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  • हिजाब पहनकर कार्यक्रम में पहुंचीं न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल

    हिजाब पहनकर कार्यक्रम में पहुंचीं न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल

    न्यूयॉर्क। न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल के एक इस्लामिक कल्चरल सेंटर के कार्यक्रम में हिजाब पहनकर शामिल होने के बाद अमेरिका में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। दक्षिणपंथी नेताओं और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने गवर्नर के इस कदम की आलोचना करते हुए उन पर मुस्लिम समुदाय के सामने झुकने और ‘थर्ड वर्ल्ड’ के आगे समर्पण करने जैसे आरोप लगाए हैं।

    यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों की 25वीं बरसी नजदीक है। आलोचकों ने इसी संदर्भ को लेकर होचुल के हिजाब पहनने पर सवाल उठाए हैं।

    इस्लामिक कल्चरल सेंटर के कार्यक्रम में पहुंची थीं होचुल

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैथी होचुल हाल ही में न्यूयॉर्क के इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस दौरान वह हिजाब पहने नजर आईं। कार्यक्रम में उन्होंने केंद्र के पदाधिकारियों और इमाम का आभार जताया।

    सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में होचुल एक व्यक्ति को धन्यवाद देते हुए उन्हें परिवार का हिस्सा महसूस कराने की बात कहती दिखाई देती हैं।

    इसके बाद दक्षिणपंथी सोशल मीडिया अकाउंट्स और कुछ राजनीतिक हस्तियों ने उनके पहनावे को लेकर सवाल खड़े किए।

    ‘न्यूयॉर्क भूल गया’ लिखकर शेयर की 9/11 की तस्वीर

    राइट-विंग इन्फ्लुएंसर मैट वैन स्वोल ने होचुल की आलोचना करते हुए 9/11 हमले की तस्वीर के साथ पोस्ट किया और लिखा, ‘न्यूयॉर्क भूल गया।’

    कंजर्वेटिव कमेंटेटर ग्राहम एलन ने भी वीडियो शेयर करते हुए 9/11 की 25वीं बरसी का जिक्र किया और गवर्नर की आलोचना की।

    वहीं फॉक्स न्यूज की होस्ट राइली गेन्स ने सवाल उठाया कि खुद को फेमिनिस्ट बताने वाली महिला द्वारा मुस्लिम पुरुषों को नाराज न करने के लिए हिजाब पहनना कथित तौर पर किस तरह की विडंबना है।

    न्यूयॉर्क यंग रिपब्लिकन क्लब ने भी साधा निशाना

    न्यूयॉर्क यंग रिपब्लिकन क्लब ने भी गवर्नर पर निशाना साधा। संगठन ने आरोप लगाया कि होचुल न्यूयॉर्क के इस्लामिक कल्चरल सेंटर में ‘थर्ड वर्ल्ड’ के आगे झुक रही हैं।

    संगठन ने यह दावा भी किया कि जिस मस्जिद में गवर्नर ने भाषण दिया, उसे लगभग पूरी तरह कुवैत से फंडिंग मिलती है। संगठन ने विदेशी देशों के अमेरिकी मामलों में कथित हस्तक्षेप को लेकर भी सवाल उठाए।

    हालांकि, ये आरोप संबंधित राजनीतिक समूहों और आलोचकों की ओर से लगाए गए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।

    पहले भी हिजाब को लेकर विवाद में घिर चुकी हैं होचुल

    कैथी होचुल को हिजाब पहनने को लेकर पहली बार आलोचना का सामना नहीं करना पड़ा है। हफपोस्ट के मुताबिक, पिछले साल भी एक मुस्लिम पुलिस अधिकारी के अंतिम संस्कार में हेडस्कार्फ पहनने पर उनकी आलोचना हुई थी।

    उस समय सीनेटर टेड क्रूज ने उनके पहनावे का मजाक उड़ाया था। इसके जवाब में होचुल ने कहा था कि वह दुखी परिवार की आस्था का सम्मान कर रही थीं और ऐसा करना किसी नेता तथा सभ्य व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

    कांग्रेस तक पहुंचा विवाद

    गवर्नर के ताजा कार्यक्रम को लेकर शुरू हुई बहस अमेरिकी कांग्रेस तक भी पहुंच गई। टेक्सास के रिपब्लिकन सांसद ब्रैंडन गिल ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी और होचुल के रुख पर सवाल उठाया।

    इसके अलावा पूर्व रियलिटी टीवी स्टार स्पेंसर प्रैट ने भी सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक अंदाज में गवर्नर की आलोचना की।

    गवर्नर कार्यालय ने तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी

    होचुल के खिलाफ सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चल रही आलोचनाओं को लेकर हफपोस्ट ने उनके कार्यालय से प्रतिक्रिया मांगी थी, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक तत्काल कोई जवाब नहीं मिला।

    पूरे विवाद का केंद्र यह सवाल है कि किसी धार्मिक कार्यक्रम में मेजबान समुदाय की धार्मिक संवेदनाओं का सम्मान करने के लिए किसी निर्वाचित नेता द्वारा पारंपरिक पोशाक पहनना सांस्कृतिक सम्मान है या राजनीतिक संदेश। समर्थक इसे धार्मिक सम्मान और सामुदायिक संवाद का हिस्सा मान सकते हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक तुष्टिकरण के तौर पर देख रहे हैं।

  • क्रिकेट की पिच के बाद टीवी पर ‘हिटमैन’ की धमाकेदार एंट्री! रोहित शर्मा लेकर आ रहे फैमिली रियलिटी शो, जानें कब से होगा आगाज

