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  • सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच प्रदर्शन मामलों में कमेटी की शक्तियां तय कीं, कहा- FIR का आदेश देने का अधिकार सिर्फ अदालत को

    सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच प्रदर्शन मामलों में कमेटी की शक्तियां तय कीं, कहा- FIR का आदेश देने का अधिकार सिर्फ अदालत को

    नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड एनक्वायरी कमेटी की शक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। अदालत ने कहा कि कमेटी आरोपों की जांच कर सकती है, पीड़ितों की पहचान कर सकती है और अपनी सिफारिशें दे सकती है, लेकिन किसी आपराधिक जांच के लिए FIR दर्ज कराने का आदेश देने का अधिकार केवल सुप्रीम कोर्ट के पास रहेगा।

    भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह टिप्पणी की। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत ने कहा कि कमेटी सीधे FIR दर्ज करने का आदेश नहीं दे सकती और उसे अदालत की निगरानी में काम करना होगा। कार्यवाही के दौरान आने वाली किसी समस्या के समाधान के लिए कमेटी सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है।

    अदालत ने कमेटी को अपनी सहायता के लिए अमिकस या वकील नियुक्त करने की भी अनुमति दी है। इसके अलावा कमेटी अपनी जांच से संबंधित जानकारी व्यापक स्तर पर सार्वजनिक कर सकती है और लोगों से सुझाव तथा आपत्तियां मांग सकती है। संवेदनशील और जरूरतमंद गवाहों तक पहुंच बनाने के लिए अलग व्यवस्था भी तैयार की जा सकती है।

    इसमें हेल्पलाइन जैसी व्यवस्था शामिल हो सकती है, ताकि वे लोग भी अपनी बात कमेटी तक पहुंचा सकें जो सीधे उसके सामने उपस्थित नहीं हो सकते। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से अदालत को बताया कि कमेटी की पहली बैठक 15 सितंबर को निर्धारित है।

    सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर के अपने आदेश का भी उल्लेख किया। अदालत ने उस समय संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शन से जुड़े आपराधिक मामलों को खत्म करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों के संबंध में दर्ज FIR पर आगे कार्रवाई या जांच नहीं की जाएगी और उन्हें बंद माना जाएगा। साथ ही इन घटनाओं के संबंध में नई FIR दर्ज नहीं करने का निर्देश भी दिया गया था।

    पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में गठित HPEC को 20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन से जुड़े विभिन्न आरोपों की स्वतंत्र जांच करनी है। कमेटी पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों के साथ सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की भी जांच करेगी। उसे दस्तावेजी सबूत, लोगों के प्रतिवेदन और गुमनाम शिकायतें लेने की अनुमति है।

    सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी की संरचना बदलने की मांग भी खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि कमेटी का गठन स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने किया है और काम शुरू होने से पहले इसमें बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि, किसी पक्ष को कमेटी के कामकाज को लेकर चिंता होने पर वह अदालत के सामने अपनी बात रख सकता है।

    सुनवाई के दौरान 14 वर्षीय लड़की को कथित तौर पर धमकाने और परेशान किए जाने का मामला भी सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को संसद मार्ग थाने में दर्ज FIR पर तत्काल कार्रवाई कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। लड़की फिलहाल उत्तर प्रदेश में रह रही है। अदालत ने उत्तर प्रदेश पुलिस को लड़की और उसके परिवार को पुलिस सुरक्षा तथा जरूरी सुरक्षा उपाय उपलब्ध कराने को भी कहा।

    अदालत ने कहा कि यदि किसी बच्चे या उसके परिवार को आपराधिक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाने के लिए डराया-धमकाया जा रहा है तो HPEC की जांच के नतीजे का इंतजार नहीं किया जा सकता। लड़की के बयान की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी बताते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोप सही पाए जाने पर जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाना चाहिए।

    सुनवाई में स्वातंत्र भारद्वाज से जुड़े आपराधिक मामलों का भी उल्लेख हुआ। उनके खिलाफ कथित हमले, आपराधिक धमकी और POCSO से जुड़े मामलों का जिक्र किया गया। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कमेटी की संरचना, संवेदनशील गवाहों की पहुंच, अंतरिम मुआवजा, पेलेट गन के इस्तेमाल और प्रदर्शनकारियों के डेटा के कथित संग्रह को लेकर चिंताएं रखीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संबंधित पक्ष अपनी सामग्री और सुझाव कमेटी के सामने रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर अदालत भी इन मुद्दों को स्पष्ट करेगी।

  • राघव चड्ढा और AAP में वोटर लिस्ट विवाद, दिल्ली में नाम जुड़ने पर चड्ढा ने तंज के साथ आरोपों का दिया जवाब

    राघव चड्ढा और AAP में वोटर लिस्ट विवाद, दिल्ली में नाम जुड़ने पर चड्ढा ने तंज के साथ आरोपों का दिया जवाब

