Category: State

  • उद्धव ठाकरे का BJP पर तंज: ‘इतनी बेशर्म कि रावण को भी अपने पार्टी में शामिल कर सकती है’

    उद्धव ठाकरे का BJP पर तंज: ‘इतनी बेशर्म कि रावण को भी अपने पार्टी में शामिल कर सकती है’

    मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे और भाजपा के बीच जुबानी जंग लगातार तेज होती जा रही है। नासिक में अपनी चचेरे भाई और मनसे प्रमुख राज ठाकरे के साथ आयोजित संयुक्त चुनावी रैली में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह पार्टी इतनी बेशर्म हो गई है कि वह असुर सम्राट रावण को भी अपने खेमे में शामिल कर सकती है।

    चुनावी हिंदुत्व पर आरोप

    उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी का हिंदुत्व केवल चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने नासिक महानगरपालिका की उस योजना पर भी सवाल उठाया, जिसमें अगले साल के कुंभ मेले के लिए ‘साधुग्राम’ बनाने के लिए पेड़ों को काटने का प्रस्ताव है। उद्धव ने पूछा कि भाजपा का हिंदुत्व वास्तविक है या सिर्फ राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

    दागी नेताओं को प्राथमिकता देने का आरोप

    शिवसेना प्रमुख ने भाजपा के “दागी” नेताओं को पार्टी में प्राथमिकता देने का आरोप भी लगाया। उद्धव ने कहा कि कई वफादार नेताओं को नजरअंदाज किया गया है, जबकि पार्टी उन्हें सही अवसर नहीं दे रही। उन्होंने इस रवैये को दुखद बताया और भाजपा के आचरण पर सवाल उठाए।

    प्रधानमंत्री पर भी टिप्पणी

    यह पहली बार नहीं है जब उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर सीधे निशाना साधा हो। कुछ दिन पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने कहा कि पीएम पहले चुनाव में प्रचार कर रहे थे, लेकिन अब उनकी पार्टी को कमजोर करने में लगी हुई है।

    महाराष्ट्र में चुनावी हालात

    महाराष्ट्र में राजनीतिक परिस्थितियां इस समय उलझी हुई हैं। 15 जनवरी को राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव होने हैं और मतगणना 16 जनवरी को होगी। इस बार शिवसेना को तोड़कर अलग पार्टी बनाने वाले एकनाथ शिंदे भी भाजपा के साथ चुनावी मैदान में हैं। ऐसे में उद्धव ठाकरे ने भाजपा और शिंदे दोनों पर निशाना साधा है और जनता के बीच अपनी पार्टी के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश की।

    उद्धव ठाकरे की नासिक रैली में भाजपा पर तंज और हिंदुत्व को लेकर सवाल, साथ ही शिंदे के सहयोग पर निशाना, महाराष्ट्र की चुनावी राजनीति में नई हलचल पैदा कर रही है। चुनावों से पहले दोनों राजनीतिक धड़ों के बीच जुबानी जंग और आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

  • 'महिला आयोग को क्या समझ रखा है..' मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव किस पर भड़कीं?

    'महिला आयोग को क्या समझ रखा है..' मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव किस पर भड़कीं?

    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव शुक्रवार को उस वक्त भड़क गईं जब किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति से मिलने पहुंचीं मगर उनसे कोई मिलना नहीं आया. अपर्णा यादव, रमीज और धर्मांतरण के मामले को लेकर केजीएमयू पहुंचीं थीं. इसके बाद एक प्रेस वार्ता में अपर्णा ने कहा कि महिला आयोग को केजीएमयू ने क्या समझ रखा है? मैं तो कुछ जानकारी करने के लिए आई थी लेकिन मुझसे मिलने वॉइस चांसलर नहीं आईं. उन्होंने कहा कि पीड़िता से मेरी बात हुई थी उसने बताया केजीएमयू के एचओडी के बताने के बाद में भी कोई सुनवाई नहीं हुई.

    यादव ने दावा किया कि पीड़िता को केजीएमयू के सीनियर डॉक्टर के द्वारा कहा गया कि आप महिला आयोग क्यों गई? उन्होंने आरोप लगाया कि उस व्यक्ति को बचाने के लिए व्यक्ति विशेष काम कर रहे हैं.यादव ने विशाखा कमेटी के द्वारा जारी रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने बयान दिया है उनके बयान बदलने के लिए दबाव दिया जा रहा है. अपर्णा ने दावा किया कि विशाखा कमेटी को अपनी तरह से तोड़ मरोड़ कर बताए गए.

    उन्होंने पूछा कि क्या महिला आयोग, संवैधानिक संस्था नहीं है?

    केजीएमयू वीसी से मुलाकात के संदर्भ में यादव ने कहा कि हमारी कुछ बात होती जिस पर हम किसी निष्कर्ष पर पहुंचते. शायद तब मैं प्रेसवार्ता भी नहीं करती. मुझे लगता है कि प्रदेश सरकार विधि और न्याय सम्मत काम करेगी. सीएम योगी आदित्यनाथ इन मामलों में सचेत रहते हैं.

    महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने कहा-केजीएमयू में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ हो रही है, यह सब क्या चल रहा है और यहां का प्रशासन मौन है. उन्होंने आरोप लगाया कि 2 साल से बिना लाइसेंस के केजीएमयू में ब्लड बैंक चल रहा है.

    यादव ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का जिक्र करते हुए कहा कि अगर वो इस बात को जानेंगी तो वह भी इसे गंभीरतापूर्वक समझेंगी. उन्होंने आरोप लगाया कि जब रमीज मलिक यहां से भागा तब प्रोफेसर वाहिद अली और सुरेश बाबू के संपर्क में रहे. केजीएमयू प्रशासन ने उन पर कार्रवाई क्यों नहीं की?

  • भोपाल का पानी 'जहर', 7 जगह इंदौर से भी ज्यादा दूषित, पीने पर रोक

    भोपाल का पानी 'जहर', 7 जगह इंदौर से भी ज्यादा दूषित, पीने पर रोक


    भोपाल। भोपाल नगर निगम की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पानी में कैंसर, हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी बीमारियों का कारण बनने वाले बैक्टीरिया मौजूद हैं। नल से आने वाला पानी कुछ ही मिनटों में लाल हो जाता है और बदबू इतनी तीव्र होती है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है। टीडीएस (टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड्स), कैल्शियम, टोटल हार्डनेस, सल्फेट और कोलीफॉर्म भी उच्च मात्रा में पाए गए हैं।

    स्थानीय लोग अब पूरी तरह से पानी के टैंकरों पर निर्भर हैं।

    आदमपुर खंती और पड़रिया के इलाकों में लोग भूजल का पानी पीने के बजाय, केवल फसलों की सिंचाई और साफ-सफाई में इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ इलाकों में तो हैंडपंप से लाल और बदबूदार पानी निकल रहा है, जिसे देखकर लोग पीने से डर रहे हैं।

    पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष पांडे के मुताबिक, जनवरी 2018 से भोपाल का कचरा आदमपुर खंती में डंप किया जा रहा है, जिससे आसपास के 7 गांवों का भूजल गंभीर रूप से प्रदूषित हो चुका है। डंपिंग साइट पर फिलहाल 14 लाख टन कचरा जमा है, जिससे लिक्विड रसायन (लीचेट) निकलकर पानी को और दूषित कर रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि भोपाल का भूजल इंदौर से भी ज्यादा गंभीर स्थिति में है। आदमपुर खंती और आसपास के इलाकों में भूजल में आयरन और क्रोमियम भी मिले हैं, जो लंबे समय तक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं और कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकते हैं। CPCB और MPPCB की रिपोर्ट्स में भी यह तथ्य सामने आया है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भोपाल से प्रतिदिन लगभग 850 टन कचरा निकलता है, जिसमें से 800 टन कचरा प्रोसेसिंग के लिए खंती भेजा जाता है। लेकिन यूनिट की क्षमता केवल 420 टन है, जिससे कचरे का ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है और आसपास के गांवों का पानी दूषित होता जा रहा है।

    भोपाल के खानूगांव, आदमपुर छावनी और वाजपेयी नगर का पानी फेल सैंपल्स दे चुका है। पानी में पाया गया ई-कोलाई बैक्टीरिया वही है, जो इंदौर के भागीरथपुरा में पाया गया था और जिसके कारण अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है।
    भोपाल का ग्राउंड वाटर वर्तमान में पीने योग्य नहीं है और स्थानीय लोगों को सुरक्षित पानी की तत्काल आवश्यकता है। प्रशासन और पर्यावरण एजेंसियों को मिलकर पानी की सफाई और कचरा प्रबंधन के लिए सख्त कदम उठाने होंगे, ताकि जनता की जान और स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।

  • ज्योतिरादित्य सिंधिया और बुआओं के बीच संपत्ति विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट से अतिरिक्त समय

    ज्योतिरादित्य सिंधिया और बुआओं के बीच संपत्ति विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट से अतिरिक्त समय


    ग्वालियर। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं वसुंधरा राजे, ऊषा राजे और यशोधरा राजे के बीच चल रहे संपत्ति विवाद में अब राजीनामा दाखिल करने की समय सीमा बढ़ा दी गई है। यह मामला लंबे समय से न्यायालयों में विचाराधीन है और इसके समाधान के लिए दोनों पक्ष समझौते की प्रक्रिया में हैं। ग्वालियर खंडपीठ में बुआओं की ओर से दायर आवेदन में बताया गया कि बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी 2026 को निर्धारित है।
    बुआओं की ओर से कोर्ट से अनुरोध किया गया कि पहले से तय 90 दिनों की अवधि को बढ़ाकर अतिरिक्त 30 दिन दिया जाए, ताकि समझौते की सभी औपचारिकताएं पूरी की जा सकें। कोर्ट ने इस आवेदन को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दोनों पक्ष बिना किसी बाधा के विवाद का समाधान कर सकें और समझौते को विधिक रूप से अंतिम रूप दिया जा सके।

    यह संपत्ति विवाद मूल रूप से 2010 में जिला न्यायालय, ग्वालियर में दर्ज हुआ था। तब से लेकर अब तक यह मामला लंबित है और 2017 में इसे हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया गया। विवाद मुख्य रूप से सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे को लेकर है। बुआओं और भतीजे दोनों पक्ष चाहते हैं कि यह विवाद समझौते के माध्यम से समाप्त हो जाए, ताकि लंबित कानूनी प्रक्रियाओं का बोझ खत्म हो सके।

    सितंबर 2025 में जिला न्यायालय ने याचिका का निस्तारण करते हुए दोनों पक्षों को 90 दिनों में समझौता पेश करने का निर्देश दिया था। लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित केस के कारण यह समय पूरा नहीं हो पाया। अब हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लंबित मामले के निस्तारण के बाद दोनों पक्षों को समझौता दाखिल करने के लिए अतिरिक्त 30 दिन का समय मिलेगा।

    इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी औपचारिकताएं और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हों और किसी भी तरह का विवाद भविष्य में न उभरे।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम पारिवारिक विवादों के शीघ्र समाधान के लिए अहम है। अक्सर लंबित कानूनी मामले सालों तक अटके रहते हैं और दोनों पक्षों के बीच मतभेद बढ़ते हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के मामले में भी यह समय वृद्धि पारिवारिक समझौते को सुरक्षित और न्यायसंगत तरीके से पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

    इस मामले से जुड़े जानकार बताते हैं कि समझौते की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है।

    इसमें संपत्ति के बंटवारे, कानूनी अधिकारों की पुष्टि और किसी भी वित्तीय या प्रशासनिक बाधा का समाधान शामिल है। अतिरिक्त 30 दिन की अवधि दोनों पक्षों को ये सुनिश्चित करने का अवसर देती है कि समझौते में सभी औपचारिकताएं और दस्तावेज़ सही तरीके से तैयार किए जाएं।

