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  • बारिश ने छीनी भारत की जीत की उम्मीद अभिषेक और श्रेयस की शानदार पारियां भी नहीं दिला सकीं नतीजा

    बारिश ने छीनी भारत की जीत की उम्मीद अभिषेक और श्रेयस की शानदार पारियां भी नहीं दिला सकीं नतीजा


    नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी20 श्रृंखला का पहला मुकाबला रोमांचक होने से पहले ही बारिश की भेंट चढ़ गया। चेस्टर ले स्ट्रीट में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट पर 189 रन का मजबूत स्कोर बनाया था लेकिन लगातार बारिश और गीले मैदान के कारण इंग्लैंड अपनी पारी शुरू भी नहीं कर सका। काफी देर तक मौसम साफ होने का इंतजार किया गया लेकिन हालात में सुधार नहीं होने पर अंपायरों ने मैच को बिना किसी परिणाम के समाप्त घोषित कर दिया। इस तरह श्रेयस अय्यर और अभिषेक शर्मा की शानदार पारियां भी टीम को जीत नहीं दिला सकीं।

    भारतीय टीम की शुरुआत हालांकि बेहद खराब रही। दूसरे ही ओवर में संजू सैमसन केवल एक रन बनाकर आउट हो गए जबकि ईशान किशन बिना खाता खोले रन आउट हो गए। शुरुआती झटकों के बाद ऐसा लग रहा था कि भारत बड़े स्कोर तक नहीं पहुंच पाएगा लेकिन अभिषेक शर्मा और कप्तान श्रेयस अय्यर ने जिम्मेदारी संभालते हुए शानदार साझेदारी की और टीम को मुकाबले में वापस ला दिया।

    अभिषेक शर्मा ने एक बार फिर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी का परिचय दिया। उन्होंने केवल 24 गेंदों में 59 रन की विस्फोटक पारी खेली जिसमें छह चौके और चार शानदार छक्के शामिल रहे। उन्होंने मात्र 20 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और इंग्लैंड के गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। उनकी यह पारी भारतीय पारी की सबसे बड़ी ताकत साबित हुई।

    दूसरे छोर पर कप्तान श्रेयस अय्यर ने संयम और आक्रामकता का शानदार संतुलन दिखाया। उन्होंने 47 गेंदों में 68 रन बनाए जिसमें छह चौके और एक छक्का शामिल था। उन्होंने 38 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और मध्यक्रम को मजबूती प्रदान की। उनके आउट होने के बाद शिवम दुबे ने तेजी से रन जुटाते हुए केवल 21 गेंदों में नाबाद 42 रन बनाए और भारत का स्कोर 189 रन तक पहुंचा दिया। इंग्लैंड की ओर से साकिब महमूद सबसे सफल गेंदबाज रहे जिन्होंने तीन विकेट अपने नाम किए।

    भारत के 190 रन के लक्ष्य का पीछा करने के लिए इंग्लैंड मैदान पर उतर ही नहीं पाया। लगातार होती बारिश के कारण पूरा मैदान कवर से ढका रहा और ग्राउंड स्टाफ की तमाम कोशिशों के बावजूद खेल दोबारा शुरू नहीं हो सका। कट ऑफ समय तक भी परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने पर मैच अधिकारियों ने मुकाबला रद्द करने का फैसला लिया।

    इस मुकाबले में एक बार फिर युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं मिला। आयरलैंड दौरे के बाद इंग्लैंड श्रृंखला के पहले मैच में भी उनका डेब्यू टलने से प्रशंसकों में निराशा देखने को मिली। अब उम्मीद की जा रही है कि आगामी मुकाबलों में टीम प्रबंधन उन्हें मौका दे सकता है।

    बारिश के कारण भले ही पहला मुकाबला बेनतीजा रहा लेकिन भारतीय बल्लेबाजों की लय टीम के लिए सकारात्मक संकेत है। अब दोनों टीमें मैनचेस्टर में होने वाले दूसरे टी20 मुकाबले की तैयारी करेंगी जहां श्रृंखला की पहली जीत हासिल करने के लिए दोनों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

  • अभिषेक शर्मा का तूफानी कमाल सबसे तेज 100 टी20 अंतरराष्ट्रीय छक्के जड़कर रचा विश्व रिकॉर्ड

    अभिषेक शर्मा का तूफानी कमाल सबसे तेज 100 टी20 अंतरराष्ट्रीय छक्के जड़कर रचा विश्व रिकॉर्ड


    नई दिल्ली । भारतीय टीम के विस्फोटक सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने इंग्लैंड के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में ऐसी तूफानी बल्लेबाजी की जिसने न केवल मैच का रुख बदल दिया बल्कि उन्हें विश्व क्रिकेट के रिकॉर्ड बुक में भी खास जगह दिला दी। चेस्टर ले स्ट्रीट में खेले गए मुकाबले में अभिषेक ने महज 24 गेंदों पर 59 रन की विस्फोटक पारी खेली और इसी दौरान टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम गेंदों में 100 छक्के पूरे करने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

    अभिषेक ने अपनी पारी के दौरान छह चौके और चार शानदार छक्के लगाए। उन्होंने केवल 20 गेंदों में अर्धशतक पूरा कर इंग्लैंड के गेंदबाजों पर शुरुआत से ही दबाव बना दिया। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी की बदौलत भारत को तेज शुरुआत मिली और विपक्षी टीम पूरी तरह बैकफुट पर पहुंच गई। हालांकि उनकी पारी का अंत सैम करन ने एलबीडब्ल्यू आउट कर किया लेकिन तब तक वह अपनी बल्लेबाजी से इतिहास रच चुके थे।

