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  • KCC: पैसे की कमी से खेती पर न लगे ब्रेक… बड़े काम की है मोदी सरकार की ये योजना

    KCC: पैसे की कमी से खेती पर न लगे ब्रेक… बड़े काम की है मोदी सरकार की ये योजना


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central government) की कई योजनाएं हैं जिसके तहत लोगों को क्रेडिट कार्ड (Credit Card) मुहैया कराया जाता है। ऐसी ही एक योजना किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card) (केसीसी) है। इस योजना के तहत किसानों को अलग-अलग फसल के लिए बैंक की ओर से क्रेडिट कार्ड दिया जाता है। सरकार का मकसद है कि पैसे की कमी की वजह से किसानों की खेती या अन्य गतिविधियों पर ब्रेक ना लगे।

    कब हुई थी शुरुआत
    वैसे तो इसकी शुरुआत साल 1998 में हुई थी लेकिन समय के साथ इसे मोडिफाई किया गया। साल 2019 में, केसीसी योजना को इससे जुड़ी गतिविधियों, जैसे पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन की वर्किंग कैपिटल आवश्यकताओं को कवर करने के लिए विस्तारित किया गया था। आइए किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट समेत अन्य डिटेल से जान लेते हैं।


    कितनी है लिमिट

    लाभार्थी को संशोधित ब्याज सहायता योजना के अंतर्गत भारत सरकार बैंकों को 7% प्रति वर्ष की दर से 3 लाख रुपये तक के शार्ट टर्म वर्किंग कैपिटल लोन प्रोवाइड करने के लिए 1.5% की ब्याज सहायता प्रदान करती है। इसके अलावा, समय पर लोन चुकाने पर किसानों को 3% का त्वरित री-पेमेंट प्रोत्साहन भी दिया जाता है। इसलिए, किसानों के लिए प्रभावी ब्याज दर 4% है। केंद्रीय बजट 2025-26 में सरकार ने केसीसी के माध्यम से लिए गए लोन को संशोधित ब्याज छूट योजना (एमआईएसएस)के अंतर्गत लोन की सीमा को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की घोषणा की थी। प्रोसेसिंग चार्ज की बात करें तो 3 लाख रुपये तक के लोन पर शून्य है।


    क्या-क्या दस्तावेज हैं जरूरी

    योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज आधार कार्ड अनिवार्य है। पहचान पत्र, पता प्रमाण, भूमि दस्तावेज, फोटो और बैंक खाता विवरण होना जरूरी है। एक स्व-घोषणा पत्र भी देना होगा कि अन्य बैंक से डिफॉल्ट नहीं है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया fasalrin.gov.in या jansamarth.in पर है। वहीं, ऑफलाइन अप्लाई करने के लिए बैंक ब्रांच जाना होगा।

  • 1984 सिख विरोधी दंगे: कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को बड़ी राहत, राउज एवेन्यू कोर्ट ने किया बरी

    1984 सिख विरोधी दंगे: कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को बड़ी राहत, राउज एवेन्यू कोर्ट ने किया बरी


    नई दिल्ली। 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक अहम मामले में कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को अदालत से बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने जनकपुरी और विकासपुरी क्षेत्रों में हुई हिंसा से संबंधित मामले में उन्हें बरी कर दिया। अदालत ने यह फैसला सबूतों की कमी के आधार पर सुनाया। यह निर्णय गुरुवार को संक्षिप्त मौखिक आदेश के रूप में दिया गया, जबकि फैसले की लिखित प्रति का अब भी इंतजार किया जा रहा है।
    यह मामला 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के सिख विरोधी दंगों से जुड़ा है, जिसमें दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में व्यापक हिंसा हुई थी। इन दंगों में हजारों सिख नागरिकों की हत्या कर दी गई थी और उनकी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया गया था। सज्जन कुमार का नाम इन दंगों से जुड़े कई मामलों में सामने आता रहा है और वे वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।राउज एवेन्यू कोर्ट में जिस मामले में उन्हें बरी किया गया है, उसमें आरोप था कि सज्जन कुमार ने दिल्ली के जनकपुरी और विकासपुरी इलाकों में भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया था। अदालत में इस केस की सुनवाई पूरी होने के बाद पिछले साल दिसंबर में फैसला सुरक्षित रख लिया गया था, जिसे 22 जनवरी को सुनाया गया।

