Category: Sports
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रोहित शर्मा और विराट कोहली की खास लिस्ट में शामिल हुए तिलक वर्मा, टी20 इंटरनेशनल में 50 कैच पूरे कर रचा इतिहास
नई दिल्ली । भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले गए तीसरे टी20 इंटरनेशनल मुकाबले में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 14 रन से जीत दर्ज की। इस मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने आक्रामक अंदाज में रन बनाए और गेंदबाजों ने दबाव के क्षणों में अहम विकेट हासिल किए। इस जीत के बीच तिलक वर्मा ने भी एक खास उपलब्धि अपने नाम कर ली। उन्होंने टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में बतौर फील्डर 50 कैच पूरे कर लिए हैं। इस मुकाम तक पहुंचने वाले वह भारत के पांचवें खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे पहले रोहित शर्मा हार्दिक पांड्या सूर्यकुमार यादव और विराट कोहली यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं।टी20 इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा कैच लेने वाले भारतीय खिलाड़ियों की सूची में रोहित शर्मा शीर्ष पर हैं। उनके नाम 65 कैच दर्ज हैं। हार्दिक पांड्या 64 कैच के साथ दूसरे स्थान पर हैं जबकि सूर्यकुमार यादव 58 कैच लेकर तीसरे नंबर पर हैं। विराट कोहली इस सूची में 54 कैच के साथ शामिल हैं। अब तिलक वर्मा ने 50 कैच पूरे करके इस खास क्लब में जगह बना ली है। यह उपलब्धि उनकी फील्डिंग क्षमता और मैदान पर लगातार योगदान को दर्शाती है।वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरे टी20 में तिलक ने बल्लेबाजी में भी उपयोगी प्रदर्शन किया। उन्होंने केवल 16 गेंदों का सामना करते हुए 28 रन बनाए। उनकी पारी में चार चौके शामिल रहे और उन्होंने 175 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। इससे पहले दूसरे टी20 मुकाबले में भी तिलक ने शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने उस मैच में 18 गेंदों पर नाबाद 44 रन बनाकर भारतीय पारी को तेज गति दी थी। लगातार दो मुकाबलों में उनके आक्रामक अंदाज ने टीम के मध्यक्रम को मजबूती प्रदान की।तीसरे टी20 में भारत की ओर से अभिषेक शर्मा ने सबसे प्रभावशाली पारियों में से एक खेली। उन्होंने 30 गेंदों पर 69 रन बनाए। उनकी पारी में छह चौके और पांच छक्के शामिल रहे। ईशान किशन ने भी तेजी से रन बनाते हुए 18 गेंदों पर 37 रन जोड़े। इन पारियों की मदद से भारतीय टीम 20 ओवर में 223 रन के बड़े स्कोर तक पहुंचने में सफल रही। भारत ने वेस्टइंडीज के सामने जीत के लिए 224 रन का लक्ष्य रखा।लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की टीम ने संघर्ष किया लेकिन निर्धारित ओवरों में सात विकेट गंवाकर 209 रन ही बना सकी। शिमरोन हेटमायर ने 43 रन और कामिल पूरन ने 42 रन बनाकर टीम को मुकाबले में बनाए रखने की कोशिश की। शेरफेन रदरफोर्ड ने 20 गेंदों पर 32 रन बनाए। वहीं शमर स्प्रिंगर ने केवल 11 गेंदों पर नाबाद 35 रन की तेज पारी खेली। इसके बावजूद कैरेबियाई टीम लक्ष्य से 14 रन दूर रह गई। दूसरे टी20 में शतक लगाने वाले कप्तान शाई होप इस बार केवल पांच रन बनाकर आउट हो गए।भारतीय गेंदबाजी में अर्शदीप सिंह ने 44 रन देकर तीन विकेट हासिल किए जबकि नमन धीर ने दो विकेट झटके। गेंदबाजों ने अंतिम ओवरों में जरूरी नियंत्रण बनाए रखा और टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इस मुकाबले में भारत की जीत के साथ तिलक वर्मा की व्यक्तिगत उपलब्धि भी चर्चा में रही। बल्लेबाजी और फील्डिंग दोनों में योगदान देने वाले तिलक के लिए यह रिकॉर्ड उनके टी20 इंटरनेशनल करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। -

वेस्टइंडीज के खिलाफ प्रिंस यादव की तूफानी बल्लेबाजी से प्रभावित हुए अभिषेक, बोले- बड़े शॉट लगाने का हुनर आने वाले समय में और निखरेगा
नई दिल्ली । भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले गए तीसरे टी20 इंटरनेशनल मुकाबले में भारतीय टीम ने 14 रन से जीत दर्ज की। इस मैच में जहां भारतीय बल्लेबाजों ने बड़े स्कोर की नींव रखी वहीं आखिरी ओवरों में प्रिंस यादव की छोटी लेकिन उपयोगी पारी भी चर्चा में रही। प्रिंस ने महज छह गेंदों पर नाबाद 13 रन बनाकर टीम के स्कोर को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दिया। उनकी इस बल्लेबाजी से अभिषेक शर्मा भी प्रभावित नजर आए। अभिषेक ने प्रिंस की तारीफ करते हुए कहा कि वह उनकी बल्लेबाजी पहले देख चुके हैं और दिल्ली के क्रिकेट सर्कल में उनके नाम की चर्चा होती है।भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की ओर से साझा किए गए वीडियो में प्रिंस यादव ने बताया कि तीसरे टी20 मुकाबले में बल्लेबाजी के लिए अभिषेक शर्मा ने उन्हें अपना बल्ला दिया था। प्रिंस के मुताबिक टीम के लिए किसी भी तरह से योगदान देना उनके लिए खुशी की बात है। चाहे बल्लेबाजी हो या गेंदबाजी अथवा फील्डिंग हर खिलाड़ी की कोशिश रहती है कि वह टीम की सफलता में अपना हिस्सा दे। उन्होंने मजाकिया अंदाज में बताया कि अभिषेक ने बल्ला देते समय उनसे कहा था कि उसकी बेइज्जती नहीं होनी चाहिए। प्रिंस ने कहा कि उन्होंने बल्ले की इज्जत रखते हुए कुछ अच्छे शॉट लगा दिए।