    इस पारी के दौरान अभिषेक शर्मा ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने 100 छक्के पूरे किए। सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने इस उपलब्धि तक पहुंचने के लिए केवल 785 गेंदों का सामना किया जो किसी भी फुल मेंबर देश के बल्लेबाज द्वारा बनाया गया सबसे तेज रिकॉर्ड है। इससे पहले यह रिकॉर्ड वेस्टइंडीज के विस्फोटक बल्लेबाज एविन लुईस के नाम था जिन्होंने 789 गेंदों में 100 छक्के पूरे किए थे। अब अभिषेक ने उन्हें पीछे छोड़ते हुए इस सूची में पहला स्थान हासिल कर लिया है।

    सबसे कम गेंदों में 100 टी20 अंतरराष्ट्रीय छक्के लगाने वाले बल्लेबाजों की सूची में अब अभिषेक शर्मा सबसे ऊपर हैं। उनके बाद एविन लुईस दूसरे स्थान पर हैं जबकि न्यूजीलैंड के फिन एलन ऑस्ट्रेलिया के टिम डेविड न्यूजीलैंड के कॉलिन मुनरो और भारत के सूर्यकुमार यादव क्रमशः अगले स्थानों पर मौजूद हैं। यह रिकॉर्ड इस बात का प्रमाण है कि अभिषेक आधुनिक टी20 क्रिकेट के सबसे आक्रामक बल्लेबाजों में तेजी से अपनी पहचान बना रहे हैं।

    इस उपलब्धि के साथ अभिषेक शर्मा भारत के केवल पांचवें बल्लेबाज भी बन गए हैं जिन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 या उससे अधिक छक्के लगाए हैं। उनसे पहले रोहित शर्मा सूर्यकुमार यादव हार्दिक पंड्या और विराट कोहली यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। इतनी कम गेंदों में यह मुकाम हासिल करना उनकी आक्रामक सोच और निडर बल्लेबाजी का सबसे बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

    पिछले कुछ समय से अभिषेक शर्मा लगातार शानदार फॉर्म में हैं और हर बड़ी टीम के खिलाफ तेजी से रन बना रहे हैं। उनकी बल्लेबाजी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह शुरुआत से ही बड़े शॉट खेलने में विश्वास रखते हैं और विरोधी गेंदबाजों को कभी भी लय में आने का मौका नहीं देते। यही कारण है कि बेहद कम समय में उन्होंने विश्व क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बना ली है।

    अगर अभिषेक शर्मा का यही आक्रामक अंदाज आगे भी जारी रहता है तो आने वाले वर्षों में वह भारत के सबसे सफल टी20 बल्लेबाजों में शामिल हो सकते हैं। कई क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य में वह रोहित शर्मा के सबसे ज्यादा टी20 अंतरराष्ट्रीय छक्कों के रिकॉर्ड को भी चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। फिलहाल इंग्लैंड के खिलाफ उनकी यह पारी भारतीय क्रिकेट के लिए एक नई उम्मीद और विश्व क्रिकेट के लिए एक नया रिकॉर्ड बनकर हमेशा याद रखी जाएगी।

  • आईपीएल में बरसाए रन फिर भी नहीं खुला टीम इंडिया का दरवाजा आखिर कब मिलेगा वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू का मौका

    आईपीएल में बरसाए रन फिर भी नहीं खुला टीम इंडिया का दरवाजा आखिर कब मिलेगा वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू का मौका


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित युवा बल्लेबाजों में शामिल वैभव सूर्यवंशी का अंतरराष्ट्रीय डेब्यू फिलहाल एक बार फिर टल गया है। इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 श्रृंखला के पहले मुकाबले में भी टीम प्रबंधन ने उन्हें अंतिम एकादश में जगह नहीं दी। चेस्टर ले स्ट्रीट में जैसे ही कप्तान श्रेयस अय्यर ने प्लेइंग इलेवन का एलान किया वैसे ही करोड़ों भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों की उम्मीदों को झटका लगा क्योंकि वैभव का नाम उसमें शामिल नहीं था। लगातार दूसरी श्रृंखला में मौका नहीं मिलने के बाद अब यह सवाल और तेज हो गया है कि आखिर इस युवा बल्लेबाज को भारतीय टीम के लिए पदार्पण करने के लिए और कितना इंतजार करना पड़ेगा।

    वैभव सूर्यवंशी पिछले कुछ महीनों से अपने प्रदर्शन के दम पर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। आईपीएल 2026 में उन्होंने राजस्थान रॉयल्स के लिए विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए 16 पारियों में 776 रन बनाए और पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाकर ऑरेंज कैप अपने नाम की। उनका स्ट्राइक रेट भी 237 से अधिक रहा जिसने क्रिकेट विशेषज्ञों को प्रभावित किया। इसके अलावा अंडर 19 विश्व कप में उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया जबकि हाल ही में भारत ए की ओर से खेलते हुए उन्होंने श्रीलंका में त्रिकोणीय श्रृंखला के फाइनल में केवल 29 गेंदों पर 94 रन बनाकर अपनी प्रतिभा का एक और शानदार उदाहरण पेश किया।

