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  • टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत ने पूरे किए 2000 छक्के, संजू सैमसन ने जड़ा ऐतिहासिक शॉट और 22 गेंदों में ठोके 56 रन

    टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत ने पूरे किए 2000 छक्के, संजू सैमसन ने जड़ा ऐतिहासिक शॉट और 22 गेंदों में ठोके 56 रन


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 2000 छक्के पूरे कर लिए हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ 14 अक्टूबर को हैदराबाद में खेले गए चौथे टी20 मुकाबले के दौरान भारत ने यह ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया। भारतीय टीम इस प्रारूप में 2000 छक्के लगाने वाली दुनिया की दूसरी टीम बन गई है। इस उपलब्धि के साथ विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन ने भी अपने प्रदर्शन से खास पहचान बनाई। उन्होंने भारत की ओर से 2000वां छक्का लगाने के अलावा टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने 100 छक्के भी पूरे किए।

    भारत ने यह उपलब्धि अपने 297वें टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में हासिल की। इस प्रारूप में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाली टीमों की सूची में वेस्टइंडीज पहले स्थान पर है। कैरेबियाई टीम ने 259 मैचों में कुल 2026 छक्के लगाए हैं। भारत अब 2000 छक्कों का आंकड़ा पार करने वाली दूसरी टीम बन गया है। इस सूची में न्यूजीलैंड 1585 छक्कों के साथ तीसरे, पाकिस्तान 1507 छक्कों के साथ चौथे और दक्षिण अफ्रीका 1407 छक्कों के साथ पांचवें स्थान पर है।

    हैदराबाद में खेले गए मुकाबले में भारत का 2000वां छक्का संजू सैमसन के बल्ले से निकला। उन्होंने वेस्टइंडीज के गेंदबाज रोस्टन चेज के ओवर की तीसरी गेंद पर शानदार छक्का लगाया। इसी शॉट के साथ भारतीय टीम ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में छक्कों का दो हजार का आंकड़ा पूरा कर लिया। यह उपलब्धि भारतीय टीम की इस प्रारूप में लंबे समय से चली आ रही आक्रामक बल्लेबाजी की क्षमता को दर्शाती है।

    संजू सैमसन के लिए यह मुकाबला व्यक्तिगत उपलब्धि के लिहाज से भी खास रहा। वह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 छक्के लगाने वाले छठे भारतीय बल्लेबाज बन गए। मुकाबले के बाद उनके नाम कुल 102 छक्के दर्ज हो गए। भारतीय बल्लेबाजों में रोहित शर्मा 205 छक्कों के साथ सबसे आगे हैं। उनके बाद सूर्यकुमार यादव के 179, अभिषेक शर्मा के 141, हार्दिक पंड्या के 126 और विराट कोहली के 124 छक्के हैं। अब संजू भी इस विशेष सूची में शामिल हो गए हैं।

    मैच में संजू ने लक्ष्य का पीछा करते हुए आक्रामक बल्लेबाजी की। वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए तीन विकेट पर 247 रन बनाए थे और भारत के सामने 248 रन का लक्ष्य रखा था। इसके जवाब में संजू ने महज 22 गेंदों में 56 रन ठोक दिए। उनकी पारी में चार चौके और चार छक्के शामिल रहे। उन्होंने तेजी से रन बनाकर भारतीय पारी को अच्छी शुरुआत देने की कोशिश की।

    हालांकि, संजू की तेजतर्रार पारी के बावजूद भारतीय टीम लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी। कप्तान श्रेयस अय्यर, अभिषेक शर्मा और ईशान किशन बल्ले से अपेक्षित योगदान नहीं दे पाए। भारतीय टीम 223 रन पर सिमट गई और मुकाबला 24 रन से हार गई। इस जीत के साथ वेस्टइंडीज ने पांच मैचों की टी20 सीरीज में 2-2 की बराबरी कर ली।

    इस तरह हैदराबाद में भारत को भले ही हार का सामना करना पड़ा, लेकिन टीम ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 2000 छक्के पूरे करने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया। संजू सैमसन ने भी दो अहम उपलब्धियां हासिल कर इस मुकाबले को अपने लिए यादगार बना दिया।


  • अभिषेक शर्मा ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रचा छक्कों का नया इतिहास, एक कैलेंडर वर्ष में सूर्यकुमार यादव का रिकॉर्ड तोड़ा

    अभिषेक शर्मा ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रचा छक्कों का नया इतिहास, एक कैलेंडर वर्ष में सूर्यकुमार यादव का रिकॉर्ड तोड़ा


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक कैलेंडर वर्ष के दौरान सबसे ज्यादा छक्के लगाने का नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। वेस्टइंडीज के खिलाफ हैदराबाद में खेले गए पांच मैचों की टी20 सीरीज के चौथे मुकाबले में अभिषेक ने 29 रन की पारी खेली।भले ही वह इस मैच में बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं रहे, लेकिन अपनी छोटी पारी के दौरान उन्होंने एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली। अभिषेक अब साल 2026 में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 69 छक्के लगा चुके हैं। उन्होंने इस मामले में सूर्यकुमार यादव को पीछे छोड़ दिया है, जिन्होंने वर्ष 2022 में 68 छक्के लगाए थे।

    14 अक्टूबर को हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय टीम को 24 रन से हार का सामना करना पड़ा। वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए तीन विकेट के नुकसान पर 247 रन बनाए और भारत के सामने 248 रन का लक्ष्य रखा। जवाब में भारतीय टीम निर्धारित लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी और उसकी पारी 223 रन पर समाप्त हो गई। इस जीत के साथ वेस्टइंडीज ने पांच मैचों की टी20 सीरीज में 2-2 की बराबरी कर ली।

