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  • जापान में आयोजित एशियन गेम्स में दिखेगा युवा खिलाड़ियों का जलवा, वैभव सूर्यवंशी और यू जिडी पर टिकी नजरें

    जापान में आयोजित एशियन गेम्स में दिखेगा युवा खिलाड़ियों का जलवा, वैभव सूर्यवंशी और यू जिडी पर टिकी नजरें


    नई दिल्ली ।
    जापान के आइची नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले 20वें एशियन गेम्स में दुनिया भर के युवा खिलाड़ियों का जलवा देखने को मिलेगा। इस बहुखेल प्रतियोगिता में लगभग 15 हजार खिलाड़ी और अधिकारी भाग लेंगे। इस बार प्रतियोगिता में कई बेहद कम उम्र के प्रतिभावान खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने उतर रहे हैं, जिनमें भारत के उभरते क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी और चीन की युवा स्विमिंग स्टार यू जिडी प्रमुख रूप से शामिल हैं।

    भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक की प्रबल दावेदार मानी जा रही है। भारत अपने पिछले खिताब की रक्षा करने के इरादे से मैदान में उतरेगा। भारत की टीम में 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे, जिन्होंने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखते हुए अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से ध्यान खींचा है। एशियाई खेलों में क्रिकेट के सभी मुकाबले जापान में विशेष रूप से तैयार किए गए नए क्रिकेट स्टेडियम में खेले जाएंगे।

    चीन की तैराक यू जिडी प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ियों में से एक होंगी। महज 13 वर्ष की आयु में अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुकीं यू जिडी ने पिछले वर्ष महिलाओं की 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले स्पर्धा में नया एशियाई रिकॉर्ड स्थापित किया था। नागोया खेलों में वह चीन की मजबूत स्विमिंग टीम की ओर से मुख्य दावेदार के रूप में हिस्सा लेंगी। चीन इस बार भी पदक तालिका में शीर्ष पर रहने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेगा।

    टेनिस स्पर्धा में फिलीपींस की 21 वर्षीय खिलाड़ी एलेक्जेंड्रा ईला भी एक बड़े नाम के रूप में चुनौती पेश करेंगी। हाल ही में वाशिंगटन ओपन जीतकर इतिहास रचने वाली ईला के शानदार प्रदर्शन से फिलीपींस में इस खेल के प्रति युवाओं का आकर्षण तेजी से बढ़ा है। उनके भाग लेने से एशियन गेम्स के टेनिस मुकाबलों में कड़ा मुकाबला देखने को मिलने की संभावना जताई जा रही है।

    आयोजकों ने खिलाड़ियों और अधिकारियों के ठहरने के लिए अनोखी व्यवस्था की है। लगभग 4,000 से 5,000 खिलाड़ियों को एक क्रूज शिप में ठहराया जाएगा, जिसमें स्विमिंग पूल, रेस्तरां और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके अलावा नागोया के गार्डन पियर क्षेत्र में विशेष रूप से तैयार किए गए लकड़ी के अस्थायी कंटेनर घरों में भी लगभग 2,000 खिलाड़ियों के रहने का प्रबंध किया गया है। तैराकी और घुड़सवारी जैसे कुछ विशेष मुकाबले टोक्यो में आयोजित किए जाएंगे।

    इस बार प्रतियोगिता में एथलेटिक्स, स्विमिंग, फुटबॉल और कबड्डी के साथ-साथ मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स, पैडल, टेकबॉल और वर्चुअल ताइक्वांडो जैसे नए खेलों को शामिल किया गया है। साथ ही ई-स्पोर्ट्स की भी वापसी हो रही है। मध्य प्रदेश सहित देश भर के खेल प्रेमी इन ऐतिहासिक खेलों में भारतीय दल और विशेषकर युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर अपनी नजरें जमाए हुए हैं।

  • टेस्ट रैंकिंग में बड़ा उलटफेर, हैरी ब्रूक नंबर वन पर लौटे; शांतो करियर की सर्वश्रेष्ठ 20वीं रैंकिंग पर

    टेस्ट रैंकिंग में बड़ा उलटफेर, हैरी ब्रूक नंबर वन पर लौटे; शांतो करियर की सर्वश्रेष्ठ 20वीं रैंकिंग पर


    नई दिल्ली। आईसीसी की ताजा पुरुष टेस्ट प्लेयर रैंकिंग में इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज हैरी ब्रूक ने एक बार फिर शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है। ब्रूक ने ऑस्ट्रेलिया के ट्रेविस हेड को पीछे छोड़ते हुए टेस्ट बल्लेबाजों की रैंकिंग में नंबर-1 का ताज अपने नाम किया है। यह चौथी बार है जब ब्रूक टेस्ट बल्लेबाजी रैंकिंग में दुनिया के शीर्ष बल्लेबाज बने हैं। वह पहली बार दिसंबर 2024 में इस मुकाम पर पहुंचे थे। ताजा बदलाव के बाद शीर्ष चार बल्लेबाजों के बीच मुकाबला बेहद करीबी हो गया है और आने वाले टेस्ट मैचों के बाद रैंकिंग में फिर बदलाव देखने को मिल सकता है।

    ट्रेविस हेड के लिए बांग्लादेश के खिलाफ डार्विन टेस्ट का प्रदर्शन काफी महंगा साबित हुआ। ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ने मुकाबले की पहली पारी में 22 रन और दूसरी पारी में 17 रन बनाए। ऑस्ट्रेलिया को इस मुकाबले में बांग्लादेश के हाथों नौ विकेट से हार का सामना करना पड़ा। इसी नतीजे और व्यक्तिगत प्रदर्शन के बाद हेड तीन पायदान नीचे खिसककर चौथे स्थान पर पहुंच गए। उनकी जगह इंग्लैंड के जो रूट दूसरे और ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। स्मिथ ने बांग्लादेश के खिलाफ 71 और 44 रन की पारियां खेली थीं।

