Category: Sports

  • तीन पदकों के साथ भारत ने रचा शानदार अभियान, पूजा सिंह का हाई जंप फाइनल में नहीं चला जलवा

    तीन पदकों के साथ भारत ने रचा शानदार अभियान, पूजा सिंह का हाई जंप फाइनल में नहीं चला जलवा


    नई दिल्ली । यूजीन में आयोजित वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20 चैंपियनशिप में भारत का अभियान तीन पदकों के साथ समाप्त हुआ। भारतीय खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। हालांकि नेशनल सीनियर रिकॉर्ड होल्डर पूजा सिंह से महिलाओं की हाई जंप स्पर्धा में बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन फाइनल में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और उन्हें सातवें स्थान से संतोष करना पड़ा।

    19 वर्षीय पूजा सिंह इस प्रतियोगिता में मजबूत दावेदार के तौर पर उतरी थीं। उन्होंने इसी साल की शुरुआत में 1.93 मीटर की छलांग लगाकर नेशनल सीनियर रिकॉर्ड बनाया था। इसके अलावा मई में एशियन अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी पूजा ने 1.93 मीटर की ऊंचाई पार करते हुए गोल्ड मेडल जीता था। शानदार फॉर्म के कारण उनसे वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप में भी पदक की उम्मीद की जा रही थी।

    महिलाओं की हाई जंप फाइनल में पूजा सिंह ने 1.84 मीटर की ऊंचाई सफलतापूर्वक पार की। इसके बाद उन्होंने 1.87 मीटर की ऊंचाई पार करने की तीन कोशिशें कीं, लेकिन तीनों प्रयास असफल रहे। इस कारण उन्हें सातवें स्थान पर प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया की इजोबेल लुइसन-रो ने 1.92 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। हंगरी की लिलियाना बाटोरी ने सिल्वर और स्पेन की एताना अलोंसो ने ब्रॉन्ज मेडल जीता।

    पूजा का इस सीजन में प्रदर्शन हालांकि बेहद प्रभावशाली रहा है। एशियन अंडर-20 चैंपियनशिप में रिकॉर्ड प्रदर्शन के साथ गोल्ड जीतने के अलावा वह सीनियर एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप की मौजूदा चैंपियन भी हैं। ऐसे में वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप में पदक से चूकना उनके लिए निराशाजनक जरूर रहा, लेकिन उनका लगातार बेहतर प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए सकारात्मक संकेत है।

    भारत की महिला 4×400 मीटर रिले टीम का प्रदर्शन भी फाइनल में उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। भूमिका नेहते, तहुरा खातून, तनु चौधरी और थिया अरुमुगम की भारतीय टीम ने 3 मिनट 45.28 सेकंड का समय दर्ज किया और फाइनल में आखिरी स्थान पर रही। अमेरिका ने 3 मिनट 29.15 सेकंड के समय के साथ गोल्ड मेडल जीता। ऑस्ट्रेलिया को 3 मिनट 31.39 सेकंड के साथ सिल्वर और ग्रेट ब्रिटेन को 3 मिनट 32.08 सेकंड के साथ ब्रॉन्ज मेडल मिला।

    भारत के तीन पदकों में दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज शामिल रहे। आशीष यादव ने पुरुषों की जैवलिन थ्रो में सिल्वर मेडल जीतकर भारत के अभियान की शुरुआत की। इसके बाद बसंत कुमार मेघवाल ने पुरुषों की हाई जंप में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। पुरुषों की लॉन्ग जंप में शाहनवाज खान ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत की पदक संख्या तीन तक पहुंचाई।

    इस प्रदर्शन के साथ भारत ने वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20 चैंपियनशिप का समापन तीन पदकों के साथ किया। खास बात यह है कि भारत ने 2021 और 2022 के संस्करणों में जितने कुल पदक जीते थे, इस बार भी उतने ही पदक हासिल किए। पूजा सिंह भले ही अपने रिकॉर्ड प्रदर्शन को पदक में नहीं बदल सकीं, लेकिन युवा भारतीय एथलीटों का यह प्रदर्शन आने वाले वर्षों के लिए उम्मीद जगाता है।

  • PM मोदी के शब्दों से गदगद मीराबाई चानू, बोलीं- आने वाली प्रतियोगिताओं में और कड़ी मेहनत करने की मिलेगी प्रेरणा

    PM मोदी के शब्दों से गदगद मीराबाई चानू, बोलीं- आने वाली प्रतियोगिताओं में और कड़ी मेहनत करने की मिलेगी प्रेरणा


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाने वाली भारतीय महिला वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद उनका आभार जताया है। रविवार को प्रधानमंत्री आवास पर कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों से खास मुलाकात हुई। इस दौरान पीएम मोदी ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उनका हौसला बढ़ाया। मीराबाई चानू ने कहा कि प्रधानमंत्री के उत्साह बढ़ाने वाले शब्द उन्हें और अन्य खिलाड़ियों को आने वाली प्रतियोगिताओं में कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करेंगे।

    प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद मीराबाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए उनका धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की यात्रा में प्रधानमंत्री का लगातार सहयोग और प्रोत्साहन काफी महत्वपूर्ण है। मीराबाई ने लिखा कि मुलाकात के दौरान हर पदक विजेता के लिए पीएम मोदी के उत्साह बढ़ाने वाले शब्द निश्चित तौर पर खिलाड़ियों को भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए और बेहतर तैयारी करने की प्रेरणा देंगे।

    इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने मीराबाई के उस भावुक पल का भी जिक्र किया जब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद पोडियम पर आंसू बहाए थे। प्रधानमंत्री ने उनसे पूछा कि वह उस समय इतनी भावुक क्यों हो गई थीं। पीएम मोदी ने मजाकिया और भावुक अंदाज में कहा कि उनके इतने आंसू निकल रहे थे कि ऐसा लग रहा था जैसे हर आंसू की बूंद से गोल्ड मेडल टपक रहा हो।

    मीराबाई ने इसके जवाब में अपने संघर्ष की पूरी कहानी बताई। उन्होंने कहा कि गोल्ड मेडल जीतने के बाद वह बेहद खुश और भावुक थीं। उनकी आंखों से आंसू इसलिए भी निकल आए क्योंकि पेरिस ओलंपिक में वह महज एक किलो के अंतर से पदक जीतने से चूक गई थीं। इसके बाद के चार वर्षों में उन्होंने कई तरह की चुनौतियों का सामना किया। चोटों ने उनकी तैयारी को प्रभावित किया और परिवार में भी कई परेशानियां चलती रहीं। इन मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार अपनी फिटनेस तथा प्रदर्शन पर काम करती रहीं।

    मीराबाई ने बताया कि जब वह कॉमनवेल्थ गेम्स के पोडियम पर खड़ी थीं और भारत का राष्ट्रगान बजना शुरू हुआ तो वह खुद को रोक नहीं सकीं। उन्होंने कहा कि जब सामने देश का तिरंगा ऊपर उठता है और राष्ट्रगान बजता है तो भावनाएं अपने आप उमड़ पड़ती हैं। उनके लिए वह पल वर्षों की मेहनत और संघर्ष का परिणाम था।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई ने 48 किलोग्राम वर्ग में कुल 190 किलोग्राम भार उठाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस जीत के साथ उन्होंने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो भारतीय खेल जगत के लिए बेहद खास है। मीराबाई लगातार तीन कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली दुनिया की पहली वेटलिफ्टर बन गई हैं।

    मीराबाई की इस उपलब्धि के पीछे केवल उनकी ताकत और तकनीक ही नहीं बल्कि लंबे समय तक किया गया संघर्ष भी शामिल है। पेरिस ओलंपिक की निराशा, चोटों और निजी चुनौतियों के बाद उन्होंने जिस तरह वापसी की, वह युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है। प्रधानमंत्री से मुलाकात और उनके प्रोत्साहन के बाद मीराबाई ने भी संकेत दिया कि उनका लक्ष्य यहीं खत्म नहीं हुआ है। आने वाली प्रतियोगिताओं में वह और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए पूरी मेहनत करेंगी और देश के लिए नए पदक जीतने की कोशिश जारी रखेंगी।

  • सिनर की चोट ने बढ़ाई टेंशन, सिनसिनाटी ओपन से नाम लिया वापस; अब यूएस ओपन पर टिकी नजरें

    सिनर की चोट ने बढ़ाई टेंशन, सिनसिनाटी ओपन से नाम लिया वापस; अब यूएस ओपन पर टिकी नजरें


    नई दिल्ली । दुनिया के नंबर एक टेनिस खिलाड़ी यानिक सिनर को यूएस ओपन से पहले बड़ा झटका लगा है। इटली के स्टार खिलाड़ी ने दाहिने घुटने की चोट के कारण सिनसिनाटी ओपन से अपना नाम वापस ले लिया है। टूर्नामेंट आयोजकों ने सिनर के हटने की पुष्टि कर दी है। साल के आखिरी ग्रैंड स्लैम यूएस ओपन की तैयारियों के लिहाज से सिनर के लिए यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि उन्हें हार्ड कोर्ट पर अपनी लय हासिल करने के लिए सिनसिनाटी ओपन में उतरना था। अब उनका पूरा ध्यान चोट से उबरने और यूएस ओपन के लिए खुद को फिट करने पर होगा।

    24 वर्षीय सिनर ने अपने फैसले के बारे में बताते हुए कहा कि डॉक्टरों और अपनी टीम से सलाह लेने के बाद उन्होंने सिनसिनाटी में होने वाले मास्टर्स 1000 टूर्नामेंट से हटने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि उनके दाहिने घुटने में परेशानी है और मेडिकल टीम उनके साथ लगातार काम कर रही है। हालांकि अभी वह मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं, इसलिए उन्होंने जोखिम लेने के बजाय आराम और रिकवरी को प्राथमिकता देने का फैसला किया है।

    सिनर के लिए यह इस महीने का दूसरा बड़ा हार्ड कोर्ट टूर्नामेंट होगा जिससे उन्हें बाहर रहना पड़ेगा। इससे पहले उन्होंने कैनेडियन ओपन से भी अपना नाम वापस लिया था। ऐसे में यूएस ओपन से पहले उनके पास प्रतिस्पर्धी मुकाबले के जरिए अपनी तैयारी मजबूत करने के मौके काफी कम हो गए हैं। पिछले महीने विंबलडन में अपना पांचवां ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने के बाद सिनर से उम्मीद की जा रही थी कि वह नॉर्थ अमेरिका के हार्ड कोर्ट टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन करते हुए यूएस ओपन में अपने खिताब की रक्षा की तैयारी करेंगे।

    सिनर ने सिनसिनाटी ओपन से हटने पर निराशा भी जताई। उन्होंने कहा कि इस टूर्नामेंट में नहीं खेल पाना उनके लिए निराशाजनक है, लेकिन इस समय सबसे जरूरी पूरी तरह फिट होना है। उन्होंने संकेत दिया कि अब उनका ध्यान यूएस ओपन की तैयारी पर रहेगा और वह चोट को लेकर किसी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहते।