    अभिषेक शर्मा ने अपनी 29 रन की पारी के दौरान 24 गेंदों का सामना किया और तीन चौके तथा एक छक्का लगाया। शुरुआती ओवरों में उन्हें तेजी से रन बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। संजू सैमसन ने शुरुआती चरण में अधिक स्ट्राइक अपने पास रखी, जबकि वेस्टइंडीज के गेंदबाजों ने अभिषेक को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। पावरप्ले के बाद उनका स्ट्राइक रेट भी 100 से नीचे था।

    पारी के नौवें ओवर में शमर स्प्रिंगर की गेंद पर अभिषेक ने आगे बढ़कर जोरदार छक्का लगाया। इसी छक्के के साथ उन्होंने सूर्यकुमार यादव के एक कैलेंडर वर्ष में सर्वाधिक छक्के लगाने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इस तरह अभिषेक ने उस समय नया मुकाम हासिल किया, जब उनका व्यक्तिगत स्कोर बड़ा नहीं था।

    अभिषेक ने वर्ष 2026 की शुरुआत आक्रामक अंदाज में की थी। न्यूजीलैंड के खिलाफ नागपुर में उन्होंने 35 गेंदों पर 84 रन बनाए थे। इस पारी में उनके बल्ले से आठ छक्के निकले थे। इसके बाद गुवाहाटी में उन्होंने 20 गेंदों पर नाबाद 68 रन की पारी खेली और पांच छक्के लगाए।

    हालांकि, इन शानदार पारियों के बाद उनका बल्ला कुछ समय तक खामोश रहा। कई मुकाबलों में वह खाता खोलने में भी नाकाम रहे। इसके बावजूद उन्होंने वापसी करते हुए छक्कों के मामले में नया रिकॉर्ड स्थापित कर दिया।

    चौथे टी20 मुकाबले में वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी का नेतृत्व शाई होप ने किया। उन्होंने 50 गेंदों पर नाबाद 102 रन बनाए। पारी की आखिरी गेंद पर छक्का लगाकर उन्होंने अपना शतक पूरा किया।

    यह मौजूदा दौरे पर उनका चौथा और टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर का तीसरा शतक था। शेरफेन रदरफोर्ड ने भी 26 गेंदों पर नाबाद 49 रन की तेज पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए केवल 43 गेंदों में 91 रन की साझेदारी की, जिससे वेस्टइंडीज बड़ा स्कोर खड़ा करने में सफल रहा।

    भारतीय गेंदबाजों के लिए यह मुकाबला चुनौतीपूर्ण रहा। मयंक यादव और अर्शदीप सिंह ने अपने-अपने चार ओवरों में 52-52 रन दिए। भारतीय टीम ने क्षेत्ररक्षण के दौरान भी कुछ मौके गंवाए। इसके अलावा टीम ने 18 अतिरिक्त रन दिए, जिसका वेस्टइंडीज को फायदा मिला। मेहमान टीम ने अपनी पारी में कुल 16 छक्के लगाए और बड़े स्कोर के दम पर मुकाबला जीत लिया। इस परिणाम से सीरीज फिर बराबरी पर आ गई, जबकि अभिषेक शर्मा ने अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि के जरिए टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नया रिकॉर्ड कायम किया।

  • 1. भारतीय कुश्ती को विश्व मंच पर बड़ी कामयाबी, विश्वजीत मोरे ने जीता ऐतिहासिक रजत पदक, फाइनल में कांटे की टक्कर

    1. भारतीय कुश्ती को विश्व मंच पर बड़ी कामयाबी, विश्वजीत मोरे ने जीता ऐतिहासिक रजत पदक, फाइनल में कांटे की टक्कर


    नई दिल्ली। भारतीय कुश्ती के लिए अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप से बड़ी उपलब्धि सामने आई है। भारतीय पहलवान विश्वजीत रामचंद्र मोरे ने पुरुषों की 55 किलोग्राम ग्रीको-रोमन स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। लास वेगास में आयोजित प्रतियोगिता के फाइनल में विश्वजीत को जॉर्जिया के कोबा कारुमिद्जे के खिलाफ बेहद करीबी मुकाबले में 12-13 से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि वह गोल्ड मेडल जीतने से चूक गए लेकिन उनका रजत पदक भारतीय कुश्ती के लिए खास उपलब्धि बन गया। वह अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप की ग्रीको-रोमन स्पर्धा में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले पहलवान बने। इससे पहले वह इस स्तर पर दो बार ब्रॉन्ज मेडल भी जीत चुके हैं।

    विश्वजीत मोरे ने टूर्नामेंट में अपने अभियान की शुरुआत दमदार अंदाज में की। पहले मुकाबले में उन्होंने मेक्सिको के इसाक मारिन माटा को 10-8 से हराकर अगले दौर में जगह बनाई। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में उनका सामना ईरान के अंडर-20 वर्ल्ड चैंपियन आर्मिन शमसीपौर से हुआ। इस मुकाबले में ईरानी पहलवान के कंधे में चोट लग गई। विश्वजीत ने मौके का फायदा उठाते हुए चार अंक दिलाने वाला शानदार थ्रो लगाया और 8-1 से मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ उन्होंने सेमीफाइनल में प्रवेश किया और पदक की उम्मीदों को मजबूत कर दिया।

    सेमीफाइनल में विश्वजीत के सामने रूस के मलिक गिगिएव की चुनौती थी। दोनों पहलवानों के बीच मुकाबला काफी रोमांचक रहा। मुकाबले के दौरान दोनों पक्षों ने रेफरी के फैसलों को चुनौती देने का विकल्प भी इस्तेमाल किया। कड़े संघर्ष के बाद विश्वजीत ने 6-4 से जीत दर्ज की और फाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया। वह अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप के ग्रीको-रोमन वर्ग में फाइनल तक पहुंचने वाले भारत के पहले पहलवान बने। फाइनल में पहुंचने के बाद उनकी नजरें गोल्ड मेडल पर थीं। यदि वह खिताबी मुकाबला जीत जाते तो इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल करने वाले पहले भारतीय पहलवान बन सकते थे।

