Category: Religious Astrology

  • पारिवारिक अनुशासन और गरुड़ पुराण: पिता के जीवित होने पर पुत्र के इन विशेष कर्तव्यों और वर्जनाओं का क्या है धार्मिक आधार?

    पारिवारिक अनुशासन और गरुड़ पुराण: पिता के जीवित होने पर पुत्र के इन विशेष कर्तव्यों और वर्जनाओं का क्या है धार्मिक आधार?


    नई दिल्ली।हिंदू धर्मग्रंथों की समृद्ध परंपरा में पिता को केवल एक अभिभावक नहींबल्कि परिवार का आधार स्तंभ और आकाश के समान रक्षक माना गया है। शास्त्रों का मत है कि यदि माता हमें इस संसार में लाती है और संस्कारित करती हैतो पिता उस जीवन को दिशासुरक्षा और स्थायित्व प्रदान करते हैं। विशेष रूप से गरुड़ पुराण मेंजो जीवन और मृत्यु के गूढ़ रहस्यों के साथ-साथ लोक-परलोक के कर्तव्यों की व्याख्या करता हैपिता के सम्मान और पारिवारिक मर्यादा को लेकर अत्यंत स्पष्ट और कड़े निर्देश दिए गए हैं। इन नियमों का ध्येय केवल धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं हैअपनिु परिवार के भीतर एक सुदृढ़ अनुशासनसंतुलन और परस्पर आदर की भावना को अक्षुण्ण बनाए रखना है। जब तक पिता जीवित हैंतब तक पुत्र के लिए कुछ विशेष सीमाओं का निर्धारण किया गया हैताकि पीढ़ीगत पदक्रम और सांस्कृतिक परंपराएं सुरक्षित रह सकें।

    गरुड़ पुराण के अनुसारपिता घर के स्वाभाविक और नैसर्गिक मुखिया होते हैं। शास्त्र यह प्रतिपादित करते हैं कि जब तक पिता का साया सिर पर हैतब तक घर के किसी भी प्रमुख निर्णय या धार्मिक अनुष्ठान की अगुवाई उन्हीं के हाथों में होनी चाहिए। पुत्र का परम कर्तव्य है कि वह एक सहायक की भूमिका निभाए और अपनी ऊर्जा व आधुनिक अनुभव को पिता के मार्गदर्शन के साथ जोड़े। यदि पुत्र स्वयं को सर्वाधिकार संपन्न मानकर नेतृत्व की बागडोर छीनने का प्रयास करता हैतो इससे न केवल परिवार का संतुलन बिगड़ता हैबल्कि नैतिक मूल्यों का भी ह्रास होता है। शास्त्र हमें समझाते हैं कि अधिकार प्राप्त करने से पहले कर्तव्य को समझना ही वास्तविक धर्म है।

    इसी क्रम मेंपितृकर्म यानी पूर्वजों के प्रति किए जाने वाले तर्पण और पिंडदान को लेकर भी गरुड़ पुराण में एक विशेष व्यवस्था का उल्लेख मिलता है। पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पहला अधिकार जीवित पिता का है। जब तक पिता स्वयं सक्षम और जीवित हैंतब तक पुत्र को स्वतंत्र रूप से पितृ तर्पण नहीं करना चाहिए। इसके पीछे का मूल भाव यह है कि वंशावली की कड़ियाँ एक निश्चित क्रम में जुड़ी होती हैं और उस क्रम का उल्लंघन करना प्रकृति के नियमों के विपरीत माना गया है। यह परंपरा परिवार की जड़ों को सींचने और वरिष्ठता का सम्मान करने का एक जीवंत प्रतीक है।

    दान-पुण्य और सामाजिक प्रतिष्ठा के विषय में भी गरुड़ पुराण का मार्गदर्शन अत्यंत व्यावहारिक है। यदि पुत्र अपनी मेहनत की कमाई से कोई दान करता है या पुण्य कर्म करता हैतो उसे पिता का नाम ही प्राथमिकता के साथ आगे रखना चाहिए। यह मात्र एक औपचारिकता नहींबल्कि इस सत्य की स्वीकारोक्ति है कि पुत्र की जो भी पहचान हैउसका मूल स्रोत उसके पिता ही हैं। सार्वजनिक मंचों और निमंत्रण पत्रों पर भी पिता का नाम पहले और पुत्र का नाम बाद में लिखना शिष्टाचार का हिस्सा माना गया है। यह छोटा सा व्यवहारिक नियम इस गहरे सांस्कृतिक अर्थ को स्पष्ट करता है कि परिवार में वरिष्ठता सर्वोपरि है।

