Category: Religious Astrology

  • गुरुवार का राशिफल

    मेष राशि :- शैक्षणिक कार्य आसानी से पूरे होते रहेंगे। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। परिश्रम प्रयास से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। बुरी संगति से बचें। नौकरी में सावधानीपूर्वक कार्य करें। अपनों का सहयोग प्राप्त होगा। अर्थपक्ष मजबूत रहेगा। शुभांक-3-5-7

    वृष राशि :- अपने अधीनस्थ लोगों से कम सहयोग मिलेगा। बाहरी सहयोग की अपेक्षा रहेगी। सलाह उपयोगी सिद्घ होगी। विपरीत परीस्थितियों में भी हानि नहीं होगी। आवेश में आना आपके हित में नहीं होगा इसलिए व्यवहार व वाणी पर नियत्रंण रखें। पठन-पाठन में स्थिति कमजोर रहेगी। शुभांक-5-6-9

    मिथुन राशि :- व्यापार व नौकरी में स्थिति अच्छी रहेगी। आलस्य का त्याग करें। कार्यसिद्घि होने में देर नहीं लगेगी। आर्थिक लाभ उत्तम रहेगा। शैक्षणिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। परिवार में किसी मांगलिक कार्य पर वार्ता होगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। लेन-देन में अस्पष्टता ठीक नहीं। स्त्री-संतान पक्ष का सहयोग मिलेगा। शुभांक-2-6-8

    कर्क राशि :- समय पक्ष का बना रहेगा। कारोबारी काम में प्रगति बनती रहेगी। लेन-देन में आ रही बाधा दूर करने का प्रयास होंगे। धार्मिक कार्य में समय और धन व्यय होगा। अपना काम दूसरों के सहयोग से पूरा होगा। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। पुराने मित्र से मिलन होगा। शुभांक-4-6-7

    सिंह राशि :- पैतृक सम्पत्ति से लाभ। मेहमानों का आगमन होगा। राजकीय कार्यों से लाभ। पुरानी गलती का पश्चाताप होगा। विद्यार्थियों को लाभ। दाम्पत्य जीवन सुखद रहेगा। परिवारजनों का सहयोग व समन्वय काम को बनाना आसान करेगा। कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। शुभांक-3-5-8

    कन्या राशि :- जीवनसाथी अथवा यार-दोस्तों के साथ साझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। एकाकी वृत्ति त्यागें। हित के काम में आ रही बाधा मध्याह्न पश्चात् दूर हो जाएगी। अपने काम आसानी से बनते चले जाएंगे। साथ ही आगे के लिए रास्ता भी बन जाएगा। कार्य सफल होंगे। शुभांक-2-5-7

    तुला राशि :- प्रसन्नता के साथ सभी जरूरी कार्य बनते नजर आएंगे। मनोरथ सिद्घि का योग है। सभा-गोष्ठियों में सम्मान मिलेगा। प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए कुछ सामाजिक कार्य संपन्न होंगे। कई प्रकार के हर्ष उल्लास के बीच आनन्ददायक दिन रहेगा। आमोद-प्रमोद का दिन होगा और व्यावसायिक प्रगति भी होगी। शुभांक-6-8-9

    वृश्चिक राशि :- स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार की अपेक्षा रहेगी। ज्ञान-विज्ञान की वृद्घि होगी और सज्जनों का साथ भी रहेगा। कुछ कार्य भी सिद्घ होंगे। व्यर्थ की दौड़़-भाग से यदि बचा जाए तो अच्छा है। प्रियजनों से समागम का अवसर मिलेगा। आय के अच्छे योग बनेगें। संतान की उन्नति के योग हैं। शुभांक-5-6-8

    धनु राशि :- आशा और उत्साह के कारण सक्रियता बढ़ेगी। आगे बढऩे के अवसर लाभकारी सिद्घ होंगे। कोई प्रिय वस्तु या नवीन वस्त्राभूषण प्राप्त होंगे। सभाओं में मान-सम्मान बढ़ेगा। धार्मिक आस्थाएं फलीभूत होंगी। माता पक्ष से विशेष लाभ। पुराने मित्र से मिलन होगा। आत्मङ्क्षचतन करें। शुभांक-4-6-8