    ताजा रैंकिंग में ब्रूक 852 रेटिंग अंकों के साथ पहले स्थान पर हैं जबकि जो रूट 840 अंकों के साथ दूसरे पायदान पर हैं। स्टीव स्मिथ 833 अंक लेकर तीसरे और ट्रेविस हेड 819 अंक के साथ चौथे स्थान पर हैं। यानी नंबर-1 से नंबर-4 तक के बल्लेबाजों के बीच सिर्फ 33 रेटिंग अंकों का अंतर है। ऐसे में इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच चल रही टेस्ट सीरीज तथा ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के दूसरे टेस्ट के बाद शीर्ष क्रम में फिर बड़ा बदलाव संभव है।

    इस रैंकिंग अपडेट में बांग्लादेश के खिलाड़ियों को भी ऐतिहासिक जीत का बड़ा फायदा मिला है। ऑस्ट्रेलिया को हराकर चर्चा में आए बांग्लादेश के कप्तान नजमुल हुसैन शांतो ने नौ पायदान की छलांग लगाई है। वह अब अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ 20वीं रैंकिंग पर पहुंच गए हैं। शांतो ने डार्विन टेस्ट की पहली पारी में 84 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली थी। उनकी इस पारी ने बांग्लादेश की ऐतिहासिक जीत की नींव मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

    बांग्लादेश के लिए सिर्फ शांतो ही नहीं बल्कि कई अन्य खिलाड़ियों की रैंकिंग में भी बड़ा सुधार हुआ है। मोमिनुल हक पांच स्थान ऊपर चढ़कर 31वें नंबर पर पहुंचे हैं। शादमान इस्लाम 58वें और मेहदी हसन मिराज 59वें स्थान पर पहुंच गए हैं। वहीं तंजीद हसन ने सबसे बड़ी छलांग लगाने वाले बल्लेबाजों में जगह बनाई है और वह 84 पायदान ऊपर पहुंचकर संयुक्त रूप से 88वें स्थान पर आ गए हैं। ऑस्ट्रेलिया के कैमरन ग्रीन भी दूसरी पारी में शतक लगाने के बाद पांच स्थान ऊपर चढ़कर 30वें नंबर पर पहुंचे हैं।

    गेंदबाजों की रैंकिंग में भी बांग्लादेश को शानदार फायदा मिला है। तेज गेंदबाज हसन महमूद ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहली पारी में छह विकेट और मैच में कुल नौ विकेट लेकर 26 पायदान की छलांग लगाई है। वह अब 38वें स्थान पर पहुंच गए हैं। मेहदी हसन मिराज भी तीन स्थान ऊपर चढ़कर 24वें नंबर पर पहुंच गए हैं। वहीं भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह टेस्ट गेंदबाजों की रैंकिंग में नंबर-1 स्थान पर बने हुए हैं।

  • सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने फिर दिखाया दम ईस्ट दिल्ली राइडर्स को 30 रन से हराकर अंकतालिका में मजबूत की बादशाहत

    सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने फिर दिखाया दम ईस्ट दिल्ली राइडर्स को 30 रन से हराकर अंकतालिका में मजबूत की बादशाहत


    नई दिल्ली। दिल्ली प्रीमियर लीग 2026 में सेंट्रल दिल्ली किंग्स का शानदार अभियान लगातार जारी है। मंगलवार को अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में किंग्स ने ईस्ट दिल्ली राइडर्स को 30 रन से शिकस्त देकर टूर्नामेंट में अपनी आठवीं जीत दर्ज की। इस जीत के साथ सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने अंकतालिका में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। टीम ने अब तक खेले 9 मुकाबलों में 8 जीत हासिल की हैं और वह शीर्ष स्थान पर मजबूती से बनी हुई है। दूसरी ओर ईस्ट दिल्ली राइडर्स के लिए यह मुकाबला बेहद निराशाजनक रहा। सीजन में छठी हार के साथ उसकी खिताबी दौड़ खत्म हो गई है।

    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी सेंट्रल दिल्ली किंग्स की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम ने पहले ही ओवर में अपने दोनों सलामी बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिए। मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं और महज 14 रन के स्कोर तक किंग्स ने अपना तीसरा विकेट भी खो दिया। शुरुआती झटकों के बाद केशव डबास और जोंटी सिद्धू ने पारी को संभालने की कोशिश की। दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए 44 गेंदों में 54 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की और टीम को संकट से बाहर निकालने का प्रयास किया।

    केशव डबास 18 रन बनाकर आउट हुए जबकि जोंटी सिद्धू ने 28 गेंदों में 41 रन की उपयोगी पारी खेली। दोनों के जाने के बाद एक बार फिर किंग्स की पारी लड़खड़ाती नजर आई। हालांकि आदित्य भंडारी ने जिम्मेदारी संभाली और मनी ग्रेवाल के साथ 38 रन की साझेदारी की। इसके बाद उन्होंने वंश बेदी के साथ भी 32 रन जोड़कर टीम को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचाया। मनी ग्रेवाल ने 11 रन जबकि वंश बेदी ने 27 रन बनाए। सेंट्रल दिल्ली किंग्स की पूरी टीम 19.5 ओवर में 179 रन पर सिमट गई।

    ईस्ट दिल्ली राइडर्स की ओर से कप्तान सिमरजीत सिंह और रोहित यादव ने गेंदबाजी में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन तीन विकेट हासिल किए। आशीष मीणा रौनक वाघले और मयंक रावत को एक एक विकेट मिला। 180 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ईस्ट दिल्ली राइडर्स की शुरुआत भी अच्छी नहीं रही। पारी की पांचवीं गेंद पर वंश मेहरा केवल एक रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद सुजल सिंह और अर्पिण राणा ने पारी को संभालने की कोशिश की। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 23 गेंदों में 30 रन जोड़े। सुजल 11 गेंदों में 12 रन बनाकर आउट हुए और अगली ही गेंद पर अरुण पुंडीर ने उदय चावला को बिना खाता खोले पवेलियन भेज दिया।

