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  • बीआईएस की चेन्नई में बड़ी कार्रवाई, 803.99 ग्राम गैर-हॉलमार्क वाले सोने के आभूषण जब्त, बिक्री के लिए रखे थे प्रदर्शित

    बीआईएस की चेन्नई में बड़ी कार्रवाई, 803.99 ग्राम गैर-हॉलमार्क वाले सोने के आभूषण जब्त, बिक्री के लिए रखे थे प्रदर्शित


    नई दिल्ली । 
    भारतीय मानक ब्यूरो यानी बीआईएस ने गैर-हॉलमार्क वाले सोने के आभूषणों की बिक्री के खिलाफ कार्रवाई करते हुए चेन्नई में 803.99 ग्राम सोने के आभूषण जब्त किए हैं। यह कार्रवाई चेन्नई के अंबत्तूर इलाके में स्थित एक आभूषण दुकान पर की गई। मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी जानकारी में कार्रवाई का विवरण दिया गया।

    बीआईएस के चेन्नई शाखा कार्यालय ने 1 सितंबर 2026 को दुकान पर प्रवर्तन तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की थी। इस दौरान बिक्री के लिए प्रदर्शित किए गए ऐसे सोने के आभूषण मिले, जिन पर आवश्यक हॉलमार्किंग नहीं थी। इसके बाद इन आभूषणों को भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 की धारा 28 के तहत जब्त किया गया।

    जब्त किए गए आभूषणों में सबसे अधिक संख्या मंगलसूत्र की थी। कार्रवाई में 671.50 ग्राम वजन के 175 मंगलसूत्र जब्त किए गए। इसके अलावा बच्चों की 25.02 ग्राम वजन वाली 12 चूड़ियां भी बरामद की गईं।

    बीआईएस की कार्रवाई में 86.14 ग्राम वजन के 40 झुमके और 21.33 ग्राम वजन के 10 पेंडेंट भी शामिल हैं। इस तरह अलग-अलग डिजाइन और श्रेणियों के इन आभूषणों का कुल वजन 803.99 ग्राम बताया गया है।

    प्रवर्तन टीम ने जांच के दौरान पाया कि ये आभूषण आवश्यक हॉलमार्किंग के बिना ग्राहकों को बिक्री के लिए पेश किए जा रहे थे। बीआईएस ने सभी संबंधित वस्तुओं को विस्तृत जांच और आगे की कानूनी कार्यवाही के लिए अपने कब्जे में ले लिया।

    यह पूरी कार्रवाई स्थानीय पुलिस की सहायता से की गई। बीआईएस चेन्नई शाखा कार्यालय के अधिकारियों और सहायक कर्मचारियों ने प्रवर्तन तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया को अंजाम दिया। मामले में भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

    बीआईएस चेन्नई शाखा कार्यालय के प्रमुख एस. डी. दयानंद ने कहा कि संगठन बाजार की नियमित निगरानी के साथ प्रवर्तन गतिविधियां भी करता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अनिवार्य बीआईएस प्रमाणन और हॉलमार्किंग से जुड़े नियमों के दायरे में आने वाले उत्पाद निर्धारित मानकों का पालन करें।

    उन्होंने कहा कि घटिया उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए ऐसी कार्रवाई महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही बीआईएस मानक चिह्न और हॉलमार्क के दुरुपयोग को रोकना तथा प्रमाणन और हॉलमार्किंग व्यवस्था में उपभोक्ताओं का भरोसा बनाए रखना भी इन कार्रवाइयों का उद्देश्य है।

    बीआईएस के अनुसार, हॉलमार्किंग कीमती धातु से बनी वस्तुओं की शुद्धता या सुंदरता का आधिकारिक संकेत देती है। मौजूदा हॉलमार्किंग व्यवस्था में हॉलमार्क वाले सोने के आभूषणों पर बीआईएस लोगो, शुद्धता और छह अंकों की हॉलमार्क विशिष्ट पहचान संख्या यानी HUID दर्ज होती है।

    उपभोक्ता हॉलमार्क वाले सोने के आभूषणों की HUID संख्या की पुष्टि बीआईएस केयर ऐप के जरिए भी कर सकते हैं। चेन्नई में हुई इस कार्रवाई में जब्त आभूषणों की आगे विस्तृत जांच और कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी।

  • सेंसेक्स 74,902 और निफ्टी 23,477 पर बंद, पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीय बाजार ने गिरावट का सिलसिला तोड़ा

    सेंसेक्स 74,902 और निफ्टी 23,477 पर बंद, पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीय बाजार ने गिरावट का सिलसिला तोड़ा

