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  • बल्ले और गेंद से जडेजा का ऐतिहासिक कमाल! 350 विकेट पूरे कर रचा नया रिकॉर्ड, दुनिया के चुनिंदा ऑलराउंडर्स में शामिल

    बल्ले और गेंद से जडेजा का ऐतिहासिक कमाल! 350 विकेट पूरे कर रचा नया रिकॉर्ड, दुनिया के चुनिंदा ऑलराउंडर्स में शामिल


    नई दिल्ली। रवींद्र जडेजा ने गॉल टेस्ट में अपने करियर की एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसने उन्हें भारतीय क्रिकेट के चुनिंदा महान ऑलराउंडर्स की कतार में खड़ा कर दिया है। श्रीलंका के खिलाफ मुकाबले में जडेजा ने टेस्ट क्रिकेट में 350 विकेट पूरे किए और इसके साथ ही उन्होंने 4000 से ज्यादा रन तथा 350 से ज्यादा विकेट लेने का ऐतिहासिक डबल भी पूरा कर लिया। जडेजा यह कारनामा करने वाले दुनिया के चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं और भारत की ओर से इस खास क्लब में जगह बनाने वाले सिर्फ दूसरे क्रिकेटर हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि महान ऑलराउंडर कपिल देव ने हासिल की थी।

    जडेजा ने गॉल टेस्ट की तीसरी पारी में श्रीलंका के बल्लेबाजों को अपनी स्पिन से परेशान किया और तीन विकेट हासिल किए। उनके 350 विकेट पूरे होते ही टेस्ट क्रिकेट में उनका नाम भारत के उन गेंदबाजों की सूची में शामिल हो गया जिन्होंने इस फॉर्मेट में 350 या उससे ज्यादा विकेट लिए हैं। इससे पहले अनिल कुंबले 619 विकेट के साथ भारत के सबसे सफल टेस्ट गेंदबाज हैं। रविचंद्रन अश्विन ने 537 विकेट लिए हैं जबकि कपिल देव के नाम 434 और हरभजन सिंह के नाम 417 टेस्ट विकेट हैं। अब जडेजा 351 विकेट के साथ इस प्रतिष्ठित सूची में पांचवें स्थान पर हैं।

    हालांकि जडेजा की उपलब्धि सिर्फ विकेटों तक सीमित नहीं है। टेस्ट क्रिकेट में उनके बल्ले से भी लगातार अहम योगदान देखने को मिला है। जडेजा के नाम 4000 से ज्यादा टेस्ट रन हैं और यही वजह है कि 350 से अधिक विकेट के साथ 4000 से अधिक रन का डबल उन्हें और खास बनाता है। इस आंकड़े तक पहुंचने वाले दुनिया के खिलाड़ियों में कपिल देव के अलावा इंग्लैंड के इयान बॉथम और न्यूजीलैंड के डेनियल विटोरी भी शामिल हैं। कपिल देव ने टेस्ट में 5248 रन और 434 विकेट लिए। बॉथम के नाम 5200 रन और 383 विकेट हैं जबकि विटोरी ने 4531 रन के साथ 362 विकेट हासिल किए। अब इस क्लब में 4108 रन और 351 विकेट के आंकड़े के साथ जडेजा का नाम भी जुड़ गया है।

    जडेजा ने इस उपलब्धि के साथ टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बाएं हाथ के स्पिनरों की सूची में भी अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। श्रीलंका के रंगना हेराथ 433 विकेट के साथ इस सूची में सबसे आगे हैं। डेनियल विटोरी के नाम 362 विकेट हैं जबकि जडेजा 351 विकेट के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच चुके हैं। अब विटोरी को पीछे छोड़ने के लिए जडेजा को केवल 12 और विकेट की जरूरत है। अगर वह यह मुकाम हासिल कर लेते हैं तो टेस्ट इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बाएं हाथ के स्पिनरों में दूसरे स्थान पर पहुंच जाएंगे।

    जडेजा की गेंदबाजी की खासियत सिर्फ विकेटों की संख्या नहीं बल्कि उनकी विकेट लेने की क्षमता भी है। कम से कम 125 टेस्ट विकेट लेने वाले बाएं हाथ के स्पिनरों में जडेजा का स्ट्राइक रेट 58 के आसपास है। इस मामले में दक्षिण अफ्रीका के केशव महाराज उनसे आगे हैं। इससे पता चलता है कि जडेजा लंबे स्पेल में दबाव बनाने के साथ जरूरत पड़ने पर तेजी से विकेट निकालने की क्षमता भी रखते हैं।

    गॉल टेस्ट में श्रीलंका की पहली पारी 284 रन पर समाप्त हुई और भारत को 178 रनों की बढ़त मिली। जडेजा ने 21 ओवर में पांच मेडन डालते हुए 57 रन देकर तीन विकेट लिए। मानव सुथार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार विकेट अपने नाम किए। उन्होंने 21.4 ओवर में एक मेडन के साथ 76 रन देकर चार विकेट हासिल किए।

    जडेजा की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह सिर्फ गेंदबाज नहीं बल्कि मैच का रुख बदलने वाले ऑलराउंडर हैं। बल्ले से उपयोगी रन बनाने के साथ गेंद से लगातार विकेट निकालना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। कपिल देव के साथ इस ऐतिहासिक क्लब में शामिल होना उनके टेस्ट करियर की बड़ी उपलब्धियों में से एक है। अलग-अलग दौर और अलग-अलग गेंदबाजी शैली के बावजूद जडेजा और कपिल ने साबित किया है कि टेस्ट क्रिकेट में लंबे समय तक बल्ले और गेंद दोनों से योगदान देने वाला ऑलराउंडर टीम के लिए कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।