    सिर्फ 32 रन के स्कोर तक ईस्ट दिल्ली राइडर्स अपने तीन विकेट गंवा चुकी थी। यहां से अर्पिण राणा ने पारी को संभाला और मयंक रावत तथा सूर्यांश रैना के साथ उपयोगी साझेदारियां कीं। अर्पिण ने 26 गेंदों में तीन चौकों की मदद से 25 रन बनाए। इसके बाद अंकित कुमार ने मोर्चा संभालते हुए सूर्यांश रैना के साथ छठे विकेट के लिए 23 रन और रौनक वाघले के साथ सातवें विकेट के लिए 20 रन की साझेदारी की। सूर्यांश रैना ने 38 रन का योगदान दिया लेकिन उनकी कोशिशें टीम को जीत तक नहीं पहुंचा सकीं।

    ईस्ट दिल्ली राइडर्स निर्धारित 20 ओवर में सात विकेट खोकर 149 रन ही बना सकी और उसे 30 रन से हार का सामना करना पड़ा। सेंट्रल दिल्ली किंग्स की ओर से गवनीश खुराना ने तीन विकेट लेकर शानदार गेंदबाजी की जबकि अरुण पुंडीर ने दो विकेट हासिल किए। इस जीत के साथ किंग्स ने जहां अंकतालिका में अपनी पकड़ मजबूत की वहीं ईस्ट दिल्ली राइडर्स की खिताबी उम्मीदों पर भी विराम लग गया। वहीं न्यू दिल्ली टाइगर्स भी अंतिम चार की दौड़ से बाहर हो गई है। अब टूर्नामेंट के अगले मुकाबलों में प्लेऑफ की तस्वीर और साफ होती जाएगी।

  • हॉकी विश्व कप में भारत-पाकिस्तान आमने सामने 16 साल बाद वर्ल्ड कप में टक्कर जीत के साथ इतिहास दोहराना चाहेगा भारत

    हॉकी विश्व कप में भारत-पाकिस्तान आमने सामने 16 साल बाद वर्ल्ड कप में टक्कर जीत के साथ इतिहास दोहराना चाहेगा भारत


    नई दिल्ली। हॉकी विश्व कप 2026 में बुधवार को भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला मुकाबला सिर्फ दो चिर प्रतिद्वंद्वी टीमों की भिड़ंत नहीं बल्कि अगले दौर में पहुंचने की जंग भी है। एम्सटेलवीन के वैगनर स्टेडियम में होने वाले इस मुकाबले पर दुनियाभर के हॉकी प्रशंसकों की नजरें टिकी हैं। दोनों पड़ोसी देशों के बीच हॉकी की प्रतिद्वंद्विता लंबे समय से बेहद खास रही है और विश्व कप जैसे बड़े मंच पर दोनों का आमना सामना इस मुकाबले को और रोमांचक बना देता है। भारत और पाकिस्तान की यह भिड़ंत 19 अगस्त को शाम 6:30 बजे भारतीय समयानुसार शुरू होगी।

    भारतीय टीम के लिए यह मुकाबला इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्रुप डी में टीम ने अब तक एक मुकाबला जीता है और एक में हार का सामना किया है। भारत ने टूर्नामेंट की शुरुआत वेल्स के खिलाफ 3-1 की शानदार जीत के साथ की थी। इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ उसे 2-4 से हार झेलनी पड़ी। ऐसे में पाकिस्तान के खिलाफ होने वाला आखिरी ग्रुप मुकाबला टीम इंडिया के लिए आगे की राह तय करने वाला है। भारत की कोशिश होगी कि मजबूत प्रदर्शन के साथ अगले चरण में अपनी जगह पक्की करे।

    दूसरी तरफ पाकिस्तान के लिए मुकाबले की चुनौती और भी बड़ी है। पाकिस्तान ने ग्रुप चरण में अब तक जीत दर्ज नहीं की है और उसकी स्थिति बेहद दबाव वाली है। चार टीमों वाले ग्रुप में भारत के साथ इंग्लैंड वेल्स और पाकिस्तान शामिल हैं। टूर्नामेंट के प्रारूप के मुताबिक ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल करने वाली टीम सीधे अगले चरण में जाएगी जबकि अन्य टीमों को आगे बढ़ने के लिए क्रॉसओवर मुकाबलों का रास्ता अपनाना होगा। इसलिए दोनों टीमों के लिए यह मैच बेहद अहम माना जा रहा है।

    भारत और पाकिस्तान के बीच हॉकी मुकाबलों का इतिहास बेहद पुराना और रोमांचक रहा है। दोनों टीमें जब भी मैदान पर उतरती हैं तो मुकाबले में खेल के साथ भावनाओं का भी खास रंग देखने को मिलता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत का प्रदर्शन पाकिस्तान के खिलाफ काफी मजबूत रहा है। विश्व कप के इतिहास में दोनों टीमें पांच बार आमने सामने आई हैं जिनमें भारत ने तीन मुकाबले जीते हैं जबकि पाकिस्तान को दो मैचों में सफलता मिली है। दोनों टीमों की पिछली विश्व कप भिड़ंत 2010 में हुई थी और उस मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को 4-1 से हराया था।

    भारतीय टीम इस बार भी उसी दबदबे को कायम रखना चाहेगी। कप्तान हरमनप्रीत सिंह के नेतृत्व में टीम ने टूर्नामेंट की शुरुआत जीत के साथ की थी और कप्तान ने वेल्स के खिलाफ दो गोल कर अहम भूमिका निभाई थी। इंग्लैंड के खिलाफ हार के बाद भारतीय टीम अब अपनी गलतियों को सुधारते हुए पाकिस्तान के खिलाफ आक्रामक और संतुलित हॉकी खेलने के इरादे से मैदान में उतर सकती है।

    मुकाबले की खास बात यह भी है कि पाकिस्तान लंबे अंतराल के बाद हॉकी विश्व कप में लौटा है। चार बार का विश्व चैंपियन पाकिस्तान हाल के वर्षों में मुश्किल दौर से गुजरा है लेकिन विश्व कप जैसे बड़े मंच पर उसकी मौजूदगी भारत के मुकाबले को और खास बनाती है। दूसरी ओर भारत लंबे समय से विश्व कप खिताब का इंतजार कर रहा है और 1975 के बाद दूसरी बार ट्रॉफी जीतने का लक्ष्य लेकर मैदान में उतरा है।

    भारत-पाकिस्तान की इस भिड़ंत में सिर्फ तीन अंक या अगले दौर की स्थिति ही दांव पर नहीं होगी बल्कि दोनों टीमों के लिए प्रतिष्ठा भी महत्वपूर्ण होगी। भारत जहां पिछले प्रदर्शन की लय वापस हासिल करना चाहेगा वहीं पाकिस्तान विश्व कप में अपनी वापसी को यादगार बनाने के लिए बड़ा उलटफेर करने की कोशिश करेगा। ऐसे में वैगनर स्टेडियम में होने वाला यह मुकाबला हॉकी प्रशंसकों के लिए रोमांच और दबाव से भरपूर रहने की उम्मीद है।

  • ब्यूटी विद ब्रेन से ग्लैमर गर्ल तक तानिया सचदेव ने चेस की दुनिया में ऐसे बनाई अलग पहचान अर्जुन अवॉर्ड से भी हुईं सम्मानित

    ब्यूटी विद ब्रेन से ग्लैमर गर्ल तक तानिया सचदेव ने चेस की दुनिया में ऐसे बनाई अलग पहचान अर्जुन अवॉर्ड से भी हुईं सम्मानित


    नई दिल्ली। भारतीय शतरंज की दुनिया में तानिया सचदेव एक ऐसा नाम हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा और खूबसूरती दोनों से अलग पहचान बनाई है। उन्हें अक्सर चेस की ग्लैमर गर्ल और ब्यूटी विद ब्रेन के नाम से जाना जाता है। शतरंज की बिसात पर शानदार प्रदर्शन करने के साथ तानिया मॉडलिंग और प्रेजेंटिंग की दुनिया में भी सक्रिय रही हैं। यही वजह है कि उनकी पहचान सिर्फ एक शतरंज खिलाड़ी तक सीमित नहीं रही बल्कि उन्होंने इस खेल को ग्लोबल मंच पर एक अलग अंदाज में पेश करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    तानिया सचदेव का जन्म 20 अगस्त 1986 को दिल्ली में हुआ था। महज छह साल की उम्र में उन्होंने शतरंज की दुनिया में कदम रखा और इस दिमागी खेल की बारीकियां सीखना शुरू कर दिया। शुरुआती दौर में उन्होंने केसी जोशी से प्रशिक्षण लिया। छोटी उम्र में ही उनकी प्रतिभा सामने आने लगी और महज आठ साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतकर यह संकेत दे दिया था कि आने वाले वर्षों में वह भारतीय शतरंज का बड़ा नाम बनने वाली हैं।

    युवा स्तर पर भी तानिया ने शानदार प्रदर्शन जारी रखा। अंडर 12 वर्ग की विश्व युवा शतरंज चैंपियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया। साल 2002 में उन्होंने एशियन जूनियर गर्ल्स चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। इसके बाद 2005 में तानिया विमेंस ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल करने वाली आठवीं भारतीय खिलाड़ी बनीं। उनकी सफलता का सिलसिला यहीं नहीं रुका और उन्होंने लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी मजबूत पहचान बनाई।

    साल 2006 और 2007 में तानिया ने नेशनल महिला प्रीमियर शतरंज चैंपियनशिप का खिताब जीता। 2007 में ही उन्होंने महिला एशियाई शतरंज चैंपियनशिप अपने नाम कर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। 2008 में उन्होंने इंटरनेशनल मास्टर का खिताब हासिल किया। इसके बाद 2015 में रेक्जाविक ओपन में सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी का पुरस्कार उनके नाम रहा। इसी वर्ष एशियन कॉन्टिनेंटल विमेंस रैपिड चेस चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक भी जीता।

    तानिया का शानदार सफर कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में भी जारी रहा। उन्होंने 2016 2018 और 2019 में कॉमनवेल्थ विमेंस चेस चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। सितंबर 2024 में वह उस भारतीय टीम का हिस्सा थीं जिसने शतरंज ओलंपियाड में देश के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता। इस उपलब्धि ने भारतीय शतरंज की दुनिया में उनकी भूमिका को और मजबूत किया।

    शतरंज में देश का नाम रोशन करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन के लिए तानिया सचदेव को 2009 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हालांकि अब वह पहले की तुलना में कम प्रतियोगिताओं में नजर आती हैं लेकिन शतरंज से उनका जुड़ाव लगातार बना हुआ है। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमेंटेटर और प्रेजेंटर के तौर पर भी अपनी पहचान बना चुकी हैं।

    तानिया सचदेव की कहानी उन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो कम उम्र में किसी खेल की शुरुआत करके उसे अपने जीवन का लक्ष्य बना लेते हैं। छह साल की उम्र में शतरंज सीखने से लेकर आठ साल में अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतने और फिर ग्रैंडमास्टर स्तर तक पहुंचने का उनका सफर भारतीय शतरंज की प्रेरणादायक कहानियों में शामिल है। उन्होंने यह साबित किया कि प्रतिभा मेहनत और आत्मविश्वास के साथ खेल की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है।

  • गाले में भारत का दबदबा कायम श्रीलंका 206 रन पर ढेर सुथार ने दूसरी पारी में झटके 6 विकेट सीरीज में 1-0 की बढ़त

    गाले में भारत का दबदबा कायम श्रीलंका 206 रन पर ढेर सुथार ने दूसरी पारी में झटके 6 विकेट सीरीज में 1-0 की बढ़त


    नई दिल्ली। गाले इंटरनेशनल स्टेडियम में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए श्रीलंका को पहले टेस्ट में 165 रन से हरा दिया। पांचवें दिन भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंका की दूसरी पारी को 206 रन पर समेट दिया और इसी के साथ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में भारत ने 1-0 की बढ़त बना ली। भारत की इस बड़ी जीत के सबसे बड़े हीरो युवा बाएं हाथ के स्पिनर मानव सुथार रहे जिन्होंने दूसरी पारी में 55 रन देकर 6 विकेट चटकाए। सुथार ने पूरे मैच में 10 विकेट अपने नाम किए और अपनी गेंदबाजी से श्रीलंकाई बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी।

