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  • गणेश चतुर्थी पर होगा India-Afghanistan T20 का महामुकाबला? ACB ने BCCI से मांगी 14 सितंबर की तारीख

    गणेश चतुर्थी पर होगा India-Afghanistan T20 का महामुकाबला? ACB ने BCCI से मांगी 14 सितंबर की तारीख


    नई दिल्ली। भारत और अफगानिस्तान के बीच सितंबर में होने वाली तीन मैचों की T20 इंटरनेशनल सीरीज को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। दोनों टीमों के बीच मुकाबलों का कार्यक्रम पहले ही तय हो चुका है लेकिन अब अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी ACB इसमें एक बदलाव चाहता है। ACB ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI से संपर्क कर सीरीज के एक मुकाबले को 14 सितंबर को कराने का प्रस्ताव रखा है। खास बात यह है कि 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी है। फिलहाल दोनों बोर्ड के बीच इस प्रस्ताव पर बातचीत चल रही है और अंतिम फैसला BCCI की मंजूरी के बाद ही होगा।

    मौजूदा कार्यक्रम के मुताबिक भारत और अफगानिस्तान के बीच तीनों T20 मुकाबले दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जाने हैं। पहला मैच 13 सितंबर को दूसरा 15 सितंबर और तीसरा मुकाबला 17 सितंबर को निर्धारित है। BCCI ने भी इस कार्यक्रम की पुष्टि की है। अब ACB चाहता है कि 13 या 15 सितंबर को होने वाले मुकाबलों में से किसी एक को 14 सितंबर को आयोजित किया जाए। यानी मैचों की संख्या में कोई बदलाव नहीं होगा बल्कि सिर्फ एक मुकाबले की तारीख बदली जाएगी।

    सवाल यह है कि आखिर ACB सोमवार यानी 14 सितंबर को ही मुकाबला क्यों कराना चाहता है। दरअसल 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी का त्योहार है और इस मौके पर दिल्ली में आंशिक छुट्टी रहने की उम्मीद है। आमतौर पर सोमवार को क्रिकेट मैच कराने पर कामकाजी दिन होने के कारण स्टेडियम में दर्शकों की संख्या कम रहने की आशंका रहती है। लेकिन गणेश चतुर्थी के कारण छुट्टी और त्योहार का माहौल होने से ACB को उम्मीद है कि मैच के लिए बड़ी संख्या में दर्शक स्टेडियम पहुंच सकते हैं। इससे मुकाबले की दर्शक उपस्थिति और फैन एंगेजमेंट बेहतर होने की संभावना है।

    अगर BCCI इस प्रस्ताव पर सहमत हो जाता है तो भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाली सीरीज का एक मुकाबला गणेश चतुर्थी के दिन खेला जाएगा। हालांकि अभी इसे अंतिम कार्यक्रम नहीं माना जा सकता। जब तक BCCI की मंजूरी नहीं मिलती तब तक आधिकारिक शेड्यूल 13 15 और 17 सितंबर का ही रहेगा।

    इस सीरीज की एक और खास बात यह है कि मुकाबले भारत में होने के बावजूद इसे अफगानिस्तान की घरेलू सीरीज माना जा रहा है। सुरक्षा परिस्थितियों के कारण अफगानिस्तान लंबे समय से अपने कई अंतरराष्ट्रीय घरेलू मुकाबले विदेशों में आयोजित करता रहा है। इस बार दिल्ली को उसके होम मैचों के लिए चुना गया है। Reuters के मुताबिक भारत ने अफगानिस्तान को इस महत्वपूर्ण सीरीज की मेजबानी के लिए अपनी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।

    भारत और अफगानिस्तान के लिए यह सीरीज एशियन गेम्स की तैयारियों के लिहाज से भी अहम होगी। दोनों टीमें आगामी बड़े मुकाबलों से पहले T20 फॉर्मेट में अपनी तैयारियों को परखना चाहेंगी। दिल्ली में लगातार तीन मुकाबले होने से खिलाड़ियों को परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने का मौका भी मिलेगा।

    इस बीच भारत के बांग्लादेश दौरे को लेकर भी स्थिति बदलती नजर आ रही है। पहले सितंबर में भारतीय टीम के बांग्लादेश दौरे का कार्यक्रम सामने आया था लेकिन अब अफगानिस्तान के खिलाफ T20 सीरीज की पुष्टि के बाद उस दौरे की संभावना कम बताई जा रही है। ऐसे में सितंबर में भारतीय टीम के लिए अफगानिस्तान के खिलाफ दिल्ली में होने वाली T20 सीरीज महत्वपूर्ण मुकाबलों में से एक हो सकती है।

    फिलहाल क्रिकेट फैंस की नजर BCCI के फैसले पर है। अगर भारतीय बोर्ड ACB के प्रस्ताव को मंजूरी दे देता है तो 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के दिन दिल्ली में भारत और अफगानिस्तान के बीच T20 मुकाबला देखने को मिल सकता है। यानी अभी मैच की तारीख बदली नहीं है लेकिन ACB की मांग ने सीरीज के कार्यक्रम में एक दिलचस्प ट्विस्ट जरूर ला दिया है।

  • शादमान इस्लाम का विकेट लेते ही स्टार्क का ऐतिहासिक कमाल, हेराथ को पीछे छोड़ा और कपिल देव के क्लब में पहुंचे

    शादमान इस्लाम का विकेट लेते ही स्टार्क का ऐतिहासिक कमाल, हेराथ को पीछे छोड़ा और कपिल देव के क्लब में पहुंचे


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क ने टेस्ट क्रिकेट में अपने शानदार करियर का एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है। बांग्लादेश के खिलाफ डार्विन में खेले जा रहे पहले टेस्ट में शादमान इस्लाम का विकेट लेते ही स्टार्क ने इतिहास रच दिया। इस विकेट के साथ उनके टेस्ट क्रिकेट में 434 विकेट पूरे हो गए और वह टेस्ट इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बाएं हाथ के गेंदबाज बन गए। स्टार्क ने इस मामले में श्रीलंका के महान स्पिनर रंगना हेराथ को पीछे छोड़ दिया है। मैच शुरू होने से पहले स्टार्क और हेराथ दोनों के नाम 433 टेस्ट विकेट थे।