    प्राचीन मान्यताओं में कुछ शारीरिक प्रतीकों को भी वंश की गरिमा से जोड़ा गया था। जैसे कि पुराने समय में मूंछ और केश को कुल की मर्यादा का प्रतीक माना जाता था और पिता के जीवित रहते पुत्र के लिए इनके संबंध में कुछ वर्जनाएं थीं। यद्यपि आधुनिक युग में इन प्रतीकों का स्वरूप बदल गया हैपरंतु उनका सार आज भी प्रासंगिक है कि पिता के स्वाभिमान को कभी ठेस नहीं पहुँचनी चाहिए। अंततः, गरुड़ पुराण के ये नियम कोई कठोर बंधन नहीं, बल्कि वे सूत्र हैं जो परिवार को बिखरने से बचाते हैं। जब पुत्र मर्यादा की इन सीमाओं का पालन करता है, तो परिवार में प्रेम, विश्वास और स्थिरता का वास होता है, जो किसी भी समृद्ध समाज की पहली शर्त है।

  • बुधवार के अचूक उपाय: गाय को खिलाएं हरा मूंग-हरी घास, बुध देव की बरसेगी कृपा

    बुधवार के अचूक उपाय: गाय को खिलाएं हरा मूंग-हरी घास, बुध देव की बरसेगी कृपा


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवता और ग्रह को समर्पित है। बुधवार का दिन ग्रहों के राजकुमार बुध देव का माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुध ग्रह वाणी बुद्धि शिक्षा संचार और व्यापार के कारक हैं। जिनकी कुंडली में बुध कमजोर होता है या बुध दोष होता है उन्हें वाणी संबंधी समस्याएं निर्णय क्षमता में कमी और व्यापार में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में बुधवार के दिन कुछ सरल और प्रभावी उपाय कर बुध ग्रह को मजबूत किया जा सकता है।

    मंत्र जाप करें

    बुधवार को ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना गया है। नियमित जाप से वाणी में मधुरता बुद्धि में तीक्ष्णता और व्यापार में वृद्धि के योग बनते हैं। विद्यार्थियों और संचार क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह उपाय विशेष लाभकारी बताया गया है।

    गाय को हरा चारा खिलाएं

    बुधवार के दिन गाय को हरा चारा विशेषकर हरी मूंग हरा धनिया या हरी घास खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे बुध ग्रह शांत होता है और आर्थिक स्थिति में सुधार आता है। बुध दोष से पीड़ित लोगों को यह उपाय अवश्य करना चाहिए।

    हरे रंग का उपयोग करें

    हरा रंग बुध ग्रह का प्रिय रंग है। बुधवार को हरे रंग के वस्त्र पहनना या हरे रंग का रूमाल अपने पास रखना शुभ फलदायी होता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और बुध का दुष्प्रभाव कम होता है।

    गणेश जी की पूजा करें

    बुध ग्रह की शांति के लिए भगवान गणेश की आराधना करना विशेष लाभ देता है। बुधवार को गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें और ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करें। इससे बुध दोष दूर होता है और कार्यों में सफलता मिलती है।

    कच्चे सूत में 7 गांठें बांधें

    परीक्षा या इंटरव्यू में सफलता के लिए बुधवार को कच्चे सूत में सात गांठें लगाकर जय गणेश काटो क्लेश मंत्र का जाप करें और धागे को गणेश जी को अर्पित करें। इससे बाधाएं दूर होने की मान्यता है।

    तुलसी को जल अर्पित करें

    बुधवार की सुबह तुलसी के पौधे को जल अर्पित करते हुए ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। इससे बुध ग्रह के दोष शांत होते हैं।

    तांबे का दान और हरी वस्तुओं का दान

    धन लाभ की इच्छा रखने वाले व्यक्ति बुधवार से लगातार सात दिन तक गणेश पूजा कर तांबे का दान करें। साथ ही छोटे बच्चों को हरे फल हरे वस्त्र कॉपी-किताब या पेंसिल दान करना भी शुभ माना गया है। इन उपायों को श्रद्धा और नियमितता से करने पर बुध ग्रह की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में बुद्धि वाणी तथा व्यापार से जुड़े क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलते हैं।

  • महाकाल का महापर्व 15 फरवरी को 44 घंटे तक नॉनस्टॉप दर्शन और दोपहर 12 बजे अद्भुत भस्म आरती का दिव्य आयोजन

    महाकाल का महापर्व 15 फरवरी को 44 घंटे तक नॉनस्टॉप दर्शन और दोपहर 12 बजे अद्भुत भस्म आरती का दिव्य आयोजन


    उज्जैन का विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भक्ति और आस्था के महासागर में डूबने जा रहा है। इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी 2026 रविवार को मनाया जाएगा और इसे लेकर मंदिर प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए महाकाल मंदिर के पट लगातार 44 घंटे तक खुले रहेंगे ताकि देश और विदेश से आने वाले लाखों भक्त बिना किसी बाधा के बाबा महाकाल के दर्शन कर सकें।

