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  • राधा यादव बोलीं- विमेंस प्रीमियर लीग ने बदला मेरा खेल, नई तैयारी और बेहतर प्रदर्शन से मिली टीम इंडिया में वापसी

    राधा यादव बोलीं- विमेंस प्रीमियर लीग ने बदला मेरा खेल, नई तैयारी और बेहतर प्रदर्शन से मिली टीम इंडिया में वापसी


    नई दिल्ली ।
    करीब 11 महीने बाद भारतीय महिला टी20 टीम में वापसी करने वाली बाएं हाथ की स्पिनर राधा यादव ने अपनी इस वापसी का श्रेय विमेंस प्रीमियर लीग को दिया है। उनका कहना है कि इस टूर्नामेंट ने न केवल उनके खेल में तकनीकी सुधार किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों के लिए मानसिक रूप से भी तैयार किया। उन्होंने माना कि लगातार अभ्यास, टीम प्रबंधन का सहयोग और अनुभवी खिलाड़ियों से मिली सीख उनके प्रदर्शन में सुधार की सबसे बड़ी वजह रही।

    राधा यादव ने कहा कि विमेंस प्रीमियर लीग के दौरान उन्होंने अपने खेल के कई पहलुओं पर विशेष रूप से काम किया। बल्लेबाजी में अधिक ताकत के साथ शॉट खेलने, डेथ ओवरों में तेज रन बनाने, गेंदबाजी में गति बदलने और विविधताओं का प्रभावी उपयोग करने जैसी क्षमताओं को उन्होंने बेहतर बनाया। उनका मानना है कि इन सुधारों ने उन्हें दोबारा राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उन्होंने टीम प्रबंधन के सहयोग की भी सराहना करते हुए कहा कि उन्हें अपने खेल को अपनी शैली में विकसित करने की पूरी स्वतंत्रता मिली। यही भरोसा उनके आत्मविश्वास को मजबूत करने में सहायक बना और वे अपने प्रदर्शन में लगातार सुधार कर सकीं।

    राधा ने कहा कि एक खिलाड़ी के रूप में सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती। उनके अनुसार साथी खिलाड़ियों, कोच और यहां तक कि विपक्षी खिलाड़ियों से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि दूसरे गेंदबाजों की रणनीति, फील्ड सेटिंग और दबाव में प्रदर्शन करने के तरीके को समझना किसी भी खिलाड़ी के विकास में अहम योगदान देता है।

    स्पिन गेंदबाजी को लेकर उन्होंने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य विकेट हासिल करना और विपक्षी टीम की रन गति पर नियंत्रण बनाए रखना होता है। उनका मानना है कि एक स्पिनर को अपनी ताकत और विविधताओं पर भरोसा रखते हुए लगातार सही लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी करनी चाहिए, क्योंकि यही सफलता की कुंजी है।

    राधा यादव ने विमेंस प्रीमियर लीग को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बताया। उन्होंने कहा कि पहले घरेलू क्रिकेट से सीधे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचना खिलाड़ियों के लिए चुनौतीपूर्ण होता था, लेकिन अब इस लीग के माध्यम से उन्हें उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा और दबाव का अनुभव पहले ही मिल जाता है। इससे नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खुद को जल्दी ढालने में मदद मिल रही है।

    उन्होंने भारतीय महिला टीम के नेतृत्व की भी सराहना करते हुए कहा कि टीम के भीतर ऐसा माहौल बनाया गया है जहां हर खिलाड़ी खुलकर अपने विचार रख सकता है। उनके अनुसार यही सकारात्मक वातावरण खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को बढ़ाता है और टीम के सामूहिक प्रदर्शन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

  • दूसरे टी20 में भारत का बड़ा फैसला, पहले गेंदबाजी का चुना रास्ता, दो नए खिलाड़ियों को मिला डेब्यू का मौका

    दूसरे टी20 में भारत का बड़ा फैसला, पहले गेंदबाजी का चुना रास्ता, दो नए खिलाड़ियों को मिला डेब्यू का मौका

    नई दिल्ली । भारत और आयरलैंड के बीच दो मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला का दूसरा और अंतिम मुकाबला बेलफास्ट में खेला जा रहा है। पहला मैच गंवाने के बाद भारतीय टीम के सामने श्रृंखला बराबर करने की चुनौती है। इसी उद्देश्य के साथ कप्तान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया, ताकि लक्ष्य का पीछा करते हुए मुकाबले पर बेहतर नियंत्रण बनाया जा सके।

    इस मुकाबले से पहले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय पदार्पण को लेकर काफी चर्चा थी। क्रिकेट प्रशंसकों को उम्मीद थी कि उन्हें दूसरे टी20 में मौका मिल सकता है, लेकिन टीम प्रबंधन ने इस बार भी उन्हें अंतिम एकादश में शामिल नहीं किया। ऐसे में उनका अंतरराष्ट्रीय डेब्यू फिलहाल टल गया है और इसके लिए उन्हें आगे का इंतजार करना होगा।