  • एक कैच छूटा और बदल गया पूरा मैच! डिकवेला-दिनुषा ने श्रीलंका को संकट से निकाला, भारत के सामने नई चुनौती

    एक कैच छूटा और बदल गया पूरा मैच! डिकवेला-दिनुषा ने श्रीलंका को संकट से निकाला, भारत के सामने नई चुनौती


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच गॉल में खेले जा रहे टेस्ट मुकाबले में तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक टीम इंडिया मजबूत स्थिति में जरूर नजर आई लेकिन मैदान पर हुई एक छोटी सी गलती ने मैच का समीकरण काफी हद तक बदल दिया। भारतीय टीम के पास श्रीलंका को 200 रन के भीतर समेटकर फॉलोऑन देने का शानदार मौका था। श्रीलंका ने एक समय केवल 90 रन पर अपने पांच विकेट गंवा दिए थे और ऐसा लग रहा था कि भारतीय गेंदबाज जल्द ही पूरी पारी समेट देंगे। लेकिन इसके बाद एक कैच छूटना मेजबान टीम के लिए बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।

    श्रीलंका की पारी के 36वें ओवर में मानव सुथार ने निरोशन डिकवेला को अपनी गेंद से परेशान किया। फ्लाइटेड गेंद पर डिकवेला के बल्ले का बाहरी किनारा लगा और गेंद स्लिप में खड़े केएल राहुल की तरफ तेजी से गई। राहुल ने दाईं ओर डाइव लगाकर कैच पकड़ने की कोशिश की लेकिन गेंद उनके हाथों से निकल गई। उस समय डिकवेला केवल 20 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे। भारतीय टीम के लिए यह मौका बेहद अहम था क्योंकि श्रीलंका पहले ही दबाव में थी और एक और विकेट गिरने से उसकी पारी जल्दी खत्म हो सकती थी।

    लेकिन कैच छूटने के बाद डिकवेला ने भारतीय गेंदबाजों को जमकर परेशान किया। उन्होंने सोनल दिनुषा के साथ मिलकर श्रीलंका की पारी को संभाल लिया। दोनों बल्लेबाजों ने छठे विकेट के लिए 146 रनों की बड़ी साझेदारी की। डिकवेला ने मिले जीवनदान का पूरा फायदा उठाया और 115 गेंदों पर 80 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। वहीं सोनल दिनुषा ने करीब साढ़े चार घंटे तक क्रीज पर टिककर शानदार शतक जमाया और भारतीय गेंदबाजों को लंबे समय तक विकेट के लिए तरसाया।

    इस साझेदारी ने मैच का पूरा माहौल बदल दिया। जिस श्रीलंकाई टीम के पांच विकेट सिर्फ 90 रन पर गिर चुके थे वह देखते ही देखते 284 रन तक पहुंच गई। भारत को फॉलोऑन देने के लिए श्रीलंका को 263 रन के आंकड़े तक पहुंचने से रोकना जरूरी था लेकिन डिकवेला और दिनुषा की साझेदारी ने भारतीय टीम की यह उम्मीद खत्म कर दी। श्रीलंका ने 284 रन बनाकर खुद को फॉलोऑन की स्थिति से बाहर निकाल लिया।

    भारतीय गेंदबाजों की बात करें तो मानव सुथार ने शानदार गेंदबाजी करते हुए चार विकेट हासिल किए। रवींद्र जडेजा ने तीन बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा जबकि प्रसिद्ध कृष्णा मोहम्मद सिराज और कुलदीप यादव को एक एक सफलता मिली। भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंका के शीर्ष क्रम को लगातार दबाव में रखा लेकिन निचले क्रम में डिकवेला और दिनुषा की साझेदारी ने टीम इंडिया की मेहनत पर पानी फेर दिया।

    श्रीलंका की पहली पारी समाप्त होने के बाद बारिश ने भी खेल में खलल डाला। बारिश शुरू होने के कारण अंपायरों ने समय से पहले तीसरे दिन के खेल को समाप्त करने का फैसला किया। हालांकि भारत के पास अब भी 178 रनों की बढ़त मौजूद है और चौथे दिन टीम इंडिया अपनी दूसरी पारी में इसी बढ़त के साथ आगे बढ़ेगी। भारत के पास मैच पर पकड़ मजबूत करने का मौका अभी भी है लेकिन श्रीलंका को फॉलोऑन से बचने का मौका देने के बाद मुकाबला पहले की तुलना में थोड़ा अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।

    इस मुकाबले में केएल राहुल के कैच को लेकर भी चर्चा तेज है। अगर डिकवेला का वह कैच पकड़ लिया जाता तो श्रीलंका का स्कोर और पारी का नतीजा पूरी तरह अलग हो सकता था। हालांकि क्रिकेट में एक कैच से मैच खत्म नहीं होता और भारत के पास अभी बढ़त मौजूद है लेकिन टेस्ट क्रिकेट में ऐसे छोटे मौके अक्सर बड़े अंतर में बदल जाते हैं। अब टीम इंडिया की नजर चौथे दिन बल्लेबाजी पर होगी जहां वह बड़ी बढ़त हासिल कर श्रीलंका के सामने मजबूत लक्ष्य रखने की कोशिश करेगी।

    भारतीय टीम के नए फील्डिंग कोच सुभदीप घोष के लिए भी यह दौरा चुनौतीपूर्ण है। टीम इंडिया को आगे ऐसे मौकों को भुनाने पर ध्यान देना होगा क्योंकि लंबे टेस्ट मैचों में एक कैच या एक साझेदारी कई बार पूरे मुकाबले की दिशा बदल देती है। गॉल टेस्ट में अब भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि तीसरे दिन की चूक से सबक लेते हुए चौथे दिन मैच पर अपनी पकड़ और मजबूत की जाए।