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीन कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट का सिलसिला गुरुवार को थम गया। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच घरेलू शेयर बाजार बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स 138.36 अंक यानी 0.19 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,902.59 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 में 46.30 अंक यानी 0.20 प्रतिशत की तेजी रही और यह 23,477.80 के स्तर पर बंद हुआ।

    कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 74,764.23 से 21.69 अंक नीचे 74,742.54 पर खुला। इसके बाद दिन में यह 146.73 अंक यानी 0.19 प्रतिशत बढ़कर 74,910.96 के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 165.75 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,598.47 के निचले स्तर तक भी गया।

    निफ्टी 50 ने पिछले बंद स्तर 23,431.50 की तुलना में 15 अंक की बढ़त के साथ 23,446.60 पर कारोबार की शुरुआत की। दिन के दौरान इंडेक्स 63.45 अंक यानी 0.27 प्रतिशत चढ़कर 23,494.95 के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। वहीं एक समय यह 51.40 अंक यानी 0.21 प्रतिशत गिरकर 23,380.10 के इंट्रा-डे निचले स्तर पर भी पहुंचा।

    व्यापक बाजार में हालांकि दबाव बना रहा। निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स क्रमशः 0.38 प्रतिशत और 0.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। यानी प्रमुख सूचकांकों में तेजी के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में कमजोरी देखने को मिली।

    सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी मीडिया, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी प्राइवेट बैंक का प्रदर्शन बेहतर रहा। इसके विपरीत निफ्टी मेटल, निफ्टी फार्मा, निफ्टी ऑटो, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी एफएमसीजी में दबाव देखा गया।

    निफ्टी 50 में एचसीएल टेक, हिंडाल्को और टाटा स्टील सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में रहे। दूसरी ओर एचडीएफसी लाइफ, पावरग्रिड, ओएनजीसी, भारतीय एयरटेल और टेक महिंद्रा के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई।

    गुरुवार के कारोबार के दौरान बाजार के लिए पश्चिम एशिया का तनाव भी महत्वपूर्ण कारक बना रहा। मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच कच्चे तेल की कीमतें 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहीं। तेल की कीमतों में यह मजबूती भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का कच्चा तेल आयात करता है।

    ईरान की ओर से कहा गया कि छह महीने से चल रहे संघर्ष के दौरान जहाजों पर हुए सबसे बड़े हमलों में अमेरिका ने पांच ईरानी तेल टैंकरों को डुबो दिया। इसके बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 10 जहाजों पर हमला करने की बात कही। इस घटनाक्रम के बीच कच्चे तेल की कीमतों पर असर बना रहा।

    ऊंची कच्चे तेल की कीमतों से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। इसके साथ ही इससे मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ने और आर्थिक विकास तथा कंपनियों की लाभप्रदता पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका रहती है। गुरुवार के सत्र में इन वैश्विक परिस्थितियों के बीच भी भारतीय बाजार ने तीन सत्रों की लगातार गिरावट के बाद कारोबार बढ़त के साथ समाप्त किया।

  • एनएसई आईपीओ से पहले इक्विटी ऑप्शंस में मार्केट शेयर घटा, सख्त डेरिवेटिव्स नियमों से कारोबार और मुनाफे पर बढ़ा दबाव

    एनएसई आईपीओ से पहले इक्विटी ऑप्शंस में मार्केट शेयर घटा, सख्त डेरिवेटिव्स नियमों से कारोबार और मुनाफे पर बढ़ा दबाव

    नई दिल्ली । नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई का आईपीओ ऐसे समय में आने जा रहा है, जब एक्सचेंज के सामने इक्विटी ऑप्शंस कारोबार में घटती बाजार हिस्सेदारी, डेरिवेटिव्स से जुड़े सख्त नियम और सीमित विकास के अवसर जैसी चुनौतियां हैं। इन परिस्थितियों का असर एक्सचेंज के कारोबार और मुनाफे पर पड़ सकता है।

    एनएसई की ओर से रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में दी गई जानकारी के अनुसार, इक्विटी ऑप्शंस के प्रीमियम वैल्यू सेगमेंट में उसकी बाजार हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023-24 में 96.9 प्रतिशत थी। वित्त वर्ष 2024-25 में यह घटकर 87.4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2025-26 में 74.71 प्रतिशत रह गई।

    इस तरह तीन वित्त वर्षों में इक्विटी ऑप्शंस के प्रीमियम वैल्यू सेगमेंट में एनएसई की बाजार हिस्सेदारी 22.2 प्रतिशत कम हुई है। हालांकि, अन्य सेगमेंट में एक्सचेंज की स्थिति मजबूत बनी हुई है।

    कैश इक्विटी सेगमेंट इसका प्रमुख उदाहरण है। वित्त वर्ष 2023-24 में इस सेगमेंट में एनएसई की बाजार हिस्सेदारी 92.7 प्रतिशत थी। अगले वित्त वर्ष में यह बढ़कर 93.6 प्रतिशत हुई और वित्त वर्ष 2025-26 में 92.99 प्रतिशत रही।

