टीम चयन और सस्पेंस
रोहित और विराट पर नजर
भारत बनाम न्यूजीलैंड का रिकॉर्ड
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संभावित प्लेइंग-11

टीम चयन और सस्पेंस
भारत बनाम न्यूजीलैंड का रिकॉर्ड
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ख्वाजा ने कहा जब मैं चोटिल होता था तो लोग बिना पूरी जानकारी के मुझ पर उंगलियां उठाते थे। मुझे ऐसा महसूस कराया गया कि मैं टीम के लिए उतना प्रतिबद्ध नहीं हूं जितना बाकी खिलाड़ी। उन्होंने यह भी कहा कि यह नजरिया सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं था बल्कि उनकी पहचान से भी जुड़ा हुआ था।उन्होंने हाल ही में पर्थ टेस्ट से पहले गोल्फ खेलने और एक वैकल्पिक ट्रेनिंग सेशन में शामिल न होने पर हुई आलोचना का भी जिक्र किया। ख्वाजा के मुताबिक कई खिलाड़ी मैच से पहले गोल्फ खेलते हैं या शराब पीते हैं लेकिन उन्हें ऑस्ट्रेलियन लैरिकिन्स कहकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। वहीं जब उन्होंने ऐसा किया तो इसे बड़ा मुद्दा बनाया गया और उनकी पेशेवर प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े किए गए।
ख्वाजा ने साफ शब्दों में कहा कि यह दोहरा मापदंड उन्हें हमेशा खलता रहा। उन्होंने कहा कि अगर वही काम कोई और करता तो उसे मजाक या सामान्य व्यवहार मान लिया जाता लेकिन उनके मामले में इसे चरित्र से जोड़ दिया गया।संन्यास की घोषणा के दौरान ख्वाजा के साथ उनकी पत्नी रेचल बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि वे काफी समय से इस फैसले पर विचार कर रहे थे। पत्नी से लंबी बातचीत के बाद उन्हें महसूस हुआ कि अब सही समय आ गया है। ख्वाजा ने कहा कि उन्हें संतोष है कि वे अपने करियर को SCG जैसे ऐतिहासिक मैदान पर अपनी शर्तों पर खत्म कर पा रहे हैं।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एशेज सीरीज की शुरुआत में एडिलेड टेस्ट की प्लेइंग इलेवन से बाहर रहना उनके लिए एक बड़ा संकेत था। हालांकि बाद में जब उन्हें मौका मिला तो उन्होंने अहम पारियां खेलीं और टीम के लिए योगदान दिया। ख्वाजा ने साफ किया कि वे जबरदस्ती टीम में बने रहने के पक्ष में नहीं थे और अगर जरूरत पड़ी होती तो वे उसी समय संन्यास लेने के लिए तैयार थे।अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी ख्वाजा क्रिकेट से पूरी तरह दूरी नहीं बनाएंगे। वे आगे भी ब्रिस्बेन हीट के लिए बिग बैश लीग और क्वींसलैंड के लिए शेफील्ड शील्ड में खेलते नजर आएंगे। उनका मानना है कि क्रिकेट अभी भी उनके जीवन का अहम हिस्सा है।
इस मौके पर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के CEO टॉड ग्रीनबर्ग ने कहा कि उस्मान ख्वाजा ने मैदान के अंदर और बाहर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट को बहुत कुछ दिया है। उनका योगदान सिर्फ रन बनाने तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने विविधता समावेशिता और साहस की मिसाल भी पेश की है।कुल मिलाकर उस्मान ख्वाजा का संन्यास सिर्फ एक खिलाड़ी का विदाई नहीं है बल्कि यह ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में मौजूद उन मुद्दों की ओर भी इशारा करता है जिन पर अब खुलकर चर्चा होने लगी है।

पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन और पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ICC और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड BCCI को साफ शब्दों में आगाह किया है कि मौजूदा ढांचे के साथ वनडे क्रिकेट को बचाना मुश्किल होगा। दोनों का मानना है कि द्विपक्षीय सीरीज की घटती अहमियत और टूर्नामेंट्स की अधिकता ने इस फॉर्मेट की चमक फीकी कर दी है।कोविड-19 महामारी के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां पांच मैचों की वनडे सीरीज आम बात हुआ करती थीं, वहीं अब ज्यादातर टीमें केवल तीन मैचों की औपचारिक सीरीज खेलती नजर आती हैं। कई देशों के लिए वनडे क्रिकेट अब सिर्फ विश्व कप तक सीमित होता जा रहा है, जबकि टी20 क्रिकेट और फ्रेंचाइज़ी लीग्स ने दर्शकों का बड़ा हिस्सा अपनी ओर खींच लिया है।
