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  • 18 हजार से ज्यादा जगहों पर फिटनेस का संदेश: BRICS Friendship Sunday on Cycle में शामिल हुए खेल मंत्री मांडविया

    18 हजार से ज्यादा जगहों पर फिटनेस का संदेश: BRICS Friendship Sunday on Cycle में शामिल हुए खेल मंत्री मांडविया

    नई दिल्ली।  विशाखापत्तनम में रविवार को फिटनेस और भारत की वैश्विक खेल पहल का अनोखा संगम देखने को मिला। भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत आयोजित बैठकों के बीच केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने BRICS Friendship Sunday on Cycle कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस खास आयोजन के जरिए फिटनेस के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में साइकिल चलाकर लोगों को नियमित व्यायाम के लिए प्रेरित किया गया। मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फिट इंडिया अभियान को देशभर में लगातार मजबूती मिल रही है और रविवार को आयोजित होने वाला यह साइकिलिंग अभियान युवाओं के बीच फिटनेस को जन आंदोलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में मांडविया ने कहा कि विशाखापत्तनम में ब्रिक्स सम्मेलन के अवसर पर आयोजित BRICS Friendship Sunday on Cycle का यह संस्करण विशेष महत्व रखता है। उन्होंने बताया कि देशभर में 18000 से अधिक स्थानों पर Sunday on Cycle कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों के जरिए युवाओं और आम लोगों को नियमित शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उनका कहना था कि साइकिल चलाना स्वास्थ्य के लिए बेहद प्रभावी व्यायाम है और इसे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाया जा सकता है।

    मांडविया ने साइकिलिंग को केवल फिटनेस से जोड़कर नहीं देखा बल्कि इसे पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि साइकिल चलाने से शरीर स्वस्थ रहता है और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलती है। इससे ईंधन की बचत होती है और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में योगदान मिलता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए देश के नागरिकों का स्वस्थ और फिट रहना जरूरी है। स्वस्थ व्यक्ति से स्वस्थ समाज बनता है और स्वस्थ समाज ही मजबूत और फिट राष्ट्र की नींव तैयार करता है।

    दरअसल भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इसी के तहत 22 और 23 अगस्त को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में ब्रिक्स युवा मंत्रियों और खेल मंत्रियों की बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। इन बैठकों में ब्रिक्स के सभी 11 सदस्य देशों के मंत्री और प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं। बैठकों का मुख्य उद्देश्य युवा मामलों और खेल के क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करना है।

    केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया इन बैठकों की अध्यक्षता कर रहे हैं। युवा मामले और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे भी इन महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल हैं। 23 अगस्त को होने वाली ब्रिक्स खेल मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों के खेल मंत्री और प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान खेलों के माध्यम से सहयोग बढ़ाने और सदस्य देशों के बीच साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की जा रही है।

    भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय लचीलेपन नवाचार सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण रखा गया है। इस थीम में लोगों को केंद्र में रखते हुए मानवता को प्राथमिकता देने की सोच दिखाई देती है। ऐसे में BRICS Friendship Sunday on Cycle जैसे कार्यक्रम भारत की फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली की पहल को अंतरराष्ट्रीय मंच से जोड़ने का माध्यम भी बन रहे हैं। इससे फिट इंडिया अभियान को नई ऊर्जा मिलने के साथ युवाओं को खेल और शारीरिक गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश को भी मजबूती मिलती है।

  • US Open 2026 से दुनिया के नंबर एक जैनिक सिनर बाहर, घुटने की चोट के कारण नहीं खेल पाएंगे साल का आखिरी ग्रैंड स्लैम

    US Open 2026 से दुनिया के नंबर एक जैनिक सिनर बाहर, घुटने की चोट के कारण नहीं खेल पाएंगे साल का आखिरी ग्रैंड स्लैम

    नई दिल्ली ।साल के आखिरी ग्रैंड स्लैम यूएस ओपन 2026 से पहले पुरुष टेनिस जगत को बड़ा झटका लगा है। दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी जैनिक सिनर ने दाएं घुटने की चोट के कारण टूर्नामेंट से अपना नाम वापस ले लिया है। 25 वर्षीय इटैलियन स्टार ने बताया कि वह 30 अगस्त से शुरू होने वाले मुख्य ड्रॉ तक पूरी तरह फिट नहीं हो पाएंगे।

    सिनर पिछले कुछ समय से चोट से उबरने पर ध्यान दे रहे थे। उन्होंने अपनी टीम और मेडिकल स्टाफ के साथ लगातार रिकवरी की कोशिश की और मोंटे कार्लो में अभ्यास के लिए कोर्ट पर भी वापसी की। हालांकि, अभ्यास के बाद उन्हें महसूस हुआ कि घुटने को पूरी तरह ठीक होने के लिए अभी और समय की जरूरत है।

    यूएस ओपन से हटने का फैसला सिनर के लिए आसान नहीं था। न्यूयॉर्क का यह ग्रैंड स्लैम उनके करियर में खास महत्व रखता है और यहां प्रशंसकों के सामने खेलने को लेकर वह उत्साहित थे। चोट के कारण टूर्नामेंट से बाहर होना उनके लिए निराशाजनक है, लेकिन उन्होंने फिटनेस को प्राथमिकता देने का फैसला किया।

    सिनर ने जुलाई में विंबलडन का खिताब अपने नाम किया था। फाइनल मुकाबले में उन्होंने अलेक्जेंडर ज्वेरेव को हराकर लगातार दूसरी बार ऑल इंग्लैंड क्लब की ट्रॉफी जीती। इस जीत के साथ उनके करियर के ग्रैंड स्लैम खिताबों की संख्या पांच हो गई। विंबलडन के बाद से वह किसी प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट में नहीं उतरे हैं।