    मकर राशि :- लेन-देन में आ रही बाधा को दूर करने के प्रयास सफल होंगे। धार्मिक कार्य में समय और धन व्यय होगा। कारोबारी काम में बाधा बनी रहेगी। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। व्यापार में स्थिति नरम रहेगी। शुभ कार्यों की प्रवृत्ति बनेगी और शुभ समाचार भी मिलेंगे। संतोष रखने से सफलता मिलेगी। शुभांक-3-6-9

    कुंभ राशि :- पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। जोखिम से दूर रहना ही बुद्घिमानी होगी। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। महत्वपूर्ण कार्य को समय पर बना लें तो अच्छा ही होगा। आशा और उत्साह के कारण सक्रियता बढ़ेगी। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। मित्र से मिलन होगा। शुभांक-1-5-8

    मीन राशि :- धर्म-कर्म के प्रति रुचि जागृत होगी। लाभ में आशातीत वृद्घि तय हैं मगर नकारात्मक रुख न अपनाएं। किसी पुराने संकल्प को पुरा कर लेने का दिन हैं। ”आगे-आगे गौरख जागे” वाली कहावत चरितार्थ होगी। निष्ठा से किया गया कार्य पराक्रम व आत्मविश्वास बढ़ाने वाला होगा। इच्छित कार्य सफल होंगें। शुभांक-1-6-9
  • आज का पंचांग: 4 फरवरी 2026 गणेश पूजा और बुधवार व्रत का संयोग..

    आज का पंचांग: 4 फरवरी 2026 गणेश पूजा और बुधवार व्रत का संयोग..


    नई दिल्ली।आज बुधवार, 4 फरवरी 2026 को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। पंचांग के अनुसार यह दिन भगवान गणेश की उपासना और बुधवार व्रत के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार का दिन बुद्धि, विवेक और बाधा निवारण के प्रतीक गणेश जी को समर्पित माना जाता है। साथ ही यह दिन बुध ग्रह से भी जुड़ा हुआ है, जिसे वाणी, व्यापार, शिक्षा और तर्कशक्ति का कारक ग्रह कहा गया है। इस कारण आज का दिन पूजा-पाठ के साथ-साथ जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए भी शुभ माना जाता है।

    फाल्गुन मास का पहला बुधवार होने के कारण आज का व्रत और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन विधि-विधान से गणेश पूजन करने से बुध ग्रह की स्थिति सुदृढ़ होती है। इसका असर करियर, शिक्षा और व्यापार में स्थिरता के रूप में देखने को मिलता है। विद्यार्थी नौकरीपेशा और कारोबारी वर्ग आज के दिन पूजा और संकल्प को विशेष महत्व देते हैं।

    आज तृतीया तिथि रात 12:09 बजे तक प्रभावी रहेगी उसके बाद चतुर्थी तिथि प्रारंभ होगी। दिन में पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र रात 10:12 बजे तक प्रभावी रहेगा, इसके बाद उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र प्रभाव में आएगा। आज अतिगण्ड योग बना हुआ है, जो 5 फरवरी की रात 1:05 बजे तक रहेगा, इसके पश्चात सुकर्मा योग का आरंभ होगा। चंद्रमा सिंह राशि में स्थित रहेगा और बाद में कन्या राशि में प्रवेश करेगा।सूर्योदय आज सुबह 7:08 बजे और सूर्यास्त शाम 6:03 बजे होगा। चंद्रोदय रात 8:37 बजे और चंद्रास्त सुबह 8:36 बजे है। ये समय व्रत, पूजा और दान कार्य के लिए शुभ माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:23 से 6:15 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2:24 से 3:08 बजे तक और अमृत काल 3:48 से 5:24 बजे तक रहेगा। शाम को गोधूलि मुहूर्त 6:00 से 6:26 बजे तक प्रभावी रहेगा।

    अशुभ समय में राहुकाल दोपहर 12:35 से 1:57 बजे, भद्रा दोपहर 12:19 बजे से रात 12:09 बजे तक (5 फरवरी) रहेगा। इसके अतिरिक्त यमगण्ड, गुलिक काल और दुर्मुहूर्त भी दिन में पड़ रहे हैं। उत्तर दिशा में दिशाशूल होने के कारण आज इस दिशा में यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।

    गणेश पूजा करने के लिए सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। लाल पुष्प, मोदक या लड्डू का भोग लगाएं और “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। हरी वस्तुओं का दान करना, कटु वाणी से बचना और व्रत के नियमों का पालन करना शुभ माना गया है।आज का यह दिन बुद्धि, व्यापार और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। सरल उपाय और विधि-विधान से गणेश पूजन करने से जीवन में बाधाएं दूर होती हैं और बुध ग्रह का सकारात्मक प्रभाव मिलता है।