    क्रिकेट की पिच के बाद टीवी पर ‘हिटमैन’ की धमाकेदार एंट्री! रोहित शर्मा लेकर आ रहे फैमिली रियलिटी शो, जानें कब से होगा आगाज


    नई दिल्ली । क्रिकेट की दुनिया में अपने शानदार शॉट्स और कप्तानी के लिए पहचान बनाने वाले स्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा अब एक बिल्कुल नए अंदाज में दर्शकों के सामने आने वाले हैं। मैदान पर अपने बल्ले से गेंदबाजों की धुनाई करने वाले हिटमैन अब टीवी स्क्रीन पर अपनी नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। रोहित शर्मा जल्द ही एक फैमिली रियलिटी गेम शो के जरिए बतौर टीवी एंटरटेनर डेब्यू करेंगे। उनके इस नए शो का नाम फैमिली फुल हाउस विद रोहित शर्मा है और अब इसके प्रसारण की तारीख का भी ऐलान कर दिया गया है।

    रोहित शर्मा का नया शो 19 सितंबर 2026 से सोनी टीवी पर शुरू होगा। इस शो के जरिए क्रिकेट की पिच पर अपना दबदबा बनाने वाले रोहित पहली बार दर्शकों को टीवी होस्ट के रूप में नजर आएंगे। मेकर्स के मुताबिक यह एक ऐसा मनोरंजन शो होगा जिसे पूरा परिवार एक साथ बैठकर देख सकेगा। शो को अलग-अलग उम्र के दर्शकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और इसमें मनोरंजन के साथ गेम्स और रोहित शर्मा का खास अंदाज भी देखने को मिलेगा।

    रोहित शर्मा ने अपने इस टीवी शो का ऐलान कई महीने पहले ही कर दिया था लेकिन अब शो से जुड़ी पूरी जानकारी सामने आने के बाद फैंस का उत्साह बढ़ गया है। शो के प्रोमो में रोहित शर्मा के कुछ सबसे चर्चित और वायरल डायलॉग्स को भी शामिल किया गया है। खासतौर पर उनका मशहूर गार्डन वाला डायलॉग एक बार फिर चर्चा में है। प्रोमो में फैंस रोहित से बार-बार उनका वायरल डायलॉग बोलने की मांग करते नजर आते हैं।

    इस पर रोहित शर्मा अपने खास अंदाज में कहते हैं कि उन्होंने सिर्फ दो लाइनें क्या बोल दीं वे इतनी वायरल हो गईं और अगर अब पूरा शो सामने आ गया तो पता नहीं क्या होगा। रोहित की यही सहज और मजेदार प्रतिक्रिया प्रोमो को और भी दिलचस्प बना रही है। क्रिकेट मैदान पर अक्सर शांत नजर आने वाले रोहित शर्मा का यह अलग रूप उनके प्रशंसकों के लिए खास होने वाला है।

    रोहित शर्मा का गार्डन वाला डायलॉग भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए टेस्ट मैच के दौरान वायरल हुआ था। मैच के दौरान वह अपने फील्डर्स को तेजी से अपनी जगह बदलने और सक्रिय रहने के लिए कह रहे थे। इसी दौरान उनके मुंह से निकला यह डायलॉग सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसके बाद यह लाइन मीम्स और मजेदार वीडियो का हिस्सा बन गई और आज भी फैंस के बीच काफी लोकप्रिय है।

    अब इसी लोकप्रियता को रोहित शर्मा अपने नए टीवी सफर में भी साथ लेकर आ रहे हैं। फैमिली फुल हाउस विद रोहित शर्मा के प्रोमो ने साफ कर दिया है कि दर्शकों को शो में रोहित का क्रिकेटर वाला नहीं बल्कि एक मजेदार और मनोरंजक व्यक्तित्व देखने को मिलेगा। क्रिकेट में बड़े मैचों का दबाव संभालने वाले हिटमैन अब टीवी की दुनिया में दर्शकों का मनोरंजन करने की चुनौती के लिए तैयार हैं।

    रोहित शर्मा के टीवी डेब्यू को लेकर उनके फैंस काफी उत्साहित हैं। 19 सितंबर से शुरू होने वाला यह शो दर्शकों के लिए क्रिकेट और मनोरंजन की दुनिया को एक नए अंदाज में जोड़ने का काम कर सकता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि जिस तरह रोहित शर्मा ने क्रिकेट के मैदान पर अपनी अलग पहचान बनाई है क्या वह टीवी की दुनिया में भी हिट साबित होते हैं।

  • BJP युवा चेहरों पर दांव खेलने की तैयारी में…. 60 साल से कम उम्र के होंगे भावी सरकारों के मुखिया… !

    BJP युवा चेहरों पर दांव खेलने की तैयारी में…. 60 साल से कम उम्र के होंगे भावी सरकारों के मुखिया… !


    नई दिल्ली।
    भाजपा (BJP) नेतृत्व देश की नई पीढ़ी (New Generation) खासकर युवाओं की आकांक्षाओं को प्राथमिकता पर रखते हुए अपनी आगे बनने वाली सरकारों (Governments) का नेतृत्व युवाओं (Youth) को सौंपे जाने की तैयारी में है। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि उसकी भावी सरकारों के मुखिया साठ साल से कम उम्र के होंगे।

    हालांकि, सरकार में वरिष्ठ नेताओं को भी शामिल किया जाएगा। अगले साल भाजपा को सात राज्यों के चुनाव में जाना है, जिनमें पांच राज्यों में अभी उसके मुख्यमंत्री है। वहां पर यह बदलाव साफ दिखाई देगा। भाजपा के देशभर में अभी 17 मुख्यमंत्री हैं। इनमें पांच की ही उम्र साठ साल से अधिक है। सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू हैं, जिनकी उम्र 47 वर्ष है। सबसे ज्यादा उम्र के त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा (73 वर्ष) हैं। छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय, गुजरात के भूपेंद्र पटेल, मणिपुर के वाय खेमचंद सिंह साठ साल के ज्यादा के हैं।

    भाजपा नेतृत्व ने संगठन में नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान सौंपकर साफ कर दिया था, कि अब वह नई पीढ़ी को आगे लाने जा रही है। जेन जी के आंदोलन के बने माहौल में भाजपा अब अपने इस फैसले को राज्यों में भी लागू करेगी। हालांकि, राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए कुछ अपवाद रखे जा सकते हैं।


    गुजरात में हर्ष सांघवी नया चेहरा

    भाजपा की इस कवायद में आने वाले चुनाव वाले राज्यों में गुजरात में पार्टी के उप मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी भावी नेता के रूप में उभर रहे हैं। मणिपुर की स्थिति अलग है। वहां पर अलग तरह से फैसला लिया जाएगा। हिमाचल प्रदेश और पंजाब जहां भाजपा की सरकारें नहीं हैं, वहां पार्टी अघोषित रूप से युवा चेहरे को सामने रखेगी।


    पीएमम मोदी के जन्मदिन पर सेवा संकल्प अभियान
    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक “सेवा संकल्प अभियान” के तहत पूरे उत्तर प्रदेश में सेवा और जनकल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित करेगी। प्रदेश भाजपा मुख्यालय से सोमवार को जारी बयान में यह जानकारी दी गई।

    मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को समर्पित इस अभियान का उद्देश्य उनके सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना है।

    अभियान को लेकर प्रदेश स्तरीय कार्यशाला सोमवार को यहां इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित की गई। कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री द्वय केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक तथा प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह शामिल हुए।

  • कठुआ में पाकिस्तानी नंबर वाली रिंग पहने कबूतर मिला, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

    कठुआ में पाकिस्तानी नंबर वाली रिंग पहने कबूतर मिला, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट


    कठुआ।
    जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास एक कबूतर मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। हीरानगर के चन्न खत्रियां इलाके में मिले इस कबूतर के पैर में एक रिंग बंधी थी, जिस पर पाकिस्तानी टेलीकॉम कोड वाला मोबाइल नंबर दर्ज था। पुलिस ने कबूतर को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

    घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में निगरानी भी बढ़ा दी गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कबूतर पाकिस्तान की ओर से किसी संदिग्ध गतिविधि के तहत आया था या फिर यह किसी व्यक्ति का पालतू पक्षी है, जो रास्ता भटककर भारतीय सीमा में पहुंच गया।

    खेत में मिला कबूतर, पैर की रिंग ने बढ़ाया शक

    पुलिस के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे एक स्थानीय ग्रामीण अपने खेत में गया था। इसी दौरान उसकी नजर खेत में बैठे कबूतर पर पड़ी। शक होने पर ग्रामीण ने कबूतर को पकड़ लिया।

    कबूतर के पैर में बंधी रिंग पर 03001717652 मोबाइल नंबर लिखा हुआ था। नंबर पर पाकिस्तानी टेलीकॉम कोड होने की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीण ने तुरंत स्थानीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को सूचना दी।

    इसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और कबूतर को अपने कब्जे में ले लिया।

    जासूसी के लिए भेजा गया या भटककर आया?

    कबूतर मिलने के बाद जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उसके पैर में पाकिस्तानी मोबाइल नंबर वाली रिंग क्यों बंधी थी।

    अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या कबूतर को सीमा पार से किसी तरह की जासूसी या संदिग्ध गतिविधि के लिए इस्तेमाल किया गया है। साथ ही यह संभावना भी जांची जा रही है कि कबूतर किसी व्यक्ति का पालतू हो और उड़ते हुए भटककर भारतीय क्षेत्र में आ गया हो।

    फिलहाल रिंग पर दर्ज मोबाइल नंबर समेत अन्य तथ्यों की तकनीकी जांच की जा रही है।

    पुलिस ने कहा- अभी तक कुछ संदिग्ध नहीं मिला

    हीरानगर थाना प्रभारी विक्रम शर्मा के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में अभी तक ऐसा कुछ सामने नहीं आया है, जिससे कबूतर के किसी संदिग्ध गतिविधि में शामिल होने की पुष्टि हो। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियां मामले को गंभीरता से लेते हुए हर पहलू की जांच कर रही हैं।

    अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक कबूतर मिलने की वजह से सुरक्षा व्यवस्था को भी सतर्क रखा गया है।

    2020 में भी पकड़ा गया था पाकिस्तानी कबूतर

    कठुआ इलाके में इस तरह का मामला पहली बार सामने नहीं आया है। मई 2020 में भी अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास मनियारी गांव में एक कबूतर पकड़ा गया था।

    उस समय पाकिस्तान के एक व्यक्ति ने वीडियो जारी कर दावा किया था कि उसने ईद के मौके पर कबूतर उड़ाया था और वह भटककर भारतीय क्षेत्र में पहुंच गया। जांच के बाद उस कबूतर को छोड़ दिया गया था।

