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  • TMC के 20वें सांसद के भी बगावत के चर्चे…. बागी गुट ने पार्टी सिंबल पर ठोका अपना दावा

    TMC के 20वें सांसद के भी बगावत के चर्चे…. बागी गुट ने पार्टी सिंबल पर ठोका अपना दावा


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों (West Bengal Assembly elections) में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress- TMC) की करारी शिकस्त के बाद पार्टी के भीतर मची बगावत अब दिल्ली दरबार तक पहुंच गई है। टीएमसी के बागी गुट ने लोकसभा स्पीकर को एक पत्र भेजकर संसद में खुद को असली टीएमसी के रूप में मान्यता देने और पार्टी सिंबल पर अपना दावा ठोका है। इस चिट्ठी के सामने के बाद 20वें सांसद के बगावत की भी चर्चा तेज हो गई है।

    सूत्रों के मुताबिक, यह पत्र 18 मई का है जिस पर टीएमसी के 19 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर हैं। दिलचस्प बात यह है कि पत्र में हस्ताक्षर करने वालों के सीरियल नंबर 1 से 20 तक हैं, लेकिन 13वें नंबर के आगे किसी का हस्ताक्षर नहीं है। इससे यह राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं कि टीएमसी का कोई अन्य कद्दावर सांसद भी इस बागी गुट के संपर्क में है और सही समय पर सामने आ सकता है।

    बागी गुट की वरिष्ठ नेता और सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, “हां, मैंने पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं और हमने इसे काफी समय पहले ही स्पीकर को भेज दिया था।” वहीं, सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने कहा कि इस पत्र से यह साफ हो जाता है कि लोकसभा में असली टीएमसी हम ही हैं।


    इन 19 सांसदों के हस्ताक्षर

    शुक्रवार को सामने आई चिट्ठी में जिन सांसदों के हस्ताक्षर हैं उनमें काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हालदार, शर्मिला सरकार, प्रसून बंदोपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार माल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सयानी घोष, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी (देव), जून मालिया और पार्थ भौमिक जैसे नाम शामिल हैं।


    बागी गुट के सामने क्या विकल्प

    लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। इनमें ममता बनर्जी के भतीजे और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी भी शामिल हैं, जो इस समय बागियों के मुख्य निशाने पर हैं। दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए बागी गुट के पास दो मुख्य रास्ते हैं। बागी गुट खुद को मूल पार्टी बताकर चुनाव आयोग (EC) के पास जा सकता है। इसके लिए उन्हें विधायी बहुमत साबित करना होगा। दलबदल कानून के तहत अयोग्य घोषित होने से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का साथ होना जरूरी है। 28 सांसदों का दो-तिहाई यानी 19 होता है। यही वजह है कि बागी गुट 19 सांसदों के साथ सुरक्षित होने का दावा कर रहा है।

    हाल ही में अप्रैल में आम आदमी पार्टी (AAP) के 10 राज्यसभा सांसदों ने इसी तरह दो-तिहाई बहुमत के साथ भाजपा में अपना विलय कर लिया था। यदि टीएमसी के ये 19 सांसद भी भाजपा या एनडीए में सीधे विलय करते हैं, तो उनकी सदस्यता बची रहेगी।

    टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने इस पर पलटवार करते हुए एक्स लिखा, “गद्दार टीएमसी सांसदों को कानून नहीं पता। 2003 के 91वें संविधान संशोधन ने पार्टी में विभाजन या अलग ब्लॉक के प्रावधान को खत्म कर दिया है। सांसदों की संख्या मायने नहीं रखती, मूल राजनीतिक दल के 2/3 हिस्से का किसी अन्य दल में विलय होना जरूरी है। इन सभी 19 गद्दारों को इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़ना चाहिए।”

    भाजपा इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए है, लेकिन वह फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रही है। राज्यसभा के नवनिर्वाचित सदस्य और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने इसे टीएमसी का आंतरिक विस्फोट और उनके पापों का नतीजा बताया है। सूत्रों के अनुसार, बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने इस हफ्ते दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से उनके आवास पर मुलाकात की थी। भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, “हमने टीएमसी को नहीं तोड़ा, वे खुद एनडीए और राष्ट्रवादी विचारधारा का समर्थन करने के लिए हमारे पास आए हैं। अब यह उन्हें तय करना है कि वे एकनाथ शिंदे या अजीत पवार का रास्ता चुनते हैं या नहीं।”

    हालांकि, इस कूटनीतिक बढ़त के बीच बंगाल भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं में थोड़ा असंतोष भी है। भाजपा का एक धड़ा इन टीएमसी बागियों को पार्टी में शामिल करने और भविष्य में एनडीए सरकार में कैबिनेट मंत्री पद दिए जाने की संभावना का खुलकर विरोध कर रहा है।


    केंद्र सरकार को क्या होगा फायदा?

    भले ही स्थानीय स्तर पर मतभेद हों, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए के लिए यह बहुत बड़ी राहत होगी। लोकसभा में इन 19 सांसदों का समर्थन मिलने से मोदी सरकार को परिसीमन विधेयक और ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे बड़े और कड़े नीतिगत कानूनों को आसानी से पारित कराने में भारी मदद मिलेगी। वहीं राज्यसभा में भी टीएमसी के 3 सांसदों सुखेन्दु शेखर, सुष्मिता देव और प्रकाश बड़ाईक के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीटों को भाजपा विधानसभा में बहुमत के दम पर आसानी से जीत लेगी।

  • केरल में सरकारी निगम को बीयर की बोतल पर 10 रुपये ज्यादा लेना पड़ा महंगा…देने पड़े 25 हजार

    केरल में सरकारी निगम को बीयर की बोतल पर 10 रुपये ज्यादा लेना पड़ा महंगा…देने पड़े 25 हजार


    कोच्चि।
    अक्सर कई जगहों पर प्रिंट रेट (MRP) से ज्यादा पैसे वसूल लिए जाते हैं और लोग इसे मामूली बात मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन केरल (Kerala) में एक ग्राहक से बीयर की बोतल (Beer bottle Price Case) पर 10 रुपये ज्यादा वसूलना सरकारी शराब निगम को भारी पड़ गया। कंज्यूमर कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए केरल स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन (KSBC) को ग्राहक को 25,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

    क्या है पूरा मामला?
    केरल के पथानामथिट्टा में एक शख्स ने KSBC के आउटलेट से 650 ml की एक बीयर की बोतल खरीदी। इस बीयर की बोतल पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 170 रुपये छपा था, लेकिन आउटलेट के कर्मचारियों ने इसके लिए 180 रुपये (यानी 10 रुपये अतिरिक्त) का बिल थमाया।

    जब ग्राहक ने रेट में इस अंतर का विरोध किया, तो कर्मचारियों ने बदसलूकी की। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिल में जो राशि लिखी है, वही देनी होगी और अगर कोई आपत्ति है तो जाकर शिकायत दर्ज करा दें। इसके बाद परेशान ग्राहक ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए कंज्यूमर कोर्ट (उपभोक्ता आयोग) का दरवाजा खटखटाया और मुआवजे की मांग की।


    शराब निगम ने दी ये दलील

    कंज्यूमर कोर्ट में KSBC ने 180 रुपये वसूलने की बात तो स्वीकार की, लेकिन इसके बचाव में कई तर्क पेश किए। निगम का कहना था कि केरल सरकार ने ‘सोशल सिक्योरिटी सेस’ (सामाजिक सुरक्षा उपकर) लागू किया था और शराब की कीमतों में संशोधन हुआ था, जिस वजह से 10 रुपये ज्यादा लिए गए। निगम ने दलील दी कि गोदामों और सप्लाई चेन में पहले से रखी करोड़ों शराब की बोतलों पर नई कीमत का लेबल (Re-labeling) लगाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।

    निगम ने लीगल मेट्रोलॉजी नियमों का हवाला देते हुए कहा कि पुराने स्टॉक को नई कीमत पर बेचने की सरकारी अनुमति थी और आउटलेट पर नई कीमतों का नोटिस भी लगाया गया था। साथ ही, ग्राहक पर ही काम में बाधा डालने और कर्मचारियों से दुर्व्यवहार करने का आरोप भी मढ़ दिया।


    कंज्यूमर कोर्ट की अहम टिप्पणी

    पथानामथिट्टा उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष जॉर्ज बेबी और सदस्य निषाद थंकप्पन की बेंच ने 3 जून को सुनाए गए अपने आदेश में निगम की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि नियम 18(2) स्पष्ट रूप से रिटेलर्स को पैकेट पर छपे रिटेल प्राइस से अधिक कीमत पर सामान बेचने से रोकता है। 170 रुपये की MRP वाली बोतल 180 में बेचना सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है।

    किसी भी ग्राहक से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि उसे सरकार के अंदरूनी आदेशों या फाइलों की जानकारी हो। एक उपभोक्ता के तौर पर ग्राहक केवल पैकेट पर दी गई जानकारी पर भरोसा करता है। बोतल पर छपा MRP ही ग्राहक और विक्रेता के बीच कॉन्ट्रैक्ट प्राइस है। कोर्ट ने कहा कि MRP से ज्यादा पैसा वसूलना ‘कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019’ के तहत ‘सर्विस में कमी’ और ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ है।


    क्या सुनाया गया फैसला?

    अदालत ने माना कि इस अवैध वसूली की वजह से ग्राहक को भारी मानसिक परेशानी और असुविधा का सामना करना पड़ा। इस तरह के ट्रेंड को रोकने के लिए आयोग ने सख्त फैसला सुनाते हुए KSBC को आदेश दिया कि ग्राहक से वसूले गए 10 रुपये अतिरिक्त राशि को शिकायत दर्ज करने की तारीख से 9% सालाना ब्याज के साथ वापस किया जाए। मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए 15,000 रुपये का मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा कानूनी खर्च के तौर पर 10,000 रुपये भी चुकाने होंगे। कुल मिलाकर कॉरपोरेशन को 30 दिन के भीतर ग्राहक को 25,000 रुपये का भुगतान करना होगा।

  • ममता का साथ छोड़ NDA को सपोर्ट कर रहे TMC के बागी सांसद…. यूसुफ पठान भी गुट में शामिल

    ममता का साथ छोड़ NDA को सपोर्ट कर रहे TMC के बागी सांसद…. यूसुफ पठान भी गुट में शामिल


    कोलकाता।
    तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के संसदीय दल पर संकट गहराता नजर आ रहा है। अधिकांश सांसदों के समर्थन का दावा करने वाले पार्टी के एक गुट ने ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) का साथ छोड़कर NDA का समर्थन करने का फैसला किया है। कहा जा रहा है कि इन बागी सांसदों के गुट में पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान (Yusuf Pathan) भी शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है। ये सारा घटनाक्रम तब हुआ, जब बनर्जी दिल्ली में INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल होने पहुंचीं थीं।

    टीएमसी की वरिष्ठ नेता और सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पठान का नाम भी होने के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि 20 सांसदों ने बगावत की है और जरूरत पड़ी, तो वह सभी का नाम बता सकती हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं एक-एक कर सभी का नाम बता सकती हूं। हम 20 सांसद हैं, लेकिन मैं ऐसा नहीं करना चाहती।’


    महुआ मित्रा ने साधा निशाना

    सोमवार को टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पठान पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, ‘और यूसुफ पठान आप दिल्ली जा रहे हैं, क्योंकि आपको अमित शाह का कॉल आया है? थोड़ी हिम्मत तो रखो। आप भारत के लिए खेले हैं। हमारे जिले ने आपको बड़े अंतर से जिताया है। थोड़ी शर्म और रीढ़ की हड्डी को मजबूत रखो।’


    लोकसभा सीट पर हो गया था बवाल

    हाल ही में खबरें आई थीं कि टीएमसी ने बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान को सीट से इस्तीफा देने के लिए मनाने की कोशिश की थी। साथ ही इसके लिए भी पूर्व क्रिकेटर सौरव गांगुली की मदद ली गई थी। ऐसा इसलिए ताकि ममता बनर्जी सीट से उपचुनाव लड़ सकें। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पूर्व क्रिकेटर ने इस्तीफा देने से मना कर दिया था। हालांकि, बाद में गांगुली ने इन दावों को खारिज कर दिया था।


    ओम बिरला को लिख दिया पत्र

    बागी गुट की प्रमुख बताई जा रहीं दस्तीदार ने NDA को अपने समर्थन की जानकारी देने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखने का फैसला किया है। दस्तीदार ने बताया, ‘मेरे समेत टीएमसी के लगभग बीस सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर NDA को औपचारिक रूप से समर्थन देने का फैसला किया है।’


    भाजपा में शामिल होंगे बागी?

    सूत्रों के अनुसार, बागी सांसदों ने टीएमसी से तुरंत इस्तीफा देने या भाजपा में शामिल होने का विकल्प नहीं चुना है। इसके बजाय, वे राजग का समर्थन करने वाले एक अलग गुट के रूप में काम करने का इरादा रखते हैं, जो दलबदल रोधी कानून से बचने के लिए बनाई गई एक रणनीति है। टीएमसी के पास फिलहाल लोकसभा में 28 सांसद हैं, जिनमें से एक सीट बसीरहाट सांसद हाजी नुरुल इस्लाम के निधन के बाद रिक्त है। 20 सांसदों का समर्थन मिलने पर दलबदल रोधी कानून लागू होने से रोकने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत आसानी से प्राप्त हो जाएगा।

    एक सूत्र ने बताया कि बागी सांसदों के एक समूह ने दिल्ली में भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक की। बैठक की एक कथित तस्वीर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही है। इस तस्वीर में, राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय, सांसद अबू ताहिर, असित मल, अरूप चक्रवर्ती, कालीपद खेरवाल, जगदीश बसुनिया, प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार और शताब्दी रॉय के साथ दिखाई दे रहे हैं।

  • तमिनाडु: BJP छोड़ने के बाद अन्नामलाई के नए आंदोलन को जबदस्त समर्थन, 10 घंटे में जुड़े लाख से अधिक लोग

    तमिनाडु: BJP छोड़ने के बाद अन्नामलाई के नए आंदोलन को जबदस्त समर्थन, 10 घंटे में जुड़े लाख से अधिक लोग


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) भाजपा (BJP) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई (K. Annamalai) के इस्तीफा देने के बाद नए राजनीतिक आंदोलन ‘इधु नम्मा इयक्कम’ (New Political Movement ‘Idhu Namma Iyakkam’) (यह हमारा आंदोलन है) को जबरदस्त जनसमर्थन मिल रहा है। भाजपा से इस्तीफा देने के बाद शुरू किए गए इस अभियान में सिर्फ 10 घंटे के भीतर 10 लाख से अधिक लोगों जुड़ चुके हैं। अन्नामलाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह जानकारी साझा करते हुए इसे अपने आंदोलन की बड़ी उपलब्धि बताया।

    अन्नामलाई ने लिखा कि यह समर्थन उनके साझा विजन और मिशन में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने सभी समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि यह आंदोलन जनता की भागीदारी से और मजबूत हो रहा है।


    पार्टी छोड़ने के बाद नई राजनीतिक दिशा

    भाजपा से इस्तीफा देने के बाद अन्नामलाई ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि वह एक नए और समावेशी राजनीतिक मंच की शुरुआत कर रहे हैं, जो आगे चलकर एक पूर्ण राजनीतिक पार्टी का रूप ले सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने दिसंबर 2025 में ही पार्टी नेतृत्व को अपने इस्तीफे की जानकारी दे दी थी।

    अन्नामलाई ने अपने इस्तीफे में कहा कि तमिलनाडु को लेकर उनके और भाजपा नेतृत्व के दृष्टिकोण में अंतर था, जिसके चलते उन्होंने यह निर्णय लिया। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को धन्यवाद देते हुए कहा कि वर्षों तक उन्हें जो समर्थन मिला, वह उनके लिए महत्वपूर्ण रहा।


    दिल्ली दौरे के बाद बढ़ी थीं अटकलें

    हाल ही में अन्नामलाई ने दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, संगठन महासचिव बी.एल. संतोष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। पार्टी को मात्र 3 प्रतिशत वोट शेयर मिला था, जिसके बाद राज्य इकाई में बदलाव और नए नेतृत्व की चर्चा शुरू हो गई थी।


    इस्तीफे के पीछे राजनीतिक समीकरण भी अहम

    उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब 2026 विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा और एआईएडीएमके के बीच गठबंधन दोबारा सक्रिय हुआ है। इसके बाद उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। अन्नामलाई के एआईएडीएमके के कुछ नेताओं के साथ संबंध पहले से ही तनावपूर्ण रहे हैं। उनके विवादित बयानों और वैचारिक मतभेदों के कारण कई बार राजनीतिक विवाद भी उत्पन्न हुए। हाल ही में कुछ नेताओं के इस्तीफे के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में कई कार्यकर्ता उनके नए राजनीतिक आंदोलन से जुड़ सकते हैं।


    क्या बनेगा नई ताकत का केंद्र?

    राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अन्नामलाई का यह नया आंदोलन तमिलनाडु में एक मजबूत विकल्प बन सकता है। उनके सोशल मीडिया दावे और शुरुआती समर्थन को देखते हुए यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस नए राजनीतिक प्रयोग का असर राज्य की राजनीति पर दिखाई दे सकता है।

  • मैनपुरी में बड़ा राजनीतिक-सांस्कृतिक दृश्य: डिंपल यादव ने शंकराचार्य के सामने टेका माथा, मांगी माफी

    मैनपुरी में बड़ा राजनीतिक-सांस्कृतिक दृश्य: डिंपल यादव ने शंकराचार्य के सामने टेका माथा, मांगी माफी


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में शुक्रवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही हलकों में चर्चा तेज कर दी। बद्रीनाथ स्थित ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी गौ रक्षा यात्रा के तहत जिले में पहुंचे थे। इसी दौरान समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव उनसे मिलने पहुंचीं और उनके चरणों में नतमस्तक होकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    कार्यक्रम के दौरान डिंपल यादव ने शंकराचार्य को शॉल भेंट की और जमीन पर बैठकर उनसे बातचीत की। इस मुलाकात में उन्होंने सबसे पहले कन्नौज की उस घटना का जिक्र किया, जिसमें शंकराचार्य को कथित तौर पर रात सड़क पर गुजारनी पड़ी थी। डिंपल यादव ने इस घटना को लेकर खेद जताते हुए माफी भी मांगी और कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा।

    डिंपल यादव ने शंकराचार्य के गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने के अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इस मुद्दे पर उनके साथ हैं और आगे भी सहयोग करते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह से शंकराचार्य का अपमान हुआ है, वह पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। अपने बयान में डिंपल यादव ने कहा कि “प्रकृति ऐसे अपमान का जवाब जरूर देती है।”

    मुलाकात के दौरान शंकराचार्य ने भी अपनी यात्रा और गौ रक्षा आंदोलन की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि उनका संकल्प गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने का है और जब तक इसे संवैधानिक मान्यता नहीं मिलती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि यात्रा के दौरान कई स्थानों पर प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनका अभियान नहीं रुकेगा।

    करीब एक घंटे चली इस मुलाकात के बाद शंकराचार्य किशनी के लिए रवाना हो गए। इससे पहले वे सपा नेता और पूर्व विधायक राजकुमार यादव के मैरिज हॉल में ठहरे हुए थे। बातचीत के दौरान डिंपल यादव ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव को इस पूरे घटनाक्रम का दुख है और यदि उन्हें जानकारी होती तो बेहतर व्यवस्थाएं की जातीं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर इसे धार्मिक संत के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे राजनीतिक संदेश के तौर पर भी समझा जा रहा है।

    कुछ महीने पहले ही लखनऊ में अखिलेश यादव ने भी शंकराचार्य से मुलाकात की थी, जहां वह उनके सामने जमीन पर बैठे नजर आए थे। उसी मुलाकात के बाद से दोनों के बीच संवाद और धार्मिक मुद्दों पर चर्चा लगातार सुर्खियों में बनी हुई है।

    मैनपुरी की यह मुलाकात अब सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत के रूप में भी देखी जा रही है, जिस पर आगे भी चर्चाएं तेज रहने की संभावना है।

  • यूपी में मौसम का अलर्ट: 38 शहरों में आंधी-तूफान की चेतावनी, 70 जिलों में बारिश की संभावना

    यूपी में मौसम का अलर्ट: 38 शहरों में आंधी-तूफान की चेतावनी, 70 जिलों में बारिश की संभावना


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। Uttar Pradesh के कई हिस्सों में तेज आंधी-तूफान और बारिश को लेकर मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार 38 शहरों में तेज हवाओं के साथ मौसम बिगड़ने की आशंका है, जबकि लगभग 70 जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है।

    लखनऊ सहित कई प्रमुख जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली है। हालांकि तेज हवाओं और बदलते मौसम के कारण कुछ इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव प्री-मानसून गतिविधियों का हिस्सा है, जिसमें गर्म हवाओं और नमी के मिलने से बादल तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। इसी कारण कुछ स्थानों पर तेज बारिश और कहीं-कहीं आंधी जैसी स्थिति बन रही है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका भी जताई गई है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

    शहरी इलाकों में भी मौसम का असर दिखाई दे रहा है, जहां दोपहर के बाद अचानक काले बादल छा गए और कई जगहों पर हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई।

    कुल मिलाकर यूपी में मौसम का यह बदला मिजाज अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकता है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत के साथ-साथ सतर्कता भी बरतनी होगी।

  • नोएडा हाईराइज में आग का तांडव: 12वें फ्लोर तक पहुंची लपटें, 6वीं मंजिल तक ही सीमित रही दमकल की धार

    नोएडा हाईराइज में आग का तांडव: 12वें फ्लोर तक पहुंची लपटें, 6वीं मंजिल तक ही सीमित रही दमकल की धार


    नोएडा। नोएडा के सेक्टर-75 स्थित IVY काउंटी सोसाइटी की 28 मंजिला इमारत शुक्रवार सुबह अचानक आग की चपेट में आ गई। आग 12वें फ्लोर पर स्थित एक फ्लैट में लगी और तेज हवा के कारण कुछ ही मिनटों में लपटें पूरे फ्लैट में फैल गईं। खिड़कियों से आग की ऊंची लपटें और काले धुएं का गुबार उठता रहा, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई।

     दमकल की पहुंच 6वीं मंजिल तक ही सीमित
    घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन शुरुआती राहत कार्यों में बड़ा संकट सामने आया। दमकल की साधारण गाड़ियों का पानी केवल 5 से 6वीं मंजिल तक ही पहुंच सका, जबकि आग 12वीं मंजिल पर विकराल रूप ले चुकी थी। इसी दौरान मौके पर मौजूद लोगों में नाराजगी देखने को मिली। एक व्यक्ति ने कहा कि सिस्टम की स्थिति बेहद खराब है और यह केवल “गमलों में पानी डालने जैसा” प्रतीत हो रहा है।