  • बुधवार के उपाय: गणेश पूजा और बुध ग्रह की पूजा से बढ़ाएं बुद्धि, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति

    बुधवार के उपाय: गणेश पूजा और बुध ग्रह की पूजा से बढ़ाएं बुद्धि, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति


    नई दिल्ली।बुधवार को भगवान गणेश और बुध ग्रह की पूजा विशेष महत्व रखती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए उपाय व्यक्ति की बुद्धि, वाणी, निर्णय क्षमता और आर्थिक स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। गणेश पूजा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, जबकि बुध ग्रह की शांति से मानसिक स्थिरता और व्यावसायिक समझ मजबूत होती है। इसे ध्यान में रखते हुए बुधवार को पूजा, व्रत, दान और सेवा से जुड़े उपायों को जीवन में अपनाना शुभ माना जाता है।

    धार्मिक ग्रंथों में बुधवार को प्रथम पूज्य भगवान गणेश का दिन माना गया है। बुध ग्रह से जुड़े उपाय बुद्धि, तर्क, व्यापार और संवाद में सुधार लाते हैं। इस दिन गणेश जी को 21 दूर्वा अर्पित करना, गुड़, मोदक या लड्डू का भोग लगाना और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है। मंत्र जाप के दौरान एकाग्रता और मानसिक संतुलन बनाए रखने की विशेष सलाह दी जाती है।

    धार्मिक मान्यताओं में बुधवार को गाय की सेवा का भी महत्व बताया गया है। हरा चारा, पालक या घास देने से बुध ग्रह से जुड़े दोष कम होते हैं। हरी मूंग की दाल, हरे वस्त्र या हरी वस्तुओं का दान जरूरतमंदों को करने से सामाजिक संतुलन और पुण्य की प्राप्ति होती है।बुधवार को हरे रंग को शुभ माना जाता है। हरे वस्त्र पहनने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और बुध ग्रह का अनुकूल प्रभाव मिलता है। इसके विपरीत काले रंग के कपड़े पहनने से बचने की सलाह दी जाती है। इस दिन उधार लेने या देने से भी परहेज करने की परंपरा है, ताकि आर्थिक अस्थिरता से बचा जा सके।

    पारिवारिक और स्वास्थ्य से जुड़े उपायों में बहन या बेटी को हरी वस्तु या पढ़ाई की सामग्री भेंट करने से शिक्षा और करियर में उन्नति के योग बनते हैं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से राहत के लिए गणेश जी को धूप और हरा फल अर्पित करना, गौशाला में हरा चारा दान करना शुभ माना जाता है।इन सरल उपायों को अपनाकर बुधवार को गणेश और बुध ग्रह की पूजा से मानसिक संतुलन, व्यावसायिक सफलता और पारिवारिक सुख-समृद्धि सुनिश्चित की जा सकती है। धार्मिक आस्था और सही समय पर उपाय करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की संभावना बढ़ जाती है।

  • शनि साढ़ेसाती 2026-27: जिम्मेदारी और अनुशासन सिखाने वाला समय मेष कुंभ और मीन राशि के जातकों के लिए

    शनि साढ़ेसाती 2026-27: जिम्मेदारी और अनुशासन सिखाने वाला समय मेष कुंभ और मीन राशि के जातकों के लिए


    नई दिल्ली।वर्ष 2026-27 में शनि की साढ़ेसाती मेष कुंभ और मीन राशि पर अपना प्रभाव जारी रखेगी। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार यह समय इन राशियों के जातकों के लिए परीक्षा और परिपक्वता का दौर साबित हो सकता है। शनि की साढ़ेसाती जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में दबाव विलंब और अतिरिक्त परिश्रम की मांग करती है।

    साढ़ेसाती तब होती है जब शनि जन्म राशि से 12वें उसी और दूसरे भाव में गोचर करता है। वर्तमान में शनि की स्थिति मेष कुंभ और मीन राशि वालों पर प्रभाव डाल रही है और यह स्थिति वर्ष 2027 तक जारी रहने की संभावना है।

    मेष राशि वालों के लिए यह समय धैर्य की परीक्षा लेने वाला है। कार्यक्षेत्र में निर्णय लेने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह लेना जरूरी है। अनियोजित खर्च और जल्दबाजी आर्थिक असंतुलन पैदा कर सकती है। पारिवारिक और व्यक्तिगत रिश्तों में खटास देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शॉर्टकट से बचें और नियमित मेहनत पर भरोसा रखें।