    घुटने की समस्या के कारण सिनर ने मॉन्ट्रियल और सिनसिनाटी में आयोजित हार्ड कोर्ट प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा नहीं लिया। यूएस ओपन से पहले इन टूर्नामेंटों को खिलाड़ियों के लिए तैयारी का अहम हिस्सा माना जाता है। लगातार मुकाबलों से दूर रहने के बाद सिनर की फिटनेस को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी, लेकिन अब उन्होंने न्यूयॉर्क में नहीं खेलने का निर्णय ले लिया है।

    2026 का सत्र सिनर के लिए शानदार रहा है। उन्होंने मियामी, मोंटे कार्लो, मैड्रिड और रोम सहित कई महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों में खिताब जीते। फ्रेंच ओपन में उन्हें दूसरे दौर में जुआन मैनुअल सेरुंडोलो के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने वापसी करते हुए विंबलडन में शानदार प्रदर्शन किया और चैंपियन बने।

    सिनर के हटने से यूएस ओपन के खिताबी समीकरण में बड़ा बदलाव आया है। कार्लोस अल्कारेज, नोवाक जोकोविच और अलेक्जेंडर ज्वेरेव जैसे शीर्ष खिलाड़ियों के लिए अब खिताब की दौड़ में आगे बढ़ने का अवसर और मजबूत हुआ है। खासतौर पर सिनर और अल्कारेज के बीच संभावित मुकाबले का इंतजार कर रहे दर्शकों को इस बार यह टक्कर देखने को नहीं मिलेगी।

    सिनर और अल्कारेज की प्रतिद्वंद्विता पिछले कुछ वर्षों में पुरुष टेनिस की सबसे चर्चित प्रतिद्वंद्विताओं में शामिल रही है। दोनों कई बड़े मुकाबलों में आमने-सामने आ चुके हैं। यूएस ओपन से सिनर के हटने के बाद इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में अल्कारेज पर भी निगाहें रहेंगी।

    सिनर के लिए यह फैसला एक और वजह से महत्वपूर्ण है। 2019 में ग्रैंड स्लैम स्तर पर शुरुआत करने के बाद वह लगातार मेजर टूर्नामेंटों में हिस्सा लेते रहे हैं। चोट के कारण यूएस ओपन 2026 से बाहर होने के साथ उनका यह लगातार ग्रैंड स्लैम खेलने का सिलसिला पहली बार टूट जाएगा।

    फिलहाल सिनर का ध्यान पूरी तरह स्वस्थ होने और सुरक्षित तरीके से प्रतिस्पर्धी टेनिस में लौटने पर है। यूएस ओपन में उनकी गैरमौजूदगी से टूर्नामेंट की प्रतिस्पर्धा जरूर बदली है, लेकिन अब बाकी शीर्ष खिलाड़ियों के पास न्यूयॉर्क में खिताब हासिल करने का बड़ा मौका होगा।

  • नीरज चोपड़ा ने 14 महीने बाद फेंका 88 मीटर पार भाला, जीत से 9 सेंटीमीटर दूर; श्रीलंकाई स्टार ने फिर हराया

    नीरज चोपड़ा ने 14 महीने बाद फेंका 88 मीटर पार भाला, जीत से 9 सेंटीमीटर दूर; श्रीलंकाई स्टार ने फिर हराया


    नई दिल्ली। भारत के स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने लुसाने डायमंड लीग में शानदार वापसी करते हुए 88.05 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो किया। नीरज ने अपने दूसरे प्रयास में यह दूरी हासिल की और कुछ समय के लिए प्रतियोगिता में शीर्ष स्थान पर पहुंच गए। हालांकि श्रीलंका के युवा स्टार रुमेश थरंगा पथिरागे ने तीसरे प्रयास में 88.14 मीटर का थ्रो कर नीरज को पीछे छोड़ दिया। इस तरह नीरज को रजत पदक से संतोष करना पड़ा और वह गोल्ड से सिर्फ 9 सेंटीमीटर दूर रह गए।

    लुसाने में नीरज का प्रदर्शन इसलिए भी खास रहा क्योंकि यह इस सीजन में उनका सबसे लंबा थ्रो है। इससे पहले उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था और वह 2026 में 88 मीटर के आंकड़े को पार नहीं कर पाए थे। लुसाने में 88.05 मीटर का प्रयास उनके लिए बड़ा आत्मविश्वास बढ़ाने वाला प्रदर्शन माना जा रहा है। यह जून 2025 में पेरिस डायमंड लीग में 88.16 मीटर फेंकने के बाद उनका एक साल से अधिक समय में सबसे लंबा थ्रो भी रहा।

    मुकाबले में नीरज ने शुरुआत 83.54 मीटर के थ्रो से की थी। इसके बाद दूसरे प्रयास में उन्होंने अपना प्रदर्शन अचानक काफी बेहतर किया और 88.05 मीटर तक भाला पहुंचाकर शीर्ष स्थान हासिल कर लिया। इस थ्रो के बाद नीरज की जीत लगभग तय होती नजर आ रही थी लेकिन रुमेश पथिरागे ने कुछ ही देर बाद शानदार जवाब दिया। श्रीलंकाई खिलाड़ी ने तीसरे प्रयास में 88.14 मीटर का थ्रो किया और महज 9 सेंटीमीटर के अंतर से नीरज को दूसरे स्थान पर धकेल दिया।

    रुमेश पथिरागे के लिए यह जीत बेहद खास रही। 23 वर्षीय श्रीलंकाई खिलाड़ी इस समय शानदार फॉर्म में चल रहे हैं और इस सीजन में नीरज के खिलाफ लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। लुसाने की जीत से पहले भी पथिरागे ने नीरज को दो अहम मुकाबलों में पीछे छोड़ा था। दोनों की प्रतिद्वंद्विता अब जैवलिन थ्रो में एक नई कहानी बनती नजर आ रही है।

    ग्रेनेडा के एंडरसन पीटर्स ने 86.69 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। उन्होंने यह दूरी अपने छठे और आखिरी प्रयास में दर्ज की। त्रिनिदाद और टोबैगो के मौजूदा विश्व चैंपियन केशॉर्न वालकॉट 83.71 मीटर के साथ चौथे स्थान पर रहे। इस तरह नीरज और पथिरागे के बीच मुकाबला बाकी खिलाड़ियों की तुलना में काफी आगे रहा।

