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  • देश में पहली पहल: यूपी के 12 लाख शिक्षाकर्मियों को ₹1 करोड़ दुर्घटना कवर, मुफ्त कैशलेस इलाज भी

    देश में पहली पहल: यूपी के 12 लाख शिक्षाकर्मियों को ₹1 करोड़ दुर्घटना कवर, मुफ्त कैशलेस इलाज भी


    उत्तरप्रदेश । उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा विभाग से जुड़े लाखों कर्मचारियों को बड़ी सामाजिक सुरक्षा देते हुए देश की पहली ऐसी व्यापक बीमा और स्वास्थ्य योजना शुरू की है, जिसके तहत पात्र शिक्षाकर्मियों को एक करोड़ रुपये तक का दुर्घटना बीमा और पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना का लाभ शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और छात्रावासों में कार्यरत वार्डेन सहित करीब 12 लाख शिक्षाकर्मियों को मिलेगा। इसके लिए भारतीय स्टेट बैंक के साथ समझौता किया गया है। सरकार का उद्देश्य शिक्षकों और शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में उनके परिवार को कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

    योजना के तहत स्थायी शिक्षकों और कर्मचारियों को 10 लाख रुपये का ग्रुप टर्म इंश्योरेंस, एक करोड़ रुपये का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, एक करोड़ रुपये का स्थायी दिव्यांगता बीमा तथा 1.60 करोड़ रुपये तक का हवाई दुर्घटना बीमा कवर मिलेगा। यदि किसी कर्मचारी के साथ दुर्घटना होती है तो उसके बच्चों की पढ़ाई और बेटियों के विवाह के लिए भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    संविदा कर्मचारियों के लिए भी अलग प्रावधान किए गए हैं। दस हजार रुपये से अधिक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को 30 लाख से 80 लाख रुपये तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा मिलेगा। स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 30 लाख रुपये और आंशिक दिव्यांगता पर 15 लाख रुपये तक का बीमा कवर दिया जाएगा। वहीं दस हजार रुपये से कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों को दो लाख रुपये का दुर्घटना बीमा मिलेगा।

    मुख्यमंत्री ने शिक्षाकर्मियों के लिए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा की भी शुरुआत की। उन्होंने कहा कि इस योजना पर राज्य सरकार हर वर्ष लगभग 450 करोड़ रुपये खर्च करेगी और इसका पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। इसके बदले सरकार शिक्षकों से केवल इतना चाहती है कि वे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दें, विद्यालयों को स्वच्छ और अनुशासित बनाए रखें तथा भविष्य की पीढ़ी के निर्माण में पूरी निष्ठा से योगदान दें।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों की विज्ञान प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया और बच्चों से संवाद किया। एक छात्रा द्वारा तैयार दूरबीन के मॉडल को देखकर उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा कि क्या इससे वाराणसी से लखनऊ के मंत्री भी दिखाई देंगे। कार्यक्रम की शुरुआत 51 बटुकों के वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई।

    इस अवसर पर माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि बोर्ड परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने अन्य सरकारी विभागों और निजी क्षेत्र से भी अपील की कि वे अपने कर्मचारियों के लिए ऐसी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं लागू करें ताकि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में कोई परिवार असहाय न रह जाए।

  • यूपी में मानसून का कहर: लखनऊ में दिन में छाया अंधेरा, आगरा में इमारत ढही, नोएडा जलमग्न

    यूपी में मानसून का कहर: लखनऊ में दिन में छाया अंधेरा, आगरा में इमारत ढही, नोएडा जलमग्न


    लखनऊ । यूपी में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है और बुधवार को राज्य के कई जिलों में तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। राजधानी लखनऊ में दोपहर के समय ही आसमान पर घने बादल छा गए और दिन में अंधेरा जैसा माहौल बन गया। इसके बाद तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हुई, जिससे शहर की सड़कों पर पानी भर गया और यातायात प्रभावित हो गया।

    राज्य के कई अन्य शहरों में भी बारिश का व्यापक असर देखने को मिला। नोएडा, गाजियाबाद, मथुरा, हाथरस, उन्नाव, औरैया और चित्रकूट सहित करीब 40 शहरों में रुक-रुककर बारिश का दौर जारी रहा। नोएडा में कई इलाकों में सड़कों पर करीब दो फीट तक पानी भर गया, जिससे दोपहिया वाहन बीच रास्ते में बंद हो गए और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    आगरा में लगातार बारिश के कारण बड़ा हादसा हो गया। यहां एक दो मंजिला दुकान अचानक भरभराकर गिर गई। मलबे में एक महिला समेत पांच लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई है। राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने और लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटा रहा।

    हाथरस में हालात और भी चुनौतीपूर्ण रहे। सदर कोतवाली परिसर तक में पानी भर गया, जबकि कई सड़कों पर पानी का बहाव इतना तेज था कि कारें और मोटरसाइकिलें बहने लगीं। मथुरा में भी जलभराव की स्थिति बनी रही और कई इलाकों में नाले उफान पर आ गए। मंगलवार को एक डिलीवरी बॉय बाइक समेत नाले के तेज बहाव में फंस गया था, जिसे स्थानीय लोगों ने सुरक्षित बाहर निकाला।

    भारतीय मौसम विभाग ने प्रदेश के 68 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें 12 जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग का कहना है कि बंगाल की खाड़ी से बना सक्रिय मानसूनी सिस्टम अब मध्य प्रदेश के आसपास पहुंच चुका है, जिसका व्यापक असर उत्तर प्रदेश में दिखाई दे रहा है। अगले पांच दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

    आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे में सबसे अधिक 31 मिलीमीटर बारिश सोनभद्र जिले में दर्ज की गई, जो सामान्य से लगभग 195 प्रतिशत अधिक है। हालांकि 1 जून से अब तक प्रदेश में कुल वर्षा सामान्य से करीब 45 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले दिनों में लगातार होने वाली बारिश से इस कमी की भरपाई हो सकती है।

    प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि भारी बारिश के दौरान जलभराव वाले इलाकों, उफनते नालों और कमजोर इमारतों से दूर रहें। साथ ही मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें और अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलें।

  • अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बड़ी बैठक चढ़ावा चोरी मामले के बाद लिए जा सकते हैं अहम निर्णय

    अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बड़ी बैठक चढ़ावा चोरी मामले के बाद लिए जा सकते हैं अहम निर्णय


    उत्तरप्रदेश। अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण सामने आने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को शुरू हो गई। इस बैठक पर देशभर के श्रद्धालुओं और आम लोगों की नजरें टिकी हैं क्योंकि इसमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफों सहित कई अहम मुद्दों पर फैसला लिया जाना है।

    बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास व्हीलचेयर पर पहुंचकर शामिल हुए। महासचिव चंपत राय भी बैठक में मौजूद रहे जबकि अनिल मिश्रा बैठक शुरू होने तक नहीं पहुंचे। जानकारी के अनुसार ट्रस्ट के कुछ पदेन सदस्य और केंद्र तथा उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि भी प्रत्यक्ष रूप से बैठक में शामिल नहीं हुए और उनके ऑनलाइन जुड़ने की संभावना जताई गई।

    बताया जा रहा है कि चढ़ावा चोरी की घटना सार्वजनिक होने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया था। ट्रस्ट की बैठक में इन इस्तीफों को स्वीकार करने या आगे की कार्रवाई को लेकर विचार किया जा रहा है। ट्रस्ट में कुल 14 सदस्य हैं जिनमें चार पदेन सदस्य शामिल हैं। किसी भी प्रस्ताव को पारित करने के लिए दो तिहाई सदस्यों की सहमति आवश्यक होती है जबकि पदेन सदस्यों के मतों की गणना नहीं की जाती।

    बैठक से पहले ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने एक बयान जारी कर कहा कि मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना से वे बेहद आहत हैं। उन्होंने कहा कि जिसने भी ऐसा महापाप किया है उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    बैठक के दौरान ट्रस्ट के सदस्यों ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम पर भरोसा जताया। उनका कहना था कि इस घटना से देशभर में गलत संदेश गया है और करोड़ों रामभक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है।

    सूत्रों के अनुसार यदि महासचिव पद पर बदलाव होता है तो विश्व हिंदू परिषद के बजरंग बागड़ा का नाम सामने आ सकता है। वहीं ट्रस्टी पद के लिए नीरज दौनेरिया के नाम पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इन संभावित नियुक्तियों पर अंतिम निर्णय ट्रस्ट की बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा।