    इतने बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिलना लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। इससे पहले आयरलैंड दौरे पर भी उन्हें दोनों टी20 मुकाबलों में बाहर बैठना पड़ा था। उस श्रृंखला में भारतीय शीर्ष क्रम उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका और टीम को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद माना जा रहा था कि इंग्लैंड दौरे पर वैभव को जरूर मौका मिलेगा लेकिन टीम प्रबंधन ने अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा जताना बेहतर समझा।

    क्रिकेट के कई पूर्व दिग्गज पहले ही संकेत दे चुके थे कि वैभव का डेब्यू तुरंत नहीं होगा। उनका मानना था कि टीम प्रबंधन युवा बल्लेबाज को सही समय पर मौका देना चाहता है ताकि उस पर अतिरिक्त दबाव न बने। हालांकि प्रशंसकों का तर्क है कि जब कोई खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट आईपीएल और जूनियर स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहा हो तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का अवसर भी मिलना चाहिए।

    बैटिंग कोच सितांशु कोटक पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अंतिम फैसला मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर की रणनीति के अनुसार लिया जाएगा। ऐसे में यह साफ है कि वैभव को मौका कब मिलेगा इसका फैसला टीम प्रबंधन की योजनाओं पर निर्भर करेगा। फिलहाल भारतीय टीम ने पहले मुकाबले में संजू सैमसन अभिषेक शर्मा ईशान किशन श्रेयस अय्यर तिलक वर्मा शिवम दुबे अक्षर पटेल हर्षित राणा रवि बिश्नोई अर्शदीप सिंह और वरुण चक्रवर्ती के साथ मैदान में उतरने का फैसला किया।

    वैभव सूर्यवंशी के लिए यह इंतजार भले ही लंबा होता जा रहा हो लेकिन उनकी उम्र और प्रदर्शन दोनों यह संकेत देते हैं कि भविष्य पूरी तरह उनके पक्ष में है। यदि वह इसी तरह रन बनाते रहे और अपने खेल में निरंतरता बनाए रखी तो भारतीय टीम में उनका पदार्पण केवल समय की बात होगी। अब सभी की नजरें इंग्लैंड के खिलाफ अगले मुकाबलों पर रहेंगी जहां शायद भारतीय क्रिकेट को अपना नया युवा सितारा पहली बार नीली जर्सी में खेलते हुए देखने का मौका मिल जाए।

  • इंग्लैंड के खिलाफ जीत की नई उम्मीद के साथ उतरेगा भारत, आयरलैंड दौरे की हार भुलाकर लय हासिल करने की चुनौती

    इंग्लैंड के खिलाफ जीत की नई उम्मीद के साथ उतरेगा भारत, आयरलैंड दौरे की हार भुलाकर लय हासिल करने की चुनौती

    नई दिल्ली । आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में मिली निराशाजनक हार के बाद भारतीय टीम अब इंग्लैंड के खिलाफ नई शुरुआत करने के इरादे से मैदान में उतरेगी। पांच मैचों की टी20 सीरीज का पहला मुकाबला बुधवार को डरहम के रिवरसाइड ग्राउंड में खेला जाएगा। इस सीरीज को भारतीय टीम के लिए आत्मविश्वास हासिल करने और पिछली गलतियों से सीख लेकर मजबूत वापसी करने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

    आयरलैंड दौरे पर भारत की बल्लेबाजी उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सकी थी। आक्रामक बल्लेबाजों से सजी टीम बड़े स्कोर बनाने और अहम मौकों पर लंबी साझेदारियां निभाने में असफल रही। परिणामस्वरूप टीम को सीरीज गंवानी पड़ी। अब इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों के सामने अपनी क्षमता साबित करने की चुनौती होगी। टीम प्रबंधन चाहेगा कि बल्लेबाजी क्रम अधिक जिम्मेदारी के साथ खेलते हुए शुरुआत से ही मैच पर पकड़ बनाए।

    नए कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए भी यह सीरीज महत्वपूर्ण मानी जा रही है। घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में सफल नेतृत्व का अनुभव रखने वाले अय्यर अब विदेशी परिस्थितियों में भारतीय टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। इंग्लैंड जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उनकी रणनीति, कप्तानी और खिलाड़ियों का उपयोग टीम के प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाएगा। युवा खिलाड़ियों के साथ संतुलन बनाना भी उनके सामने बड़ी जिम्मेदारी होगी।

    टीम चयन को लेकर भी काफी चर्चा बनी हुई है। युवा सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी पर सभी की निगाहें रहेंगी, जिन्हें आयरलैंड दौरे पर अंतिम एकादश में मौका नहीं मिला था। यदि उन्हें इस मुकाबले में पदार्पण का अवसर मिलता है तो वह भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे युवा क्रिकेटरों में शामिल हो जाएंगे। हालांकि टीम प्रबंधन युवा खिलाड़ियों को जल्दबाजी में आगे बढ़ाने के बजाय उनके दीर्घकालिक विकास पर भी बराबर ध्यान दे रहा है।

    भारतीय गेंदबाजी आक्रमण में अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का अच्छा मिश्रण मौजूद है। तेज गेंदबाज शुरुआती ओवरों में इंग्लैंड के बल्लेबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे, जबकि स्पिन विभाग में विविधता टीम की ताकत मानी जा रही है। मध्य ओवरों में विकेट निकालने की जिम्मेदारी स्पिन गेंदबाजों पर रहेगी, जिससे इंग्लैंड की मजबूत बल्लेबाजी को नियंत्रित किया जा सके।

