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  • कुंभ राशि में सूर्य–मंगल की महायोग युति, इन राशियों को मिलेगा मान-सम्मान और करियर में बड़ी सफलता

    कुंभ राशि में सूर्य–मंगल की महायोग युति, इन राशियों को मिलेगा मान-सम्मान और करियर में बड़ी सफलता


    नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और मंगल को साहस, ऊर्जा और आत्मबल के सबसे प्रभावशाली ग्रह माना जाता है। सूर्य जहां आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और मान-सम्मान का प्रतीक है, वहीं मंगल ऊर्जा, पराक्रम और निर्णय शक्ति का कारक ग्रह है। जब ये दोनों शक्तिशाली ग्रह एक साथ आते हैं, तो इसे सूर्य–मंगल की युति कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह विशेष युति 23 फरवरी से 15 मार्च के बीच कुंभ राशि में बनने जा रही है, जो कई राशियों के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आएगी। यह युति खासतौर पर करियर, व्यवसाय और सामाजिक प्रतिष्ठा के लिहाज से बेहद शुभ मानी जा रही है। इस दौरान कुछ राशियों को नई नौकरी के अवसर मिल सकते हैं, कारोबार में विस्तार के योग बनेंगे और आत्मविश्वास में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। साथ ही, कुछ जातकों के लिए नए रिश्ते और महत्वपूर्ण संपर्क बनने के भी संकेत हैं। आइए जानते हैं किन राशियों पर सूर्य–मंगल की युति का सबसे अधिक सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

    मेष राशि
    मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य–मंगल की युति दशम भाव को प्रभावित करेगी, जो करियर और कर्म क्षेत्र का भाव माना जाता है। इस दौरान नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति, नई जिम्मेदारियां या बेहतर जॉब ऑफर मिल सकता है। व्यवसाय से जुड़े जातकों को नए क्लाइंट, बड़े प्रोजेक्ट और मुनाफे के अवसर प्राप्त होंगे। सरकारी क्षेत्र में काम करने वालों को मान-सम्मान और पहचान मिल सकती है। लंबे समय से की जा रही मेहनत का फल मिलने से आत्मविश्वास में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    कुंभ राशि

    कुंभ राशि में ही सूर्य और मंगल की युति बन रही है, इसलिए इस राशि के जातकों के लिए यह समय बेहद खास रहेगा। नेतृत्व क्षमता, आत्मबल और निर्णय शक्ति में जबरदस्त इजाफा होगा। नई नौकरी शुरू करने, करियर बदलने या खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए यह समय अनुकूल है। सामाजिक और कार्यस्थल पर आपकी छवि मजबूत होगी। वैवाहिक जीवन में भी स्थिरता और मजबूत रिश्ते बनने के योग हैं। लंबे समय से अटके हुए काम और प्रोजेक्ट इस दौरान गति पकड़ सकते हैं।

    धनु राशि

    धनु राशि वालों के लिए यह युति तीसरे भाव को प्रभावित करेगी, जो साहस, पराक्रम और संचार का भाव होता है। इस दौरान जोखिम लेने की क्षमता बढ़ेगी और आप आत्मविश्वास के साथ नए कदम उठा पाएंगे। मीडिया, कम्युनिकेशन, मार्केटिंग, सेल्स, लेखन और डिजिटल क्षेत्र से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिल सकता है। नए अनुबंध, छोटी यात्राएं और नेटवर्किंग के जरिए आर्थिक लाभ के संकेत हैं। भाई-बहनों से सहयोग भी प्राप्त हो सकता है। कुल मिलाकर सूर्य–मंगल की यह युति कई राशियों के लिए आत्मबल, सफलता और सम्मान का मार्ग खोलने वाली है। सही दिशा में प्रयास करने से इस शुभ योग का पूरा लाभ उठाया जा सकता है।

  • देश का अनोखा मंदिर, जहां शिव नहीं बल्कि नंदी के नाम से होती है पूजा, रहस्य से भरा है यह धाम

    देश का अनोखा मंदिर, जहां शिव नहीं बल्कि नंदी के नाम से होती है पूजा, रहस्य से भरा है यह धाम


    नई दिल्ली । भारत में भगवान शिव के असंख्य मंदिर हैं, लेकिन कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में स्थित एक ऐसा अनोखा मंदिर भी है, जो शिव के नाम से नहीं बल्कि उनके प्रिय भक्त, वाहन और गण नंदी के नाम से जाना जाता है। शिव और नंदी को एक-दूसरे के बिना अधूरा माना जाता है, लेकिन श्री दक्षिणामुख नंदी तीर्थ कल्याणी क्षेत्र देश का ऐसा दुर्लभ स्थल है, जहां नंदी स्वयं शिवलिंग का लगातार अभिषेक करते दिखाई देते हैं। यही कारण है कि यह मंदिर श्रद्धा के साथ-साथ अपने रहस्य के कारण भी भक्तों और पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

    यह पवित्र मंदिर बेंगलुरु के मल्लेश्वरम लेआउट क्षेत्र में स्थित है और इसे नंदीश्वर तीर्थ, बसवा तीर्थ या स्थानीय भाषा में मल्लेश्वरम नंदी गुड़ी भी कहा जाता है। करीब 400 साल पुराने इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां नंदी की विशाल मूर्ति के मुख से लगातार जलधारा बहती रहती है, जो सीधे शिवलिंग का अभिषेक करती है। आश्चर्य की बात यह है कि आज तक कोई यह पता नहीं लगा सका है कि यह जलधारा आखिर कहां से आती है। वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों ही दृष्टि से यह मंदिर एक रहस्य बना हुआ है।

    इतिहास की बात करें तो इस मंदिर का दोबारा प्रकट होना भी किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता। वर्ष 1997 में जब इस क्षेत्र में जमीन की खुदाई का काम चल रहा था, तब यह प्राचीन मंदिर फिर से सामने आया। अन्य दक्षिण भारतीय मंदिरों की तरह यहां कोई भव्य गोपुरम नहीं है और आकार में भी यह मंदिर अपेक्षाकृत छोटा है, लेकिन इसकी आध्यात्मिक महत्ता और रहस्यमयी स्वरूप इसे विशिष्ट बनाता है। नंदी के मुख से निरंतर होते शिवाभिषेक को देखकर भक्तों की आस्था और भी गहरी हो जाती है।

    इस मंदिर की स्थापना को लेकर एक लोकप्रिय दंतकथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में इस क्षेत्र में मूंगफली की खेती हुआ करती थी। किसानों को बार-बार एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता था। हर पूर्णिमा की रात एक सांड खेतों में घुस आता और पूरी फसल को नष्ट कर देता। परेशान होकर एक रात सभी किसानों ने उस सांड को पकड़ने का फैसला किया। वे उसका पीछा करते हुए एक पहाड़ी तक पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचते ही सांड अचानक गायब हो गया। उसकी जगह उन्हें नंदी की एक मूर्ति दिखाई दी, जिसे कन्नड़ भाषा में बसवा कहा जाता है।

    किसानों ने इसे भगवान शिव के गण नंदी का संकेत मानते हुए उनके क्रोध को शांत करने के लिए उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण करवा दिया। मान्यता है कि मंदिर बनने के बाद सांड ने खेतों को नुकसान पहुंचाना बंद कर दिया। तभी से यहां हर साल उत्सव मनाया जाता है और किसान अपनी फसल का पहला हिस्सा नंदी को अर्पित करते हैं। बताया जाता है कि मंदिर में स्थापित नंदी की मूर्ति दुनिया की सबसे बड़ी नंदी मूर्तियों में से एक है। आज यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी अनोखी परंपरा और रहस्यमयी जलधारा के कारण देश के सबसे विशिष्ट और चमत्कारी मंदिरों में गिना जाता है।

  • ICC वनडे रैंकिंग में बड़ा बदलाव: विराट कोहली से छिना नंबर-1 का ताज, डेरिल मिचेल बने टॉप बल्लेबाज

    ICC वनडे रैंकिंग में बड़ा बदलाव: विराट कोहली से छिना नंबर-1 का ताज, डेरिल मिचेल बने टॉप बल्लेबाज


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के कप्तान विराट कोहली को वनडे रैंकिंग में नंबर-1 बल्लेबाज का ताज सिर्फ एक हफ्ते ही टिक सका। आईसीसी ने ताजा रैंकिंग में न्यूजीलैंड के स्टार बल्लेबाज डेरिल मिचेल को शीर्ष स्थान पर पहुंचते हुए नंबर-1 बल्लेबाज का खिताब दिया है। यह बदलाव उनके लगातार दो शानदार पारियों के दम पर संभव हुआ।

    विराट कोहली ने बीते हफ्ते भारत-न्यूजीलैंड श्रृंखला के पहले वनडे में 93 रनों की शानदार पारी खेली थी। इस प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच भी चुना गया और उसी रैंकिंग में वे नंबर-1 बल्लेबाज बने थे। लेकिन सिर्फ सात दिन बाद तीसरे वनडे में टीम इंडिया की हार के बावजूद मिचेल ने अपनी लगातार दो बड़ी पारियों के दम पर नंबर-1 स्थान हासिल कर लिया।डेरिल मिचेल की शानदार पारी तीसरे वनडे में देखने को मिली जो इंदौर में खेला गया। मिचेल ने मुश्किल परिस्थितियों में 131 गेंदों पर 137 रन बनाए और टीम को संकट से बाहर निकाला। इस पारी में उन्होंने 15 चौके और 3 छक्के लगाए। खास बात यह थी कि उन्होंने टीम की शुरुआत में ही संकट का सामना किया जब न्यूजीलैंड की टीम 5 रन पर 2 विकेट गंवा चुकी थी। इस शानदार प्रदर्शन के बाद मिचेल की रेटिंग 845 तक पहुंच गई जो उनके करियर की अब तक की सर्वोत्तम रेटिंग है।

    वहीं विराट कोहली अब 795 रेटिंग के साथ नंबर-2 पर हैं। उनके अलावा रोहित शर्मा भी तीसरे स्थान से गिरकर चौथे स्थान पर आ गए हैं उनकी रेटिंग अब 757 है। अफगानिस्तान के इब्राहिम जादरान ने 764 रेटिंग के साथ तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया।आईसीसी रैंकिंग में एक और दिलचस्प बदलाव केएल राहुल की टॉप-10 में एंट्री है। उन्होंने 11वें स्थान से छलांग लगाकर अब 670 रेटिंग के साथ दसवें स्थान पर जगह बनाई। वहीं श्रेयस अय्यर एक स्थान फिसलकर 11वें स्थान पर आ गए हैं।

    इस अपडेट के साथ ही वनडे रैंकिंग में नए खिलाड़ी और पुराने दिग्गजों के बीच प्रतिस्पर्धा और भी रोमांचक होती जा रही है। डेरिल मिचेल की निरंतरता और दबाव में शानदार खेल ने उन्हें दुनिया के शीर्ष बल्लेबाजों में शामिल कर दिया है वहीं विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसी भारतीय स्टार बल्लेबाजों के लिए नंबर-1 की चुनौती अब और कठिन हो गई है।आईसीसी की यह ताजा रैंकिंग दर्शाती है कि वनडे क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और हर खिलाड़ी को लगातार अपने प्रदर्शन को बेहतर करना होगा।

  • मुख्य सचिव अनुराग जैन का कलेक्टरों को कड़ा संदेश: “समझो कि सब कुछ पता चल जाता है, करप्शन से दूर रहो”

    मुख्य सचिव अनुराग जैन का कलेक्टरों को कड़ा संदेश: “समझो कि सब कुछ पता चल जाता है, करप्शन से दूर रहो”



    नई दिल्ली। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कई जिलों में कलेक्टरों के खिलाफ मिल रही शिकायतों पर नाराजगी जताई है और स्पष्ट किया है कि अधिकारियों को यह नहीं समझना चाहिए कि उनकी गतिविधियां छुपी रहती हैं। उन्होंने कहा कि “किसके यहां क्या पक रहा है, सब मालूम है”, इसलिए सभी अधिकारियों को करप्शन से दूर रहकर सरकार की प्राथमिकताओं और जनता के हितों के अनुरूप काम करना चाहिए।
    सीएस जैन ने यह भी कहा कि कुछ जिलों की शिकायतें उनके और मुख्यमंत्री के पास भी पहुंची हैं, इसलिए बेहतर यही होगा कि अधिकारी जल्द ही अपनी कार्यशैली सुधारें।

    यह चेतावनी उन्होंने सात और आठ अक्टूबर को हुई दो दिवसीय कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की दूसरी समीक्षा बैठक में दी। इस बैठक में सीएस जैन ने कॉन्फ्रेंस के 85 बिंदुओं की जिलावार समीक्षा की और टॉप थ्री तथा बॉटम थ्री जिलों की जानकारी साझा करते हुए कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों को सुधारने का निर्देश दिया। बैठक में पुलिस और अन्य विभागों के साथ मिलकर महिला सुरक्षा के प्रति जागरूकता के लिए किए गए कार्यों की भी समीक्षा की गई।

    साथ ही नाबालिग बालिकाओं के गुम होने पर उनकी तलाश के लिए चलाए जा रहे मुस्कान अभियान की प्रगति भी ली गई, जिसमें बताया गया कि अब तक 1900 से अधिक बालिकाओं को बरामद किया गया है। जन जागरूकता अभियान में टीकमगढ़, धार और सिंगरौली टॉप थ्री जिलों में शामिल रहे, जबकि पन्ना, मुरैना और भिंड बॉटम थ्री जिलों में रहे।

    कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की तारीखों को लेकर भी चर्चा हुई, क्योंकि इसे आयोजित करने के लिए कई बार तारीख बदलती रही। सीएस अनुराग जैन ने पिछले माह 31 दिसंबर को बैठक की तारीख तय की थी, फिर इसे 5 जनवरी कर दिया गया। फिर भी कॉन्फ्रेंस समय पर नहीं हो सकी और 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक करने का निर्णय लिया गया, लेकिन प्रशासनिक कारणों से यह भी संभव नहीं हो पाया। अंततः यह बैठक चौथी बार तय तारीख पर ही हो सकी।

  • डिजिटल इंडिया की दिशा में सरकार की बड़ी पहल; डिजीलॉकर से जुड़ा ‘संपन्न’ पोर्टल, पेंशनरों को मिलेगी ऑनलाइन सुविधा

    डिजिटल इंडिया की दिशा में सरकार की बड़ी पहल; डिजीलॉकर से जुड़ा ‘संपन्न’ पोर्टल, पेंशनरों को मिलेगी ऑनलाइन सुविधा


    नई दिल्ली। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने एक बड़ी पहल की है। अब केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए संपन्न पोर्टल को डिजीलॉकर से जोड़ दिया गया है। इससे सेवानिवृत्त कर्मचारी और पेंशनर अपनी पेंशन संबंधित जरूरी दस्तावेज जैसे ई-पेंशन पेमेंट ऑर्डरई-पीपीओ ग्रेच्युटी पेमेंट ऑर्डर कम्यूटेशन ऑर्डर और फॉर्म-16 घर बैठे ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे।

    संपन्न पेंशन पोर्टल कंट्रोलर जनरल ऑफ कम्युनिकेशन अकाउंट्सCGCA द्वारा विकसित किया गया है। दूरसंचार विभाग ने इस पहल के तहत अपने सभी पेंशनरों को इंटीग्रेशन की जानकारी दे दी है। अब पेंशनर पोर्टल पर अपने पीपीओ नंबर को दर्ज कर गेट डॉक्यूमेंट पर क्लिक करेंगे और सिस्टम उनके अनुरोध के अनुसार आवश्यक दस्तावेज तैयार कर देगा।संचार मंत्रालय के अनुसार इस कदम से पेंशनर सीधे अपने डिजीलॉकर अकाउंट में कम्युनिकेशन स्वीकृति आदेश फॉर्म-16 और अन्य अहम दस्तावेज प्राप्त कर सकेंगे। इससे दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे और कागज की आवश्यकता पूरी तरह समाप्त होगी। साथ ही बैंकिंग मेडिकल रिइंबर्समेंट या अन्य आधिकारिक प्रक्रियाएं पहले से अधिक आसान और त्वरित हो जाएंगी।

    दिल्ली के प्रधान संचार लेखा नियंत्रक आशीष जोशी ने कहा कि यह पहल पेंशनरों के समय और पैसे की बचत करेगी क्योंकि उन्हें अब कागजी दस्तावेजों के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि यह कदम पेंशनरों को डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनाता है और पेपरलेस डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।पेंशनर इस सेवा का उपयोग डिजीलॉकर.गव.इन पर आधार के माध्यम से लॉगिन करके कर सकते हैं। लॉगिन के बाद अपना पीपीओ नंबर लिंक कर तुरंत जरूरी दस्तावेज डाउनलोड किए जा सकते हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 दिसंबर 2018 को देश को समर्पित किया गया संपन्न पोर्टल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पेंशनर-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हुआ है। इस पोर्टल के माध्यम से पेंशन की पूरी प्रक्रिया – आवेदन प्रोसेसिंग ई-पीपीओ जारी करना भुगतान लेखा-जोखा ऑडिट और शिकायत निवारण – पूरी तरह डिजिटल हो गई है। इससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों की जिंदगी आसान हुई है।सरकार की यह पहल न केवल पेंशनरों की सुविधा बढ़ाएगी बल्कि डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को साकार करने में भी एक अहम कदम साबित होगी।

  • वनप्लस इंडिया ने परिचालन बंद करने की अफवाहों को किया खारिज, सीईओ बोले- स्थिति सामान्य

    वनप्लस इंडिया ने परिचालन बंद करने की अफवाहों को किया खारिज, सीईओ बोले- स्थिति सामान्य