    श्रीलंका के सामने भारत ने जीत के लिए 372 रन का मुश्किल लक्ष्य रखा था। लक्ष्य का पीछा करने उतरी मेजबान टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और उसके शीर्ष चार बल्लेबाज सिर्फ 47 रन के स्कोर पर पवेलियन लौट गए। इस शुरुआती झटके के बाद श्रीलंका की टीम लगातार दबाव में रही। हालांकि कप्तान धनंजय डी सिल्वा ने 59 रन की जुझारू पारी खेली जबकि पहली पारी में शतक लगाने वाले सोनल दिनुशा ने 84 रन बनाकर कुछ देर तक भारतीय गेंदबाजों का सामना किया। दोनों ने श्रीलंका की उम्मीदों को कुछ समय के लिए जिंदा रखा लेकिन भारत के गेंदबाजों के सामने यह साझेदारी ज्यादा देर नहीं टिक सकी।

    सोनल दिनुशा और धनंजय डी सिल्वा के आउट होते ही श्रीलंका की जीत की बची खुची उम्मीदें भी खत्म हो गईं। पूरी टीम 77.4 ओवर में 206 रन पर सिमट गई। मानव सुथार ने 23.4 ओवर में 55 रन देकर 6 विकेट लिए। उनके अलावा प्रसिद्ध कृष्णा ने 2 विकेट चटकाए जबकि मोहम्मद सिराज और रविंद्र जडेजा को एक एक सफलता मिली। सुथार की शानदार गेंदबाजी ने उन्हें मैच में 10 विकेट दिलाए और वह भारत की जीत के मुख्य सूत्रधार बनकर उभरे।

    इससे पहले भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 462 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था। देवदत्त पडिक्कल ने शानदार 167 रन की पारी खेलकर टीम को मजबूत आधार दिया। उनके अलावा केएल राहुल ने 82 रन बनाए जबकि ध्रुव जुरेल ने 51 रनों का अहम योगदान दिया। बारिश से प्रभावित मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने परिस्थितियों के अनुरूप धैर्य और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाया। पडिक्कल की पारी को भारत की पहली पारी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना गया।

    भारत के 462 रन के जवाब में श्रीलंका की पहली पारी 284 रन पर समाप्त हुई। सोनल दिनुशा ने शानदार शतक लगाकर टीम को संभालने की कोशिश की जबकि निरोशन डिकवेला ने 80 रन बनाए। इसके बावजूद भारतीय गेंदबाज श्रीलंका को बड़ी साझेदारियां बनाने से रोकने में सफल रहे और भारत को पहली पारी में 178 रन की महत्वपूर्ण बढ़त हासिल हुई।

    दूसरी पारी में भारत 193 रन पर ऑलआउट हो गया। ऋषभ पंत ने तेजतर्रार 66 रन की पारी खेलकर भारत की बढ़त को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। भारत की कुल बढ़त के आधार पर श्रीलंका को 372 रन का लक्ष्य मिला लेकिन मेजबान टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी।

    इस जीत के साथ भारत ने दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। अब दोनों टीमों की नजरें दूसरे टेस्ट पर होंगी जो 23 अगस्त से कोलंबो में खेला जाएगा। गाले में मिली इस जीत ने भारत के विश्व टेस्ट चैंपियनशिप अभियान को भी मजबूती दी है। वहीं मानव सुथार के 10 विकेट ने भारतीय क्रिकेट में एक नए स्पिन सितारे के उभरने के संकेत दे दिए हैं।

  • बृजभूषण की संपत्ति पर विनेश फोगाट ने उठाए सवाल, बोलीं- अब पीछे नहीं हटूंगी, सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे

    बृजभूषण की संपत्ति पर विनेश फोगाट ने उठाए सवाल, बोलीं- अब पीछे नहीं हटूंगी, सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे


    नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और पहलवान विनेश फोगाट ने भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को लेकर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। हरियाणा के जींद में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में विनेश ने बृजभूषण को गुंडा और अपराधी बताते हुए सवाल किया कि आखिर ऐसे व्यक्ति को इतना सम्मान क्यों दिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक ताकत और पैसे के प्रभाव का इस्तेमाल महिलाओं के खिलाफ किया गया और भारतीय जनता पार्टी पर बृजभूषण का समर्थन करने का आरोप लगाया।

    विनेश फोगाट ने बृजभूषण के राजनीतिक प्रभाव वाले उत्तर प्रदेश के गोंडा इलाके को लेकर भी कई सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि वहां कई लोगों को परेशान किए जाने और जमीन पर कब्जे से जुड़े सवाल सामने आते रहे हैं। विनेश ने बृजभूषण की संपत्ति और धन के स्रोत पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि इतनी संपत्ति और पैसा कहां से आया। उन्होंने हेलिकॉप्टर से यात्रा और कथित आर्थिक प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि इन सवालों के जवाब सामने आने चाहिए। विनेश ने यह भी कहा कि उनकी लड़ाई आगे सुप्रीम कोर्ट तक ले जाई जाएगी।

    महिला पहलवानों से जुड़े पुराने विवाद का जिक्र करते हुए विनेश ने बृजभूषण पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पैसे और ताकत के दम पर लड़कियों के साथ अत्याचार किया जाता है। विनेश के मुताबिक यही BJP की हकीकत है और पार्टी बृजभूषण का समर्थन कर रही है। हालांकि बृजभूषण इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं और हाल ही में एक अदालत ने उन्हें मामले में बरी किया है।

    विनेश ने 2023 के पहलवान आंदोलन को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उस समय दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने वाले पहलवानों के साथ जिस तरह का पुलिस व्यवहार हुआ था वैसा ही व्यवहार अब प्रदर्शन कर रही बेटियों के साथ देखने को मिला। महिला पहलवानों के आरोपों के बाद 2023 में विनेश फोगाट साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया समेत कई पहलवानों ने विरोध प्रदर्शन किया था। यह आंदोलन भारतीय कुश्ती और खेल प्रशासन को लेकर देशभर में चर्चा का बड़ा मुद्दा बना था।

