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  • CWG 2026: शर्मिला धनखड़ ने पैरा शॉट पुट में स्वर्ण पदक जीतकर रचा इतिहास…

    CWG 2026: शर्मिला धनखड़ ने पैरा शॉट पुट में स्वर्ण पदक जीतकर रचा इतिहास…


    नई दिल्ली।
    भारत (India) की शर्मिला धनखड़ (Sharmila Dhankhar) ने सोमवार को इतिहास रचते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) में देश के लिए पहला पैरा एथलेटिक्स गोल्ड मेडल (Para-athletics gold medal) जीत लिया. उन्होंने ग्लासगो में महिलाओं की शॉट पुट F57 स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया. शर्मिला ने 9.81 मीटर का सीजन का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया।

    शर्मिला के गोल्ड मेडल के साथ ही भारत का पैरा एथलेटिक्स में कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक का 20 साल का इंतजार भी खत्म हो गया. शर्मिला के गोल्ड मेडल ने भारत को इन खेलों में दूसरा गोल्ड दिलाया है।

    इसी स्पर्धा में भारत की एक अन्य खिलाड़ी शिल्पा शायला ने ब्रॉन्ज मेडल जीता. हालांकि, शिल्पा का पदक बेहद नाटकीय घटनाक्रम के बाद पक्का हुआ. शिल्पा ने 7.26 मीटर का अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था और शुरुआत में वह चौथे स्थान पर रही थीं. वहीं नाइजीरिया की यूचेरिया इयियाजी को शुरुआत में ब्रॉन्ज मेडल दिया गया था।

    हालांकि, भारत की ओर से की गई आपत्ति के बाद आधिकारिक समीक्षा हुई और नाइजीरियाई खिलाड़ी के एकमात्र वैध थ्रो को फाउल करार दिया गया. इसके बाद शिल्पा को चौथे स्थान से तीसरे स्थान पर अपग्रेड करते हुए ब्रॉन्ज मेडल दिया गया.

    मेडल मिलने के बाद शिल्पा भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े. उन्होंने शर्मिला के साथ मिलकर इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाया. हालांकि, नाइजीरिया की ओर से इस फैसले के खिलाफ काउंटर प्रोटेस्ट किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है.

    बता दें कि F57 वर्गीकरण उन पैरा एथलीटों के लिए है, जिनके निचले अंगों में दिव्यांगता, अंगों की कमी या मांसपेशियों की ताकत में कमी होती है. शर्मिला को दो साल की उम्र में बाएं पैर में पोलियो हो गया था. उन्होंने इसी साल फाजा इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल जीता था. वह 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भी हिस्सा ले चुकी हैं, जहां वह चौथे स्थान पर रही थीं.


    वल्लूरी अजय बाबू ने वेटलिफ्टिंग में जीता सिल्वर

    भारत के पदक अभियान में वल्लूरी अजय बाबू ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की 79 KG वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता. उन्होंने कुल 330 किलो ग्राम वजन उठाया और गोल्ड मेडल से महज एक किलोग्राम से चूक गए. मलेशिया के एरी हिदायत मुहम्मद ने 331 किलो ग्राम के कुल वजन के साथ स्वर्ण पदक जीता.

    वल्लूरी अजय बाबू की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने अपने पिता श्रीनिवास राव की उपलब्धि को एक कदम आगे बढ़ाया है. उनके पिता ने 2010 दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों की 56 KG वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता था. अब 16 साल बाद उनके बेटे ने सिल्वर मेडल जीतकर परिवार की पदक परंपरा को आगे बढ़ाया है.

    वल्लूरी गोल्ड मेडल के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन एरी हिदायत मुहम्मद से सिर्फ एक किलोग्राम पीछे रह गए. मुकाबला आखिरी लिफ्ट तक बेहद रोमांचक रहा और भारतीय खिलाड़ी को रजत पदक से संतोष करना पड़ा. इसी के साथ भारत की कुल पदक संख्या अब 10 हो गई है, जिसमें 2 गोल्ड शामिल हैं।

  • ग्लासगो में भारत का परचम लहराया शर्मिला बनीं गोल्डन गर्ल चार नए पदकों के साथ मेडल टैली में मजबूत हुई दावेदारी

