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  • मौसम साफ फिर भी शहर अंधेरे में डूबा, MPEB ऑफिस बंद मिला

    मौसम साफ फिर भी शहर अंधेरे में डूबा, MPEB ऑफिस बंद मिला


    नई दिल्ली । रीवा शहर में गुरुवार रात बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। नौतपा की भीषण गर्मी और करीब 44 डिग्री तापमान के बीच घंटों बिजली गुल रहने से लोगों की रात भारी परेशानी में गुजरी। हालात इतने खराब रहे कि नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पांडेय के बंगले और उनके मोहल्ले तक में रात 10 बजे से गई बिजली सुबह तक वापस नहीं आई। उमस और गर्मी से परेशान लोग पूरी रात छतों, गलियों और सड़कों पर समय बिताने को मजबूर हो गए। खास बात यह रही कि शहर में कहीं भी आंधी या तूफान जैसी स्थिति नहीं थी, फिर भी बिजली आपूर्ति ठप रही।

    शहर के पड़रा, समान, ढेकहा, अमहिया, सिरमौर चौराहा, बिछिया, विश्वविद्यालय रोड और पुरानी बस्ती सहित कई इलाकों में या तो बार-बार ट्रिपिंग होती रही या पूरी रात बिजली सप्लाई बहाल ही नहीं हो सकी। लगातार कटौती के कारण लोगों के घरों में लगे इन्वर्टर भी जवाब दे गए। बिजली नहीं होने से पानी की मोटरें बंद रहीं और सुबह तक कई इलाकों में जल संकट की स्थिति बन गई। लोगों को पीने के पानी तक के लिए परेशान होना पड़ा।

    बिजली संकट के बीच विद्युत विभाग का रवैया भी लोगों के गुस्से का कारण बना। उपभोक्ता लगातार हेल्पलाइन नंबर पर फोन करते रहे, लेकिन वहां से सिर्फ संबंधित जेई से संपर्क करने की सलाह दी जाती रही। लोगों का आरोप है कि संबंधित जूनियर इंजीनियर का मोबाइल पूरी रात स्विच ऑफ रहा। रात करीब 12 बजे जब मीडिया टीम ने MPEB कार्यालय का जायजा लिया तो वहां ताला लगा मिला। मौके पर कोई जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं था। इससे नाराज लोग दफ्तर के बाहर ही विभागीय अधिकारियों के खिलाफ गुस्सा जाहिर करते नजर आए।

    स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समान निवासी राजेश तिवारी ने बताया कि भीषण गर्मी के कारण पूरा परिवार रातभर छत पर बैठा रहा। अमहिया निवासी पूजा मिश्रा ने कहा कि उमस से छोटे बच्चे पूरी रात रोते रहे, लेकिन बिजली बहाल नहीं हुई। ढेकहा के मोहम्मद आरिफ का कहना है कि नौतपा जैसी स्थिति में इतनी लंबी बिजली कटौती लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। वहीं बिछिया निवासी संगीता पटेल ने बताया कि रातभर बिजली न होने के कारण सुबह पानी की मोटर नहीं चल सकी और घरों में पानी खत्म हो गया।

    अब तक इस पूरे मामले में बिजली विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। दूसरी तरफ नागरिकों का कहना है कि जब नगर निगम अध्यक्ष के इलाके तक में पूरी रात अंधेरा छाया रहा, तो आम लोगों की परेशानी का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। शहरवासियों ने बिजली व्यवस्था में तत्काल सुधार और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

  • अक्षय कुमार से कंगना रनौत तक, जून में बड़े पर्दे पर छाएंगे कई सितारे

    अक्षय कुमार से कंगना रनौत तक, जून में बड़े पर्दे पर छाएंगे कई सितारे


    नई दिल्ली । साल 2026 की शुरुआत से ही सिनेमाघरों में फिल्मों का शानदार दौर देखने को मिला है। कई बड़ी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त कमाई करते हुए दर्शकों का दिल जीता। मई महीने में भी रोमांस, एक्शन और ड्रामा से भरपूर कई फिल्मों ने एंटरटेनमेंट का तगड़ा डोज दिया। अब जून का महीना भी सिनेप्रेमियों के लिए बेहद खास होने जा रहा है, क्योंकि इस महीने एक नहीं बल्कि कई बड़ी और बहुप्रतीक्षित फिल्में रिलीज होने को तैयार हैं। कॉमेडी से लेकर लव स्टोरी और देशभक्ति तक हर जॉनर की फिल्म दर्शकों को देखने को मिलेगी।

