Category: State

  • रामचरितमानस पर सपा का बदला रुख: अखिलेश यादव ने इसे बताया ‘सांस्कृतिक संविधान’, यूपी की राजनीति में फिर गरमाई बहस

    रामचरितमानस पर सपा का बदला रुख: अखिलेश यादव ने इसे बताया ‘सांस्कृतिक संविधान’, यूपी की राजनीति में फिर गरमाई बहस




    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर रामचरितमानस को लेकर समाजवादी पार्टी का रुख चर्चा में है। लोकसभा चुनाव से पहले जिस मुद्दे पर सपा के भीतर विवाद और राजनीतिक टकराव देखने को मिला था, अब उसी पर पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का रुख काफी नरम और अलग नजर आ रहा है।

    हाल ही में लखनऊ में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान एक वकील के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद मामला फिर सुर्खियों में आया। बताया गया कि वकील के हाथ में रामचरितमानस की प्रति थी। इसी घटना के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए रामचरितमानस को “सांस्कृतिक संविधान का एक रूप” और “नैतिक आचार संहिता” बताया, जिससे राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है।

    पहले विवाद, अब नया रुख
    लोकसभा चुनाव 2024 से पहले समाजवादी पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस के कुछ दोहों को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने इन दोहों को महिलाओं, दलितों और पिछड़ों के प्रति अपमानजनक बताते हुए उन्हें हटाने की मांग की थी। इस बयान के बाद बीजेपी ने सपा पर तीखा हमला बोला था और मामला राजनीतिक रूप से काफी गरमा गया था।

    बाद में यह विवाद इतना बढ़ा कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। उस समय अखिलेश यादव ने इस पूरे विवाद पर खुलकर कोई सख्त रुख नहीं अपनाया था, लेकिन अब उनका बदला हुआ स्टैंड राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    चुनावी रणनीति या जनभावना का असर?
    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगले विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी अपनी छवि को व्यापक जनसमर्थन के अनुरूप ढालने की कोशिश कर रही है। रामचरितमानस जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर नरम रुख अपनाकर सपा आम मतदाताओं के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

    वहीं बीजेपी का आरोप है कि सपा राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए अब धार्मिक प्रतीकों का सहारा ले रही है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि जो लोग पहले भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते रहे हैं, वे अब धार्मिक ग्रंथों का सम्मान दिखा रहे हैं।

    विपक्ष और सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया
    इस मुद्दे पर कांग्रेस ने अखिलेश यादव के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि रामचरितमानस भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का हिस्सा है और इसे राजनीति से अलग रखकर देखा जाना चाहिए। वहीं बसपा ने इस पूरे मामले पर टिप्पणी से दूरी बनाए रखी है।

    यूपी की सियासत में नया मोड़
    रामचरितमानस को लेकर सपा के बदले सुर ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सांस्कृतिक और धार्मिक विमर्श को केंद्र में ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों में यह मुद्दा सियासी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।फिलहाल यह साफ है कि यूपी की राजनीति में धर्म और संस्कृति एक बार फिर रणनीतिक बहस का बड़ा हिस्सा बनते जा रहे हैं।

  • बिजली कटौती से नहीं रुकेगी नमो भारत ट्रेन, NCRTC ने बताया, मजबूत मल्टी-लेयर बैकअप सिस्टम से पूरी तरह सुरक्षित संचालन

    बिजली कटौती से नहीं रुकेगी नमो भारत ट्रेन, NCRTC ने बताया, मजबूत मल्टी-लेयर बैकअप सिस्टम से पूरी तरह सुरक्षित संचालन




    नई दिल्ली। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर पर चल रही नमो भारत (RRTS) ट्रेन को लेकर यात्रियों के बीच बिजली कटौती के दौरान सेवा बाधित होने की आशंका जताई जा रही थी, खासकर गुड़गांव में हाल ही में मेट्रो सेवा प्रभावित होने की घटना के बाद। लेकिन नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने साफ किया है कि नमो भारत ट्रेन का सिस्टम सामान्य मेट्रो या ट्रेनों की तुलना में कहीं अधिक आधुनिक और सुरक्षित है, जिससे बिजली फेल होने की स्थिति में भी संचालन रुकने की संभावना बेहद कम है।