    बांग्लादेश की पहली पारी के नौवें ओवर में स्टार्क ने शादमान इस्लाम को अपनी गेंद पर आउट किया। नाथन लायन ने उनका कैच पकड़ा और इसी विकेट के साथ स्टार्क के नाम एक बड़ा रिकॉर्ड दर्ज हो गया। 36 साल के स्टार्क अब टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले खब्बू गेंदबाज हैं। उनके नाम 434 विकेट हो चुके हैं जबकि रंगना हेराथ ने अपने टेस्ट करियर में 433 विकेट हासिल किए थे।

    स्टार्क की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि 434 विकेट के आंकड़े तक पहुंचते ही उन्होंने भारत के महान कप्तान और दिग्गज ऑलराउंडर कपिल देव की भी बराबरी कर ली। कपिल देव ने 1978 से 1994 के बीच 131 टेस्ट मैच खेलकर 434 विकेट लिए थे। स्टार्क ने यह आंकड़ा अपने 106वें टेस्ट मैच में हासिल किया है। इस तरह टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में स्टार्क और कपिल देव अब संयुक्त रूप से 11वें स्थान पर हैं।

    बाएं हाथ के गेंदबाजों की बात करें तो स्टार्क इस सूची में सबसे ऊपर पहुंच चुके हैं। उनके बाद रंगना हेराथ 433 विकेट के साथ दूसरे स्थान पर हैं। पाकिस्तान के महान तेज गेंदबाज वसीम अकरम 414 विकेट के साथ तीसरे स्थान पर हैं। न्यूजीलैंड के डेनियल वेटोरी ने 362 विकेट लिए हैं जबकि श्रीलंका के चामिंडा वास के नाम 355 विकेट हैं। भारत के रवींद्र जडेजा भी 348 टेस्ट विकेट के साथ इस खास सूची में शामिल हैं।

    अब स्टार्क की नजर टेस्ट क्रिकेट के सर्वकालिक सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की टॉप-10 सूची पर है। इस सूची में दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज तेज गेंदबाज डेल स्टेन 439 विकेट के साथ 10वें स्थान पर हैं। स्टार्क के खाते में फिलहाल 434 विकेट हैं। यानी स्टेन को पीछे छोड़कर टॉप-10 में जगह बनाने के लिए स्टार्क को छह और विकेट हासिल करने होंगे। जिस तरह वह लगातार विकेट चटका रहे हैं उसे देखते हुए यह मुकाम भी उनके लिए ज्यादा दूर नजर नहीं आता।

    स्टार्क ने अक्टूबर 2010 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था। अपनी तेज रफ्तार गेंदबाजी स्विंग और खतरनाक यॉर्कर के दम पर उन्होंने दुनिया के सबसे प्रभावशाली तेज गेंदबाजों में अपनी जगह बनाई। खासकर बड़े टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन ऑस्ट्रेलिया की सफलता का अहम हिस्सा रहा है। वह 2015 और 2023 में वनडे विश्व कप जीतने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम का हिस्सा रहे। 2015 विश्व कप में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट भी चुना गया था।

    स्टार्क उन चुनिंदा क्रिकेटरों में शामिल हैं जिन्होंने वनडे विश्व कप टी20 विश्व कप और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का खिताब जीता है। वनडे क्रिकेट में भी उनका रिकॉर्ड शानदार है। उन्होंने 130 वनडे इंटरनेशनल मुकाबलों में 23.58 की औसत से 247 विकेट हासिल किए हैं। सितंबर 2025 में उन्होंने टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया था लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनका शानदार सफर अब भी जारी है।

    शादमान इस्लाम का विकेट स्टार्क के लिए सिर्फ एक और विकेट नहीं था बल्कि यह उनके लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर की एक ऐतिहासिक उपलब्धि बन गया। रंगना हेराथ को पीछे छोड़कर टेस्ट के सबसे सफल खब्बू गेंदबाज बनने के बाद अब उनकी निगाहें डेल स्टेन के 439 विकेट पर हैं। अगर स्टार्क छह और विकेट हासिल कर लेते हैं तो टेस्ट क्रिकेट के सर्वकालिक टॉप-10 गेंदबाजों में उनका नाम भी दर्ज हो जाएगा।

  • कैनेडियन ओपन में झांग शुआई-सिनियाकोवा का जलवा! एरानी-मेलिचर को हराकर बिना सेट गंवाए जीता डबल्स खिताब

    कैनेडियन ओपन में झांग शुआई-सिनियाकोवा का जलवा! एरानी-मेलिचर को हराकर बिना सेट गंवाए जीता डबल्स खिताब


    नई दिल्ली। कैनेडियन ओपन 2026 में चीन की झांग शुआई और चेक रिपब्लिक की कैटरीना सिनियाकोवा की जोड़ी ने महिला डबल्स का खिताब अपने नाम कर लिया है। टॉप सीड इस जोड़ी ने टोरंटो में खेले गए फाइनल मुकाबले में तीसरी वरीयता प्राप्त सारा एरानी और निकोल मेलिचर-मार्टिनेज की जोड़ी को सीधे सेटों में 6-3 6-4 से हराया। इस जीत के साथ झांग और सिनियाकोवा ने पूरे टूर्नामेंट में एक भी सेट गंवाए बिना ट्रॉफी अपने नाम की और एक खास उपलब्धि भी हासिल की।

    झांग शुआई और कैटरीना सिनियाकोवा की यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में लगातार मजबूत विरोधियों का सामना किया। दोनों खिलाड़ियों ने पहले ही राउंड से अपने खेल में शानदार तालमेल दिखाया और दबाव के बावजूद मुकाबलों पर पकड़ बनाए रखी। फाइनल में भी उन्होंने एरानी और मेलिचर-मार्टिनेज को ज्यादा मौके नहीं दिए। पहले सेट में 6-3 की जीत के बाद उन्होंने दूसरे सेट में 6-4 से मुकाबला खत्म करते हुए खिताब पर कब्जा कर लिया।