    ग्लासगो में भारत का परचम लहराया शर्मिला बनीं गोल्डन गर्ल चार नए पदकों के साथ मेडल टैली में मजबूत हुई दावेदारी


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। सोमवार देर रात भारतीय दल ने एक बार फिर देश को गौरवान्वित करते हुए चार और पदक अपने नाम किए। इन उपलब्धियों में सबसे बड़ी सफलता पैरा एथलीट शर्मिला ने दिलाई जिन्होंने महिला शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को प्रतियोगिता का दूसरा गोल्ड दिलाया। इसके अलावा भारत को दो रजत और एक कांस्य पदक भी मिला जिससे कुल पदकों की संख्या बढ़कर 10 हो गई। भारत अब दो स्वर्ण पांच रजत और तीन कांस्य पदकों के साथ पदक तालिका में आठवें स्थान पर पहुंच गया है।

    महिला शॉट पुट एफ57 वर्ग के फाइनल में शर्मिला ने शुरुआत से ही शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने छह प्रयासों में लगातार बेहतरीन थ्रो किए और तीसरे प्रयास में 9 दशमलव 81 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह उनका इस सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा। पूरे मुकाबले में उन्होंने आत्मविश्वास और तकनीकी कौशल का बेहतरीन प्रदर्शन किया जिससे प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी उनके आसपास भी नहीं पहुंच सके।

    इस स्पर्धा में घाना की जिनाबु इसाह ने 8 दशमलव 65 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ रजत पदक हासिल किया जबकि भारत की शिल्पा कंचुगरकोप्पालु शायला ने 7 दशमलव 26 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। इस तरह एक ही स्पर्धा में भारत ने स्वर्ण और कांस्य दोनों पदक जीतकर शानदार उपलब्धि दर्ज की।

    एथलेटिक्स में भी भारत को बड़ी सफलता मिली। पुरुषों की हाई जंप स्पर्धा में सर्वेश अनिल कुशारे ने 2 दशमलव 25 मीटर की ऊंची छलांग लगाकर रजत पदक अपने नाम किया। गोल्ड मेडल की दौड़ बेहद रोमांचक रही क्योंकि सर्वेश और जमैका के रोमेन बेकफोर्ड दोनों ने समान ऊंचाई पार की। हालांकि प्रयासों की संख्या के आधार पर स्वर्ण पदक जमैका के खिलाड़ी के नाम रहा जबकि सर्वेश को रजत से संतोष करना पड़ा। इसके बावजूद उनका प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    वेटलिफ्टिंग में भी भारत ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। पुरुषों के 79 किलोग्राम वर्ग में वल्लूरी अजय बाबू ने कुल 330 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता। उन्होंने स्नैच में 149 किलोग्राम का गेम रिकॉर्ड बनाया और क्लीन एंड जर्क में 181 किलोग्राम भार उठाया। हालांकि मलेशिया के एरी हिदायत मुहम्मद ने कुल 331 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला बेहद कांटे का रहा और अजय बाबू केवल एक किलोग्राम के अंतर से स्वर्ण पदक से चूक गए।

    भारतीय खिलाड़ियों के लगातार शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि देश के खिलाड़ी अब हर बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर दमदार चुनौती पेश कर रहे हैं। पैरा खेलों से लेकर एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग तक भारतीय प्रतिभाएं लगातार पदक जीतकर देश का मान बढ़ा रही हैं। आने वाले दिनों में भी कई स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों से पदकों की उम्मीद बनी हुई है और खेल प्रेमियों की नजर अब अगले मुकाबलों पर टिकी है।

  • भारत की मेडल झोली हुई और मजबूत, राजा मुथुपंडी के सिल्वर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गर्व

    भारत की मेडल झोली हुई और मजबूत, राजा मुथुपंडी के सिल्वर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गर्व


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है और देश के पदकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। वेटलिफ्टिंग में भारत को एक और बड़ी सफलता तब मिली जब तमिलनाडु के प्रतिभाशाली वेटलिफ्टर राजा मुथुपंडी ने पुरुषों के 65 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक अपने नाम कर लिया। उनकी इस उपलब्धि ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी शानदार सफलता पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।