    NCRTC के अनुसार नमो भारत ट्रेनें 25 केवी (किलोवोल्ट) 50 हर्ट्ज ओवरहेड इलेक्ट्रिक सिस्टम से चलती हैं, जिसे ओवरहेड कैटेनरी सिस्टम (OCS) के जरिए सप्लाई दी जाती है। पूरा कॉरिडोर अलग-अलग बड़े सब-स्टेशनों और मल्टी-ग्रिड नेटवर्क से जुड़ा हुआ है, जिससे किसी एक स्थान पर फॉल्ट आने पर दूसरा ग्रिड तुरंत पावर सपोर्ट संभाल लेता है और ट्रेन संचालन बाधित नहीं होता।

    रीजनरेटिव ब्रेकिंग से खुद बनती है बिजली
    इस ट्रेन की एक खास तकनीक रीजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम है, जिसमें ट्रेन ब्रेक लगाने के दौरान अपनी गतिज ऊर्जा को बिजली में बदलकर वापस ग्रिड में भेजती है। इससे लगभग 30 प्रतिशत तक ऊर्जा की बचत होती है और सिस्टम को अतिरिक्त पावर सपोर्ट भी मिलता है, जो आपात स्थिति में मददगार साबित होता है।

    SCADA सिस्टम से रियल टाइम निगरानी
    पूरे 82 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर की निगरानी के लिए SCADA (Supervisory Control and Data Acquisition) सिस्टम लगाया गया है। यह सिस्टम हर सब-स्टेशन और पावर फ्लो पर लगातार नजर रखता है और किसी भी तकनीकी खराबी की स्थिति में तुरंत पावर को दूसरे स्रोत की ओर डायवर्ट कर देता है, जिससे सेवा बिना रुके जारी रहती है।

    पूरी तरह बिजली गुल होने पर भी सुरक्षित संचालन
    NCRTC के अनुसार, यदि किसी वजह से मुख्य बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो जाती है, तब भी ट्रेनों और स्टेशनों में लगी बैकअप बैटरियां जरूरी सिस्टम जैसे लाइट, एयर कंडीशनिंग, कंट्रोल सिस्टम और इमरजेंसी गेट को चालू रखती हैं। इससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित रहती है और किसी भी तरह की आपात स्थिति में ट्रेन को सुरक्षित तरीके से रोका जा सकता है।

    गुड़गांव घटना से तुलना नहीं संभव
    हाल ही में गुड़गांव में बिजली बाधित होने से रैपिड मेट्रो सेवा प्रभावित हुई थी, लेकिन NCRTC का दावा है कि नमो भारत का पावर इंफ्रास्ट्रक्चर मल्टी-लेयर बैकअप सिस्टम पर आधारित है, इसलिए ऐसी स्थिति यहां बनने की संभावना बेहद कम है। इस तकनीकी मजबूती के चलते दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर पर यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को भरोसेमंद और निर्बाध सेवा मिलने का दावा किया गया है।

  • PM मोदी को झालमुड़ी खिलाकर फेमस हुए बंगाल के विक्रम को पाक-बांग्लादेश से मिल रही धमकियां…..

    PM मोदी को झालमुड़ी खिलाकर फेमस हुए बंगाल के विक्रम को पाक-बांग्लादेश से मिल रही धमकियां…..


