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  • सुसनेर से कुरावर जा रही बस बनी हादसे का शिकार तेज रफ्तार ने ली एक जान

    सुसनेर से कुरावर जा रही बस बनी हादसे का शिकार तेज रफ्तार ने ली एक जान


    शाजापुर । मध्यप्रदेश में लगातार बढ़ते सड़क हादसे एक बार फिर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं और ताजा मामला आगर मालवा जिले से सामने आया है जहां तेज रफ्तार का कहर एक और जान ले गया। सुसनेर से कुरावर जा रही एक निजी यात्री बस अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई जिससे मौके पर अफरा तफरी और चीख पुकार मच गई। इस दर्दनाक हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि एक दर्जन से अधिक यात्री घायल हो गए जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    जानकारी के अनुसार यह बस सुसनेर से कुरावर की ओर जा रही थी तभी बड़ागांव के पास चालक बस पर नियंत्रण खो बैठा और वाहन सड़क किनारे पलट गया। बस के पलटते ही यात्रियों में चीख पुकार मच गई और कई लोग अंदर ही फंस गए। आसपास के ग्रामीणों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया और स्थानीय लोगों की मदद से बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला गया।

    घटना के तुरंत बाद सभी घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को नलखेड़ा के अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो पाई है और पुलिस उसकी शिनाख्त करने में जुटी हुई है।

    हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में बस की तेज रफ्तार और चालक की लापरवाही को हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है हालांकि तकनीकी खराबी या अन्य कारणों की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

    इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश में लगातार हो रहे ऐसे हादसे यह संकेत देते हैं कि यातायात नियमों का पालन और वाहनों की नियमित जांच बेहद जरूरी है। खासकर निजी बसों में ओवरस्पीडिंग और लापरवाही से वाहन चलाने की घटनाएं आम होती जा रही हैं जो यात्रियों की जान के लिए खतरा बन रही हैं।

    जरूरत इस बात की है कि प्रशासन सख्ती दिखाते हुए नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे और लोगों में भी सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए ताकि इस तरह के दर्दनाक हादसों को रोका जा सके। फिलहाल इस दुर्घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है और लोग घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

  • शेयर बाजार पर दबाव बरकरार: विदेशी निवेशकों की बिकवाली से लगातार पांचवीं साप्ताहिक गिरावट

    शेयर बाजार पर दबाव बरकरार: विदेशी निवेशकों की बिकवाली से लगातार पांचवीं साप्ताहिक गिरावट


    नई दिल्ली भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का नाम थमाने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बहुलता और विदेशी उपभोक्ताओं की लगातार बिकवाली रही। सप्ताह के आखिरी प्रमुख दिन निफ्टी 50 2.09% बढ़त के साथ 22,819.60 पर बंद हुआ, जबकि पूरे सप्ताह में इसमें 0.52% की बढ़ोतरी हुई। हालांकि पिछले एक महीने में शेयरधारकों को करीब 8.23% का नुकसान हुआ है, लेकिन जिन निवेशकों की चिंता काफी बढ़ गई है।

    गोदाम और बैंक में भी भारी दबाव

    वहीं बीएसई सेंसेक्स में भी गिरावट साफ नजर आई और यह शुक्रवार को 1,690 अंक 2.25% 73,583.22 पर बंद हुआ। पूरे हफ्ते में करीब 1.94% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एक महीने में यह 8.29% तक टूट गई। नेटवर्क सेक्टर की बात करें तो निफ्टी बैंक सबसे ज्यादा दबाव में रहा और शुक्रवार को 2.67% 52,274 के करीब बंद हुआ। पूरे सप्ताह में इसमें 2.16% की गिरावट दर्ज की गई।

    वैश्विक तनाव और सरकारी कच्चे तेल का असर

    बाजार पर सबसे बड़ा असर संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का है, जिससे निवेशकों में अनिश्चितता बनी हुई है। इसके साथ ही ब्रेंट क्रूड की पार्टनरशिप 98 से 115 डॉलर प्रति शेयर के बीच बनी हुई है, जिसने स्थिरता और आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। कच्चे कच्चे तेल का सीधा असर भारत जैसे मजबूत देश पर पड़ता है, जिससे आरएमबी भी दबाव में आ गई।

    सेक्टर में मिलाजुला रुख, मेटल और पीएसयू बैंक सबसे खराब

    सेक्टोरल परफॉर्मेंस की बात तो मेट्रिक मेटल और पीएससीयू बैंक में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। वहीं आईटी और फार्मास्युटिकल सेक्टर में छोटी-छोटी जगहें दिखाई दीं, जहां आईटी में 1.17% और फार्मास्युटिकल में 0.11% की बढ़त दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी प्रेशर में रहे—निफ्टी मिडकैप100 में 1.38% और स्मॉलकैप100 में 0.63% की गिरावट दर्ज की गई।

    FII की बिकवाली, DII का सहारा

    बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली रही। सप्ताह भर में करीब 25,000 से 30,000 करोड़ रुपये की बिक्री बढ़ी, जबकि मार्च में यह आंकड़ा 1.13 लाख रुपये करोड़ से ज्यादा तक पहुंच गया। वहीं घरेलू उद्यमों (डीआईआई) ने 25,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया, जिससे बाजार को कुछ हद तक सहारा मिला।

    क्या? अहम किरदार पर टिकी नजर

    निफ्टी 50 22,850-22,750 के अहम सपोर्ट जोन पर टिकने की कोशिश कर रहा है। ऊपर की तरफ 23,000-23,100 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है। वहीं निफ्टी बैंक के लिए 52,000-51,800 का सपोर्ट जोन है, जबकि 53,000-53,600 के लेवल पर सपोर्ट मिल सकता है।


    प्रकाशन- जारी रहने के संकेत

    विशेषज्ञ का मानना ​​है कि जब तक वैश्विक तनाव और कच्चे तेल के कारखाने में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालाँकि घरेलू निवेश और बाज़ारों में सुधार से बाज़ार को आगे सहारा मिल सकता है।

  • नोएडा एयरपोर्ट बनेगा गेमचेंजर! बेहतर कनेक्टिविटी से कारोबार और रोजगार को रफ्तार

    नोएडा एयरपोर्ट बनेगा गेमचेंजर! बेहतर कनेक्टिविटी से कारोबार और रोजगार को रफ्तार


    नई दिल्ली करीब 11,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पहला चरण अब देश को समर्पित हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन करते हुए इसे भारत के विकास क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। यमुना एक्सप्रेसवे के पास स्थित यह हवाई अड्डा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का दूसरा प्रमुख सिविल हवाई अड्डा बन गया है, जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इससे दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में हवाई यात्रा का दबाव कम होगा और यात्रा पहले से अधिक सशक्त बनेगी।

    प्रोजेक्ट में क्रांतिकारी परिवर्तन, मल्टी-मॉडल हब के रूप में विकास

    नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को एक मल्टी-मॉडल बिजनेस हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां सड़क, रेल और मेट्रो सुविधाओं का बेहतरीन संगम होगा। यह हवाई अड्डा न सिर्फ दिल्ली-मैदान, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों के लिए भी बड़ा पर्यटक केंद्र बनेगा। यहां के माध्यम से एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित रेल लिंक बेहद आसान होगा, जिससे यात्रियों के साथ-साथ सहयोगियों को भी लाभ मिलेगा।

    आधुनिक तकनीक से लैस ‘ऑल वेडर’ एयरपोर्ट

    इस हवाई अड्डे को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से ‘ऑल वेडर ऑपरेशन’ की शुरुआत मिली है। इसका मतलब यह है कि यहां राक्षसी नेविगेशन सिस्टम, रनवे लाइटिंग और एयर रिमोट कंट्रोल सिस्टम मौजूद हैं, जिससे खराब मौसम या कम दृश्यता में भी उड़ान ऑपरेशन ऑपरेशन रूप से जारी रहता है। 3,900 मीटर वजनी रनवे बड़े वीडियो-बॉडी चित्रों को संलग्न करने में सक्षम है और दोनों सिरों पर आईएलएस सिस्टम स्थापित किया गया है, जो अधिक सुरक्षित और आसान सुविधा प्रदान करता है।

    क्षमता और बुनियादी ढांचे: भविष्य की इंजीनियरों के स्कूल की तैयारी

    पहले चरण में इस एयरपोर्ट की यात्री क्षमता 1.2 करोड़ रखी गई है, जिसे भविष्य में 7 करोड़ तक बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही यहां कार्गो हैंडलिंग की क्षमता भी काफी बड़ी है, जो हर साल 2.5 लाख टन से अधिक कार्गो हैंडलिंग कर सकती है। खास बात यह है कि यह देश का पहला एयरपोर्ट होगा, जहां इन-हाउस बात एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे एयरलाइंस की लागत और समय दोनों की बचत होगी।