    राजा मुथुपंडी ने पूरे मुकाबले के दौरान दमदार प्रदर्शन करते हुए कुल 286 किलोग्राम वजन उठाया। उन्होंने स्नैच में 126 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 160 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। उनका प्रदर्शन पूरे मुकाबले में बेहद संतुलित और प्रभावशाली रहा। हालांकि स्वर्ण पदक मलेशिया के अजनील बिदिन ने जीता जिन्होंने रिकॉर्ड 299 किलोग्राम वजन उठाकर पहला स्थान हासिल किया लेकिन राजा मुथुपंडी का रजत पदक भारत के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं माना जा रहा है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी करते हुए राजा मुथुपंडी को बधाई दी और कहा कि पुरुषों के 65 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग वर्ग में रजत पदक जीतकर उन्होंने पूरे देश का सम्मान बढ़ाया है। राष्ट्रपति ने कहा कि देश को उनकी उपलब्धि पर गर्व है और भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए उन्हें शुभकामनाएं दीं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राजा मुथुपंडी की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग से भारत के लिए एक और पदक आना बेहद गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि राजा की सफलता से हर भारतीय खुश है और उनका प्रदर्शन देश के युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगा। प्रधानमंत्री ने उनके उज्ज्वल भविष्य और आगामी प्रतियोगिताओं में और बड़ी सफलताओं की कामना भी की।

    राजा मुथुपंडी का यह पदक भारत के लिए बेहद अहम साबित हुआ क्योंकि इससे पहले भारतीय वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह चनंबम पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीत चुके थे जबकि स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। मीराबाई ने लगातार तीसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम और मजबूत कर लिया है।

    भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम का यह प्रदर्शन साफ संकेत देता है कि देश के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। शुरुआती दिनों में ही वेटलिफ्टिंग में मिले इन पदकों ने भारत की पदक तालिका को मजबूत किया है और अन्य खिलाड़ियों का भी मनोबल बढ़ाया है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही लय बरकरार रही तो भारत इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने पिछले प्रदर्शन से भी बेहतर नतीजे हासिल कर सकता है।

    भारत के खिलाड़ियों का लगातार शानदार प्रदर्शन यह साबित कर रहा है कि वर्षों की मेहनत आधुनिक प्रशिक्षण और बेहतर खेल सुविधाओं का सकारात्मक परिणाम अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाई देने लगा है। राजा मुथुपंडी का रजत पदक भी इसी सफलता की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है जिसने देशवासियों को एक और गर्व का अवसर दिया है।

  • मीराबाई चानू की ऐतिहासिक जीत पर नेताओं ने जताया गर्व, राहुल गांधी बोले- आपने दुनिया में तिरंगा ऊंचा किया

    मीराबाई चानू की ऐतिहासिक जीत पर नेताओं ने जताया गर्व, राहुल गांधी बोले- आपने दुनिया में तिरंगा ऊंचा किया


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाली स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू को देशभर से बधाइयों का सिलसिला जारी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने उनकी शानदार उपलब्धि पर खुशी जताते हुए इसे पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि मीराबाई की मेहनत अनुशासन और संघर्ष करोड़ों भारतीयों विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर मीराबाई चानू की विजयी तस्वीर साझा करते हुए उन्हें लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि मीराबाई ने अपनी अटूट मेहनत दृढ़ संकल्प और अनुशासन के दम पर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का तिरंगा शान से लहराया है। राहुल ने लिखा कि हर भारतीय को उनकी इस ऐतिहासिक सफलता पर गर्व है और उनकी उपलब्धि देश के लाखों युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेगी।

    कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मीराबाई चानू को बधाई देते हुए उनकी उपलब्धि को भारतीय खेल इतिहास का गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह चनंबम को भी रजत पदक जीतने पर शुभकामनाएं दीं। खड़गे ने कहा कि दोनों खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का सम्मान बढ़ाया है और उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों को खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगी।

    ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर प्रतियोगिता में अपना दबदबा कायम रखा। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीतने का ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया। इससे पहले वह 2018 के गोल्ड कोस्ट और 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। वहीं 2014 के ग्लासगो खेलों में उन्होंने रजत पदक हासिल किया था।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई का यह स्वर्ण भारत का पहला गोल्ड मेडल भी बना। दूसरी ओर ऋषिकांत सिंह चनंबम ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता और भारत की पदक तालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    मीराबाई चानू पिछले कई वर्षों से भारतीय वेटलिफ्टिंग की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल रही हैं। उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरे स्वर्ण पदक के साथ अपने शानदार करियर में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जोड़ दी है। उनकी इस सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेहनत और समर्पण के दम पर भारतीय खिलाड़ी विश्व मंच पर लगातार नई ऊंचाइयां हासिल कर सकते हैं।

  • हांगझोउ में भारत की शानदार शूटिंग, ईशा सिंह बनीं विश्व कप चैंपियन, मनु भाकर ने कांस्य जीतकर बढ़ाया गौरव

    हांगझोउ में भारत की शानदार शूटिंग, ईशा सिंह बनीं विश्व कप चैंपियन, मनु भाकर ने कांस्य जीतकर बढ़ाया गौरव


    नई दिल्ली । चीन के हांगझोउ में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में भारतीय निशानेबाजों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में भारत की युवा स्टार निशानेबाज ईशा सिंह ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर ने कांस्य पदक जीतकर भारत की झोली में एक और सफलता जोड़ दी। इन दोनों उपलब्धियों के साथ भारतीय टीम के कुल पदकों की संख्या तीन हो गई है और भारत पदक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

    फाइनल मुकाबले में ईशा सिंह ने शुरुआत से ही आत्मविश्वास और सटीक निशानेबाजी का शानदार प्रदर्शन किया। पूरे मुकाबले के दौरान उन्होंने लगातार बढ़त बनाए रखी और 50 शॉट्स में 40 अंक हासिल करते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया। मेजबान चीन की मजबूत चुनौती के बावजूद ईशा ने किसी तरह का दबाव अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और शानदार संयम के साथ मुकाबला अपने नाम किया।

    स्वर्ण पदक की दौड़ में चीन की युयुए झांग ईशा की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी थीं। हालांकि भारतीय निशानेबाज ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए उन्हें तीन अंकों के अंतर से पीछे छोड़ दिया। झांग ने 37 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया। चीन की धरती पर मेजबान देश की स्टार निशानेबाज को हराकर स्वर्ण जीतना ईशा सिंह के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।

    दूसरी ओर ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर ने भी एक बार फिर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। कांस्य पदक के मुकाबले में उनका सामना उत्तर कोरिया की ह्योन ग्योंग पाक से हुआ। दोनों खिलाड़ियों के बीच बेहद रोमांचक और कांटे की टक्कर देखने को मिली। मुकाबला इतना करीबी रहा कि विजेता का फैसला डबल शूटऑफ से हुआ। दबाव के इस क्षण में मनु भाकर ने शानदार संयम दिखाया और निर्णायक निशाना लगाकर कांस्य पदक अपने नाम कर लिया।

    ईशा सिंह के स्वर्ण और मनु भाकर के कांस्य पदक के साथ भारत की पदक संख्या तीन हो गई है। इससे पहले भारतीय निशानेबाज संयम ने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में रजत पदक जीतकर भारत का खाता खोला था। लगातार मिल रही इन सफलताओं ने भारतीय शूटिंग दल का आत्मविश्वास और मजबूत कर दिया है।

    आईएसएसएफ वर्ल्ड कप की पदक तालिका में मेजबान चीन फिलहाल पहले स्थान पर बना हुआ है। चीन अब तक 14 पदक जीत चुका है जिनमें छह स्वर्ण पदक शामिल हैं। वहीं भारत तीन पदकों के साथ दूसरे स्थान पर है। भारतीय निशानेबाजों का मौजूदा प्रदर्शन यह संकेत दे रहा है कि आने वाले मुकाबलों में भी देश के खाते में और पदक जुड़ सकते हैं तथा भारतीय दल अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत पहचान बनाए रखेगा

  • भारतीय जूनियर स्क्वैश टीमों का शानदार प्रदर्शन, पुरुष टीम ने बनाई प्री-क्वार्टर में जगह, महिला टीम ने जीत से किया आगाज

    भारतीय जूनियर स्क्वैश टीमों का शानदार प्रदर्शन, पुरुष टीम ने बनाई प्री-क्वार्टर में जगह, महिला टीम ने जीत से किया आगाज