    दूसरी ओर इंग्लैंड की टीम घरेलू परिस्थितियों का पूरा फायदा उठाने के इरादे से मैदान में उतरेगी। उसके बल्लेबाज तेज शुरुआत करने और बड़े स्कोर खड़े करने की क्षमता रखते हैं। वहीं तेज गेंदबाजी आक्रमण नई गेंद से मिलने वाली सीम मूवमेंट का लाभ उठाकर भारतीय शीर्ष क्रम को शुरुआती झटके देने की कोशिश करेगा। घरेलू मैदान पर इंग्लैंड का रिकॉर्ड भी उसे मनोवैज्ञानिक बढ़त प्रदान करता है।

    यह सीरीज दोनों टीमों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत जहां पिछली हार की निराशा को पीछे छोड़ जीत की राह पर लौटना चाहेगा, वहीं इंग्लैंड घरेलू मैदान पर अपने दबदबे को कायम रखने की कोशिश करेगा। ऐसे में पहले मुकाबले का परिणाम पूरी सीरीज की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। क्रिकेट प्रेमियों की नजरें इस बात पर भी रहेंगी कि भारतीय टीम दबाव से उबरकर किस तरह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करती है और मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ नई शुरुआत को सफल बनाती है।

  • विमेंस टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया का एकतरफा दबदबा, बेथ मूनी के नाबाद अर्धशतक से वेस्टइंडीज को 8 विकेट से दी मात

    विमेंस टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया का एकतरफा दबदबा, बेथ मूनी के नाबाद अर्धशतक से वेस्टइंडीज को 8 विकेट से दी मात

    नई दिल्ली । विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 के पहले सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए वेस्टइंडीज को 8 विकेट से हराकर लगातार अपनी मजबूत दावेदारी साबित की। इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलियाई टीम ने आठवीं बार टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बनाई और एक बार फिर खिताब जीतने की ओर मजबूत कदम बढ़ाया। टीम की जीत में बेथ मूनी की नाबाद अर्धशतकीय पारी निर्णायक साबित हुई, जबकि गेंदबाजों ने भी शुरुआती चरण में वेस्टइंडीज को बड़े स्कोर तक पहुंचने से रोक दिया।

    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी वेस्टइंडीज की शुरुआत संतुलित रही। कप्तान हेली मैथ्यूज और किआना जोसेफ ने पहले विकेट के लिए उपयोगी साझेदारी कर टीम को संभली हुई शुरुआत दिलाई। हालांकि शुरुआती विकेट गिरने के बाद मध्यक्रम ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी के सामने टिक नहीं सका। नियमित अंतराल पर विकेट गिरने से रन गति भी प्रभावित हुई और टीम बड़े स्कोर की ओर नहीं बढ़ सकी।

    मध्यक्रम में शेमेन कैंपबेल ने पारी को संभालने का प्रयास किया, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। अंतिम ओवरों में डिएंड्रा डॉटिन ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए टीम के स्कोर को सम्मानजनक स्थिति तक पहुंचाया। उन्होंने तेज रन बनाते हुए महत्वपूर्ण योगदान दिया और जनिलेया ग्लासगो के साथ उपयोगी साझेदारी निभाई। निर्धारित 20 ओवर में वेस्टइंडीज ने सात विकेट पर 125 रन बनाए।

    ऑस्ट्रेलिया की ओर से गेंदबाजी में सोफी मोलिनक्स, एशले गार्डनर और जॉर्जिया वेयरहैम ने शानदार प्रदर्शन किया। तीनों गेंदबाजों ने दो-दो विकेट लेकर वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी को लगातार दबाव में रखा। एनाबेल सदरलैंड ने भी एक विकेट हासिल कर विपक्षी टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचने से रोकने में अहम भूमिका निभाई।

    126 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम ने शुरुआत से ही सकारात्मक बल्लेबाजी की। शुरुआती विकेट जल्दी गिरने के बावजूद बेथ मूनी ने पारी को पूरी तरह संभाल लिया। उन्होंने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाते हुए लगातार रन बनाए और विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा। उनके साथ एशले गार्डनर ने भी तेज गति से रन जुटाए और दोनों के बीच हुई नाबाद साझेदारी ने मुकाबले को पूरी तरह ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में कर दिया।

    बेथ मूनी ने सिर्फ 36 गेंदों में आठ चौकों की मदद से नाबाद 61 रन की मैच विजयी पारी खेली। वहीं एशले गार्डनर ने 20 गेंदों में 35 रन बनाकर उनका बेहतरीन साथ निभाया। ऑस्ट्रेलिया ने लक्ष्य केवल 13 ओवर में हासिल कर अपनी बल्लेबाजी की गहराई और आक्रामकता का शानदार प्रदर्शन किया। वेस्टइंडीज की ओर से चिनेल हेनरी और हेली मैथ्यूज को एक-एक विकेट मिला, लेकिन वे टीम को मुकाबले में बनाए रखने में सफल नहीं हो सकीं।

    इस प्रभावशाली जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े मुकाबलों में उसका प्रदर्शन लगातार मजबूत रहता है। अब टीम की नजर फाइनल में एक और विश्व खिताब जीतने पर होगी, जबकि वेस्टइंडीज का अभियान सेमीफाइनल में समाप्त हो गया।

  • वेस्टइंडीज दौरे के लिए न्यूजीलैंड की वनडे टीम घोषित, मैथ्यू फिशर को पहली बार मिला मौका; मिशेल सेंटनर संभालेंगे कमान

    वेस्टइंडीज दौरे के लिए न्यूजीलैंड की वनडे टीम घोषित, मैथ्यू फिशर को पहली बार मिला मौका; मिशेल सेंटनर संभालेंगे कमान