  • ऑस्ट्रेलियाई टीम में फेरबदल की मांग, बांग्लादेश के हाथों 9 विकेट की करारी शिकस्त के बाद दिग्गजों का फूटा गुस्सा

    ऑस्ट्रेलियाई टीम में फेरबदल की मांग, बांग्लादेश के हाथों 9 विकेट की करारी शिकस्त के बाद दिग्गजों का फूटा गुस्सा


    नई दिल्ली ।
    डार्विन के मैदान पर खेले गए पहले टेस्ट मुकाबले में बांग्लादेश ने बड़ा उलटफेर करते हुए मेजबान ऑस्ट्रेलिया को 9 विकेट से पराजित कर दिया है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही बांग्लादेश ने टेस्ट श्रृंखला का आगाज धमाकेदार अंदाज में किया है। खेल के हर विभाग में ऑस्ट्रेलियाई टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, जिसके बाद पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों का गुस्सा भड़क उठा है। पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग, मार्क वॉ और मैथ्यू हेडन ने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के प्रदर्शन की आलोचना करते हुए टीम प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं।

    ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज मार्क वॉ ने इस हार को ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा उलटफेर करार दिया है। उन्होंने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपने पूरे करियर में इतना बड़ा उलटफेर नहीं देखा। वॉ ने रेखांकित किया कि बांग्लादेश की टीम अपने दो प्रमुख तेज गेंदबाजों के बिना मैदान पर उतरी थी, इसके बावजूद उसने ऑस्ट्रेलिया की पूरी तरह से मजबूत टीम को पछाड़ दिया। उनके अनुसार, यह पराजय गाबा में वेस्टइंडीज के हाथों मिली हार से भी अधिक चौंकाने वाली है।

    दूसरी ओर पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग ने इस हार को बेहद शर्मनाक बताते हुए टीम में बड़े बदलावों की वकालत की है। पोंटिंग का मानना है कि अब समय आ गया है जब ऑस्ट्रेलियाई टीम को भविष्य को ध्यान में रखकर फैसले लेने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि टीम को तुरंत नए सलामी बल्लेबाज और नंबर 3 के स्थान पर बदलाव करने की आवश्यकता है। पहले व्यापक बदलावों के पक्ष में न रहने वाले पोंटिंग ने स्वीकार किया कि इस करारी हार ने पूरी स्थिति बदल दी है।

    इसी बीच पूर्व दिग्गज मैथ्यू हेडन ने भी ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी क्रम की नाकामी पर चिंता जताई और सलाह दी कि ट्रेविस हेड को पुनः नंबर 5 के स्थान पर भेजा जाना चाहिए। मैच के बाद ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस ने भी बांग्लादेशी टीम के बेहतर प्रदर्शन की सराहना की और अपनी टीम की नाकामियों को स्वीकार किया। मध्य प्रदेश सहित दुनिया भर के क्रिकेट विशेषज्ञों की नजरें अब आगामी मुकाबले पर टिकी हैं।

    श्रृंखला के दूसरे टेस्ट मैच से पहले ऑस्ट्रेलियाई टीम पर मानसिक दबाव साफ दिखाई दे रहा है। पूर्व दिग्गजों के कड़े रुख और मीडिया में हो रही आलोचनाओं के बाद आगामी मैच के लिए ऑस्ट्रेलियाई प्लेइंग-11 में बड़े बदलाव होना लगभग तय माना जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रबंधन इन दिग्गजों के सुझावों पर किस तरह अमल करता है।

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    ऑस्ट्रेलिया बनाम बांग्लादेश डार्विन टेस्ट, मार्क वॉ रिकी पोंटिंग फोटो, पैट कमिंस ऑस्ट्रेलियाई टीम इंजरी, ट्रेविस हेड टेस्ट क्रिकेट

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    बांग्लादेश से हार के बाद ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में भूचाल, दिग्गजों ने उठाई टीम में बड़े बदलावों की मांग

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    डार्विन टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया की ऐतिहासिक हार, मार्क वॉ और रिकी पोंटिंग ने प्रबंधन पर दागे तीखे सवाल

  • सुनील गावस्कर ने भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों की फिटनेस और ट्रेनिंग पर उठाए सवाल, हैमस्ट्रिंग की चोटों पर जताई चिंता

    सुनील गावस्कर ने भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों की फिटनेस और ट्रेनिंग पर उठाए सवाल, हैमस्ट्रिंग की चोटों पर जताई चिंता

    नई दिल्ली ।भारतीय क्रिकेट टीम में खिलाड़ियों की लगातार चोटों ने फिटनेस और प्रशिक्षण के मौजूदा तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पंड्या, वॉशिंगटन सुंदर, साई सुदर्शन, नीतीश कुमार रेड्डी और हर्षित राणा जैसे कई प्रमुख खिलाड़ी अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं के कारण टीम से बाहर चल रहे हैं। इस बीच पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का बचाव करते हुए खिलाड़ियों की मूल ट्रेनिंग प्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

    सुनील गावस्कर का मानना है कि भारतीय खिलाड़ियों में बार-बार सामने आ रही हैमस्ट्रिंग की समस्या को सामान्य मानकर खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इसके पीछे के मूल कारणों को समझने के लिए खिलाड़ियों के नियमित प्रशिक्षण और वर्कलोड मैनेजमेंट की गहराई से समीक्षा की जानी बेहद जरूरी है। अधिकतर खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम के लिए खेलते समय चोटिल होते हैं, लेकिन बाद में दोष बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के फिजियो और मेडिकल स्टाफ पर मढ़ दिया जाता है।