    नीरज के लिए लुसाने का यह प्रदर्शन भले ही गोल्ड में नहीं बदल सका लेकिन 88 मीटर के पार पहुंचना उनके लिए बड़ी सकारात्मक खबर है। 2026 सीजन की शुरुआत में संघर्ष करने के बाद उन्होंने अब अपनी पुरानी लय की झलक दिखाई है। इससे आगे होने वाली बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए उनकी तैयारी को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। नीरज के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस प्रदर्शन को लगातार बनाए रखना और आने वाले मुकाबलों में 90 मीटर के आंकड़े के करीब पहुंचना होगी।

    लुसाने डायमंड लीग का नतीजा नीरज के लिए एक करीबी हार जरूर रहा लेकिन उनका 88.05 मीटर का थ्रो बताता है कि भारतीय स्टार अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म की ओर लौट रहे हैं। दूसरी तरफ पथिरागे की लगातार चुनौती ने पुरुष जैवलिन थ्रो में मुकाबले को और रोमांचक बना दिया है। नीरज अब इस प्रदर्शन से मिले आत्मविश्वास के साथ सीजन के अगले बड़े मुकाबलों में नजर आएंगे।

  • हॉकी वर्ल्ड कप में भारत को बड़ा झटका, नीदरलैंड्स ने 2-0 से हराया; अब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ करो या मरो का मुकाबला

    हॉकी वर्ल्ड कप में भारत को बड़ा झटका, नीदरलैंड्स ने 2-0 से हराया; अब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ करो या मरो का मुकाबला


    नई दिल्ली। महिला हॉकी विश्व कप 2026 में भारतीय टीम को दूसरे दौर के मुकाबले में नीदरलैंड्स के खिलाफ 0-2 से हार का सामना करना पड़ा है। एम्स्टलवीन में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय टीम ने रक्षात्मक रूप से संघर्ष जरूर किया लेकिन नीदरलैंड्स के लगातार दबाव के सामने गोल करने में कामयाब नहीं हो सकी। मौजूदा ओलंपिक और विश्व चैंपियन नीदरलैंड्स ने दोनों गोल पेनल्टी कॉर्नर के जरिए किए। इस हार के बाद भारतीय टीम की सेमीफाइनल की राह काफी मुश्किल हो गई है।

    मुकाबले की शुरुआत से ही नीदरलैंड्स ने आक्रामक तेवर दिखाए। मैच के दूसरे मिनट में ही मेजबान टीम को पेनल्टी कॉर्नर मिला और यिब्बी जानसेन ने इसे गोल में बदलकर भारत पर शुरुआती दबाव बना दिया। भारत ने इसके बाद खेल को संभालने की कोशिश की लेकिन नीदरलैंड्स ने गेंद पर अपना नियंत्रण बनाए रखा और भारतीय खिलाड़ियों को लगातार रक्षात्मक स्थिति में रखा। भारतीय गोलकीपर और डिफेंस ने कई मौकों पर शानदार बचाव किया लेकिन मेजबान टीम के आक्रमण को पूरी तरह रोकना आसान नहीं था।

    दूसरे हाफ में नीदरलैंड्स ने एक बार फिर पेनल्टी कॉर्नर के जरिए भारत की मुश्किल बढ़ा दी। 38वें मिनट में फ्रेडरिके मातला ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर मेजबान टीम की बढ़त 2-0 कर दी। इसके बाद भारतीय टीम ने वापसी के लिए कई प्रयास किए लेकिन डच रक्षापंक्ति ने भारतीय फॉरवर्ड्स को ज्यादा मौके नहीं दिए। भारत के पास कुछ अवसर जरूर आए लेकिन उन्हें गोल में बदलने में टीम नाकाम रही।

    इस मुकाबले में भारत की सबसे बड़ी परेशानी आक्रमण में नजर आई। टीम को गोल के मौके बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा जबकि नीदरलैंड्स ने अपने पेनल्टी कॉर्नर का बेहतर इस्तेमाल किया। खास तौर पर मैच के शुरुआती चरण में मिला दबाव भारतीय टीम के लिए भारी पड़ा। हालांकि भारतीय डिफेंस ने पूरे मुकाबले में हार नहीं मानी और लगातार नीदरलैंड्स के हमलों का सामना करता रहा।

    अब भारतीय टीम के सामने सबसे अहम चुनौती ऑस्ट्रेलिया की है। रविवार 23 अगस्त को होने वाला यह मुकाबला भारत के लिए करो या मरो जैसा बन गया है। भारत को सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए ऑस्ट्रेलिया को हराना जरूरी होगा। नीदरलैंड्स के खिलाफ हार के बाद भारत के खाते में एक अंक है जबकि ऑस्ट्रेलिया भी चीन के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ के बाद एक अंक पर है। चीन के दो अंक हैं जबकि नीदरलैंड्स छह अंकों के साथ मजबूत स्थिति में पहुंच चुका है।

    भारत ने विश्व कप के पहले दौर में चीन के खिलाफ 2-2 से ड्रॉ खेला था और इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ के जरिए दूसरे दौर में जगह बनाई थी। पूल डी में भारत चीन के बाद दूसरे स्थान पर रहा था। अब टीम के सामने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐसा प्रदर्शन करने की चुनौती है जिसमें डिफेंस के साथ आक्रमण में भी बेहतर तालमेल नजर आए।

    नीदरलैंड्स के खिलाफ हार ने निश्चित रूप से भारत की सेमीफाइनल की राह कठिन कर दी है लेकिन टीम की उम्मीदें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत भारत को फिर से मजबूत स्थिति में ला सकती है। ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों को पेनल्टी कॉर्नर के साथ गोल करने के मौकों को भुनाने और शुरुआती दबाव से बचने पर खास ध्यान देना होगा। अब टूर्नामेंट में भारत का अगला मुकाबला ही उसकी आगे की राह तय करेगा।

