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  • एनरी डर्कसन की विस्फोटक फिफ्टी से साउथ अफ्रीका की रोमांचक जीत, पाकिस्तान को 2 विकेट से हराया

    एनरी डर्कसन की विस्फोटक फिफ्टी से साउथ अफ्रीका की रोमांचक जीत, पाकिस्तान को 2 विकेट से हराया


    नई दिल्ली । महिला टी20 विश्व कप 2026 के 11वें मुकाबले में साउथ अफ्रीका ने रोमांचक संघर्ष के बाद पाकिस्तान को 2 विकेट से हराकर महत्वपूर्ण जीत अपने नाम कर ली। एजबेस्टन मैदान पर खेले गए इस मुकाबले में पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 126 रन बनाए थे, जिसके जवाब में साउथ अफ्रीका ने 16.5 ओवर में 8 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। मैच के दौरान कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले, लेकिन अंततः एनरी डर्कसन की शानदार अर्धशतकीय पारी ने प्रोटियाज टीम को जीत की मंजिल तक पहुंचाया।

    127 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी साउथ अफ्रीका की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। कप्तान लौरा वोल्वार्ट केवल 8 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं, जबकि अनुभवी बल्लेबाज सुने लुस भी सिर्फ 5 रन ही जोड़ सकीं। शुरुआती विकेट गिरने से टीम दबाव में आ गई थी, लेकिन एनरी डर्कसन ने मोर्चा संभालते हुए पाकिस्तान के गेंदबाजों पर पलटवार किया।

    डर्कसन ने मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट लगाए और महज 35 गेंदों में 52 रनों की शानदार पारी खेली। उनकी इस पारी में 7 चौके और 2 शानदार छक्के शामिल रहे। उन्होंने न केवल रनगति को बनाए रखा, बल्कि विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव भी बनाया। दूसरी ओर नादिन डे क्लर्क ने भी अहम भूमिका निभाई और 28 गेंदों में 37 रन बनाकर टीम की जीत की नींव मजबूत की।

    हालांकि डर्कसन के आउट होने के बाद मुकाबला फिर रोमांचक हो गया। साउथ अफ्रीका ने लगातार अंतराल पर विकेट गंवाए और पाकिस्तान की टीम ने मैच में जोरदार वापसी की। एक समय ऐसा लग रहा था कि मुकाबला पाकिस्तान की ओर झुक सकता है, लेकिन निचले क्रम के बल्लेबाजों ने संयम बनाए रखा और टीम को जीत दिलाने में सफलता हासिल की।

    पाकिस्तान की ओर से कप्तान फातिमा सना ने गेंद और बल्ले दोनों से शानदार प्रदर्शन किया। गेंदबाजी में उन्होंने 16 रन देकर 3 महत्वपूर्ण विकेट झटके, जबकि सादिया इकबाल ने भी दो बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा। इसके बावजूद उनकी मेहनत टीम को जीत नहीं दिला सकी।

    इससे पहले पाकिस्तान की बल्लेबाजी बेहद कमजोर शुरुआत के कारण बड़े स्कोर तक नहीं पहुंच सकी। मुनीबा अली पहली ही गेंद पर आउट हो गईं, जबकि गुल फिरोजा, नतालिया परवेज, आयशा जफर और रमीन शमीम भी बड़ी पारी नहीं खेल सकीं। शीर्ष क्रम की नाकामी के बाद कप्तान फातिमा सना ने शानदार जिम्मेदारी निभाई और 38 गेंदों में नाबाद 55 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी में 6 चौके और 2 छक्के लगाए। तूबा हसन ने भी 23 रनों का उपयोगी योगदान दिया, जिसकी बदौलत पाकिस्तान 126 रन तक पहुंच पाया।

    साउथ अफ्रीका की गेंदबाजी में मारिजाने कैप सबसे सफल रहीं। उन्होंने 4 ओवर में 23 रन देकर 3 विकेट लिए। शबनीम इस्माइल और अयबोंगा खाका ने भी एक-एक विकेट हासिल कर टीम की जीत में अहम योगदान दिया।

    इस जीत के साथ साउथ अफ्रीका ने टूर्नामेंट में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है, जबकि पाकिस्तान को अगले मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन कर वापसी करनी होगी। मैच की सबसे बड़ी नायिका एनरी डर्कसन रहीं, जिनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने साउथ अफ्रीका को मुश्किल हालात से निकालकर जीत दिलाई।

  • ब्लंडेल और फिलिप्स ने संभाली न्यूजीलैंड की पारी, दूसरे टेस्ट के पहले दिन 291/7 का मजबूत स्कोर

    ब्लंडेल और फिलिप्स ने संभाली न्यूजीलैंड की पारी, दूसरे टेस्ट के पहले दिन 291/7 का मजबूत स्कोर


    नई दिल्ली । न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच केनिंग्टन ओवल में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन का खेल रोमांच और उतार-चढ़ाव से भरपूर रहा। शुरुआती झटकों के बावजूद न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी करते हुए दिन का खेल समाप्त होने तक 7 विकेट के नुकसान पर 291 रन बना लिए। टॉम ब्लंडेल और ग्लेन फिलिप्स की जिम्मेदार पारियों ने टीम को संकट से निकालकर सम्मानजनक स्थिति में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

    इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया और शुरुआत में उसका यह निर्णय सही साबित होता नजर आया। न्यूजीलैंड के सलामी बल्लेबाज डेवोन कॉनवे मात्र 9 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद कप्तान टॉम लाथम ने कुछ अच्छे शॉट जरूर लगाए, लेकिन वह बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं हो सके और 27 रन बनाकर आउट हो गए। हेनरी निकोल्स ने भी शुरुआत तो की, लेकिन 24 रन के निजी स्कोर पर उनकी पारी समाप्त हो गई।

