Category: Religious Astrology

  • धर्म कर्म: फाल्गुन अमावस्या पर पितरों के लिए करें यह पवित्र कर्म, पितृ दोष से मिलेगी मुक्ति

    धर्म कर्म: फाल्गुन अमावस्या पर पितरों के लिए करें यह पवित्र कर्म, पितृ दोष से मिलेगी मुक्ति


    नई दिल्ली। फाल्गुन मास की अमावस्या हिंदू धर्म में पितरों की शांति और पितृ दोष से मुक्ति के लिए एक अत्यंत शुभ और पुण्यदायी दिन माना जाता है। इस वर्ष यह तिथि 16 फरवरी, 2026 की शाम 05:34 बजे से प्रारंभ होकर 17 फरवरी, 2026 की सायं 05:30 बजे तक रहेगी, इसलिए साल 2026 में फाल्गुन अमावस्या 17 फरवरी, मंगलवार को मनाई जाएगी।

    धार्मिक मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा अर्चना, तर्पण पिंडदान और दान पुण्य कर्म से पितृ दोष होने पर भी मुक्ति प्राप्त होती है और पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। यह अवसर आत्मिक शुद्धि, मृत्यु के बाद के कर्जों का निवारण तथा परिवार में सुख शांति, समृद्धि और संतुलन लाने के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

    सबसे पहले पवित्र स्नान करना शुभफलदायी होता है। ब्रह्म मुहूर्त या सुबह जल्दी उठकर आप पवित्र नदी जैसे गंगा में स्नान करें। यदि नदी का स्नान संभव न हो, तो घर पर गंगाजल में तिल, कुश और काले तिल मिलाकर स्नान करना भी पुण्यदायी माना जाता है। स्नान के बाद अपने पूर्वजों को पितृ तर्पण और पिंडदान करना चाहिए, जिसमें जल, तिल, अन्न और शुद्ध मन से प्रार्थना शामिल हो।

    तर्पण करते समय दक्षिण की ओर मुख करके जल को कंठ के पास से बहाते हुए ॐ पितृभ्यो नमः जैसे मंत्र का उच्चारण किया जाता है, जिससे पूर्वजों को शांति स्वास्थ्य और मोक्ष प्राप्त होने की मान्यता प्रचलित है। पिंडदान में शुद्ध अन्न और तिल से बनाए गए पिंड को गंगा यमुना जैसे पवित्र नदी के तट पर या किसी पवित्र स्थान पर अर्पित करें। इससे पितृलोक में निवास करने वाले पूर्वजों को संतुष्टि और पुण्य की प्राप्ति होती है।

    अमावस्या तिथि में दान पुण्य का भी विशेष महत्व है। ब्राह्मणों को भोजन कराना, गरीबों को अन्न, वस्त्र, मसाले, दाल चावल आदि दान करना तथा गो दैनिक सेवा या पशु पक्षियों को पानी भोजन देना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। इससे जीवन में नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और संपन्नता आती है।

    शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और उसके चारों ओर सात परिक्रमा करना लाभकारी होता है। इससे पितरों की शांति और परिवार में सुख समृद्धि का आगमन होता है, साथ ही गृहस्थ जीवन में बाधाएँ कम होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    धार्मिक परंपरा के अनुसार अमावस्या पितरों से जुड़ी तिथि है, इसलिए इस दिन स्नान, दान पुण्य, तर्पण पिंडदान तथा मंत्र जाप करने से पितृ दोष से मुक्ति पाई जा सकती है और पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है।

  • Grah Gochar 2026: महाशिवरात्रि पर 3 ग्रहों की चाल बदलेगी, इन 7 राशियों के जीवन में आएगी समृद्धि

    Grah Gochar 2026: महाशिवरात्रि पर 3 ग्रहों की चाल बदलेगी, इन 7 राशियों के जीवन में आएगी समृद्धि