    फाइनल में विश्वजीत और जॉर्जिया के कोबा कारुमिद्जे के बीच आखिरी समय तक कड़ी टक्कर देखने को मिली। दोनों पहलवानों ने जीत के लिए पूरा जोर लगाया लेकिन अंत में कारुमिद्जे ने 13-12 से मुकाबला जीत लिया। इस तरह विश्वजीत का गोल्ड मेडल जीतने का सपना पूरा नहीं हो सका। जॉर्जियाई पहलवान ने भी फाइनल तक पहुंचने के लिए कठिन मुकाबले खेले थे। उन्होंने सेमीफाइनल में किर्गिस्तान के बार्सबेक असनकोझोएव को हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई थी। करीबी हार के बावजूद विश्वजीत का प्रदर्शन भारतीय टीम के लिए बड़ी उपलब्धि रहा।

    इस चैंपियनशिप में भारत के अभियान को वीजा संबंधी परेशानी का भी सामना करना पड़ा। भारतीय कुश्ती महासंघ के प्रमुख संजय सिंह के अनुसार ग्रीको-रोमन और महिला कुश्ती वर्ग के नौ भारतीय पहलवानों को अमेरिकी वीजा नहीं मिल सका। उन्होंने दावा किया कि इन पहलवानों की उम्र 20 वर्ष से कम थी और उनके पास पूर्णकालिक नौकरी नहीं थी। संजय सिंह ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि कुछ पहलवान पदक जीतने के मजबूत दावेदार थे। उन्होंने यह भी कहा कि यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग के अध्यक्ष ने इस मामले में अमेरिकी दूतावास को पत्र लिखा था। वीजा विवाद के कारण भारतीय टीम की पदक संभावनाओं पर असर पड़ने का दावा किया गया है। हालांकि विश्वजीत मोरे ने अपने प्रदर्शन से देश को ऐतिहासिक रजत पदक दिलाया और अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में भारत की उपलब्धियों में एक नया अध्याय जोड़ दिया।

  • बेंगलुरु मैच से पहले पुजारा ने टीम इंडिया को चेताया, गेंदबाजी में सुधार की सलाह, वेस्टइंडीज के तीन बल्लेबाजों की तारीफ

    बेंगलुरु मैच से पहले पुजारा ने टीम इंडिया को चेताया, गेंदबाजी में सुधार की सलाह, वेस्टइंडीज के तीन बल्लेबाजों की तारीफ


    नई दिल्ली। भारत के पूर्व बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबले में टीम के प्रदर्शन का विश्लेषण करते हुए शाई होप की बल्लेबाजी और कीमो पॉल की गेंदबाजी की जमकर तारीफ की है। पुजारा के मुताबिक शाई होप ने जिस संयम और समझदारी के साथ बल्लेबाजी की उसने भारतीय गेंदबाजों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। वहीं कीमो पॉल का निर्णायक गेंदबाजी स्पेल मैच का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। पुजारा ने भारतीय गेंदबाजी की कमजोरियों की ओर भी ध्यान दिलाया और कहा कि बेंगलुरु में होने वाले अगले मुकाबले में टीम इंडिया को अपनी रणनीति में सुधार करना होगा। गेंदबाजों को सही लेंथ के साथ अधिक विविधता दिखानी होगी ताकि विपक्षी बल्लेबाजों को आसानी से रन बनाने का मौका न मिले।

    पुजारा ने शाई होप की बल्लेबाजी को वेस्टइंडीज की सफलता का प्रमुख आधार बताया। उनका कहना है कि होप बिना सोचे-समझे आक्रामक शॉट खेलने के बजाय अपने स्वाभाविक खेल पर भरोसा करते हैं। वह गेंद की दिशा और गति को समझकर सही गैप में शॉट लगाते हैं। इसी वजह से वह कम जोखिम लेते हुए भी तेजी से रन बनाने में सफल रहते हैं। पुजारा के अनुसार होप की टाइमिंग और अपनी पसंदीदा जगहों पर शॉट खेलने की क्षमता उन्हें खास बनाती है। स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ भी उनका प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है। ऐसी पिच पर जहां बल्लेबाजों के लिए स्पिनरों पर हावी होना आसान नहीं था वहां होप ने अपने खेल पर नियंत्रण बनाए रखा और गेंदबाजों को दबाव बनाने का ज्यादा मौका नहीं दिया।

    पूर्व भारतीय बल्लेबाज ने होप के निरंतर प्रदर्शन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब कोई बल्लेबाज अपनी तकनीक और रणनीति को लेकर स्पष्ट होता है तो उसे रोकना गेंदबाजों के लिए मुश्किल हो जाता है। होप ने पूरी सीरीज में प्रभावशाली बल्लेबाजी की है और उनके आंकड़े भी उनकी निरंतरता को दर्शाते हैं। पुजारा ने शिमरोन हेटमायर और शेरफेन रदरफोर्ड की भी तारीफ की। उनके मुताबिक इन बल्लेबाजों ने भी भारतीय गेंदबाजी योजनाओं की कमजोरियों को पहचाना और जरूरत के मुताबिक आक्रामक रुख अपनाया। इन खिलाड़ियों के सामूहिक योगदान ने वेस्टइंडीज को मुकाबले में मजबूत स्थिति दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

    पुजारा ने कीमो पॉल की गेंदबाजी को जीत का निर्णायक मोड़ बताया। पॉल ने अपनी पहली ही गेंद पर संजू सैमसन को आउट कर भारतीय टीम को बड़ा झटका दिया। इसके बाद उसी ओवर में ईशान किशन का विकेट लेकर उन्होंने दबाव और बढ़ा दिया। फिर 19वें ओवर में तीन विकेट लेकर मुकाबले का रुख बदल दिया। पुजारा के मुताबिक मुश्किल परिस्थिति में इस तरह का प्रदर्शन टीम के आत्मविश्वास को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि वेस्टइंडीज ने दबाव के बावजूद शानदार वापसी की और अपने प्रदर्शन से यह संदेश दिया कि टीम मुकाबले में जीत हासिल करने के इरादे से उतरी थी।