    आधुनिक क्रिकेट में अपनाए जा रहे वर्कलोड मैनेजमेंट पर टिप्पणी करते हुए पूर्व कप्तान ने कहा कि अभ्यास सत्र के दौरान गेंदबाजों पर लगाई जाने वाली गेंदें फेंकने की सीमा हमेशा लाभदायक नहीं होती। उन्होंने उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि जब एक टी20 मुकाबले में गेंदबाज को कम से कम चार ओवर यानी 24 गेंदें फेंकनी होती हैं, तो अभ्यास में उसे 20 से कम गेंदें फेंकने तक सीमित रखना व्यावहारिक नहीं है। इससे खिलाड़ी मैदान की वास्तविक परिस्थितियों के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हो पाते।

    फिटनेस के तय पैमानों पर बात करते हुए गावस्कर ने स्पष्ट किया कि केवल जिम में पसीना बहाकर हासिल की गई शारीरिक क्षमता पर्याप्त नहीं है। मैदान की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप शरीर को ढालना और मैच फिट होना अधिक आवश्यक है। बार-बार लगने वाली चोटों से टीम का संतुलन भी प्रभावित होता है, जिस पर कप्तान शुभमन गिल भी पूर्व में चिंता जाहिर कर चुके हैं। मध्य प्रदेश सहित देश भर के क्रिकेट प्रशंसकों और विशेषज्ञों के बीच अब इस विषय पर गंभीर बहस छिड़ गई है।

    आगामी बड़े टूर्नामेंटों और विश्व कप जैसी प्रतियोगिताओं को ध्यान में रखते हुए खिलाड़ियों का लगातार स्वस्थ और उपलब्ध रहना बेहद आवश्यक माना जा रहा है। यदि वर्कलोड और ट्रेनिंग के तरीकों में समय रहते सुधार नहीं किया गया तो इसका असर टीम के समग्र प्रदर्शन पर पड़ सकता है। फिलहाल बीसीसीआई और प्रबंधन द्वारा इस दिशा में उठाए जाने वाले आगामी कदमों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • ODI वर्ल्ड कप 2027 की बदलेगी शुरुआत की तारीख? गांधी जयंती पर होगा पहला मुकाबला, जानें पूरा प्लान

    ODI वर्ल्ड कप 2027 की बदलेगी शुरुआत की तारीख? गांधी जयंती पर होगा पहला मुकाबला, जानें पूरा प्लान


    नई दिल्ली । वनडे वर्ल्ड कप 2027 को लेकर क्रिकेट फैंस के लिए बड़ी खबर सामने आई है। दक्षिण अफ्रीका जिम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में होने वाले इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की शुरुआत की तारीख में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल यानी ICC अब 2 अक्टूबर 2027 को टूर्नामेंट शुरू करने पर विचार कर रहा है। यह तारीख इसलिए खास है क्योंकि इसी दिन भारत में महात्मा गांधी की जयंती मनाई जाती है। हालांकि अभी ICC की ओर से नई शुरुआत की तारीख का औपचारिक ऐलान नहीं किया गया है।

    शुरुआती कार्यक्रम के मुताबिक 2027 वनडे वर्ल्ड कप की शुरुआत अक्टूबर के पहले सप्ताह के बाद होनी थी। पहले 8 अक्टूबर को मुख्य टूर्नामेंट शुरू करने की योजना सामने आई थी और उससे पहले वार्म अप मुकाबले खेले जाने थे। अब अगर ICC की नई योजना पर सहमति बनती है तो मुख्य टूर्नामेंट 2 अक्टूबर से शुरू हो सकता है। फाइनल फिलहाल 21 नवंबर को होने की उम्मीद है। इस स्थिति में प्रतियोगिता करीब 50 दिनों तक चल सकती है।

    गांधी जयंती को टूर्नामेंट के आगाज से जोड़ने के पीछे महात्मा गांधी और दक्षिण अफ्रीका के बीच गहरा ऐतिहासिक संबंध भी एक अहम वजह माना जा रहा है। गांधी ने अपने जीवन के करीब 21 वर्ष दक्षिण अफ्रीका में बिताए थे। वहीं उन्होंने सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांतों को विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया था। ऐसे में दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी में होने वाले क्रिकेट वर्ल्ड कप की शुरुआत गांधी जयंती से करना एक प्रतीकात्मक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    2027 का वर्ल्ड कप कई मायनों में खास होने वाला है। इस बार प्रतियोगिता में 14 टीमें हिस्सा लेंगी और मुकाबले दक्षिण अफ्रीका जिम्बाब्वे तथा नामीबिया में खेले जाएंगे। ICC ने टूर्नामेंट के लिए 12 वेन्यू की जानकारी भी साझा की है। दक्षिण अफ्रीका के आठ शहरों में मुकाबले होंगे जबकि जिम्बाब्वे के तीन और नामीबिया के एक वेन्यू को शामिल किया गया है।

    टूर्नामेंट के फॉर्मेट में भी बड़ा बदलाव किया गया है। ICC ने 2027 वर्ल्ड कप को 14 टीमों का करने के साथ क्वालिफिकेशन चरण में नई सुपर सीरीज व्यवस्था जोड़ी है। सबसे निचली रैंक वाली तीन क्वालिफाइड टीमों को सुपर सीरीज में आपस में मुकाबले करने होंगे और इस चरण से एक टीम मुख्य प्रतियोगिता के लिए आगे बढ़ेगी। इसके बाद मुख्य टूर्नामेंट में 12 टीमों को दो ग्रुप में बांटकर मुकाबले कराए जाएंगे। ग्रुप चरण के बाद सुपर सिक्स चरण और फिर सेमीफाइनल तथा फाइनल का रास्ता होगा।