    विनेश फोगाट ने BJP के राष्ट्रवाद और देशभक्ति के दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि BJP नेताओं को कांग्रेस को देशभक्ति का पाठ पढ़ाने का अधिकार नहीं है। RSS कार्यालयों में लंबे समय तक तिरंगा नहीं फहराए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि आज वही लोग तिरंगा यात्राएं निकाल रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़े कथित शुद्धिकरण विवाद का भी जिक्र किया और सवाल किया कि क्या किसी दलित नेता को किसी स्थान पर जाने का अधिकार नहीं है।

    हरियाणा BJP अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता के कथित बयान को लेकर भी विनेश ने निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि समुदायों को लेकर इस तरह के बयान केवल प्रचार और TRP हासिल करने के लिए दिए जाते हैं। विनेश ने दावा किया कि BJP का समय खत्म हो रहा है और जनता अब ऐसे बयानों का जवाब देगी। उन्होंने कहा कि लोगों की राय लेना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सकारात्मक हिस्सा है और नेताओं को जनता की बात सुननी चाहिए।

    विनेश फोगाट के इन बयानों के बाद बृजभूषण शरण सिंह और BJP को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज होने की संभावना है। 2023 का पहलवान आंदोलन पहले ही भारतीय खेल और राजनीति के बीच रिश्तों को लेकर बड़ा विवाद बन चुका है। अब विनेश के ताजा आरोपों ने इस पुराने विवाद को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर डेविड वॉर्नर को सजा, कोर्ट ने लगाया जुर्माना; कार में इंटरलॉक डिवाइस लगाना होगा

    ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर डेविड वॉर्नर को सजा, कोर्ट ने लगाया जुर्माना; कार में इंटरलॉक डिवाइस लगाना होगा


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज डेविड वॉर्नर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शराब पीकर गाड़ी चलाने के मामले में सिडनी की अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया है। अदालत ने वॉर्नर पर 1500 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही अब उन्हें दोबारा वाहन चलाने के लिए इंटरलॉक डिवाइस से जुड़ी शर्तों का पालन करना होगा। इस मामले में अदालत ने यह भी माना कि घटना के समय वाहन में बच्चे मौजूद थे इसलिए मामला और गंभीर हो गया था।

    यह पूरा मामला 5 अप्रैल 2026 का है। ईस्टर संडे के दिन डेविड वॉर्नर एक वाहन चला रहे थे और सिडनी में रैंडम ब्रेथ-टेस्टिंग साइट के पास पहुंचने से पहले उन्होंने गाड़ी रोक दी थी। इसी दौरान पुलिस की नजर उन पर गई। जांच में उनके शरीर में अल्कोहल की मात्रा कानूनी सीमा से दोगुने से भी ज्यादा पाई गई। इसके बाद उन पर मिड-रेंज ड्रिंक-ड्राइविंग का आरोप लगाया गया।

    मामले की सुनवाई के दौरान वॉर्नर ने पिछले महीने अदालत में ड्रिंक-ड्राइविंग के आरोप को स्वीकार कर लिया था। इसके बाद अदालत ने अंतिम सजा के लिए 18 अगस्त की तारीख तय की थी। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने घटना से जुड़े कई पहलू रखे गए और अंत में जज क्लेयर फॉर्नन ने वॉर्नर को दोषी मानते हुए जुर्माने की सजा सुनाई।

    इस मामले में एक अहम बात यह भी सामने आई कि रैंडम ब्रेथ टेस्टिंग साइट के पास पहुंचने से पहले वॉर्नर ने कथित तौर पर वाहन में मौजूद एक यात्री के साथ सीट बदलने की कोशिश की थी। पुलिस जांच के बाद उन पर शराब पीकर गाड़ी चलाने का मामला दर्ज किया गया। अदालत ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और खास तौर पर इस बात को ध्यान में रखा कि घटना के समय कार में बच्चे भी मौजूद थे।

    वॉर्नर के वकील अवैस अहमद ने अदालत में उनका पक्ष रखते हुए कहा कि इस मामले की मीडिया कवरेज के कारण वॉर्नर को पहले ही काफी सार्वजनिक दबाव और नुकसान का सामना करना पड़ा है। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि इस घटना का असर उनके पेशेवर जीवन और भविष्य के व्यावसायिक अवसरों पर पड़ सकता है। वॉर्नर अभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं लेकिन दुनिया भर की टी20 फ्रेंचाइजी लीग में खेलने के अवसर उनके करियर का हिस्सा रहे हैं।

    हालांकि अदालत ने मीडिया कवरेज और सोशल मीडिया टिप्पणियों को ध्यान में रखा लेकिन जज ने साफ किया कि सजा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य लोगों को शराब पीकर गाड़ी चलाने से रोकना है। अदालत के मुताबिक यह केवल किसी एक व्यक्ति की गलती का मामला नहीं है बल्कि सड़क सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। कार में बच्चों की मौजूदगी ने इस मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया।

    अब वॉर्नर को वाहन चलाने के लिए इंटरलॉक लाइसेंस से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके लिए उनकी कार में एक इंटरलॉक डिवाइस लगाया जाएगा। यह डिवाइस वाहन को तब तक स्टार्ट होने से रोक सकता है जब तक चालक की सांस की जांच में अल्कोहल की मौजूदगी निर्धारित सीमा के भीतर न हो। अदालत की शर्तों के अनुसार वॉर्नर को इस व्यवस्था का पालन करने के बाद ही वाहन चलाने की अनुमति होगी।

    डेविड वॉर्नर ऑस्ट्रेलिया के सबसे चर्चित क्रिकेटरों में शामिल रहे हैं। टेस्ट क्रिकेट में लंबे समय तक टीम के प्रमुख सलामी बल्लेबाज रहे वॉर्नर ने अपने आक्रामक अंदाज से दुनियाभर में पहचान बनाई। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद भी वह टी20 क्रिकेट और फ्रेंचाइजी लीग से जुड़े रहे हैं। ऐसे में अदालत का यह फैसला उनके व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ भविष्य के पेशेवर अवसरों पर भी असर डाल सकता है।

