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  • बांग्लादेश दौरे के लिए वेस्टइंडीज ने चुनी 15 सदस्यीय टीम, रोस्टन चेस संभालेंगे कप्तानी, अल्जारी जोसेफ बाहर

    बांग्लादेश दौरे के लिए वेस्टइंडीज ने चुनी 15 सदस्यीय टीम, रोस्टन चेस संभालेंगे कप्तानी, अल्जारी जोसेफ बाहर


    नई दिल्ली । बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड ने 15 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। रोस्टन चेस की कप्तानी वाली इस टीम में युवा बल्लेबाज केविन विकम को पहली बार टेस्ट टीम में जगह मिली है। 23 वर्षीय विकम ने घरेलू क्रिकेट में अपने शानदार प्रदर्शन से चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा है। साल 2026 की वेस्टइंडीज चैंपियनशिप में लगातार तीन शतकीय पारियां खेलकर उन्होंने अपनी बल्लेबाजी क्षमता साबित की थी। अब उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का अवसर मिलेगा। दोनों टीमों के बीच पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से मीरपुर में खेला जाएगा जबकि दूसरा मुकाबला 5 नवंबर से सिलहट में शुरू होगा।

    केविन विकम घरेलू क्रिकेट में मध्यक्रम के भरोसेमंद बल्लेबाज के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने अब तक 25 प्रथम श्रेणी मुकाबलों में 40 से अधिक की औसत से रन बनाए हैं और उनके नाम छह शतक दर्ज हैं। चैंपियनशिप में लगातार तीन शतक लगाने का उनका प्रदर्शन चयन का प्रमुख आधार बना। वेस्टइंडीज को उम्मीद होगी कि विकम टेस्ट क्रिकेट में भी अपनी बल्लेबाजी से टीम को मजबूती देंगे। हालांकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहली बार मौका मिलने के कारण उनके सामने खुद को साबित करने की चुनौती भी होगी। टीम में अनुभव और युवा प्रतिभा के संतुलन के लिहाज से उनका चयन अहम माना जा रहा है।

    टीम में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी किए गए हैं। सीमित ओवरों की टीम के कप्तान शाई होप को इस टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। वहीं तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ को नियमित चिकित्सा जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद टीम में शामिल नहीं किया गया है। क्रिकेट वेस्टइंडीज ने उनकी सहमति से कार्यभार प्रबंधन का फैसला लिया है। जोसेफ छोटे प्रारूपों में टीम के विकल्प बने रहेंगे। उनकी जगह ऑलराउंडर कीमो पॉल को टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इससे टीम को गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में भी अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।

    सलामी बल्लेबाज जॉन कैंपबेल ने हैमस्ट्रिंग की चोट से उबरने के बाद टीम में वापसी की है। इसके अलावा श्रीलंका के खिलाफ जीत और पाकिस्तान के खिलाफ ड्रॉ खेलने वाली टीम के अधिकांश खिलाड़ियों को बरकरार रखा गया है। घोषित टीम में तीन तेज गेंदबाजी विकल्प दो तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर और दो विशेषज्ञ स्पिनर शामिल हैं। बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में स्पिन गेंदबाजों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में वेस्टइंडीज की रणनीति में तेज गेंदबाजी और स्पिन के बीच संतुलन बनाए रखना अहम होगा।

    वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने सीरीज को टीम के लिए महत्वपूर्ण बताया है। उनके मुताबिक विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने रैंकिंग के शीर्ष आधे हिस्से में जगह बनाने का लक्ष्य तय किया था। बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम इस लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी ने माना कि बांग्लादेश को उसके घरेलू मैदान पर चुनौती देना आसान नहीं होगा लेकिन टीम इस मुकाबले के लिए तैयार है।

    विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 में वेस्टइंडीज की यह आखिरी सीरीज होगी। टीम 18 अक्टूबर को बांग्लादेश पहुंचेगी और 22 से 24 अक्टूबर तक ढाका में तीन दिवसीय अभ्यास मैच खेलेगी। इसके बाद टेस्ट सीरीज में उसका सामना मेजबान टीम से होगा। वेस्टइंडीज के लिए यह दौरा अंक तालिका में अपनी स्थिति बेहतर करने का अहम अवसर है। वहीं केविन विकम के लिए यह पहला टेस्ट कॉल-अप करियर की नई शुरुआत साबित हो सकता है।

    वेस्टइंडीज टीम: रोस्टन चेस कप्तान जोमेल वारिकन उपकप्तान जोशुआ बिशप जॉन कैंपबेल तेजनारायण चंद्रपॉल जोशुआ डा सिल्वा जस्टिन ग्रीव्स कावेम हॉज आमिर जंगू शमार जोसेफ ब्रैंडन किंग कीमो पॉल केमर रोच जेडन सील्स और केविन विकम।

  • 45 साल के हुए गौतम गंभीर, वर्ल्ड कप फाइनल की पारियों से लेकर नेपियर के 137 रन तक, जानिए उनके करियर के यादगार पल

    45 साल के हुए गौतम गंभीर, वर्ल्ड कप फाइनल की पारियों से लेकर नेपियर के 137 रन तक, जानिए उनके करियर के यादगार पल


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के मौजूदा मुख्य कोच गौतम गंभीर बुधवार 14 अक्टूबर को अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं। बतौर खिलाड़ी गंभीर ने भारतीय क्रिकेट को कई यादगार पल दिए। टी20 विश्व कप 2007 के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 75 रन और वनडे विश्व कप 2011 के फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ 97 रन की उनकी पारियां आज भी क्रिकेट प्रशंसकों के जेहन में ताजा हैं। हालांकि गंभीर के करियर की एक और पारी ऐसी है जो उनकी तकनीक धैर्य और संघर्ष क्षमता की मिसाल मानी जाती है। साल 2009 में न्यूजीलैंड के नेपियर में खेली गई 137 रन की उनकी पारी ने भारतीय टीम को निश्चित दिखाई दे रही हार से बचाने में अहम भूमिका निभाई थी।