वीडियो में प्रिंस के साथ मौजूद अभिषेक शर्मा ने उनकी बल्लेबाजी की क्षमता पर भरोसा जताया। अभिषेक ने कहा कि यदि किसी ने प्रिंस को बल्लेबाजी करते हुए नहीं देखा है तो उन्होंने उन्हें खेलते देखा है। दिल्ली में होने वाले सिंगल विकेट क्रिकेट में खिलाड़ियों को आमने-सामने अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों का हुनर दिखाना पड़ता है। अभिषेक के अनुसार प्रिंस में बड़े शॉट लगाने की क्षमता है और इसकी झलक वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबले में भी देखने को मिली। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में प्रिंस का यह हुनर और निखरेगा। अभिषेक ने यह भी कहा कि बल्ला उनका था लेकिन गेंद को बाउंड्री के पार पहुंचाने में प्रिंस की ताकत और प्रतिभा का योगदान था।प्रिंस ने बातचीत के दौरान यह भी बताया कि इंग्लैंड में भी उन्होंने अभिषेक के बल्ले से बल्लेबाजी की थी और छक्का लगाया था। इसी वजह से अब वह जब भी बल्लेबाजी के लिए उतरेंगे तो अभिषेक से ही बल्ला लेने की कोशिश करेंगे। मैदान पर इस हल्की-फुल्की बातचीत ने दोनों खिलाड़ियों के बीच अच्छे तालमेल की झलक भी दिखाई।मैच में प्रिंस यादव ने भारत की ओर से नंबर 10 या 11 पर बल्लेबाजी करते हुए टी20 इंटरनेशनल में तीन या उससे अधिक बाउंड्री लगाने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों की सूची में जगह बनाई। उन्होंने अपनी नाबाद 13 रन की पारी में तीन चौके लगाए। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 223 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। जवाब में वेस्टइंडीज की टीम सात विकेट गंवाकर 209 रन ही बना सकी और भारत ने मुकाबला 14 रन से अपने नाम कर लिया।इस जीत में भारतीय टीम के सामूहिक प्रदर्शन की अहम भूमिका रही। हालांकि प्रिंस यादव की छोटी पारी ने यह भी दिखाया कि निचले क्रम के बल्लेबाजों का योगदान टी20 क्रिकेट में कितना महत्वपूर्ण हो सकता है। अभिषेक शर्मा की तारीफ से प्रिंस का आत्मविश्वास बढ़ने की उम्मीद है और अब नजरें उनके आगे के प्रदर्शन पर रहेंगी। -

रणजी ट्रॉफी 2026-27 में सितारों का शानदार आगाज, जडेजा-रिंकू के शतक से चमका बल्ला, प्रेरक मांकड़ ने भी खेली 129 रन की पारी
नई दिल्ली । रणजी ट्रॉफी 2026-27 सीजन की शुरुआत भारतीय क्रिकेट के कई बड़े खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के साथ हुई है। सौराष्ट्र की ओर से खेलते हुए अनुभवी ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने छत्तीसगढ़ के खिलाफ शतकीय पारी खेलकर अपनी बल्लेबाजी का दम दिखाया। वहीं उत्तर प्रदेश की तरफ से रिंकू सिंह ने भी बिहार के खिलाफ शतक जड़कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इन दोनों खिलाड़ियों के अलावा प्रेरक मांकड़ और माधव कौशिक ने भी शानदार पारियां खेलीं। घरेलू क्रिकेट के इस मुकाबले में खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने एक बार फिर रणजी ट्रॉफी के महत्व को सामने रखा है।छत्तीसगढ़ के खिलाफ मुकाबले में रवींद्र जडेजा ने 209 गेंदों का सामना करते हुए 102 रन बनाए। उनकी पारी में सात चौके शामिल रहे। जडेजा जब क्रीज पर बल्लेबाजी करने उतरे थे तब सौराष्ट्र की टीम तीन विकेट के नुकसान पर 120 रन बनाकर खेल रही थी। ऐसे समय में टीम को एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी। जडेजा ने पहले चिराग जानी के साथ चौथे विकेट के लिए 31 रन जोड़े। चिराग के आउट होने के बाद प्रेरक मांकड़ ने उनका साथ दिया और दोनों बल्लेबाजों ने मिलकर सौराष्ट्र की पारी को मजबूती प्रदान की।जडेजा और प्रेरक मांकड़ के बीच पांचवें विकेट के लिए 205 रनों की शानदार साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने सौराष्ट्र को शुरुआती झटकों से उबारने में बड़ी भूमिका निभाई। प्रेरक मांकड़ ने 150 गेंदों पर 129 रन बनाए। उनकी पारी में बेहतरीन बल्लेबाजी का प्रदर्शन देखने को मिला। इससे पहले चिराग जानी ने भी 83 रनों का उपयोगी योगदान दिया था। इन पारियों की मदद से सौराष्ट्र की टीम पहली पारी में 392 रन तक पहुंचने में सफल रही। जडेजा का शतक इस पारी की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा।दूसरी ओर बिहार के खिलाफ उत्तर प्रदेश की टीम से खेलते हुए रिंकू सिंह ने भी अपने बल्ले से प्रभाव छोड़ा। रिंकू ने 168 गेंदों पर 112 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने आठ चौके और तीन छक्के लगाए। उनकी बल्लेबाजी ने उत्तर प्रदेश की पारी को मजबूती दी। रिंकू को दूसरे छोर से माधव कौशिक का शानदार साथ मिला। दोनों के बीच 312 गेंदों में 207 रनों की बड़ी साझेदारी हुई। माधव कौशिक ने भी बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए 150 रन बनाए। दोनों खिलाड़ियों के शतकों ने उत्तर प्रदेश के लिए इस मुकाबले में मजबूत आधार तैयार किया।