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  • एशियन पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों की धमाकेदार शुरुआत.. पहले दिन 4 गोल्ड समेत 11 मेडल जीते

    एशियन पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों की धमाकेदार शुरुआत.. पहले दिन 4 गोल्ड समेत 11 मेडल जीते


    नागोया (जापान)।
    एशियन पैरा गेम्स 2026 (Asian Para Games 2026) में भारतीय खिलाड़ियों (Indian Players) ने पहले ही दिन धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए पदकों की झड़ी लगा दी. भारत ने सोमवार को चार गोल्ड, पांच सिल्वर और दो ब्रॉन्ज समेत कुल 11 पदक अपने नाम किए. इस शानदार शुरुआत के साथ भारत (India) पदक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंच गया।

    शूटिंग में मोना अग्रवाल, पैरा एथलेटिक्स में निषाद कुमार, सौम्या और रिंकू ने गोल्ड मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया. वहीं, तीरंदाजी में शीतल देवी ने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी कर अपने प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया. उन्होंने राकेश कुमार के साथ मिलकर मिक्स्ड टीम स्पर्धा में नया विश्व रिकॉर्ड भी बनाया।


    शूटिंग में मोना का गोल्ड, अवनि को सिल्वर

    भारत के लिए पदकों का सिलसिला शूटिंग से शुरू हुआ. महिला 10 मीटर एयर राइफल SH1 फाइनल में मोना अग्रवाल ने शानदार वापसी करते हुए गोल्ड मेडल जीता. 2024 पेरिस पैरालंपिक की कांस्य पदक विजेता मोना ने छठे स्थान से आगे बढ़ते हुए 250.0 अंक हासिल किए और एशियन पैरा गेम्स का रिकॉर्ड बनाया.

    दो बार की पैरालंपिक चैम्पियन अवनि लेखरा 249.6 अंक के साथ दूसरे स्थान पर रहीं. दोनों भारतीय खिलाड़ियों के बीच मुकाबला बेहद करीबी रहा. मोना ने महज 0.4 अंक के अंतर से गोल्ड अपने नाम किया.

    इस पदक के साथ भारत ने 2028 लॉस एंजिल्स पैरालंपिक के लिए दूसरा कोटा स्थान भी हासिल किया. मोना पिछले महीने दक्षिण कोरिया के चांगवोन में विश्व शूटिंग पैरा स्पोर्ट चैम्पियनशिप में सिल्वर जीतकर एक कोटा पहले ही हासिल कर चुकी थीं.


    निषाद, सौम्या और रिंकू ने एथलेटिक्स में चमकाया

    शाम होते-होते पैरा एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का जलवा देखने को मिला. दो बार के पैरालंपिक सिल्वर मेडलिस्ट निषाद कुमार ने पुरुषों की लॉन्ग जंप T47 स्पर्धा में 7.11 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड जीता. खास बात यह रही कि निषाद पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय लॉन्ग जंप प्रतियोगिता में उतरे थे. बचपन में घास काटने वाली मशीन से हुए हादसे में उनका दायां हाथ कट गया था, लेकिन उन्होंने अपने जज्बे और मेहनत से इतिहास रच दिया.

    महिलाओं की 1500 मीटर T12/T13 स्पर्धा में दृष्टिबाधित धाविका सौम्या ने 5 मिनट 12.39 सेकंड का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीता. भारत की वेंकटेश राधा ने 5 मिनट 30.90 सेकंड के समय के साथ सिल्वर हासिल किया.

    पुरुषों की भाला फेंक F46 स्पर्धा में भारत ने गोल्ड और सिल्वर दोनों पर कब्जा जमाया. रिंकू ने 65.11 मीटर के थ्रो के साथ पहला स्थान हासिल किया, जबकि अजीत सिंह 65.02 मीटर के प्रयास के साथ दूसरे स्थान पर रहे. दोनों भारतीय खिलाड़ियों का यह सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था.

    दृष्टिबाधित खिलाड़ियों की T11 स्पर्धा में भारत की रवन्नी वलासनैनी को भी ब्रॉन्ज मेडल मिला. मूल रूप से तीसरे स्थान पर रहने वाली रक्षित्था राजू को तकनीकी नियमों के उल्लंघन के कारण अयोग्य घोषित किए जाने के बाद रवन्नी तीसरे स्थान पर पहुंचीं.


    जूडो में कोकिला का सिल्वर, कपिल को ब्रॉन्ज

    जूडो में भी भारतीय खिलाड़ियों ने दो पदक जीते. दृष्टिबाधित कोकिला ने महिलाओं के J2-52 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल हासिल किया. फाइनल में उन्हें किर्गिस्तान की आइबिके उलानबेक क्यजी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा.

    पुरुषों के J1-70 किलोग्राम वर्ग में कपिल परमार ने ब्रॉन्ज मेडल जीता. सेमीफाइनल में इंडोनेशिया के जुनेदी से 0-1 से हारने के बाद कपिल ने कांस्य पदक के मुकाबले में इंडोनेशिया के ही अहनफ रफली शिदकी को 1-0 से हराया.


    स्विमिंग में रवि ने जीता सिल्वर

    स्विमिंग में भारत के रवि कार्तिक बुडिगिना ने पुरुषों की 100 मीटर फ्रीस्टाइल S13 स्पर्धा में 56.68 सेकंड का समय निकालकर सिल्वर मेडल जीता. इस वर्ग में कम दृष्टिबाधित खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं.


    टेबल टेनिस और बैडमिंटन में भी पदक पक्के

    टेबल टेनिस में भारत ने तीन वर्गों में पदक पक्के किए. पैरालंपिक सिल्वर मेडलिस्ट भाविना पटेल ने चीन की झांग मियाओ को 3-1 से हराकर क्लास 4-5 के सेमीफाइनल में जगह बनाई. सोनलबेन ने महिला क्लास 3 के क्वार्टर फाइनल में थाईलैंड की दरारत असायुत को 3-1 से शिकस्त दी.

    प्राची पांडे ने महिला क्लास 6 में थाईलैंड की कानोकपॉर्न फाथुमचाई को 11-5, 11-4, 11-13, 12-10 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया. इस जीत के साथ भारत ने क्लास 6 में एशियन पैरा गेम्स का अपना पहला पदक सुनिश्चित किया.

    बैडमिंटन में नितेश कुमार और थुलासिमथी मुरुगेसन की जोड़ी ने मिक्स्ड डबल्स SL3-SU5 वर्ग के ग्रुप बी में अपराजित रहते हुए सेमीफाइनल में जगह बनाई. भारतीय जोड़ी ने चीन के चेन पेंगफेई और हुआंग जुआन को 21-4, 21-18 से हराया. इससे भारत का एक और पदक पक्का हो गया.