    नई दिल्ली । कनाडा के ओंटारियो में आयोजित वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश टीम चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने अभियान की जोरदार शुरुआत की है। पुरुष और महिला दोनों टीमों ने अपने शुरुआती मुकाबलों में प्रभावशाली जीत दर्ज कर भारत की मजबूत दावेदारी पेश की। जहां भारतीय पुरुष टीम ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल करते हुए प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई वहीं महिला टीम ने भी पहले ही मुकाबले में शानदार जीत दर्ज कर आत्मविश्वास से भरी शुरुआत की है।

    पांचवीं वरीयता प्राप्त भारतीय पुरुष टीम ने ग्रुप चरण में अपना पहला मुकाबला नीदरलैंड के खिलाफ खेला। गुरवीर सिंह युशा नफीस और आर्यवीर दीवान की तिकड़ी ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए अपने सभी मुकाबले जीते और नीदरलैंड को 3-0 से करारी शिकस्त दी। भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे मैच के दौरान आक्रामक खेल दिखाया और विरोधी खिलाड़ियों को वापसी का कोई मौका नहीं दिया।

    ग्रुप चरण के दूसरे मुकाबले में भारत का सामना ब्राजील से हुआ। इस मैच में गुरवीर सिंह को आराम देते हुए पूरव रांभिया को टीम में शामिल किया गया। पूरव युशा नफीस और आर्यवीर दीवान ने शानदार तालमेल के साथ खेलते हुए ब्राजील के खिलाड़ियों को भी 3-0 से हराया। लगातार दूसरी एकतरफा जीत के साथ भारतीय पुरुष टीम ने ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया और प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह सुनिश्चित कर ली। टीम का आत्मविश्वास और प्रदर्शन यह संकेत दे रहा है कि वह इस बार खिताब की मजबूत दावेदारों में शामिल है।

    महिला वर्ग में भी भारत ने विजयी शुरुआत की। पांचवीं वरीयता प्राप्त भारतीय महिला टीम ने चीनी ताइपे के खिलाफ एकतरफा मुकाबला खेलते हुए 3-0 से जीत दर्ज की। सान्वी कलंकी अनिका दुबे और रुद्र सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों को कोई मौका नहीं दिया। अब भारतीय महिला टीम का अगला मुकाबला मलेशिया से होगा जहां जीत दर्ज कर वह नॉकआउट चरण की ओर मजबूत कदम बढ़ाना चाहेगी।

    भारतीय महिला टीम की स्टार खिलाड़ी अनाहत सिंह को शुरुआती मुकाबले में आराम दिया गया। अनाहत ने एक दिन पहले ही विश्व जूनियर व्यक्तिगत स्क्वैश खिताब जीतकर इतिहास रचा था। टीम प्रबंधन ने उन्हें पर्याप्त आराम देने का फैसला किया ताकि आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों में वह पूरी ऊर्जा के साथ कोर्ट पर उतर सकें।

    टूर्नामेंट में अन्य प्रमुख टीमों ने भी शानदार शुरुआत की है। मेजबान कनाडा की महिला टीम ने नाइजीरिया को हराकर अपने अभियान का आगाज किया जबकि जापान की पुरुष टीम ने कनाडा को मात दी। वहीं गत चैंपियन मिस्र ने भी अपने खिताब बचाने की मजबूत दावेदारी पेश करते हुए महिला वर्ग में ब्राजील और पुरुष वर्ग में नीदरलैंड तथा न्यूजीलैंड को हराकर जीत दर्ज की।

    भारतीय टीमों के इस दमदार प्रदर्शन से देश के खेल प्रेमियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। अब सभी की नजरें आगामी मुकाबलों पर हैं जहां भारत दोनों वर्गों में पदक और खिताब की चुनौती पेश करने के इरादे से उतरेगा।

  • एशियाई खेल 2026 में गुजरात का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, पहली बार 9 खिलाड़ी करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व

    एशियाई खेल 2026 में गुजरात का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, पहली बार 9 खिलाड़ी करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व