    उद्योग और रोजगार को मिलेगा बड़ा सहारा

    नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा सिर्फ एक हवाई अड्डा नहीं है, बल्कि आर्थिक विकास का नया इंजन साबित हो रहा है। इसके माध्यम से निवेश, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे। उत्तर प्रदेश में पहले ही एक्सप्रेसवे, मेट्रो और रैपिड रेल जैसी कंपनियां प्रमुखता से काम कर रही हैं, और अब इस एयरपोर्ट के साथ देश में सबसे ज्यादा एयरपोर्ट वाले राज्य शामिल हो गए हैं।

    निष्कर्ष: भारत के एविएशन सेक्टर की नई उड़ान

    अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे की शुरुआत न सिर्फ एनसीआर की ओर से मजबूत होगी, बल्कि यह भारत को वैश्विक एविएशन हब की दिशा में बनाना भी एक बड़ा कदम है। आने वाले वर्षों में यह एयरपोर्ट देश की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभाएगा।

  • विकसित भारत 2047 की दिशा में बड़ा कदम भोपाल में जुटेंगे तीन राज्यों के युवा विधायक

    विकसित भारत 2047 की दिशा में बड़ा कदम भोपाल में जुटेंगे तीन राज्यों के युवा विधायक


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनने जा रही है जहां 30 और 31 मार्च 2026 को युवा विधायकों का एक विशेष और अनूठा सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। मध्य प्रदेश विधानसभा की इस पहल में मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के 55 से अधिक युवा विधायक एक मंच पर एकत्रित होंगे और लोकतंत्र तथा देश के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण विचार-विमर्श करेंगे। खास बात यह है कि इस सम्मेलन में शामिल सभी जनप्रतिनिधियों की आयु 45 वर्ष से कम है जिससे यह आयोजन पूरी तरह युवा नेतृत्व और उनकी सोच पर केंद्रित रहेगा।

    दो दिवसीय इस सम्मेलन का उद्घाटन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। इस अवसर पर नरेन्द्र सिंह तोमर और रमन सिंह जैसे वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहेंगे जो युवा विधायकों का मार्गदर्शन करेंगे। वहीं समापन सत्र में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह की मौजूदगी इस सम्मेलन को और अधिक महत्वपूर्ण बनाएगी।

    इस सम्मेलन में तीनों राज्यों से युवा विधायकों की भागीदारी भी संतुलित और व्यापक है। मध्यप्रदेश से 18, छत्तीसगढ़ से 15 और राजस्थान से 22 विधायक इसमें शामिल होंगे। यह आयोजन न केवल संख्या के लिहाज से बड़ा है बल्कि इसके उद्देश्यों की दृष्टि से भी बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि पहली बार इस तरह तीन राज्यों के युवा जनप्रतिनिधियों को एक साझा मंच दिया जा रहा है जहां वे अपने अनुभवों और विचारों का आदान-प्रदान कर सकेंगे।

    सम्मेलन के दौरान दो प्रमुख विषयों पर गहन चर्चा और मंथन किया जाएगा जिनमें लोकतंत्र में युवाओं की भूमिका और विकसित भारत 2047 का विजन शामिल है। इन सत्रों में युवा विधायक अपने अपने क्षेत्रों में किए गए नवाचार, सफल योजनाओं और जमीनी अनुभवों को साझा करेंगे। इसके साथ ही वे उन चुनौतियों पर भी चर्चा करेंगे जो भविष्य में शासन और नीति निर्माण के दौरान सामने आ सकती हैं। इस तरह यह मंच केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि व्यावहारिक समाधान खोजने का भी प्रयास करेगा।

    विधानसभा सचिवालय के अनुसार यह सम्मेलन विधान परिषद भवन में आयोजित किया जाएगा जहां विभिन्न सत्रों के माध्यम से युवा नेतृत्व को सशक्त बनाने पर जोर दिया जाएगा। यह आयोजन संसदीय प्रणाली को समझने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि देश के भविष्य की राजनीति को आकार देने की दिशा में एक सार्थक पहल है। यहां लिए गए विचार और सुझाव आने वाले वर्षों में नीति निर्माण और विकास के एजेंडे को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में सभी की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि युवा विधायक इस मंच से किस तरह के विचार और विजन देश के सामने रखते हैं और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में अपनी भूमिका को कैसे परिभाषित करते हैं।