रणजी ट्रॉफी के अन्य मुकाबलों में भी कई खिलाड़ियों ने अपनी छाप छोड़ी। बड़ौदा की ओर से खेलते हुए दीपक हुड्डा ने गोवा के खिलाफ 98 गेंदों पर 52 रन बनाए। उनकी पारी में पांच चौके शामिल रहे। हालांकि राजस्थान की तरफ से खेलने वाले मानव सुथार बल्लेबाजी में खास प्रभाव नहीं छोड़ सके और 17 रन बनाकर आउट हो गए। हैदराबाद की ओर से खेलते हुए मोहम्मद सिराज त्रिपुरा के खिलाफ पहली पारी में कोई विकेट हासिल नहीं कर सके।इससे पहले रविवार को भी कुछ प्रमुख खिलाड़ियों का प्रदर्शन चर्चा में रहा था। कर्नाटक की तरफ से खेलने वाले केएल राहुल सिर्फ चार रन बनाकर आउट हो गए थे। मुंबई के लिए खेलते हुए यशस्वी जायसवाल भी खाता नहीं खोल सके थे। वहीं मोहम्मद सिराज ने दिल्ली के खिलाफ शानदार गेंदबाजी करते हुए चार विकेट हासिल किए थे। रणजी ट्रॉफी में इन मुकाबलों के जरिए अनुभवी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों और घरेलू क्रिकेट के प्रतिभाशाली बल्लेबाजों को अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिल रहा है। जडेजा और रिंकू सिंह के शतकों ने सीजन की शुरुआत को खास बना दिया है। -

IND vs WI: इंदौर में भारत की जीत के बीच वेस्टइंडीज ने बनाया महारिकॉर्ड, T20I में छक्कों का दोहरा हजार पूरा, जानें किस नंबर पर है टीम इंडिया
नई दिल्ली । भारत और वेस्टइंडीज के बीच इंदौर में खेले गए तीसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में टीम इंडिया ने 14 रन से जीत दर्ज कर पांच मैचों की सीरीज में 2-1 की बढ़त बना ली। हालांकि इस हार के बावजूद वेस्टइंडीज की टीम ने ऐसा विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया जो टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब तक कोई दूसरी टीम हासिल नहीं कर सकी थी। वेस्टइंडीज टी20 इंटरनेशनल में 2000 छक्के लगाने वाली दुनिया की पहली टीम बन गई है। भारतीय टीम भी इस रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंच चुकी है और आने वाले मुकाबलों में उसके पास इस आंकड़े को पार करने का मौका होगा।वेस्टइंडीज की टीम ने भारत के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में कुल 13 छक्के लगाए। इसी के साथ उसके टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में छक्कों की संख्या 2000 के पार पहुंच गई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वेस्टइंडीज के नाम 2010 छक्के दर्ज हैं और वह इस सूची में पहले स्थान पर है। दूसरी ओर भारतीय टीम 1997 छक्कों के साथ दूसरे नंबर पर मौजूद है। इंदौर में खेले गए मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने आठ छक्के लगाए थे। इस तरह दोनों टीमों के बीच छक्कों के मामले में अंतर बेहद कम रह गया है। भारत को वेस्टइंडीज के आंकड़े से आगे निकलने के लिए अब ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ सकता।टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में छक्के लगाने के मामले में भारत और वेस्टइंडीज का दबदबा साफ दिखाई देता है। दोनों टीमों में कई ऐसे बल्लेबाज हैं जो तेजी से रन बनाने और बड़े शॉट खेलने के लिए जाने जाते हैं। इस सूची में न्यूजीलैंड तीसरे स्थान पर है जिसके नाम 1585 छक्के दर्ज हैं। भारत और न्यूजीलैंड के बीच 412 छक्कों का बड़ा अंतर है। पाकिस्तान 1500 छक्कों के साथ चौथे स्थान पर है जबकि दक्षिण अफ्रीका 1407 छक्कों के साथ पांचवें नंबर पर मौजूद है। इंग्लैंड के खाते में 1406 और ऑस्ट्रेलिया के नाम 1400 छक्के दर्ज हैं। श्रीलंका 1045 छक्कों के साथ आठवें स्थान पर है। अफगानिस्तान के 1014 बांग्लादेश के 986 और जिम्बाब्वे के 931 छक्के हैं। ये आंकड़े टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आक्रामक बल्लेबाजी के लिहाज से टीमों के प्रदर्शन को दर्शाते हैं।इंदौर में खेले गए तीसरे टी20 मुकाबले में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बड़ा स्कोर खड़ा किया। सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने तूफानी अर्धशतक लगाकर टीम को तेज शुरुआत दिलाई और भारत ने निर्धारित 20 ओवर में 223 रन बनाए। इसके जवाब में वेस्टइंडीज की टीम सात विकेट के नुकसान पर 209 रन ही बना सकी। शिमरोन हेटमायर ने 26 गेंदों में 43 रन बनाए जिसमें छह चौके और दो छक्के शामिल रहे। कामिल पूरन ने भी 27 गेंदों पर 42 रन की उपयोगी पारी खेली। हालांकि भारतीय गेंदबाजों ने दबाव बनाए रखा और मेहमान टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी।वेस्टइंडीज की ओर से पारी के अंतिम ओवरों में शमार स्प्रिंगर ने तेजी से रन बनाकर मुकाबले में रोमांच पैदा किया। उन्होंने केवल 11 गेंदों पर नाबाद 35 रन ठोक दिए जिसमें चार छक्के और दो चौके शामिल थे। इसके बावजूद टीम को जीत नहीं मिल सकी। भारत की तरफ से अर्शदीप सिंह ने 44 रन देकर तीन विकेट हासिल किए जबकि नमन धीर ने 39 रन देकर दो बल्लेबाजों को आउट किया। गेंदबाजों के इस प्रदर्शन ने भारत की जीत सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई।इस जीत के साथ भारत ने पांच मैचों की टी20 सीरीज में 2-1 की बढ़त हासिल कर ली। मुकाबले की खास बात यह भी रही कि मौजूदा भारत दौरे में पहली बार किसी टीम ने लक्ष्य का सफलतापूर्वक बचाव किया। एक तरफ भारतीय टीम सीरीज में बढ़त बनाकर उत्साहित है तो दूसरी तरफ वेस्टइंडीज ने हार के बावजूद छक्कों का ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम किया है। अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजर भारतीय टीम पर रहेगी कि वह कितनी जल्दी 2000 छक्कों का आंकड़ा पार कर इस उपलब्धि को हासिल करती है। -