    सबसे पहले 5 जून 2026 को रिलीज होगी है जवानी तो इश्क होना है। मशहूर निर्देशक डेविड धवन के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक मजेदार कॉमेडी एंटरटेनर बताई जा रही है। फिल्म में वरुण धवन, मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। इनके अलावा मौनी रॉय, मनीष पॉल, जिमी शेरगिल, राकेश बेदी और चंकी पांडे भी अहम किरदार निभाते दिखेंगे। फिल्म की कहानी जस्स नाम के युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे एक साथ दो लड़कियों से प्यार हो जाता है।

    भारत भाग्य विधाता भी 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। देशभक्ति से भरपूर इस फिल्म को मनोज तापड़िया ने लिखा और निर्देशित किया है। फिल्म में कंगना रनौत लीड रोल में दिखाई देंगी। उनके साथ गिरिजा ओक, स्मिता तांबे और अन्य कलाकार भी नजर आएंगे।

    इसी दिन यानी 12 जून को मैं वापस आऊंगा भी रिलीज होगी। निर्देशक इम्तियाज अली की यह रूहानी लव स्टोरी पहले से ही चर्चा में बनी हुई है। फिल्म में वेदांग रैना और शरवरी मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। वहीं दिलजीत दोसांझ और नसीरुद्दीन शाह भी अहम किरदारों में दिखाई देंगे।

    19 जून 2026 को रिलीज होगी कॉकटेल 2, जिसका दर्शकों को लंबे समय से इंतजार है। निर्देशक होमी अदजानिया की इस फिल्म में शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना मुख्य भूमिकाओं में दिखाई देंगे। फिल्म की कहानी लव ट्रायंगल पर आधारित बताई जा रही है।

    जून महीने का सबसे बड़ा धमाका 26 जून को होने वाला है, जब वेलकम टू द जंगल रिलीज होगी। निर्देशक अहमद खान की इस मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्म में अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, रवीना टंडन, दिशा पटानी, लारा दत्ता, जैकलिन फर्नांडिस, परेश रावल, अरशद वारसी, जॉनी लीवर और राजपाल यादव समेत 20 से ज्यादा कलाकार एक साथ नजर आने वाले हैं।

    जून 2026 में रिलीज होने वाली ये फिल्में दर्शकों को भरपूर मनोरंजन देने के लिए तैयार हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि इनमें से कौन सी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सबसे बड़ा धमाका करती है।

  • सिद्धारमैया के बाद डीके शिवकुमार पर दांव, कांग्रेस संगठन के सबसे मजबूत चेहरे के हाथों में होगी जिम्मेदारी

    सिद्धारमैया के बाद डीके शिवकुमार पर दांव, कांग्रेस संगठन के सबसे मजबूत चेहरे के हाथों में होगी जिम्मेदारी

    नई दिल्ली । कर्नाटक की राजनीति में एक बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लंबे समय से संगठन की रीढ़ माने जाने वाले डीके शिवकुमार अब सत्ता के सबसे महत्वपूर्ण केंद्र तक पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री पद से सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद कांग्रेस विधायक दल की बैठक को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और माना जा रहा है कि पार्टी अब राज्य की कमान अपने सबसे भरोसेमंद और प्रभावशाली रणनीतिकार के हाथों में सौंप सकती है।

    कांग्रेस संगठन में डीके शिवकुमार की पहचान केवल एक वरिष्ठ नेता के रूप में नहीं बल्कि ऐसे संकटमोचक के रूप में रही है, जिन्होंने कई बार कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी को संभालने में निर्णायक भूमिका निभाई। पिछले दो दशकों में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई राजनीतिक संकटों के दौरान उन्होंने संगठन को एकजुट रखने, विधायकों को साथ बनाए रखने और चुनावी रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यही कारण है कि पार्टी नेतृत्व के भीतर उनकी विश्वसनीयता लगातार मजबूत होती गई।

    ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर राज्य की राजनीति के शीर्ष तक पहुंचने वाले डीके शिवकुमार का राजनीतिक सफर संघर्ष, संगठन क्षमता और संसाधन प्रबंधन का उदाहरण माना जाता है। छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले शिवकुमार ने धीरे-धीरे अपने प्रभाव का विस्तार किया और वोक्कालिगा समुदाय के बीच मजबूत जनाधार तैयार किया। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस के भीतर भी अपनी ऐसी स्थिति बनाई, जहां संगठनात्मक फैसलों में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाने लगी।