    भारतीय गेंदबाजी पर बात करते हुए पुजारा ने कहा कि पावरप्ले के दौरान और उसके बाद गेंदबाज सही लेंथ बनाए रखने में नाकाम रहे। साथ ही गेंदबाजी में पर्याप्त विविधता भी नजर नहीं आई। उन्होंने नमन धीर की गेंदबाजी का उल्लेख करते हुए कहा कि वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने उनकी लेंथ को जल्दी समझ लिया और खराब गेंदों का फायदा उठाया। ऐसे बल्लेबाजों के सामने छोटी सी चूक भी भारी पड़ सकती है। पुजारा ने सलाह दी कि बेंगलुरु में भारतीय गेंदबाजों को बेहतर लाइन और लेंथ के साथ गेंदबाजी करनी होगी और अपनी रणनीति में बदलाव करते रहना होगा। अगले मुकाबले में टीम इंडिया के सामने चुनौती होगी कि वह वेस्टइंडीज के आक्रामक बल्लेबाजों पर लगाम लगाए और पिछली गलतियों से सबक लेकर बेहतर प्रदर्शन करे।

  • दूसरे टेस्ट में पलटवार की तैयारी में साउथ अफ्रीका, स्टब्स की जगह ब्रीट्जके को चुना, रबाडा की वापसी पर नजरें

    दूसरे टेस्ट में पलटवार की तैयारी में साउथ अफ्रीका, स्टब्स की जगह ब्रीट्जके को चुना, रबाडा की वापसी पर नजरें


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे टेस्ट मुकाबले से पहले साउथ अफ्रीका ने अपनी 17 सदस्यीय टीम का ऐलान कर दिया है। टीम में पहले टेस्ट के मुकाबले केवल एक बदलाव किया गया है। खराब प्रदर्शन के बाद ट्रिस्टन स्टब्स को टीम से बाहर कर दिया गया है जबकि उनकी जगह मैथ्यू ब्रीट्जके को शामिल किया गया है। इसके साथ ही विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी रयान रिकेलटन संभालेंगे। पहले टेस्ट में हार का सामना करने वाली साउथ अफ्रीकी टीम दूसरे मुकाबले में वापसी करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। चयनकर्ताओं ने टीम के बाकी खिलाड़ियों पर भरोसा कायम रखा है और तेज गेंदबाजी के विकल्पों में भी बदलाव नहीं किया है।

    पहले टेस्ट में ट्रिस्टन स्टब्स का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था। वह पहली पारी में 32 रन बना सके जबकि दूसरी पारी में उनके बल्ले से केवल एक रन निकला। इसके बाद टीम प्रबंधन ने दूसरे टेस्ट के लिए उनकी जगह मैथ्यू ब्रीट्जके को मौका देने का फैसला किया। ब्रीट्जके ने अब तक साउथ अफ्रीका के लिए केवल दो टेस्ट मैच खेले हैं। उन्होंने अक्टूबर 2024 में बांग्लादेश और जुलाई 2025 में जिम्बाब्वे के खिलाफ टेस्ट मुकाबलों में हिस्सा लिया था। इन दोनों मैचों में वह कुल 14 रन ही बना सके थे। हालांकि सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनका हालिया प्रदर्शन बेहतर रहा है और इसी फॉर्म ने टीम में उनकी वापसी का रास्ता बनाया है।

    ब्रीट्जके ने हाल ही में डरबन में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए पहले वनडे मुकाबले में शानदार शतक लगाया था। उनके इस प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन का ध्यान खींचा। साउथ अफ्रीका के मुख्य कोच शुकरी कॉनराड ने भी उनकी हालिया फॉर्म और व्यक्तित्व को चयन का अहम आधार बताया। क्रिकेट साउथ अफ्रीका की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए वीडियो में कॉनराड ने कहा कि ब्रीट्जके पहले भी टीम का हिस्सा रह चुके हैं और उनकी बेहतरीन वनडे फॉर्म ने उन्हें दूसरे खिलाड़ियों के मुकाबले बढ़त दिलाई। कोच के मुताबिक खिलाड़ी का रवैया और चरित्र भी टीम के लिए महत्वपूर्ण है।

    दूसरे टेस्ट में बल्लेबाजी क्रम को लेकर भी टीम प्रबंधन को फैसला करना होगा। रयान रिकेलटन विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी संभालेंगे। ऐसे में यह तय किया जाना है कि वह बल्लेबाजी क्रम में नीचे उतरेंगे या पहले की तरह पारी की शुरुआत करते रहेंगे। बल्लेबाजी क्रम में होने वाला यह बदलाव टीम की रणनीति को प्रभावित कर सकता है। साउथ अफ्रीका को ऑस्ट्रेलिया के मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के सामने बेहतर प्रदर्शन करना होगा ताकि वह सीरीज में वापसी की उम्मीद कायम रख सके।

    टीम में टोनी डी जोर्जी को शामिल नहीं किया गया है क्योंकि वह बाईं हैमस्ट्रिंग की चोट से उबर रहे हैं। वहीं तेज गेंदबाज कगिसो रबाडा की प्लेइंग इलेवन में वापसी की उम्मीद जताई जा रही है। हैमस्ट्रिंग में हल्की चोट के कारण वह डरबन में खेले गए पहले टेस्ट से बाहर रहे थे। तेज गेंदबाजी विभाग में एनरिक नॉर्टजे और मार्को जानसन के साथ वियान मुल्डर गेराल्ड कोएत्जी डेन पैटरसन और कॉर्बिन बॉश जैसे विकल्प मौजूद हैं।