    कैश सेगमेंट में 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी एनएसई की मजबूत स्थिति को दर्शाती है। हालांकि, इतनी ऊंची हिस्सेदारी होने के कारण इस क्षेत्र में आगे बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने की गुंजाइश सीमित है। इसलिए ऑप्शंस और डेरिवेटिव्स कारोबार में होने वाले बदलाव एनएसई के लिए अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

    डेरिवेटिव्स कारोबार पर सख्त होते नियम भी एक्सचेंज के लिए चुनौती बढ़ा रहे हैं। निवेशकों को इस सेगमेंट में हुए बड़े नुकसान के बाद पिछले कुछ वर्षों में डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग को कम करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स यानी एसटीटी बढ़ाना और मार्जिन से जुड़े कदम शामिल हैं।

    इसके साथ ही भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी की ओर से भी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग से जुड़े जोखिमों को लेकर निवेशकों में जागरूकता बढ़ाई जा रही है। इन उपायों का उद्देश्य डेरिवेटिव्स कारोबार में निवेशकों की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।

    खुदरा निवेशकों की संख्या में आई गिरावट भी इसी चुनौती को सामने रखती है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी की ओर से राज्यसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, एफएंडओ सेगमेंट में विशिष्ट खुदरा निवेशकों की संख्या वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 20 प्रतिशत घटकर 78.6 लाख रह गई। वित्त वर्ष 2024-25 में यह संख्या 98.1 लाख थी।

    खुदरा निवेशकों की संख्या घटने से एफएंडओ बाजार की गतिविधियों और वॉल्यूम पर असर पड़ सकता है। इसका महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि एनएसई ने अपने आरएचपी में खुद इस जोखिम का उल्लेख किया है।

    एनएसई के अनुसार, डेरिवेटिव्स, खासकर एफएंडओ बाजार में वॉल्यूम में कमी आने से उसके कारोबार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। वॉल्यूम घटने का असर आगे उसके मुनाफे पर भी पड़ सकता है।

    इस तरह एनएसई के सामने चुनौती का मुख्य कारण इक्विटी ऑप्शंस में घटती हिस्सेदारी और डेरिवेटिव्स कारोबार को नियंत्रित करने वाले सख्त होते नियम हैं। इसका संभावित असर एफएंडओ गतिविधियों और वॉल्यूम में कमी के रूप में सामने आ सकता है, जिससे कारोबार और मुनाफे की वृद्धि प्रभावित हो सकती है।

    आईपीओ से पहले एनएसई की कैश इक्विटी में मजबूत पकड़ बनी हुई है, लेकिन इक्विटी ऑप्शंस में बाजार हिस्सेदारी की गिरावट और डेरिवेटिव्स कारोबार से जुड़े नियामकीय बदलाव एक्सचेंज के लिए महत्वपूर्ण कारोबारी चुनौतियां बने हुए हैं।

  • भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 में नई दिल्ली का फोकस, समावेशी वैश्विक व्यवस्था और ग्लोबल साउथ की आवाज पर जोर

    भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 में नई दिल्ली का फोकस, समावेशी वैश्विक व्यवस्था और ग्लोबल साउथ की आवाज पर जोर

    नई दिल्ली ।कभी चार उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए इस्तेमाल होने वाले आर्थिक शब्द के रूप में सामने आया ब्रिक्स अब चार महाद्वीपों तक फैले प्रभावशाली भू-राजनीतिक समूह का रूप ले चुका है। नए सदस्य देशों के जुड़ने के साथ इसकी आर्थिक और रणनीतिक ताकत में लगातार विस्तार हुआ है। वर्ष 2026 में संगठन की अध्यक्षता भारत के पास है और नई दिल्ली इसे अधिक समावेशी, प्रभावी तथा समाधान-केंद्रित मंच बनाने की दिशा में काम कर रही है।

    ब्रिक्स प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक नीतियों के समन्वय का महत्वपूर्ण मंच बन गया है। सदस्य देश यहां वैश्विक शासन, विकास, व्यापार और आर्थिक सुधारों से जुड़े मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करते हैं। लगातार संवाद और सहयोग के जरिए संगठन ने वैश्विक दक्षिण की आवाज को अंतरराष्ट्रीय संस्थानों तक पहुंचाने में भी भूमिका निभाई है।

    भारत की 2026 की अध्यक्षता “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” विषय पर केंद्रित है। इसी थीम के तहत 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की जाएगी। भारत का लक्ष्य संगठन की संस्थागत क्षमता को मजबूत करना, विकास और नवाचार को प्राथमिकता देना तथा वैश्विक दक्षिण की आकांक्षाओं को अंतरराष्ट्रीय विमर्श में प्रमुख स्थान दिलाना है।