  • हेडिंग्ले में पाकिस्तान का शर्मनाक सरेंडर, इंग्लैंड ने 3 दिन में पारी और 103 रन से रौंदा; बल्लेबाजों ने टेके घुटने

    हेडिंग्ले में पाकिस्तान का शर्मनाक सरेंडर, इंग्लैंड ने 3 दिन में पारी और 103 रन से रौंदा; बल्लेबाजों ने टेके घुटने


    नई दिल्ली। इंग्लैंड ने हेडिंग्ले में खेले गए पहले टेस्ट में पाकिस्तान को बुरी तरह शिकस्त देकर तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली है। लीड्स में खेला गया यह मुकाबला तीसरे दिन ही खत्म हो गया। इंग्लैंड ने पाकिस्तान को पारी और 103 रन से हराया। पाकिस्तान की टीम दोनों पारियों को मिलाकर भी इंग्लैंड की पहली पारी के स्कोर के करीब नहीं पहुंच सकी। मेजबान टीम ने पहली पारी में 409 रन बनाए थे जबकि पाकिस्तान 171 और 135 रन पर ऑलआउट हो गया।

    पाकिस्तान की परेशानी मुकाबले के पहले ही दिन शुरू हो गई थी। इंग्लैंड ने टॉस जीतकर गेंदबाजी का फैसला किया और उसके तेज गेंदबाजों ने इस फैसले को पूरी तरह सही साबित कर दिया। ओली रॉबिन्सन और जोश टंग ने पाकिस्तान की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। दोनों ने पहली पारी में पांच-पांच विकेट झटके। रॉबिन्सन ने 5 विकेट देकर 51 रन दिए जबकि टंग ने 5 विकेट के लिए 46 रन खर्च किए। पाकिस्तान की पूरी टीम 171 रन पर सिमट गई।

    पाकिस्तान की ओर से अब्दुल्लाह शफीक ने 61 रन बनाकर सबसे ज्यादा संघर्ष किया। उनके अलावा कोई भी बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल सका। इंग्लैंड के गेंदबाजों ने लगातार सही लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी करते हुए पाकिस्तानी बल्लेबाजों को रन बनाने का मौका नहीं दिया। मुश्किल परिस्थितियों में इंग्लैंड की सीम गेंदबाजी के सामने पाकिस्तान का टॉप और मिडिल ऑर्डर पूरी तरह बेअसर नजर आया।

    इसके बाद इंग्लैंड ने बल्लेबाजी में भी पाकिस्तान को कोई राहत नहीं दी। मेजबान टीम ने 409 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया और पहली पारी के आधार पर 238 रन की बढ़त हासिल कर ली। हैरी ब्रूक ने 91 रन की शानदार पारी खेली। जॉर्डन कॉक्स ने 73 रन बनाए जबकि कप्तान जो रूट ने 66 रन और डैन लॉरेंस ने 51 रन का योगदान दिया। पाकिस्तान के अली उस्मान ने पांच विकेट लेकर इंग्लैंड को रोकने की कोशिश की लेकिन तब तक मेजबान टीम मैच पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर चुकी थी।

    238 रन से पिछड़ने के बाद पाकिस्तान को मैच बचाने के लिए बड़ी दूसरी पारी की जरूरत थी लेकिन कहानी फिर वही रही। इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों ने पाकिस्तान के बल्लेबाजों को क्रीज पर जमने का मौका ही नहीं दिया। पाकिस्तान ने 51 रन तक दो विकेट गंवा दिए थे और इसके बाद विकेटों का पतन तेज हो गया। टीम ने केवल 25 रन के भीतर चार विकेट गंवा दिए। मोहम्मद रिजवान ने 41 रन बनाकर कुछ प्रतिरोध जरूर किया लेकिन उनकी पारी भी पाकिस्तान को हार से नहीं बचा सकी। पूरी टीम 135 रन पर सिमट गई।

    दूसरी पारी में ओली रॉबिन्सन जोश टंग और जोफ्रा आर्चर ने पाकिस्तान पर दबाव बनाए रखा। रॉबिन्सन और टंग ने पूरे मैच में आठ-आठ विकेट अपने नाम किए। रॉबिन्सन को उनके 8 विकेट के प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। इंग्लैंड के गेंदबाजों ने पाकिस्तान की दोनों पारियों में कुल 20 विकेट हासिल किए और यही इस एकतरफा मुकाबले की सबसे बड़ी कहानी रही।

    इस जीत के साथ जो रूट की टेस्ट कप्तानी में वापसी भी शानदार रही। इंग्लैंड ने पाकिस्तान को तीन दिन के अंदर हराकर नई टेस्ट शुरुआत का मजबूत संदेश दिया है। पाकिस्तान के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी बल्लेबाजी की कमजोरियों को दूर करना होगी। तीन मैचों की सीरीज का दूसरा टेस्ट 27 अगस्त से लॉर्ड्स में खेला जाएगा जहां पाकिस्तान की टीम वापसी कर सीरीज बराबर करने के इरादे से उतरेगी।

  • कोलंबो में नहीं चलेगी श्रीलंका की स्पिन वाली चाल? टीम इंडिया को फंसाने का दांव पड़ सकता है उल्टा, पिच पर बड़ा अपडेट

    कोलंबो में नहीं चलेगी श्रीलंका की स्पिन वाली चाल? टीम इंडिया को फंसाने का दांव पड़ सकता है उल्टा, पिच पर बड़ा अपडेट


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला 23 अगस्त से कोलंबो के सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब यानी एसएससी मैदान पर खेला जाएगा। शुभमन गिल की कप्तानी वाली भारतीय टीम गॉल में पहला टेस्ट 165 रन से जीतकर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना चुकी है। अब भारत के पास कोलंबो में जीत हासिल कर सीरीज अपने नाम करने का मौका है। दूसरी तरफ श्रीलंका के लिए यह मुकाबला बेहद अहम है क्योंकि सीरीज बराबर करने के लिए उसे हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी।