    युवा बल्लेबाज रचिन रविंद्र से टीम को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन वह भी 33 रन बनाकर आउट हो गए। 107 रन के स्कोर तक न्यूजीलैंड अपने चार प्रमुख बल्लेबाजों के विकेट गंवा चुका था और टीम दबाव में दिखाई दे रही थी। ऐसे समय में अनुभवी बल्लेबाज टॉम ब्लंडेल ने मोर्चा संभाला और डेरिल मिचेल के साथ मिलकर पारी को स्थिरता प्रदान की।

    ब्लंडेल और मिचेल ने पांचवें विकेट के लिए 81 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की, जिससे न्यूजीलैंड की पारी फिर से पटरी पर लौट आई। मिचेल 44 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन ब्लंडेल ने अपना संघर्ष जारी रखा। उन्होंने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन मिश्रण दिखाते हुए 84 गेंदों में 51 रन बनाए। उनकी पारी में छह आकर्षक चौके शामिल रहे।

    ब्लंडेल के आउट होने के बाद ग्लेन फिलिप्स ने जिम्मेदारी संभाली और शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। फिलिप्स ने तेज गति से रन बनाते हुए इंग्लैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा। दिन का खेल समाप्त होने तक वह 74 गेंदों में 49 रन बनाकर नाबाद लौटे। अपनी पारी में उन्होंने नौ चौके लगाए और दूसरे दिन अर्धशतक पूरा करने के करीब पहुंच गए। उनके साथ काइल जेमिसन 6 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं।

    इंग्लैंड की गेंदबाजी की बात करें तो युवा गेंदबाज सन्नी बेकर और जैकब बेथेल ने सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन किया। दोनों ने दो-दो विकेट हासिल किए। जोफ्रा आर्चर, मैथ्यू फिशर और जोश टंग को एक-एक सफलता मिली। हालांकि दिन के अंतिम सत्र में इंग्लिश गेंदबाज न्यूजीलैंड के निचले क्रम को पूरी तरह दबाव में नहीं ला सके।

    इस मैच में इंग्लैंड की टीम कई बदलावों के साथ मैदान पर उतरी है। नियमित कप्तान बेन स्टोक्स और तेज गेंदबाज गस एटकिंसन चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे, जिसके चलते जो रूट टीम की कप्तानी कर रहे हैं। वहीं चोटिल ओली रोबिन्सन की जगह जोफ्रा आर्चर को अंतिम एकादश में शामिल किया गया है।

  • हैरी केन ने रचा इतिहास, वर्ल्ड कप में गैरी लिनेकर के रिकॉर्ड की बराबरी कर बने इंग्लैंड के संयुक्त शीर्ष स्कोरर

    हैरी केन ने रचा इतिहास, वर्ल्ड कप में गैरी लिनेकर के रिकॉर्ड की बराबरी कर बने इंग्लैंड के संयुक्त शीर्ष स्कोरर


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के अपने पहले ही मुकाबले में इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह दुनिया के सबसे भरोसेमंद स्ट्राइकरों में क्यों गिने जाते हैं। क्रोएशिया के खिलाफ खेले गए मुकाबले में केन ने दो शानदार गोल दागकर न केवल अपनी टीम को 4-2 की महत्वपूर्ण जीत दिलाई, बल्कि इंग्लैंड फुटबॉल इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय भी जोड़ दिया। इन दो गोलों के साथ केन ने विश्व कप इतिहास में इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा गोल करने के गैरी लिनेकर के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली।

    मैच से पहले हैरी केन को इस उपलब्धि तक पहुंचने के लिए दो गोलों की जरूरत थी और उन्होंने यह काम पहले हाफ में ही पूरा कर दिया। केन ने 12वें मिनट में पेनल्टी के जरिए अपना पहला गोल दागा और टीम को शुरुआती बढ़त दिलाई। इस गोल के साथ उन्होंने एक और खास रिकॉर्ड अपने नाम किया। वह फीफा वर्ल्ड कप इतिहास में शूटआउट को छोड़कर पांच पेनल्टी गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। इसके बाद हाफ टाइम से ठीक पहले उन्होंने अपना दूसरा गोल दागकर इंग्लैंड की स्थिति मजबूत कर दी और गैरी लिनेकर के 10 विश्व कप गोलों के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली।

    हैरी केन का विश्व कप सफर 2018 में शुरू हुआ था और तब से वह लगातार बड़े मंच पर अपनी छाप छोड़ते आए हैं। रूस में खेले गए 2018 विश्व कप में उन्होंने छह गोल दागकर गोल्डन बूट अपने नाम किया था। उस टूर्नामेंट में इंग्लैंड सेमीफाइनल तक पहुंचा था और केन टीम के सबसे बड़े नायक बनकर उभरे थे। इसके बाद कतर में आयोजित 2022 विश्व कप में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और दो महत्वपूर्ण गोल किए। अब 2026 विश्व कप में उन्होंने अपने गोलों की संख्या 10 तक पहुंचाकर इतिहास रच दिया है।

    इंग्लैंड के लिए केन का योगदान केवल विश्व कप तक सीमित नहीं है। वह राष्ट्रीय टीम के सर्वकालिक शीर्ष गोल स्कोरर भी हैं और पिछले कई वर्षों से टीम की सफलता के प्रमुख स्तंभ रहे हैं। उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने यूरो 2020 और यूरो 2024 के फाइनल तक का सफर तय किया। हालांकि टीम खिताब जीतने में सफल नहीं हो सकी, लेकिन केन के नेतृत्व और प्रदर्शन की हर स्तर पर सराहना हुई।