    नई दिल्ली ।पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम हटने और दिल्ली की मतदाता सूची में नाम जुड़ने को लेकर बीजेपी सांसद राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच विवाद बढ़ गया है। आम आदमी पार्टी की ओर से सवाल उठाए जाने के बाद चड्ढा ने पलटवार करते हुए पार्टी पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि AAP की हालत ऐसी हो गई है कि उन्हें सपने में भी वह भूत की तरह नजर आते हैं और पार्टी लगातार उनके नाम का जिक्र करती रहती है।

    राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी की स्थिति की तुलना एक ऐसी एक्स गर्लफ्रेंड से की, जिसे उसका बॉयफ्रेंड छोड़कर आगे बढ़ चुका है, लेकिन वह अब भी उसके प्यार में है। इसी दौरान उन्होंने तंज करते हुए कहा कि उन्हें डर है कि कहीं कोई दिलजला आशिक की तरह उनकी याद में अपनी नसें न काट ले। चड्ढा ने कहा कि उन्हें आम आदमी पार्टी की चिंता रहती है।

    दरअसल, पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से अपना नाम गायब होने के बाद राघव चड्ढा ने नाराजगी जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि पंजाब की AAP सरकार ने राजनीतिक विद्वेष के कारण उनका नाम वोटर लिस्ट में शिफ्टेड कैटेगरी में डाल दिया। चड्ढा का कहना था कि पार्टी छोड़ने के बाद से AAP उन्हें लगातार निशाना बना रही है।

    चड्ढा ने यह भी कहा था कि ऐसा लगता है कि वह अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को परेशान कर रहे हैं। उनके मुताबिक पार्टी के लोग दिन-रात उनके बारे में सोच रहे हैं और उन पर हमला करने की कोशिश कर रहे हैं।

    इसके बाद आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की वोटर लिस्ट में राघव चड्ढा का नाम जुड़ने को लेकर चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। AAP की दिल्ली इकाई के प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने कहा कि 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में राजिंदर नगर के संबंधित पोलिंग पार्ट में 746 मतदाता थे। बाद में राघव चड्ढा का नाम 747वें मतदाता के रूप में जुड़ा।

    सौरभ भारद्वाज के अनुसार राजिंदर नगर की मतदाता सूची में सीरियल नंबर 747 पर राघव चड्ढा, पिता सुनील चड्ढा और उम्र 37 साल दर्ज है। उन्होंने चड्ढा के तीन सितंबर के बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने पंजाब में दोबारा मतदाता के तौर पर पंजीकरण कराने की बात कही थी। भारद्वाज ने चुनाव आयोग से पूछा कि जब ड्राफ्ट सूची में 746 नाम थे तो 747वां नाम किस प्रक्रिया के तहत जोड़ा गया।

    AAP प्रवक्ता अनुराग ढांडा ने भी इस मामले में राघव चड्ढा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक चड्ढा ने 26 अगस्त को दिल्ली में वोट बनवाने के लिए फॉर्म-6 दाखिल किया था और दो सितंबर को उनका आवेदन मंजूर हो गया। ढांडा ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद तीन सितंबर को चड्ढा पंजाब सरकार पर उनका वोट कटवाने का आरोप लगा रहे थे।

    राघव चड्ढा ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग की सभी लागू गाइडलाइंस और तय प्रक्रिया का पालन किया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने भी स्पष्ट किया कि उनका नाम नियमों के तहत जोड़ा गया। कार्यालय के मुताबिक 26 अगस्त को फॉर्म-6 के जरिए आवेदन किया गया था और सात दिन की अनिवार्य नोटिस अवधि पूरी होने के बाद दो सितंबर को निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी ने आवेदन मंजूर किया।

    मुख्य निर्वाचन कार्यालय के अनुसार आवेदन मंजूर होने के बाद संबंधित नाम मसौदा मतदाता सूची की अंतिम क्रम संख्या के बाद डेटाबेस में दिखाई देता है। अंतिम मतदाता सूची पुनरीक्षण अवधि पूरी होने और सभी दावों तथा आपत्तियों के निपटारे के बाद प्रकाशित की जाएगी।

  • MP में 40 हजार बैंक कर्मचारी हड़ताल पर शाखाओं के नहीं खुले ताले 5 डे वीक की मांग से आज से 3 दिन तक रहेगा असर

    MP में 40 हजार बैंक कर्मचारी हड़ताल पर शाखाओं के नहीं खुले ताले 5 डे वीक की मांग से आज से 3 दिन तक रहेगा असर


    भोपाल। मध्य प्रदेश में शुक्रवार को बैंक कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी हड़ताल के चलते बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो गई हैं। पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह यानी 5 डे वीक लागू करने की मांग को लेकर प्रदेश के करीब 40 हजार बैंक कर्मचारी काम से दूर रहे। इसके चलते भोपाल सहित कई शहरों में बैंक शाखाओं के ताले नहीं खुले। भोपाल के एमपी नगर में बैंक कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई। हालांकि हड़ताल केवल एक दिन की है लेकिन इसका असर लगातार तीन दिनों तक देखने को मिल सकता है क्योंकि शनिवार और रविवार को बैंकिंग अवकाश रहेगा।

    यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले आयोजित इस हड़ताल में मध्य प्रदेश के बैंक कर्मचारी भी शामिल हुए हैं। कर्मचारियों की हड़ताल का सीधा असर आम लोगों के बैंकिंग कामकाज पर पड़ रहा है। बैंक शाखाएं बंद रहने से चेक जमा करने और उनके क्लियरेंस जैसे काम प्रभावित होंगे। इसके अलावा शाखाओं से जुड़े कई दूसरे नियमित काम भी अटक सकते हैं। ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल भुगतान सेवाएं अलग माध्यम से जारी रह सकती हैं लेकिन जिन कामों के लिए शाखा जाना जरूरी है उनके लिए ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

    हड़ताल से पहले बैंक यूनियनों और सरकार के बीच बातचीत भी हुई थी लेकिन किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद यूनियनों ने हड़ताल को जारी रखने का फैसला किया। बैंक कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांग हर शनिवार को बैंक अवकाश घोषित कर पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की है। फिलहाल बैंकों में महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी रहती है जबकि अन्य शनिवार को सामान्य कामकाज होता है।

    यूनियनों का प्रस्ताव है कि शनिवार की छुट्टी के बदले सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना कामकाज का समय करीब 40 मिनट बढ़ाया जा सकता है। कर्मचारियों का कहना है कि इससे पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू होने के बावजूद बैंकिंग कामकाज और ग्राहकों को दी जाने वाली सेवाओं पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

    यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने 5 डे वीक के साथ स्केल चार और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI योजना को वापस लेने की मांग भी उठाई है। यूनियनों का आरोप है कि यह योजना बैंक कर्मचारियों के बीच असमानता बढ़ाने वाली है। उनका कहना है कि अधिकारियों के एक सीमित वर्ग को ज्यादा लाभ देने वाली इस व्यवस्था को लागू करने के बजाय कर्मचारियों से जुड़े लंबित मुद्दों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

    बैंक कर्मचारियों की ओर से पेंशन अपडेट करने और पेंशनभोगियों के एक्स ग्रेशिया की समीक्षा की मांग भी उठाई जा रही है। इसके अलावा NPS को OPS में बदलने और सभी पेंशनभोगियों के लिए समान महंगाई भत्ता व्यवस्था लागू करने की मांग लंबित बताई गई है। कर्मचारियों का कहना है कि बैंकों में पर्याप्त संख्या में क्लर्क सब स्टाफ और आर्म्ड गार्ड की भर्ती भी जरूरी है।

    सितंबर के आखिरी सप्ताह में भी बैंकिंग सेवाओं पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है। 26 और 27 सितंबर को शनिवार और रविवार का अवकाश है जबकि 28 से 30 सितंबर तक हड़ताल का आह्वान किया गया है। ऐसे में लगातार पांच दिन बैंक शाखाएं बंद रह सकती हैं। इससे पहले शुक्रवार की हड़ताल ने ही ग्राहकों को बैंक से जुड़े जरूरी काम जल्द निपटाने की चुनौती दे दी है।

  • विद्या भारती की अखिल भारतीय बैठक में शिक्षा को लेकर बड़ा मंथन स्थानीय जरूरतों के हिसाब से तैयार होंगे नए शिक्षण मॉडल

    विद्या भारती की अखिल भारतीय बैठक में शिक्षा को लेकर बड़ा मंथन स्थानीय जरूरतों के हिसाब से तैयार होंगे नए शिक्षण मॉडल


    जबलपुर । जबलपुर में विद्या भारती की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारिणी बैठक शुक्रवार से शुरू हो गई है। शास्त्री ब्रिज स्थित सरस्वती शिक्षा परिषद में आयोजित इस बैठक में देशभर के अलग अलग प्रांतों से करीब 210 शिक्षाविद् और शिक्षा शास्त्री शामिल हुए हैं। 11 से 13 सितंबर तक चलने वाली इस बैठक में देश की शिक्षा व्यवस्था के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार विमर्श किया जा रहा है। बैठक का मुख्य केंद्र गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भारतीय ज्ञान परंपरा राष्ट्रीय शिक्षा नीति और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप बच्चों के लिए बेहतर शिक्षण व्यवस्था तैयार करना है।

    कार्यकारिणी बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया जा रहा है कि बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखा जाए बल्कि उन्हें कौशल आधारित और व्यवहारिक शिक्षा भी उपलब्ध कराई जाए। बदलती तकनीक और रोजगार की जरूरतों को देखते हुए शिक्षा के ऐसे मॉडल तैयार करने पर चर्चा हो रही है जिनसे विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ साथ आवश्यक कौशल भी विकसित हो सकें। इसके साथ ही प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में नए मॉड्यूल तैयार करने पर भी मंथन किया जा रहा है।

    बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भी रणनीति पर चर्चा की जा रही है। शिक्षा नीति के प्रावधानों को कक्षा स्तर तक तेजी से पहुंचाने के साथ शिक्षकों को उसके अनुरूप प्रशिक्षित करने की जरूरत पर विचार किया जा रहा है। शिक्षकों की भूमिका को मजबूत बनाने और उन्हें नई शिक्षण पद्धतियों से जोड़ने को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    विद्या भारती की कार्यकारिणी बैठक में शिक्षा को देश के अलग अलग क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप ढालने पर भी जोर दिया जा रहा है। जनजातीय क्षेत्रों से लेकर दूरदराज के गांवों और महानगरीय क्षेत्रों तक विद्यार्थियों की जरूरतें अलग होती हैं। ऐसे में स्थानीय परिस्थितियों संस्कृति और संसाधनों को ध्यान में रखते हुए शिक्षण मॉडल विकसित करने पर चर्चा हो रही है। उद्देश्य यह है कि क्षेत्र चाहे कोई भी हो हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

    बैठक में शिक्षा के जरिए वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने की दिशा में भी विचार किया जा रहा है। शिक्षाविद् इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि विद्यार्थियों में जिम्मेदारी संवेदनशीलता और समाज के प्रति सकारात्मक सोच कैसे विकसित की जाए। भारतीय मूल्यों और आधुनिक आवश्यकताओं के बीच बेहतर संतुलन बनाने को भी शिक्षा के भविष्य के लिए अहम माना जा रहा है।

    बैठक के दौरान विद्या भारती के आगामी 75वें वर्ष यानी अमृत महोत्सव की तैयारियों की रूपरेखा पर भी चर्चा हो रही है। इसी क्रम में 25 सितंबर को सुबह 11 बजे देशभर में एक साथ वंदे मातरम् के सामूहिक गायन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों शिक्षकों और समाज में राष्ट्रभावना तथा देश के प्रति श्रद्धा को मजबूत करने का संदेश दिया जाएगा। जबलपुर में चल रही यह बैठक आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था को लेकर विद्या भारती की दिशा और प्राथमिकताओं को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • पुलिस की भनक लगते ही जंगल में भागा शराब तस्कर बाइक मौके पर छोड़ी 55 लीटर शराब मिली 600 लीटर लाहन किया नष्ट

    पुलिस की भनक लगते ही जंगल में भागा शराब तस्कर बाइक मौके पर छोड़ी 55 लीटर शराब मिली 600 लीटर लाहन किया नष्ट


    जबलपुर । जबलपुर के पनागर इलाके में पुलिस ने अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जंगल में चल रहे शराब बनाने के अड्डे का भंडाफोड़ किया है। पुलिस को सूचना मिली थी कि पनागर से करीब 25 से 30 किलोमीटर दूर तिलगमा और भौरहा गांव के बीच घने जंगल में हाथ भट्टी लगाकर महुआ शराब तैयार की जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने इलाके में पहुंचकर जंगल और नाले के आसपास तलाशी अभियान शुरू किया। पुलिस की गतिविधि देखते ही वहां मौजूद एक आरोपी बाइक छोड़कर जंगल की ओर भाग निकला।

    पुलिस टीम जब बताए गए स्थान पर पहुंची तो एक मोटरसाइकिल सवार व्यक्ति वहां मौजूद था। पुलिस को देखते ही उसने बाइक वहीं छोड़ दी और घने जंगल का फायदा उठाकर फरार हो गया। पुलिस ने मौके पर छोड़ी गई मोटरसाइकिल को अपने कब्जे में ले लिया। बाइक की तलाशी लेने पर उसमें करीब 55 लीटर हाथ भट्टी से तैयार की गई महुआ शराब मिली। शराब को जब्त कर पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू की।

    इसके बाद पुलिस टीम ने जंगल के अंदर और नाले के किनारे मौजूद संभावित ठिकानों की तलाश की। तलाशी के दौरान तीन बड़े ड्रम मिले जिनमें शराब बनाने के लिए सामग्री छिपाकर रखी गई थी। पुलिस को मौके पर करीब 600 लीटर लाहन मिला। इसके अलावा शराब तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाली भट्टियां और अन्य उपकरण भी वहां रखे हुए थे। इससे साफ हुआ कि जंगल में लंबे समय से अवैध शराब बनाने का काम चल रहा था।

    पुलिस ने मौके पर ही शराब बनाने के इस पूरे ठिकाने को नष्ट करने की कार्रवाई शुरू की। करीब 600 लीटर लाहन को मौके पर नष्ट कर दिया गया। इसके साथ ही अवैध शराब तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली भट्टियों और अन्य सामान को भी हटाया गया ताकि दोबारा वहां शराब बनाने की गतिविधि शुरू न हो सके। पुलिस ने जब्त 55 लीटर महुआ शराब और मोटरसाइकिल को अपने कब्जे में ले लिया है।