    दूसरे टेस्ट के लिए घोषित टीम में कप्तान टेम्बा बावुमा के अलावा मार्केस एकरमैन डेविड बेडिंगहैम मैथ्यू ब्रीट्जके कॉर्बिन बॉश गेराल्ड कोएत्जी साइमन हार्मर मार्को जानसन केशव महाराज एडेन मार्कराम वियान मुल्डर सेनुरन मुथुसामी एनरिक नॉर्टजे डेन पैटरसन कगिसो रबाडा रयान रिकेलटन और काइल वेरिन को जगह दी गई है। दूसरा टेस्ट रविवार से शुरू होगा। पहले मैच में हार के बाद साउथ अफ्रीका के सामने अब प्रदर्शन सुधारने और मजबूत वापसी करने की चुनौती होगी।

  • IPL में युवराज सिंह की नई पारी, दिल्ली कैपिटल्स के बैटिंग कोच बनकर लौटेंगे मैदान पर, सौरव गांगुली के साथ करेंगे काम

    IPL में युवराज सिंह की नई पारी, दिल्ली कैपिटल्स के बैटिंग कोच बनकर लौटेंगे मैदान पर, सौरव गांगुली के साथ करेंगे काम

    नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह एक बार फिर इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में नई भूमिका में नजर आ सकते हैं। अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और लंबे-लंबे छक्कों के लिए मशहूर युवराज सिंह के दिल्ली कैपिटल्स से जुड़ने की चर्चा है। सामने आ रही रिपोर्ट के मुताबिक, वह आगामी आईपीएल सीजन में टीम के बैटिंग कोच की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। यदि यह नियुक्ति होती है, तो युवराज पहली बार इस फ्रेंचाइजी के साथ कोचिंग की भूमिका में दिखाई देंगे। हालांकि, उनकी नियुक्ति को लेकर आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

    युवराज सिंह भारतीय क्रिकेट के उन खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने अपनी बल्लेबाजी और ऑलराउंड प्रदर्शन से खास पहचान बनाई। सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। बड़े मुकाबलों में तेजी से रन बनाने और दबाव की परिस्थितियों में खेलने की क्षमता ने उन्हें प्रशंसकों के बीच लोकप्रिय बनाया। मैदान पर लंबे छक्के लगाने के लिए मशहूर युवराज को सिक्सर किंग भी कहा जाता है। अब उनके संभावित कोचिंग करियर को लेकर चर्चा ने आईपीएल में उनकी वापसी की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।

    दिल्ली कैपिटल्स के साथ युवराज सिंह के जुड़ने की खबर इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि टीम अपने बल्लेबाजी विभाग को मजबूत करने की दिशा में काम कर सकती है। बैटिंग कोच की भूमिका में युवराज खिलाड़ियों को बल्लेबाजी तकनीक, शॉट चयन, दबाव में प्रदर्शन और मैच की परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बनाने में मदद कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल में खेलने का उनका अनुभव युवा खिलाड़ियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि, टीम के बल्लेबाजी विभाग में उनकी संभावित जिम्मेदारियों का आधिकारिक विवरण सामने आना बाकी है।

    इस संभावित नियुक्ति में सौरव गांगुली की भूमिका भी चर्चा में है। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली दिल्ली कैपिटल्स के साथ जुड़े रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, युवराज सिंह उनके साथ मिलकर काम कर सकते हैं। गांगुली और युवराज दोनों भारतीय क्रिकेट के अनुभवी नाम हैं और उन्होंने अलग-अलग दौर में भारतीय टीम की सफलता में योगदान दिया है। ऐसे में यदि दोनों दिल्ली कैपिटल्स के साथ एक ही टीम प्रबंधन व्यवस्था में काम करते हैं, तो उनके अनुभव का लाभ फ्रेंचाइजी को मिल सकता है।

    दिल्ली कैपिटल्स लंबे समय से आईपीएल खिताब जीतने की कोशिश कर रही है। टीम के सामने हर सीजन बेहतर संयोजन तैयार करने, बल्लेबाजी में निरंतरता बनाए रखने और अहम मौकों पर अच्छा प्रदर्शन करने की चुनौती रहती है। युवराज जैसे अनुभवी पूर्व खिलाड़ी का कोचिंग स्टाफ से जुड़ना इन पहलुओं पर काम करने का अवसर दे सकता है। खास तौर पर युवा बल्लेबाजों को बड़े मुकाबलों के लिए तैयार करने में उनका अनुभव अहम हो सकता है।

    फिलहाल, युवराज सिंह की दिल्ली कैपिटल्स में संभावित नियुक्ति को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनकी भूमिका, अनुबंध और टीम के कोचिंग स्टाफ में जिम्मेदारियों की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही तस्वीर साफ होगी। यदि यह खबर सही साबित होती है, तो आईपीएल में खिलाड़ी के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले युवराज एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकते हैं। प्रशंसकों की नजरें अब फ्रेंचाइजी की आधिकारिक घोषणा पर रहेंगी।
  • IPL 2027 में रोहित शर्मा फिर बन सकते हैं मुंबई इंडियंस के कप्तान, हार्दिक पंड्या के भविष्य पर भी उठे सवाल

    IPL 2027 में रोहित शर्मा फिर बन सकते हैं मुंबई इंडियंस के कप्तान, हार्दिक पंड्या के भविष्य पर भी उठे सवाल


    नई दिल्ली:
    इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2027 से पहले मुंबई इंडियंस की कप्तानी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पांच बार टीम को चैंपियन बनाने वाले रोहित शर्मा एक बार फिर फ्रेंचाइजी की कमान संभाल सकते हैं। सामने आ रही रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि टीम प्रबंधन आगामी सीजन के लिए अपने सबसे सफल कप्तान को दोबारा नेतृत्व सौंपने पर विचार कर रहा है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में रोहित की वापसी और हार्दिक पंड्या की भूमिका को लेकर अंतिम फैसला होना बाकी है।