    नई दिल्ली। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि वनप्लस इंडिया भारत में अपने ऑपरेशन बंद करने जा रही है। इस खबर के सामने आते ही कंपनी ने बुधवार को इसे पूरी तरह झूठा बताया और कहा कि उनके संचालन पूरी तरह से सामान्य हैं।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वनप्लस के सीईओ रॉबिन लियू ने एक पोस्ट में कहा,वनप्लस इंडिया और उसके संचालन के बारे में फैल रही कुछ गलत जानकारियों को मैं स्पष्ट करना चाहता हूं। हम सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।- उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में आई अपुष्ट खबरें पूरी तरह झूठी हैं और सभी पक्षकारों से आग्रह किया कि वे आधिकारिक स्रोतों की पुष्टि किए बिना कोई जानकारी साझा न करें।कंपनी की इस सफाई ऐसे समय में आई है जब भारत में स्मार्टफोन निर्माताओं को कड़ी सुरक्षा जांच और बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। वनप्लस 2013 में स्वतंत्र ब्रांड के रूप में स्थापित हुआ थालेकिन इसकी ओप्पो के साथ काफी करीबी साझेदारी है। दोनों कंपनियां बीबीके इलेक्ट्रॉनिक्स ग्रुप का हिस्सा हैं और निवेश तथा आपूर्ति श्रृंखला में भी दोनों के बीच निकटता है।

    वनप्लस भारतीय स्मार्टफोन बाजार के मध्य-प्रीमियम सेगमेंट में सक्रिय है। 2025 की तीसरी तिमाही में कंपनी की वृद्धि सालाना आधार पर 10.7 प्रतिशत रही और बाजार हिस्सेदारी 3 प्रतिशत से बढ़कर 4 प्रतिशत हो गई। इस सेगमेंट में सैमसंग शीर्ष पर हैउसके बाद ओप्पो और फिर वनप्लस का स्थान है।आईडीसी के अनुसार2025 की तीसरी तिमाही में भारत का स्मार्टफोन बाजार पांच साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गयाजिसमें सालाना आधार पर 4.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और कुल बिक्री 48 मिलियन यूनिट तक पहुंची। इस अवधि में भारत से स्मार्टफोन की विदेशी शिपमेंट लगभग 79.03 बिलियन डॉलर रहीजिसमें एप्पल के आईफोन का हिस्सा लगभग 75 प्रतिशत यानी 22 बिलियन डॉलर से अधिक रहा।

    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा कि सेमीकंडक्टर उत्पादन बढ़ने से भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में और वृद्धि होने की उम्मीद है। भारत अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन उत्पादक बन गया हैजहां घरेलू स्तर पर बिकने वाले 99 प्रतिशत से अधिक फोन ‘मेड इन इंडिया’ हैंजिससे देश की विनिर्माण मूल्य श्रृंखला में महत्व बढ़ गया है।वनप्लस इंडिया की स्थिति स्पष्ट है – कंपनी भारत में कामकाज जारी रखेगी और स्मार्टफोन बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। मार्च 2026 में समाप्त होने वाली स्मार्टफोन पीएलआई योजना के बावजूद सरकार कथित तौर पर समर्थन बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रही हैजिससे भारत में स्मार्टफोन उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत मिलते हैं।

  • नेशनल रिकॉर्ड होल्डर देव मीणा के साथ बदसलूकी: टीटीई ने पोल को बताया ‘पाइप’, 5 घंटे स्टेशन पर बैठाया और वसूला जुर्माना

    नेशनल रिकॉर्ड होल्डर देव मीणा के साथ बदसलूकी: टीटीई ने पोल को बताया ‘पाइप’, 5 घंटे स्टेशन पर बैठाया और वसूला जुर्माना


    भोपाल । मध्य प्रदेश के गौरव और देश के उभरते हुए पोल वॉल्टर देव कुमार मीणा को अपनी खेल प्रतिभा के बदले महाराष्ट्र के पनवेल रेलवे स्टेशन पर प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। नेशनल रिकॉर्ड होल्डर खिलाड़ी और उनके साथी कुलदीप यादव को न केवल ट्रेन से उतार दिया गया, बल्कि खेल उपकरण पोल साथ रखने के जुर्म में उन पर भारी जुर्माना भी थोपा गया।

    क्या है पूरा मामला

    17 जनवरी को देव मीणा और कुलदीप यादव महाराष्ट्र में आयोजित ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भाग लेकर भोपाल लौट रहे थे। जब वे पनवेल स्टेशन पर ट्रेन बदल रहे थे तब रेलवे स्टाफ और टीटीई ने उनके पास मौजूद पोल खेल उपकरण को लेकर आपत्ति जताई। टीटीई ने इसे ‘स्टील पाइप’ और असुरक्षित सामान करार देते हुए उन्हें ट्रेन में चढ़ने से रोक दिया।

    मेडल की भी नहीं की कद्र

    देव मीणा ने बताया कि उन्होंने रेलवे स्टाफ को अपनी पहचान बताई, अपने जीते हुए मेडल दिखाए और नेशनल रिकॉर्ड के प्रमाण भी दिए। उन्होंने समझाने की कोशिश की कि वे एथलीट हैं और यह उनका खेल उपकरण है, न कि कोई कबाड़ या पाइप। इसके बावजूद टीटीई का रवैया अड़ियल बना रहा। लगभग 5 घंटे तक दोनों खिलाड़ियों को स्टेशन पर मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

    वीडियो बनाकर बयां किया दर्द

    स्टेशन पर रोके जाने के दौरान देव मीणा ने एक वीडियो जारी कर अपना दुख साझा किया। उन्होंने सवाल उठाया, “हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। अगर हमारे जैसे सीनियर एथलीटों के साथ ऐसा बर्ताव हो रहा है, तो छोटे गांवों से आने वाले जूनियर खिलाड़ियों की क्या स्थिति होग अंत में, अपनी यात्रा जारी रखने के लिए दोनों खिलाड़ियों को मजबूरी में 1865 रुपये का जुर्माना भरना पड़ा। जुर्माना भरने के बाद ही उन्हें दूसरी ट्रेन में पोल ले जाने की अनुमति मिली, जिससे न केवल उनका समय बर्बाद हुआ बल्कि उन्हें आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव भी झेलना पड़ा।

    कौन हैं देव मीणा

    19 वर्षीय देव कुमार मीणा मध्य प्रदेश के खातेगांव देवास जिला के रहने वाले हैं। उन्होंने पोल वॉल्ट में नेशनल रिकॉर्ड बनाकर प्रदेश का नाम रोशन किया है और वे भारत के टॉप एथलीटों में शुमार हैं।

  • भारत की बड़ी रणनीतिक पहल: अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका में शामिल होने के संकेत, सप्लाई चेन को मिलेगी वैश्विक मजबूती

    भारत की बड़ी रणनीतिक पहल: अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका में शामिल होने के संकेत, सप्लाई चेन को मिलेगी वैश्विक मजबूती


    नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत एक अहम रणनीतिक कदम उठाने की तैयारी में नजर आ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत अमेरिका के नेतृत्व वाली पहल पैक्स सिलिका में शामिल हो सकता है। यह फैसला ऐसे समय पर सामने आ रहा है जब चीन और पश्चिमी देशों के बीच सेमीकंडक्टर और हाई-टेक सप्लाई चेन को लेकर खींचतान लगातार बढ़ रही है।पैक्स सिलिका में भारत की संभावित भागीदारी से देश को विकसित देशों के साथ तकनीकी साझेदारी आगे बढ़ाने बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने और रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। हालांकि भारत इस प्रक्रिया में यह स्पष्ट करना चाहता है कि उसकी रणनीतिक स्वायत्तता पर कोई असर न पड़े और वह अपनी स्वतंत्र नीतिगत निर्णय क्षमता बनाए रखे।

    क्या है पैक्स सिलिका और इसका उद्देश्य
    पैक्स सिलिका उन देशों का समूह है जो सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस टेक्नोलॉजी की आपूर्ति श्रृंखलाओं में अहम भूमिका निभाते हैं। इस समूह में सिंगापुर इजराइल जापान दक्षिण कोरिया ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स ऑटोमोबाइल और अत्याधुनिक एआई सिस्टम जैसी तकनीकों की रीढ़ मानी जाने वाली अत्यधिक केंद्रीकृत सप्लाई चेन की कमजोरियों को दूर करना है।बीते वर्षों में वैश्विक चिप संकट ने यह दिखा दिया है कि कुछ सीमित क्षेत्रों पर निर्भरता पूरी दुनिया के उद्योगों को प्रभावित कर सकती है। पैक्स सिलिका इसी निर्भरता को कम कर भरोसेमंद और विविध आपूर्ति नेटवर्क विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।

    भारत के लिए क्यों अहम है यह कदम

    भारत जैसे विकासशील बाजार के लिए यह पहल कई मायनों में फायदेमंद साबित हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक नई दिल्ली सब्सिडी खरीद व्यवस्था में प्राथमिकता और संतुलित आयात नियमों के लिए नीतिगत गुंजाइश तलाश सकती है। हालांकि यह रुख कुछ पैक्स सिलिका सदस्य देशों के दृष्टिकोण से पूरी तरह मेल न भी खा सकता है।इसके बावजूद भारत पहले से ही जापान और सिंगापुर जैसे देशों के साथ लचीली सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने पर काम कर रहा है। यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में अपनी भूमिका को लेकर गंभीर और दीर्घकालिक सोच रखता है।

    अमेरिका का स्पष्ट संकेत

    नई दिल्ली में अपने पहले दिन भारत में नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने उन्नत प्रौद्योगिकी में अमेरिकी नेतृत्व वाली आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी का जिक्र करते हुए पैक्स सिलिका में भारत को पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल करने की घोषणा की थी। इसे भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से एक अहम संकेत माना जा रहा है।