    नई दिल्ली । साल 2026 की महाशिवरात्रि इस बार केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। द्रिक पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि 15 फरवरी, रविवार को पड़ रही है और इस दिन तीन प्रमुख ग्रहों की चाल में बदलाव होगा। मंगल श्रवण नक्षत्र से निकलकर धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, चंद्रमा शनि की राशि मकर में गोचर करेगा और बुध ग्रह रात में शतभिषा नक्षत्र से पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में गोचर करेगा। खास बात यह है कि इस दिन बुध दक्षिणावर्ती से उत्तरवर्ती होंगे, जिसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना जाता है।इन ग्रहों के गोचर का असर सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन विशेष रूप से सात राशियों के लिए यह दिन बेहद फलदायी रहेगा। कहा जाता है कि इस अवसर पर शिव की विशेष कृपा इन राशियों पर रहेगी और उनके जीवन में धन, सफलता और समृद्धि के नए अवसर उत्पन्न होंगे।

    मेष राशि

    मेष राशि के जातकों के लिए यह समय नई ऊर्जा और सकारात्मक अवसर लेकर आएगा। करियर और व्यवसाय में अचानक लाभ मिलने की संभावना है। लंबे समय से रुके काम इस समय पूरे हो सकते हैं और घर में सुख-शांति का माहौल बना रहेगा। धन की स्थिति मजबूत रहेगी और आपकी मेहनत का फल जल्दी दिखाई देगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन लंबे काम और तनाव से बचने के लिए आराम जरूरी है। किसी नए निवेश या पैसे से जुड़े निर्णय सोच-समझकर लें, ताकि भविष्य में फायदे के अवसर बनें।

    मिथुन राशि
    मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय बदलाव और सफलता लेकर आएगा। नौकरी या व्यवसाय में बदलाव आपके लिए लाभकारी साबित हो सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में प्रयास सफल रहेंगे और मनोवांछित परिणाम मिलेंगे। परिवार में प्रेम और सहयोग बना रहेगा और मानसिक तनाव कम होगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा। इस समय नए कौशल सीखना या किसी प्रशिक्षण में भाग लेना भविष्य में फायदेमंद रहेगा।

    कर्क राशि

    कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय बेहद शुभ रहेगा। घरेलू मामलों में मनचाही सफलता मिलेगी और माता-पिता या बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलेगा। वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और पुराने आर्थिक तनाव दूर होंगे। यात्रा के लिए समय अनुकूल है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन समय-समय पर आराम लेना आवश्यक है। परिवार के साथ अधिक समय बिताने से मानसिक शांति बढ़ेगी।

    सिंह राशि
    सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय करियर में लाभ और समाज में मान-सम्मान बढ़ाने वाला रहेगा। पुराने निवेश या संपत्ति से लाभ मिलने की संभावना है। शिक्षा और बच्चों के मामलों में भी सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। मित्र और परिवार का सहयोग सहायक रहेगा। व्यापार या नौकरी में नए प्रस्तावों पर ध्यान दें, क्योंकि इस समय लाभ की संभावना अधिक है।

    तुला राशि

    तुला राशि के जातकों के लिए यह समय नए अवसर और खुशियाँ लेकर आएगा। जीवनसाथी और परिवार के साथ संबंध मजबूत होंगे। व्यापार या पेशेवर क्षेत्र में नई योजनाएं सफल होंगी। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा और मानसिक संतुलन बना रहेगा। यात्रा और शौक के लिए समय अनुकूल है। इस समय अपने लक्ष्यों को लिखकर प्राथमिकता देना लाभकारी रहेगा।

    मकर राशि

    मकर राशि के जातकों के लिए यह समय भावनात्मक और आर्थिक रूप से सशक्त रहने वाला है। पुराने विवाद सुलझ सकते हैं और परिवार में सुख-शांति का माहौल रहेगा। धन लाभ के नए अवसर सामने आएंगे और नए काम शुरू करने के लिए समय अनुकूल है। दोस्तों और सामाजिक संपर्कों में वृद्धि होगी। अपने विचारों और योजनाओं को लिखकर उनका पालन करना लाभकारी रहेगा।

    मीन राशि

    मीन राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी रहेगा। नौकरी या व्यवसाय में बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। पुराने कर्ज या परेशानियों से मुक्ति मिलेगी। शिक्षा और कौशल क्षेत्र में सफलता मिलेगी और मित्र व परिवार का सहयोग सहायक साबित होगा। वित्तीय मामलों में साफ-सफाई और रिकॉर्ड रखना भविष्य में फायदे का कारण बनेगा। इस समय अपने प्रयासों को सही दिशा में लगाने से लंबे समय के लिए लाभ सुनिश्चित होगा।

  • मंगलवार: हनुमानजी की आराधना से कठिनाइयाँ दूर, जीवन में आएगी सुख-समृद्धि

    मंगलवार: हनुमानजी की आराधना से कठिनाइयाँ दूर, जीवन में आएगी सुख-समृद्धि

    नई दिल्ली। हिंदू धार्मिक परंपरा में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की विशेष आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मंगलवार को हनुमानजी की पूजा-अर्चना करने से जीवन में बाधाएँ कम होती हैं, मानसिक शांति मिलती है और सुख-समृद्धि आती है। इस दिन किये गए विशेष उपायों से देवी-देवताओं की कृपा पाकर कठिनाइयों से भी मुक्ति मिल सकती है।

    धार्मिक आस्था के अनुसार मंगलवार को सुबह स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करने के बाद हनुमान चालीसा, बजरंगबाण या मारुति स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में आने वाली परेशानियों का नाश होता है और संकट दूर हो जाते हैं। हनुमान चालीसा की भक्ति से हनुमानजी संकटों से रक्षा करते हैं और भक्त को साहस तथा शक्ति प्रदान करते हैं।

    इस दिन श्रीराम के नाम का स्मरण तथा जाप भी अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। हनुमानजी को प्रभु राम का नाम अत्यंत प्रिय है, इसलिए मंगलवार के दिन राम नाम का उच्चारण निरंतर करने से मन और बुद्धि में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    आस्था अनुसार मंगलवार को तुलसी के पास दीपक जलाना भी शुभ फलदायी होता है। तुलसी के पास जल या दीपक प्रज्वलित करने से घर में सकारात्मक वातावरण बनता है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। तुलसी के उपाय से गृहस्थ जीवन में सुख-शांति तथा लक्ष्मीजी का आगमन भी माना जाता है।

    लाल जनेऊ अर्पण तथा विशेष विधि से पूजा करना भी मंगलमय फल देता है। मंगलवार को मंदिर में जाकर या घर में ही हनुमानजी को लाल जनेऊ अर्पित करने से कार्यों में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं और बिगड़े हुए कार्यों के सफल होने की संभावनाएँ बढ़ती हैं।

    अन्य उपायों में हनुमानजी के मंदिर में दीपक जलाना, लाल या केसरिया वस्त्र धारण कर पूजा करना और प्रसाद के रूप में गुड़-चना, मेवा-फल अर्पित करना शामिल है। इस प्रकार की भक्ति और उपायों से मनोबल उच्च रहता है तथा जीवन में आने वाली कठिनाइयाँ बलवान उपाय के रूप में कमजोर पड़ती हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगलवार को हनुमानजी की भक्ति निरंतर करने से न केवल भौतिक जीवन की समस्याओं का समाधान होता है, बल्कि मानसिक संतुलन, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त होती है। इससे घर-परिवार में समृद्धि तथा संतोषपूर्ण जीवन का अनुभव होता है, जिससे भक्त का संपूर्ण कल्याण सुनिश्चित होता है।

  • Wealth Dreams Signs: अगर नींद में आते हैं ये 7 सपने, समझ लें जल्द ही होंगे मालामाल

    Wealth Dreams Signs: अगर नींद में आते हैं ये 7 सपने, समझ लें जल्द ही होंगे मालामाल

    नई दिल्ली। स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने केवल हमारी कल्पना नहीं होते बल्कि कई बार वे भविष्य की संभावनाओं के संकेत भी देते हैं। इंसान दो तरह के सपने देखता है एक वे जिन्हें वह जागते हुए देखता है और मेहनत के बल पर पूरा करने की कोशिश करता है और दूसरे वे सपने जो नींद के दौरान अचानक दिखाई देते हैं। जागते हुए सपनों पर हमारा नियंत्रण होता है लेकिन नींद में आने वाले सपनों को हम रोक नहीं सकते। स्वप्न शास्त्र में नींद में दिखाई देने वाले कई दृश्य शुभ या अशुभ घटनाओं की भविष्यवाणी करते हैं। खासतौर पर कुछ सपने ऐसे होते हैं जो अचानक धन लाभ और आर्थिक मजबूती की ओर संकेत करते हैं। अगर आपको भी ऐसे सपने आते हैं तो समझिए आपकी किस्मत बदलने वाली है।