    कर्नाटक में कांग्रेस की हालिया चुनावी सफलता में भी उनकी भूमिका को निर्णायक माना गया था। एक तरफ सामाजिक और कल्याणकारी राजनीति का चेहरा सामने था, तो दूसरी ओर चुनावी प्रबंधन, संसाधनों के समन्वय और संगठन को सक्रिय रखने की जिम्मेदारी शिवकुमार के कंधों पर थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी यही क्षमता अब उन्हें मुख्यमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित कर रही है।

    हालांकि उनका राजनीतिक सफर विवादों और चुनौतियों से भी अछूता नहीं रहा है। वित्तीय मामलों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर वह लगातार विपक्ष के निशाने पर रहे हैं। इसके बावजूद उन्होंने हर राजनीतिक संकट के बाद खुद को पहले से अधिक मजबूत तरीके से स्थापित किया। समर्थकों के बीच उनकी छवि ऐसे नेता की बन चुकी है जो दबाव की परिस्थितियों में भी संगठन के लिए खड़े रहते हैं।

    कांग्रेस के लिए यह बदलाव केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीति का भी संकेत माना जा रहा है। पार्टी ऐसे समय में राज्य की कमान ऐसे नेता को सौंपने की तैयारी में दिखाई दे रही है, जो जातीय समीकरणों, संगठनात्मक ताकत, संसाधन प्रबंधन और चुनावी राजनीति की जमीनी समझ को एक साथ साधने की क्षमता रखता हो।

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद संभालते हैं तो कर्नाटक की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत हो सकती है। यह दौर संगठन आधारित नेतृत्व, मजबूत राजनीतिक नियंत्रण और आक्रामक चुनावी रणनीति के लिए जाना जा सकता है। आने वाले समय में यह भी साफ होगा कि क्या उनकी राजनीतिक शैली राज्य में कांग्रेस को लंबे समय तक स्थिरता और मजबूती दे पाएगी।

  • चुनावी झटकों के बाद मैदान में उतरे अभिषेक बनर्जी, हिंसा प्रभावित कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर साधेंगे संगठन

    चुनावी झटकों के बाद मैदान में उतरे अभिषेक बनर्जी, हिंसा प्रभावित कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर साधेंगे संगठन


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद एक बार फिर हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। चुनावी झटकों और लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी अब दोबारा सक्रिय राजनीति में उतरते नजर आ रहे हैं। लंबे समय तक सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखने के बाद उनका मैदान में लौटना राज्य की राजनीति में नए संकेतों के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल सामान्य जनसंपर्क कार्यक्रम नहीं बल्कि पार्टी संगठन और कैडर को फिर से मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

    चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से अभिषेक बनर्जी की सार्वजनिक गतिविधियां काफी सीमित हो गई थीं। वह मुख्य रूप से सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रख रहे थे, लेकिन अब उन्होंने सीधे पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच जाने का निर्णय लिया है। उनके कार्यक्रमों का केंद्र वे कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं, जो चुनाव बाद हिंसा की घटनाओं से प्रभावित हुए हैं। इसे तृणमूल कांग्रेस की ओर से संगठनात्मक एकजुटता और राजनीतिक संदेश दोनों के रूप में देखा जा रहा है।

    राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि हाल के घटनाक्रमों ने अभिषेक बनर्जी की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित किया है। चुनाव के बाद उनकी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव, संपत्तियों से जुड़े प्रशासनिक नोटिस और एक चुनावी भाषण को लेकर दर्ज मामला लगातार चर्चा में बने हुए हैं। हालांकि अदालत से उन्हें अस्थायी राहत मिली है, लेकिन इन घटनाओं ने राजनीतिक वातावरण को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच जाकर संवाद स्थापित करना तृणमूल कांग्रेस के लिए संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम है। चुनावी नतीजों के बाद पार्टी के भीतर भी कई स्तरों पर असंतोष और पुनर्समीक्षा की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में वरिष्ठ नेतृत्व की सक्रियता कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और संगठन को एकजुट रखने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

    राज्य की राजनीति में चुनाव बाद हिंसा लंबे समय से बड़ा मुद्दा रही है और विपक्ष लगातार इसे लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाता रहा है। अब जब तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व स्वयं प्रभावित कार्यकर्ताओं से मिलने की रणनीति अपना रहा है, तो यह राजनीतिक संदेश देने की कोशिश भी मानी जा रही है कि पार्टी अपने समर्थकों के साथ खड़ी है।