    6 फरवरी से ही महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्रि के साथ भगवान शिव के विवाहोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। यह आयोजन 16 फरवरी 2026 तक चलेगा। पूरे मंदिर परिसर को भव्य और आकर्षक सजावट से सजाया जा रहा है। फूलों की विशेष साज सज्जा के साथ महादेव का दिव्य श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधा तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    महाशिवरात्रि के दिन 15 फरवरी को सुबह 6 बजे से दर्शन प्रारंभ होंगे और 16 फरवरी की सुबह तक बिना किसी विश्राम के जारी रहेंगे। इन 44 घंटों के दौरान मंदिर नॉनस्टॉप खुला रहेगा। श्रद्धालु दिन और रात किसी भी समय बाबा महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन भक्तों के लिए की गई है जो दूर दराज से उज्जैन पहुंचते हैं और महाशिवरात्रि पर महाकाल के साक्षात दर्शन की अभिलाषा रखते हैं।

    महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। इस दिन चारों प्रहर महादेव की पूजा की जाती है। भक्त व्रत रखते हैं और रात्रि जागरण कर शिव नाम का स्मरण करते हैं। उज्जैन नगरी इस अवसर पर पूरी तरह शिवमय हो जाती है। हर ओर हर हर महादेव के जयघोष गूंजते हैं और वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो जाता है।

    इस पर्व का सबसे विशेष और आकर्षक आयोजन 16 फरवरी को दोपहर 12 बजे होने वाली भस्म आरती होगी। महाकालेश्वर मंदिर में दोपहर की भस्म आरती साल में केवल एक बार महाशिवरात्रि पर ही आयोजित की जाती है। यह अद्भुत और दुर्लभ दृश्य देखने के लिए हर वर्ष लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल को फलों फूलों और सप्तधान्य से निर्मित भव्य सेहरा बांधा जाता है। यह श्रृंगार अपने आप में अद्वितीय होता है और श्रद्धालुओं के लिए दिव्य अनुभूति का क्षण बन जाता है।

    महाशिवरात्रि और शिव नवरात्रि का यह भव्य समापन 16 फरवरी को भस्म आरती के साथ होगा। उज्जैन का यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत खास है। महाकाल की नगरी में इस दौरान उमड़ने वाली आस्था यह दर्शाती है कि भगवान शिव के प्रति श्रद्धा आज भी उतनी ही प्रगाढ़ है जितनी सदियों पहले थी। महाकाल के दरबार में इस महापर्व पर शामिल होना हर शिवभक्त के लिए सौभाग्य की बात मानी जाती है और इस वर्ष 44 घंटे के निरंतर दर्शन ने इस उत्सव को और भी ऐतिहासिक बना दिया है।

  • आज का पंचांग 11 फरवरी 2026 फाल्गुन माह की कृष्ण नवमी पर करें गणपति पूजन मिलेगा बुद्धि समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद

    आज का पंचांग 11 फरवरी 2026 फाल्गुन माह की कृष्ण नवमी पर करें गणपति पूजन मिलेगा बुद्धि समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद


    नई दिल्ली। 11 फरवरी 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आज फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है और साथ ही बुधवार का पावन संयोग भी बन रहा है। हिंदू धर्म में बुधवार का दिन मुख्य रूप से भगवान गणेश को समर्पित होता है। गणपति बप्पा को विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त आज के दिन सच्चे मन से भगवान गणेश की पूजा अर्चना करता है उसके जीवन के समस्त विघ्न बाधाएं दूर होती हैं और उसे बुद्धि विवेक सफलता तथा समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। विशेष रूप से जिन लोगों की कुंडली में बुध दोष होता है उनके लिए यह दिन अत्यंत फलदायी माना जाता है।

    आज के दिन गणेश जी को दूर्वा अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। इसके साथ ही मोदक और शमी के पत्ते चढ़ाने से भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं। पूजा के समय ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और कार्यों में सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं। यदि कोई नया कार्य आरंभ करना चाहते हैं तो आज का दिन उपयुक्त साबित हो सकता है बशर्ते शुभ मुहूर्त का ध्यान रखा जाए।

    आज का अमृत काल प्रातः 03:50 से 05:38 तक रहेगा। यह समय अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। इसके अतिरिक्त ब्रह्म मुहूर्त 05:28 से 06:16 तक है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर ध्यान जप और पूजा करने से आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है और मन में सकारात्मकता का संचार होता है।

    अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12:41 से 2:04 तक रहेगा। इस अवधि में किसी भी नए कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। यम गण्ड प्रातः 8:29 से 9:53 तक रहेगा जबकि कुलिक काल 11:17 से 12:41 तक है। दुर्मुहूर्त 12:18 से 01:03 तक रहेगा और वर्ज्यम् सायं 05:07 से 06:54 तक है। इन समयों में शुभ कार्यों से परहेज करना ही उचित माना जाता है।

    सूर्योदय प्रातः 7:05 पर होगा और सूर्यास्त सायं 6:16 पर। चंद्रोदय 11 फरवरी को प्रातः 2:07 पर हुआ है जबकि चंद्रास्त दोपहर 12:48 पर होगा। ग्रह नक्षत्रों की यह स्थिति साधना और आराधना के लिए अनुकूल मानी जा रही है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज के दिन सादगी और श्रद्धा के साथ गणेश पूजन करने से जीवन में स्थिरता आती है और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। विद्यार्थी वर्ग के लिए यह दिन विशेष लाभकारी हो सकता है। व्यापार और करियर से जुड़े लोगों को भी आज भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

    इस प्रकार 11 फरवरी 2026 का यह दिन आस्था विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण है। यदि शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हुए भगवान गणेश की आराधना की जाए तो जीवन में सुख शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

  • Maha Shivratri पर इस बार बन रहे कई दुर्लभ संयोग… जानिए पूजा-जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त और विधि

    Maha Shivratri पर इस बार बन रहे कई दुर्लभ संयोग… जानिए पूजा-जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त और विधि


    नई दिल्ली।
    महाशिवरात्रि (Maha Shivratri) हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन पर्व (Holy Festival) है, जिसका भक्त पूरे साल इंतजार करते हैं. साल 2026 में महाशिवरात्रि (Maha Shivratri 2026) 15 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी. इस बार तिथि को लेकर कुछ लोगों के मन में भ्रम था कि व्रत 15 को रखा जाए या 16 फरवरी को, लेकिन शास्त्रों के अनुसार 15 फरवरी को ही पर्व मनाना उचित रहेगा. फाल्गुन मास (Phalguna Month) के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि इस बार 15 फरवरी शाम 5 बजकर 5 मिनट बजे से शुरू होकर 16 फरवरी शाम 5 बजकर 35 मिनट तक रहेगी. चूंकि, निशीथकाल (मध्य रात्रि) में चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की रात को ही रहेगी, इसलिए इसी दिन महाशिवरात्रि मनाना शास्त्रसम्मत है.


    महाशिवरात्रि पर पूजा का सही समय क्या है?

    अगर आप मंदिर में जलाभिषेक करने जा रहे हैं तो दिन में किसी भी समय जा सकते हैं. लेकिन यदि रुद्राभिषेक करना चाहते हैं तो रात्रि का समय सबसे उत्तम माना गया है।
    प्रथम पहर: शाम 7 बजे से 9 बजे तक
    द्वितीय पहर: रात 10 बजे से 12 बजे तक
    तृतीय पहर: रात 1 बजे से 3 बजे तक
    चतुर्थ पहर: सुबह 4 बजे से 6 बजे तक
    यदि चारों पहर संभव न हो, तो कम से कम एक पहर में रुद्राभिषेक अवश्य करें.


    महाशिवरात्रि 2026 शुभ संयोग (Maha Shivratri 2026 Shubh Sanyog)

    महाशिवरात्रि इस बार बहुत ही विशेष मानी जा रही है. दरअसल इस दिन शिव योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग, आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, शोभन योग, साध्य योग, शुक्ल योग, ध्रुव योग, व्यतिपात और वरियान योग का भी प्रभाव बना रहेगा.

    महाशिवरात्रि 2026 जलाभिषेक शुभ मुहूर्त (Maha Shivratri 2026 Jalabhishek Muhurat)
    इस बार महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए दिनभर कई शुभ मुहूर्त मिलेंग, जिनमें भक्त पूजा-अर्चना कर सकते हैं. पहला मुहूर्त सुबह 8 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. इसके बाद दूसरा मुहूर्त सुबह 9 बजकर 48 मिनट से 11 बजकर 11 मिनट तक का रहेगा.

    तीसरा मुहूर्त अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त रहेगा, जो सुबह 11 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक का रहेगा, जिसमें जल चढ़ाना अत्यंत फलदायी रहेगा. जो श्रद्धालु शाम को पूजा करना चाहते हैं, वे 6 बजकर 11 मिनट से 7 बजकर 47 मिनट के बीच अभिषेक कर सकते हैं. इन सभी मुहूर्तों में श्रद्धा और सच्चे मन से शिवलिंग पर जल अर्पित करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है.


    रुद्राभिषेक में क्या चढ़ाएं?