    सबसे पहले बात करें मंदिर के ध्वज सूर्य या पूर्णिमा के चंद्रमा की। हिंदू मान्यताओं के अनुसार सपने में मंदिर का लहराता हुआ ध्वज आकाश में सूर्य देव का प्रकाश या पूर्णिमा का चंद्रमा दिखना धन लाभ का संकेत माना जाता है। यदि काले बादलों के बीच से सूर्य निकलता हुआ दिखाई दे तो यह आर्थिक परेशानियों के समाप्त होने की ओर संकेत करता है। ऐसे सपने देखने वाले व्यक्ति को आने वाले समय में स्थिरता और बढ़ती आमदनी की संभावना रहती है।

    दूसरा और सबसे शुभ संकेत है मां लक्ष्मी के दर्शन। सपने में धन की देवी मां लक्ष्मी का किसी भी रूप में दिखाई देना बेहद शुभ माना जाता है। यह सपना इस बात की ओर संकेत करता है कि व्यक्ति पर मां लक्ष्मी की कृपा होने वाली है और उसे बड़ा आर्थिक लाभ लाभकारी अवसर या अचानक धन प्राप्ति हो सकती है।

    तीसरा संकेत है कमल का फूल। यदि सपने में तालाब बगीचे या गुलदस्ते में कमल दिखाई दे तो इसे सुख-समृद्धि के आगमन का प्रतीक माना जाता है। चूंकि कमल मां लक्ष्मी से जुड़ा है इसलिए यह सपना धन वृद्धि की ओर संकेत करता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला होता है।

    सपनों में पशु-पक्षियों का दिखना भी शुभ माना जाता है। स्वप्न में हंस सारस या मोर जैसे पक्षियों का दिखाई देना सौभाग्य का प्रतीक है। वहीं हाथी का दिखना किस्मत का साथ मिलने का संकेत देता है। अगर सपने में गाय को बछड़े के साथ या दूध देते हुए देखा जाए तो यह भी धन लाभ का संकेत माना जाता है और पारिवारिक सुख-शांति का संकेत भी देता है।

    पानी से भरा कलश या जल से जुड़ा सपना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। सपने में पानी से भरा कलश या घड़ा दिखना नदी या समुद्र देखना या खुद को पानी में तैरते हुए देखना आर्थिक उन्नति का प्रतीक होता है। पानी का स्वभाव प्रवाहशील होता है इसलिए ऐसे सपने जीवन में धन के प्रवाह की ओर इशारा करते हैं।

    सनातन परंपरा में हल्दी को शुभता का प्रतीक माना गया है। यदि कोई व्यक्ति सपने में खुद को हल्दी लगे हुए देखे तो यह आने वाले समय में धन लाभ और शुभ घटनाओं का संकेत हो सकता है।आखिरी और बेहद खास संकेत है मधुमक्खी या उसका छत्ता। सपने में मधुमक्खी या छत्ता दिखाई देना तरक्की और मेहनत का फल मिलने का संकेत माना जाता है। यह सपना बताता है कि आपकी मेहनत का परिणाम अब मिलने वाला है और आपको जल्द ही सफलता और लाभ मिल सकता है।

  • महाशिवरात्रि 2026: महादेव क्यों पहनते हैं सांपों की माला? वासुकी नाग से जुड़ी कथा और ज्योतिषीय मान्यता

    महाशिवरात्रि 2026: महादेव क्यों पहनते हैं सांपों की माला? वासुकी नाग से जुड़ी कथा और ज्योतिषीय मान्यता