    इसके साथ ही कानूनी चुनौतियां भी अभिषेक बनर्जी के राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। एक चुनावी बयान को लेकर उनके खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं। अदालत ने फिलहाल राहत जरूर दी है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीतिक गर्मी को और बढ़ा दिया है।

    पश्चिम बंगाल में आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। तृणमूल कांग्रेस जहां संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने में जुटी है, वहीं विपक्ष भी सरकार और पार्टी नेतृत्व पर लगातार हमलावर बना हुआ है। ऐसे माहौल में अभिषेक बनर्जी की सक्रियता राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • दहेज के लिए मानसिक प्रताड़ना को सुप्रीम कोर्ट ने बताया गंभीर सामाजिक अपराध, आरोपी की याचिका खारिज

    दहेज के लिए मानसिक प्रताड़ना को सुप्रीम कोर्ट ने बताया गंभीर सामाजिक अपराध, आरोपी की याचिका खारिज

    नई दिल्ली । दहेज प्रताड़ना और विवाह के बाद महिलाओं के साथ होने वाले मानसिक उत्पीड़न को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर गंभीर चिंता व्यक्त की है। देश की सर्वोच्च अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि शादी के बाद बहू और उसके परिवार का अपमान करना समाज में एक खतरनाक प्रवृत्ति बनती जा रही है और ऐसे मामलों में सख्त संदेश देना बेहद जरूरी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि विवाह किसी परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का माध्यम नहीं बन सकता।

    मामला छत्तीसगढ़ के एक दहेज मृत्यु प्रकरण से जुड़ा था, जिसमें एक महिला की शादी के कुछ वर्षों के भीतर ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। जांच और अभियोजन पक्ष के अनुसार महिला को लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था और उसके परिवार पर आर्थिक दबाव बनाया जा रहा था। अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि महिला के परिवार को अपमानजनक शब्द कहे गए और अतिरिक्त धन तथा वाहन की मांग लगातार जारी रही।

    सुनवाई के दौरान पीठ ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि समाज में पढ़े-लिखे और जागरूक लोग भी दहेज जैसी कुप्रथा में शामिल पाए जाते हैं। अदालत ने कहा कि शादी जैसे पवित्र सामाजिक संबंध को लालच और अपमान से जोड़ना बेहद चिंताजनक है। न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह समझ से परे है कि लोग विवाह करने के बाद लड़की और उसके परिवार को अपमानित क्यों करते हैं। अदालत के अनुसार यह केवल कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक और नैतिक समस्या भी है, जिस पर कठोर दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।

    मेडिकल रिपोर्ट में महिला की मौत फांसी लगने से दम घुटने के कारण बताई गई थी, लेकिन अदालत ने माना कि लगातार मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना का उसकी मौत से सीधा संबंध था। न्यायालय ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में प्रत्यक्ष हिंसा के साथ-साथ मानसिक उत्पीड़न को भी गंभीरता से देखने की आवश्यकता है, क्योंकि यह पीड़ित महिला को गहरे तनाव और असुरक्षा की स्थिति में पहुंचा देता है।

    इस मामले में निचली अदालत और उच्च न्यायालय पहले ही आरोपी पक्ष को दोषी ठहरा चुके थे। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में सजा को चुनौती दी गई थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज करते हुए कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद तथ्यों और परिस्थितियों से प्रताड़ना के आरोप स्पष्ट रूप से साबित होते हैं। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में केवल तकनीकी आधारों पर राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे समाज में गलत संदेश जाएगा।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि दहेज प्रताड़ना के मामलों में समाज को स्पष्ट संकेत मिलना चाहिए कि महिलाओं और उनके परिवारों का अपमान स्वीकार नहीं किया जाएगा। न्यायालय की इस टिप्पणी को महिलाओं की सुरक्षा और दहेज विरोधी कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    देश में दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कानून के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और पारिवारिक सोच में बदलाव भी बेहद जरूरी है ताकि विवाह संस्था सम्मान और समानता के आधार पर मजबूत हो सके।

  • नीट यूजी 2026 फीस वापसी प्रक्रिया फिर शुरू, लाखों छात्रों को बैंक जानकारी अपडेट करने का अंतिम मौका