    क्रोएशिया के खिलाफ मुकाबले में इंग्लैंड ने आक्रामक फुटबॉल का शानदार प्रदर्शन किया। केन के दो गोलों के अलावा जूड बेलिंगहैम और मार्कस रैशफोर्ड ने भी एक-एक गोल दागा। इंग्लैंड की यह जीत न केवल टूर्नामेंट में आत्मविश्वास बढ़ाने वाली रही, बल्कि इसने यह भी संकेत दिया कि टीम खिताब की मजबूत दावेदारों में शामिल है।

    अब सभी की निगाहें हैरी केन पर टिकी हैं, क्योंकि अगले गोल के साथ वह गैरी लिनेकर को पीछे छोड़कर फीफा वर्ल्ड कप इतिहास में इंग्लैंड के सबसे सफल गोल स्कोरर बन जाएंगे। जिस फॉर्म में केन नजर आ रहे हैं, उसे देखते हुए यह रिकॉर्ड टूटना सिर्फ समय की बात लग रही है।

  • जूड बेलिंगहैम ने रचा इतिहास, चार बड़े इंटरनेशनल टूर्नामेंट खेलने वाले सबसे युवा यूरोपीय फुटबॉलर बने

    जूड बेलिंगहैम ने रचा इतिहास, चार बड़े इंटरनेशनल टूर्नामेंट खेलने वाले सबसे युवा यूरोपीय फुटबॉलर बने


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के पहले ही मुकाबले में इंग्लैंड के युवा स्टार जूड बेलिंगहैम ने ऐसा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया, जिसने उन्हें यूरोपीय फुटबॉल के सबसे खास खिलाड़ियों की सूची में शामिल कर दिया है। इंग्लैंड ने ग्रुप एल के अपने पहले मैच में क्रोएशिया को 4-2 से हराकर टूर्नामेंट का शानदार आगाज किया, लेकिन इस जीत के साथ सबसे ज्यादा चर्चा बेलिंगहैम की ऐतिहासिक उपलब्धि की रही।

    22 वर्षीय जूड बेलिंगहैम अब चार बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलने वाले सबसे युवा यूरोपीय खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने अब तक दो फीफा वर्ल्ड कप और दो यूईएफए यूरो चैंपियनशिप में हिस्सा लिया है। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने जर्मनी के प्रतिभाशाली खिलाड़ी जमाल मुसियाला का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया। बेलिंगहैम की यह उपलब्धि उनकी निरंतरता, प्रतिभा और कम उम्र में हासिल की गई सफलता का शानदार उदाहरण मानी जा रही है।

    क्रोएशिया के खिलाफ मुकाबले में बेलिंगहैम ने न सिर्फ रिकॉर्ड बनाया बल्कि मैदान पर भी अपनी उपयोगिता साबित की। उन्होंने एक शानदार गोल दागा और मिडफील्ड में टीम के खेल को नियंत्रित करते हुए इंग्लैंड की जीत में अहम भूमिका निभाई। कप्तान हैरी केन के दो गोलों के अलावा बेलिंगहैम और मार्कस रैशफोर्ड के गोलों ने इंग्लैंड को 4-2 की मजबूत जीत दिलाई।

    बेलिंगहैम का अंतरराष्ट्रीय सफर बेहद कम उम्र में शुरू हुआ था। उन्होंने मात्र 17 साल और 136 दिन की उम्र में इंग्लैंड की सीनियर टीम के लिए डेब्यू किया था। इंग्लैंड के इतिहास में उनसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले सिर्फ दो खिलाड़ी—वेन रूनी और थियो वालकॉट—रहे हैं। इसके बाद उन्होंने लगातार अपने प्रदर्शन से खुद को टीम का अहम हिस्सा बना लिया।

    उनका पहला बड़ा टूर्नामेंट यूरो 2020 था, जहां उन्होंने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद उन्होंने फीफा वर्ल्ड कप 2022, यूरो 2024 और अब फीफा वर्ल्ड कप 2026 में हिस्सा लेकर यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम किया। इतनी कम उम्र में चार बड़े टूर्नामेंट खेलने की उपलब्धि इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में वह इंग्लैंड फुटबॉल के सबसे बड़े चेहरों में से एक बन सकते हैं।

    मैच के बाद बेलिंगहैम ने कहा कि देश का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व की बात है और हर बार इंग्लैंड की जर्सी पहनते समय वह अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके लिए राष्ट्रीय टीम की जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण है और वह मैदान पर उतरते ही पूरी ऊर्जा के साथ खेलते हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह सीजन काफी लंबा और चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन बड़े मैचों में टीम के लिए योगदान देना हमेशा उनकी प्राथमिकता रही है।

    चार बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलने वाले सबसे युवा यूरोपीय खिलाड़ियों की सूची में अब जूड बेलिंगहैम शीर्ष पर पहुंच गए हैं। उनके बाद जमाल मुसियाला, पेड्री, जेरेमी डोकू, माइकल ओवेन और लुकास पोडोल्स्की का नाम आता है। यह उपलब्धि न केवल बेलिंगहैम के करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव है, बल्कि इंग्लैंड फुटबॉल के उज्ज्वल भविष्य का भी संकेत देती है।