    नेपियर टेस्ट में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए नौ विकेट पर 619 रन बनाकर पारी घोषित कर दी थी। इसके जवाब में भारतीय टीम पहली पारी में महज 305 रन पर सिमट गई और उसे फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर होना पड़ा। भारतीय टीम के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती मैच बचाने की थी। दूसरी पारी में विकेट जल्दी गिरते तो न्यूजीलैंड की जीत लगभग तय हो सकती थी। ऐसे मुश्किल हालात में गौतम गंभीर वीरेंद्र सहवाग के साथ सलामी बल्लेबाज के रूप में मैदान पर उतरे। सहवाग 22 रन बनाकर आउट हो गए लेकिन गंभीर ने एक छोर संभालकर बल्लेबाजी जारी रखी।

    गंभीर ने इसके बाद राहुल द्रविड़ के साथ दूसरे विकेट के लिए 133 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। दोनों बल्लेबाजों ने 376 गेंदों का सामना करते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों को लंबे समय तक विकेट के लिए तरसाया। द्रविड़ ने 62 रन बनाए। उनके आउट होने के बाद गंभीर ने सचिन तेंदुलकर के साथ तीसरे विकेट के लिए 97 रन जोड़े। तेंदुलकर ने 64 रन का योगदान दिया। इसके बाद वीवीएस लक्ष्मण के साथ गंभीर ने चौथे विकेट के लिए 96 रन की साझेदारी की। इस दौरान भारतीय बल्लेबाजों का मुख्य लक्ष्य तेजी से रन बनाना नहीं बल्कि क्रीज पर टिके रहकर मैच को हार से बचाना था।

    गंभीर की एकाग्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 436 गेंदों का सामना करते हुए 137 रन बनाए। वह करीब 643 मिनट तक क्रीज पर डटे रहे। उनकी इस मैराथन पारी ने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों को लगातार मेहनत करने पर मजबूर किया और भारतीय टीम को मुकाबले में बनाए रखा। गंभीर के आउट होने के बाद लक्ष्मण ने नाबाद 124 रन बनाए जबकि युवराज सिंह 54 रन बनाकर नाबाद रहे। दोनों ने बचा हुआ समय निकालते हुए न्यूजीलैंड को जीत से दूर रखा। मैच समाप्त होने तक भारत ने दूसरी पारी में चार विकेट पर 476 रन बना लिए थे और मुकाबला ड्रॉ हो गया।

    इस ऐतिहासिक मुकाबले में द्रविड़ सचिन लक्ष्मण और युवराज ने भी अहम योगदान दिया लेकिन गंभीर की पारी को भारतीय टेस्ट क्रिकेट के धैर्यपूर्ण प्रदर्शनों में विशेष स्थान मिलता है। यह पारी बताती है कि क्रिकेट में हर बार बड़ी जीत के लिए तेज रन बनाना जरूरी नहीं होता। कभी-कभी क्रीज पर टिके रहना और परिस्थितियों के अनुसार खेलना भी टीम के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि बन जाता है।

    14 अक्टूबर 1981 को दिल्ली में जन्मे गंभीर ने 2003 से 2016 के बीच भारत के लिए 58 टेस्ट 147 वनडे और 37 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। उन्होंने टेस्ट में 4154 वनडे में 5238 और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 932 रन बनाए। 2011 के वनडे विश्व कप और 2007 के टी20 विश्व कप में भारत की खिताबी जीत में उनकी भूमिका बेहद अहम रही। साल 2018 में संन्यास लेने के बाद गंभीर ने कोचिंग और क्रिकेट प्रशासन में अपनी नई पारी शुरू की। नौ जुलाई 2024 को भारतीय टीम के मुख्य कोच बने गंभीर के नेतृत्व में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 और टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीता। खिलाड़ी के रूप में संघर्ष और निर्णायक मौकों पर प्रदर्शन करने वाले गंभीर अब कोच के तौर पर भारतीय क्रिकेट को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

  • 71 रन की पारी के दौरान चोटिल हुईं लिचफील्ड, तीसरे वनडे से हुईं बाहर, न्यूजीलैंड सीरीज से भी कट सकता है पत्ता

    71 रन की पारी के दौरान चोटिल हुईं लिचफील्ड, तीसरे वनडे से हुईं बाहर, न्यूजीलैंड सीरीज से भी कट सकता है पत्ता


    नई दिल्ली । ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम को बांग्लादेश के खिलाफ वनडे सीरीज के तीसरे मुकाबले से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम की सलामी बल्लेबाज फोएबे लिचफील्ड कूल्हे की मांसपेशियों में खिंचाव के कारण बुधवार को खेले जा रहे तीसरे वनडे की प्लेइंग इलेवन से बाहर हो गईं। उनकी चोट ने ऑस्ट्रेलियाई टीम की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि न्यूजीलैंड के खिलाफ रविवार से शुरू होने वाली टी20 सीरीज में भी उनके खेलने पर संशय बना हुआ है। फिलहाल उनकी चोट की गंभीरता और मैदान पर वापसी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऑस्ट्रेलिया को उम्मीद होगी कि यह चोट ज्यादा गंभीर न हो और लिचफील्ड जल्द ही टीम में वापसी कर सकें।