    मुकाबले से पहले सबसे ज्यादा चर्चा कोलंबो की पिच को लेकर हो रही है। माना जा रहा था कि श्रीलंका भारत के मजबूत बल्लेबाजी क्रम को परेशान करने के लिए बेहद ज्यादा स्पिन वाली पिच तैयार कर सकता है। हालांकि ताजा रिपोर्टों के मुताबिक मेजबान टीम इस रणनीति से पीछे हटती दिखाई दे रही है। श्रीलंका क्रिकेट से जुड़े एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि फिलहाल गॉल टेस्ट जैसी संतुलित पिच तैयार करने के बारे में सोचा जा रहा है। ऐसी पिच पर बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों को पर्याप्त मदद मिलने की उम्मीद रहती है।

    श्रीलंका के लिए सबसे बड़ी चिंता उसका कमजोर बल्लेबाजी क्रम है। अनुभवी बल्लेबाज कुसल मेंडिस और दिनेश चांदीमल दूसरे टेस्ट से बाहर हैं जबकि पथुम निसांका भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में अगर पिच को जरूरत से ज्यादा स्पिन के अनुकूल बनाया जाता है तो इसका नुकसान श्रीलंकाई बल्लेबाजों को भी उठाना पड़ सकता है। टीम पहले ही भारत के स्पिन आक्रमण के सामने दबाव में रही है और युवा बल्लेबाजों को कठिन परिस्थितियों में उतारना जोखिम भरा फैसला साबित हो सकता है।

    गॉल में खेले गए पहले टेस्ट में भारत ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया था। देवदत्त पडिक्कल ने पहली पारी में 167 रन की बड़ी पारी खेली जबकि भारत ने 460 रन से ज्यादा का स्कोर खड़ा किया। श्रीलंका के स्पिनरों ने मुकाबले में वापसी की कोशिश जरूर की लेकिन भारतीय बल्लेबाजी की गहराई ने मेजबान टीम को दबाव में बनाए रखा। भारत ने अंत में 165 रन से मुकाबला अपने नाम किया।

    कोलंबो में संतुलित पिच होने की स्थिति में टॉस और पहली पारी का स्कोर काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। एसएससी मैदान का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताता है कि यहां पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम को बड़े स्कोर के जरिए दबाव बनाने का मौका मिल सकता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस मैदान पर टेस्ट में पहली पारी का औसत स्कोर 323 रन रहा है जबकि दूसरी पारी का औसत 354 रन है।

    श्रीलंका के लिए एक और चुनौती टीम संयोजन की है। पूर्व श्रीलंकाई क्रिकेटर रसेल अर्नोल्ड ने भी माना है कि मेजबान टीम भारत की तरह तीन विशेषज्ञ स्पिनरों के साथ उतरने की स्थिति में नहीं है क्योंकि इससे बल्लेबाजी का संतुलन बिगड़ सकता है। भारत के पास रविंद्र जडेजा जैसे खिलाड़ी हैं जो गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में भी मजबूत योगदान दे सकते हैं। इसी कारण श्रीलंका को पिच और प्लेइंग इलेवन दोनों में संतुलन साधना होगा।

    ऐसे में कोलंबो टेस्ट में असली मुकाबला सिर्फ भारतीय बल्लेबाजों और श्रीलंकाई स्पिनरों के बीच नहीं होगा बल्कि रणनीति और टीम संतुलन के बीच भी होगा। अगर श्रीलंका बहुत ज्यादा टर्न वाली पिच तैयार करता है तो उसके अनुभवहीन बल्लेबाज खुद मुश्किल में पड़ सकते हैं। वहीं संतुलित विकेट मिलने पर भारत की मजबूत बल्लेबाजी को रोकना उसके लिए बड़ी चुनौती होगी। इसलिए पिच का अंतिम मिजाज दोनों टीमों की रणनीति और मैच के नतीजे पर बड़ा असर डाल सकता है।

  • ENG vs PAK: रॉबिन्सन-टंग ने उड़ाई पाकिस्तानी बल्लेबाजी की धज्जियां, इंग्लैंड ने जीता पहला टेस्ट

    ENG vs PAK: रॉबिन्सन-टंग ने उड़ाई पाकिस्तानी बल्लेबाजी की धज्जियां, इंग्लैंड ने जीता पहला टेस्ट


    हेडिंग्ले। पाकिस्तान की बल्लेबाजी एक बार फिर इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों के सामने बेनकाब हो गई। हेडिंग्ले में खेले गए पहले टेस्ट में इंग्लैंड ने पाकिस्तान को दूसरी पारी में महज 135 रन पर समेटते हुए पारी और 103 रन से करारी शिकस्त दी। इसके साथ ही तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में इंग्लैंड ने 1-0 की बढ़त बना ली। ओली रॉबिन्सन और जोश टंग ने दोनों पारियों में पांच-पांच विकेट लेकर पाकिस्तान की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी, जबकि जोफ्रा आर्चर ने भी अहम मौकों पर विकेट चटकाए।

    171 पर ढेर हुआ पाकिस्तान, इंग्लैंड ने खड़ा किया 409 का पहाड़
    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी पाकिस्तान की टीम पहली पारी में सिर्फ 171 रन बना सकी। अब्दुल्ला शफीक ने 61 और इमाम-उल-हक ने 42 रन बनाए, लेकिन बाकी बल्लेबाज इंग्लैंड के पेस अटैक के सामने ज्यादा देर नहीं टिक सके। रॉबिन्सन और टंग ने पांच-पांच विकेट लेकर पाकिस्तानी पारी को समेट दिया।

    जवाब में इंग्लैंड ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 409 रन बनाए और पहली पारी के आधार पर 238 रन की विशाल बढ़त हासिल कर ली। हैरी ब्रूक ने 93 गेंदों में 91 रन बनाए। जॉर्डन कॉक्स ने 73, जो रूट ने 66 और डेन लॉरेंस ने 51 रन की पारियां खेलीं।