    नई दिल्ली । जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले 20वें एशियाई खेलों के लिए गुजरात ने नया इतिहास रच दिया है। पहली बार राज्य से रिकॉर्ड 9 खिलाड़ियों का भारतीय टीम में चयन हुआ है जबकि एक खिलाड़ी को हाई वैल्यू रिजर्व के रूप में जगह मिली है। यह उपलब्धि गुजरात में खेल संस्कृति के लगातार विस्तार और खिलाड़ियों को मिल रहे बेहतर प्रशिक्षण तथा आधुनिक खेल सुविधाओं का बड़ा परिणाम मानी जा रही है।

    गुजरात के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वर्ष 2014 में आयोजित 17वें एशियाई खेलों में राज्य से केवल तीन खिलाड़ी ही भारतीय टीम का हिस्सा थे। अब महज एक दशक में यह संख्या तीन गुना बढ़कर नौ पहुंच गई है जो राज्य के खेल विकास की नई तस्वीर पेश करती है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि गुजरात अब केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा बल्कि कई खेलों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।

    भारतीय टीम में चयनित खिलाड़ियों में शूटिंग की स्टार खिलाड़ी इलावेनिल वलारिवन प्रमुख नाम हैं। टेबल टेनिस में हरमीत देसाई मानव ठक्कर और मानुष शाह को जगह मिली है। सॉफ्ट टेनिस में अनिकेत पटेल भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे जबकि तैराकी में आर्यन नेहरा को मौका मिला है। टेनिस में अनुभवी खिलाड़ी अंकिता रैना और वैदेही चौधरी का चयन हुआ है। एथलेटिक्स में धाविका देवयानी झाला भी भारतीय दल का हिस्सा होंगी। वहीं टेनिस खिलाड़ी जील देसाई को रिजर्व खिलाड़ी के रूप में टीम में शामिल किया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि गुजरात के खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन वर्षों से चल रही योजनाबद्ध तैयारी का परिणाम है। राज्य में खेल प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर से पहचानने आधुनिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अनुरूप सुविधाएं विकसित करने पर लगातार काम किया गया है। इसी वजह से अब गुजरात के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।

    राज्य सरकार ने भी इसे गुजरात के लिए गर्व का क्षण बताया है। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात में विश्वस्तरीय खेल संस्कृति विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। खिलाड़ियों को केवल प्रशिक्षण ही नहीं बल्कि बेहतर खेल सुविधाएं आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी का पूरा वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि वे देश का नाम दुनिया भर में रोशन कर सकें।

    उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2030 में गुजरात राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है। इसके लिए विश्वस्तरीय खेल परिसरों और आधुनिक सुविधाओं का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य गुजरात को देश का प्रमुख खेल केंद्र बनाना है जहां से भविष्य में और अधिक खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करें।

    पिछले एक दशक में गुजरात ने ओलंपिक कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई खेलों में अपनी भागीदारी लगातार बढ़ाई है। अब एशियाई खेल 2026 में राज्य के इन खिलाड़ियों से देश को शानदार प्रदर्शन और पदकों की उम्मीद रहेगी।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों का जलवा, प्रीति और जादूमणि की शानदार जीत, मीराबाई और ऋषिकांत ने दिलाए पदक

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों का जलवा, प्रीति और जादूमणि की शानदार जीत, मीराबाई और ऋषिकांत ने दिलाए पदक


    नई दिल्ली । महिलाओं के 54 किलोग्राम वर्ग में भारतीय मुक्केबाज प्रीति ने मलावी की डेबरा मिटेंजे के खिलाफ एकतरफा मुकाबला खेलते हुए रेफरी स्टॉप्स कॉन्टेस्ट के जरिए शानदार जीत हासिल की। मुकाबले की शुरुआत से ही प्रीति पूरी तरह हावी रहीं और उन्होंने अपने सटीक पंचों से प्रतिद्वंद्वी पर लगातार दबाव बनाए रखा। पहले राउंड में सभी जजों ने उन्हें बढ़त दी जबकि दूसरे राउंड में लगातार प्रभावी आक्रमण के कारण रेफरी को मुकाबला बीच में ही रोकना पड़ा। मुकाबले के दौरान डेबरा मिटेंजे दो बार नॉकडाउन भी हुईं। इस शानदार जीत के साथ प्रीति ने क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया जहां उनका मुकाबला नॉर्दर्न आयरलैंड की निकोल क्लाइड से होगा। यह मुकाबला सेमीफाइनल में पहुंचने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