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal.) के झारग्राम (Jhargram) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के चुनाव प्रचार के दौरान सड़क किनारे के स्टॉल से झालमुड़ी (Jhalmuri) खरीदने का वीडियो वायरल हुआ था। उस स्टॉल के मालिक विक्रम कुमार साहू अचानक चर्चा में आ गए। पीएम मोदी खुद उनके हाथ से तैयार झालमुड़ी खाते दिखे। हालांकि, फेमस होने के साथ ही साहू की मुश्किलें भी शुरू हो गईं। उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से उनके मोबाइल पर बार-बार मौत की धमकियां मिल रही हैं। धमकियां टेक्स्ट मैसेज, व्हाट्सएप और वीडियो कॉल के जरिए आ रही हैं।

    एक वीडियो कॉल में तो साहू को बंदूक दिखाकर धमकाया गया। इससे उनके परिवार में दहशत फैल गई और उन्होंने कुछ दिनों के लिए अपनी दुकान भी बंद कर दी थी। झारग्राम पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साहू के स्टॉल पर यूनिफॉर्म और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों व केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवानों की तैनाती कर दी है। स्टॉल पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। साइबर क्राइम एक्सपर्ट्स को भी मामले में शामिल किया गया है।


    धमकियां देने वाले फोन नंबर्स की पहचान

    पुलिस अधिकारी के अनुसार, धमकियां देने वाले फोन नंबर्स की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिकायत दर्ज होने के बाद सुरक्षा के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जांच शुरू कर दी गई है। साहू ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि धमकियों से वे और उनका परिवार बेहद डरा हुआ था। साहू ने कहा कि शुरुआती दिनों में डर के मारे दुकान बंद रखनी पड़ी, लेकिन अब पुलिस सुरक्षा के साथ वे फिर से अपने काम पर लौट आए हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी का झालमुड़ी खाने का वीडियो न सिर्फ चुनावी अभियान को यादगार बनाया, बल्कि झालमुड़ी जैसे पारंपरिक बंगाली स्ट्रीट फूड को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। विपक्ष ने इसे लेकर निशाना भी साधा। झारग्राम पुलिस का कहना है कि वे हर स्तर पर साहू की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। इस मामले की जांच आगे भी जारी रहेगी ताकि दोषियों को सजा मिल सके।

  • मलिहाबाद आंधी-बारिश से दशहरी आम की पैदावार 60% घटी, इस साल ₹100-120 किलो तक पहुंचेंगे दाम

    मलिहाबाद आंधी-बारिश से दशहरी आम की पैदावार 60% घटी, इस साल ₹100-120 किलो तक पहुंचेंगे दाम




    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद क्षेत्र में इस साल मशहूर दशहरी आम की पैदावार पर मौसम की मार पड़ी है। आंधी और बेमौसम बारिश के कारण आम की फसल लगभग 60% तक कम हो गई है, जिससे बाजार में इस बार आम के दाम बढ़ने की संभावना है।

    किसानों के अनुसार इस बार केवल 40% पेड़ों पर ही फल आए हैं। पिछले साल जहां दशहरी आम 50-60 रुपए प्रति किलो तक बिकता था, वहीं इस साल इसके 100 से 120 रुपए प्रति किलो तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही आम का साइज भी सामान्य से छोटा रहने की संभावना है।

    किसानों को बड़ा नुकसान, एक्सपोर्ट पर भी असर
    मलिहाबाद के किसानों का कहना है कि इस बार उत्पादन कम होने के कारण वे विदेशों में आम निर्यात नहीं कर पाएंगे और केवल स्थानीय मंडियों में ही बिक्री करनी पड़ेगी। आमतौर पर यहां से 500 टन से अधिक आम दुबई, अमेरिका, जापान और अन्य देशों में भेजा जाता है, लेकिन इस बार निर्यात लगभग रुक गया है।

    किसानों का कहना है कि बागों में कई पेड़ों पर आम नहीं आए हैं। कुछ किसानों के अनुसार यह स्थिति हर साल रोटेशन के कारण भी होती है, जबकि कई बागों में रोग और मौसम की वजह से भी नुकसान हुआ है।

    ‘गोल्डन मैंगो’ बनाने के लिए विशेष पैकिंग
    कई बागों में आमों को विशेष लिफाफों से ढका जा रहा है, जिससे फल का रंग बेहतर आता है और बाजार में इसे ‘गोल्डन मैंगो’ के नाम से बेचा जाता है। हालांकि इससे लागत भी बढ़ गई है।