    दूसरी पारी में भी नहीं संभला पाकिस्तान
    238 रन से पिछड़ने के बाद पाकिस्तान को मैच बचाने के लिए लंबी बल्लेबाजी करनी थी, लेकिन उसकी शुरुआत ही खराब रही। जोफ्रा आर्चर ने इमाम-उल-हक को आउट किया, जबकि अजान अवैस 9 रन बनाकर पवेलियन लौटे। इसके बाद रॉबिन्सन ने अब्दुल्ला शफीक को 15 रन पर चलता कर दिया।

    शान मसूद ने 29 रन बनाकर संघर्ष की कोशिश की, लेकिन जोश टंग ने आते ही पाकिस्तान के मध्यक्रम को तहस-नहस कर दिया। उन्होंने सऊद शकील को 14 रन पर आउट करने के बाद एक ही ओवर में शान मसूद और सलमान आगा के विकेट निकाल दिए। टंग ने महज 11 गेंदों में तीन विकेट लेकर पाकिस्तान को 76 रन पर छह विकेट के संकट में पहुंचा दिया।

    रिजवान ने दिखाया संघर्ष, फिर भी 135 पर सिमटी टीम
    विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान ने 39 गेंदों पर 41 रन बनाकर कुछ प्रतिरोध जरूर किया। वह दूसरी पारी में पाकिस्तान के सबसे सफल बल्लेबाज रहे, लेकिन उनकी पारी भी टीम को हार से नहीं बचा सकी। गस एटकिंसन ने रिजवान को आउट किया और इसके बाद आर्चर ने आखिरी बल्लेबाज को पवेलियन भेज दिया। पाकिस्तान की पूरी टीम 37.3 ओवर में 135 रन पर ऑलआउट हो गई और इंग्लैंड ने तीन दिन में ही मुकाबला अपने नाम कर लिया।

    रॉबिन्सन-टंग ने मिलकर बरपाया कहर
    इंग्लैंड की जीत में ओली रॉबिन्सन सबसे बड़े नायक रहे। उन्होंने पहली पारी में 5/51 और दूसरी पारी में तीन विकेट लिए। मैच में कुल 8/80 के शानदार आंकड़े के साथ उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

    जोश टंग ने भी मैच में आठ विकेट लिए। उन्होंने पहली पारी में 5/46 और दूसरी पारी में तीन विकेट चटकाए। जोफ्रा आर्चर ने दूसरी पारी में तीन विकेट हासिल किए। इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों ने लगातार फुल लेंथ पर गेंदबाजी करते हुए पाकिस्तानी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

    जो रूट की कप्तानी में शानदार वापसी
    बेन स्टोक्स के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास और ब्रेंडन मैकुलम के कोच पद से हटने के बाद इंग्लैंड नए दौर में प्रवेश कर रहा है। ऐसे में पूर्णकालिक टेस्ट कप्तान के तौर पर जो रूट की वापसी जीत के साथ हुई। इंग्लैंड ने गेंदबाजी, बल्लेबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में पाकिस्तान को पछाड़ दिया। पाकिस्तान के कप्तान सलमान आगा ने भी मैच के बाद माना कि इंग्लैंड ने उनकी टीम को हर विभाग में मात दी।

    लॉर्ड्स में होगी अगली भिड़ंत
    इस जीत से इंग्लैंड को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 में भी अहम अंक मिले हैं। वहीं पाकिस्तान का अंक प्रतिशत गिरकर 19.05 हो गया है। दोनों टीमों के बीच सीरीज का दूसरा टेस्ट 27 अगस्त से लॉर्ड्स में खेला जाएगा।

    पाकिस्तान के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी बल्लेबाजी को संभालने की है। हेडिंग्ले में जिस तरह उसका शीर्ष और मध्यक्रम इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों के सामने बिखरा, अगर यही कहानी लॉर्ड्स में भी दोहराई गई तो सीरीज में वापसी मुश्किल हो सकती है।

  • विदेशी पिचों पर सचिन या कोहली कौन बेहतर? एबी डिविलियर्स की राय ने बढ़ाई चर्चा, आंकड़ों में किसका पलड़ा भारी

    विदेशी पिचों पर सचिन या कोहली कौन बेहतर? एबी डिविलियर्स की राय ने बढ़ाई चर्चा, आंकड़ों में किसका पलड़ा भारी

    नई दिल्ली । सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली भारतीय क्रिकेट के ऐसे दो नाम हैं जिनकी तुलना अक्सर होती रही है। दोनों ने अलग-अलग दौर में भारतीय बल्लेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और दुनिया के मुश्किल क्रिकेटिंग हालात में अपनी काबिलियत साबित की। अब दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान एबी डिविलियर्स ने दोनों दिग्गजों की विदेशी परिस्थितियों में सफलता को लेकर अपनी राय रखी है। डिविलियर्स की टिप्पणी के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि सचिन और विराट में आखिर बेहतर बल्लेबाज कौन था।

    डिविलियर्स ने सचिन तेंदुलकर की उपलब्धियों को कमतर आंकने के बजाय यह कहा कि सचिन ने भारतीय बल्लेबाजों के लिए एक रास्ता तैयार किया था। उनके मुताबिक सचिन उन शुरुआती भारतीय बल्लेबाजों में थे जिन्होंने यह विश्वास पैदा किया कि उपमहाद्वीप से आने वाला बल्लेबाज तेज गेंदबाजों की उछाल और सीम वाली परिस्थितियों में भी सफल हो सकता है। हालांकि डिविलियर्स का मानना है कि विराट कोहली ने इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए उसे एक अलग स्तर तक पहुंचाया।

    डिविलियर्स की बात का सबसे चर्चित हिस्सा यही रहा कि उन्होंने विराट कोहली को विदेशी परिस्थितियों में सचिन से अधिक मजबूत बताया। उनकी राय के मुताबिक कोहली ने विदेशों में भारतीय बल्लेबाजी के आत्मविश्वास को और बढ़ाया और टीम इंडिया को विदेशी मैदानों पर एक मजबूत टेस्ट टीम बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस बयान ने सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में सचिन बनाम विराट की पुरानी बहस को फिर हवा दे दी है।