    कुंभ राशि के जातकों को स्वास्थ्य संबंधी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। विदेश यात्रा निवेश और व्यापार से जुड़े फैसलों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। पारिवारिक गलतफहमियां और प्रेम संबंधों में बाधाएं मानसिक दबाव बढ़ा सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दबाजी से बचें और योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ें।

    मीन राशि वालों के लिए यह दौर चुनौतियों भरा रह सकता है। नए लोगों पर भरोसा करने से पहले सावधानी बरतने की जरूरत है। आर्थिक तंगी वाहन या संपत्ति से जुड़े फैसलों में देरी और सरकारी कार्यों में रुकावटें सामने आ सकती हैं। कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में भी मानसिक तनाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।

    ज्योतिषियों के अनुसार साढ़ेसाती केवल कष्ट का काल नहीं बल्कि आत्ममंथन अनुशासन और जिम्मेदारी सिखाने का समय है। यह दौर व्यक्ति को जिम्मेदार बनाता है और लंबे समय में स्थायी परिणाम देता है। प्रभाव को संतुलित करने के लिए नियमित पूजा दान और संयमित जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है। शनिवार के दिन शनि से जुड़े उपाय मानसिक संतुलन और नकारात्मक प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

  • मंगल और शनि की शत्रुता से इन तीन राशियों में बढ़ सकती है झड़प और विवाद वृषभ वृश्चिक और कुंभ राशि के जातक रहें सतर्क

    मंगल और शनि की शत्रुता से इन तीन राशियों में बढ़ सकती है झड़प और विवाद वृषभ वृश्चिक और कुंभ राशि के जातक रहें सतर्क


    नई दिल्ली। फरवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में होने वाला मंगल गोचर ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार कई राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। 23 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजकर 33 मिनट पर मंगल ग्रह कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। कुंभ राशि शनि की मानी जाती है और मंगल और शनि के बीच शत्रुता का भाव होने के कारण यह गोचर वृषभ वृश्चिक और कुंभ राशि के जातकों के लिए सावधानी का संकेत दे रहा है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल साहस ऊर्जा पराक्रम और क्रोध का कारक ग्रह है जबकि शनि कर्म अनुशासन और धैर्य का प्रतिनिधित्व करता है। जब मंगल शनि की राशि में प्रवेश करता है तो स्वभाव में उग्रता और परिस्थितियों में टकराव की संभावना बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह गोचर व्यक्तिगत पेशेवर और पारिवारिक जीवन में असंतुलन ला सकता है।

    वृषभ राशि के जातकों के लिए पेशेवर मोर्चे पर दबाव बढ़ सकता है। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों से मतभेद का सामना करना पड़ सकता है। जल्दबाजी में लिए गए निर्णय नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। संयम और धैर्य से काम लेना जरूरी है नहीं तो गुस्से पर नियंत्रण न रखने से बनाए हुए कार्य बिगड़ सकते हैं।

    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए पारिवारिक और निजी रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है। मानसिक बेचैनी और चिड़चिड़ापन निर्णय क्षमता को प्रभावित कर सकता है। संपत्ति वाहन और साझेदारी से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है। जीवनसाथी या व्यापारिक साझेदार के साथ मतभेद बढ़ने की संभावना है। छोटी बातों को तूल देने से रिश्तों में दूरी पैदा हो सकती है।

    कुंभ राशि में मंगल के गोचर से जातकों में ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ेगा लेकिन अत्यधिक आत्मविश्वास और जल्दबाजी टकराव और नुकसान का कारण बन सकती है। बिना सोच-समझे फैसले लेने से विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है इस समय शांत रहना और संवाद में संयम बरतना आवश्यक है।

    ज्योतिषियों के अनुसार यह गोचर अस्थायी है लेकिन प्रभाव को कम करने के लिए सोच-समझकर निर्णय लेना क्रोध पर नियंत्रण रखना और जोखिम भरे कदमों से बचना जरूरी है। इससे पेशेवर पारिवारिक और व्यक्तिगत जीवन में असंतुलन को रोका जा सकता है।