    इस मामले की जांच विशेष जांच दल SIT द्वारा की गई थी। फरवरी 2015 में SIT ने शिकायतों के आधार पर सज्जन कुमार के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थीं। पहली एफआईआर जनकपुरी इलाके से संबंधित थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि 1 नवंबर 1984 को सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या कर दी गई थी। दूसरी एफआईआर विकासपुरी की घटना से जुड़ी थी जिसमें आरोप था कि 2 नवंबर 1984 को गुरबचन सिंह को कथित तौर पर जिंदा जला दिया गया।अभियोजन पक्ष का दावा था कि इन दोनों घटनाओं के दौरान सज्जन कुमार की भूमिका भीड़ को भड़काने में रही, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को निराधार बताते हुए सबूतों की कमी की बात कही। अदालत ने सभी दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण मौजूद नहीं हैं।

    गौरतलब है कि सज्जन कुमार 1984 दंगों से जुड़े अन्य मामलों में पहले दोषी भी ठहराए जा चुके हैं और सजा काट रहे हैं। ऐसे में इस केस में बरी होने को उनके लिए एक बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है। हालांकि पीड़ित पक्ष और सिख संगठनों की ओर से इस फैसले पर नाराजगी जताए जाने की संभावना भी है।यह फैसला एक बार फिर 1984 दंगों से जुड़े मामलों में न्याय साक्ष्यों की मजबूती और लंबी न्यायिक प्रक्रिया को लेकर बहस को तेज कर सकता है। पीड़ित परिवारों के लिए यह मुद्दा आज भी बेहद संवेदनशील बना हुआ है।

  • CG: बीजापुर में नक्सलियों ने की पूर्व सरपंच की हत्या, गांव में दहशत का माहौल

    CG: बीजापुर में नक्सलियों ने की पूर्व सरपंच की हत्या, गांव में दहशत का माहौल


    बीजापुर।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बीजापुर जिले (Bijapur district) में खौफनाक घटना सामने आई है। यहां नक्सलियों (Naxalites) ने मंगलवार देर शाम को एक पूर्व सरपंच भीमा मडकम (Former Sarpanch Bhima Madkam) की निर्मम हत्या कर दी, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। पूर्व सरपंच का बुधवार को पोस्टमॉर्टम के बाद शव का अंतिम संस्कार किया जायेगा।

    मिली जानकारी के अनुसार पामेड़ थाना क्षेत्र (Pamed police station area) के कावरगट्टा गांव में हथियारबंद नक्सलियों ने पूर्व सरपंच मडकम पर उस समय गोलियां चलायी, जब वह अपने खेत में काम कर रहे थे। ग्रामीणों के मुताबिक यह नक्सलियों के द्वारा की गई हत्या है। इस हत्या के बारे में पुलिस ने कल शाम पत्रकारों को बताया था लेकिन यह जानकारी नहीं दी कि नक्सलियों के द्वारा इस घटना को अंजाम दिया गया था। चश्मदीद ग्रामीण इस हत्या को नक्सलियों के द्वारा की गई हत्या बता रहे हैं।

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, घटना के समय खेत में कुछ अन्य ग्रामीण भी मौजूद थे। नक्सली अचानक वहां पहुंचे और बिना किसी चेतावनी के भीमा मडकम को निशाना बनाया। गोली लगने के तुरंत बाद ही उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हमलावर घटनास्थल से फरार हो गए।

    पुलिस ने बताया कि पूर्व सरपंच मडकम उसी दिन दंतेवाड़ा जिले के बचेली से अपने गांव लौटे थे। गांव के नजदीक ही वह अपने खेतों पर काम कर रहे थे तभी नक्सलियों ने गोली मारकर उनकी जान ले ली। यह पहली बार नहीं है जब उन पर नक्सलियों ने हमला किया, इससे पहले भी वह एक हमले में चमत्कारिक रूप से बच गए थे। मृतक का शव कल देर शाम गांव तक लाया गया।

