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  • मुजफ्फरनगर तिलक लगाकर मीट राकेश टिकैत के बयान से मचा बवालबोले इनपर सुताई अभियान चलेगा

    मुजफ्फरनगर तिलक लगाकर मीट राकेश टिकैत के बयान से मचा बवालबोले इनपर सुताई अभियान चलेगा


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने चौंकाने वाला बयान दिया है. जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है. टिकैत ने खुद को हिंदू संगठन बताने वाले कुछ लोगों पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे अटल चौक पर तिलक लगाकर मीट खाते हैं और इससे एक राजनीतिक दल की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं. टिकैत ने इस दौरान कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए एक दिन ‘सुताई अभियान’ चलाने जैसी टिप्पणी भी की. राकेश टिकैत का यह बयान अब सोशल मीडिया पर है.

    दरअसल मुजफ्फरनगर जिला कलेक्ट्रेट में प्रदूषण के मुद्दे को लेकर फैक्ट्री मालिकों और किसानों के बीच वार्ता आयोजित की गई थी. इसी दौरान मीडिया ने राकेश टिकैत से नगर के मीनाक्षी चौक का नाम बदलकर अटल चौक करने को लेकर सवाल किया. इस पर टिकैत ने कहा कि मीनाक्षी कौन थेयह कोई नहीं जानताजबकि अटल बिहारी वाजपेई को पूरा देश जानता है क्योंकि वे प्रधानमंत्री रहे हैं. उन्होंने चौक का नाम बदलने पर कोई आपत्ति नहीं जताई.

    हिन्दू संगठनों को लेकर जताई नाराजगी

    इसी बातचीत के दौरान राकेश टिकैत ने कथित हिंदू संगठनों को लेकर नाराजगी जाहिर की. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग हिंदू संगठन का नाम लेकर अटल चौक पर तिलक लगाकर मीट खाते हैं और इससे बीजेपी की छवि खराब हो रही है. टिकैत ने कहा कि बीजेपी का कार्यकर्ता मीट नहीं खाता और ऐसे लोग जानबूझकर माहौल खराब कर रहे हैं.

    सुताई अभियान चलाने की बात कही
    किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा“नाम हिंदू संगठन का लेते हैं और अटल चौक पर जाकर मीट खाते हैं. एक-दो दिन में इनका सुताई अभियान भी चलेगा. जो वहां तिलक लगाकर मीट खाते हुए फंस जाएगाउस पर कार्रवाई होगी.” टिकैत ने आगे कहा कि ऐसे कृत्यों से देश की छवि विदेशों में खराब हो रही है और अलग-अलग समुदायों के बीच तनाव बढ़ रहा है. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और प्रशासन की नजर पूरे मामले पर बनी हुई है.
  • कर्नाटक में कांग्रेस का बुलडोज़र अभियान: 400 से ज्यादा मुस्लिमों के घर ढहाए, सियासत में गरमा गए पारे

    कर्नाटक में कांग्रेस का बुलडोज़र अभियान: 400 से ज्यादा मुस्लिमों के घर ढहाए, सियासत में गरमा गए पारे




    बेंगलुरु।
    कर्नाटक कांग्रेस सरकार का बुलडोज़र अभियान अब राजनीति का नया विवाद बन गया है। 22 दिसंबर को सुबह 4 बजे कोगिलु गांव के फकीर कॉलोनी और वसीम लेआउट में 400 से ज्यादा घरों को गिराया गया। अधिकांश प्रभावित परिवार मुस्लिम समुदाय से हैं। इस कार्रवाई से सैकड़ों लोग बेघर हो गए और ठंड में सड़कों पर या अस्थायी शेल्टरों में रात गुजारने को मजबूर हैं।कर्नाटक सरकार का कहना है कि ये घर उर्दू गवर्नमेंट स्कूल के पास झील किनारे सरकारी ज़मीन पर अवैध रूप से बने थे।
    निवासियों की आपत्ति
    स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया और पुलिस ने जबरदस्ती उन्हें बेदखल किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कई लोग 25 सालों से इलाके में रह रहे हैं और उनके पास वैध आधार कार्ड व वोटर आईडी हैं। निकाले गए ज्यादातर लोग प्रवासी और मजदूरी कर जीवनयापन करते हैं।

    विरोध प्रदर्शन और सियासी हलचल
    इस कार्रवाई के खिलाफ स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा के घर के पास भी प्रदर्शन हुआ।

    दलित संघर्ष समिति और कई अन्य संगठन भी इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं।

    केरल सरकार की निंदा
    पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इसे “अल्पसंख्यक विरोधी राजनीति” करार दिया। उन्होंने कहा कि डर और ज़बरदस्ती से शासन करने वाली सरकारें संवैधानिक मूल्यों और मानवीय गरिमा का उल्लंघन करती हैं। केरल के मंत्री वी शिवनकुट्टी ने इसे “अमानवीय कार्रवाई” बताया और कहा कि यह इमरजेंसी के दौर की याद दिलाती है।

    कर्नाटक उपमुख्यमंत्री का जवाब
    कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि यह इलाका अवैध कब्ज़े और कचरा फेंकने की जगह था, जिसे लैंड माफिया झुग्गी बस्ती में बदलने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोगों को नई जगह शिफ्ट करने का समय पहले ही दिया गया था। शिवकुमार ने पिनाराई विजयन पर तंज कसते हुए कहा कि नेताओं को ज़मीनी हकीकत जाने बिना टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।

    यह मामला न केवल बेंगलुरु बल्कि पूरे कर्नाटक की राजनीति में गर्मागरम बहस का केंद्र बन गया है। कांग्रेस सरकार के बुलडोज़र अभियान ने शहर के गरीब और अल्पसंख्यक समुदायों को सीधे प्रभावित किया है, जबकि विपक्ष और पड़ोसी राज्यों ने इसे लोकतांत्रिक और मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

  • बागपत खाप पंचायत का सख्त फैसला,लड़कों पर हाफ पैंट और स्मार्टफोन की रोक, शादियों में फिजूल खर्च भी बर्दाश्त नहीं

    बागपत खाप पंचायत का सख्त फैसला,लड़कों पर हाफ पैंट और स्मार्टफोन की रोक, शादियों में फिजूल खर्च भी बर्दाश्त नहीं




    नई दिल्ली।
    बागपत खाप पंचायत ने समाज सुधार और सांस्कृतिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए बड़े और सख्त फैसले लिए हैं। बड़ौत की खाप पंचायत ने 18 साल से कम उम्र के लड़कों को स्मार्टफोन देने और हाफ पैंट पहनकर बाहर निकलने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके साथ ही शादियों में फिजूल खर्च और मैरिज होम में समारोह आयोजित करने पर भी पाबंदी की गई है। खाप चौधरियों ने स्पष्ट किया कि ये नियम अब लड़कियों और लड़कों दोनों पर समान रूप से लागू होंगे और इसका उद्देश्य युवा पीढ़ी पर अनुशासन और सामाजिक संस्कारों का असर बढ़ाना है।

    बड़ौत की इस पंचायत में खाप चौधरी सुभाष के नेतृत्व में समाज के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सख्त निर्णय लिए गए। उन्होंने कहा कि आज के युवा हाफ पैंट पहनकर और स्मार्टफोन का दुरुपयोग करके सामाजिक मर्यादा की अवहेलना कर रहे हैं, इसलिए इसे रोकना जरूरी है। पंचायत ने यह भी निर्देश दिया कि विवाह समारोहों को गांव या घर में ही आयोजित किया जाए, ताकि फिजूल खर्च और समय दोनों की बचत हो सके।

    अब शादी के निमंत्रण व्हाट्सएप के माध्यम से भी स्वीकार किए जा सकते हैं, जिससे आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए सामाजिक मर्यादा और परंपराओं का पालन किया जा सके।

    खाप पंचायत का यह कदम केवल बागपत तक सीमित नहीं रहेगा। राजस्थान की पंचायतों से प्रेरणा लेकर इसे पूरे उत्तर प्रदेश में लागू कराने की योजना बनाई जा रही है।

    खाप चौधरी ब्रजपाल सिंह ने कहा कि लड़कों के स्मार्टफोन और हाफ पैंट पर रोक को पूरे प्रदेश में लागू कराने का प्रयास किया जाएगा। खाप चौधरी ओमपाल सिंह ने जोड़ते हुए कहा कि समाज में लड़के और लड़कियां समान हैं, इसलिए नियम भी समान रूप से लागू होने चाहिए।

    बागपत की खाप पंचायत के इस सख्त फैसले ने सामाजिक और सांस्कृतिक मर्यादा के प्रति एक स्पष्ट संदेश दिया है। युवा पीढ़ी को अनुशासन में लाना, फिजूल खर्च रोकना और पारिवारिक व सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करना इस कदम का मुख्य उद्देश्य है। खाप पंचायत के अनुसार, नियमों का पालन कराकर ही समाज और संस्कृति को बचाया जा सकता है। यह कदम वेस्ट यूपी में खाप पंचायतों द्वारा युवा और परिवारों पर सकारात्मक प्रभाव डालने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है और इसे पूरे प्रदेश में फैलाने की तैयारी की जा रही है।

  • Rajasthan: चूरू में ट्रेलर और कार के बीच सीधी भिड़ंत…5 लोगों की मौत, तीन घायल

    Rajasthan: चूरू में ट्रेलर और कार के बीच सीधी भिड़ंत…5 लोगों की मौत, तीन घायल


    जयपुर।
    राजस्थान (Rajasthan) राजस्थान के चूरू जिले (Churu District) में शुक्रवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे (Road Accident) ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। सांडवा थाना क्षेत्र में ट्रेलर और एक एसयूवी की आमने-सामने टक्कर (collision Trailer and an SUV) में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस के मुताबिक, हादसा इतना भीषण था कि एसयूवी में सवार चार लोगों की मौके पर ही जान चली गई।

    सांडवा थाना प्रभारी चौथमल ने बताया कि एसयूवी में सवार लोग किसी पारिवारिक विवाद को सुलझाने के लिए सांडवा आए थे। काउंसलिंग के बाद सभी लोग वापस लालगढ़ लौट रहे थे, तभी रास्ते में यह हादसा हो गया। टक्कर के बाद वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।


    तीन घायलों को बीकानेर रेफर

    मृतकों की पहचान उमेद सिंह (55), प्रह्लाद सिंह (35), दलिप सिंह (25) सभी निवासी लालगढ़, राजू कंवर (40) निवासी श्यामसर (नागौर) और नारायण राम (60) के रूप में हुई है। नारायण राम ने इलाज के दौरान बीकानेर के अस्पताल में दम तोड़ दिया। हादसे में घायल तीन लोगों को पहले सांडवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें बीकानेर रेफर कर दिया गया।

    मामले की जांच जारी
    पुलिस ने बताया कि ट्रेलर चालक हादसे के बाद मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश के लिए टीमें गठित की गई हैं। फिलहाल मृतकों के शवों को सांडवा सीएचसी के शवगृह में पोस्टमॉर्टम के लिए रखा गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

  • UP: शाहजहांपुर में रेलवे ट्रैक पार करते समय ट्रेन की चपेट आया परिवार, 5 लोगों की मौत

    UP: शाहजहांपुर में रेलवे ट्रैक पार करते समय ट्रेन की चपेट आया परिवार, 5 लोगों की मौत


    शाहजहांपुर।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के शाहजहांपुर (Shahjahanpur) में दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है. यहां रोजा रेलवे स्टेशन (Roza Railway Station) के आउटर इलाके में रेलवे ट्रैक पार करते समय गरीब रथ ट्रेन (Garib Rath Train) की चपेट में आने से पांच लोगों की मौत हो गई. इस हादसे में एक ही परिवार के चार सदस्य और उनका एक रिश्तेदार शामिल है. घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई. हादसे के बारे में पता चलते ही स्टेशन पर मौजूद लोग सन्न रह गए।

    हादसा उस समय हुआ, जब हरिओम नाम का युवक अपने रिश्तेदार सेठपाल, उसकी पत्नी पूजा और उनके दो बच्चों को रेलवे स्टेशन छोड़ने आया था. दोनों परिवार एक ही बाइक पर सवार होकर रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे. यह रास्ता आमतौर पर रेलवे कर्मचारियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन ट्रैक पार करते समय बाइक सवार ट्रेन की दिशा का सही अंदाजा नहीं लगा सके. इसी दौरान तेज रफ्तार में गरीब रथ ट्रेन आ गई और पांचों लोग चपेट में आ गए.

    हादसा इतना भीषण था कि दो पुरुष, एक महिला और दो बच्चों की मौके पर ही ट्रेन से कटकर मौत हो गई. घटना की सूचना मिलते ही स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई. आसपास मौजूद लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी. कुछ ही देर में जीआरपी पुलिस और रेलवे अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए। जीआरपी ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है. मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

    मृतकों के परिजन लालाराम ने कहा कि हमारा लड़का हरिओम अपनी मां को छोड़ने शहर आया था. उसके बाद वह अपने साढू के परिवार के साथ लौट रहा था. रास्ते में हादसा हो गया. वहीं जीआरपी एसओ मदनपाल ने कहा कि यहां एक रास्ता है, जिस पर रेलवे कर्मचारी निकलते हैं, वहां से यह परिवार बाइक से निकल रहा था. यह जज नहीं कर पाया कि किधर से ट्रेन आ रही है, तभी यह हादसा हो गया।

    एसपी राजेश द्विवेदी ने कहा कि शाहजहांपुर के रोजा स्टेशन के आउटर पर एक बाइक से पति-पत्नी उनके दो बच्चे और उनका एक साढू रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे, हादसे में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. जीआरपी आगे की कार्रवाई कर रही है।

  • संभल में 'मुस्कान कांड' की पुनरावृत्ति: पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर पति को उतारा मौत के घाट शव के किए कई टुकड़े

    संभल में 'मुस्कान कांड' की पुनरावृत्ति: पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर पति को उतारा मौत के घाट शव के किए कई टुकड़े


    संभल । उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुए सनसनीखेज ‘मुस्कान कांड’ की खौफनाक यादें अभी जनता के मानस पटल से धुंधली भी नहीं हुई थीं कि संभल जिले के चन्दौसी क्षेत्र में वैसी ही रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ एक पत्नी ने अपने प्रेम संबंधों में बाधक बन रहे पति को न केवल रास्ते से हटाया बल्कि हत्या के बाद उसके शव के साथ जो दरिंदगी की उसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। आरोपी महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति के शव को कसाई की तरह टुकड़ों में काटा और उन्हें पॉलीथिन में भरकर शहर के विभिन्न हिस्सों में ठिकाने लगा दिया।

    ईदगाह के पास मिले मांस के लोथड़े फैली सनसनी

    वारदात का खुलासा सोमवार को तब हुआ जब पतरोआ रोड स्थित ईदगाह के बाहर लावारिस पॉलीथिन बैग्स मिले। जब स्थानीय लोगों ने उन्हें देखा तो उनमें मानव शरीर के कटे हुए हिस्से और मांस के लोथड़े थे। सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। हत्यारों ने पहचान छुपाने के उद्देश्य से सिर हाथ और पैरों को बड़ी ही बेरहमी से काटकर अलग कर दिया था। पुलिस के लिए बिना सिर वाले धड़ और अंगों की शिनाख्त करना एक बड़ी चुनौती बन गई थी।

