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  • गलवान के बाद पहली बड़ी राहत, सरकार ने चार चीनी कंपनियों को सरकारी टेंडर में दी एंट्री, जानिए वजह

    गलवान के बाद पहली बड़ी राहत, सरकार ने चार चीनी कंपनियों को सरकारी टेंडर में दी एंट्री, जानिए वजह


    नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच वर्ष 2020 के गलवान संघर्ष के बाद सुरक्षा कारणों से चीनी कंपनियों पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बीच केंद्र सरकार ने पावर सेक्टर को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने भारत में उत्पादन कर रही चार चीनी बिजली उपकरण निर्माता कंपनियों को सरकारी बिजली परियोजनाओं के टेंडर में भाग लेने की विशेष अनुमति दे दी है। यह छूट केवल दो वर्षों के लिए दी गई है और सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसे भविष्य में अन्य कंपनियों के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा। इस फैसले को देश की ऊर्जा सुरक्षा और बिजली क्षेत्र की जरूरतों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार टीबीईए एनर्जी नानजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया और ताईकाई इलेक्ट्रिक इंडिया को सार्वजनिक खरीद नियमों के कुछ प्रावधानों से राहत दी गई है। सामान्य तौर पर भारत से जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों को सरकारी टेंडर में भाग लेने से पहले संबंधित भारतीय प्राधिकरण से अनिवार्य पंजीकरण और सुरक्षा मंजूरी लेनी होती है। इन चार कंपनियों को फिलहाल इस प्रक्रिया से सीमित अवधि के लिए छूट प्रदान की गई है।

    सरकार का कहना है कि यह फैसला बिजली क्षेत्र की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के उद्देश्य से लिया गया है। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने इस वर्ष जनवरी में वित्त मंत्रालय से सिफारिश की थी कि भारत में निर्माण इकाइयां स्थापित कर चुकी कुछ कंपनियों को विशेष अनुमति दी जाए ताकि ट्रांसमिशन और बिजली ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं में देरी न हो। इसके बाद वित्त मंत्रालय ने दो वर्षों के लिए यह विशेष छूट मंजूर की।

    इन चारों कंपनियों की भूमिका भारतीय बिजली क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जाती है। ये कंपनियां ट्रांसफार्मर हाई वोल्टेज स्विच गियर गैस इंसुलेटेड स्विच गियर और ट्रांसमिशन लाइनों में इस्तेमाल होने वाले अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों का निर्माण भारत में करती हैं। इनमें से न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया देश की कई प्रमुख ट्रांसमिशन परियोजनाओं पर काम कर रही है जबकि अन्य कंपनियां भी बिजली वितरण और ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार में अहम योगदान दे रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपकरणों के बिना कई बड़ी बिजली परियोजनाएं समय पर पूरी करना मुश्किल हो सकता है।

    वर्ष 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुए हिंसक संघर्ष के बाद केंद्र सरकार ने चीनी कंपनियों के लिए कई सख्त नियम लागू किए थे। इसके तहत सरकारी खरीद में भाग लेने वाली कंपनियों के लिए विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से सुरक्षा और राजनीतिक मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी। इसके अलावा प्रेस नोट तीन के माध्यम से चीन सहित भारत की सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले निवेश के लिए भी सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक कर दी गई थी। इन कदमों का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों में विदेशी प्रभाव को नियंत्रित करना था।

    हालांकि बिजली क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों और तकनीकी विशेषज्ञता की कमी ने सरकार को सीमित दायरे में व्यावहारिक निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय बिजली उद्योग ने भी चीनी तकनीशियनों के लिए वीजा प्रक्रिया में राहत की मांग की थी क्योंकि कई परियोजनाएं विशेषज्ञों की कमी के कारण प्रभावित हो रही थीं। सरकार का मानना है कि घरेलू विनिर्माण इकाइयों के माध्यम से काम कर रही इन कंपनियों को सीमित अवधि की छूट देने से बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं में तेजी आएगी और देश के ऊर्जा ढांचे को मजबूती मिलेगी। साथ ही सुरक्षा संबंधी निगरानी और अन्य सरकारी शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगी ताकि राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता न हो।

  • सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, निजता की आड़ में नहीं छिपा सकेंगे विवाहेतर संबंध, कॉल रिकॉर्ड और होटल डिटेल देने होंगे

    सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, निजता की आड़ में नहीं छिपा सकेंगे विवाहेतर संबंध, कॉल रिकॉर्ड और होटल डिटेल देने होंगे


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों और निजता के अधिकार को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाला निजता का अधिकार किसी व्यक्ति को अपने जीवनसाथी से ऐसे तथ्यों को छिपाने की छूट नहीं देता जो अदालत में चल रहे व्यभिचार और तलाक के मामले की सुनवाई के लिए जरूरी हों। शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि किसी पति या पत्नी पर विवाहेतर संबंध रखने का आरोप है तो वह प्राइवेसी का हवाला देकर अपने मोबाइल कॉल रिकॉर्ड या होटल में ठहरने से जुड़ी जानकारी देने से इनकार नहीं कर सकता।

    न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए पति की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि निजता का अधिकार महत्वपूर्ण जरूर है लेकिन यह पूर्ण या असीमित अधिकार नहीं है। जब न्याय के हित और किसी मामले की सच्चाई सामने लाने की आवश्यकता हो तब इस अधिकार पर उचित और कानूनी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। अदालत का मानना था कि यदि व्यभिचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच करनी है तो संबंधित दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।

    यह मामला वर्ष 1998 में विवाह करने वाले एक दंपति से जुड़ा है जिनकी वर्ष 2000 में एक बेटी का जन्म हुआ। कुछ समय बाद पत्नी को संदेह हुआ कि उसके पति का किसी अन्य महिला के साथ विवाहेतर संबंध है। पत्नी का आरोप था कि उसका पति दूसरी महिला के साथ जयपुर के एक होटल में भी रुका था। इन आरोपों के आधार पर उसने अदालत में तलाक की याचिका दायर की और अपने दावों को साबित करने के लिए पति के कॉल डिटेल रिकॉर्ड तथा होटल में ठहरने से संबंधित दस्तावेज मंगवाने की मांग की।

    फैमिली कोर्ट ने पत्नी की मांग को उचित मानते हुए संबंधित रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए थे। इस आदेश को पति ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि इससे उसके निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा। हालांकि हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और कहा कि जनहित तथा न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता के लिए निजता के अधिकार पर आवश्यक सीमाएं लगाई जा सकती हैं। अदालत ने यह भी कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम व्यभिचार को तलाक का वैध आधार मानता है इसलिए ऐसे मामलों में आवश्यक साक्ष्य जुटाना न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पति सुप्रीम कोर्ट पहुंचा लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यदि अदालत के समक्ष किसी वैवाहिक विवाद में विवाहेतर संबंध का आरोप लगाया गया है तो संबंधित पक्ष को केवल निजता का हवाला देकर आवश्यक जानकारी छिपाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में सत्य का पता लगाने के लिए डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि निजता का अधिकार महत्वपूर्ण होते हुए भी न्यायिक जांच से ऊपर नहीं है। यदि किसी मामले में कॉल रिकॉर्ड होटल बुकिंग या अन्य डिजिटल साक्ष्य आरोपों की पुष्टि या खंडन के लिए आवश्यक हैं तो अदालत उन्हें मंगवा सकती है। यह फैसला भविष्य में तलाक और व्यभिचार से जुड़े मामलों की सुनवाई में साक्ष्यों के महत्व को और अधिक मजबूत करेगा।

  • महाराष्ट्र में भी लागू होगा UCC…. ड्राफ्ट तैयार करने के सरकार बनाएगी कमेटी

    महाराष्ट्र में भी लागू होगा UCC…. ड्राफ्ट तैयार करने के सरकार बनाएगी कमेटी


    मुंबई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) में यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code- UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार एक अहम कदम उठाने जा रही है. जानकारी के मुताबिक कानून का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए जल्द ही एक कमेटी का गठन किया जाएगा.

    अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि महाराष्ट्र सरकार (Government of Maharashtra) यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए कानून का ड्राफ्ट तैयार करने हेतु दो हफ्ते के भीतर एक कमेटी बना सकती है. उन्होंने जानकारी दी कि कमेटी के गठन और इसके काम करने के दायरे को अभी फाइनल किया जाना बाकी है।

    जानकारी के मुताबिक एक अधिकारी ने जानकारी दी कि यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए कानून का ड्राफ्ट तैयार करने वाली कमेटी बनाने का प्रोसेस चल रहा है और अगले दो हफ्तों के भीतर इसका गठन कर दिया जाएगा।

    बता दें कि पिछले हफ्ते ही गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने विधानसभा में जानकारी दी थी कि महाराष्ट्र में यूसीसी लागू किया जाएगा और इस कानून का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अगुवाई में कमेटी बनाई जाएगी.

    यूनिफॉर्म सिविल कोड एक संवैधानिक निर्देश है, जिसका मकसद सभी नागरिकों के लिए शादी, तलाक, विरासत और एडॉप्शन जैसे मामलों में एक समान कानून लागू करना है. कानून की नजर में सब एक समान होते हैं. शादी, तलाक, एडॉप्शन, उत्तराधिकार, विरासत लेकिन सबसे बढ़कर लैंगिक समानता वो कारण है, जिस वजह से यूनिफार्म सिविल कोड की जरूरत महसूस की जाती रही है।

    यूसीसी का मतलब है कि शादी, तलाक, बच्चा गोद लेने और संपत्ति के बंटवारे जैसे मामलों में सभी नागरिकों पर एक समान कानून लागू हो, चाहे उनका धर्म या जाति कुछ भी हो. जिस राज्य में समान नागरिक संहिता लागू होगी, वहां इन मामलों में सभी धर्मों के लोगों के लिए एक ही कानूनी व्यवस्था लागू होगी।

  • Monsoon: कहीं मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त -व्यस्त.. तो कहीं बूंदाबांदी

    Monsoon: कहीं मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त -व्यस्त.. तो कहीं बूंदाबांदी


    नई दिल्ली
    । देश के लगभग 95 फीसदी क्षेत्रों में पहुंचा दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) कहीं आंधी-तूफान (Thunderstorm) और मूसलाधार बौछारों (Torrential downpours) से कहर बरपा रहा है तो कहीं बूंद-बूंद के लिए तरसा रहा है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से लेकर पूर्वी भारत के ओडिशा, पश्चिम के गुजरात और मध्य के मुंबई में आफत की बारिश हो रही है। हिमाचल में फिर बादल फटा है, जिसके बाद पानी के साथ आए मलबे में कई वाहन दब गए। मुंबई में जल प्रलय जैसे हालात हो गए हैं और पांच घंटे के भीतर ही 70 मिमी तक वर्षा हुई है। वहीं, दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में बादल मंडरा तो रहे हैं, लेकिन बूंदा-बांदी से ज्यादा बरस नहीं रहे।

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, बीते 24 घंटों में जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, असम, नागालैंड और कर्नाटक के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई है। ओडिशा, गुजरात, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कोंकण, मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ में बहुत भारी बारिश (12-20 सेमी) हुई है। वहीं, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी राजस्थान और मध्य महाराष्ट्र में 60-125 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आए तूफान ने तबाही मचाई है। जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, मध्य प्रदेश, मराठवाड़ा और गुजरात राज्य में कुछ जगहों पर 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चली हैं। मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी देते हुए रेड अलर्ट जारी किया है।

    आदि कैलाश यात्रा की गई निलंबित
    मानसूनी बारिश में भूस्खलन के जोखिम और श्रद्धालुों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा को निलंबित कर दिया गया है। धारचुला के एसडीएम आशीष जोशी ने बताया कि 1 मई को यात्रा शुरू होने के दो महीनों के अंदर 52,441 तीर्थयात्रियों ने आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन किए। उन्होंने कहा कि आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट अब आगे के आदेशों के बाद ही जारी किए जाएंगे। यात्रा रोके जाने से पहले, एक जुलाई को आखिरी बार 103 तीर्थयात्रियों को परमिट जारी किए गए थे।

    मुंबई में जल प्रलय जैसे हालात, और बारिश की चेतावनी जारी
    देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के कई इलाके भारी बारिश के कारण जलमग्न हो गए हैं। शुक्रवार को पांच घंटे की झमाझम बरसात ने जलप्रलय जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। सबसे ज्यादा बांद्रा में 73.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। बीएमसी ने कहा कि शुक्रवार सुबह 8 बजे तक बीते 24 घंटों के दौरान 100 मिमी वर्षा हुई है। हालांकि, प्रशासन ने मेट्रो, उपनगरीय रेल और बस सेवा के सामान्य संचालन का दावा किया है, लेकिन यात्रियों ने कहा कि उपनगरीय ट्रेन और बसें देर से चलीं। मौसम विभाग ने और बारिश की संभावना जताई है और अलर्ट जारी किया है।

    बारिश से मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर जगह-जगह गड्डे बन जाने से पालघर के पास एक के बाद एक कम से कम 15 आपस में टकरा गए। हालांकि, इसमें किसी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है। वहीं, नांदेड़ में लगातार हो रही बारिश से बाढ़ की आशंका बढ़ गई है, जिसको देखते हुए 30 सितंबर तक राज्य आपदा मोचन बल की एक टीम को तैनात किया गया है।

    उज्जैन में शिप्रा का जलस्तर बढ़ा
    मध्य प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण शुक्रवार को उज्जैन के कई हिस्सों में गंभीर जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। भारी बारिश के बाद शिप्रा नदी का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे राम घाट के पास स्थित कई मंदिर पानी में डूब गए हैं।

    उत्तराखंड में उफान पर नदी-नाले
    उत्तराखंड में भी बारिश से हालात बदहाल होने लगे हैं। उत्तरकाशी जिले की हर्षिल घाटी में मूसलाधार बारिश के बाद तेलगाड नदी उफान पर आ गई है जिससे मलबा गंगोत्री हाईवे तक पहुंचने से पुल निर्माण के लिए रखी सामग्री मलबे में दब गई है। साथ ही वहां पर पुल की निर्माणाधीन दीवारों को भी नुकसान हुआ है। भागीरथी नदी के बाद अब तेलगाड नदी का जलस्तर बढ़ने से लोग भयभीत हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गत वर्ष भी तेलगाड के मुहाने पर भूस्खलन के कारण झील बन गई थी। तेज बारिश से इसके टूटने का खतरा बढ़ गया है।

  • बैंक ऑफ बड़ौदा ने वसूला तय सीमा से अधिक ब्याज….. RBI ने ठोका 63.60 लाख का जुर्माना

    बैंक ऑफ बड़ौदा ने वसूला तय सीमा से अधिक ब्याज….. RBI ने ठोका 63.60 लाख का जुर्माना


    नई दिल्ली।
    देश के प्रमुख सरकारी बैंकों (Public sector Banks) में शामिल बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) पर भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India-RBI) ने 63.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। केंद्रीय बैंक ने यह कार्रवाई बैंक द्वारा कुछ लोन खातों में तय सीमा से अधिक ब्याज वसूलने और KYC (Know Your Customer) नियमों का पालन नहीं करने के कारण की है। RBI के इस कदम से साफ संदेश गया है कि बैंकिंग नियमों के उल्लंघन पर किसी भी बैंक को राहत नहीं दी जाएगी, चाहे वह सरकारी बैंक ही क्यों न हो।

    क्या है मामला?
    RBI के अनुसार, यह मामला बैंक की 31 मार्च 2025 तक की वित्तीय स्थिति के निरीक्षण के दौरान सामने आया। जांच में पाया गया कि बैंक ऑफ बड़ौदा ने कुछ ग्राहकों से निर्धारित दर से अधिक ब्याज वसूला। इसके अलावा कई खातों में ग्राहकों की KYC जानकारी को तय समय सीमा के अंदर CKYCR (Central KYC Records Registry) में अपडेट नहीं किया गया, जो RBI के नियमों का उल्लंघन है।

    कारण बताओ नोटिस
    इन खामियों के सामने आने के बाद रिजर्व बैंक ने बैंक ऑफ बड़ौदा को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया और उससे स्पष्टीकरण मांगा। बैंक को लिखित जवाब देने के साथ-साथ व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने का भी अवसर दिया गया। हालांकि, RBI ने बैंक की दलीलों को संतोषजनक नहीं माना। इसके बाद 30 जून 2026 को बैंक पर 63.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश जारी कर दिया गया।

    RBI ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल नियामकीय नियमों के उल्लंघन के आधार पर की गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि बैंक और उसके ग्राहकों के बीच हुए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता पर कोई असर पड़ेगा। यानी बैंक की सामान्य बैंकिंग सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी और ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है।

    KYC नियमों का सही तरीके से पालन नहीं
    इसी कार्रवाई के तहत रिजर्व बैंक ने एक अन्य मामले में GIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड पर भी 3.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी पर KYC नियमों का सही तरीके से पालन नहीं करने का आरोप था। RBI ने नोटिस, लिखित जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई के बाद कंपनी की दलीलों को भी असंतोषजनक पाया और 24 जून 2026 को जुर्माना लगाने का आदेश जारी किया।

    बैंकिंग एक्सपर्ट का मानना है कि हाल के सालों में RBI नियमों के पालन को लेकर काफी सख्त हुआ है। KYC, ब्याज दरों की पारदर्शिता और ग्राहक हितों की सुरक्षा को लेकर केंद्रीय बैंक लगातार निगरानी बढ़ा रहा है। ऐसे में सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए RBI के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करना बेहद जरूरी हो गया है।

    बैंक ऑफ बड़ौदा पर लगाया गया यह जुर्माना ग्राहकों के लिए एक संदेश है कि बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए RBI लगातार सक्रिय है। वहीं, ग्राहकों के लिए यह राहत की बात है कि इस कार्रवाई का उनकी जमा राशि, बैंक खाते या बैंक की नियमित सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

  • देश की अथर्व्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनेगा मिडिल क्लास….2036 तक कुल उपभोक्ता खर्च में होगा 93% हिस्सा

    देश की अथर्व्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनेगा मिडिल क्लास….2036 तक कुल उपभोक्ता खर्च में होगा 93% हिस्सा


    नई दिल्ली।
    भारत (India) की अर्थव्यवस्था (Economy) आने वाले सालों में किसके दम पर आगे बढ़ेगी? इसका जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने कहा है कि भारत का मिडिल क्लास (मध्यम वर्ग) ही देश की आर्थिक वृद्धि का सबसे बड़ा इंजन बनने जा रहा है। उन्होंने बताया कि 2036 तक भारत के मिडिल क्लास और उच्च-मध्यम वर्ग (Slightly Affluent Population) का देश के कुल उपभोक्ता खर्च (Consumer Spending) में 93% हिस्सा होगा, यानी अगले एक दशक में भारत की अर्थव्यवस्था को सबसे ज्यादा ताकत इसी वर्ग की बढ़ती खरीदारी और खर्च से मिलेगी।

    फ्रांस के Aix-Marseille यूनिवर्सिटी में आयोजित प्रतिष्ठित आर्थिक सम्मेलन Rencontres Économiques d’Aix-en-Provence को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह देश का मजबूत घरेलू उपभोग (Domestic Consumption) है, जिसे मिडिल क्लास लगातार आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि जब लोग ज्यादा खर्च करते हैं, तो उद्योगों का उत्पादन बढ़ता है, रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं और पूरी अर्थव्यवस्था को नई गति मिलती है।

    निर्मला सीतारमण के अनुसार, वर्तमान में भारत की लगभग 31% आबादी मिडिल क्लास में आती है। OECD (Organisation for Economic Co-operation and Development) के अनुमान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 2030 से 2035 के बीच भारत दुनिया में मिडिल क्लास आबादी के मामले में चीन को भी पीछे छोड़ सकता है। उन्होंने बताया कि साल 1995 से 2021 के बीच भारत का मिडिल क्लास औसतन 6.3% सालाना की दर से बढ़ा है और आने वाले सालों में यह रफ्तार और तेज होने की उम्मीद है।

    वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार की वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion), जनकल्याण योजनाओं और आर्थिक सुधारों ने करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालकर मिडिल क्लास तक पहुंचने में मदद की है। उनके मुताबिक, अब तक 24.8 करोड़ (248 मिलियन) लोग बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) से बाहर आए हैं। इसके अलावा डिजिटल बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और आसान लोन सिस्टम ने लोगों की आर्थिक क्षमता को मजबूत किया है। वहीं, कई वस्तुओं पर GST दरों में कमी से भी घरेलू खर्च बढ़ाने में मदद मिली है।

    निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा कि अब आर्थिक विकास केवल दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु या चेन्नई जैसे महानगरों तक सीमित नहीं है। टियर-2 और टियर-3 शहर भी तेजी से आर्थिक गतिविधियों के नए केंद्र बन रहे हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के अनुमान के अनुसार, आने वाले सालों में 500 से अधिक भारतीय शहर नए आर्थिक हब के रूप में उभर सकते हैं। इससे देशभर में रोजगार, निवेश और उपभोग के नए अवसर पैदा होंगे।

    वित्त मंत्री ने भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षमता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत का कुशल युवा वर्ग तेजी से AI तकनीक अपना रहा है और उद्योगों को भी AI आधारित समाधान उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने बताया कि देश के MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) सेक्टर का लगभग 40% निर्यात होता है और इनमें से कई कंपनियां अब AI आधारित बिजनेस मॉडल अपना रही हैं। इससे नए रोजगार और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिल रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत आज दुनिया में सबसे अधिक AI ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और डेटा सेंटर्स वाले प्रमुख देशों में शामिल हो रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण देश की बड़ी और कुशल तकनीकी कार्यबल है, जो वैश्विक कंपनियों की जरूरतों को पूरा कर रही है।

    वित्त मंत्री का मानना है कि आने वाले सालों में भारत की आर्थिक तरक्की का सबसे बड़ा आधार उसका तेजी से बढ़ता मिडिल क्लास होगा। अगर मौजूदा रफ्तार बनी रहती है, तो 2036 तक देश की लगभग 93% उपभोक्ता खरीदारी इसी वर्ग से आएगी, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभेगी।

  • MP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह

    MP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह


    भोपाल।
    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता (Senior Congress leader) दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह राम मंदिर में चढ़ावे और दान की चोरी के मुद्दे को लेकर दो अक्टूबर (गांधी जयंती) से उज्जैन के महाकाल मंदिर (Mahakal Temple) से अयोध्या (Ayodhya) तक ‘गैर-राजनीतिक’ पदयात्रा करेंगे। सिंह ने इस बात की घोषणा भोपाल में अपने सरकारी आवास के बाहर एक बैनर लगाने के दौरान कही। उन्होंने कहा कि मैंने अपने घर के बाहर एक बैनर लगाया है, जिस पर लिखा है चंदा चोरों का प्रवेश वर्जित है। आगे उन्होंने कहा कि अब यह बैनर सभी मंदिरों के बाहर लगना चाहिए कि चंदा चोरों से सावधान।

    दरअसल सिंह ने अपने घर के बार जो बैनर लगाया उस पर लिखा है, ‘जय सिया राम। हमारी आस्था के प्रतीक भगवान श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए समूचे देश के द्वारा दिए गए चंदा के चोरों एवं चढ़ावा चोरों का मेरे निवास पर प्रवेश निषेध है।’ इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा कि वह अदालत में वाद दायर कर राम मंदिर के लिए दिया गया अपना चंदा वापस मांगेंगे क्योंकि उनके धन का दुरुपयोग हुआ है।


    ‘पदयात्रा में हर दिन चलूंगा 10 से 15 किमी पैदल’

    कांग्रेस नेता ने कहा, ‘राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी के विरोध में मैं दो अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा शुरू करूंगा। यह पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी। इसमें किसी दल का झंडा नहीं रहेगा। भगवान राम में आस्था रखने वाले और राम मंदिर में दान देने वाले सभी लोग इसमें शामिल हो सकते हैं।’ एक प्रश्न के उत्तर में सिंह ने कहा कि यात्रा की दूरी करीब एक हजार किलोमीटर है और वह प्रतिदिन 10 से 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे।


    ‘आडवाणी की रथयात्रा के दौरान दिया था चंदा’

    पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने कहा, ‘मैंने लालकृष्ण आडवाणी (वरिष्ठ भाजपा नेता) की रथयात्रा के दौरान चंदा दिया था क्योंकि मुझे भगवान राम और मंदिर पर आस्था है। उस पहले अभियान में एकत्र किए गए चंदे का आज तक कोई हिसाब नहीं दिया गया। उच्चतम न्यायालय के फैसले (जिससे मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ) के बाद फिर से चंदा अभियान चलाया गया।’


    ‘मुकदमा दायर करते हुए वापस मांगूंगा चंदा’

    उन्होंने कहा, ‘मैंने तय किया है कि अयोध्या में मुकदमा दायर करूंगा कि मेरे द्वारा दिया गया चंदा गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया। मैं अपना चंदा वापस चाहता हूं।’ सिंह का यह बयान राम मंदिर में चढ़ावे और कीमती सामान की कथित चोरी के आरोपों के संदर्भ में आया, जिनकी जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है।


    ‘महाकाल मंदिर के पास की जमीन RSS को दी गई थी’

    सिंह ने दावा किया कि जब दूसरी बार विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने चंदा अभियान चलाया तो उन्होंने संगठन पर भरोसा नहीं होने के कारण उसमें योगदान नहीं दिया और सीधे 1 लाख 11 हजार रुपए का दान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह राम मंदिर में चढ़ावे और कीमती सामान की चोरी हुई है, उसी तरह उज्जैन में भी महाकाल मंदिर के पास की एक बहुमूल्य भूमि भाजपा की सुंदरलाल पटवा सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को दे दी थी।


    ‘होटल के लिए अब उस स्कूल को गिराया जा रहा’
    सिंह ने आगे कहा, ‘मेरी सरकार आने के बाद मैंने इस पर आपत्ति जताई थी।’ उन्होंने आरोप लगाया कि अब वहां संचालित एक स्कूल को होटल बनाने के लिए गिराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वहां ठहरने वाले लोगों को स्वत: वीआईपी दर्शन की सुविधा मिल जाती है और संबंधित संगठन वहां से मिले दान का उपयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसकी भी जांच की मांग की जाएगी।

  • MP: मैहर के इस गांव में कुएं में गिरे बैल को बचाने की कोशिश में 3 लोगों की मौत, एक गंभीर

    MP: मैहर के इस गांव में कुएं में गिरे बैल को बचाने की कोशिश में 3 लोगों की मौत, एक गंभीर


    मैहर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मैहर जिले (Maihar district) के अमरपाटन थाना (Amarpatan Police Station) क्षेत्र से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। यहां के ग्राम खरामसेड़ा (Village Kharamseda) के अहिरान टोला में शुक्रवार की रात कुएं में गिरे एक बैल की जान बचाने के चक्कर में तीन घरों के चिराग हमेशा के लिए बुझ गए।

    दरअसल बैल को बाहर निकालने की कोशिश में चार ग्रामीण एक-एक कर कुएं की गहराई में उतरे, लेकिन भीतर मौजूद जहरीली गैस और ऑक्सीजन की भारी कमी के चलते चारों अचेत हो गए। ग्रामीणों ने भारी मशक्कत के बाद चारों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि एक की हालत नाजुक बनी हुई है।

    इस हादसे की शुरुआत शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे उस वक्त हुई, जब गांव के रामनिवास कुशवाहा के घर के पास बने करीब 35 फीट गहरे कुएं में अचानक एक बैल गिर गया। बैल को कुएं में तड़पता देख गांव के दो युवक उसे सुरक्षित बाहर निकालने की नीयत से रस्सी के सहारे गहराई में उतरे और कुएं की तली में पहुंचते ही ऑक्सीजन ना मिल पाने के कारण दोनों का दम घुटने लगा और कुछ ही देर में ऊपर खड़े लोगों को उनकी आवाज आना बंद हो गई। उन्हें अचेत होते देख, बाहर खड़े दो अन्य ग्रामीण भी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के उन्हें बचाने के लिए फौरन कुएं में कूद गए, लेकिन अफसोस वे भी उसी जहरीली हवा की चपेट में आकर वहीं निढाल हो गए।


    रस्सियों और कांटों के सहारे ग्रामीणों ने किया रेस्क्यू

    चार लोगों के नीचे उतरने के बाद भी जब काफी देर तक जब कुएं के भीतर से कोई हलचल नहीं हुई और किसी की आवाज बाहर नहीं आई, तो कुएं के मुहाने पर खड़े ग्रामीणों के होश उड़ गए और किसी अनहोनी की आशंका से वहां चीख-पुकार मच गई। ग्रामीणों ने बिना वक्त गंवाए खुद ही बचाव अभियान शुरू किया। रस्सियों, हुक और कांटों के सहारे चारों अचेत लोगों को भारी मशक्कत के बाद एक-एक कर कुएं से बाहर निकाला गया। इसी बीच डायल-112 पुलिस को भी सूचना दी गई। रात करीब 9 बजे सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और चारों को तत्काल सिविल अस्पताल अमरपाटन ले जाया गया।


    अस्पताल पहुंचते ही तीन को मृत घोषित किया

    अमरपाटन सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद तीन ग्रामीणों को मृत घोषित कर दिया, जिससे अस्पताल परिसर में मौजूद परिजनों में कोहराम मच गया। मृतकों की पहचान कृष्ण कुमार यादव (28 वर्ष) पिता रामदास यादव, वीरेंद्र यादव (47 वर्ष) पिता जगदीश यादव और राहुल यादव (34 वर्ष) पिता मोतीलाल यादव के रूप में हुई है। ये तीनों मृतक अहिरान टोला, खरमसेड़ा के ही रहने वाले थे। वहीं, चौथे ग्रामीण रामचंद्र यादव की हालत गंभीर बनी हुई है, जिनका डॉक्टरों की देखरेख में आईसीयू में इलाज जारी है।


    कुएं में भरा था घुटनों तक पानी, पीएम रिपोर्ट का इंतजार

    बताया जा रहा है कि कुआं लगभग 35 फीट गहरा है, जिसमें घुटनों तक पानी भरा हुआ था। लेकिन लंबे समय से बंद रहने या हवा का प्रवाह न होने के कारण कुएं के निचले हिस्से में जानलेवा कार्बन मोनोऑक्साइड या अन्य जहरीली गैसें जमा हो गई थीं। अमरपाटन एसडीओपी ख्याति मिश्रा ने बताया कि ‘रामनिवास कुशवाहा के कुएं में एक बैल गिर गया था, जिसे बचाने के लिए चार लोग नीचे उतरे थे। समय पर वापस नहीं आने पर ग्रामीणों ने उन्हें बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, जहां तीन लोगों की मौत हो चुकी है और एक का इलाज जारी है। प्रथम दृष्टया मामला दम घुटने का लग रहा है, हालांकि वास्तविक कारणों का स्पष्ट खुलासा पोस्टमार्टम (पीएम) रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।’

  • पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ की जयपुर में हुई एंजियोप्लास्टी…. ब्लड ग्रुप को लेकर बड़ी चूक

    पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ की जयपुर में हुई एंजियोप्लास्टी…. ब्लड ग्रुप को लेकर बड़ी चूक


    जयपुर।
    पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Former Vice President Jagdeep Dhankhar) शुक्रवार को स्वास्थ्य जांच (Health Check-up) के लिए जयपुर पहुंचे, जहां निजी अस्पताल में उनकी सफल एंजियोप्लास्टी (Angioplasty) की गई। लेकिन इस पूरे मेडिकल प्रोटोकॉल के बीच एक ऐसी चूक सामने आई, जिसने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। धनखड़ के लिए रिजर्व रखे जाने वाले ब्लड ग्रुप को लेकर जयपुर CMHO कार्यालय से बड़ी गलती हो गई। राहत की बात यह रही कि समय रहते यह त्रुटि पकड़ में आ गई और संशोधित पत्र जारी कर स्थिति संभाल ली गई।


    ब्लड ग्रुप की गलती से मचा हड़कंप

    पूर्व उपराष्ट्रपति के जयपुर दौरे को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से विशेष मेडिकल प्रोटोकॉल लागू किया गया था। उनके निजी सचिव की ओर से भेजे गए आधिकारिक प्रोटोकॉल लेटर में स्पष्ट रूप से A पॉजिटिव ब्लड ग्रुप रिजर्व रखने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन जयपुर CMHO कार्यालय ने SMS अस्पताल प्रशासन को जो पत्र भेजा, उसमें गलती से O नेगेटिव ब्लड ग्रुप रिजर्व रखने का उल्लेख कर दिया।

    मामला सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग में हलचल मच गई। अधिकारियों ने तत्काल पत्र में सुधार कराया और संशोधित निर्देश SMS अस्पताल को भेजे गए। यदि यह गलती समय रहते नहीं पकड़ी जाती तो गंभीर स्थिति पैदा हो सकती थी।


    CMHO बोले- टाइपिंग मिस्टेक थी

    जयपुर CMHO डॉ. रवि शेखावत ने इस पूरे मामले को टाइपिंग की त्रुटि बताया। उन्होंने कहा कि O नेगेटिव ब्लड ग्रुप पूर्व उपराष्ट्रपति की पत्नी का है, जो गलती से धनखड़ के नाम के सामने दर्ज हो गया। जैसे ही यह त्रुटि सामने आई, तुरंत उसे ठीक कर नया पत्र जारी कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल में किसी तरह की चिकित्सा प्रक्रिया प्रभावित नहीं हुई।


    एयरपोर्ट से सीधे अस्पताल पहुंचे धनखड़

    पूर्व उपराष्ट्रपति शुक्रवार सुबह जयपुर एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से सीधे जवाहर सर्किल स्थित निजी अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में उन्हें प्रारंभिक जांच के लिए भर्ती किया गया, जहां विभिन्न कार्डियक और रूटीन मेडिकल टेस्ट किए गए। चिकित्सकों की सलाह के बाद दोपहर में उनकी एंजियोग्राफी की गई और इसके बाद एंजियोप्लास्टी का निर्णय लिया गया।

    सूत्रों के अनुसार, धनखड़ के हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज मिलने के बाद दो स्टेंट लगाए गए। पूरा कार्डियक प्रोसीजर वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. समीन के. शर्मा की निगरानी में संपन्न हुआ। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक उनकी स्थिति स्थिर है और चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज जारी है।


    राजनीतिक नेताओं ने भी जाना हालचाल

    पूर्व उपराष्ट्रपति के अस्पताल में भर्ती होने की सूचना मिलते ही राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने अस्पताल पहुंचकर धनखड़ से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। नेताओं ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।


    पहले भी हो चुका है कार्डियक उपचार

    यह पहला मौका नहीं है जब जगदीप धनखड़ को हृदय संबंधी उपचार कराना पड़ा हो। इससे पहले मार्च 2025 में भी उन्हें हृदय संबंधी समस्या के चलते नई दिल्ली स्थित AIIMS में भर्ती कराया गया था, जहां उनका कार्डियक प्रोसीजर किया गया था। वहीं 12 जनवरी 2025 को अचानक तबीयत बिगड़ने और बेहोशी की शिकायत के बाद भी उन्हें AIIMS में भर्ती कर MRI सहित कई महत्वपूर्ण जांचें कराई गई थीं। चिकित्सकों की सलाह पर वे नियमित कार्डियक फॉलो-अप कराते रहे हैं।


    5 जुलाई को दिल्ली लौटेंगे

    मेडिकल प्रक्रिया के बाद धनखड़ फिलहाल चिकित्सकों की निगरानी में जयपुर में ही रहेंगे। उनके कार्यक्रम के अनुसार वे 3 और 4 जुलाई को जयपुर में रुकेंगे। इस दौरान उनका ठहराव लोकभवन में प्रस्तावित है। स्वास्थ्य में सुधार होने पर वे 5 जुलाई की सुबह करीब 8 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगे।


    एक गलती जिसने खड़े कर दिए बड़े सवाल

    पूर्व उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति के मेडिकल प्रोटोकॉल में ब्लड ग्रुप जैसी बुनियादी जानकारी का गलत दर्ज होना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि अधिकारियों ने इसे महज टाइपिंग मिस्टेक बताया और समय रहते सुधार भी कर लिया, लेकिन इस घटना ने यह जरूर दिखा दिया कि वीवीआईपी प्रोटोकॉल में छोटी सी लापरवाही भी बड़े जोखिम का कारण बन सकती है। फिलहाल राहत की बात यह है कि धनखड़ की एंजियोप्लास्टी सफल रही है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

  • केतन हत्याकांड में जांच तेज, दूसरा मोबाइल बरामद गवाहों के बयान से बढ़ीं सिया और चेतन की मुश्किलें

    केतन हत्याकांड में जांच तेज, दूसरा मोबाइल बरामद गवाहों के बयान से बढ़ीं सिया और चेतन की मुश्किलें


    नई दिल्ली। पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। पुलिस का दावा है कि अब उसके पास ऐसे अहम सबूत मौजूद हैं जो इस मामले को और मजबूत बना रहे हैं। जांच के दौरान दूसरा मोबाइल फोन बरामद किया गया है जबकि कुछ महत्वपूर्ण गवाह भी सामने आए हैं। इन नए साक्ष्यों के बाद पुलिस का कहना है कि यह साबित करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं कि केतन अग्रवाल की मौत हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या थी। मामले में मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं।

    पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने बताया कि जांच कई स्तरों पर आगे बढ़ रही है। बरामद किए गए दूसरे मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि दोनों आरोपियों के बीच हुई बातचीत और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा सके। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि केतन अग्रवाल ने सिया गोयल को कितनी आर्थिक मदद दी थी और दोनों के बीच पैसों का लेनदेन किस स्तर तक हुआ था। इस संबंध में कई लोगों से पूछताछ की जा रही है और डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।

    इसी बीच पुणे की अदालत ने दोनों आरोपियों सिया गोयल और चेतन चौधरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद दोनों को अदालत में पेश किया गया था। अभियोजन पक्ष ने तीन दिन की अतिरिक्त पुलिस रिमांड की मांग करते हुए दलील दी कि आरोपियों के मोबाइल फोन से कोड भाषा में हुई बातचीत मिली है जिसका पूरा अर्थ समझने और साजिश के अन्य पहलुओं का खुलासा करने के लिए आगे पूछताछ जरूरी है। हालांकि अदालत ने यह मांग खारिज करते हुए दोनों को 16 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

    पुलिस का आरोप है कि 18 जून को पुणे जिले के लोहागढ़ किले में केतन अग्रवाल को खाई में धक्का देकर उसकी हत्या की गई थी। शुरुआत में इस घटना को दुर्घटना बताया गया था लेकिन जांच के दौरान मिले परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और आरोपियों के बदलते बयानों ने हत्या की आशंका को मजबूत कर दिया। इसी आधार पर पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है।

    जांच एजेंसियों ने लोहागढ़ किले और आसपास के सभी महत्वपूर्ण स्थानों का दोबारा निरीक्षण किया। घटनास्थल का विस्तृत पंचनामा तैयार किया गया और मुख्य आरोपी सिया गोयल को भी उन स्थानों पर ले जाकर घटनाक्रम की पुष्टि करने का प्रयास किया गया। पुलिस ने घटना वाले दिन पहने गए सिया के कपड़ों को भी जब्त कर लिया है जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। इसके अलावा उन स्थानों की भी जांच की गई जहां सिया और चेतन के एक साथ जाने की जानकारी सामने आई है। जांच अधिकारियों को संदेह है कि दोनों ने हत्या की योजना पहले से बनाई थी और संभव है कि अलग अलग स्थानों पर उसका पूर्वाभ्यास भी किया गया हो।

    पुलिस ने सिया गोयल के लोनावला स्थित घर की भी तलाशी ली है जहां से कुछ अहम जानकारियां मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। जांच एजेंसियां दोनों आरोपियों का लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की तैयारी भी कर रही हैं क्योंकि पूछताछ के दौरान उनके बयानों में कई विरोधाभास सामने आए हैं। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह परीक्षण कराया जाएगा। पुलिस का कहना है कि गवाहों के बयान डिजिटल साक्ष्य फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य तकनीकी प्रमाणों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां तेजी से जुड़ रही हैं और जांच अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है।