  • सकट चौथ पर इन चीजों का करें दान, मिलेगा पुण्य

    सकट चौथ पर इन चीजों का करें दान, मिलेगा पुण्य


    नई दिल्ली । माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के चतुर्थी व्रत को सकट चौथ का व्रत कहा जाता है।महिलाएं इस दिन व्रत रखकर संतान की दीर्घायु का वरदान मांगती है। साथ ही इस दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना की जाती है। इसे माघी चतुर्थी, तिल चौथ, संकट चौथ के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत 6 जनवरी 2026 को रखा जाएगा
    हिंदू धर्म सकट चौथ व्रत का काफी महत्व होता है। माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के चतुर्थी व्रत को सकट चौथ का व्रत कहा जाता है।महिलाएं इस दिन व्रत रखकर संतान की दीर्घायु का वरदान मांगती है। साथ ही इस दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना की जाती है। इसे माघी चतुर्थी, तिल चौथ, संकटा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। नए साल में सकट चौथ व्रत 6 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। इस दिन दान का काफी महत्व होता है। माना जाता है कि इस किन कुछ चीजों का दान करने से

    तिल और गुड़ का दान

    सकट चौथ को कई जगहों पर तिलकुटा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे में इस दिन तिल का दान बेहद शुभ फलदायी माना गया है। साथ ही इस दिन गुड़ का दान जरूर करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से शनि दोष का प्रभाव कम होता है।

    कपड़ों का दान
    शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति या योग्य ब्राह्मण को कंबल, ऊनी वस्त्र या जूते-चप्पल का दान करने से पितृ दोष शांत होता है। साथ ही संतान से जुड़ी परेशानियों और कष्टों से भी राहत मिलती है।

    घी का दान
    सकट चौथ के दिन घी करना भी शुभ होता है। इससे सौभाग्य बढ़ता है। घी का दान घर में धन-धान्य लाता है जिससे समृद्धि आती है। इससे शुक्र की कृपा प्राप्ति होती है और स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से भी छुटकारा मिल सकता है।

    अन्न दान का महत्व

    सकट चौथ के अवसर पर अनाज का दान करने से घर में अन्न और धन की कभी कमी नहीं होती। धार्मिक मान्यता है कि इससे आर्थिक संकट दूर होता है और परिवार में समृद्धि बनी रहती है।

    तांबे के पात्र

    शास्त्रों में कहा गया है कि दक्षिणा के बिना कोई भी पूजा अधूरी रहती है। इसलिए सकट चौथ की पूजा संपन्न होने के बाद किसी ब्राह्मण को तांबे का पात्र और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा दें।

    अन्य चीजें

    इसके अलावा सकट चौथ पर नमक का दान, चांदी का दान, कंबल का दान करना भी शुभ फलदायी माना गया है।

    किन चीजों का दान ना करें

    सकट चौथ के दिन भूलकर भी नुकीली चीजों का दान नहीं करना चाहिए। इस दिन नुकीली चीजों का दान करने से व्यक्ति को नुकसान झेलना पड़ सकता है। सकट चौथ के दिन तेल का दान करना मना होता है और भूलकर भी तेल कर दान नहीं करना चाहिए। सकट चौथ के दिन हल्दी का दान नहीं करना चाहिए। इस दिन हल्दी दान करने से वैवाहिक जीवन में परेशानी आने का खतरा रहता है।

  • होली पर ब्लड मून का साया: भद्रा और खग्रास चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग; जानें होलिका दहन का समय और सूतक काल के नियम

    होली पर ब्लड मून का साया: भद्रा और खग्रास चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग; जानें होलिका दहन का समय और सूतक काल के नियम

    उज्जैन/इंदौर। इस वर्ष होली के उल्लास के बीच भद्रा और चंद्र ग्रहण की स्थिति बन रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा लेकिन अगले ही दिन यानी 3 मार्चधुलेंडी को खग्रास चंद्र ग्रहण का प्रभाव रहेगा। इस दौरान आसमान में ब्लड मूनलाल चंद्रमा का अद्भुत नजारा भी दिखाई देगा। ग्रहण के कारण इस बार रंगपंचमी और धुलेंडी के उत्सव पर सूतक काल का असर देखने को मिलेगा।

    होलिका दहन और भद्रा का गणित

    ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार 2 मार्च को शाम 5:55 बजे से भद्रा काल शुरू होगा जो 3 मार्च की सुबह 4:28 बजे तक चलेगा। चूंकि इस बार भद्रा भूलोकसिंह राशि में है इसलिए प्रदोष काल में होलिका पूजन और दहन करना ही शास्त्रसम्मत और श्रेष्ठ माना गया है। भद्रा काल के दौरान भी दान-पुण्य किया जा सकता है जो फलदायी रहता है।