    इस जीत के साथ झांग और सिनियाकोवा 2017 में एकातेरिना मकारोवा और एलेना वेस्नीना के बाद कैनेडियन ओपन महिला डबल्स का खिताब बिना कोई सेट गंवाए जीतने वाली पहली जोड़ी बन गई हैं। यह उपलब्धि उनके पूरे टूर्नामेंट में दबदबे को दिखाती है। दोनों खिलाड़ियों ने शुरुआत से लेकर फाइनल तक लगातार उच्च स्तर का प्रदर्शन किया और किसी भी मुकाबले में अपनी लय टूटने नहीं दी।

    टूर्नामेंट के शुरुआती तीन राउंड में भी झांग और सिनियाकोवा को कड़ी चुनौती मिली। उनकी जीत के सिलसिले में हर राउंड में कम से कम एक ग्रैंड स्लैम चैंपियन के खिलाफ मुकाबला शामिल रहा। शुरुआती दौर में उन्होंने सोराना सिर्स्टिया और मिरा एंड्रीवा की जोड़ी को हराया। इसके बाद दूसरे राउंड में उनका सामना कोको गॉफ और कैटी मैकनेली से हुआ। झांग और सिनियाकोवा ने इस मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए 6-0 6-4 से जीत दर्ज की। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने स्टॉर्म हंटर और डेसिरेट क्रावजिक की जोड़ी को मात देकर सेमीफाइनल और फिर फाइनल का रास्ता तय किया।

    दोनों खिलाड़ियों के लिए यह खिताब व्यक्तिगत तौर पर भी बेहद महत्वपूर्ण रहा। डब्ल्यूटीए टूर की अनुभवी डबल्स खिलाड़ियों में शामिल झांग और सिनियाकोवा ने बतौर जोड़ी अपना तीसरा खिताब जीता। वहीं डब्ल्यूटीए 1000 स्तर पर यह उनकी पहली ट्रॉफी रही। झांग के लिए यह इस साल की चौथी डबल्स ट्रॉफी है और उनके करियर की कुल 19वीं ट्रॉफी बन गई है। दूसरी तरफ सिनियाकोवा ने इस सीजन की अपनी चौथी डब्ल्यूटीए 1000 ट्रॉफी हासिल की और चीनी खिलाड़ी झांग के साथ यह उनकी पहली डब्ल्यूटीए 1000 खिताबी जीत रही।

    खिताब जीतने के बाद झांग शुआई ने अपनी जोड़ीदार सिनियाकोवा की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट में उन्हें कई मजबूत विरोधियों का सामना करना पड़ा और इनमें ग्रैंड स्लैम चैंपियन भी शामिल थे। इसके बावजूद दोनों ने लगातार ऊंचे स्तर का टेनिस खेला और हर मुकाबले में अपनी रणनीति को बेहतर तरीके से लागू किया।

    झांग ने अपनी सफलता का बड़ा श्रेय सिनियाकोवा को दिया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टनर ने पूरे टूर्नामेंट में उनकी काफी मदद की और इसी वजह से दोनों इतना अच्छा प्रदर्शन कर सकीं। झांग के मुताबिक दोनों खिलाड़ी हर दिन एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल बना रही हैं और इस प्रदर्शन से दोनों काफी खुश हैं।

    कैनेडियन ओपन की यह जीत झांग शुआई और कैटरीना सिनियाकोवा की जोड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि है। बिना कोई सेट गंवाए खिताब जीतने के बाद अब इस जोड़ी की नजर सीजन के बाकी बड़े टूर्नामेंटों पर होगी। जिस तरह दोनों ने टोरंटो में मजबूत विरोधियों को मात दी है उससे उनके बीच तालमेल और आत्मविश्वास साफ नजर आता है।

  • स्वियाटेक ने लौटाया अपना जलवा! रायबाकिना को सीधे सेटों में हराकर बनीं कैनेडियन ओपन चैंपियन

    स्वियाटेक ने लौटाया अपना जलवा! रायबाकिना को सीधे सेटों में हराकर बनीं कैनेडियन ओपन चैंपियन


    नई दिल्ली। पोलैंड की स्टार टेनिस खिलाड़ी इगा स्वियाटेक ने आखिरकार लंबे इंतजार के बाद खिताबी सूखा खत्म कर दिया है। स्वियाटेक ने कैनेडियन ओपन 2026 महिला एकल का खिताब अपने नाम कर लिया। टोरंटो में खेले गए फाइनल मुकाबले में सातवीं वरीयता प्राप्त स्वियाटेक ने दुनिया की नंबर दो खिलाड़ी एलेना रायबाकिना को सीधे सेटों में 6-2, 6-3 से मात दी। इस जीत के साथ स्वियाटेक ने इस सीजन की अपनी पहली ट्रॉफी हासिल की। उनके लिए यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले कुछ महीनों से उन्हें खिताब नहीं जीत पाने के कारण आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था।

    फाइनल में स्वियाटेक ने शुरुआत से ही अपने खेल पर नियंत्रण बनाए रखा। पहले सेट में उन्होंने रायबाकिना पर दबाव बनाया और अपनी आक्रामकता के दम पर लगातार अंक जुटाए। दूसरी ओर रायबाकिना की गलतियों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं। कजाकिस्तान की खिलाड़ी ने लगातार दो डबल फॉल्ट किए और इसके कारण महत्वपूर्ण ब्रेक पॉइंट गंवा दिया। स्वियाटेक ने मौके का फायदा उठाते हुए अपनी बढ़त मजबूत की और पहला सेट 6-2 से अपने नाम कर लिया।

    दूसरे सेट में भी मुकाबले की तस्वीर ज्यादा नहीं बदली। रायबाकिना को अपनी गलतियों का खामियाजा भुगतना पड़ा। उनके दो बैकहैंड शॉट चूकने से स्वियाटेक को एक और ब्रेक हासिल करने का मौका मिला और पोलिश खिलाड़ी ने इसे हाथ से जाने नहीं दिया। रायबाकिना ने वापसी की कोशिश जरूर की और एक चैंपियनशिप पॉइंट बचाने में भी सफल रहीं लेकिन स्वियाटेक ने अगले मौके पर मैच खत्म कर दिया। उन्होंने दूसरा सेट 6-3 से जीतकर खिताब पर कब्जा जमा लिया।

