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  • मथुरा में बारात के दौरान बवाल, डांस से शुरू हुआ विवाद पथराव तक पहुंचा

    मथुरा में बारात के दौरान बवाल, डांस से शुरू हुआ विवाद पथराव तक पहुंचा

    नई दिल्ली। मथुरा जिले के हाईवे थाना क्षेत्र के नरहौली गांव में बुधवार रात एक शादी समारोह अचानक हिंसा का मैदान बन गया। बरसाना से आई बारात में खुशियों का माहौल उस समय बिगड़ गया जब डांस के दौरान बारातियों के बीच कहासुनी शुरू हो गई और मामला देखते ही देखते पथराव तक पहुंच गया।

    जानकारी के अनुसार, बरसाना के भरनाकलां गांव से अशोक और कुलदीप की बारात नरहौली गांव में भगवान दास की बेटियों के घर पहुंची थी। रात करीब 10 बजे जब बारात चढ़ रही थी, तभी किसी बात को लेकर विवाद हो गया। बताया जा रहा है कि डांस के दौरान एक पत्थर लगने के बाद तनाव और बढ़ गया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच जमकर पत्थरबाजी शुरू हो गई।

    स्थिति इतनी बिगड़ गई कि मौके पर पहुंची पुलिस टीम को भी उपद्रवियों का सामना करना पड़ा। थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी सहित कुछ पुलिसकर्मी भी इस झड़प में घायल हो गए। हालात बेकाबू होते देख पुलिस ने कई थानों की फोर्स बुलाकर स्थिति को नियंत्रित किया और कुछ लोगों को हिरासत में लिया।

    घटना के बाद भरतपुर रोड पर यातायात भी रोकना पड़ा, जिससे कुछ समय के लिए आवाजाही बाधित रही। पुलिस ने लाठीचार्ज कर दोनों पक्षों को तितर-बितर किया और देर रात तक स्थिति को नियंत्रण में लाया गया।

    विवाद को लेकर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं। एक पक्ष का कहना है कि बारात के दौरान गाली-गलौज और बग्गी में लात मारने से विवाद शुरू हुआ, जबकि दूसरे पक्ष का आरोप है कि बाराती आपस में ही डांस को लेकर भिड़ गए और विवाद दुकान तक पहुंचकर तोड़फोड़ में बदल गया।

    इस पूरे घटनाक्रम में शादी की रस्में भी पुलिस की मौजूदगी में पूरी कराई गईं ताकि मामला और न बिगड़े। एक महिला के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    फिलहाल गांव में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पुलिस बल तैनात है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • हीट वेव से राहत देने सड़कों पर आर्टिफिशियल बारिश करा रहा नगर निगम

    हीट वेव से राहत देने सड़कों पर आर्टिफिशियल बारिश करा रहा नगर निगम

    नई दिल्ली।झांसी में गुरुवार को भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया। सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं ने शहर को तपते तंदूर में बदल दिया। मौसम विज्ञान विभाग की ओर से जिले में रेड अलर्ट जारी किए जाने के बाद प्रशासन और नगर निगम भी अलर्ट मोड में नजर आए। दोपहर होते-होते सड़कें सूनी पड़ गईं और जरूरी काम से निकलने वाले लोग भी सिर और चेहरा पूरी तरह ढंककर चलते दिखाई दिए।

    गर्मी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुबह के समय ही तापमान 44 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था, जबकि दिन में इसके 47 डिग्री तक जाने की संभावना जताई गई। फिलहाल जिले का अधिकतम तापमान 45.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जो सामान्य से काफी अधिक है। लगातार बढ़ती गर्मी और हीट वेव के चलते आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

    लोगों को राहत पहुंचाने के लिए नगर निगम ने अनोखी पहल करते हुए शहर के प्रमुख चौराहों और सड़कों पर आर्टिफिशियल बारिश और फव्वारों की व्यवस्था शुरू की है। कई जगह पानी का छिड़काव कराया जा रहा है ताकि राहगीरों को झुलसाती गर्मी से कुछ राहत मिल सके। चौराहों पर लगाए गए फव्वारों के पास लोग कुछ देर रुककर राहत महसूस करते दिखाई दिए।

    पिछले पांच दिनों से झांसी के तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। बुधवार को भी अधिकतम तापमान 45.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था, जबकि न्यूनतम तापमान 29.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। रात के समय भी गर्म हवाओं के कारण लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों तक हीट वेव का असर जारी रहने की चेतावनी दी है।

    भीषण गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन ने नागरिकों से दोपहर के समय घर से बाहर न निकलने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि बेहद जरूरी काम होने पर ही लोग बाहर जाएं और पर्याप्त मात्रा में पानी, नींबू पानी, छाछ तथा अन्य तरल पदार्थों का सेवन करते रहें। लोगों के मोबाइल फोन पर भी लगातार अलर्ट संदेश भेजे जा रहे हैं, जिनमें गर्मी से बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं।

    कृषि विज्ञान केंद्र भरारी के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एके सिंह ने बताया कि आने वाले दिनों में गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि दोपहर के समय खेतों में काम करने से बचें और शरीर को पूरी तरह ढककर ही बाहर निकलें। लगातार बढ़ते तापमान ने न सिर्फ शहरवासियों बल्कि किसानों और मजदूरों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं।

  • झांसी में युवती ने रची किडनैपिंग की साजिश, होटल मैनेजर को अगवा कर मांगी फिरौती

    झांसी में युवती ने रची किडनैपिंग की साजिश, होटल मैनेजर को अगवा कर मांगी फिरौती



    झांसी। उत्तर प्रदेश के झांसी में होटल मैनेजर के अपहरण और फिरौती मांगने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि एक युवती ने खुद को ग्राहक बताकर होटल मैनेजर को फोन किया और उसे एक लोकेशन पर बुलाया। जैसे ही मैनेजर वहां पहुंचा, युवती ने अपने साथियों को मौके पर बुला लिया।

    बताया जा रहा है कि आरोपियों ने होटल मैनेजर की आंखों पर पट्टी बांधकर उसे जबरन कार में बैठा लिया। इसके बाद उसे बंधक बनाकर मारपीट की गई। आरोपी युवती और उसके साथियों ने पीड़ित के पिता को फोन कर बेटे की रिहाई के बदले फिरौती मांगी और पैसे नहीं देने पर हत्या की धमकी दी।

    बेटे की जान बचाने के लिए पिता ने आरोपियों के बताए खाते में 30 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। रकम मिलने के करीब 20 घंटे बाद आरोपी होटल मैनेजर को एक सुनसान इलाके में छोड़कर फरार हो गए। घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर जांच शुरू की गई।

    गुरुवार को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने आरोपियों की घेराबंदी की। इस दौरान बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई के बाद पुलिस ने युवती, उसके पति और दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से दो तमंचे, कारतूस, वारदात में इस्तेमाल की गई कार और चार मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।

    पूरा मामला नवाबाद थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर मामले की आगे की जांच कर रही है।

  • लखनऊ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: कोर्ट की अनुमति बिना “अग्रिम जांच” वैध नहीं

    लखनऊ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: कोर्ट की अनुमति बिना “अग्रिम जांच” वैध नहीं


    नई दिल्ली। लखनऊ उच्च न्यायालय पीठ ने एक अहम फैसले में कहा है कि किसी भी आपराधिक मामले में आगे की जांच (Further Investigation) शुरू करने से पहले अदालत की अनुमति लेना जरूरी है। बिना कोर्ट की मंजूरी की गई अग्रिम विवेचना को वैध नहीं माना जा सकता।यह फैसला जस्टिस Shree Prakash Singh की एकल पीठ ने सैयद मोहम्मद हमजा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

     कोर्ट ने क्या कहा?
    हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

    एक ही केस में दोबारा संज्ञान (Second Cognizance) लेना कानूनन स्वीकार्य नहीं है

    यदि ट्रायल पहले से चल रहा है, तो पुलिस को आगे की जांच से पहले अदालत की अनुमति लेनी होगी

    बिना अनुमति दाखिल की गई सप्लीमेंट्री चार्जशीट कानूनी सवालों के घेरे में आएगी

     पूरा मामला क्या था?
    वर्ष 2021 में अंबेडकरनगर में मामला दर्ज हुआ था

    शुरुआती चार्जशीट में हत्या की धारा नहीं लगाई गई थी

    बाद में पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर धारा 302 और 201 IPC जोड़ते हुए सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर दी गई

    याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि:

    आगे की विवेचना से पहले ट्रायल कोर्ट से अनुमति नहीं ली गई

    यह सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों के खिलाफ है
     सरकार ने क्या माना?
    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से यह स्वीकार किया गया कि:

    एसपी के निर्देश पर आगे की जांच हुई

    लेकिन ट्रायल कोर्ट से पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी

    इसके बाद हाई कोर्ट ने:

    29 अप्रैल 2023 की सप्लीमेंट्री चार्जशीट

    3 फरवरी 2026 का सेकेंड कॉग्निजेंस ऑर्डर

    13 फरवरी 2026 का डिस्चार्ज ऑर्डर

     तीनों को निरस्त कर दिया।

    फैसले का महत्व
    यह निर्णय इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे:

    पुलिस जांच प्रक्रिया में न्यायिक निगरानी मजबूत होगी

    एक ही केस में बार-बार कार्रवाई पर रोक लगेगी

    आरोपी के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी

    हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच एजेंसियां कानून के मुताबिक दोबारा उचित प्रक्रिया अपनाकर कार्रवाई कर सकती हैं।

  • यूपी सरकार का बड़ा फैसला: 16 लाख कर्मचारियों का DA 60% हुआ

    यूपी सरकार का बड़ा फैसला: 16 लाख कर्मचारियों का DA 60% हुआ



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों को राहत देते हुए महंगाई भत्ते (DA) में 2% की बढ़ोतरी का आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही अब राज्य कर्मचारियों का DA बढ़कर 58% से 60% हो गया है।यह निर्णय करीब 16 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशन से जुड़े कर्मियों को सीधे लाभ देगा।

    कब से मिलेगा फायदा?
    सरकारी आदेश के अनुसार:

    बढ़ा हुआ DA 1 जनवरी 2026 से लागू माना जाएगा

    इसका भुगतान मई 2026 की सैलरी के साथ नकद किया जाएगा

    जनवरी से अप्रैल 2026 तक का बकाया (arrears) अलग से दिया जाएगा

    किन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ?
    यह बढ़ोतरी इन सभी श्रेणियों पर लागू होगी:

    नियमित राज्य कर्मचारी

    सहायता प्राप्त शिक्षण एवं तकनीकी संस्थानों के कर्मचारी

    शहरी स्थानीय निकायों के कर्मचारी

    UGC वेतनमान में कार्यरत अधिकारी

    रिटायर कर्मचारियों के लिए खास प्रावधान
    सरकार ने रिटायरमेंट से जुड़े मामलों पर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं:

    जिनकी सेवा आदेश से पहले या बीच में समाप्त हुई है

    जो आने वाले 6 महीनों में रिटायर होंगे

    उन्हें DA का पूरा बकाया नकद (cash) में दिया जाएगा

    यह फैसला क्यों अहम है?
    महंगाई बढ़ने के बीच DA बढ़ोतरी:

    कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ाएगी

    राज्य अर्थव्यवस्था में खपत (consumption) को सपोर्ट करेगी

    केंद्र सरकार के DA संशोधन के बाद एक “aligning step” माना जा रहा है

  • लखनऊ में 60 दिन का अलर्ट: लागू हुई सख्त निषेधाज्ञा,प्रशासन ने कहा-शांति और सुरक्षा सर्वोपरि

    लखनऊ में 60 दिन का अलर्ट: लागू हुई सख्त निषेधाज्ञा,प्रशासन ने कहा-शांति और सुरक्षा सर्वोपरि



    लखनऊ । लखनऊ में प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और आगामी धार्मिक व प्रशासनिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए बड़ा कदम उठाया है। शहर में 60 दिनों के लिए निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है, जो 19 जुलाई तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान कई तरह की गतिविधियों पर सख्त प्रतिबंध रहेंगे और बिना अनुमति किसी भी प्रकार का सार्वजनिक आयोजन करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय बकरीद, बड़ा मंगल, मोहर्रम जैसे धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ आने वाली प्रवेश परीक्षाओं को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से लिया गया है।

    लखनऊ में 60 दिन का अलर्ट: प्रशासन का बड़ा फैसला
    लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत यह निषेधाज्ञा लागू की गई है। संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) बबलू कुमार द्वारा जारी आदेश में साफ कहा गया है कि किसी भी तरह की भीड़, जुलूस या धरना-प्रदर्शन अब बिना अनुमति संभव नहीं होगा। शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस को सख्त निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

    5 से अधिक लोगों की सभा पर रोक, अनुमति जरूरी
    आदेश के अनुसार, बिना अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों का एकत्र होना, समूह बनाना, जुलूस निकालना या किसी प्रकार का सार्वजनिक आयोजन करना प्रतिबंधित रहेगा। धार्मिक कार्यक्रमों जैसे भंडारा, मजलिस, जुलूस, चल समारोह या सांस्कृतिक आयोजन के लिए पहले से प्रशासनिक अनुमति लेना अनिवार्य होगा। रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर के उपयोग पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।

    संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष प्रतिबंध
    निषेधाज्ञा के तहत विधानसभा भवन और उसके आसपास के क्षेत्रों में ट्रैक्टर-ट्रॉली, घोड़ा गाड़ी, ज्वलनशील पदार्थ और हथियार लेकर प्रवेश पर रोक रहेगी। इसके अलावा लालबत्ती चौराहा, पार्क रोड, सिविल अस्पताल, अटल चौक, बंदरिया बाग, गोल्फ क्लब और कैसरबाग जैसे इलाकों में धरना या विरोध प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन ने साफ किया है कि इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    ड्रोन, शूटिंग और सोशल मीडिया पर भी नजर
    लखनऊ में सरकारी भवनों जैसे लोकभवन, मुख्यमंत्री आवास और विधान भवन के आसपास ड्रोन उड़ाने या शूटिंग करने पर भी रोक लगा दी गई है। साथ ही सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट, अफवाह या सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाले कंटेंट पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। साइबर सेल को ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    डिलीवरी स्टाफ और किरायेदारों की जांच अनिवार्य
    ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं जैसे जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकिट के कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। साइबर कैफे संचालकों को ग्राहकों का पूरा रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं मकान मालिकों को भी बिना किरायेदार सत्यापन के मकान न देने की सख्त हिदायत दी गई है।

    सख्त संदेश: नियम तोड़ा तो होगी कार्रवाई
    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि यह कदम शहर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए जरूरी है।

  • यूपी का ‘धुरंधर’ लउआ गांव: 32 साल तक जिस गांव के पास रही विधायकी

    यूपी का ‘धुरंधर’ लउआ गांव: 32 साल तक जिस गांव के पास रही विधायकी

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का लउआ गांव अपनी अनोखी राजनीतिक विरासत के लिए जाना जाता है। इस गांव से निकले दो नेताओं हृदय नारायण दीक्षित और उदय राज यादव ने पुरवा विधानसभा सीट पर दशकों तक दबदबा बनाए रखा और मिलकर आठ बार जीत दर्ज की।

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में उन्नाव जिले का एक छोटा-सा गांव लउआ किसी राजनीतिक ‘हॉटस्पॉट’ से कम नहीं रहा है। पुरवा विधानसभा क्षेत्र के इस गांव ने पिछले कई दशकों में ऐसी राजनीतिक कहानी लिखी है, जिसे राज्य की चुनावी इतिहास में एक अलग पहचान मिली है। वर्ष 1985 से लेकर 2012 तक इस गांव के दो नेताओं ने बारी-बारी से विधानसभा सीट पर कब्जा जमाए रखा और कुल मिलाकर 32 वर्षों तक इस क्षेत्र की राजनीति पर प्रभाव बनाए रखा।

    इस गांव से निकलकर प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाने वाले दो प्रमुख नाम हैं—भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पद्मश्री से सम्मानित हृदय नारायण दीक्षित और समाजवादी पार्टी के नेता उदय राज यादव। दोनों नेताओं ने अलग-अलग राजनीतिक दलों से चुनाव लड़कर पुरवा विधानसभा में लगातार सफलता हासिल की और अपने क्षेत्र को राजनीतिक नक्शे पर खास स्थान दिलाया।

    हृदय नारायण दीक्षित ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1985 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में की और पहली ही बार में जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने 1989 में जनता दल, 1991 में जनता पार्टी और 1993 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर लगातार जीत दर्ज की। इस तरह उन्होंने पुरवा विधानसभा से चार बार विधायक बनकर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ साबित की। बाद में 2017 में उन्होंने बीजेपी के टिकट पर भगवंतनगर सीट से भी जीत दर्ज की और विधानसभा अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुंचे।

    दूसरी ओर, लउआ गांव के ही उदय राज यादव ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर पुरवा विधानसभा में लगातार चार बार—1996, 2002, 2007 और 2012—जीत हासिल की। उनकी लोकप्रियता का आधार उनका मजबूत जनसंपर्क और गांव-गांव तक सीधा जुड़ाव रहा। हालांकि 2017 और 2022 के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन लंबे समय तक उनका प्रभाव क्षेत्र की राजनीति में बना रहा।

    पुरवा विधानसभा का चुनावी इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। वर्ष 1952 से 2022 तक इस सीट पर कुल 18 विधानसभा चुनाव हुए, जिनमें से 8 बार जीत लउआ गांव के इन दोनों नेताओं के खाते में गई। यह आंकड़ा अपने आप में इस गांव के राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता है।

    इस क्षेत्र की राजनीति की खास बात यह रही है कि यहां पार्टी से ज्यादा व्यक्तिगत छवि और जनता से जुड़ाव का असर देखने को मिलता रहा है। लोधी और यादव जाति के मतदाताओं की बड़ी संख्या, साथ ही सवर्ण और मुस्लिम वोटरों की निर्णायक भूमिका ने चुनावी समीकरणों को हमेशा रोचक बनाए रखा।

    दोनों नेताओं की सफलता का सबसे बड़ा कारण उनका निरंतर जनता से संपर्क और जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ रही। जहां हृदय नारायण दीक्षित अपनी वैचारिक और संगठनात्मक राजनीति के लिए जाने जाते हैं, वहीं उदय राज यादव जनसंपर्क आधारित समाजवादी राजनीति के प्रतीक रहे हैं।

    लउआ गांव की यह राजनीतिक कहानी आज भी यूपी की चुनावी राजनीति में एक मिसाल के रूप में देखी जाती है, जहां एक छोटे से गांव ने दो नेताओं के दम पर दशकों तक सत्ता समीकरणों को प्रभावित किया।

  • इकबाल अंसारी की मांग: गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए, कुर्बानी को बताया अनुचित

    इकबाल अंसारी की मांग: गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए, कुर्बानी को बताया अनुचित

    नई दिल्ली। बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले के पूर्व वादी इकबाल अंसारी ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और उसकी कुर्बानी पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और गाय का आदर करना सामाजिक एकता के लिए जरूरी है।

    उत्तर प्रदेश में बकरीद के मौके पर गाय की कुर्बानी और सार्वजनिक धार्मिक गतिविधियों को लेकर चल रही बहस के बीच बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि केस के पूर्व वादी इकबाल अंसारी का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि गाय को “गौमाता” माना जाता है और इसका सम्मान हर नागरिक की जिम्मेदारी है, चाहे वह किसी भी धर्म का क्यों न हो।

    इकबाल अंसारी ने मांग की है कि सरकार गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करे, ताकि इसके संरक्षण और सम्मान को और मजबूती मिल सके। उन्होंने कहा कि गाय केवल एक पशु नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था से जुड़ी हुई है। ऐसे में उसकी कुर्बानी किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराई जा सकती।