    पुरुषों के 55 किलोग्राम वर्ग में भारत के जादूमणि सिंह ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान के रहमान को 5-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल का टिकट हासिल किया। पहले राउंड में मामूली बढ़त लेने के बाद उन्होंने दूसरे राउंड में पूरी तरह दबदबा कायम कर लिया और सभी जजों से पूरे अंक हासिल किए। इससे पहले जादूमणि ने शुरुआती मुकाबले में स्कॉटलैंड के एरॉन कुलेन को भी 5-0 से हराया था। लगातार दूसरी शानदार जीत के बाद उनसे पदक की उम्मीद और मजबूत हो गई है।

    बॉक्सिंग के अलावा वेटलिफ्टिंग में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने कुल 190 किलोग्राम भार उठाते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरी बार गोल्ड मेडल अपने नाम किया। मीराबाई ने स्नैच में 85 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 105 किलोग्राम वजन उठाकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय दल का मनोबल और ऊंचा कर दिया।

    वहीं पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में ऋषिकांत सिंह चनंबम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। उन्होंने कुल 264 किलोग्राम वजन उठाया जिसमें स्नैच में 121 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 143 किलोग्राम का सफल प्रयास शामिल रहा। उनके इस प्रदर्शन ने भारत के पदकों की संख्या में महत्वपूर्ण इजाफा किया।

    भारतीय खिलाड़ियों की इन लगातार सफलताओं से कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में देश की पदक उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं। अब सभी की नजरें बॉक्सिंग के आगामी मुकाबलों और अन्य स्पर्धाओं पर टिकी हैं जहां भारतीय खिलाड़ी एक बार फिर देश के लिए पदक जीतने के इरादे से उतरेंगे।

  • ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में दर्दनाक हादसा, हाई बार स्पर्धा के दौरान गंभीर रूप से चोटिल हुए ब्रिटिश जिम्नास्ट

    ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में दर्दनाक हादसा, हाई बार स्पर्धा के दौरान गंभीर रूप से चोटिल हुए ब्रिटिश जिम्नास्ट

    नई दिल्ली । ग्लास्गो में आयोजित हो रहे राष्ट्रमंडल खेल 2026 के जिम्नास्टिक पुरुष टीम फाइनल मुकाबले के दौरान एक बेहद गंभीर और भयावह हादसा देखने को मिला। ब्रिटेन के उन्नीस वर्षीय युवा जिम्नास्ट गेब्रियल लैंगटन हाई बार स्पर्धा में अपना प्रदर्शन प्रस्तुत कर रहे थे, तभी अचानक ग्रिप छूट जाने के कारण वे बेहद अनियंत्रित होकर सिर के बल सीधे फ्लोर पर गिर पड़े। इस अचानक घटी घटना के बाद एरिना में मौजूद दर्शक, कोच और साथी खिलाड़ी स्तब्ध रह गए और परिसर में कुछ देर के लिए गहरा सन्नाटा छा गया।

    घटना के तुरंत बाद आयोजन स्थल पर मौजूद मेडिकल टीम ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मोर्चा संभाला। चोटिल खिलाड़ी जमीन से उठने में पूरी तरह असमर्थ थे, जिसके बाद डॉक्टरों ने मौके पर ही प्राथमिक उपचार शुरू किया। खिलाड़ी की गर्दन और रीढ़ की हड्डी को सुरक्षित रखने के लिए विशेष मेडिकल सपोर्ट लगाया गया और उन्हें तुरंत स्ट्रेचर के जरिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। इस गंभीर आपात स्थिति के कारण प्रतियोगिता को कुछ समय के लिए रोक देना पड़ा।

    चिकित्सकीय जांच और अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के बाद खिलाड़ी पूरी तरह होश में आ गए थे और डॉक्टरों से संवाद कर रहे थे। उनके सिर और रीढ़ की हड्डी के कई विस्तृत स्कैन और परीक्षण किए गए, जिनकी रिपोर्ट सकारात्मक आई है। किसी भी प्रकार की गंभीर या जानलेवा आंतरिक चोट की पुष्टि न होने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी, जिसके बाद वे अपनी टीम के पास वापस लौट आए हैं जहां डॉक्टरों की देखरेख जारी है।