    पुलिस ने मामले में आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फरार आरोपी की पहचान के लिए मौके से जब्त मोटरसाइकिल के रजिस्ट्रेशन नंबर की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में लगी है कि बाइक किसके नाम पर दर्ज है और जंगल में शराब बनाने के इस कारोबार से उसका क्या संबंध है।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अवैध शराब के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच में यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। जंगल के भीतर लंबे समय से चल रहे इस अवैध कारोबार पर कार्रवाई के बाद पुलिस ने साफ किया है कि क्षेत्र में अवैध शराब के निर्माण और बिक्री के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।

  • एक हफ्ते से पानी भरे प्लॉट में छिपा था मगरमच्छ: सड़क पर निकलते ही मचा हड़कंप वन विभाग ने किया रेस्क्यू

    एक हफ्ते से पानी भरे प्लॉट में छिपा था मगरमच्छ: सड़क पर निकलते ही मचा हड़कंप वन विभाग ने किया रेस्क्यू


    जबलपुर। जबलपुर के पनागर स्थित द्वारका परिसर में करीब एक सप्ताह से दहशत का कारण बना मगरमच्छ आखिरकार वन विभाग की टीम के हाथ लग गया। करीब 5 फीट लंबे मगरमच्छ के कॉलोनी के एक खाली प्लॉट में भरे पानी में छिपे होने की जानकारी सामने आने के बाद से ही वन विभाग की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही थी। शुक्रवार सुबह पानी खाली करने की प्रक्रिया के दौरान मगरमच्छ अचानक प्लॉट से निकलकर सड़क की ओर आने लगा। पहले से तैयार वन विभाग की टीम ने उसे घेर लिया और सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर लिया। मगरमच्छ के पकड़े जाने के बाद कॉलोनी के रहवासियों ने राहत की सांस ली।

    बताया गया है कि द्वारका परिसर में 5 सितंबर को मगरमच्छ दिखाई देने की सूचना वन विभाग को मिली थी। इसके बाद वन परिक्षेत्र अधिकारी सौरभ शर्मा के निर्देश पर 12 सदस्यीय रेस्क्यू टीम बनाई गई। टीम ने खाली प्लॉट के आसपास लगातार निगरानी शुरू की। प्लॉट में काफी मात्रा में पानी भरा होने के कारण मगरमच्छ को पकड़ना आसान नहीं था। वह पानी के भीतर छिपा रहता था और टीम के पहुंचने पर दिखाई नहीं देता था।

    वन कर्मी शैलेश कुमार गौतम के मुताबिक शुरुआती तौर पर आशंका जताई गई कि मानसून के दौरान परियट नदी और आसपास की नहरों में तेज बहाव के कारण मगरमच्छ बहकर रिहायशी इलाके तक पहुंचा होगा। पानी के बहाव के साथ वह कॉलोनी के खाली प्लॉट में पहुंच गया और वहां जमा पानी में छिप गया। मगरमच्छ की मौजूदगी की जानकारी मिलने के बाद आसपास रहने वाले लोगों में भी डर का माहौल था।

    रेस्क्यू टीम ने मगरमच्छ को पकड़ने के लिए कई प्रयास किए। टीम के सदस्य कमर तक पानी में उतरकर जाल लेकर उसे तलाशते रहे। कई बार जाल डालकर उसे पकड़ने की कोशिश की गई लेकिन मगरमच्छ पानी में छिपकर टीम को चकमा देता रहा। इसके बाद प्लॉट का पानी पंप की मदद से खाली कराने की योजना बनाई गई। लगातार कई दिनों तक निगरानी और प्रयास के बावजूद मगरमच्छ पकड़ में नहीं आया।

    शुक्रवार सुबह जब प्लॉट का पानी बाहर निकाला जा रहा था तभी मगरमच्छ पानी से बाहर निकल आया। वह सड़क की ओर बढ़ने लगा। वन विभाग की टीम पहले से मौके पर मौजूद थी इसलिए कर्मचारियों ने तुरंत उसे चारों तरफ से घेर लिया। सावधानी के साथ जाल की मदद से मगरमच्छ को पकड़ लिया गया। रेस्क्यू के दौरान टीम ने यह भी सुनिश्चित किया कि मगरमच्छ को किसी तरह की चोट न पहुंचे और आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा भी बनी रहे।

    मगरमच्छ के सुरक्षित पकड़े जाने के बाद वन विभाग की टीम उसे परियट नदी के पास ले गई। अधिकारियों के मुताबिक रेस्क्यू किए गए मगरमच्छ को शुक्रवार सुबह ही सुरक्षित तरीके से परियट नदी में छोड़ दिया गया। करीब एक सप्ताह से चली आ रही तलाश पूरी होने के बाद कॉलोनी के लोगों ने राहत की सांस ली। इस दौरान वन विभाग की टीम ने लगातार निगरानी और सावधानी के साथ अभियान चलाया और आखिरकार मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ने में सफलता हासिल की।

  • बहन से विवाद कर रहा था जीजा बचाव करने पहुंचे साले के पेट में घोंपा चाकू हमला करने के बाद मौके से फरार हुआ आरोपी