  • मुनमुन सेन बर्थडे स्पेशल: 80 के दशक की ‘बोल्ड बाला’ जिसने हिंदी सिनेमा को किया चुनौतीपूर्ण

    मुनमुन सेन बर्थडे स्पेशल: 80 के दशक की ‘बोल्ड बाला’ जिसने हिंदी सिनेमा को किया चुनौतीपूर्ण

    नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के 80 के दशक में महिलाएं अपने करियर और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाना मुश्किल मानती थीं। शादी और बच्चों के बाद बड़े कलाकारों के साथ काम करना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता था। ऐसे में मुनमुन सेन ने इन सभी रूढ़िवादी नियमों को तोड़ते हुए अपनी पहचान बनाई। 28 मार्च को जन्मी मुनमुन सेन ने हिंदी और बंगाली सिनेमा में अपनी अलग छवि बनाई और उन्हें इंडस्ट्री कीबोल्ड बाला कहा गया।

    सिनेमा में आने का मुनमुन का कोई प्रारंभिक इरादा नहीं था। उनकी मां, सुचित्रा सेन, चाहती थीं कि उनकी बेटी फिल्मों से दूर रहे। लेकिन शादी और दो बच्चों की मां बनने के बाद मुनमुन ने खुद की पहचान बनाने के लिए फिल्मों का रुख किया। पति के सहयोग से उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा और पहला किरदार ही उन्हें सुर्खियों में ला गया।

    उनकी पहली फिल्मअंदर बाहर में उनका छोटा सा किरदार भी दर्शकों को प्रभावित करने के लिए काफी था। मुनमुन सेन ने इस फिल्म में आधुनिक और निडर महिला की भूमिका निभाई, जिसने उन्हें इंडस्ट्री में अलग पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने100 डेज जख्मी दिल तेलुगु फिल्म सिरिवे नेलाअमर कंटक औरशीशा जैसी फिल्मों में काम किया।

    मुनमुन सेन की फिल्मों में बोल्ड और निडर भूमिकाओं के कारण उनका नाम हमेशा चर्चा में रहा। बंगाल में उनके बोल्ड किरदारों पर विरोध हुआ और उनके विवादित फोटोशूट ने इस बहस को और भी बढ़ा दिया। कई मैगजीन के लिए सेंसेशनल पोज देने के बावजूद मुनमुन ने अश्लीलता के आरोपों को बेखौफ झेला और 80-90 के दशक की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शुमार रहीं।

    सिर्फ फिल्मी करियर ही नहीं, उनकी निजी जिंदगी भी हमेशा मीडिया और दर्शकों के बीच चर्चाओं का विषय रही। उनके नाम कई अफेयर्स जुड़े, जिनमें पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर और प्रधानमंत्री इमरान खान, प्रोड्यूसर रोमू सिप्पी और विक्टर बनर्जी शामिल हैं। लेकिन मुनमुन सेन ने हमेशा बेबाकी से अफेयर्स की खबरों को नकारा और इमरान खान को अपना करीबी दोस्त बताया।

    मुनमुन सेन की कहानी यह दिखाती है कि एक महिला चाहे शादीशुदा हो या मां, अगर हिम्मत और आत्मविश्वास हो तो सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है। उनके निडर किरदार और बोल्ड फिल्म च्वाइस ने हिंदी सिनेमा के उस समय के रूढ़िवादी नजरिए को चुनौती दी और उन्हें इंडस्ट्री की सबसे चर्चित और यादगार अभिनेत्रियों में शामिल किया।

  • मुंबई इंडियंस के लिए खुशखबरी! बुमराह कैंप से जुड़े, KKR के खिलाफ दिख सकते हैं एक्शन में

    मुंबई इंडियंस के लिए खुशखबरी! बुमराह कैंप से जुड़े, KKR के खिलाफ दिख सकते हैं एक्शन में


    नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के ट्रेलर से ठीक पहले मुंबई इंडियंस के खेमे से बड़ा टेलिविजन सामने आया है। टीम के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रित बुमरा मुंबई पहुंच गए हैं और टीम में शामिल हो गए हैं। ऐसे में रविवार को कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ होने वाले क्लब में उनका प्रदर्शन काफी बढ़ गया है। हालांकि फाइनल डिसीजन मैच से पहले ही ले लिया गया था, लेकिन टीम से जुड़े ब्यौरे के मुताबिक सुपरस्टार पूरी तरह से फिट नजर आ रहे हैं।

    वर्कशॉप के बाद पूरी तरह से तैयार

    संगीतकार पिछले कुछ दिनों से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के एक्सीलेंस सेंटर में स्थित थे, जहां उनका वर्कशॉप बनाया जा रहा था। यह एक नियमित प्रक्रिया थी, जिससे उनकी फिटनेस पर नज़र बनी रहती थी। एथोट के अनुसार, उन्होंने हाल ही में पूरी तरह से नामांकन दाखिल किया है और अब वह मैच के लिए तैयार हैं। ऐसे में उनकी वापसी में मुंबई का आक्रमण और भी खतरनाक नजर आ रहा है।

    एमआई बनाम केकेआर में वनखेड़े नज़ारें प्रशंसक पर

    रविवार को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच सीजन का दूसरा मुकाबला खेला जाएगा। दोनों टीमों ने शुक्रवार रात अभ्यास और शनिवार को एक और अभ्यास सत्र तय किया। इस दौरान सभी की नजरें, बॉलर की फिटनेस और उनकी जगह-जगह की चुनौती। यदि वह प्रतिस्पर्धा करता है, तो केकेआर के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

    पिछले सीज़न की सीख, इस बार की बेहतर शुरुआत की तैयारी

    आईपीएल 2025 में मुंबई इंडियंस का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। टीम 14 में से 8 ग्रुप ने ही जीत हासिल की और प्लेऑफ में किसी तरह चौथे स्थान पर रहे। हालांकि पांच बार की चैंपियन टीम इस बार बेहतर शुरुआत कर टॉप-2 में जगह बनाने का लक्ष्य लेकर उतरेगी। स्टूडियो की वापसी इस मिशन को स्थान देने का काम करती है।

    आगे का नाटक भी

    केकेआर का पहला मुकाबला मॉस्को के बाद मुंबई इंडियंस से 4 अप्रैल को दिल्ली कैपिटल्स से, 7 अप्रैल को राजस्थान रॉयल्स से और 12 अप्रैल को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ खेलेगी। ऐसे में शुरुआती मैचों में म्यूजिकल टीम के लिए बेहद अहम रहने वाली है।

  • RCB कप्तानी का इतिहास: इन 5 खिलाड़ियों ने सबसे ज्यादा मैचों में लीड की टीम

    RCB कप्तानी का इतिहास: इन 5 खिलाड़ियों ने सबसे ज्यादा मैचों में लीड की टीम


    नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग 2026 की शुरुआत के साथ ही गत चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु एक बार फिर खिताब बचाने के इरादे से मैदान में उतर रही है। लेकिन इस टीम का इतिहास सिर्फ स्टार खिलाड़ियों के लिए ही नहीं, बल्कि कप्तानी के उतार-चढ़ाव के लिए भी जाना जाता है। आइए जानते हैं उन 5 खिलाड़ियों के बारे में, जिन्होंने कप्तान आरसीबी के लिए सबसे ज्यादा मैच खेले और टीम को दिशा दी।

    विराट कोहली: सबसे लंबे समय तक कप्तानी का रिकॉर्ड

    विराट कोहली आरसीबी के सबसे सफल और लंबे समय तक कप्तानी करने वाले खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने 2011 से 2023 तक टीम की कमान संभाली और कुल 143 मुकाबलों में कप्तानी की। इस दौरान टीम को 66 जीत मिली, जबकि 70 मैचों में हार का सामना करना पड़ा। उनकी कप्तानी में टीम 2016 में फाइनल तक पहुंची, हालांकि खिताब जीतने से चूक गई।

    फाफ डू प्लेसिस: बैलेंस्ड परफॉर्मेंस के साथ नई दिशा

    फाफ डू प्लेसिस ने 2022 से 2024 के बीच RCB की कप्तानी की। उन्होंने 42 मैचों में टीम का नेतृत्व किया, जिसमें 21 जीते और 21 हारे। डू प्लेसिस ने अपने शांत नेतृत्व और आक्रामक बल्लेबाजी से टीम को संतुलन दिया।

    अनिल कुंबले: कम समय में शानदार प्रभाव

    अनिल कुंबले ने 2009-2010 के दौरान 26 मैचों में RCB की कप्तानी की। इस दौरान टीम ने 15 मुकाबले जीते और 11 हारे। कुंबले की कप्तानी में RCB 2009 के फाइनल तक पहुंची थी, जो उस समय टीम का बड़ा प्रदर्शन था।

    डेनियल विटोरी: शांत नेतृत्व, अच्छा रिकॉर्ड

    डेनियल विटोरी ने 2011 से 2012 के बीच 22 मैचों में टीम की कमान संभाली। उनकी कप्तानी में टीम ने 12 मैच जीते और 10 हारे। विटोरी का नेतृत्व शांत और गैंगस्टर माना जाता था।

    राहुल द्रविड़: RCB के पहले कप्तान

    राहुल द्रविड़ IPL इतिहास में RCB के पहले कप्तान थे। वे 2008 में टीम की कमान संभाली और 14 मैचों में सिर्फ 4 जीत दिला सके, जबकि 10 मुकाबलों में टीम को हार झेलनी पड़ी। हालांकि, द्रविड़ ने टीम की नींव मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।

    कप्तान बदले, लेकिन खिताब की तलाश लंबी रही

    RCB की कप्तानी कई दिग्गज खिलाड़ियों ने संभाली, लेकिन टीम को लंबे समय तक खिताब का इंतजार करना पड़ा। अलग-अलग कप्तानों ने अपनी छाप छोड़ी, जिन्होंने टीम को आज के मुकाम तक पहुंचाया।

  • क्रिकेट फैंस के लिए खुशखबरी! बांग्लादेश में IPL प्रसारण का रास्ता साफ

    क्रिकेट फैंस के लिए खुशखबरी! बांग्लादेश में IPL प्रसारण का रास्ता साफ


    नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग 2026 की शुरुआत से पहले क्रिकेट प्रेमियों के लिए बड़ी खबर सामने है। बांग्लादेश सरकार ने अपने देश में आईपीएल प्रसारण को लेकर रुख साफ करते हुए इसे मंजूरी दे दी है। नवनियुक्त सूचना एवं प्रसारण मंत्री जहीर उद्दीन स्वपन ने स्पष्ट किया कि आईपीएल के प्रसारण पर कोई रोक नहीं है और यदि कोई चैनल इसके लिए आवेदन करता है, तो सरकार उस पर सकारात्मक तरीके से विचार करें। इससे पहले दिए गए प्रतिबंध को लेकर जो साख बनी हुई थी, वह अब लगभग खत्म होने वाली नजर आ रही है।

    ‘राजनीति में नहीं’-सरकार का साफ संदेश

    मीडिया के अनुसार, मंत्री स्वप्न ने कहा कि सरकार खेल और राजनीति को अलग रखना चाहती है। उनका कहना है कि आईपीएल एक व्यावसायिक और मनोरंजन से जुड़ा कार्यक्रम है, इसलिए इसे भी देखा जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि अब तक किसी भी चैनल ने ऑनलाइन एप्लिकेशन के रूप में प्रसारण के लिए आवेदन नहीं किया है, लेकिन जैसे ही कोई एप्लिकेशन आता है, उस पर नए सिरे से विचार किया जाएगा। इससे यह साफ होता है कि सरकार की ओर से वैचारिक खेलों को बढ़ावा दिया जा रहा है, न कि उस पर भारी पाबंदियां डाली जा रही हैं।

    स्टार स्पोर्ट्स को भी मिल सकता है मौका

    जब ब्रॉडकास्टिंग अथॉरिटी को लेकर सवाल उठाया गया तो जहीर उद्दीन स्वपन ने संकेत दिया कि स्टार स्पोर्ट्स जैसे ब्रॉडकास्टर भी बांग्लादेश में आईपीएल दिखा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी चैनल को निषेध के पक्ष में नहीं है, बल्कि सभी को समान अवसर देगी। इसके अलावा, केबल ऑटोमोबाइल्स एसोसिएशन के प्रतिबंध ने यह भी साफ किया है कि उन्हें सरकार की ओर से किसी भी तरह का प्रतिबंधात्मक निर्देश नहीं मिला है, इसलिए प्रसारण में कोई बाधा नहीं आएगी।

