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  • Maharashtra Politics Alert: BMC चुनाव से पहले माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे को लेकर सियासी उठापटक

    Maharashtra Politics Alert: BMC चुनाव से पहले माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे को लेकर सियासी उठापटक


    मुंबई/महाराष्ट्र की राजनीति में BMC चुनाव से पहले सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ है। खेल मंत्री माणिकराव कोकाटे को सदनिका घोटाला मामले में नासिक जिला न्यायालय द्वारा दो साल की सजा सुनाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। अदालत ने 16 नवंबर को सजा को बरकरार रखा था। इसके बाद पुलिस ने कोकाटे की गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू कर दी है और किसी भी समय उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी होने की संभावना बनी हुई है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर वारंट जारी हुआ, तो पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ऐसे में एनसीपी प्रमुख अजित पवार को यह निर्णय लेना होगा कि कोकाटे इस्तीफा दें या हाई कोर्ट की रोक तक अपने मंत्री पद को बरकरार रखें। इस राजनीतिक पेंच ने सत्तारूढ़ दल और पार्टी नेतृत्व दोनों के लिए रणनीति बदलने की चुनौती खड़ी कर दी है।

    अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस की अहम बैठक
    हालिया राजनीतिक चर्चाओं के बीच अजित पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से ‘वर्षा’ निवास पर मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, बैठक में माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे और विभाग के आवंटन पर विस्तृत चर्चा हुई। फडणवीस ने साफ कहा कि कोकाटे के इस्तीफे का निर्णय पार्टी नेतृत्व और अजित पवार पर निर्भर करेगा। बैठक में विभाग आवंटन पर भी बात हुई। फडणवीस ने अजित पवार से राय मांगी कि किसे विभाग सौंपा जाए। इससे पहले इसी तरह के हालात में धनंजय मुंडे को इस्तीफा देना पड़ा था।राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कोकाटे के इस्तीफे से एनसीपी की अंदरूनी राजनीति प्रभावित हो सकती है और आगामी BMC चुनाव में इसका असर भी देखने को मिल सकता है।

    हाई कोर्ट की रोक और मंत्री पद की स्थिति
    माणिकराव कोकाटे का मंत्री पद केवल हाई कोर्ट की रोक पर सुरक्षित रह सकता है। अगर कोर्ट रोक नहीं लगाती है, तो उनके इस्तीफे की संभावना लगभग तय मानी जा रही है। विभाग आवंटन के मामले में पार्टी नेतृत्व को नई रणनीति तैयार करनी होगी। विश्लेषकों का मानना है कि BMC चुनाव से पहले यह मामला पार्टी और सरकार दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। अदालत का फैसला और अजित पवार के अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी को इसी समय रणनीति बदलकर चुनावी समीकरणों को मजबूत करना होगा।

    मंत्रिपद और BMC चुनाव रणनीति पर असर
    कुल मिलाकर, माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे और विभाग आवंटन के फैसले से महाराष्ट्र में सियासी उठापटक बढ़ सकती है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़ी नई रणनीतियों और संभावित बदलावों पर चर्चाएं तेज हो सकती हैं।BMC चुनाव के नजदीक आने के कारण यह मामला सिर्फ एनसीपी के आंतरिक समीकरण तक सीमित नहीं रहेगा। इसके प्रभाव से सरकार की सियासी छवि, गठबंधन की स्थिति और चुनावी रणनीति भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए पार्टी के नेताओं और सियासी विश्लेषकों की निगाहें लगातार इस मामले पर बनी हुई हैं।

  • BMC चुनाव 2025: सीट बंटवारे पर आमने-सामने शिंदे गुट और BJP, आज की बैठक में तय होगी रणनीति

    BMC चुनाव 2025: सीट बंटवारे पर आमने-सामने शिंदे गुट और BJP, आज की बैठक में तय होगी रणनीति


    मुंबई /महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनावों का ऐलान होते ही सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। खासतौर पर मुंबई महानगरपालिका BMC चुनाव 2025 को लेकर राजनीतिक दल पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। देश की सबसे अमीर नगर निगम मानी जाने वाली बीएमसी पर कब्जे की जंग इस बार और भी दिलचस्प होने वाली है। इसी कड़ी में आज शिवसेना एकनाथ शिंदे गुट और भारतीय जनता पार्टी BJP के बीच सीट बंटवारे को लेकर पहली औपचारिक बैठक होने जा रही है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।मुंबई में होने वाली यह बैठक इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि यह तय करेगी कि महायुति के सहयोगी दल चुनावी मैदान में किस रणनीति के साथ उतरेंगे। बैठक में उप मुख्यमंत्री शिवसेना शिंदे गुट की ओर से मंत्री उदय सामंत, पूर्व सांसद राहुल शेवाळे और राज्यमंत्री योगेश कदम शामिल होंगे। वहीं बीजेपी की तरफ से मंत्री आशिष शेलार, मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम, विधायक प्रविण दरेकर और अतुल भातखळकर बैठक में मौजूद रहेंगे।

    सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना शिंदे गुट इस बातचीत की शुरुआत 50-50 सीट बंटवारे के फार्मूले के साथ करेगी। पार्टी का तर्क है कि 2012 और 2017 के बीएमसी चुनावों को मिलाकर शिवसेना के कुल 125 पार्षद रह चुके हैं, जबकि बीजेपी ने 2017 के चुनाव में अपने दम पर 82 सीटें जीती थीं। दूसरी ओर बीजेपी इस बार और आक्रामक रुख में है और उसने 100 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य तय किया है। यही वजह है कि दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर कड़ा मंथन तय माना जा रहा है। इस सियासी समीकरण के बीच यह भी साफ हो गया है कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे का गठबंधन आगामी चुनावों में एकजुट रहेगा, जिससे मुकाबला और ज्यादा त्रिकोणीय और रोचक बन सकता है।

    ठाणे में भी चुनावी हलचल तेज
    मुंबई के साथ-साथ ठाणे महानगरपालिका चुनाव को लेकर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे आज ठाणे में पार्टी पदाधिकारियों के साथ एक बड़ी बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक में सभी पुराने हेड्स, डिपार्टमेंट हेड्स, ब्रांच हेड्स, विधायक, सांसद और पूर्व कॉर्पोरेटर्स शामिल होंगे। इस बैठक को ठाणे चुनाव के लिए शुरुआती रोडमैप माना जा रहा है। यहां सीट बंटवारे, प्रचार रणनीति, बड़ी जनसभाओं और इच्छुक उम्मीदवारों को लेकर अहम दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। चूंकि ठाणे में भी बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा जाना है, इसलिए दोनों दलों के बीच तालमेल और रणनीति पर विशेष जोर रहेगा। यह बैठक आज शाम ठाणे के टिप टॉप प्लाजा में आयोजित की गई है।

    कांग्रेस और अन्य दल भी सक्रिय
    महायुति की बैठकों के बाद अब कांग्रेस ने भी महानगरपालिका चुनावों को लेकर कमर कस ली है। नगर निगम क्षेत्रों के जिला कांग्रेस अध्यक्षों और विधानसभा प्रभारियों की बैठक आज 16 दिसंबर को दोपहर 1 बजे प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की अध्यक्षता में होगी। इस बैठक में संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति पर चर्चा की जाएगी।

    वहीं बीजेपी ने भी बीएमसी चुनाव के लिए अपने घटक दलों के साथ बैठकों का सिलसिला शुरू कर दिया है। पार्टी आज आरपीआई आठवले गुट और शिवसेना के साथ अलग-अलग बैठकें करेगी। ये सभी बैठकें दादर स्थित वसंत स्मृति कार्यालय में होंगी, जहां से महायुति की चुनावी दिशा और दशा तय होने की उम्मीद है।कुल मिलाकर, बीएमसी और ठाणे चुनावों को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल अपने चरम पर है। आज होने वाली बैठकें यह तय करेंगी कि आने वाले दिनों में सियासी समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।

  • पंजाब सरकार का बड़ा फैसला: अमृतसर, आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो बने ‘पवित्र शहर’, शराब-मांस पर लगेगी सख्त रोक

    पंजाब सरकार का बड़ा फैसला: अमृतसर, आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो बने ‘पवित्र शहर’, शराब-मांस पर लगेगी सख्त रोक


    चंडीगढ़/पंजाब सरकार ने राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने अमृतसर की वॉल्ड सिटी श्री आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो श्री दमदमा साहिबको आधिकारिक रूप सेपवित्र शहर घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद इन तीनों धार्मिक नगरीयों में शराब तंबाकू नशीले पदार्थों और मांस की बिक्री व उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाएगा। इस संबंध में पंजाब सरकार की ओर से एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है जिसे राज्यपाल की मंजूरी प्राप्त हो चुकी है। अधिसूचना के मुताबिक यह फैसला इन शहरों के धार्मिक महत्व आस्था और पवित्रता को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

    पंजाब सरकार के गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक शेखर द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि राज्यपाल को यह घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि जिला अमृतसर का चारदीवारी क्षेत्र वॉल्ड सिटीजिला रूपनगर का श्री आनंदपुर साहिब नगर और जिला बठिंडा का तलवंडी साबो नगर अब पंजाब राज्य के पवित्र शहर घोषित किए जाते हैं। यह दर्जा मिलने के बाद इन इलाकों में कई तरह की गतिविधियों पर नियंत्रण लागू होगा।सरकार ने सबसे पहले आबकारी विभाग को निर्देश जारी किए हैं। विभाग को कहा गया है कि इन तीनों पवित्र शहरों की नगरपालिका सीमाओं के भीतर शराब और उससे जुड़े सभी उत्पादों की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के आदेश तुरंत जारी किए जाएं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों में मौजूद शराब के ठेकों को बंद करने या उन्हें शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने को लेकर भी कार्रवाई की जाएगी।

