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  • टीम इंडिया को मिला हार्दिक का विकल्प 2027 वर्ल्ड कप से पहले नितीश रेड्डी या वॉशिंगटन सुंदर पर दांव लगाएंगे चयनकर्ता

    टीम इंडिया को मिला हार्दिक का विकल्प 2027 वर्ल्ड कप से पहले नितीश रेड्डी या वॉशिंगटन सुंदर पर दांव लगाएंगे चयनकर्ता


    नई दिल्ली । साल 2023 वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में मिली हार के बाद टीम इंडिया अब 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारियों में जुट चुकी है और इस बड़े टूर्नामेंट को ध्यान में रखते हुए टीम मैनेजमेंट के सामने कई अहम सवाल हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण सवाल हार्दिक पंड्या के विकल्प को लेकर है। हार्दिक लंबे समय से भारतीय टीम के सबसे अहम ऑलराउंडरों में शामिल रहे हैं क्योंकि वह बल्लेबाजी के साथ तेज गेंदबाजी का विकल्प भी देते हैं। हालांकि उनकी फिटनेस और चोटों का रिकॉर्ड टीम के लिए चिंता का विषय रहा है। ऐसे में चयनकर्ताओं को 2027 वर्ल्ड कप से पहले एक ऐसा खिलाड़ी तैयार करना होगा जो जरूरत पड़ने पर हार्दिक की भूमिका निभा सके।

    हार्दिक पंड्या की करीब पांच महीने बाद टीम इंडिया में वापसी की उम्मीद जताई जा रही है। उनकी वापसी भारतीय टीम के लिए निश्चित रूप से बड़ी राहत होगी क्योंकि सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनका अनुभव और मैच जिताने की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार हार्दिक अपनी फिटनेस पर काम कर रहे हैं और टीम में वापसी के लिए तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। हालांकि फिटनेस से जुड़ी ताजा चुनौतियों के कारण उनकी वापसी को लेकर स्थिति पर नजर बनी हुई है।

    लेकिन टीम इंडिया केवल हार्दिक पर निर्भर रहने का जोखिम नहीं उठा सकती। 2027 वर्ल्ड कप दक्षिण अफ्रीका जिम्बाब्वे और नामीबिया में खेला जाना है और वहां की परिस्थितियों को देखते हुए टीम को ऐसे ऑलराउंडर की जरूरत होगी जो बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी में भी प्रभाव छोड़ सके। इस रेस में नितीश कुमार रेड्डी का नाम सबसे आगे नजर आता है। नितीश की सबसे बड़ी ताकत उनकी मध्यम तेज गेंदबाजी है। वह निचले और मध्यक्रम में उपयोगी बल्लेबाजी करने की क्षमता भी रखते हैं। उन्हें हार्दिक के संभावित बैकअप के रूप में तैयार करने की चर्चा पहले से होती रही है और पूर्व क्रिकेटर सुरेश रैना भी टीम इंडिया के लिए एक भरोसेमंद बैकअप तैयार करने की जरूरत पर जोर दे चुके हैं।

    दूसरी ओर वॉशिंगटन सुंदर भी टीम इंडिया के लिए एक मजबूत विकल्प हैं। वह ऑफ स्पिन के साथ बल्लेबाजी में गहराई देते हैं और परिस्थितियों के अनुसार टीम को अलग संतुलन प्रदान कर सकते हैं। हालांकि वॉशिंगटन की भूमिका हार्दिक से अलग है क्योंकि वह तेज गेंदबाज नहीं हैं। इसलिए यदि टीम को हार्दिक जैसी सीम बॉलिंग क्षमता वाले ऑलराउंडर की जरूरत होगी तो नितीश कुमार रेड्डी का दावा अधिक मजबूत माना जा सकता है।

    वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया के पास अभी पर्याप्त समय है और आने वाले मुकाबले यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि हार्दिक पंड्या के बाद टीम का सबसे भरोसेमंद ऑलराउंडर कौन बनेगा। नितीश कुमार रेड्डी की फिटनेस और लगातार प्रदर्शन उन्हें मजबूत दावेदार बनाते हैं जबकि वॉशिंगटन सुंदर अपनी बहुआयामी क्षमता से चयनकर्ताओं का ध्यान खींच सकते हैं। हालिया रिपोर्टों में दोनों खिलाड़ियों की फिटनेस और आगामी मुकाबलों के लिए उपलब्धता को टीम के लिए सकारात्मक संकेत माना गया है।

    2027 वर्ल्ड कप में सफलता के लिए टीम इंडिया को केवल हार्दिक पंड्या की वापसी नहीं बल्कि उनका एक मजबूत विकल्प भी तैयार करना होगा। आने वाले महीनों में यही फैसला तय करेगा कि भारतीय टीम का असली ब्रह्मास्त्र कौन बनकर उभरता है।

  • टीवी के सबसे महंगे होस्ट बने सलमान खान! बिग बॉस 20 के लिए 120 करोड़ की फीस की चर्चा, जानें पूरा फीस सफर

    टीवी के सबसे महंगे होस्ट बने सलमान खान! बिग बॉस 20 के लिए 120 करोड़ की फीस की चर्चा, जानें पूरा फीस सफर


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के दबंग स्टार सलमान खान एक बार फिर छोटे पर्दे और ओटीटी की दुनिया में अपनी धमाकेदार वापसी करने जा रहे हैं। टीवी के सबसे चर्चित रियलिटी शो बिग बॉस का 20वां सीजन जल्द शुरू होने वाला है और इसके साथ ही एक बार फिर सलमान खान की फीस सुर्खियों में आ गई है। हर साल की तरह इस बार भी शो के लिए उनकी भारी-भरकम कमाई को लेकर चर्चाएं तेज हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक बिग बॉस 20 के लिए सलमान खान को पूरे सीजन के बदले करीब 120 करोड़ रुपये की फीस ऑफर की गई है। हालांकि इस रकम को लेकर मेकर्स की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है लेकिन सलमान की फीस का सफर अपने आप में बेहद दिलचस्प रहा है।