    वैज्ञानिकों ने बताई मौसम की वजह
    सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर (CISH) के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार बौर आने के समय कोहरा और उसके बाद हुई बेमौसम बारिश ने फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाया। फूलों में नमी बैठने और सड़न की वजह से उत्पादन में भारी गिरावट आई है।

    कुछ क्षेत्रों में बेहतर फसल
    हालांकि मलिहाबाद में नुकसान के बावजूद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों जैसे मेरठ और अमरोहा में चौसा और लंगड़ा आम की अच्छी पैदावार दर्ज की गई है।

    कुल मिलाकर इस साल दशहरी आम की कम आपूर्ति के कारण बाजार में दाम बढ़ना तय माना जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को महंगा आम खरीदना पड़ सकता है और किसानों को मिश्रित नुकसान-लाभ की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

  • आला हजरत दरगाह की ईद-उल-अजहा पर अपील: प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी से बचें, कानून और स्वच्छता का पालन करें

    आला हजरत दरगाह की ईद-उल-अजहा पर अपील: प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी से बचें, कानून और स्वच्छता का पालन करें



    बरेली । बरेली की प्रसिद्ध आला हजरत दरगाह ने ईद-उल-अजहा के मौके पर मुस्लिम समुदाय से महत्वपूर्ण अपील की है। दरगाह से जुड़े संगठन जमात रजा-ए-मुस्तफा ने कहा है कि त्योहार के दौरान किसी भी तरह के प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी न दी जाए और सभी लोग कानून का पालन करते हुए ही धार्मिक परंपराओं को निभाएं। साथ ही खुले स्थानों पर कुर्बानी न करने और स्वच्छता बनाए रखने की भी अपील की गई है।

    धार्मिक और सामाजिक संतुलन पर जोर
    दरगाह की ओर से जारी संदेश में कहा गया है कि ईद-उल-अजहा एक पवित्र त्योहार है, जिसे शांतिपूर्ण और नियमों के अनुसार मनाना सभी की जिम्मेदारी है। संगठन ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे जानवरों की कुर्बानी न करें, जो कानूनन प्रतिबंधित हैं, ताकि किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई या विवाद की स्थिति न बने।

    इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि त्योहार के दौरान सामाजिक सौहार्द और भाईचारे को बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी या तनाव की स्थिति उत्पन्न न हो।

    इमामों से संपर्क कर दिया गया संदेश
    जमात रजा-ए-मुस्तफा ने एक विशेष जागरूकता अभियान भी शुरू किया है। इसके तहत संगठन के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार की नमाज के दौरान विभिन्न जिलों की मस्जिदों के इमामों से संपर्क किया और उनसे अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करें।

    इमामों से कहा गया है कि वे नमाज के दौरान और धार्मिक प्रवचनों में लोगों को यह संदेश दें कि कुर्बानी केवल निर्धारित नियमों और स्थानों पर ही की जाए। साथ ही किसी भी प्रकार के नियम उल्लंघन की स्थिति में स्थानीय प्रशासन और दरगाह प्रबंधन को सूचना दी जाए।

    मोहल्लों में निगरानी टीम तैनात
    संगठन के राष्ट्रीय महासचिव फरमान हसन खान ने बताया कि इस बार नियमों के पालन पर विशेष नजर रखने के लिए मोहल्लों में निगरानी टीमों की तैनाती की गई है। ये टीमें यह सुनिश्चित करेंगी कि कहीं भी सार्वजनिक स्थानों, सड़कों या खुले इलाकों में कुर्बानी न की जाए।

    उन्होंने कहा कि स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए और पशुओं के अवशेषों का सही तरीके से निपटान किया जाए, ताकि पर्यावरण और समाज दोनों पर इसका नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

    गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग
    इस मौके पर जमात रजा-ए-मुस्तफा की ओर से एक और महत्वपूर्ण मांग भी सामने आई है। महासचिव फरमान हसन खान ने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की है कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए।उनका कहना है कि ऐसा करने से अवैध वध पर रोक लगेगी और इससे जुड़े अपराधों में कमी आएगी। साथ ही यह कदम सामाजिक और सांस्कृतिक संतुलन बनाए रखने में भी मदद करेगा।

    आला हजरत दरगाह की यह अपील न केवल धार्मिक भावना से जुड़ी है, बल्कि इसमें कानून, स्वच्छता और सामाजिक एकता का संदेश भी शामिल है। ईद-उल-अजहा जैसे पवित्र पर्व को शांतिपूर्ण और जिम्मेदारी के साथ मनाने पर जोर देकर संगठन ने समाज में सद्भाव और अनुशासन बनाए रखने की कोशिश की है।

  • गरौठा में नेशनल पत्रकार एसोसिएशन की बैठक संपन्न, मुन्ना यादव बने नगर अध्यक्ष; पत्रकारों की एकजुटता पर दिया जोर

    गरौठा में नेशनल पत्रकार एसोसिएशन की बैठक संपन्न, मुन्ना यादव बने नगर अध्यक्ष; पत्रकारों की एकजुटता पर दिया जोर

    झांसी। गरौठा स्थित बजरंग धर्मशाला में नेशनल पत्रकार एसोसिएशन की बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें संगठनात्मक विस्तार और पत्रकारों की एकजुटता पर विशेष चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता जिला महामंत्री मिलन सिंह परिहार ने की।

    बैठक के दौरान धर्मजीत मुन्ना यादव को सर्वसम्मति से नेशनल पत्रकार एसोसिएशन का गरौठा नगर अध्यक्ष नियुक्त किया गया। वहीं श्रीमती भारती अग्रवाल को संगठन की सदस्यता दिलाई गई। इस अवसर पर संरक्षक रामपाल सिंह यदुवंशी, राष्ट्रीय महामंत्री शशिकांत तिवारी, मंडल उपाध्यक्ष राजेश सिंह परिहार और जिला महासचिव विमल कुमार तिवारी सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार रामपाल सिंह यदुवंशी ने सभी पत्रकारों से एकजुट रहने और आपसी सहयोग की भावना बनाए रखने की अपील की। राष्ट्रीय महामंत्री शशिकांत तिवारी ने कहा कि पत्रकारों को अपनी पहचान मजबूत करने के लिए नियमित रूप से खबरों का प्रकाशन करते रहना चाहिए।

    मंडल उपाध्यक्ष राजेश सिंह परिहार ने कहा कि कोई भी पत्रकार कवरेज पर जाने से पहले संगठन को सूचित करे, ताकि किसी भी आपात स्थिति में मदद उपलब्ध कराई जा सके। अन्य पदाधिकारियों ने भी संगठन की मजबूती और अनुशासन पर अपने विचार रखे।

    बैठक का संचालन जिला महामंत्री मिलन सिंह परिहार ने किया। अंत में नवनियुक्त नगर अध्यक्ष धर्मजीत मुन्ना यादव ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए संगठन को मजबूती से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इस मौके पर बड़ी संख्या में पत्रकार बंधु उपस्थित रहे।

  • मथुरा: नेशनल हाईवे पर 4 किमी लंबा जाम, भीषण गर्मी में 4 घंटे तक फंसे रहे लोग; रेलवे पुल निर्माण बना वजह

    मथुरा: नेशनल हाईवे पर 4 किमी लंबा जाम, भीषण गर्मी में 4 घंटे तक फंसे रहे लोग; रेलवे पुल निर्माण बना वजह

    मथुरा। दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे पर रविवार को भीषण जाम लग गया, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। रेलवे पुल निर्माण कार्य के चलते हाईवे का एक हिस्सा संकरा हो जाने से यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया और करीब 4 किलोमीटर लंबा जाम लग गया।