    स्वियाटेक के लिए यह जीत केवल एक ट्रॉफी नहीं बल्कि आत्मविश्वास लौटाने वाली उपलब्धि भी है। पिछले सितंबर के बाद यह उनका पहला खिताब है। लगातार खिताब से दूर रहने के कारण उनके प्रदर्शन पर सवाल उठ रहे थे लेकिन कैनेडियन ओपन में उन्होंने पूरे टूर्नामेंट के दौरान अपने खेल में निरंतरता दिखाई और फाइनल में भी दबाव के बीच बेहतरीन प्रदर्शन किया। अब उनकी नजर यूएस ओपन पर होगी और कैनेडियन ओपन की यह जीत उनके लिए ग्रैंड स्लैम से पहले मनोबल बढ़ाने वाली साबित हो सकती है।

    खिताब जीतने के बाद स्वियाटेक ने अपनी भावनाएं खुलकर जाहिर कीं। उन्होंने माना कि पिछले कुछ महीने उनके लिए आसान नहीं रहे हैं। ऑनलाइन और सोशल मीडिया पर लगातार होने वाली आलोचनाओं और लोगों की राय से निपटना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा। इसके बावजूद उन्होंने अपने खेल में बदलाव करने और खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया। स्वियाटेक ने कहा कि उनके आसपास मौजूद लोगों का समर्थन उन्हें हर दिन आगे बढ़ने और अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित करता रहा।

    स्वियाटेक ने अपनी खिताबी जीत को उन लोगों को समर्पित किया जिन्हें गलत तरीके से जज किया जाता है या जिन्हें खेल और जिंदगी के दूसरे क्षेत्रों में नफरत का सामना करना पड़ता है। उन्होंने संदेश दिया कि नकारात्मक विचारों को खुद पर हावी होने देना सही नहीं है। इसके बजाय आगे बढ़ते रहना अपनी कोशिशों पर ध्यान देना और खुद पर भरोसा बनाए रखना जरूरी है।

    कैनेडियन ओपन की यह जीत स्वियाटेक के लिए एक नए दौर की शुरुआत भी मानी जा सकती है। लंबे अंतराल के बाद मिली ट्रॉफी ने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया है। अब सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि वह इस लय को यूएस ओपन तक कैसे कायम रखती हैं और क्या इस जीत के बाद ग्रैंड स्लैम में भी अपना दबदबा दोबारा कायम कर पाती हैं।

  • पहले वनडे में ही इतिहास रच गए लाइल रॉबर्टसन! 6 विकेट लेकर स्कॉटलैंड को दिलाई 170 रन की बड़ी जीत

    पहले वनडे में ही इतिहास रच गए लाइल रॉबर्टसन! 6 विकेट लेकर स्कॉटलैंड को दिलाई 170 रन की बड़ी जीत


    नई दिल्ली। स्कॉटलैंड के 23 वर्षीय ऑफ स्पिनर लाइल रॉबर्टसन ने वनडे क्रिकेट में अपने डेब्यू को यादगार बना दिया। आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप लीग 2 के तहत स्कॉटलैंड और कनाडा के बीच डंडी में खेले गए मुकाबले में रॉबर्टसन ने गेंद से ऐसा कमाल किया कि उनका नाम वनडे डेब्यू पर सबसे शानदार गेंदबाजी करने वाले खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गया। उन्होंने अपने पहले ही वनडे मुकाबले में 10 ओवर की गेंदबाजी करते हुए 52 रन देकर 6 विकेट झटके। उनकी इस शानदार गेंदबाजी ने स्कॉटलैंड को कनाडा के खिलाफ 170 रन की बड़ी जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

    लाइल रॉबर्टसन के लिए यह मुकाबला इसलिए भी खास रहा क्योंकि वनडे करियर की पहली ही पारी में उन्होंने विपक्षी बल्लेबाजी क्रम को पूरी तरह परेशान कर दिया। ऑफ स्पिनर ने लगातार विकेट निकालकर कनाडा की रन चेज को पटरी से उतार दिया। 10 ओवर में 52 रन देकर 6 विकेट का उनका आंकड़ा वनडे क्रिकेट में डेब्यू करते हुए किसी गेंदबाज का चौथा सर्वश्रेष्ठ स्पेल रहा। इस प्रदर्शन के साथ रॉबर्टसन ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत बेहद प्रभावशाली अंदाज में की है।

    वनडे डेब्यू पर सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी का रिकॉर्ड भी स्कॉटलैंड के ही गेंदबाज चार्ली कैसल के नाम दर्ज है। कैसल ने 2024 में ओमान के खिलाफ अपने डेब्यू मैच में महज 21 रन देकर 7 विकेट हासिल किए थे। उनका यह प्रदर्शन वनडे क्रिकेट में डेब्यू करने वाले किसी गेंदबाज का सबसे बेहतरीन स्पेल है। दूसरे नंबर पर दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज कगिसो रबाडा का नाम आता है। रबाडा ने 2015 में बांग्लादेश के खिलाफ वनडे डेब्यू करते हुए 16 रन देकर 6 विकेट झटके थे।

    इस सूची में तीसरे स्थान पर वेस्टइंडीज के फिदेल एडवर्ड्स हैं। उन्होंने 2003 में जिम्बाब्वे के खिलाफ डेब्यू मुकाबले में 22 रन देकर 6 विकेट हासिल किए थे। अब लाइल रॉबर्टसन ने 52 रन देकर 6 विकेट के प्रदर्शन के साथ इस खास सूची में चौथा स्थान हासिल किया है। नामीबिया के जैन फ्रीलिंक पांचवें स्थान पर हैं जिन्होंने 2019 में ओमान के खिलाफ डेब्यू करते हुए 13 रन देकर 5 विकेट लिए थे।