    जांच के बाद ही साफ होगी पूरी कहानी

    फिलहाल कठुआ में मिले कबूतर को लेकर सुरक्षा एजेंसियां रिंग पर लिखे मोबाइल नंबर और उसके भारत पहुंचने की परिस्थितियों की पड़ताल कर रही हैं। अभी तक जासूसी या किसी आतंकी गतिविधि से इसका संबंध साबित नहीं हुआ है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह महज भटका हुआ पालतू पक्षी था या इसके पीछे कोई और वजह थी।

  • नेपाल में जलप्रलय के बाद अब महामारी का खतरा, 962 मौतें; 4 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता

    नेपाल में जलप्रलय के बाद अब महामारी का खतरा, 962 मौतें; 4 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता


    काठमांडू।
    नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद तबाही का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। राहत और बचाव अभियान दूसरे सप्ताह में पहुंच चुका है, लेकिन अब प्रशासन के सामने एक नई और गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। बाढ़ में अब तक 960 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता हैं।

    आपदा के बाद कई इलाकों में शवों के सड़ने और दुर्गंध फैलने की खबरों ने महामारी फैलने का खतरा बढ़ा दिया है। मलबे और दलदल में दबे शवों को निकालना भी राहत टीमों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में रेस्क्यू ऑपरेशन के साथ अब प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता और संक्रमण रोकने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    ग्लेशियर टूटने से शुरू हुई तबाही

    यह प्राकृतिक आपदा पिछले बुधवार को चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटने के बाद शुरू हुई। अचानक बड़ी मात्रा में पानी चट्टानों और मलबे के साथ पहाड़ों से नीचे आया और रास्ते में पड़ने वाले गांवों और कस्बों को अपनी चपेट में ले लिया।

    तेज बहाव में कई इलाकों में घर और सड़कें बह गईं। बड़ी संख्या में लोग मलबे में दब गए या बाढ़ के पानी में बह गए। भारत में भी बाढ़ के पानी के साथ बहकर आई कम से कम 17 लाशें बरामद की जा चुकी हैं।

    शवों के सड़ने से बढ़ी चिंता

    आपदा के करीब एक सप्ताह बाद कई प्रभावित इलाकों में शवों के सड़ने से दुर्गंध फैलने लगी है। मलबे और कीचड़ में फंसे शवों को निकालने में लग रहा समय स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए नई चुनौती बन रहा है।

    प्रशासन के सामने अब दोहरी जिम्मेदारी है—एक तरफ मलबे में फंसे लोगों की तलाश और दूसरी तरफ प्रभावित इलाकों में सैनिटेशन व्यवस्था बनाए रखना और संभावित संक्रमण को फैलने से रोकना।

    सुरंगों में फंसे करीब 100 कर्मचारियों की तलाश

    नेपाल के रसुवा जिले में करीब 100 जलविद्युत परियोजना कर्मियों के कई सुरंगों के भीतर फंसे होने की आशंका है। बचाव दल मोटी मिट्टी और मलबे को हटाकर सुरंगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

    अब तक दो सुरंगों से तीन शव बरामद किए जा चुके हैं। एक भारतीय सेना अधिकारी के मुताबिक, बचाव टीमें लगातार भारी कीचड़ और मलबा हटाकर आगे बढ़ रही हैं। परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन राहतकर्मियों को अब भी कुछ लोगों के जिंदा मिलने की उम्मीद है।

    नेपाल ने राहत और बचाव अभियान में करीब 20,600 सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों को लगाया है। अब तक 3,100 से ज्यादा लोगों को प्रभावित इलाकों से सुरक्षित निकाला जा चुका है।

    शवगृहों में जगह कम, अज्ञात शवों को दफनाया जा रहा

    बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण नेपाल में शवगृहों की क्षमता भी कम पड़ने लगी है। अज्ञात शवों के डीएनए सैंपल लेने के बाद उन्हें दफनाया जा रहा है, ताकि भविष्य में पहचान होने पर उन्हें उनके परिवारों को सौंपा जा सके।

    लापता लोगों के परिजन सामुदायिक केंद्रों में पहुंचकर बरामद शवों की तस्वीरें देख रहे हैं। कई परिवार अब भी अपने रिश्तेदारों के मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

    1000 से ज्यादा फ्रीजर यूनिट की जरूरत

    नेपाल सरकार ने शवों को सुरक्षित रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की है। अधिकारियों के मुताबिक, शवों को संरक्षित रखने के लिए 1,000 से ज्यादा फ्रीजर यूनिट की जरूरत है।

    वहीं, लापता लोगों में 592 विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। इससे बचाव और पहचान की प्रक्रिया और जटिल हो गई है।

    रेस्क्यू के साथ अब स्वास्थ्य संकट से निपटने की चुनौती

    नेपाल में राहत अभियान जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे आपदा का दूसरा पहलू सामने आ रहा है। हजारों लोगों की तलाश अभी बाकी है, सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश जारी है और दूसरी ओर शवों के सड़ने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ रहा है।

    ऐसे में आने वाले दिनों में नेपाल के लिए सिर्फ लापता लोगों को ढूंढना ही चुनौती नहीं होगी, बल्कि स्वच्छता, शवों के सुरक्षित निस्तारण और संभावित महामारी को रोकना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।

  • हिमालय में बार-बार क्यों आती है तबाही? बाढ़, भूस्खलन और भूकंप का कनेक्शन समझिए

    हिमालय में बार-बार क्यों आती है तबाही? बाढ़, भूस्खलन और भूकंप का कनेक्शन समझिए


    काठमांडू।
    नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। खूबसूरत पहाड़ों और घाटियों के लिए पहचाना जाने वाला हिमालय दरअसल प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है। यहां बाढ़, भूस्खलन, बादल फटना, भूकंप और ग्लेशियर से जुड़ी घटनाएं समय-समय पर बड़े संकट में बदल जाती हैं।

    लेकिन आखिर हिमालय से सटे इलाकों में आपदाओं का खतरा इतना ज्यादा क्यों है? इसके पीछे भूगर्भीय बनावट, पहाड़ों की ढलान, भारी बारिश और तेजी से बदलती जलवायु जैसे कई कारण एक साथ काम करते हैं।

    भारतीय और यूरेशियन प्लेटों की टक्कर है बड़ी वजह

    हिमालय दुनिया की सबसे युवा प्रमुख पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। इसका निर्माण भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार टक्कर से हुआ है। खास बात यह है कि दोनों प्लेटों की गति आज भी जारी है।

    इन प्लेटों की लगातार हलचल पृथ्वी के भीतर भूगर्भीय तनाव पैदा करती है। इसी कारण हिमालयी क्षेत्र तकनीकी रूप से बेहद सक्रिय है और यहां भूकंप का खतरा लगातार बना रहता है।

    हिमालय से जुड़े भारत के कई हिस्से भी उच्च भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्रों में आते हैं, खासकर भूकंपीय क्षेत्र IV और V में शामिल इलाके।

    पहाड़ों की युवा संरचना क्यों बढ़ाती है खतरा?

    हिमालय की अपेक्षाकृत युवा भूगर्भीय संरचना का एक परिणाम यह भी है कि यहां कई जगह मिट्टी, चट्टान और तलछट अपेक्षाकृत अस्थिर हैं। तेज बारिश होने पर यही सामग्री ढलानों से नीचे खिसकने लगती है।

    इससे भूस्खलन की घटनाएं होती हैं। जब बड़ी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और मलबा अचानक नीचे आता है तो सड़कें, पुल और बस्तियां इसकी चपेट में आ सकती हैं।

    खड़ी ढलानें पानी को बना देती हैं खतरनाक

    हिमालय का भूभाग बेहद खड़ा है। यहां गहरी घाटियां और तीखी ढलानें हैं। भारी बारिश के दौरान पानी पहाड़ों पर ज्यादा देर ठहरने के बजाय तेजी से नीचे की ओर बहता है और संकरी नदी घाटियों में पहुंच जाता है।

    तेज बहाव अपने साथ चट्टान, मिट्टी, पेड़ और दूसरे मलबे को भी बहाकर ले जा सकता है। यही प्रक्रिया अचानक आने वाली बाढ़ को और ज्यादा विनाशकारी बना देती है।

    संकरी घाटियों में पानी का वेग बहुत तेजी से बढ़ सकता है। इसका सीधा असर नदी किनारे बने घरों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे पर पड़ता है।

    जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई मुश्किल

    हिमालय की प्राकृतिक संवेदनशीलता के ऊपर अब जलवायु परिवर्तन का अतिरिक्त दबाव भी पड़ रहा है। हिमालय को कई बार ‘तीसरा ध्रुव’ कहा जाता है क्योंकि ध्रुवीय क्षेत्रों के बाहर यहां बड़ी मात्रा में बर्फ और ग्लेशियर मौजूद हैं।

    बढ़ते तापमान के कारण कई ग्लेशियर पीछे हट रहे हैं। इसके साथ ही जमी हुई जमीन और पहाड़ी ढलानों की स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है।

    ग्लेशियर की झील फटी तो तबाही और तेज

    ग्लेशियरों के पिघलने से उनके आसपास बनी झीलों का आकार बढ़ सकता है। इन झीलों को रोकने वाली प्राकृतिक बर्फ, चट्टान या मलबे की दीवार अगर पानी के दबाव, भूस्खलन या किसी अन्य वजह से टूट जाए तो अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर बह सकता है।

    इसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहा जाता है।

    ऐसी बाढ़ कुछ ही समय में निचली घाटियों में बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकती है। खासकर उन इलाकों में खतरा ज्यादा होता है जहां बस्तियां और बुनियादी ढांचा नदियों के बेहद करीब बना हुआ है।

    बादल फटने से कुछ मिनटों में बदल सकते हैं हालात

    हिमालयी इलाकों में बादल फटना भी अचानक बड़ी आपदा का कारण बन सकता है। इसमें बेहद कम समय में एक छोटे क्षेत्र में बहुत ज्यादा बारिश होती है।

    पहाड़ी इलाकों में इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। अचानक हुई मूसलाधार बारिश एक साथ भूस्खलन, मलबा प्रवाह और फ्लैश फ्लड जैसी घटनाओं को जन्म दे सकती है।

    नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है और अतिरिक्त पानी का भार पहले से कमजोर पहाड़ी ढलानों को अस्थिर कर सकता है।

    हिमालय में आपदाएं अलग-अलग नहीं, एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं

    हिमालयी क्षेत्रों की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यहां एक प्राकृतिक घटना दूसरी आपदा को जन्म दे सकती है। भारी बारिश से ढलान कमजोर होता है, भूस्खलन नदी का रास्ता रोक सकता है और बाद में जमा पानी अचानक निकलकर बाढ़ ला सकता है। वहीं ग्लेशियरों के पिघलने से बनी झीलों के टूटने पर भी निचले इलाकों में अचानक जलप्रलय आ सकता है।

    यानी हिमालय में भूगर्भीय सक्रियता, खड़ी ढलान, अस्थिर चट्टानें, भारी बारिश, ग्लेशियरों में बदलाव और जलवायु परिवर्तन मिलकर आपदा का जोखिम बढ़ाते हैं।

    इसीलिए नेपाल, भारत, भूटान और हिमालय से जुड़े दूसरे क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन, शुरुआती चेतावनी प्रणाली, नदी घाटियों में सुरक्षित निर्माण और संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

  • दायरा के ट्रेलर लॉन्च पर करीना कपूर का चढ़ा पारा! पैप्स को लगाई फटकार, हुईं ट्रोल

    दायरा के ट्रेलर लॉन्च पर करीना कपूर का चढ़ा पारा! पैप्स को लगाई फटकार, हुईं ट्रोल


    नई दिल्ली । दायरा के ट्रेलर लॉन्च इवेंट पर बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर खान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में करीना पैपराजी के लगातार निर्देशों से परेशान और नाराज नजर आ रही हैं। तस्वीरें खिंचवाने के दौरान पैपराजी उन्हें बार बार अलग अलग दिशा में खड़े होने और कैमरे की ओर देखने के लिए कह रहे थे। कभी उन्हें दाईं ओर जाने के लिए कहा गया तो कभी बाईं ओर मुड़ने के लिए। लगातार बदलते निर्देशों से परेशान करीना ने आखिरकार पैपराजी को अपने अंदाज में फटकार लगा दी।

    वीडियो में करीना की परेशानी उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही है। वह पैपराजी को यह समझाने की कोशिश करती नजर आईं कि उन्हें बार बार इधर उधर जाने के लिए कहा जा रहा है जबकि उन्होंने हील्स पहन रखी हैं। करीना का यह रिएक्शन कैमरों में कैद हो गया और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई और कई सोशल मीडिया यूजर्स ने अभिनेत्री को ट्रोल करना शुरू कर दिया।

    कुछ लोगों ने करीना कपूर के इस व्यवहार की तुलना दिग्गज अभिनेत्री जया बच्चन से कर दी। जया बच्चन भी कई मौकों पर पैपराजी के रवैये पर नाराजगी जाहिर करती नजर आ चुकी हैं। ऐसे में करीना के वायरल वीडियो को देखकर यूजर्स ने दोनों अभिनेत्रियों के बीच तुलना शुरू कर दी। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने करीना के गुस्से को लेकर अलग अलग टिप्पणियां कीं। कुछ यूजर्स ने उन्हें जरूरत से ज्यादा महत्व दिए जाने पर सवाल उठाया जबकि कुछ लोगों ने उनके इस रवैये का मजाक भी उड़ाया।

    वायरल वीडियो के बाद करीना को लेकर कई तरह की टिप्पणियां सामने आईं। कुछ यूजर्स ने उनकी उम्र को लेकर भी टिप्पणी की जबकि कुछ लोगों ने हाल के दिनों में फैली उनकी प्रेग्नेंसी की अफवाहों का जिक्र करना शुरू कर दिया। हालांकि सोशल मीडिया पर होने वाली इन चर्चाओं के बीच करीना का यह वीडियो लगातार लोगों का ध्यान खींच रहा है।

    करीना कपूर जल्द ही मेघना गुलजार की फिल्म दायरा में बड़े पर्दे पर नजर आने वाली हैं। फिल्म में उनके साथ साउथ फिल्म इंडस्ट्री के लोकप्रिय अभिनेता पृथ्वीराज सुकुमारन भी महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई देंगे। फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के बाद इसकी कहानी और कलाकारों के किरदारों को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है। मुंबई में आयोजित ट्रेलर लॉन्च इवेंट से करीना और फिल्म की टीम की कई तस्वीरें और वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए।

    हाल ही में करीना कपूर को लेकर प्रेग्नेंसी की अफवाह भी तेजी से फैली थी। एक वीडियो में उन्हें जिम से बाहर निकलते हुए देखा गया था जिसके बाद कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने कयास लगाने शुरू कर दिए कि वह तीसरी बार मां बनने वाली हैं। इस चर्चा ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं लेकिन बाद में उनकी ओर से स्पष्ट किया गया कि वह प्रेग्नेंट नहीं हैं।

    अब दायरा के ट्रेलर लॉन्च से सामने आया यह नया वीडियो चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ करीना के प्रशंसक उनके इस रिएक्शन को लगातार निर्देशों से हुई परेशानी का परिणाम बता रहे हैं तो दूसरी ओर ट्रोलर्स इसे लेकर अभिनेत्री पर निशाना साध रहे हैं। कुल मिलाकर फिल्म दायरा के ट्रेलर लॉन्च से ज्यादा करीना कपूर का यह वायरल मोमेंट सोशल मीडिया पर चर्चा में बना हुआ है।

  • मंगलवार के दिन इन नियमों का रखें ध्यान, बजरंगबली की पूजा के साथ इन कामों से बनाएं दूरी

    मंगलवार के दिन इन नियमों का रखें ध्यान, बजरंगबली की पूजा के साथ इन कामों से बनाएं दूरी


    नई दिल्ली। मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन बजरंगबली का स्मरण और पूजा करने से भक्तों को साहस शक्ति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है। मंगलवार को कई लोग हनुमान मंदिर जाकर पूजा करते हैं और कुछ श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार व्रत भी रखते हैं। लेकिन पूजा पाठ के साथ इस दिन कुछ नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है। मान्यता है कि मंगलवार को व्यक्ति को अपने व्यवहार और खानपान से लेकर विचारों तक में संयम रखना चाहिए। धार्मिक परंपराओं में मंगलवार को सात्विकता और अनुशासन का दिन माना गया है।

    मंगलवार की शुरुआत सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और स्वच्छ कपड़े पहनने के साथ करना शुभ माना जाता है। इसके बाद घर के पूजा स्थान की सफाई करके भगवान हनुमान के सामने दीपक जलाया जा सकता है। पूजा के दौरान भगवान श्रीराम का स्मरण करना भी विशेष माना जाता है क्योंकि हनुमान जी को भगवान राम का परम भक्त माना गया है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार हनुमान चालीसा का पाठ कर सकते हैं और बजरंगबली से परिवार की सुख शांति और जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करने की प्रार्थना कर सकते हैं।

    मंगलवार के दिन क्रोध और विवाद से बचने की सलाह धार्मिक मान्यताओं में दी जाती है। माना जाता है कि इस दिन किसी के साथ अनावश्यक बहस करना या कटु शब्दों का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। व्यक्ति को अपने व्यवहार में विनम्रता बनाए रखने और दूसरों के प्रति सम्मान की भावना रखने का प्रयास करना चाहिए। हनुमान जी को साहस और सेवा का प्रतीक माना जाता है इसलिए इस दिन जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी अच्छा माना जाता है।

    खानपान को लेकर भी मंगलवार के दिन कई परिवारों में विशेष परंपराएं होती हैं। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी मान्यता के अनुसार फलाहार या सात्विक भोजन करते हैं। कुछ लोग इस दिन मांसाहारी भोजन और नशे से दूरी रखते हैं। हालांकि खानपान से जुड़े नियम अलग अलग धार्मिक परंपराओं में अलग हो सकते हैं इसलिए इन्हें अपनी आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार अपनाना उचित है। मंगलवार को व्रत रखने वालों को अपनी क्षमता का भी ध्यान रखना चाहिए और स्वास्थ्य से जुड़ी परिस्थितियों में कठोर उपवास से बचना चाहिए।

    मंगलवार को नकारात्मक सोच से दूर रहने और मन को शांत रखने पर भी जोर दिया जाता है। सुबह या शाम के समय हनुमान जी का ध्यान करने से मन को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। पूजा के दौरान लाल फूल सिंदूर और चमेली के तेल जैसी सामग्री अपनी श्रद्धा के अनुसार अर्पित की जा सकती है। इसके बाद प्रसाद चढ़ाकर परिवार के लोगों में बांटना शुभ माना जाता है।

    सबसे जरूरी बात यह है कि मंगलवार के नियम केवल बाहरी आचरण तक सीमित नहीं माने जाते। भगवान हनुमान की भक्ति के साथ व्यक्ति को अपने कर्मों में ईमानदारी सेवा और संयम को भी स्थान देना चाहिए। किसी का अपमान करना झूठ बोलना या जानबूझकर किसी को परेशान करना किसी भी पूजा की भावना के विपरीत माना जाता है। इसलिए मंगलवार को बजरंगबली का स्मरण करते हुए अच्छे विचारों के साथ दिन बिताने और जरूरतमंदों की सहायता करने का प्रयास करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में आस्था रखने वाले लोगों के लिए मंगलवार के ये नियम पूजा को अधिक अनुशासित और अर्थपूर्ण बनाने का माध्यम हो सकते हैं।

  • मंगलवार बना देगा मंगलमय अगर सही विधि से करेंगे पूजा, हनुमान जी की कृपा पाने के लिए जरूर करें ये काम

    मंगलवार बना देगा मंगलमय अगर सही विधि से करेंगे पूजा, हनुमान जी की कृपा पाने के लिए जरूर करें ये काम


    नई दिल्ली। मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित माना जाता है और इस दिन श्रद्धा भाव से बजरंगबली की पूजा करने की विशेष मान्यता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार को हनुमान जी का स्मरण करने और विधि विधान से पूजा करने से भक्तों को साहस आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती प्राप्त होती है। जीवन में आने वाली परेशानियों और चुनौतियों का सामना करने के लिए हनुमान जी की आराधना को बेहद प्रभावी माना जाता है। यही वजह है कि मंगलवार के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर जाकर हनुमान जी के दर्शन करते हैं और घर पर भी उनकी पूजा अर्चना करते हैं।

    मंगलवार की पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और स्वच्छ वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। इसके बाद पूजा स्थल की साफ सफाई करके हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाना चाहिए। पूजा की शुरुआत भगवान श्रीराम के स्मरण से करना भी शुभ माना जाता है क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार हनुमान जी भगवान राम के परम भक्त हैं। इसके बाद श्रद्धा के साथ हनुमान जी का ध्यान करके उन्हें सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित किया जा सकता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार लाल फूल और अन्य पूजा सामग्री भी अर्पित कर सकते हैं।

    पूजा के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। इसके साथ ही बजरंग बाण या हनुमान जी के मंत्रों का जाप भी श्रद्धा के अनुसार किया जा सकता है। पूजा करते समय मन को शांत रखना और भगवान के प्रति पूरी श्रद्धा बनाए रखना जरूरी है। धार्मिक पूजा में केवल सामग्री ही महत्वपूर्ण नहीं मानी जाती बल्कि भक्त का भाव भी विशेष महत्व रखता है। इसलिए पूजा के दौरान जल्दबाजी करने के बजाय शांत मन से हनुमान जी का स्मरण करना चाहिए।

    मंगलवार के दिन कई श्रद्धालु व्रत भी रखते हैं। व्रत रखने वाले लोग अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या सात्विक भोजन कर सकते हैं। पूजा के बाद हनुमान जी को प्रसाद अर्पित करके परिवार के सदस्यों में बांटना शुभ माना जाता है। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी धार्मिक दृष्टि से अच्छा माना जाता है। इससे सेवा और परोपकार की भावना मजबूत होती है।

    मंगलवार की पूजा में स्वच्छता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा के दौरान नकारात्मक विचारों से बचने और किसी के प्रति गलत भावना न रखने का प्रयास करना चाहिए। श्रद्धालु इस दिन भगवान हनुमान से अपने परिवार की सुख शांति और जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करने की प्रार्थना कर सकते हैं। माना जाता है कि सच्ची श्रद्धा और नियमित भक्ति से मन को सकारात्मक दिशा मिलती है।

    हालांकि पूजा के नियम अलग अलग परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए मंगलवार की पूजा करते समय अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं का भी ध्यान रखना उचित है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भगवान हनुमान की पूजा श्रद्धा विश्वास और अच्छे कर्मों की भावना के साथ की जाए। मंगलवार को बजरंगबली का स्मरण केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय नहीं बल्कि आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को मजबूत करने का माध्यम भी बन सकता है।

  • सितंबर को बाजार में संभलकर कदम रखें निवेशक, ग्लोबल संकेतों से लेकर तेल कीमतों तक कई फैक्टर तय करेंगे Nifty-Sensex की दिशा

    सितंबर को बाजार में संभलकर कदम रखें निवेशक, ग्लोबल संकेतों से लेकर तेल कीमतों तक कई फैक्टर तय करेंगे Nifty-Sensex की दिशा


    नई दिल्ली। 1 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। अगस्त के आखिरी कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार दबाव में नजर आया और अब नए महीने की शुरुआत कई महत्वपूर्ण संकेतों के बीच हो रही है। सोमवार को Nifty 50 और Sensex में गिरावट दर्ज की गई थी जबकि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंता ने बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव बनाया। 31 अगस्त को Nifty 50 करीब 0.74 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23997.10 के स्तर तक पहुंच गया था जबकि Sensex भी करीब 0.66 प्रतिशत नीचे 76751.32 के आसपास रहा।

    1 सितंबर के कारोबार में सबसे बड़ा फोकस MSCI रीबैलेंसिंग पर रहने वाला है। इंडेक्स में बदलाव प्रभावी होने के साथ कई शेयरों में फंड फ्लो बढ़ सकता है। बाजार रिपोर्टों के मुताबिक Laurus Labs Adani Energy Solutions Lenskart और Groww जैसे शेयरों को इंडेक्स बदलाव से फायदा मिल सकता है जबकि Reliance Industries और Jio Financial Services जैसे बड़े शेयरों में आउटफ्लो का दबाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में बाजार का मुख्य सूचकांक भले ही सीमित दायरे में रहे लेकिन कुछ खास शेयरों में तेज खरीदारी या बिकवाली देखने को मिल सकती है।

    MSCI रीबैलेंसिंग के साथ बाजार में नए Closing Auction Session को लेकर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। यह व्यवस्था अगस्त की शुरुआत से लागू हुई है और 1 सितंबर का MSCI बदलाव इस नई व्यवस्था के लिए पहला बड़ा परीक्षण माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कम ट्रेडिंग वॉल्यूम वाले शेयरों में इंडेक्स से जुड़े बड़े फंड फ्लो आने पर कीमतों में सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। हालांकि व्यापक बाजार पर इसका असर सीमित रहने की उम्मीद जताई गई है।

    इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें भी भारतीय बाजार के लिए अहम संकेत बनी हुई हैं। तेल की कीमतों में तेजी से भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है और इससे महंगाई तथा रुपये की चाल पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी ओर 31 अगस्त को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 0.2 प्रतिशत मजबूत होकर 95.1625 पर बंद हुआ और करीब चार सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया। बाजार में MSCI से जुड़े प्रवाह और भारतीय रिजर्व बैंक के समर्थन को रुपये की मजबूती के प्रमुख कारणों में गिना गया।

    बैंकिंग शेयरों में भी निवेशकों को सतर्क नजर रखनी होगी। HDFC Bank के शेयरों में हालिया कमजोरी ने बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया है। 31 अगस्त को बैंक के शेयर में करीब 1.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। वहीं बाजार में वैश्विक ब्याज दरों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित नीति को लेकर संकेत आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

    ऐसे माहौल में 1 सितंबर का कारोबार निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। बाजार में किसी एक दिशा में तेजी या गिरावट के बजाय शेयर आधारित गतिविधियां ज्यादा देखने को मिल सकती हैं। इसलिए निवेशकों को केवल बाजार की तेजी देखकर खरीदारी करने या गिरावट देखकर घबराकर बिकवाली करने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और बाजार के जोखिम को ध्यान में रखना चाहिए। खासतौर पर MSCI बदलाव से प्रभावित शेयरों में अचानक आने वाली हलचल को समझना जरूरी होगा। कुल मिलाकर नए महीने की शुरुआत घरेलू संकेतों के साथ वैश्विक बाजार कच्चे तेल रुपये और इंडेक्स रीबैलेंसिंग के बीच होने जा रही है और यही फैक्टर मंगलवार को शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।