    रोहित शर्मा की कप्तानी में मुंबई इंडियंस ने 2013, 2015, 2017, 2019 और 2020 में आईपीएल का खिताब जीता था। उनकी अगुवाई में टीम ने लीग की सबसे सफल फ्रेंचाइजी में अपनी जगह बनाई। इसके बाद आईपीएल 2024 से पहले रोहित की जगह हार्दिक पंड्या को कप्तान बनाया गया था। हार्दिक गुजरात टाइटंस से मुंबई में लौटे थे। कप्तानी में इस बदलाव को लेकर काफी चर्चा हुई थी और टीम के समर्थकों के बीच भी इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।

    हार्दिक की कप्तानी में मुंबई इंडियंस का प्रदर्शन उतार-चढ़ाव भरा रहा। आईपीएल 2024 में टीम अंक तालिका में सबसे नीचे रही थी। इसके बाद 2025 में उसने वापसी करते हुए प्लेऑफ तक का सफर तय किया, लेकिन खिताब जीतने में सफल नहीं हुई।
    वर्ष 2026 में भी टीम का प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा और वह नौवें स्थान पर रही। लगातार खिताब से दूर रहने के कारण टीम की रणनीति और नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ऐसे में रोहित को फिर से कप्तानी सौंपने की संभावना चर्चा का विषय बनी हुई है।

    अगर रोहित शर्मा की कप्तानी में वापसी होती है, तो हार्दिक पंड्या के भविष्य पर भी इसका असर पड़ सकता है। रिपोर्टों में हार्दिक को दूसरी फ्रेंचाइजी में ट्रेड किए जाने की संभावना जताई गई है। इस सिलसिले में राजस्थान रॉयल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स जैसी टीमों के नाम भी चर्चा में आए हैं। हालांकि, हार्दिक को लेकर किसी संभावित सौदे पर अंतिम सहमति बनने या उनके मुंबई इंडियंस छोड़ने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। किसी भी ट्रेड के लिए संबंधित फ्रेंचाइजी के बीच शर्तों पर सहमति जरूरी होगी।

    मुंबई इंडियंस के पास कप्तानी के अन्य विकल्प भी मौजूद हैं। सूर्यकुमार यादव और तिलक वर्मा को संभावित उम्मीदवारों के रूप में देखा जा रहा है। सूर्यकुमार को टीम की कप्तानी करने का अनुभव है और वह भारतीय टी20 टीम की भी अगुवाई कर चुके हैं। वहीं, तिलक वर्मा युवा खिलाड़ी हैं और भारतीय क्रिकेट में उनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में फ्रेंचाइजी को अनुभवी कप्तान और भविष्य के नेतृत्व विकल्पों के बीच फैसला करना होगा।

    रोहित शर्मा की उम्र भी टीम की दीर्घकालिक योजना के लिहाज से अहम हो सकती है। वह आईपीएल 2027 के दौरान 40 वर्ष के हो जाएंगे। यदि उन्हें दोबारा कप्तानी मिलती है, तो मुंबई को भविष्य के कप्तान की तैयारी पर भी ध्यान देना पड़ सकता है। फिलहाल, रोहित की वापसी की खबरें चर्चाओं और रिपोर्टों पर आधारित हैं। मुंबई इंडियंस की ओर से आधिकारिक निर्णय सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि अगले सीजन में टीम की कमान किसके हाथों में होगी।

  • बांग्लादेश दौरे के लिए वेस्टइंडीज ने चुनी 15 सदस्यीय टीम, रोस्टन चेस संभालेंगे कप्तानी, अल्जारी जोसेफ बाहर

    बांग्लादेश दौरे के लिए वेस्टइंडीज ने चुनी 15 सदस्यीय टीम, रोस्टन चेस संभालेंगे कप्तानी, अल्जारी जोसेफ बाहर


    नई दिल्ली । बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड ने 15 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। रोस्टन चेस की कप्तानी वाली इस टीम में युवा बल्लेबाज केविन विकम को पहली बार टेस्ट टीम में जगह मिली है। 23 वर्षीय विकम ने घरेलू क्रिकेट में अपने शानदार प्रदर्शन से चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा है। साल 2026 की वेस्टइंडीज चैंपियनशिप में लगातार तीन शतकीय पारियां खेलकर उन्होंने अपनी बल्लेबाजी क्षमता साबित की थी। अब उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का अवसर मिलेगा। दोनों टीमों के बीच पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से मीरपुर में खेला जाएगा जबकि दूसरा मुकाबला 5 नवंबर से सिलहट में शुरू होगा।

    केविन विकम घरेलू क्रिकेट में मध्यक्रम के भरोसेमंद बल्लेबाज के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने अब तक 25 प्रथम श्रेणी मुकाबलों में 40 से अधिक की औसत से रन बनाए हैं और उनके नाम छह शतक दर्ज हैं। चैंपियनशिप में लगातार तीन शतक लगाने का उनका प्रदर्शन चयन का प्रमुख आधार बना। वेस्टइंडीज को उम्मीद होगी कि विकम टेस्ट क्रिकेट में भी अपनी बल्लेबाजी से टीम को मजबूती देंगे। हालांकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहली बार मौका मिलने के कारण उनके सामने खुद को साबित करने की चुनौती भी होगी। टीम में अनुभव और युवा प्रतिभा के संतुलन के लिहाज से उनका चयन अहम माना जा रहा है।

    टीम में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी किए गए हैं। सीमित ओवरों की टीम के कप्तान शाई होप को इस टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। वहीं तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ को नियमित चिकित्सा जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद टीम में शामिल नहीं किया गया है। क्रिकेट वेस्टइंडीज ने उनकी सहमति से कार्यभार प्रबंधन का फैसला लिया है। जोसेफ छोटे प्रारूपों में टीम के विकल्प बने रहेंगे। उनकी जगह ऑलराउंडर कीमो पॉल को टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इससे टीम को गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में भी अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।

