार का व्रत शुरू किया।

    शीला ने सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण किए और पूरे भक्तिभाव से मां लक्ष्मी का पूजन किया। शाम को पूजा के दौरान दीपक जलाया गया और मां को प्रसाद अर्पित किया गया। प्रचलित वैभव लक्ष्मी व्रत कथा में श्री यंत्र और लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूपों के पूजन का भी उल्लेख मिलता है। व्रत के दौरान किसी की निंदा या चुगली से बचने और मन को सकारात्मक रखने की बात कही गई है।

    कथा के अनुसार शीला ने लगातार श्रद्धा के साथ व्रत किया। धीरे धीरे उसके परिवार की परिस्थितियों में बदलाव आने लगा। पति के व्यवहार में भी सुधार हुआ और उसने मेहनत से काम करना शुरू किया। समय के साथ परिवार में फिर से सुख शांति और आर्थिक स्थिरता आने लगी। शीला का विश्वास मां लक्ष्मी के प्रति और मजबूत हो गया।

    प्रचलित मान्यता के अनुसार वैभव लक्ष्मी व्रत को 11 या 21 शुक्रवार तक करने का संकल्प लिया जाता है। अंतिम शुक्रवार को उद्यापन की परंपरा बताई गई है। इस अवसर पर मां लक्ष्मी को खीर या अन्य प्रसाद अर्पित किया जाता है और श्रद्धा के अनुसार महिलाओं या कन्याओं को प्रसाद तथा पूजन सामग्री दी जाती है। अलग अलग परंपराओं में उद्यापन की विधि अलग हो सकती है।

    माता लक्ष्मी की यह कथा भक्तों को श्रद्धा धैर्य और अच्छे आचरण का संदेश देती है। धार्मिक मान्यता है कि शुक्रवार को पूरे विश्वास के साथ मां लक्ष्मी का स्मरण और पूजन करने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है। भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखते हैं और माता से परिवार की सुख शांति तथा समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

  • अनंत चतुर्दशी पर 18 साल बाद बना दुर्लभ संयोग: 4 राशियों के लिए धन और तरक्की के योग

    अनंत चतुर्दशी पर 18 साल बाद बना दुर्लभ संयोग: 4 राशियों के लिए धन और तरक्की के योग


    नई दिल्ली। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी यानी अनंत चतुर्दशी को सनातन धर्म में बेहद पवित्र माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा कर 14 गांठों वाला अनंत सूत्र धारण किया जाता है और गणपति बप्पा को विदाई दी जाती है। इस बार 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ पंचक भी रहेगा और ज्योतिषीय गणना के अनुसार चंद्रमा कुंभ राशि में रहेगा।

    ज्योतिष गणना के मुताबिक इस दिन कुंभ राशि में चंद्रमा और राहु की युति से ग्रहण योग बनने की बात कही जा रही है। चंद्रमा के कुंभ राशि में रहने के कारण पंचक का प्रभाव भी रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस संयोग का असर सभी राशियों पर अलग-अलग हो सकता है, लेकिन चार राशियों के लिए आर्थिक लाभ, करियर और सफलता के विशेष योग बताए जा रहे हैं।

    18 साल बाद कुंभ राशि में चंद्र-राहु का संयोग

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार राहु किसी एक राशि में करीब 18 महीने यानी डेढ़ साल तक रहते हैं, जबकि चंद्रमा लगभग सवा दो दिन में राशि बदलते हैं। ऐसे में राहु के कुंभ राशि में गोचर के दौरान चंद्रमा का भी इसी राशि में आना अपेक्षाकृत दुर्लभ संयोग माना जाता है।

    इसी आधार पर अनंत चतुर्दशी के दिन कुंभ राशि में चंद्रमा और राहु की युति को करीब 18 साल बाद बनने वाला संयोग बताया जा रहा है। वहीं, पंचांग के अनुसार 25 सितंबर को चंद्रमा कुंभ राशि में रहेगा और शतभिषा नक्षत्र के बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेगा। इस दिन पंचक भी दर्ज है।

    मेष राशि: आय के नए रास्ते खुलने के योग

    मेष राशि वालों के लिए यह युति 11वें भाव यानी आय और लाभ के भाव में बनने की बात कही गई है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसका सकारात्मक प्रभाव आर्थिक मामलों में देखने को मिल सकता है। आय के नए स्रोत बन सकते हैं। लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना है। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए किसी बड़ी डील के फाइनल होने के योग बन सकते हैं।