    नई दिल्ली । इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में शानदार प्रदर्शन के बाद न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम अब वेस्टइंडीज दौरे की तैयारी में जुट गई है। 12 से 22 जुलाई के बीच खेली जाने वाली पांच मैचों की वनडे सीरीज के लिए न्यूजीलैंड क्रिकेट ने 16 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। टीम की कमान ऑलराउंडर मिशेल सेंटनर को सौंपी गई है, जबकि अनुभवी बल्लेबाज टॉम लैथम विकेटकीपर की भूमिका निभाएंगे।

    घोषित टीम में सबसे अधिक चर्चा तेज गेंदबाज मैथ्यू फिशर के चयन को लेकर है। 28 वर्षीय दाएं हाथ के गेंदबाज को पहली बार न्यूजीलैंड की वनडे टीम में शामिल किया गया है। घरेलू लिस्ट-ए क्रिकेट में उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन का उन्हें इनाम मिला है। फिशर ने अब तक 35 लिस्ट-ए मुकाबलों में 32 विकेट हासिल किए हैं और निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाजी करने की क्षमता भी रखते हैं, जिससे टीम को अतिरिक्त संतुलन मिलने की उम्मीद है।

    टीम में तेज गेंदबाज जैकब डफी की भी वापसी हुई है। उनके अलावा क्रिस्टियन क्लार्क, बेन सियर्स और नाथन स्मिथ तेज गेंदबाजी आक्रमण का हिस्सा होंगे। वहीं स्पिन विभाग की जिम्मेदारी माइकल ब्रेसवेल, जेडन लेनोक्स और डीन फॉक्सक्रॉफ्ट संभालेंगे। बल्लेबाजी क्रम में मार्क चैपमैन, डेरिल मिशेल, हेनरी निकोलस, विल यंग और निक केली जैसे खिलाड़ी टीम को मजबूती देंगे।

    मुख्य कोच रॉब वाल्टर ने मैथ्यू फिशर और जैकब डफी के चयन पर संतोष जताते हुए कहा कि दोनों खिलाड़ियों ने घरेलू क्रिकेट में निरंतर प्रदर्शन के दम पर यह अवसर अर्जित किया है। उनके अनुसार फिशर ने अपनी गेंदबाजी की गति और विविधता पर लगातार काम किया है, जिससे वह पारी के अलग-अलग चरणों में प्रभावी साबित हो सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह दौरा उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की मजबूत शुरुआत साबित होगा।

    कोच ने जैकब डफी की भी सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में सभी प्रारूपों में लगातार प्रभाव छोड़ा है। उनका अनुभव और कौशल टीम के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा और वह गेंदबाजी आक्रमण को अतिरिक्त मजबूती प्रदान करेंगे।

    इस दौरे में न्यूजीलैंड के कई नियमित खिलाड़ी उपलब्ध नहीं रहेंगे। तेज गेंदबाज काइल जैमीसन, मैट हेनरी और विल ओ’रूर्के को कार्यभार प्रबंधन के तहत आराम दिया गया है। वहीं बल्लेबाज डेवोन कॉनवे अपने दूसरे बच्चे के जन्म के कारण इस श्रृंखला से बाहर रहेंगे। स्टार ऑलराउंडर रचिन रवींद्र भी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत मेजर लीग क्रिकेट में भाग लेने के कारण इस दौरे का हिस्सा नहीं होंगे।

    न्यूजीलैंड की टीम नए और अनुभवी खिलाड़ियों के संतुलित संयोजन के साथ वेस्टइंडीज के खिलाफ उतरने जा रही है। चयनकर्ताओं को उम्मीद है कि युवा खिलाड़ियों को मिला यह अवसर भविष्य की टीम निर्माण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जबकि अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी टीम को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद करेगी।

  • फीफा विश्व कप से बाहर होते ही इक्वाडोर में बड़ा फैसला, मेक्सिको से हार के बाद हेड कोच सेबेस्टियन बेकासे ने दिया इस्तीफा

    फीफा विश्व कप से बाहर होते ही इक्वाडोर में बड़ा फैसला, मेक्सिको से हार के बाद हेड कोच सेबेस्टियन बेकासे ने दिया इस्तीफा

    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में मेक्सिको के हाथों राउंड ऑफ 32 में मिली हार के बाद इक्वाडोर फुटबॉल टीम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। टीम के मुख्य कोच सेबेस्टियन बेकासे ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि विश्व कप में तय लक्ष्य हासिल नहीं हो सके, इसलिए पद छोड़ना उचित निर्णय है। उनके अनुसार विश्व कप अभियान की समाप्ति के साथ ही उनका अनुबंध भी समाप्त होना था और इसी कारण उन्होंने अपने कार्यकाल का समापन करने का फैसला लिया।

    मेक्सिको के खिलाफ खेले गए नॉकआउट मुकाबले में इक्वाडोर को 2-0 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ टीम का विश्व कप अभियान समाप्त हो गया। मैच के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में बेकासे ने कहा कि वह इक्वाडोर फुटबॉल महासंघ और उसके नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर दिया। उन्होंने खिलाड़ियों, सहयोगी स्टाफ और पूरे देश का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह उनके लिए यादगार अनुभव रहा और टीम के साथ बिताया गया समय हमेशा विशेष रहेगा।