    हाइड्रोलिक क्रेन से पाया गया काबू
    स्थिति बिगड़ते देख फायर विभाग ने हाइड्रोलिक क्रेन को मौके पर बुलाया। इसके बाद ऊंचाई पर पानी डालकर आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू हुई। करीब ढाई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया गया। राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं मिली।

    अफरा-तफरी में खाली कराई गई सोसाइटी
    आग लगते ही सोसाइटी में अफरा-तफरी मच गई। लोग सीढ़ियों के जरिए बाहर भागने लगे। सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के टावर भी खाली करा दिए गए। फायर सेफ्टी सिस्टम सक्रिय होने के कारण एक बड़ी दुर्घटना टल गई।

    एक और घटना: PG रेस्टोरेंट में आग, 15 लोग सुरक्षित निकाले गए
    इसी बीच सेक्टर-52 स्थित ई-3 शताब्दी विहार के एक PG और रेस्टोरेंट में भी आग लग गई। प्रारंभिक जांच में आग का कारण फ्रीजर में शॉर्ट सर्किट बताया गया। दमकल विभाग ने समय रहते कार्रवाई करते हुए ऊपर फंसे 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

     हाईराइज फायर सेफ्टी की हकीकत उजागर
    नोएडा जैसे तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्र में ऊंची इमारतों के लिए फायर सेफ्टी सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं। वर्तमान में उपलब्ध हाइड्रोलिक उपकरण अधिकतम 42 मीटर तक ही प्रभावी हैं, जबकि कई इमारतें 30 से 80 मंजिल तक पहुंच चुकी हैं। फायर विभाग भविष्य में 72 और 102 मीटर क्षमता वाली मशीनें लाने की योजना पर काम कर रहा है, लेकिन फिलहाल यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं मानी जा रही।

    यह घटना स्पष्ट करती है कि तेजी से बढ़ते शहरी विकास के मुकाबले आपातकालीन सेवाओं की क्षमता अभी पीछे है। नोएडा की यह आग केवल एक हादसा नहीं, बल्कि हाईराइज सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी है।

  • Bihar: पूर्व सीएम लालू यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा में बड़ा बदलाव….., Z+ सुरक्षा हटी

    Bihar: पूर्व सीएम लालू यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा में बड़ा बदलाव….., Z+ सुरक्षा हटी


    पटना।
    बिहार (Bihar) के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav ) और राबड़ी देवी (Rabri Devi) की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है. दोनों नेताओं को पहले Z+ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी, लेकिन अब उनकी सुरक्षा में कटौती कर दी गई है. वहीं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) की Y+ कैटेगरी की सुरक्षा पहले की तरह जारी रहेगी. जानकारी के अनुसार, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी दोनों बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं. पहले उन्हें सुरक्षा खतरों को देखते हुए Z+ श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी, हाउस गार्ड और एस्कॉर्ट वाहन शामिल होते थे।

    हालांकि वर्तमान सुरक्षा मानकों के अनुसार किसी शख्स की सुरक्षा उसके मौजूदा संवैधानिक पद और उपलब्ध खुफिया इनपुट के आधार पर तय की जाती है. चूंकि दोनों नेता लंबे समय से किसी सक्रिय प्रशासनिक या संवैधानिक पद पर नहीं हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया गया है।

    दूसरी तरफ, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की Y+ श्रेणी की सुरक्षा को बरकरार रखा गया है. सुरक्षा समिति का मानना है कि नेता प्रतिपक्ष का पद कैबिनेट मंत्री के समकक्ष होता है. इसके अलावा उनकी लगातार राजनीतिक गतिविधियों, जनसभाओं और दौरों को देखते हुए मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था जारी रखने का फैसला लिया गया है.

    पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में भी कटौती की गई है. पहले उन्हें Y कैटेगरी की सुरक्षा मिलती थी, लेकिन अब उन्हें केवल एक व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी यानी अंगरक्षक उपलब्ध कराया जाएगा. सुरक्षा में यह बदलाव मंत्री पद छोड़ने के बाद लागू होने वाले नियमों के तहत किया गया है।


    राजश्री यादव की सुरक्षा के लिए एक बॉडीगार्ड की तैनाती

    लालू यादव की बड़ी बेटी और सांसद मीसा भारती को अब तीन सुरक्षाकर्मियों का सुरक्षा कवर मिलेगा. यह व्यवस्था सांसदों के लिए निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत तय की गई है. वहीं तेजस्वी यादव की पत्नी राजश्री यादव को एक सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराया जाएगा. राजश्री का कोई राजनीतिक या संवैधानिक पद नहीं है, लेकिन परिवार की सार्वजनिक गतिविधियों और व्यक्तिगत सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें एक अंगरक्षक दिया गया है. इस तरह लालू परिवार के विभिन्न सदस्यों की सुरक्षा व्यवस्था को उनके वर्तमान पद और सुरक्षा मानकों के अनुरूप पुनर्गठित किया गया है।