    23 वर्षीय बाएं हाथ की बल्लेबाज को रविवार को बांग्लादेश के खिलाफ दूसरे वनडे मुकाबले के दौरान चोट लगी थी। उस मैच में उन्होंने 71 रन की शानदार पारी खेली थी। हालांकि इसी पारी के दौरान उनके कूल्हे की मांसपेशियों में खिंचाव आ गया। इसके बाद उनकी फिटनेस पर नजर रखी जा रही थी लेकिन तीसरे वनडे से पहले उन्हें खेलने के लिए फिट नहीं माना गया। न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी टी20 सीरीज को देखते हुए ऑस्ट्रेलियाई टीम प्रबंधन के लिए लिचफील्ड की फिटनेस बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। रविवार को होने वाले पहले टी20 मुकाबले से पहले उनकी स्थिति पर फैसला लिया जा सकता है।

    ऑस्ट्रेलिया की कार्यवाहक कप्तान ताहलिया मैकग्राथ ने टॉस के दौरान लिचफील्ड की चोट की जानकारी दी। उनकी अनुपस्थिति में ऑलराउंडर निकोला कैरी को तीन मैचों की वनडे सीरीज में पहली बार प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। वहीं विकेटकीपर बल्लेबाज बेथ मूनी को पारी की शुरुआत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। तीसरा वनडे मूनी के लिए भी खास है क्योंकि यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का 100वां वनडे मुकाबला है। ऐसे में वह इस उपलब्धि को यादगार बनाने के साथ टीम को एक और जीत दिलाने की कोशिश करेंगी।

    ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए चोटों की समस्या ऐसे समय में सामने आई है जब टीम पहले से ही खिलाड़ियों की कमी से जूझ रही है। हिप की परेशानी से जूझ रहीं सोफी मोलिनक्स और क्वाड्रिसेप्स की चोट से उबर रहीं लूसी हैमिल्टन भी उपलब्ध नहीं हैं। इन खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी के कारण बांग्लादेश के खिलाफ तीसरे वनडे के लिए मेजबान टीम के पास केवल 12 खिलाड़ी उपलब्ध थे। लगातार चोटों ने टीम के विकल्प सीमित कर दिए हैं और आगामी टी20 सीरीज से पहले खिलाड़ियों की फिटनेस ऑस्ट्रेलिया के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

    इस बीच ग्रेस हैरिस को कवर के तौर पर टीम से जुड़ने के लिए ब्रिस्बेन भेजा गया है। ऑस्ट्रेलिया की टी20 टीम में जगह नहीं बना पाने के बाद वह गुरुवार को ब्रिस्बेन हीट के टी20 स्प्रिंग चैलेंज अभियान में वापसी करेंगी। हालांकि मौजूदा वनडे सीरीज में ऑस्ट्रेलिया का प्रदर्शन शानदार रहा है। टीम ने पहले मुकाबले में बांग्लादेश को सात विकेट से हराया था जबकि दूसरे वनडे में नौ विकेट से जीत दर्ज की थी। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया ने तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। अब तीसरे मुकाबले में टीम की नजर क्लीन स्वीप पर है जबकि लिचफील्ड की चोट और उनकी संभावित वापसी आगामी न्यूजीलैंड सीरीज से पहले चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है।

  • सगाई तोड़ने के फैसले के बाद फिर साथ आए पृथ्वी शॉ और आकृति अग्रवाल, बोले- अब अपने भरोसे और समझ से तय करेंगे भविष्य

    सगाई तोड़ने के फैसले के बाद फिर साथ आए पृथ्वी शॉ और आकृति अग्रवाल, बोले- अब अपने भरोसे और समझ से तय करेंगे भविष्य

    नई दिल्ली ।भारतीय क्रिकेटर पृथ्वी शॉ और अभिनेत्री-इन्फ्लुएंसर आकृति अग्रवाल ने अपने रिश्ते को लेकर नया फैसला किया है। सगाई तोड़ने और अलग होने की जानकारी देने के कुछ सप्ताह बाद दोनों ने फिर से साथ रहने का निर्णय लिया है। 12 अक्टूबर 2026 को दोनों ने एक साझा व्यक्तिगत स्पष्टीकरण जारी कर अपने रिश्ते में आए बदलाव की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब वे अपने भविष्य से जुड़े फैसले आपसी बातचीत, समझ और भरोसे के आधार पर लेना चाहते हैं।

    पृथ्वी शॉ और आकृति अग्रवाल ने इसी साल मार्च में सगाई की थी। दोनों ने 8 मार्च को अपने रिश्ते को नया नाम देते हुए सगाई की तस्वीरें साझा की थीं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों के बीच इस रिश्ते को लेकर उत्साह देखा गया था। हालांकि, कुछ समय बाद दोनों के बीच अनबन की खबरें सामने आने लगीं। अगस्त से उनके रिश्ते में तनाव की चर्चाएं होने लगी थीं। इसके बाद 17 सितंबर 2026 को आकृति ने एक पोस्ट के जरिए अलग होने के फैसले की जानकारी दी थी।

    12 अक्टूबर को साझा किए गए स्पष्टीकरण में सगाई तोड़ने के फैसले के पीछे की परिस्थितियों का भी उल्लेख किया गया। इसमें बताया गया कि उस समय करीबी लोगों की बातों को अधिक महत्व दिया गया और उनके सुझावों के आधार पर रिश्ता खत्म करने का निर्णय लिया गया। पोस्ट में कहा गया कि कुछ लोग उनके रिश्ते के बारे में उनसे भी अधिक जानते होने का दावा करते थे और उनके फैसलों पर उनका काफी प्रभाव था। इसी वजह से रिश्ते को लेकर गलत निर्णय लिया गया।

    साझा संदेश में इस बात पर भी जोर दिया गया कि उस समय दोनों के बीच बातचीत की कमी रही। पोस्ट के अनुसार, सगाई तोड़ने से पहले एक-दूसरे के साथ खुलकर बात करना जरूरी था। अब दोनों ने बीते घटनाक्रम पर चर्चा की है और एक-दूसरे के नजरिए को समझने की कोशिश की है। इसी बातचीत के बाद उन्होंने अपने रिश्ते को फिर से आगे बढ़ाने का फैसला किया।

