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  • मुख्यमंत्री से कराया जनपद भवन का भूमिपूजन, भवन निर्माण के लिए जमीन की तलाश जारी, SDM ने किया विवाद खारिज

    मुख्यमंत्री से कराया जनपद भवन का भूमिपूजन, भवन निर्माण के लिए जमीन की तलाश जारी, SDM ने किया विवाद खारिज


    उज्जैन। उज्जैन के खाचरौद में नए बनने वाले जनपद भवन का भूमि पूजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 जनवरी 2026 को किया। इस दौरान अधिकारियों ने 5.25 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले भवन का भूमि पूजन मुख्यमंत्री के हाथों करवा दिया। लेकिन इस महत्वपूर्ण खबर में एक चौंकाने वाली बात सामने आई कि भवन के लिए आवश्यक जमीन पूरी तरह से उपलब्ध नहीं थी, जिससे निर्माण प्रक्रिया और योजना को लेकर सवाल उठने लगे।

    जनपद अध्यक्ष पृथ्वीराज सिंह ने मामले की शिकायत कलेक्टर और कमिश्नर से की। अध्यक्ष का आरोप था कि नए भवन निर्माण के लिए 2 एकड़ भूमि की जरूरत है, लेकिन जिस जमीन (सर्वे क्रमांक 984) पर तहसील और एसडीएम कार्यालय बन रहे हैं, वहां पर्याप्त जगह नहीं बची।

    इसके कारण अब नए जनपद भवन के निर्माण के लिए पांच किलोमीटर दूर अतिरिक्त जमीन तलाशने की स्थिति बन गई।

    इस मुद्दे पर SDM खाचरौद, नेहा साहू ने बयान दिया कि अधिकारियों को पर्याप्त जमीन उपलब्ध है और विवादित जानकारी गलत तरीके से फैल रही है। उन्होंने जनपद अध्यक्ष को ऑनलाइन आवेदन कर सही भूमि निर्धारित करने का विकल्प भी दिया।

    जानकारी के मुताबिक, जनपद भवन और तहसील कार्यालय दोनों के निर्माण का उद्देश्य स्थानीय प्रशासनिक कार्यों को आधुनिक और सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करना है।

    अधिकारियों की योजना के अनुसार नई इमारत में जनपद स्तर की सभी सुविधाएं मौजूद होंगी, लेकिन जमीन की सही व्यवस्था को लेकर अभी स्पष्टता जरूरी है।

    यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जनपद के विकास और सरकारी सेवाओं के सुचारू संचालन के लिए भवन निर्माण और भूमि का सही प्रबंधन अहम है। वहीं, अधिकारियों ने भी कहा है कि परियोजना की समीक्षा के दौरान सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है और जल्द ही निर्माण कार्य सुचारू रूप से शुरू किया जाएगा।

    इस घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों के बीच जमीन आवंटन और योजना कार्यान्वयन में पारदर्शिता की
    आवश्यकता को उजागर किया है। जनता की निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि प्रशासन इस समस्या का स्थायी और शीघ्र समाधान कैसे करेगा।

  • उज्जैन में टोल कर्मचारी पर चाकू से हमला, बिना टोल देने पर विवाद हुआ हिंसक

    उज्जैन में टोल कर्मचारी पर चाकू से हमला, बिना टोल देने पर विवाद हुआ हिंसक


    उज्जैन। नागदा रोड स्थित चकरावदा टोल प्लाजा पर 7 जनवरी 2025 की रात लगभग 2:10 बजे एक गंभीर घटना हुई, जिसमें टोल कर्मचारी अरुण पर चार युवकों ने चाकू से हमला किया। यह पूरी वारदात टोल प्लाजा में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है।

    सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि उज्जैन की ओर जा रही टाटा टिगोर कार में सवार चार युवक पहले टोल कर्मचारियों से बहस करने लगे। कुछ देर बाद चालक सीट पर बैठे एक युवक ने कार से उतरकर अरुण पर मारपीट शुरू कर दी। इसके बाद पीछे बैठे अन्य युवक भी उतरकर चाकू से हमला करने लगे और फिर अन्य कर्मचारियों पर भी हाथ साफ किया। हमलावर तुरंत अपनी कार में बैठकर फरार हो गए।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी टोल शुल्क दिए बिना आगे निकलना चाहते थे। जब कर्मचारियों ने उन्हें रोका तो युवक गुस्से में चिल्लाने लगे और विवाद बढ़ने पर चाकू से हमला कर दिया। हमले में अरुण की पीठ, गर्दन और सिर पर गंभीर चोटें आईं, जिन्हें तुरंत उज्जैन के चरक अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां सिर और गर्दन पर टांके लगाए गए।