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना के लिए शुभ होता है और मान्यता है कि इस दिन शिव पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है तथा घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी।भगवान शिव का स्वरूप रहस्यमयी और अलौकिक है। जहां अन्य देवता स्वर्ण आभूषण धारण करते हैं, वहीं महादेव भस्म, रुद्राक्ष और सांप को अपने आभूषण के रूप में अपनाते हैं। इसी कारण शिव को ‘नागेश्वर’ भी कहा जाता है।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, नागराज वासुकी भगवान शिव के परम भक्त थे और हमेशा उनके समीप रहना चाहते थे। समुद्र मंथन के दौरान जब देवताओं और असुरों ने समुद्र से अमृत और कई रत्नों के साथ-साथ हलाहल विष निकाला, तो उसका प्रभाव पृथ्वी पर भारी पड़ने लगा। इस विष को खत्म करने के लिए भगवान शिव ने अपने कंठ में हलाहल विष पी लिया, जिससे उनका शरीर जलने लगा। इस संकट की घड़ी में वासुकी ने भी महादेव का साथ दिया और विष के प्रभाव को सहने में उनकी मदद की। वासुकी की भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें अपने गले में धारण करने का वरदान दिया और तभी से वासुकी अमर हो गए। यही कारण है कि भगवान शिव अपने गले में सांपों की माला धारण करते हैं।

    शिव और नाग के इस संबंध का उल्लेख शिव पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। इन ग्रंथों में शिव-नाग की कथा का विस्तार से वर्णन है और इसे भक्तों के लिए प्रेरणास्रोत माना गया है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, शिव के साथ नाग की पूजा करने से कालसर्प दोष और पितृ दोष से राहत मिलती है। खासकर महाशिवरात्रि या सोमवार के दिन चांदी के नाग-नागिन की जोड़ी अर्पित करने से राहु-केतु शांत होते हैं और जीवन में बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

    महाशिवरात्रि के दिन भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, और बेलपत्र अर्पित करते हैं। वहीं नाग-नागिन की पूजा भी विशेष रूप से की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इससे जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सुरक्षा बनी रहती है। इस महापर्व के दिन भक्त विशेष व्रत रखते हैं और रात भर जागरण करके शिव की भक्ति में लीन रहते हैं। महाशिवरात्रि के दौरान शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और शिव-प्रसाद का आयोजन होता है, जिससे भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।

  • Aamlaki Ekadashi 2026 : फरवरी में आमलकी एकादशी कब? ये हर पाप से मुक्ति का दिन, काशी के पंडित से जानें तरीका

    Aamlaki Ekadashi 2026 : फरवरी में आमलकी एकादशी कब? ये हर पाप से मुक्ति का दिन, काशी के पंडित से जानें तरीका


    नई दिल्ली । इस एकादशी पर व्रत से सभी पापों का नाश होता है. आंवले के पेड़ की पूजा का विधान है. आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से भी जानते हैं. लोकल 18 ने इस बारे में काशी के पंडित संजय उपाध्याय से बात की. वे बताते हैं कि भगवान विष्णु की पूजा के दौरान उन्हें आंवले का फल भी जरूर अर्पण करना चाहिए. इससे मनोवांछित मुराद पूरी होती है. आमलकी एकादशी व्रत विधि वाराणसी. सनातन धर्म में एकादशी के व्रत का विशेष महत्त्व है. हर महीने में दो एकादशी का व्रत होता है पहला कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है. फरवरी महीने में भी दो एकादशी के व्रत हैं

    . इसी महीने में आमलकी एकादशी भी पड़ रही है. इस एकादशी के व्रत से सभी पापों का नाश होता है. फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से जानते हैं. आमलकी एकादशी के दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का निवास होता है. इसलिए इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा से भगवान विष्णु के पूजन का फल मिलता है. आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से भी जानते हैं. लोकल 18 से बात करते हुए काशी के ज्योतिषाचार्य पंडित संजय उपाध्याय बताते हैं कि 26 फरवरी को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाएगा.


    क्या है पूजा का शुभ समय
    आमलकी एकादशी पर ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए. उसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए. सनातन वैदिक पंचांग के अनुसार, इस दिन पूजा के लिए सुबह 6 बजकर 15 मिनट से लेकर 9 बजकर 40 मिनट तक का समय बेहद शुभ है. इस समय में भगवान विष्णु की पूजा के दौरान उन्हें आंवले का फल भी जरूर अर्पण करना चाहिए. इससे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.
    बाघ को मनुष्य योनी
    पंडित संजय उपाध्याय बताते हैं कि इस व्रत के प्रभाव से दैवत्य की प्राप्ति होती है. कथाओं के मुताबिक, इस व्रत के प्रभाव से ही व्याघ्र (बाघ) को मनुष्य की योनि प्राप्त हुई थी. इस व्रत से मनुष्य की आर्थिक समस्याएं भी दूर होती हैं और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद उन्हें मिलता है. रंगभरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ माता गौरा का गवना कराते हैं. इस दौरान बाबा विश्वनाथ अपने भक्तों के साथ जमकर होली खेलते हैं. काशी में इस दिन से शुरू हुआ रंगोत्सव होली तक चलता है. सदियों से यह परम्परा चली आ रही है.
  • महाशिवरात्रि के बाद साल का पहला सूर्य ग्रहण, तीन राशियों के लिए सावधानी का संकेत

    महाशिवरात्रि के बाद साल का पहला सूर्य ग्रहण, तीन राशियों के लिए सावधानी का संकेत


    नई दिल्ली। फरवरी का महीना धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से हमेशा खास माना जाता है। इस दौरान कई व्रत, त्योहार और पूजा-अनुष्ठान होते हैं, जो लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आस्था का संचार करते हैं। इस बार भी महाशिवरात्रि के तुरंत बाद साल का पहला सूर्य ग्रहण पड़ने जा रहा है, जिसने लोगों की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का समय केवल खगोलीय घटना ही नहीं, बल्कि जीवन पर प्रभाव डालने वाला महत्वपूर्ण काल भी माना जाता है।

    सूर्य ग्रहण को लेकर लोगों के मन में हमेशा कई तरह के सवाल रहते हैं, क्या इसका असर जीवन पर पड़ेगा, क्या सावधानी रखनी चाहिए और किन राशियों पर इसका प्रभाव ज्यादा होगा। ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार का सूर्य ग्रहण कुछ राशियों के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण समय लेकर आ सकता है, इसलिए उन्हें विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या के दिन लगेगा। भारतीय समय के मुताबिक यह ग्रहण शाम 5 बजकर 31 मिनट पर शुरू होकर लगभग रात 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। जब ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता, तो उसका सूतक काल मान्य नहीं माना जाता। इसका मतलब है कि मंदिरों के कपाट बंद करने या पूजा-पाठ रोकने जैसी परंपराएं लागू नहीं होंगी।

    फिर भी ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों की स्थिति का प्रभाव राशियों पर देखा जाता है। इस बार सूर्य ग्रहण शनि की राशि कुंभ में लग रहा है और इसी राशि में बुध और शुक्र की मौजूदगी भी बताई जा रही है। यही कारण है कि इसे सामान्य ग्रहण की तुलना में थोड़ा अधिक प्रभावशाली माना जा रहा है।

    ज्योतिष में सूर्य ग्रहण को एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है। इस दौरान सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं, जिससे कुछ समय के लिए सूर्य का प्रकाश ढक जाता है। मान्यता है कि इस समय ग्रहों की ऊर्जा का प्रभाव मन, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता पर पड़ सकता है। कई लोगों को इस दौरान मानसिक अस्थिरता, उलझन या थकान का अनुभव हो सकता है, इसलिए इस समय शांत रहकर सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है।

    इस बार सभी 12 राशियों पर ग्रहण का अलग-अलग प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन कर्क, सिंह और कुंभ राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई जा रही है।

    कर्क राशि के लोगों के लिए यह समय मानसिक रूप से थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव और बेचैनी बढ़ सकती है। निर्णय लेने में दुविधा की स्थिति बन सकती है। स्वास्थ्य के मामले में भी सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि कोई पुरानी बीमारी दोबारा परेशान कर सकती है। खानपान और दिनचर्या का विशेष ध्यान रखना जरूरी होगा। वाहन चलाते समय भी सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

    सिंह राशि वालों के लिए यह ग्रहण करियर और आर्थिक मामलों में सोच-समझकर कदम उठाने का संकेत दे रहा है। इस समय जल्दबाजी में लिया गया फैसला आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकता है। व्यापार या निवेश से जुड़े लोगों को नई डील या बड़ा निवेश फिलहाल टाल देना बेहतर रहेगा। कार्यक्षेत्र में भी संयम और धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा, ताकि अनावश्यक विवाद से बचा जा सके।