    पहले था संशय, अब साफ हुई स्थिति

    इससे पहले खेल मामलों से जुड़े अधिकारियों द्वारा संकेत दिए गए थे कि आईपीएल प्रसारण पर रोक लगाई जा सकती है, जिसके कारण होटल के बीच चिंता का विषय था। हालांकि, अब सरकार के ताजा बयान ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि खेल आयोजनों को लेकर सरकार का रुख पहले से अधिक लचीला और अव्यवहारिक हो गया है।

    आईपीएल 2026 की योजना भी तय

    आईपीएल 2026 का पहला मुकाबला रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच 28 मार्च को खेला जाएगा। इसके बाद मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स का मुकाबला- मुखपृष्ठ होगा। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की पहली लीग चरण योजना जारी हो चुकी है, जो 24 मई तक जारी रहेगी, जबकि प्लेऑफ मुकाबलों की तारीखें जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है।

  • बाल कलाकार से कॉमेडी आइकन: जगदीप की प्रेरक और भावुक कहानी

    बाल कलाकार से कॉमेडी आइकन: जगदीप की प्रेरक और भावुक कहानी


    नई दिल्ली : हिंदी सिनेमा में हास्य और चरित्र अभिनय के स्वर्णिम युग में जगदीप का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है। वे केवल एक हास्य कलाकार नहीं थे, बल्कि अपनी अनूठी संवाद अदायगी और चेहरे के हाव-भावों के जरिए हास्य को नई पहचान देने वाले कलाकार थे। आगामी 29 मार्च को इस दिग्गज अभिनेता की जयंती है, जो 400 से अधिक फिल्मों में अपनी भूमिका निभा चुके हैं।

    जगदीप का फिल्मी सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा। बाल कलाकार के रूप में उन्होंने मात्र 3 रुपये की दिहाड़ी से शुरुआत की थी। देश विभाजन और गरीबी की त्रासदी को करीब से देख चुके इस बच्चे ने कभी सोचा भी नहीं था कि वे अभिनेता बनेंगे। लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था। 1951 में फिल्म ‘अफसाना’ की शूटिंग के दौरान मुख्य बाल कलाकार उर्दू संवाद नहीं बोल पाया, तब भीड़ का हिस्सा रहे जगदीप ने स्वयं वह संवाद बोल दिया। उनके इस हुनर से निर्देशक प्रभावित हुए और उन्हें 6 रुपये की दिहाड़ी पर काम करने का मौका मिला। यही उनके फिल्मी करियर की शुरुआत थी।

    जगदीप का उच्चारण उर्दू में साफ और प्रभावशाली था। मात्र 9 वर्ष की उम्र में उन्होंने दरबार में राजा के आने से पहले होने वाली अनाउंसमेंट में शानदार प्रदर्शन किया। डायरेक्टर ने उन्हें तत्काल सेट पर बुलाकर पहला किरदार दिया और उस समय ही उन्होंने ठान लिया कि अब अभिनय ही उनकी जिंदगी है।

    उनकी कॉमिक प्रतिभा का असली खुलासा तब हुआ जब निर्देशक बिमल रॉय ने उन्हें ‘धोबी डॉक्टर’ फिल्म में रोते हुए सीन में देखा। बिमल रॉय का मानना था कि जो पर्दे पर दूसरों को रुला सकता है, वही हास्य के माध्यम से गहराई दिखा सकता है। इसी वजह से उन्होंने जगदीप को फिल्म में बूट पॉलिश करने वाले लड़के का हास्यपूर्ण किरदार दिया। यह सीन जगदीप की जीवन और करियर में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ।

    इसके बाद जगदीप ने ‘शोले’, ‘रोटी’, ‘एक बार कहो’ जैसी फिल्मों में कॉमेडी से भरपूर भूमिकाएं निभाईं। उनका हास्य कभी जादुई था, कभी भावुक। दर्शक उन्हें सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं मानते थे, बल्कि उनकी अदायगी में छुपे जीवन अनुभव और संवेदनशीलता को भी महसूस करते थे। यही कारण है कि वे हिंदी सिनेमा में हास्य और चरित्र अभिनय का अविस्मरणीय नाम बने।

