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  • अपने होम स्टेट में घर बसाना चाहते हैं ऋषभ पंत, तीन साल से जमीन की तलाश के बाद सीएम से लगाई गुहार

    अपने होम स्टेट में घर बसाना चाहते हैं ऋषभ पंत, तीन साल से जमीन की तलाश के बाद सीएम से लगाई गुहार

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत इन दिनों श्रीलंका दौरे पर हैं, लेकिन इस बीच उनका एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आ गया है। पंत ने उत्तराखंड में जमीन नहीं मिलने को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मदद की अपील की है। उन्होंने कहा कि वह दिल्ली से अपने गृह राज्य उत्तराखंड में वापस आकर बसना चाहते हैं और इसके लिए लंबे समय से जमीन तलाश रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक उपयुक्त जमीन नहीं मिल सकी है।

    ऋषभ पंत ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संबोधित करते हुए कहा कि वह लंबे समय से उत्तराखंड में जमीन लेने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह दिल्ली से उत्तराखंड शिफ्ट होना चाहते हैं और अपने परिवार के साथ अपने राज्य में रहना चाहते हैं। पंत ने बड़ी और अच्छी जमीन की जरूरत बताई, जहां वह अपना घर बना सकें और स्थायी रूप से रह सकें।

    पंत ने अपनी पोस्ट में उत्तराखंड के प्रति अपने लगाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह अपने राज्य से बेहद प्यार करते हैं और पहाड़ के लोगों के बीच रहना चाहते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले को देखने और जमीन उपलब्ध कराने में मदद करने की अपील की। पंत के मुताबिक, इस प्रयास को करीब तीन साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें जमीन नहीं मिल पाई है।

    क्रिकेटर ने यह भी कहा कि उन्हें उत्तराखंड को प्रमोट करने के उद्देश्य से कुछ अन्य जमीन भी मिलनी थी, लेकिन वह प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद पंत ने एक और पोस्ट करते हुए कहा कि अपने राज्य के लिए देश का उच्च स्तर पर प्रतिनिधित्व करने के बदले अगर राज्य की ओर से घर बनाने के लिए जमीन मिल जाए तो यह उनके लिए खुशी की बात होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर वह सरकार से जमीन खरीदने के लिए तैयार हैं।

    ऋषभ पंत की अपील पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिक्रिया देते हुए मदद का भरोसा दिया। मुख्यमंत्री ने पंत को उत्तराखंड का गौरव बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने खेल और उपलब्धियों से देश-दुनिया में देवभूमि का नाम रोशन किया है। उन्होंने पंत की मातृभूमि के प्रति भावना और उत्तराखंड लौटकर योगदान देने की इच्छा की सराहना की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पंत द्वारा उठाए गए मामले के संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अधिकारी जल्द ही ऋषभ पंत से संपर्क करेंगे और नियमानुसार हरसंभव सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इससे पंत की जमीन से जुड़ी समस्या के समाधान की उम्मीद बढ़ी है।

    हालांकि, ऋषभ पंत उत्तराखंड में पूरी तरह जमीनविहीन नहीं हैं। रुड़की में उनके परिवार का करीब दो से ढाई हजार वर्ग गज में फैला पैतृक मकान है। इसी परिसर में उनके पिता स्वर्गीय राजेंद्र पंत पहले न्यू मॉडर्न पब्लिक स्कूल भी चलाते थे। परिवार का यह आवास आज भी मौजूद है और वहां ऋषभ पंत की मां रहती हैं। मकान पर उनके पिता के साथ ऋषभ पंत के नाम की नेम प्लेट भी लगी हुई है।

    पंत का पैतृक संबंध पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट विकासखंड के गांव पाली से भी है। गांव में उनके परिवार के सदस्य और उनके दो चाचा जगदीश चंद्र पंत और हेम पंत रहते हैं। ऐसे में उत्तराखंड में जमीन और घर को लेकर पंत की इच्छा उनके पुराने पारिवारिक जुड़ाव से भी जुड़ी हुई है। अब मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी।

  • श्रीलंका बोर्ड इलेवन के खिलाफ वॉर्म-अप मैच में भारतीय गेंदबाजों की खुली पोल, पहले दिन लुटाए 363 रन।

    श्रीलंका बोर्ड इलेवन के खिलाफ वॉर्म-अप मैच में भारतीय गेंदबाजों की खुली पोल, पहले दिन लुटाए 363 रन।

    नई दिल्ली ।आगामी टेस्ट श्रृंखला की तैयारियों के सिलसिले में कोलंबो में खेले जा रहे तीन दिवसीय अभ्यास मैच के पहले ही दिन भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की कमजोरियां खुलकर सामने आ गईं। श्रीलंका क्रिकेट इलेवन के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की ढीली गेंदों का पूरा फायदा उठाते हुए दिन का खेल खत्म होने तक 8 विकेट के नुकसान पर 363 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। इस मुकाबले में नियमित कप्तान की अनुपस्थिति के कारण टीम की कमान संभाल रहे अनुभवी बल्लेबाज के नेतृत्व में भारतीय गेंदबाजों को शुरुआती सफलता हासिल करने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।

    मेजबान टीम के सलामी बल्लेबाजों ने भारतीय तेज गेंदबाजों और स्पिनरों पर दबाव बनाते हुए पहले विकेट के लिए शतकीय साझेदारी निभाई। निशान मदुष्का और रविंदु रसंथा के अर्धशतकों ने श्रीलंका इलेवन को मजबूत आधार प्रदान किया। इसके बाद मध्यक्रम में सोनल दिनुशा ने भी जिम्मेदारी से बल्लेबाजी करते हुए अर्धशतक जड़ा। भारतीय मुख्य गेंदबाजों की लाइन-लेंथ पूरी तरह से बिखरी हुई नजर आई, जिसके चलते श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने आसानी से चार रन प्रति ओवर से भी अधिक की औसत से रन बनाए।

    हालांकि, खेल के दूसरे और तीसरे सत्र में स्पिन गेंदबाजों ने वापसी का प्रयास किया। रवींद्र जडेजा, मानव सुथार और कुलदीप यादव ने आपस में विकेट बांटकर विपक्षी टीम की रन गति को रोकने की कोशिश की। इसके बावजूद, आगामी टेस्ट मैचों की तैयारियों के लिहाज से लगभग सभी प्रमुख गेंदबाज काफी महंगे साबित हुए। प्रसिद्ध कृष्णा, मोहम्मद सिराज और सारांश जैन जैसे गेंदबाज विकेट हासिल करने में नाकाम रहे और उन्होंने प्रति ओवर चार से अधिक रन लुटाए।

    उंगली की चोट के कारण टीम के नियमित कप्तान शुभमन गिल पहले दिन मैदान पर नहीं उतर सके, जिससे टीम प्रबंधन की चिंताएं थोड़ी और बढ़ गई हैं। टेस्ट श्रृंखला शुरू होने से पहले यह अभ्यास मैच खिलाड़ियों की फॉर्म और लय परखने का अहम अवसर माना जा रहा था। गेंदबाजी विभाग के इस प्रदर्शन ने टीम प्रबंधन को अपनी रणनीतियों पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है ताकि मुख्य मुकाबलों में इस तरह की गलतियों से बचा जा सके।

  • क्रिकेट इतिहास का एक और स्वर्णिम अध्याय पूरा, वनडे फॉर्मेट ने हासिल किया 5000 मुकाबलों का ऐतिहासिक मुकाम।

    क्रिकेट इतिहास का एक और स्वर्णिम अध्याय पूरा, वनडे फॉर्मेट ने हासिल किया 5000 मुकाबलों का ऐतिहासिक मुकाम।


    नई दिल्ली । 
    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सबसे लोकप्रिय प्रारूपों में से एक वनडे क्रिकेट ने हाल ही में 5000 मुकाबलों का एक ऐतिहासिक और गौरवशाली पड़ाव पार कर लिया है। स्कॉटलैंड और कनाडा के बीच खेला गया रोमांचक मैच इस फॉर्मेट के इतिहास का 5000वां मुकाबला बना, जिसमें स्कॉटलैंड ने 9 रन से जीत दर्ज की। टेस्ट क्रिकेट के बाद अस्तित्व में आए वनडे फॉर्मेट ने बीते दशकों में दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया है। हालांकि, मौजूदा दौर में टी20 फॉर्मेट के तेजी से बढ़ते प्रभाव और व्यस्त शेड्यूल के बीच वनडे के भविष्य और प्रासंगिकता को लेकर भी खेल जगत में नए सिरे से बहस छिड़ गई है।

    सांख्यिकीय आंकड़ों के लिहाज से देखें तो तीनों प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रारूपों में अब तक सबसे अधिक मुकाबले वनडे क्रिकेट में ही खेले गए हैं। टेस्ट क्रिकेट में जहां 2600 से अधिक मैच हुए हैं, वहीं टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की संख्या भी 4000 के पार पहुंच चुकी है। जिस गति से टी20 मैचों का आयोजन हो रहा है, उसे देखते हुए खेल विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ वर्षों में टी20 सबसे ज्यादा खेले जाने वाला फॉर्मेट बन सकता है। इसके बावजूद वनडे क्रिकेट का इतिहास कई ऐसे व्यक्तिगत और टीम रिकॉर्ड्स से समृद्ध है, जिन्हें तोड़ना आज भी किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद कठिन चुनौती है।

    इस 5000वें ऐतिहासिक मैच के अवसर पर वनडे क्रिकेट के सबसे यादगार और लंबे समय तक कायम रहने वाले रिकॉर्ड्स को याद किया गया। इनमें सबसे शीर्ष पर भारतीय बल्लेबाजी के आधार स्तंभ रहे सचिन तेंदुलकर के 18426 रनों का महारिकॉर्ड है। सचिन ने वर्ष 2012 में अपना अंतिम वनडे मुकाबला खेला था, लेकिन उनके संन्यास के इतने वर्षों बाद भी दुनिया का कोई भी बल्लेबाज उनके इस विशाल स्कोर तक नहीं पहुंच पाया है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि सचिन का प्रभुत्व इस फॉर्मेट पर किस स्तर का रहा था।

    सचिन के इस सबसे बड़े रिकॉर्ड के सबसे करीब वर्तमान समय के महान बल्लेबाज विराट कोहली हैं, जिनके नाम 14900 से अधिक वनडे रन दर्ज हैं। हालांकि, सचिन और कोहली के बीच अभी भी 3400 से अधिक रनों का बड़ा फासला है। कोहली भले ही वनडे प्रारूप पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर रहे हों, लेकिन मैचों की घटती संख्या और करियर के इस पड़ाव को देखते हुए सचिन का रिकॉर्ड तोड़ पाना आसान नहीं होगा। यही कारण है कि क्रिकेट विशेषज्ञ 18426 रनों के इस आंकड़े को खेल इतिहास के सबसे सुरक्षित रिकॉर्ड्स में से एक मानते हैं।

    इसके अलावा वनडे इतिहास में श्रीलंका का सबसे बड़ा टीम स्कोर, विव रिचर्ड्स की ऐतिहासिक पारियां, चमिंडा वास और मुथैया मुरलीधरन की घातक गेंदबाजी तथा सनथ जयसूर्या और शाहिद अफरीदी के सबसे तेज तूफानी शतक-अर्धशतक जैसे रिकॉर्ड्स ने भी दशकों तक प्रशंसकों को रोमांचित किया है। सचिन तेंदुलकर के नाम दर्ज सबसे ज्यादा शतकों और वकार यूनिस के सबसे ज्यादा पांच विकेट हॉल का रिकॉर्ड भी इस फॉर्मेट की शान रहा है। 5000 मैचों का यह सफर साबित करता है कि वनडे क्रिकेट का रोमांच और इसके ऐतिहासिक आंकड़े हमेशा खास बने रहेंगे।

  • भारत के खिलाफ श्रीलंका इलेवन का बड़ा स्कोर, 363 रन पर घोषित की पारी; अर्धशतकों से बढ़ा दबाव

    भारत के खिलाफ श्रीलंका इलेवन का बड़ा स्कोर, 363 रन पर घोषित की पारी; अर्धशतकों से बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका क्रिकेट इलेवन के बीच नोंडेस्क्रिप्ट्स क्रिकेट क्लब मैदान पर खेला जा रहा तीन दिवसीय वॉर्मअप मुकाबला रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। श्रीलंका क्रिकेट इलेवन ने पहली पारी में 8 विकेट के नुकसान पर 363 रन बनाकर पारी घोषित कर दी। दूसरे दिन श्रीलंकाई टीम बल्लेबाजी के लिए मैदान पर नहीं उतरी और पहले दिन के स्कोर को ही अपनी पारी का अंतिम स्कोर मानते हुए घोषणा कर दी। मुकाबले के पहले दिन श्रीलंका क्रिकेट इलेवन के बल्लेबाजों का दबदबा देखने को मिला और उन्होंने भारतीय गेंदबाजों के सामने मजबूती से बल्लेबाजी की।

    श्रीलंकाई पारी की शुरुआत निशान मदुश्का और रविंदु रसंता ने शानदार अंदाज में की। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 110 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की और टीम को मजबूत आधार दिया। निशान मदुश्का ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 65 गेंदों में 66 रन बनाए। उनकी पारी में 11 चौके और एक छक्का शामिल रहा। दूसरी ओर रविंदु रसंता ने धैर्य के साथ बल्लेबाजी करते हुए 143 गेंदों में 71 रन की शानदार पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी के दौरान 6 चौके और एक छक्का लगाया।

    सलामी जोड़ी के बाद भी श्रीलंका क्रिकेट इलेवन के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों को लगातार परेशान किया। पसिंदु सोरियाबंदरा ने 35 रन बनाए जबकि पवन रत्नायके ने 47 गेंदों में 39 रन की उपयोगी पारी खेली। हालांकि वह अपनी पारी को बड़ी पारी में बदलने में कामयाब नहीं हो सके और गुरनूर बरार का शिकार बने। अहान विक्रमसिंघे ने भी 31 रनों का योगदान दिया।

    टीम के कप्तान सोनल दिनुशा ने जिम्मेदारी संभालते हुए अर्धशतक लगाया। उन्होंने 71 गेंदों में 52 रन बनाए और टीम के स्कोर को मजबूत स्थिति में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद रमेश मेंडिस ने 32 रन बनाए। केशरा नुवंता 9 रन और दिलुम सुदीरा एक रन बनाकर नाबाद रहे। श्रीलंका क्रिकेट इलेवन ने 8 विकेट खोकर 363 रन बनाए और इसके बाद पारी घोषित करने का फैसला किया।

    भारतीय गेंदबाजी की बात करें तो तेज गेंदबाजों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा पहले दिन श्रीलंका के किसी भी बल्लेबाज को आउट नहीं कर सके। गुरनूर बरार को सिर्फ एक विकेट मिला। भारतीय स्पिनरों ने हालांकि कुछ हद तक दबाव बनाने की कोशिश की। कुलदीप यादव ने 76 रन खर्च कर 2 विकेट हासिल किए जबकि मानव सुथार ने 33 रन देकर 2 विकेट चटकाए। रवींद्र जडेजा ने भी 64 रन देकर 2 बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा।

    वॉर्मअप मैच के पहले दिन भारतीय टीम अपने नियमित कप्तान शुभमन गिल के बिना मैदान पर उतरी। गिल की उंगली में चोट है और एहतियात के तौर पर वह फील्डिंग के लिए मैदान पर नहीं आए। उनकी गैरमौजूदगी में केएल राहुल ने टीम की कप्तानी संभाली। अब श्रीलंका क्रिकेट इलेवन की पारी घोषित होने के बाद भारतीय बल्लेबाजों के सामने बड़ी चुनौती है। भारतीय टीम की कोशिश होगी कि वह मजबूत बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंकाई टीम के 363 रनों के स्कोर का जवाब दे और मैच में अपनी स्थिति मजबूत करे।

  • फ्लिंटॉफ ने छोड़ा इंग्लैंड लायंस का हेड कोच पद, अब BBL में नई जिम्मेदारी संभालने की तैयारी

    फ्लिंटॉफ ने छोड़ा इंग्लैंड लायंस का हेड कोच पद, अब BBL में नई जिम्मेदारी संभालने की तैयारी


    नई दिल्ली। इंग्लैंड क्रिकेट के दिग्गज ऑलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने इंग्लैंड लायंस के हेड कोच पद से इस्तीफा दे दिया है। सितंबर 2024 में इंग्लैंड लायंस की जिम्मेदारी संभालने वाले फ्लिंटॉफ ने करीब दो साल तक युवा खिलाड़ियों के साथ काम करने के बाद अब अपने कोचिंग करियर में नई चुनौती स्वीकार करने का फैसला किया है। फ्लिंटॉफ इस साल के अंत में ऑस्ट्रेलिया की मशहूर बिग बैश लीग में सिडनी थंडर के साथ जुड़ेंगे। यह उनकी पहली फुल टाइम कोचिंग भूमिका होगी और उनके करियर के लिहाज से इसे एक अहम कदम माना जा रहा है।

    इंग्लैंड लायंस के साथ अपने कार्यकाल को लेकर फ्लिंटॉफ ने कहा कि उन्होंने इस पद से हटने का फैसला काफी सोच विचार के बाद लिया है। उन्होंने इंग्लैंड की अगली पीढ़ी के क्रिकेटरों के साथ काम करने को बेहद खास अनुभव बताया। फ्लिंटॉफ के मुताबिक युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ते हुए देखना उनके लिए गर्व की बात रही है। उन्होंने लायंस के कोचिंग स्टाफ और सपोर्ट टीम का भी आभार जताया और उनके जुनून तथा लगातार मेहनत की सराहना की।

    फ्लिंटॉफ ने खास तौर पर एड बार्नी और रॉब का जिक्र करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस भूमिका ने उन्हें न केवल युवा क्रिकेटरों के साथ काम करने का मौका दिया बल्कि एक कोच के तौर पर खुद को आगे बढ़ाने का अवसर भी दिया। अब वह सिडनी थंडर के साथ काम शुरू करने को लेकर उत्साहित हैं और यह देखना चाहते हैं कि कोचिंग का उनका सफर आगे किस दिशा में जाता है।

    फ्लिंटॉफ के इंग्लैंड लायंस से अलग होने की घोषणा सिडनी थंडर द्वारा उन्हें आगामी बिग बैश लीग सीजन के लिए हेड कोच नियुक्त किए जाने के करीब दो महीने बाद हुई है। इंग्लैंड के लिए लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले फ्लिंटॉफ अब ऑस्ट्रेलिया की घरेलू टी20 प्रतियोगिता में अपनी कोचिंग क्षमता का इस्तेमाल करते नजर आएंगे। उनके अनुभव और आक्रामक क्रिकेट की समझ को देखते हुए सिडनी थंडर के साथ उनकी नियुक्ति को अहम माना जा रहा है।

    इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड के मेंस परफॉर्मेंस डायरेक्टर एड बार्नी ने भी फ्लिंटॉफ के कार्यकाल की जमकर तारीफ की है। बार्नी के अनुसार फ्लिंटॉफ ने इंग्लैंड लायंस के माहौल को एक ऐसे मजबूत कार्यक्रम में बदलने में अहम भूमिका निभाई जिसका युवा खिलाड़ियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। उन्होंने ऐसा वातावरण तैयार किया जहां खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन करने के साथ अपनी क्षमता को भी लगातार विकसित कर सकें।

    बार्नी ने यह भी कहा कि फ्लिंटॉफ के साथ काम करते हुए युवा और अनुभवी दोनों तरह के कोचों को आगे बढ़ने का अवसर मिला। उन्होंने टीम के कोचिंग ग्रुप में मौजूद विशेषज्ञता का बेहतर इस्तेमाल किया और इंग्लैंड की अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ईसीबी ने फ्लिंटॉफ को उनके कोचिंग करियर के अगले चरण के लिए शुभकामनाएं दी हैं और भविष्य में इंग्लिश क्रिकेट में उनकी वापसी की उम्मीद भी जताई है।

    फ्लिंटॉफ के जाने के बाद ईसीबी ने आगामी चार दिवसीय मुकाबले के लिए अंतरिम व्यवस्था भी कर दी है। 12 अगस्त से बेकनहैम में प्रोफेशनल काउंटी क्लब सिलेक्ट इलेवन और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबले में माइक यार्डी इंग्लैंड लायंस की ओर से कोचिंग जिम्मेदारी संभालेंगे। फ्लिंटॉफ की विदाई के साथ इंग्लैंड लायंस में एक दौर का अंत हुआ है लेकिन उनके लिए कोचिंग करियर में एक नई और रोमांचक शुरुआत होने जा रही है।

  • गिल फिट नहीं हुए तो किसे मिलेगा नंबर-4 का मौका? इन 3 खिलाड़ियों पर टिकी टीम इंडिया की नजर

    गिल फिट नहीं हुए तो किसे मिलेगा नंबर-4 का मौका? इन 3 खिलाड़ियों पर टिकी टीम इंडिया की नजर


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले टीम इंडिया के सामने शुभमन गिल की चोट ने नई चिंता खड़ी कर दी है। गिल भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान होने के साथ बल्लेबाजी क्रम में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में अगर वह 15 अगस्त से शुरू होने वाले पहले टेस्ट तक पूरी तरह फिट नहीं हो पाते हैं तो भारतीय टीम को न सिर्फ कप्तानी बल्कि नंबर चार की बल्लेबाजी को लेकर भी बड़ा फैसला लेना पड़ सकता है।

    शुभमन गिल को प्रैक्टिस के दौरान दाहिने हाथ की रिंग फिंगर में चोट लगी है। इसी वजह से वह इंडिया और श्रीलंका इलेवन के बीच खेले जा रहे अभ्यास मुकाबले के पहले दिन मैदान पर नहीं उतरे। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की मेडिकल टीम उनकी चोट पर लगातार नजर रख रही है। फिलहाल उनकी चोट कितनी गंभीर है और वह अभ्यास मैच में आगे हिस्सा लेंगे या नहीं इसे लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। हालांकि अगर वह पहले टेस्ट से पहले फिट हो जाते हैं तो टीम इंडिया के लिए राहत की खबर होगी लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो नंबर चार पर उनकी जगह भरना आसान नहीं होगा।

    ऐसी स्थिति में रवींद्र जडेजा सबसे अनुभवी विकल्पों में से एक हो सकते हैं। जडेजा भले ही शुद्ध रूप से नंबर चार के बल्लेबाज नहीं हैं लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनका अनुभव और बल्लेबाजी क्षमता उन्हें इस भूमिका के लिए मजबूत दावेदार बनाती है। खासकर स्पिन के खिलाफ जडेजा की बल्लेबाजी टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। वह पहले भी ऊपरी क्रम में बल्लेबाजी कर चुके हैं और एक टेस्ट के लिए उन्हें नंबर चार पर भेजना टीम के लिए व्यावहारिक विकल्प हो सकता है। इसके अलावा उनकी मौजूदगी टीम को गेंदबाजी में भी अतिरिक्त विकल्प देती है।

    दूसरा नाम ध्रुव जुरेल का है। विकेटकीपर बल्लेबाज जुरेल ने अब तक टेस्ट क्रिकेट में मुश्किल परिस्थितियों में अपनी बल्लेबाजी क्षमता दिखाई है। उन्होंने नंबर चार से लेकर नंबर छह तक बल्लेबाजी की है और उनके टेस्ट आंकड़े बताते हैं कि वह केवल बैकअप विकेटकीपर नहीं बल्कि एक उपयोगी बल्लेबाज भी हैं। अगर टीम प्रबंधन ऋषभ पंत के साथ एक अतिरिक्त बल्लेबाज खिलाने का फैसला करता है तो जुरेल को नंबर चार पर मौका दिया जा सकता है। गिल की गैरमौजूदगी उनके लिए खुद को साबित करने का बड़ा अवसर भी बन सकती है।

    तीसरा और शायद सबसे स्वाभाविक विकल्प देवदत्त पडिक्कल हो सकते हैं। पडिक्कल विशेषज्ञ बल्लेबाज के तौर पर टीम के साथ हैं और नंबर चार पर बल्लेबाजी का अनुभव रखते हैं। घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन करने वाले पडिक्कल तकनीकी रूप से मजबूत बल्लेबाज माने जाते हैं। अगर टीम प्रबंधन सीधे गिल की जगह विशेषज्ञ बल्लेबाज उतारना चाहता है तो पडिक्कल को मौका मिल सकता है। हालांकि इससे भारतीय बल्लेबाजी क्रम में बाएं हाथ के बल्लेबाजों की संख्या बढ़ जाएगी लेकिन एक टेस्ट के लिए यह बड़ी समस्या नहीं मानी जाएगी।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल शुभमन गिल की फिटनेस को लेकर है। बीसीसीआई की मेडिकल टीम की रिपोर्ट के बाद ही तस्वीर साफ होगी कि वह श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट में मैदान पर उतर पाएंगे या नहीं। अगर गिल फिट नहीं होते हैं तो टीम इंडिया के पास जडेजा का अनुभव जुरेल की युवा क्षमता और पडिक्कल की विशेषज्ञ बल्लेबाजी के रूप में तीन अलग-अलग विकल्प मौजूद हैं। अब फैसला टीम मैनेजमेंट को करना होगा कि वह अनुभव को प्राथमिकता देता है युवा खिलाड़ी पर भरोसा करता है या विशेषज्ञ बल्लेबाज को नंबर चार की जिम्मेदारी सौंपता है।

  • देर रात ऋषभ पंत ने CM पुष्कर धामी को किया मैसेज, बोले- ‘भटक रहा हूं…’ रखी बड़ी डिमांड

    देर रात ऋषभ पंत ने CM पुष्कर धामी को किया मैसेज, बोले- ‘भटक रहा हूं…’ रखी बड़ी डिमांड


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत इन दिनों श्रीलंका दौरे पर हैं लेकिन इसी बीच उनका एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा का विषय बन गया है। पंत ने देर रात उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को टैग करते हुए अपने लिए जमीन खरीदने में मदद की अपील की। क्रिकेटर ने बताया कि वह लंबे समय से उत्तराखंड में अपना घर बनाने और दिल्ली से अपना बेस अपने गृह राज्य में शिफ्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि जमीन की तलाश में उन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पंत के मुताबिक वह करीब तीन साल से जमीन का इंतजार कर रहे हैं और अब उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में मदद करने का अनुरोध किया है।

    ऋषभ पंत ने शुक्रवार और शनिवार की दरम्यानी रात करीब 12 बजकर 46 मिनट पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को टैग करते हुए पोस्ट किया। उन्होंने अपने संदेश में उत्तराखंड के प्रति अपने लगाव का जिक्र किया और कहा कि वह अपने राज्य में वापस लौटना चाहते हैं। पंत ने बताया कि वह उत्तराखंड में ऐसी जगह तलाश रहे हैं जहां सुविधाओं के साथ अपना घर बनाया जा सके और अपना बेस दिल्ली से उत्तराखंड शिफ्ट किया जा सके। लेकिन जमीन खरीदने की प्रक्रिया उनके लिए आसान नहीं रही है।

    पंत ने मुख्यमंत्री से जमीन खरीदने की प्रक्रिया को स्पष्ट कराने और इसमें मदद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह उत्तराखंड से जुड़े हुए हैं और अपने पहाड़ी लोगों के बीच वापस लौटना चाहते हैं। क्रिकेटर ने यह भी इच्छा जताई कि वह अपने राज्य के विकास और निर्माण में योगदान देना चाहते हैं। इसी वजह से वह उत्तराखंड में स्थायी रूप से अपना घर बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।

    ऋषभ पंत ने अपनी अपील में जमीन को लेकर एक विकल्प भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार उन्हें जमीन उपलब्ध कराने की अनुमति देती है तो वह उसे निर्धारित सरकारी दर पर खरीदने के लिए तैयार हैं। पंत के लिए यह केवल जमीन खरीदने का मामला नहीं है बल्कि उत्तराखंड में अपना पहला घर बनाने से जुड़ा सपना है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले पर गंभीरता से ध्यान देने और उन्हें सही प्रक्रिया बताने की अपील की।

    पंत का उत्तराखंड से पुराना और गहरा जुड़ाव रहा है। उनका परिवार राज्य से जुड़ा हुआ है और वह कई मौकों पर उत्तराखंड के प्रति अपना लगाव जाहिर कर चुके हैं। अब उन्होंने सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री से मदद मांगकर यह साफ कर दिया है कि वह अपने गृह राज्य में वापस लौटकर यहां अपना स्थायी ठिकाना बनाना चाहते हैं।

    पंत की अपील पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने क्रिकेटर को उत्तराखंड का गौरव बताते हुए कहा कि पंत ने अपने शानदार खेल और उपलब्धियों से देश और दुनिया में देवभूमि का नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री ने उनकी मातृभूमि के प्रति प्रेम और उत्तराखंड लौटकर योगदान देने की भावना की सराहना की और जरूरी सहयोग का भरोसा दिया।

    ऋषभ पंत इस समय भारतीय टेस्ट टीम के साथ श्रीलंका दौरे पर हैं और टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया के अहम खिलाड़ियों में शामिल हैं। अब उनकी जमीन से जुड़ी अपील के बाद निगाहें उत्तराखंड सरकार की अगली कार्रवाई पर हैं। अगर सरकारी स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो पंत का अपने पहाड़ में पहला घर बनाने का सपना जल्द पूरा हो सकता है।

  • WTC फाइनल की रेस में भारत की अग्निपरीक्षा, अब हर मैच जीतना जरूरी; एक गलती बिगाड़ देगी पूरा गणित

    WTC फाइनल की रेस में भारत की अग्निपरीक्षा, अब हर मैच जीतना जरूरी; एक गलती बिगाड़ देगी पूरा गणित


    नई दिल्ली। वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप 2025-27 में भारतीय क्रिकेट टीम की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। शुरुआती मुकाबलों के बाद टीम इंडिया अंक प्रतिशत के मामले में पांचवें स्थान पर पहुंच गई है और अब उसके सामने फाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए बेहद कठिन चुनौती है। भारत ने अब तक 9 टेस्ट मैच खेले हैं जिसमें उसे 4 मुकाबलों में जीत मिली है और उसका पॉइंट्स परसेंटेज यानी पीसीटी 48.15 है। मौजूदा स्थिति में भारत बांग्लादेश से भी पीछे है। ऐसे में अब टीम इंडिया के लिए WTC का हर मुकाबला लगभग करो या मरो जैसा हो गया है।

    भारतीय टीम के पास इस चक्र में अभी 9 टेस्ट मैच बाकी हैं। अगर टीम अपने सभी बचे हुए मुकाबले जीतने में सफल रहती है तो उसका पीसीटी करीब 74.07 तक पहुंच सकता है। यह आंकड़ा उसे फाइनल की दौड़ में बेहद मजबूत स्थिति में पहुंचा सकता है। लेकिन समस्या यह है कि आने वाले सभी मुकाबले आसान नहीं होने वाले हैं। भारत को पहले श्रीलंका का दौरा करना है जहां दो टेस्ट मैच खेले जाएंगे। श्रीलंका की परिस्थितियों में स्पिन गेंदबाजी हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है और गॉल की पिच पर भारतीय बल्लेबाजों की परीक्षा होना तय माना जा रहा है।

    श्रीलंका के बाद भारतीय टीम न्यूजीलैंड का दौरा करेगी। वहां उसे दो टेस्ट मैच खेलने हैं। न्यूजीलैंड की परिस्थितियां भी भारतीय टीम के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। तेज गेंदबाजी के अनुकूल परिस्थितियों में भारतीय बल्लेबाजों को नई गेंद का सामना करना होगा। इसके बाद भारत में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जाएगी। ऑस्ट्रेलिया मौजूदा WTC चक्र में मजबूत टीमों में शामिल है और उसके खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज भारत के लिए सबसे बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है।

    भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा यह है कि अब एक भी हार उसके अंक प्रतिशत को काफी नीचे ला सकती है। अगर टीम अपने बचे हुए नौ मैचों में से एक मुकाबला हार जाती है तो उसका पीसीटी करीब 68.5 तक गिर सकता है। दो हार होने पर यह आंकड़ा करीब 62.9 और तीन हार की स्थिति में लगभग 57.41 तक पहुंच सकता है। ऐसे में सिर्फ एक मुकाबले का नतीजा भी फाइनल की रेस में भारत की स्थिति को काफी प्रभावित कर सकता है।

    मौजूदा अंक तालिका पर नजर डालें तो ऑस्ट्रेलिया 87.50 पीसीटी के साथ शीर्ष पर है। दक्षिण अफ्रीका 75 पीसीटी के साथ दूसरे जबकि न्यूजीलैंड 72.22 के साथ तीसरे स्थान पर है। बांग्लादेश 58.33 पीसीटी के साथ भारत से आगे है। इसका मतलब साफ है कि भारत को अपने बचे हुए मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करने के साथ साथ दूसरी टीमों के नतीजों पर भी नजर रखनी होगी। अगर शीर्ष टीमों में से कोई लगातार अंक गंवाती है तो भारत को उसका फायदा मिल सकता है।

    WTC में जीत के लिए 12 अंक मिलते हैं जबकि ड्रॉ होने पर दोनों टीमों को 4-4 अंक दिए जाते हैं और हारने वाली टीम को कोई अंक नहीं मिलता। अंक प्रतिशत की यही व्यवस्था टीमों की अंतिम स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए भारत के लिए अब ड्रॉ भी उतना फायदेमंद नहीं होगा जितनी लगातार जीत होगी।