    सलमान खान ने साल 2010 में बिग बॉस के चौथे सीजन से बतौर होस्ट शो की कमान संभाली थी। उस समय उन्हें प्रति एपिसोड करीब 2.5 करोड़ रुपये मिलने की खबरें सामने आई थीं। बिग बॉस के चौथे सीजन में उनकी होस्टिंग को दर्शकों ने खूब पसंद किया और धीरे-धीरे सलमान इस शो की सबसे बड़ी पहचान बन गए। इसके बाद पांचवें और छठे सीजन में भी उनकी फीस लगभग इसी स्तर पर बताई गई लेकिन सातवें सीजन से उनकी कमाई में बड़ा उछाल देखने को मिला। रिपोर्ट्स के अनुसार इस सीजन में उनकी फीस बढ़कर करीब 5 करोड़ रुपये प्रति एपिसोड हो गई।

    इसके बाद बिग बॉस की लोकप्रियता के साथ सलमान खान की फीस भी लगातार बढ़ती चली गई। आठवें सीजन में उन्हें करीब 5.5 करोड़ और नौवें सीजन में लगभग 6 करोड़ रुपये प्रति एपिसोड मिलने की चर्चा रही। दसवें और ग्यारहवें सीजन तक पहुंचते-पहुंचते यह रकम और तेजी से बढ़ी। अलग-अलग सीजनों में सलमान के कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें भी बदलती रहीं और कभी उनकी फीस प्रति एपिसोड के हिसाब से तो कभी पूरे सीजन के पैकेज के रूप में तय होने की खबरें सामने आईं।

    रिपोर्ट्स के अनुसार बिग बॉस के 12वें सीजन के लिए सलमान खान को पूरे सीजन के बदले करीब 300 करोड़ रुपये मिलने की चर्चा थी जबकि 13वें सीजन में यह आंकड़ा लगभग 200 करोड़ रुपये बताया गया। इसके बाद भी उनकी फीस को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे। बिग बॉस के हर नए सीजन के साथ यह साफ होता गया कि सलमान खान सिर्फ शो के होस्ट नहीं बल्कि इसकी सबसे बड़ी यूएसपी बन चुके हैं। उनके वीकेंड एपिसोड और कंटेस्टेंट्स के साथ उनका खास अंदाज दर्शकों के लिए शो का प्रमुख आकर्षण रहता है।

    अब बिग बॉस 20 को लेकर भी दर्शकों की उत्सुकता चरम पर है। इस सीजन का ग्रैंड प्रीमियर 6 सितंबर से होने जा रहा है और सलमान खान एक बार फिर अपने खास अंदाज में कंटेस्टेंट्स की क्लास लगाते नजर आएंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार शो में कई चर्चित टीवी सितारे और सोशल मीडिया चेहरे शामिल हो सकते हैं। संभावित कंटेस्टेंट्स को लेकर मौनी रॉय फैसल खान कनिका मान माही विज गीता बसरा जन्नत जुबैर मिस्टर फैजू सुनील पाल निया शर्मा पर्ल वी पुरी शोविक चक्रवर्ती और रिया अहीर जैसे नाम चर्चा में हैं।

    बिग बॉस के साथ सलमान खान का सफर अब करीब 16 साल पुराना हो चुका है। 2.5 करोड़ रुपये प्रति एपिसोड से शुरू हुई फीस की चर्चा आज 120 करोड़ रुपये के सीजन पैकेज तक पहुंच गई है। हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन एक बात तय है कि सलमान खान की मौजूदगी के बिना बिग बॉस की कल्पना करना दर्शकों के लिए मुश्किल है। अब देखना दिलचस्प होगा कि बिग बॉस 20 दर्शकों के बीच कितना बड़ा धमाका करता है और सलमान खान इस बार अपनी होस्टिंग से कौन-कौन से नए रिकॉर्ड बनाते हैं।

  • सलमान खान के बिग बॉस 20 में दिखेंगे ये बड़े चेहरे! संभावित कंटेस्टेंट्स की लिस्ट ने बढ़ाई हलचल, प्रीमियर से पहले सस्पेंस बरकरार

    सलमान खान के बिग बॉस 20 में दिखेंगे ये बड़े चेहरे! संभावित कंटेस्टेंट्स की लिस्ट ने बढ़ाई हलचल, प्रीमियर से पहले सस्पेंस बरकरार


    नई दिल्ली । सलमान खान के मोस्ट अवेटेड रियलिटी शो बिग बॉस 20 का काउंटडाउन अब तेज हो गया है। शो के ग्रैंड प्रीमियर में कुछ ही दिन बाकी हैं और दर्शकों के बीच इसे लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। इस बीच बिग बॉस के नए सीजन में शामिल होने वाले संभावित कंटेस्टेंट्स के नाम लगातार सामने आ रहे हैं। हालांकि मेकर्स ने अभी तक प्रतिभागियों की आधिकारिक सूची जारी नहीं की है लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स और मनोरंजन जगत में चल रही चर्चाओं ने कई बड़े नामों को लेकर हलचल तेज कर दी है। बताया जा रहा है कि इस बार बिग बॉस के घर में करीब 17 सदस्य नजर आ सकते हैं और टीवी से लेकर डिजिटल दुनिया भोजपुरी इंडस्ट्री कॉमेडी और खेल जगत तक के चर्चित चेहरे शो का हिस्सा बन सकते हैं।