    इस बीच चढ़ावा चोरी मामले की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ पहले ही खारिज कर चुकी है। अदालत ने कहा कि इसी विषय से संबंधित मामला पहले से सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में अब सभी की निगाहें ट्रस्ट की बैठक में लिए जाने वाले निर्णय और जांच की अगली दिशा पर टिकी हुई हैं।

  • कानपुर में दर्दनाक हादसा कंटेनर ने ट्रैफिक सिपाहियों को कुचला एक की मौत ड्राइवर भी मरा

    कानपुर में दर्दनाक हादसा कंटेनर ने ट्रैफिक सिपाहियों को कुचला एक की मौत ड्राइवर भी मरा


    उत्तरप्रदेश। कानपुर में सोमवार तड़के बर्रा एलिवेटेड रोड पर एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। ड्यूटी पर तैनात दो ट्रैफिक सिपाही जब एक ट्रक को रोककर उसके दस्तावेजों की जांच कर रहे थे, तभी पीछे से तेज रफ्तार में आ रहे एक कंटेनर ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि मौके पर अफरा तफरी मच गई और कुछ ही पलों में हालात बेकाबू हो गए।

    जानकारी के अनुसार ट्रैफिक कांस्टेबल जितेंद्र कुमार और राकेश कुमार नौबस्ता चौराहे पर ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान झारखंड नंबर का एक खाली ट्रक पनकी प्लांट की ओर जा रहा था। शक के आधार पर दोनों सिपाहियों ने ट्रक को रोका और चालक को नीचे उतारकर दस्तावेजों की जांच शुरू की। वे ट्रक के पीछे खड़े होकर पूछताछ कर ही रहे थे कि तभी पीछे से तेज रफ्तार कंटेनर आया और ट्रक को जोरदार टक्कर मार दी।

    हादसे के बाद कंटेनर लगभग 50 मीटर तक वाहन को घसीटता हुआ ले गया। इस दौरान दोनों सिपाही और ट्रक चालक उसकी चपेट में आ गए। हादसे में कांस्टेबल जितेंद्र कुमार की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दूसरे सिपाही राकेश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हें कांशीराम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ट्रक चालक रितेश कुमार यादव की भी इस हादसे में मौत हो गई।

    जितेंद्र कुमार 2018 बैच के सिपाही थे और आगरा के रहने वाले थे। उनकी शादी 2020 में हुई थी और उनकी एक ढाई साल की बेटी भी है। इस घटना ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। वहीं घायल सिपाही राकेश कुमार का इलाज जारी है और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। हादसे के बाद एलिवेटेड रोड पर करीब दो घंटे तक यातायात बाधित रहा और लंबा जाम लग गया।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसा तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण हुआ। पुलिस मामले की जांच कर रही है और कंटेनर चालक की पहचान तथा उसकी जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया जारी है।

    यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों की रफ्तार पर सवाल खड़े करती है। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चर्चा शुरू हो गई है।

  • आंधी और बारिश से यूपी में जनजीवन प्रभावित कई शहरों में सड़कें डूबी मौसम विभाग ने दी चेतावनी

    आंधी और बारिश से यूपी में जनजीवन प्रभावित कई शहरों में सड़कें डूबी मौसम विभाग ने दी चेतावनी


    उत्तरप्रदेश उत्तर प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है और सोमवार को कई जिलों में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। प्रयागराज में सुबह से ही तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का दौर जारी है जिससे शहर की सड़कों पर पानी भर गया है और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। वाराणसी भदोही और मिर्जापुर सहित कई पूर्वी यूपी के शहरों में भी तेज बारिश और आंधी ने लोगों को परेशान किया है।

    वाराणसी में हालात ऐसे रहे कि कई गलियों में पानी भर गया और गंगा नदी किनारे लगी जेटी तेज हवाओं की वजह से बह गई। वहीं बरेली में देर रात हुई बारिश के बाद सड़कें जलमग्न हो गईं और जलभराव में कई ई रिक्शा पलटने की घटनाएं सामने आईं। लखनऊ और कानपुर जैसे बड़े शहरों में दिन के समय तेज धूप रही लेकिन बीच बीच में बादलों की आवाजाही भी देखी गई जिससे उमस बढ़ गई।

