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  • धमतरी में ऑटोमेटिक ई-चालान का आतंक: 'उटपटांग' कट रहे चालानों से जनता त्रस्त, अब कलेक्टर करेंगे राहत की पहल

    धमतरी में ऑटोमेटिक ई-चालान का आतंक: 'उटपटांग' कट रहे चालानों से जनता त्रस्त, अब कलेक्टर करेंगे राहत की पहल

    धमतरी । छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए लागू की गई हाईटेक ई-चालान प्रणाली अब आम जनता के लिए गले की फांस बन गई है। आरटीओ और यातायात विभाग द्वारा शुरू किए गए ऑटोमेटिक ऑनलाइन ई-चालान सिस्टम से वाहन चालक इस कदर परेशान हैं कि शिकायतों का अंबार लग गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब जिला प्रशासन ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करने के संकेत दिए हैं। लगातार मिल रही शिकायतों से खुद जिला कलेक्टर भी असहज महसूस कर रहे हैं और उन्होंने आम जनता को इस ‘तकनीकी प्रताड़ना’ से राहत दिलाने के लिए पहल शुरू कर दी है।

    तकनीक का अजीब व्यवहार और चालान की मार शहर के प्रमुख चौराहों पर लगाए गए हाईटेक कैमरे वाहन चालकों के लिए खौफ का कारण बन गए हैं। यह सिस्टम चलते वाहनों की नंबर प्लेट को स्कैन कर स्वतः ही चालान जनरेट कर देता है। वाहन चालकों का आरोप है कि यह प्रणाली कई बार बिना किसी ठोस यातायात उल्लंघन के ही भारी-भरकम चालान काट रही है। सोमवार को अपनी व्यथा सुनाते हुए कई चालकों ने बताया कि उन्हें ऐसे अपराधों के लिए उटपटांग चालान भेजे जा रहे हैं, जो उन्होंने किए ही नहीं। जब अचानक मोबाइल पर चालान का मैसेज पहुंचता है, तो वाहन चालक यह समझ ही नहीं पाते कि आखिर उनसे गलती कहाँ हुई।

    बढ़ता जन आक्रोश और प्रशासनिक सक्रियता बिना मानवीय हस्तक्षेप के कट रहे इन ऑनलाइन चालानों ने लोगों की जेब पर भारी बोझ डाल दिया है। कई मामलों में तो कैमरे की तकनीकी खराबी के कारण भी गलत चालान जारी होने की बात सामने आई है। रोजमर्रा के काम से घर से निकलने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह सिस्टम एक बड़ी मानसिक और आर्थिक परेशानी बन चुका है। कलेक्ट्रेट कार्यालय तक पहुँच रही शिकायतों की बाढ़ ने प्रशासन को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

    कलेक्टर की पहल से जगी उम्मीद मामले की गंभीरता और जनता की नाराजगी को देखते हुए कलेक्टर ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वे इस सिस्टम की समीक्षा करेंगे। शिकायतों के निवारण के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था बनाने और गलत तरीके से कटे चालानों को रद्द करने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है। कलेक्टर की इस सक्रियता से अब धमतरी की जनता को उम्मीद बंधी है कि उन्हें कैमरों की इस मनमानी से जल्द निजात मिलेगी और यातायात नियमों के नाम पर हो रही इस तकनीकी धांधली पर अंकुश लगेगा।

  • Bihar: RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक 25 जनवरी को, तेजस्वी को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

    Bihar: RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक 25 जनवरी को, तेजस्वी को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी


    पटना।
    राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) (Rashtriya Janata Dal – RJD) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक (National Executive Important meeting) 25 जनवरी को पटना (Patna) में बुलाई गई है. यह बैठक पटना के एक बड़े होटल में आयोजित होगी, जिसमें पार्टी के भविष्य और संगठनात्मक बदलावों को लेकर अहम फैसले लिए जा सकते हैं।

    आरजेडी सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर विचार हो सकता है. अगर यह फैसला होता है तो तेजस्वी यादव को पार्टी के सभी बड़े और अहम निर्णय लेने का अधिकार मिल जाएगा।


    लालू यादव की उम्र और स्वास्थ्य बना वजह

    बताया जा रहा है कि पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य को देखते हुए यह फैसला लिया जा सकता है, ताकि संगठन की जिम्मेदारी युवा नेतृत्व के हाथों में सौंपी जा सके।


    चुनावी हार के बाद संगठन में बदलाव की तैयारी

    विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तेजस्वी यादव और उनकी टीम के फैसलों पर सवाल उठे थे. इसी पृष्ठभूमि में उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव सामने आया है, ताकि संगठन को नए सिरे से मजबूत किया जा सके।


    तेज प्रताप की वापसी की संभावना होगी खत्म

    अगर तेजस्वी यादव राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनते हैं, तो पार्टी में तेज प्रताप यादव की वापसी की अटकलों पर भी विराम लग सकता है.


    सितंबर 2025 के बाद पहली बैठक

    सितंबर 2025 में आरजेडी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन के बाद यह पहली बैठक होगी. बैठक की अध्यक्षता खुद लालू प्रसाद यादव करेंगे।


    करीब 200 नेता होंगे शामिल

    इस बैठक में 85 स्थायी सदस्यों को बुलाया गया है. इसके अलावा विशेष आमंत्रित सदस्यों को मिलाकर करीब 200 नेता राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल होंगे. बिहार के अलावा दूसरे राज्यों से भी डेलीगेट्स के आने की संभावना है।

  • नेशनल सिक्योरिटी कानूनों पर पूर्व CJI की चेतावनी,इनोसेंस को गिल्ट न बनाएं प्री-ट्रायल जेल सजा नहीं हो सकती

    नेशनल सिक्योरिटी कानूनों पर पूर्व CJI की चेतावनी,इनोसेंस को गिल्ट न बनाएं प्री-ट्रायल जेल सजा नहीं हो सकती


    जयपुर। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) में पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने न्याय व्यवस्था, बेल सिस्टम और भ्रष्टाचार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर बात की। ‘आइडियाज ऑफ जस्टिस’ सत्र में उमर खालिद के मामले से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि वे अब जज के रूप में नहीं, बल्कि एक नागरिक के तौर पर बोल रहे हैं।

    पूर्व CJI ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को दोषसिद्धि से पहले जमानत मिलना अधिकार का विषय है, क्योंकि भारतीय कानून ‘इनोसेंस की पूर्वधारणा’ यानी निर्दोषता की धारणा पर आधारित है।उन्होंने कहा,प्री-ट्रायल बेल कभी सजा नहीं हो सकती।

    अगर कोई व्यक्ति 5–7 साल अंडरट्रायल रहकर अंत में बरी हो जाए, तो उसके खोए हुए समय की भरपाई कैसे होगी?

    बेल कब रोकी जा सकती है, सरल उदाहरण से समझाया
    चंद्रचूड़ ने बेल डिनाय करने की स्थितियों को आसान भाषा में समझाते हुए कहा कि बेल न देने के तीन क्लासिक एक्सेप्शन होते हैं
    आरोपी छूटने के बाद अपराध दोहरा सकता हो (जैसे सीरियल रेप या मर्डर केस)
    आरोपी भाग जाने की आशंका हो। आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता होउन्होंने स्पष्ट कहा,अगर ये तीनों परिस्थितियां मौजूद नहीं हैं, तो बेल नियम है, अपवाद नहीं।

    नेशनल सिक्योरिटी कानूनों पर चिंता
    पूर्व CJI ने कहा कि आज की बड़ी समस्या यह है कि नेशनल सिक्योरिटी से जुड़े कानून ‘निर्दोषता’ की जगह ‘दोष’ की धारणा को बैठा देते हैं।

    उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अदालतों को यह जांचना चाहिए कि, क्या वाकई नेशनल सिक्योरिटी का मामला बनता हैक्या डिटेंशन प्रोपोर्शनल है। वरना लोग सालों तक जेल में सड़ते रहते हैं।

    स्पीडी ट्रायल नहीं तो आर्टिकल 21 का उल्लंघन
    चंद्रचूड़ ने कहा कि भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली की सबसे बड़ी समस्या यह है कि ट्रायल समय पर पूरे नहीं होते।अगर ट्रायल रीजनेबल टाइम में खत्म नहीं होता, तो यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्पीडी ट्रायल के अधिकार का उल्लंघन है। भले ही कोई कानून बेल से मना करे, लेकिन संविधान सर्वोच्च है।

    उमर खालिद का जिक्र
    उन्होंने कहा कि उमर खालिद को करीब 5 साल जेल में हो चुके हैं।मैं अपनी कोर्ट की आलोचना करने में झिझक रहा हूं, क्योंकि कुछ समय पहले तक मैं इसी संस्थान का नेतृत्व कर रहा था।

    लेकिन सिद्धांत साफ हैंअगर ट्रायल आगे नहीं बढ़ सकता, तो बेल ही नियम है, शर्तें लगाई जा सकती हैं।

    जिला अदालतों में बेल न देने की प्रवृत्ति चिंताजनकपूर्व CJI ने कहा कि हाईकोर्ट और जिला अदालतों में बेल न देने की आदत बन गई है, जो चिंता का विषय है।उन्होंने बताया कि जिला अदालतें न्याय प्रणाली का पहला इंटरफेस हैं, लेकिन वहां जज बेल देने से डरते हैं।जजों को लगता है कि बेल दी तो उनकी नीयत पर सवाल उठेंगेखासतौर पर फाइनेंशियल फ्रॉड जैसे मामलों में। नतीजा यह है कि केस सीधे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहुंचते हैं। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट में हर साल करीब 70 हजार मामले आ रहे हैं।

    जजों पर नैतिक दबाव से डर का माहौल
    चंद्रचूड़ ने कहा कि यदि कोई जिला जज गलत बेल देता है, तो उसे कानूनी तरीके से रिवर्स किया जाना चाहिए, लेकिन मोरल प्रेशर नहीं बनाना चाहिए।

    हाईकोर्ट की छोटी-सी टिप्पणी भी किसी जज का करियर तबाह कर सकती है। प्रमोशन रुक जाता है। इससे ऐसा इकोसिस्टम बनता है, जहां जज डर के माहौल में काम करते हैं।

    करप्शन पर स्पष्ट संदेश
    पूर्व CJI ने अंत में कहा, मैं भ्रष्टाचार को जस्टिफाई नहीं कर रहा, लेकिन सच यह है कि जज भी उसी समाज से आते हैं, जहां करप्शन है।हालांकि जज से समाज से कहीं ऊंचे नैतिक मानदंडों की अपेक्षा की जाती है। करप्शन रोकने के लिए जवाबदेही तय करने वाला प्रभावी सिस्टम जरूरी है।गलत फैसले को तुरंत करप्ट कह देना आसान है, लेकिन सच को समझना ज्यादा जरूरी है।”

  • जयपुर में नगर निगम की सख्त कार्रवाई: किशनपोल जोन में पांच अवैध भवन और दुकानें सीज

    जयपुर में नगर निगम की सख्त कार्रवाई: किशनपोल जोन में पांच अवैध भवन और दुकानें सीज


    जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में नगर निगम ने शहर में बढ़ते अवैध निर्माणों के खिलाफ शनिवार को सख्त कार्रवाई की। किशनपोल जोन में नगर निगम की टीम ने बिना अनुमति और अवैध तरीके से निर्माण किए जा रहे पांच भवन और दुकानों को सीज कर दिया। इस कार्रवाई का नेतृत्व किशनपोल जोन के राजस्व अधिकारी सुनील कुमार ने किया, जबकि नगर निगम उपायुक्त विजेन्द्र सिंह ने इसे सीधे निर्देशित किया।

    नगर निगम के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि इन भवनों और दुकानों में निर्माण कार्य स्वीकृत नक्शे और उपविधियों के विपरीत चल रहा था। इससे पहले संबंधित भवन मालिकों और दुकानदारों को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन वे निर्माण रोकने के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे थे। ऐसे में निगम ने कठोर कदम उठाते हुए अवैध निर्माण को सीज करने का निर्णय लिया।

    इस दौरान निगम टीम ने पुलिस जाब्ता के साथ संयुक्त निरीक्षण किया और निर्माण स्थल पर अवैध गतिविधियों को तुरंत रोका। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई नगर निगम की शहरी नियोजन और सुरक्षा मानकों के पालन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नगर निगम का कहना है कि शहर में अवैध निर्माण की रोकथाम के लिए आगे भी नियमित निरीक्षण और सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

    विशेष रूप से नगर निगम ने चेतावनी दी है कि शहर में बिना अनुमति निर्माण करने वालों के खिलाफ भविष्य में और भी कड़े कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे ऐसे मामलों की सूचना तुरंत नगर निगम को दें ताकि समय रहते अवैध निर्माण रोका जा सके। किशनपोल जोन में यह कार्रवाई नगर निगम की शहर में अवैध निर्माण पर नजर रखने की नीति को दर्शाती है। निगम का लक्ष्य है कि जयपुर शहर का शहरी ढांचा नियामक ढांचे के अनुसार सुरक्षित और सुव्यवस्थित रहे।

  • अलवर में सड़क हादसा: कार की चपेट में आए युवक की मौत, दो घायल

    अलवर में सड़क हादसा: कार की चपेट में आए युवक की मौत, दो घायल


    अलवर। राजस्थान के अलवर जिले में भिवाड़ी मेगा हाईवे पर शुक्रवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जिसमें एक युवक की मौत हो गई और दो अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस सूत्रों के अनुसार यह घटना रात करीब 10 बजे छठी मील के पास हुई। भिवाड़ी की तरफ से आ रही एक कार विपरीत दिशा से आ रही कार से आमने-सामने टकरा गई। इस जबरदस्त टक्कर के कारण कार अनियंत्रित होकर पास की दुकान में जा घुसी।

    हादसे के समय दुकान के सामने खड़ा 25 वर्षीय पप्पू खान कार की चपेट में आ गया। पुलिस ने बताया कि पप्पू की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कार में सवार दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। सदर थाना पुलिस ने बताया कि दोनों कारों के ड्राइवरों और गाड़ियों की स्थिति का आकलन किया जा रहा है और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।

    शुरुआती जांच में तेज रफ्तार और सड़क पर अनियंत्रित गाड़ी चलाने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस ने कहा कि आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी और दुर्घटना की पूरी रिपोर्ट तैयार कर वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हाईवे अक्सर तेज रफ्तार गाड़ियों की वजह से हादसों का शिकार होता है। पुलिस ने इस मार्ग पर सुरक्षा उपायों को बढ़ाने और ड्राइवरों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इस हादसे ने इलाके में सुरक्षा और सड़क नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए हैं।
  • राजस्थान उच्च न्यायालय का बड़ा फैसला: लंबे समय तक निष्क्रिय रहे कर्मचारी अदालत से राहत नहीं मांग सकते

    राजस्थान उच्च न्यायालय का बड़ा फैसला: लंबे समय तक निष्क्रिय रहे कर्मचारी अदालत से राहत नहीं मांग सकते


    जयपुर । राजस्थान उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक अहम निर्णय में स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए लंबे समय तक कोई कदम नहीं उठाते, वे बाद में अदालत से राहत की उम्मीद नहीं कर सकते। न्यायाधीश आनंद शर्मा की एकल पीठ ने कहा कि अत्यधिक देरी और निष्क्रियता किसी भी दावे की वैधता को कमजोर कर देती है और इसे कानून भी स्वीकार नहीं करता। यह निर्णय उस याचिका पर आया जिसमें एक कर्मचारी ने करीब 30 वर्ष बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया। मामला 1994 का था, लेकिन कर्मचारी ने 2024 में जाकर याचिका दायर की।
    न्यायालय ने कहा कि इतने लंबे समय तक चुप बैठे रहने के बाद अब व्यक्ति को यह अधिकार नहीं रह जाता कि वह अदालत से तत्काल न्याय की मांग करे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून उन लोगों की सहायता करता है जो अपने अधिकारों के प्रति सजग और सक्रिय रहते हैं। न्यायालय ने तर्क दिया कि इतने वर्षों की देरी से न केवल दस्तावेज़ और साक्ष्य कमजोर हो जाते हैं, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर भी अनावश्यक बोझ पड़ता है। इस निर्णय से स्पष्ट संदेश गया कि कर्मचारी अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सक्रिय और समय पर कदम उठाना अनिवार्य है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह निर्णय सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों में कर्मचारियों के लिए मार्गदर्शक होगा। यह न केवल न्यायिक प्रणाली पर भरोसा बनाए रखने में मदद करेगा, बल्कि ऐसे मामलों में देरी से होने वाले विवादों को भी रोकेगा। अदालत ने यह भी कहा कि कर्मचारियों को अपने अधिकारों की जानकारी और उनके लिए उपलब्ध कानूनी विकल्पों के प्रति जागरूक रहना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कठिनाई न आए। इस मामले में न्यायालय ने यह संकेत भी दिया कि लंबे समय तक निष्क्रिय रहने वालों को न्याय मिलने की संभावना बेहद कम होती है और ऐसे कर्मचारियों को यह समझना होगा कि समय पर कार्रवाई करना ही उनके अधिकारों की रक्षा की कुंजी है। अदालत ने अपने फैसले में प्रशासनिक दक्षता और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के महत्व को भी रेखांकित किया।

  • धौलपुर में प्रिंसपल के तबादले के विरोध में छात्राओं का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी, प्रशासनिक अधिकारी पर नाराजगी

    धौलपुर में प्रिंसपल के तबादले के विरोध में छात्राओं का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी, प्रशासनिक अधिकारी पर नाराजगी


    भरतपुर। राजस्थान के धौलपुर जिले में बाड़ा हैदर शाह सरकारी स्कूल में प्रिंसपल नरेश जैन के तबादले के विरोध में छात्राओं का आंदोलन शुक्रवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। प्रिंसपल के झालावाड़ स्थानांतरण के फैसले के विरोध में छात्राओं ने स्कूल परिसर में प्रदर्शन किया और मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय तक अपनी आवाज पहुंचाई।

    इस दौरान छात्राओं के आंदोलन को शांत करने और समझाने के लिए प्रशासनिक अधिकारी अशोक उपाध्याय और मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी महेश शर्मा स्कूल पहुंचे। लेकिन छात्राओं ने तबादले रद्द करने की मांग पर अड़ी रहीं और अधिकारियों के समझाने के प्रयासों को खारिज कर दिया। वहीं, अधिकारियों के कथित हड़काने और धमकी देने के तरीकों से ग्रामीणों में भी आक्रोश फैल गया। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसने विवाद को और बढ़ा दिया।

    स्थानीय सूत्रों के अनुसार, छात्राओं का कहना है कि प्रिंसपल नरेश जैन उनके लिए मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत रहे हैं। उनकी अनुपस्थिति से स्कूल की पढ़ाई और अनुशासन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यही कारण है कि छात्राएं तबादले को लेकर किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करना चाह रही हैं। इस मामले में ग्रामीण भी छात्राओं के समर्थन में खड़े हैं। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग द्वारा छात्रों और स्थानीय समुदाय की भावनाओं को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि यह प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और निर्णय नियमों के तहत लिया गया है।

    विदित हो कि यह विरोध प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन तक जारी रहा और छात्राओं ने प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में भी शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने हालात पर नजर रखी है और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। इस घटना से यह स्पष्ट हो गया है कि स्कूल स्तर पर निर्णय लेने में छात्रों और स्थानीय समुदाय की भागीदारी और उनकी भावनाओं का सम्मान करना अत्यंत आवश्यक है।

  • भजनलाल ने राजस्थान में ग्राम पंचायतों में 23 जनवरी से विशेष शिविर लगाने के दिए निर्देश

    भजनलाल ने राजस्थान में ग्राम पंचायतों में 23 जनवरी से विशेष शिविर लगाने के दिए निर्देश


    जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट ग्राम 2026 से पूर्व ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। ये शिविर 23 जनवरी, बसंत पंचमी से शुरू होंगे और इसका उद्देश्य किसानों और पशुपालकों को सीधे लाभ पहुंचाना है। श्री शर्मा ने शुक्रवार रात मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में यह निर्देश जारी किया। उन्होंने कहा कि इस मीट में अधिक से अधिक कृषकों और पशुपालकों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए ये शिविर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को कहा कि शिविरों में विभागीय योजनाओं की जानकारी दी जाए और किसानों को उनके लाभों का सीधा लाभ दिलाया जाए।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि इस पहल के माध्यम से न केवल किसानों और पशुपालकों की योजनाओं से रूबरू होने की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि उन्हें नई तकनीकों और कृषि-उन्नयन के उपायों की जानकारी भी मिलेगी। ये शिविर ग्राम स्तर पर आयोजित किए जाएंगे, जिससे सभी हितग्राहियों तक योजनाओं की पहुँच सुनिश्चित हो सके। श्री शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिविरों का समुचित प्रचार-प्रसार किया जाए और सभी पंचायतों में उनका प्रभावी आयोजन सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि मीट से पहले होने वाले इन शिविरों में जुटाए गए अनुभव और सुझावों का मीट में उपयोग किया जाए, ताकि प्रदेश के कृषकों और पशुपालकों के हित में रणनीतियाँ और बेहतर बनाई जा सकें।

    गौरतलब है कि ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट-2026 मार्च में आयोजित होने वाला है और यह मीट कृषि और पशुपालन क्षेत्र में नवाचार, निवेश और किसानों के लाभ को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा। मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार, ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाले शिविरों से किसानों और पशुपालकों को धरातल पर विभागीय योजनाओं की जानकारी प्राप्त होगी और उन्हें व्यावहारिक सहायता भी मिलेगी। राजस्थान सरकार की इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर योजनाओं की पहुंच बढ़ाना और कृषकों को उनकी खेती और पशुपालन गतिविधियों में सुधार हेतु जानकारी प्रदान करना है। इससे प्रदेश में कृषि और पशुपालन क्षेत्र में उत्पादन और लाभ दोनों बढ़ाने में मदद मिलेगी।

  • राजधानी में कानून-व्यवस्था पर सवाल: CM आवास के नजदीक हत्या, सौरभ भारद्वाज का तीखा हमला

    राजधानी में कानून-व्यवस्था पर सवाल: CM आवास के नजदीक हत्या, सौरभ भारद्वाज का तीखा हमला

    नई दिल्ली। नई दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में पिछले सप्ताह एक सनसनीखेज वारदात सामने आई। आम आदमी पार्टी की सक्रिय कार्यकर्ता और स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष रचना यादव को उनके घर के पास ही दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने पहले उनसे नाम पूछा और पुष्टि होते ही गोलियां चला दीं। घटना के बाद आरोपी मोटरसाइकिल पर फरार हो गए। सीसीटीवी फुटेज में हमलावर साफ दिखाई दे रहे हैं, लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

    पति की हत्या के मामले में गवाह थीं रचना यादव

    रचना यादव की हत्या अकेली नहीं मानी जा सकती। वर्ष 2023 में उनके पति विजेंद्र यादव की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस मामले में रचना यादव प्रमुख प्रत्यक्षदर्शी गवाह थीं। पुलिस का अनुमान है कि उनकी हत्या का मकसद पुराने मामले को कमजोर करना और गवाहों में डर का माहौल पैदा करना हो सकता है। रचना यादव ने अपने पीछे दो बेटियों का परिवार छोड़ा है, जिन्हें इस घटना से गहरा आघात पहुँचा है।

    AAP नेताओं ने जताया दुख और पुलिस पर उठाए सवाल

    मंगलवार को शालीमार बाग में रचना यादव की शोक सभा आयोजित की गई। इसमें आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और विधायक संजीव झा शामिल हुए। दोनों नेताओं ने पीड़ित परिवार से मिलकर संवेदना व्यक्त की और रचना यादव को श्रद्धांजलि अर्पित की।

    सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हत्या के आरोपी सीसीटीवी में स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं, बावजूद इसके पुलिस की कार्रवाई बेहद धीमी है। उन्होंने इसे राजधानी की कानून-व्यवस्था के लिए शर्मनाक बताया। उन्होंने यह भी कहा कि वारदात स्थल मुख्यमंत्री के आवास से केवल 400 मीटर दूर है, फिर भी सुरक्षा व्यवस्था में कोई सुधार नहीं दिख रहा।

    न्याय दिलाने के लिए AAP का संघर्ष

    AAP ने साफ किया कि वह पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी। पार्टी ने दोहराया कि दोषियों को सख्त सजा दिलाने और परिवार को इंसाफ देने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। इस घटना ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और लोगों में भय का माहौल पैदा किया है।

    रचना यादव की हत्या न सिर्फ दिल्ली की कानून-व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह है, बल्कि यह पुराने हत्या मामलों में गवाहों की सुरक्षा की जरूरत को भी उजागर करती है। AAP नेताओं ने घटना को गंभीर बताते हुए दोषियों को तुरंत पकड़ने और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

  • हरियाणा में बंद होगा ‘हरिजन-गिरिजन’ शब्दों का इस्तेमाल, सरकार ने जारी किए सख्त आदेश

    हरियाणा में बंद होगा ‘हरिजन-गिरिजन’ शब्दों का इस्तेमाल, सरकार ने जारी किए सख्त आदेश


    नई दिल्ली। हरियाणा सरकार ने अब ‘हरिजन’ और ‘गिरिजन’ शब्दों के आधिकारिक उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। राज्य सरकार ने सभी विभागों, बोर्डों, निगमों, सार्वजनिक उपक्रमों, विश्वविद्यालयों और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी आधिकारिक पत्राचार, अभिलेख या संचार में इन शब्दों का प्रयोग बिल्कुल न करें। यह निर्णय संवैधानिक निर्देशों और भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है, क्योंकि संविधान में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए केवल संवैधानिक रूप से मान्य शब्दों का प्रयोग ही स्वीकार्य है।
    इतिहास की बात करें तो महात्मा गांधी ने अनुसूचित जातियों के लिए ‘हरिजन’ शब्द का प्रयोग किया था, जिसका अर्थ है ‘ईश्वर के लोग’। वहीं, बी.आर. आंबेडकर इसके विरोधी थे और वे इन्हें ‘दलित’ कहना पसंद करते थे। वर्तमान में यह शब्द कुछ विभागों और अधिकारियों द्वारा अब भी आधिकारिक संचार में उपयोग किया जा रहा था। इसी कारण राज्य सरकार ने सख्त निर्देश जारी कर सभी विभागों और अधिकारियों को केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों का पूर्ण पालन करने का आदेश दिया है।

    सरकारी आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि अब से सभी आधिकारिक दस्तावेज, पत्राचार और संचार में ‘हरिजन’ और ‘गिरिजन’ शब्दों का प्रयोग पूरी तरह निषिद्ध होगा।

    यह कदम केवल शब्दों पर प्रतिबंध नहीं है, बल्कि अनुसूचित जातियों और जनजातियों के प्रति सम्मान और सामाजिक समानता सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है।

    हरियाणा सरकार का यह निर्णय समाज में समानता, संवैधानिक अधिकार और सामाजिक न्याय की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। अब राज्य के सभी विभाग और अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि उनकी भाषा और अभिव्यक्ति संवैधानिक और सम्मानजनक हो, जिससे किसी भी समुदाय की भावनाओं को आघात न पहुंचे।

    सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि भारत का संविधान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को दर्शाने के लिए ‘हरिजन’ या ‘गिरिजन’ शब्दों का इस्तेमाल नहीं करता।

    राज्य सरकार ने भारत सरकार के निर्देशों का हवाला देते हुए यह कदम उठाया है। आदेश में यह भी कहा गया कि कुछ विभाग अभी तक इन दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर रहे थे, इसलिए सभी विभागों और अधिकारियों को केंद्र सरकार के आदेशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

    इस निर्णय से न केवल संवैधानिक सटीकता सुनिश्चित होगी, बल्कि समाज में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के प्रति सम्मान और समानता की भावना भी मजबूत होगी। अब से सरकारी और आधिकारिक संचार में केवल संवैधानिक रूप से मान्य शब्दों का ही प्रयोग किया जाएगा।

    हरियाणा सरकार का यह कदम समाज में सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसके माध्यम से राज्य प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि संवेदनशील शब्दावली का उपयोग न हो और सभी वर्गों के लिए सम्मानजनक भाषा अपनाई जाए।