    भगवान शिव को जल, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, शमी पत्र, भस्म, चंदन और मौसमी फल अर्पित किए जाते हैं. कई लोग पार्थिव शिवलिंग बनाकर भी अभिषेक करते हैं. शिवलिंग पर जल चढ़ाने का विशेष महत्व है. मान्यता है कि जल हमारे भावों को धारण करता है. जब हम सच्चे मन से जल अर्पित करते हैं, तो हमारे मन की सकारात्मक ऊर्जा भी ईश्वर तक पहुंचती है और नकारात्मकता धीरे-धीरे कम होने लगती है.


    महाशिवरात्रि पर जरूर करें ये उपाय

    अगर जीवन में आर्थिक परेशानी है, आय कम है या मेहनत के अनुसार फल नहीं मिल रहा, तो महाशिवरात्रि के दिन व्रत रखें. सुबह स्नान के बाद शिव मंदिर जाकर गंगाजल से अभिषेक करें. ”ऊं नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए 11 बेलपत्र चढ़ाएं. दिन भर श्रद्धा से व्रत रखें. शाम को रुद्राभिषेक कराएं और कम से कम 11 माला ”ऊं नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें. नियमित रूप से मंत्र जाप जारी रखने से धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है.


    तनाव और डिप्रेशन दूर करने का उपाय

    अगर मन में तनाव, नकारात्मकता या बेचैनी रहती है, तो महाशिवरात्रि पर गंगाजल और कच्चे दूध से अभिषेक करें. 11 बेलपत्र अर्पित करें और प्रतिदिन 108 बार ”ऊं नमः शिवाय” का जाप शुरू करें. नियमित मंत्र जाप से मन को शांति मिलती है और सकारात्मक सोच विकसित होती है.

  • Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि कब शुरू होगी, घटस्थापना मुहूर्त और 9 दिन का कैलेंडर

    Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि कब शुरू होगी, घटस्थापना मुहूर्त और 9 दिन का कैलेंडर


    नई दिल्‍ली । चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का सबसे पवित्र पर्व है, जिसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 गुरुवार से शुरू होकर 27 मार्च 2026 शुक्रवार को रामनवमी के साथ समाप्त होगी।

    चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत और समापन प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा: 19 मार्च 2026 सुबह 6:52 बजे से

    समाप्ति: 27 मार्च 2026 रामनवमी

    नवरात्रि की अवधि: 9 दिन

    घटस्थापना मुहूर्त 2026

    इस साल घटस्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त हैं:

    सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे तक

    दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक

    पहले दिन बनने वाले शुभ योग 19 मार्च 2026

    सर्वार्थ सिद्धि योग: 20 मार्च सुबह 04:05 से 06:25

    शुक्ल योग: प्रातःकाल से रात 01:17 तक

    ब्रह्म योग: शुक्ल योग के बाद

    इन योगों के कारण कलश स्थापना और पूजा का फल बढ़ जाता है।
    राहुकाल 19 मार्च 2026
    राहुकाल: दोपहर 2:00 बजे से 3:30 बजे तक
    इस समय कोई शुभ कार्य या पूजा न करें। घटस्थापना राहुकाल से पहले या बाद में करें।

    चैत्र नवरात्रि 2026 – 9 दिन का कैलेंडर

    दिन तारीख वार तिथि पूजा
    दिन 1 19 मार्च गुरुवार प्रतिपदा घटस्थापना, शैलपुत्री पूजा
    दिन 2 20 मार्च शुक्रवार द्वितीया ब्रह्मचारिणी पूजा
    दिन 3 21 मार्च शनिवार तृतीया चंद्रघंटा पूजा
    दिन 4 22 मार्च रविवार चतुर्थी कूष्मांडा पूजा
    दिन 5 23 मार्च सोमवार पंचमी स्कंदमाता पूजा
    दिन 6 24 मार्च मंगलवार षष्ठी कात्यायनी पूजा
    दिन 7 25 मार्च बुधवार सप्तमी कालरात्रि पूजा, महासप्तमी
    दिन 8 26 मार्च गुरुवार अष्टमी महागौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी
    दिन 9 27 मार्च शुक्रवार नवमी नवरात्रि पारण, रामनवमी

  • बुधवार 11 फरवरी शुभ-अशुभ समय पंचांग अनुसार सर्वार्थ सिद्धि अमृत सिद्धि योग और राहुकाल

    बुधवार 11 फरवरी शुभ-अशुभ समय पंचांग अनुसार सर्वार्थ सिद्धि अमृत सिद्धि योग और राहुकाल