    इसके अलावा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को भी इस फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। विभाग से अनुरोध किया गया है कि इन पवित्र शहरों में सिगरेट तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री व उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए आवश्यक आदेश जारी किए जाएं। सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ धार्मिक वातावरण शुद्ध रहेगा बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।सरकार ने पशुपालन विभाग को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अमृतसर की वॉल्ड सिटी श्री आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो की नगरपालिका सीमाओं के भीतर मांस और उससे जुड़े उत्पादों की बिक्री व उपयोग पर रोक लगाने के आदेश जारी किए जाएं। इस कदम को खास तौर पर धार्मिक भावनाओं के सम्मान और पवित्र स्थलों की गरिमा बनाए रखने से जोड़कर देखा जा रहा है।

    इस फैसले को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए स्थानीय सरकार विभाग को भी अधिसूचना भेजी गई है। साथ ही अमृतसर रूपनगर और बठिंडा के उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में इस निर्णय को जमीन पर उतारने के लिए जरूरी कदम उठाएं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही स्थानीय प्रशासन विस्तृत दिशा-निर्देश और नियमावली जारी करेगा।सरकार के इस फैसले को सिख धर्म के प्रमुख धार्मिक स्थलों की पवित्रता से जोड़कर देखा जा रहा है। अमृतसर सिख धर्म का सबसे बड़ा केंद्र है जहां श्री हरमंदिर साहिब स्थित है। वहीं श्री आनंदपुर साहिब सिख इतिहास में खालसा पंथ की स्थापना का साक्षी रहा है जबकि तलवंडी साबो जिसे श्री दमदमा साहिब भी कहा जाता है सिखों के पांच तख्तों में से एक है। पंजाब सरकार का कहना है कि इन ऐतिहासिक और धार्मिक शहरों की आध्यात्मिक गरिमा बनाए रखने और श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करने के लिए यह फैसला समय की जरूरत था।

  • भोग व्यवस्था पर संकट: वृंदावन बांके बिहारी मंदिर में पहली बार नहीं लगा बाल और शयन भोग टूटी सदियों पुरानी परंपरा

    भोग व्यवस्था पर संकट: वृंदावन बांके बिहारी मंदिर में पहली बार नहीं लगा बाल और शयन भोग टूटी सदियों पुरानी परंपरा


    मथुरा । वृंदावन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर में सोमवार को एक ऐसी घटना सामने आईजिसने न केवल मंदिर की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिएबल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को भी गहरी ठेस पहुंचाई। मंदिर के इतिहास में यह पहली बार हुआजब ठाकुर श्री बांके बिहारी जी को बाल भोग और शयन भोग अर्पित नहीं किया जा सका। यह स्थिति हलवाई को समय पर वेतन न मिलने के कारण उत्पन्न हुईजिसके चलते भोग का निर्माण ही नहीं हो पाया।
    श्री बांके बिहारी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहींबल्कि सनातन परंपराओं और भक्ति भावना का जीवंत केंद्र है। यहां प्रतिदिन देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु ठाकुर जी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार ठाकुर जी को दिन में चार बार भोग अर्पित किया जाता है। इसमें सुबह का बाल भोगदोपहर का राजभोगशाम का उत्थापन भोग और रात्रि का शयन भोग शामिल है। लेकिन सोमवार को सुबह और रात के दो प्रमुख भोग न लग पाने से यह परंपरा पहली बार टूटी।
    भोग न लगने के बावजूद मंदिर के पट खुले रहे और ठाकुर जी ने भक्तों को दर्शन दिए। यह दृश्य कई श्रद्धालुओं को भावुक कर गया। भक्तों का कहना था कि ठाकुर जी के दर्शन तो हुएलेकिन बिना भोग के सेवा अधूरी प्रतीत हुई। कई श्रद्धालुओं ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया। मामले की जड़ में भुगतान की समस्या सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मंदिर की व्यवस्थाओं के संचालन के लिए गठित हाई पावर कमेटी के अंतर्गत भोग एवं प्रसाद निर्माण की जिम्मेदारी तय की गई है। ठाकुर जी के लिए भोग तैयार करने वाले हलवाई को प्रतिमाह लगभग 80 हजार रुपये वेतन दिया जाता है। जानकारी के अनुसारपिछले कुछ महीनों से इस भुगतान में देरी हो रही थी। अंततः हलवाई ने वेतन न मिलने के कारण भोग बनाने से इनकार कर दियाजिससे यह अभूतपूर्व स्थिति उत्पन्न हुई।
    इस घटना के बाद मंदिर के गोस्वामियों में भारी आक्रोश देखने को मिला। गोस्वामियों का कहना है कि ठाकुर जी की सेवा सर्वोपरि है और उसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही अक्षम्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अव्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण मंदिर की गरिमा और परंपराओं को नुकसान पहुंचा है। गोस्वामियों ने मांग की है कि भविष्य में इस तरह की चूक न होइसके लिए ठोस और स्थायी व्यवस्था की जाए।
    हाई पावर कमेटी की ओर से भी इस मामले पर प्रतिक्रिया सामने आई है। कमेटी के सदस्य दिनेश गोस्वामी ने बताया कि जैसे ही उन्हें घटना की जानकारी मिलीतुरंत संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति से बातचीत की गई। हलवाई के लंबित भुगतान को शीघ्र करने के निर्देश दे दिए गए हैं। साथ हीभविष्य में भोग व्यवस्था बाधित न होइसके लिए कड़े कदम उठाने का आश्वासन दिया गया है।
    यह मामला केवल एक प्रशासनिक चूक भर नहींबल्कि श्रद्धालुओं की भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। बांके बिहारी मंदिर में भोग को ठाकुर जी की सेवा का अभिन्न अंग माना जाता है। ऐसे में इस परंपरा का टूटना भक्तों के लिए अत्यंत पीड़ादायक है। अब सभी की नजरें मंदिर प्रशासन और हाई पावर कमेटी पर टिकी हैं कि वे इस घटना से सबक लेकर व्यवस्था को कैसे मजबूत करते हैंताकि भविष्य में आस्था और परंपरा पर दोबारा कोई संकट न आए।

  • MP में मौसम का बदला मिजाज: सीजन का पहला घना कोहरा, मुरैना-रीवा में विजिबिलिटी 50 मीटर; 14 जिलों में अलर्ट

    MP में मौसम का बदला मिजाज: सीजन का पहला घना कोहरा, मुरैना-रीवा में विजिबिलिटी 50 मीटर; 14 जिलों में अलर्ट


    मध्यप्रदेश में ठंड ने अब अपना असली असर दिखाना शुरू कर दिया है। सोमवार की सुबह प्रदेश के कई हिस्सों में इस सीजन का पहला घना कोहरा देखने को मिला। हालात सबसे ज्यादा खराब रीवा में रहे, जहां विजिबिलिटी घटकर महज 50 मीटर रह गई। मुरैना और रायसेन में भी यही स्थिति रही जिससे सुबह के समय सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए और ड्राइवरों को हेडलाइट जलाकर सफर करना पड़ा। राजधानी भोपाल में भी कोहरे का असर साफ दिखा। यहां दृश्यता 500 मीटर से 1 किलोमीटर के बीच दर्ज की गई। कई इलाकों में सुबह 11 बजे तक भी 2 से ढाई किलोमीटर दूर तकसाफ नजर नहीं आ रहा था। मौसम विभाग के अनुसार ठंड के इस सीजन में यह पहली सुबह रही, जब प्रदेश के इतने बड़े हिस्से में एक साथ घना कोहरा छाया।

    मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, रीवा के अलावा छतरपुर के खजुराहो में विजिबिलिटी 50 से 200 मीटर रही। भोपाल, ग्वालियर, दतिया और सीधी में दृश्यता 500 से 1000 मीटर के बीच दर्ज की गई। वहीं इंदौर, नर्मदापुरम, सागर, रतलाम, दमोह और मंडला में 1 से 2 किलोमीटर तक विजिबिलिटी रही। अशोकनगर, पचमढ़ी, टीकमगढ़, विदिशा, शाजापुर, सीहोर और देवास में भी सुबह कोहरे की चादर छाई रही। कोहरे के साथ-साथ तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। प्रदेश के पांच बड़े शहरों में भोपाल सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इंदौर में 6.6 डिग्री, ग्वालियर में 9.1 डिग्री, उज्जैन में 9.3 डिग्री और जबलपुर में 9.4 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रहा।

    प्रदेश में सबसे ठंडे स्थान पचमढ़ी और राजगढ़ रहे, जहां पारा 5.4 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। बैतूल में 5.8 डिग्री, उमरिया में 7 डिग्री, रीवा में 7.5 डिग्री, रायसेन में 7.6 डिग्री, मलाजखंड और नौगांव में 7.8 डिग्री, खजुराहो में 8.1 डिग्री और नरसिंहपुर में 8.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने प्रदेश के 14 जिलों में कोहरे को लेकर अलर्ट जारी किया है। हालांकि राहत की बात यह है कि अगले तीन दिनों तक शीतलहर चलने की संभावना कम है। लेकिन 17 दिसंबर से एक नया पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) सक्रिय होने जा रहा है जिसका असर मध्यप्रदेश में भी देखने को मिलेगा। इसके चलते ठंड फिर से तेज हो सकती है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय जेट स्ट्रीम भी सक्रिय है। यह जमीन से करीब 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर लगभग 176 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बह रही है। यही तेज ऊंची हवाएं उत्तर भारत और मध्य भारत में ठंड बढ़ाने का काम कर रही हैं। पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाओं के साथ जब जेट स्ट्रीम सक्रिय होती है, तो ठंड का असर दोगुना हो जाता है।इस बार नवंबर में ही सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली, जो 1931 के बाद सबसे लंबा दौर माना जा रहा है। 17 नवंबर की रात भोपाल में तापमान 5.2 डिग्री तक पहुंच गया था, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।

    मौसम विभाग का कहना है कि दिसंबर और जनवरी ठंड के लिहाज से सबसे अहम महीने होते हैं। आने वाले दिनों में ग्वालियर-चंबल, उज्जैन, भोपाल, सागर, रीवा और जबलपुर संभाग में कड़ाके की ठंड पड़ने की संभावना है। विशेषज्ञों के मुताबिक, दिसंबर और जनवरी में 20 से 22 दिन तक कोल्ड वेव चल सकती है। कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश में ठंड का असली दौर अब शुरू हो चुका है। कोहरा, गिरता तापमान और आने वाले पश्चिमी विक्षोभ के संकेत बताते हैं कि अगले कुछ हफ्तों में लोगों को ठिठुरन के लिए तैयार रहना होगा।

  • ग्वालियर व्यापार मेले में इस बार इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में भी दिखेगी 'चमक', जीएसटी कटौती से बढ़ेगी बिक्री की उम्मीद

    ग्वालियर व्यापार मेले में इस बार इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में भी दिखेगी 'चमक', जीएसटी कटौती से बढ़ेगी बिक्री की उम्मीद


    ग्वालियर । देश के सबसे बड़े और 120 साल से अधिक पुराने ग्वालियर व्यापार मेले में इस साल कारोबार के रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद है। इस बार मेला केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि इलेक्ट्रॉनिक सामानों सहित अन्य सेक्टरों में भी जबरदस्त बिक्री होने की संभावना है। यह मेला अपनी अनूठी परंपरा के लिए जाना जाता है जहाँ घर में उपयोग होने वाली छोटी सुई से लेकर मोटर कार तक हर चीज़ छूट के साथ उपलब्ध होती है। यही कारण है कि देश भर से खरीदार इस मेले का इंतज़ार करते हैं।

    जीएसटी लागू होने के बाद बदला परिदृश्य

    1 जुलाई 2017 को जब वस्तु एवं सेवा कर GST लागू हुआ उत्पादों पर 50% वाणिज्यकर में छूट मिलती थी। जीएसटी लागू होने के बाद सरकार ने केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर को रोड टैक्स में 50% की छूट देकर राहत दी। इस छूट के कारण ऑटोमोबाइल सेक्टर में तो शानदार कारोबार होता रहा 2024-25 मेले में ₹900 करोड़ से अधिक का कारोबार लेकिन इलेक्ट्रॉनिक और अन्य सेक्टरों को वह फायदा नहीं मिला।

    इस बार इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर क्यों चमकेगा

    इस वर्ष, स्थिति बदलने की उम्मीद है। सरकार ने 22 सितंबर से जीएसटी की दरों में कमी की है, जिसका असर कारोबार के सभी सेक्टरों पर दिख रहा है और चीजें सस्ती हुई हैं।दोहरी छूट का फायदा: ऑटोमोबाइल सेक्टर को तो पहले से ही रोड टैक्स में 50% की छूट मिल रही है।इलेक्ट्रॉनिक और अन्य सेक्टर: जीएसटी दरों में कमी आने से इस बार इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों पर भी अपने प्रोडक्ट्स पर तगड़ी छूट देने का दबाव और अवसर दोनों हैं। उपभोक्ताओं को लाभजीएसटी कम होने के कारण चीज़ें पहले ही सस्ती हुई हैं और अब कंपनियों की अतिरिक्त छूट से खरीदारी करने वालों को बड़ा फायदा होगा।

    पिछले 2024-25 के मेले में कुल ₹3327 करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ था। जानकारों का मानना है कि इस बार इलेक्ट्रॉनिक और अन्य सेक्टरों के चमकने से यह कारोबार का आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है। यह उम्मीद है कि इस साल का मेला ग्राहकों और व्यापारियों दोनों के लिए बेहद लाभदायक साबित होगा।

  • महाराष्ट्र: सिर से टोपी को लेकर हुआ झगड़ा, बीच-बचाव करने गई गर्भवती महिला के बच्चे की गर्भ में मौत

    महाराष्ट्र: सिर से टोपी को लेकर हुआ झगड़ा, बीच-बचाव करने गई गर्भवती महिला के बच्चे की गर्भ में मौत


    महाराष्ट्र। के कल्याण, मोहने गांव के लहूजीनगर इलाके से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक छोटी सी बात पर शुरू हुई पड़ोसियों की लड़ाई ने एक मासूम की जान ले ली। आरोप है कि लड़ाई रोकने गई एक गर्भवती महिला पर हमला कर उसके पेट में लात मारी गई, जिसके परिणामस्वरूप गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई।

    मामूली बहस बनी जानलेवा हमला
    जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत एक पड़ोसी द्वारा दूसरे के सिर से टोपी उतारने को कहने जैसी मामूली बात पर हुई। यह बहस देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। इसी दौरान, जब एक गर्भवती महिला ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो कथित तौर पर आरोपी ने उसके पेट में जोरदार लात मार दी। इस क्रूर हमले के कारण महिला गंभीर रूप से घायल हो गई और उसके गर्भस्थ शिशु की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई।

    पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
    इस हृदय विदारक घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। साथ ही, क्षेत्र में लगातार बढ़ रही ऐसी घटनाओं के कारण स्थानीय पुलिस की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    पीड़ित परिवार ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद पुलिस द्वारा तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस तरह की घटनाओं का बार-बार होना कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए घटनास्थल पर पहुँचकर जाँच शुरू कर दी है।

    अतिरिक्त खबर का अंश (संबंधित जानकारी)
    राजनीतिक बयान: इसी बीच, महाराष्ट्र में राजनीतिक गलियारों से एक खबर यह भी है, जहाँ शिवसेना नेता उदय सामंत ने उद्धव ठाकरे से सवाल किया है, “क्या आपमें कांग्रेस के उपमुख्यमंत्रियों से इस्तीफा मांगने की हिम्मत है?”

    सड़क हादसा: महाराष्ट्र के बीड में एक डीजल टैंकर से कार टकराने के बाद हाइवे पर धुएं का गुबार छा गया, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते बचा।

  • नवादा में मॉब लिंचिंग की दर्दनाक घटना: अतहर हुसैन की पत्नी ने सुनाई दिल दहला देने वाली कहानी

    नवादा में मॉब लिंचिंग की दर्दनाक घटना: अतहर हुसैन की पत्नी ने सुनाई दिल दहला देने वाली कहानी

    नवादा । बिहार के नवादा जिले के रोह थाना क्षेत्र में 5 दिसंबर की रात को एक दिल दहला देने वाली घटना घटी जब 35 वर्षीय मोहम्मद अतहर हुसैन को धर्म के नाम पर बेरहमी से मार डाला गया। यह घटना उस वक्त हुई जब अतहर डुमरी गांव से लौट रहे थे और भट्टा गांव के पास छह-सात नशे में धुत युवकों ने उन्हें रोक लिया। बाद में नाम और धर्म का पता चलने के बाद अतहर पर हमला किया गया। उनकी हत्या के बाद परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए इसे सिर्फ एक हत्या नहीं बल्कि एक सांप्रदायिक हत्या करार दिया है।

    घटना का विवरण

    अतहर हुसैन जब घर लौट रहे थे तब कुछ युवकों ने उन्हें घेर लिया। उन्हें साइकिल से उतारकर हाथ-पैर बांधकर एक कमरे में घसीटा गया। वहां पर अतहर के साथ बर्बरता की सारी सीमाएं पार की गईं। पैंट खोलकर उनके धर्म की पहचान की गई फिर करंट लगाया गया उंगलियां तोड़ी गईं कान काटे गए और शरीर पर गर्म लोहे की रॉड से चोटें दी गईं। इस पूरी घटना को सहते हुए भी अतहर ने पुलिस को अपनी जान बचाने के लिए मदद मांगी।

    इलाज के दौरान अतहर की मौत

    अतहर हुसैन को गंभीर अवस्था में नवादा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां 7 दिसंबर को उन्होंने कांपती आवाज में इस दिल दहला देने वाली घटना की पूरी कहानी सुनाई थी। हालांकि उनके शरीर पर लगी गहरी चोटों ने उनका साथ नहीं दिया और 12 दिसंबर को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस दौरान उन्होंने एबीपी संवाददाता को अस्पताल में अपनी आपबीती सुनाई और पूरी घटना के बारे में जानकारी दी।

    पोस्टमॉर्टम और पुलिस कार्रवाई

    अतहर की मौत के बाद उनका पोस्टमॉर्टम नालंदा सदर अस्पताल में फॉरेंसिक टीम और मजिस्ट्रेट की निगरानी में किया गया। इस घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों—सोनू कुमार रंजन कुमार सचिन कुमार और श्री कुमार को गिरफ्तार किया है। हालांकि अन्य आरोपी अभी फरार हैं।

    रोह थाना प्रभारी रंजन कुमार ने इस मामले में गिरफ्तारी की पुष्टि की है लेकिन परिजनों का कहना है कि उन्हें सिर्फ गिरफ्तारी से संतुष्टि नहीं है। वे चाहते हैं कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई हो और अतहर हुसैन के हत्यारों को सजा मिले। उनके बेटे इस्तेखार हुसैन ने प्रशासन से सिर्फ एक बात कही हमारे पिता के हत्यारों को सजा मिलनी चाहिए।”

    मॉब लिंचिंग पर बढ़ते सवाल

    इस दर्दनाक घटना ने बिहार और खासकर नवादा जिले में बढ़ती मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धर्म के नाम पर हिंसा और इस तरह के अपराधों का बढ़ता चलन समाज के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। यह घटना केवल एक हत्या नहीं है बल्कि यह हमारे समाज के उन गंभीर मुद्दों को उजागर करती है जिनमें धार्मिक सहिष्णुता की कमी और सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियां दिखाई देती हैं।

    अतहर के परिजनों का दर्द इस बात को साफ तौर पर दर्शाता है कि समाज और प्रशासन को सिर्फ अपराधियों को गिरफ्तार करने से अधिक कुछ करना होगा। समाज में धार्मिक सहिष्णुता और समानता की आवश्यकता को बल देने के साथ साथ हमें ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है ताकि भविष्य में कोई और अतहर हुसैन जैसे व्यक्ति की हत्या न हो।

    मॉब लिंचिंग की घटनाएं एक बहुत बड़ा सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दा बन चुकी हैं। अतहर हुसैन की दर्दनाक मौत ने यह सवाल खड़ा किया है कि हमें समाज में आपसी सम्मान और धार्मिक सहिष्णुता की आवश्यकता को समझना होगा। केवल गिरफ्तारी से इन घटनाओं का समाधान नहीं होगा बल्कि इसके लिए समाज के सभी हिस्सों को एकजुट होकर काम करना होगा।

  • सुकमा में एम्बुलेंस के अभाव में युवक की मौतशव खाट पर लेकर घर पहुंचे परिजन

    सुकमा में एम्बुलेंस के अभाव में युवक की मौतशव खाट पर लेकर घर पहुंचे परिजन


    सुकमा । सुकमा जिले के जगरगुंडा इलाके में एक दर्दनाक घटना ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां के निवासी 40 वर्षीय युवकबारसे रामेश्वरमकी तबीयत बिगड़ने के बाद एम्बुलेंस का इंतजार करते-करते उसकी मौत हो गई। सबसे अधिक आश्चर्य की बात यह है कि न सिर्फ युवक की मौत के समयबल्कि बाद में शव को ले जाने के लिए भी परिजनों को एम्बुलेंस नहीं मिली। परिणामस्वरूपपरिजनों को शव को खाट पर लेकर घर जाना पड़ा। इस घटना ने न केवल जगरगुंडा क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर कियाबल्कि पूरे सुकमा जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर स्थिति को भी सामने ला दिया है।

    क्या है पूरा मामला

    मृतक युवक बारसे रामेश्वरमजगरगुंडा इलाके का निवासी था। बताया जाता है कि युवक को हाथ-पैर में सूजन और पेट दर्द की शिकायत थी। पहले उसे जगरगुंडा के सरकारी अस्पताल में इलाज दिया गयालेकिन अचानक उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। परिजनों ने उसे अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस को कॉल कियालेकिन घंटों इंतजार करने के बाद भी कोई वाहन उपलब्ध नहीं हो पाया।बार-बार एम्बुलेंस के लिए संपर्क करने के बावजूदजब कोई राहत नहीं मिलीतो परिजनों ने खुद ही अस्पताल पहुंचने की कोशिश की। लेकिन तब तक युवक की हालत और अधिक बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया।

    स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

    यह घटना न केवल इस क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को उजागर करती हैबल्कि यह भी दिखाती है कि किस तरह से नदियोंपहाड़ियोंऔर अन्य दूरस्थ इलाकों में रह रहे लोगों के लिए मेडिकल सहायता तक पहुंच प्राप्त करना कितना कठिन हो सकता है। जगरगुंडा जैसे इलाकों मेंजहां तक पहुंचने के लिए भी बेहद कठिन रास्तों से गुजरना पड़ता हैएम्बुलेंस का समय पर उपलब्ध न होना गंभीर समस्या बन चुकी है।मृतक के परिजनों ने एम्बुलेंस का इंतजार कियालेकिन जब कोई मदद नहीं मिलीतो शव को खाट पर लादकर घर ले जाना पड़ा। यह घटना न केवल सुकमा जिले के चिकित्सा प्रशासन के लिए एक शर्मनाक स्थिति हैबल्कि यह स्वास्थ्य सेवाओं की अत्यधिक कमी को भी दर्शाती हैजो गंभीर स्वास्थ्य संकटों से निपटने के लिए बिल्कुल असमर्थ है।

    समाजसेवी और स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया

    स्थानीय समाजसेवियों और कुछ ग्रामीणों ने इस घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि सुकमा जिले में कई गांवों में एम्बुलेंस की कमी लंबे समय से बनी हुई हैऔर प्रशासन इसे नजरअंदाज करता आ रहा है। जब भी किसी को मेडिकल सहायता की जरूरत होती हैतो इन गांवों में लोग अक्सर चिकित्सा सेवा की अनुपलब्धता से जूझते हैं।कई बार एम्बुलेंस को बुलाने पर वह समय पर नहीं पहुंच पातींजिससे लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। इस घटना के बाद अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या सुकमा प्रशासन इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देगा या यह मुद्दा ऐसे ही उपेक्षित रहेगा।

    आगे की राह और सुधार की आवश्यकता

    यह घटना सुकमा और अन्य ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवा की स्थिति में सुधार की आवश्यकता को और अधिक स्पष्ट करती है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर गांव में एम्बुलेंस की उपलब्धता होऔर मेडिकल सहायता समय पर मिले। इसके अलावाएम्बुलेंस कर्मचारियों और चिकित्सा उपकरणों का उचित प्रबंध भी किया जाएताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

    साथ हीग्रामीण इलाकों के लिए विशेष स्वास्थ्य योजनाएं और सुविधाएं बनाई जाएं ताकि वहां रहने वाले लोग भी बेसिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठा सकें। सुकमा जिले के जगरगुंडा इलाके में हुई यह घटना न केवल इस क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की खामियों को उजागर करती हैबल्कि यह पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता को भी दिखाती है। जब तक प्रशासन और सरकार इस दिशा में कदम नहीं उठातीतब तक ऐसे हादसे होते रहेंगेजो न केवल जिंदगियां ले सकते हैंबल्कि लोगों के विश्वास को भी तोड़ सकते हैं।

  • नवादा मॉब लिंचिंग: 'मुस्लिम होने के कारण' युवक की पीट-पीटकर हत्या; दर्दनाक आपबीती

    नवादा मॉब लिंचिंग: 'मुस्लिम होने के कारण' युवक की पीट-पीटकर हत्या; दर्दनाक आपबीती


    नवादा। बिहार: नवादा ज़िले में 5 दिसंबर को मॉब लिंचिंग की एक भयावह घटना में गंभीर रूप से घायल हुए 40 वर्षीय मोहम्मद अतहर हुसैन की शुक्रवार देर रात इलाज के दौरान मौत हो गई। नालंदा निवासी अतहर, जो पिछले 20 सालों से घूम-घूमकर कपड़े बेचते थे, की मृत्यु से पहले की गई गवाही ने इस बर्बरतापूर्ण कृत्य की गहराई को उजागर किया है।

    मौत से पहले अतहर हुसैन का दर्दनाक बयान
    मृतक मोहम्मद अतहर हुसैन ने 7 दिसंबर को रिकॉर्ड कराए अपने बयान में बताया कि उन्हें सिर्फ इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वे मुस्लिम थे। उनकी आपबीती के कुछ अंश:

    धर्म की पहचान: “4-5 लोगों ने घेरकर मारपीट की और मुझे एक कमरे में ले गए। वहाँ पैंट उतारकर चेक किया गया कि मैं मुस्लिम हूँ या नहीं।”

    असहनीय यातना: धर्म की पुष्टि होने के बाद, हमलावरों ने उन्हें गर्म रॉड, स्टील के रॉड, लाठी-डंडे और ईंटों से बुरी तरह पीटा।

    अमानवीय कृत्य: “किसी ने प्लायर से मेरे कान काटे, उंगलियां तोड़ीं, और नाखून तक उखाड़ लिए। मुझ पर चढ़कर गला दबाया गया, जिससे मेरे मुँह से खून आने लगा।”

    प्राइवेट पार्ट पर हमला: उन्होंने बताया कि हमलावरों ने उनके प्राइवेट पार्ट की जाँच की, वहाँ रॉड डाला गया और पेट्रोल डाला गया। गर्म लोहे की रॉड से शरीर के कई हिस्सों को दागा गया, जिससे चमड़ी निकल गई।

    लूटपाट: रोह थाना क्षेत्र के भट्ठापर गाँव से लौटते समय, नशे में धुत 6-7 युवकों ने नाम पूछने के बाद उनसे 8,000 रुपये लूट लिए। बाद में हमलावरों की संख्या 15-20 तक हो गई थी।

    पुलिस कार्रवाई और एफआईआर
    अतहर हुसैन की मौत के बाद उनकी पत्नी शबनम परवीन ने 10 नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है, जिसमें अब हत्या की धाराएँ भी जोड़ी गई हैं।

    नामजद आरोपी: सत्यनारायण कुमार, मंटू यादव, सोनू कुमार, सतीश कुमार, सिकंदर यादव, रामस्वरूप यादव, रंजन कुमार, विपुल कुमार, सचिन कुमार, और सुगन यादव।

    गिरफ्तारी: रोह थाना पुलिस ने अब तक चार आरोपियों – सोनू कुमार, रंजन कुमार, और श्री कुमार सहित – को गिरफ्तार कर लिया है। शेष आरोपियों की तलाश जारी है।

    पोस्टमॉर्टम: मृतक का पोस्टमॉर्टम मजिस्ट्रेट और फोरेंसिक टीम की मौजूदगी में कराया गया।

    चोरी का आरोप: यह भी सामने आया है कि 5 दिसंबर को ही सिकंदर यादव ने मो. अतहर पर घर में घुसकर सोने के कंगन, मंगलसूत्र और अन्य सामान चोरी करने की शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के चलते डायल 112 अतहर की तलाश में थी, और पुलिस ने उन्हें देर रात कमरे से घायल अवस्था में बरामद कर अस्पताल पहुँचाया था।

    मृतक का परिचय
    मोहम्मद अतहर हुसैन मूल रूप से बिहारशरीफ के गगनदीवान के रहने वाले थे, लेकिन नवादा जिले के रोह थाना क्षेत्र के बरुई गाँव में अपने ससुराल में रहकर कपड़े फेरी का काम करते थे। उनकी मौत के बाद उनकी साइकिल और कपड़े का कोई पता नहीं चल पाया है।

    क्या आप इस मामले से संबंधित कोई और जानकारी जानना चाहेंगे, या मैं आपके लिए नवादा क्षेत्र की अन्य खबरें देख सकता हूँ?