    मौसम विभाग के अनुसार इस समय बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम उत्तर ओडिशा तट की ओर बढ़ रहा है और इसका असर उत्तर प्रदेश के मौसम पर भी पड़ रहा है। इस सिस्टम के पश्चिमी विक्षोभ से मिलने के कारण प्रदेश में अचानक तेज बारिश और कहीं कहीं ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। इसी कारण मौसम विभाग ने राज्य के 57 शहरों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है।

    पिछले 24 घंटे में भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई है। गाजियाबाद बलिया और अन्य जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई जबकि लखनऊ और बाराबंकी में लगभग 45 मिनट तक चली आंधी और बारिश ने कई जगह पेड़ और बिजली के पोल तक गिरा दिए। हापुड़ में हाईवे पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ।

    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान में मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं है और प्रदेश में अब तक सामान्य से लगभग 46 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि आने वाले 24 घंटों में मानसून के फिर से सक्रिय होने की संभावना है जिससे पूरे प्रदेश में बारिश का दौर तेज हो सकता है।

    कुल मिलाकर यूपी में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है और कई जिलों में भारी बारिश और जलभराव से जनजीवन प्रभावित है। प्रशासन और मौसम विभाग लगातार लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

  • मानसून की सटीक भविष्यवाणी का दावा करता है यह प्राचीन मंदिर! छत से टपकती बूंदों का अनोखा रहस्य

    मानसून की सटीक भविष्यवाणी का दावा करता है यह प्राचीन मंदिर! छत से टपकती बूंदों का अनोखा रहस्य


    उत्तर प्रदेशउत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में स्थित प्राचीन जगन्नाथ मंदिर वर्षों से एक ऐसी अनोखी मान्यता के कारण लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि मानसून आने से लगभग सात दिन पहले मंदिर की छत के पत्थरों से अपने आप पानी की बूंदें टपकने लगती हैं। यही वजह है कि इस मंदिर को आसपास के ग्रामीण और किसान प्राकृतिक मौसम पूर्वानुमान का केंद्र मानते हैं। आधुनिक तकनीक और मौसम विभाग के दौर में भी इस परंपरा पर लोगों का भरोसा बना हुआ है।

    मंदिर के बारे में कहा जाता है कि जब बाहर तेज गर्मी पड़ रही होती है और आसमान पूरी तरह साफ दिखाई देता है तब भी गर्भगृह की छत पर नमी दिखाई देने लगती है। कुछ ही समय बाद पत्थरों से पानी की बूंदें गिरने लगती हैं। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यह संकेत बताता है कि अगले सात दिनों के भीतर मानसून दस्तक देने वाला है। वर्षों से इस दृश्य को देखने के लिए आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

    इस मंदिर से जुड़ी एक और रोचक मान्यता यह है कि बूंदों के आकार और उनकी मात्रा के आधार पर लोग उस वर्ष होने वाली बारिश का अनुमान भी लगाते हैं। यदि बूंदें बड़ी और लगातार गिरती हैं तो इसे अच्छी और भरपूर वर्षा का संकेत माना जाता है। वहीं यदि बूंदें छोटी हों या कम मात्रा में गिरें तो लोग सामान्य या कम बारिश की संभावना मानते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जैसे ही वास्तविक मानसून शुरू होता है और बाहर बारिश होने लगती है वैसे ही मंदिर के भीतर बूंदों का गिरना बंद हो जाता है।

    आसपास के किसानों के लिए यह परंपरा केवल आस्था का विषय नहीं बल्कि खेती की तैयारी का आधार भी बन चुकी है। मंदिर से संकेत मिलने के बाद किसान खेतों की जुताई बीज और अन्य कृषि कार्यों की तैयारी शुरू कर देते हैं। उनका मानना है कि पीढ़ियों से यह संकेत अधिकांश अवसरों पर सही साबित हुआ है इसलिए वे इसे प्राकृतिक चेतावनी के रूप में स्वीकार करते हैं।