    बहन से विवाद कर रहा था जीजा बचाव करने पहुंचे साले के पेट में घोंपा चाकू हमला करने के बाद मौके से फरार हुआ आरोपी


    शिवपुरी । शिवपुरी में पारिवारिक विवाद ने गुरुवार रात हिंसक रूप ले लिया। श्रीराम कॉलोनी के बाल्मीकि मोहल्ले में एक युवक पर उसके जीजा ने चाकू से हमला कर दिया। पेट में चाकू लगने से 30 वर्षीय अनिल उर्फ अन्नी बाल्मीकि गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजनों ने उसे तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया जहां उसका इलाज चल रहा है। घटना के बाद कोतवाली पुलिस ने आरोपी धर्मेंद्र करोसिया के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

    बताया गया है कि विवाद की शुरुआत आरोपी धर्मेंद्र करोसिया और उसकी पत्नी के बीच पुराने पारिवारिक विवाद को लेकर हुई थी। अनिल की पत्नी काजल बाल्मीकि के मुताबिक उसकी ननद की शादी अशोकनगर निवासी धर्मेंद्र करोसिया से हुई थी। बाद में दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि उनका तलाक हो गया। तलाक के बाद अनिल की ननद करीब सात महीने से शिवपुरी में अपने भाई और भाभी के साथ रह रही थी। आरोप है कि इसी बात को लेकर धर्मेंद्र नाराज रहता था और अक्सर शिवपुरी आकर विवाद करता था।

    गुरुवार रात करीब 8 बजे धर्मेंद्र एक बार फिर उनके घर पहुंचा। वहां उसने अपनी पूर्व पत्नी से विवाद शुरू कर दिया। घर में विवाद बढ़ता देख अनिल भी मौके पर पहुंच गया। अनिल के मुताबिक धर्मेंद्र उसकी बहन पर चाकू से हमला करने की कोशिश कर रहा था। बहन को बचाने के लिए वह दोनों के बीच आ गया। इसी दौरान धर्मेंद्र ने कथित तौर पर चाकू से अनिल के पेट में वार कर दिया।

    चाकू लगते ही अनिल गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा। हमले के बाद आरोपी धर्मेंद्र मौके से फरार हो गया। घटना के बाद घर में अफरा तफरी मच गई। परिजन घायल अनिल को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उसका उपचार शुरू किया। पेट में चाकू लगने के कारण उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

    घटना की सूचना मिलने के बाद कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी जुटाई। पुलिस ने घायल युवक के बयान दर्ज किए हैं। इसके आधार पर आरोपी धर्मेंद्र करोसिया के खिलाफ हत्या के प्रयास की धारा में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब आरोपी की तलाश में जुटी है।

    पुलिस इस पूरे मामले में पारिवारिक विवाद और तलाक के बाद चल रहे तनाव को भी जांच का हिस्सा बना रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार आरोपी और उसकी पूर्व पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद के दौरान अनिल के बीच में आने पर उस पर चाकू से हमला किया गया।

    फिलहाल घायल युवक का जिला अस्पताल में इलाज जारी है। पुलिस आरोपी को पकड़ने के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। घटना ने इलाके में भी सनसनी फैला दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के बाद घटना से जुड़े अन्य तथ्यों को भी सामने लाया जाएगा।

  • शिवपुरी में हाईवे पर बड़ा हादसा टला चलती कार से निकली आग की लपटें कुछ ही मिनटों में पूरी वर्ना जलकर राख

    शिवपुरी में हाईवे पर बड़ा हादसा टला चलती कार से निकली आग की लपटें कुछ ही मिनटों में पूरी वर्ना जलकर राख


    शिवपुरी । शिवपुरी में गुरुवार रात एनएच-46 पर एक बड़ा हादसा होते होते टल गया। भैंसोंरा गांव के पास सड़क पर चल रही Hyundai Verna कार में अचानक आग लग गई। कार से तेज लपटें उठती देखकर चालक ने बिना देर किए वाहन को सड़क किनारे रोक दिया। इसके बाद कार में सवार दोनों लोग तुरंत बाहर निकल आए। कुछ ही मिनटों में आग इतनी तेजी से फैली कि पूरी कार उसकी चपेट में आ गई और देखते ही देखते वर्ना जलकर पूरी तरह खाक हो गई। राहत की बात यह रही कि हादसे में कार सवार दोनों लोग सुरक्षित बच गए।

    घटना रात करीब 8 बजे की बताई जा रही है। कार में ग्वालियर निवासी 26 वर्षीय प्रेम गुप्ता और देव करारा सवार थे। दोनों चिकित्सा से जुड़ा सामान लेकर इंदौर की ओर जा रहे थे। बताया गया कि जब कार भैंसोंरा गांव के पास पहुंची तो अचानक उसमें से आग की लपटें निकलने लगीं। कार में आग लगते ही दोनों यात्रियों में अफरा तफरी मच गई। चालक ने स्थिति को भांपते हुए तुरंत वाहन को सड़क किनारे रोक दिया। दोनों लोग किसी तरह कार से बाहर निकले और सुरक्षित दूरी पर पहुंच गए।