    मिथुन राशि: भाग्य का साथ, विदेश से जुड़े काम में अवसर

    मिथुन राशि के जातकों के लिए चंद्रमा और राहु का संयोग 9वें भाव यानी भाग्य और धर्म के भाव में बनने की बात कही गई है।

    इसके प्रभाव से अटके हुए काम गति पकड़ सकते हैं। उच्च शिक्षा, विदेश व्यापार और ऑनलाइन बिजनेस से जुड़े लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं। धार्मिक यात्रा के योग भी बन सकते हैं। भाग्य का साथ मिलने से कई महत्वपूर्ण काम पूरे होने की संभावना जताई जा रही है।

    तुला राशि: निवेश से लाभ और रचनात्मक क्षेत्र में पहचान

    तुला राशि के लिए यह युति 5वें भाव यानी बुद्धि, संतान और लाभ से जुड़े भाव में बनने की बात कही गई है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक शेयर मार्केट या पुराने निवेश से अचानक आर्थिक लाभ मिल सकता है। रचनात्मक और मीडिया क्षेत्र से जुड़े लोगों के काम को पहचान मिल सकती है। इस दौरान अन्य शुभ ग्रहों के प्रभाव को भी तुला राशि के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।

    धनु राशि: आत्मविश्वास बढ़ेगा, करियर में बदलाव के संकेत

    धनु राशि के जातकों के लिए चंद्रमा और राहु का संयोग तीसरे भाव यानी पराक्रम और छोटे भाई-बहनों से संबंधित भाव में बनने की बात कही गई है।

    इससे आत्मविश्वास और काम करने की क्षमता बढ़ने के योग बताए जा रहे हैं। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है या पदोन्नति के अवसर बन सकते हैं। कार्यक्षेत्र में आपकी कार्यशैली की सराहना हो सकती है। विरोधियों पर प्रभाव बढ़ने के भी संकेत बताए गए हैं।

  • शुक्रवार व्रत के ये नियम बदल सकते हैं पूजा का तरीका जानिए क्या करें क्या न करें और किस चीज से रहें दूर

    शुक्रवार व्रत के ये नियम बदल सकते हैं पूजा का तरीका जानिए क्या करें क्या न करें और किस चीज से रहें दूर


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी और शुक्र देव की आराधना से जुड़ा माना जाता है। वहीं कई श्रद्धालु इस दिन संतोषी माता का व्रत भी रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार का व्रत सुख शांति सौभाग्य और समृद्धि की कामना से किया जाता है। अलग अलग परंपराओं में शुक्रवार के व्रत की पूजा विधि और नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी परंपरा के अनुसार संकल्प लेकर पूजा करनी चाहिए।

    शुक्रवार व्रत की शुरुआत करने से पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और स्वच्छ वस्त्र धारण करने की परंपरा है। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके अपने आराध्य का ध्यान किया जाता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूजा के दौरान अपनी मनोकामना के साथ व्रत का संकल्प लेते हैं। सामान्य रूप से पूजा में देवी देवता को उनके प्रिय माने जाने वाले फूल फल और प्रसाद अर्पित किए जाते हैं। व्रत की कथा और आरती का भी विशेष महत्व माना जाता है।

    अगर शुक्रवार को संतोषी माता का व्रत रखा जा रहा है तो प्रचलित मान्यता के अनुसार गुड़ और चने का भोग लगाया जाता है। संतोषी माता के शुक्रवार व्रत में खट्टी चीजों से परहेज करने की परंपरा है। व्रती अपनी क्षमता के अनुसार उपवास रख सकते हैं और कई परंपराओं में एक समय सात्विक भोजन करने का विधान बताया गया है। कुछ लोग केवल फल दूध या अन्य व्रत सामग्री का सेवन करते हैं।

    माता लक्ष्मी की पूजा करने वाले श्रद्धालु शुक्रवार को घर की साफ सफाई पर विशेष ध्यान देते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार साफ और व्यवस्थित घर में लक्ष्मी का वास माना जाता है। पूजा के दौरान माता लक्ष्मी को फूल फल और मिठाई अर्पित की जाती है। शाम के समय घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीपक जलाने की परंपरा भी कई जगह प्रचलित है। कुछ मान्यताओं में सफेद या हल्के रंग के वस्त्र पहनना और सफेद वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना गया है।