IPL 2027 में नए अंदाज में उतरेगी CSK, बल्लेबाजी कोच माइकल हसी से टूटा रिश्ता, इंग्लैंड की टीम से जुड़ने की भी चर्चा
नई दिल्ली। आईपीएल 2027 से पहले पांच बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स में बदलावों का सिलसिला लगातार जारी है। फ्रेंचाइजी ने अपने कोचिंग स्टाफ में एक और बड़ा फेरबदल करते हुए अनुभवी बल्लेबाजी कोच माइकल हसी से अलग होने का फैसला किया है। हसी लंबे समय से चेन्नई की टीम से जुड़े हुए थे और उन्हें कोचिंग स्टाफ का अहम हिस्सा माना जाता था। उनके जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगामी सीजन में टीम का नया बल्लेबाजी कोच कौन होगा और चेन्नई सुपर किंग्स किस रणनीति के साथ मैदान पर उतरेगी।ऑस्ट्रेलिया के पूर्व बाएं हाथ के बल्लेबाज माइकल हसी का चेन्नई सुपर किंग्स के साथ पुराना नाता रहा है। उन्होंने पहले खिलाड़ी के रूप में टीम का प्रतिनिधित्व किया और कई यादगार पारियां खेलकर अपनी उपयोगिता साबित की। इसके बाद वर्ष 2018 में उन्हें टीम का बल्लेबाजी कोच बनाया गया। तब से वह लगातार इस जिम्मेदारी को निभा रहे थे। उनके अनुभव और टीम के साथ लंबे जुड़ाव के कारण उन्हें चेन्नई के कोचिंग ढांचे का मजबूत स्तंभ माना जाता था। अब फ्रेंचाइजी ने कोचिंग स्टाफ में बदलाव की योजना के तहत उनसे रास्ते अलग कर लिए हैं।चेन्नई सुपर किंग्स में यह बदलाव किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। इससे पहले टीम ने लंबे समय तक मुख्य कोच रहे स्टीफन फ्लेमिंग से भी नाता तोड़ लिया था। उनकी जगह पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज जहीर खान को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा गेंदबाजी कोच एरिक सिमंस को हटाकर उनकी जगह मोहित शर्मा को शामिल किया गया है। इस तरह टीम के कोचिंग स्टाफ में लगातार नए चेहरे लाए जा रहे हैं। फील्डिंग कोच जेम्स फास्टर के भविष्य को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं बताई गई है।माइकल हसी की विदाई के बाद उनके अगले कदम को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें इंग्लैंड की टेस्ट टीम के बल्लेबाजी कोच की भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि इस संबंध में किसी अंतिम नियुक्ति की पुष्टि नहीं हुई है। हसी का इंग्लैंड क्रिकेट से पहले भी जुड़ाव रहा है। उन्होंने वर्ष 2022 में टी20 विश्व कप के दौरान इंग्लैंड की टीम के साथ सलाहकार के रूप में काम किया था। उस अभियान में इंग्लैंड ने खिताब जीता था। इसके अलावा हसी द हंड्रेड टूर्नामेंट में वेल्श फायर के मुख्य कोच भी हैं।चेन्नई सुपर किंग्स के लिए आगामी सीजन नई शुरुआत की तरह देखा जा रहा है। टीम अपने कोचिंग स्टाफ में बदलाव के जरिए नई रणनीति और नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। जहीर खान और मोहित शर्मा जैसे पूर्व भारतीय खिलाड़ियों को अहम जिम्मेदारी सौंपने के बाद अब बल्लेबाजी कोच का पद चर्चा में है। हसी के जाने से टीम को उनके अनुभव की कमी महसूस हो सकती है लेकिन फ्रेंचाइजी नए विकल्पों के साथ आगे बढ़ना चाहती है।आईपीएल 2027 से पहले चेन्नई के सामने कोचिंग स्टाफ को अंतिम रूप देने और खिलाड़ियों की तैयारी को मजबूत करने की चुनौती होगी। नए बल्लेबाजी कोच की नियुक्ति टीम की रणनीति के लिहाज से अहम साबित हो सकती है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हसी की जगह किसे जिम्मेदारी दी जाएगी। ऐसे में चेन्नई के प्रशंसकों की नजर फ्रेंचाइजी के अगले फैसले पर टिकी हुई है। -

टीम इंडिया में चयन नहीं होने पर मोहम्मद शमी ने तोड़ी चुप्पी, चयनकर्ताओं पर साधा निशाना, बोले मौका नहीं मिला तो यह मेरा नुकसान नहीं
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम में अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की वापसी के बाद मोहम्मद शमी के चयन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एक तरफ भुवनेश्वर कुमार को लंबे इंतजार के बाद टी20 टीम में जगह मिली है तो दूसरी तरफ मोहम्मद शमी अब भी भारतीय टीम में वापसी का इंतजार कर रहे हैं। घरेलू क्रिकेट में बंगाल की ओर से खेलने जा रहे शमी ने टीम में चयन नहीं होने को लेकर अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि पिछले दो से तीन साल से उनके साथ यही स्थिति बनी हुई है और लगातार प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें टीम इंडिया में मौका नहीं मिल रहा है।रेवस्पोर्ट्स से बातचीत के दौरान जब शमी से भुवनेश्वर कुमार की वापसी और खुद के लंबे समय से टीम से बाहर रहने के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि भुवनेश्वर को भारत के लिए खेलने का मौका मिला है और यह उनके लिए अच्छी बात है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भुवनेश्वर के चयन से उनका कोई लेना देना नहीं है। शमी ने कहा कि उन्हें जहां भी खेलने का अवसर मिलेगा वह अपना शत प्रतिशत प्रदर्शन करेंगे। फिलहाल उनका पूरा ध्यान रणजी ट्रॉफी के मुकाबलों पर है।