  • भारत ने वर्ल्ड चैंपियन जर्मनी को 3-1 से रौंदा, एफआईएच प्रो लीग में दिखाया दम

    भारत ने वर्ल्ड चैंपियन जर्मनी को 3-1 से रौंदा, एफआईएच प्रो लीग में दिखाया दम


    नई दिल्ली । एफआईएच हॉकी प्रो लीग 2025-26 में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने एक बार फिर अपनी ताकत का शानदार प्रदर्शन करते हुए मौजूदा विश्व चैंपियन जर्मनी को 3-1 से शिकस्त दे दी। रॉटरडैम में खेले गए इस मुकाबले में भारत ने शुरुआत से ही आक्रामक और संतुलित खेल दिखाया तथा जर्मनी को पूरे मैच में दबाव में बनाए रखा। इस जीत ने न केवल भारतीय टीम के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि टीम बड़े मुकाबलों में किसी भी दिग्गज को चुनौती देने की क्षमता रखती है।

    मैच की शुरुआत से ही भारतीय खिलाड़ियों ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और जर्मन टीम को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। इसका फायदा भारत को सातवें मिनट में मिला, जब मनदीप सिंह ने शानदार मूव बनाते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। इस गोल के बाद भारतीय टीम का आत्मविश्वास और बढ़ गया। पहले क्वार्टर के अंतिम क्षणों में शिलानंद लाकड़ा ने बेहतरीन स्ट्राइक लगाकर भारत की बढ़त को दोगुना कर दिया। 13वें मिनट में आए इस गोल ने जर्मनी को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया और स्कोर 2-0 हो गया।

    दूसरे क्वार्टर में जर्मनी ने वापसी की कोशिश की और भारतीय हाफ में लगातार हमले किए। हालांकि भारतीय डिफेंस चट्टान की तरह मजबूती से खड़ा रहा। जर्मनी को मिले पेनल्टी कॉर्नर भी भारतीय रक्षा पंक्ति और गोलकीपर मोहित की सतर्कता के सामने बेअसर साबित हुए। अमित रोहिदास ने भी महत्वपूर्ण मौके पर शानदार ब्लॉक लगाकर टीम को बढ़त बनाए रखने में मदद की। पहले हाफ के अंत तक भारत 2-0 से आगे रहा।

    तीसरे क्वार्टर में भारत ने अपनी आक्रामक रणनीति जारी रखी। 35वें मिनट में नीलकांत शर्मा ने शानदार व्यक्तिगत कौशल का प्रदर्शन करते हुए कई जर्मन डिफेंडरों को छकाया और शानदार गोल दागकर भारत को 3-0 की मजबूत बढ़त दिला दी। यह गोल मैच का सबसे आकर्षक क्षणों में से एक रहा। हालांकि तीसरे क्वार्टर के अंत में जर्मनी के राफेल हार्टकोफ ने गोल कर अंतर कम करने की कोशिश की, लेकिन तब तक भारत मैच पर पूरी तरह पकड़ बना चुका था।

    अंतिम क्वार्टर में जर्मनी ने वापसी के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने अनुशासित और संयमित खेल दिखाया। काउंटर-प्रेसिंग और विंग्स से तेज हमलों के जरिए भारत ने जर्मनी को दबाव में रखा। मैच के अंतिम मिनटों में जर्मनी को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन भारतीय डिफेंस ने उसे भी नाकाम कर दिया और 3-1 की यादगार जीत अपने नाम कर ली।

    इस मुकाबले का एक और ऐतिहासिक पहलू रहा। अनुभवी खिलाड़ी मनप्रीत सिंह ने अपना 413वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेलते हुए दिलीप टिर्की का 412 मैचों का रिकॉर्ड तोड़ दिया और भारत के लिए सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले खिलाड़ी बन गए। वहीं मिडफील्ड में शानदार प्रदर्शन करने वाले हार्दिक सिंह को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। भारत की यह जीत टीम की बढ़ती ताकत और आगामी बड़े टूर्नामेंटों के लिए उसके मजबूत इरादों का संकेत मानी जा रही है।

  • ‘टीम इंडिया के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है’: डेब्यू सीरीज में चमके गुरनूर बरार, सफलता का बताया राज

    ‘टीम इंडिया के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है’: डेब्यू सीरीज में चमके गुरनूर बरार, सफलता का बताया राज


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट को एक और उभरता हुआ तेज गेंदबाज मिल गया है। अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले युवा तेज गेंदबाज गुरनूर बरार ने अपने प्रदर्शन से सभी का ध्यान आकर्षित किया है। दाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज ने अपने पहले दोनों वनडे मुकाबलों में तीन-तीन विकेट लेकर यह साबित कर दिया कि वह भविष्य में भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण का अहम हिस्सा बन सकते हैं।

    लखनऊ में खेले गए मुकाबले के बाद गुरनूर बरार ने अपनी सफलता के पीछे घरेलू क्रिकेट और इंडिया ए टीम में मिले अनुभव को सबसे बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा कि इंडिया ए का मंच उनके लिए सीखने और खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करने का महत्वपूर्ण माध्यम साबित हुआ है।

    गुरनूर ने कहा कि जब उन्हें इंडिया ए टीम में चुना गया था, तब वह बेहद उत्साहित थे। उनके अनुसार, इंडिया ए में खेलते समय उन्होंने वही रणनीति अपनाई जो वह रणजी ट्रॉफी में इस्तेमाल करते थे। हार्ड लेंथ पर लगातार तेज गेंदबाजी करना और गेंद को स्विंग कराना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। उन्होंने बताया कि इंडिया ए में मिले अनुभव ने उन्हें यह विश्वास दिया कि वह बड़े स्तर पर भी उसी आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शन कर सकते हैं।