    हालांकि अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर थोड़ी अलग दिखाई देती है। सचिन तेंदुलकर ने 200 टेस्ट मैचों में 15,921 रन बनाए और टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने हुए हैं। उनके टेस्ट करियर का बड़ा हिस्सा विदेशी मैदानों पर भी सफल रहा। आंकड़ों के अनुसार सचिन ने दक्षिण अफ्रीका इंग्लैंड न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में 63 टेस्ट खेलकर 51.30 की औसत से 5,387 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 17 शतक और 23 अर्धशतक लगाए।

    वहीं विराट कोहली ने 123 टेस्ट मैचों में 9,230 रन बनाए। भारत के बाहर खेले गए 66 टेस्ट में उनके नाम 4,774 रन दर्ज हैं। चार प्रमुख विदेशी देशों दक्षिण अफ्रीका इंग्लैंड न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में कोहली ने 46 टेस्ट मैचों में 42.08 की औसत से 3,661 रन बनाए। उनके नाम इन परिस्थितियों में 12 शतक और 14 अर्धशतक रहे। यानी कुल विदेशी आंकड़ों में सचिन का पलड़ा मजबूत नजर आता है जबकि डिविलियर्स ने कोहली के प्रभाव और उनके दौर में भारतीय टीम की मानसिकता में आए बदलाव को अधिक महत्व दिया।

    डिविलियर्स ने मौजूदा भारतीय बल्लेबाजों का भी जिक्र किया और कहा कि सचिन और विराट ने अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए मिसाल कायम की। केएल राहुल और देवदत्त पडिक्कल जैसे बल्लेबाजों को उन्होंने इसी परंपरा का हिस्सा बताया। हालांकि राहुल की विदेशी टेस्ट बल्लेबाजी पर उन्होंने सुधार की गुंजाइश भी बताई। डिविलियर्स के मुताबिक राहुल की तकनीक शानदार है लेकिन विदेशों में उनके औसत से ज्यादा की उम्मीद की जाती है। उन्होंने सलाह दी कि राहुल जब क्रीज पर जम जाएं तो अपनी पारियों को बड़े स्कोर में बदलें और शतक के बाद भी बल्लेबाजी जारी रखते हुए 150 से 180 रन जैसे बड़े स्कोर बनाने की कोशिश करें।

    दरअसल सचिन और विराट की तुलना सिर्फ आंकड़ों से पूरी तरह तय नहीं हो सकती। सचिन ने ऐसे दौर में भारतीय क्रिकेट को विश्व मंच पर स्थापित किया जब विदेशी परिस्थितियों में भारतीय बल्लेबाजों के सामने कई तरह की चुनौतियां थीं। विराट ने उसी आधार को आगे बढ़ाते हुए फिटनेस आक्रामकता और विदेशी जीत की मानसिकता को नई पहचान दी। इसलिए डिविलियर्स का बयान किसी एक खिलाड़ी को पूरी तरह महान साबित करने के बजाय दोनों की विरासत और उनके प्रभाव के अलग-अलग पहलुओं को सामने रखता है। यही वजह है कि सचिन बनाम विराट की बहस शायद क्रिकेट प्रशंसकों के बीच कभी खत्म नहीं होने वाली।

  • गॉल की जीत ने बढ़ाई उम्मीद लेकिन खतरा बरकरार, 8 टेस्ट में एक भी बड़ी चूक भारत का बिगाड़ सकती है पूरा खेल

    गॉल की जीत ने बढ़ाई उम्मीद लेकिन खतरा बरकरार, 8 टेस्ट में एक भी बड़ी चूक भारत का बिगाड़ सकती है पूरा खेल

    नई दिल्ली । श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट में 165 रनों की शानदार जीत दर्ज कर टीम इंडिया ने दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त जरूर बना ली है लेकिन वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप 2025-27 के फाइनल की दौड़ में भारत की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। गॉल में मिली जीत से भारतीय टीम के अंक प्रतिशत में सुधार हुआ है और फाइनल की उम्मीदें भी मजबूत हुई हैं लेकिन अंक तालिका में टीम अभी पांचवें स्थान पर ही बनी हुई है। ऐसे में अब बचे हुए आठ टेस्ट मुकाबले भारत के लिए बेहद अहम हो गए हैं और फाइनल की रेस में बने रहने के लिए टीम को लगभग हर मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा।

    गॉल टेस्ट से पहले भारत ने नौ मुकाबलों में चार जीत दर्ज की थीं और उसका पॉइंट्स प्रतिशत 48.15 था। इस जीत के बाद भारत का पीसीटी बढ़कर 53.33 हो गया है। हालांकि इस सुधार के बावजूद भारतीय टीम अभी बांग्लादेश से पीछे है। बांग्लादेश ने पांच टेस्ट में तीन जीत के साथ 66.67 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं और वह चौथे स्थान पर है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 77.78 प्रतिशत के साथ तालिका में सबसे ऊपर है। दक्षिण अफ्रीका 75 प्रतिशत और न्यूजीलैंड 72.22 प्रतिशत के साथ भारत से आगे हैं। इससे साफ है कि भारत को सिर्फ अपने प्रदर्शन पर निर्भर रहने से काम नहीं चलेगा बल्कि दूसरी टीमों के नतीजे भी फाइनल की तस्वीर तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

    भारत के पास अब इस चक्र में आठ टेस्ट मैच बाकी हैं। अगर टीम इन सभी मुकाबलों में जीत दर्ज करती है तो उसका पॉइंट्स प्रतिशत करीब 74.07 तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में भारत की फाइनल में पहुंचने की संभावना बेहद मजबूत हो जाएगी। लेकिन समस्या यह है कि इन आठ मुकाबलों में एक भी हार भारत के समीकरण को काफी प्रभावित कर सकती है। एक हार की स्थिति में पीसीटी लगभग 68.52 तक गिर सकता है जबकि दो हार होने पर यह करीब 62.96 और तीन हार की स्थिति में लगभग 57.41 तक पहुंच जाएगा। यानी भारत के लिए अब हर टेस्ट का महत्व कई गुना बढ़ गया है।