अश्विन ने हाल ही में अपने यूट्यूब चैनल ऐश की बात में इस मुद्दे पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि अगर रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे बड़े नाम वनडे क्रिकेट से हटते हैं तो दर्शकों की दिलचस्पी और तेजी से कम हो सकती है। अश्विन ने घरेलू क्रिकेट का उदाहरण देते हुए बताया कि विजय हजारे ट्रॉफी को आमतौर पर सीमित दर्शक ही देखते हैं, लेकिन जब रोहित और विराट इस टूर्नामेंट में खेले, तो स्टेडियमों में भारी भीड़ देखने को मिली।उनके मुताबिक, यह साफ संकेत है कि मौजूदा दौर में वनडे क्रिकेट काफी हद तक स्टार खिलाड़ियों पर निर्भर है। अगर बड़े चेहरे नहीं होंगे, तो दर्शकों को आकर्षित करना और भी मुश्किल हो जाएगा। अश्विन ने ICC के मौजूदा टूर्नामेंट मॉडल पर भी सवाल उठाए। उनका मानना है कि साल भर में लगातार अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट कराने से फैंस में थकान पैदा हो रही है और हर इवेंट की अहमियत कम होती जा रही है।
अश्विन ने सुझाव दिया कि ICC को फुटबॉल की तर्ज पर वनडे विश्व कप को चार साल में सिर्फ एक बार आयोजित करना चाहिए ताकि इस टूर्नामेंट की प्रतिष्ठा और रोमांच बना रहे। उनका कहना है कि जब कोई इवेंट दुर्लभ होता है तो उसकी वैल्यू अपने आप बढ़ जाती है।वहीं इरफान पठान ने भी वनडे क्रिकेट के गिरते ग्राफ पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय सीरीज अब दर्शकों को रोमांचित नहीं कर पा रही हैं। इरफान के अनुसार, अगर वनडे क्रिकेट को फिर से लोकप्रिय बनाना है, तो ट्राई सीरीज और क्वाड्रेंगुलर सीरीज जैसे फॉर्मेट्स को दोबारा शुरू करना होगा।
इरफान का मानना है कि जब एक ही सीरीज में तीन या चार टीमें हिस्सा लेती हैं तो मुकाबलों की प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और हर मैच का महत्व भी ज्यादा होता है। इससे दर्शकों की रुचि बनी रहती है और खिलाड़ियों को भी अलग-अलग परिस्थितियों में खेलने का मौका मिलता है।कुल मिलाकर अश्विन और इरफान दोनों इस बात पर सहमत हैं कि अगर ICC और BCCI ने समय रहते ठोस और साहसिक फैसले नहीं लिए तो वनडे क्रिकेट धीरे-धीरे हाशिए पर चला जाएगा। 50 ओवर का यह पारंपरिक फॉर्मेट कभी क्रिकेट की पहचान हुआ करता था, लेकिन बदलते दौर में इसे बचाने के लिए बड़े और दूरदर्शी बदलाव अब जरूरी हो गए हैं।

उस्मान ख्वाजा ने कहा, “क्रिकेट के जरिए भगवान ने मुझे मेरी कल्पना से कहीं ज्यादा दिया है। उन्होंने मुझे ऐसी यादें दी हैं जिन्हें मैं हमेशा अपने साथ रखूंगा, ऐसी दोस्ती जो खेल से कहीं आगे है, और ऐसे सबक जिन्होंने मुझे, जो मैं आज हूं, मैदान के बाहर बनाया है। लेकिन कोई भी करियर सिर्फ एक इंसान का नहीं होता। जाहिर है, मुझे बहुत मदद मिली। मेरे माता-पिता, जो वहां बैठे हैं, आपके बलिदानों के लिए धन्यवाद, जो कभी हाइलाइट्स रील में नहीं आए।”
उस्मान ख्वाजा ने इस दौरान एशेज में अपनी तैयारी और पीठ की दिक्कतों को लेकर अपने साथ हुए नस्लीय स्टीरियोटाइपिंग के बारे में बात की। उन्होंने कहा, “ऐसी टिप्पणियां, ‘वह टीम के प्रति कमिटेड नहीं है। ‘वह सिर्फ अपने बारे में सोच रहा था। उसने एक दिन पहले गोल्फ कॉम्पिटिशन खेला। वह स्वार्थी है। वह काफी मेहनत से ट्रेनिंग नहीं करता। उसने मैच से एक दिन पहले ट्रेनिंग नहीं की। वह आलसी है।’ ये वही स्टीरियोटाइप हैं, वही नस्लीय स्टीरियोटाइप जिनके साथ मैं पूरी जिंदगी बड़ा हुआ हूं… यही बात मुझे सबसे ज्यादा निराश करती है, क्योंकि मुझे लगा था कि हम इससे आगे निकल चुके हैं। लेकिन अभी भी थोड़ा बहुत ऐसा है, जिससे मुझे हर दिन लड़ना पड़ता है, जो मेरे लिए बहुत निराशाजनक है।”