    सिनर के हटने से सिनसिनाटी ओपन की स्टार पावर को भी बड़ा झटका लगा है। इससे पहले यूएस ओपन चैंपियन कार्लोस अल्काराज भी कलाई की चोट के कारण टूर्नामेंट से बाहर हो चुके हैं। ऐसे में सिनसिनाटी के मुख्य ड्रॉ में दो बड़े नामों की गैरमौजूदगी ने टूर्नामेंट की तस्वीर बदल दी है। वहीं सिनर के लिए इसका सीधा असर यूएस ओपन की तैयारियों पर पड़ सकता है क्योंकि अब उन्हें हार्ड कोर्ट पर प्रतिस्पर्धी अभ्यास का सीमित अवसर मिलेगा।

    सिनसिनाटी ओपन का मेन ड्रॉ 13 अगस्त से शुरू होना है, जबकि यूएस ओपन का मेन ड्रॉ 30 अगस्त से शुरू होगा। ऐसे में सिनर के पास लगभग दो सप्ताह से थोड़ा अधिक समय रहेगा जिसमें उन्हें घुटने की समस्या से पूरी तरह उबरना होगा। उनके लिए चुनौती यह होगी कि वह बिना जल्दबाजी किए फिटनेस हासिल करें और यूएस ओपन में अपने खिताब की रक्षा के लिए कोर्ट पर उतरें।

    सिनर का इस समय चोट से बचने का फैसला उनके लंबे सीजन को देखते हुए भी महत्वपूर्ण है। लगातार बड़े टूर्नामेंट खेलने के बाद शरीर पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है और घुटने की समस्या को गंभीर होने से रोकने के लिए आराम करना जरूरी हो सकता है। अब टेनिस प्रशंसकों की नजर इस बात पर होगी कि सिनर अगले कुछ हफ्तों में कितनी तेजी से रिकवरी करते हैं और क्या वह यूएस ओपन में पूरी फिटनेस के साथ अपने अभियान की शुरुआत कर पाते हैं।

  • पोडियम पर क्यों रोई थीं मीराबाई चानू? PM मोदी ने पूछा सवाल, बोलीं- चार साल में बहुत कुछ सहा

    पोडियम पर क्यों रोई थीं मीराबाई चानू? PM मोदी ने पूछा सवाल, बोलीं- चार साल में बहुत कुछ सहा


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लगातार तीसरी बार गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचने वाली भारतीय वेटलिफ्टर मीराबाई चानू की भावुक तस्वीरें अब भी लोगों के जेहन में हैं। ग्लासगो में पोडियम पर खड़ी मीराबाई जब अपने गले में गोल्ड मेडल पहनकर भारत का राष्ट्रगान सुन रही थीं तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े थे। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर कॉमनवेल्थ गेम्स से पदक जीतकर लौटे भारतीय खिलाड़ियों से मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी ने मीराबाई चानू के उसी भावुक पल का जिक्र करते हुए उनकी उपलब्धि और संघर्ष की जमकर सराहना की।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीराबाई से पूछा कि गोल्ड मेडल जीतने के बाद वह पोडियम पर इतनी भावुक क्यों हो गई थीं। पीएम ने बेहद भावुक अंदाज में कहा कि उनके इतने आंसू बह रहे थे कि ऐसा लग रहा था जैसे हर आंसू की बूंद से गोल्ड मेडल टपक रहा हो। प्रधानमंत्री की यह बात सुनकर मीराबाई ने भी अपने भावुक होने की वजह बताई और कहा कि उस दिन वह बेहद खुश और भावुक थीं। उन्होंने बताया कि पेरिस ओलंपिक में वह सिर्फ एक किलो के अंतर से पदक से चूक गई थीं और उस अनुभव ने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया था।

    मीराबाई ने बताया कि एक खिलाड़ी के सफर में केवल मैदान पर प्रदर्शन करना ही चुनौती नहीं होता, बल्कि इसके साथ कई व्यक्तिगत और शारीरिक संघर्ष भी जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों के दौरान उन्हें लगातार चोटों का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही परिवार में भी कई तरह की परेशानियां चल रही थीं। इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और खुद को दोबारा मजबूत बनाकर कॉमनवेल्थ गेम्स में वापसी की।

    मीराबाई ने कहा कि जब वह पोडियम पर खड़ी थीं और भारत का राष्ट्रगान बजना शुरू हुआ, तो वह अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख सकीं। ऊपर लहराता भारतीय तिरंगा देखकर उनके आंसू अपने आप निकल आए। उनके लिए वह पल केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं था, बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष, चोटों और निराशाओं के बाद देश के लिए सम्मान हासिल करने का क्षण था।

    कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई चानू का प्रदर्शन भारतीय खेल इतिहास के लिए बेहद खास रहा। उन्होंने लगातार तीसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर ऐसी उपलब्धि हासिल की, जो इससे पहले किसी महिला वेटलिफ्टर के नाम नहीं थी। उन्होंने 48 किलोग्राम वर्ग में कुल 190 किलोग्राम भार उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनकी इस जीत ने एक बार फिर साबित किया कि मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद निरंतर मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति से दुनिया के बड़े मंच पर सफलता हासिल की जा सकती है।