    जगदीप की कहानी यह बताती है कि संघर्ष, प्रतिभा और सही दिशा मिल जाए तो कोई भी साधारण बच्चा बड़े पर्दे का सितारा बन सकता है। 6 रुपये की दिहाड़ी से शुरू हुआ सफर उन्हें ‘सूरमा भोपाली’ और हिंदी सिनेमा के चिरस्थायी हास्य कलाकार के रूप में ले गया। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल दर्शकों को हंसाया बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी दी।

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    IPL में सिर्फ 3 टीमों का राज! 13 खिताब जीतकर रचा इतिहास, जानिए साल-दर-साल विजेता


    नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का रोमांच हर सीजन में बढ़ता ही जा रहा है, लेकिन अगर इतिहास पर नजर डाली जाए तो कुछ घटिया आंकड़े ही सामने आते हैं। अब तक खेले गए 18वें सीजन में 13 खिताब सिर्फ तीन टीमों चेन्नई सुपर किंग्स, मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स ने अपने नाम किए हैं। इन टीमों ने लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए लीग में अपनी टीम के साथ बाजी मारी है, जबकि बाकी टीमों को गाइन-चूने का मौका ही मिला है।

    सीएसके: आत्मविश्वास और स्थिरता से बनी चैंपियन टीम

    चेन्नई सुपर किंग्स आईपीएल की सबसे सफल रेस में शामिल है। टीम ने 2010 और 2011 में कॉन्स्टेंटाइन के दो खिताब अपनी ताकत का परास्त किए। इसके बाद 2018 में तीसरी ट्रॉफी की शानदार वापसी हुई। फिर 2021 और 2023 में नामकरण कुल 5 ट्रॉफी अपना नाम कर लें। हालांकि 2012, 2013, 2015 और 2019 में टीम फाइनल तक पहुंची, लेकिन खिताब जीतने में असफल रही। यह टीम लंबे समय तक महेंद्र सिंह धोनी की वैज्ञानिक में अपनी पहचान बना चुकी है।

    मुंबई: अभिलेख की मशीन

    मुंबई इंडियंस ने भी 5 बार आईपीएल ट्रॉफी रॉकेट खुद को सबसे सफल रेस में शामिल किया है। टीम ने 2013 में पहली बार खिताब जीता और इसके बाद 2015, 2017, 2019 और 2020 में लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए ट्रॉफी अपने नाम की। खास बात यह है कि मुंबई ने कई बार फाइनल में सीएसके जैसी मजबूत टीम को हराया और बड़े मैचों में अपनी ताकत साबित की।

    केकेआर: गंभीर युग से लेकर नई चमक तक

    कोलकाता नाइट राइडर्स ने 3 बार खिताब जीता है। टीम ने गौतम गंभीर को 2012 और 2014 में ट्रॉफी में दिखाया। इसके बाद 2024 में टीम ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा खिताब अपने नाम किया। इस दौरान गंभीर में टॉर की भूमिका में थे और टीम ने नई रणनीति के साथ सफलता हासिल की।

    अन्य टीमों का प्रदर्शन भी यादगार बना हुआ है

    जहाँ तीन रथों का वैगन चल रहा था, वहीं अन्य रथों ने भी अपने-अपने समय में चमचमाते हुए महल बनाए। राजस्थान रॉयल्स ने 2008 में पहला आईपीएल खिताब जीता। डेक्कन चार्जर्स ने 2009 में ट्रॉफी अपने नाम की। सनराइजर्स हैदराबाद ने 2016 में खिताब जीता, जबकि गुजरात टाइटंस ने 2022 के डेब्यू सीजन में ही ट्रॉफी नामांकन इतिहास रचा।

    वहीं रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने लंबे इंतजार के बाद 2025 में अपना पहला खिताब जीता। इससे पहले टीम 2009, 2011 और 2016 में फाइनल तक पहुंची थी, लेकिन हर बार ट्रॉफी हार गई थी।

    कुछ टीमों के लिए चुनौती, बाकी के लिए चुनौती

    आईपीएल के इतिहास में यह साफ दिखता है कि कुछ चैंपियनशिप ने लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए खिताब पर कब्ज़ा जमाया है। आने वाले सीज़न में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नए रिकॉर्ड हैं, इस दबबे को तोड़ते हुए दोस्त हैं या फिर यही रिकॉर्ड विक्टोरैल अपना पार्ट बनाते हैं।