    संदेश में आगे कहा गया कि सगाई तोड़ने के फैसले और उससे हुई तकलीफ की जिम्मेदारी स्वीकार की गई है। दोनों ने स्पष्ट किया कि वे एक-दूसरे के लिए पर्याप्त हैं और अपने रिश्ते को लेकर बाहरी लोगों के हस्तक्षेप पर निर्भर नहीं रहना चाहते। उन्होंने यह भी कहा कि आगे का जीवन किस दिशा में बढ़ेगा, इसका फैसला उनकी अपनी समझ, आपसी भरोसे और प्यार के आधार पर होगा।

    इससे पहले 17 सितंबर को आकृति अग्रवाल ने अलग होने की जानकारी देते हुए कहा था कि दोनों के भविष्य के लक्ष्य और परिस्थितियां अलग थीं। इसी कारण उन्होंने अलग होने का फैसला किया था। उस समय उनके बयान से सगाई टूटने की पुष्टि हुई थी। अब नए साझा संदेश के जरिए दोनों ने अपने फैसले में बदलाव की जानकारी दी है।

    पृथ्वी शॉ और आकृति अग्रवाल ने अपने रिश्ते को एक और अवसर देने का निर्णय लेते हुए लोगों से उनकी निजता और फैसले का सम्मान करने की अपील की है। दोनों के मुताबिक, वे अब नई शुरुआत कर रहे हैं और अपने रिश्ते का भविष्य आपसी समझ तथा विश्वास के आधार पर तय करना चाहते हैं।

  • पैरा एशियन गेम्स में भारतीय बेटियों पर रहेंगी नजरें, हांगझोऊ में 40 पदक जीतकर बढ़ाया था देश का मान

    पैरा एशियन गेम्स में भारतीय बेटियों पर रहेंगी नजरें, हांगझोऊ में 40 पदक जीतकर बढ़ाया था देश का मान

    नई दिल्ली: पैरा एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के पीछे महिला पैरा एथलीटों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण रही है। हांगझोऊ में 2022 में आयोजित पिछले पैरा एशियाई खेलों में भारत ने कुल 111 पदक जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया था। इनमें 40 पदक महिला खिलाड़ियों के नाम रहे थे। अब जापान के आइची-नागोया में 18 से 24 अक्टूबर 2026 तक होने वाले पैरा एशियन गेम्स में भारतीय महिला खिलाड़ियों से एक बार फिर दमदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। भारत का लक्ष्य पिछले खेलों में हासिल की गई पदक संख्या को पीछे छोड़ना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करना है।

    हांगझोऊ पैरा एशियाड में भारत ने 2018 में जीते गए 72 पदकों की तुलना में उल्लेखनीय सुधार किया था। भारतीय दल ने कुल 111 पदक अपने नाम किए और पदक तालिका में पांचवां स्थान हासिल किया। इनमें महिला खिलाड़ियों ने 40 पदक जीतकर कुल पदकों में लगभग 36 प्रतिशत योगदान दिया था। एथलेटिक्स, बैडमिंटन, तीरंदाजी और टेबल टेनिस जैसे खेलों में महिला खिलाड़ियों का प्रदर्शन खास तौर पर उल्लेखनीय रहा। इन उपलब्धियों ने दिखाया कि भारतीय महिला पैरा एथलीट देश की पदक उम्मीदों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    पिछले खेलों में शीतल देवी ने पैरा तीरंदाजी में शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। वह महिला कंपाउंड और मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय पैरा एथलीट बनी थीं। उनके प्रदर्शन ने भारतीय पैरा तीरंदाजी को नई पहचान दिलाई। आगामी प्रतियोगिता में भी उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी। वहीं, पैरा बैडमिंटन में थुलासिमथी मुरुगेसन ने महिला एकल एसयू-5 वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। इस बार उनके खेल में भाग लेने को लेकर अंतिम चयन की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

    पैरा पावरलिफ्टिंग में जैनब खातून ने हांगझोऊ में महिला 61 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता था। उनकी उपलब्धि ने भारत की पदक तालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी मानसी जोशी ने महिला एकल एसएल-3 वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया था। पैरा टेबल टेनिस में भाविना पटेल ने महिला एकल क्लास-4 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। इस बार भाविना को भारतीय दल की ध्वजवाहिका चुना गया है। उनकी यह जिम्मेदारी भारतीय टीम के लिए खास महत्व रखती है। हालांकि, कुछ खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की अंतिम सूची घोषित होने का इंतजार है, इसलिए सभी खिलाड़ियों की भागीदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

    भारत ने 2010 में चीन के ग्वांगझू में आयोजित पहले पैरा एशियाई खेलों में 14 पदक जीतकर 15वां स्थान हासिल किया था। इसके बाद हर संस्करण में देश की पदक संख्या में वृद्धि दर्ज की गई। हांगझोऊ में 111 पदकों के साथ पांचवें स्थान पर पहुंचना भारतीय पैरा खेलों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। अब 2026 के खेलों में भारत इस प्रदर्शन को और बेहतर करने के लक्ष्य के साथ उतरेगा। इस प्रतियोगिता में 45 देशों के लगभग 3,000 पैरा एथलीट हिस्सा लेंगे। कुल 18 खेलों में 492 पदक स्पर्धाएं आयोजित होंगी। भारत की ओर से 121 खिलाड़ियों का दल जापान जाएगा, जिसमें 80 पुरुष और 41 महिला पैरा एथलीट शामिल हैं। भारतीय महिला खिलाड़ियों का प्रदर्शन इस बार भी देश की कुल पदक संख्या और रैंकिंग के लिहाज से अहम रहने वाला है।

  • सुरेश रैना ने परिवार संग मां बगलामुखी के किए दर्शन, मंदिर में हवन के दौरान लाल मिर्च चढ़ाने की क्या है मान्यता?