    नई दिल्ली।11 फरवरी बुधवार को पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि सुबह 9 बजकर 58 मिनट तक प्रभावी रहेगी इसके बाद दशमी तिथि प्रारंभ होगी नक्षत्र अनुराधा सुबह 10 बजकर 53 मिनट तक रहेगा इसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र शुरू होगा चंद्रमा वृश्चिक राशि में संचार करेंगे

    सूर्योदय इस दिन 7 बजकर 3 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 8 मिनट पर होगा 11 फरवरी के प्रमुख योग की बात करें तो सुबह 7 बजकर 3 मिनट से 10 बजकर 53 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग दोनों एक साथ रहेंगे यह दुर्लभ संयोग अत्यंत शुभ माना जाता है इस समय नए कार्य शुरू करना पूजा हवन दान और अन्य मंगल कार्य करने से विशेष लाभ होता है

    अन्य शुभ मुहूर्तों में ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 19 मिनट से 6 बजकर 11 मिनट तक रहेगा विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 26 मिनट से 3 बजकर 11 मिनट तक रहेगा और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 6 मिनट से 6 बजकर 32 मिनट तक रहेगा अमृत काल 12 फरवरी की सुबह 3 बजकर 52 मिनट से 5 बजकर 39 मिनट तक रहेगा

    अशुभ समय का ध्यान रखना भी आवश्यक है योग व्याघात 12 फरवरी की देर रात 2 बजकर 30 मिनट तक रहेगा वर्ज्य शाम 5 बजकर 8 मिनट से 6 बजकर 55 मिनट तक रहेगा और गंड मूल सुबह 10 बजकर 53 मिनट से अगले दिन सुबह तक प्रभावी रहेगा पंचांग अनुसार अशुभ काल से दूर रहना और महत्वपूर्ण कार्यों को शुभ समय में करना ही उत्तम माना गया है

    राहुकाल 11 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 36 मिनट से 1 बजकर 59 मिनट तक रहेगा इस समय कोई भी शुभ कार्य करना निष्फल होता है और बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है अन्य अशुभ समय में यमगंड सुबह 8 बजकर 26 मिनट से 9 बजकर 49 मिनट तक गुलिक काल सुबह 11 बजकर 12 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक और दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा बुधवार का दिन विघ्न विनाशन गणेश और बुध ग्रह को समर्पित है इस दिन गणपति और बुध ग्रह की विधि विधान से पूजन करने से बाधाओं का नाश होता है और जीवन में सुख शांति और समृद्धि का संचार होता है बुध ग्रह भी शांत होने के कारण कार्यों में सफलता मिलती है

    इस प्रकार 11 फरवरी का दिन पंचांग अनुसार अत्यंत शुभ योगों वाला और कुछ विशेष समयों में सावधानी रखने वाला दिन है सुबह के सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग से नए कार्य शुरू करने के लिए सर्वोत्तम समय मिलता है राहुकाल और अन्य अशुभ समय में सावधानी बरतकर किसी भी प्रकार की बाधा से बचा जा सकता है गणेश और बुध ग्रह की पूजा विधिपूर्वक करने से दिन भर की सफलता सुनिश्चित की जा सकती है

  • सनातन परंपरा का महापर्व विजया एकादशी: इन 10 उपायों से घर में बरसेगा लक्ष्मी-नारायण का आशीर्वाद

    सनातन परंपरा का महापर्व विजया एकादशी: इन 10 उपायों से घर में बरसेगा लक्ष्मी-नारायण का आशीर्वाद


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में फाल्गुन माह के कृष्णपक्ष में पड़ने वाली एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है. सनातन परंपरा में विजया एकादशी की पूजा और व्रत को विधि-विधान से करने पर बड़े से बड़ा संकट दूर और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. इस व्रत के पुण्य प्रताप से भगवान राम ने भी त्रेतायुग में लंका के राजा रावण पर विजय प्राप्त की थी. सुख, सौभाग्य, सफलता और विजय का आशीर्वाद दिलाने वाली विजया एकादशी 13 फरवरी 2026 को रखा जाएगा. आइए विजया एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु की सरल सनातनी विधि से की जाने वाली पूजा के उन 10 अचूक उपायों के बारे में विस्तार से जानते हैं, जिसे करते ही सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

    1. विजया एकादशी के दिन गंगा नदी अथवा किसी पवित्र जल तीर्थ पर स्नान करने का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. यदि आप इस दिन किसी कारण से गंगा तट पर न जा पाएं तो पुण्य की प्राप्ति के लिए घर में ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें.

    2. हिंदू धर्म में व्रत एवं पूजा के दिन स्नान के साथ दान का भी बहत ज्यादा महत्व माना गया है, इसलिए इस दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार दान जरूर करें. विजया एकादशी के दिन किसी मंदिर के पुजारी या फिर किसी जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें.