    इस घटना के बाद से गांव में भय और तनाव का माहौल है। इस हत्या के पीछे के ठोस कारणों का पता लगाया जा रहा है। पामेड़ थाने की पुलिस इस हत्याकांड की जांच करेगी। पुलिस के मुताबिक गांव के आसपास सुरक्षा कड़ी की गई है।

  • 26 जनवरी से पहले CM योगी ने प्रदेशवासियों को लिखा पत्र, मथुरा से संभल तक का किया जिक्र

    26 जनवरी से पहले CM योगी ने प्रदेशवासियों को लिखा पत्र, मथुरा से संभल तक का किया जिक्र

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को प्रदेश की जनता के नाम एक पत्र लिखकर राज्य में हुए व्यापक बदलावों, विकास की दिशा और भविष्य के संकल्पों को साझा किया. सीएम योगी ने ‘योगी की पाती’ शीर्षक से लिखे गए इस पत्र में उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य की छवि से निकालकर देश के विकास का ग्रोथ इंजन बनाने की यात्रा का उल्लेख किया.

    मुख्यमंत्री ने पत्र की शुरुआत प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि असीम संभावनाओं वाला हमारा प्रदेश संघर्ष और नीतिगत उदासीनता की बेड़ियों को तोड़ते हुए बीमारू राज्य से भारत के विकास का ग्रोथ इंजन बन गया है. दृढ़ संकल्प के साथ हमने कानून एवं सुशासन का राज स्थापित किया है. सत्ता के संरक्षण में पनप रहे माफिया के भय के साम्राज्य का अंत करते हुए विकास को गति दी है. निवेशक जो कभी लचर कानून व्यवस्था के नाम पर दूर भागते थे, उनमें निवेश की होड़ लगी है.

    उद्योगों का अभूतपूर्व विस्तार हुआ- सीएम योगी

    सीएम योगी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में उत्तर प्रदेश देश की आद्य सुरक्षा की रीढ़ बनकर उभरा है. ‘बीन से बाजार तक’ की व्यवस्था और रिकॉर्ड डीबीटी भुगतान से अन्नदाताओं की आय में वृद्धि हुई है. उद्योगों का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है. पलायन की पीड़ा और बेरोजगारी का दंश समाप्ति की ओर है. लेबर रिफॉर्म, डी-रेगुलेशन, एमएसएमई, कौशल विकास, स्टार्टअप और ओडीओपी ने प्रदेश को लोकल से ग्लोबल की दिशा में अग्रसर करते हुए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित किए हैं.

    अयोध्या-काशी-मथुरा से संभल तक सांस्कृतिक पुनर्जागरण की स्वर्णिम गाथा लिखी जा रही

    महिलाओं की श्रमबल भागीदारी में ऐतिहासिक वृद्धि का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों के जन्म से विवाह तक सरकार आर्थिक सहायता सुनिश्चित कर रही है. निराश्रित महिलाओं, वृद्धों एवं दिव्यांगजन के लिए पेंशन की व्यवस्था है. मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और हेल्थ-टेक के माध्यम से सेवाएं अधिक सुलभ हुई हैं. जल-थल-नभ की अद्भुत कनेक्टिविटी ने व्यापार, पर्यटन और निवेश को नई गति दी है. अयोध्या-काशी-मथुरा से संभल तक सांस्कृतिक पुनर्जागरण की स्वर्णिम गाथा लिखी जा रही है. आज हमारे त्योहारों में स्वदेशी की चमक स्पष्ट दिखाई देती है.

    सीएम योगी ने आगे कहा कि हमने जीरो पॉवर्टी लक्ष्य के साथ 6 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है. डबल इंजन सरकार ने प्रदेश को ‘बॉटलनेक से ब्रेकथ्रू’, ‘रेवेन्यू डेफिसिट से रेवेन्यू सरप्लस’ एवं ‘उपद्रव से उत्सव’ की ओर अग्रसर किया है.

    24 जनवरी को हम उत्तर प्रदेश दिवस बनाएंगे

    पत्र के अंत में सीएम योगी ने कहा कि 24 जनवरी को हम उत्तर प्रदेश दिवस मना रहे हैं. यह विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को दोहराने का समय है. हम सबके संयुक्त प्रयासों से संकल्प से सिद्धि की यह मात्रा ऐसे ही गतिशील बनी रहेगी. सभी प्रदेशवासियों को उत्तर प्रदेश दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं.

  • पाक की नापाक हरकत, LoC पर सर्विलांस कैमरे लगाते समय की गोलीबारी, भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब

    पाक की नापाक हरकत, LoC पर सर्विलांस कैमरे लगाते समय की गोलीबारी, भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब


    जम्मू।
    उत्तरी कश्मीर (North Kashmir) के कुपवाड़ा जिले (Kupwara district) के केरन सेक्टर में 20-21 जनवरी की रात भारत और पाकिस्तानी (India and Pakistan) सैनिकों के बीच गोलीबारी हुई। रक्षा सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। यह झड़प तब हुई जब 6 राष्ट्रीय राइफल्स के सैनिक केरन बाला इलाके में सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और लाइन ऑफ कंट्रोल (Line of Control) के साथ ब्लाइंड स्पॉट को खत्म करने के लिए हाई-टेक सर्विलांस कैमरे लगा रहे थे। पाकिस्तानी सैनिकों की गोलीबारी का भारतीय जवानों ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया।

    पाकिस्तानी सैनिकों ने इंस्टॉलेशन को रोकने के लिए छोटे हथियारों से दो राउंड फायरिंग की, जिसके जवाब में भारतीय पक्ष से एक, सोच-समझकर जवाबी गोली चलाई गई। हालांकि दोनों तरफ से किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन भारतीय सेना ने घने जंगल वाले इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया है, क्योंकि उन्हें शक है कि आग का इस्तेमाल घुसपैठ की कोशिश से ध्यान भटकाने के लिए किया गया हो सकता है।

    पूरे सेक्टर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, क्योंकि सेना सर्दियों के महीनों में पारंपरिक घुसपैठ के रास्तों पर नजर रखने के लिए टेक्निकल सर्विलांस को अपग्रेड कर रही है।

    इससे पहले, जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के ऊपरी इलाकों में आतंकवादियों का पता लगाने के लिए अभियान चलाया गया। इसके तीसरे दिन मंगलवार को सुरक्षा बलों ने कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। चतरू क्षेत्र के मन्द्राल-सिंहपुरा के पास सोनार गांव में रविवार को अभियान शुरू किया गया था और इस बीच हुई मुठभेड़ में एक ‘पैराट्रूपर’ शहीद हो गया तथा छिपे हुए आतंकवादियों द्वारा अचानक किए गए ग्रेनेड हमले से सात अन्य घायल हो गए।

    आतंकवादी घने जंगल में भाग गए, लेकिन खाने-पीने की चीजें, कंबल और बर्तनों सहित बड़ी मात्रा में सर्दियों के सामान से भरे उनके ठिकाने का भंडाफोड़ किया गया। जम्मू जोन के पुलिस महानिरीक्षक भीम सेन तुती और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जम्मू महानिरीक्षक आर. गोपाल कृष्ण राव सहित वरिष्ठ अधिकारी भी मुठभेड़ स्थल पर पहुंच गए तथा वे अभियान की निगरानी के लिए वर्तमान में कई सेना अधिकारियों के साथ वहीं डेरा डाले हुए हैं।

  • MP: गणतंत्र दिवस पर भोपाल में राज्यपाल, उज्जैन में CM करेंगे ध्वजारोहण, जानिए इंदौर में कौन फहराएगा तिरंगा

    MP: गणतंत्र दिवस पर भोपाल में राज्यपाल, उज्जैन में CM करेंगे ध्वजारोहण, जानिए इंदौर में कौन फहराएगा तिरंगा


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में भी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस (Republic Day) बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस दौरान प्रदेश के सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें राज्य सरकार के अलग-अलग जनप्रतिनिधि हिस्सा लेकर झंडावंदन (Flag Hoisting) करेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस बारे में जानकारी देते हुए एक पत्र जारी किया है और बताया है कि इस साल होने वाले जिलास्तरीय आयोजनों कौन से प्रतिनिधि कहां पर राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। राज्य के सभी कलेक्टरों के नाम पर जारी इस पत्र में बताया गया है कि राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय कार्यक्रमों में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उप मुख्यमंत्री, मंत्री, राज्यमंत्री और कलेक्टर किन जिला मुख्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे।

    पत्र में दी गई जानकारी के अनुसार प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल (Mangubhai Patel) भोपाल में होने वाले मुख्य समारोह में ध्वज फहराएंगे, जबकि प्रदेश के मुख्मंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) अपने गृह नगर उज्जैन में होने वाले आयोजन में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। वहीं विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर जिले में ध्वज फहराएंगे और मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करेंगे। पत्र के अनुसार 23 जिले ऐसे भी हैं, जहां पर स्थानीय कलेक्टर ही ध्वज फहराएंगे।


    किस जिले में कौन सा मंत्री फहराएगा ध्वज

    1. इंदौर- जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री
    2. सागर- राजेन्द्र शुक्ल, उप मुख्यमंत्री
    3. रतलाम- कुंवर विजय शाह, मंत्री
    4. रीवा- प्रहलाद सिंह पटेल, मंत्री
    5. छिंदवाडा- राकेश सिंह, मंत्री
    6. सिवनी- करण सिंह वर्मा, मंत्री
    7. कटनी- उदय प्रताप सिंह, मंत्री
    8. जबलपुर- सम्पतिया उईके, मंत्री
    9. बुरहानपुर- तुलसीराम सिलावट, मंत्री
    10. दतिया- एदल सिंह कंषाना, मंत्री
    11. नीमच- निर्मला भूरिया, मंत्री
    12. गुना- गोविन्द सिंह राजपूत, मंत्री
    13. खरगोन- विश्वास सारंग, मंत्री
    14. शाजापुर- नारायण सिंह कुशवाह, मंत्री
    15. आगर-मालवा- नागर सिंह चौहान, मंत्री
    16. शिवपुरी- प्रद्युम्न सिंह तोमर, मंत्री
    17. अशोकनगर- राकेश शुक्ला, मंत्री
    18. राजगढ़- चेतन्य काश्यप, मंत्री
    19. दमोह- इंदर सिंह परमार, मंत्री
    20. सीहोर- कृष्णा गौर, राज्यमंत्री
    21. खण्डवा- धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी, राज्यमंत्री
    22. मण्डला- दिलीप जायसवाल, राज्यमंत्री
    23. बड़वानी- गौतम टेटवाल, राज्यमंत्री
    24. विदिशा- लखन सिंह पटेल, राज्यमंत्री
    25. रायसेन- नारायण सिंह पंवार, राज्यमंत्री
    26. नर्मदापुरम- नरेंद्र शिवाजी पटेल, राज्यमंत्री
    27. डिण्डौरी- प्रतिमा बागरी, राज्यमंत्री
    28. अनूपपुर- दिलीप अहिरवार, राज्यमंत्री
    29. मैहर- राधा सिंह, राज्यमंत्री

    इन 23 जिलों में कलेक्टर फहराएंगे ध्वज व पढ़ेंगे CM का संदेश

    1. देवास, 2. धार, 3. झाबुआ, 4. अलीराजपुर, 5. मुरैना, 6. मन्दसौर, 7. श्योपुर, 8. भिण्ड, 9. सीधी, 10. सतना, 11. मऊगंज, 12. शहडोल, 13. उमरिया, 14. पन्ना, 15. छतरपुर, 16. टीकमगढ़, 17. निवाड़ी, 18. बैतूल, 19. हरदा, 20. सिंगरौली, 21. नरसिंहपुर, 22. बालाघाट, 23. पांढुर्णा

  • टिकट नहीं मिला तो बगावत की हद पार: NCP विधायक के दफ्तर के बाहर बेटे ने किया पेशाब महाराष्ट्र की सियासत गरमाई

    टिकट नहीं मिला तो बगावत की हद पार: NCP विधायक के दफ्तर के बाहर बेटे ने किया पेशाब महाराष्ट्र की सियासत गरमाई

    नई दिल्ली। महाराष्ट्र में जिला परिषद चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर हैं लेकिन लातूर जिले से सामने आई एक घटना ने सियासी विरोध की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक और पूर्व मंत्री संजय बंसोडे के स्थानीय कार्यालय के बाहर एक युवक द्वारा खुलेआम पेशाब किए जाने की घटना ने न सिर्फ राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी बल्कि आम जनता को भी हैरान कर दिया।
    यह पूरी घटना बुधवार 21 जनवरी की बताई जा रही है जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।मामला लातूर जिले की उदगीर तहसील का है जहां आगामी जिला परिषद चुनावों के लिए टिकट बंटवारे को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया। जानकारी के अनुसार उदगीर के निदेबन क्षेत्र से जुड़े सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता मधुकर एकुरकेकर को 5 फरवरी को होने वाले जिला परिषद चुनाव के लिए NCP की ओर से उम्मीदवार नहीं बनाया गया। इसी फैसले से नाराज होकर उनके बेटे नितिन एकुरकेकर ने विरोध का ऐसा तरीका अपनाया जिसने सबको चौंका दिया।

    बताया जा रहा है कि नितिन एकुरकेकर ने पार्टी नेतृत्व पर अन्याय का आरोप लगाते हुए NCP विधायक संजय बंसोडे के कार्यालय के बाहर पेशाब कर अपना आक्रोश जाहिर किया। यही नहीं उन्होंने इस पूरी घटना का वीडियो खुद अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर किया। कुछ ही घंटों में यह वीडियो वायरल हो गया और देखते ही देखते राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक हंगामा मच गया। हालांकि विवाद बढ़ता देख नितिन ने बाद में यह वीडियो अपने अकाउंट से हटा लिया।

    वीडियो सामने आने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी दो धड़ों में बंटी नजर आईं। बड़ी संख्या में लोगों ने इसे लोकतांत्रिक विरोध के नाम पर की गई शर्मनाक और अशोभनीय हरकत बताया। उनका कहना है कि राजनीतिक असहमति जताने के कई संवैधानिक और सभ्य तरीके होते हैं लेकिन इस तरह का कृत्य न केवल व्यक्ति विशेष बल्कि पूरे राजनीतिक तंत्र की छवि को नुकसान पहुंचाता है। वहीं कुछ लोगों ने इसे पार्टी नेतृत्व के प्रति कार्यकर्ताओं की हताशा और गुस्से का प्रतीक बताया हालांकि उन्होंने भी इस तरीके का समर्थन नहीं किया।

    इस घटना ने NCP को भी असहज स्थिति में ला खड़ा किया है। पार्टी के भीतर टिकट वितरण को लेकर असंतोष की बातें पहले भी सामने आती रही हैं लेकिन इस तरह का सार्वजनिक और आपत्तिजनक विरोध पहली बार देखने को मिला है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव से पहले इस तरह की घटनाएं दलों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं और मतदाताओं के बीच गलत संदेश भी भेजती हैं।कुल मिलाकर लातूर की यह घटना महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ते तनाव गुटबाजी और असंतोष की तस्वीर पेश करती है। सवाल यह है कि क्या राजनीतिक दल समय रहते अपने कार्यकर्ताओं की नाराजगी को संभाल पाएंगे या फिर आने वाले दिनों में सियासत का तापमान और चढ़ता नजर आएगा।

  • वैश्विक आर्थिक खतरा: चीन की जनसंख्या में गिरावट, भारत से पिछड़ने के बाद दोहरी चुनौती

    वैश्विक आर्थिक खतरा: चीन की जनसंख्या में गिरावट, भारत से पिछड़ने के बाद दोहरी चुनौती

    बीजिंग। चीन, जो दशकों तक दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश था, अब ऐतिहासिक जनसांख्यिकीय बदलाव का सामना कर रहा है। 2023 में भारत ने चीन को पीछे छोड़कर सबसे अधिक आबादी वाला देश बनने का ताज हासिल कर लिया। 2025 के आंकड़े और भी चिंताजनक हैं।

    नेशनल स्टैटिस्टिक्स ब्यूरो के अनुसार, चीन की जन्म दर रिकॉर्ड निचले स्तर 7.93 मिलियन (79.3 लाख) पर आ गई है और कुल जनसंख्या में 33.9 लाख की गिरावट देखी गई है। प्रजनन दर केवल 1.3 रह गई है, जबकि स्थिर आबादी के लिए इसे 2.1 होना चाहिए।

    जनसंख्या गिरावट के कारण और प्रभाव:
    घटता वर्कफोर्स: काम करने वाले लोगों की संख्या अब कुल आबादी का 60.6% है, जो एक दशक पहले 70% थी।
    बुजुर्गों की बढ़ती संख्या: 2034 तक 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग चीन की कुल आबादी का 30% बन सकते हैं।
    आर्थिक दबाव: श्रमिकों की कमी से मजदूरी बढ़ेगी और सामान महंगा होगा। पेंशन और हाउसिंग जैसे सेक्टर भी दबाव में आएंगे।

    सरकार की कोशिशें:
    2016 में दो बच्चों की अनुमति, 2021 में इसे बढ़ाकर तीन कर दिया गया।
    बच्चों की देखभाल के लिए सब्सिडी (करीब 500 डॉलर प्रति वर्ष)।
    रिटायरमेंट उम्र धीरे-धीरे बढ़ाने की योजना।
    शिक्षा की लागत कम करने और गर्भपात रोकने के लिए कदम।

    समस्या की जड़:
    ‘वन-चाइल्ड पॉलिसी’ (1979–2016) के चलते चीन में लंबे समय तक जन्म दर पर सख्त नियंत्रण रहा। यह नीति अब भी देश को लंबे समय तक प्रभावित कर रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के लिए यह चुनौती आसान नहीं है। जापान और दक्षिण कोरिया के अनुभव बताते हैं कि समाज की सोच और जीवनयापन की लागत में बदलाव के बाद जन्म दर बढ़ाना कठिन हो जाता है। चीन अब “बूढ़े होने से पहले अमीर बनने” की दौड़ में भी पिछड़ता दिखाई दे रहा है।

  • ट्रंप के दावे को लेकर कांग्रेस का PM मोदी पर तंज, कहा-70 बार मजाक उडा… फिर भी चुप्पी

    ट्रंप के दावे को लेकर कांग्रेस का PM मोदी पर तंज, कहा-70 बार मजाक उडा… फिर भी चुप्पी


    नई दिल्ली।
    भारत और पाकिस्तान (India and Pakistan) के बीच पिछले साल हुए तनाव को खत्म करने का श्रेय एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने लिया है। ट्रंप के इस ताजा दावे के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) पर हमला तेज कर दिया है। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि ट्रंप अब तक 70 बार इस तरह का दावा कर चुके हैं, लेकिन भारत सरकार की ओर से इस पर कोई कड़ा रुख नहीं दिख रहा। वाइट हाउस में अपने दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष की उपलब्धियां गिनाते हुए ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने दुनिया की 8 अंतहीन लड़ाइयां रुकवाई हैं।

    भारत-पाक के संदर्भ में उन्होंने कहा, “पाकिस्तान और भारत एक-दूसरे पर हमला कर रहे थे। आठ विमान मार गिराए गए थे। मेरी राय में दोनों देश परमाणु युद्ध की ओर बढ़ रहे थे। अगर मैं हस्तक्षेप नहीं करता, तो करोड़ों लोग मारे जाते।” ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने 10 महीनों में कंबोडिया-थाईलैंड, कोसोवो-सर्बिया और इजरायल-ईरान जैसे आठ बड़े संघर्षों को शांत कराया है।


    जयराम रमेश का तीखा हमला

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की दोस्ती पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “कल से पहले यह संख्या 68 थी। लेकिन कल ही यह आंकड़ा 69 नहीं, बल्कि सीधे 70 पर पहुंच गया। एक बार व्हाइट हाउस की प्रेस कॉन्फ़्रेंस के अपने शुरुआती बयान में और बाद में सवाल-जवाब के दौरान। यही वह संख्या है, जितनी बार प्रधानमंत्री के ‘अच्छे दोस्त’ और जिन्हें कई बार पीएम की जबरन झप्पी मिल चुकी है- ने यह दावा किया है कि 10 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर के अचानक और अप्रत्याशित रूप से रुकने के लिए वही जिम्मेदार थे।”

    नोबेल शांति पुरस्कार की चाहत
    ट्रंप ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी मलाल जताया कि इन युद्धों को रुकवाने के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकने से कम से कम 1.5 से 2 करोड़ लोगों की जान बची है, जो उनके लिए नोबेल से बड़ी बात है।

    गौरतलब है कि भारत सरकार हमेशा से यह कहती रही है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है। हालांकि, 10 मई 2025 को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि वाशिंगटन की मध्यस्थता के बाद दोनों देश पूर्ण युद्धविराम पर सहमत हुए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि ट्रंप के बार-बार इस तरह के दावे करना भारतीय संप्रभुता और प्रधानमंत्री के दावों पर सवाल खड़ा करता है।

  • देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन आज से होगी शुरू…. गुवाहाटी-हावड़ा के बीच होगी संचालित

    देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन आज से होगी शुरू…. गुवाहाटी-हावड़ा के बीच होगी संचालित


    नई दिल्ली।
    भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने लंबी दूरी की यात्रा को आरामदायक (Making long-distance travel comfortable) और तेज बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन (Vande Bharat Sleeper Train) आज (गुरुवार, 22 जनवरी) से कामाख्या (गुवाहाटी) और हावड़ा (पश्चिम बंगाल) के बीच अपनी व्यावसायिक सेवा शुरू करने जा रही है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) द्वारा संचालित यह ट्रेन रातों-रात सफर करने वाले यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाओं और कम समय में यात्रा पूरी करने का एक नया विकल्प पेश करेगी।

    रेलवे के अनुसार, वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 27576 बनकर कामाख्या-हावड़ा की यात्रा करेगी। यह ट्रेन 22 जनवरी से शुरू हो रही है। बुधवार को छोड़कर यह सप्ताह के सभी दिन चलेगी। यह कामाख्या से शाम 18:15 बजे निकलेगी और अगली सुबह 08:15 बजे हावड़ा पहुंचेगी। वहीं, ट्रेन नंबर 27575 (हावड़ा-कामाख्या)की व्यावसायिक शुरुआत 23 जनवरी से होगी। गुरुवार को छोड़कर यह प्रतिदिन चलेगी। यह हावड़ा से शाम 18:20 बजे प्रस्थान करेगी और अगली सुबह 08:20 बजे कामाख्या पहुंचेगी। यह ट्रेन लगभग 14 घंटे में अपना सफर पूरा करेगी।

    यात्रियों की सुविधा के लिए इस ट्रेन में कुल 16 कोच लगाए गए हैं। इसमें AC फर्स्ट क्लास के एक, AC 2-टियर के चार कोच और AC 3-टियर के 11 कोच हैं।


    इन स्टेशनों पर स्टॉपेज

    हावड़ा और कामाख्या के बीच यह ट्रेन 13 महत्वपूर्ण स्टेशनों पर रुकेगी। उनमें बंडिल, नबद्वीप धाम, कटवा, अजीमगंज, न्यू फरक्का, मालदा टाउन, अलुआबारी रोड, न्यू जलपाईगुड़ी, जलपाईगुड़ी रोड, न्यू कूचबिहार, न्यू अलीपुरद्वार, न्यू बोंगाईगांव और रंगिया शामिल है।

    हावड़ा से कामख्या के बीच की यात्रा के लिए थर्ड एसी का किराया 2435 रुपये है। वहीं सेकेंड एसी के लिए 3145 और फर्स्ट एसी के लिए 3855 रुपये खर्च करने होंगे।

    वंदे भारत के इस स्लीपर वेरिएंट के आने से पूर्वी भारत और उत्तर-पूर्व के बीच संपर्क काफी मजबूत होगी। पारंपरिक लंबी दूरी की ट्रेनों के मुकाबले यह ट्रेन न केवल तेज है, बल्कि इसमें सुरक्षा और आराम के अंतरराष्ट्रीय मानकों का ध्यान रखा गया है।