

दिनभर के कारोबार में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों ने बाजार को सबसे अधिक सहारा दिया। इस सेक्टर में लगातार खरीदारी देखने को मिली, जिसके कारण प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। मजबूत निवेश के चलते तकनीकी क्षेत्र बाजार की बढ़त का प्रमुख आधार बना और निवेशकों ने इस सेक्टर में विशेष रुचि दिखाई।
दूसरी ओर बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के कुछ प्रमुख शेयरों पर दबाव बना रहा। कई बड़े बैंकिंग शेयर गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए, जिससे बाजार की बढ़त कुछ सीमित रही। इसके बावजूद अन्य क्षेत्रों में हुई खरीदारी ने इस कमजोरी की भरपाई कर दी और प्रमुख सूचकांकों को सकारात्मक दायरे में बनाए रखा।
कारोबार की शुरुआत भी बेहद उत्साहजनक रही थी। शुरुआती घंटों में सेंसेक्स में 650 अंकों तक की तेजी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 24,375 के स्तर के करीब पहुंच गया। आईटी, मेटल, फार्मा और केमिकल सेक्टर में मजबूत खरीदारी के चलते शुरुआती कारोबार में बाजार ने शानदार प्रदर्शन किया। हालांकि दिन बढ़ने के साथ निवेशकों ने मुनाफावसूली भी की, जिससे शुरुआती बढ़त कुछ कम हुई, लेकिन बाजार अंत तक मजबूती बनाए रखने में सफल रहा।
विदेशी संकेतों ने भी घरेलू बाजार के माहौल को समर्थन दिया। वैश्विक बाजारों में ब्याज दरों को लेकर बनी उम्मीदों और निवेशकों की सकारात्मक धारणा का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। इसी कारण दिनभर निवेशकों का रुझान खरीदारी की ओर बना रहा और कई प्रमुख शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई।
मुद्रा बाजार में भी भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में रुपये में मजबूती दर्ज होने से आयात आधारित कंपनियों और निवेशकों का भरोसा बढ़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की स्थिरता और वैश्विक संकेत निकट भविष्य में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निकट अवधि में निवेशकों को सतर्क आशावादी रणनीति अपनानी चाहिए। उनका मानना है कि निफ्टी का 24,000 के ऊपर बने रहना तेजी के रुख को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। यदि बाजार 24,300 और उसके ऊपर के स्तर को पार करने में सफल रहता है तो आगे और मजबूती देखने को मिल सकती है। वहीं, किसी भी गिरावट की स्थिति में 24,050 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो बाजार में सीमित सुधार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों ने यह भी सलाह दी है कि निवेशक वैश्विक तकनीकी शेयरों में चल रही गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतों पर लगातार नजर बनाए रखें, क्योंकि आने वाले कारोबारी सत्रों में इन्हीं कारकों का बाजार की चाल पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

नगर पालिका के सफाई कर्मचारी प्रतिदिन शहर के सभी वार्डों घरों बाजारों और सार्वजनिक स्थानों से कचरा एकत्र करते हैं। सामान्य दिनों में करीब छह ट्रैक्टर ट्रॉलियों और चार बड़े डंपरों के माध्यम से इस कचरे को जतरापुरा डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचाया जाता है। लेकिन गुरुवार की तेज बारिश के बाद डंपिंग स्थल तक जाने वाला मार्ग पूरी तरह दलदल बन गया जिससे वाहन बीच रास्ते में फंसने लगे और कचरा ले जाना असंभव हो गया। मजबूरी में सभी वाहनों को नगर पालिका परिसर में ही खड़ा करना पड़ा।
यह समस्या पहली बार सामने नहीं आई है। इससे पहले भी बारिश के मौसम में इसी तरह की स्थिति बन चुकी है जब डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचने का रास्ता बंद हो गया था और कई दिनों तक कचरे से भरे वाहन नगर पालिका परिसर में खड़े रहे थे। हालांकि उस समय बारिश थमने के बाद रास्ता खुल गया था और कचरे का निस्तारण किया जा सका था। इस बार भी पूरे मार्ग में कीचड़ होने से वाहन आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं और फिलहाल कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।
विदिशा नगर पालिका पहले सोठिया क्षेत्र के पास कचरा डंप करती थी लेकिन ग्रामीणों के विरोध और मानव अधिकार आयोग में शिकायत के बाद वहां कचरा डालना बंद कर दिया गया। इसके बाद जतरापुरा और मिर्जापुर क्षेत्रों को अस्थायी डंपिंग स्थल के रूप में उपयोग किया जाने लगा। अब लगातार बारिश के कारण इन स्थानों तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है जिससे नगर पालिका के सामने कचरा प्रबंधन की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।
नगर पालिका के कर्मचारियों का कहना है कि यदि रास्ता जल्द नहीं खुला तो शहर से निकलने वाले दैनिक कचरे का उठाव प्रभावित हो जाएगा। इससे सड़कों और मोहल्लों में गंदगी बढ़ेगी तथा मच्छरों और संक्रमणजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। बारिश के मौसम में स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखना पहले से ही चुनौतीपूर्ण होता है और ऐसे में डंपिंग ग्राउंड तक पहुंच बंद होना हालात को और गंभीर बना सकता है।
नगर पालिका में नेता प्रतिपक्ष आशीष माहेश्वरी ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक डंपिंग व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो शहर को गंभीर स्वच्छता और स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ सकता है। वहीं नगर पालिका अधिकारियों का कहना है कि स्थायी डंपिंग ग्राउंड के लिए जिला प्रशासन से भूमि की मांग की गई है। फिलहाल दूसरी जगह तलाशने के साथ स्थायी समाधान की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं ताकि भविष्य में बारिश के दौरान ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई परिषद की बैठक में भारतीय सेना के लिए कई महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों को स्वीकृति दी गई। इनमें ‘आकाश तरंग’ एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल, वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम, टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम तथा जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन प्रणाली प्रमुख हैं। इन सभी प्रणालियों का उद्देश्य आधुनिक युद्ध में उभरती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करना है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार ‘आकाश तरंग’ प्रणाली विशेष रूप से दुश्मन के ड्रोन हमलों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वहीं मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल पैदल सेना को दुश्मन के आधुनिक टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के विरुद्ध अधिक प्रभावी बनाएगी। मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल मध्यम दूरी तक विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करेगी, जबकि वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम कम दूरी के हवाई लक्ष्यों को तेजी से निष्क्रिय करने में सक्षम होगा।
टैंकों के लिए स्वीकृत एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम उनकी सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करेगा। यह प्रणाली युद्धक्षेत्र में आने वाले मिसाइल और रॉकेट जैसे खतरों का समय रहते पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने में सहायक होगी। इसके साथ ही जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और सटीक लक्ष्यभेदन अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इन प्रणालियों से सेना की मारक क्षमता और परिचालन दक्षता दोनों में वृद्धि होने की उम्मीद है।
भारतीय नौसेना के लिए भी कई उन्नत परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें मल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन, नेवल शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम तथा इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के लिए लैंड बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी की स्थापना शामिल है। इन परियोजनाओं से समुद्री निगरानी, नौसैनिक अभियानों और आधुनिक युद्धपोतों की तकनीकी क्षमता को मजबूती मिलेगी। अत्याधुनिक सेंसर से लैस अनमैन्ड एरियल सिस्टम समुद्री क्षेत्र में निगरानी और स्थितिजन्य जागरूकता को और अधिक प्रभावी बनाएगा।
वायुसेना के लिए फिक्स्ड-विंग आधारित हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट प्रणाली को भी मंजूरी दी गई है। यह अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म लंबे समय तक ऊंचाई पर रहकर खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी, टोही, दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग जैसे मिशनों को अंजाम देने में सक्षम होगा। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों और रणनीतिक इलाकों में वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ेगी।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के लागू होने के बाद भारतीय सशस्त्र बलों की संयुक्त युद्ध क्षमता, निगरानी तंत्र, वायु एवं समुद्री सुरक्षा तथा आधुनिक तकनीकी तैयारी में उल्लेखनीय सुधार होगा। बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल और नई सैन्य चुनौतियों को देखते हुए यह निर्णय भारत की रक्षा तैयारियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

यह योजना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की तर्ज पर संचालित की जाएगी। इसके तहत पात्र लाभार्थी देशभर में सूचीबद्ध अस्पतालों में बिना नकद भुगतान के उपचार प्राप्त कर सकेंगे। योजना के अंतर्गत मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं और उपचार संबंधी लाभ आयुष्मान भारत योजना के अनुरूप होंगे, जिससे शिक्षकों और उनके परिवारों को व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध हो सकेगी।
योजना के प्रभावी और पारदर्शी संचालन के लिए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है। पात्र लाभार्थियों का पंजीकरण, सत्यापन और अनुमोदन ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए विशेष डेटा संग्रह पोर्टल विकसित किया गया है, जहां शिक्षक अपना विवरण दर्ज कर रहे हैं। डिजिटल प्रणाली अपनाने का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है, ताकि पात्र लाभार्थियों को बिना अनावश्यक विलंब के योजना का लाभ मिल सके।
बेसिक शिक्षा विभाग के लिए तैयार किए गए पोर्टल पर अब तक लाखों लाभार्थी अपना विवरण दर्ज करा चुके हैं। आवेदन के बाद संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा जानकारी का सत्यापन किया जाएगा, जबकि अंतिम स्वीकृति जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के स्तर पर दी जाएगी। अनुमोदन के पश्चात लाभार्थियों का विवरण राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली से एकीकृत किया जाएगा, जिसके बाद आधार आधारित ई-केवाईसी पूरी कर डिजिटल कार्ड डाउनलोड किया जा सकेगा।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए भी ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस श्रेणी के शिक्षकों के आवेदन का सत्यापन संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य करेंगे और अंतिम अनुमोदन जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा प्रदान किया जाएगा। इसके बाद लाभार्थियों का डेटा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की प्रणाली से जोड़ा जाएगा। सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शिक्षक डिजिटल कार्ड प्राप्त कर योजना के तहत कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से शिक्षकों और उनके परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान आर्थिक राहत मिलेगी। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच अधिक आसान और प्रभावी बनेगी। डिजिटल व्यवस्था के कारण आवेदन से लेकर लाभ प्राप्त करने तक की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुविधाजनक होगी।
सरकार इस योजना का दायरा आगे और बढ़ाने की तैयारी भी कर रही है। आगामी चरण में उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों और कर्मचारियों को भी योजना से जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए अलग ऑनलाइन डेटा संग्रह पोर्टल विकसित किया जाएगा, जिससे विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं कर्मचारी भी इस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का लाभ प्राप्त कर सकें। इस विस्तार के बाद राज्य में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े बड़ी संख्या में कार्मिकों को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य पूरा किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार पाल कॉलोनी की घरेलू बिजली लाइन टूट जाने के कारण पूरे क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति पिछले चार दिनों से बंद थी। लगातार अंधेरे में रहने से लोगों को पीने के पानी घरेलू कामकाज और गर्मी से राहत पाने जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा था। सबसे ज्यादा परेशानी उन छात्राओं को हो रही थी जो परीक्षा और नियमित पढ़ाई की तैयारी कर रही थीं। बिजली नहीं होने के कारण रात में पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही थी और मोबाइल फोन तक चार्ज नहीं हो पा रहे थे जिससे ऑनलाइन पढ़ाई और जरूरी संपर्क भी बाधित हो रहे थे।
प्रदर्शन में शामिल छात्राओं ने बताया कि वे समय पर बिजली बिल जमा करती हैं लेकिन इसके बावजूद विभाग उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा था। उन्होंने कई बार बिजली वितरण कंपनी के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई और जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों को फोन भी किए लेकिन किसी ने समस्या का समाधान नहीं किया। उनका आरोप था कि कई अधिकारी फोन तक नहीं उठा रहे थे और शिकायतों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था। इसी उपेक्षा से नाराज होकर छात्राओं ने सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन करने का फैसला लिया।
गुरुवार रात प्रियंका लोधी सहित दर्जनभर छात्राएं बिजली कंपनी के कार्यालय पहुंचीं और मुख्य मार्ग पर बैठकर चक्काजाम शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने साफ कहा कि जब तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होगी तब तक वे सड़क से नहीं हटेंगी। अचानक हुए प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और करीब आधे घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। स्थानीय लोगों ने भी छात्राओं की मांगों का समर्थन करते हुए विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन भी सक्रिय हो गया। एसडीएम ममता शाक्य के निर्देश पर पुलिस और बिजली विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने छात्राओं से बातचीत कर उन्हें जल्द समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया। इसके साथ ही बिजली कर्मचारियों ने तत्काल टूटी लाइन की मरम्मत का काम शुरू कर दिया। जैसे ही मरम्मत कार्य शुरू हुआ छात्राओं ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विभाग ने शुरुआती शिकायतों पर ही कार्रवाई कर दी होती तो लोगों को चार दिनों तक अंधेरे में नहीं रहना पड़ता और सड़क पर उतरकर विरोध करने की नौबत भी नहीं आती। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आम लोगों की समस्याओं का समाधान आखिर शिकायतों से होगा या फिर प्रदर्शन के बाद ही प्रशासन और विभाग जागेंगे।

जानकारी के अनुसार मणिखेड़ा गांव निवासी 40 वर्षीय माथुर जाटव पुत्र भरोसा जाटव शुक्रवार सुबह अपने खेत में सिंचाई करने के लिए पहुंचे थे। खेत में लगी बोरवेल से पानी निकालकर फसल की सिंचाई की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान अचानक बोरवेल की विद्युत व्यवस्था में करंट दौड़ गया और माथुर जाटव उसकी चपेट में आ गए। तेज करंट लगने से वह मौके पर ही बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। खेत में मौजूद लोगों को जब घटना का पता चला तो तुरंत परिजनों और आसपास के ग्रामीणों को सूचना दी गई।
घटना की खबर मिलते ही परिवार के सदस्य और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर किसान को तत्काल शिवपुरी मेडिकल कॉलेज पहुंचाया लेकिन वहां चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। किसान की असमय मौत की खबर मिलते ही अस्पताल में मौजूद परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हो गया।
माथुर जाटव खेती कर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। उनकी अचानक हुई मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीणों ने बताया कि वह मेहनती और सरल स्वभाव के किसान थे तथा रोज की तरह खेत में सिंचाई करने गए थे लेकिन विद्युत करंट ने उनकी जान ले ली। गांव के लोगों का कहना है कि खेतों में लगे बोरवेल और बिजली कनेक्शनों की नियमित जांच नहीं होने से इस तरह के हादसे लगातार सामने आते रहते हैं। उनका कहना है कि समय रहते विद्युत उपकरणों की जांच और रखरखाव किया जाए तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
घटना की सूचना मिलने के बाद मेडिकल कॉलेज चौकी पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में किसान की मौत का कारण करंट लगना माना गया है लेकिन पुलिस यह भी पता लगा रही है कि विद्युत व्यवस्था में करंट किस वजह से आया और कहीं किसी प्रकार की तकनीकी लापरवाही तो इस हादसे का कारण नहीं बनी।
इस हादसे ने एक बार फिर खेतों में उपयोग होने वाली विद्युत व्यवस्थाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को सिंचाई के दौरान बिजली से जुड़े उपकरणों का उपयोग पूरी सावधानी के साथ करना चाहिए और समय समय पर वायरिंग मोटर तथा बोरवेल कनेक्शन की जांच करानी चाहिए ताकि ऐसे दर्दनाक हादसों से बचा जा सके।

जिला अस्पताल में भर्ती 32 वर्षीय संजीव परिहार ने बताया कि उनकी आठ बीघा कृषि भूमि पर खेरौना गांव के भरत रावत और हजारी रावत ने पहले कब्जा कर रखा था। करीब दो माह पहले राजस्व विभाग ने सीमांकन कराकर जमीन से कब्जा हटवाया था और उन्हें खेत का कब्जा दिलाया गया था।
संजीव के मुताबिक तीन दिन पहले उन्होंने अपनी जमीन की जुताई कराई थी। गुरुवार शाम सूचना मिली कि भरत रावत और हजारी रावत दोबारा ट्रैक्टर से उनकी जमीन जोत रहे हैं। जानकारी मिलते ही वह अपने पिता राम सिंह परिहार के साथ खेत पहुंचे और इसका विरोध किया।
आरोप है कि खेत पर पहले से मौजूद भरत रावत, हजारी रावत, राजेश रावत, बुद्धा, टिल्लू, बलवीर रावत समेत 10 से 12 लोगों ने एकजुट होकर दोनों पर हमला कर दिया। हमलावरों ने लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से पिता-पुत्र की बेरहमी से पिटाई की और उन्हें घायल अवस्था में छोड़कर मौके से फरार हो गए।
घटना के बाद परिजन दोनों घायलों को तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनका इलाज जारी है। चिकित्सकों की निगरानी में दोनों की हालत पर नजर रखी जा रही है।
तेंदुआ थाना प्रभारी नीतू सिंह धाकड़ ने बताया कि घायलों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच पूरी होने और बयानों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

प्रियदर्शन ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि फिल्म के निर्माता ने स्पष्ट रूप से यह शर्त रखी थी कि फिल्म का निर्माण तो उनके अधिकारों के तहत होगा, लेकिन निर्देशन उनके हाथों में नहीं होना चाहिए। निर्देशक के अनुसार, यह बात उनके लिए बेहद निराशाजनक थी और इसी कारण उन्होंने परियोजना से दूरी बनाने का फैसला किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अतीत में भी निर्माता की ओर से कई बार उनके प्रति सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया।
निर्देशक ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वर्ष 2000 में रिलीज हुई ‘हेरा फेरी’ के समय भी उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था। उनका दावा है कि फिल्म देखने के बाद निर्माता ने उसकी प्रस्तुति को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। प्रियदर्शन के अनुसार, उस वक्त उन्हें फिल्म के लंबे संस्करण को काफी संपादित कर छोटा करना पड़ा, ताकि इसे निर्धारित प्रारूप में रिलीज किया जा सके।
प्रियदर्शन ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में केवल अभिनेता अक्षय कुमार के आग्रह और विश्वास के कारण ‘हेरा फेरी 3’ का निर्देशन करने में रुचि दिखाई थी। उनका मानना था कि इस लोकप्रिय फ्रेंचाइजी को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है और इसे भारतीय सिनेमा की सबसे सफल कॉमेडी सीरीज में शामिल किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें फिल्म बनाने का अवसर मिलता तो वह इसे और अधिक बड़े स्तर पर प्रस्तुत करते।
निर्देशक के अनुसार, अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और परेश रावल तीनों चाहते थे कि वही फिल्म का निर्देशन करें। उन्होंने कहा कि कलाकारों का उन पर भरोसा उनके लिए महत्वपूर्ण था, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि परियोजना से अलग होना पड़ा। इस बयान के बाद फिल्म के निर्माण से जुड़े घटनाक्रम को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से ‘हेरा फेरी 3’ लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। पहले कलाकारों के फिल्म से जुड़ने और अलग होने की खबरें सामने आईं, वहीं अब निर्देशन और निर्माण को लेकर भी अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। इससे फिल्म के भविष्य और निर्माण प्रक्रिया को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है।
फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि लोकप्रिय फ्रेंचाइजी की सफलता केवल कलाकारों पर ही नहीं, बल्कि मजबूत निर्देशन और टीमवर्क पर भी निर्भर करती है। ऐसे में निर्माण से जुड़े मतभेद किसी भी बड़े प्रोजेक्ट की गति को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल दर्शकों की नजर इस बात पर टिकी है कि फिल्म से जुड़े सभी विवादों के बीच ‘हेरा फेरी 3’ की आगे की दिशा क्या होगी और निर्माण प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी।

सुनील पाल के अनुसार, शो की टीम ने उनसे संपर्क कर कार्यक्रम में शामिल होने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वह मंच पर किसी भी प्रकार की गाली-गलौज या अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उनका कहना है कि इसके जवाब में उन्हें बताया गया कि उन्हें स्वयं ऐसा करने की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन कार्यक्रम में अन्य प्रतिभागी अपनी शैली में प्रस्तुति देंगे। इसके बावजूद उन्होंने शो का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया।
फिलहाल समय रैना या उनकी टीम की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में सुनील पाल के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। हालांकि, उनके इस बयान ने दोनों कॉमेडियनों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
यह पहली बार नहीं है जब सुनील पाल ने समय रैना या उनके शो की सार्वजनिक रूप से आलोचना की हो। इससे पहले भी वह कई अवसरों पर आधुनिक स्टैंड-अप कॉमेडी में बढ़ती अभद्र भाषा और विवादित कंटेंट पर सवाल उठा चुके हैं। उनका मानना रहा है कि हास्य का उद्देश्य स्वस्थ मनोरंजन होना चाहिए और मंच पर प्रस्तुत सामग्री समाज के लिए सकारात्मक संदेश देने वाली होनी चाहिए।
इससे पहले शो के पहले सीजन को लेकर भी सुनील पाल ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर कहा था कि अश्लील भाषा और आपत्तिजनक प्रस्तुति को कॉमेडी का नाम देना उचित नहीं है। उनके अनुसार, ऐसे प्रयोग दर्शकों के बीच गलत संदेश पहुंचाते हैं और पारिवारिक मनोरंजन की परंपरा को प्रभावित करते हैं। उनके इन बयानों ने उस समय भी सोशल मीडिया पर व्यापक बहस को जन्म दिया था।
हाल के महीनों में दोनों कलाकार एक डिजिटल मनोरंजन कार्यक्रम में भी साथ दिखाई दिए थे। उस दौरान मंच पर दोनों ने एक-दूसरे पर हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणियां की थीं, लेकिन दर्शकों ने इसे उनके पुराने विवाद से जोड़कर देखा। इसके बाद भी समय-समय पर दोनों के बयानों ने यह संकेत दिया कि उनके विचारों में मतभेद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।
कॉमेडी की बदलती शैली और अभिव्यक्ति की सीमाओं को लेकर मनोरंजन जगत में लगातार चर्चा होती रही है। एक ओर कुछ कलाकार प्रयोगधर्मी और बेबाक प्रस्तुति को आधुनिक दर्शकों की पसंद बताते हैं, वहीं दूसरी ओर कई वरिष्ठ कलाकार मर्यादित और पारिवारिक हास्य को अधिक उपयुक्त मानते हैं। सुनील पाल का ताजा बयान भी इसी बहस को एक बार फिर सामने लेकर आया है। अब दर्शकों की नजर इस बात पर रहेगी कि समय रैना या उनकी टीम इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है या नहीं।