    3. यदि आपके जीवन में इन दिनों आर्थिक संकट बना हुआ है या फिर आप किसी कार्य विशेष में सफलता पाना चाहते हैं तो आपको विजया एकादशी वाले दिन भगवान विष्णु की पूजा में विशेष रूप से एक पीले कपड़े में हल्दी की दो गांठें अर्पित करना चाहिए. पूजा के बाद उसे अपने कार्यस्थल या बैग में रख लें.

    4. हिंदू मान्यता के अनुसार विजया एकादशी के दिन विष्णु भगवान का दक्षिणावर्ती शंख से जलाभिषेक करने से उनका विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है. यदि संभव हो तो शंख से केसर मिले दूध या फिर पंचामृत से श्री हरि का अभिषेक करें.

    5. हिंदू धर्म में किसी भी मनोकामना को पूरा करने के लिए मंत्र जप को उत्तम उपाय माना गया है. ऐसे में विजया एकादशी व्रत वाले दिन साधक को भगवान श्री विष्णु के मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ का तुलसी की माला से अधिक से अधिक जप करना चाहिए.

    6. हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु की पूजा में पीले रंग का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. ऐसे में विजया एकादशी के दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु की पूजा में पीले रंग के पुष्प, पीले फल और पीले रंग की मिठाई अर्पित करें.

    7. विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु से सुख-सौभाग्य का आशीर्वाद पाने के लिए उन्हें पीला चंदन या ​केसर का तिलक अर्पित करके उसे प्रसाद स्वरूप अपने माथे पर लगाएं. इसी प्रकार श्री हरि को पीले रंग का धागा अर्पित करके अपने दाहिने हाथ में बाधें.

    8. हिंदू धर्म में तुलसी जी को विष्णुप्रिया कहा गया है. ऐसे में आपकी विजया एकादशी की पूजा और व्रत तब तक अधूरा है जब तक आप श्री हरि की पूजा में तुलसी दल नहीं चढ़ाते हैं.  हादेव को मनाना है तो महाशिवरात्रि पर राशि के अनुसार ही करें ज्योर्तिलिंग का दर्शन और पूजन

    9. यदि आप चाहते हैं कि आपको श्री हरि संग माता लक्ष्मी का भी आशीर्वाद मिले तो आपको विजया एकादशी वाले दिन तुलसी माता को जल देने के बाद शुद्ध देशी घी का दीया जलाना चाहिए और उनकी परिक्रमा करनी चाहिए.

    10. विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करते समय न सिर्फ एकादशी व्रत की कथा सुनें या फिर पढ़ें बल्कि इसके साथ श्री विष्णु सहस्त्रनाम, नारायण कवच या फिर श्रीमद्भागवत कथा का पाठ भी जरूर करें.

  • 300 साल बाद महाशिवरात्रि पर दुर्लभ ज्योतिष संयोग: 15 फरवरी को भगवान शिव से आपकी हर मनोकामना हो सकती है पूरी

    300 साल बाद महाशिवरात्रि पर दुर्लभ ज्योतिष संयोग: 15 फरवरी को भगवान शिव से आपकी हर मनोकामना हो सकती है पूरी


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र पर्व महाशिवरात्रि इस बार 15 फरवरी, 2026 को मनाया जाएगा। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन तथा शिव के भक्ति, साधना और उपवास से जुड़े अनगिनत धार्मिक महत्वों से संपन्न है। इस वर्ष महाशिवरात्रि को ज्योतिषीय दृष्टि से भी एक दुर्लभ और शक्तिशाली संयोग के साथ जोड़ा जा रहा है, जिसे करीब 300 साल बाद बन रहा शुभ योग माना जा रहा है।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन कई प्रमुख ग्रहों की चाल में बदलाव देखने को मिलेगा, जिसमें सूर्य, बुध और शुक्र के संयोग जैसे दुर्लभ ग्रह-योग शामिल हैं, जो जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालने वाले बताए जा रहे हैं। इसी के साथ चंद्रमा का मकर राशि में गोचर, बुध का शतभिषा से पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश और मंगल का श्रवण से धनिष्ठा नक्षत्र में जाना भी इसी दिन विशेष शुभ माना जा रहा है।

    आधिकारिक पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि तिथि 15 फरवरी को शाम 05:04 बजे से आरंभ होकर 16 फरवरी को शाम 05:34 बजे तक रहेगी, और इस दिन भक्त शिवलिंग पर विधिवत पूजा, रुद्राभिषेक और निशीथ-काल में जागरण कर भोलेनाथ का आह्वान करते हैं। इस रात को शिव के तत्त्वों का प्रभाप्रवाह बढ़ा हुआ माना जाता है, जिससे शिवभक्ति, ध्यान और मंत्र जाप का विशेष फल प्राप्त होता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र का संयोग भी विशेष रूप से शुभ माना जाता है, क्योंकि यह नक्षत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इसका प्रभाव साधक के जीवन में दिव्य ऊर्जा को प्रेरित कर सकता है। इस संयोग को सर्वार्थ सिद्धि योग भी कहा जा रहा है, जिसमें साधना, पूजा, व्रत और दान-पुण्य का असर असाधारण फल प्रदान कर सकता है।