    वर्ल्ड कप के लिए भारत समेत कई बड़ी टीमों ने अपनी जगह पक्की कर ली है। भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड पाकिस्तान इंग्लैंड श्रीलंका बांग्लादेश अफगानिस्तान और मेजबान दक्षिण अफ्रीका तथा जिम्बाब्वे भी क्वालिफाई कर चुके हैं। वहीं नामीबिया समेत बाकी टीमों की स्थिति क्वालिफिकेशन प्रक्रिया से तय होगी।

    फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा गांधी जयंती के दिन वर्ल्ड कप शुरू होने को लेकर है। अगर ICC इस प्रस्ताव पर मुहर लगाता है तो 2027 वनडे वर्ल्ड कप का आगाज सिर्फ क्रिकेट के लिहाज से ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदेश के लिहाज से भी बेहद खास बन जाएगा। हालांकि अंतिम कार्यक्रम की पुष्टि ICC के आधिकारिक ऐलान के बाद ही होगी।

  • श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज आज से… टीम इंडिया बनेगी 600 टेस्ट खेलने वाली तीसरी टीम

    श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज आज से… टीम इंडिया बनेगी 600 टेस्ट खेलने वाली तीसरी टीम


    नई दिल्ली।
    इंडिया वर्सेस श्रीलंका (India vs Sri Lanka) दो मैच की टेस्ट सीरीज (Test series) का आगाज आज यानी शनिवार, 15 अगस्त से होने जा रहा है। सीरीज का पहला मैच गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा। भारतीय टीम (Indian team) के लिए यह टेस्ट मैच काफी खास रहने वाला है क्योंकि यह टीम इंडिया (Team India) के टेस्ट क्रिकेट के इतिहास का 600वां मैच होगा। भारत इस मुकाम तक पहुंचने वाला मात्र तीसरा देश बनेगा। टीम इंडिया से ज्यादा अभी तक सिर्फ दो ही देशों ने मैच खेले हैं, इस लिस्ट में क्रिकेट के इतिहास की दो सबसे पुरानी टीम इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया का नाम दर्ज है। इंग्लैंड के नाम तो सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेलने का भी वर्ल्ड रिकॉर्ड है।


    इंग्लैंड के नाम 1000 से अधिक टेस्ट खेलने का वर्ल्ड रिकॉर्ड

    क्रिकेट का जनक इंग्लैंड को कहा जाता है। उनके नाम इस खेल के सबसे लंबे फॉर्मेट में सबसे ज्यादा मैच खेलने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है। क्रिकेट इतिहास में इंग्लैंड एकमात्र टीम है जिसने 1000 से अधिक टेस्ट मैच खेले हैं। जी हां, इंग्लैंड की टीम अभी तक रेड बॉल क्रिकेट में 1097 मैच खेल चुके हैं, जिसमें 405 में उन्हें जीत मिली 336 में हार का सामना करना पड़ा, जबकि 356 मैच ड्रॉ रहे।


    टॉप-2 में ऑस्ट्रेलिया भी

    इंग्लैंड के बाद अगर किसी टीम ने सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेले हैं तो वह है ऑस्ट्रेलिया की टीम। कंगारू टीम बांग्लादेश के खिलाफ जारी टेस्ट सीरीज में अपना 883वां मुकाबला खेल रही है। उनका जीत का रिकॉर्ड इंग्लैंड से काफी बेहतर रहा है। उन्होंने अभी तक रेड बॉल क्रिकेट में 426 मैच जीता है, 235 हारे हैं जबकि 219 मुकाबले ड्रॉ रहे हैं।

    भारत 600 टेस्ट खेलने वाला बनेगा तीसरा देश
    इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में 600 टेस्ट मैच खेलने वाला तीसरा देश बनेगा। टीम इंडिया ने अभी तक इस फॉर्मेट में खेले 599 मुकाबलों में से 186 जीते, 188 हारे और 224 ड्रॉ रहे।


    वेस्टइंडीज बेहद नजदीक

    वेस्टइंडीज की टीम भी 600 टेस्ट मैच के रिकॉर्ड के बेहद नजदीक है। उन्होंने भी इस फॉर्मेट में अभी तक 596 मैच खेल लिए हैं। जबकि अन्य टीम अभी काफी पीछे हैं। न्यूजीलैं, पाकिस्तान और साउथ अफ्रीका जैसी टीमों ने अभी तक 450 से अधिक टेस्ट मैच खेले हैं। वहीं श्रीलंका ने अभी तक 350 टेस्ट मैच भी नहीं खेले हैं।

  • एक सीरीज में मचाया तहलका फिर टीम इंडिया से हुए दूर, जानिए विजय भारद्वाज का पूरा क्रिकेट सफर

    एक सीरीज में मचाया तहलका फिर टीम इंडिया से हुए दूर, जानिए विजय भारद्वाज का पूरा क्रिकेट सफर


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में कई ऐसे खिलाड़ी रहे हैं जिनका अंतरराष्ट्रीय करियर बेहद छोटा रहा लेकिन घरेलू क्रिकेट में उनकी उपलब्धियां किसी बड़े सितारे से कम नहीं रहीं। विजय भारद्वाज भी इसी सूची में शामिल हैं। 15 अगस्त 1975 को बेंगलुरु में जन्मे इस ऑलराउंडर ने भारतीय टीम में धमाकेदार अंदाज में दस्तक दी थी। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 1999-2000 के एलजी कप में उनके प्रदर्शन ने उन्हें रातोंरात चर्चा में ला दिया था। गेंद और बल्ले दोनों से प्रभाव छोड़ने वाले भारद्वाज को उस टूर्नामेंट में प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया था।