    संभावित कंटेस्टेंट्स की सूची में भोजपुरी फिल्मों की लोकप्रिय अभिनेत्री आम्रपाली दुबे का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक आम्रपाली की एंट्री को लगभग तय माना जा रहा है। अगर वह बिग बॉस के घर में पहुंचती हैं तो भोजपुरी दर्शकों के साथ साथ देशभर में उनके फैंस का उत्साह बढ़ सकता है। इसके अलावा रिया अहीर और लव गिल में से किसी एक के शो में शामिल होने की भी संभावना जताई जा रही है।

    वहीं अभिनेत्री गीता बसरा कॉमेडियन सुनील पाल और शोविक चक्रवर्ती के नाम भी संभावित कंटेस्टेंट्स की सूची में सामने आए हैं। इन तीनों को लेकर दावा किया जा रहा है कि उनकी एंट्री लगभग पक्की हो सकती है। अलग अलग क्षेत्रों से आने वाले इन चेहरों की मौजूदगी शो में मनोरंजन और ड्रामा का तड़का बढ़ा सकती है।

    टीवी और डिजिटल दुनिया के कई सितारे भी बिग बॉस 20 की रेस में बताए जा रहे हैं। क्योंकि सास भी कभी बहू थी में नजर आ चुके अभिनेता अमन गांधी का नाम चर्चा में है। इसके अलावा इशा रिखी और उदिती सिंह को लेकर भी अटकलें तेज हैं। डिजिटल और रियलिटी शो की दुनिया से जुड़े कुशल तंवर उर्फ गुल्लू काजी तौकीर अर्शिफा खान अंजलि अरोड़ा और आर्यन केल्विन जैसे नाम भी संभावित सूची में शामिल बताए जा रहे हैं। टीवी अभिनेत्री खुशी दुबे और युक्ति कपूर की एंट्री को लेकर भी चर्चाएं बनी हुई हैं।

    इस संभावित सूची में सबसे चौंकाने वाला नाम मशहूर बॉक्सर मैरी कॉम का बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार मेकर्स उन्हें शो का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि मैरी कॉम की एंट्री को लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन उनके नाम ने दर्शकों की उत्सुकता जरूर कई गुना बढ़ा दी है। यदि वह शो का हिस्सा बनती हैं तो बिग बॉस 20 का यह सीजन और भी खास हो सकता है।

    कुछ अन्य सितारों के साथ मेकर्स की बातचीत जारी होने की खबर है। इनमें नीति टेलर पार्थ समथान करण वाही प्रणाली राठौड़ और माही विज के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। दूसरी ओर अभिनेता रजत बेदी को शुरुआत में कन्फर्म कंटेस्टेंट्स की सूची में बताया गया था लेकिन अब उनके शो का हिस्सा न बनने की खबरें सामने आ रही हैं।

    सलमान खान एक बार फिर बिग बॉस के होस्ट के रूप में वापसी करने जा रहे हैं। बिग बॉस 20 का ग्रैंड प्रीमियर 6 सितंबर को होगा। शो को जियोहॉटस्टार पर सोमवार से रविवार रात 9 बजे स्ट्रीम किया जाएगा जबकि कलर्स टीवी पर इसका प्रसारण रात 10 बजकर 30 मिनट पर होगा। कंटेस्टेंट्स की आधिकारिक घोषणा से पहले संभावित नामों की इस लंबी सूची ने दर्शकों की बेसब्री और बढ़ा दी है और अब सबकी नजरें ग्रैंड प्रीमियर पर टिकी हैं।

  • प्लास्टिक नोटों में जानवरों की चर्बी जैसी अफवाहों का बाजार गर्म… जानिए क्या है सच?

    प्लास्टिक नोटों में जानवरों की चर्बी जैसी अफवाहों का बाजार गर्म… जानिए क्या है सच?


    नई दिल्ली।
    जेब में रखा नोट (Note) कुछ ही समय में मुड़ जाता है, गंदा हो जाता है और कई बार फट भी जाता है। इसी समस्या के बीच भारत (India) में पॉलिमर यानी प्लास्टिक (Plastic Currency) आधारित नोट लाने की तैयारी हो रही है। इसे लेकर कई तरह की बातें और अफवाहें भी चल रही हैं कि क्या कागज के नोट बंद हो जाएंगे? क्या प्लास्टिक के नोट ज्यादा टिकेंगे? यह कैसे अलग है? आखिर सरकार ने क्या मंजूरी दी है? क्या इन नोटों में पशु की चर्बी से बनी सामग्री भी डाली जाएगी? ये नोट कब तक आपकी जेब में आएंगे? इससे क्या बदलेगा? आइए जानते हैं…


    क्या है पॉलिमर नोट?

    पॉलिमर नोट (Polymer note) कागज के बजाय एक खास प्लास्टिक आधारित सामग्री से बनाए जाते हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत इनका ज्यादा टिकाऊ होना है। पॉलिमर सामग्री पानी, गंदगी और फटने के मामले में कागज की तुलना में ज्यादा मजबूत होती है। इसका फायदा खासकर उन छोटे नोटों में हो सकता है जो रोजाना बहुत ज्यादा इस्तेमाल होते हैं। ऐसे नोट जल्दी खराब होते हैं और उन्हें बार-बार बदलना पड़ता है। पॉलिमर नोट ज्यादा समय तक चलें तो नए नोट छापने और पुराने नोट बदलने की जरूरत कम हो सकती है।


    सरकार ने अभी क्या मंजूरी दी है?

    भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश के बाद सरकार को पॉलिमर नोटों के क्षेत्रीय परीक्षण का प्रस्ताव भेजा था। यह प्रस्ताव भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 25 के तहत भेजा गया था। सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत 10 और 20 रुपये के एक-एक अरब पॉलिमर नोट, यानी कुल दो अरब नोटों का क्षेत्रीय परीक्षण किया जाएगा। अगर परीक्षण सफल रहा तो इन दोनों मूल्यवर्ग के पॉलिमर नोटों को नियमित रूप से जारी किया जा सकता है।


    क्या कागज के पुराने नोट बंद हो जाएंगे?

    नहीं। सरकार ने साफ किया है कि पॉलिमर नोट कागज के नोटों को हटाकर नहीं लाए जाएंगे। अगर परीक्षण सफल होता है और इनकी नियमित आपूर्ति शुरू होती है तो पॉलिमर नोट मौजूदा कागज के नोटों के साथ ही चलेंगे। इसलिए पॉलिमर नोट आने का मतलब यह नहीं है कि लोगों के पास मौजूद कागज के नोट अचानक बेकार हो जाएंगे।


    इन्हें लाने का मुख्य मकसद क्या है?

    आरबीआई का मानना है कि पॉलिमर नोट पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक समय तक चलते हैं। विशेष रूप से छोटे मूल्यवर्ग के नोट, जिनका उपयोग सबसे अधिक होता है और जो जल्दी खराब हो जाते हैं, उनके लिए यह बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। इससे नोटों की बार-बार छपाई और प्रतिस्थापन पर आने वाली लागत में भी कमी आने की संभावना है। पॉलिमर नोटों में उन्नत सुरक्षा तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इनमें पारदर्शी विंडो सहित कई आधुनिक सुरक्षा फीचर शामिल किए जा सकते हैं, जिससे नकली नोटों की पहचान आसान होगी और जालसाजी पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।


    क्या पहले भी हुई थी प्लास्टिक के नोटों को लाने की कोशिश?

    भारत में पॉलिमर नोट का विचार नया नहीं है। 2009 में इस दिशा में काम शुरू हुआ था। इसके बाद 2012 में 10 रुपये के एक अरब पॉलिमर नोटों का क्षेत्रीय परीक्षण करने की योजना बनाई गई। इसके लिए अलग-अलग भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों वाले पांच शहर चुने गए थे जिनमें कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर शामिल थे। उस समय भी मकसद कम मूल्यवर्ग के नोटों की उम्र बढ़ाना था।

    2012 का परीक्षण क्यों आगे नहीं बढ़ पाया?
    उस समय पॉलिमर नोटों को तेज गति से चलने वाली मशीनों में इस्तेमाल करने पर घर्षण और स्थैतिक बिजली की समस्या सामने आई। इससे नोट आपस में चिपकने लगे और मशीनों में एक साथ कई नोट जाने की परेशानी हुई। इसके अलावा उस समय पॉलिमर सामग्री का इस्तेमाल, उसकी स्याही के घिसने, अलग-अलग मौसम में प्रदर्शन और मशीनों के साथ अनुकूलता जैसी चुनौतियां भी सामने आईं।


    पुरानी योजना के सामने और क्या दिक्कतें थीं?

    उस समय पॉलिमर नोट बनाने की सामग्री चीन, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देशों से आयात की जाती थी। आयात से जुड़ी प्रक्रियाएं और सामग्री की कीमत भी चुनौती थीं। इसके अलावा कई वाणिज्यिक बैंकों ने अपने मौजूदा ढांचे को पॉलिमर नोटों के अनुरूप बदलने के लिए होने वाली अतिरिक्त पूंजीगत लागत को लेकर चिंता जताई थी।

    2016 की नोटबंदी के बाद इस योजना की रफ्तार और प्रभावित हुई। आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2016-17 में मुद्रा छपाई की लागत 7,965 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। इसके बाद पॉलिमर नोट से जुड़े प्रयोग आगे नहीं बढ़ सके।


    इस बार पिछली समस्या से कैसे निपटा जा रहा है?

    इस बार पॉलिमर सामग्री में एंटी-स्टैटिक कोटिंग का प्रावधान रखा गया है। इसका उद्देश्य स्थैतिक बिजली की समस्या को कम करना है, ताकि नोट आपस में चिपकें नहीं और मशीनों में एक साथ कई नोट जाने या मशीन के अटकने जैसी समस्या कम हो। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी टेंडर के अनुसार, ऐसी सामग्री मांगी गई है जिस पर आवश्यक अपारदर्शी परत के साथ एंटी-स्टैटिक कोटिंग हो और जो छपाई व स्याही के चिपकने के लिए उपयुक्त हो।


    नोट में सुरक्षा के लिए क्या?

    पॉलिमर सामग्री में सुरक्षा विशेषताओं को शामिल करने की क्षमता मांगी गई है। इसमें पारदर्शी खिड़की में चित्र, धातु जैसा अंक, चुंबकीय सुरक्षा धागा, छाया चित्र और चमक बदलने वाला पैटर्न जैसी विशेषताएं शामिल हैं। इस तरह सुरक्षा संबंधी कुछ विशेषताओं को पॉलिमर सामग्री में ही शामिल किया जा सकता है।


    नोटों में पशु चर्बी की अफवाह में कितना दम है?

    इस तरह की बातें सिर्फ कोरी अफवाह हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी टेंडर में पॉलिमर सामग्री को लेकर एक खास शर्त रखी गई है। इसमें पशु वसा यानी एनिमल टैलो या पशु का डीएनए नहीं होना चाहिए। इसके लिए कंपनी को इसका प्रमाण पत्र देना होगा। केवल प्रमाण पत्र ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि कंपनियों की ओर से दिए गए पॉलिमर नमूनों की प्रयोगशाला में जांच भी की जाएगी।


    आरबीआई की नोट छापने वाली कंपनी ने क्या प्रक्रिया शुरू की?

    भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड यानी बीआरबीएनएमपीएल ने 17 जुलाई 2026 को पॉलिमर सब्सट्रेट की आपूर्ति के लिए वैश्विक रुचि आमंत्रण जारी किया है। इसमें ऐसी योग्य कंपनियों से रुचि मांगी गई है, जो भारतीय बैंक नोटों की छपाई के लिए सुरक्षा विशेषताओं वाली अपारदर्शी पॉलिमर सब्सट्रेट शीट बना और उपलब्ध करा सकें। यह अभी अंतिम खरीद निविदा नहीं है। इस प्रक्रिया में योग्य कंपनियों की पहचान की जाएगी और आगे मुख्य निविदा की प्रक्रिया हो सकती है।

  • Pitru Paksha 2026: कब करें पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण, 15 दिनों की पूरी तिथि सूची के साथ जानें मातृ नवमी और सर्वपितृ अमावस्या का महत्व

    Pitru Paksha 2026: कब करें पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण, 15 दिनों की पूरी तिथि सूची के साथ जानें मातृ नवमी और सर्वपितृ अमावस्या का महत्व


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने का अत्यंत महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने दिवंगत माता पिता और पूर्वजों का स्मरण करते हुए श्राद्ध तर्पण पिंडदान और दान पुण्य जैसे धार्मिक कर्म करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धापूर्वक किए गए इन कर्मों से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। साल 2026 में पितृपक्ष सितंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू होगा और अक्टूबर में सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा। ऐसे में परिवारों के लिए श्राद्ध पक्ष की सभी तिथियों की जानकारी रखना बेहद जरूरी है ताकि वे अपने पूर्वजों का श्राद्ध सही दिन पर कर सकें।

    वर्ष 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर शनिवार से होगी। इस दिन भाद्रपद पूर्णिमा तिथि का श्राद्ध किया जाएगा। इसके बाद 27 सितंबर रविवार को प्रतिपदा श्राद्ध होगा और क्रमशः अलग अलग तिथियों पर पूर्वजों के निमित्त धार्मिक कर्म किए जाएंगे। पितृपक्ष का समापन 10 अक्टूबर शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि इस दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर उनका श्राद्ध नहीं हो पाया हो।

    पितृपक्ष की प्रमुख तिथियों की बात करें तो 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध होगा जबकि 27 सितंबर को प्रतिपदा और 28 सितंबर को द्वितीया श्राद्ध किया जाएगा। 29 सितंबर को तृतीया श्राद्ध होगा। इस बार 30 सितंबर बुधवार को एक विशेष स्थिति बनेगी क्योंकि इसी दिन चतुर्थी और पंचमी दोनों तिथियों का श्राद्ध किया जाएगा। जिन परिवारों में किसी पूर्वज का निधन चतुर्थी या पंचमी तिथि को हुआ था वे इस दिन उनका श्राद्ध कर्म कर सकेंगे।

    इसके बाद 1 अक्टूबर को षष्ठी 2 अक्टूबर को सप्तमी 3 अक्टूबर को अष्टमी और 4 अक्टूबर को नवमी तिथि का श्राद्ध होगा। 4 अक्टूबर को मातृ नवमी भी मानी जाएगी जिसका अपना विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन दिवंगत माताओं और परिवार की अन्य महिलाओं के निमित्त श्राद्ध तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। श्रद्धालु इस दिन मातृ पक्ष के पूर्वजों का स्मरण कर उनके प्रति सम्मान और श्रद्धा प्रकट करते हैं।

    पितृपक्ष की आगे की तिथियों में 5 अक्टूबर को दशमी 6 अक्टूबर को एकादशी 7 अक्टूबर को द्वादशी 8 अक्टूबर को त्रयोदशी और 9 अक्टूबर को चतुर्दशी का श्राद्ध किया जाएगा। इसके बाद 10 अक्टूबर को अमावस्या के दिन सर्वपितृ श्राद्ध के साथ इस पावन पक्ष का समापन होगा।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष में श्राद्ध करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण आधार मृत्यु की तिथि होती है। जिस तिथि को किसी व्यक्ति का निधन हुआ हो पितृपक्ष में उसी तिथि पर उसका श्राद्ध करना उचित माना जाता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी पूर्वज की मृत्यु प्रतिपदा तिथि को हुई थी तो पितृपक्ष में प्रतिपदा के दिन उनका श्राद्ध किया जाता है। वहीं जिन लोगों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि की जानकारी नहीं होती उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या विशेष अवसर मानी जाती है।

    पितृपक्ष केवल धार्मिक कर्मकांड का समय नहीं बल्कि अपनी जड़ों और पूर्वजों को याद करने का भी अवसर है। इस अवधि में श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार तर्पण पिंडदान भोजन और दान पुण्य करने की परंपरा रही है। वर्ष 2026 में 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलने वाला यह पितृपक्ष श्रद्धालुओं को अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।

  • बांग्लादेश में इस बार जन्माष्टमी पर नहीं दिखेगी पहले जैसी रौनक…. सरकार ने रद्द किया अवकाश

    बांग्लादेश में इस बार जन्माष्टमी पर नहीं दिखेगी पहले जैसी रौनक…. सरकार ने रद्द किया अवकाश


    ढाका।
    जैसे-जैसे जन्माष्टमी (Janmashtami) के साथ अन्य हिंदू त्योहारों (Hindu Festivals Holidays) की समय नजदीक आ रहा है, बांग्लादेश (Bangladesh) में सरकार के प्रति हिंदुओं में रोष बढ़ता ही जा रहा है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि बांग्लादेश सरकार (Bangladesh Government) ने जन्माष्टमी को मिलने वाला सरकारी अवकाश रद्द कर दिया है। ढाकेश्वरी मंदिर, चट्टग्राम, सिलहट समेत कई मंदिरों में जन्माष्टमी मनाई जानी है, लेकिन इस बार यहां जन्माष्टमी को आधिकारिक छुट्टी नहीं रहेगी।

    खबरों के मुताबिक, इस वर्ष 2 जनवरी को ही बांग्लादेश में सरस्वती पूजा, जन्माष्टमी, दुर्गाष्टमी और बुद्ध पूर्णिमा की सरकारी छुट्टियां रद्द कर दी गईं। हिंदू जागृति समिति व इसकी अगुवाई में हिंदुओं ने इसका भारी विरोध किया है। हसीना के अपदस्थ होने के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं की हिंसा के चलते ढाका, सिलहट, खुलना, कुमिला, जेसोर और मीरपुर में बड़े-बड़े जुलूस नहीं निकाले जा रहे हैं इस बार भी यहां उत्साह फीका रहेगा। देश के अखबार प्रोथोम आलो के मुताबिक, इस बार मंदिरों में जन्माष्टमी समारोह तो होंगे लेकिन दस दिन पूर्व से बाजारों में जो उत्साह देखा जाता था वह इस बार नहीं है। बांग्लादेश में एक समय रहा है जब हिंदू पर्वों के लिए मंदिरों में उत्साह होता था और बड़े बड़े उत्सव तथा जुलूस निकाले जाते थे, लेकिन अब देश में पूर्व पीएम शेख हसीना के कार्यकाल जैसी उमंग नहीं दिख रही।


    सरकार का दावा, मंदिरों में विशेष सुरक्षा प्रबंध

    बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने सियासी उथल-पुथल के समय अल्पसंख्यक सुरक्षा के बाद कहा है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन की तरफ से मंदिरों के लिए विशेष सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। हालांकि बांग्लादेश हिंदू जागरण मंच के प्रवक्ता निहार हलदर ने कहा, अभी समुदाय में डर है। कुछ मंदिरों में जनमाष्टमी पर शोभायात्राएं निकाली जाएंगी लेकिन ज्यादातर जगहों पर पहले जैसी रंगत नहीं रहेगी।

  • खाद्य तेल अब स्टैंडर्ड साइज पैक में मिलेगा…. आज से गैर-मानक पैकेट्स की बिक्री पर रोक

    खाद्य तेल अब स्टैंडर्ड साइज पैक में मिलेगा…. आज से गैर-मानक पैकेट्स की बिक्री पर रोक


    नई दिल्ली
    । उपभोक्ता मामलों के विभाग ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग नियमों (Standard Operating Rules) में बड़ा संशोधन करते हुए 1 सितंबर से खाद्य तेलों (Edible oils) के गैर-मानक पैकेट्स (Non-Standard Packets) की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अब तक कंपनियां 1 लीटर या 1 किलो के स्थान पर 800 ग्राम, 900 ग्राम या 910 ग्राम जैसे भ्रामक और गुमराह करने वाले पैक साइज बाजार में उतार रही थीं।

    कंपनियों को पुराने स्टॉक को निकालने के लिए दिया गया तीन महीने का समय 31 अगस्त को समाप्त हो चुका है। अब देश में बिकने वाले घरेलू और आयातित दोनों प्रकार के प्रमुख खाद्य तेलों पर यह नया नियम अनिवार्य रूप से लागू हो गया है।


    तय साइज में मिलेगा खाद्य तेल

    नए नियमों के अनुसार, खाद्य तेल केवल 9 तय पैमानों पर ही बेचा जा सकेगा। कमजोर आय वर्ग और सिंगल उपभोक्ताओं की जरूरत का ध्यान रखते हुए 200 मिलीलीटर या 200 ग्राम से छोटे किफायती पाउचों को मानकीकरण के दायरे से बाहर रखा गया है, साथ ही कुछ विशेष तेलों को भी इस अनिवार्यता से छूट दी गई है।

    मीडियम पैकेट व बोतलें : 1 लीटर, 2 लीटर, 3 लीटर, 4 लीटर और 5 लीटर।
    बड़े पैकेट व टिन : 15 लीटर और 20 लीटर के मानक टिन।


    पैकेजिंग बदलने से कीमतों में उछाल संभव…

    उद्योग सूत्रों के मुताबिक, पैकिंग साइज बदलने के बाद खुदरा कीमतों में तकनीकी री-एडजस्टमेंट देखने को मिल सकता है। उदाहरण के लिए, गैर-मानक 800 या 900 ग्राम वाले पैकेट हटने और पूरे 1 लीटर के मानक पैक आने पर खुदरा स्तर पर प्रति पैकेट दाम बढ़ सकते हैं।


    कीमतों की तुलना होगी आसान

    बदलाव का सीधा फायदा आम उपभोक्ता को मिलेगा। पुराने सिस्टम में जब कोई ग्राहक 1 लीटर का पैकेट समझकर 800 या 900 ग्राम का पाउच खरीदता था, तो ऊपरी तौर पर पैकेट की कीमत 10 से 15 रुपये सस्ती लगती थी, लेकिन प्रति लीटर या प्रति किलो वह असल में ज्यादा कीमत चुका रहा होता था। वजन और मात्रा के अंतर के कारण दो अलग-अलग ब्रांड के बीच सही मूल्य की तुलना मुश्किल थी। मानक आकार तय होने से पारदर्शिता आएगी।

    मात्रा के साथ वजन लिखना अनिवार्य
    एक और तकनीकी पेंच को सरकार ने सुलझा दिया है। यदि पैकेट पर मात्रा लीटर या मिलीलीटर में है, तो उसके समानांतर उसका सटीक समतुल्य वजन (ग्राम या किलोग्राम में) भी स्पष्ट रूप से लिखना होगा। इससे घनत्व के नाम पर घटतौली खत्म होगी। ग्राहक को पता होगा कि वह कितना वजन खरीद रहा है।

  • राजस्थान HC विवाद…. कॉलेजियम का बड़ा फैसला…. चीफ जस्टिस के लिए की नए नाम की सिफारिश

    राजस्थान HC विवाद…. कॉलेजियम का बड़ा फैसला…. चीफ जस्टिस के लिए की नए नाम की सिफारिश


    नई दिल्ली।
    राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) के कार्यवाहक चीफ जस्टिस (Acting Chief Justice) संजीव प्रकाश शर्मा (Sanjeev Prakash Sharma) को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) ने सोमवार शाम बड़ा फैसला लिया। कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जज संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश की है। इस बीच जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा छुट्टी पर चले गए हैं। यह सिफारिश ऐसे समय हुई है जब राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ वकीलों का विरोध तेज हो गया है। इसी दिन जस्टिस शर्मा ने न्यायिक कार्य से खुद को अलग कर लिया।


    जस्टिस शर्मा के खिलाफ क्या आरोप लगे?

    सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता ने 2, 10 और 17 अगस्त को CJI सूर्यकांत को पत्र लिखे थे। इन पत्रों में उन्होंने जस्टिस शर्मा पर ‘पावर के दुरुपयोग’ का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें ऐसी कई शिकायतें मिली हैं, जिनसे कार्यवाहक चीफ जस्टिस की ईमानदारी पर सवाल उठते हैं।

    जस्टिस मेहता ने यह भी मांग की थी कि जस्टिस शर्मा को किसी दूसरे हाईकोर्ट में ट्रांसफर किया जाए और राजस्थान हाईकोर्ट में नया चीफ जस्टिस नियुक्त किया जाए। कॉलेजियम की बैठक में इन आरोपों पर भी चर्चा हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, कॉलेजियम इन आरोपों की जांच कर सकता है। शिकायत में कथित तौर पर जिन कुछ आदेशों पर सवाल उठाए गए हैं, उन्हें भी जांच के दायरे में लाया जा सकता है। हालांकि, जस्टिस शर्मा 26 सितंबर को रिटायर होने वाले हैं, इसलिए कॉलेजियम इस मामले में सावधानी से आगे बढ़ने के पक्ष में है।


    1 से 5 सितंबर तक नहीं बैठेंगे जस्टिस शर्मा

    राजस्थान हाईकोर्ट के अपडेटेड रोस्टर के मुताबिक, जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा 1 सितंबर से 5 सितंबर तक किसी बेंच में नहीं बैठेंगे। उनकी बेंच के मामलों को दूसरी बेंचों को सौंप दिया गया है। जस्टिस शर्मा को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में वकीलों का विरोध भी तेज हो गया है।

    जयपुर में कुछ वकील कार्यवाहक चीफ जस्टिस की अदालत के बाहर बैठ गए और नारेबाजी की। जोधपुर में दोनों वकील संगठनों ने रविवार तक हड़ताल का ऐलान किया। उनकी मांग है कि जस्टिस शर्मा को न्यायिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाए। वकील संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को मजबूत प्रतिनिधित्व भेजने का भी फैसला किया है।


    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने और किन नामों की सिफारिश की?

    राजस्थान हाईकोर्ट के लिए संजय कुमार अग्रवाल के अलावा कॉलेजियम ने जस्टिस पुष्पेंद्र भाटी को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है। जस्टिस भाटी राजस्थान हाईकोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज हैं। वहीं गुजरात हाईकोर्ट के जज अल्पेश यशवंत कोगजे को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई है। इन तीन सिफारिशों के बाद चीफ जस्टिस की नियुक्ति से जुड़ी कुल सात सिफारिशें सरकार के पास लंबित होंगी।


    कॉलेजियम ने कहा- आरोपों को निष्कर्ष नहीं माना जा सकता

    जस्टिस शर्मा के खिलाफ आरोपों को लेकर CJI सूर्यकांत ने 26 अगस्त को एक बयान में कहा था कि उन्होंने और कॉलेजियम के अन्य सदस्यों ने जस्टिस संदीप मेहता की चिंताओं पर ध्यान दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी मौजूदा जज के खिलाफ लगाए गए आरोपों से स्थापित संस्थागत प्रक्रिया के तहत निपटा जाना चाहिए। संबंधित जज को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना जरूरी है और सिर्फ आरोप लगाए जाने से उन्हें निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। CJI ने यह भी कहा था कि कॉलेजियम पहले से ही बाकी हाईकोर्ट में नियमित चीफ जस्टिस की नियुक्ति की प्रक्रिया पर काम कर रहा था।


    10 महीने से कार्यवाहक चीफ जस्टिस थे शर्मा

    जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा करीब 10 महीने से राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस के तौर पर काम कर रहे थे। सितंबर 2025 में जस्टिस एस. श्रीराम के चीफ जस्टिस पद से रिटायर होने के बाद उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली थी। अब कॉलेजियम ने उनकी जगह छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जज संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है।

  • MP: भोपाल में CJP की बैठक में हंगामा….छात्रों ने लगाए नारे, माइक छीनने की कोशिश

    MP: भोपाल में CJP की बैठक में हंगामा….छात्रों ने लगाए नारे, माइक छीनने की कोशिश


    भोपाल।
    भोपाल (Bhopal) में सीजेपी (CJP) की बैठक के दौरान उस वक्त हंगामा हो गया, जब छात्रों और युवाओं का एक समूह बैठक में पहुंच गया. युवकों ने CJP के प्रतिनिधियों (Representatives) से स्कूलों के ऑडिट (School audits) और संगठन की गतिविधियों को लेकर सवाल किए. सवाल-जवाब के दौरान विवाद बढ़ गया और कुछ युवकों ने नारेबाजी शुरू कर दी. इस दौरान माइक छीनने की कोशिश भी की गई. हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस गांधी भवन पहुंची और छात्रों को समझाइश देकर मामला शांत कराया।

    दरअसल, शहर के गांधी भवन का यह मामला है. यहां CJP की बैठक के दौरान अचानक हंगामे की स्थिति बन गई. दरअसल, छात्रों और युवाओं का एक समूह बैठक के दौरान अंदर पहुंचा था. इनमें कुछ युवक काली टी-शर्ट पहने हुए थे। युवकों ने CJP के प्रतिनिधियों से स्कूलों के ऑडिट को लेकर सवाल पूछना शुरू किया।

    सवाल-जवाब के दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया. युवकों ने दिल्ली में हुए पिछले प्रदर्शनों और संगठन की गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए। इसी दौरान कुछ युवकों ने नारेबाजी शुरू कर दी. ‘यह दिल्ली नहीं, भोपाल है’, ‘कॉकरोच पार्टी मुर्दाबाद’ और ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाए गए. मामला बढ़ने पर माइक छीनने की कोशिश भी हुई।

    हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस बल गांधी भवन पहुंचा. पुलिस ने मौके पर मौजूद छात्रों और युवाओं को समझाइश दी. पुलिस की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ. घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बैठक के दौरान युवकों की नारेबाजी और हंगामे का दृश्य दिखाई दे रहा है।

  • गैस सिलिंडर से लेकर दूध के दाम तक…. आज से हो रहे ये बड़े बदलाव

    गैस सिलिंडर से लेकर दूध के दाम तक…. आज से हो रहे ये बड़े बदलाव


    नई दिल्ली।
    आज यानी 1 सितंबर 2026 (1 September 2026) से नए महीने (New month) की शुरुआत हो चुकी है और ऐसे में हमारे लिए ये जानना जरूरी हो जाता है कि कौन से नियम बदल रहे हैं। दरअसल, हर महीने की शुरुआत में यानी पहली तारीख से कई नियम (Several Rules changes) बदलते हैं। ऐसे में कौन से नियम बदले हैं और इनका आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा? आप इस बारे में आगे जान सकते हैं…


    आज से क्या बदलाव हो रहे हैं?

    दरअसल, मुंबई में आज यानी 1 सितंबर से डेयरी फार्म से सप्लाई होने वाले भैंस के ताजा दूध की थोक कीमत 93 रुपये से बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी यानी दूध महंगा हो जाएगा मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने दूध की थोक कीमत में 9 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है और ये नई कीमत 28 फरवरी 2027 तक जारी रहेगी।

    हालांकि, ये बढ़ोतरी दूध की थोक कीमत में हुई है। इसलिए ये जरूरी नहीं है कि हर ग्राहक के लिए दूध की कीमत सीधे 9 रुपये प्रति लीटर ही बढ़ जाए। खुदरा कीमत स्थानीय सप्लायर और दुकानदार के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।


    दूसरा बदलाव

    1 सितंबर 2026 से अगर आप भारत से अंतरराष्ट्रीय यात्रा करते हैं, तो आपको इमिग्रेशन काउंटर पर बोर्डिंग पास पर स्टांप लगवाने की जरूरत नहीं होगी। यात्री अपने मोबाइल में इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास दिखा सकेंगे या फिर प्रिंटेड बोर्डिंग पास का इस्तेमाल भी कर पाएंगे। इससे डिपार्चर की प्रक्रिया पहले से आसान हो सकेगी।


    तीसरा बदलाव

    एलपीजी गैस सिलिंडर उपभोक्ताओं के लिए ई-केवाईसी करवाने के लिए कल यानी 31 अगस्त आखिरी तारीख थी। ऐसे में आज यानी 1 सितंबर से आपको गैस की बुकिंग, सब्सिडी और घरेलू दरों पर सिलेंडर मिलने में परेशानी आ सकती है। हालांकि, इससे गैस कनेक्शन नहीं कटेगा।


    चौथा बदलाव

    आज दिल्ली से पटना तक 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर के दाम में 9.50 रुपये की बढोतरी हुई है। हालांकि, घरेलू सिलिंडर के दामों में कोई इजाफा नहीं हुआ है ।

    पांचवां बदलाव

    अगर आप इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करते हैं, तो जान लें कि इसकी तारीख को लेकर बदलाव हो रहा है। दरअसल, जिन टैक्सपेयर्स की बिजनेस या प्रोफेशन से आय है और जिनके खातों का ऑडिट जरूरी नहीं है, उनके लिए Assessment Year 2026-27 का आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त 2026 है।

    ये डेडलाइन मुख्य रूप से पात्र टैक्सपेयर्स के ITR-3 और ITR-4 दाखिल करने से जुड़ी है। अगर आप इस समय तक रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो इन नियमों के तहत आप बिलेटेड ITR दाखिल कर सकते हैं। साथ ही ध्यान रहे कि इसके लिए लेट फाइलिंग से जुड़े नियम और शुल्क लागू हो सकते हैं।