    भैरवगढ़ थाना पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हमलावरों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है।

  • खंडवा के गांवों में फ्लोराइड से सैंकड़ों प्रभावित, बच्चों और युवाओं की सेहत पर संकट

    खंडवा के गांवों में फ्लोराइड से सैंकड़ों प्रभावित, बच्चों और युवाओं की सेहत पर संकट




    खंडवा।
    मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के किल्लौद ब्लॉक में पीने के पानी में फ्लोराइड की उच्च मात्रा के कारण इलाके के ग्रामीणों की सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है। एक दर्जन से ज्यादा गांवों में लोग मजबूरी में दूषित पानी पी रहे हैं, जिससे बच्चों और युवाओं में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उभरकर सामने आ रही हैं।

    ग्रामीणों का कहना है कि कई बच्चों के दांत पीले पड़ गए हैं, युवाओं के हाथ ठीक से नहीं मुड़ पा रहे, और जोड़ों में दर्द, कमजोरी और इंफेक्शन जैसी समस्याएं बढ़ गई हैं।

    पानी की जांच में कई गांवों में फ्लोराइड का स्तर 2.0 से 5.0 पीपीएम पाया गया, जबकि सुरक्षित सीमा 1.0 पीपीएम से कम मानी जाती है। अधिक फ्लोराइड के कारण क्षेत्र में डेंटल और स्केलेटल फ्लोरोसिस के लक्षण दिखाई देने लगे हैं।

    किल्लौद ब्लॉक के ग्राम गरबड़ी में हालात और भी चिंताजनक हैं। यहां नल-जल योजना के तहत जो पानी सप्लाई हो रहा है, उसमें भी फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। पूरे गांव में पीने का पानी केवल एक बोरवेल से सप्लाई होता है, जिससे लगभग 3 हजार लोग प्रभावित हैं।

    ग्रामवासी शिवराज सिंह सिसोदिया ने कहा, बच्चों के दांत पीले हो रहे हैं, युवाओं के हाथों में दिक्कत है और लीवर इंफेक्शन जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। हमें सुरक्षित पीने का पानी चाहिए। इंदौर जैसी घटना हमारे गांव में न हो।

    मामला गंभीर होने पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) की टीम ने प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। जिन हैंडपंप और ट्यूबवेल में फ्लोराइड का स्तर अधिक पाया गया, वहां लाल निशान लगाकर लोगों से पानी न पीने की चेतावनी दी गई।

    खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि PHE द्वारा दूषित जल स्रोतों की पहचान कर लाल निशान लगाए गए हैं। ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग, तालाबों और वाटर टैंकों का निर्माण कर लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए।

    ग्रामीणों का आरोप है कि सिर्फ चिह्नांकन किया गया, लेकिन न तो बोरवेल पूरी तरह बंद किए गए और न ही फिल्टर प्लांट या स्थायी शुद्ध पेयजल व्यवस्था शुरू की गई। लंबे समय से लोग फ्लोरोसिस और अन्य बीमारियों से जूझ रहे हैं, लेकिन अभी तक समाधान कागजों तक ही सीमित है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक फ्लोराइड युक्त पानी पीने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, बच्चों की दंत संरचना प्रभावित होती है और गंभीर मामलों में स्थायी अपंगता का खतरा भी बन सकता है।

    खंडवा के यह हालात ग्रामीणों और प्रशासन दोनों के लिए चेतावनी हैं कि जल सुरक्षा और स्वच्छ पेयजल व्यवस्था तुरंत सुनिश्चित करना आवश्यक है।

  • माओवादी संगठन को बड़ा झटका ‘पूना मार्गेम’ अभियान से प्रभावित होकर 26 नक्सलियों ने किया सरेंडर, 64 लाख था इनाम

    माओवादी संगठन को बड़ा झटका ‘पूना मार्गेम’ अभियान से प्रभावित होकर 26 नक्सलियों ने किया सरेंडर, 64 लाख था इनाम