    नीट यूजी 2026 फीस वापसी प्रक्रिया फिर शुरू, लाखों छात्रों को बैंक जानकारी अपडेट करने का अंतिम मौका

    नई दिल्ली ।  प्रवेश परीक्षा स्नातक यानी NEET UG 2026 से जुड़े लाखों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत सामने आई है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने परीक्षा शुल्क वापसी प्रक्रिया के तहत बैंक खाते की जानकारी जमा करने की समयसीमा को बढ़ाकर 22 जून 2026 तक कर दिया है। यह फैसला उन उम्मीदवारों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिन्होंने अब तक अपनी बैंक डिटेल्स पोर्टल पर अपडेट नहीं की थीं। परीक्षा रद्द होने के बाद शुरू हुई रिफंड प्रक्रिया में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए हैं और एजेंसी अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कोई भी पात्र उम्मीदवार शुल्क वापसी से वंचित न रहे।

    इस वर्ष मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित NEET UG परीक्षा देशभर में 3 मई को संपन्न हुई थी। परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप सामने आने पर इसे रद्द कर दिया गया था, जिसके बाद पूरे मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चर्चा का रूप ले लिया। जांच एजेंसियों द्वारा मामले की जांच जारी है और अब परीक्षा को दोबारा आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। पुनर्परीक्षा 21 जून को प्रस्तावित है और इसके लिए अभ्यर्थियों से किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।

    राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जिन उम्मीदवारों ने परीक्षा शुल्क जमा किया था, उनकी राशि वापस की जाएगी। इसी प्रक्रिया के तहत छात्रों से उनके बैंक खाते से संबंधित जानकारी मांगी गई थी ताकि रिफंड सीधे खाते में भेजा जा सके। एजेंसी ने मई महीने में सीमित समय के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर बैंक विवरण अपडेट करने की सुविधा उपलब्ध कराई थी, जिसके दौरान बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी जानकारी जमा की।

    आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब तक लगभग 13 लाख अभ्यर्थी अपने बैंक खाते की जानकारी अपडेट कर चुके हैं। हालांकि परीक्षा के लिए पंजीकरण कराने वाले कुल उम्मीदवारों की संख्या लगभग 23 लाख रही थी, जिसके कारण बड़ी संख्या में ऐसे छात्र अभी भी बाकी हैं जिन्होंने आवश्यक विवरण जमा नहीं किया है। इसी स्थिति को देखते हुए एजेंसी ने अंतिम अवसर के रूप में समयसीमा बढ़ाने का निर्णय लिया है।

    एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि एक बार बैंक विवरण जमा करने के बाद उसमें किसी प्रकार का संशोधन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसलिए छात्रों को सलाह दी गई है कि वे अपने खाते की जानकारी सावधानीपूर्वक भरें ताकि रिफंड प्रक्रिया में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या या देरी न हो।

    नीट यूजी परीक्षा देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है और हर वर्ष लाखों छात्र इसमें हिस्सा लेते हैं। इस बार परीक्षा रद्द होने और दोबारा आयोजन की घोषणा ने छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ा दी थी। हालांकि शुल्क वापसी और पुनर्परीक्षा को लेकर एजेंसी द्वारा लगातार जारी किए जा रहे निर्देशों से स्थिति को व्यवस्थित करने की कोशिश की जा रही है।

    शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आने वाले समय में परीक्षा संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

  • बीजेपी ने महिला नेतृत्व पर जताया भरोसा, अर्चना गुप्ता बनीं प्रदेश अध्यक्ष

    बीजेपी ने महिला नेतृत्व पर जताया भरोसा, अर्चना गुप्ता बनीं प्रदेश अध्यक्ष


    नई दिल्ली । Bharatiya Janata Party ने हरियाणा में बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए डॉ. अर्चना गुप्ता को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस फैसले के साथ करीब चार दशक बाद हरियाणा बीजेपी को दूसरी महिला प्रदेश अध्यक्ष मिली हैं। इससे पहले कमला वर्मा ने 1980 से 1983 तक पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। ऐसे में अर्चना गुप्ता की नियुक्ति को महिला नेतृत्व और संगठनात्मक संतुलन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

    डॉ. अर्चना गुप्ता पेशे से डॉक्टर हैं और लंबे समय से बीजेपी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। वह मूल रूप से हरियाणा के पानीपत की रहने वाली हैं। पार्टी में उनकी पहचान एक मजबूत संगठनकर्ता और जमीनी नेता के रूप में रही है। प्रदेश अध्यक्ष बनने से पहले वह हरियाणा बीजेपी में महासचिव की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। इसके अलावा वह जिला बीजेपी अध्यक्ष समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर भी काम कर चुकी हैं।

    बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने गुरुवार को हरियाणा समेत दिल्ली, पंजाब और त्रिपुरा इकाइयों के नए प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा की। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार हरियाणा में अर्चना गुप्ता, पंजाब में केवल सिंह ढिल्लों, त्रिपुरा में अभिषेक देबरॉय और दिल्ली में केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।

    अर्चना गुप्ता ने हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष के रूप में मोहन लाल बड़ौली की जगह ली है। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह संगठन को बूथ स्तर तक और मजबूत बनाने के लिए पूरी मेहनत करेंगी। उन्होंने कहा कि बीजेपी महिलाओं को बराबरी का भागीदार मानती है और महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है।

    पानीपत में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अर्चना गुप्ता ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और उनके सशक्तीकरण के लिए काम करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। उन्होंने महिला आरक्षण अधिनियम के मुद्दे पर विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने महिलाओं को आरक्षण देने की दिशा में कई बार रुकावट पैदा की और महिलाओं के साथ विश्वासघात किया।

    नई प्रदेश अध्यक्ष ने हरियाणा बीजेपी को मजबूत बनाने में योगदान देने वाले नेताओं का भी धन्यवाद किया। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ और सुभाष बराला के कार्यों की सराहना की। अर्चना गुप्ता ने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य संगठन को और मजबूत करना तथा महिलाओं और युवाओं को पार्टी से जोड़ना रहेगा।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी ने अर्चना गुप्ता को आगे कर हरियाणा में महिला वोट बैंक और संगठनात्मक मजबूती दोनों पर बड़ा दांव खेला है। आने वाले समय में उनकी नेतृत्व क्षमता पार्टी की रणनीति में अहम भूमिका निभा सकती है।

  • इतिहास रचेगी महिला क्रिकेट सीरीज, सितंबर में जिम्बाब्वे दौरे पर जाएगी दक्षिण अफ्रीका टीम

    इतिहास रचेगी महिला क्रिकेट सीरीज, सितंबर में जिम्बाब्वे दौरे पर जाएगी दक्षिण अफ्रीका टीम


    नई दिल्ली । जिम्बाब्वे महिला क्रिकेट के इतिहास में सितंबर 2026 एक खास अध्याय जोड़ने जा रहा है। दक्षिण अफ्रीका महिला क्रिकेट टीम पांच मैचों की टी20 सीरीज के लिए जिम्बाब्वे का दौरा करेगी। जिम्बाब्वे क्रिकेट बोर्ड ने शुक्रवार को इस ऐतिहासिक दौरे की आधिकारिक पुष्टि की। खास बात यह है कि दोनों देशों के बीच यह पहली द्विपक्षीय महिला क्रिकेट सीरीज होगी, जिसे महिला क्रिकेट के विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

    यह सीरीज न केवल जिम्बाब्वे महिला क्रिकेट टीम के लिए चुनौतीपूर्ण होगी, बल्कि घरेलू खिलाड़ियों के लिए खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साबित करने का सुनहरा अवसर भी लेकर आएगी। दक्षिण अफ्रीका मौजूदा समय की सबसे मजबूत महिला क्रिकेट टीमों में गिनी जाती है और उसके खिलाफ खेलने का अनुभव जिम्बाब्वे की युवा खिलाड़ियों के आत्मविश्वास और खेल स्तर को नई ऊंचाई दे सकता है।

    जिम्बाब्वे क्रिकेट के मैनेजिंग डायरेक्टर गिवमोर माकोनी ने इस दौरे को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि दक्षिण अफ्रीका जैसी विश्वस्तरीय टीम का जिम्बाब्वे आना महिला क्रिकेट के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि घरेलू मैदान पर शीर्ष स्तर की टीम के खिलाफ खेलने से खिलाड़ियों को अपनी क्षमताओं को परखने का मौका मिलेगा और इससे देश में महिला क्रिकेट को भी नई पहचान मिलेगी। माकोनी ने उम्मीद जताई कि यह सीरीज नई पीढ़ी की लड़कियों को क्रिकेट अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।