    हालांकि भारतीय टीम ने दो नए खिलाड़ियों को टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का अवसर दिया है। टीम प्रबंधन ने पिछले मुकाबले के प्रदर्शन को देखते हुए संयोजन में बदलाव किया और नए खिलाड़ियों पर भरोसा जताया। माना जा रहा है कि इन बदलावों का उद्देश्य टीम को बेहतर संतुलन देना और गेंदबाजी आक्रमण को अधिक प्रभावी बनाना है।

    पहले टी20 मुकाबले में भारतीय टीम को 34 रन से हार का सामना करना पड़ा था। इस हार के साथ आयरलैंड ने पहली बार टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत को हराकर इतिहास रचा। भारतीय बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों ही विभाग अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके थे, जिसके कारण टीम को सीरीज में पिछड़ना पड़ा।

    दूसरे मुकाबले में भारतीय टीम की कोशिश शुरुआती ओवरों से दबाव बनाने की होगी। गेंदबाजों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है, जबकि बल्लेबाजों के सामने लक्ष्य का सफलतापूर्वक पीछा कर श्रृंखला बराबर करने की जिम्मेदारी रहेगी। टीम प्रबंधन को उम्मीद है कि नए खिलाड़ियों का उत्साह और अनुभवी खिलाड़ियों का अनुभव टीम के लिए निर्णायक साबित होगा।

    यह मुकाबला दोनों टीमों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत जहां सीरीज 1-1 से बराबर करने के इरादे से मैदान में उतरा है, वहीं आयरलैंड की नजर ऐतिहासिक सीरीज जीत दर्ज करने पर है। ऐसे में बेलफास्ट में खेला जा रहा यह मुकाबला रोमांचक होने की पूरी संभावना है।

  • Ind vs Ire : दूसरा T-20 आज… प्लेइंग-11 में संजू की जगह वैभव सूर्यवंशी को मिल सकता है मौका

    Ind vs Ire : दूसरा T-20 आज… प्लेइंग-11 में संजू की जगह वैभव सूर्यवंशी को मिल सकता है मौका


    बेलफास्ट।
    आयरलैंड (Ireland) के खिलाफ पहले टी20 इंटरनेशनल (First T20 International) में मिली 34 रनों की हार के बाद भारतीय टीम (Indian team) आज (28 जून) दूसरे एवं आखिरी मुकाबले में सीरीज बराबर करने के इरादे से उतरेगी. यह मुकाबला बेलफास्ट के सिविल सर्विस क्रिकेट क्लब में भारतीय समयानुसार शाम 6 बजे से खेला जाएगा।

    यह पहली बार था, जब आयरलैंड ने किसी भी अंतरराष्ट्रीय मैच में भारतीय टीम को हराया. अब कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुवाई वाली युवा भारतीय टीम के सामने सम्मान बचाने की चुनौती होगी. पहले मैच में भारतीय बल्लेबाजी पूरी तरह बिखर गई थी. शीर्ष क्रम बड़ी साझेदारियां नहीं कर सका और टीम 183 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 148 रनों पर सिमट गई।

    ऐसे में दूसरे मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी. इस मैच से पहले सबसे बड़ी चर्चा 15 साल के वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) को लेकर है. पहले टी20 में उन्हें डेब्यू का मौका नहीं मिला था, लेकिन हार के बाद टीम मैनेजमेंट प्लेइंग इलेवन में बदलाव कर सकता है. वैभव को संजू सैमसन (Sanju Samson) के स्थान पर मौका मिल सकता है. संजू को इस मुकाबले में रेस्ट दिया जा सकता है. ऐसे में ईशान किशन विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी संभालेंगे।


    इन दो खिलाड़ियों का भी हो सकता है डेब्यू

    दूसरी ओर, टीम मैनेजमेंट वॉशिंगटन सुंदर को दूसरे टी20 से बाहर रख सकता है. अगर ऐसा होता है तो भारत स्पिनर रवि बिश्नोई या ऑलराउंडर सूर्यांश शेडगे के साथ उतर सकता है. शेडगे ने अब तक अपना इंटरनेशनल डेब्यू नहीं किया है. पहले टी20 मुकाबले में सुंदर गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों में ही नाकाम रहे थे. गेंदबाजी में सुंदर ने एक ओवर में ही 19 रन दे दिए. वो बल्लेबाजी के दौरान भी महज 9 रन बनाकर आउट हो गए.

    इसके अलावा तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा की प्लेइंग-11 से छुट्टी हो सकती है. प्रसिद्ध ने पहले मुकाबले में 57 रन लुटाए थे. कृष्णा की जगह प्रिंस यादव को मौका मिल सकता है. प्रिंस ने अब तक अपना टी20 इंटरनेशनल डेब्यू नहीं किया है.