    सुरेश रैना ने परिवार संग मां बगलामुखी के किए दर्शन, मंदिर में हवन के दौरान लाल मिर्च चढ़ाने की क्या है मान्यता?

    नई दिल्ली: पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना ने शारदीय नवरात्र के पहले दिन अपने परिवार के साथ हिमाचल प्रदेश स्थित मां बगलामुखी मंदिर में दर्शन किए। नवरात्र के अवसर पर उन्होंने मां के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना की। मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या माना जाता है। देशभर से श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां बगलामुखी की उपासना शत्रुओं पर विजय, बाधाओं से मुक्ति और जीवन में आने वाली कठिनाइयों से निपटने की शक्ति प्राप्त करने के लिए की जाती है। मंदिर में विशेष हवन का भी महत्व है, जिसमें लाल मिर्च की आहुति देने की परंपरा प्रचलित है।

    मां बगलामुखी मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के बनखंडी क्षेत्र में स्थित है। यह शक्तिपीठ श्रद्धालुओं के बीच अपनी विशिष्ट पूजा पद्धति और धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। नवरात्र के दौरान यहां भक्तों की आवाजाही बढ़ जाती है। कई श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन की परेशानियों से छुटकारा पाने की कामना लेकर मंदिर पहुंचते हैं। सुरेश रैना का परिवार के साथ मंदिर में दर्शन करना भी इसी धार्मिक अवसर से जुड़ा रहा। नवरात्र के पहले दिन देवी की आराधना को विशेष महत्व दिया जाता है और भक्त विधि-विधान से पूजा कर आशीर्वाद मांगते हैं।

    मां बगलामुखी की पूजा में हवन का विशेष स्थान माना जाता है। इस दौरान लाल मिर्च की आहुति देने की परंपरा मंदिर की पहचान से जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां बगलामुखी को शत्रुओं की वाणी और नकारात्मक शक्तियों को नियंत्रित करने वाली देवी माना जाता है। लाल मिर्च की आहुति को इसी मान्यता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। भक्तों का विश्वास है कि इस प्रकार का हवन विरोधियों से उत्पन्न परेशानियों, विवादों और बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना के लिए किया जाता है। यह धार्मिक आस्था पर आधारित परंपरा है, जिसका महत्व श्रद्धालु अपनी मान्यताओं के अनुसार समझते हैं।

    मां बगलामुखी को पीतांबरा देवी के नाम से भी जाना जाता है। उनकी पूजा में पीले रंग को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, देवी को पीले वस्त्र अर्पित किए जाते हैं और पूजा में पीले फूलों तथा अन्य पीली सामग्री का उपयोग किया जाता है। मंदिर में होने वाले विशेष अनुष्ठानों के दौरान श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं के अनुसार पूजा कराते हैं। मां बगलामुखी की साधना को विशेष रूप से उन परिस्थितियों में महत्वपूर्ण माना जाता है, जब व्यक्ति किसी विवाद, विरोध या कठिन चुनौती का सामना कर रहा हो। हालांकि, इन मान्यताओं का आधार धार्मिक विश्वास है और इन्हें आस्था के संदर्भ में ही देखा जाता है।

    मां बगलामुखी से जुड़ी धार्मिक कथाओं में देवी को असाधारण शक्ति वाली महाविद्या के रूप में वर्णित किया गया है। मान्यता है कि देवी की आराधना से संकटों का सामना करने का साहस और मानसिक मजबूती मिलती है। नवरात्र के दौरान शक्तिपीठों में पूजा-अर्चना का विशेष महत्व रहता है। इस समय श्रद्धालु उपवास रखते हैं, देवी के मंत्रों का जाप करते हैं और हवन के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। सुरेश रैना का परिवार के साथ मां बगलामुखी के दर्शन करना इसी धार्मिक परंपरा से जुड़ा प्रसंग है। मंदिर में लाल मिर्च की आहुति की परंपरा भी देवी की शक्ति और शत्रु बाधाओं से रक्षा की मान्यता के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखती है।

  • सचिन, युवराज और गंभीर को टीम से बाहर करने पर सालों बाद चर्चा, संदीप पाटिल ने चयन प्रक्रिया से जुड़े अनुभव बताए

    सचिन, युवराज और गंभीर को टीम से बाहर करने पर सालों बाद चर्चा, संदीप पाटिल ने चयन प्रक्रिया से जुड़े अनुभव बताए

    नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट में टीम चयन को लेकर हमेशा चर्चा होती रही है। किसी खिलाड़ी को टीम में जगह देना हो या किसी अनुभवी क्रिकेटर को बाहर बैठाने का फैसला लेना हो, चयनकर्ताओं के लिए यह जिम्मेदारी आसान नहीं होती। सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह और गौतम गंभीर जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के करियर में भी ऐसे दौर आए, जब उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा। इन फैसलों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अब पूर्व भारतीय क्रिकेटर और चयनकर्ता संदीप पाटिल ने चयन प्रक्रिया से जुड़े अपने अनुभवों के आधार पर इस तरह के फैसलों की परिस्थितियों पर चर्चा की है।

    संदीप पाटिल भारतीय क्रिकेट के उन पूर्व खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने मैदान पर खेलने के साथ-साथ चयनकर्ता की भूमिका भी निभाई। चयन समिति में रहते हुए उन्हें कई बार ऐसे फैसले लेने पड़े, जिनका सीधा असर स्थापित खिलाड़ियों के करियर पर पड़ता था। भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए प्रदर्शन, फिटनेस, टीम की जरूरत और उपलब्ध विकल्पों जैसे पहलुओं पर विचार किया जाता है। किसी खिलाड़ी का बड़ा नाम या पुराना रिकॉर्ड हमेशा उसकी जगह सुनिश्चित नहीं करता। चयनकर्ताओं के सामने यह चुनौती रहती है कि वे व्यक्तिगत लोकप्रियता के बजाय टीम के हित और मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निर्णय लें।

    सचिन तेंदुलकर का करियर भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित अध्यायों में से एक रहा है। उन्होंने लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में देश का प्रतिनिधित्व किया और कई रिकॉर्ड बनाए। इसके बावजूद उनके करियर में भी ऐसे मौके आए, जब उनके चयन या टीम में भूमिका को लेकर चर्चा हुई। युवराज सिंह ने भारत की कई महत्वपूर्ण जीतों में योगदान दिया और सीमित ओवरों के क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई। वहीं, गौतम गंभीर ने भी भारतीय टीम के लिए अहम पारियां खेलीं। इन खिलाड़ियों के अनुभव बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लंबे समय तक प्रदर्शन करने के बावजूद टीम में जगह बनाए रखना लगातार चुनौतीपूर्ण रहता है।

    टीम चयन के फैसलों में केवल किसी खिलाड़ी का पिछला प्रदर्शन ही निर्णायक नहीं होता। चयनकर्ता यह भी देखते हैं कि टीम को किस तरह के संयोजन की जरूरत है, खिलाड़ी का हालिया प्रदर्शन कैसा है और आगामी मुकाबलों की परिस्थितियों के लिए कौन उपयुक्त होगा। कई बार किसी खिलाड़ी को बाहर रखने का फैसला अस्थायी होता है, जबकि कुछ परिस्थितियों में टीम में बदलाव लंबे समय के लिए भी हो सकता है। ऐसे फैसलों के कारण प्रशंसकों और पूर्व खिलाड़ियों के बीच बहस होना स्वाभाविक है, क्योंकि लोकप्रिय खिलाड़ियों से दर्शकों की भावनाएं जुड़ी रहती हैं।

    संदीप पाटिल के अनुभवों के संदर्भ में चयनकर्ताओं की जिम्मेदारी का एक और पहलू सामने आता है। खिलाड़ियों के साथ निजी संबंध, दोस्ती या व्यक्तिगत समीकरण चयन प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करने चाहिए। चयनकर्ता का दायित्व टीम के लिए उपयुक्त खिलाड़ियों का चुनाव करना है, भले ही किसी फैसले से लोकप्रिय खिलाड़ी या उनके प्रशंसक निराश हों। हालांकि, सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह और गौतम गंभीर को टीम से बाहर किए जाने के अलग-अलग कारण रहे होंगे। इन तीनों के मामलों को एक जैसा मानना उचित नहीं है, क्योंकि उनके करियर, प्रदर्शन और टीम की जरूरतें अलग-अलग समय पर अलग थीं।

    भारतीय क्रिकेट में चयन को लेकर होने वाली चर्चाएं इस बात को रेखांकित करती हैं कि टीम बनाना केवल नामों का चुनाव नहीं, बल्कि परिस्थितियों और रणनीति के बीच संतुलन बनाने की प्रक्रिया है। संदीप पाटिल जैसे पूर्व खिलाड़ियों के अनुभव इस प्रक्रिया को समझने का अवसर देते हैं। किसी खिलाड़ी को टीम से बाहर रखने का फैसला उसके पूरे करियर का मूल्यांकन नहीं होता, बल्कि अक्सर किसी खास समय की जरूरतों और उपलब्ध विकल्पों से जुड़ा होता है। इसलिए पुराने चयन फैसलों को समझने के लिए उस समय की परिस्थितियों और संबंधित खिलाड़ियों के प्रदर्शन को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

  • शतक लगाने के बाद मैदान पर रो पड़े अभिषेक पोरेल, जमानत पर बाहर आने के बाद भावुक हुए बंगाल के विकेटकीपर

    शतक लगाने के बाद मैदान पर रो पड़े अभिषेक पोरेल, जमानत पर बाहर आने के बाद भावुक हुए बंगाल के विकेटकीपर


    नई दिल्ली:
    बंगाल के विकेटकीपर-बल्लेबाज अभिषेक पोरेल ने रणजी ट्रॉफी मुकाबले में शतक लगाने के बाद मैदान पर भावुक प्रतिक्रिया दी। पारी के दौरान उन्होंने अपना शतक पूरा किया तो उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। हाल के दिनों में निजी जीवन में मुश्किल दौर से गुजर रहे पोरेल के लिए यह पारी खास रही। दुष्कर्म के आरोप से जुड़े एक मामले में जमानत मिलने के कुछ दिन बाद उन्होंने क्रिकेट के मैदान पर वापसी की थी। शतक पूरा करने के बाद उनकी भावुकता ने सबका ध्यान खींचा। इस दौरान उन्होंने अपने अनुभवों और बीते दिनों के मानसिक दबाव को लेकर भी बात की।

    पोरेल ने रणजी ट्रॉफी में बंगाल की ओर से खेलते हुए महत्वपूर्ण पारी खेली। घरेलू क्रिकेट में विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में अपनी पहचान बना चुके पोरेल के लिए यह प्रदर्शन ऐसे समय आया, जब वह कानूनी मामले के कारण चर्चा में थे। जमानत पर रिहा होने के बाद मैदान पर उतरना उनके लिए आसान नहीं रहा होगा, लेकिन उन्होंने खेल पर ध्यान केंद्रित करते हुए शतक बनाया। पारी पूरी होने के बाद उनकी आंखों में आंसू दिखाई दिए। यह भावुक क्षण उनके लिए क्रिकेट में वापसी और मुश्किल परिस्थितियों के बीच प्रदर्शन करने के महत्व को दर्शाता है।

    पोरेल से जुड़े मामले में उन पर दुष्कर्म का आरोप लगाया गया है। इस मामले में उन्हें जमानत मिली है, लेकिन जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से मुक्त होना नहीं है। मामले की कानूनी प्रक्रिया अपने अनुसार आगे बढ़ेगी और आरोपों पर अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। ऐसे मामलों में आरोप और दोषसिद्धि के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। पोरेल की ओर से अपनी भावनाओं और हालात को लेकर की गई बातों ने उनके निजी संघर्ष को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, इस मामले से जुड़े आरोपों के संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा, जब तक कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।

    बंगाल की टीम के लिए रणजी ट्रॉफी जैसे घरेलू टूर्नामेंट में खिलाड़ियों का प्रदर्शन अहम होता है। पोरेल ने अपने शतक के जरिए टीम के लिए उपयोगी योगदान दिया। विकेटकीपर-बल्लेबाज के तौर पर उनकी भूमिका केवल विकेट के पीछे जिम्मेदारी निभाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के समय रन बनाना भी उनकी अहम जिम्मेदारी है। इस पारी ने दिखाया कि निजी चुनौतियों के बीच भी उन्होंने मैदान पर अपना योगदान देने की कोशिश की। हालांकि, किसी एक पारी के आधार पर उनके भविष्य या मामले से जुड़े घटनाक्रम के बारे में कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    शतक के बाद पोरेल का भावुक होना उनके लिए इस उपलब्धि के व्यक्तिगत महत्व को दर्शाता है। हालिया परिस्थितियों के बीच मैदान पर लौटकर रन बनाना उनके लिए एक महत्वपूर्ण पल रहा। खेल में खिलाड़ियों को प्रदर्शन के साथ-साथ निजी जीवन की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है। लेकिन कानूनी मामले की गंभीरता को देखते हुए क्रिकेट प्रदर्शन और आरोपों से जुड़ी प्रक्रिया को अलग-अलग समझना जरूरी है। फिलहाल पोरेल की रणजी ट्रॉफी पारी चर्चा में है, जबकि उनके खिलाफ चल रहे मामले का नतीजा कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

  • ऋषभ पंत चोट के कारण न्यूजीलैंड दौरे के शुरुआती दो मैचों से बाहर, युवा विकेटकीपर कुमार कुशाग्र को मिला मौका

    ऋषभ पंत चोट के कारण न्यूजीलैंड दौरे के शुरुआती दो मैचों से बाहर, युवा विकेटकीपर कुमार कुशाग्र को मिला मौका


    नई दिल्ली:
    भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत चोट के कारण न्यूजीलैंड दौरे पर इंडिया ए के शुरुआती दो मैचों से बाहर हो गए हैं। उनकी जगह युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज कुमार कुशाग्र को टीम में शामिल किया गया है। पंत को यह चोट ईरानी कप के दौरान लगी थी, जब वह रेस्ट ऑफ इंडिया की कप्तानी कर रहे थे। उनके बाएं हिस्से में खिंचाव आने के बाद न्यूजीलैंड दौरे के लिए उनकी उपलब्धता फिटनेस पर निर्भर थी। अब वह शुरुआती दो मुकाबलों में नहीं खेल पाएंगे। हालांकि, तीसरे मैच में उनकी वापसी की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है और इस पर आगे उनकी फिटनेस का आकलन करने के बाद निर्णय लिया जाएगा।

    पंत फिलहाल भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की मेडिकल टीम की देखरेख में हैं और उनकी चोट से उबरने की प्रक्रिया जारी है। चयनकर्ताओं ने उनकी जगह कुमार कुशाग्र को पहले दो मैचों के लिए टीम में शामिल करने का फैसला किया है। पंत की अनुपस्थिति में ध्रुव जुरेल इंडिया ए की कप्तानी करेंगे और विकेटकीपर की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। इस बदलाव से टीम की शुरुआती योजना में परिवर्तन हुआ है। न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में होने वाले बहुदिवसीय मुकाबले युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के लिए अपनी क्षमता दिखाने का अवसर हैं। ऐसे में पंत का बाहर होना टीम के लिए अहम बदलाव माना जा रहा है।

    झारखंड के 21 वर्षीय कुमार कुशाग्र ने हाल के घरेलू मुकाबलों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। उन्होंने दलीप ट्रॉफी के फाइनल में ईस्ट जोन की ओर से खेलते हुए साउथ जोन के खिलाफ शतक लगाया था। इसके बाद उन्होंने पुदुचेरी में ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ इंडिया ए के लिए भी शतकीय पारी खेली और नाबाद 46 रन बनाए। लगातार अच्छे प्रदर्शन के कारण उन्हें न्यूजीलैंड दौरे के शुरुआती दो मैचों में मौका मिला है। अब उनके पास इंडिया ए के लिए विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में अपनी उपयोगिता साबित करने का अवसर होगा। यह चयन उनके घरेलू क्रिकेट में किए गए प्रदर्शन के बाद आया है।

    इंडिया ए को न्यूजीलैंड ए के खिलाफ तीन बहुदिवसीय मुकाबले खेलने हैं। पहला मैच 24 से 28 अक्टूबर तक लिंकन में आयोजित होगा। दूसरा मुकाबला 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक क्राइस्टचर्च में खेला जाएगा, जबकि तीसरा और अंतिम मैच 7 से 10 नवंबर तक लिंकन में होगा। इन मैचों के जरिए खिलाड़ियों को न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में लाल गेंद से क्रिकेट खेलने का अनुभव मिलेगा। टीम में यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, देवदत्त पडिक्कल, साई सुदर्शन और वॉशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं। हालांकि, कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों की उपलब्धता पर सीमित ओवरों की अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के कार्यक्रम का असर पड़ सकता है।