    कुंभ राशि में ही यह सूर्य ग्रहण लग रहा है, इसलिए इसका प्रभाव इस राशि के जातकों पर ज्यादा देखा जा सकता है। बुध और शुक्र की मौजूदगी के कारण मन में भ्रम और असमंजस की स्थिति बन सकती है। आर्थिक मामलों में भी सावधानी जरूरी है, क्योंकि गलत निवेश या जल्दबाजी में किया गया लेन-देन नुकसान दे सकता है। मानसिक थकान और तनाव महसूस हो सकता है, ऐसे में योग, ध्यान और परिवार के साथ समय बिताना फायदेमंद साबित हो सकता है।

  • शिवनवरात्रि उत्सव: महाकाल का दिव्य श्रृंगार, 15 फरवरी तक अलग-अलग स्वरूपों में होंगे दर्शन

    शिवनवरात्रि उत्सव: महाकाल का दिव्य श्रृंगार, 15 फरवरी तक अलग-अलग स्वरूपों में होंगे दर्शन


    उज्जैन । उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिवनवरात्रि उत्सव धूमधाम और श्रद्धा-उल्लास के साथ जारी है। शनिवार को शिवनवरात्रि के दूसरे दिन मंदिर प्रांगण में कोटितीर्थ के तट पर सुबह 8 बजे से ही भक्तों का तांता लगा रहा। इस अवसर पर सुबह श्री गणेश पूजन के साथ ही श्री कोटेश्वर महादेव का विशेष पूजन, अभिषेक और आरती संपन्न हुई।

    श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मणों द्वारा भगवान महाकाल का अभिषेक एकादश-एकादशनी रुद्रपाठ के साथ विधिवत रूप से किया गया। अभिषेक में भक्तों की आस्था के अनुसार विशेष विधियों का पालन किया गया और मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान की पवित्रता बनी रही।

    दोपहर तीन बजे के बाद संध्या पूजन के पश्चात भगवान श्री महाकालेश्वर का विशेष श्रृंगार किया गया। इस दौरान भगवान को नवीन वस्त्रों से सजा कर मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुंड-माला, छत्र आदि से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही भांग, चंदन और सूखे मेवों से दिव्य श्रृंगार कर भगवान को नारंगी माला और मुंड-माला अर्पित की गई। भगवान महाकाल का यह श्रृंगार भक्तों के लिए अत्यंत आकर्षण का केंद्र बना।

    शिवनवरात्रि के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है। हर समय भक्तों का उत्साह देखने लायक है और लोग भगवान के दर्शन के लिए कतार में लगे रहते हैं। मंदिर में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि भक्तों को बिना किसी असुविधा के दर्शन-पूजन का अवसर मिल सके।

    विशेष रूप से यह बताया गया है कि भगवान श्री महाकालेश्वर 15 फरवरी तक प्रतिदिन सायंकाल अलग-अलग स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देंगे। शिवनवरात्रि के इन दिनों में महाकालेश्वर का श्रृंगार और विशेष पूजा-आराधना का क्रम जारी रहेगा, जिससे भक्तों को भक्ति और आध्यात्मिक अनुभव का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

    शिवनवरात्रि उत्सव का यह दूसरा दिन भक्तों के लिए विशेष रूप से यादगार रहा। मंदिर के पवित्र वातावरण में सुबह से शाम तक चलने वाले अनुष्ठान और श्रृंगार ने भक्तों के मन में एक अलग ही ऊर्जा और श्रद्धा का संचार किया।

  • 08 फरवरी 2026 का पंचांग: फाल्गुन कृष्ण सप्तमी आज, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त और सूर्य-चंद्र का समय

    08 फरवरी 2026 का पंचांग: फाल्गुन कृष्ण सप्तमी आज, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त और सूर्य-चंद्र का समय


    नई दिल्ली । आज 08 फरवरी 2026, रविवार को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन पूजा-पाठ, जप-तप और व्रत-अनुष्ठान के लिए विशेष महत्व रखता है। दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त से होती है, जिसे आध्यात्मिक साधना के लिए श्रेष्ठ माना गया है। वहीं शुभ कार्यों की योजना बनाते समय अभिजीत और अमृत काल को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाता है।

    आज के पंचांग के अनुसार अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से 1 बजकर 03 मिनट तक रहेगा, जो किसी भी नए और शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अनुकूल माना जाता है। वहीं अमृत काल शाम 7 बजकर 17 मिनट से 9 बजकर 03 मिनट तक रहेगा, इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना अधिक रहती है। प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त 5 बजकर 30 मिनट से 6 बजकर 18 मिनट तक रहेगा, जो ध्यान, योग और ईश्वर स्मरण के लिए सर्वोत्तम समय है।