    कोच ने स्वीकार किया कि नॉकआउट मुकाबले में मेक्सिको ने हर विभाग में बेहतर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि उनकी टीम अपने स्वाभाविक खेल का स्तर नहीं दिखा सकी और प्रतिद्वंद्वी जीत का हकदार था। उनके अनुसार विश्व कप जैसे बड़े मंच पर छोटी-छोटी गलतियां भी भारी पड़ती हैं और इस मुकाबले में टीम अपेक्षित प्रदर्शन करने में सफल नहीं रही।

    सेबेस्टियन बेकासे ने अगस्त 2024 में इक्वाडोर की जिम्मेदारी संभाली थी। उस समय टीम दक्षिण अमेरिकी क्वालीफाइंग अभियान में कठिन दौर से गुजर रही थी। उनके नेतृत्व में इक्वाडोर ने शानदार वापसी करते हुए क्वालीफाइंग तालिका में अर्जेंटीना के बाद दूसरा स्थान हासिल किया। टीम ने पूरे अभियान में मजबूत रक्षात्मक प्रदर्शन किया और 18 क्वालीफाइंग मुकाबलों में केवल पांच गोल खाए। इस दौरान उसने कोलंबिया, उरुग्वे और ब्राजील जैसी मजबूत टीमों से बेहतर प्रदर्शन कर अपनी क्षमता का परिचय दिया।

    बेकासे के कार्यकाल का रिकॉर्ड भी संतुलित और प्रभावशाली रहा। उनके नेतृत्व में इक्वाडोर ने 24 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में नौ जीत दर्ज की, 12 मैच ड्रॉ रहे और केवल तीन मुकाबलों में हार मिली। विश्व कप से पहले टीम लगातार 19 मैचों तक अपराजित रही थी, जिससे उससे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं।

    विश्व कप अभियान की शुरुआत हालांकि उम्मीद के अनुरूप नहीं रही। शुरुआती मुकाबले में आइवरी कोस्ट से हार और कुराकाओ के खिलाफ ड्रॉ के बाद टीम की आलोचना हुई। इसके बावजूद इक्वाडोर ने अंतिम ग्रुप मैच में जर्मनी को 2-1 से हराकर शानदार वापसी की और सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों में शामिल होकर राउंड ऑफ 32 में जगह बनाई। टीम की इस उपलब्धि पर इक्वाडोर सरकार ने राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा भी की थी।

    हालांकि नॉकआउट चरण में मेक्सिको के खिलाफ हार के साथ अभियान समाप्त हो गया और इसके तुरंत बाद मुख्य कोच ने पद छोड़ने का फैसला लिया। अब इक्वाडोर फुटबॉल महासंघ के सामने नए मुख्य कोच की नियुक्ति और आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए टीम की नई रणनीति तैयार करने की चुनौती होगी।

  • रणनीति, संयम और दमदार बल्लेबाजी से ऑस्ट्रेलिया फाइनल में, शिखा पांडे ने गिनाईं जीत की बड़ी वजहें

    रणनीति, संयम और दमदार बल्लेबाजी से ऑस्ट्रेलिया फाइनल में, शिखा पांडे ने गिनाईं जीत की बड़ी वजहें

    नई दिल्ली । महिला टी20 विश्व कप 2026 के पहले सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने वेस्टइंडीज को आठ विकेट से हराकर एक बार फिर अपनी मजबूत दावेदारी साबित कर दी। मुकाबले के बाद भारत की पूर्व तेज गेंदबाज शिखा पांडे ने ऑस्ट्रेलियाई टीम की रणनीति, अनुशासित बल्लेबाजी और परिस्थितियों के अनुसार खुद को तेजी से ढालने की क्षमता को इस जीत का सबसे बड़ा कारण बताया। उनका मानना है कि ऑस्ट्रेलिया ने मैच के हर अहम मोड़ पर बेहतर फैसले लिए और इसी वजह से वह रिकॉर्ड आठवीं बार टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने में सफल रहा।

    शिखा पांडे ने विशेष रूप से सलामी बल्लेबाज बेथ मूनी की बल्लेबाजी की सराहना की। उन्होंने कहा कि मूनी की सबसे बड़ी ताकत केवल रन बनाना नहीं, बल्कि गेंदबाजों की लाइन और लेंथ को लगातार बिगाड़ना है। क्रीज पर उनकी मूवमेंट, फील्ड के अनुसार शॉट चयन और विकेटों के बीच तेज दौड़ उन्हें महिला क्रिकेट की सबसे चुनौतीपूर्ण बल्लेबाजों में शामिल करती है। उनके अनुसार, मूनी बिना अनावश्यक जोखिम उठाए तेजी से स्कोर बढ़ाने की कला में माहिर हैं और यही उनकी सबसे बड़ी विशेषता है।

    पूर्व भारतीय गेंदबाज ने कहा कि मूनी की 36 गेंदों में 61 रन की पारी इस बात का उदाहरण है कि कोई बल्लेबाज बिना आक्रामक दिखे भी किस तरह मैच पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित कर सकता है। उन्होंने कहा कि अनुभवी खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं का संतुलित संयोजन ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है। बेथ मूनी के साथ जॉर्जिया वोल और फोएबे लिचफील्ड जैसी युवा बल्लेबाजों की मौजूदगी टीम को मजबूत आधार देती है।