    वर्तमान में ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात सहित 11 सदस्य देश हैं। ये देश मिलकर दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी, लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद और करीब 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं। इससे संगठन की आर्थिक और जनसांख्यिकीय पहुंच का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    ब्रिक्स के विस्तार का बड़ा चरण जनवरी 2024 में आया, जब मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद जनवरी 2025 में इंडोनेशिया 11वां पूर्ण सदस्य बना। इन देशों के शामिल होने से संगठन का प्रभाव एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका तक और व्यापक हुआ।

    विस्तार के साथ ब्रिक्स में पार्टनर कंट्री श्रेणी भी बनाई गई। वर्ष 2025 के दौरान बेलारूस, बोलिविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम इस ढांचे से जुड़े। इससे संगठन की पहुंच और प्रभाव क्षेत्र में और विस्तार हुआ।

    समय के साथ ब्रिक्स का एजेंडा केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहा। आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, कृषि, श्रम एवं रोजगार, दूरसंचार, वैश्विक वित्तीय व्यवस्था तथा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियां भी इसके प्रमुख विषयों में शामिल हैं।

    ब्रिक्स विश्व व्यापार संगठन और वैश्विक वित्तीय संस्थानों में अधिक प्रतिनिधित्व तथा संतुलित भागीदारी की वकालत करता है। इसके प्रयासों का उद्देश्य वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाना तथा बदलती वैश्विक चुनौतियों के प्रति उसे अधिक उत्तरदायी बनाना है।

  • बीएसई में तकनीकी गड़बड़ी से एफएंडओ कारोबार प्रभावित, जेरोधा यूजर्स ने कीमतें अपडेट और ऑर्डर में दिक्कत की शिकायत

    बीएसई में तकनीकी गड़बड़ी से एफएंडओ कारोबार प्रभावित, जेरोधा यूजर्स ने कीमतें अपडेट और ऑर्डर में दिक्कत की शिकायत


    नई दिल्ली ।
    गुरुवार को शेयर बाजार में कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई पर तकनीकी गड़बड़ी के कारण कुछ समय के लिए ट्रेडिंग गतिविधियां प्रभावित हुईं। एक्सचेंज के अनुसार, सुबह 9:42 बजे कैश सेगमेंट के एक हिस्से और उससे जुड़े शेयरों में तकनीकी समस्या सामने आई। हालांकि, अन्य सभी सेगमेंट और पार्टिशन सामान्य रूप से काम करते रहे। तकनीकी टीम ने समस्या का समाधान किया और सुबह 10:08 बजे से सामान्य परिचालन दोबारा शुरू कर दिया गया।

    तकनीकी समस्या के सामने आने के बाद बाजार में सक्रिय कई ट्रेडर्स के बीच चिंता देखी गई। खासकर डेरिवेटिव कारोबार करने वाले यूजर्स ने कीमतों के अपडेट नहीं होने और ऑर्डर से जुड़ी दिक्कतों की शिकायत की। कुछ ट्रेडर्स के लिए बाजार में उपलब्ध कीमतों में बदलाव समय पर दिखाई नहीं देने से ट्रेडिंग निर्णय लेना मुश्किल हुआ।

    इस दौरान जेरोधा के कई यूजर्स ने भी बीएसई पर एफएंडओ कॉन्ट्रैक्ट्स की कीमतें अपडेट नहीं होने की शिकायत की। इसके बाद जेरोधा ने अपने ग्राहकों को बताया कि बीएसई पर कुछ फ्यूचर्स एवं ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स में कीमतों के अपडेट और ऑर्डर प्लेसमेंट से जुड़ी समस्याएं सामने आई हैं। कंपनी ने कहा कि समस्या को जल्द दूर करने के लिए वह एक्सचेंज के साथ लगातार संपर्क में है।

    बाद में जेरोधा की ओर से जानकारी दी गई कि समस्या का समाधान कर लिया गया है और दोपहर 1:03 बजे तक स्थिति सामान्य हो गई। हालांकि, इसके बावजूद कुछ ट्रेडर्स ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि तकनीकी परेशानी बीच-बीच में दोबारा सामने आती रही।

    कई यूजर्स ने शिकायत की कि कीमतें लंबे समय तक अपडेट नहीं हो रही थीं। कुछ ट्रेडर्स ने यह भी दावा किया कि उनके ऑर्डर समय पर न तो निष्पादित हो रहे थे और न ही रद्द हो पा रहे थे। कुछ निवेशकों ने सेंसेक्स कॉल ऑप्शंस की कीमतें स्थिर रहने और नए ऑर्डर प्लेस नहीं कर पाने की भी शिकायत की।