    व्रत के दौरान केवल भोजन का त्याग करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि मन और व्यवहार की शुद्धता पर भी जोर दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार क्रोध ईर्ष्या चुगली और निंदा से बचना चाहिए। व्रत के दौरान भगवान का ध्यान मंत्र जाप भजन या धार्मिक पाठ करने की परंपरा है। जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी व्रत से जुड़े धार्मिक आचरण का हिस्सा माना जाता है।

    शुक्रवार व्रत में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि व्यक्ति किस देवी देवता के लिए व्रत कर रहा है। संतोषी माता के व्रत में खट्टी चीजों से बचने की मान्यता प्रमुख है। वहीं सामान्य उपवास में फल दूध दही और सात्विक भोजन का सेवन करने की परंपरा कई परिवारों में है। स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार व्रत रखने का तरीका तय करना भी जरूरी है और अस्वस्थ व्यक्ति को कठोर उपवास करने से बचना चाहिए।

    व्रत पूरा होने के बाद पारण भी नियमपूर्वक करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत खोलते समय सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और पहले भगवान को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करना शुभ माना जाता है। इस तरह शुक्रवार का व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूजा पाठ संयम दान और सकारात्मक आचरण से जुड़ी धार्मिक परंपरा के रूप में मनाया जाता है।

  • आज का राशिफल 25 सितंबर 2026, मेष से मीन तक जानें कैसा रहेगा दिन, किन राशियों के बनेंगे तरक्की और धन लाभ के योग

    आज का राशिफल 25 सितंबर 2026, मेष से मीन तक जानें कैसा रहेगा दिन, किन राशियों के बनेंगे तरक्की और धन लाभ के योग


    नई दिल्ली। 25 सितंबर 2026 शुक्रवार का दिन कई राशियों के लिए नए अवसर लेकर आ सकता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार आज कुछ राशि के जातकों को करियर और कारोबार में आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं तो कुछ लोगों को आर्थिक मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत होगी। दिन की शुरुआत किसी महत्वपूर्ण योजना के साथ हो सकती है। नौकरी करने वाले लोगों को अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान देना होगा वहीं व्यापार करने वालों के लिए नए संपर्क और काम के अवसर सामने आ सकते हैं। ग्रहों की स्थिति को देखते हुए मेष राशि के जातकों के लिए लाभ और उपलब्धि के संकेत हैं जबकि वृषभ राशि वालों को लक्ष्य पर फोकस बनाए रखने से फायदा मिल सकता है।

    मेष राशि वालों के लिए आज का दिन लाभ देने वाला रह सकता है। कामकाज में मेहनत का परिणाम मिलने की संभावना है। किसी पुराने प्रयास से फायदा मिल सकता है। नौकरी में अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिल सकता है। आर्थिक मामलों में दिन सामान्य से बेहतर रह सकता है।

    वृषभ राशि वालों को आज अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखना होगा। मेहनत और सही फैसलों से परिस्थितियां आपके पक्ष में आ सकती हैं। धन से जुड़े किसी महत्वपूर्ण काम में सफलता मिल सकती है। रिश्तों में अपनी बात खुलकर रखने का मौका मिलेगा।

    मिथुन राशि वालों को आज अपनी दिनचर्या और भावनाओं के बीच संतुलन बनाना होगा। किसी पुराने काम को पूरा करने पर राहत मिल सकती है। अनावश्यक चिंता से बचें और अपना ध्यान जरूरी कामों पर रखें। खर्च को लेकर भी सजग रहना बेहतर होगा।

    कर्क राशि वालों के लिए दिन ऊर्जा और उत्साह से भरा रह सकता है। रचनात्मक कामों में सफलता मिलने के संकेत हैं। नौकरी और कारोबार में अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने का अवसर मिल सकता है। परिवार का सहयोग भी मिल सकता है।

    सिंह राशि वालों को आज धैर्य के साथ आगे बढ़ना होगा। मुश्किल परिस्थितियों में आपकी मेहनत काम आ सकती है। कार्यक्षेत्र में किसी योजना को आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा। सकारात्मक सोच आपके लिए मददगार साबित हो सकती है।