    अशुभ काल की बात करें तो आज राहुकाल शाम 4 बजकर 51 मिनट से 6 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। इस दौरान किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य से बचना चाहिए। यम गण्ड दोपहर 12 बजकर 41 मिनट से 2 बजकर 04 मिनट तक और कुलिक काल 3 बजकर 27 मिनट से 4 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त दुर्मुहूर्त शाम 4 बजकर 45 मिनट से 5 बजकर 30 मिनट तक तथा वर्ज्यम् काल सुबह 8 बजकर 40 मिनट से 10 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है।

    खगोलीय दृष्टि से आज सूर्य का उदय सुबह 7 बजकर 07 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 14 मिनट पर होगा। चंद्रमा का उदय 9 फरवरी की रात 12 बजकर 18 मिनट पर होगा, जबकि चंद्रास्त 9 फरवरी को सुबह 11 बजकर 23 मिनट पर रहेगा। शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य सकारात्मक फल प्रदान करते हैं, इसलिए दिन की योजना पंचांग के अनुसार बनाना लाभकारी माना जाता है।

    शुभ काल:
    अभिजीत मुहूर्त – 12:18 PM – 01:03 PM
    अमृत काल – 07:17 PM – 09:03 PM
    ब्रह्म मुहूर्त – 05:30 AM – 06:18 AM

    अशुभ काल:
    राहुकाल – 04:51 PM – 06:14 PM
    यम गण्ड – 12:41 PM – 02:04 PM
    कुलिक – 03:27 PM – 04:51 PM
    दुर्मुहूर्त – 04:45 PM – 05:30 PM
    वर्ज्यम् – 08:40 AM – 10:26 AM

    सूर्य और चंद्रमा का समय:
    सूर्योदय – 07:07 AM
    सूर्यास्त – 06:14 PM
    चन्द्रोदय – 09 फरवरी, 12:18 AM
    चन्द्रास्त – 09 फरवरी, 11:23 AM

  • आज फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष सप्तमी, स्वाति और विशाखा नक्षत्र का संयोग

    आज फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष सप्तमी, स्वाति और विशाखा नक्षत्र का संयोग

    नई दिल्ली। 08 फरवरी 2026 को फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि है। आज रविवार का दिन है और सप्तमी तिथि पर स्वाति नक्षत्र और विशाखा नक्षत्र का संयोग बन रहा है।

    शुभ मुहूर्त:

    अभिजीत मुहूर्त: 12:18 PM – 01:03 PM

    अमृत काल: 07:17 PM – 09:03 PM

    ब्रह्म मुहूर्त: 05:30 AM – 06:18 AM

    अशुभ मुहूर्त:

    राहू काल: 04:51 PM – 06:14 PM

    यम गण्ड: 12:41 PM – 02:04 PM

    कुलिक: 03:27 PM – 04:51 PM

    दुर्मुहूर्त: 04:45 PM – 05:30 PM

    वर्ज्यम्: 08:40 AM – 10:26 AM

    सूर्य और चंद्रमा का समय:

    सूर्योदय: 07:07 AM

    सूर्यास्त: 06:14 PM

    चन्द्रोदय: Feb 09, 12:18 AM

    चन्द्रास्त: Feb 09, 11:23 AM

    विशेष जानकारी:
    आज स्वाति और विशाखा नक्षत्र के संयोग के कारण नये कार्य, निवेश या महत्वपूर्ण निर्णय के लिए शुभ समय माना जाता है। अभिजीत और अमृत मुहूर्त में किए गए कार्य लाभकारी रहेंगे। वहीं, राहू काल और दुर्मुहूर्त में किए गए कार्य से बचना चाहिए क्योंकि ये अशुभ परिणाम दे सकते हैं।

    सूर्य और चंद्रमा के समय के अनुसार पूजा, उपासना और ध्यान के लिए भी सही समय का चुनाव किया जा सकता है। रविवार होने के कारण सूर्य देव की आराधना करने से स्वास्थ्य, ऊर्जा और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।