    एक निवेशक ने कहा कि करीब 15 मिनट तक कीमतें अपडेट नहीं हो रही थीं और ऐसी स्थिति में संभावित नुकसान की जिम्मेदारी को लेकर चिंता है। एक अन्य यूजर ने दावा किया कि समस्या दोबारा सामने आने पर उसका ऑर्डर रद्द नहीं हो पाया। इस तरह कीमतों के अपडेट और ऑर्डर प्रबंधन से जुड़ी तकनीकी परेशानियों ने एफएंडओ ट्रेडर्स की चिंता बढ़ाई।

    यह तकनीकी समस्या ऐसे समय सामने आई, जब सेंसेक्स का साप्ताहिक एफएंडओ एक्सपायरी सेशन था। एक्सपायरी वाले दिन बाजार में आमतौर पर ट्रेडिंग गतिविधियां और उतार-चढ़ाव अधिक देखने को मिलते हैं। ऐसे में कीमतों के अपडेट या ऑर्डर निष्पादन में तकनीकी बाधा ट्रेडर्स के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

    एफएंडओ एक्सपायरी के दौरान बाजार में छोटे-छोटे उतार-चढ़ाव भी ट्रेडर्स की पोजीशन और संभावित मुनाफे को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए इस तरह के सत्र में ट्रेडिंग सिस्टम और कीमतों की जानकारी का समय पर उपलब्ध होना महत्वपूर्ण माना जाता है।

    तकनीकी व्यवधान के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार का रुख मिला-जुला रहा। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स हल्की कमजोरी के साथ खुला, जबकि निफ्टी मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया।

    बीएसई और जेरोधा की ओर से तकनीकी समस्या के समाधान की जानकारी दिए जाने के बाद परिचालन सामान्य हुआ। हालांकि, इस घटना से ट्रेडिंग सिस्टम की तकनीकी स्थिरता और भरोसेमंद इंफ्रास्ट्रक्चर की अहमियत फिर सामने आई है। खासकर ऐसे समय में जब खुदरा निवेशकों की बाजार में भागीदारी बढ़ रही है और एफएंडओ कारोबार में गतिविधियां लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई हैं।

  • अगस्त में म्यूचुअल फंड SIP निवेश रिकॉर्ड 32,297 करोड़ रुपए पहुंचा, गोल्ड ETF में भी 67 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज

    अगस्त में म्यूचुअल फंड SIP निवेश रिकॉर्ड 32,297 करोड़ रुपए पहुंचा, गोल्ड ETF में भी 67 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज

    नई दिल्ली ।अगस्त 2026 में म्यूचुअल फंड में निवेश का रुझान मजबूत बना रहा। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया यानी एम्फी के आंकड़ों के अनुसार, इस महीने सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी के जरिए निवेश बढ़कर रिकॉर्ड 32,297 करोड़ रुपए पहुंच गया। जुलाई में यह आंकड़ा 31,961 करोड़ रुपए था। अगस्त का एसआईपी निवेश अब तक का सबसे ऊंचा स्तर रहा।

    अगस्त का आंकड़ा मार्च में दर्ज 32,087 करोड़ रुपए और पहले दर्ज किए गए 31,781 करोड़ रुपए के उच्च स्तर से भी अधिक रहा। एसआईपी खातों में योगदान भी सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचकर 10.2 करोड़ हो गया, जबकि इससे पहले यह संख्या 9.9 करोड़ थी। अगस्त में नए एसआईपी खातों की संख्या 66.39 लाख रही, जो पिछले आंकड़े 61.44 लाख से अधिक है। वहीं बंद किए गए खातों की संख्या 53.82 लाख रही, जबकि पहले यह 50.30 लाख थी। इसके साथ कुल सक्रिय एसआईपी खातों की संख्या 10.62 करोड़ हो गई।

    अगस्त में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी गोल्ड ईटीएफ में भी निवेश में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। आंकड़ों के मुताबिक, गोल्ड ईटीएफ में शुद्ध निवेश बढ़कर 2,596.70 करोड़ रुपए हो गया। जुलाई में यह 1,559 करोड़ रुपए था। इस तरह एक महीने में गोल्ड ईटीएफ निवेश में करीब 67 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

    गोल्ड ईटीएफ में यह लगातार तीसरा महीना रहा, जब सकारात्मक निवेश प्रवाह दर्ज किया गया। सोने की कीमतों में बढ़ोतरी और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ते रुझान के बीच निवेशकों की दिलचस्पी इस श्रेणी में बनी रही। अगस्त के दौरान मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर सोने की कीमत करीब 7.7 प्रतिशत बढ़ी।

    इसी अवधि में चांदी आधारित निवेश उत्पादों में भी निवेशकों की रुचि दिखाई दी। अगस्त में सिल्वर ईटीएफ में 1,270.63 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश दर्ज हुआ। औद्योगिक मांग और निवेश मांग दोनों के मजबूत रहने के कारण चांदी निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बनी रही।

    अगस्त में सक्रिय रूप से प्रबंधित इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में भी निवेश बढ़ा। इन योजनाओं में 29,328.62 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश आया, जबकि जुलाई में यह 24,697.39 करोड़ रुपए था। इस तरह निवेश में करीब 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद इक्विटी में लगातार निवेश से लंबी अवधि की निवेश रणनीति के प्रति भरोसा दिखाई दिया।

    इक्विटी योजनाओं में स्मॉलकैप फंड सबसे अधिक पसंद किए गए। इनमें 7,973 करोड़ रुपए का निवेश आया। इसके बाद मिडकैप फंड में 6,989 करोड़ रुपए, फ्लेक्सीकैप फंड में 5,059 करोड़ रुपए और लार्ज एंड मिडकैप फंड में 3,873 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया। आंकड़ों से पता चलता है कि निवेशकों की रुचि अलग-अलग इक्विटी श्रेणियों में बनी हुई है।

    दूसरी ओर, अगस्त में डेट म्यूचुअल फंड योजनाओं से 8,127.32 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी हुई। इसके विपरीत हाइब्रिड योजनाओं में 10,045 करोड़ रुपए का निवेश आया। हाइब्रिड श्रेणी में मल्टी एसेट एलोकेशन फंड में 3,671 करोड़ रुपए और आर्बिट्रेज फंड में 3,789 करोड़ रुपए का निवेश दर्ज हुआ।

    लिक्विड फंड्स में 19,934 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश आया, जबकि ओवरनाइट फंड्स से 30,654 करोड़ रुपए की निकासी हुई। अगस्त के आंकड़ों में एसआईपी, इक्विटी और गोल्ड ईटीएफ में मजबूत निवेश के साथ निवेशकों की अलग-अलग परिसंपत्ति श्रेणियों में बदलती प्राथमिकताएं भी दिखाई दीं।

  • देवास में दूध की गुणवत्ता को लेकर जांच से मचा हड़कंप 6 डेयरियों में पहुंची संयुक्त टीम एक के दूध पर शक सैंपल अब भोपाल में होगा टेस्ट

    देवास में दूध की गुणवत्ता को लेकर जांच से मचा हड़कंप 6 डेयरियों में पहुंची संयुक्त टीम एक के दूध पर शक सैंपल अब भोपाल में होगा टेस्ट


    देवास। देवास में दूध की गुणवत्ता को लेकर खाद्य विभाग ने गुरुवार को बड़ी जांच कार्रवाई की। खाद्य विभाग राजस्व विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीम ने उज्जैन रोड स्थित कई दूध डेयरियों का निरीक्षण किया। इस दौरान उज्जैन से पहुंची चलित प्रयोगशाला की मदद से करीब छह डेयरियों में दूध की रैपिड किट के जरिए जांच की गई। जांच के दौरान ज्यादातर डेयरियों में दूध निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया गया। हालांकि एक डेयरी के दूध की गुणवत्ता को लेकर अधिकारियों को आशंका हुई जिसके बाद वहां से सैंपल लेकर विस्तृत जांच के लिए भोपाल भेजा गया है।

    अधिकारियों के मुताबिक मौके पर की गई प्रारंभिक जांच के आधार पर दूध की गुणवत्ता को लेकर जहां संदेह सामने आया वहां से नमूना सुरक्षित तरीके से लिया गया। अब इस सैंपल की प्रयोगशाला में जांच की जाएगी। भोपाल से रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दूध में वास्तव में किसी तरह की मिलावट या गुणवत्ता संबंधी कमी है या नहीं। अधिकारियों ने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    संयुक्त जांच टीम में नायब तहसीलदार हरिओम ठाकुर और खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुरेंद्र ठाकुर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल रहे। टीम ने डेयरियों में पहुंचकर दूध की गुणवत्ता की जांच करने के साथ वहां उपलब्ध अन्य दूध उत्पादों को भी देखा। अधिकारियों ने बताया कि जांच का उद्देश्य उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना और दूध तथा दूध से बने उत्पादों में किसी तरह की मिलावट की संभावना को सामने लाना है।

    जांच के दौरान डेयरियों में मौजूद दूध उत्पादों की भी पड़ताल की गई। इनमें सुक्रोज की मात्रा की जांच भी शामिल रही। अधिकारियों ने मौके पर उपलब्ध उत्पादों से जुड़े जरूरी तथ्यों को दर्ज किया। इस तरह की जांच से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि उपभोक्ताओं को बेचे जा रहे दूध और अन्य उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।

    खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान ज्यादातर दुकानों पर दूध तय मानकों के अनुसार मिला। हालांकि एक डेयरी से लिए गए सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि केवल प्रारंभिक जांच के आधार पर किसी डेयरी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। भोपाल से आने वाली प्रयोगशाला रिपोर्ट के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

    दूध रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ा खाद्य पदार्थ है और बड़ी संख्या में लोग इसका सीधे सेवन करते हैं। ऐसे में इसकी गुणवत्ता को लेकर समय समय पर जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। देवास में हुई इस कार्रवाई के बाद अब लोगों की नजर भोपाल भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट पर है। यदि जांच में दूध मानकों के विपरीत पाया जाता है तो संबंधित डेयरी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल प्रशासन रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है और उसके आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

  • इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में अगस्त में 29,329 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो, एयूएम बढ़कर 87.07 लाख करोड़ रुपये हुआ

    इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में अगस्त में 29,329 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो, एयूएम बढ़कर 87.07 लाख करोड़ रुपये हुआ

    मुंबई, 10 सितंबर। इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में अगस्त में नेट इनफ्लो मासिक आधार पर 4,631.23 करोड़ रुपये बढ़कर 29,328.62 करोड़ रुपये हो गया है, जो कि जुलाई में 24,697.39 करोड़ रुपये था। यह जानकारी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) की ओर से गुरुवार को जारी किए गए डेटा में दी गई।

    अगस्त में सबसे अधिक 7,973.33 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो स्मॉलकैप फंड्स में दर्ज किया है। इस कैटेगरी में जुलाई में 7,767.50 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो आया था।

    वहीं, मिडकैप फंड्स में 6,989.40 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो आया है, जो कि पहले 6,192.31 करोड़ रुपये था। फ्लेक्सी कैप फंड्स में 5,059.42 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया है, जो कि पहले 4,709.08 करोड़ रुपये था।

    इसके अलावा, लार्जकैप फंड्स में नेट इनफ्लो -1,147.36 करोड़ रुपये रहा है। जुलाई में भी इस कैटेगरी में -1,321.69 करोड़ रुपये की निकासी देखी गई थी।

    लार्ज एंड मिडकैप फंड्स में अगस्त में 3,872.79 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया है, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 3,425.37 करोड़ रुपये था।

    इसके अलावा, अगस्त में मल्टीकैप फंड्स में 3,732.77 करोड़ रुपये, कॉन्ट्रा फंड्स में 1,328.01 करोड़ रुपये और फोकस्ड फंड्स में 994.74 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया है।

    अगस्त में इक्विटी ईटीएफ में 7,237.49 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया है।

    अगस्त में म्यूचुअल फंड्स इंडस्ट्री का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) बढ़कर 87.07 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो जुलाई में 85.75 लाख करोड़ रुपये पर था।

    इस हफ्ते की शुरुआत में, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) के डेटा में बताया गया कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद म्यूचुअल फंड में नेट एसआईपी इनफ्लो वित्त वर्ष 26 में रिकॉर्ड 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

    वित्त वर्ष 26 में कुल 3.5 लाख करोड़ रुपये के एसआईपी निवेश में नेट एसआईपी इनफ्लो का हिस्सा लगभग 56 प्रतिशत था, जो तीन सालों में सबसे उच्चतम स्तर है। वित्त वर्ष 25 में यह हिस्सा 54 प्रतिशत था।

  • देवास नगर निगम में विकास कार्यों को लेकर हंगामा, पार्षद ने दिया धरना; जनता के लिए काम कराने पर अड़े

    देवास नगर निगम में विकास कार्यों को लेकर हंगामा, पार्षद ने दिया धरना; जनता के लिए काम कराने पर अड़े


    देवास । देवास में वार्ड क्रमांक 9 के विकास कार्यों को लेकर नगर निगम और पार्षद के बीच विवाद सामने आया है। बुधवार को वार्ड पार्षद दीपेश कानूनगो ने बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों और महिलाओं के साथ नगर निगम कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। पार्षद और उनके साथ पहुंचे लोगों ने निगम परिसर की सीढ़ियों पर बैठकर नारेबाजी की। इस दौरान नगर निगम प्रशासन के साथ महापौर और महापौर प्रतिनिधि के खिलाफ भी नारे लगाए गए। प्रदर्शन के दौरान पार्षद ने वार्ड में विकास कार्यों की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाते हुए निगम प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