    3 मार्च: चंद्र ग्रहण और ब्लड मून

    धुलेंडी के दिन यानी 3 मार्च को खग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:समय: दोपहर 3:19 बजे से शाम 6:47 बजे तक।पूर्ण खग्रास: लगभग 17 मिनट तक चंद्रमा पूरी तरह ग्रहण की चपेट में रहेगा।ब्लड मून: शाम 6:00 बजे के बाद चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देगा जिसे खगोलीय भाषा में ब्लड मून कहा जाता है।सूतक काल: चंद्र ग्रहण का सूतक काल 3 मार्च को सुबह 9:30 बजे से शुरू हो जाएगा।

    सूतक काल में क्या करें और क्या न करें?

    सूतक काल शुरू होने के बाद मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं और शुभ कार्य वर्जित होते हैं। हालांकि आध्यात्मिक दृष्टि से यह समय बहुत महत्वपूर्ण है मंत्र सिद्धि: ग्रहण काल में इष्ट देव या गुरु मंत्र का जाप करने से मंत्र जल्दी सिद्ध होते हैं।भोजन: सूतक काल में भोजन बनाने और खाने से बचने की सलाह दी जाती हैबुजुर्गों और बीमारों को छोड़कर। दान: ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर सफेद वस्तुओंचावल चीनी दूध का दान करना शुभ माना जाता है।

  • महाशिवरात्रि 2026 पर ग्रहों का महासंयोग: कुंभ राशि में बनेगा चतुर्ग्रही योग, इन 4 राशियों की खुलेगी किस्मत!

    महाशिवरात्रि 2026 पर ग्रहों का महासंयोग: कुंभ राशि में बनेगा चतुर्ग्रही योग, इन 4 राशियों की खुलेगी किस्मत!


    नई दिल्ली । आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से साल 2026 की महाशिवरात्रि बेहद खास होने जा रही है। 15 फरवरी 2026 को जब पूरा देश महादेव की भक्ति में लीन होगा, तब अंतरिक्ष में ग्रहों की एक ऐसी हलचल होगी जो कई राशियों के भाग्य को सुनहरे अक्षरों में लिख देगी। इस दिन कुंभ राशि में चार बड़े ग्रहों राहु, बुध, शुक्र और सूर्य का दुर्लभ चतुर्ग्रही योग बनने जा रहा है। वर्तमान में कुंभ में राहु और बुध पहले से ही मौजूद हैं, लेकिन शिवरात्रि के शुभ अवसर तक शुक्र और सूर्य भी इस राशि में प्रवेश कर जाएंगे। ज्योतिषविदों का मानना है कि शनि की स्वामित्व वाली इस राशि में ग्रहों का यह जमावड़ा न केवल भगवान शिव की असीम कृपा दिलाएगा, बल्कि शनि देव के आशीर्वाद से जातकों के जीवन में सकारात्मकता का संचार भी करेगा।

    इस महासंयोग का सबसे शक्तिशाली प्रभाव मेष राशि के जातकों पर देखने को मिलेगा। मेष राशि वालों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है, जहाँ आर्थिक तंगी दूर होगी और धन की आवक के नए रास्ते खुलेंगे। निवेश की पुरानी योजनाएं अब फल देने लगेंगी और जो लोग लंबे समय से बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं, उनके लिए रोजगार के बेहतरीन अवसर पैदा होंगे। इसी तरह कन्या राशि के जातकों के लिए भी यह महाशिवरात्रि खुशियों की सौगात लेकर आएगी। पैतृक संपत्ति के अटके हुए मामले सुलझ सकते हैं और नया वाहन या मकान खरीदने का सपना सच हो सकता है। इस दौरान किसी प्रभावशाली व्यक्तित्व से आपकी मुलाकात करियर की दिशा और दशा दोनों बदल सकती है।

    मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए भी यह समय किसी बड़े टर्निंग पॉइंट की तरह होगा। मकर राशि वालों को कोर्ट-कचहरी के पुराने विवादों से मुक्ति मिलेगी और कर्ज का बोझ कम होने से मानसिक शांति का अनुभव होगा। वहीं, चूंकि यह चतुर्ग्रही योग स्वयं कुंभ राशि में ही बन रहा है, इसलिए इस राशि के जातकों के लिए लाभ की संभावनाएं सबसे अधिक हैं। कुंभ राशि के जो जातक नौकरी छोड़कर स्वयं का स्टार्टअप या कारोबार शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह समय सबसे अनुकूल है। सोने-चांदी में निवेश और संतान पक्ष से मिलने वाली खुशखबरी उनके उत्साह को दोगुना कर देगी। कुल मिलाकर, 15 फरवरी 2026 की यह महाशिवरात्रि आर्थिक सामाजिक और व्यक्तिगत विकास की दृष्टि से इन चार राशियों के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित होने वाली है।

  • Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नाराज हो सकते हैं भोलेनाथ!

    Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नाराज हो सकते हैं भोलेनाथ!


    नई दिल्ली । महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सबसे पावन पर्वों में से एक है. इस दिन भक्त व्रत रखकर रात्रि जागरण कर और शिवलिंग पर जल-अभिषेक कर भोलेनाथ की विशेष कृपा पाने की कामना करते हैं. पंचांग के अनुसार साल 2026 में 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं लेकिन अगर पूजा-व्रत में कुछ गलतियां हो जाएं तो इसका फल उल्टा भी हो सकता है. आइए जानते हैं महाशिवरात्रि के दिन कौन-सी गलतियां भूलकर भी नहीं करनी चाहिए.

    महाशिवरात्रि के दिन न करें ये काम!

    केतकी के फूल: पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा से वर्जित कर दिया था. इसलिए भूलकर भी इसे शिवलिंग पर न अर्पित करें. सिंदूर या कुमकुम: शिवजी वैरागी हैं और सिंदूर सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है जिसे महादेव पर नहीं चढ़ाया जाता. उनकी पूजा में भस्म का उपयोग सही माना जाता है. तुलसी दल: भगवान शिव की पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित है. इसकी जगह आप बेलपत्र का इस्तेमाल करें. हल्दी: हल्दी का संबंध स्त्री सौंदर्य से है जबकि शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक है. इसलिए शिवजी को हल्दी नहीं चढ़ानी चाहिए.

    बेलपत्र चढ़ाते समय रखें ध्यान

    हमेशा तीन पत्तियों वाला बेलपत्र ही चढ़ाएं. पत्तियां कहीं से कटी-फटी या सूखी नहीं होनी चाहिए. वहीं बेलपत्र का चिकना हिस्सा शिवलिंग की तरफ होना चाहिए.

    शंख से जल अर्पित करना
    भगवान विष्णु की पूजा में शंख अनिवार्य है लेकिन शिवजी की पूजा में शंख का प्रयोग वर्जित है. शास्त्रों के अनुसार महादेव ने शंखचूड़ नामक असुर का वध किया था इसलिए शिवलिंग का अभिषेक शंख से नहीं करना चाहिए. इसके लिए तांबे या पीतल के लोटे का उपयोग करें.

    खान-पान और व्यवहार की सावधानियां

    तामसिक भोजन: महाशिवरात्रि के दिन प्याज लहसुन मांस या मदिरा का सेवन बिल्कुल न करें. काले कपड़े: पूजा के दौरान काले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए. इस दिन हरा सफेद या पीला रंग शुभ माना जाता है. अनुशासन: इस दिन किसी का अपमान न करें न ही घर में क्लेश करें. शिव भक्ति में मन को शांत रखें.

    शिवलिंग की आधी परिक्रमा न करें?

    अक्सर लोग जोश में आकर शिवलिंग की पूरी परिक्रमा कर लेते हैं लेकिन नियम के अनुसार शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती. जहां से अभिषेक का जल बाहर निकलता है (जिसे जलाधारी या निर्मली कहते हैं) उसे लांघना अशुभ माना जाता है. हमेशा वहीं से वापस मुड़ जाना चाहिए.

  • मंगलवार का राशिफल

    मेष राशि :- कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। मान-सम्मान में वृद्घि होगी। अच्छे कार्य के लिए रास्ते बना लेंगे। नवीन उद्योगों के अवसर बढ़ेंगे व अभिलाषाएं पूर्ण होंगी। कुछ भ्रामक धारणाओं का खंडन होगा। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। शुभांक-5-6-9

    वृष राशि :- अपनी गतिविधियों पर पुनर्विचार करें। वैचारिक द्वन्द्व और असंतोष बना रहेगा। किसी सूचना से पूर्ण निर्णय सम्भव। सुख आरोग्य प्रभावित होगा। प्रतिष्ठा बढ़ाने वाले कुछ सामाजिक कार्य संपन्न होंगे। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। स्वास्थ्य का पाया भी कमजोर बना रहेगा। शुभांक-2-6-8