    युवा तेज गेंदबाज ने कहा कि उन्होंने भारतीय टीम के लिए खेलते समय भी अपनी स्वाभाविक गेंदबाजी पर भरोसा रखा। उन्होंने किसी तरह का अतिरिक्त दबाव नहीं लिया और अपनी मजबूत पक्षों पर ध्यान केंद्रित किया। बरार का मानना है कि अभी भी उनके प्रदर्शन में और सुधार की काफी गुंजाइश है और आने वाले मैचों में वह और बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं।

    उन्होंने टीम प्रबंधन और गेंदबाजी कोच की भी जमकर तारीफ की। गुरनूर ने कहा कि उन्हें कोचिंग स्टाफ से पूरा समर्थन मिला है। टीम प्रबंधन ने उन्हें कोई नई तकनीक अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया, बल्कि उनकी मौजूदा क्षमताओं पर भरोसा जताते हुए अपनी ताकत के अनुसार गेंदबाजी करने की सलाह दी। यही भरोसा उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में मददगार साबित हुआ।

    गुरनूर बरार ने कहा कि वह भगवान के आभारी हैं कि उन्हें भारतीय टीम के लिए खेलने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह तो केवल शुरुआत है और वह आने वाले वर्षों में टीम इंडिया के लिए बहुत कुछ हासिल करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य केवल टीम में जगह बनाना नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की सफलताओं में महत्वपूर्ण योगदान देना है।

    आईपीएल 2026 में गुरनूर बरार गुजरात टाइटंस का हिस्सा रहे। हालांकि उन्हें अधिक मैच खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन टीम के साथ बिताया गया समय उनके लिए बेहद मूल्यवान रहा। उन्होंने बताया कि गुजरात टाइटंस के ड्रेसिंग रूम में अनुभवी खिलाड़ियों और कोचों से बहुत कुछ सीखने को मिला।

    बरार ने कहा कि टीम में मुख्य कोच आशीष नेहरा के अलावा कगिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और इशांत शर्मा जैसे अनुभवी गेंदबाज मौजूद थे। उनके साथ समय बिताने और बातचीत करने से उन्हें गेंदबाजी के कई तकनीकी और मानसिक पहलुओं को समझने का मौका मिला।

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार शुरुआत के बाद अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें गुरनूर बरार पर टिकी हैं। यदि वह इसी तरह निरंतर प्रदर्शन करते रहे, तो भारतीय तेज गेंदबाजी को एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प मिल सकता है।

  • श्री चरणी और शेफाली की फिरकी में उलझा नीदरलैंड, भारत ने 209 रन बनाकर दर्ज की टूर्नामेंट की लगातार दूसरी जीत

    श्री चरणी और शेफाली की फिरकी में उलझा नीदरलैंड, भारत ने 209 रन बनाकर दर्ज की टूर्नामेंट की लगातार दूसरी जीत

    नई दिल्ली। महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। टूर्नामेंट के अपने दूसरे मुकाबले में भारत ने नीदरलैंड को 95 रनों के बड़े अंतर से हराकर अपनी लगातार दूसरी जीत दर्ज की। बुधवार को लीड्स के मैदान पर खेले गए इस एकतरफा मुकाबले में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 20 ओवरों में 5 विकेट के नुकसान पर 209 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया, जिसके जवाब में नीदरलैंड की पूरी टीम 17.3 ओवरों में महज 114 रनों पर ही सिमट गई।

    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम को सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा ने बेहद आक्रामक और मजबूत शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने डच गेंदबाजों की जमकर खबर ली और पहले विकेट के लिए 90 से अधिक रनों की बेहतरीन साझेदारी की। शेफाली वर्मा ने शानदार फॉर्म दिखाते हुए मात्र 32 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया, हालांकि वह 38 गेंदों में 55 रन बनाकर हीदर साइगर्स का शिकार बनीं। दूसरी छोर पर जमीं उप-कप्तान स्मृति मंधाना ने भी कप्तानी पारी खेली और 47 गेंदों में 11 चौकों और एक छक्के की मदद से 74 रनों की धुआंधार पारी खेली।

    मध्यक्रम में जेमिमा रोड्रिग्स ने 14 गेंदों में 23 रनों का उपयोगी योगदान दिया, जबकि यास्तिका भाटिया सिर्फ 3 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। अंतिम ओवरों में ऋचा घोष और कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टीम के स्कोर को 200 के पार पहुँचाया। भारतीय टीम का यह स्कोर महिला टी20 विश्व कप के इतिहास में उसका अब तक का सर्वोच्च स्कोर है, जबकि विश्व कप इतिहास में यह किसी भी टीम द्वारा बनाया गया तीसरा सबसे बड़ा स्कोर बन गया है। नीदरलैंड की ओर से गेंदबाजी करते हुए कैरोलीन डी लैंग ने दो विकेट चटकाए, जबकि आइरिस विलिंग, हीदर साइगर्स और मायरेथ वैन डेन रॉड को एक-एक सफलता मिली।

    210 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी नीदरलैंड की टीम भारतीय गेंदबाजों के सधे हुए आक्रमण के सामने शुरू से ही दबाव में नजर आई। सलामी बल्लेबाज हीदर साइगर्स ने 21 रन बनाकर टीम को संभालने की कोशिश की, लेकिन भारतीय तेज गेंदबाज नंदनी शर्मा ने उन्हें स्मृति मंधाना के हाथों कैच कराकर नीदरलैंड को पहला झटका दिया। इसके बाद डच टीम की पारी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। नियमित अंतराल पर विकेट गिरने के कारण नीदरलैंड की टीम कभी भी आवश्यक रन रेट के करीब नहीं पहुंच सकी। फीबी मोलकेन्बोर और स्टेयर कैलिस के सस्ते में आउट होने के बाद कप्तान बैबेट डी लीड और रॉबिन रिज्क भी क्रीज पर ज्यादा देर नहीं टिक सकीं।