    मीराबाई की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उनके सामने पिछले कुछ वर्षों में कई चुनौतियां आईं। चोटों के कारण उन्हें अपनी फिटनेस और तैयारी पर लगातार काम करना पड़ा। पेरिस ओलंपिक में पदक से मामूली अंतर से चूकने के बाद उनके लिए वापसी आसान नहीं थी। लेकिन उन्होंने निराशा को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए फिर से स्वर्ण पदक हासिल किया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने खिलाड़ियों से मुलाकात के दौरान भारतीय दल के प्रदर्शन की भी सराहना की। ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने कुल 39 पदक जीते। इनमें 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल शामिल रहे। भारतीय खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने देश को गौरवान्वित किया और मीराबाई चानू की ऐतिहासिक हैट्रिक ने इस सफलता को और खास बना दिया। उनके पोडियम पर छलके आंसू उस संघर्ष की कहानी बयां कर रहे थे, जिसने उन्हें लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ चैंपियन बनाया।

  • 6 छक्के और 9 चौकों से मचाई तबाही, युगल सैनी की 91 रन की आतिशी पारी से सेंट्रल दिल्ली की रोमांचक जीत

    6 छक्के और 9 चौकों से मचाई तबाही, युगल सैनी की 91 रन की आतिशी पारी से सेंट्रल दिल्ली की रोमांचक जीत


    नई दिल्ली । दिल्ली प्रीमियर लीग 2026 में सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए साउथ दिल्ली सुपरस्टार्स को 4 विकेट से हरा दिया। दोनों टीमों के बीच खेले गए लीग के 19वें मुकाबले में रनों की जमकर बारिश हुई। साउथ दिल्ली सुपरस्टार्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 6 विकेट खोकर 220 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने लक्ष्य का पीछा करते हुए 2 गेंद शेष रहते 6 विकेट गंवाकर 221 रन बनाते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया। टीम की इस जीत के सबसे बड़े नायक युगल सैनी रहे जिन्होंने दबाव के बीच 45 गेंदों में 91 रन की तूफानी पारी खेलकर मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया।

    221 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी सेंट्रल दिल्ली किंग्स की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। कप्तान यश धुल महज एक रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद सिद्धार्थ जून ने तेजी से रन बनाने की कोशिश की और 14 गेंदों में 26 रन बनाए लेकिन अपनी पारी को बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर सके। जोंटी सिद्धू ने भी 13 गेंदों में 5 चौकों की मदद से 24 रन की तेज पारी खेली। शुरुआती झटकों के बीच केशव डब्बास ने पारी को संभालने की कोशिश की और 27 गेंदों में 39 रन बनाकर टीम को मुकाबले में बनाए रखा।

    इसके बाद नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने आए युगल सैनी ने पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और साउथ दिल्ली के गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाया। युगल ने सिर्फ 45 गेंदों में 91 रन ठोक दिए। उनकी पारी में 9 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। उन्होंने मैदान के चारों ओर शॉट लगाते हुए सेंट्रल दिल्ली को लक्ष्य के बेहद करीब पहुंचा दिया। युगल सैनी अपने शतक से महज 9 रन दूर रह गए और उनकी पारी खत्म होने के बावजूद टीम ने मुकाबले पर पकड़ बनाए रखी।

    अंत में वंश बेदी ने तेजी से रन बनाते हुए टीम को जीत तक पहुंचाया। उन्होंने केवल 13 गेंदों का सामना किया और 4 चौकों की मदद से नाबाद 21 रन बनाकर सेंट्रल दिल्ली की जीत सुनिश्चित कर दी। साउथ दिल्ली की ओर से अंशुमन हुड्डा सबसे सफल गेंदबाज रहे और उन्होंने 3 विकेट हासिल किए, लेकिन सेंट्रल दिल्ली के बल्लेबाजों को लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं रोक सके।

    इससे पहले साउथ दिल्ली सुपरस्टार्स ने टॉस के बाद बल्लेबाजी करते हुए 220 रन का मजबूत स्कोर बनाया था। हालांकि टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और अनमोल शर्मा केवल 6 रन बनाकर आउट हो गए। सनत सांगवान ने 23 गेंदों में 38 रन बनाए। उनकी पारी में 3 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। कप्तान आयुष बदोनी ने भी आक्रामक बल्लेबाजी की और केवल 25 गेंदों में 44 रन ठोक दिए। उन्होंने 6 चौके और 2 छक्के लगाए। प्रणव पंत ने 19 गेंदों में 29 रन बनाकर टीम के स्कोर को गति दी।

    साउथ दिल्ली के लिए सबसे विस्फोटक पारी तेजस्वी दहिया ने खेली। उन्होंने महज 31 गेंदों में 69 रन की आतिशी पारी खेली। तेजस्वी ने इस दौरान 8 छक्के और एक चौका लगाया। उनके लगातार बड़े शॉट्स ने सेंट्रल दिल्ली के गेंदबाजों पर दबाव बढ़ा दिया। करन गर्ग ने भी आखिरी ओवरों में तेजी से रन जोड़े और 9 गेंदों में नाबाद 19 रन बनाकर टीम को 220 रन के बड़े स्कोर तक पहुंचाया।

    गेंदबाजी में सेंट्रल दिल्ली की ओर से मनी ग्रेवाल ने 26 रन देकर 2 विकेट हासिल किए। गवनीश खुराना ने भी 2 विकेट अपने नाम किए। इसके बावजूद साउथ दिल्ली के बल्लेबाजों ने अंतिम ओवरों में तेजी से रन बनाकर मजबूत स्कोर खड़ा किया। लेकिन युगल सैनी की धमाकेदार बल्लेबाजी के सामने यह लक्ष्य भी छोटा साबित हुआ और सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने रोमांचक मुकाबले में 4 विकेट से जीत दर्ज कर ली।