    मुकाबले की बात करें तो स्कॉटलैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक बल्लेबाजी की और निर्धारित 50 ओवर में 7 विकेट खोकर 347 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। कप्तान रिची बेरिंगटन ने शानदार शतकीय पारी खेलते हुए 120 रन बनाए। उनके अलावा मैथ्यू क्रॉस ने 51 रन और ब्रैंडन मैकमुलेन ने 64 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। इन पारियों की बदौलत स्कॉटलैंड ने कनाडा के सामने जीत के लिए 348 रन का बड़ा लक्ष्य रखा।

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी कनाडाई टीम स्कॉटलैंड की गेंदबाजी के सामने टिक नहीं सकी। कनाडा की पूरी टीम 35 ओवर में 177 रन बनाकर ऑलआउट हो गई। परगट सिंह ने टीम की ओर से सबसे ज्यादा 42 रन बनाए लेकिन दूसरे छोर से उन्हें पर्याप्त सहयोग नहीं मिल सका। स्कॉटलैंड के गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट निकालते हुए कनाडा की पारी को समेट दिया।

    इस तरह स्कॉटलैंड ने यह मुकाबला 170 रन के बड़े अंतर से अपने नाम किया। हालांकि जीत में कई खिलाड़ियों का योगदान रहा लेकिन लाइल रॉबर्टसन का डेब्यू स्पेल सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। महज 23 साल की उम्र में वनडे क्रिकेट की शुरुआत करते हुए इतिहास के शीर्ष डेब्यू स्पेल में जगह बनाना उनके करियर के लिए बड़ी उपलब्धि है। अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजर इस युवा ऑफ स्पिनर के आने वाले मुकाबलों पर रहेगी कि क्या वह अपने डेब्यू के प्रदर्शन को आगे भी बरकरार रख पाते हैं।

  • टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में 29 साल से कायम है श्रीलंका का 952 रनों का ऐतिहासिक और अटूट ऑल-टाइम रिकॉर्ड।

    टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में 29 साल से कायम है श्रीलंका का 952 रनों का ऐतिहासिक और अटूट ऑल-टाइम रिकॉर्ड।

    नई दिल्ली ।टी20 क्रिकेट के आधुनिक दौर में बल्लेबाजी के तौर-तरीकों और रन बनाने की गति में व्यापक परिवर्तन आया है। पावर हिटिंग, उन्नत फिटनेस और नई रणनीतियों के कारण खेल का स्वरूप काफी आक्रामक हो चुका है। इसके बावजूद टेस्ट क्रिकेट के लंबे इतिहास में एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज है, जिसे लगभग तीन दशकों के बीत जाने के बाद भी कोई देश पार नहीं कर सका है। वर्ष 1997 में श्रीलंका की राष्ट्रीय टीम द्वारा भारत के विरुद्ध कोलंबो में बनाया गया 952 रनों का ऐतिहासिक स्कोर आज भी सर्वोच्च बना हुआ है।

    कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में आयोजित उस ऐतिहासिक टेस्ट मुकाबले में भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी में 537 रनों का विशाल स्कोर बनाकर पारी घोषित की थी। भारत की ओर से कप्तान सचिन तेंदुलकर, मोहम्मद अजहरुद्दीन और नवजोत सिंह सिद्धू ने शानदार शतकीय पारियां खेली थीं। उस दौर में 500 से अधिक रनों का स्कोर मैच में बेहद मजबूत स्थिति माना जाता था, किंतु इसके जवाब में उतरी श्रीलंकाई टीम ने ऐसी बल्लेबाजी की जिसने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास के पन्नों को पूरी तरह से बदलकर रख दिया।

    श्रीलंका की पहली पारी में सलामी बल्लेबाज सनत जयसूर्या ने 340 रनों की मैराथन पारी खेली, जबकि रोशन महानामा ने 225 रनों का योगदान दिया। इन दोनों दिग्गजों ने दूसरे विकेट के लिए 576 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी निभाई, जो आज भी टेस्ट इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी साझेदारी मानी जाती है। इसके अतिरिक्त मध्यक्रम के प्रमुख बल्लेबाज अरविंद डी सिल्वा ने भी 126 रन बनाए। श्रीलंकाई टीम ने 271 ओवरों की लंबी बल्लेबाजी के बाद 6 विकेट पर 952 रन बनाकर अपनी पारी घोषित की थी।

    क्रिकेट आंकड़ों के दृष्टिकोण से श्रीलंका का यह स्कोर टेस्ट इतिहास का सबसे बड़ा टीम स्कोर है। इस सूची में इंग्लैंड द्वारा बनाया गया 903/7 का स्कोर दूसरे स्थान पर आता है, जबकि हाल के वर्षों में इंग्लैंड ने पाकिस्तान के खिलाफ 823/7 का स्कोर बनाकर इस आंकड़े के समीप पहुंचने का प्रयास अवश्य किया था। हालांकि 952 रनों की यह ऐतिहासिक उपलब्धि पिछले 29 वर्षों से एवरेस्ट की भांति अडिग खड़ी है।

    वर्तमान टी20 युग में यह प्रश्न बार-बार उठता है कि क्या आधुनिक टेस्ट क्रिकेट में कोई टीम 1000 रनों के तिलिस्म को तोड़ सकती है। खेल विशेषज्ञों के अनुसार, 1000 रन के आंकड़े को छूने के लिए केवल तेज गति से रन बनाना ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए अत्यंत सपाट पिच, दो से तीन बड़ी और लंबी साझेदारियों तथा विपक्षी गेंदबाजों के पूरी तरह प्रभावहीन रहने की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही टीम के कप्तान को व्यक्तिगत या टीम रिकॉर्ड तथा मैच के परिणाम के बीच संतुलन बनाना होगा। मध्य प्रदेश सहित देश भर के खेल प्रेमी इस रिकॉर्ड के महत्व को भली-भांति समझते हैं।

    अधिकांश अवसरों पर टेस्ट मैच जीतने के लिए कप्तानों को समय रहते पारी घोषित करनी पड़ती है, ताकि विपक्षी टीम के 20 विकेट निकाले जा सकें। ऐसे में केवल रिकॉर्ड बनाने के उद्देश्य से बल्लेबाजी जारी रखना मैच के नतीजे को जोखिम में डाल सकता है। श्रीलंका ने 1997 में यह दर्शाया था कि टेस्ट क्रिकेट में धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी की क्या सीमाएं हो सकती हैं। आज के आक्रामक दौर में भी 952 रनों की यह क्रिकेटीय दीवार पूरी मजबूती से खड़ी है।