    भारत का सेमीकंडक्टर विजन

    इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा था कि भारत संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र-डिजाइन विनिर्माण ऑपरेटिंग सिस्टम एप्लिकेशन सामग्री और उपकरण-में एक प्रमुख वैश्विक खिलाड़ी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि देश में चार सेमीकंडक्टर प्लांट इस वर्ष वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करेंगे।कुल मिलाकर पैक्स सिलिका में भारत की संभावित भागीदारी न सिर्फ आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगी बल्कि भारत को वैश्विक टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर मैप पर एक अहम केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी मदद कर सकती है।

  • मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला: अटल पेंशन योजना 2030-31 तक जारी

    मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला: अटल पेंशन योजना 2030-31 तक जारी


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अटल पेंशन योजना (APY) को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बुढ़ापे में नियमित आमदनी और वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को मजबूत बनाना है।
    सरकार ने कहा है कि योजना का प्रचार-प्रसार, विकास और जरूरत पड़ने पर आर्थिक सहायता जारी रहेगी। इसका मकसद है कि ज्यादा से ज्यादा गरीब और कम आय वाले लोग इस योजना से जुड़ सकें।

    यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
    इससे असंगठित क्षेत्र के लाखों कामगारों को बुढ़ापे में स्थायी आमदनी मिलेगी।

    यह कदम विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाएगा।
    सरकार जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण, और वित्तीय सहायता जारी रखेगी।
    यदि किसी बैंक/संस्था को योजना चलाने में आर्थिक कमी होती है, तो गैप फंडिंग के जरिए उसे पूरा किया जाएगा, ताकि योजना टिकाऊ बनी रहे।

    अटल पेंशन योजना कब शुरू हुई?
    9 मई 2015 को अटल पेंशन योजना की शुरुआत हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य था असंगठित क्षेत्र के लोगों को 60 वर्ष की उम्र के बाद पेंशन का लाभ देना, ताकि वे अपने बुढ़ापे में किसी पर निर्भर न रहें।

    पेंशन कितनी मिलती है?

    योजना के अनुसार 60 साल की उम्र के बाद लाभार्थी को ₹1,000 से ₹5,000 तक मासिक पेंशन मिल सकती है।

    पेंशन राशि इस पर निर्भर करती है:
    आपकी उम्र
    आपने कितनी पेंशन चुनी
    आपकी कुल जमा राशि

    अब तक कितने लोग जुड़े?
    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 19 जनवरी 2026 तक 8.66 करोड़ से ज्यादा लोग इस योजना से जुड़े हुए हैं। यह आंकड़ा योजना की विश्वसनीयता और लोकप्रियता को दर्शाता है।

    अटल पेंशन योजना की पात्रता (Eligibility)
    भारतीय नागरिक होना चाहिए
    उम्र 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए
    आपके पास बैंक/पोस्ट ऑफिस में सेविंग्स अकाउंट होना चाहिए
    1 अक्टूबर 2022 से यदि आप इनकम टैक्सपेयर हैं या रहे हैं, तो आप शामिल नहीं हो सकते
    जो व्यक्ति NPS या अन्य पेंशन स्कीम में नहीं है, वह जुड़ सकता है

    कितना निवेश करना पड़ता है?
    आप अपनी पेंशन राशि चुन सकते हैं:
    ₹1,000 / ₹2,000 / ₹3,000 / ₹4,000 / ₹5,000
    मासिक योगदान आपकी उम्र और चुनी गई पेंशन पर निर्भर करता है।
    जितनी कम उम्र में शुरू करेंगे, उतना कम मासिक योगदान देना पड़ेगा।

    उम्र के अनुसार मासिक योगदान
    एंट्री की उम्र ₹1,000 ₹2,000 ₹3,000 ₹4,000 ₹5,000
    18 ₹42 ₹84 ₹126 ₹168 ₹210
    20 ₹50 ₹100 ₹150 ₹198 ₹248
    25 ₹76 ₹151 ₹226 ₹301 ₹376
    30 ₹126 (approx) ₹252 ₹378 ₹504 ₹630 (approx)
    35 ₹231 (approx) ₹462 ₹693 ₹924 ₹1,154
    40 ₹471 (approx) ₹942 ₹1,413 ₹1,884 ₹2,354
    नोट: यह राशि इंडिकेटिव है।

    सटीक राशि के लिए बैंक या आधिकारिक APY कैलकुलेटर (npstrust.org.in या PFRDA वेबसाइट) देखें।