    कार से निकलने के कुछ ही समय बाद आग ने विकराल रूप ले लिया। देखते ही देखते लपटें पूरी कार में फैल गईं। हाईवे पर चल रहे दूसरे वाहन चालकों ने भी आग का यह खतरनाक मंजर देखा। आग के कारण मौके पर कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित होने की स्थिति बन गई। सूचना मिलने के बाद सुभाषपुरा थाना प्रभारी अरविंद चौहान पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे।

    पुलिस ने सबसे पहले हाईवे पर यातायात को नियंत्रित किया ताकि आग की वजह से कोई दूसरा हादसा न हो। वाहनों को दूसरी लेन से निकाला गया। इसके बाद पुलिस ने आग की सूचना फायर ब्रिगेड को दी। मोहना से फायर ब्रिगेड की टीम को मौके पर बुलाया गया। दमकल कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर काफी मशक्कत के बाद कार में लगी आग पर काबू पाया। हालांकि तब तक कार पूरी तरह जल चुकी थी।

    हादसे में प्रेम गुप्ता और देव करारा को किसी तरह की चोट नहीं आई। दोनों समय रहते कार से बाहर निकल गए थे। अगर आग लगने के बाद उन्हें बाहर निकलने में थोड़ी भी देरी होती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। पुलिस ने घटना की जानकारी जुटाने के साथ आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल शुरुआती जांच में आग लगने की स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है।

    हाईवे पर चलती कार में अचानक आग लगने की यह घटना एक बार फिर बताती है कि वाहन में किसी तरह की असामान्य स्थिति नजर आते ही उसे सुरक्षित स्थान पर रोकना कितना जरूरी है। समय रहते कार से बाहर निकलने के कारण दोनों यात्रियों की जान बच गई जबकि उनकी कार पूरी तरह जलकर नष्ट हो गई।

  • रेखा के करियर का वो यादगार मोड़ जब एक गाने ने बदल दी किस्मत मोहम्मद रफी की आवाज ने दिलाई रातोंरात बड़ी पहचान

    रेखा के करियर का वो यादगार मोड़ जब एक गाने ने बदल दी किस्मत मोहम्मद रफी की आवाज ने दिलाई रातोंरात बड़ी पहचान


    नई दिल्ली ।
    बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री रेखा आज हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित और सम्मानित अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। अपनी खूबसूरती दमदार अभिनय और लंबे फिल्मी सफर के दौरान निभाए गए यादगार किरदारों की वजह से उन्होंने इंडस्ट्री में खास मुकाम बनाया है। हालांकि रेखा के लिए बॉलीवुड तक पहुंचने और अपनी पहचान बनाने का सफर बिल्कुल आसान नहीं था। महज 15 साल की उम्र में हिंदी फिल्मों में कदम रखने वाली रेखा को शुरुआती दौर में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। यहां तक कि उन्हें अपने रंग रूप और हिंदी भाषा को लेकर भी ताने सुनने पड़े थे। लेकिन उनकी पहली हिंदी फिल्म सावन भादों उनके करियर के लिए बेहद खास साबित हुई।

    साल 1970 में रिलीज हुई सावन भादों में रेखा के साथ अभिनेता नवीन निश्चल मुख्य भूमिका में नजर आए थे। खास बात यह थी कि दोनों ने इसी फिल्म के जरिए हिंदी सिनेमा में बतौर लीड कलाकार शुरुआत की थी। फिल्म का निर्देशन मोहन सहगल ने किया था। रेखा ने फिल्म में चंदा नाम की एक गांव की लड़की का किरदार निभाया था जबकि नवीन निश्चल विक्रम के रोल में नजर आए थे। फिल्म की कहानी में रोमांस के साथ परिवार जमीन जायदाद और साजिश का भी तड़का देखने को मिला था।

    इस फिल्म ने रेखा को पहली बड़ी पहचान दिलाई लेकिन उनकी लोकप्रियता को जिस गाने ने नई ऊंचाई दी वह आज भी पुराने हिंदी गीतों के चाहने वालों के बीच याद किया जाता है। फिल्म का गाना कान में झुमका चाल में ठुमका कमर पे चोटी लटके रेखा के शुरुआती करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस गाने को दिग्गज गायक मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज दी थी। रफी की आवाज और रेखा तथा नवीन निश्चल की स्क्रीन केमिस्ट्री ने गाने को बेहद लोकप्रिय बना दिया था।

    गाने में रेखा का अंदाज दर्शकों को खूब पसंद आया। उनकी अदाएं और डांस ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा और देखते ही देखते वह दर्शकों के बीच पहचान बनाने लगीं। यही वजह रही कि सावन भादों की सफलता को रेखा के शुरुआती करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। फिल्म की कामयाबी के बाद हिंदी सिनेमा में उनके लिए आगे के रास्ते खुलने लगे।