  • भारत और श्रीलंका के बीच पहले टेस्ट मैच से पूर्व गॉल की पिच और मौसम को लेकर रणनीतिक खींचतान तेज।

    भारत और श्रीलंका के बीच पहले टेस्ट मैच से पूर्व गॉल की पिच और मौसम को लेकर रणनीतिक खींचतान तेज।

    नई दिल्ली ।भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से शुरू होने वाले पहले टेस्ट मैच से पूर्व गॉल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में पिच के मिजाज को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मुकाबले से दो दिन पहले तक भारतीय टीम प्रबंधन के सामने यह तस्वीर पूरी तरह से साफ नहीं हो सकी है कि मैदान पर तीन तेज गेंदबाजों के कॉम्बिनेशन के साथ उतरा जाए या फिर स्पिन आक्रमण पर ज्यादा भरोसा जताया जाए। इसी असमंजस के बीच भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर और बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने अभ्यास सत्र के दौरान स्वयं 22 गज की पट्टी का विस्तृत जायजा लिया।

    श्रीलंकाई टीम के बंद दरवाजों के पीछे चल रहे अभ्यास सत्र के दौरान दोनों भारतीय कोच मैदान पर पहुंचे, जहां ग्राउंड स्टाफ ने उनके लिए विशेष रूप से मुख्य कवर हटाए। गंभीर और कोटक ने विकेट की नमी, कठोरता और सतह की स्थिति का गहराई से निरीक्षण किया। हालांकि दोनों अधिकारियों के वहां से लौटते ही ग्राउंड स्टाफ ने पिच को दोबारा ढक दिया। इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य उस पिच की व्यवहारिक प्रकृति को समझना था जिस पर दो मैचों की श्रृंखला का पहला मुकाबला आयोजित होना है।

    भारतीय कोचों के जाने के लगभग दो घंटे पश्चात मैदान पर पिच से मुख्य कवर पूरी तरह हटा दिए गए और घास काटने वाली मशीन उतारी गई। ग्राउंड स्टाफ द्वारा पिच पर कई बार मशीन चलाने के बाद सॉफ्ट रोलर का इस्तेमाल किया गया और सतह को कुछ समय के लिए धूप में खुला छोड़ दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में पिच पर पानी देने की मात्रा और रोलर के उपयोग से ही गॉल की इस पारंपरिक पिच का अंतिम मिजाज निर्धारित हो सकेगा।

    गॉल के मैदान को ऐतिहासिक रूप से स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार माना जाता रहा है, किंतु भारतीय टीम प्रबंधन केवल पुराने आंकड़ों के आधार पर अपनी अंतिम एकादश का चयन करने से बच रहा है। यदि टेस्ट मैच के शुरुआती दिन पिच पर नमी और तेजी बनी रहती है तो भारतीय टीम तीन प्रमुख तेज गेंदबाजों को प्लेइंग इलेवन में अवसर दे सकती है। इस स्थिति में मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार की तिकड़ी को नई गेंद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

    यदि परिस्थितियों को देखते हुए अतिरिक्त स्पिनर को खिलाने का निर्णय लिया जाता है तो कुलदीप यादव की दावेदारी सर्वाधिक मजबूत नजर आ रही है। कप्तान शुभमन गिल को सपाट पिचों पर भी विकेट निकालने वाले गेंदबाज की आवश्यकता होगी, जिसमें कुलदीप कारगर सिद्ध हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त रवींद्र जडेजा अपनी ऑलराउंड क्षमता से टीम को संतुलन प्रदान करेंगे। मध्य प्रदेश और देश भर के क्रिकेट प्रशंसक भी इस महत्वपूर्ण टेस्ट सीरीज के आगाज का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

    गॉल में मौसम की स्थिति भी मुकाबला की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पिछले कुछ दिनों में क्षेत्र में अचानक तेज बारिश दर्ज की गई है, हालांकि हाल के समय में धूप खिलने से मैदान सूखा है। मैच के दौरान बादलों की मौजूदगी और हवा में नमी रहने पर तेज गेंदबाजों को मदद मिलने की संभावना है, जबकि तेज धूप की स्थिति में पिच जल्दी टूट सकती है और स्पिनरों का प्रभाव बढ़ सकता है। भारतीय टीम अभ्यास सत्र के माध्यम से अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे रही है।

  • पहली बार भारत में टी20 सीरीज की मेजबानी करेगा अफगानिस्तान, अरुण जेटली स्टेडियम में भिड़ेंगी दोनों टीमें

    पहली बार भारत में टी20 सीरीज की मेजबानी करेगा अफगानिस्तान, अरुण जेटली स्टेडियम में भिड़ेंगी दोनों टीमें


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने भारत और अफगानिस्तान के बीच प्रस्तावित तीन मैचों की टी20 सीरीज की तारीखों पर मुहर लगा दी है। इस सीरीज के सभी मुकाबले दिल्ली के अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम में खेले जाएंगे। दोनों टीमों के बीच पहला टी20 मुकाबला 13 सितंबर को होगा, जबकि दूसरा मैच 15 सितंबर और तीसरा मुकाबला 17 सितंबर को खेला जाएगा। इस सीरीज के साथ भारत और अफगानिस्तान की टीमें तीनों फॉर्मेट में एक-दूसरे के खिलाफ द्विपक्षीय मुकाबला करती नजर आएंगी।

    इस सीरीज की सबसे खास बात यह है कि अफगानिस्तान पहली बार भारत की जमीन पर टी20 सीरीज में भारतीय टीम की मेजबानी करेगा। दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं और अफगानिस्तान क्रिकेट ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान तेजी से बनाई है। उसके कई खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट फैंस के बीच काफी लोकप्रिय हैं और आईपीएल में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं।

    बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मन्हास ने सीरीज को लेकर कहा कि बोर्ड अफगानिस्तान में क्रिकेट के विकास का समर्थन करने और उसके खिलाड़ियों को उच्च स्तर पर मुकाबला करने के अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने द्विपक्षीय सीरीज को दोनों टीमों के लिए नियमित रूप से मजबूत विपक्षी टीमों के खिलाफ खेलने और महत्वपूर्ण अनुभव हासिल करने का माध्यम बताया। उन्होंने भारत में अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड का स्वागत करते हुए दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंधों को और मजबूत करने की बात कही।

    बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने भी इस सीरीज को दोनों देशों के क्रिकेट संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अफगानिस्तान के बीच पिछले कुछ वर्षों में कई रोमांचक मुकाबले देखने को मिले हैं। अफगानिस्तान के खिलाड़ी भारत में क्रिकेट फैंस के बीच भी काफी लोकप्रिय हैं। सैकिया ने 2018 में भारत की ओर से अफगानिस्तान को उसके ऐतिहासिक पहले टेस्ट के लिए मेजबानी देने को दोनों देशों के क्रिकेट सफर का अहम पड़ाव बताया।

    सैकिया के मुताबिक भारत ने हाल ही में जून में अफगानिस्तान की टेस्ट और वनडे सीरीज के लिए मेजबानी की थी। अब तीन मैचों की टी20 सीरीज के साथ दोनों टीमें क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में आमने-सामने होंगी। ऐसे में सितंबर में होने वाली यह सीरीज दोनों टीमों के खिलाड़ियों के लिए अपनी तैयारियों को परखने का अच्छा मौका होगी।

    अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष मीरवाइज अशरफ ने भी सीरीज को अफगानिस्तान क्रिकेट के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत में द्विपक्षीय सीरीज की मेजबानी करना अफगानिस्तान क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धि है और बीसीसीआई के सहयोग को वह काफी महत्व देते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सीरीज क्रिकेट के साथ-साथ व्यावसायिक और तकनीकी स्तर पर भी दोनों देशों के लिए नए अवसर पैदा करेगी।

    भारत और अफगानिस्तान के बीच मुकाबले पिछले कुछ वर्षों में खासे प्रतिस्पर्धी रहे हैं। अफगानिस्तान की टीम अपनी स्पिन गेंदबाजी और आक्रामक बल्लेबाजी के दम पर भारतीय टीम को कई बार कड़ी चुनौती दे चुकी है। ऐसे में दिल्ली की पिच और परिस्थितियों में होने वाले तीनों मुकाबलों में क्रिकेट फैंस को रोमांचक टक्कर देखने की उम्मीद है। तीन मैचों की यह सीरीज दोनों देशों के बीच क्रिकेट रिश्तों को नई मजबूती देने के साथ खिलाड़ियों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता साबित करने का बड़ा मंच बनेगी।

    मैचों की तारीख

    पहला टी20: 13 सितंबर 2026
    दूसरा टी20: 15 सितंबर 2026
    तीसरा टी20: 17 सितंबर 2026
    स्थान: अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम, दिल्ली

  • ग्रीन-वेबस्टर पर जताया भरोसा, स्टार्क-बुमराह वाली तिकड़ी तैयार; बांग्लादेश टेस्ट के लिए ऑस्ट्रेलिया की XI घोषित

    ग्रीन-वेबस्टर पर जताया भरोसा, स्टार्क-बुमराह वाली तिकड़ी तैयार; बांग्लादेश टेस्ट के लिए ऑस्ट्रेलिया की XI घोषित


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला 13 अगस्त से डार्विन में खेला जाएगा। इस मुकाबले के लिए ऑस्ट्रेलिया ने अपनी प्लेइंग इलेवन का ऐलान कर दिया है। कप्तान पैट कमिंस ने टीम में कैमरून ग्रीन और ब्यू वेबस्टर दोनों ऑलराउंडरों को जगह देकर टीम के संतुलन पर भरोसा जताया है। वहीं तेज गेंदबाज स्कॉट बोलैंड और विकेटकीपर बल्लेबाज जोश इंग्लिस को पहले टेस्ट की प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली है।

    ऑस्ट्रेलिया की टीम में जेक वेदराल्ड और ट्रेविस हेड पारी की शुरुआत करेंगे। इसके बाद मार्नस लाबुशेन तीसरे नंबर पर और अनुभवी स्टीव स्मिथ चौथे नंबर पर बल्लेबाजी की जिम्मेदारी संभालेंगे। कप्तान पैट कमिंस के मुताबिक कैमरून ग्रीन को नंबर पांच पर बल्लेबाजी के लिए उतारा जाएगा। इसके बाद विकेटकीपर एलेक्स कैरी और ब्यू वेबस्टर मध्यक्रम को मजबूती देंगे।

    कमिंस ने टीम चयन के बारे में बताया कि ऑस्ट्रेलिया को कैरी और वेबस्टर का छठे और सातवें नंबर का संयोजन पसंद है। वहीं ग्रीन को इन दोनों से पहले बल्लेबाजी कराने का फैसला किया गया है। टीम प्रबंधन मिडिल ऑर्डर में ऐसा संयोजन तैयार करना चाहता है जिससे बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी में भी विकल्प मौजूद रहें। ग्रीन और वेबस्टर दोनों ऑलराउंड क्षमता के कारण टीम को अतिरिक्त संतुलन देते हैं।

    गेंदबाजी विभाग में ऑस्ट्रेलिया के पास बेहद अनुभवी और मजबूत आक्रमण है। कप्तान पैट कमिंस के साथ मिचेल स्टार्क और जोश हेजलवुड तेज गेंदबाजी की कमान संभालेंगे। इन तीनों के अनुभव के सामने बांग्लादेश के बल्लेबाजों के लिए चुनौती आसान नहीं होगी। वहीं स्पिन विभाग में अनुभवी नाथन लियोन की वापसी हुई है। एशेज सीरीज के दौरान चोटिल होने के बाद लियोन अब टेस्ट टीम में लौट रहे हैं और उनकी मौजूदगी ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाजी आक्रमण को और मजबूत करेगी।