    कुल मिलाकर क्रिकेट फैन्स बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि क्या इस मुकाबले में वैभव भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करेंगे? हालांकि, पूरी पिक्चर टॉस के बाद ही साफ होगी.

    भारत को गेंदबाजी में भी सुधार करना होगा. पहले मुकाबले में आयरलैंड के बल्लेबाजों ने बीच के ओवरों में तेजी से रन बटोरे, जिससे मेजबान टीम मजबूत स्कोर तक पहुंचने में सफल रही. दूसरी ओर, आयरलैंड जीत की लय बरकरार रखते हुए पहली बार भारत के खिलाफ टी20 सीरीज जीतना चाहेगा.

    बेलफास्ट के मैदान पर होने वाला यह मुकाबला दोनों टीमों के लिए बेहद अहम है. भारत के लिए यह सीरीज बचाने का मैच है, जबकि आयरलैंड के पास ऐतिहासिक सीरीज जीत दर्ज करने का सुनहरा मौका होगा. अभी आयरलैंड 1-0 से सीरीज में बढ़त बनाया हुआ है.


    मुकाबले में भारत की संभावित प्लेइंग-11:
    अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, रवि बिश्नोई/सूर्यांश शेडगे, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह और प्रिंस यादव.


    मुकाबले में आयरलैंड की संभावित प्लेइंग-11: टिम टेक्टर,
    रॉस एडायर, हैरी टेक्टर, लोर्कन टकर (विकेटकीपर/कप्तान), बेंजामिन कैलिट्ज, गैरेथ डेलानी, जॉर्ज डॉकरेल, लियाम मैकार्थी, मैथ्यू हम्फ्रीज, जय मूंदरा और मैथ्यू हॉलार्ड.

  • विंबलडन का दिल है सेंटर कोर्ट: 104 साल का गौरवशाली इतिहास, यहीं लिखी गई टेनिस की सबसे बड़ी दास्तानें

    विंबलडन का दिल है सेंटर कोर्ट: 104 साल का गौरवशाली इतिहास, यहीं लिखी गई टेनिस की सबसे बड़ी दास्तानें


    नई दिल्ली । टेनिस की दुनिया में विंबलडन सिर्फ एक ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट नहीं बल्कि परंपरा प्रतिष्ठा और इतिहास का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। वर्ष 1877 में शुरू हुए इस टूर्नामेंट ने दुनिया को अनगिनत यादगार मुकाबले और महान खिलाड़ी दिए हैं लेकिन इसकी सबसे बड़ी पहचान सेंटर कोर्ट है जिसे विंबलडन का दिल कहा जाता है। यही वह मंच है जहां हर टेनिस खिलाड़ी खेलने और जीत दर्ज करने का सपना देखता है।

    सेंटर कोर्ट का इतिहास भी उतना ही दिलचस्प है जितना यहां खेले गए मुकाबलों का। शुरुआती दौर में विंबलडन के कोर्ट अलग-अलग बनाए गए थे लेकिन वर्ष 1881 में दो कोर्ट को मिलाकर एक मुख्य कोर्ट तैयार किया गया जो परिसर के बिल्कुल मध्य में स्थित था। इसी वजह से इसका नाम सेंटर कोर्ट रखा गया। बाद में वर्ष 1922 में जब ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस एंड क्रोके क्लब नए परिसर में स्थानांतरित हुआ तब आधुनिक सेंटर कोर्ट का निर्माण हुआ और तभी से यह विंबलडन की सबसे बड़ी पहचान बन गया।

    दिलचस्प बात यह है कि इस कोर्ट का उपयोग पूरे वर्ष में केवल दो सप्ताह के लिए किया जाता है। बाकी समय इसकी घास और सतह की विशेष देखभाल की जाती है ताकि टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों को सर्वोत्तम गुणवत्ता का कोर्ट मिल सके। यहां केवल बारहमासी राई घास का इस्तेमाल किया जाता है और उसकी लंबाई करीब 8 मिलीमीटर रखी जाती है जिससे खेल की गति और गुणवत्ता बनी रहती है।

    सेंटर कोर्ट की एक और खास पहचान इसका रॉयल बॉक्स है जहां ब्रिटिश शाही परिवार और विशेष अतिथि बैठकर मुकाबलों का आनंद लेते हैं। वर्ष 2009 में यहां आधुनिक रिट्रैक्टेबल रूफ लगाया गया जिससे बारिश के दौरान भी मुकाबले बिना ज्यादा बाधा के जारी रखे जा सकते हैं। महज कुछ मिनटों में छत बंद कर खेल दोबारा शुरू कर दिया जाता है।

    इस कोर्ट पर खेलने के लिए खिलाड़ियों को पूरी तरह सफेद पोशाक पहनना अनिवार्य होता है। इसके अलावा कोर्ट के आसपास किसी भी प्रकार के व्यावसायिक विज्ञापन बोर्ड लगाने की अनुमति नहीं दी जाती ताकि विंबलडन की पारंपरिक गरिमा और ऐतिहासिक स्वरूप बरकरार रहे।