    कन्या राशि वालों के लिए दिन रिश्तों और संवाद के लिहाज से महत्वपूर्ण रह सकता है। किसी करीबी से बातचीत मन को हल्का कर सकती है। कामकाज में नई ऊर्जा महसूस होगी। अपनी बात रखते समय सामने वाले की भावनाओं का भी ध्यान रखें।

    तुला राशि वालों को आज शांत रहकर फैसले लेने की जरूरत है। आसपास के लोगों के व्यवहार से ध्यान भटक सकता है लेकिन समझदारी से काम लेने पर स्थिति संभल सकती है। बातचीत के जरिए किसी पुराने मतभेद को दूर करने का अवसर मिल सकता है।

    वृश्चिक राशि वालों के लिए आज आत्मविश्वास बढ़ सकता है। किसी काम में उम्मीद की नई किरण दिखाई दे सकती है। करियर में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। हालांकि अपनी सेहत और आराम को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    धनु राशि वालों को आज दूसरों पर अपनी सोच थोपने से बचना चाहिए। बातचीत में धैर्य रखने से रिश्ते बेहतर होंगे। मेहनत का परिणाम मिलने की संभावना है। किसी महत्वपूर्ण फैसले में तर्क और समझदारी से काम लेना आपके लिए बेहतर रहेगा।

    मकर राशि वालों के लिए परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने का अवसर मिल सकता है। कामकाज में नई ऊर्जा महसूस होगी। आर्थिक मामलों में सोच समझकर कदम उठाएं। बातचीत में मिठास बनाए रखने से रिश्ते मजबूत होंगे।

    कुंभ राशि वालों के लिए आज आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं। सकारात्मक सोच और मेहनत से कार्यक्षेत्र में अच्छा परिणाम मिल सकता है। किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से संपर्क भविष्य में उपयोगी साबित हो सकता है।

    मीन राशि वालों को आज परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की जरूरत होगी। अपनी क्षमता पर भरोसा रखें और लक्ष्य से भटकने से बचें। मेहनत और धैर्य के साथ आगे बढ़ने पर कामयाबी मिल सकती है। रिश्तों में भी समझदारी से बात करना लाभकारी रहेगा।

  • गणपति बप्पा की विदाई का समय आ गया 25 सितंबर को होगा विसर्जन नोट कर लें शुभ मुहूर्त और जरूरी नियम

    गणपति बप्पा की विदाई का समय आ गया 25 सितंबर को होगा विसर्जन नोट कर लें शुभ मुहूर्त और जरूरी नियम


    नई दिल्ली। गणेश उत्सव के बाद अब गणपति बप्पा की विदाई का समय आ गया है। इस साल गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर 2026 को मनाया गया था और इसके साथ ही घरों तथा पंडालों में गणपति प्रतिमाओं की स्थापना हुई थी। अब अनंत चतुर्दशी के अवसर पर भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। गणेश विसर्जन की तारीख को लेकर कई लोगों के मन में 24 और 25 सितंबर को लेकर असमंजस है। ऐसे में जानना जरूरी है कि बप्पा की विदाई किस दिन की जाएगी और इसके लिए कौन से शुभ मुहूर्त बताए गए हैं।

    द्रिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात 11 बजकर 18 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 25 सितंबर की रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगा। तिथि के आधार पर इस साल गणेश विसर्जन 25 सितंबर 2026 शुक्रवार को किया जाएगा। इस दिन भक्त विधि विधान से गणपति की पूजा करने के बाद उन्हें श्रद्धापूर्वक विदाई देंगे।

    गणेश विसर्जन के लिए दिनभर में कई शुभ चौघड़िया मुहूर्त बताए गए हैं। सुबह का चर लाभ अमृत मुहूर्त 6 बजकर 11 मिनट से 10 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। दोपहर में शुभ मुहूर्त 12 बजकर 13 मिनट से 1 बजकर 43 मिनट तक बताया गया है। इसके बाद शाम का चर मुहूर्त 4 बजकर 44 मिनट से 6 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। रात में लाभ का मुहूर्त 9 बजकर 14 मिनट से 10 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा रात 12 बजकर 13 मिनट से 26 सितंबर की सुबह 4 बजकर 42 मिनट तक शुभ अमृत चर मुहूर्त रहेगा।

    विसर्जन के दिन सबसे पहले घर में स्थापित गणपति की विधिवत पूजा करनी चाहिए। श्रद्धालु भगवान गणेश को नारियल शमी पत्र धूप और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर सकते हैं। पूजा के बाद गणपति की आरती की जाती है और परिवार की सुख शांति स्वास्थ्य तथा मंगल की कामना की जाती है। इसके बाद प्रतिमा को सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाया जाता है।

    धार्मिक परंपराओं में विसर्जन के दौरान श्रद्धा और शुद्धता का विशेष ध्यान रखने की बात कही गई है। कई स्थानों पर भक्त नंगे पैर गणपति को विसर्जन के लिए ले जाने की परंपरा का पालन करते हैं। चमड़े से बनी वस्तुओं से भी परहेज किया जाता है। वहीं पर्यावरण की दृष्टि से मिट्टी और प्राकृतिक सामग्री से बनी प्रतिमाओं का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। ऐसी प्रतिमाओं का विसर्जन भी निर्धारित स्थानों पर ही किया जाना चाहिए।

    25 सितंबर को गणेश विसर्जन के साथ अनंत चतुर्दशी का पर्व भी मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा करने की परंपरा है। श्रद्धालु व्रत रखते हैं और अनंत सूत्र बांधते हैं। अलग-अलग परिवारों में व्रत और पूजा की परंपराएं अलग हो सकती हैं इसलिए इन्हें अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार करना उचित माना जाता है।

    इस तरह 25 सितंबर को गणपति बप्पा की विदाई के साथ गणेश उत्सव का समापन होगा। भक्त इस अवसर पर प्रार्थना करेंगे कि गणपति के साथ उनके जीवन के दुख संकट और बाधाएं भी दूर हों और परिवार में सुख शांति तथा समृद्धि बनी रहे।

  • महिलाओं के लिए खास है आने वाला समय करवा चौथ अहोई अष्टमी जितिया और छठ पूजा की जानिए पूरी जानकारी

    महिलाओं के लिए खास है आने वाला समय करवा चौथ अहोई अष्टमी जितिया और छठ पूजा की जानिए पूरी जानकारी


    नई दिल्ली। त्योहारों का मौसम शुरू होते ही हिंदू पंचांग में व्रत और त्योहारों की लंबी श्रृंखला भी शुरू हो जाती है। खासकर महिलाओं के लिए आने वाले दिन काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं क्योंकि इस दौरान कई प्रमुख व्रत और उपवास पड़ते हैं। करवा चौथ से लेकर अहोई अष्टमी और जितिया के बाद छठ पूजा तक कई ऐसे अवसर आने वाले हैं जिनका धार्मिक और महत्व माना जाता है। दशहरा दिवाली धनतेरस और भाई दूज जैसे प्रमुख त्योहार भी इसी दौरान पड़ेंगे।

    सबसे पहले करवा चौथ का व्रत आएगा। विवाहित महिलाएं इस दिन पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार कई महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला उपवास करती हैं। शाम के समय करवा चौथ की पूजा की जाती है और चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है। करवा चौथ को लेकर देश के अलग अलग हिस्सों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार पूजा की विधि में अंतर भी देखने को मिलता है।

    इसके बाद अहोई अष्टमी का व्रत आता है। यह व्रत खास तौर पर संतान की सुख समृद्धि और लंबी आयु की कामना से जुड़ा माना जाता है। माताएं इस दिन उपवास रखकर अहोई माता की पूजा करती हैं। कई स्थानों पर तारों को देखकर व्रत खोलने की परंपरा है। अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं परिवार की सुख शांति और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं।

    महिलाओं के प्रमुख व्रतों में जीवित्पुत्रिका यानी जितिया व्रत का भी विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से संतान की लंबी आयु और उनकी सुरक्षा की कामना के लिए रखा जाता है। कई क्षेत्रों में महिलाएं इस दिन कठिन उपवास करती हैं। खासकर बिहार झारखंड पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में जितिया व्रत को लेकर विशेष धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं हैं।

    इसके बाद छठ पूजा का पर्व आता है जो केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है लेकिन इसमें महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। छठ व्रत में सूर्य देव और छठी मैया की उपासना की जाती है। व्रती महिलाएं और पुरुष दोनों ही कठोर नियमों का पालन करते हैं। इस दौरान डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। छठ पूजा खास तौर पर बिहार झारखंड पूर्वी उत्तर प्रदेश और देश के कई अन्य हिस्सों में बड़े स्तर पर मनाई जाती है।

    इन व्रतों के बीच दशहरा धनतेरस दिवाली और भाई दूज जैसे प्रमुख त्योहार भी आएंगे। ऐसे में आने वाले सप्ताह धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। बाजारों में भी त्योहारों की तैयारियां शुरू हो जाती हैं और घरों में पूजा पाठ के साथ खरीदारी का सिलसिला बढ़ जाता है।

    करवा चौथ अहोई अष्टमी जितिया और छठ पूजा जैसे व्रत भारतीय परंपराओं में परिवार संतान और सुख समृद्धि से जुड़ी मान्यताओं को दर्शाते हैं। अलग अलग क्षेत्रों में इनके नियम और पूजा विधियां अलग हो सकती हैं इसलिए व्रत रखने से पहले स्थानीय पंचांग या परंपरा के अनुसार तिथि और पूजा समय की जानकारी देखना उचित रहता है।

  • गुरुवार के दिन क्या करें और क्या नहीं बाल काटने से लेकर कपड़े धोने तक जानिए पूरी मान्यता

    गुरुवार के दिन क्या करें और क्या नहीं बाल काटने से लेकर कपड़े धोने तक जानिए पूरी मान्यता


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सप्ताह का गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और बृहस्पति देव का स्मरण करने से जीवन में सुख समृद्धि और सकारात्मकता आती है। गुरुवार को कई लोग व्रत रखते हैं और पीले रंग के वस्त्र धारण करने के साथ भगवान विष्णु को पीले फूल और पीले रंग की वस्तुओं का भोग लगाते हैं। मान्यता है कि गुरुवार का दिन धार्मिक कार्यों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। हालांकि इस दिन कुछ कामों को करने से बचने की भी परंपरा है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार के दिन बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए। कई परिवारों में इस दिन शेविंग करने की भी मनाही मानी जाती है। इसके पीछे धार्मिक परंपराओं और ज्योतिषीय मान्यताओं को आधार माना जाता है। मान्यता है कि गुरुवार को शरीर से जुड़ी इन चीजों को काटने से बृहस्पति ग्रह से जुड़े शुभ प्रभाव कमजोर हो सकते हैं। हालांकि यह धार्मिक विश्वास है और इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

    गुरुवार के दिन कपड़े धोने और घर की विशेष साफ सफाई से जुड़े कुछ कामों से भी बचने की परंपरा कई जगह देखने को मिलती है। खासतौर पर पुराने समय से चली आ रही मान्यताओं में इस दिन कपड़े धोने और घर के कुछ हिस्सों की सफाई को लेकर अलग नियम बताए गए हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से घर की सुख समृद्धि प्रभावित हो सकती है। अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में इन मान्यताओं को लेकर अलग परंपराएं भी देखने को मिलती हैं।

    गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा के दौरान पीले रंग का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त भगवान विष्णु को पीले फूल और पीले फल अर्पित करते हैं। केले के पेड़ की पूजा करने की परंपरा भी कई जगह प्रचलित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। इस दिन जरूरतमंद व्यक्ति को पीले रंग की वस्तुएं दान करना भी शुभ माना जाता है। चने की दाल गुड़ हल्दी और पीले वस्त्र का दान करने की परंपरा भी कई स्थानों पर है।

    गुरुवार के दिन पूजा पाठ के साथ अपनी वाणी और व्यवहार को लेकर भी संयम रखने की सलाह दी जाती है। किसी व्यक्ति का अपमान करने या अनावश्यक विवाद में पड़ने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सकारात्मक विचारों के साथ भगवान विष्णु का ध्यान करने से मन को शांति मिलती है। कई लोग इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करते हैं।

    गुरुवार को बृहस्पति देव से जुड़े उपाय करने की भी मान्यता है। कुंडली में गुरु की स्थिति कमजोर होने पर ज्योतिषीय सलाह के अनुसार पूजा पाठ और दान किया जाता है। पीली वस्तुओं का दान और जरूरतमंदों की सहायता को विशेष महत्व दिया जाता है। हालांकि किसी भी ज्योतिषीय उपाय को व्यक्तिगत कुंडली और परंपरा के अनुसार ही अपनाने की सलाह दी जाती है।