  • मोहम्मद शमी की टीम इंडिया में वापसी पर जहीर खान ने दिया बड़ा संकेत, 2027 वर्ल्ड कप को लेकर चयनकर्ताओं को समझाया नजरिया

    मोहम्मद शमी की टीम इंडिया में वापसी पर जहीर खान ने दिया बड़ा संकेत, 2027 वर्ल्ड कप को लेकर चयनकर्ताओं को समझाया नजरिया

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को राष्ट्रीय टीम की योजनाओं से बाहर रखे जाने को लेकर चर्चा लगातार बनी हुई है। घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन करने के बावजूद टीम में जगह नहीं मिलने के बीच पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज जहीर खान ने शमी के समर्थन में अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि भारत को 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारियों में शमी जैसे अनुभवी गेंदबाज के अनुभव का इस्तेमाल करना चाहिए।

    जहीर खान का मानना है कि शमी को बाहरी चर्चाओं और टीम में चयन से जुड़ी परिस्थितियों पर अधिक ध्यान देने के बजाय अपने प्रदर्शन पर फोकस बनाए रखना चाहिए। उनके अनुसार, किसी खिलाड़ी के नियंत्रण में सबसे महत्वपूर्ण चीज उसका प्रदर्शन होता है। इसलिए शमी को लगातार मैच खेलकर विकेट हासिल करने पर ध्यान देना चाहिए।

    जहीर ने कहा कि अगर शमी नियमित रूप से क्रिकेट खेल रहे हैं और अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, तो वह 2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए उपलब्ध विकल्प हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि घरेलू क्रिकेट में मजबूत प्रदर्शन करने वाले अनुभवी खिलाड़ी को राष्ट्रीय टीम की भविष्य की योजनाओं में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    मोहम्मद शमी भारतीय क्रिकेट में लंबे समय से अपनी तेज गेंदबाजी और नई गेंद से विकेट लेने की क्षमता के लिए पहचाने जाते रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके अनुभव को देखते हुए आगामी बड़े टूर्नामेंट के लिए उनकी संभावित भूमिका को लेकर चर्चा स्वाभाविक है। जहीर खान के बयान ने इसी बहस को और प्रमुखता दी है।

    जहीर के मुताबिक, यदि कोई अनुभवी खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, तो चयनकर्ताओं को उसके प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि टीम प्रबंधन को भविष्य की योजनाएं बनाते समय ऐसे खिलाड़ियों के अनुभव को ध्यान में रखना उपयोगी हो सकता है।

    2027 का वनडे वर्ल्ड कप दक्षिण अफ्रीका में आयोजित होना है। इस टूर्नामेंट को ध्यान में रखते हुए भारतीय टीम के पास अपनी गेंदबाजी इकाई तैयार करने के लिए पर्याप्त समय है। ऐसे में चयनकर्ताओं के सामने अनुभवी खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं के बीच सही संतुलन बनाने की चुनौती भी रहेगी।

    जहीर ने शमी को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें उन चीजों पर ध्यान देना चाहिए जो उनके नियंत्रण में हैं। चयन को लेकर होने वाली चर्चा खिलाड़ी के हाथ में नहीं होती, लेकिन मैदान पर प्रदर्शन और फिटनेस बनाए रखना उसके नियंत्रण में रहता है। लगातार अच्छा प्रदर्शन करने से राष्ट्रीय टीम में वापसी की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

    शमी के लिए घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रीय चयन के दौरान मौजूदा फॉर्म और फिटनेस जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाता है। जहीर की राय में यदि शमी प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेल रहे हैं और विकेट हासिल कर रहे हैं, तो उनकी उपलब्धता को भारतीय टीम की योजनाओं में गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

    पूर्व तेज गेंदबाज की इस टिप्पणी से 2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम की संभावित गेंदबाजी रणनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। भारत के सामने आने वाले वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय मुकाबले और आईसीसी प्रतियोगिताएं होंगी, जिनमें अनुभवी खिलाड़ियों की भूमिका और युवा गेंदबाजों को तैयार करने के बीच संतुलन अहम होगा।

    फिलहाल अंतिम फैसला चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन को करना है। शमी की वापसी उनकी फिटनेस, प्रदर्शन और टीम की जरूरतों समेत कई पहलुओं पर निर्भर करेगी। हालांकि जहीर खान की टिप्पणी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय क्रिकेट के अनुभवी खिलाड़ियों में से एक को 2027 वर्ल्ड कप की योजनाओं में शामिल किए जाने की संभावना पर चर्चा जारी है।

  • भारत बांग्लादेश क्रिकेट मैच, BCCI टीम इंडिया, बांग्लादेश क्रिकेट टीम, ढाका क्रिकेट स्टेडियम, भारत बांग्लादेश सीरीज

    भारत बांग्लादेश क्रिकेट मैच, BCCI टीम इंडिया, बांग्लादेश क्रिकेट टीम, ढाका क्रिकेट स्टेडियम, भारत बांग्लादेश सीरीज

    नई दिल्ली ।भारत और बांग्लादेश के बीच सितंबर 2026 में प्रस्तावित वनडे और टी20 सीरीज को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हुई है। भारतीय क्रिकेट टीम इस दौरे पर जाएगी या नहीं, इसका अंतिम फैसला फिलहाल भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के हाथ में नहीं है। बांग्लादेश में मौजूदा परिस्थितियों और खिलाड़ियों की सुरक्षा से जुड़े सवालों को देखते हुए बीसीसीआई ने इस मामले में भारत सरकार की मंजूरी को जरूरी बताया है।