    अटल पेंशन योजना में निवेश कैसे करें?
    नजदीकी बैंक/पोस्ट ऑफिस जाएं
    APY आवेदन फॉर्म भरें
    आधार, मोबाइल नंबर, नामिनेशन, बैंक डिटेल्स भरें
    पेंशन राशि चुनें
    बैंक ऑटो-डेबिट सेट करेगा और PRAN जारी करेगा
    कुछ बैंक ऐप्स/पोर्टल से भी आवेदन हो सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में बैंक शाखा से ही शुरू होता है।

    अटल पेंशन योजना को 2030-31 तक जारी रखने का निर्णय असंगठित क्षेत्र के लोगों के लिए एक बड़ी राहत है। यह कदम उन्हें बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा देगा और देश में वित्तीय समावेशन को और मजबूत करेगा।

  • Ayurvedic Bathing Tips: सफाई के साथ स्वास्थ्य और ताजगी के लिए ये तीन स्टेप्स अपनाएं

    Ayurvedic Bathing Tips: सफाई के साथ स्वास्थ्य और ताजगी के लिए ये तीन स्टेप्स अपनाएं

    नई दिल्ली। भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग हर काम तेजी से करते हैं, लेकिन खुद के लिए समय निकालना मुश्किल हो गया है। ऐसे में रोज़मर्रा की जरूरतों के बीच स्नान का महत्व अक्सर अनदेखा हो जाता है। आम धारणा यह है कि नहाना केवल शरीर की बाहरी सफाई के लिए होता है, लेकिन आयुर्वेद में इसे ‘संस्कार’ और ‘चिकित्सा’ माना गया है, जो तन के साथ-साथ मन को भी शुद्ध करता है।

    स्नान से शारीरिक और मानसिक लाभ

    स्नान केवल शरीर की गंदगी हटाने तक सीमित नहीं है। इसके नियमित अभ्यास से:

    पाचन शक्ति मजबूत होती है और मेटाबॉलिज्म में सुधार आता है।

    सुस्ती और थकान कम होती है, जिससे दिनभर ऊर्जा बनी रहती है।

    रक्त संचार बेहतर होता है, और शरीर की अग्नि संतुलित रहती है।

    तनाव और कोर्टिसोल का स्तर कम होता है, जबकि एंडोर्फिन हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जिससे मन प्रसन्न रहता है।

    अच्छी नींद आती है, क्योंकि स्नान से नर्वस सिस्टम शांत होता है।

    यदि रोज़ाना पूरा स्नान संभव न हो, तो कम से कम गुनगुने पानी में पैरों को डुबोकर रखना भी लाभकारी माना गया है।

    आयुर्वेदिक तरीके से स्नान करने के तीन नियम

    आयुर्वेद में स्नान को स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा के लिए तीन मुख्य क्रियाओं में बांटा गया है:

    अभ्यंग (तेल मालिश)
    नहाने से लगभग 15 मिनट पहले पूरे शरीर की तेल से मालिश करें। नवजात शिशु की तरह हल्के हाथों से अभ्यंग करने से रक्त संचार बढ़ता है, शरीर पोषित होता है और त्वचा की नमी बरकरार रहती है।

    उबटन का प्रयोग
    अभ्यंग के बाद उबटन लगाना त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद है। यह मृत त्वचा की कोशिकाओं को हटाकर नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। प्राकृतिक उबटन रसायनों से मुक्त होते हैं और त्वचा को मुलायम, चमकदार और स्वस्थ बनाते हैं।

    मंत्रोच्चार
    स्नान के समय सकारात्मक मंत्रोच्चार करना मन और मस्तिष्क दोनों के लिए लाभकारी है। यह मानसिक तनाव कम करता है और शरीर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करता है।

    स्नान के नियमित अभ्यास से जीवनशैली में सुधार

    नियमित स्नान सिर्फ स्वच्छता का साधन नहीं, बल्कि तन, मन और आत्मा की ताजगी का माध्यम है। आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर पर पानी पड़ता है, तो:

    पूरे शरीर में रक्त का संचार तेज़ होता है।

    पाचन अग्नि सक्रिय रहती है।

    थकान दूर होती है और मन प्रसन्न रहता है।

    स्नान के दौरान तेल, उबटन और मंत्रोच्चार का संयोजन शरीर और मन दोनों के लिए सशक्त ऊर्जा प्रदान करता है, जिससे जीवनशैली में सुधार आता है।

    स्नान को केवल नित्यकर्म मानना बड़ी भूल है। यह तन, मन और मस्तिष्क की शुद्धि का आयुर्वेदिक तरीका है। सही विधि से स्नान करने से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि मानसिक तनाव भी कम होता है और दिनभर ऊर्जा बनी रहती है। इसलिए, भागदौड़ भरी जिंदगी में भी स्नान को सिर्फ स्वच्छता नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा का संस्कार समझकर अपनाना चाहिए।