    मिथुन राशि :- यात्रा का दूरगामी परिणाम मिल जाएगा। कामकाज में आ रही बाधा को दूर कर लेंगे। सुविधा और समन्वय बना रहने से कामकाज में प्रगति बन जाएगी। आर्थिक हित के काम को साधने में मदद मिल जाएगी। यात्रा शुभ रहेगी। अपने काम पर पैनी नजर रखिए। विरोधी नुकसान की कोशिश करेगा। शुभांक-4-7-9

    कर्क राशि :- लेन-देन में अस्पष्टता ठीक नहीं। मध्याह्न पूर्व समय आपके पक्ष का रहेगा। कारोबारी काम में प्रगति बनती रहेगी। लेन-देन में आ रही बाधा दूर करने का प्रयास होंगे। परिश्रम से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। पर प्रपंच में ना पड़कर काम पर ध्यान दीजिए। यात्रा शुभ रहेगी। शुभांक-1-3-5

    सिंह राशि :- दुर्लभ स्वप्न साकार होंगे। आलस्य का त्याग करें। पुरुषार्थ का सहारा लें। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। कोई प्रिय वस्तु अथवा नवीन वस्त्राभूषण प्राप्त होंगे। भावनाओं का उद्वेग बढ़ेगा। शुभांक-2-6-8

    कन्या राशि :- विवाद समाप्त होंगे। शुभ संदेशों से मन खिला-खिला रहेगा। परेशानीयां स्वत: ही दूर होती प्रतीत होगी। अध्ययन में रुचि पैदा होगी। अभिभावकों के प्रति उत्तरदायित्व निभाने होंगे। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। स्वविवेक से कार्य करे। जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। शुभांक-3-7-8

    तुला राशि :- भ्रातृपक्ष में विरोध होने की संभावना है। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। परिश्रम प्रयास से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। बुरी संगति से बचें। नौकरी में सावधानीपूर्वक कार्य करें। अपनों का सहयोग प्राप्त होगा। शुभांक-3-5-7

    वृश्चिक राशि :- आवेश में आना आपके हित में नही होगा इसलिए व्यवहार व वाणी पर नियत्रंण रखें। पठन-पाठन में स्थिति कमजोर रहेगी। अपने अधीनस्त लोगों से कम सहयोग मिलेगा। बाहरी सहयोग की अपेक्षा रहेगी। सलाह उपयोगी सिद्घ होगी। विपरीत परीस्थितियों में भी हानि नहीं होगी। शुभांक-5-6-8

    धनु राशि :- व्यापार व नौकरी में स्थिति अच्छी रहेगी। आलस्य का त्याग करें। कार्यसिद्घि होने में देर नहीं लगेगी। आर्थिक लाभ उत्तम रहेगा। शैक्षणिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। परिवार में किसी मांगलिक कार्य पर वार्ता होगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। लेन-देन में अस्पष्टता ठीक नहीं। स्त्री-संतान पक्ष का सहयोग मिलेगा। शुभांक-2-6-8

    मकर राशि :- समय पक्ष का बना रहेगा। कारोबारी काम में प्रगति बनती रहेगी। लेन-देन में आ रही बाधा दूर करने का प्रयास होंगे। धार्मिक कार्य में समय और धन व्यय होगा। अपना काम दूसरों के सहयोग से पूरा होगा। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। पुराने मित्र से मिलन होगा। स्वविवेक से कार्य करें। शुभांक-4-6-7

    कुंभ राशि :- मेहमानों का आगमन होगा। राजकीय कार्यों से लाभ। पैतृक सम्पत्ति से लाभ। पुरानी गलती का पश्चाताप होगा। विद्यार्थियों को लाभ। दाम्पत्य जीवन सुखद रहेगा। परिवारजन का सहयोग व समन्वय काम को बनाना आसान करेगा। कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। शुभांक-3-5-8

    मीन राशि :- जीवनसाथी अथवा दोस्तों के साथ साझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। एकाकी वृत्ति त्यागें। हित के काम में आ रही बाधा मध्याह्न पश्चात् दूर हो जाएगी। अपने काम आसानी से बनते चले जाएंगे। साथ ही आगे के लिए रास्ता भी बन जाएगा। इच्छित कार्य सफल होंगे। शुभांक-2-5-7