    प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार भारतीय टीम को बांग्लादेश दौरे पर तीन वनडे और तीन टी20 मुकाबले खेलने हैं। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड इस सीरीज को आयोजित करने को लेकर लगातार प्रयास कर रहा है और उसने भारतीय बोर्ड के सामने दौरे को लेकर अपनी तैयारी भी जाहिर की है। दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड के बीच इस विषय पर बातचीत जारी है, लेकिन भारतीय टीम की यात्रा को लेकर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है।

    बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, बोर्ड सुरक्षा से जुड़े किसी भी मामले में अपने स्तर पर अंतिम फैसला नहीं लेना चाहता। ऐसे में भारत सरकार के संबंधित विभागों से बातचीत की जाएगी और सरकारी मंजूरी मिलने के बाद ही दौरे पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया जाएगा। खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की सुरक्षा को बोर्ड की प्राथमिकता माना जा रहा है।

    बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने 29 अगस्त से 15 सितंबर के बीच प्रस्तावित व्हाइट बॉल सीरीज के लिए समय भी निर्धारित रखा है। इस अवधि में तीन वनडे और तीन टी20 मैच कराने की योजना है। हालांकि, भारतीय टीम के दौरे की पुष्टि सरकार की सुरक्षा समीक्षा और मंजूरी पर निर्भर करेगी। अगर अनुमति मिलती है तो निर्धारित अवधि में सीरीज आयोजित की जा सकती है।

    इस पूरे मामले में भारत के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सुरक्षा परिस्थितियों का आकलन करने के बाद सरकार की ओर से बीसीसीआई को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भारतीय खिलाड़ी बांग्लादेश की राजधानी ढाका जाएंगे या दौरा आगे के लिए टाल दिया जाएगा।

    इस सीरीज का इतिहास भी मौजूदा स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। भारत और बांग्लादेश के बीच यह दौरा मूल रूप से 2024 में प्रस्तावित था। उस समय बांग्लादेश में सरकार विरोधी प्रदर्शनों और बाद में हुए राजनीतिक बदलाव के कारण दोनों देशों के बीच परिस्थितियां बदल गई थीं। इसी पृष्ठभूमि में प्रस्तावित क्रिकेट दौरे को आगे के लिए स्थगित कर दिया गया था।

    अब 2026 में इस सीरीज को दोबारा आयोजित करने की योजना सामने आई है। हालांकि, पहले की परिस्थितियों और वर्तमान सुरक्षा स्थिति को देखते हुए भारतीय पक्ष किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं करना चाहता। क्रिकेट बोर्ड के लिए खिलाड़ियों की सुरक्षा से समझौता नहीं करना प्राथमिकता है।

    अगर भारत सरकार दौरे को मंजूरी देती है तो अगस्त के अंत और सितंबर के दौरान दोनों टीमों के बीच सीमित ओवरों की सीरीज देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, सुरक्षा कारणों से अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड का प्रस्तावित कार्यक्रम प्रभावित होगा।

    फिलहाल दोनों क्रिकेट बोर्ड के बीच संपर्क बना हुआ है और अंतिम निर्णय के लिए सरकारी स्तर पर सुरक्षा आकलन का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में सरकार के रुख के बाद ही भारत-बांग्लादेश सीरीज के आयोजन और भारतीय टीम के दौरे को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • IPL 2027 में ऑस्ट्रेलियाई दिग्गजों के खेलने पर सस्पेंस, मैकडोनाल्ड के बयान से मची हलचल

    IPL 2027 में ऑस्ट्रेलियाई दिग्गजों के खेलने पर सस्पेंस, मैकडोनाल्ड के बयान से मची हलचल


    नई दिल्ली । आईपीएल 2027 के शुरू होने से काफी पहले ही ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ऑस्ट्रेलिया के हेड कोच एंड्रयू मैकडोनाल्ड के बयान ने इस चर्चा को और हवा दे दी है। दरअसल अगले साल ऑस्ट्रेलियाई टीम का इंटरनेशनल शेड्यूल बेहद व्यस्त रहने वाला है और इसी वजह से टीम के प्रमुख टेस्ट खिलाड़ियों को आईपीएल में खेलने को लेकर मुश्किल फैसले लेने पड़ सकते हैं। हालांकि मैकडोनाल्ड ने यह साफ नहीं किया है कि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी आईपीएल 2027 से पूरी तरह बाहर रहेंगे। उन्होंने संकेत दिया है कि खिलाड़ियों की फिटनेस, वर्कलोड और इंटरनेशनल प्रतिबद्धताओं को देखते हुए अलग-अलग फैसले लिए जा सकते हैं।

    आईपीएल 2027 के मार्च के मध्य से मई के अंत तक चलने की उम्मीद है। इसके बाद जून में संभावित वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल होना है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के पास इंटरनेशनल क्रिकेट से आराम का समय काफी सीमित रह सकता है। अगले 12 महीनों में ऑस्ट्रेलियाई टीम को करीब 20 टेस्ट और 14 व्हाइट-बॉल इंटरनेशनल मुकाबले खेलने हैं। इस व्यस्त कार्यक्रम में भारत के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज भी शामिल है। इसके अलावा टेस्ट क्रिकेट की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर इंग्लैंड के खिलाफ एक विशेष टेस्ट और फिर एशेज सीरीज भी ऑस्ट्रेलिया के कार्यक्रम का हिस्सा है।

    ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख टेस्ट खिलाड़ियों के लिए आईपीएल और इंटरनेशनल क्रिकेट के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती हो सकता है। हालांकि एंड्रयू मैकडोनाल्ड का मानना है कि आईपीएल ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के मैनेजमेंट प्लान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे बेहतरीन टी20 प्रतियोगिताओं में से एक आईपीएल में अपने प्रमुख खिलाड़ियों को खेलने का मौका मिलने से उन्हें फायदा हो सकता है। लेकिन इसके साथ ही खिलाड़ियों के वर्कलोड और फिटनेस को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाना जरूरी होगा।

    ऑस्ट्रेलिया के कई बड़े सितारे फिलहाल आईपीएल फ्रेंचाइजी से जुड़े हुए हैं। पैट कमिंस, मिचेल स्टार्क, जोश हेजलवुड, कैमरन ग्रीन और ट्रेविस हेड जैसे खिलाड़ी आईपीएल में अपनी पहचान बना चुके हैं। इसके अलावा जोश इंग्लिस भी लखनऊ सुपर जायंट्स का हिस्सा हैं। ऐसे में अगर ऑस्ट्रेलिया के नियमित टेस्ट खिलाड़ी अगले सीजन में अपनी उपलब्धता सीमित करते हैं या टूर्नामेंट से बाहर रहने का फैसला करते हैं तो इसका सीधा असर आईपीएल फ्रेंचाइजियों की रणनीति पर पड़ सकता है। खासकर रिटेंशन और टीम संयोजन को लेकर फ्रेंचाइजियों को पहले से योजना बनानी होगी।

    मैकडोनाल्ड के बयान में सबसे ज्यादा जोर तेज गेंदबाजों के वर्कलोड और रिकवरी पर रहा। ऑस्ट्रेलिया के पास अगले कुछ समय में बेहद महत्वपूर्ण मुकाबले हैं और टीम मैनेजमेंट नहीं चाहता कि लगातार क्रिकेट खेलने की वजह से उसके प्रमुख तेज गेंदबाजों की फिटनेस प्रभावित हो। भारत दौरा, एशेज और वनडे विश्व कप जैसे बड़े लक्ष्य सामने होने के कारण खिलाड़ियों को पर्याप्त आराम देना ऑस्ट्रेलिया की प्राथमिकता हो सकती है।

    मैकडोनाल्ड ने यह भी संकेत दिया कि देश और फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बीच किसी एक को चुनने का फैसला सभी खिलाड़ियों के लिए एक जैसा नहीं होगा। खिलाड़ियों की शारीरिक और मानसिक स्थिति के आधार पर अलग-अलग फैसले लिए जा सकते हैं। अगर किसी खिलाड़ी के लिए आईपीएल उसके वर्कलोड प्लान में फिट बैठता है तो वह टूर्नामेंट में हिस्सा ले सकता है और अगर ऐसा संभव नहीं होता है तो खिलाड़ी और टीम मैनेजमेंट मिलकर फैसला कर सकते हैं।

    इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी आईपीएल 2027 में नहीं खेलेंगे। मैकडोनाल्ड के बयान से इतना जरूर साफ है कि इस बार खिलाड़ियों की उपलब्धता केवल फ्रेंचाइजी या व्यक्तिगत इच्छा से तय नहीं होगी बल्कि फिटनेस, इंटरनेशनल शेड्यूल और टीम की जरूरतों को ध्यान में रखकर फैसला लिया जाएगा। ऐसे में आईपीएल 2027 की नीलामी और रिटेंशन से पहले ऑस्ट्रेलियाई सितारों की उपलब्धता पर सभी फ्रेंचाइजियों की नजरें टिकी रहेंगी।

  • दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी के सिर से उठा पिता का साया, 68 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

    दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी के सिर से उठा पिता का साया, 68 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

    नई दिल्ली । विश्व फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ी और अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी के पिता जॉर्ज मेसी का 68 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्होंने अर्जेंटीना के रोसारियो शहर में लंबी बीमारी से जूझने के बाद अंतिम सांस ली। खेल जगत और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से शनिवार को उनके निधन की दुखद खबर सामने आई।

    जॉर्ज मेसी का अपने बेटे लियोनेल मेसी के जीवन और पेशेवर करियर में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा। वे केवल एक पिता ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने वर्षों तक मेसी के आधिकारिक एजेंट के रूप में भी जिम्मेदारियां संभालीं। मेसी के बचपन से लेकर पेशेवर फुटबॉल में वैश्विक पहचान बनाने और करियर से जुड़े बड़े फैसलों को आकार देने में उनकी मुख्य भूमिका मानी जाती है।

    बीते जून महीने में जॉर्ज मेसी के स्वास्थ्य को लेकर विभिन्न प्रकार की खबरें सामने आने लगी थीं, जिसके बाद मेसी परिवार को सार्वजनिक रूप से एक बयान जारी करना पड़ा था। उस समय परिवार ने पुष्टि की थी कि वे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पीड़ित हैं और चिकित्सकों की सख्त देखरेख में इलाज करा रहे हैं। परिवार ने उस वक्त लोगों और मीडिया से निजता का सम्मान करने तथा अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की थी।

    पिता की गंभीर स्थिति का प्रभाव लियोनेल मेसी की खेल गतिविधियों पर भी देखा गया था। एक महत्वपूर्ण मैच के दौरान गोल करने के बाद वे काफी भावुक नजर आए थे और उन्होंने स्वीकार किया था कि व्यक्तिगत जीवन में उनके लिए समय कठिन चल रहा है। इसके अलावा, हाल ही में आयोजित एक प्रमुख प्रदर्शनी मैच से भी उन्होंने दूरी बनाई थी, जिसे उनके पिता के स्वास्थ्य से जोड़कर देखा गया था।