    भारत की इस ऐतिहासिक जीत में गेंदबाजों की भूमिका बेहद अहम रही। युवा सनसनी श्री चरणी ने अपनी फिरकी का जादू बिखेरते हुए नीदरलैंड के चार बल्लेबाजों को आउट कर डच बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। बल्लेबाजी में कमाल दिखाने वाली शेफाली वर्मा ने गेंद से भी अपना हुनर दिखाया और शानदार गेंदबाजी करते हुए तीन विकेट अपने नाम किए। इसके अलावा नंदनी शर्मा को दो और अनुभवी स्पिनर दीप्ति शर्मा को एक सफलता मिली। पाकिस्तान को हराने के बाद नीदरलैंड पर मिली इस धमाकेदार जीत से भारतीय महिला टीम का आत्मविश्वास शीर्ष पर है और उसने टूर्नामेंट में अपनी स्थिति बेहद मजबूत कर ली है।

  • क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा 'सुपर वेडनेसडे': एक ही दिन में खेले जाएंगे 7 महामुकाबले, 16 घंटे तक मचेगा बल्लेबाजों का धमाल

    क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा 'सुपर वेडनेसडे': एक ही दिन में खेले जाएंगे 7 महामुकाबले, 16 घंटे तक मचेगा बल्लेबाजों का धमाल


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक क्रिकेट के इतिहास में आज का दिन यानी 17 जून खेल प्रेमियों के लिए किसी ऐतिहासिक उत्सव या बड़ी दावत से कम नहीं होने वाला है। आज दुनिया के अलग-अलग कोनों और मैदानों पर एक या दो नहीं, बल्कि कुल 7 बड़े क्रिकेट मुकाबले खेले जाने का एक अनोखा संयोग बना है।
    इन 7 मैचों में से 6 मुकाबले सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय (इंटरनेशनल) स्तर के हैं, जबकि एक मैच ‘लिस्ट ए’ क्रिकेट का हिस्सा है। इस खेल महाकुंभ की सबसे खास और गौरवशाली बात यह है कि आज अकेले भारत की तीन अलग-अलग राष्ट्रीय टीमें तीन अलग-अलग देशों में अपनी चुनौती पेश करने के लिए मैदान पर उतर रही हैं। भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे से शुरू होने वाला यह दे-दनादन क्रिकेट का सिलसिला देर रात या यूं कहें कि अगले दिन 18 जून की भोर में 3 बजे तक लगातार जारी रहेगा, जिससे प्रशंसकों को करीब 16 घंटे तक नॉन-स्टॉप रोमांच देखने को मिलेगा।

    भारतीय टीमों के इस त्रिकोणीय अभियान की बात करें तो आज इंडिया ए, मुख्य पुरुष टीम इंडिया और भारतीय महिला क्रिकेट टीम तीनों एक्शन में दिखाई देंगी। सबसे पहले सुबह 10 बजे श्रीलंका की धरती पर खेली जा रही ट्राई-नेशन वनडे सीरीज में इंडिया ए की भिड़ंत अफगानिस्तान ए से होने जा रही है।

    इसके ठीक बाद, दोपहर 1:30 बजे मुख्य भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम लखनऊ के इकाना स्टेडियम में अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के दूसरे बेहद महत्वपूर्ण वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच में जीत के इरादे से उतरेगी। वहीं, शाम के समय महिला क्रिकेट का रोमांच चरम पर होगा, जब हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय महिला टीम शाम 7:00 बजे आईसीसी महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 के एक बेहद अहम मुकाबले में नीदरलैंड की टीम का सामना करेगी।

    भारत के अलावा आज के इस महाशेड्यूल में बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया की टीमों का भी जबरदस्त दबदबा देखने को मिलने वाला है। आज इन दोनों देशों की भी दो-दो टीमें मैदान पर एक-दूसरे से लोहा लेंगी। दोपहर 1:30 बजे बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया के बीच पुरुष टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का पहला मुकाबला खेला जाएगा। इसके ठीक बाद, दोपहर 3:00 बजे महिला टी20 विश्व कप के अंतर्गत बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया की महिला टीमें एक बार फिर आमने-सामने होंगी, जो दोनों देशों के प्रशंसकों के लिए बेहद दिलचस्प होने वाला है।

    फुटबॉल जैसी गति के साथ टी20 और वनडे के इस रोमांच के बीच पारंपरिक और क्लासिक टेस्ट क्रिकेट के प्रेमियों के लिए भी आज का दिन बेहद खास है। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड की मजबूत टीमों के बीच खेली जा रही टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला भी आज दोपहर 3:30 बजे से शुरू होने जा रहा है, जो पांच दिनों तक क्रिकेट की सर्वोच्च कला का प्रदर्शन करेगा।

    दिन के अंतिम हिस्से में महिला टी20 विश्व कप का एक और कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा, जिसमें रात 11:00 बजे साउथ अफ्रीका और पाकिस्तान की महिला टीमें एक-दूसरे के खिलाफ अंक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत करने के इरादे से मैदान संभालेंगी। इस प्रकार सुबह से लेकर देर रात तक चलने वाला यह शेड्यूल क्रिकेट के हर प्रारूप के प्रशंसकों को मंत्रमुग्ध करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
  • न्यू जर्सी में एमबाप्पे का महाधमाका: जस्ट फोंटेन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड ध्वस्त, दिग्गजों की सूची में शीर्ष की ओर बढ़े फ्रांसीसी कप्तान