उस्मान ख्वाजा ने 2011 में ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट डेब्यू किया था। सिडनी में जो वह इंग्लैंड के खिलाफ अपना आखिरी टेस्ट खेलेंगे वह उनके करियर का 88वां मुकाबला होगा। ख्वाजा ऑस्ट्रेलिया की 2023 WTC चैंपियन टीम का भी हिस्सा थे। उन्होंने मैदान के बाहर एक मजबूत विरासत छोड़ी है, वह ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलने वाले पहले पाकिस्तान में जन्मे क्रिकेटर और देश का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले मुस्लिम क्रिकेटर हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए 49 वनडे मैच भी खेले हैं।

2025 विराट के लिए रहा यादगार साल
पिछले साल विराट कोहली के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए अपना पहला IPL खिताब जीता, जिससे टीम और खुद विराट का 18 साल का इंतजार खत्म हुआ।
परिवार और गुरु के साथ बिताया समय
दिसंबर में विराट और अनुष्का नैनिताल में अपने प्रिय गुरु, प्रेमानंद महाराज से मिलने भी गए थे। गुरु के आधिकारिक यूट्यूब पेज पर उनका दौरा दिखाने वाला वीडियो साझा किया गया, जिसमें दोनों की उपस्थिति नजर आई। 2017 में विवाह करने के बाद दोनों अब अपने दो बच्चों, वामिका और आकाय के माता-पिता हैं। उन्होंने 11 दिसंबर को अपनी आठवीं शादी की सालगिरह भी मनाई।
अनुष्का के फिल्म करियर की स्थिति
अनुष्का शर्मा की आखिरी रिलीज फिल्म ‘Zero’ थी, जिसमें उन्होंने शाहरुख खान के साथ काम किया था।
फैंस के लिए खास पल
विराट और अनुष्का की इस नई तस्वीर ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। फैंस ने जोड़ी की फोटो पर प्यार भरे कमेंट किए और नए साल के जश्न में उनके शानदार अंदाज की तारीफ की। इस जोड़ी की प्यारी केमिस्ट्री और विराट के क्रिकेट करियर की उपलब्धियों ने उन्हें न सिर्फ खेल बल्कि मनोरंजन जगत में भी लोगों का पसंदीदा बना दिया है।

नहीं लिया वीआईपी सुरक्षा का तामझाम
बताया जाता है कि कपिल देव अपने पुराने पारिवारिक मित्र मोहनलाल सोनी और सरला सोनी से मिलने उनके निवास पर आए थे। इस अल्प प्रवास के दौरान उन्होंने किसी भी प्रकार का सुरक्षा प्रोटोकॉल या वीआईपी तामझाम नहीं लिया और बेहद सहजता के साथ समय बिताया। सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है जिसमें वे फ्रीगंज की गलियों में बच्चों के साथ प्लास्टिक के बल्ले से क्रिकेट खेलते नजर आ रहे हैं।
बच्चों संग फोटो भी खिंचाई
महान क्रिकेटर को अचानक अपने बीच गली में बल्लेबाजी करते देख बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। स्थानीय लोग भी कपिल देव की सादगी देखकर अभूभूत हुए। कपिल देव ने न केवल बच्चों के साथ क्रिकेट का आनंद लिया वरन उनके साथ फोटो भी खिंचाई और काफी वक्त बिताया। उन्होंने उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा से भी शिष्टाचार मुलाकात की। अपनी बातचीत के दौरान कपिल देव ने उज्जैन की शांति और सुंदरता की तारीफ की।
उज्जैन की तारीफ की
कपिलदेव ने कहा कि उज्जैन का माहौल इतना सुखद है कि यहीं बस जाने का मन करता है। हालांकि इन दिनों महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और लोगों को असुविधा ना हो, इस वजह से वह मंदिर नहीं गए। कपिल देव के उज्जैन में होने की खबर जैसे फैली प्रशंसकों की भीड़ उनके मित्र के घर पहुंचने लगी लेकिन तब तक वह वापस लौट चुके थे। उनकी सादगी की चर्चा सोशल मीडिया पर हो रही है।


POTS अवॉर्ड जीतकर क्या बोलीं शेफाली?