    पेरिस पैरालंपिक चैम्पियन नितेश ने पुरुष एकल SL3 में दक्षिण कोरिया के जू डोंगजे को 21-13, 21-15 से हराया. वहीं, रुथिक रघुपति ने पुरुष एकल SU5 वर्ग में थाईलैंड के सोमसिरी प्रीचा को 21-12, 21-12 से मात दी।

  • संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी में किसे मिलेगी ओपनिंग की जिम्मेदारी? चेतेश्वर पुजारा ने बताई प्लेइंग-11 की चुनौती

    संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी में किसे मिलेगी ओपनिंग की जिम्मेदारी? चेतेश्वर पुजारा ने बताई प्लेइंग-11 की चुनौती

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग-11 में मौका मिलने का इंतजार करना पड़ सकता है। न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज से पहले टीम के संयोजन को लेकर चर्चा तेज है। पूर्व भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा का मानना है कि न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में वैभव के लिए अंतिम ग्यारह में जगह बनाना आसान नहीं होगा। उन्होंने इसकी वजह टीम का संतुलन, ऑलराउंडर्स की जरूरत और शीर्ष क्रम में पहले से मौजूद बल्लेबाजों को बताया है।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी20 सीरीज का आगाज 22 अक्टूबर से क्राइस्टचर्च में होना है। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि टीम प्रबंधन वैभव सूर्यवंशी को शुरुआती मुकाबलों में मौका देता है या उन्हें बेंच पर इंतजार करना पड़ता है। युवा बल्लेबाज को लेकर चर्चा इसलिए भी अहम है, क्योंकि टीम में पहले से ऐसे खिलाड़ी मौजूद हैं, जो ओपनिंग की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।

    न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में टीम संतुलन अहम

    चेतेश्वर पुजारा के अनुसार, न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में टीम का संतुलन काफी मायने रखेगा। ऐसी परिस्थितियों में टीम को अधिक ऑलराउंडर्स की जरूरत पड़ सकती है, जिससे प्लेइंग-11 में बल्लेबाजों के लिए उपलब्ध जगह सीमित हो जाती है। इसी कारण शीर्ष क्रम में कई बल्लेबाजों को एक साथ शामिल करना टीम प्रबंधन के लिए चुनौती बन सकता है।

    पुजारा ने संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी के विकल्प पर बात करते हुए कहा कि दोनों में से किसी एक को ओपनिंग की जिम्मेदारी दी जा सकती है। उनके मुताबिक, न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में दोनों खिलाड़ियों को एक साथ प्लेइंग-11 में शामिल करना मुश्किल नजर आता है। ऐसे में वैभव को अवसर के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि युवा बल्लेबाज को आगे मौके जरूर मिलेंगे।

    अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन पर भरोसा

    टीम में ओपनिंग के विकल्पों को देखते हुए अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। कप्तान श्रेयस अय्यर पहले ही इन दोनों बल्लेबाजों की अहमियत का जिक्र कर चुके हैं। दोनों खिलाड़ियों ने टीम के लिए उपयोगी प्रदर्शन किया है और उनकी मौजूदगी शीर्ष क्रम में प्रतिस्पर्धा बढ़ाती है।

    लगातार रन बनाने वाले बल्लेबाजों को टीम से बाहर करना आसान फैसला नहीं होता। यही वजह है कि वैभव सूर्यवंशी को मौका देने के लिए टीम प्रबंधन को बल्लेबाजी क्रम और अन्य खिलाड़ियों की भूमिकाओं के बीच संतुलन बनाना होगा। हालांकि, खिलाड़ियों की फिटनेस या टीम की जरूरतों के अनुसार परिस्थितियां बदलने पर वैभव के लिए प्लेइंग-11 में जगह बन सकती है।

    संजू सैमसन की फॉर्म पर पुजारा ने क्या कहा?
    चेतेश्वर पुजारा ने संजू सैमसन के हालिया प्रदर्शन में आए उतार-चढ़ाव पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने संजू का बचाव करते हुए कहा कि टी20 क्रिकेट में शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों से निरंतरता की उम्मीद को लेकर लोगों की धारणा हमेशा सही नहीं होती। इस प्रारूप में प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव आना सामान्य बात है।

    पुजारा के मुताबिक, संजू सैमसन को पूरी तरह आउट ऑफ फॉर्म मानना उचित नहीं है। टी20 क्रिकेट में कई बार बल्लेबाज को अपनी लय हासिल करने के लिए एक अच्छी पारी की जरूरत होती है। उनका मानना है कि संजू एक अच्छी पारी खेलकर दोबारा फॉर्म में लौट सकते हैं।

    इस तरह न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी टी20 सीरीज में भारतीय टीम का संयोजन चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। एक ओर संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा जैसे स्थापित विकल्प हैं, तो दूसरी ओर वैभव सूर्यवंशी को अवसर मिलने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि टीम प्रबंधन परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किस संयोजन के साथ मैदान पर उतरता है।

  • बाबर आजम का वर्ल्ड रिकॉर्ड, 141 वनडे पारियों में बनाए 6671 रन; हाशिम अमला को पछाड़ा, विराट कोहली तीसरे नंबर पर

    बाबर आजम का वर्ल्ड रिकॉर्ड, 141 वनडे पारियों में बनाए 6671 रन; हाशिम अमला को पछाड़ा, विराट कोहली तीसरे नंबर पर

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के स्टार बल्लेबाज बाबर आजम ने वनडे क्रिकेट में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने अपने वनडे करियर की 141 पारियों में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। श्रीलंका के खिलाफ ट्राई सीरीज के पहले मुकाबले में 45 रनों की पारी खेलने के दौरान बाबर ने यह उपलब्धि हासिल की। इस रिकॉर्ड के साथ उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के पूर्व सलामी बल्लेबाज हाशिम अमला को पीछे छोड़ दिया, जबकि भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली इस सूची में तीसरे स्थान पर खिसक गए हैं।

    बाबर आजम ने वनडे क्रिकेट में अब तक 141 पारियों में 6671 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका औसत 53.37 का रहा है। उनके नाम इस प्रारूप में 20 शतक और 38 अर्धशतक दर्ज हैं। श्रीलंका के खिलाफ मुकाबले में वह अपना अर्धशतक पूरा नहीं कर सके, लेकिन 45 रनों की पारी ने उनके रिकॉर्ड में एक नया अध्याय जोड़ दिया। इसी मैच के दौरान बाबर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 16000 रन भी पूरे किए। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले पाकिस्तान के पांचवें बल्लेबाज बने।

    हाशिम अमला का रिकॉर्ड टूटा

    बाबर आजम से पहले वनडे क्रिकेट की 141 पारियों में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड दक्षिण अफ्रीका के पूर्व सलामी बल्लेबाज हाशिम अमला के नाम था। अमला ने अपनी शुरुआती 141 वनडे पारियों में 6626 रन बनाए थे। बाबर ने 6671 रन के साथ उन्हें पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल कर लिया। दोनों बल्लेबाजों के बीच इस सूची में 45 रनों का अंतर है।

    हाशिम अमला अपने वनडे करियर में तेजी से रन बनाने और विभिन्न व्यक्तिगत उपलब्धियां हासिल करने के लिए जाने जाते रहे हैं। कई प्रमुख रन संबंधी पड़ावों पर उन्होंने विराट कोहली से भी पहले उपलब्धियां दर्ज की थीं। हालांकि, 141 पारियों के बाद सर्वाधिक रन बनाने के मामले में अब बाबर आजम उनसे आगे निकल गए हैं।

    विराट कोहली तीसरे स्थान पर

    इस सूची में भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली तीसरे स्थान पर हैं। उन्होंने वनडे करियर की शुरुआती 141 पारियों में 6224 रन बनाए थे। बाबर आजम और हाशिम अमला के मुकाबले इस आंकड़े के आधार पर कोहली तीसरे पायदान पर हैं। हालांकि, वनडे क्रिकेट में कुल रनों के मामले में विराट कोहली अब भी दुनिया के प्रमुख बल्लेबाजों में शामिल हैं।

    कोहली ने वनडे क्रिकेट में 305 पारियों में 15109 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका औसत 58.78 रहा है। उनके नाम वनडे प्रारूप में 55 शतक दर्ज हैं, जो इस प्रारूप में सबसे अधिक शतकों का रिकॉर्ड है। इस तरह शुरुआती 141 पारियों में रनों की सूची और पूरे वनडे करियर के कुल रनों की सूची में बल्लेबाजों की स्थिति अलग-अलग है।

    141 पारियों के बाद सबसे ज्यादा वनडे रन
    बाबर आजम इस सूची में 6671 रनों के साथ पहले स्थान पर हैं। हाशिम अमला ने 6626 रन बनाकर दूसरा स्थान हासिल किया था, जबकि विराट कोहली की शुरुआती 141 पारियों में 6224 रन रहे। इन आंकड़ों के आधार पर बाबर ने दोनों दिग्गज बल्लेबाजों को पीछे छोड़ दिया है। यह रिकॉर्ड उनके वनडे करियर में लगातार रन बनाने की क्षमता को दर्शाता है।

    पाकिस्तान ने श्रीलंका को 37 रन से हराया
    पाकिस्तान, श्रीलंका और इंग्लैंड के बीच ट्राई सीरीज पाकिस्तान में खेली जा रही है। टूर्नामेंट के पहले मुकाबले में मेजबान पाकिस्तान ने श्रीलंका को 37 रनों से हराकर जीत के साथ शुरुआत की। पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 306 रनों का लक्ष्य रखा। टीम की ओर से सलमान आगा ने शानदार शतक लगाया। उन्होंने 90 गेंदों में 10 चौकों और एक छक्के की मदद से 107 रन बनाए। उनके अलावा पाकिस्तान का कोई अन्य बल्लेबाज 50 रनों का आंकड़ा नहीं छू सका।

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम 268 रन पर सिमट गई। शाहीन अफरीदी की अगुवाई में पाकिस्तान के गेंदबाजों ने प्रभावी प्रदर्शन किया और टीम को 37 रनों से जीत दिलाई। इस जीत के साथ पाकिस्तान ने ट्राई सीरीज में अपना अभियान शुरू किया। बाबर आजम की व्यक्तिगत उपलब्धि और टीम की जीत ने इस मुकाबले को पाकिस्तान क्रिकेट के लिए खास बना दिया।

  • Ind W vs ZIM W : शेफाली-मंधाना की तूफानी पारियां… टीम इंडिया ने जिम्बाब्वे को 9 विकेट से रौंदा

    Ind W vs ZIM W : शेफाली-मंधाना की तूफानी पारियां… टीम इंडिया ने जिम्बाब्वे को 9 विकेट से रौंदा


    रायपुर।
    शेफाली वर्मा (Shafali Verma) की तूफानी बल्लेबाजी और स्मृति मंधाना (Smriti Mandhana) की शानदार पारी के दम पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम (Indian Women’s Cricket Team) ने जिम्बाब्वे (Zimbabwe) को दूसरे टी20 मुकाबले में नौ विकेट से हरा दिया। रविवार को खेले गए इस मैच में भारत ने 103 रनों के लक्ष्य को महज 8.5 ओवर में हासिल कर लिया। इस जीत के साथ ही टीम इंडिया ने तीन मैचों की टी20 सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। शेफाली वर्मा ने 25 गेंदों में 55 रनों की विस्फोटक पारी खेली, जबकि कप्तान स्मृति मंधाना 47 रन बनाकर नाबाद लौटीं। दोनों ने पहले विकेट के लिए 96 रनों की साझेदारी कर जिम्बाब्वे के गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया। इस सीरीज जीत के साथ स्मृति मंधाना ने पूर्णकालिक कप्तान के रूप में अपने कार्यकाल की शुरुआत भी जीत के साथ की।


    शेफाली वर्मा ने 25 गेंदों में जड़ी फिफ्टी

    103 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को शेफाली वर्मा और स्मृति मंधाना ने शानदार शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और जिम्बाब्वे के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया।शेफाली ने महज 25 गेंदों में 55 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी के दौरान चौकों और छक्कों की बरसात की। ऑफ स्पिनर बिलव्ड बिजा की गेंद पर छक्का लगाकर शेफाली ने अपना अर्धशतक पूरा किया। यह उनके टी20 इंटरनेशनल करियर का 22वां अर्धशतक रहा। भारतीय ओपनर ने मिशेल मावुंगा के एक ओवर में लगातार तीन गेंदों पर 4, 4 और 6 रन बटोरकर अपने इरादे साफ कर दिए। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी के सामने जिम्बाब्वे की गेंदबाज बेबस नजर आईं।


    स्मृति मंधाना ने भी दिखाया दम

    भारतीय कप्तान स्मृति मंधाना ने भी शानदार बल्लेबाजी की। उन्होंने नाबाद 47 रन बनाए और शेफाली के साथ मिलकर टीम को जीत की दहलीज तक पहुंचाया। मंधाना ने तेज गेंदबाज न्याशा ग्वांजुरा के खिलाफ लगातार चार चौके जड़कर अपनी लय का प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने ओलिंडर चारे की गेंद पर शानदार इनसाइड-आउट छक्का लगाकर भारत को जीत दिला दी। भारत ने 103 रनों का लक्ष्य सिर्फ 8.5 ओवर में एक विकेट खोकर हासिल कर लिया। शेफाली और मंधाना की साझेदारी ने मुकाबले को एकतरफा बना दिया।

    भारतीय गेंदबाजों ने जिम्बाब्वे को 102 रन पर रोका
    इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने बड़ा स्कोर खड़ा करने में नाकाम रही। निर्धारित 20 ओवर में टीम आठ विकेट खोकर सिर्फ 102 रन बना सकी। तेज गेंदबाज नंदनी शर्मा ने जिम्बाब्वे को शुरुआती झटका दिया। उन्होंने सलामी बल्लेबाज केलिस न्द्लोवु को 11 गेंदों में बिना खाता खोले बोल्ड कर दिया। पावरप्ले में जिम्बाब्वे की टीम एक विकेट के नुकसान पर सिर्फ 20 रन बना सकी। इस दौरान टीम को केवल एक चौका मिला। पावरप्ले समाप्त होने के दो गेंद बाद बिलव्ड बिजा भी पवेलियन लौट गईं, जिससे जिम्बाब्वे की मुश्किलें और बढ़ गईं।


    चिपो तिरिपानो और कप्तान जोसेफिन नकोमो ने संभाली पारी

    शुरुआती झटकों के बाद चिपो तिरिपानो और कप्तान जोसेफिन नकोमो ने पारी को संभालने की कोशिश की। दोनों के बीच चौथे विकेट के लिए 45 रनों की साझेदारी हुई, जो जिम्बाब्वे की पारी की सबसे बड़ी साझेदारी रही। तिरिपानो ने 32 गेंदों में 34 रन बनाए, जबकि नकोमो 27 रन बनाकर नाबाद रहीं। तिरिपानो को 20 और 22 रन के निजी स्कोर पर जीवनदान भी मिला। उन्होंने भारतीय स्पिनर श्री चरणी के खिलाफ लगातार दो रिवर्स स्वीप चौके भी लगाए। इस साझेदारी के दौरान जिम्बाब्वे की टीम ने सात चौके लगाए। सातवें से 15वें ओवर के बीच टीम ने 56 रन जुटाकर स्कोर को आगे बढ़ाया।


    निकी प्रसाद ने एक ओवर में दिए दो झटके

    भारत की ओर से ऑफ स्पिनर निकी प्रसाद ने शानदार गेंदबाजी करते हुए दो विकेट हासिल किए। उन्होंने तिरिपानो को विकेट के पीछे ऋचा घोष के हाथों कैच कराया और फिर न्याशा ग्वांजुरा को एलबीडब्ल्यू आउट कर दिया। निकी प्रसाद लगातार दो विकेट लेकर हैट्रिक के करीब पहुंच गई थीं, लेकिन वह यह उपलब्धि हासिल नहीं कर सकीं। इसके बावजूद भारतीय गेंदबाजों ने जिम्बाब्वे को बड़ा स्कोर बनाने से रोक दिया। भारतीय गेंदबाजों के सामूहिक प्रदर्शन के बाद बल्लेबाजों ने लक्ष्य को बेहद आसानी से हासिल कर लिया। इस जीत के साथ भारत ने तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है।

  • 2.5 ओवर में 50 रन ठोककर भारत ने रचा इतिहास, बारिश ने रोका मुकाबला, नमन धीर ने 6 गेंदों में जड़े 24 रन

    2.5 ओवर में 50 रन ठोककर भारत ने रचा इतिहास, बारिश ने रोका मुकाबला, नमन धीर ने 6 गेंदों में जड़े 24 रन


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम ने वेस्टइंडीज के खिलाफ बेंगलुरु में खेले गए पांचवें टी20 मुकाबले में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से नया रिकॉर्ड बना दिया। टीम इंडिया ने महज 2.5 ओवर यानी 17 गेंदों में 50 रन पूरे कर लिए। यह टी20 क्रिकेट में भारत का सबसे तेज अर्धशतक रहा। भारतीय बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही तेज रफ्तार से रन बनाए और विरोधी गेंदबाजों पर दबाव बनाया। हालांकि बारिश के कारण मुकाबला पूरा नहीं हो सका और आखिरकार मैच रद्द करना पड़ा।
    एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में बारिश के कारण टॉस में काफी देरी हुई। इसके बाद दोनों टीमों के बीच मैच को नौ-नौ ओवरों का कर दिया गया। भारतीय बल्लेबाजों ने कम ओवरों में बड़ा स्कोर खड़ा करने के इरादे से आक्रामक रुख अपनाया। टीम ने केवल 2.5 ओवरों में 50 रन का आंकड़ा छूकर अपना पिछला रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। यह प्रदर्शन भारतीय बल्लेबाजी की तेज गति और छोटे प्रारूप में बड़े लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ने की क्षमता को दिखाता है।
    इससे पहले इसी सीरीज में भारत ने हैदराबाद में वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन ओवर में 50 रन पूरे किए थे। न्यूजीलैंड के खिलाफ गुवाहाटी में भारतीय टीम ने 3.1 ओवर में यह आंकड़ा हासिल किया था। एशियन गेम्स 2026 के दौरान जापान के निस्शिन में पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने 3.2 ओवर में अर्धशतक पूरा किया था। वहीं अफगानिस्तान के खिलाफ दिल्ली में भारतीय बल्लेबाजों ने 3.3 ओवर में 50 रन पूरे किए थे। बेंगलुरु में बनाया गया नया रिकॉर्ड इन सभी उपलब्धियों से आगे निकल गया।
    भारतीय पारी में ईशान किशन ने तेज शुरुआत करते हुए केवल 10 गेंदों में 30 रन बनाए। उनकी पारी में पांच बाउंड्री शामिल रहीं। कप्तान श्रेयस अय्यर ने भी आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 14 गेंदों में 22 रन जोड़े। संजू सैमसन ने 16 रन का योगदान दिया। वहीं नमन धीर ने कम गेंदों में तेजी से रन बनाकर दर्शकों का ध्यान खींचा। वह छह गेंदों पर 24 रन बनाकर नाबाद रहे। इन पारियों की मदद से भारतीय टीम ने बारिश से प्रभावित मुकाबले में भी बड़े स्कोर की ओर तेजी से कदम बढ़ाए।
    वेस्टइंडीज की ओर से कीमो पॉल और शमार स्प्रिंगर ने दो-दो विकेट हासिल किए जबकि शमार जोसेफ को एक सफलता मिली। भारतीय टीम ने 7.4 ओवरों की समाप्ति तक पांच विकेट खोकर 118 रन बना लिए थे। इसके बाद बारिश ने एक बार फिर खेल रोक दिया। मौसम में सुधार नहीं होने के कारण मुकाबले को रद्द करने का फैसला किया गया। इस तरह दर्शकों को मैच का पूरा रोमांच देखने का अवसर नहीं मिल सका।
    भले ही पांचवां टी20 मुकाबला पूरा नहीं हो पाया लेकिन भारतीय टीम का तेज अर्धशतक चर्चा का विषय बन गया। कम गेंदों में 50 रन पूरे करना टी20 प्रारूप में आक्रामक बल्लेबाजी का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। ईशान किशन और श्रेयस अय्यर की तेज पारियों के साथ नमन धीर की विस्फोटक बल्लेबाजी ने भारतीय पारी को रफ्तार दी। बेंगलुरु में बना यह रिकॉर्ड भारतीय टी20 क्रिकेट के सबसे तेज अर्धशतकों में खास स्थान रखेगा।

  • भारत-वेस्टइंडीज टी20 सीरीज ड्रॉ, शाई होप बने सबसे बड़े हीरो, श्रेयस अय्यर ने मानी टीम इंडिया की रणनीति में कमी

    भारत-वेस्टइंडीज टी20 सीरीज ड्रॉ, शाई होप बने सबसे बड़े हीरो, श्रेयस अय्यर ने मानी टीम इंडिया की रणनीति में कमी


    नई दिल्ली। भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेली गई पांच मैचों की टी20 सीरीज 2-2 की बराबरी पर समाप्त हो गई। शनिवार को बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में होने वाला पांचवां और निर्णायक मुकाबला बारिश के कारण नहीं खेला जा सका। लगातार बारिश और मैदान की परिस्थितियों को देखते हुए अंपायरों ने मैच रद्द करने का फैसला किया। इसके साथ ही सीरीज का परिणाम बराबरी पर रहा। मुकाबला रद्द होने के बाद भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप के प्रदर्शन की तारीफ की और माना कि उनकी बल्लेबाजी ने भारतीय टीम के सामने बड़ी चुनौती खड़ी की।
    श्रेयस अय्यर ने मैच के बाद कहा कि भारतीय टीम दूसरे और चौथे टी20 मुकाबले में बेहतर गेंदबाजी कर सकती थी। अगर इन मैचों में गेंदबाज अपनी योजनाओं को सही तरीके से लागू कर पाते तो परिणाम अलग हो सकता था। उन्होंने वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी को शानदार बताते हुए कहा कि विरोधी टीम को उसके प्रदर्शन का पूरा श्रेय दिया जाना चाहिए। अय्यर के मुताबिक शाई होप ने बेहतरीन बल्लेबाजी की और उनकी पारियों ने भारतीय टीम के लिए मुश्किलें बढ़ा दीं। उन्होंने होप को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई भी दी।
    इस सीरीज में शाई होप वेस्टइंडीज की सफलता के सबसे प्रमुख खिलाड़ियों में रहे। उन्होंने चार पारियों में दो शतकों की मदद से कुल 261 रन बनाए। इनमें से 204 रन उन्होंने केवल 95 गेंदों पर बनाए। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाया और वेस्टइंडीज को सीरीज में वापसी करने का मौका दिया। होप को उनके लगातार शानदार प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया।
    सीरीज के दूसरे और चौथे टी20 मुकाबले में वेस्टइंडीज ने भारत को हराया था। इन दोनों मैचों में शाई होप ने शतक लगाकर अपनी टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। उनके प्रदर्शन की बदौलत वेस्टइंडीज ने सीरीज में 2-2 की बराबरी हासिल कर ली। भारतीय टीम के लिए इन मुकाबलों में विपक्षी बल्लेबाजों को रोकना चुनौतीपूर्ण रहा। कप्तान अय्यर की टिप्पणी से भी साफ हुआ कि टीम को अपनी गेंदबाजी योजनाओं के क्रियान्वयन पर ध्यान देने की जरूरत है।
    वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी में शरफेन रदरफोर्ड का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा। बाएं हाथ के इस आक्रामक बल्लेबाज ने दूसरे टी20 में 37 गेंदों पर 84 रन की शानदार पारी खेली थी। इसके बाद चौथे मुकाबले में उन्होंने 26 गेंदों पर नाबाद 49 रन बनाकर टीम को मजबूती दी। होप और रदरफोर्ड की पारियों ने वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी को धार दी और भारतीय टीम के सामने चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा की।
    सीरीज बराबरी पर समाप्त होने के बाद शाई होप ने भी अपनी टीम के प्रदर्शन पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि टीम जीत के काफी करीब पहुंची और इतने वर्षों में इस तरह की प्रतिस्पर्धा दिखाना खिलाड़ियों के सामूहिक प्रयास को दर्शाता है। होप के अनुसार सीरीज में टीम ने खुद को अच्छा मौका दिया और यह संकेत है कि वेस्टइंडीज एक इकाई के रूप में आगे बढ़ रही है।
    पांचवें मुकाबले के बारिश में धुलने से दोनों टीमों को निर्णायक मैच खेलने का मौका नहीं मिला। भारतीय टीम जहां अपनी गेंदबाजी की कमियों से सबक लेकर आगे बढ़ना चाहेगी वहीं वेस्टइंडीज के लिए शाई होप और शरफेन रदरफोर्ड का प्रदर्शन सकारात्मक पहलू रहा। बराबरी पर खत्म हुई सीरीज ने दोनों टीमों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा को दिखाया।

  • एबी डिविलियर्स ने बताया विराट कोहली को देखकर कैसा था पहला इंप्रेशन, बोले- शुरुआत में घमंडी लगते थे भारतीय स्टार बल्लेबाज

    एबी डिविलियर्स ने बताया विराट कोहली को देखकर कैसा था पहला इंप्रेशन, बोले- शुरुआत में घमंडी लगते थे भारतीय स्टार बल्लेबाज

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली और दक्षिण अफ्रीका के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज एबी डिविलियर्स की दोस्ती क्रिकेट जगत में काफी लोकप्रिय रही है। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए साथ खेलते हुए दोनों ने कई यादगार पारियां खेलीं और अपनी बल्लेबाजी से टीम को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकाला। मैदान पर उनकी साझेदारी जितनी प्रभावशाली रही, मैदान के बाहर भी दोनों के बीच दोस्ती उतनी ही मजबूत दिखाई दी। हालांकि, डिविलियर्स ने हाल ही में विराट कोहली को पहली बार देखने के बाद बनी अपनी शुरुआती धारणा के बारे में दिलचस्प खुलासा किया है।

    एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान डिविलियर्स से पूछा गया कि विराट कोहली को पहली बार देखने पर उनके मन में क्या विचार आए थे। इस सवाल के जवाब में उन्होंने मजाकिया अंदाज में स्वीकार किया कि शुरुआत में उन्हें विराट घमंडी और मगरूर लगते थे। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है विराट खुद भी उनकी इस बात से सहमत हों। हालांकि, डिविलियर्स ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी को पूरी तरह गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए। वह इसे हल्के-फुल्के अंदाज में कह रहे थे और उनका मकसद विराट के व्यक्तित्व पर नकारात्मक टिप्पणी करना नहीं था।

    डिविलियर्स के मुताबिक, जब विराट कोहली 19, 20 या 21 साल के थे, तब उनके अंदर आत्मविश्वास भरपूर था। युवा उम्र में ही विराट अपने खेल को लेकर काफी दृढ़ दिखाई देते थे और उन्हें खुद की क्षमताओं पर पूरा भरोसा था। डिविलियर्स ने इसी आत्मविश्वास को उनके शुरुआती व्यवहार की एक प्रमुख वजह बताया। उनके अनुसार, कई बार किसी खिलाड़ी का खुद पर मजबूत भरोसा दूसरों को घमंड या मगरूर होने जैसा लग सकता है, जबकि वास्तविकता में वह अपने प्रदर्शन को लेकर आश्वस्त होता है।