    न्यू जर्सी में एमबाप्पे का महाधमाका: जस्ट फोंटेन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड ध्वस्त, दिग्गजों की सूची में शीर्ष की ओर बढ़े फ्रांसीसी कप्तान


    नई दिल्ली ।
    पिछले संस्करण की उपविजेता रही फ्रांस की फुटबॉल टीम ने फीफा विश्व कप 2026 में अपने अभियान का शानदार और धमाकेदार आगाज किया है। अमेरिका के न्यू जर्सी में खेले गए ग्रुप ‘आई’ के एक बेहद रोमांचक और कड़े मुकाबले में फ्रांस ने अफ्रीकी महाद्वीप की मजबूत टीम सेनेगल को 3-1 से पराजित कर दिया। इस मुकाबले में फ्रांस की जीत के महानायक उनके स्टार स्ट्राइकर और कप्तान कायलियन एमबाप्पे रहे, जिन्होंने मैच के उत्तरार्ध में अपने जादुई खेल से पासा पलट दिया। एमबाप्पे ने मुकाबले में दो महत्वपूर्ण गोल दागे और इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत उन्होंने फुटबॉल इतिहास की एक अत्यंत प्रतिष्ठित और बड़ी उपलब्धि अपने नाम दर्ज करा ली है।

    मैच के शुरुआती हिस्से की बात करें तो पहले हाफ में सेनेगल की टीम ने उम्मीद से कहीं बेहतर और आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। मैच के 7वें मिनट में ही सेनेगल के इस्माइला सर्र ने फ्रांस के मजबूत डिफेंस को भेदते हुए गोल पोस्ट के समीप पहुंचकर पहला खतरनाक प्रयास किया। सेनेगल ने पूरे पहले हाफ में फ्रांसीसी टीम पर लगातार दबाव बनाए रखा। फ्रांस की ओर से 19वें मिनट में ओस्मान डेम्बेले ने जवाबी हमला किया, लेकिन वे गोल करने में असफल रहे। इसके बाद 25वें मिनट में सेनेगल के निकोलस जैक्सन गोल करने के बेहद करीब पहुंचे, परंतु उनका शॉट पोस्ट के ठीक बगल से बाहर निकल गया। खेल के 40वें मिनट में स्टार खिलाड़ी सादियो माने का एक बेहतरीन शॉट भी चूक गया, जिसके चलते पहला हाफ पूरी तरह से गोलरहित बराबरी पर समाप्त हुआ और पहले हाफ में एमबाप्पे भी अधिकांश समय गेंद से दूर ही नजर आए।

    हालांकि, दूसरे हाफ की शुरुआत होते ही फ्रांसीसी टीम ने अपनी रणनीति बदलते हुए बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया। मैच के 57वें मिनट में एमबाप्पे ने सेनेगल के डिफेंडरों को छकाते हुए एक बेहतरीन मौका बनाया, लेकिन सेनेगल के गोलकीपर एडौर्ड मेंडी ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे नाकाम कर दिया। फ्रांस के खिलाड़ियों ने दबाव जारी रखा और आखिरकार 66वें मिनट में गतिरोध टूट गया। माइकल ओलिसे से मिले एक सटीक पास को नियंत्रित करते हुए कप्तान कायलियन एमबाप्पे ने सेनेगल के डिफेंस को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया और गोलकीपर को चकमा देते हुए गेंद को जाल में पहुंचाकर फ्रांस को 1-0 की महत्वपूर्ण बढ़त दिला दी।

    एक गोल की बढ़त हासिल करने के बाद फ्रांस का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर पहुंच गया। मैच के 82वें मिनट में युवा फॉरवर्ड ब्रैडली बारकोला ने एक और दर्शनीय गोल दागकर फ्रांस की बढ़त को दोगुना यानी 2-0 कर दिया। निर्धारित 90 मिनट के खेल के बाद लग रहा था कि मैच इसी स्कोर पर समाप्त होगा, लेकिन रेफरी द्वारा जोड़े गए 8 मिनट के इंजरी टाइम ने मुकाबले के रोमांच को चरम पर पहुंचा दिया। इंजरी टाइम के शुरुआती पलों में सेनेगल के इब्राहिम मबाये ने एक शानदार गोल कर अपनी टीम की वापसी की उम्मीदें जगाईं और स्कोर 2-1 कर दिया। हालांकि, सेनेगल की यह खुशी कुछ ही सेकेंड टिक सकी, क्योंकि खेल खत्म होने की अंतिम सीटी बजने से ठीक पहले एमबाप्पे ने एक और अविश्वसनीय गोल दागकर फ्रांस को 3-1 से आगे कर दिया और जीत पूरी तरह पक्की कर दी।

    इस ऐतिहासिक मुकाबले में दो गोल करने के साथ ही कायलियन एमबाप्पे के नाम अब फीफा विश्व कप के इतिहास में कुल 14 गोल दर्ज हो गए हैं। इस कीर्तिमान के साथ ही उन्होंने फ्रांस के महान पूर्व खिलाड़ी जस्ट फोंटेन के 13 गोलों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है और वे अब विश्व कप इतिहास में फ्रांस के लिए सर्वाधिक गोल करने वाले इकलौते खिलाड़ी बन गए हैं। इसके साथ ही एमबाप्पे ने विश्व कप में सर्वाधिक गोल करने के मामले में जर्मनी के दिग्गज गेर्ड मुलर के 14 गोलों के सर्वकालिक रिकॉर्ड की भी बराबरी कर ली है। अब विश्व कप के इतिहास में उनसे ज्यादा गोल केवल ब्राजील के रोनाल्डो (15 गोल) और जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोस (16 गोल) के नाम दर्ज हैं। एमबाप्पे का यह शानदार फॉर्म दर्शाता है कि वे आने वाले मैचों में फुटबॉल जगत के कई और बड़े रिकॉर्ड्स को अपने नाम करने के बेहद करीब हैं।