21 वर्षीय शेफाली ने प्लेयर ऑफ द सीरीज अवॉर्ड जीतने के बाद कहा, ”मैंने पूरे साल मेहनत की, जो रंग लाई है। मैं बहुत खुश हूं कि मैंने जिस भी चीज पर काम किया, उसे मैं करने में सफल रही। हालांकि, पांचवें मैच में जिस तरह आउट खराब शॉट खेलकर आउट हुई, मैं उसे दोहराना नहीं चाहूंगी। टीम के लिए और योगदान देना चाहती हूं। मेरा मकसद लंबी पारी खेलना और हर दिन एक बेहतर खिलाड़ी बनना है।” ओपनर ने वनडे से टी20 मोड में शिफ्ट होने पर कहा, ”दोनों बहुत अलग हैं। वनडे में आपको ग्राउंड पर टिककर खेलना होता है क्योंकि यह लंबा फॉर्मेट है। टी20 मेरा पसंदीदा है। इसमें मुझे ज्यादा मजा आता है।”
शेफाली से हरमन-मंधाना बहुत पीछे छूटीं
शेफाली ने सीरीज में सबसे ज्यादा रन बटोरे। उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ पांच मैचों में 80.33 के औसत से 241 रन बनाए। उनका स्टाइक रेट 181.20 का रहा। शेफावरी ने तीन अर्धशतकीय पारियां खेलीं। वहीं, सीरीज में रन बनाने के मामले में कप्तान हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना बहुत पीछे रहीं। हरमनप्रीत ने 65.00 के औसत से कुल 130 रन जुटाए, जिसमें एक अर्धशतक है। उन्होंने पांचवें मैचों में 43 गेंदों में 68 रनों की पारी खेलकर प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड हासिल किया। वहीं, मंधाना ने चार मैचों में 30.00 के औसत से 120 रन बनाए। स्टार क्रिकेटर मंधाना को अंतिम मुकाबले में आराम दिया गया। उनकी जगह 17 साल की जी कमलिनी को डेब्यू का मौका मिला।
T20I में सबसे ज्यादा POTS अवॉर्ड जीतने वाली भारतीय महिला क्रिकेटर
3 – मिताली राज
3 – हरमनप्रीत कौर
3 – दीप्ति शर्मा
3 – शेफाली वर्मा

‘साल 2025 हमारे लिए बहुत अच्छा रहा’
श्रीलंका का सूपड़ा साफ करने के बाद हरमनप्रीत ने कहा, ”2025 हमारे लिए वाकई बहुत अच्छा रहा। हमें कड़ी मेहनत का परिणाम मिला। मुझे लगता है कि अब इन अच्छी आदतों को दोहराते रहना है। इस साल हमने जैसा किया, वैसा ही जीतते रहना है।” जब हरमनप्रीत से पूछा गया कि क्या वनडे वर्ल्ड कप जीतने के बाद सोच में बदलाव करना आसान था तो उन्होंने कहा, ”हम सबने एकसाथ काफी टी20 क्रिकेट खेला है और सभी को खुद पर विश्वास था कि हम यह कर सकते हैं। हर कोई बहुत सकारात्मक था और सच में खुश थे कि एकजुटता के साथ खेले। हम अपने लिए स्टैंडर्ड सेट करना चाहते थे। आगे बढ़ते हुए हम इस सीरीज को देख सकते हैं, सोच सकते हैं कि हमने क्या किया और हम भविष्य में क्या कर सकते हैं।”
‘टी20 मोड में शिफ्ट करना आसान नहीं था’
36 वर्षीय भारतीय कप्तान ने एक बैटर और लीडर के तौर पर अपने बारे में कहा, ”बतौर बल्लेबाज यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं टीम की बैटिंग लाइनअप को मजबूती दूं। मैं हमेशा टीम की जरूरत के मुताबिक योगदान देना चाहती हूं। बतौर कप्तान जिस तरह से हमने यह सीरीज खेली, उससे मैं वाकई में खुश हूं। वनडे क्रिकेट के बाद टी20 मोड में शिफ्ट करना आसान नहीं था, लेकिन सभी बहुत पॉजिटिव थे। वर्ल्ड कप के बाद यह सीरीज खेलने के लिए हर कोई उत्साहित था। चीजें जिस तरह से रही, उससे काफी खुश हूं। हमने जद्दोजहद की और अपना शत प्रतिशत दिया।”