    पार्षद दीपेश कानूनगो का कहना है कि वार्ड क्रमांक 9 के लोगों को पिछले करीब एक साल से विकास कार्यों का इंतजार है। उनके मुताबिक इस अवधि में वार्ड के लिए कोई नया विकास कार्य मंजूर नहीं किया गया है। उन्होंने दावा किया कि नगर निगम में करीब 450 विकास कार्यों के टेंडर किए गए हैं लेकिन इनमें वार्ड क्रमांक 9 का एक भी काम शामिल नहीं है। पार्षद का आरोप है कि इस स्थिति के कारण वार्ड के लोगों को मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    प्रदर्शन के दौरान पार्षद ने कहा कि वार्ड की समस्याओं को लेकर वे लगातार नगर निगम के अधिकारियों से संपर्क करते रहे हैं। कई बार समस्याओं और विकास कार्यों को लेकर अधिकारियों को ज्ञापन भी दिए गए हैं। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। पार्षद ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने नगर निगम आयुक्त को पूरे मामले की जानकारी दी है लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।

    पार्षद के अनुसार महापौर प्रतिनिधि दुर्गेश अग्रवाल से भी उन्होंने वार्ड के विकास को लेकर बातचीत करने की कोशिश की है। उनका आरोप है कि अब महापौर प्रतिनिधि उनका फोन तक नहीं उठा रहे हैं। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ निगम कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और अपनी मांग प्रशासन के सामने रखी।

    प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने भी वार्ड की समस्याओं को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि लंबे समय से विकास कार्यों की जरूरत महसूस की जा रही है लेकिन लोगों को केवल आश्वासन मिल रहे हैं। महिलाओं ने कहा कि जनता को सिर्फ भरोसा दिलाने के बजाय धरातल पर काम शुरू किया जाना चाहिए। उन्होंने निगम प्रशासन से वार्ड की मूलभूत समस्याओं का जल्द निराकरण करने की मांग की।

    वहीं नगर निगम आयुक्त दलीप कुमार ने पार्षद की ओर से रखी गई मांगों को लेकर कहा कि पार्षद ने कुछ मुद्दे सामने रखे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वार्ड में पहले भी विकास कार्य कराए गए हैं। निगम आयुक्त के इस बयान के बाद अब वार्ड में विकास कार्यों को लेकर पार्षद और निगम प्रशासन के दावों में अंतर सामने आया है। प्रदर्शन के जरिए पार्षद ने वार्ड की समस्याओं को लेकर निगम प्रशासन पर दबाव बढ़ाया है। अब देखना होगा कि निगम की ओर से इन मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं और वार्ड क्रमांक 9 में नए विकास कार्यों को लेकर कब तक स्थिति स्पष्ट होती है।

  • अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, समयपूर्व रिहाई की याचिका खारिज, 1993 मुंबई ब्लास्ट केस में जेल में रहेगा

    अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, समयपूर्व रिहाई की याचिका खारिज, 1993 मुंबई ब्लास्ट केस में जेल में रहेगा

    नई दिल्ली । 1993 मुंबई सीरियल बम धमाके मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है। उसकी समय से पहले रिहाई की मांग वाली याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने उसकी दलील को नहीं माना और उसकी उम्मीदों को फिलहाल के लिए झटका दे दिया है।

    यह मामला देश के सबसे भयावह आतंकी हमलों में से एक से जुड़ा है। 12 मार्च 1993 को मुंबई के 12 अलग-अलग इलाकों में एक के बाद एक बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 257 लोगों की जान चली गई थी और लगभग 800 लोग घायल हुए थे।

    जांच में यह बात सामने आई कि बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेने के मकसद से ये धमाके करवाए गए थे। अबू सलेम को इस पूरी साजिश का मुख्य किरदार माना गया। जांच में यह साबित हुआ कि वह हमले की योजना बनाने में शामिल था और उसी ने गुजरात के भरुच से मुंबई तक हथियार और विस्फोटक पहुंचाए थे। इसके अलावा उसे हत्या का भी दोषी ठहराया गया था। इन सभी आरोपों के आधार पर विशेष टाडा अदालत ने उसे 25 साल कैद की सजा सुनाई थी।

    इससे पहले भी सलेम कोर्ट में यह दलील दे चुका है कि पुर्तगाल के साथ हुए प्रत्यर्पण समझौते के मुताबिक उसे 25 साल से ज्यादा समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता। लेकिन अदालतें इस दलील को कई बार खारिज कर चुकी हैं।

    इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट भी सलेम की ऐसी ही याचिका ठुकरा चुका है। हाईकोर्ट ने कहा था कि सजा में मिलने वाली छूट की गणना रिहाई की तय तारीख से सिर्फ एक महीने पहले ही की जा सकती है। यानी अभी यह मानना सही नहीं होगा कि उसकी सजा पूरी हो चुकी है।

    अब सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला भी इसी रुख को आगे बढ़ाता है और साफ करता है कि सलेम की जल्द रिहाई फिलहाल संभव नहीं है।