    शुभमन गिल की अगुआई वाली भारतीय टीम के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती जीत की लय कायम रखने की है। श्रीलंका में दो टेस्ट से लेकर न्यूजीलैंड और फिर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मुकाबलों तक टीम को लगातार दबाव में खेलना होगा। भारतीय बल्लेबाजों को स्पिन और तेज गेंदबाजी दोनों परिस्थितियों के लिए तैयार रहना होगा जबकि गेंदबाजों को भी हर मैच में निर्णायक प्रदर्शन करना होगा।

    कुल मिलाकर WTC 2025-27 में भारत के लिए तस्वीर बिल्कुल साफ है। फाइनल में पहुंचने का रास्ता अभी बंद नहीं हुआ है लेकिन गलती की गुंजाइश बेहद कम बची है। भारत अगर अपने बचे हुए नौ टेस्ट में लगातार जीत दर्ज करता है तो फाइनल की उम्मीद मजबूत रहेगी लेकिन हार की संख्या बढ़ते ही समीकरण मुश्किल होता जाएगा। अब टीम इंडिया के सामने हर टेस्ट सिर्फ एक मुकाबला नहीं बल्कि WTC फाइनल की ओर बढ़ने का एक बड़ा कदम होगा।

  • स्पिन की तैयारी करने पहुंची टीम इंडिया के सामने बिछी घास वाली पिच, श्रीलंका में अभ्यास मैच से पहले खड़ा हुआ विवाद

    स्पिन की तैयारी करने पहुंची टीम इंडिया के सामने बिछी घास वाली पिच, श्रीलंका में अभ्यास मैच से पहले खड़ा हुआ विवाद


    नई दिल्ली। श्रीलंका दौरे पर पहुंची भारतीय क्रिकेट टीम के लिए दो मैचों की टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले ही एक नया विवाद सामने आ गया है। भारत को 7 अगस्त से कोलंबो के नॉनडिस्क्रिप्ट क्रिकेट क्लब यानी एनसीसी मैदान पर तीन दिवसीय अभ्यास मैच खेलना है लेकिन मुकाबले से पहले तैयार की गई पिच को देखकर भारतीय टीम मैनेजमेंट पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आया। टीम इंडिया को उम्मीद थी कि अभ्यास मैच के लिए ऐसी विकेट तैयार की जाएगी जो श्रीलंका की पारंपरिक स्पिन परिस्थितियों जैसी हो ताकि बल्लेबाजों और स्पिन गेंदबाजों को टेस्ट सीरीज से पहले बेहतर तैयारी का मौका मिल सके लेकिन मैदान पर घास वाली विकेट देखकर टीम की चिंता बढ़ गई। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक भारतीय टीम ने पिच पर मौजूद घास को लेकर सवाल उठाए हैं। एनसीसी से जुड़े अधिकारी ने भी बताया कि पिच पर घास रखने का फैसला श्रीलंका क्रिकेट के निर्देश के बाद किया गया है।

    दरअसल भारत और श्रीलंका के बीच पहला टेस्ट मुकाबला 15 अगस्त से गॉल में खेला जाना है। गॉल की परिस्थितियां आमतौर पर स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती हैं। ऐसे में भारतीय टीम चाहती थी कि अभ्यास मैच में भी उसे ऐसी ही परिस्थितियों का अनुभव मिले ताकि बल्लेबाज श्रीलंकाई स्पिनरों का सामना करने से पहले अपनी कमियों को सुधार सकें। खासतौर पर भारतीय बल्लेबाजों के स्पिन के खिलाफ प्रदर्शन को देखते हुए यह अभ्यास मैच टीम के लिए काफी अहम माना जा रहा है। लेकिन एनसीसी की पिच पर छोड़ी गई घास ने टीम इंडिया की योजना को कुछ हद तक बदल दिया है।

    घास वाली पिच का फायदा शुरुआती दौर में तेज गेंदबाजों को मिल सकता है। गेंद नई होने पर सतह से अतिरिक्त सीम और मूवमेंट मिलने की संभावना रहती है जिससे बल्लेबाजों के लिए शुरुआती समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। दूसरी तरफ स्पिन गेंदबाजों को इस विकेट से तुरंत वैसी मदद मिलने की उम्मीद कम है जैसी भारतीय टीम चाहती थी। हालांकि एनसीसी प्रबंधन का कहना है कि मुकाबले के आगे बढ़ने के साथ पिच का मिजाज बदल सकता है और तीसरे दिन स्पिनरों को कुछ सहायता मिलने की संभावना है। क्लब का यह भी मानना है कि पिच पर बल्लेबाजों को रन बनाने का अच्छा मौका मिल सकता है।

    एनसीसी मैदान श्रीलंका के पुराने क्रिकेट क्लबों में शामिल है और भारतीय टीम यहां टेस्ट सीरीज से पहले अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने की कोशिश करेगी। पहले यह अभ्यास मुकाबला चार दिन का प्रस्तावित था लेकिन बाद में इसे घटाकर तीन दिन कर दिया गया। ऐसे में भारतीय टीम के पास परिस्थितियों को समझने और खिलाड़ियों को पर्याप्त मैच अभ्यास देने के लिए सीमित समय है। यही वजह है कि अभ्यास मैच की पिच को लेकर उठे सवालों ने टीम मैनेजमेंट की चिंता बढ़ा दी है।

    भारत के लिए यह टेस्ट सीरीज कई मायनों में महत्वपूर्ण है। टीम को श्रीलंका की परिस्थितियों में खुद को ढालने के साथ साथ स्पिन और तेज गेंदबाजी दोनों के खिलाफ अपनी रणनीति को मजबूत करना होगा। वहीं श्रीलंका भी घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाकर भारतीय टीम को कड़ी चुनौती देने की कोशिश करेगा। अभ्यास मैच में कैसी पिच मिलती है और भारतीय खिलाड़ी उस पर किस तरह प्रदर्शन करते हैं इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