शमी ने अपने बयान में चयन को लेकर नाराजगी भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पिछले दो से तीन वर्षों से उनके साथ ऐसा ही हो रहा है। वह लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और बंगाल के लिए खेलते हुए अपनी फिटनेस भी साबित कर चुके हैं। इसके बावजूद अगर उन्हें दोबारा भारतीय टीम के लिए खेलने का मौका नहीं मिलता है तो यह उनका नुकसान नहीं होगा। उनके इस बयान के बाद अनुभवी तेज गेंदबाजों के चयन और टीम इंडिया में वापसी के अवसरों को लेकर बहस तेज हो गई है।36 वर्षीय मोहम्मद शमी ने भारत के लिए अपना आखिरी मुकाबला 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी में खेला था। इसके बाद से वह भारतीय टीम से बाहर चल रहे हैं। फिटनेस से जुड़ी समस्याओं और युवा खिलाड़ियों को प्राथमिकता दिए जाने को उनके टीम से बाहर रहने की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है। हालांकि शमी घरेलू क्रिकेट में अपनी गेंदबाजी के दम पर वापसी की उम्मीद बनाए हुए हैं। रणजी ट्रॉफी में बंगाल की टीम का हिस्सा होने के कारण उनके पास एक बार फिर अपनी क्षमता दिखाने का अवसर है।दूसरी ओर भुवनेश्वर कुमार ने आईपीएल 2026 में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय टी20 टीम में वापसी की है। उन्हें न्यूजीलैंड दौरे के लिए टीम में शामिल किया गया है। माना जा रहा है कि उन्हें 2027 में होने वाले वनडे विश्व कप की योजनाओं के मद्देनजर भी परखा जा सकता है। भुवनेश्वर की वापसी ने अनुभवी गेंदबाजों की भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।वेस्टइंडीज के खिलाफ मौजूदा सीरीज में भारतीय गेंदबाजों के प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सपाट पिचों पर गेंदबाजों को मिल रही चुनौती के बीच क्रिकेट प्रशंसक और विशेषज्ञ अनुभवी खिलाड़ियों को मौका देने की मांग कर रहे हैं। ऐसे माहौल में शमी का बयान चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि टीम में चयन का अंतिम फैसला चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन की रणनीति पर निर्भर करता है। शमी के लिए फिलहाल रणजी ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन करना और अपनी गेंदबाजी की लय बनाए रखना अहम होगा। उनका घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन आने वाले समय में टीम इंडिया में वापसी की संभावनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। -

होलकर स्टेडियम में आज बनेगा इतिहास? अभिषेक शर्मा तोड़ सकते हैं सूर्या के दो रिकॉर्ड, ईशान और श्रेयस के पास भी बड़ा मौका
नई दिल्ली। इंदौर के होलकर स्टेडियम में रविवार 11 अक्टूबर को भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाला तीसरा टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला भारतीय बल्लेबाजों के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकता है। टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा की नजरें सूर्यकुमार यादव के दो बड़े रिकॉर्ड पर टिकी हैं। वहीं ईशान किशन और कप्तान श्रेयस अय्यर के पास भी भारतीय क्रिकेट के रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज कराने का मौका है। ऐसे में इस मुकाबले में रोमांचक क्रिकेट के साथ कई व्यक्तिगत उपलब्धियों पर भी दर्शकों की निगाहें रहेंगी।अभिषेक शर्मा इस समय शानदार बल्लेबाजी कर रहे हैं और उनके पास टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम गेंदों में 2000 रन पूरे करने का रिकॉर्ड अपने नाम करने का मौका है। अभिषेक अब तक 64 मुकाबलों की 63 पारियों में 1967 रन बना चुके हैं और इसके लिए उन्होंने 1009 गेंदों का सामना किया है। तीसरे टी20 में 33 रन बनाते ही वह 2000 रन के आंकड़े तक पहुंच जाएंगे। फिलहाल यह रिकॉर्ड सूर्यकुमार यादव के नाम है जिन्होंने अपनी 1164वीं गेंद पर टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 2000 रन पूरे किए थे। अभिषेक को यह उपलब्धि हासिल करने के लिए सूर्यकुमार से कम गेंदों में यह आंकड़ा पार करना होगा। इस सूची में ऑस्ट्रेलिया के आरोन फिंच और ग्लेन मैक्सवेल भी शामिल हैं।अभिषेक के निशाने पर सूर्यकुमार का एक और बड़ा रिकॉर्ड है। एक कैलेंडर वर्ष में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाजों की सूची में सूर्यकुमार शीर्ष पर हैं। उन्होंने 2022 में 31 मुकाबलों में 68 छक्के लगाए थे। अभिषेक 2026 में अब तक 31 मैचों में 63 छक्के जड़ चुके हैं। उन्हें सूर्यकुमार का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए तीसरे टी20 में कम से कम छह छक्के लगाने होंगे। अगर अभिषेक ऐसा करने में सफल रहते हैं तो वह एक कैलेंडर वर्ष में पूर्ण सदस्य देशों के बल्लेबाजों के बीच सबसे ज्यादा टी20 अंतरराष्ट्रीय छक्के लगाने वाले बल्लेबाज बन सकते हैं।अभिषेक के पास टी20 क्रिकेट के सभी मुकाबलों में भी अपना ही रिकॉर्ड बेहतर करने का मौका है। उन्होंने 2025 में 41 मैचों में 108 छक्के लगाए थे। इस साल वह 46 मुकाबलों में 106 छक्के लगा चुके हैं। यानी अपने पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने के लिए उन्हें तीन और छक्कों की जरूरत है। इंदौर में उनकी आक्रामक बल्लेबाजी इस उपलब्धि को खास बना सकती है।