    इस रहस्य ने वैज्ञानिकों और पुरातत्व विशेषज्ञों का भी ध्यान आकर्षित किया है। समय-समय पर मंदिर की संरचना और पत्थरों की जांच की गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि पानी आखिर कहां से आता है। कुछ विशेषज्ञ इसे नमी तापमान व वायुदाब में बदलाव जैसी प्राकृतिक प्रक्रियाओं से जोड़कर देखते हैं जबकि अब तक कोई सर्वमान्य वैज्ञानिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। यही कारण है कि यह घटना आज भी चर्चा और शोध का विषय बनी हुई है।

    धार्मिक दृष्टि से यह मंदिर भगवान जगन्नाथ की विशेष कृपा का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यह किसी चमत्कार से कम नहीं और भगवान स्वयं अपने भक्तों को मौसम का संकेत देते हैं। वहीं वैज्ञानिक समुदाय इसे प्राकृतिक कारणों से समझने की कोशिश कर रहा है। आस्था और विज्ञान के बीच यह रहस्यमयी परंपरा आज भी लोगों को आकर्षित करती है और कानपुर के इस प्राचीन मंदिर को देश के सबसे चर्चित धार्मिक स्थलों में शामिल करती है।

  • महाराष्ट्र में भी लागू होगा UCC…. ड्राफ्ट तैयार करने के सरकार बनाएगी कमेटी

    महाराष्ट्र में भी लागू होगा UCC…. ड्राफ्ट तैयार करने के सरकार बनाएगी कमेटी


    मुंबई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) में यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code- UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार एक अहम कदम उठाने जा रही है. जानकारी के मुताबिक कानून का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए जल्द ही एक कमेटी का गठन किया जाएगा.

    अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि महाराष्ट्र सरकार (Government of Maharashtra) यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए कानून का ड्राफ्ट तैयार करने हेतु दो हफ्ते के भीतर एक कमेटी बना सकती है. उन्होंने जानकारी दी कि कमेटी के गठन और इसके काम करने के दायरे को अभी फाइनल किया जाना बाकी है।

    जानकारी के मुताबिक एक अधिकारी ने जानकारी दी कि यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए कानून का ड्राफ्ट तैयार करने वाली कमेटी बनाने का प्रोसेस चल रहा है और अगले दो हफ्तों के भीतर इसका गठन कर दिया जाएगा।

    बता दें कि पिछले हफ्ते ही गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने विधानसभा में जानकारी दी थी कि महाराष्ट्र में यूसीसी लागू किया जाएगा और इस कानून का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अगुवाई में कमेटी बनाई जाएगी.

    यूनिफॉर्म सिविल कोड एक संवैधानिक निर्देश है, जिसका मकसद सभी नागरिकों के लिए शादी, तलाक, विरासत और एडॉप्शन जैसे मामलों में एक समान कानून लागू करना है. कानून की नजर में सब एक समान होते हैं. शादी, तलाक, एडॉप्शन, उत्तराधिकार, विरासत लेकिन सबसे बढ़कर लैंगिक समानता वो कारण है, जिस वजह से यूनिफार्म सिविल कोड की जरूरत महसूस की जाती रही है।

    यूसीसी का मतलब है कि शादी, तलाक, बच्चा गोद लेने और संपत्ति के बंटवारे जैसे मामलों में सभी नागरिकों पर एक समान कानून लागू हो, चाहे उनका धर्म या जाति कुछ भी हो. जिस राज्य में समान नागरिक संहिता लागू होगी, वहां इन मामलों में सभी धर्मों के लोगों के लिए एक ही कानूनी व्यवस्था लागू होगी।

  • मूसलाधार बारिश से यूपी बेहाल, अंडरपास डूबे, स्कूटी बही, 75 जिलों में बारिश का अलर्ट

    मूसलाधार बारिश से यूपी बेहाल, अंडरपास डूबे, स्कूटी बही, 75 जिलों में बारिश का अलर्ट


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है और शुक्रवार को प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। मथुरा में महज आधे घंटे की मूसलाधार बारिश ने सड़कों को नदी में बदल दिया, जबकि कानपुर में देर रात हुई भारी बारिश के कारण जलभराव, दीवार गिरने और इमारतों को नुकसान जैसी घटनाएं सामने आईं। मौसम विभाग ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी करते हुए 11 जिलों में भारी वर्षा, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं की चेतावनी दी है।