    रेखा इससे पहले दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी काम कर चुकी थीं लेकिन हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उनकी शुरुआत ने उनके करियर को एक अलग दिशा दी। सावन भादों के बाद उन्हें लगातार फिल्मों के प्रस्ताव मिलने लगे और धीरे धीरे वह उस दौर की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं। शुरुआती मुश्किलों से निकलकर रेखा ने आगे चलकर ऐसा मुकाम हासिल किया जिसे आज भी बॉलीवुड की सबसे प्रेरणादायक यात्राओं में गिना जाता है।

    मोहम्मद रफी की आवाज में रिकॉर्ड किया गया यह गाना भी रेखा की शुरुआती पहचान का अहम हिस्सा बन गया। यही वजह है कि करीब 56 साल बाद भी सावन भादों और इस सुपरहिट गीत का जिक्र रेखा के फिल्मी सफर की शुरुआत के साथ जरूर किया जाता है। एक युवा अभिनेत्री के लिए यह गाना सिर्फ एक हिट गीत नहीं बल्कि उनके करियर को नई पहचान देने वाला यादगार पड़ाव साबित हुआ।

  • अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान, कहा- चुनावी राजनीति से आगे बढ़कर बदलाव लाना है, कॉकरोच आंदोलन को जारी रखने की योजना

    अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान, कहा- चुनावी राजनीति से आगे बढ़कर बदलाव लाना है, कॉकरोच आंदोलन को जारी रखने की योजना


    नई दिल्ली ।
    कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने कहा है कि उनकी पार्टी और आंदोलन का उद्देश्य केवल चुनाव लड़ना नहीं है। उन्होंने एक हालिया इंटरव्यू में अपने भविष्य के प्लान, कॉकरोच आंदोलन और CJP की आगे की दिशा को लेकर बात की। दीपके ने कहा कि अब जब वे मैदान में उतर चुके हैं तो आंदोलन को जारी रखने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।

    बीते मई महीने में देश के मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी के बाद 30 वर्षीय अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना की थी। उन्होंने इसे शुरुआत में एक तंज के तौर पर शुरू किया था। इसके बाद इस मुहिम से लाखों लोग जुड़ गए और दीपके की पहचान भी तेजी से बढ़ी।

    बाद में अभिजीत दीपके अमेरिका से भारत लौटे। भारत आने के बाद उन्होंने और उनकी पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों की अगुवाई की थी। अब उन्होंने एक इंटरव्यू में अपने इस फैसले और आंदोलन को आगे बढ़ाने की योजना के बारे में विस्तार से बात की है।

    अभिजीत दीपके ने बताया कि सरकार की ओर से उन्हें ‘देश के लिए खतरा’ और ‘एंटी नेशनल’ जैसे टैग दिए जाने की बात उन्हें काफी खटकी थी। उन्होंने कहा कि इन बातों से उन्हें बहुत दुख हुआ। दीपके के अनुसार उनके परिवार और वकील ने उन्हें भारत नहीं जाने की सलाह दी थी। इसके बावजूद उन्होंने अमेरिका से भारत लौटने का निर्णय लिया।

    दीपके ने कहा कि जब उनकी अपनी सरकार ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया, तभी उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया। उनके मुताबिक इस बात ने उन्हें काफी दुख पहुंचाया। उन्होंने सवाल किया कि जब वह विदेश में थे, तब क्या उनकी सरकार को उनके साथ खड़ा नहीं होना चाहिए था।

    उन्होंने कहा कि उन्होंने देश लौटने का फैसला इसलिए किया ताकि यह साबित कर सकें कि वह देश की सुरक्षा के लिए कोई खतरा नहीं हैं। दीपके ने यह भी कहा कि वह अपने देश से प्यार करते हैं, लेकिन उस तरीके से नहीं जिस तरीके से सरकार चाहती है।

    नीट पेपर लीक आंदोलन के बाद कॉकरोचों ने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान भी शुरू किया है। CJP के नेता सरकारी स्कूलों की बदहाली से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं। इसी संदर्भ में जब दीपके से उनकी आगे की योजना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने आंदोलन को पार्टी या चुनावी राजनीति तक सीमित रखने से इनकार किया।

    अभिजीत दीपके ने कहा कि लोगों ने राजनीति को केवल चुनाव और राजनीतिक दलों तक सीमित कर दिया है, जबकि उनका उद्देश्य इससे आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि वे सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए नहीं हैं, बल्कि एक बड़ा बदलाव लाना चाहते हैं।

    उनके मुताबिक इस बदलाव का उद्देश्य लोगों को अपने अधिकार और कर्तव्य समझने में सक्षम बनाना है। साथ ही वे चाहते हैं कि लोग यह भी समझें कि सत्ता में कोई भी राजनीतिक पार्टी आए, उससे जवाबदेही कैसे तय कराई जा सकती है। इस तरह दीपके ने अपने आंदोलन को चुनाव से आगे ले जाने और उसे व्यापक बदलाव से जोड़ने की योजना सामने रखी है।