    उन्होंने यह भी कहा कि हम भारतीय मुसलमान हैं और देश की साझा परंपराओं का सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी है। उनके अनुसार समाज में शांति और भाईचारे को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि सभी धर्म एक-दूसरे की भावनाओं को समझें और उसका सम्मान करें। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पड़ोसी धर्म की आस्था का ध्यान रखना भी सामाजिक सद्भाव का हिस्सा है।

    इकबाल अंसारी ने कहा कि गाय का दूध स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है और इसे प्रकृति का एक उपयोगी उपहार माना जाता है। इसलिए गाय का संरक्षण और सम्मान और भी जरूरी हो जाता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस्लाम भी निर्दोष और उपयोगी जीवों के प्रति क्रूरता को बढ़ावा नहीं देता, और समाज के कुछ लोग गलत कार्यों से पूरे समुदाय को बदनाम करते हैं।

    उन्होंने समाज के लोगों से अपील करते हुए कहा कि गायों के साथ किसी भी प्रकार का गलत व्यवहार नहीं होना चाहिए और जो भी ऐसा करता है, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि इस मुद्दे को राजनीति से दूर रखना चाहिए और केवल सामाजिक सौहार्द के नजरिए से देखा जाना चाहिए।

    पूर्व वादी ने यह भी कहा कि यदि समाज में भाईचारा बनाए रखना है तो सभी धर्मों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना होगा। उन्होंने अयोध्या के संतों की राय का भी समर्थन करते हुए कहा कि धर्मों के बीच संवाद और सम्मान ही देश को मजबूत बनाता है।

    इस बयान पर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे सांप्रदायिक सौहार्द की दिशा में सकारात्मक कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे धार्मिक और राजनीतिक बहस से जोड़कर देख रहे हैं।

  • मौलाना मदनी बोले- गाय को दिया जाए राष्ट्रीय पशु का दर्जा….इससे मॉब लिंचिंग व हिंसा रुकेगी

    मौलाना मदनी बोले- गाय को दिया जाए राष्ट्रीय पशु का दर्जा….इससे मॉब लिंचिंग व हिंसा रुकेगी


    सहारनपुर।
    जमीयत उलमा-ए-हिंद (Jamiat Ulama-e-Hind) के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी (Maulana Arshad Madani) ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की है। उन्होंने कहा, इससे गाय के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग और हिंसा (Mob lynching and violence) पर रोक लग सकती है। सरकार गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने से क्यों बच रही है, यह बड़ा सवाल है।

    मदनी ने कहा, गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने पर मुसलमानों को कोई आपत्ति नहीं होगी, बल्कि उन्हें खुशी होगी कि समाज में नफरत और तनाव कम होगा। मदनी ने कहा कि गाय के मुद्दे को राजनीतिक और भावनात्मक हथियार बना दिया गया है।

  • प्रयागराज में गंगा नदी पर बनेगा नया पुल, फाफामऊ जाम से मिलेगी बड़ी राहत

    प्रयागराज में गंगा नदी पर बनेगा नया पुल, फाफामऊ जाम से मिलेगी बड़ी राहत


    नई दिल्ली। प्रयागराज में गंगा नदी पर फाफामऊ पुल के समानांतर एक और नया पुल बनाया जाएगा, जिससे शहर में जाम की समस्या से लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इस परियोजना के लिए जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार, यह नया पुल पुराने फाफामऊ पुल के पास गंगा नदी के अपस्ट्रीम हिस्से में प्रस्तावित है। इसके बनने से प्रयागराज में गंगा नदी पर कुल पुलों की संख्या बढ़कर 10 हो जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इस नए पुल के निर्माण से गंगापार क्षेत्र और शहर के उत्तरी हिस्से के बीच आवागमन पहले की तुलना में काफी आसान हो जाएगा और लोगों को जाम से बड़ी राहत मिलेगी।

    इस परियोजना को लेकर प्रशासन का कहना है कि बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए यह पुल बेहद जरूरी है, जिससे भविष्य में यातायात व्यवस्था को सुचारु रखा जा सकेगा।