    स्कॉट बोलैंड को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखने का फैसला हालांकि चर्चा का विषय बना हुआ है। कमिंस ने खुद माना कि बोलैंड का चयन नहीं होना उनके लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह हमेशा बेहद मुश्किल फैसला होता है और बोलैंड की टीम में अहमियत बनी हुई है। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ने संकेत दिया कि आने वाले व्यस्त टेस्ट कार्यक्रम में बोलैंड को लगातार मौके मिल सकते हैं।

    जोश इंग्लिस को भी पहले टेस्ट में जगह नहीं मिली है और एलेक्स कैरी विकेटकीपर की भूमिका निभाएंगे। ऑस्ट्रेलिया ने इस टीम के जरिए अपने अनुभव और ऑलराउंड विकल्पों का अच्छा संतुलन बनाने की कोशिश की है। दूसरी ओर बांग्लादेश के लिए ऑस्ट्रेलियाई परिस्थितियों में इस मजबूत टीम के खिलाफ मुकाबला बड़ी चुनौती होगा।

    डार्विन टेस्ट के बाद दोनों टीमें सीरीज के दूसरे मुकाबले में भिड़ेंगी। ऑस्ट्रेलिया की नजर घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाकर सीरीज में बढ़त बनाने पर होगी, जबकि बांग्लादेश मजबूत कंगारू टीम को चुनौती देकर सीरीज की शुरुआत यादगार बनाना चाहेगा।

    ऑस्ट्रेलिया की प्लेइंग XI

    जेक वेदराल्ड, ट्रेविस हेड, मार्नस लाबुशेन, स्टीव स्मिथ, कैमरून ग्रीन, एलेक्स कैरी (विकेटकीपर), ब्यू वेबस्टर, मिचेल स्टार्क, पैट कमिंस (कप्तान), नाथन लियोन, जोश हेजलवुड।

  • 85 टेस्ट के अनुभवी रहाणे अब बताएंगे क्रिकेट की बारीकियां, श्रीलंका सीरीज से कमेंट्री बॉक्स में एंट्री

    85 टेस्ट के अनुभवी रहाणे अब बताएंगे क्रिकेट की बारीकियां, श्रीलंका सीरीज से कमेंट्री बॉक्स में एंट्री


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के अनुभवी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने मैदान को अलविदा कहने के बाद अब क्रिकेट से जुड़ी अपनी नई पारी शुरू करने की तैयारी कर ली है। 38 वर्षीय रहाणे भारत और श्रीलंका के बीच होने वाली टेस्ट सीरीज से कमेंट्री की दुनिया में कदम रखेंगे। भारत और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला 15 अगस्त से गॉल में खेला जाना है और इसी मुकाबले से रहाणे कमेंट्री बॉक्स में अपनी नई भूमिका निभाते नजर आएंगे।

    रहाणे ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट से संन्यास का ऐलान किया था। 30 जुलाई 2026 को क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद अब वह अपने लंबे खेल अनुभव को एक अलग अंदाज में क्रिकेट फैंस तक पहुंचाएंगे। टेस्ट क्रिकेट में लंबे समय तक भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले रहाणे अब बल्ले की जगह माइक के जरिए खेल की रणनीतियों और बारीकियों पर अपनी राय साझा करेंगे।

    कमेंट्री में डेब्यू को लेकर रहाणे ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि भारत के श्रीलंका दौरे के लिए टेस्ट कमेंट्री में डेब्यू करने को लेकर वह उत्साहित हैं। उनके मुताबिक टेस्ट क्रिकेट खेल का शिखर है और इतने वर्षों तक इस फॉर्मेट में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद अब खेल को एक अलग नजरिए से देखना उनके लिए सौभाग्य की बात है। रहाणे ने यह भी कहा कि वह अपने अनुभव को फैंस के साथ साझा करना चाहते हैं और उन फैसलों तथा रणनीतियों को समझाने की कोशिश करेंगे जो टेस्ट मैच की दिशा तय करते हैं।

    रहाणे का कमेंट्री में पदार्पण इसलिए भी खास है क्योंकि उनका क्रिकेट करियर मुख्य रूप से टेस्ट क्रिकेट से गहराई से जुड़ा रहा है। उन्होंने 2013 में टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए डेब्यू किया था। इससे पहले 2011 में उन्होंने वनडे और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था। उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला जुलाई 2023 में टेस्ट मैच के रूप में आया था।

    अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में रहाणे ने भारत के लिए 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी20 मुकाबले खेले। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 144 पारियों में 12 शतक और 26 अर्धशतक की मदद से 5,077 रन बनाए। वनडे क्रिकेट में उनके नाम 3 शतक और 24 अर्धशतक के साथ 2,962 रन दर्ज हैं। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उन्होंने एक अर्धशतक की मदद से 375 रन बनाए।

    रहाणे की पहचान भारतीय क्रिकेट में एक भरोसेमंद टेस्ट बल्लेबाज के तौर पर रही है। मुश्किल परिस्थितियों में धैर्य के साथ बल्लेबाजी करने और टीम को संभालने की उनकी क्षमता ने उन्हें खास पहचान दिलाई। अब वही अनुभव कमेंट्री के दौरान उनके लिए सबसे बड़ा हथियार होगा। टेस्ट क्रिकेट की रणनीति, बल्लेबाजों की तकनीक, गेंदबाजों की योजना और मैच के दौरान लिए जाने वाले फैसलों पर उनकी राय फैंस के लिए दिलचस्प हो सकती है।

    भारत और श्रीलंका के बीच होने वाली टेस्ट सीरीज से रहाणे की नई भूमिका की शुरुआत ऐसे समय हो रही है जब वह खुद हाल ही में पेशेवर क्रिकेट से अलग हुए हैं। मैदान पर वर्षों के अनुभव के बाद अब कमेंट्री बॉक्स में उनका नजरिया क्रिकेट प्रेमियों को खेल को और करीब से समझने का मौका दे सकता है। ऐसे में रहाणे के फैंस के लिए यह उनके पसंदीदा क्रिकेटर को एक नए अंदाज में देखने का खास मौका होगा।