    सेंटर कोर्ट ने टेनिस इतिहास के कई स्वर्णिम पल देखे हैं। रोजर फेडरर ने अपने आठ विंबलडन खिताब इसी कोर्ट पर जीते। वर्ष 2008 में फेडरर और राफेल नडाल के बीच खेला गया ऐतिहासिक फाइनल आज भी टेनिस इतिहास के सबसे महान मुकाबलों में गिना जाता है। वहीं वर्ष 2019 में नोवाक जोकोविच और फेडरर के बीच खेला गया विंबलडन इतिहास का सबसे लंबा पुरुष एकल फाइनल भी इसी कोर्ट का हिस्सा बना।

    आज सेंटर कोर्ट केवल एक खेल मैदान नहीं बल्कि उत्कृष्टता परंपरा और गौरव का प्रतीक बन चुका है। यहां जीत हासिल करना किसी भी खिलाड़ी के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल माना जाता है। यही वजह है कि जब भी विंबलडन का नाम लिया जाता है तो सबसे पहले सेंटर कोर्ट की भव्यता और उससे जुड़ी ऐतिहासिक यादें लोगों के सामने उभर आती हैं।

  • ट्रॉसार्ड का डबल अटैक, डी ब्रूने का जलवा: बेल्जियम ने न्यूजीलैंड को 5-1 से हराकर कटाया नॉकआउट टिकट

    ट्रॉसार्ड का डबल अटैक, डी ब्रूने का जलवा: बेल्जियम ने न्यूजीलैंड को 5-1 से हराकर कटाया नॉकआउट टिकट


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप जी में बेल्जियम ने दमदार प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को 5-1 से करारी शिकस्त दी और शानदार अंदाज में राउंड ऑफ 32 का टिकट पक्का कर लिया। बीसी प्लेस स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में बेल्जियम ने शुरुआत से अंत तक पूरी तरह दबदबा बनाए रखा। स्टार विंगर लिएंड्रो ट्रॉसार्ड ने दो गोल दागकर जीत के हीरो की भूमिका निभाई, जबकि केविन डी ब्रूने ने शानदार खेल दिखाते हुए एक गोल और दो असिस्ट अपने नाम किए।

    इस बड़ी जीत के साथ बेल्जियम ने ग्रुप जी में पांच अंक हासिल किए। मिस्र के भी पांच अंक रहे, लेकिन बेहतर गोल अंतर के आधार पर बेल्जियम ग्रुप विजेता बना। वहीं मिस्र ने दूसरे स्थान पर रहते हुए नॉकआउट चरण में जगह बनाई। ईरान तीन अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा और उसकी उम्मीदें अन्य नतीजों पर टिकी हैं, जबकि न्यूजीलैंड सिर्फ एक अंक के साथ टूर्नामेंट से बाहर हो गया।

    मैच की शुरुआत से ही बेल्जियम ने आक्रामक रुख अपनाया और गेंद पर लगातार नियंत्रण बनाए रखा। 11वें मिनट में ट्रॉसार्ड गोल करने के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन उनका शॉट गोलपोस्ट से टकरा गया। कुछ देर बाद बेल्जियम को पेनल्टी भी मिली, लेकिन वीएआर समीक्षा के बाद रेफरी ने फैसला बदल दिया और पेनल्टी रद्द कर दी। इसके बावजूद बेल्जियम का दबाव कम नहीं हुआ।

    आखिरकार 28वें मिनट में केविन डी ब्रूने के शानदार क्रॉस पर लिएंड्रो ट्रॉसार्ड ने बेहतरीन फिनिश करते हुए टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। दूसरे हाफ की शुरुआत में दोनों खिलाड़ियों की यह जोड़ी फिर चमकी। 49वें मिनट में डी ब्रूने के सटीक पास पर ट्रॉसार्ड ने अपना दूसरा गोल दागते हुए स्कोर 2-0 कर दिया।

    इसके बाद बेल्जियम ने न्यूजीलैंड को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। गोलकीपर थिबो कोर्टोइस ने विपक्ष के कुछ अच्छे प्रयासों को शानदार बचाव से नाकाम किया। 66वें मिनट में केविन डी ब्रूने ने खुद गोल दागकर बढ़त 3-0 कर दी। इस गोल के साथ 34 वर्षीय डी ब्रूने फीफा वर्ल्ड कप में बेल्जियम के लिए गोल करने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी भी बन गए।

    मैच के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड ने 84वें मिनट में एलिजा जस्ट के गोल से सम्मान बचाने की कोशिश की, लेकिन बेल्जियम ने तुरंत जवाब दिया। अगले ही मिनट रोमेलु लुकाकू ने शानदार हेडर के जरिए चौथा गोल कर मुकाबला पूरी तरह अपने नाम कर लिया। स्टॉपेज टाइम में एलेक्सिस सालेमेकर्स ने पांचवां गोल दागकर बेल्जियम की 5-1 की धमाकेदार जीत पर मुहर लगा दी।

    इस शानदार प्रदर्शन के साथ बेल्जियम ने न केवल नॉकआउट चरण में जगह बनाई बल्कि खिताब की मजबूत दावेदारी भी पेश कर दी। टीम का संतुलित आक्रमण, मजबूत मिडफील्ड और अनुभवी खिलाड़ियों का प्रदर्शन आने वाले मुकाबलों में विरोधी टीमों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

  • फ्रांस से भिड़ंत से पहले स्वीडन को तगड़ा झटका: डिफेंस की दीवार इसाक हिएन टूर्नामेंट से बाहर

    फ्रांस से भिड़ंत से पहले स्वीडन को तगड़ा झटका: डिफेंस की दीवार इसाक हिएन टूर्नामेंट से बाहर


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के नॉकआउट मुकाबलों से पहले स्वीडन को बड़ा झटका लगा है। टीम के स्टार डिफेंडर इसाक हिएन हैमस्ट्रिंग चोट के कारण पूरे टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं। फ्रांस के खिलाफ होने वाले राउंड ऑफ 32 के अहम मुकाबले से पहले यह खबर स्वीडिश टीम के लिए बड़ी चिंता लेकर आई है, क्योंकि हिएन टीम की रक्षापंक्ति के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल थे।

    27 वर्षीय इसाक हिएन को गुरुवार को जापान के खिलाफ खेले गए ग्रुप मुकाबले के दौरान चोट लगी थी। यह मैच 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ था और इसी नतीजे के साथ स्वीडन ने तीसरे स्थान की सर्वश्रेष्ठ आठ टीमों में जगह बनाते हुए नॉकआउट चरण के लिए क्वालिफाई किया था। हालांकि मैच के दौरान लगी चोट अब इतनी गंभीर साबित हुई कि उन्हें पूरे टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा।

    स्वीडिश फुटबॉल एसोसिएशन ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि हिएन अब विश्व कप में आगे हिस्सा नहीं ले पाएंगे। मेडिकल जांच में उनके बाएं पैर की हैमस्ट्रिंग में गंभीर चोट पाई गई है। टीम के डॉक्टर जोनास वर्नर ने बताया कि खिलाड़ी को तुरंत रिहैबिलिटेशन के लिए अपने क्लब लौटना होगा और पूरी तरह फिट होने में कुछ समय लगेगा। उन्होंने कहा कि इस चोट के कारण हिएन फिलहाल फुटबॉल से दूर रहेंगे।

    स्वीडन के मुख्य कोच ग्राहम पॉटर ने भी इसाक हिएन के बाहर होने पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि विश्व कप जैसे बड़े मंच पर किसी खिलाड़ी का चोट के कारण सफर खत्म होना बेहद दुखद होता है। टीम हिएन के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और उन्हें विश्वास है कि वह पूरी तरह फिट होकर पहले से अधिक मजबूत वापसी करेंगे। कोच ने यह भी संकेत दिया कि फ्रांस के खिलाफ मुकाबले के लिए टीम को अपनी रक्षापंक्ति में बदलाव करना पड़ेगा।

    जापान के खिलाफ मैच में हिएन को चोट उस समय लगी थी जब उन्होंने पेनल्टी बॉक्स के अंदर युकिनारी सुगावारा के क्रॉस को रोकने के लिए लंबा स्ट्रेच किया। इसी प्रयास में उनकी हैमस्ट्रिंग खिंच गई और उन्हें मैदान छोड़ना पड़ा। उनकी जगह युवा मिडफील्डर लुकास बर्गवैल को उतारा गया, जबकि कप्तान विक्टर लिंडेलोफ ने सेंटर बैक की जिम्मेदारी संभाली।

    अब स्वीडन के सामने सबसे बड़ी चुनौती फ्रांस जैसी मजबूत टीम के खिलाफ अपनी रक्षापंक्ति को संतुलित रखना होगी। हिएन की गैरमौजूदगी निश्चित रूप से टीम की रणनीति और डिफेंस पर असर डालेगी। ऐसे में बाकी खिलाड़ियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी होगी कि वे इस कमी को पूरा करते हुए टीम को नॉकआउट मुकाबले में जीत दिलाने का प्रयास करें।

  • आयरलैंड से हार के बाद भी टीम इंडिया पर भरोसा, जडेजा के कोच बोले- मजबूत वापसी करेगी टीम

    आयरलैंड से हार के बाद भी टीम इंडिया पर भरोसा, जडेजा के कोच बोले- मजबूत वापसी करेगी टीम


    नई दिल्ली । आयरलैंड के खिलाफ पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में मिली हार के बाद भारतीय टीम को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं लेकिन अनुभवी ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा के कोच महेंद्र चौहान ने टीम का बचाव करते हुए इसे टी20 क्रिकेट का स्वाभाविक हिस्सा बताया है। उनका कहना है कि इस फॉर्मेट में किसी भी दिन कोई भी टीम बेहतर प्रदर्शन कर सकती है और ऐसे नतीजे क्रिकेट का हिस्सा हैं।

    महेंद्र चौहान ने कहा कि भारत जैसी मजबूत टीम को एक हार के आधार पर कमजोर नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि टी20 क्रिकेट बेहद तेज और अनिश्चितताओं से भरा प्रारूप है जहां छोटी-सी गलती या विपक्षी टीम का शानदार प्रदर्शन मैच का परिणाम बदल सकता है। उनके अनुसार कभी-कभी अपेक्षाकृत नई या कमजोर मानी जाने वाली टीमें भी बड़े उलटफेर कर देती हैं।

    उन्होंने कहा कि पहले टी20 में मिली हार से यह निष्कर्ष निकालना गलत होगा कि भारतीय टीम अच्छी नहीं है। टीम इंडिया के पास विश्व स्तरीय बल्लेबाज गेंदबाज और फील्डर मौजूद हैं जो किसी भी परिस्थिति में मुकाबले का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय टीम अगले मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन करते हुए जोरदार वापसी करेगी।

    जब महेंद्र चौहान से पूछा गया कि वह भारतीय खिलाड़ियों को कोई विशेष सलाह देना चाहेंगे तो उन्होंने विनम्रता से कहा कि राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने वाले खिलाड़ी अपने दम पर हर चुनौती पार करके वहां पहुंचे हैं। ऐसे खिलाड़ियों को सलाह देने की जरूरत नहीं होती क्योंकि वे खेल की बारीकियों और दबाव से अच्छी तरह परिचित हैं।

    पहले टी20 मुकाबले में आयरलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 9 विकेट के नुकसान पर 182 रन बनाए। टीम के लिए लॉर्कन टकर ने 36 गेंदों में शानदार 50 रन की पारी खेली जबकि गैरेथ डेलानी ने 39 रन का महत्वपूर्ण योगदान दिया। दोनों बल्लेबाजों की पारियों की बदौलत आयरलैंड ने भारत के सामने चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा।

    183 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम शुरुआत से ही दबाव में नजर आई। नियमित अंतराल पर विकेट गिरने से टीम कभी भी मैच में मजबूत स्थिति नहीं बना सकी। सात बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके जिससे रनचेज पूरी तरह बिखर गया।

    भारत की ओर से अभिषेक शर्मा ने सबसे अधिक 49 रन बनाए और संघर्ष जरूर किया लेकिन दूसरे छोर से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। पूरी भारतीय टीम 148 रन पर सिमट गई और उसे 34 रन से हार का सामना करना पड़ा।

    यह जीत आयरलैंड के लिए ऐतिहासिक रही क्योंकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उसने पहली बार भारत को हराने का कारनामा किया। हालांकि भारतीय टीम और उसके समर्थकों को उम्मीद होगी कि अगले मुकाबलों में टीम अपनी गलतियों से सबक लेकर बेहतर प्रदर्शन करेगी।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026: स्पेन ने उरुग्वे को हराकर नॉकआउट में बनाई जगह, उरुग्वे बाहर

    फीफा वर्ल्ड कप 2026: स्पेन ने उरुग्वे को हराकर नॉकआउट में बनाई जगह, उरुग्वे बाहर


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में स्पेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए उरुग्वे को 1-0 से हराकर नॉकआउट चरण में अपनी जगह पक्की कर ली। ग्रुप एच के इस अहम मुकाबले में स्पेन ने पूरे मैच के दौरान संतुलित खेल दिखाया और एकमात्र गोल के दम पर जीत दर्ज की। इस हार के साथ ही दो बार की विश्व चैंपियन उरुग्वे का टूर्नामेंट में सफर समाप्त हो गया।

    गुआडालाहारा में खेले गए मुकाबले में दोनों टीमों ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। उरुग्वे ने शुरुआती मिनटों में स्पेन पर दबाव बनाने की कोशिश की जबकि स्पेन ने भी लगातार आक्रमण किए और सेट पीस के जरिए गोल करने के अवसर बनाए। स्पेन के डिफेंडर पाउ क्यूबार्सी को पहले हाफ में गोल करने के कुछ अच्छे मौके मिले लेकिन वे उन्हें भुना नहीं सके।

    उरुग्वे की ओर से फेडेरिको वाल्वरडे और डार्विन नुनेज ने भी स्पेनिश रक्षा पंक्ति को चुनौती दी लेकिन दोनों खिलाड़ी अपने अवसरों को गोल में नहीं बदल पाए। दोनों टीमों के गोलकीपरों ने पहले हाफ में कई शानदार बचाव किए जिससे मुकाबला लंबे समय तक बराबरी पर बना रहा।