  • TMC के विद्रोह में मुस्लिम MLA भी पीछे नहीं…. मुर्शिदाबाद के 9 में से 8 ने छोड़ा ममता का साथ

    TMC के विद्रोह में मुस्लिम MLA भी पीछे नहीं…. मुर्शिदाबाद के 9 में से 8 ने छोड़ा ममता का साथ


    कोलकाता।
    तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) में हुए विद्रोह में टीएमसी (TMC) के अल्पसंख्यक विधायक (Minority MLA) भी पीछे नहीं हैं. इन विधायकों ने ममता बनर्जी (Mamata Banerjee .) की बजाय ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) के साथ जाना ज्यादा बेहतर समझा है. मुर्शिदाबाद में TMC के जो 9 विधायक जीते थे उनमें से 8 ने ममता का साथ छोड़ दिया है और ऋतब्रत बनर्जी का दामन थाम लिया है।

    इस सूची में तृणमूल कांग्रेस के लंबे समय से विश्वसनीय और वरिष्ठ नेता जावेद खान के साथ-साथ काजल शेख जैसे प्रभावशाली नेता भी शामिल हैं। बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने इन मुस्लिम विधायकों को बगावत का भरपूर इनाम दिया है. बागियों में शामिल जावेद खान को विधानसभा में विपक्ष का उपनेता बनाया गया है. वहीं दूसरी ओर अखुरुज्जमां को चीफ व्हिप बनाया गया है।


    तृणमूल की ‘टूट’ बीजेपी के लिए बंगाल से ज्यादा दिल्ली में फायदेमंद

    एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले मंत्रिमंडल के चार अल्पसंख्यक मंत्री भी आंदोलनकारी विधायकों के इस समूह में शामिल हैं. ये विधायक हैं- जावेद खान, सबीना यास्मीन, गुलाम रब्बानी और अखरूजमां।

    तृणमूल के आंदोलनकारी खेमे के जिन अल्पसंख्यक विधायकों के नाम अब तक सामने आए हैं, वे इस प्रकार हैं – जावेद खान, अखरूजमां, काजल शेख, गुलाम रब्बानी, डॉ. मोशर्रफ हुसैन, इमानी बिस्वास, नियामत शेख, रेयात हुसैन, गुलशन मल्लिक, तौसीफुर रहमान, मुस्तफिजुर रहमान, बहारुल इस्लाम।

    लेकिन कुल आंकड़ा कही ज्यादा है. रिपोर्ट के अनुसार तृणमूल के टिकट पर चुनाव जीतने वाले 34 मुस्लिम विधायकों में से 17 बागी खेमे में शामिल हो गए हैं।

    सबसे खास बात यह है कि मुर्शिदाबाद के 9 अल्पसंख्यक विधायकों में से 8 ऋतब्रत बनर्जी के खेमे में शामिल हो गए हैं. अखरुजमां कहते हैं, ‘मुर्शिदाबाद जिले के 9 विधायकों में से 8 ने हमारा समर्थन किया है. हमने पार्टी के बहुमत के साथ खड़े रहने का फैसला किया है.’ केवल नव निर्वाचित विधायक और शिक्षाविद बाबर अली (जलंगी विधायक) ने ही पार्टी नेता ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भरोसा जताया है।

    रघुनाथगंज के विधायक अख्रुज्जमां को इस ‘विद्रोह’ के सूत्रधारों में से एक माना जा रहा है. अखरूजमां ने 2018 में कांग्रेस छोड़ दी थी और तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे, तब शुभेंदु अधिकारी मुर्शिदाबाद जिले में तृणमूल कांग्रेस के पर्यवेक्षक थे. इस बार वे ऋतब्रता के साथ आए हैं. जिले के दूसरे विधायकों शमशेरगंज के नूर आलम, सुती विधायक इमानी बिस्वास, लालगोला के अब्दुल अजीज, भगवानगोला के रियात हुसैन सरकार और हरिहरपारा के नियामत शेख तथा भरतपुर के विधायकों मुस्तफिजुर रहमान।