    इस दुर्घटना के कारण प्रतियोगिता में भाग ले रहे अन्य खिलाड़ियों के मनोबल पर गहरा असर पड़ा। इसके बावजूद टीमों ने अपने खेल को आगे बढ़ाया और फाइनल मुकाबला पूरा किया। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक कनाडा की टीम ने अपने नाम किया, जबकि पूर्व विजेता ब्रिटेन को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। ऑस्ट्रेलियाई दल ने इस मुकाबले में तीसरा स्थान हासिल कर कांस्य पदक पर कब्जा जमाया।

    खेल विशेषज्ञों और साथी एथलीटों ने इस घटना के बाद कहा कि जिम्नास्टिक एक अत्यधिक जोखिम भरा और कठिन खेल है, जिसमें मामूली सी चूक भी गंभीर परिणाम ला सकती है। हालांकि खिलाड़ी की स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है और उनके शीघ्र पूर्ण स्वस्थ होने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • श्रीलंका दौरे से पहले भारतीय टेस्ट टीम के प्रमुख खिलाड़ियों की चोटों ने बढ़ाई चयनकर्ताओं की चिंताएं

    श्रीलंका दौरे से पहले भारतीय टेस्ट टीम के प्रमुख खिलाड़ियों की चोटों ने बढ़ाई चयनकर्ताओं की चिंताएं


    नई दिल्ली ।
    अगस्त माह से श्रीलंका के खिलाफ शुरू होने वाली दो मैचों की टेस्ट श्रृंखला से ठीक पहले भारतीय क्रिकेट टीम की चुनौतियां बढ़ती नजर आ रही हैं। आगामी दौरे के लिए टीम की घोषणा से पूर्व कई महत्वपूर्ण खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पांच प्रमुख खिलाड़ियों के चोटिल होने या पूरी तरह से फिट न होने के कारण टीम प्रबंधन और कप्तान के सामने सही संयोजन तैयार करने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, तेज गेंदबाज हर्षित राणा और उभरते हुए ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी चोट के कारण श्रीलंका दौरे के लिए चयन प्रक्रिया से बाहर हो चुके हैं। इन दोनों युवा खिलाड़ियों की अनुपस्थिति टीम के संतुलन के लिहाज से एक बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि दोनों ने ही हालिया समय में अपने हरफनमौला प्रदर्शन से प्रभावित किया था। इनके बाहर होने से तेज गेंदबाजी और ऑलराउंडर विभाग में नए विकल्पों की तलाश बढ़ गई है।

    इसके अतिरिक्त, स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और मध्यक्रम के बल्लेबाज साई सुदर्शन के खेलने पर भी संशय बना हुआ है। दोनों खिलाड़ी इस समय अपनी रिकवरी प्रक्रिया से गुजर रहे हैं और उन्हें अपनी फिटनेस रिपोर्ट प्रस्तुत करने की सलाह दी गई है। राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में चिकित्सा परीक्षण पास करने के बाद ही उनके चयन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि ये खिलाड़ी पूरी तरह से फिट घोषित नहीं होते हैं, तो उन्हें भी इस दौरे से आराम दिया जा सकता है।

    ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर भी पूरी तरह फिट न होने के कारण गाले में आयोजित होने वाले पहले टेस्ट मैच से बाहर रह सकते हैं। हालांकि, दूसरे टेस्ट तक उनकी वापसी की उम्मीद जताई जा रही है, जो उनकी अंतिम फिटनेस रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। दूसरी ओर, टीम के लिए राहत की बात यह है कि अनुभवी ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा की टीम में वापसी लगभग तय मानी जा रही है, जिससे स्पिन विभाग को मजबूती मिलेगी।

    खिलाड़ियों के एक साथ चोटिल होने के कारण चयनकर्ताओं को अब नए और युवा चेहरों को मौका देने पर विचार करना पड़ सकता है। आगामी दिनों में होने वाले वार्म-अप मैच और फिटनेस रिपोर्ट के आधार पर ही श्रृंखला के लिए अंतिम भारतीय दल की तस्वीर साफ हो पाएगी।