    कुल मिलाकर गुरुवार को भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की आराधना का दिन माना जाता है। इस दिन पूजा पाठ के साथ संयम और सेवा भाव रखने की परंपरा है। बाल काटने से लेकर कुछ घरेलू कार्यों तक कई तरह की मान्यताएं इस दिन से जुड़ी हैं। इन नियमों को धार्मिक विश्वास और परंपरा के रूप में देखा जाना चाहिए। इनका पालन व्यक्ति अपनी आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार कर सकता है।

  • आज से शनि के पुष्य नक्षत्र में मंगल, 17 अक्टूबर तक 3 राशियों को रहना होगा सतर्क

    आज से शनि के पुष्य नक्षत्र में मंगल, 17 अक्टूबर तक 3 राशियों को रहना होगा सतर्क


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में मंगल को साहस, ऊर्जा, भूमि, पराक्रम और सेना का कारक ग्रह माना गया है। वहीं शनि के स्वामित्व वाले पुष्य नक्षत्र को ज्योतिष में महत्वपूर्ण नक्षत्र माना जाता है, जो पोषण, स्थिरता और शुभता से जुड़ा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 24 सितंबर 2026 को मंगल पुनर्वसु नक्षत्र से निकलकर पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। मंगल यहां 17 अक्टूबर 2026 तक रहेंगे।

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार मंगल के शनि के नक्षत्र में आने से इस अवधि में कुछ लोगों को विचारों के टकराव, गुस्सा, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों या कामकाज में अचानक आने वाली रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर मिथुन, तुला और मकर राशि के जातकों को इस दौरान निर्णय लेते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    मिथुन राशि

    मंगल का पुष्य नक्षत्र में गोचर मिथुन राशि से जुड़े जातकों के दूसरे भाव को प्रभावित करेगा। यह भाव धन, वाणी और परिवार से संबंधित माना जाता है।

    ज्योतिषीय फलादेश के अनुसार इस दौरान बातचीत के दौरान गुस्सा या कठोर शब्द परेशानी बढ़ा सकते हैं। परिवार के सदस्यों या कार्यस्थल पर किसी से विवाद की स्थिति बन सकती है। अचानक आने वाला कोई बड़ा खर्च आर्थिक बजट को प्रभावित कर सकता है। इसलिए इस अवधि में बिना पूरी जानकारी के बड़ा निवेश करने या किसी को बड़ी रकम उधार देने से बचने की सलाह दी जाती है।

    तुला राशि

    तुला राशि के जातकों के लिए मंगल का यह गोचर दसवें भाव में होगा, जिसे कर्म, करियर और कारोबार से जोड़ा जाता है।

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों या सहकर्मियों के साथ मतभेद हो सकते हैं। ऑफिस में किसी विवाद या राजनीति का हिस्सा बनने से बचना बेहतर रहेगा। इस दौरान जल्दबाजी में नौकरी बदलने या किसी कारोबारी समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले उसके सभी पहलुओं की अच्छी तरह जांच कर लेने की सलाह दी जाती है। अपने काम पर फोकस बनाए रखना महत्वपूर्ण रहेगा।

    मकर राशि

    मकर राशि के स्वामी शनि हैं और मंगल का पुष्य नक्षत्र में गोचर मकर राशि के सातवें भाव को प्रभावित करेगा। ज्योतिष में सातवें भाव का संबंध दांपत्य जीवन, साझेदारी और व्यापार से माना जाता है।

    इस अवधि में जीवनसाथी के साथ छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव या मतभेद बढ़ने की आशंका बताई गई है। ऐसे में बातचीत के दौरान धैर्य रखना जरूरी होगा। कारोबार में पार्टनरशिप करने वाले लोगों को लेन-देन और कामकाज में पारदर्शिता बनाए रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि गलतफहमी की स्थिति बन सकती है। स्वास्थ्य को लेकर भी लापरवाही न बरतें। खासकर ब्लड प्रेशर (BP) और जोड़ों से जुड़ी परेशानी होने पर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मंगल के अशुभ प्रभाव से बचने के ज्योतिषीय उपाय

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मंगल के नक्षत्र परिवर्तन के दौरान हनुमान जी की पूजा करना शुभ माना जाता है। इसके लिए मंगलवार को हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ किया जा सकता है। हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करने की भी मान्यता है।

    इसके अलावा मंगलवार को जरूरतमंद व्यक्ति या मंदिर में लाल मसूर की दाल, गुड़ या लाल वस्त्र दान करने की सलाह दी जाती है। ये उपाय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं।