झारखंड सरकार का प्रस्ताव
नुसरत का फैसला और विवाद
कॉलेज की स्थिति

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दूसरी घटना रामगढ़ प्रखंड के कुंदरूकलां पंचायत में हुई जहां काजल देवी नाम की महिला ईंट भट्ठे में काम करने आई थी। जब वह रात में शौच के लिए बाहर गई तो हाथियों ने उसे घेर लिया और उसे पटक-पटककर मार डाला। इस दौरान वहां मौजूद आधे दर्जन से अधिक लोग बाल-बाल बच गए। इसके अलावा हाथियों ने पास में मौजूद फसलों को भी नुकसान पहुंचाया। वन विभाग अब इस नुकसान का मूल्यांकन करने में जुटा है।
इन घटनाओं से पहले मंगलवार को भी रामगढ़ जिले के घाटो थाना क्षेत्र के आरा सारूबेड़ा में हाथियों के हमले में चार लोग मारे गए थे जिनमें एक सीसीएल का सुरक्षाकर्मी और तीन अन्य स्थानीय लोग शामिल थे।स्थानीय लोगों और वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि हाथियों के आक्रामक होने का मुख्य कारण उनके पारंपरिक रास्तों में बढ़ती मानवीय गतिविधि और जंगलों का सिमटना है। इसके कारण हाथी भोजन और पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों में घुसने पर मजबूर हो रहे हैं।
वर्तमान में वन विभाग ने क्षेत्र में हाथियों से बचाव के लिए निगरानी बढ़ा दी है और उनके मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। साथ ही ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी समाधान और मुआवजे के साथ-साथ हाथियों के सुरक्षित मार्ग को बहाल करने की अपील की है। तोपा माइनस कॉलोनी उखरबेड़वा और हरवे क्षेत्र में हाथियों का झुंड खुलेआम विचरण कर रहा है जिससे ग्रामीणों में चिंता का माहौल है।प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को तत्काल 25 हजार रुपये की सहायता राशि दी है और मुआवजे के रूप में 3 लाख 75 हजार रुपये 10 दिनों के अंदर भुगतान करने का आश्वासन दिया है।

मारे गए नक्सली की पहचान 35 वर्षीय फागनू माडवी के रूप में हुई है। वह भैरमगढ़ क्षेत्र समिति का सक्रिय सदस्य था। मुठभेड़ के बाद उसका शव घटनास्थल पर पाया गया। मौके से एक .303 राइफल एक 9 मिमी पिस्टल दो स्कैनर सेट एक रेडियो और एक मेडिकल किट बरामद किया गया। इस घटना को लेकर बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने कहा कि सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे अभियानों के कारण बस्तर में माओवादी नेटवर्क काफी कमजोर हो चुका है। उन्होंने बाकी माओवादी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे हिंसा छोड़कर सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करें।
इस वर्ष छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ों में कुल 285 माओवादी मारे गए हैं जिनमें से 256 माओवादी बस्तर मंडल के सात जिलों में मारे गए जिनमें बीजापुर भी शामिल है। शेष माओवादी रायपुर मंडल के गरियाबंद जिले और दुर्ग मंडल के मोहला-मनपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में मारे गए। यह मुठभेड़ सुरक्षा बलों की लगातार कोशिशों का परिणाम है जो छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर में माओवादी गतिविधियों को नष्ट करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

शीतकालीन सत्र का प्रारंभ
सत्र के पहले दिन 19 दिसंबर को दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। इस दिन का मुख्य उद्देश्य विधानसभा में योगदान देने वाले उन नेताओं को सम्मानित करना है जिनका हाल ही में निधन हुआ था। इसके बाद 20 और 21 दिसंबर को अवकाश रहेगा। 22 दिसंबर को सत्र का मुख्य कार्यक्रम शुरू होगा जिसमें वित्तीय वर्ष 2025-26 का अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा।
अनुपूरक बजट और वंदे मातरम् पर चर्चा
सत्र के दौरान 22 दिसंबर को अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा जिसमें राज्य सरकार की अतिरिक्त वित्तीय जरूरतों के लिए प्रस्तावित खर्चों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा उसी दिन वंदे मातरम् पर पांच घंटे की विशेष चर्चा आयोजित की जाएगी। यह चर्चा भारतीय राष्ट्रवाद और संस्कृति को बढ़ावा देने के संदर्भ में होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विधानसभा जन आकांक्षाओं का महत्वपूर्ण मंच है और इस चर्चा के माध्यम से सरकार सभी मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी करेगी।
‘विकसित उत्तर प्रदेश विजन डॉक्यूमेंट-2047’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शीतकालीन सत्र के उद्घाटन से पहले प्रदेश के ‘विकसित उत्तर प्रदेश विजन डॉक्यूमेंट-2047’ पर बात की। उन्होंने पिछले सत्र में इस विषय पर हुई 27 घंटे लंबी चर्चा का हवाला दिया। इस दौरान राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश से लगभग 98 लाख सुझाव प्राप्त किए थे जिनका उपयोग आईआईटी कानपुर के सहयोग से अंतिम रूप देने में किया जाएगा। यह डॉक्यूमेंट उत्तर प्रदेश के 2047 तक के विकास का रोडमैप तय करेगा।
एसआईआर अभियान और वीर बाल दिवस
मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे एसआईआर स्पेशल इन्फॉर्मेशन रिवाइज अभियान की सराहना की। इस अभियान के माध्यम से मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जाएगा जिससे लोकतंत्र को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाने की घोषणा की गई है। यह दिन भारतीय संस्कृति और राष्ट्र के प्रति बच्चों को प्रेरित करने के लिए मनाया जाएगा।
विधायी कार्य और आगामी कार्यक्रम
सत्र के अंतिम दो दिनों यानी 23 और 24 दिसंबर को विधायी कार्य और विभिन्न मुद्दों पर चर्चाएं आयोजित की जाएंगी। इन दो दिनों में विभिन्न विधेयकों पर विचार किया जाएगा और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री ने इस बात को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता हमेशा जनहित में निर्णय लेना और समस्याओं का समाधान करना रहेगा।
संपूर्ण सत्र में राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील करते हुए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने यह भी कहा कि इस सत्र के दौरान जनोपयोगी मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा की जाएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी दलों के सहयोग से विधानसभा का संचालन सुचारु रूप से होगा और प्रदेश के विकास के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।

यह मामला 23 अप्रैल 2023 का है। कोरबा निवासी व्यापारी अमित अग्रवाल और उनके भाई सुमित अग्रवाल रायपुर से कोरबा लौट रहे थे जब तरदा गांव के पास सामने से आ रहे वाहन से बचने के प्रयास में उनकी इनोवा कार अनियंत्रित हो गई और पेड़ से टकरा गई। हादसा बेहद गंभीर था और इस दौरान कार का कोई भी एयरबैग नहीं खुला जिससे चालक अमित अग्रवाल को गंभीर चोटें आईं।
अमित अग्रवाल ने इलाज के दौरान कुल 36.83 लाख रुपये खर्च किए क्योंकि उन्हें रायपुर और हैदराबाद में इलाज कराना पड़ा। इसके बाद सुमित अग्रवाल ने टोयोटा किर्लोस्कर मोटर कंपनी के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग कोरबा में शिकायत दायर की। शिकायत में यह आरोप लगाया गया कि कार में एयरबैग की तकनीकी खराबी के कारण गंभीर दुर्घटना के दौरान चालक को बचाया नहीं जा सका।
जब कंपनी की ओर से कोई प्रतिनिधि सुनवाई में उपस्थित नहीं हुआ तो जिला उपभोक्ता आयोग ने एकपक्षीय निर्णय लेते हुए टोयोटा को नया वाहन या उसके बराबर राशि देने का आदेश दिया। इसके अलावा उन्होंने चिकित्सा खर्च की भरपाई भी करने के निर्देश दिए।
टोयोटा ने इस फैसले के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की जिसमें उन्होंने बीमा भुगतान और विशेषज्ञ रिपोर्ट के अभाव जैसे तर्क प्रस्तुत किए। हालांकि राज्य उपभोक्ता आयोग ने कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए जिला आयोग के फैसले को सही ठहराया। आयोग ने कहा कि वाहन के एयरबैग का न खुलना एक गंभीर लापरवाही और खराब निर्माण का उदाहरण है जो उपभोक्ता के जीवन को खतरे में डालता है।
यह मामला उपभोक्ता सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि कार निर्माता कंपनियों को अपनी सुरक्षा प्रणालियों की गुणवत्ता और कार्यक्षमता को सुनिश्चित करना चाहिए। अगर कोई उपभोक्ता सुरक्षा मानक में कमी की वजह से नुकसान उठाता है तो कंपनी को जिम्मेदारी लेनी चाहिए और उपभोक्ता को उचित मुआवजा देना चाहिए। यह फैसला उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करता है और यह संदेश देता है कि कंपनियों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर ध्यान देना चाहिए।

ट्रैफिक पुलिस के अनुसार बंदरियाबाग चौराहे से राजभवन डीएसओ चौराहा हजरतगंज चौराहा जीपीओ मोड़ और विधानसभा की ओर जाने वाले सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। इन मार्गों की ओर जाने वाले वाहन अब लालबत्ती चौराहा कैंट रोड गोल्फ क्लब चौराहा और 1090 चौराहे के रास्ते अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।इसी तरह डीएसओ चौराहे से हजरतगंज जीपीओ पार्क और विधानसभा की ओर जाने वाले रास्तों को भी बंद रखा जाएगा। इस रूट पर चलने वाले वाहनों को पार्क रोड और मेफेयर तिराहे से होकर जाने की सलाह दी गई है। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि इन वैकल्पिक मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि यातायात सुचारु रूप से चलता रहे।
इसके अलावा रॉयल होटल चौराहे से विधानसभा के सामने होकर हजरतगंज चौराहे की ओर जाने वाला मार्ग पूरी तरह से बंद रहेगा। इस रास्ते से गुजरने वाले वाहनों को कैसरबाग चौराहा परिवर्तन चौक सुभाष चौराहा चिरैया झील या बर्लिंगटन चौराहा सदर ओवरब्रिज और कैंट रोड के जरिए डायवर्ट किया जाएगा।विधानसभा सत्र का असर सार्वजनिक परिवहन पर भी पड़ेगा। रोडवेज और सिटी बसों के कई रूट में बदलाव किया गया है। संकल्प वाटिका पुल के नीचे स्थित तिराहे से महानगर की ओर से आने वाली बसें अब सिकंदरबाग हजरतगंज और विधानसभा मार्ग से नहीं गुजरेंगी। इन बसों को बैकुंठ धाम 1090 गांधी सेतु बंदरियाबाग लालबत्ती चौराहा और कैंट के रास्ते संचालित किया जाएगा।
गौरतलब है कि विधानसभा का शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर से 24 दिसंबर तक प्रस्तावित है। हालांकि 20 और 21 दिसंबर को अवकाश रहेगा लेकिन इसके बावजूद 22 23 और 24 दिसंबर को भी ट्रैफिक डायवर्जन की यही व्यवस्था लागू रहेगी। ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से समय से निकलने ट्रैफिक नियमों का पालन करने और जरूरत पड़ने पर नजदीकी ट्रैफिक कर्मियों से सहायता लेने की अपील की है

इसी दौरान नई दिल्ली से लखनऊ जा रही तेजस एक्सप्रेस को एहतियातन गंगाघाट रेलवे स्टेशन पर रोक दिया गया। ट्रेन करीब 27 मिनट तक वहां खड़ी रही। इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर कई अन्य ट्रेनों को भी रोक दिया गयाजिससे कुछ समय के लिए इस रूट पर रेल यातायात प्रभावित हुआ।रेलवे अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ट्रैक की जांच की और सीमेंटेड स्लीपर को हटवाया। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद रात लगभग 9:19 बजे ट्रैक को पूरी तरह क्लियर कर दिया गयाजिसके बाद तेजस एक्सप्रेस समेत अन्य ट्रेनों को रवाना किया गया।
आरपीएफ इंस्पेक्टर हरीश कुमार मीणा ने बताया कि मगरवारा स्टेशन के पास गिट्टी उतारने का कार्य चल रहा है। संभव है कि ट्रेनों की तेज धमक के कारण सीमेंटेड स्लीपर ट्रैक पर आ गया हो। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह किसी अराजक तत्व की शरारत हो। मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है।वहीं मगरवारा स्टेशन मास्टर शिव बहादुर ने बताया कि डाउन लाइन पर स्लीपर पड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि यह निर्माण कार्य के दौरान अपनी जगह से खिसक सकता हैलेकिन साजिश की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। पीडब्ल्यूआई स्थायी मार्ग निरीक्षक- की टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए स्लीपर हटाया और ट्रैक को सुरक्षित घोषित किया।
इस घटना ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेजस एक्सप्रेस जैसी हाई-स्पीड और प्रीमियम ट्रेन को निशाना बनाए जाने की आशंका ने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। रेलवे अब आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रहा है और स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।उधरप्रदेश के कई हिस्सों में घने कोहरे का असर भी रेल यातायात पर साफ दिखाई दिया। मुरादाबाद मंडल समेत उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में कोहरे के कारण ट्रेनों की रफ्तार धीमी रही और कई प्रमुख ट्रेनें घंटों की देरी से चलीं। दृश्यता कम होने के चलते लोको पायलटों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी।
बुधवार को 20505 डिब्रूगढ़-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस करीब सवा दो घंटे की देरी से मुरादाबाद पहुंची। वहीं जम्मूतवी-कोलकाता एक्सप्रेसदुर्गियाना एक्सप्रेसअमरनाथ एक्सप्रेस और जनसाधारण एक्सप्रेस सहित कई ट्रेनें एक से सात घंटे तक लेट रहीं। ट्रेनों के विलंब से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और जंक्शनों पर वेटिंग हॉल यात्रियों से भरे नजर आए। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी जरूर लें। साथ ही ट्रैक की सुरक्षा को लेकर निगरानी और गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैंताकि भविष्य में किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

सबसे बड़ा फैसला दफ्तरों को लेकर लिया गया है। दिल्ली सरकार ने सभी सरकारी और निजी संस्थानों में वर्क फ्रॉम होम को अनिवार्य कर दिया है। श्रम मंत्री कपिल मिश्रा ने साफ कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी। आदेश के मुताबिक, निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत से ज्यादा कर्मचारी एक साथ ऑफिस में मौजूद नहीं हो सकते। बाकी कर्मचारियों को घर से काम करना होगा। हालांकि, इमरजेंसी सेवाओं और फ्रंटलाइन वर्कर्स को इससे छूट दी गई है। इसमें अस्पताल, स्वास्थ्य सेवाएं, फायर डिपार्टमेंट, प्रदूषण नियंत्रण, ट्रांसपोर्ट और सैनिटेशन जैसी जरूरी सेवाएं शामिल हैं।
प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्माण गतिविधियों पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। सरकार का कहना है कि GRAP-IV लागू रहने तक सभी तरह के निर्माण और तोड़-फोड़ के काम बंद रहेंगे। इससे प्रभावित होने वाले मजदूरों के लिए राहत की घोषणा भी की गई है। दिल्ली सरकार ऐसे पंजीकृत मजदूरों को 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता देगी, ताकि उनकी आजीविका पर तत्काल असर न पड़े। इसके लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
वाहनों से फैलने वाले प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए सरकार ने बिना PUC पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट के पेट्रोल और डीजल देने पर रोक लगा दी है। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि अब पेट्रोल पंपों पर PUC सर्टिफिकेट की जांच की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों को ईंधन नहीं मिलेगा। PUC सर्टिफिकेट अधिकृत केंद्रों पर वाहन की उत्सर्जन जांच के बाद जारी होता है। दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए इसकी फीस 60 रुपये, चारपहिया के लिए 80 रुपये और डीजल वाहनों के लिए 100 रुपये तय की गई है। BS-IV और BS-VI वाहनों के लिए इसकी वैधता 12 महीने की होती है।
इसके अलावा, निर्माण सामग्री ढोने वाले ट्रकों की दिल्ली में एंट्री पर भी रोक लगा दी गई है। सरकार ने साफ किया है कि दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड BS-6 से नीचे के सभी वाहनों को GRAP-3 और GRAP-4 के दौरान राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। बाहर से आने वाले लोगों से अपील की गई है कि वे केवल BS-6 मानक वाले वाहन ही दिल्ली लाएं।दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की टीमें पेट्रोल पंपों, प्रमुख सड़कों और बॉर्डर पॉइंट्स पर तैनात की गई हैं, ताकि नियमों का सख्ती से पालन कराया जा सके। साथ ही, सरकार वाहन प्रदूषण कम करने के लिए एक कारपूलिंग ऐप लॉन्च करने की योजना पर भी काम कर रही है।सरकार का मानना है कि ये कड़े फैसले अस्थायी हैं लेकिन इनका मकसद दिल्ली के लोगों को साफ और सुरक्षित हवा देना है। यदि हालात में सुधार होता है तो पाबंदियों में ढील दी जा सकती है, लेकिन फिलहाल सभी नागरिकों से नियमों का पालन करने और सहयोग करने की अपील की गई है।

तीसरे उपमुख्यमंत्री की चर्चा क्यों?
सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर फोकस
बागी नेताओं को भी मिल सकता है मौका
चुनावी रणनीति से जुड़ा है विस्तार