    मैच का निर्णायक पल 42वें मिनट में आया जब स्पेन के मिडफील्डर एलेक्स बेना ने बॉक्स के बाहर से शानदार शॉट लगाकर गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। उनका यह गोल उरुग्वे के अनुभवी गोलकीपर फर्नांडो मुस्लेरा को चकमा देता हुआ जाल में समा गया। खास बात यह रही कि उस समय मैदान पर दोनों टीमों के खिलाड़ी उपचार ले रहे थे लेकिन खेल जारी था और बेना ने मिले मौके का पूरा फायदा उठाया।

    दूसरे हाफ में उरुग्वे ने वापसी की भरपूर कोशिश की और गेंद पर अधिक नियंत्रण भी रखा लेकिन स्पेन का मजबूत डिफेंस उसके सामने दीवार बनकर खड़ा रहा। सब्स्टीट्यूट फेडेरिको विनास को बराबरी का बेहतरीन मौका मिला लेकिन उनका शॉट गोलपोस्ट के ऊपर से निकल गया।

    स्पेन की ओर से डैनी ओल्मो और फेरान टोरेस ने भी बढ़त दोगुनी करने के लिए कई प्रयास किए लेकिन उरुग्वे के गोलकीपर और डिफेंडरों ने उन्हें सफल नहीं होने दिया। मुकाबले के अंतिम मिनटों में उरुग्वे ने लगातार हमले किए लेकिन स्पेन के गोलकीपर उनाई सिमोन ने शानदार बचाव करते हुए अपनी टीम की बढ़त सुरक्षित रखी।

    स्टॉपेज टाइम में उरुग्वे की मुश्किलें और बढ़ गईं जब अगस्टिन कैनोबियो को रेड कार्ड दिखाया गया। इसके बाद टीम के लिए वापसी की सभी उम्मीदें लगभग खत्म हो गईं और अंतिम सीटी के साथ स्पेन ने 1-0 की महत्वपूर्ण जीत दर्ज कर ली।

    इस जीत के साथ स्पेन ने दो जीत और एक ड्रॉ के दम पर सात अंक हासिल करते हुए ग्रुप एच में शीर्ष स्थान पर कब्जा किया। वहीं विश्व कप में पदार्पण करने वाली केप वर्डे तीन ड्रॉ के साथ दूसरे स्थान पर रहकर नॉकआउट चरण में पहुंच गई। उरुग्वे केवल दो अंक ही जुटा सका और ग्रुप चरण से ही बाहर हो गया।

  • वेस्टइंडीज ने संकट से की शानदार वापसी, जांगू-चेज की शतकीय साझेदारी बनी सहारा

    वेस्टइंडीज ने संकट से की शानदार वापसी, जांगू-चेज की शतकीय साझेदारी बनी सहारा


    नई दिल्ली । एंटीगुआ के सर विवियन रिचर्ड्स क्रिकेट स्टेडियम में खेले जा रहे वेस्टइंडीज और श्रीलंका के बीच पहले टेस्ट मुकाबले में दूसरे दिन का खेल मेजबान टीम के नाम रहा। शुरुआती झटकों के बाद आमिर जांगू और कप्तान रोस्टन चेज ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज की पारी को संभाला। दूसरे दिन का खेल समाप्त होने तक वेस्टइंडीज ने पहली पारी में 5 विकेट पर 271 रन बना लिए हैं और अब वह श्रीलंका के पहली पारी के स्कोर से केवल 37 रन पीछे है।

    दिन की शुरुआत वेस्टइंडीज के सलामी बल्लेबाजों ने सकारात्मक अंदाज में की। जॉन कैंपबेल और ब्रैंडन किंग ने पहले विकेट के लिए 58 रन जोड़कर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। हालांकि अच्छी शुरुआत के बावजूद ब्रैंडन किंग 31 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद कैंपबेल भी 39 रन बनाकर पवेलियन लौट गए और वेस्टइंडीज की पारी लड़खड़ाने लगी।

    मध्यक्रम में केवम हॉज 16 रन बनाकर आउट हुए जबकि जोशुआ दा सिल्वा भी 20 रन से आगे नहीं बढ़ सके। इसके बाद जस्टिन ग्रीव्स केवल 3 रन बनाकर चलते बने। 168 रन के स्कोर तक पांच विकेट गिरने के बाद ऐसा लग रहा था कि श्रीलंका मैच पर पूरी तरह पकड़ बना लेगा।

    यहीं से आमिर जांगू और कप्तान रोस्टन चेज ने शानदार जिम्मेदारी निभाई। दोनों बल्लेबाजों ने संयम और धैर्य के साथ बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंकाई गेंदबाजों को सफलता से दूर रखा। जांगू ने 174 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 78 रन बनाए। उनकी पारी में सात चौके शामिल रहे। दूसरी ओर कप्तान रोस्टन चेज ने भी धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी करते हुए 105 गेंदों में नाबाद 42 रन बनाए।

    दोनों बल्लेबाजों के बीच छठे विकेट के लिए अब तक 103 रन की अटूट साझेदारी हो चुकी है जिसने वेस्टइंडीज को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। तीसरे दिन कैरेबियाई टीम की कोशिश बढ़त हासिल कर मैच पर नियंत्रण बनाने की होगी।