    इस मामले ने एक बार फिर शराब पीकर वाहन चलाने के खतरों को लेकर बहस छेड़ दी है। अदालत ने अपने फैसले के जरिए यह संदेश भी दिया कि सड़क सुरक्षा के नियम किसी भी व्यक्ति की लोकप्रियता या सार्वजनिक पहचान से अलग हैं। वॉर्नर के लिए अब आगे की राह अदालत द्वारा तय शर्तों का पालन करने और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने की होगी।

  • गॉल में इतिहास रचने उतरेगी श्रीलंका की टीम! 288 रन का टारगेट, सफल हुआ रन चेज तो बनेगा बड़ा रिकॉर्ड

    गॉल में इतिहास रचने उतरेगी श्रीलंका की टीम! 288 रन का टारगेट, सफल हुआ रन चेज तो बनेगा बड़ा रिकॉर्ड


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच गॉल में खेले जा रहे पहले टेस्ट का रोमांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। टीम इंडिया ने श्रीलंका के सामने जीत के लिए 372 रन का बड़ा लक्ष्य रखा है। चौथे दिन का खेल खत्म होने तक श्रीलंका ने 34 ओवर में 84 रन पर 4 विकेट गंवा दिए हैं। अब मेजबान टीम को टेस्ट जीतने के लिए आखिरी दिन 288 रन और बनाने होंगे। वहीं भारत को जीत के लिए सिर्फ 6 विकेट की जरूरत है। आंकड़े भारत के पक्ष में नजर आ रहे हैं लेकिन श्रीलंका का टेस्ट इतिहास बताता है कि वह 350 रन से ज्यादा के लक्ष्य का सफल पीछा करने का कारनामा पहले भी कर चुका है।

    श्रीलंका के नाम टेस्ट क्रिकेट में सबसे बड़ा सफल रन चेज 388 रन का है। जुलाई 2017 में कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में जिम्बाब्वे के खिलाफ श्रीलंकाई टीम ने यह ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। उस मुकाबले में जिम्बाब्वे ने पहली पारी में 356 रन बनाए थे जबकि श्रीलंका ने 346 रन बनाए। इसके बाद जिम्बाब्वे ने दूसरी पारी में 377 रन बनाए और श्रीलंका के सामने 388 रन का लक्ष्य रखा। मेजबान टीम ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 391 रन बनाकर 4 विकेट से मुकाबला अपने नाम कर लिया था।

    उस ऐतिहासिक रन चेज में निरोशन डिकवेला ने 81 रन की अहम पारी खेली थी जबकि असेला गुणारत्ने 80 रन बनाकर नाबाद रहे थे। दोनों बल्लेबाजों के बीच छठे विकेट के लिए 121 रन की निर्णायक साझेदारी हुई थी। इस जीत ने श्रीलंका को टेस्ट इतिहास के सबसे यादगार रन चेज में शामिल कर दिया।

    श्रीलंका ने इससे पहले भी 350 से ज्यादा रन के लक्ष्य का सफल पीछा किया है। साल 2006 में कोलंबो में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ श्रीलंका ने 352 रन का लक्ष्य हासिल किया था। दक्षिण अफ्रीका ने चौथी पारी में जीत के लिए 352 रन का लक्ष्य रखा था और श्रीलंका ने 352 रन बनाकर मुकाबला जीत लिया था। इस मैच में महेला जयवर्धने ने 123 रन की शानदार पारी खेलकर टीम की जीत में बड़ी भूमिका निभाई थी।

    यानी श्रीलंका की टीम टेस्ट क्रिकेट में दो बार 350 या उससे ज्यादा रन के लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल कर चुकी है। अब गॉल में उसके सामने 372 रन का लक्ष्य है। यह लक्ष्य उसके 352 रन वाले दूसरे सबसे बड़े सफल रन चेज से 20 रन ज्यादा है। अगर श्रीलंका आखिरी दिन 372 रन तक पहुंच जाता है तो यह उसके टेस्ट इतिहास का तीसरा सबसे बड़ा सफल रन चेज बन जाएगा।

    हालांकि भारत के खिलाफ यह चुनौती आसान नहीं होगी। चौथे दिन भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंका को शुरुआती झटके देकर दबाव में ला दिया। दिन का खेल खत्म होने तक श्रीलंका ने 84 रन पर 4 विकेट गंवा दिए। कप्तान धनंजय डी सिल्वा 31 रन बनाकर नाबाद हैं जबकि सोनल दिनुषा 25 रन पर खेल रहे हैं। दोनों बल्लेबाजों पर पांचवें दिन टीम की उम्मीदों का बड़ा दारोमदार रहेगा।

    गॉल में श्रीलंका के सामने सिर्फ 288 रन बनाने की चुनौती नहीं है बल्कि भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ पूरे दिन टिके रहने की परीक्षा भी होगी। टेस्ट मैच की चौथी पारी में बड़ा लक्ष्य हासिल करना वैसे ही मुश्किल माना जाता है और यहां श्रीलंका के पास सिर्फ 6 विकेट बचे हैं। दूसरी ओर भारत के पास मैच खत्म करने का स्पष्ट मौका है।

    गॉल में विदेशी टीम द्वारा श्रीलंका के खिलाफ सबसे बड़ा सफल रन चेज पाकिस्तान के नाम है। पाकिस्तान ने 2015 में पल्लेकेले में श्रीलंका के खिलाफ 377 रन का लक्ष्य हासिल किया था। उसने 382 रन बनाकर मुकाबला जीता था। ऐसे में मौजूदा 372 रन का लक्ष्य उस रिकॉर्ड से सिर्फ 5 रन कम है।