    इस साल की शुरुआत में पाकिस्तान के खिलाफ अपने पहले व्हाइट-बॉल घरेलू दौरे की मेजबानी करने के बाद जिम्बाब्वे महिला क्रिकेट लगातार आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है। टीम ने सितंबर 2025 में संयुक्त अरब अमीरात के खिलाफ घरेलू सीरीज खेली थी, जिसके बाद उसने पाकिस्तान और न्यूजीलैंड जैसे देशों का विदेशी दौरा भी किया। ऐसे में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ यह सीरीज जिम्बाब्वे के लिए अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करने का बड़ा मंच बनकर सामने आई है।

    दोनों टीमों के बीच सीनियर स्तर पर अब तक केवल दो मुकाबले हुए हैं। ये दोनों मैच 2017 में पोटचेफस्ट्रूम में आयोजित चार देशों की वनडे सीरीज के दौरान खेले गए थे। अब लगभग नौ साल बाद दोनों टीमें फिर आमने-सामने होंगी, लेकिन इस बार मुकाबला टी20 फॉर्मेट में होगा और मेजबानी जिम्बाब्वे के पास रहेगी।

    आईसीसी महिला टी20 विश्व कप ग्लोबल क्वालीफायर में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद जिम्बाब्वे टीम खुद को फिर से मजबूत करने में जुटी हुई है। ऐसे में दक्षिण अफ्रीका जैसी मजबूत टीम के खिलाफ सीरीज टीम की तैयारियों और रणनीतियों को परखने का अहम मौका साबित होगी।

    सीरीज के सभी पांच मुकाबले बुलावायो में खेले जाएंगे। मैचों का आयोजन 11, 13, 15, 17 और 19 सितंबर को किया जाएगा। क्रिकेट प्रेमियों को उम्मीद है कि यह सीरीज महिला क्रिकेट को नई लोकप्रियता दिलाने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच खेल संबंधों को भी मजबूत करेगी।

  • ऑपरेशन सिंदूर बना भारत की सैन्य ताकत का प्रतीक, आधुनिक युद्ध क्षमता और तीनों सेनाओं के तालमेल की मिसाल

    ऑपरेशन सिंदूर बना भारत की सैन्य ताकत का प्रतीक, आधुनिक युद्ध क्षमता और तीनों सेनाओं के तालमेल की मिसाल

    नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की सैन्य कार्रवाई इतनी प्रभावशाली रही कि पाकिस्तान मात्र चार दिनों के भीतर ही युद्धविराम की अपील करने पर मजबूर हो गया। उन्होंने इस अभियान को भारत की निर्णायक सैन्य इच्छाशक्ति, आधुनिक तकनीकी क्षमता और तीनों सेनाओं के उत्कृष्ट समन्वय का प्रतीक बताया। उनके अनुसार यह ऑपरेशन केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि यह भारत की रणनीतिक मजबूती और बदलती रक्षा क्षमता का स्पष्ट प्रदर्शन था, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश की स्थिति को और सुदृढ़ किया।

    राजनाथ सिंह ने यह बात उस अवसर पर कही जब नई दिल्ली में ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित एक स्मारक प्रकाशन का विमोचन किया गया। इस कार्यक्रम में भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे और पूरा वातावरण राष्ट्रीय भावना और गर्व से परिपूर्ण दिखाई दिया। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह प्रकाशन केवल घटनाओं का संकलन नहीं है, बल्कि उन सैनिकों के अनुभवों, संघर्षों और साहस की कहानी भी प्रस्तुत करता है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में देश की सुरक्षा सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से नहीं जीते जाते, बल्कि इसमें नेतृत्व क्षमता, मानसिक दृढ़ता और सही निर्णय लेने की क्षमता निर्णायक भूमिका निभाती है।

    उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया कि भारतीय सशस्त्र बल अब पारंपरिक युद्ध सीमाओं से आगे बढ़कर तेज, सटीक और बहुआयामी अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने में सक्षम हैं। उनके अनुसार यह अभियान भारत की सैन्य रणनीति में आए बड़े बदलाव का संकेत है, जिसमें तकनीक, समन्वय और त्वरित निर्णय क्षमता को केंद्र में रखा गया है। रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि ऐसे अभियानों से न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत की स्थिति अधिक सशक्त होती है।

    इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी सहित सशस्त्र बलों के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर के रणनीतिक पहलुओं, संयुक्त सैन्य समन्वय और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों के अनुसार यह अभियान भारतीय सैन्य इतिहास में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जिसने यह स्पष्ट किया है कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के मुद्दों पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।