    शिखा पांडे ने एश्ले गार्डनर की पारी को भी निर्णायक बताया। उनके मुताबिक गार्डनर ने परिस्थितियों के अनुरूप बल्लेबाजी करते हुए बड़े शॉट खेलने की जल्दबाजी नहीं दिखाई। उन्होंने फील्ड में मौजूद खाली स्थानों का प्रभावी इस्तेमाल किया, स्ट्राइक रोटेट की और विकेटों के बीच शानदार दौड़ लगाकर दबाव लगातार वेस्टइंडीज पर बनाए रखा। ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों ने एक-एक रन को दो रन में बदलने की कोशिश की, जिससे विपक्षी टीम पर अतिरिक्त दबाव बना।

    उन्होंने वेस्टइंडीज की रणनीतिक गलतियों का भी उल्लेख किया। शिखा के अनुसार गेंदबाजी में बदलाव के दौरान कुछ फैसले टीम के खिलाफ गए। विशेष रूप से जहजारा क्लैक्सटन को पावरप्ले के महत्वपूर्ण चरण में गेंदबाजी सौंपना महंगा साबित हुआ, क्योंकि उस ओवर में ऑस्ट्रेलिया ने तेजी से रन बटोरकर मैच का रुख अपनी ओर मोड़ लिया। उनका कहना था कि छोटे लक्ष्य का बचाव करते समय शुरुआती ओवरों में अतिरिक्त रन देना किसी भी टीम के लिए नुकसानदायक साबित होता है।

    पूर्व तेज गेंदबाज ने यह भी कहा कि वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी काफी हद तक कप्तान हेली मैथ्यूज पर निर्भर दिखाई दी। शुरुआती बल्लेबाजों के संघर्ष और मध्यक्रम पर बढ़ते दबाव का ऑस्ट्रेलिया ने पूरा फायदा उठाया। जैसे ही ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को पिच से स्पिन और अतिरिक्त मदद मिलने लगी, उन्होंने अपनी रणनीति में तुरंत बदलाव किया। कप्तान सोफी मोलिनक्स ने भी गेंदबाजी संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए विपक्षी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

    सेमीफाइनल मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज ने निर्धारित 20 ओवर में सात विकेट पर 125 रन बनाए। जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने केवल 13 ओवर में दो विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलियाई टीम ने रिकॉर्ड आठवीं बार महिला टी20 विश्व कप के फाइनल में प्रवेश कर अपनी लगातार सफलता और बड़े मैचों में दबदबा एक बार फिर साबित कर दिया।

  • भारत बनाम इंग्लैंड टी20 सीरीज का आगाज आज श्रेयस अय्यर की टीम के सामने जीत की चुनौती जानें पूरी लाइव स्ट्रीमिंग डिटेल

    भारत बनाम इंग्लैंड टी20 सीरीज का आगाज आज श्रेयस अय्यर की टीम के सामने जीत की चुनौती जानें पूरी लाइव स्ट्रीमिंग डिटेल


    नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का रोमांच बुधवार से शुरू होने जा रहा है। दोनों टीमों के बीच पहला मुकाबला इंग्लैंड के चेस्टर ली स्ट्रीट स्थित रिवरसाइड ग्राउंड में खेला जाएगा। भारतीय टीम हाल ही में आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज गंवाने के बाद मैदान पर उतर रही है ऐसे में कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुआई में टीम इंडिया की कोशिश जीत के साथ नई शुरुआत करने की होगी। वहीं मेजबान इंग्लैंड अपने घरेलू हालात का पूरा फायदा उठाकर सीरीज में बढ़त हासिल करना चाहेगा।

    इस मुकाबले से पहले सबसे ज्यादा चर्चा युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर हो रही है। 15 वर्षीय प्रतिभाशाली खिलाड़ी के अंतरराष्ट्रीय टी20 डेब्यू का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है लेकिन टीम प्रबंधन के संकेत बताते हैं कि पहले मुकाबले में उन्हें मौका मिलना आसान नहीं होगा। आयरलैंड दौरे पर भी उन्हें अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली थी जबकि सूर्यांश शेडगे और प्रिंस यादव को डेब्यू का अवसर दिया गया था। ऐसे में एक बार फिर यह सवाल बना हुआ है कि क्या वैभव को इंतजार करना पड़ेगा या टीम कोई बड़ा फैसला लेगी।

    भारतीय बल्लेबाजी पिछले कुछ समय से कठिन और तेज पिचों पर संघर्ष करती नजर आई है। इंग्लैंड की परिस्थितियां भी आयरलैंड जैसी मानी जा रही हैं जहां गेंदबाजों को अतिरिक्त उछाल और स्विंग मिलती है। ऐसे में भारतीय बल्लेबाजों को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा। इंग्लैंड के पास जोफ्रा आर्चर जोश टंग साकिब महमूद और सोनी बेकर जैसे तेज गेंदबाज हैं जबकि स्पिन विभाग में आदिल रशीद और रेहान अहमद जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूद हैं जो किसी भी बल्लेबाजी क्रम को परेशानी में डाल सकते हैं।

    रिवरसाइड ग्राउंड की पिच भी गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती है। यहां खेले गए टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में औसत स्कोर करीब 138 रन रहा है जबकि सर्वोच्च स्कोर 195 रन का है। ऐसे आंकड़े बताते हैं कि बल्लेबाजों को शुरुआत से ही संभलकर खेलना होगा और छोटी गलतियां भी भारी पड़ सकती हैं।

    श्रेयस अय्यर के लिए यह सीरीज काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि लगातार दूसरी टी20 सीरीज हारने से टीम पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर इंग्लैंड अपनी मजबूत गेंदबाजी और घरेलू परिस्थितियों के दम पर सीरीज का विजयी आगाज करना चाहेगा। ऐसे में पहले मुकाबले में दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने की पूरी उम्मीद है।