    पंत की चोट को लेकर एक और महत्वपूर्ण पहलू भारतीय सीनियर टीम के आगामी न्यूजीलैंड दौरे से जुड़ा है। भारत को 19 नवंबर से न्यूजीलैंड के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट श्रृंखला खेलनी है, जो 1 दिसंबर तक चलेगी। पंत की फिटनेस को लेकर फिलहाल इस श्रृंखला के लिए कोई अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनकी उपलब्धता का निर्णय चोट से उबरने की प्रगति और मेडिकल टीम के आकलन के आधार पर लिया जाएगा। अभी तक उनके तीसरे इंडिया ए मैच में खेलने पर भी फैसला बाकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में उनकी फिटनेस पर नजर रहेगी, जबकि कुमार कुशाग्र को शुरुआती दो मैचों में मिले अवसर का लाभ उठाने की चुनौती होगी।

  • अभिषेक शर्मा के तूफान से पस्त हुआ वेस्टइंडीज, हार के बाद कप्तान शाई होप का बड़ा बयान, भारतीय गेंदबाजों की तारीफ में कही ये बात

    अभिषेक शर्मा के तूफान से पस्त हुआ वेस्टइंडीज, हार के बाद कप्तान शाई होप का बड़ा बयान, भारतीय गेंदबाजों की तारीफ में कही ये बात


    नई दिल्ली । भारत के खिलाफ तीसरे टी20 इंटरनेशनल मुकाबले में 14 रन से मिली हार के बाद वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने अपनी टीम की गेंदबाजी को लेकर अहम बात कही है। उन्होंने माना कि गेंदबाज कुछ मौकों पर बेहतर प्रदर्शन कर सकते थे और भारतीय बल्लेबाजों को कुछ अतिरिक्त बाउंड्री देने से बचना चाहिए था। रविवार को खेले गए मुकाबले में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 223 रन बनाए। जवाब में वेस्टइंडीज की टीम सात विकेट खोकर 209 रन तक ही पहुंच सकी। इस जीत के साथ भारत ने सीरीज में 2-1 की बढ़त बना ली है।
    मैच के बाद शाई होप ने कहा कि क्रिकेट में जीत और हार का अंतर कई बार बेहद कम होता है। ऐसे मुकाबलों में कुछ अहम पल पूरे परिणाम को बदल सकते हैं। उनके मुताबिक वेस्टइंडीज की टीम ने मैच में वापसी करने की कोशिश की और कुछ विकेट लेकर मुकाबले पर पकड़ भी बनाई। हालांकि गेंदबाजी के दौरान कुछ मौकों पर टीम बेहतर कर सकती थी। होप ने माना कि भारतीय बल्लेबाजों को बाउंड्री लगाने के अवसर मिले और इसका असर अंतिम परिणाम पर पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआती साझेदारी काफी खतरनाक साबित हो सकती थी लेकिन रोस्टन चेज की मदद से टीम को जरूरी विकेट मिले।
    वेस्टइंडीज के कप्तान ने टीम की सलामी जोड़ी के प्रदर्शन पर भी बात की। सीरीज के शुरुआती तीनों मुकाबलों में ओपनिंग साझेदारी टीम को मजबूत शुरुआत देने में नाकाम रही है। होप ने कहा कि किसी भी टीम के लिए अच्छी शुरुआत बेहद जरूरी होती है क्योंकि इससे आगे आने वाले बल्लेबाजों को पारी संभालने और बड़े लक्ष्य का पीछा करने में मदद मिलती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खराब शुरुआत के लिए केवल एक या दो खिलाड़ियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। टीम को सामूहिक रूप से बेहतर प्रदर्शन करने की जरूरत है।
    होप ने मुकाबले में ओस की स्थिति और गेंद की स्विंग का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक टीम को उम्मीद थी कि परिस्थितियां अलग होंगी लेकिन पारी के अंतिम हिस्से में गेंद अपेक्षाकृत ज्यादा स्विंग करती दिखाई दी। उन्होंने भारतीय गेंदबाजों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने अच्छी लाइन और लेंथ के साथ गेंदबाजी की और यॉर्कर का प्रभावी इस्तेमाल किया। होप के अनुसार भारतीय गेंदबाजों ने दबाव के क्षणों में सटीक गेंदें डालकर अपनी क्षमता दिखाई और उन्हें इसका श्रेय मिलना चाहिए।
    इस मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। अभिषेक शर्मा ने केवल 30 गेंदों पर 69 रन बनाए। उनकी पारी में छह चौके और पांच छक्के शामिल रहे। ईशान किशन ने 18 गेंदों पर 37 रन बनाकर तेजी से रन जोड़े। तिलक वर्मा ने भी 16 गेंदों पर 28 रन की उपयोगी पारी खेली। इन योगदानों की मदद से भारतीय टीम 223 रन के बड़े स्कोर तक पहुंची और वेस्टइंडीज के सामने 224 रन का लक्ष्य रखा।
    लक्ष्य का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने मुकाबले में बने रहने की कोशिश की। कामिल पूरन ने 27 गेंदों पर 42 रन और शिमरोन हेटमायर ने 26 गेंदों पर 43 रन बनाए। रदरफोर्ड ने 32 रन का योगदान दिया जबकि शमर स्प्रिंगर ने केवल 11 गेंदों पर नाबाद 35 रन बनाकर आखिरी ओवरों में तेजी से रन जुटाए। इसके बावजूद टीम लक्ष्य से 14 रन दूर रह गई। अब वेस्टइंडीज के सामने अगले मुकाबले में वापसी करने की चुनौती होगी जबकि भारतीय टीम सीरीज में अपनी बढ़त मजबूत करने के इरादे से उतरेगी।