‘उम्मीद है कि जिस तरह से वनडे क्रिकेट…’
अगले सात महीनों में बहुत सारा टी20 क्रिकेट खेला जाना है। हरमनप्रीत ने कहा, ”बिल्कुल। यह सीरीज हमारे लिए बहुत अहम थी। इसलिए हम चाहते थे कि सभी उपलब्ध रहें ताकि बाद में हम देख सकें कि चीजें हमारे लिए कैसी चल रही हैं। अब महिला प्रीमियर ली (WPL) होगा। सभी फिर से टी20 मोड में होंगे। उम्मीद है कि हम सभी अपना बेस्ट क्रिकेट खेलेंगे और लुत्फ उठाएंगे। अगले छह महीने हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं। हम बस कड़ी मेहनत करते रहना चाहते हैं। उम्मीद है कि जिस तरह से वनडे क्रिकेट में चीजें हमारे लिए अच्छी रहीं, उसी तरह टी20 में भी चीजें अच्छी रहेंगी।”

अश्विन ने सबसे पहले मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती की तारीफ की और उन्हें इस साल भारत का सबसे बेहतरीन गेंदबाज बताया। अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनलऐश की बात पर कहा मैं वरुण चक्रवर्ती को 2025 का MVP मानता हूँ। जब भी टीम ने उनका इस्तेमाल किया उन्होंने अपना X-फैक्टर दिखाया। विपक्षी टीम के लिए उन्हें समझना मुश्किल रहा। 2026 T20 वर्ल्ड कप में भारत की जीत के लिए उनकी भूमिका बहुत अहम होगी। वह T20 गेंदबाज हैं और व्हाइट-बॉल क्रिकेट में भारत के सबसे भरोसेमंद विकेट लेने वाले खिलाड़ी बनकर उभरे हैं।
वास्तव में वरुण चक्रवर्ती ने इस साल 4 वनडे में 10 विकेट और 20 T20I में 36 विकेट लिए। उनके प्रदर्शन ने उन्हें भारत की व्हाइट-बॉल टीम का भरोसेमंद खिलाड़ी बना दिया।अश्विन ने इसके साथ ही अभिषेक शर्मा की भी तारीफ की। लेफ्ट-हैंडर ओपनर को उन्होंने भारत की अगली पीढ़ी का X-फैक्टर खिलाड़ी बताया। अश्विन के अनुसार यह सिर्फ अभिषेक शर्मा का आना नहीं है बल्कि यह भारत की नई पीढ़ी का एक्स-फैक्टर खिलाड़ी बनने की शुरुआत है। 2025 में उनका प्रदर्शन अद्भुत रहा। उन्होंने 21 T20I मैचों में 42.95 की औसत और 193.46 के स्ट्राइक रेट से 859 रन बनाए जिसमें एक शतक और पांच अर्धशतक शामिल हैं।
साल 2025 में एक समय ऐसा भी था जब विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे सीनियर खिलाड़ियों के करियर पर संदेह किया जा रहा था। लेकिन साल के अंत तक दोनों खिलाड़ियों ने साबित किया कि उनमें अभी भी क्रिकेट की पर्याप्त क्षमता है। रोहित और कोहली ने टेस्ट और टी20 से संन्यास लिया है लेकिन उनका सपना 2027 के वर्ल्ड कप में खेलना है।अश्विन ने कहा रोहित और विराट दोनों में 50 ओवर का वर्ल्ड कप जीतने की आग है। यह जरूरी है कि हम उनके हर मैच का आनंद लें। उन्होंने इस साल क्रिकेट की परिभाषा को फिर से बदल दिया। टेस्ट क्रिकेट के लिहाज से यह साल चुनौतीपूर्ण था लेकिन दोनों ने वापसी कर बेहतरीन प्रदर्शन किया। विराट जबरदस्त फॉर्म में हैं और यह भारतीय क्रिकेट के लिए बहुत अच्छा है।
इस तरह 2025 में भारतीय क्रिकेट में युवा और सीनियर खिलाड़ियों ने मिलकर एक यादगार साल बनाया। वरुण चक्रवर्ती और अभिषेक शर्मा ने अपनी नई प्रतिभा दिखाई जबकि रोहित और विराट ने अनुभव और निरंतरता के बल पर टीम को मजबूत रखा।