    हालांकि पिच को लेकर उठे विवाद के बावजूद टीम इंडिया के पास परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने का मौका है। घास वाली विकेट भारतीय बल्लेबाजों और गेंदबाजों के लिए एक अलग तरह की परीक्षा साबित हो सकती है। अगर भारतीय खिलाड़ी इस चुनौती का फायदा उठाते हैं तो गॉल टेस्ट से पहले उन्हें जरूरी आत्मविश्वास मिल सकता है। अब देखना यही होगा कि अभ्यास मैच में घास वाली पिच टीम इंडिया के लिए परेशानी बनती है या टेस्ट सीरीज की तैयारी का एक उपयोगी हिस्सा साबित होती है।

  • भारत का सबसे महान क्रिकेटर कौन? अजिंक्य रहाणे ने लिया सचिन तेंदुलकर का नाम, बताया क्यों हैं सभी युगों के महान खिलाड़ी

    भारत का सबसे महान क्रिकेटर कौन? अजिंक्य रहाणे ने लिया सचिन तेंदुलकर का नाम, बताया क्यों हैं सभी युगों के महान खिलाड़ी


    नई दिल्ली। भारत में क्रिकेट को लेकर जब भी महान खिलाड़ियों की चर्चा होती है तो सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली जैसे नाम सबसे पहले सामने आते हैं। दोनों ने अलग अलग दौर में भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयां दी हैं और दुनियाभर में अपनी पहचान बनाई है। ऐसे में जब पूर्व भारतीय बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे से भारत के सबसे महान क्रिकेटर का नाम पूछा गया तो उनके सामने आसान सवाल नहीं था। हालांकि काफी सोचने के बाद रहाणे ने जिस खिलाड़ी का नाम लिया वह क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर हैं।

    हाल ही में क्रिकेट से संन्यास लेने वाले अजिंक्य रहाणे ने स्टिक टू क्रिकेट के एक एपिसोड में भारत के ऑल टाइम महान क्रिकेटर को लेकर अपनी पसंद बताई। उनसे जब पूछा गया कि भारत का अब तक का सबसे महान क्रिकेटर कौन है तो उन्होंने कहा कि एक नाम चुनना काफी मुश्किल है लेकिन शायद सचिन तेंदुलकर। रहाणे ने सचिन को सभी युगों का महान खिलाड़ी बताया। उनके इस जवाब ने एक बार फिर सचिन तेंदुलकर की महानता और भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान को चर्चा के केंद्र में ला दिया।

    रहाणे की सचिन से मुलाकात केवल एक प्रशंसक और महान खिलाड़ी के तौर पर नहीं रही है। उन्हें कई बार सचिन के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने का मौका भी मिला। रहाणे ने 2011 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था और इसके बाद भारतीय टीम में अपनी जगह बनाई। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने भारत के मजबूत मध्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और विराट कोहली तथा चेतेश्वर पुजारा जैसे खिलाड़ियों के साथ लंबे समय तक टीम का हिस्सा रहे।

    सचिन के साथ रहाणे का जुड़ाव घरेलू क्रिकेट और आईपीएल तक भी रहा। 2009 के आईपीएल सीजन में दोनों मुंबई इंडियंस की टीम में साथ थे। इसके अलावा घरेलू क्रिकेट में भी दोनों ने मुंबई के लिए साथ खेला। रहाणे को भारत की ओर से सचिन के साथ टेस्ट मैच खेलने का अवसर भी मिला। ऐसे में सचिन के खेल को करीब से देखने वाले रहाणे के लिए उन्हें भारत का महानतम क्रिकेटर चुनना काफी खास माना जा रहा है।

    सचिन तेंदुलकर का अंतरराष्ट्रीय करियर करीब 24 वर्षों तक चला। उन्होंने 1989 में महज 16 वर्ष की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। इसके बाद उन्होंने भारतीय क्रिकेट को कई ऐतिहासिक उपलब्धियां दिलाईं। सचिन ने कुल 664 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले जिनमें 200 टेस्ट 463 वनडे और एक टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला शामिल है।

    टेस्ट क्रिकेट में सचिन के नाम 15,921 रन हैं जबकि वनडे क्रिकेट में उन्होंने 18,426 रन बनाए। वह टेस्ट और वनडे दोनों प्रारूपों में लंबे समय तक सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। उनका नाम क्रिकेट इतिहास में कई ऐसे रिकॉर्ड के साथ दर्ज है जिन्हें हासिल करना किसी भी बल्लेबाज के लिए बेहद कठिन माना जाता है। वह दुनिया के इकलौते खिलाड़ी हैं जिन्होंने 200 टेस्ट मैच खेले हैं।

    सचिन के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 2011 वनडे विश्व कप जीत भी शामिल है। भारतीय टीम ने घरेलू मैदान पर विश्व कप अपने नाम किया और सचिन के लिए यह ट्रॉफी उनके लंबे करियर की सबसे भावुक उपलब्धियों में से एक रही। उन्होंने वर्षों तक विश्व कप जीतने का सपना देखा था और आखिरकार 2011 में यह सपना पूरा हुआ।

    विराट कोहली भी आधुनिक क्रिकेट के सबसे बड़े बल्लेबाजों में शामिल हैं और उनकी उपलब्धियों की तुलना अक्सर सचिन से की जाती है। इसके बावजूद रहाणे ने अपने ऑल टाइम महान क्रिकेटर के रूप में सचिन का नाम चुना है। उनका यह चयन इस बात को दर्शाता है कि सचिन तेंदुलकर का प्रभाव केवल उनके आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने कई पीढ़ियों के क्रिकेटरों को प्रेरित किया है।