    जाम थाना हाईवे क्षेत्र से शुरू होकर रिफाइनरी तक फैल गया, जिसमें कई वाहन घंटों तक रेंगते नजर आए। रविवार होने के कारण हाईवे पर वाहनों का दबाव भी अधिक था, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।

    भीषण गर्मी और उमस के बीच जाम में फंसे लोग परेशान होते रहे। खासकर छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई लोग पानी और छांव की तलाश करते नजर आए, जबकि वाहनों की लंबी कतारें सड़क पर लगातार बढ़ती रहीं।

    स्थानीय लोगों के अनुसार हाईवे थाना के पास रेलवे पुल का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके कारण सड़क संकरी हो गई है और ट्रैफिक का दबाव बढ़ते ही जाम की स्थिति बन जाती है। रविवार को स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और कई घंटे तक यातायात बाधित रहा।

    सूचना मिलने पर ट्रैफिक पुलिस मौके पर पहुंची और यातायात को सुचारू कराने का प्रयास किया। हालांकि जाम पूरी तरह खत्म होने में काफी समय लग गया।

    स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य के दौरान वैकल्पिक मार्ग और अतिरिक्त पुलिस बल की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में यात्रियों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

  • झांसी: नयागांव में राशन दुकान आवंटन पर विवाद, धांधली के आरोप, निरस्त करने की मांग

    झांसी: नयागांव में राशन दुकान आवंटन पर विवाद, धांधली के आरोप, निरस्त करने की मांग



    झांसी। मऊरानीपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत नयागांव में सरकारी राशन दुकान के आवंटन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम पंचायत सदस्यों और ग्रामीणों ने आवंटन प्रक्रिया में धांधली और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी सहित मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर आवंटन को निरस्त करने की मांग की है।

    जल्दबाजी में बैठक का आरोप
    ग्रामीणों का कहना है कि गांव में मुनादी होने के महज दूसरे ही दिन जल्दबाजी में राशन दुकान आवंटन के लिए खुली बैठक आयोजित कर दी गई। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रखी गई और नियमों की अनदेखी की गई।

    ग्राम पंचायत सदस्यों में नाराजगी
    ग्राम पंचायत सदस्यों ने भी आवंटन प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसमें गांव के लोगों की सहमति नहीं ली गई और न ही उचित प्रक्रिया का पालन किया गया।

    जांच की मांग
    ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में राशन दुकान का आवंटन निरस्त कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की बात कही जा रही है
    ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती, उनका विरोध जारी रहेगा।

  • झांसी में एंबुलेंस संचालकों की मनमानी: 30 किमी शव ले जाने के लिए मांगे 6000 रुपए, परिजनों ने DM से लगाई गुहार

    झांसी में एंबुलेंस संचालकों की मनमानी: 30 किमी शव ले जाने के लिए मांगे 6000 रुपए, परिजनों ने DM से लगाई गुहार



    झांसी। मेडिकल कॉलेज स्थित पोस्टमार्टम हाउस के बाहर एंबुलेंस संचालकों की मनमानी का गंभीर मामला सामने आया है। एक गरीब परिवार से मात्र 30 किलोमीटर दूर शव ले जाने के लिए 6000 रुपए की मांग की गई, जबकि दूसरी एंबुलेंस 1200 से 1500 रुपए में जाने को तैयार थी।

    परिजनों ने 4000 रुपए देने की बात कही, लेकिन एंबुलेंस चालक 6000 रुपए पर अड़ा रहा। अंततः परिजनों ने डीएम ऑफिस में फोन कर अपनी पीड़ा बताई, जिसके बाद मामला 4000 रुपए में तय हुआ और शव को रवाना किया गया।

    ट्रेन के बाथरूम में मिला शव
    मृतक महेंद्र सिंह (47), बबीना क्षेत्र के ठकरास मोहल्ले के रहने वाले थे और अहमदाबाद में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे। वे अहमदाबाद से साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन से घर लौट रहे थे। यात्रा के दौरान ट्रेन के बाथरूम में उनकी तबीयत बिगड़ गई और वहीं उनकी मौत हो गई।ट्रेन जब झांसी स्टेशन पहुंची तो जीआरपी ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेज दिया।