    एलजी कप में विजय भारद्वाज ने अपनी ऑफ स्पिन गेंदबाजी से शानदार प्रदर्शन करते हुए 10 विकेट हासिल किए थे। निचले क्रम में बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 89 रन भी बनाए थे। इस प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय क्रिकेट के भविष्य के अहम खिलाड़ियों में गिना जाने लगा। उनकी उपयोगिता यह थी कि वह जरूरत के मुताबिक बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी और फील्डिंग में भी योगदान दे सकते थे। हालांकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उस शुरुआती सफलता को वह लंबे समय तक बरकरार नहीं रख सके।

    विजय भारद्वाज ने सितंबर 1999 में भारत के लिए वनडे डेब्यू किया और इसके बाद टेस्ट क्रिकेट में भी मौका मिला। उनका अंतरराष्ट्रीय करियर कुल तीन टेस्ट और 10 वनडे तक ही सीमित रहा। तीन टेस्ट की तीन पारियों में उन्होंने 28 रन बनाए और एक विकेट लिया। वहीं 10 वनडे में उन्होंने 136 रन बनाने के साथ 16 विकेट अपने नाम किए। उनका आखिरी वनडे मुकाबला 2002 में जिम्बाब्वे के खिलाफ रहा। इसके बाद उनकी भारतीय टीम में वापसी नहीं हो सकी।

    लेकिन अगर विजय भारद्वाज के पूरे क्रिकेट करियर को केवल भारत के लिए खेले 13 मुकाबलों के आधार पर देखा जाए तो उनकी कहानी अधूरी रह जाएगी। कर्नाटक के लिए उनका घरेलू क्रिकेट करियर बेहद प्रभावशाली रहा। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने 96 मैचों की 149 पारियों में 5553 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 14 शतक और 26 अर्धशतक निकले। गेंदबाजी में भी उन्होंने 59 विकेट हासिल किए। लिस्ट ए क्रिकेट में उनके नाम 1707 रन और 46 विकेट दर्ज हैं।

    कर्नाटक के मजबूत दौर में भारद्वाज टीम का महत्वपूर्ण हिस्सा थे। वह 1990 के दशक में कर्नाटक की तीन रणजी ट्रॉफी खिताबी जीत का हिस्सा रहे। 2000 से 2002 तक उन्होंने कर्नाटक की कप्तानी भी की। घरेलू क्रिकेट में उनके लगातार प्रदर्शन ने साबित किया कि वह सिर्फ एक सीरीज के खिलाड़ी नहीं थे बल्कि लंबे समय तक उच्च स्तर पर प्रदर्शन करने की क्षमता रखते थे। उनके करियर पर चोटों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का भी असर पड़ा और यही वजह रही कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनका सफर अपेक्षा के मुताबिक आगे नहीं बढ़ सका।

    4 नवंबर 2006 को विजय भारद्वाज ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया। इसके बाद उन्होंने खेल से दूरी बनाने के बजाय कोचिंग और कमेंट्री को अपना नया रास्ता बनाया। वह नेशनल क्रिकेट एकेडमी से लेवल थ्री कोच के रूप में प्रमाणित हैं। आईपीएल के शुरुआती दौर में वह रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के सहायक कोच भी रहे। इसके अलावा ओमान क्रिकेट टीम के फील्डिंग कोच के रूप में भी काम किया। बाद के वर्षों में उन्होंने कन्नड़ क्रिकेट कमेंट्री और विश्लेषण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई।

    विजय भारद्वाज की कहानी यही बताती है कि किसी खिलाड़ी के करियर को केवल अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों से नहीं आंका जा सकता। भारत के लिए उनका सफर भले ही छोटा रहा लेकिन कर्नाटक क्रिकेट में उनका योगदान और बाद में कोचिंग व कमेंट्री के जरिए खेल से जुड़ाव उनकी क्रिकेट विरासत को आज भी खास बनाता है।

  • एशिया कप से पहले खुद को और धार दे रहीं दीप्ति शर्मा, बोलीं- द हंड्रेड से तीनों विभाग में सुधार का मौका

    एशिया कप से पहले खुद को और धार दे रहीं दीप्ति शर्मा, बोलीं- द हंड्रेड से तीनों विभाग में सुधार का मौका


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा इन दिनों इंग्लैंड में खेले जा रहे द हंड्रेड के जरिए एशिया कप की तैयारी को मजबूत करने में जुटी हैं। दीप्ति का कहना है कि वह सनराइजर्स लीड्स के साथ खेलते हुए अपने खेल के तीनों विभागों बल्लेबाजी गेंदबाजी और फील्डिंग पर काम कर रही हैं ताकि 28 अगस्त से दुबई में शुरू होने वाले महिला एशिया कप में पूरी तरह तैयार होकर उतर सकें। मौजूदा द हंड्रेड सीजन में दीप्ति सनराइजर्स लीड्स के लिए प्रभावी प्रदर्शन कर रही हैं और टीम के लिए उनकी गेंदबाजी खास तौर पर अहम रही है।

    दीप्ति ने कहा कि वह द हंड्रेड के हर मैच और हर अनुभव का अधिकतम फायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं। उनके मुताबिक इस प्रतियोगिता में खेलने से उन्हें अपनी स्किल्स को बेहतर करने का शानदार मौका मिल रहा है। उनका फोकस सिर्फ व्यक्तिगत प्रदर्शन पर नहीं बल्कि टीम के लिए ज्यादा से ज्यादा योगदान देने पर भी है। दीप्ति के लिए यह टूर्नामेंट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके तुरंत बाद भारतीय टीम को एशिया कप जैसे बड़े मुकाबले में उतरना है।