  • मिरोस्लाव क्लोस के सर्वकालिक महान रिकॉर्ड की मेसी ने की बराबरी, केन्सास सिटी में अर्जेंटीना की धमाकेदार जीत के साथ फुटबॉल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय दर्ज

    मिरोस्लाव क्लोस के सर्वकालिक महान रिकॉर्ड की मेसी ने की बराबरी, केन्सास सिटी में अर्जेंटीना की धमाकेदार जीत के साथ फुटबॉल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय दर्ज

    नई दिल्ली । वैश्विक फुटबॉल के महाकुंभ फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर लियोनेल मेसी ने एक नया और अभूतपूर्व इतिहास रच दिया है। अमेरिका के केन्सास सिटी में अल्जीरिया के खिलाफ खेले गए एक बेहद रोमांचक मुकाबले में अर्जेंटीना के कप्तान ने अपने जादुई खेल का प्रदर्शन करते हुए शानदार हैट्रिक जमाई। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के दम पर अर्जेंटीना ने मुकाबले में 3-0 की एकतरफा और मजबूत बढ़त हासिल की। इसके साथ ही 37 वर्षीय दिग्गज खिलाड़ी लियोनेल मेसी के नाम अब फीफा वर्ल्ड कप इतिहास में कुल 16 गोल दर्ज हो गए हैं, जो खेल जगत के सबसे बड़े मंच पर एक महारिकॉर्ड के रूप में स्थापित हो गया है।

    इस शानदार और अविस्मरणीय हैट्रिक के साथ ही लियोनेल मेसी ने जर्मनी के पूर्व दिग्गज स्ट्राइकर मिरोस्लाव क्लोस के उस ऐतिहासिक रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है, जो लंबे समय से अटूट माना जा रहा था। क्लोस ने साल 2002 से 2014 के बीच चार विश्व कप संस्करणों के कुल 24 मैचों में 16 गोल दागे थे। अब मेसी और क्लोस संयुक्त रूप से फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। इस सूची में ब्राजील के महान खिलाड़ी रोनाल्डो 15 गोल के साथ दूसरे स्थान पर हैं, जबकि जर्मनी के गेर्ड मुलर और फ्रांस के युवा स्टार किलियन एमबाप्पे 14-14 गोल के साथ क्रमशः अगले पायदानों पर काबिज हैं।

    यह मेसी के लंबे और सुनहरे अंतरराष्ट्रीय करियर का एक अनूठा मोड़ है, क्योंकि उनके पांच विश्व कप संस्करणों के सफर में यह पहली बार है जब उन्होंने विश्व कप के किसी एकल मैच में हैट्रिक लगाई है। इसके साथ ही मेसी दुनिया के उन चुनिंदा खिलाड़ियों की फेहरिस्त में शामिल हो गए हैं जिन्होंने पांच अलग-अलग विश्व कप टूर्नामेंटों में गोल करने का गौरव हासिल किया है। इस मामले में उन्होंने पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो के रिकॉर्ड की बराबरी की है। मैच के दौरान मेसी का दबदबा इस कदर था कि विरोधी टीम के गोलकीपर लुका जिदान उनके प्रहारों के सामने पूरी तरह बेबस नजर आए।

    मैच में मेसी के गोल करने का सिलसिला एक बेहद सटीक और पावरफुल शॉट के साथ शुरू हुआ, जिसे रोकने में विपक्षी गोलकीपर नाकाम रहे। इसके बाद दूसरा गोल तब देखने को मिला जब एलेक्सिस मैक एलिस्टर के एक जोरदार शॉट को अल्जीरियाई गोलकीपर नियंत्रित नहीं कर सके और रिबाउंड पर मुस्तैद खड़े मेसी ने गेंद को जाल में धकेलने में कोई चूक नहीं की। हैट्रिक को पूरा करने वाला तीसरा गोल पूरी तरह से मेसी के पारंपरिक और सिग्नेचर स्टाइल का नमूना था। पेनल्टी एरिया के कोने पर निको गोंजालेज से मिले पास को इंटर मियामी के इस स्टार खिलाड़ी ने अपने बाएं पैर के बाहरी हिस्से से नियंत्रित किया और बॉक्स के बाहर से एक ऐसा घुमावदार शॉट लगाया कि गेंद सीधे गोलपोस्ट के निचले बाएं कोने में समा गई।

    इस शानदार प्रदर्शन के बाद जब मैच के 79वें मिनट में कोच ने रणनीति के तहत लियोनेल मेसी को मैदान से बाहर बुलाने का निर्णय लिया, तो स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों ने खड़े होकर करतल ध्वनि से अपने चहेते खिलाड़ी का अभिवादन किया। साल 2006 में अपने विश्व कप सफर की शुरुआत करने वाले मेसी अब तक इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 27 मैच खेलने वाले खिलाड़ी भी बन चुके हैं। अर्जेंटीना के रोसारियो शहर में जन्मे और बचपन से ही फुटबॉल को अपनी जिंदगी मानने वाले मेसी अब इतिहास का इकलौता सबसे सफल विश्व कप फुटबॉलर बनने के वैश्विक रिकॉर्ड से महज एक गोल दूर हैं। आने वाले मैचों में एक और गोल करते ही वे क्लोस को पीछे छोड़कर फुटबॉल के स्वर्णिम इतिहास में अकेले शीर्ष पर विराजमान हो जाएंगे।