    बबीना ले जाने को लेकर विवाद
    पोस्टमार्टम के बाद शव को बबीना ले जाने को लेकर एंबुलेंस संचालकों में मनमानी वसूली का आरोप लगा। परिजनों का कहना है कि बाहर खड़ी एंबुलेंस 1200–1500 रुपए में जाने को तैयार थी, लेकिन अंदर मौजूद संचालक अधिक पैसे की मांग पर अड़े रहे, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।

    गरीब परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
    मृतक के परिवार में पत्नी, तीन बेटे और एक बेटी हैं। सभी अभी अविवाहित हैं। पिता की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर बताई जा रही है।

    प्रशासन पर उठे सवाल
    यह कोई पहला मामला नहीं है जब पोस्टमार्टम हाउस के बाहर एंबुलेंस संचालकों पर मनमानी वसूली के आरोप लगे हों। दूर-दराज से आने वाले परिजनों से कई गुना अधिक किराया वसूलने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं, लेकिन व्यवस्था सुधारने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

  • यूपी के मदरसों में ‘वंदे मातरम’ लागू करने की तैयारी, ओपी राजभर के बयान से सियासत गरमाई

    यूपी के मदरसों में ‘वंदे मातरम’ लागू करने की तैयारी, ओपी राजभर के बयान से सियासत गरमाई



    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने संकेत दिए हैं कि यूपी के मदरसों में भी ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य करने की दिशा में तैयारी की जा रही है। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत में नई बहस शुरू हो गई है।

    राजभर ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा कि जिस तरह अन्य शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान कराया जाता है, उसी तरह मदरसों में भी ऐसी व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि विभाग उनके पास है और इस तरह की व्यवस्था लागू करने में कोई बुराई नहीं है।

    शिक्षा और राष्ट्रभक्ति से जोड़ने की बात
    मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि सरकार का उद्देश्य मदरसा संस्थानों के छात्रों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर देना है। उन्होंने कहा कि बच्चों को अमन, चैन और भाईचारे के साथ आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है।उनके अनुसार, “राष्ट्रगीत का सम्मान किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह देश के प्रति सम्मान का प्रतीक है।”

    विपक्ष पर तीखा हमला
    ओपी राजभर ने अपने बयान में विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे केवल राजनीति के लिए समाज में नफरत फैलाने की बात करते हैं।

    उन्होंने कहा कि मुसलमानों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया है और उन्हें शिक्षा एवं विकास से दूर रखा गया है। राजभर ने दावा किया कि उनकी सरकार सभी वर्गों के विकास के लिए काम कर रही है।

    विवाद की पृष्ठभूमि
    यह मुद्दा ऐसे समय पर सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में भी कुछ मदरसों में ‘वंदे मातरम’ को लेकर बहस चल रही है। वहां कई मुस्लिम संगठनों ने इसका विरोध किया है, जबकि कुछ राजनीतिक दलों ने इसे समर्थन दिया है।अब उत्तर प्रदेश में भी इस तरह का प्रस्ताव सामने आने के बाद राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। विपक्षी दलों के साथ-साथ धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रिया आने की संभावना है।

    सियासी माहौल गर्म
    उत्तर प्रदेश में पहले से ही 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हैं। ऐसे में ओपी राजभर का यह बयान राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। इसे सरकार की शिक्षा नीति और सामाजिक संतुलन की दिशा में एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    मदरसा शिक्षा प्रणाली में ‘वंदे मातरम’ लागू करने की चर्चा ने राज्य में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। जहां सरकार इसे राष्ट्रभक्ति और एकता से जोड़कर देख रही है, वहीं विरोधी इसे संवेदनशील मुद्दा मान रहे हैं। आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है।