    श्रीलंका की ओर से गेंदबाजी में असिथा फर्नांडो और मिलन रत्नायके ने दो-दो विकेट हासिल किए। शुरुआती सफलता के बावजूद दोनों गेंदबाज बाद में जांगू और चेज की साझेदारी को नहीं तोड़ सके।

    इससे पहले श्रीलंका ने अपनी पहली पारी में 308 रन बनाए थे। टीम के लिए धनंजय डी सिल्वा ने शानदार शतक जड़ते हुए 168 गेंदों में 120 रन बनाए। दिनेश चांदीमल ने 54 रन का योगदान दिया जबकि सोनल दिनुशा ने 43 और मदुशंका ने 23 रन की उपयोगी पारी खेली थी।

    अब मुकाबला बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है। वेस्टइंडीज के पास पहली पारी में बढ़त लेने का सुनहरा मौका है जबकि श्रीलंका तीसरे दिन शुरुआती विकेट लेकर मैच में फिर से वापसी करना चाहेगा।

  • अटापट्टू की कप्तानी पारी से श्रीलंका की शानदार जीत, सेमीफाइनल की उम्मीदें बरकरार

    अटापट्टू की कप्तानी पारी से श्रीलंका की शानदार जीत, सेमीफाइनल की उम्मीदें बरकरार

    नई दिल्ली । महिला टी20 विश्व कप 2026 में श्रीलंका ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्कॉटलैंड को रोमांचक मुकाबले में 3 विकेट से हराकर सेमीफाइनल में पहुंचने की अपनी उम्मीदों को कायम रखा। मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर खेले गए इस मुकाबले में श्रीलंका ने 152 रन के लक्ष्य को 19.5 ओवर में 7 विकेट खोकर हासिल कर लिया। कप्तान चमारी अटापट्टू ने तेजतर्रार पारी खेलकर टीम की जीत की नींव रखी जबकि नीलाक्षी डी सिल्वा ने अंत तक टिककर जीत सुनिश्चित की।

    152 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका की शुरुआत अच्छी नहीं रही। इमेशा दुलानी केवल 4 रन बनाकर आउट हो गईं। इसके बाद हसीनी परेरा ने तेज शुरुआत करते हुए 17 गेंदों में 23 रन बनाए लेकिन अपनी पारी को बड़ी नहीं बना सकीं। हर्षिता समरविक्रमा ने 23 गेंदों में 27 रन बनाकर पारी को संभाला और मध्यक्रम को मजबूती दी।

    कप्तान चमारी अटापट्टू ने एक बार फिर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से मैच का रुख बदल दिया। उन्होंने केवल 16 गेंदों में 33 रन की विस्फोटक पारी खेली जिसमें 6 चौके और एक शानदार छक्का शामिल रहा। उनकी तेज बल्लेबाजी से श्रीलंका ने रन गति बनाए रखी और लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़त बनाई।

    मध्यक्रम में कविशा दिलहारी ने 18 रन का योगदान दिया जबकि नीलाक्षी डी सिल्वा ने दबाव के समय संयम दिखाते हुए 21 रन की उपयोगी नाबाद पारी खेली। उनके साथ सुगंधिका कुमारी 7 रन बनाकर नाबाद लौटीं और दोनों बल्लेबाजों ने अंतिम ओवर में टीम को जीत दिला दी।

    स्कॉटलैंड की ओर से कप्तान कैथरीन ब्राइस राहेल स्लेटर और कैथरीन फ्रेजर ने दो-दो विकेट हासिल किए लेकिन वे टीम को जीत नहीं दिला सकीं।

    इससे पहले बल्लेबाजी करते हुए स्कॉटलैंड ने निर्धारित 20 ओवर में 6 विकेट पर 151 रन बनाए। टीम के लिए सारा ब्राइस ने सबसे ज्यादा 47 रन की नाबाद पारी खेली। उन्होंने 33 गेंदों का सामना करते हुए 6 चौके लगाए। डार्सी कार्टर ने 34 रन बनाए जबकि ऐल्सा लिस्टर ने 17 गेंदों में 26 रन और कप्तान कैथरीन ब्राइस ने 23 रन का योगदान दिया।

    श्रीलंका की ओर से गेंदबाजी में मिताली अयोध्या सबसे सफल रहीं। उन्होंने 34 रन देकर 2 विकेट झटके जबकि कविशा दिलहारी को एक विकेट मिला। गेंदबाजों ने अंतिम ओवरों में स्कॉटलैंड की रन गति पर अंकुश लगाकर टीम को बड़ा स्कोर बनाने से रोक दिया।

    इस जीत के साथ श्रीलंका के पांच मैचों में छह अंक हो गए हैं और टीम ग्रुप बी की अंक तालिका में तीसरे स्थान पर पहुंच गई है। अब श्रीलंका की नजर अगले मुकाबलों में जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में जगह बनाने पर होगी।