    सुकमा । छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में चलाए जा रहे पूना मार्गेम पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान के तहत सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। इस अभियान के तहत 26 माओवादी जिनमें 07 महिला कैडर भी शामिल हैं ने आत्मसमर्पण किया है। इस आत्मसमर्पण को माओवादी नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि ये माओवादी लंबे समय से विभिन्न नक्सली गतिविधियों में सक्रिय रहे थे। इन माओवादियों पर कुल ₹64 लाख का इनाम घोषित था।

    आत्मसमर्पण करने वालों की पहचान और उनका योगदान

    आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी पीएलजीए बटालियन दक्षिण बस्तर माड़ डिवीजन और आंध्र-ओडिशा बॉर्डर क्षेत्र में सक्रिय रहे थे। इनमें से कुछ माओवादी सुकमा माड़ क्षेत्र और ओडिशा की सीमाओं पर हुई कई बड़ी नक्सली घटनाओं में शामिल रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में विभिन्न रैंक के लोग शामिल हैं जैसे CYPCM – 01,DVCM – 01, PPCM – 03,ACM – 03 पार्टी सदस्य 18 यह माओवादी आत्मसमर्पण अभियान न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन में बदलाव ला रहा है बल्कि यह माओवादी संगठन के खिलाफ सुरक्षा बलों की एक बड़ी रणनीतिक सफलता भी है।

    पूना मार्गेम अभियान का उद्देश्य

    पूना मार्गेम अभियान का मुख्य उद्देश्य भटके हुए युवाओं को हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति सम्मानजनक और समाज में स्वीकार्य जीवन की ओर लौटने का अवसर देना है। इस अभियान के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत विशेष लाभ मिलेंगे जिसमें आर्थिक सहायता सुरक्षा आवास शिक्षा और रोजगार जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

    एसपी की अपील
    सुकमा पुलिस अधीक्षक किरण चह्वाण ने शेष माओवादियों से अपील करते हुए कहा हिंसा का रास्ता छोड़ें शांति और विकास का मार्ग अपनाएं। सरकार आत्मसमर्पण करने वालों के पुनर्वास और सुरक्षित भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने नक्सलियों से अपील की कि वे सरकार द्वारा प्रदान किए जा रहे इस अवसर का लाभ उठाएं और समाज में अपना स्थान बनाएं।

    नक्सलवाद के खिलाफ एक और कदम

    पूना मार्गेम अभियान को नक्सलवाद के खिलाफ छत्तीसगढ़ सरकार का एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस अभियान ने न केवल सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की है बल्कि यह नक्सलियों के भीतर यह संदेश भी भेज रहा है कि अगर वे हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटते हैं तो उनके लिए बेहतर भविष्य की संभावना है।

  • महाकाल दर्शन जा रहे 3 दोस्तों की दर्दनाक मौत, तेलंगाना से उज्जैन-अयोध्या की यात्रा में हादसा

    महाकाल दर्शन जा रहे 3 दोस्तों की दर्दनाक मौत, तेलंगाना से उज्जैन-अयोध्या की यात्रा में हादसा


    उज्जैन । उज्जैन के देवास रोड स्थित चंदेसरा इलाके में मंगलवार तड़के एक भीषण सड़क हादसा हुआ। तेलंगाना से महाकाल मंदिर और अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए आ रहे युवकों की टेंपो ट्रक्स (क्रमांक KA36N0688) ट्राले से जा टकराई। हादसा सुबह करीब चार बजे हुआ, जिसमें तीन युवकों की मौत हो गई।

    तेलंगाना के फरीदपुर, मेहबूबनगर निवासी बी. नरसिम्हा (20 वर्ष) अपने सात दोस्तों के साथ यात्रा कर रहे थे। दुर्घटना के समय ट्राले में पाइप भरे हुए थे।

    ट्राले के चालक ने अचानक ब्रेक लगाने के कारण ट्रक्स ट्राले में जा घुसी।

    हादसे में घायल सभी को तुरंत चरक अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों ने नरसिम्हा पिता बालचंद्रणा (20 वर्ष) और जगन्नाथ पिता बेंकेंटेस (26 वर्ष) को मृत घोषित किया। गंभीर रूप से घायल शिवा कुमार पिता एलप्पा (25 वर्ष) को इंदौर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।

    अन्य घायल युवकों में के.बी. नरसिम्हा, रामप्पा, मलेन पिता नरसप्पा, अरतिद पिता लक्ष्मण (11 वर्ष), वाहन चालक बाल मंद्रप्पा, चिन्ना कुंधाकुंटा, जिया कुमार पिता एलव्या और काशष्या पिता चित्रा रामुनु शामिल हैं। सभी को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।

    एडिशनल एसपी गुरु प्रसाद पराशर ने बताया कि यह हादसा धार्मिक यात्रा पर जा रहे युवकों के लिए दर्दनाक साबित हुआ। पुलिस ने ट्राले को जब्त कर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

    यह हादसा न केवल परिवार और दोस्तों के लिए त्रासदी है, बल्कि सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों के पालन पर भी सवाल खड़ा करता है।

  • भोपाल में पेयजल व्यवस्था पर सवाल: कांग्रेस ने टंकियों और फिल्टर प्लांट का किया निरीक्षण, कई जगह लापरवाही उजागर

    भोपाल में पेयजल व्यवस्था पर सवाल: कांग्रेस ने टंकियों और फिल्टर प्लांट का किया निरीक्षण, कई जगह लापरवाही उजागर


    भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 17 लोगों की मौत के बाद मध्य प्रदेश में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी कड़ी में राजधानी भोपाल में भी कई इलाकों से गंदे पानी की सप्लाई की शिकायतें सामने आने लगी हैं। हालात को देखते हुए नगर निगम का अमला पानी के सैंपल लेने और वाल्व सुधारने में जुटा है। वहीं, मंगलवार को कांग्रेस नेताओं और पार्षदों ने खुद मैदान में उतरकर शहर की पानी की टंकियों और फिल्टर प्लांट का निरीक्षण किया, जहां कई चौंकाने वाली लापरवाहियां सामने आईं।
    कांग्रेस नेताओं ने सबसे पहले गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के बरखेड़ा पठानी इलाके में स्थित पानी की टंकी का निरीक्षण किया। कांग्रेस नेता रविंद्र साहू झूमरवाला टंकी पर चढ़े और पूरे निरीक्षण का वीडियो भी रिकॉर्ड किया। इस दौरान टंकी के अंदर और आसपास गंदगी पाई गई। झूमरवाला ने कहा कि इसी टंकी से रोजाना हजारों लोगों को पीने का पानी सप्लाई किया जाता है और यदि यहां साफ-सफाई नहीं होगी, तो लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

    झूमरवाला ने कहा कि दूषित पानी से संक्रमण और गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं।

    उन्होंने प्रशासन से तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो भोपाल में भी इंदौर जैसी दुखद घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि टंकी के आसपास गंदगी फैली हुई है और शराबियों का जमावड़ा भी रहता है, जो हालात को और खराब करता है। झूमरवाला ने कहा कि यह वक्त सिर्फ चेतावनी देने का नहीं, बल्कि तुरंत कार्रवाई करने का है। पानी जीवन है और इसके साथ किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

    इसके बाद नगर निगम के कांग्रेसी पार्षद श्यामला हिल्स स्थित वाटर फिल्टर प्लांट पहुंचे। इस निरीक्षण में नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी, पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान और मो. जहीर सहित अन्य कांग्रेसी मौजूद रहे।

    निरीक्षण के दौरान कांग्रेस पार्षदों ने आरोप लगाया कि श्यामला हिल्स के फिल्टर प्लांट का रॉ वॉटर सीधे बड़े तालाब में मिल रहा है, जबकि इसी बड़े तालाब से शहर के कई इलाकों में पीने का पानी सप्लाई किया जाता है।

    नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने कहा कि रॉ वॉटर का बड़े तालाब में मिलना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने दावा किया कि निरीक्षण के समय वाटर ट्रीटमेंट प्लांट चालू हालत में नहीं था और सिर्फ कागजी कार्रवाई ही दिखाई गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पानी का नियमित सैंपल लिया जाता है या नहीं, इसकी कोई रिपोर्ट मौके पर उपलब्ध नहीं कराई गई।

    जकी ने यह भी आरोप लगाया कि प्लांट में नियुक्त केमिस्ट के पास रसायन शास्त्र में ग्रेजुएशन की अनिवार्य योग्यता होनी चाहिए, लेकिन इस संबंध में भी संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि पानी की गुणवत्ता जांच में भी खामियां सामने आईं और फिल्ट्रेशन के लिए तय दिशा-निर्देशों का पालन होता नहीं दिखा।

    कांग्रेस नेताओं और पार्षदों ने नगर निगम और प्रशासन से मांग की कि भोपाल की सभी पानी की टंकियों और फिल्टर प्लांट की तुरंत जांच कराई जाए, नियमित सैंपलिंग सुनिश्चित की जाए और जहां भी लापरवाही पाई जाए, वहां सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने साफ कहा कि इंदौर की घटना से सबक लेते हुए राजधानी में किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

  • भोपाल में बेकाबू कार का कहर: नशे में धुत चालक ने कई वाहनों को मारी टक्कर, पेड़ से टकराकर रुकी कार

    भोपाल में बेकाबू कार का कहर: नशे में धुत चालक ने कई वाहनों को मारी टक्कर, पेड़ से टकराकर रुकी कार




    भोपाल।
     भोपाल के टीटी नगर थाना क्षेत्र में मंगलवार दोपहर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर कई वाहनों को टक्कर मारती हुई आखिरकार एक पेड़ से जा टकराई। यह घटना नानके पेट्रोल पंप के पास दोपहर करीब 3:45 बजे की है। हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने कार चालक को पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई करने के बाद पुलिस के हवाले कर दिया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार चालक नशे की हालत में था और लापरवाही से वाहन चला रहा था। पेड़ से टकराने से पहले कार ने दो से तीन अन्य वाहनों को टक्कर मारी, जिससे सड़क पर हड़कंप मच गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ।

    घटना की सूचना मिलते ही टीटी नगर पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में लिया। पुलिस ने भीड़ से चालक को छुड़ाकर हिरासत में ले लिया। आरोपी चालक की पहचान हरीश मालवीय के रूप में हुई है, जो एमपी 04 जेडए 2299 नंबर की कार चला रहा था।

    टीटी नगर थाना पुलिस के एसआई राघवेंद्र सिंह सिकरवार ने बताया कि आरोपी चालक अत्यधिक नशे में था। वह नानके पेट्रोल पंप से जवाहर चौक की ओर जा रहा था, इसी दौरान उसने नियंत्रण खो दिया और रास्ते में खड़े व चल रहे दो से तीन वाहनों को टक्कर मार दी।

    इसके बाद उसकी कार सड़क किनारे एक पेड़ से जा टकराई, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

    पुलिस के अनुसार, इस घटना में करीब 6 से 7 लोगों को मामूली चोटें आई हैं। सभी घायलों को प्राथमिक उपचार दिया गया है और किसी की हालत गंभीर नहीं है। अत्यधिक नशे में होने के कारण आरोपी चालक खुद के बारे में भी स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहा था।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कार की रफ्तार और ज्यादा होती, तो यह हादसा जानलेवा साबित हो सकता था। घटना के बाद कुछ समय के लिए इलाके में यातायात भी प्रभावित रहा।

    फिलहाल पुलिस ने आरोपी चालक को हिरासत में ले लिया है और उसके खिलाफ नशे में वाहन चलाने, लापरवाही से गाड़ी चलाने और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने जैसी धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस था या नहीं और वाहन की स्थिति क्या थी।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नशे की हालत में वाहन चलाना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि दूसरों की जान के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। इस घटना को लेकर इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है।

  • मेरे पिता का नाम नहीं मिटाया जा सकता, रितेश देशमुख ने रवींद्र चव्हाण की विवादित टिप्पणी पर किया करारा पलटवार

    मेरे पिता का नाम नहीं मिटाया जा सकता, रितेश देशमुख ने रवींद्र चव्हाण की विवादित टिप्पणी पर किया करारा पलटवार


    मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के महाराष्ट्र इकाई अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण की दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बारे में विवादित टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में गर्माहट बढ़ा दी है। चव्हाण ने सोमवार को कहा था कि विलासराव देशमुख की यादें उनके गृह नगर लातूर से मिटा दी जाएंगी। इस बयान के बाद कांग्रेस और एनसीपी समेत कई दलों ने कड़ी आपत्ति जताई।

    इस विवाद पर रितेश देशमुख, जो कि विलासराव देशमुख के बेटे और बॉलीवुड अभिनेता हैं, ने मंगलवार को भावुक लेकिन स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक वीडियो बयान जारी करते हुए कहा, मैं हाथ जोड़कर कहना चाहता हूं कि जो लोग जनता के लिए जीते हैं, उनके नाम लोगों के दिलों में गहरी छाप छोड़ जाते हैं। लिखे हुए को मिटाया जा सकता है, लेकिन दिलों पर पड़ी गहरी छाप को नहीं मिटाया जा सकता।

    रितेश का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और उनके समर्थन में लोग सामने आए।

    विलासराव देशमुख महाराष्ट्र के कद्दावर नेताओं में से एक थे। उन्होंने लातूर से कई बार विधायक का चुनाव जीता, दो बार राज्य के मुख्यमंत्री पद पर कार्य किया और केंद्र सरकार में भी मंत्री रहे। उनके योगदान को महाराष्ट्र के विकास और प्रशासनिक स्थिरता के लिए याद किया जाता है। ऐसे में उनके नाम और विरासत को लेकर की गई टिप्पणी ने स्वाभाविक रूप से लोगों की भावनाओं को आहत किया।

    कांग्रेस ने रवींद्र चव्हाण के बयान की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि यह सत्ता के अहंकार और दिवंगत नेता के योगदान को कमतर आंकने का प्रयास है। पार्टी ने कहा कि इस तरह के बयान राजनीतिक मर्यादाओं और देशमुख की विरासत के प्रति अज्ञानता को दर्शाते हैं।

    इसी विवाद में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) भी कूद पड़ी। पार्टी के वरिष्ठ नेता नवाब मलिक ने कहा कि दिवंगत नेताओं को लेकर नैतिक मर्यादा का पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा, “विलासराव देशमुख लातूर से कई बार चुनाव जीत चुके हैं, महाराष्ट्र के कई बार मुख्यमंत्री रहे और केंद्र में मंत्री भी। दिवंगत आत्माओं के बारे में बोलते समय मर्यादा बनाए रखना सभी के लिए जरूरी है।

    किसी के नाम या विरासत को मिटाने की बात करना उचित नहीं।

    इस पूरे विवाद ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। सोशल मीडिया पर लोग रितेश देशमुख के समर्थन में आए और दिवंगत नेता के योगदान की सराहना कर रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना यह दर्शाती है कि नेता चाहे चले जाएं, लेकिन उनकी विरासत और कार्य आज भी लोगों के दिलों में जिंदा रहती है।

    रितेश देशमुख का यह बयान केवल एक बेटे की भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की भावना का प्रतिनिधित्व करता है, जिन्होंने विलासराव देशमुख के नेतृत्व और कार्यों को नज़दीक से देखा और अनुभव किया। इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि राजनीति में बयान देते समय भाषा और मर्यादा का ध्यान रखना कितना आवश्यक है।

    फिलहाल, रवींद्र चव्हाण या बीजेपी की महाराष्ट्र इकाई की तरफ से कोई औपचारिक सफाई नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारे इस मामले पर लगातार चर्चा कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विवाद का राजनीतिक नतीजा क्या होता है और मर्यादा के विषय में कोई पहल की जाती है या नहीं।
  • Bihar: समस्तीपुर के पास डिरेल हुआ मालगाड़ी का टैंक वैगन…

    Bihar: समस्तीपुर के पास डिरेल हुआ मालगाड़ी का टैंक वैगन…


    समस्तीपुर।
    बिहार (Bihar) में मालगाड़ी (Freight Train) एक बार फिर बेपटरी हो गई। समस्तीपुर-खगड़िया रेलखंड (Samastipur-Khagaria railway section) पर रुसेराघाट रेलवे स्टेशन के समीप सोमवार की शाम मालगाड़ी का टैंक वैगन डिरेल (Tank Wagon Derailed) हो गया। घटना के बाद कुछ देर के लिए अफरातफरी मच गई, हालांकि किसी तरह की जान-माल की क्षति नहीं हुई। जानकारी के अनुसार मालगाड़ी समस्तीपुर से खगड़िया की ओर जा रही थी। घटना की सूचना मिलते ही रुसेराघाट स्टेशन के अधिकारियों ने समस्तीपुर रेल मंडल को अवगत कराया। इसके बाद समस्तीपुर से पहुंचे रेल अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।

    रेलवे अधिकारियों ने बताया कि टैंक वैगन के पहिये में तकनीकी खराबी आने के कारण यह हादसा हुआ। वैगन को दुरुस्त करने का कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया है, ताकि रेल परिचालन जल्द सामान्य किया जा सके। गड़बड़ी के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। मंडल के पीआरओ आरके सिंह ने बताया कि रुसेराघाट स्टेशन के समीप मालगाड़ी का टैंक वैगन डिरेल हुआ था।

    आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले बिहार के जमुई जिले के सिमुलतला में एक मालगाड़ी के आठ डिब्बों के पटरी से उतरने के कारण हावड़ा-पटना मार्ग पर रेल सेवाएं बाधित रहीं। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। यहां मालगाड़ी के आठ डिब्बों के पटरी से उतरने के कारण कई एक्सप्रेस और अन्य ट्रेन का समय पुनर्निर्धारित किया गया था। पूर्वी रेलवे के आसनसोल डिवीजन के अंतर्गत लाहाबोन और सिमुलतला रेलवे स्टेशन के बीच हुई दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।

  • उत्तराखंड 99 क्विंटल राशन खराब होने के मामले में सरकार ने गठित की जांच कमेटी कोर्ट ने 18 फरवरी तक रिपोर्ट देने का दिया आदेश

    उत्तराखंड 99 क्विंटल राशन खराब होने के मामले में सरकार ने गठित की जांच कमेटी कोर्ट ने 18 फरवरी तक रिपोर्ट देने का दिया आदेश


    नई दिल्ली । उत्तराखंड हाई कोर्ट ने ऊधम सिंह नगर में 2021 में 99 क्विंटल अनाज के खराब होने के मामले में राज्य सरकार को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने रिपोर्ट 18 फरवरी तक पेश करने का आदेश दिया है। याचिका में दोषियों से नुकसान की वसूली की मांग की गई थी। उत्तराखंड में राशन घोटाले पर हाई कोर्ट का हस्तक्षेप सरकार ने जांच कमेटी गठित की उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले में 2021 में सस्ता गल्ला वितरण के दौरान 99 क्विंटल से अधिक अनाज के खराब होने के मामले पर अब उच्च न्यायालय ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।
    इस मामले में राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित करने का निर्णय लिया है। इस मामले में हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सरकार से इस घोटाले की जांच के लिए समिति गठित करने को कहा था जिसके बाद सरकार ने यह कदम उठाया। अब राज्य सरकार को इस जांच कमेटी से रिपोर्ट 18 फरवरी से पहले पेश करने का निर्देश दिया गया है।

    99 क्विंटल राशन का हुआ था नुकसान

    2021 में ऊधम सिंह नगर जिले में सस्ता गल्ला योजना के तहत वितरित होने वाला 99 क्विंटल से अधिक अनाज रखरखाव के अभाव में खराब हो गया था। इस मामले में जिलाधिकारी ने दोषियों से नुकसान की वसूली का आदेश दिया था। हालांकि खाद्य आयुक्त ने इस आदेश को माफ कर दिया था जिसे लेकर हरिद्वार निवासी अभिजीत ने जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि यह घोटाला एक गंभीर मामला है और इसका सही तरीके से जांच होनी चाहिए। याचिका में कोर्ट से यह भी मांग की गई कि दोषियों से नुकसान की वसूली की जाए और कड़ी कार्रवाई की जाए।

    सरकार ने गठित की तीन सदस्यीय जांच कमेटी

    उत्तराखंड सरकार ने अब इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है जो इस मामले की जांच करेगी। कोर्ट ने राज्य सरकार से 18 फरवरी तक जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।राज्य सरकार की तरफ से यह रिपोर्ट दायर की गई कि इस जांच कमेटी में राज्य के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है जो मामले की पूरी जांच करेंगे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करेंगे।

    जनता की प्रतिक्रिया

    इस मामले को लेकर आम जनता में असंतोष देखा जा रहा है। लोग यह मानते हैं कि सस्ता गल्ला योजना के तहत जो अनाज गरीबों को मिलना था वह खराब हो गया और प्रशासन ने इस मामले में बहुत ही लापरवाही दिखाई। अब जनता का यह कहना है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और वसूली के आदेश को लागू किया जाए। उत्तराखंड सरकार को उम्मीद है कि जांच कमेटी की रिपोर्ट से इस घोटाले का सच सामने आएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।