ईशान किशन भी इस मुकाबले में एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकते हैं। उन्होंने 2026 में अब तक 31 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 1085 रन बनाए हैं। भारत के लिए एक कैलेंडर वर्ष में सबसे ज्यादा टी20 अंतरराष्ट्रीय रन बनाने का रिकॉर्ड फिलहाल सूर्यकुमार यादव के नाम है जिन्होंने 2022 में 1164 रन बनाए थे। ईशान को इस रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए तीसरे टी20 में कम से कम 80 रन बनाने होंगे। ऐसे में उनकी बल्लेबाजी भी मैच का अहम आकर्षण रहेगी।भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर के पास भी रिकॉर्ड बनाने का अवसर है। उन्होंने 2026 में भारत की कप्तानी करते हुए 18 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 551 रन बनाए हैं। एक कैलेंडर वर्ष में भारतीय कप्तान के तौर पर सबसे ज्यादा टी20 अंतरराष्ट्रीय रन बनाने का रिकॉर्ड रोहित शर्मा के नाम है। रोहित ने 2022 में 29 मैचों में 656 रन बनाए थे। श्रेयस को उनसे आगे निकलने के लिए 106 रन बनाने होंगे। कुल मिलाकर इंदौर में होने वाला यह मुकाबला भारतीय बल्लेबाजों के लिए उपलब्धियों के लिहाज से बेहद खास हो सकता है। अब देखना होगा कि अभिषेक ईशान और श्रेयस में से कौन अपने प्रदर्शन से नया इतिहास रचता है। -

भुवनेश्वर कुमार पर फिर भरोसा, क्या टीम इंडिया के पास तेज गेंदबाजों की कमी, बुमराह के बाद कौन बनेगा अगला सहारा
नई दिल्ली । करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद भुवनेश्वर कुमार की भारतीय टीम में वापसी ने क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी है। 36 साल की उम्र में टीम इंडिया के पेस अटैक में दोबारा जगह बनाने वाले भुवनेश्वर के लिए यह वापसी उनके अनुभव और शानदार प्रदर्शन का इनाम मानी जा रही है। लेकिन इसके साथ ही भारतीय तेज गेंदबाजी की गहराई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज के लिए चुने गए भुवनेश्वर की वापसी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जसप्रीत बुमराह के बाद भारतीय तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी उठाने के लिए भरोसेमंद विकल्प कौन है।भुवनेश्वर कुमार ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ ही खेला था। अब उसी टीम के विरुद्ध उनकी वापसी की कहानी दिलचस्प संयोग लेकर आई है। भुवनेश्वर ने अपने करियर में 21 टेस्ट 87 टी20 अंतरराष्ट्रीय और 121 वनडे मुकाबले खेले हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत नई गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की क्षमता रही है। इसके अलावा वह सटीक यॉर्कर और नियंत्रित लाइन लेंथ से बल्लेबाजों को परेशान करने में माहिर हैं। पिछले दो आईपीएल सीजन में उनके प्रदर्शन ने भी चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा है। करीब आठ की इकॉनमी से 45 विकेट लेने वाले भुवनेश्वर ने साबित किया है कि अनुभव और कौशल के दम पर वह अब भी प्रभावी गेंदबाज बने हुए हैं।भुवनेश्वर की वापसी को समझने के लिए भारतीय क्रिकेट के पुराने उदाहरणों पर भी नजर डालना जरूरी है। पूर्व तेज गेंदबाज आशीष नेहरा ने भी 2011 विश्व कप के बाद करीब पांच साल तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहने के बाद 2016 में टीम इंडिया में वापसी की थी। उस समय उनकी उम्र भी लगभग 36 साल थी। नेहरा ने इसके बाद भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी उपयोगिता साबित की और 2017 में संन्यास लिया। ऐसे में भुवनेश्वर की वापसी को उम्र के लिहाज से असामान्य नहीं कहा जा सकता। असली सवाल यह है कि क्या यह वापसी केवल उनके मौजूदा प्रदर्शन का परिणाम है या भारतीय टीम को अनुभवी तेज गेंदबाजों की कमी भी महसूस हो रही है।जसप्रीत बुमराह भारतीय गेंदबाजी की सबसे मजबूत कड़ी हैं लेकिन उनकी गैरमौजूदगी में टीम को संतुलित रखने की चुनौती बनी रहती है। मोहम्मद शमी लंबे समय तक इस भूमिका को मजबूती से निभाते रहे हैं लेकिन उन्हें लगातार मौके मिलने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। मोहम्मद सिराज ने भी कई मुकाबलों में अपनी क्षमता दिखाई है लेकिन सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी भूमिका और निरंतरता को लेकर चर्चा जारी है। दूसरी ओर अर्शदीप सिंह प्रसिद्ध कृष्णा हर्षित राणा और मयंक यादव जैसे गेंदबाजों ने अलग-अलग मौकों पर उम्मीद जगाई है। इसके बावजूद किसी एक तेज गेंदबाज को तीनों प्रारूपों में लंबे समय तक भरोसेमंद विकल्प मानना अभी आसान नहीं है।भारतीय क्रिकेट के पास बड़ा घरेलू ढांचा आईपीएल जैसा प्रतिस्पर्धी मंच और खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। बल्लेबाजी में हर दौर के बाद नई पीढ़ी सामने आती रही है। सचिन तेंदुलकर सौरव गांगुली और वीरेंद्र सहवाग के बाद विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ी आए। अब युवा बल्लेबाज भी अपनी जगह बनाने लगे हैं। तेज गेंदबाजी में हालांकि ऐसी निरंतरता उतनी स्पष्ट दिखाई नहीं देती। चोटें कार्यभार प्रबंधन और प्रदर्शन में उतार चढ़ाव तेज गेंदबाजों के करियर को प्रभावित करते रहे हैं।भुवनेश्वर कुमार की वापसी इसलिए केवल एक खिलाड़ी की वापसी नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल भी है। बुमराह जैसा गेंदबाज हर पीढ़ी में नहीं मिलता और किसी दूसरे खिलाड़ी से हूबहू उनकी जगह लेने की उम्मीद करना भी सही नहीं होगा। लेकिन टीम के पास ऐसे विकल्प जरूर होने चाहिए जो उनकी अनुपस्थिति में गेंदबाजी को मजबूती दे सकें। न्यूजीलैंड सीरीज भुवनेश्वर के लिए खुद को दोबारा साबित करने का मौका होगी। साथ ही यह चयनकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण परीक्षा होगी कि वे अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा तेज गेंदबाजों को किस तरह तैयार करते हैं। आखिरकार सबसे बड़ा सवाल यही है कि भुवी के बाद कौन और भविष्य में बुमराह की गैरमौजूदगी में टीम इंडिया की अगुवाई कौन करेगा। -

Ind vs WI: दूसरे टी20 में वेस्टइंडीज की धमाकेदार जीत….501 रन बने… छक्कों की बरसात, टूटे कई रिकॉर्ड
रांची। शुक्रवार को रांची (Ranchi) के जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम कॉम्प्लेक्स (JSCA International Stadium Complex) में भारत और वेस्टइंडीज (India vs West Indies) के बीच टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला (T20 Series, Second Match) खेला गया. इस मुकाबले में वेस्टइंडीज ने 6 विकेट से जीत हासिल की. मुकाबले में मेहमान टीम वेस्टइंडीज को जीत के लिए 250 रनों का टारगेट मिला था, जिसे उसने 9 गेंद बाकी रहते हासिल कर लिया. वेस्टइंडीज की जीत में कप्तान शाई होप (102* रन) और शेरफेन रदरफोर्ड (84 रन) की अहम भूमिका रही. दोनों ने चौथे विकेट के लिए 120 रनों की साझेदारी कर मैच का नक्शा पलट दिया।इस जीत के साथ ही वेस्टइंडीज ने पांच मैचों की टी20 सीरीज में 1-1 की बराबरी कर ली. भारत- वेस्टइंडीज के बीच रांची में हुए मुकाबले में रनों की बारिश हुई और दोनों टीमों के गेंदबाज बेबस दिखे. इस मुकाबले में कुछ खास रिकॉर्ड्स बने।
मेन्स टी20 इंटरनेशनल के इतिहास का ये दूसरा सबसे सफल रनचेज रहा. इस मामले में साउथ अफ्रीका पहले नंबर पर है, जिसने साल 2023 में सेंचुरियन के मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ 259 रनों का टारगेट चेज कर लिया था. ये टी20 इंटरनेशनल में भारत के खिलाफ सबसे सफल रनचेज रहा. वहीं वेस्टइंडीज ने टी20 क्रिकेट में पहली बार इतना बड़ा टारगेट का सफलतापूर्वक पीछा किया है।
मेन्स टी20 इंटरनेशनल में सबसे सफल रनचेज
259- साउथ अफ्रीका बनाम वेस्टइंडीज, सेंचुरियन, 2023
250- वेस्टइंडीज बनाम भारत, रांची, 2026
244- ऑस्ट्रेलिया बनाम न्यूजीलैंड, ऑकलैंड, 2018
244- बुल्गारिया बनाम जिब्राल्टर, सोफिया, 2025
243- बुल्गारिया बनाम सर्बिया, सोफिया, 2022
232- वेस्टइंडीज बनाम साउथ अफ्रीका, जोहानिसबर्ग, 2015
230- इंग्लैंड बनाम साउथ अफ्रीका, मुंबई WS, 2016
मेन्स टी20 में चेज किए 250 या उससे अधिक के लक्ष्य
267- वॉशिंगटन फ्रीडम बनाम MI न्यूयॉर्क, ऑकलैंड, 2026
265- पंजाब किंग्स बनाम दिल्ली कैपिटल्स, दिल्ली, 2026
262- पंजाब किंग्स बनाम कोलकाता नाइट राइडर्स, कोलकाता, 2024
259- साउथ अफ्रीका बनाम वेस्टइंडीज, सेंचुरियन, 2023
258- ब्रिस्बेन हीट बनाम पर्थ स्कॉर्चर्स, ब्रिस्बेन, 2025
253- मिडलसेक्स बनाम सरे, द ओवल, 2023
250- वेस्टइंडीज बनाम भारत, रांची, 2026इस मुकाबले में कुल 501 रन बने. दूसरी बार ऐसा हुआ है जब किसी मेन्स टी20 इंटरनेशनल में 500 या उससे ज्यादा रन स्कोर किए गए. इस मामले में साउथ अफ्रीका और वेस्टइंडीज के बीच 2023 में सेंचुरियन के मैदान पर खेला गया मुकाबला टॉप पर है. उस मुकाबले में कुल 517 रन बने थे।
मेन्स टी20 इंटरनेशनल मैच में सर्वाधिक रन
517- साउथ अफ्रीका बनाम वेस्टइंडीज, सेंचुरियन, 2009
501- भारत बनाम वेस्टइंडीज, रांची, 2026
499- भारत बनाम इंग्लैंड, मुंबई WS, T20 विश्व कप 2026
496- भारत बनाम न्यूजीलैंड, तिरुवनंतपुरम, 2026
489- वेस्टइंडीज बनाम भारत, लॉडरहिल, 2016भारत और वेस्टइंडीज के बीच इस मुकाबले में कुल 81 बाउंड्रीज (46 चौके और 33 छक्के) लगे. इससे ज्यादा बाउंड्रीज टी20 इंटरनेशनल के इतिहास में केवल दो मौके पर लगे. भारत की पारी में 25 चौके और 13 छक्के लगे. वहीं वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने इस मैच में 21 चौके और 20 छक्के उड़ाए।
टी20I मैचों में सर्वाधिक बाउंड्रीज
81- साउथ अफ्रीका बनाम वेस्टइंडीज, सेंचुरियन, 2023 (चौके/छक्के: 46/35)
80- जिब्राल्टर बनाम बुल्गारिया, सोफिया, 2025 (चौके/छक्के: 39/41)
79- भारत बनाम वेस्टइंडीज, रांची, 2026 (चौके/छक्के: 46/33)
73- भारत बनाम इंग्लैंड, मुंबई WS, 2026 (चौके/छक्के: 39/34)
72- भारत बनाम न्यूजीलैंड, तिरुवनंतपुरम, 2026 (चौके/छक्के: 36/36)वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने इस मैच में सिर्फ 45 बॉल पर शतक जड़ दिया. होप ने 102* रन बनाए, जिसमें 9 छक्के और 6 चौके शामिल रहे. होप ने दूसरी बार टी20 इंटरनेशनल मैच में शतक लगाया है. यह गेंदों के लिहाज से वेस्टइंडीज के किसी बल्लेबाज का दूसरा सबसे तेज शतक रहा. होप अब भारत के खिलाफ सबसे तेज टी20 इंटरनेशनल शतक जड़ने के मामले में भी संयुक्त रूप से टॉप पर आ गए हैं. इंग्लैंड के जैकब बेथेल ने भी टी20 विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में 45 गेंदों में यह उपलब्धि हासिल की थी।
वेस्टइंडीज के लिए सबसे तेज टी20I शतक (गेंदों के हिसाब से)
39- जॉनसन चार्ल्स बनाम साउथ अफ्रीका, सेंचुरियन, 2023
45- शाई होप बनाम भारत, रांची, 2026
47- क्रिस गेल बनाम इंग्लैंड, मुंबई WS, 2016
48- इविन लुईस बनाम भारत, लॉडरहिल, 2016
50- क्रिस गेल बनाम साउथ अफ्रीका, जोहानिसबर्ग, 2007
वेस्टइंडीज के लिए टी20I में सर्वाधिक शतक
2- क्रिस गेल,
2 – इविन लुईस
2- शाई होपदो फुल मेम्बर्स टीम के बीच हुए मेन्स टी20 इंटरनेशनल मैचों में अब तक 10 बार किसी टीम ने 20 या उससे अधिक छक्के लगाए हैं. वेस्टइंडीज और भारतीय टीम ने यह कारनामा चार-चार बार किया है. जबकि अफगानिस्तान और इंग्लैंड ने एक-एक बार ये मुकाम हासिल किया।
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पार्थिव पटेल के साथ खेलकर शुरू हुआ सफर, न्यूजीलैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले जीत रावल ने लिया संन्यास
नई दिल्ली। भारतीय मूल के न्यूजीलैंड के सलामी बल्लेबाज जीत रावल ने पेशेवर क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है। 38 वर्षीय रावल का क्रिकेट सफर कई मायनों में खास रहा। गुजरात के अहमदाबाद में जन्मे रावल ने अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए न्यूजीलैंड का रुख किया और वहां अपनी मेहनत के दम पर राष्ट्रीय टीम तक पहुंचे। हालांकि उनका अंतरराष्ट्रीय करियर बहुत लंबा नहीं रहा लेकिन घरेलू क्रिकेट में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई। क्रिकेट से विदाई के बाद अब वह चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में अपना काम जारी रखेंगे।जीत रावल का जन्म 22 सितंबर 1988 को अहमदाबाद में हुआ था। उनके पिता चाहते थे कि उनका बेटा एक दिन न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के लिए खेले। इस सपने को साकार करने के लिए परिवार ने बड़ा फैसला लिया और न्यूजीलैंड में बस गया। रावल ने वहां क्रिकेट में अपनी प्रतिभा दिखाई और न्यूजीलैंड की अंडर-19 टीम तक पहुंचे। इसके बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट में ऑकलैंड और नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट्स की ओर से खेलते हुए लगातार अच्छा प्रदर्शन किया। उनके लिए न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय टीम तक पहुंचना केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं थी बल्कि उनके पिता के वर्षों पुराने सपने का पूरा होना भी था।
नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट्स क्रिकेट एसोसिएशन को दिए गए इंटरव्यू में रावल ने अपने संन्यास के फैसले पर संतुष्टि जाहिर की। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड के लिए खेलना उनका और उनके पिता का बचपन का सपना था। इस सपने को पूरा करने के लिए उनके पिता ने पूरे परिवार को न्यूजीलैंड ले जाने जैसा बड़ा कदम उठाया था। राष्ट्रीय टीम की जर्सी पहनने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व की बात रही। अब पेशेवर क्रिकेट को अलविदा कहते हुए वह अपने करियर के इस अध्याय को संतोष के साथ समाप्त करना चाहते हैं।
रावल की कहानी का एक दिलचस्प पहलू भारत में बिताए उनके स्कूल के दिन भी हैं। न्यूजीलैंड जाने से पहले वह विद्यानगर स्कूल में पढ़ते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल से हुई थी। दोनों स्कूल क्रिकेट में साथ खेलते थे और पारी की शुरुआत करते थे। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि दोनों खिलाड़ी आगे चलकर अलग-अलग क्रिकेट सफर तय करेंगे। पार्थिव पटेल ने भारतीय टीम में अपनी पहचान बनाई जबकि रावल ने न्यूजीलैंड की टेस्ट टीम का प्रतिनिधित्व किया।
रावल ने नवंबर 2016 में 28 वर्ष की उम्र में न्यूजीलैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। उन्होंने देश के लिए 24 टेस्ट मैच खेले। टेस्ट की 39 पारियों में उनके बल्ले से एक शतक और सात अर्धशतकों की मदद से 1143 रन निकले। उन्हें न्यूजीलैंड की ओर से वनडे और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिला। इसके बावजूद घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा।
प्रथम श्रेणी क्रिकेट में रावल ने 164 मैचों में 24 शतक और 50 अर्धशतक लगाते हुए 10432 रन बनाए। उनका सर्वाधिक स्कोर 256 रन रहा। लिस्ट ए क्रिकेट में उन्होंने 96 मैचों में 2714 रन बनाए जिसमें चार शतक और 13 अर्धशतक शामिल हैं। वहीं 76 टी20 मुकाबलों में उन्होंने आठ अर्धशतकों के साथ 1484 रन बनाए। नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट्स के क्रिकेट जनरल मैनेजर इयान सैंडब्रुक ने भी उन्हें अनुभवी खिलाड़ी और शानदार नेतृत्वकर्ता बताते हुए उनकी तारीफ की। उनके मुताबिक टीम को रावल के अनुभव और शांत नेतृत्व की कमी खलेगी। क्रिकेट से संन्यास के बाद रावल अब चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में अपना पेशेवर सफर आगे बढ़ाएंगे।