    श्रीलंका के खिलाफ सीरीज का दूसरा और आखिरी मुकाबला 23 अगस्त से कोलंबो के एसएससी मैदान पर खेला जाएगा। भारत की कोशिश इस मुकाबले को जीतकर सीरीज 2-0 से अपने नाम करने की होगी। इसके बाद टीम इंडिया के सामने न्यूजीलैंड की चुनौती होगी जहां उसे दो टेस्ट मैच खेलने हैं। न्यूजीलैंड की परिस्थितियां भारतीय टीम के लिए आसान नहीं होंगी और हाल के वर्षों में कीवी टीम ने भारत को टेस्ट क्रिकेट में कड़ी चुनौती दी है।

    इसके बाद भारत की अगली बड़ी परीक्षा ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैचों की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी होगी। ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ घरेलू मैदान पर होने वाली यह सीरीज WTC फाइनल की दौड़ में निर्णायक साबित हो सकती है। भारत अगर ऑस्ट्रेलिया को 4-1 या 3-1 से हराने में सफल रहता है तो उसके फाइनल की राह काफी मजबूत हो जाएगी। इसके उलट सीरीज में ज्यादा नुकसान भारत के समीकरण को मुश्किल बना सकता है।

    WTC में जीत के लिए 12 अंक मिलते हैं जबकि ड्रॉ होने पर चार अंक हासिल होते हैं और हार की स्थिति में कोई अंक नहीं मिलता। यही वजह है कि भारत के लिए अब हर टेस्ट में जीत की अहमियत बढ़ गई है। गॉल की जीत ने टीम इंडिया को राहत जरूर दी है लेकिन फाइनल का टिकट अभी दूर है। आने वाले आठ टेस्ट मुकाबले अब भारत के लिए सिर्फ सीरीज जीतने की लड़ाई नहीं बल्कि WTC फाइनल में जगह बनाने की निर्णायक जंग बनने वाले हैं।

  • गॉल टेस्ट में श्रीलंका पर धमाकेदार जीत से भारतीय टीम की डब्ल्यूटीसी स्थिति मजबूत, फाइनल का समीकरण हुआ दिलचस्प

    गॉल टेस्ट में श्रीलंका पर धमाकेदार जीत से भारतीय टीम की डब्ल्यूटीसी स्थिति मजबूत, फाइनल का समीकरण हुआ दिलचस्प

    नई दिल्ली ।गॉल में खेले गए पहले टेस्ट मैच के पांचवें दिन भारतीय क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मेजबान श्रीलंका को 165 रनों के भारी अंतर से हरा दिया। इस बड़ी जीत के साथ ही भारत ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली है। इस मुकाबले में मिली जीत से आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप की अंक तालिका में भारतीय टीम के खाते में महत्वपूर्ण अंक जुड़े हैं और उसकी फाइनल में पहुंचने की संभावनाएं काफी मजबूत हुई हैं।

    मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का भारतीय कप्तान का फैसला पूरी तरह सही साबित हुआ। पहली पारी में देवदत्त पड़िक्कल ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए अपने करियर का पहला टेस्ट शतक जमाया और 167 रनों की यादगार पारी खेली। भारत की पहली पारी 462 रनों पर समाप्त हुई, जिसके जवाब में श्रीलंकाई टीम अपनी पहली पारी में 284 रन ही बना सकी। इससे भारतीय टीम को पहली पारी के आधार पर 178 रनों की मजबूत बढ़त हासिल हुई।

    दूसरी पारी में भारतीय बल्लेबाजों ने तेज गति से रन बनाते हुए श्रीलंका के सामने जीत के लिए 372 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। दूसरी पारी के दौरान विकेटकीपर बल्लेबाज ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए एक बड़ा कीर्तिमान भी अपने नाम किया। जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी मेजबान टीम भारतीय गेंदबाजों के सटीक आक्रमण के सामने टिक नहीं सकी और पूरी टीम सस्ते में सिमट गई।

    भारत की इस जीत में गेंदबाजों का योगदान बेहद सराहनीय रहा। युवा स्पिनर मानव सुथार ने मैच में घातक गेंदबाजी करते हुए पहली पारी में चार और दूसरी पारी में छह विकेट झटके। पूरे मैच में कुल दस विकेट लेकर उन्होंने श्रीलंकाई टीम को मुकाबले में वापसी का कोई अवसर नहीं दिया। उनके इस शानदार प्रदर्शन ने भारत की जीत की राह आसान कर दी।

    वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप 2025-27 की ताजा रैंकिंग के अनुसार भारतीय टीम अब 10 मैचों में 5 जीत, 4 हार और 1 ड्रॉ के साथ 64 अंक अर्जित कर 53.33 प्रतिशत पीसीटी के साथ पांचवें स्थान पर बनी हुई है। वहीं भारत से करारी हार झेलने के बाद श्रीलंकाई टीम तालिका में खिसक कर छठे पायदान पर आ गई है। वर्तमान तालिका में ऑस्ट्रेलिया शीर्ष स्थान पर बना हुआ है, जबकि दक्षिण अफ्रीका दूसरे और न्यूजीलैंड तीसरे स्थान पर मौजूद हैं।

    सीरीज का दूसरा और अंतिम टेस्ट मैच 23 अगस्त से कोलंबो के ऐतिहासिक मैदान पर खेला जाएगा। इस सीरीज के समाप्त होने के बाद भारतीय टीम को न्यूजीलैंड के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला खेलनी है। मध्य प्रदेश सहित पूरे देश के क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि भारतीय टीम आगामी मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन बरकरार रखकर फाइनल में अपनी जगह कैसे पक्की करती है।