    उन्होंने यह भी समझाया कि शीर्ष स्तर पर क्रिकेट खेलने और सफलता हासिल करने के लिए आत्मविश्वास बेहद जरूरी होता है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जगह बनाए रखने और लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के लिए खिलाड़ी को अपनी क्षमताओं पर भरोसा करना पड़ता है। युवा खिलाड़ियों में यह विश्वास कभी-कभी उनके व्यवहार में अधिक आक्रामकता के रूप में नजर आ सकता है। विराट कोहली के मामले में भी डिविलियर्स ने उनके शुरुआती अंदाज को इसी नजरिए से देखा।

    समय के साथ विराट के व्यक्तित्व में आए बदलाव का जिक्र करते हुए डिविलियर्स ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ वह एक खिलाड़ी और इंसान के तौर पर अधिक परिपक्व हुए। उनके शुरुआती करियर में खुद को साबित करने की चुनौती काफी बड़ी थी। ऐसे दौर में उनका आक्रामक रवैया और खुद पर जरूरत से ज्यादा भरोसा होने की छवि कुछ लोगों को अलग तरह से दिखाई दे सकती थी। लेकिन अनुभव बढ़ने और क्रिकेट में लगातार आगे बढ़ने के साथ उनके व्यवहार में भी बदलाव आया।

    विराट कोहली ने अपने करियर में बल्लेबाजी के दम पर कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उनकी आक्रामकता और जीत के लिए लगातार प्रयास करने की प्रवृत्ति उनके खेल की पहचान रही है। मैदान पर उनका जोशीला अंदाज कई बार चर्चा का विषय बनता रहा है, लेकिन उनके प्रशंसक इसी प्रतिस्पर्धी भावना को उनकी ताकत भी मानते हैं। डिविलियर्स की टिप्पणी इसी शुरुआती छवि और समय के साथ आए बदलाव को सामने लाती है।

    आईपीएल के दौरान विराट कोहली और एबी डिविलियर्स ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए लंबे समय तक साथ खेला। दोनों के बीच तालमेल ने टीम को कई मुकाबलों में मजबूत स्थिति दिलाई। बल्लेबाजी के दौरान एक-दूसरे की शैली को समझना और मैदान पर बेहतरीन साझेदारियां करना उनकी जोड़ी की खासियत रही। साथ खेलने के दौरान उनकी दोस्ती भी मजबूत हुई और दोनों कई मौकों पर एक-दूसरे की तारीफ करते दिखाई दिए।

    डिविलियर्स का यह बयान विराट कोहली के शुरुआती दिनों की उनकी व्यक्तिगत धारणा पर आधारित है। उन्होंने इसे मजाकिया संदर्भ में रखते हुए विराट के आत्मविश्वास और समय के साथ उनके परिपक्व होने की बात कही। उनकी टिप्पणी से यह भी स्पष्ट होता है कि किसी खिलाड़ी के शुरुआती व्यवहार को समझने के लिए उसकी उम्र, अनुभव और करियर की परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।

  • भारत-वेस्टइंडीज पांचवें टी20 में ईशान किशन का तूफान, छक्का मारकर स्टेडियम के बाहर पहुंचाई गेंद, अंपायरों को मंगानी पड़ी नई बॉल

    भारत-वेस्टइंडीज पांचवें टी20 में ईशान किशन का तूफान, छक्का मारकर स्टेडियम के बाहर पहुंचाई गेंद, अंपायरों को मंगानी पड़ी नई बॉल


    नई दिल्ली ।
    भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांचवें टी20 मुकाबले में ईशान किशन ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से दर्शकों का ध्यान खींचा। बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले जा रहे इस मुकाबले में बारिश के कारण खेल प्रभावित हुआ और मैच को घटाकर नौ-नौ ओवर का कर दिया गया। टॉस जीतने के बाद वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम पहले बल्लेबाजी करने उतरी, लेकिन शुरुआती ओवर में ही उसे पहला झटका लग गया।

    वेस्टइंडीज के गेंदबाज कीमो पॉल ने अभिषेक शर्मा को छह रन के निजी स्कोर पर आउट कर भारत को शुरुआती नुकसान पहुंचाया। इसके बाद बल्लेबाजी करने आए ईशान किशन ने तेजी से रन बनाकर भारतीय पारी को गति दी। उन्होंने क्रीज पर आते ही कैरेबियाई गेंदबाजों पर आक्रमण शुरू कर दिया। उनकी बल्लेबाजी में बड़े शॉट खेलने का अंदाज साफ दिखाई दिया और कुछ ही गेंदों में उन्होंने मुकाबले का माहौल बदल दिया।

    ईशान की पारी का सबसे खास क्षण रोमारियो शेफर्ड के ओवर में देखने को मिला। उन्होंने लेग साइड की ओर हटकर घुटने के बल बैठते हुए फाइन लेग के ऊपर से स्कूप शॉट खेला। गेंद इतनी दूर गई कि स्टेडियम की सीमा पार कर बाहर जा गिरी। इस जोरदार छक्के के बाद मैच में नई गेंद की जरूरत पड़ी और अंपायरों को गेंद बदलनी पड़ी। उनके इस शॉट ने मैदान पर मौजूद दर्शकों के बीच उत्साह बढ़ा दिया।

    ईशान किशन ने अपनी पारी में केवल 10 गेंदों का सामना किया और 30 रन बनाकर आउट हो गए। शमर जोसेफ की गेंद पर रोवमैन पॉवेल ने उनका कैच पकड़ा। हालांकि, उनकी पारी ज्यादा लंबी नहीं चली, लेकिन कम गेंदों में बनाए गए रनों ने भारतीय बल्लेबाजी को तेज शुरुआत देने में मदद की। इस दौरान उन्होंने बड़े शॉट लगाने की अपनी क्षमता दिखाई। मुकाबले में लगाया गया छक्का सीरीज के छक्कों का शतक पूरा होने से भी जुड़ा रहा।

    बारिश के कारण मैच की परिस्थितियों में बदलाव करना पड़ा। मुकाबले को नौ-नौ ओवर का किए जाने के बाद गेंदबाजों के लिए भी विशेष नियम लागू किए गए। नए खेल नियमों के अनुसार, प्रत्येक टीम का कोई भी गेंदबाज अधिकतम दो ओवर डाल सकता है, जबकि एक गेंदबाज को केवल एक ओवर करने की अनुमति होगी। छोटे प्रारूप में बल्लेबाजों को कम समय में तेजी से रन बनाने का मौका मिलता है, वहीं गेंदबाजों के सामने भी सीमित ओवरों में विकेट निकालने की चुनौती रहती है।

    ह मुकाबला सीरीज के लिहाज से बेहद अहम था, क्योंकि पांचवें टी20 से पहले भारत और वेस्टइंडीज के बीच श्रृंखला 2-2 से बराबर थी। ऐसे में दोनों टीमों के लिए यह मैच निर्णायक महत्व रखता था। बारिश से प्रभावित खेल में बल्लेबाजी और गेंदबाजी के दौरान गलतियों की गुंजाइश कम हो गई थी। भारत की ओर से ईशान की तेज पारी ने शुरुआती चरण में टीम को आक्रामक रुख अपनाने का अवसर दिया।

    इस मुकाबले के लिए भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने प्लेइंग इलेवन में दो बदलाव किए। चार साल बाद भारतीय टीम में वापसी करने वाले भुवनेश्वर कुमार को मयंक यादव की जगह शामिल किया गया। भारत की प्लेइंग इलेवन में अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, नमन धीर, अक्षर पटेल, भुवनेश्वर कुमार, प्रिंस यादव और अर्शदीप सिंह शामिल रहे।

    वेस्टइंडीज की टीम में शाई होप कप्तान और विकेटकीपर की भूमिका में उतरे। उनके साथ ज्वेल एंड्रयू, शिमरोन हेटमायर, रोवमैन पॉवेल, शेरफेन रदरफोर्ड, रोमारियो शेफर्ड, रोस्टन चेज, कीमो पॉल, शमर स्प्रिंगर, गुडाकेश मोटी और शमर जोसेफ को प्लेइंग इलेवन में जगह मिली। सीरीज बराबर होने के कारण दोनों टीमें निर्णायक मुकाबले में जीत हासिल कर ट्रॉफी अपने नाम करने के इरादे से उतरीं।

  • ऑस्ट्रेलिया की जीत से WTC फाइनल की रेस हुई रोमांचक, भारत के पास बचे सात टेस्ट, जानिए कैसे मिलेगी फाइनल में जगह

    ऑस्ट्रेलिया की जीत से WTC फाइनल की रेस हुई रोमांचक, भारत के पास बचे सात टेस्ट, जानिए कैसे मिलेगी फाइनल में जगह

    नई दिल्ली । वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) 2025-27 के फाइनल में पहुंचने की दौड़ ऑस्ट्रेलिया की दक्षिण अफ्रीका पर जीत के बाद और दिलचस्प हो गई है। डरबन में खेले गए टेस्ट मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने मेजबान दक्षिण अफ्रीका को 214 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। इस जीत से ऑस्ट्रेलिया ने अंक तालिका में अपनी शीर्ष स्थिति मजबूत कर ली, जबकि मौजूदा चैंपियन दक्षिण अफ्रीका तीसरे स्थान पर खिसक गया। न्यूजीलैंड दूसरे और भारतीय टीम पांचवें स्थान पर बनी हुई है।

    ऑस्ट्रेलिया ने मौजूदा WTC चक्र में 11 मैचों में नौ जीत दर्ज की हैं। उसके खाते में 108 अंक हैं और अंक प्रतिशत यानी पीसीटी 81.82 हो गया है। न्यूजीलैंड छह मैचों में चार जीत, एक हार और एक ड्रॉ के साथ 72.22 प्रतिशत अंक लेकर दूसरे स्थान पर है। दक्षिण अफ्रीका ने पांच मैचों में तीन जीत और दो हार के बाद 36 अंक जुटाए हैं। उसका पीसीटी 60 है। बांग्लादेश 55.56 प्रतिशत अंकों के साथ चौथे स्थान पर है।

    भारतीय टीम ने अब तक 11 टेस्ट खेले हैं, जिनमें पांच जीत, चार हार और दो ड्रॉ शामिल हैं। भारत के खाते में 68 अंक हैं और उसका पीसीटी 51.52 है। टीम ने हाल ही में श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज 1-0 से जीती थी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की ताजा जीत के बाद भारतीय टीम की रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ। बांग्लादेश फिलहाल भारत से आगे है, इसलिए टीम इंडिया को अपनी स्थिति बेहतर बनाने के लिए आगामी मुकाबलों में लगातार जीत दर्ज करनी होगी।

    अंक तालिका में इंग्लैंड 38.54 प्रतिशत अंकों के साथ छठे स्थान पर है। उसने 16 मैचों में सात जीत, आठ हार और एक ड्रॉ दर्ज किया है। धीमी ओवर गति के कारण उसके 14 अंक काटे गए हैं। श्रीलंका 33.33 प्रतिशत अंकों के साथ सातवें, वेस्टइंडीज 20.83 प्रतिशत के साथ आठवें और पाकिस्तान 4.63 प्रतिशत अंकों के साथ नौवें स्थान पर है। वेस्टइंडीज के दो और पाकिस्तान के नौ अंक पेनल्टी के कारण काटे गए हैं।

    भारत के सामने अब सात टेस्ट मैच बाकी हैं। इनमें न्यूजीलैंड के खिलाफ उसके घर में दो मुकाबले और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू मैदान पर पांच टेस्ट शामिल हैं। फाइनल में पहुंचने के लिए भारत को इन मैचों में अधिकतम जीत हासिल करने के साथ अन्य टीमों के नतीजों पर भी नजर रखनी होगी। WTC में टीमों की रैंकिंग कुल अंकों के बजाय अंक प्रतिशत के आधार पर तय होती है। जीत पर 12, ड्रॉ पर चार और टाई होने पर छह अंक मिलते हैं। चक्र के अंत में अंक तालिका की शीर्ष दो टीमें फाइनल खेलती हैं।

    अगर भारत अपने बाकी सभी सात टेस्ट जीत लेता है, तो उसके कुल अंक 152 हो जाएंगे। इस चक्र में भारत के कुल 18 मैच होने हैं और अधिकतम उपलब्ध अंक 216 हैं। इस हिसाब से उसका पीसीटी 70.37 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यह स्कोर भारत को फाइनल की दौड़ में मजबूत स्थिति में ला सकता है। हालांकि, क्वालिफिकेशन दूसरी टीमों के प्रदर्शन और उनके अंतिम अंक प्रतिशत पर भी निर्भर करेगा। केवल छह मैच जीतना अपने आप में फाइनल में जगह की गारंटी नहीं देता।

    ऑस्ट्रेलिया की मौजूदा स्थिति भारत के लिए बड़ी चुनौती है। अगर ऑस्ट्रेलिया लगातार जीत दर्ज करता है, तो उसका अंक प्रतिशत भारत के संभावित स्कोर से ऊपर रह सकता है। दूसरी ओर, दक्षिण अफ्रीका का ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बाकी मुकाबलों में जीतना भारतीय टीम के लिए मददगार हो सकता है, क्योंकि इससे ऑस्ट्रेलिया के अंक प्रतिशत पर असर पड़ेगा। भारत को अपने पांचों घरेलू टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को हराने की भी जरूरत पड़ सकती है।

    न्यूजीलैंड भी भारत की राह में चुनौती बना हुआ है। उसके पास अभी दस टेस्ट बाकी हैं और मौजूदा अंक प्रतिशत 72.22 है। भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने दोनों मुकाबले जीतने होंगे, लेकिन इसके बावजूद कीवी टीम अन्य मैचों में अच्छा प्रदर्शन करके अपनी स्थिति मजबूत कर सकती है।

    पिछली WTC साइकिलों के नतीजे बताते हैं कि फाइनल में पहुंचने के लिए कोई एक स्थायी अंक प्रतिशत तय नहीं है। 2021-23 चक्र में भारत 58.80 प्रतिशत अंकों के साथ दूसरे और ऑस्ट्रेलिया 66.67 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर रहा था। 2023-25 चक्र में दक्षिण अफ्रीका ने 69.44 और ऑस्ट्रेलिया ने 67.54 प्रतिशत अंकों के साथ फाइनल के लिए क्वालिफाई किया था। ऐसे में भारत की उम्मीदें अभी कायम हैं, लेकिन सातों टेस्ट में बेहतर प्रदर्शन और प्रतिद्वंद्वी टीमों के नतीजे निर्णायक होंगे।

  • पैरा एशियन गेम्स 2026 की आज होगी भव्य शुरुआत… भारत के 168 खिलाड़ी लेंगे हिस्सा

    पैरा एशियन गेम्स 2026 की आज होगी भव्य शुरुआत… भारत के 168 खिलाड़ी लेंगे हिस्सा


    आइची-नागोया।
    भारत (India) रविवार से शुरू हो रहे पैरा एशियन गेम्स (Para Asian Games) में अपने पिछले प्रदर्शन को पीछे छोड़ने के इरादे से उतरेगा। हालांकि, इस बार भारतीय दल का आकार पहले के मुकाबले काफी छोटा है। इसके अलावा पैरा निशानेबाजी और पैरा साइकिलिंग में चयन प्रक्रिया को लेकर उठे विवादों ने भी खेलों से पहले माहौल को प्रभावित किया है। ऐसे में भारत के लिए 2023 में जीते गए 111 पदकों की उपलब्धि को दोहराना एक बड़ी चुनौती होगी। भारत ने चीन के हांगझोउ में 2023 में आयोजित पिछले पैरा एशियन गेम्स में 29 स्वर्ण, 31 रजत और 51 कांस्य सहित कुल 111 पदक जीते थे। यह इन खेलों में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। इस बार भारतीय खिलाड़ी (Indian players) इस रिकॉर्ड को बेहतर करने के लक्ष्य (New Medal Record) के साथ मैदान में उतरेंगे।


    303 से घटकर 168 हुआ भारतीय दल

    आइची-नागोया (Aichi-Nagoya) में आयोजित होने वाले इन खेलों में भारत ने 11 खेलों के लिए 168 खिलाड़ियों का दल भेजा है, जबकि हांगझोउ में भारत की ओर से 303 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। भागीदारी के लिए कड़े किए गए कोटे और खेल कार्यक्रमों में बदलाव के कारण भारतीय दल के आकार में कमी आई है। खिलाड़ियों की संख्या में आई इस गिरावट का असर पदकों की कुल संख्या पर भी पड़ सकता है। ऐसे में भारत की सफलता काफी हद तक अनुभवी पदक विजेताओं के प्रदर्शन और नए खिलाड़ियों की महाद्वीपीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की क्षमता पर निर्भर करेगी। आधिकारिक उद्घाटन समारोह से पहले ही भारतीय खिलाड़ी पैरा बैडमिंटन, पैरा टेबल टेनिस, बोकिया और दृष्टिबाधित फुटबॉल में अपने अभियान की शुरुआत कर चुके हैं।


    पैरा एथलेटिक्स से सबसे ज्यादा उम्मीदें

    हांगझोउ पैरा एशियन गेम्स में भारत ने पैरा एथलेटिक्स में 18 स्वर्ण सहित कुल 55 पदक जीते थे। इस बार भी एथलेटिक्स भारतीय दल के लिए पदकों का बड़ा स्रोत बन सकता है। हालांकि, इस स्पर्धा में भारत के खिलाड़ियों की संख्या 123 से घटकर 62 रह गई है। पैरालंपिक चैंपियन और विश्व रिकॉर्डधारी भाला फेंक खिलाड़ी सुमित अंतिल से स्वर्ण पदक की उम्मीद होगी। ऊंची कूद में निषाद कुमार, फर्राटा दौड़ में प्रीति पाल और क्लब थ्रो में धरमबीर सिंह भारतीय चुनौती को मजबूती देंगे।


    तीरंदाजी, बैडमिंटन और निशानेबाजी पर नजर

    तीरंदाजी में भुजाहीन तीरंदाज शीतल देवी और पायल नाग से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। वहीं, पैरालंपिक रिकर्व चैंपियन हरविंदर सिंह और विश्व चैंपियन तोमान कुमार भी पदक के दावेदारों में शामिल हैं। पैरा बैडमिंटन में कई बार के चैंपियन प्रमोद भगत और सुहास एलवाई पर भारत की उम्मीदों का बड़ा दारोमदार होगा। निशानेबाजी में पैरालंपिक चैंपियन अवनि लेखरा भारतीय चुनौती की अगुवाई करेंगी। पैरा टेबल टेनिस में टोक्यो पैरालंपिक की रजत पदक विजेता भाविना पटेल से भी पदक की आस रहेगी।

    चयन प्रक्रिया पर विवाद से बढ़ी मुश्किलें
    खेलों से पहले पैरा निशानेबाजी और पैरा साइकिलिंग में चयन प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आए हैं। करीब 150 पैरा निशानेबाजों ने भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) से कथित वित्तीय अनियमितताओं, वसूली और चयन संबंधी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। भारतीय पैरालंपिक समिति के अध्यक्ष देवेंद्र झाझड़िया ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से पूरी की गई। वहीं, खेल मंत्रालय ने निशानेबाजी टीम के मुख्य कोच को दल से हटाकर उनकी जगह दूसरे कोच को शामिल किया। इस फैसले का कई प्रमुख निशानेबाजों ने विरोध किया। पैरा साइकिलिंग में भी चयन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी। संयुक्त चयन समिति ने छह साइकिलिस्ट का चयन किया था, लेकिन खेल मंत्रालय ने केवल अरशद शेख के नाम को मंजूरी दी।


    अनुभवी खिलाड़ियों और नए चेहरों पर टिकी निगाहें

    भारतीय दल के सामने इस बार चुनौती केवल पदकों की संख्या बढ़ाने की नहीं, बल्कि सीमित खिलाड़ियों के साथ बेहतर प्रदर्शन करने की भी है। एक ओर सुमित अंतिल, अवनि लेखरा, प्रमोद भगत और भाविना पटेल जैसे अनुभवी खिलाड़ियों से पदक की उम्मीदें हैं, तो दूसरी ओर नए खिलाड़ियों के पास बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा साबित करने का मौका होगा। अब देखना होगा कि छोटा भारतीय दल विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हांगझोउ के 111 पदकों के रिकॉर्ड को पार कर पाता है या नहीं।