    सनराइजर्स लीड्स के साथ अपने अनुभव को लेकर भी दीप्ति काफी उत्साहित नजर आईं। उन्होंने बताया कि टीम में चुने जाने के बाद वह बेहद खुश थीं क्योंकि ऑरेंज उनका पसंदीदा रंग है। लीड्स में घरेलू मैदान पर खेलने का अनुभव भी उनके लिए खास है। स्टेडियम में बड़ी संख्या में सनराइजर्स के प्रशंसकों की मौजूदगी उन्हें अतिरिक्त ऊर्जा देती है। दीप्ति ने कहा कि टीम के खिलाड़ी एक दूसरे के योगदान की सराहना करते हैं और इसी माहौल में वे हर मुकाबले से कुछ नया सीखने की कोशिश कर रहे हैं।

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व करने को दीप्ति सबसे बड़े गर्व के पलों में से एक मानती हैं। उनके लिए भारतीय टीम की नीली जर्सी सिर्फ खेल की पोशाक नहीं बल्कि वर्षों की मेहनत त्याग और संघर्ष का परिणाम है। वह मानती हैं कि देश के लिए खेलने के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है। जब उम्मीदें ज्यादा होती हैं और खिलाड़ी उन उम्मीदों पर खरा उतरने में सफल होता है तो वह पल बेहद खास बन जाता है। यही भावना उन्हें मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित करती है।

    दीप्ति दबाव वाले मुकाबलों को भी चुनौती के रूप में देखती हैं। उनका मानना है कि हर मैच महत्वपूर्ण होता है और किसी एक बड़े टूर्नामेंट तक सीमित होकर तैयारी करना सही तरीका नहीं है। वह हर मुकाबले में अपना पूरा योगदान देने की कोशिश करती हैं। मुश्किल परिस्थितियों में प्रदर्शन करना उन्हें पसंद है क्योंकि ऐसे मौके खिलाड़ी को अपनी कमियों पर काम करने और खुद को बेहतर बनाने का अवसर देते हैं।

    महिला एशिया कप 28 अगस्त से दुबई में शुरू होगा और भारतीय टीम के लिए यह अहम टूर्नामेंट माना जा रहा है। इसके बाद फरवरी 2027 में महिला चैंपियंस ट्रॉफी भी खेली जानी है। हालांकि दीप्ति फिलहाल भविष्य की बजाय मौजूदा चुनौती पर ध्यान देना चाहती हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि अभी उनका पूरा फोकस द हंड्रेड पर है और इस प्रतियोगिता से हासिल अनुभव को वह एशिया कप में भारत के लिए उपयोग करना चाहती हैं।

  • हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी छोड़ने की मुख्य वजह बताई और पंजाब में ड्रग्स की समस्या पर सवाल उठाए।

    हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी छोड़ने की मुख्य वजह बताई और पंजाब में ड्रग्स की समस्या पर सवाल उठाए।


    नई दिल्ली । 
    पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़ने और भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने के फैसले को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुरानी पार्टी में खेल और जनहित से जुड़े सुझावों की लगातार उपेक्षा की जा रही थी। इसके साथ ही उन्होंने पंजाब में पैर पसार रहे नशीले पदार्थों के नेटवर्क और ड्रग्स की गंभीर होती समस्या पर राज्य की भगवंत मान सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं।

    हरभजन सिंह ने एक विशेष बातचीत के दौरान बताया कि जब उन्हें पंजाब के मुख्यमंत्री की ओर से पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव मिला था, तब उनका मुख्य उद्देश्य राज्यसभा में खेलों और खिलाड़ियों के मुद्दों को मजबूती से उठाना था। उन्होंने शुरुआत में ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वे सक्रिय राजनीति के बजाय केवल खेल विकास पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इस अवसर के जरिए वे पंजाब समेत पूरे देश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देना चाहते थे।

    हालांकि, समय बीतने के साथ पार्टी के भीतर उनके सुझावों को दरकिनार किया जाने लगा। भविष्य की योजनाओं और सुधारों को लेकर जब भी उन्होंने अपनी बात रखनी चाही, तो उनकी आवाज़ को अनसुना कर दिया गया। लगातार किनारे किए जाने से वे मानसिक रूप से काफी परेशान महसूस कर रहे थे। जिस सोच और विज़न के साथ वे पार्टी में शामिल हुए थे, वह कार्य पूरा नहीं हो पा रहा था, जिसके चलते उन्होंने अंततः पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया।

    पंजाब में गहराते नशीले पदार्थों के संकट पर चिंता जताते हुए राज्यसभा सांसद ने कहा कि इसके दुष्परिणाम बेहद भयावह रूप ले रहे हैं। यह समस्या केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के जिस भी हिस्से में ड्रग्स पहुंचती है, वहां युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो जाता है। सीमावर्ती राज्य होने के कारण पंजाब में स्थिति और भी अधिक संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

    उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बात की गहन जांच होनी चाहिए कि नशीले पदार्थों की आपूर्ति राज्य में किस रास्ते से हो रही है। इस समस्या पर पूरी तरह से अंकुश लगाने के लिए सख्त से सख्त कानून बनाए जाने और उन्हें कड़ाई से लागू करने की तत्काल आवश्यकता है। सरकार को इस दिशा में जवाबदेही तय करते हुए कड़े कदम उठाने होंगे ताकि युवा पीढ़ी को इस दलदल से बचाया जा सके।

    आप से अलग होने के बाद उनके आवास के बाहर हुए विरोध प्रदर्शनों और पुतला दहन की घटनाओं पर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करने वाले लोगों की पहचान किसी से छिपी नहीं है, इसलिए वे किसी का व्यक्तिगत नाम नहीं लेना चाहते। देश की जनता ने उन्हें एक क्रिकेटर के रूप में अपार प्रेम और सम्मान दिया है, जो उनके लिए सर्वोपरि है।