    मथुरा में दोपहर करीब एक बजे हुई तेज बारिश के बाद शहर के कई इलाके जलमग्न हो गए। रेलवे अंडरपास में गर्दन तक पानी भर गया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। कई वाहन पानी में फंस गए और सड़क पर तेज बहाव के कारण एक स्कूटी बह गई। दुकानों के बाहर रखा सामान भी पानी के तेज बहाव में बहता नजर आया। कई लोग अपनी बाइक पकड़कर सड़क किनारे सुरक्षित स्थान तलाशते दिखाई दिए।

    कानपुर में गुरुवार देर रात से शुक्रवार तड़के तक लगातार हुई बारिश ने शहर की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज परिसर में पानी भर गया, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पार्किंग में खड़ी कई कारें और बाइकें आधी पानी में डूब गईं। ऑर्डिनेंस फैक्ट्री परिसर की करीब 100 फीट लंबी दीवार भरभराकर गिर गई, जबकि एक अपार्टमेंट के बेसमेंट की दीवार धंसकने के बाद सुरक्षा के लिहाज से पूरी इमारत खाली करानी पड़ी।

    प्रदेश के अन्य जिलों में भी बारिश का असर देखने को मिला। झांसी में आकाशीय बिजली गिरने से एक किसान की मौत हो गई। उन्नाव में नालियां जाम होने के कारण बरसाती पानी लोगों के घरों में घुस गया। जालौन में तेज आंधी के साथ बारिश हुई, जिससे कई स्थानों पर जनजीवन प्रभावित रहा।

    मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को प्रदेश के सभी जिलों में बारिश की संभावना है। 11 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इसके साथ ही आकाशीय बिजली गिरने, ओलावृष्टि और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी आशंका जताई गई है। लोगों को खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

    लखनऊ स्थित मौसम केंद्र के वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार मानसून अब पूरे प्रदेश में सक्रिय हो चुका है और अगले एक सप्ताह तक रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। लगातार बारिश के कारण तापमान में करीब 8 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि पूरे मानसून सीजन में प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना भी जताई गई है।

    आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे में उत्तर प्रदेश में औसतन 8.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 54 प्रतिशत अधिक है। इस अवधि में संभल में सबसे ज्यादा 46.3 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा मिर्जापुर, आजमगढ़, बदायूं, मुरादाबाद, वाराणसी, हरदोई, बिजनौर, एटा और लखीमपुर-खीरी में भी अच्छी बारिश दर्ज हुई। वहीं 1 जून से 2 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक सामान्य से लगभग 45 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जिससे आने वाले दिनों की वर्षा कृषि और जल संसाधनों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • एटा में कंटेनर का कहर: रोडवेज बस में पीछे से टक्कर, बाहर खड़े 5 यात्रियों की मौत, 12 घायल

    एटा में कंटेनर का कहर: रोडवेज बस में पीछे से टक्कर, बाहर खड़े 5 यात्रियों की मौत, 12 घायल


    लखनऊ । उत्तर प्रदेश के एटा जिले में गुरुवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे में पांच यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 12 लोग घायल हो गए। हादसा बागवाला थाना क्षेत्र में उस समय हुआ, जब खराब हुई रोडवेज बस सड़क किनारे खड़ी थी और कई यात्री गर्मी के कारण बस से उतरकर बाहर खड़े थे। तभी पीछे से तेज रफ्तार कंटेनर आया और यात्रियों को कुचलते हुए बस में टक्कर मार दी।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, करीब 40 यात्रियों से भरी रोडवेज बस एटा से दिल्ली जा रही थी। रास्ते में बस खराब होने पर चालक उसे सड़क किनारे खड़ा कर आवश्यक पार्ट्स लेने चला गया। इसी दौरान कई यात्री बस से उतरकर बाहर खड़े थे। अचानक तेज रफ्तार कंटेनर ने नियंत्रण खो दिया और बाहर खड़े लोगों को रौंदते हुए बस के पिछले हिस्से में टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कंटेनर सड़क पार दूसरी ओर जा पहुंचा और कई शव सड़क पर बिखर गए।

    हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों और पुलिस ने तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को वीरांगना अवंतीबाई मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने पांच लोगों को मृत घोषित कर दिया।

    घायल यात्री अंसार ने बताया कि बस खराब होने के कारण चालक मरम्मत के लिए गया था। अधिक गर्मी होने के कारण कई यात्री नीचे उतर आए थे, जबकि महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बस के भीतर ही बैठे रहे। इसी वजह से वे इस हादसे की चपेट में आने से बच गए।

    घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी अरविंद सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. इलामारन मौके पर पहुंचे। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त बस और कंटेनर को हटवाकर करीब एक घंटे बाद यातायात बहाल कराया।

    हादसे में बुलंदशहर निवासी सतेंद्र शर्मा (38), फर्रुखाबाद के राजेश (34), सुखराम (30), शैलेश (29) और आशीष सक्सेना (22) की मौत हो गई। मृतकों में अधिकांश लोग दिल्ली में नौकरी या कारोबार करते थे और काम पर लौट रहे थे या परीक्षा देने जा रहे थे।

  • TET परीक्षा का दूसरा दिन: महिला अभ्यर्थियों की सख्त जांच, 15 फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए

    TET परीक्षा का दूसरा दिन: महिला अभ्यर्थियों की सख्त जांच, 15 फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए


    लखनऊ । UP-TET 2026 के दूसरे दिन शुक्रवार को प्रदेशभर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच परीक्षा आयोजित की गई। सुबह 7:15 बजे से अभ्यर्थियों की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें एडमिट कार्ड की जांच, बायोमेट्रिक सत्यापन और रेटिना स्कैन के बाद ही परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिया गया। पहली पाली सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2:30 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित की जा रही है।

    परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा इतनी सख्त रही कि महिला अभ्यर्थियों के हेयरपिन, क्लचर, चूड़ियां और अन्य धातु के आभूषण उतरवाए गए। कई केंद्रों पर जूड़े खुलवाकर जांच की गई, जबकि पुरुष अभ्यर्थियों की बेल्ट उतरवाकर और जूतों की जांच के बाद ही प्रवेश मिला। ललितपुर में एक नवविवाहिता महिला घूंघट में परीक्षा देने पहुंची। पूछताछ में उसने बताया कि वह अपने जेठ के साथ आई है, इसलिए घूंघट कर रखा है। वहीं लखनऊ में एक महिला सिपाही ने समय पर परीक्षा केंद्र न पहुंच पाने वाली अभ्यर्थी को अपनी स्कूटी से परीक्षा केंद्र तक पहुंचाकर मानवता की मिसाल पेश की।

    इस बीच बस्ती जिले से दुखद खबर सामने आई। टीईटी परीक्षा ड्यूटी पर जा रहे 51 वर्षीय हेड कॉन्स्टेबल राजेंद्र यादव की शुक्रवार सुबह सड़क हादसे में मौत हो गई। बताया गया कि ड्यूटी के लिए बाइक से जा रहे हेड कॉन्स्टेबल को तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी। हादसे में कार सवार एक ही परिवार के तीन लोग भी गंभीर रूप से घायल हो गए।

    महाराष्ट्र में हाल ही में हुए टीईटी पेपर लीक मामले के बाद उत्तर प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी कर दी गई है। पहली बार शिक्षा चयन आयोग एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम के माध्यम से परीक्षा की लाइव निगरानी कर रहा है। प्रदेशभर के 60 जिलों में 955 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां खुफिया एजेंसियां भी सतर्क हैं।

    पहले दिन आयोजित परीक्षा में फर्जीवाड़े की कई कोशिशें भी सामने आईं। दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे 15 सॉल्वर गिरफ्तार किए गए। पहले दिन दोनों पालियों में 8 लाख 7 हजार 636 पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 6 लाख 84 हजार 614 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी, जिससे उपस्थिति 84.76 प्रतिशत रही।

    प्रदेश में चार दिनों तक चलने वाली इस परीक्षा में कुल 19.94 लाख अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। इनमें 17.67 लाख उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, जबकि 2.27 लाख अभ्यर्थी अन्य राज्यों से परीक्षा देने पहुंचे हैं। इनमें बड़ी संख्या में सेवारत शिक्षक भी शामिल हैं।

    उधर बदायूं में भाजपा नेता के स्वागत के दौरान लगे जाम के कारण कई परीक्षार्थियों की परीक्षा छूट गई। इसे लेकर विपक्ष ने सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। समाजवादी पार्टी सांसद आदित्य यादव ने प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए दोबारा परीक्षा कराने की मांग करते हुए इसे युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय बताया।