    शास्त्रों और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक, दूध-दही-गंगा जल का समर्पण, बेलपत्र-धतूरा चढ़ाना, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और ध्यान करने से भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है। इससे कष्टों का निवारण, मनोकामना की सिद्धि, मानसिक शांति, जीवन में सकारात्मक बदलाव और समृद्धि की संभावनाओं में वृद्धि होती है।

    विशेष रूप से यह माना जाता है कि महाशिवरात्रि पर जो साधक श्रद्धा, भक्ति और संतुलित साधना के साथ पूजा-अर्चना करता है, उसे भगवान शिव की आशीर्वाद से आध्यात्मिक उन्नति, कठिनाइयों से मुक्ति तथा जीवन की हर मनोकामना की पूर्ति के मार्ग खुलते दिखाई देते हैं। यह दिन केवल धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, कर्म-निवृति और शिव-तत्त्व से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है।

  • चंद्रमा का वृश्चिक गोचर बढ़ाएगा मानसिक दबाव जानिए किन राशियों पर पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव

    चंद्रमा का वृश्चिक गोचर बढ़ाएगा मानसिक दबाव जानिए किन राशियों पर पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव


    नई दिल्ली :ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन और भावनाओं का सबसे बड़ा कारक माना गया है। चंद्रमा की स्थिति व्यक्ति की मानसिक अवस्था से लेकर सेहत और निर्णय क्षमता तक को प्रभावित करती है। यही कारण है कि चंद्रमा के गोचर को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। चंद्रमा सबसे तेज गति से चलने वाले ग्रह हैं और लगभग ढाई दिन में एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश कर जाते हैं। इस बार चंद्रमा का गोचर कुछ राशियों के लिए चिंता और चुनौतियां लेकर आ रहा है।

    ज्योतिषियों के अनुसार वर्तमान समय में चंद्रमा तुला राशि में विराजमान हैं और 10 फरवरी को देर रात 1 बजकर 11 मिनट पर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। वृश्चिक राशि चंद्रमा की नीच राशि मानी जाती है। नीच अवस्था में चंद्रमा का प्रभाव मन को अस्थिर कर सकता है। इससे तनाव बढ़ता है और व्यक्ति छोटी छोटी बातों को लेकर भी मानसिक दबाव महसूस करता है। ऐसे में कुछ राशि वालों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

    मेष राशि के जातकों के लिए यह गोचर मानसिक तनाव को बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। बीती बातों को लेकर विवाद उत्पन्न हो सकता है। मन अशांत रहेगा और स्वयं को थका हुआ महसूस कर सकते हैं। इस समय किसी भी प्रकार का निवेश करने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह लेना आवश्यक होगा। पारिवारिक या कार्यस्थल से जुड़ी किसी बात पर बहस की स्थिति बन सकती है। प्रेम संबंधों में भी संयम बरतने की आवश्यकता रहेगी। धैर्य और समझदारी से काम लेना इस समय सबसे जरूरी होगा।

    मिथुन राशि वालों के लिए चंद्रमा का यह गोचर कुछ उलझनें लेकर आ सकता है। किसी नए रिश्ते में जल्दबाजी करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे मतभेद बढ़ सकते हैं। नौकरी परिवर्तन या यात्रा को लेकर मन में असमंजस बना रह सकता है। स्वास्थ्य के लिहाज से मौसमी बीमारियां परेशान कर सकती हैं इसलिए खानपान और दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी होगा। कला और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को किसी बात को लेकर मानसिक दबाव महसूस हो सकता है।

    धनु राशि के जातकों को इस समय सेहत के प्रति विशेष सतर्कता बरतनी होगी। थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है जिससे रोजमर्रा के कार्य प्रभावित हो सकते हैं। मनचाहे परिणाम पाने के लिए अपेक्षा से अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना जरूरी होगा और अहंकार से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। मानसिक बेचैनी और अनावश्यक चिंताएं परेशान कर सकती हैं। किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले सोच विचार करना लाभकारी रहेगा।

    ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि चंद्रमा का यह गोचर स्थायी प्रभाव नहीं डालेगा लेकिन इन कुछ दिनों में मानसिक संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। ध्यान योग और सकारात्मक सोच से इस प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सही निर्णय और संयम से इन चुनौतियों को अवसर में बदला जा सकता है।