    आंकड़ों के अनुसार 2021 के विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने मुर्शिदाबाद जिले की 22 सीटों में से 20 सीटें जीती थीं. तृणमूल कांग्रेस के सुनहरे दिनों में जब अभिषेक बनर्जी या ममता बनर्जी कोलकाता में बैठक बुलाते थे तो मुर्शिदाबाद जिले से बुलाए गए सभी विधायक लगभग एक दिन पहले ही कोलकाता में होटल बुक कर लेते थे, ताकि वे समय पर बैठक में पहुंच सकें और पीछे की पंक्ति में न बैठना पड़े. लेकिन इस विधानसभा चुनाव के बाद स्थिति बदल गई है।

    पिछले रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घर पर हुई तृणमूल कांग्रेस विधायक दल की बैठक में ये विधायक नजर नहीं आए. 2011 से ही मुस्लिम बड़ी संख्या में तृणमूल को वोट देते आ रहे हैं. ममता बनर्जी को लगता था कि मुस्लिम उनके स्थायी वोट बैंक रहेंगे. लेकिन इस चुनाव में पूरी तस्वीर बदल गई है।

  • प्रयागराज में सनसनीखेज हत्याकांड…. मकान से एक के बाद एक 4 शव बरामद

    प्रयागराज में सनसनीखेज हत्याकांड…. मकान से एक के बाद एक 4 शव बरामद


    प्रयागराज।
    यूपी (UP) के प्रयागराज (Prayagraj) के साउथ मलाका (South Malacca) में चार लोगों की निर्मम हत्या की बात फैलते ही पूरा इलाके में सनसनी फैल गई। मंगलवार दोपहर घर के भीतर से उठ रही तेज दुर्गंध ने जिस खौफनाक कांड से पर्दा उठाया, उसने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि पुलिस को भी हैरान कर दिया। एक के बाद एक, चार शव बरामद होने की खबर फैलते ही साउथ मलाका चौराहे पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल था कि आखिर चार लोगों की इतनी बेरहमी से हत्या किसने और क्यों की?

    मकान से निकल रही दुर्गंध इतनी तीव्र थी कि चौराहे से गुजरने वाले राहगीरों तक को परेशानी हो रही थी। आसपास के दुकानदारों को पहले लगा कि किसी जानवर की मौत हुई होगी, लेकिन जब पुलिस ने मकान का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो पूरा मामला सनसनीखेज हत्याकांड में बदल गया। बताया जा रहा है कि शव करीब तीन दिन तक बंद कमरों में पड़े रहने के कारण सड़ने लगे थे, जिससे पूरे इलाके में दुर्गंध फैल गई थी। चार हत्याओं की खबर फैलते ही आसपास के लोग अपने घरों और दुकानों से निकलकर घटनास्थल पर पहुंच गए। चौराहे पर देर शाम तक लोगों की भीड़ जुटी रही। घटनास्थल पर पुलिस कमिश्नर, अपर पुलिस आयुक्त, डीसीपी सिटी, फॉरेंसिक विशेषज्ञ और डॉग स्क्वायड की टीम घंटों जांच में जुटी रही।

    पुलिस को मकान से तीन मोबाइल फोन और हत्या में इस्तेमाल होने की आशंका वाली एक हथौड़ी भी मिली है। फॉरेंसिक टीम ने मौके से महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। पुलिस आसपास के लोगों, किरायेदारों, रिश्तेदारों और परिवार से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है। साथ ही इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। शहर के बीचोंबीच हुए इस सनसनीखेज चौहरे हत्याकांड ने लोगों में दहशत पैदा कर दी है।


    चौथा शव किसका? सबसे बड़ा सवाल

    साउथ मलाका हत्याकांड की जांच में सबसे बड़ा सवाल भूतल स्थित कलर लैब से बरामद चौथे शव की पहचान को लेकर खड़ा हो गया है। पुलिस को आशंका है कि युवक की पहले दुकान के भीतर हत्या की गई और फिर केमिकल डालकर उसका चेहरा जला दिया गया, ताकि पहचान छिपाई जा सके। प्रथम दृष्टया माना जा रहा है कि शव वीरेंद्र वैश्य के बड़े बेटे अभिषेक का हो सकता है, लेकिन चेहरा बुरी तरह झुलस जाने के कारण इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। पुलिस डीएनए परीक्षण और अन्य वैज्ञानिक तरीकों से पहचान सुनिश्चित कराने की तैयारी कर रही है।

    पुलिस को यह भी संदेह है कि युवक की हत्या के बाद आरोपी पहली मंजिल पर पहुंचे और वृद्ध दंपती वीरेंद्र वैश्य, उनकी पत्नी अनीता और बेटी मीनाक्षी पर हथौड़ी या किसी भारी वस्तु से ताबड़तोड़ वार कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि कहीं चौथा शव किसी अन्य व्यक्ति का तो नहीं है और पहचान छिपाने के लिए चेहरा जलाया गया हो। इसी बिंदु को जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।