    सलामी बल्लेबाज जॉन कैंपबेल ने हैमस्ट्रिंग की चोट से उबरने के बाद टीम में वापसी की है। इसके अलावा श्रीलंका के खिलाफ जीत और पाकिस्तान के खिलाफ ड्रॉ खेलने वाली टीम के अधिकांश खिलाड़ियों को बरकरार रखा गया है। घोषित टीम में तीन तेज गेंदबाजी विकल्प दो तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर और दो विशेषज्ञ स्पिनर शामिल हैं। बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में स्पिन गेंदबाजों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में वेस्टइंडीज की रणनीति में तेज गेंदबाजी और स्पिन के बीच संतुलन बनाए रखना अहम होगा।

    वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने सीरीज को टीम के लिए महत्वपूर्ण बताया है। उनके मुताबिक विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने रैंकिंग के शीर्ष आधे हिस्से में जगह बनाने का लक्ष्य तय किया था। बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम इस लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी ने माना कि बांग्लादेश को उसके घरेलू मैदान पर चुनौती देना आसान नहीं होगा लेकिन टीम इस मुकाबले के लिए तैयार है।

    विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 में वेस्टइंडीज की यह आखिरी सीरीज होगी। टीम 18 अक्टूबर को बांग्लादेश पहुंचेगी और 22 से 24 अक्टूबर तक ढाका में तीन दिवसीय अभ्यास मैच खेलेगी। इसके बाद टेस्ट सीरीज में उसका सामना मेजबान टीम से होगा। वेस्टइंडीज के लिए यह दौरा अंक तालिका में अपनी स्थिति बेहतर करने का अहम अवसर है। वहीं केविन विकम के लिए यह पहला टेस्ट कॉल-अप करियर की नई शुरुआत साबित हो सकता है।

    वेस्टइंडीज टीम: रोस्टन चेस कप्तान जोमेल वारिकन उपकप्तान जोशुआ बिशप जॉन कैंपबेल तेजनारायण चंद्रपॉल जोशुआ डा सिल्वा जस्टिन ग्रीव्स कावेम हॉज आमिर जंगू शमार जोसेफ ब्रैंडन किंग कीमो पॉल केमर रोच जेडन सील्स और केविन विकम।

  • 45 साल के हुए गौतम गंभीर, वर्ल्ड कप फाइनल की पारियों से लेकर नेपियर के 137 रन तक, जानिए उनके करियर के यादगार पल

    45 साल के हुए गौतम गंभीर, वर्ल्ड कप फाइनल की पारियों से लेकर नेपियर के 137 रन तक, जानिए उनके करियर के यादगार पल


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के मौजूदा मुख्य कोच गौतम गंभीर बुधवार 14 अक्टूबर को अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं। बतौर खिलाड़ी गंभीर ने भारतीय क्रिकेट को कई यादगार पल दिए। टी20 विश्व कप 2007 के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 75 रन और वनडे विश्व कप 2011 के फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ 97 रन की उनकी पारियां आज भी क्रिकेट प्रशंसकों के जेहन में ताजा हैं। हालांकि गंभीर के करियर की एक और पारी ऐसी है जो उनकी तकनीक धैर्य और संघर्ष क्षमता की मिसाल मानी जाती है। साल 2009 में न्यूजीलैंड के नेपियर में खेली गई 137 रन की उनकी पारी ने भारतीय टीम को निश्चित दिखाई दे रही हार से बचाने में अहम भूमिका निभाई थी।

    नेपियर टेस्ट में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए नौ विकेट पर 619 रन बनाकर पारी घोषित कर दी थी। इसके जवाब में भारतीय टीम पहली पारी में महज 305 रन पर सिमट गई और उसे फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर होना पड़ा। भारतीय टीम के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती मैच बचाने की थी। दूसरी पारी में विकेट जल्दी गिरते तो न्यूजीलैंड की जीत लगभग तय हो सकती थी। ऐसे मुश्किल हालात में गौतम गंभीर वीरेंद्र सहवाग के साथ सलामी बल्लेबाज के रूप में मैदान पर उतरे। सहवाग 22 रन बनाकर आउट हो गए लेकिन गंभीर ने एक छोर संभालकर बल्लेबाजी जारी रखी।

    गंभीर ने इसके बाद राहुल द्रविड़ के साथ दूसरे विकेट के लिए 133 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। दोनों बल्लेबाजों ने 376 गेंदों का सामना करते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों को लंबे समय तक विकेट के लिए तरसाया। द्रविड़ ने 62 रन बनाए। उनके आउट होने के बाद गंभीर ने सचिन तेंदुलकर के साथ तीसरे विकेट के लिए 97 रन जोड़े। तेंदुलकर ने 64 रन का योगदान दिया। इसके बाद वीवीएस लक्ष्मण के साथ गंभीर ने चौथे विकेट के लिए 96 रन की साझेदारी की। इस दौरान भारतीय बल्लेबाजों का मुख्य लक्ष्य तेजी से रन बनाना नहीं बल्कि क्रीज पर टिके रहकर मैच को हार से बचाना था।

    गंभीर की एकाग्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 436 गेंदों का सामना करते हुए 137 रन बनाए। वह करीब 643 मिनट तक क्रीज पर डटे रहे। उनकी इस मैराथन पारी ने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों को लगातार मेहनत करने पर मजबूर किया और भारतीय टीम को मुकाबले में बनाए रखा। गंभीर के आउट होने के बाद लक्ष्मण ने नाबाद 124 रन बनाए जबकि युवराज सिंह 54 रन बनाकर नाबाद रहे। दोनों ने बचा हुआ समय निकालते हुए न्यूजीलैंड को जीत से दूर रखा। मैच समाप्त होने तक भारत ने दूसरी पारी में चार विकेट पर 476 रन बना लिए थे और मुकाबला ड्रॉ हो गया।