    देश के अन्य राज्यों की तरह मध्य प्रदेश में भी खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और युवाओं को नशे के कुचक्र से दूर रखने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि हरभजन सिंह द्वारा उठाए गए मुद्दे केवल एक राज्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे देश के खेल जगत और युवा नीति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय है।

    हरभजन सिंह का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़कर वे खेलों के विकास और युवाओं के कल्याण के लिए अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेंगे। आने वाले समय में वे खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और नशा विरोधी अभियानों को राष्ट्रव्यापी स्तर पर गति देने के लिए प्रयासरत रहेंगे, ताकि देश का युवा सही दिशा में आगे बढ़ सके।

  • अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों की सूची में स्टीव स्मिथ चौथे पायदान पर पहुंचे।

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों की सूची में स्टीव स्मिथ चौथे पायदान पर पहुंचे।


    नई दिल्ली ।
    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मंच पर ऑस्ट्रेलियाई टीम के अनुभवी बल्लेबाज स्टीव स्मिथ ने एक नया और महत्वपूर्ण कीर्तिमान अपने नाम दर्ज कर लिया है। बांग्लादेश के खिलाफ खेले जा रहे टेस्ट मैच की पहली पारी में संकट के समय संयमित और उपयोगी अर्धशतकीय पारी खेलते हुए उन्होंने पूर्व महान कप्तान एलन बॉर्डर के रनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। इस शानदार प्रदर्शन के साथ ही वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी टीम के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में चौथे स्थान पर पहुंच गए हैं।

    इस मुकाबले में जब ऑस्ट्रेलियाई टीम का ऊपरी क्रम लगातार ताश के पत्तों की तरह बिखर रहा था, तब स्टीव स्मिथ ने एक छोर संभालकर धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी का परिचय दिया। मुश्किल परिस्थितियों में खेलते हुए उन्होंने टीम के स्कोर को सम्मानजनक स्थिति में पहुंचाने का हरसंभव प्रयास किया। अपनी इस जुझारू पारी के दौरान उन्होंने मैदान के चारों तरफ आकर्षक शॉट लगाए और टीम के अन्य बल्लेबाजों के विफल रहने के बावजूद अपनी उपयोगिता साबित की।

    स्टीव स्मिथ ने अब अपने करियर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 17 हजार सात सौ से अधिक रन बना लिए हैं। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने तीन सौ साठ मैचों की चार सौ तीस पारियों का सामना किया है। उनके खाते में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुल 49 शतक और 85 अर्धशतक दर्ज हो चुके हैं। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि वह आधुनिक युग के सबसे निरन्तर और विश्वसनीय खिलाड़ियों में से एक हैं।

    पूर्व कप्तान एलन बॉर्डर ने अपने करियर के दौरान चार सौ उनतीस अंतरराष्ट्रीय मैचों में कुल 17698 रन बनाए थे। बॉर्डर के इस ऐतिहासिक आंकड़े को पार करके स्टीव स्मिथ ने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के स्वर्णिम इतिहास में अपना नाम और अधिक मजबूती से दर्ज करवा लिया है। क्रिकेट समीक्षकों का मानना है कि स्मिथ का यह मुकाम उनकी कड़ी मेहनत और तकनीकी श्रेष्ठता का ही प्रतिफल है।

    ऑस्ट्रेलिया के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ियों की सूची में पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग शीर्ष स्थान पर काबिज हैं। पोंटिंग ने अपने करियर में 27 हजार तीन सौ चौंसठ रन बनाए हैं, जिनमें 70 शतक शामिल हैं। इस सूची में दूसरे स्थान पर पूर्व सलामी बल्लेबाज डेविड वॉर्नर हैं और तीसरे स्थान पर पूर्व दिग्गज कप्तान स्टीव वॉ मौजूद हैं।

    विश्व स्तर पर दर्ज हुई इस नई उपलब्धि का प्रभाव न केवल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में देखा जा रहा है, बल्कि भारत के खेल प्रेमियों में भी इसको लेकर गहरा उत्साह है। मध्य प्रदेश सहित देश भर के युवा खिलाड़ियों और क्रिकेट प्रेमियों के बीच स्टीव स्मिथ की इस तकनीकी पारी और रिकॉर्ड की व्यापक चर्चा हो रही है। मध्य प्रदेश के खेल अकादमियों में अभ्यास कर रहे नवोदित खिलाड़ी उनकी बल्लेबाजी शैली और मुश्किल समय में टिके रहने की क्षमता से प्रेरणा ले रहे हैं।

    बल्लेबाजी के क्षेत्र में लगातार नए रिकॉर्ड स्थापित करने वाले स्टीव स्मिथ का यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब उनकी टीम को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। क्रिकेट विशेषज्ञों के अनुसार जिस तरह से स्मिथ कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहकर रन बनाते हैं, वह उनकी मानसिक मजबूती को दर्शाता है। खेल के सबसे लंबे प्रारूप में उनका यह अनुभव आने वाले मुकाबलों में भी टीम के लिए बेहद निर्णायक साबित होगा।

    स्टीव स्मिथ अब 50 अंतरराष्ट्रीय शतकों के बेहद करीब पहुंच चुके हैं और आगामी मैचों में उनकी नजरें इस खास आंकड़े को हासिल करने पर होंगी। हालांकि उनकी वर्तमान उम्र को देखते हुए रिकी पोंटिंग के कुल रनों के रिकॉर्ड तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन चौथे स्थान पर पहुंचना ही अपने आप में एक अभूतपूर्व उपलब्धि है जिसने उनके करियर में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।