    हाथ पर गुदे ‘नाम’ और झूठी ‘गुमशुदगी’ ने खोला राज

    अंधे कत्ल की इस गुत्थी को सुलझाने में मृतक के हाथ पर लिखा उसका नाम संजीवनी साबित हुआ। पुलिस ने जब जिले में दर्ज हालिया गुमशुदगी की रिपोर्टों को खंगाला तो कड़ियाँ जुड़ने लगीं। जांच में सामने आया कि मोहल्ला चुन्नी निवासी राहुल मृतक की पत्नी रूबी ने ही 18 नवंबर को कोतवाली जाकर पति की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
    पुलिस को रूबी की बातों पर संदेह तब हुआ जब उसके बयानों में लगातार विरोधाभास मिला। कड़ाई से पूछताछ और मोबाइल सर्विलांस की मदद से पुलिस जब रूबी के प्रेमी गौरव तक पहुँची तो पूरी साजिश का पर्दाफाश हो गया। रूबी ने स्वीकार किया कि उसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया।

    मेरठ के ‘मुस्कान कांड’ की तर्ज पर रची गई खूनी साजिश

    यह मामला पूरी तरह से मेरठ के सौरभ हत्याकांड मुस्कान कांड की कार्बन कॉपी नजर आता है। जिस तरह मेरठ में मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर पति के टुकड़े किए थे ठीक उसी तरह रूबी और गौरव ने राहुल की हत्या घर के भीतर ही की। हत्या के बाद आरी या धारदार हथियार से शव को काटा गया और साक्ष्यों को मिटाने के लिए टुकड़ों को पॉलीथिन में भरकर अलग-अलग सुनसान जगहों पर फेंक दिया गया।

    गायब अंगों की तलाश और पुलिस की कार्रवाई

    पुलिस की फोरेंसिक टीम ने आरोपी के घर से साक्ष्य जुटाए हैं जहाँ खून के धब्बे और हत्या में प्रयुक्त सामान मिलने की संभावना है। हालांकि पुलिस के लिए अब भी सबसे बड़ी चुनौती राहुल के ‘सिर’ और शरीर के अन्य लापता हिस्सों को बरामद करना है जिन्हें आरोपियों ने कहीं दूर ठिकाने लगाया है। कोतवाली प्रभारी के अनुसार दोनों आरोपियों रूबी और गौरव को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनसे गहन पूछताछ जारी है ताकि हत्या में प्रयुक्त हथियार और शेष अंगों को बरामद किया जा सके। इस घटना ने समाज में पनप रहे अपराध और रिश्तों के कत्ल की भयावह तस्वीर पेश की है।

  • यूपी के भोजपुर में ‘रोहिंग्या’ संदिग्धों को मिला सरकारी आवास और राशन जांच एजेंसियां सतर्क

    यूपी के भोजपुर में ‘रोहिंग्या’ संदिग्धों को मिला सरकारी आवास और राशन जांच एजेंसियां सतर्क


    मेरठ । भोजपुर उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश के भोजपुर क्षेत्र के रानी नागल गांव में सरकारी योजनाओं का गड़बड़ तरीके से वितरण किए जाने का मामला सामने आया है। गांव में रह रहे घूमंतू परिवारों को बिना उचित प्रक्रिया के मुफ्त राशन प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ और वोटर बनाने की कोशिश की गई है। इन परिवारों में से कुछ को रोहिंग्या माना जा रहा है जिनके खिलाफ खुफिया विभाग और पुलिस की जांच अब तेज़ हो गई है।

    सरकारी योजनाओं का बंदरबांट

    रानी नागल में कुछ परिवारों को सरकारी योजनाओं का फायदा गलत तरीके से दिया गया है। यह परिवार मूलतः घूमंतू समुदाय से हैं और इनका नाम असल में रजिस्टर्ड वोटर सूची में नहीं था। शिकायतों के बाद यह सामने आया कि इन परिवारों को राशन कार्ड प्रधानमंत्री आवास योजना का घर और आधार कार्ड भी जारी कर दिया गया था। इसके अलावा वोटर लिस्ट में इनका नाम जोड़ने के लिए फर्जी तरीके से प्रक्रिया की जा रही थी जिसमें केवल महिलाओं ने ही अपनी गणना प्रपत्र भरे थे।

    गांव छोड़ने पर मजबूर हुए लोग

    गांव में हो रही इस गड़बड़ी के उजागर होते ही कई परिवारों ने गांव छोड़ दिया और भागने को मजबूर हो गए। इस संदिग्ध गतिविधि की जानकारी के बाद खुफिया विभाग की टीम गांव में पहुंची और मामले की गहन जांच शुरू की। रानी नागल के पूर्व प्रधान सईदुल ने डीएम अनुज सिंह और एसएसपी सतपाल अंतिल से इस मामले की शिकायत की थी। इसके बाद एसडीएम सदर डॉ. राम तोहन मीणा द्वारा की गई जांच में यह तथ्य सामने आया कि 2018 में कुल 92 घूमंतू लोग गांव में पहुंचे थे और इनकी फर्जी वोटर बनने की प्रक्रिया चल रही थी।

    किसी और के नाम पर आवास देना

    इन घूमंतू परिवारों में से दस परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने घरों में रह रहे हैं। इस योजना के तहत ये आवास ग्राम समाज की भूमि पर बने थे लेकिन सवाल उठता है कि क्या इन आवासों का नाम इन परिवारों के नाम पर दर्ज किया गया या फिर किसी और के नाम पर इन्हें आवास दिया गया। यह मामला अब जांच का विषय बन चुका है। जांच में यह भी सामने आया कि इन परिवारों के पास राशन कार्ड भी हैं और उनके आधार कार्ड भी बनवाए गए हैं। इस संदिग्ध गतिविधि का पता चलते ही खुफिया विभाग ने तुरंत अपनी टीम भेजी और मामले की गहरी जांच शुरू कर दी।

    पुलिस और खुफिया विभाग की जांच

    भोजपुर पुलिस ने भी इस मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच शुरू की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस गड़बड़ी में किसकी भूमिका है। एसएसपी सतपाल अंतिल ने बताया कि मामले की जांच पूरी होने के बाद ही इस पर कोई बयान दिया जा सकेगा। फिलहाल खुफिया विभाग और पुलिस विभाग के अधिकारी पूरी स्थिति की जांच कर रहे हैं और मामले के सभी पहलुओं को उजागर करने का प्रयास कर रहे हैं।

    फर्जी वोटर बनाने की कोशिश

    गांव में फर्जी वोटर बनाने की प्रक्रिया का खुलासा होने के बाद जांच टीम ने यह पुष्टि की कि 92 लोगों में से केवल 10 परिवारों ने ही वोटर बनने के लिए अपना गणना प्रपत्र भरा था और इन सभी ने इसे केवल महिलाओं के नाम से भरा था। इस प्रक्रिया में भी कई असंगतियां पाई गईं और यही कारण है कि जांच की दिशा और तेज़ कर दी गई है। रानी नागल गांव में हो रही इस सरकारी योजनाओं की गड़बड़ी से सवाल उठ रहे हैं कि क्या अधिकारियों ने इन गतिविधियों पर सही समय पर नजर नहीं रखी। यह मामला न केवल भ्रष्टाचार और सरकारी प्रणाली की नाकामी को उजागर करता है बल्कि यह भी दर्शाता है कि गलत तरीके से योजनाओं का लाभ उठाने की कोशिश की जा रही थी। खुफिया विभाग और पुलिस की जांच अब यह निर्धारित करेगी कि इन गतिविधियों में कितनी साजिश शामिल थी और इसके पीछे कौन लोग थे।

  • CG: बाघ के शिकार मामले में महिला सरपंच समेत 7 गिरफ्तार… खोजी कुत्ते ने आरोपियों तक पहुंचाया

    CG: बाघ के शिकार मामले में महिला सरपंच समेत 7 गिरफ्तार… खोजी कुत्ते ने आरोपियों तक पहुंचाया


    रायपुर।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के सूरजपुर जिले (Surajpur district) में बाघ का शिकार (Tiger hunting) करने के आरोप में वन विभाग ने एक महिला सरपंच (Woman Sarpanch) समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इस बारे में जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि शिकार की यह घटना सूरजपुर जिले के घुई वन परिक्षेत्र के अंतर्गत भैंसामुंडा गांव के जंगल में हुई थी और पुलिस के खोजी कुत्ते की मदद से हम आरोपियों तक पहुंच सके। घटना को लेकर अधिकारियों ने बताया कि जंगली जानवरों का शिकार करने के लिए आरोपियों ने जंगल में बिजली का जाल बिछाया था, और उसी की चपेट में आकर बाघ की मृत्यु हो गई।

    इस दौरान नर बाघ का शिकार करने के आरोप में वन विभाग के दल ने गांव की सरपंच सिस्का कुजूर और उनके पति दिनेश के अलावा ईश्वर कुजूर, अभिषेक रोशन बड़ा, मिथिलेश सिंह, रामनाथ सिंह और भोला प्रसाद को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बताया कि इनमें से चार आरोपी सिस्का कुजूर, दिनेश, ईश्वर कुजूर और अभिषेक रोशन बड़ा भैंसामुंडा गांव के निवासी हैं तथा मिथिलेश और रामनाथ कैलाशपुर गांव के निवासी हैं। वहीं भोला प्रसाद जिले के बर्तिकाला गांव का निवासी है।

    अधिकारियों ने बताया कि 15 दिसंबर को जिले के घुई वन रेंज के तहत भैंसामुंडा में नर बाघ का शव बरामद किया गया था, जिसके कुछ अंग गायब थे। उन्होंने बताया कि बाघ के शव का पोस्टमार्टम करने के बाद वन विभाग ने जांच शुरू की और जांच के लिए एक खोजी कुत्ते को भी लगाया गया।

    अधिकारियों ने बताया, ‘तलाशी के दौरान खोजी कुत्ता सरपंच सिस्का कुजूर के घर तक जा पहुंचा। तब जांच अधिकारियों ने बुधवार को सिस्का के घर की तलाशी ली, जहां से बाघ के दो नाखून, बालों का गुच्छा और मांस के टुकड़े तथा बिजली और जीआई का तार बरामद किया गया।’ आगे उन्होंने बताया, ‘सिस्का से पूछताछ के आधार पर अगले दिन, छह अन्य लोगों को पकड़ा गया। उनके पास से बाघ के दांत, बालों के गुच्छे, नाखून, बिजली और जीआई तार, लकड़ी का खूंटा और रस्सी का फंदा बरामद किया गया।’

    उन्होंने बताया कि आरोपियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया तथा उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें 30 दिसंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

  • यूपी में शराब पीने वालों के लिए बड़ी खबर नई आबकारी नीति लागू होते ही महंगी हो जाएगी बोतल

    यूपी में शराब पीने वालों के लिए बड़ी खबर नई आबकारी नीति लागू होते ही महंगी हो जाएगी बोतल

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    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में एक अप्रैल से नई आबकारी नीति लागू होने जा रही है और इसके साथ ही शराब पीने वालों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है. प्रस्तावित नीति के तहत अंग्रेजी शराब की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है. विभागीय सूत्रों के अनुसार लाइसेंस शुल्क में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी का मसौदा तैयार कर मुख्यालय से लखनऊ भेज दिया गया है. इस प्रस्ताव को जनवरी महीने में मंजूरी मिलने की उम्मीद है.

    नई नीति में इस बार भी शराब दुकानों के नवीनीकरण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी. यानी मौजूदा लाइसेंसधारकों को राहत देते हुए टेंडर प्रक्रिया नहीं कराई जाएगी. इससे व्यापारियों को निरंतरता मिलेगी लेकिन बढ़ी हुई लाइसेंस फीस का असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है. विभाग का मानना है कि शुल्क बढ़ोतरी से राजस्व में इजाफा होगा.

    पिछली नीति से अलग होगा असर

    गौरतलब है कि पिछले वर्ष लागू की गई आबकारी नीति में शराब की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी. लेकिन इस बार हालात अलग हैं. लाइसेंस नवीनीकरण शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव के चलते शराब के दाम बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है. आबकारी विभाग की बैठकों में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई है.

    शराब की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी

    अनुमान लगाया जा रहा है कि नई नीति लागू होने के बाद अंग्रेजी शराब के क्वार्टर की कीमत में 15 से 20 रुपये तक का इजाफा हो सकता है. वहीं हाफ बोतल करीब 50 रुपये और फुल बोतल 100 रुपये तक महंगी हो सकती है. हालांकि अंतिम फैसला शासन की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा.

    राजस्व बढ़ेगा उपभोक्ता पर असर

    आबकारी विभाग का कहना है कि बढ़े हुए शुल्क से राज्य के राजस्व को मजबूती मिलेगी. वहीं आम उपभोक्ताओं के लिए यह नीति खर्च बढ़ाने वाली साबित हो सकती है. अब सभी की निगाहें जनवरी में होने वाले फैसले पर टिकी हैं.

  • मंत्रियों के विवादों पर घिरी महाराष्ट्र सरकार सुप्रिया सुले बोलीं- यह राज्य की छवि के लिए बुरा

    मंत्रियों के विवादों पर घिरी महाराष्ट्र सरकार सुप्रिया सुले बोलीं- यह राज्य की छवि के लिए बुरा


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र सरकार में एनसीपी अजित पवार गुट के दो मंत्रियों पर लगे गंभीर आरोपों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है एनसीपी शरद पवार गुट की वरिष्ठ नेता सुप्रिया सुले ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे घटनाक्रम महाराष्ट्र की छवि के लिए बुरा है और दिल्ली तक में लोग सवाल पूछ रहे हैं कि राज्य में आखिर चल क्या रहा है ।
    सुप्रिया सुले ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार में शामिल दो बड़े नेताओं पर गंभीर आरोप लगे हैं उन्होंने बताया कि दिल्ली में उनसे लोग पूछ रहे थे कि महाराष्ट्र में एक और मंत्री का विकेट गिर गया उनके मुताबिक इस तरह की बातें राज्य की छवि को खराब करती हैं और जनता में गलत संदेश जाता है उन्होंने साफ कहा कि यह स्थिति किसी भी तरह से अच्छी नहीं कही जा सकती  ।
    माणिकराव कोकाटे मामले पर चिंता
    पूर्व मंत्री माणिकराव कोकाटे को लेकर सुप्रिया सुले ने कहा कि किसानों के बारे में जिस तरह की बातें कही गईं वह दुर्भाग्यपूर्ण हैं फिलहाल कोकाटे अस्पताल में भर्ती हैं और उन्हें सही इलाज मिलना चाहिए यह जरूरी है
    मनरेगा के नाम को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि महात्मा गांधी का नाम हटाने का फैसला गलत है उनका कहना है कि इससे न सिर्फ प्रतीकात्मक नुकसान हुआ है ।
    बल्कि आगे चलकर राज्यों को मिलने वाली फंडिंग पर भी असर पड़ेगा उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से राज्य सरकारों को नुकसान होगा और गरीबों से जुड़ी योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है एनसीपी अजित पवार गुट और शरद पवार गुट के संभावित गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर सुप्रिया सुले ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में स्थानीय नेता ही फैसला लेंगे उन्होंने बताया कि पवार साहब पहले ही कह चुके हैं कि इस पर निर्णय जमीनी स्तर पर लिया जाएगा ।

    नीतीश कुमार के बुर्का विवाद पर प्रतिक्रिया
    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़े बुर्का विवाद पर सुप्रिया सुले ने संवेदनशील रुख अपनाया उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार की परंपरा और पहनावा उसका निजी विषय होता है घूंघट लेना हो या बुर्का पहनना यह परिवार की अपनी परंपरा है नीतीश कुमार एक वरिष्ठ नेता हैं और इस तरह के विवादों से हमें दुख होता है ।