    इस ऐतिहासिक मुकाबले में द्रविड़ सचिन लक्ष्मण और युवराज ने भी अहम योगदान दिया लेकिन गंभीर की पारी को भारतीय टेस्ट क्रिकेट के धैर्यपूर्ण प्रदर्शनों में विशेष स्थान मिलता है। यह पारी बताती है कि क्रिकेट में हर बार बड़ी जीत के लिए तेज रन बनाना जरूरी नहीं होता। कभी-कभी क्रीज पर टिके रहना और परिस्थितियों के अनुसार खेलना भी टीम के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि बन जाता है।

    14 अक्टूबर 1981 को दिल्ली में जन्मे गंभीर ने 2003 से 2016 के बीच भारत के लिए 58 टेस्ट 147 वनडे और 37 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। उन्होंने टेस्ट में 4154 वनडे में 5238 और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 932 रन बनाए। 2011 के वनडे विश्व कप और 2007 के टी20 विश्व कप में भारत की खिताबी जीत में उनकी भूमिका बेहद अहम रही। साल 2018 में संन्यास लेने के बाद गंभीर ने कोचिंग और क्रिकेट प्रशासन में अपनी नई पारी शुरू की। नौ जुलाई 2024 को भारतीय टीम के मुख्य कोच बने गंभीर के नेतृत्व में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 और टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीता। खिलाड़ी के रूप में संघर्ष और निर्णायक मौकों पर प्रदर्शन करने वाले गंभीर अब कोच के तौर पर भारतीय क्रिकेट को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

  • 71 रन की पारी के दौरान चोटिल हुईं लिचफील्ड, तीसरे वनडे से हुईं बाहर, न्यूजीलैंड सीरीज से भी कट सकता है पत्ता

    71 रन की पारी के दौरान चोटिल हुईं लिचफील्ड, तीसरे वनडे से हुईं बाहर, न्यूजीलैंड सीरीज से भी कट सकता है पत्ता


    नई दिल्ली । ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम को बांग्लादेश के खिलाफ वनडे सीरीज के तीसरे मुकाबले से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम की सलामी बल्लेबाज फोएबे लिचफील्ड कूल्हे की मांसपेशियों में खिंचाव के कारण बुधवार को खेले जा रहे तीसरे वनडे की प्लेइंग इलेवन से बाहर हो गईं। उनकी चोट ने ऑस्ट्रेलियाई टीम की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि न्यूजीलैंड के खिलाफ रविवार से शुरू होने वाली टी20 सीरीज में भी उनके खेलने पर संशय बना हुआ है। फिलहाल उनकी चोट की गंभीरता और मैदान पर वापसी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऑस्ट्रेलिया को उम्मीद होगी कि यह चोट ज्यादा गंभीर न हो और लिचफील्ड जल्द ही टीम में वापसी कर सकें।

    23 वर्षीय बाएं हाथ की बल्लेबाज को रविवार को बांग्लादेश के खिलाफ दूसरे वनडे मुकाबले के दौरान चोट लगी थी। उस मैच में उन्होंने 71 रन की शानदार पारी खेली थी। हालांकि इसी पारी के दौरान उनके कूल्हे की मांसपेशियों में खिंचाव आ गया। इसके बाद उनकी फिटनेस पर नजर रखी जा रही थी लेकिन तीसरे वनडे से पहले उन्हें खेलने के लिए फिट नहीं माना गया। न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी टी20 सीरीज को देखते हुए ऑस्ट्रेलियाई टीम प्रबंधन के लिए लिचफील्ड की फिटनेस बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। रविवार को होने वाले पहले टी20 मुकाबले से पहले उनकी स्थिति पर फैसला लिया जा सकता है।

    ऑस्ट्रेलिया की कार्यवाहक कप्तान ताहलिया मैकग्राथ ने टॉस के दौरान लिचफील्ड की चोट की जानकारी दी। उनकी अनुपस्थिति में ऑलराउंडर निकोला कैरी को तीन मैचों की वनडे सीरीज में पहली बार प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। वहीं विकेटकीपर बल्लेबाज बेथ मूनी को पारी की शुरुआत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। तीसरा वनडे मूनी के लिए भी खास है क्योंकि यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का 100वां वनडे मुकाबला है। ऐसे में वह इस उपलब्धि को यादगार बनाने के साथ टीम को एक और जीत दिलाने की कोशिश करेंगी।

    ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए चोटों की समस्या ऐसे समय में सामने आई है जब टीम पहले से ही खिलाड़ियों की कमी से जूझ रही है। हिप की परेशानी से जूझ रहीं सोफी मोलिनक्स और क्वाड्रिसेप्स की चोट से उबर रहीं लूसी हैमिल्टन भी उपलब्ध नहीं हैं। इन खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी के कारण बांग्लादेश के खिलाफ तीसरे वनडे के लिए मेजबान टीम के पास केवल 12 खिलाड़ी उपलब्ध थे। लगातार चोटों ने टीम के विकल्प सीमित कर दिए हैं और आगामी टी20 सीरीज से पहले खिलाड़ियों की फिटनेस ऑस्ट्रेलिया के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

    इस बीच ग्रेस हैरिस को कवर के तौर पर टीम से जुड़ने के लिए ब्रिस्बेन भेजा गया है। ऑस्ट्रेलिया की टी20 टीम में जगह नहीं बना पाने के बाद वह गुरुवार को ब्रिस्बेन हीट के टी20 स्प्रिंग चैलेंज अभियान में वापसी करेंगी। हालांकि मौजूदा वनडे सीरीज में ऑस्ट्रेलिया का प्रदर्शन शानदार रहा है। टीम ने पहले मुकाबले में बांग्लादेश को सात विकेट से हराया था जबकि दूसरे वनडे में नौ विकेट से जीत दर्ज की थी। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया ने तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। अब तीसरे मुकाबले में टीम की नजर क्लीन स्वीप पर है जबकि लिचफील्ड की चोट और उनकी संभावित वापसी आगामी न्यूजीलैंड सीरीज से पहले चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है।