    अब मुकाबले का पूरा दारोमदार पांचवें दिन पर है। श्रीलंका अगर 288 रन और बना लेता है तो वह न केवल भारत के खिलाफ यादगार जीत दर्ज करेगा बल्कि अपने टेस्ट इतिहास में तीसरा सबसे बड़ा सफल रन चेज भी पूरा कर लेगा। दूसरी तरफ भारत के पास छह विकेट लेकर गॉल टेस्ट अपने नाम करने का मौका है। ऐसे में 19 अगस्त का पांचवां दिन दोनों टीमों के लिए बेहद महत्वपूर्ण और रोमांचक रहने वाला है।

  • बल्ले और गेंद से जडेजा का ऐतिहासिक कमाल! 350 विकेट पूरे कर रचा नया रिकॉर्ड, दुनिया के चुनिंदा ऑलराउंडर्स में शामिल

    बल्ले और गेंद से जडेजा का ऐतिहासिक कमाल! 350 विकेट पूरे कर रचा नया रिकॉर्ड, दुनिया के चुनिंदा ऑलराउंडर्स में शामिल


    नई दिल्ली। रवींद्र जडेजा ने गॉल टेस्ट में अपने करियर की एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसने उन्हें भारतीय क्रिकेट के चुनिंदा महान ऑलराउंडर्स की कतार में खड़ा कर दिया है। श्रीलंका के खिलाफ मुकाबले में जडेजा ने टेस्ट क्रिकेट में 350 विकेट पूरे किए और इसके साथ ही उन्होंने 4000 से ज्यादा रन तथा 350 से ज्यादा विकेट लेने का ऐतिहासिक डबल भी पूरा कर लिया। जडेजा यह कारनामा करने वाले दुनिया के चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं और भारत की ओर से इस खास क्लब में जगह बनाने वाले सिर्फ दूसरे क्रिकेटर हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि महान ऑलराउंडर कपिल देव ने हासिल की थी।

    जडेजा ने गॉल टेस्ट की तीसरी पारी में श्रीलंका के बल्लेबाजों को अपनी स्पिन से परेशान किया और तीन विकेट हासिल किए। उनके 350 विकेट पूरे होते ही टेस्ट क्रिकेट में उनका नाम भारत के उन गेंदबाजों की सूची में शामिल हो गया जिन्होंने इस फॉर्मेट में 350 या उससे ज्यादा विकेट लिए हैं। इससे पहले अनिल कुंबले 619 विकेट के साथ भारत के सबसे सफल टेस्ट गेंदबाज हैं। रविचंद्रन अश्विन ने 537 विकेट लिए हैं जबकि कपिल देव के नाम 434 और हरभजन सिंह के नाम 417 टेस्ट विकेट हैं। अब जडेजा 351 विकेट के साथ इस प्रतिष्ठित सूची में पांचवें स्थान पर हैं।

    हालांकि जडेजा की उपलब्धि सिर्फ विकेटों तक सीमित नहीं है। टेस्ट क्रिकेट में उनके बल्ले से भी लगातार अहम योगदान देखने को मिला है। जडेजा के नाम 4000 से ज्यादा टेस्ट रन हैं और यही वजह है कि 350 से अधिक विकेट के साथ 4000 से अधिक रन का डबल उन्हें और खास बनाता है। इस आंकड़े तक पहुंचने वाले दुनिया के खिलाड़ियों में कपिल देव के अलावा इंग्लैंड के इयान बॉथम और न्यूजीलैंड के डेनियल विटोरी भी शामिल हैं। कपिल देव ने टेस्ट में 5248 रन और 434 विकेट लिए। बॉथम के नाम 5200 रन और 383 विकेट हैं जबकि विटोरी ने 4531 रन के साथ 362 विकेट हासिल किए। अब इस क्लब में 4108 रन और 351 विकेट के आंकड़े के साथ जडेजा का नाम भी जुड़ गया है।

    जडेजा ने इस उपलब्धि के साथ टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बाएं हाथ के स्पिनरों की सूची में भी अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। श्रीलंका के रंगना हेराथ 433 विकेट के साथ इस सूची में सबसे आगे हैं। डेनियल विटोरी के नाम 362 विकेट हैं जबकि जडेजा 351 विकेट के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच चुके हैं। अब विटोरी को पीछे छोड़ने के लिए जडेजा को केवल 12 और विकेट की जरूरत है। अगर वह यह मुकाम हासिल कर लेते हैं तो टेस्ट इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बाएं हाथ के स्पिनरों में दूसरे स्थान पर पहुंच जाएंगे।

    जडेजा की गेंदबाजी की खासियत सिर्फ विकेटों की संख्या नहीं बल्कि उनकी विकेट लेने की क्षमता भी है। कम से कम 125 टेस्ट विकेट लेने वाले बाएं हाथ के स्पिनरों में जडेजा का स्ट्राइक रेट 58 के आसपास है। इस मामले में दक्षिण अफ्रीका के केशव महाराज उनसे आगे हैं। इससे पता चलता है कि जडेजा लंबे स्पेल में दबाव बनाने के साथ जरूरत पड़ने पर तेजी से विकेट निकालने की क्षमता भी रखते हैं।

    गॉल टेस्ट में श्रीलंका की पहली पारी 284 रन पर समाप्त हुई और भारत को 178 रनों की बढ़त मिली। जडेजा ने 21 ओवर में पांच मेडन डालते हुए 57 रन देकर तीन विकेट लिए। मानव सुथार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार विकेट अपने नाम किए। उन्होंने 21.4 ओवर में एक मेडन के साथ 76 रन देकर चार विकेट हासिल किए।

    जडेजा की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह सिर्फ गेंदबाज नहीं बल्कि मैच का रुख बदलने वाले ऑलराउंडर हैं। बल्ले से उपयोगी रन बनाने के साथ गेंद से लगातार विकेट निकालना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। कपिल देव के साथ इस ऐतिहासिक क्लब में शामिल होना उनके टेस्ट करियर की बड़ी उपलब्धियों में से एक है। अलग-अलग दौर और अलग-अलग गेंदबाजी शैली के बावजूद जडेजा और कपिल ने साबित किया है कि टेस्ट क्रिकेट में लंबे समय तक बल्ले और गेंद दोनों से योगदान देने वाला ऑलराउंडर टीम के लिए कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।