    राजनाथ सिंह ने नागरिकों से भी अपील की कि वे इस प्रकार के प्रकाशनों और अनुभवों से प्रेरणा लें और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाले जिम्मेदार नागरिक बनें। उन्होंने कहा कि जब सैनिक सीमाओं पर अपने प्राणों की आहुति देने को तैयार रहते हैं, तब समाज का भी कर्तव्य बनता है कि वह देश की एकता, सुरक्षा और संप्रभुता के प्रति सजग और समर्पित रहे।

  • इलेक्ट्रिक कार सेगमेंट में बड़ा धमाका, टेस्ला ने नया मॉडल पेश किया

    इलेक्ट्रिक कार सेगमेंट में बड़ा धमाका, टेस्ला ने नया मॉडल पेश किया


    नई दिल्ली । अमेरिकी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी टेस्ला ने भारत के ऑटोमोबाइल बाजार में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए शुक्रवार को नई मॉडल वाई प्रीमियम रियर-व्हील ड्राइव (RWD) वेरिएंट को पेश किया है। इस नए मॉडल की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 50.89 लाख रुपये तय की गई है। कंपनी ने घोषणा की है कि इस वाहन की डिलीवरी जुलाई 2026 से शुरू की जाएगी।

    टेस्ला का यह नया लॉन्च भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में प्रतिस्पर्धा को और तेज करने वाला माना जा रहा है, जहां कंपनी अब तक अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाई थी। इस कदम के जरिए टेस्ला का लक्ष्य भारतीय ग्राहकों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना है।

    नई मॉडल वाई RWD में प्रीमियम ऑल-ब्लैक इंटीरियर दिया गया है, जो इसे एक आधुनिक और आकर्षक लुक प्रदान करता है। इसके साथ ही वाहन में पहली पंक्ति के लिए 16 इंच का बड़ा टचस्क्रीन शामिल किया गया है, जो बेहतर रिस्पॉन्सिवनेस और एडवांस्ड यूजर इंटरफेस के साथ आता है। कंपनी ने इसमें वैकल्पिक जेन ग्रे इंटीरियर थीम का भी विकल्प दिया है, जिससे ग्राहकों को पर्सनलाइजेशन की सुविधा मिलती है।

    स्पेस और कम्फर्ट की बात करें तो यह मॉडल 2,138 लीटर तक की विशाल स्टोरेज क्षमता प्रदान करता है। इसमें पावर-फोल्डिंग सीटें दी गई हैं, जिससे कार्गो स्पेस को जरूरत के अनुसार बढ़ाया जा सकता है। यह वाहन पांच यात्रियों के बैठने की सुविधा के साथ डिजाइन किया गया है।

    परफॉर्मेंस के मामले में यह इलेक्ट्रिक कार 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार सिर्फ 5.9 सेकंड में पकड़ सकती है। वहीं, WLTP मानकों के अनुसार यह लगभग 500 किलोमीटर तक की ड्राइविंग रेंज देने में सक्षम है, जो इसे लंबी दूरी की यात्रा के लिए भी उपयुक्त बनाता है।

    सुरक्षा के लिहाज से मॉडल वाई RWD को वैश्विक स्तर की मान्यता प्राप्त हुई है। इसे NHTSA, IIHS, Euro NCAP, ANCAP और C-IASI जैसे प्रमुख सुरक्षा संगठनों से उच्चतम सुरक्षा रेटिंग मिली है, जो इसकी मजबूती और सुरक्षा तकनीक को प्रमाणित करती है।

    हाल ही में टेस्ला ने भारत में छह सीटों वाली मॉडल वाई L भी लॉन्च की थी, जिसकी शुरुआती कीमत 61.99 लाख रुपये है। इसके अलावा कंपनी ने बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड में अपना पहला एक्सपीरियंस सेंटर खोलकर भारत में अपने विस्तार की शुरुआत की थी।

    टेस्ला की वरिष्ठ निदेशक इसाबेल फैन ने कहा कि कंपनी का उद्देश्य तकनीक को अधिक सुलभ बनाना और चार्जिंग समाधानों के जरिए इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देना है।

    कंपनी ने ग्राहकों के लिए फाइनेंस विकल्प भी पेश किए हैं, जिसमें 39,990 रुपये से मासिक EMI और 6 लाख रुपये से डाउन पेमेंट की सुविधा शामिल है। यह कदम भारतीय बाजार में प्रीमियम इलेक्ट्रिक वाहनों को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।