    उल्लेखनीय है कि लियोनेल मेसी की कप्तानी में अर्जेंटीना की टीम ने वर्ष 2022 में कतर में आयोजित फीफा विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था। इसके अलावा हालिया दौर में भी उनकी टीम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं के फाइनल तक का सफर तय किया है। पिता के निधन की खबर से वैश्विक फुटबॉल समुदाय और मेसी के प्रशंसकों में शोक की लहर व्याप्त है।

  • IND vs SL टेस्ट में रिकॉर्ड बुक पर नजर, जडेजा-जायसवाल दे सकते हैं रोहित-कोहली को चुनौती; गिल का दबदबा कायम

    IND vs SL टेस्ट में रिकॉर्ड बुक पर नजर, जडेजा-जायसवाल दे सकते हैं रोहित-कोहली को चुनौती; गिल का दबदबा कायम


    नई दिल्ली । भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज सिर्फ मुकाबले के लिहाज से ही अहम नहीं रहने वाली है बल्कि इस दौरान भारतीय बल्लेबाजों के बीच वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में रिकॉर्ड की रेस भी देखने को मिलेगी। रवींद्र जडेजा और यशस्वी जायसवाल के पास WTC में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीयों की सूची में पूर्व कप्तान विराट कोहली और रोहित शर्मा को पीछे छोड़ने का शानदार मौका है। खास बात यह है कि जडेजा इस रिकॉर्ड की रेस में विराट कोहली से महज 8 रन पीछे हैं। ऐसे में श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट की पहली पारी में ही वह कोहली को पीछे छोड़ सकते हैं।

    भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज से पहले तीन दिन का प्रैक्टिस मैच भी खेला जा रहा है। इस मुकाबले में रवींद्र जडेजा ने अर्धशतक लगाकर अपनी शानदार फॉर्म के संकेत दे दिए हैं। दूसरी ओर यशस्वी जायसवाल इस अभ्यास मैच में कुछ खास नहीं कर सके और बिना खाता खोले आउट हो गए। भारतीय कप्तान शुभमन गिल चोट के कारण इस प्रैक्टिस मैच का हिस्सा नहीं हैं। इसके बावजूद WTC में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाजों की सूची में गिल का दबदबा कायम है।

    वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के इतिहास में भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज शुभमन गिल हैं। गिल ने 40 मैचों में 2843 रन बनाए हैं और इस सूची में नंबर एक पर हैं। उनके बाद विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत का नंबर आता है जिन्होंने WTC में 2780 रन बनाए हैं। पूर्व कप्तान रोहित शर्मा 2716 रन के साथ तीसरे स्थान पर हैं जबकि विराट कोहली 2617 रन बनाकर चौथे पायदान पर हैं। रवींद्र जडेजा 2610 रन के साथ पांचवें नंबर पर मौजूद हैं।

    जडेजा के लिए यह सीरीज इसलिए खास है क्योंकि उन्हें विराट कोहली को पीछे छोड़ने के लिए सिर्फ 8 रन की जरूरत है। उनके मौजूदा 2610 रन हैं जबकि कोहली के नाम 2617 रन दर्ज हैं। यानी श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में जडेजा जैसे ही 8 रन पूरे करेंगे वह WTC में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीयों की सूची में विराट कोहली को पीछे छोड़कर चौथे स्थान पर पहुंच जाएंगे। इसके बाद उनकी नजर रोहित शर्मा के 2716 रन के आंकड़े पर होगी। जडेजा और रोहित के बीच फिलहाल 106 रन का अंतर है। अगर वह सीरीज में 107 रन या उससे ज्यादा बना लेते हैं तो रोहित शर्मा को भी पीछे छोड़ सकते हैं।

    यशस्वी जायसवाल की स्थिति भी काफी दिलचस्प है। वह अभी 2511 रन के साथ छठे स्थान पर हैं और टॉप-5 में शामिल होने से केवल 100 रन दूर हैं। पांचवें नंबर पर मौजूद जडेजा के 2610 रन हैं। ऐसे में श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में जायसवाल के पास टॉप-5 में पहुंचने का बेहतरीन मौका है। उन्हें विराट कोहली के 2617 रन से आगे निकलने के लिए 107 रन और रोहित शर्मा के 2716 रन को पीछे छोड़ने के लिए 206 रन बनाने होंगे।

    रोहित शर्मा और विराट कोहली के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद अब WTC की इस रन रेस में नई पीढ़ी के बल्लेबाजों के पास आगे निकलने का मौका है। जडेजा अनुभव के दम पर तेजी से ऊपर चढ़ सकते हैं जबकि जायसवाल के पास लंबा करियर और बड़े स्कोर बनाने का अवसर है। ऐसे में भारत और श्रीलंका की टेस्ट सीरीज के दौरान सिर्फ टीम के प्रदर्शन पर ही नहीं बल्कि इन खिलाड़ियों की व्यक्तिगत रिकॉर्ड रेस पर भी क्रिकेट फैंस की नजरें रहेंगी।

    फिलहाल शुभमन गिल 2843 रन के साथ इस सूची में सबसे आगे हैं और ऋषभ पंत 2780 रन के साथ दूसरे स्थान पर हैं। रोहित शर्मा, विराट कोहली और रवींद्र जडेजा के बीच भी ज्यादा बड़ा अंतर नहीं है। ऐसे में आने वाली टेस्ट सीरीज भारतीय क्रिकेट के WTC इतिहास में रन बनाने वालों की सूची को काफी हद तक बदल सकती है।