    भारत और इंग्लैंड के बीच पहला टी20 मुकाबला भारतीय समयानुसार रात 10 बजे शुरू होगा जबकि टॉस रात 9 बजकर 30 मिनट पर होगा। मुकाबले का सीधा प्रसारण सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के चैनलों पर किया जाएगा जबकि लाइव स्ट्रीमिंग सोनीलिव एप पर उपलब्ध रहेगी। क्रिकेट प्रशंसकों को एक रोमांचक मुकाबले की उम्मीद है जहां दोनों टीमें जीत के साथ सीरीज की शुरुआत करने के इरादे से मैदान में उतरेंगी।

  • फीफा विश्व कप 2026 में एल्डोर शोमुरोदोव का बड़ा धमाका ग्रुप स्टेज के बेस्ट गोल की रेस में मेसी और विनीसियस को छोड़ा पीछे

    फीफा विश्व कप 2026 में एल्डोर शोमुरोदोव का बड़ा धमाका ग्रुप स्टेज के बेस्ट गोल की रेस में मेसी और विनीसियस को छोड़ा पीछे


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में जहां दुनिया की नजरें लियोनेल मेसी किलियन एमबाप्पे एरलिंग हालंद और विनीसियस जूनियर जैसे दिग्गज खिलाड़ियों पर टिकी हुई हैं वहीं उज्बेकिस्तान के कप्तान एल्डोर शोमुरोदोव ने अपने शानदार प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया है। भले ही उज्बेकिस्तान की टीम ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ सकी लेकिन उसके कप्तान ने ऐसा गोल दागा जिसने दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों का दिल जीत लिया। फीफा की ओर से आयोजित ग्रुप स्टेज गोल ऑफ द टूर्नामेंट की शुरुआती वोटिंग में शोमुरोदोव का गोल सबसे अधिक पसंद किया गया और उन्होंने मेसी तथा विनीसियस जूनियर जैसे सुपरस्टार खिलाड़ियों को भी पीछे छोड़ दिया।

    डीआर कांगो के खिलाफ ग्रुप स्टेज के आखिरी मुकाबले में शोमुरोदोव ने बेहद कठिन कोण से शानदार लॉब शॉट लगाकर ऐसा गोल किया जिसे पूरे टूर्नामेंट के सबसे खूबसूरत गोलों में शामिल किया जा रहा है। इस गोल को फैंस से 36 प्रतिशत वोट मिले और वह पहले स्थान पर रहे। हैती के विल्सन इसिडोर 26.5 प्रतिशत वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे जबकि बोस्निया और हर्जेगोविना के केरिम अलाजबेगोविच को 24.9 प्रतिशत वोट मिले। इस नतीजे ने यह साबित कर दिया कि शानदार प्रदर्शन किसी बड़े नाम का मोहताज नहीं होता।

    31 वर्षीय एल्डोर शोमुरोदोव का जन्म उज्बेकिस्तान के छोटे से कस्बे जारकुरगान में हुआ था। विश्व कप से पहले उन्होंने कहा था कि वह इस टूर्नामेंट में अपने देश को नई पहचान दिलाना चाहते हैं। भले ही टीम नॉकआउट चरण तक नहीं पहुंच सकी लेकिन उनके इस शानदार गोल ने उज्बेकिस्तान को वैश्विक फुटबॉल मंच पर नई पहचान दिला दी है।

    फीफा ने गोल ऑफ द टूर्नामेंट चुनने के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाई है। सबसे पहले ग्रुप स्टेज के गोलों पर 48 घंटे तक फैंस से वोटिंग कराई गई। इसके बाद राउंड ऑफ 32 राउंड ऑफ 16 क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल के बाद भी इसी तरह मतदान होगा। टूर्नामेंट समाप्त होने के बाद अंतिम वोटिंग के आधार पर पूरे विश्व कप का सर्वश्रेष्ठ गोल चुना जाएगा।

    दूसरी ओर विश्व कप के 20वें दिन भी कई बड़े सितारों ने अपनी चमक बिखेरी। नॉर्वे के स्टार स्ट्राइकर एरलिंग हालंद ने आइवरी कोस्ट के खिलाफ निर्णायक गोल कर अपनी टीम को 2-1 से जीत दिलाई। इस जीत के साथ नॉर्वे पहली बार विश्व कप के नॉकआउट मुकाबले में जीत दर्ज कर राउंड ऑफ 16 में पहुंच गया जहां उसका सामना ब्राजील से होगा। हालंद ने इस टूर्नामेंट में अब तक हर मैच में गोल करने का अपना शानदार रिकॉर्ड भी कायम रखा है।

    उधर फ्रांस के कप्तान किलियन एमबाप्पे ने स्वीडन के खिलाफ दो गोल दागकर अपनी टीम को 3-0 की शानदार जीत दिलाई। एमबाप्पे के विश्व कप करियर में अब 18 गोल हो चुके हैं और वह लियोनेल मेसी के 19 गोल के रिकॉर्ड से सिर्फ एक कदम दूर हैं। इसके साथ ही वह मौजूदा विश्व कप में गोल्डन बूट की दौड़ में भी सबसे आगे निकल चुके हैं। विश्व कप 2026 लगातार नए रिकॉर्ड शानदार मुकाबलों और यादगार गोलों का गवाह बन रहा है और एल्डोर शोमुरोदोव का यह गोल लंबे समय तक फुटबॉल प्रेमियों की यादों में दर्ज रहेगा।