    कुल मिलाकर, यह कदम ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच लंबित संपत्ति विवाद को शांतिपूर्ण और कानूनी ढंग से समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। कोर्ट की अनुमति से दोनों पक्ष बिना किसी दबाव के समझौता अंतिम रूप दे सकेंगे। इससे परिवार के बीच तनाव कम होगा और लंबित न्यायिक प्रक्रियाओं का बोझ भी घटेगा।

    इस मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट में होगी, जिसके बाद अतिरिक्त 30 दिनों में समझौते की औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इस प्रक्रिया के सफलतापूर्वक पूर्ण होने से परिवार के सभी सदस्यों के बीच संपत्ति विवाद का स्थायी समाधान निकलने की संभावना है।

  • ग्वालियर में रिकॉर्ड तोड़ ठंड का कहर: 25 साल का रिकॉर्ड ध्वस्त, न्यूनतम तापमान 5 डिग्री, जनजीवन बेहाल

    ग्वालियर में रिकॉर्ड तोड़ ठंड का कहर: 25 साल का रिकॉर्ड ध्वस्त, न्यूनतम तापमान 5 डिग्री, जनजीवन बेहाल


    ग्वालियर । ग्वालियर में कड़ाके की ठंड ने इस बार सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। जनवरी में बीते 25 साल का रिकॉर्ड टूट गया, जब अधिकतम तापमान गिरकर सिर्फ 10.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जबकि न्यूनतम तापमान भी लुढ़ककर 5 डिग्री दर्ज किया गया।
    मौसम विभाग के अनुसार बीते 100 साल में यह दूसरी बार है जब जनवरी के महीने में ग्वालियर में इतनी गंभीर ठंड दर्ज की गई है। घने कोहरे और बर्फीली हवाओं के चलते सुबह से लेकर दिन तक ठंड का असर बना हुआ है और लोगों को दिन में भी रात जैसा एहसास हो रहा है।

    शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे तक पूरा शहर कोहरे की मोटी चादर में लिपटा रहा। सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और लोग बेहद जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले। पिछले आठ दिनों से सुबह देर तक और शाम को जल्दी घना कोहरा छा रहा है। दृश्यता घटकर 60 से 100 मीटर रह गई, जिससे वाहन चालकों को दिन में भी हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा।

    ठंड के प्रकोप को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्राइमरी और मिडिल स्कूलों की छुट्टियां 10 जनवरी तक बढ़ा दी हैं।

    मौसम विभाग ने बताया कि गुरुवार को अधिकतम तापमान सामान्य से 11.1 डिग्री कम रहने के कारण दिन को ‘कोल्ड सीवियर डे’ घोषित किया गया। इससे पहले साल 2019 में अधिकतम तापमान 8.3 डिग्री तक गिरा था। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 260 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही जेट स्ट्रीम हवाओं के कारण घना कोहरा बना हुआ है। वहीं कश्मीर की ओर से करीब 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आ रही बर्फीली हवाएं हिमालय की बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों तक ला रही हैं, जिससे ठंड और ज्यादा बढ़ गई है।

    ठंड से राहत दिलाने के लिए नगर निगम ने शहर के प्रमुख चौराहों पर अलाव जलवाए हैं, ताकि राहगीरों और बेसहारा लोगों व जानवरों को कुछ राहत मिल सके।

    इसके बावजूद धूप न के बराबर दिखाई दे रही है और सूरज के तेवर पूरी तरह ढीले पड़े हुए हैं। मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल ठंड से राहत की कोई उम्मीद नहीं है। अगले 48 घंटों में न्यूनतम तापमान और गिर सकता है और घना कोहरा भी बना रहेगा।

    कड़ाके की ठंड और कोहरे का असर परिवहन व्यवस्था पर भी साफ दिख रहा है। रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और ग्वालियर आने वाली कई ट्रेनें 5 से 6 घंटे तक देरी से चल रही हैं। दिल्ली से आने वाली पंजाब मेल करीब 4 घंटे, शताब्दी एक्सप्रेस लगभग 2 घंटे और मंगला एक्सप्रेस करीब 5 घंटे लेट रही। वहीं भोपाल से आने वाली मंगला एक्सप्रेस भी साढ़े तीन घंटे की देरी से पहुंची, जबकि केरल और समता एक्सप्रेस भी अपने निर्धारित समय से काफी देर से चल रही हैं।

    हवाई यातायात पर भी कोहरे का असर पड़ा है। ग्वालियर एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स 2 से 3 घंटे तक देरी से संचालित हो रही हैं। गुरुवार को इंडिगो की मुंबई और दिल्ली फ्लाइट्स और एयर इंडिया की बेंगलुरु फ्लाइट कोहरे के कारण देर से आईं और रवाना हुईं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुल मिलाकर ग्वालियर में ठंड ने अपना रौद्र रूप दिखा दिया है और आने वाले दिनों में हालात और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

  • मां ने लगाया मौत को गले पास बैठी बिलखती रही 2 साल की मासूम मंजर देख कांप उठी रूह

    मां ने लगाया मौत को गले पास बैठी बिलखती रही 2 साल की मासूम मंजर देख कांप उठी रूह


    कानपुर । उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। शहर के रावतपुर थाना क्षेत्र के आनंद नगर इलाके में एक महिला ने घर के भीतर फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। यह घटना उस वक्त और भी दर्दनाक हो गई जब मृतका की दो साल की मासूम बेटी अपनी मां को फंदे पर लटका देख वहीं बैठकर बिलखती रही। जिस मां की गोद में वह सुकून पाती थी उसी मां को बेजान हालत में देख बच्ची की चीखें पूरे घर में गूंजती रहीं।

    शोर सुनकर जब कमरे में पहुंचे परिजन जानकारी के मुताबिक आनंद नगर निवासी प्रॉपर्टी डीलर राकेश तिवारी की पत्नी संध्या तिवारी 38 ने बुधवार देर शाम अज्ञात कारणों के चलते कमरे में पंखे के कुंडे से दुपट्टे के सहारे फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के वक्त घर के अन्य सदस्य अपने कामों में व्यस्त थे। काफी देर तक जब संध्या कमरे से बाहर नहीं निकली और अंदर से छोटी बेटी नायरा के रोने की लगातार आवाजें आने लगीं तो परिवार को अनहोनी की आशंका हुई। संध्या की 14 वर्षीय बड़ी बेटी भूमि जैसे ही कमरे के भीतर पहुंची वहां का खौफनाक मंजर देख उसकी चीख निकल गई। उसकी आंखों के सामने उसकी मां का शव फंदे से लटक रहा था और पास ही उसकी दो साल की छोटी बहन नायरा अपनी मां के शव के पास बैठी रो रही थी।

    पुलिस जांच और परिजनों का हाल भूमि की चीख पुकार सुनकर घर के अन्य सदस्य और आस-पड़ोस के लोग तुरंत मौके पर जमा हो गए। आनन-फानन में पुलिस को सूचना दी गई जिसके बाद रावतपुर थाना पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने शव को फंदे से नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घर में मचे इस कोहराम से हर किसी की आंखें नम हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि संध्या ने आखिर इतना बड़ा कदम क्यों उठाया।

    अनसुलझे सवाल और मासूम की सिसकियां इस घटना ने कई सवाल भी पीछे छोड़ दिए हैं। पुलिस इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है कि आखिर सुसाइड के पीछे की मुख्य वजह क्या थी? क्या यह घरेलू कलह का मामला है या फिर कोई और मानसिक तनाव। हालांकि सबसे ज्यादा विचलित करने वाली बात वह दृश्य था जिसमें एक दो साल की मासूम को यह भी समझ नहीं आ रहा था कि उसकी मां उसे हमेशा के लिए छोड़कर जा चुकी है। वह बस अपनी मां को उठने की उम्मीद में निहारती रही। फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि मौत के सही कारणों और समय की पुष्टि हो सके। इस घटना ने पूरे आनंद नगर इलाके में मातम पसरा दिया है।

  • इंदौर में दूषित पानी से मौतों का खुलासा: कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना

    इंदौर में दूषित पानी से मौतों का खुलासा: कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना


    नई दिल्ली। इंदौर में दूषित पेयजल के कारण कम से कम 18 लोगों की मौत हुई है। कांग्रेस मीडिया एंड कम्युनिकेशन प्रमुख पवन खेड़ा ने इस घटना को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है और कहा कि यह केवल स्थानीय प्रशासन की नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री और मेयर तक की जवाबदेही है।
    “हर घर जल” की बजाय “हर घर मल” योजना
    खेड़ा ने बताया कि इंदौर को स्वच्छ भारत अभियान में कई बार “नंबर-वन शहर” का दर्जा मिला, लेकिन आज वही शहर गंदे पानी और दूषित स्वास्थ्य सेवाओं की वजह से मौतों का सामना कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि “हर घर जल योजना” के लिए मंजूर पाइपलाइन का काम जुलाई 2022 में शुरू होना था, लेकिन केवल ठेके की फाइनलाइजेशन का इंतजार किया गया।लोगों की जान दांव पर लगाई गई, जबकि अधिकारियों और सरकार ने काम रोक रखा था।
    प्रशासन और राजनीतिक जिम्मेदारी पर सवाल
    खेड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव गाने गा रहे हैं, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पत्रकारों से बदसलूकी कर रहे हैं, और मेयर अलग ही बयान दे रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी अराजकता का खामियाजा छोटे बच्चे और आम लोग भुगत रहे हैं।

    स्वास्थ्य संकट और राष्ट्रीय पैमाना
    पानी, हवा और दवाइयों में मिलावट एक व्यापक समस्या बन गई है।
    गुजरात के गांधीनगर और दिल्ली में भी टाइफाइड और दूषित पानी के मामले सामने आए हैं।
    लगभग 70% पानी देश में दूषित हो चुका है।

    हैजा की पुष्टि और नोटिफिकेशन का सवाल
    खेड़ा ने सीधे सवाल किया, क्या पानी और प्रभावित नागरिकों के स्टूल सैंपल की कल्चर जांच हुई?
    अगर हैजा का बैक्टीरिया मिला, तो क्या इसे आईडीएसपी के तहत नोटिफाई किया गया?
    क्या इस मामले की जानकारी केंद्र सरकार, स्वास्थ्य मंत्रालय और WHO को दी गई?

    वित्तीय अनियमितताएं
    वर्ष 2003 में एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से 200 मिलियन डॉलर का लोन भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के लिए आया।सवाल उठाया गया कि यह पैसा कहाँ गया और क्या योजनाओं को पूरा करने में इसका सही इस्तेमाल हुआ।
    खेड़ा ने कहा, 18 मौतें किसी हादसे का नतीजा नहीं हैं, यह शासन की विफलता और भ्रष्टाचार का परिणाम हैं। जनता जानना चाहती है कि क्या कोई जिम्मेदारी लेगा या यह मामला भी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा।
  • Bihar:हिजाब हटाने के विवाद में 23 दिन बाद डॉ. नुसरत परवीन ने ज्वाइन की नौकरी..

    Bihar:हिजाब हटाने के विवाद में 23 दिन बाद डॉ. नुसरत परवीन ने ज्वाइन की नौकरी..


    पटना।
    बिहार ( Bihar) की आयुष चिकित्सक डॉ. नुसरत परवीन (Ayush physician Dr. Nusrat Parveen) ने आखिरकार 23 दिनों के बाद नौकरी ज्वाइन कर ली है। गर्दनीबाग स्थित सिविल सर्जन कार्यालय में उन्होंने मंगलवार को योगदान दे दिया। इस बाबत सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार ने बताया कि उनकी तैनाती सदर पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) में की गई है। उन्होंने योगदान के लिए आवेदन दिया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

    डॉ. नुसरत परवीन को संविदा पर यह नौकरी मिली है। पहले उन्हें 31 दिसंबर तक ही योगदान करना था। डॉ. नुसरत परवीन उस समय चर्चा में आई थी, जब 15 दिसंबर को मुख्यमंत्री सचिवालय में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान हिजाब हटाए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। डॉ. नुसरत परवीन पटना स्थित राजकीय तिब्बी कॉलेज से एमडी पीजी की पढ़ाई कर रही हैं।

    राजकीय तिब्बी कॉलेज एवं अस्पताल के प्राचार्य महफूज-उर-रहमान ने बताया कि डॉक्टर नुसरत परवीन ने अंतिम तिथि पर ड्यूटी ‘ज्वाइन’ कर ली। उन्होंने कहा, “आज सेवा में शामिल होने की अंतिम तिथि थी और नुसरत ने पटना सिविल सर्जन कार्यालय में ड्यूटी के लिए रिपोर्ट कर दिया। सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा उन्हें उपयुक्त स्थान पर पदस्थापित किया जाएगा।”

    प्राचार्य ने बताया कि सेवा में शामिल होने की अंतिम तिथि पहले 31 दिसंबर तक बढ़ाई गई थी और फिर इसे सात जनवरी तक विस्तार दिया गया था। नुसरत परवीन उसी कॉलेज की छात्रा रह चुकी हैं, जिसके रहमान प्राचार्य हैं। इससे पहले कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि नुसरत ने शुरुआत में “नाराजगी” के चलते सेवा में शामिल होने से इनकार कर दिया था। हालांकि कॉलेज प्रशासन ने इस दावे को खारिज किया था।

    पिछले महीने, जब नुसरत तय समय सीमा के भीतर ड्यूटी के लिए रिपोर्ट नहीं कर पाई थीं, तब प्राचार्य ने कहा था, “उनके परिवार ने बताया था कि वे मीडिया कवरेज से बचना चाहती हैं और वह दोबारा विचार करेंगी कि उन्हें सेवा में शामिल होना है या नहीं।”

  • हिजाब विवाद खत्म, नुसरत परवीन ने 23 दिन बाद जॉइन की नौकरी, CM ने जॉइनिंग लेटर देते वक्त हटाया था नकाब

    हिजाब विवाद खत्म, नुसरत परवीन ने 23 दिन बाद जॉइन की नौकरी, CM ने जॉइनिंग लेटर देते वक्त हटाया था नकाब


    नई दिल्ली।  हिजाब विवाद में फंसी आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन ने 23 दिन की देरी के बाद आखिरकार अपनी नौकरी जॉइन कर ली है। नुसरत ने अधिकारियों के दबाव के बावजूद सिविल सर्जन के पास जाने की औपचारिकता को छोड़कर सीधे विभाग में जॉइनिंग की।

    नुसरत की जॉइनिंग की आखिरी तारीख कई बार बढ़ाई गई। मूल रूप से 20 दिसंबर को जॉइनिंग की लास्ट डेट थी, जिसे 31 दिसंबर और फिर 7 जनवरी तक बढ़ाया गया।

    7 जनवरी को नुसरत ने अंतिम मौका लेकर अपना CHC जॉइनिंग पूरा किया।

    15 दिसंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र बांटते समय नुसरत का हिजाब हटाया था, जिसके बाद से उनकी लोकेशन और जॉइनिंग को लेकर अफसरों में भी सवाल उठ रहे थे।

    आयुष डॉक्टर की जॉइनिंग प्रोसेस:
    आयुष विभाग नियुक्ति पत्र जारी करता है। इसे लेकर कैंडिडेट को सिविल सर्जन के ऑफिस जाना होता है, जहां डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और बेसिक जानकारी ली जाती है। इसके बाद सिविल सर्जन जॉइनिंग लेटर जारी करते हैं, जिसे कैंडिडेट संबंधित CHC में दिखाकर जॉइन करता है।

    झारखंड ऑफर बनाम बिहार सैलरी:
    हिजाब विवाद के दौरान झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने नुसरत को 3 लाख रुपए मासिक वेतन, सरकारी फ्लैट और मनचाही पोस्टिंग का ऑफर दिया। वहीं बिहार में उनकी सैलरी 32 हजार रुपए प्रति माह तय है। मंत्री ने कहा कि झारखंड में डॉक्टरों, विशेषकर महिलाओं के मान-सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाता।

    हिजाब विवाद की झलक:
    15 दिसंबर को CM नीतीश कुमार ने नुसरत को नियुक्ति पत्र थमाते हुए हिजाब पर सवाल उठाया और खुद अपने हाथ से नकाब हटाया। इस दौरान डिप्टी CM सम्राट चौधरी भी नुसरत को रोकने की कोशिश में लगे। नुसरत थोड़ी देर असहज हुईं, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें नियुक्ति पत्र थमाया और जाने का इशारा किया।

    इस प्रकार, नुसरत परवीन ने विवादों के बीच अपनी नौकरी जॉइन कर भारत में महिला डॉक्टरों के लिए पेशेवर अधिकार और सम्मान की मिसाल कायम की है।

  • मुरैना में वकील मृत्युंजय सुसाइड केस में नया मोड़,मां ने एसपी से मांगी न्यायिक कार्रवाई, महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी FIR दर्ज होने की मांग

    मुरैना में वकील मृत्युंजय सुसाइड केस में नया मोड़,मां ने एसपी से मांगी न्यायिक कार्रवाई, महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी FIR दर्ज होने की मांग




    मुरैना।
    वकील मृत्युंजय चौहान के सुसाइड केस में नया मोड़ आया है। बुधवार को मृतक वकील की मां, शिवकुमारी जादौन, मुरैना एसपी समीर सौरभ से मिलने पहुंचीं और भावुक होकर बोलीं कि उनके बेटे के साथ जो अत्याचार हुआ, उसकी न्यायिक कार्रवाई सिर्फ ग्वालियर में नहीं, बल्कि मुरैना में भी हो। उन्होंने कहा, “मुझे भी यहीं मार डालो, मेरा बेटा तो चला ही गया।

    मृत्युंजय की मां ने आरोप लगाया कि मुरैना पुलिस अब तक किसी ठोस कार्रवाई में नहीं जुटी है।

    12 दिसंबर को मुरैना सिविल लाइन की महिला एसआई प्रीति जादौन और कॉन्स्टेबल अराफात खान ने मृत्युंजय के साथ मारपीट की थी। इसी के चलते मृत्युंजय ने 15 दिसंबर को ग्वालियर में अपने किराए के मकान में फांसी लगाई। उन्होंने मांग की कि आरोपी महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी एफआईआर दर्ज की जाए, अवैध पिस्टल जब्त की जाए और दोनों को जिले से बाहर अटैच किया जाए क्योंकि वे परिवार को धमका रहे हैं।

    ग्वालियर पुलिस की जांच में सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन से पुष्टि हुई कि घटना वाले दिन आरोपी और वकील साथ थे।

    जांच में यह भी खुलासा हुआ कि महिला एसआई ने शादी का दबाव बनाया, पूर्व पत्नी से तलाक, जमीन-जायदाद और जेवरात हड़पने की कोशिश की। इस मामले में ग्वालियर पुलिस ने बीएनएस की धारा 108 और 3(5) के तहत महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    एसपी ने कहा कि जांच जारी है और जैसे ही ग्वालियर पुलिस का एफआईआर प्रतिवेदन मिलेगा, दोनों आरोपियों को पुलिस मुख्यालय अटैच कर दिया जाएगा। शिवकुमारी जादौन की यह मांग न्यायपालिका और पुलिस पर दबाव डालती है कि किसी भी तरह की अवहेलना या विलंब न्याय में बाधक न बने।

    इस पूरे मामले ने मुरैना और ग्वालियर में पुलिस और न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक वकील के परिवार ने स्पष्ट किया कि केवल ग्वालियर में कार्रवाई से संतोष नहीं होगा, बल्कि मुरैना में भी एफआईआर दर्ज होना जरूरी है ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके।