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एक करोड़ दिलाने का वादा और फिर सोने की कहानी, तमिलनाडु के CM के नाम पर बुजुर्ग से ₹7.52 लाख की ठगी
जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में साइबर ठगी का एक मामला सामने आया है जिसमें आरोपियों ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलापति के नाम का इस्तेमाल कर 69 वर्षीय बुजुर्ग को एक करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दिलाने का झांसा दिया। आरोपियों ने बुजुर्ग का भरोसा जीतकर अलग-अलग चरणों में कुल 7.52 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। रकम लेने के बाद भी ठगों ने पैसे मांगना बंद नहीं किया। उन्होंने सोना लेकर आने और रास्ते में पुलिस के पकड़ लेने की कहानी सुनाकर बुजुर्ग से 60 हजार रुपये और मांग लिए। इस बार उन्हें शक हुआ और उन्होंने पुलिस से शिकायत कर दी। गोरखपुर थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।पुलिस के मुताबिक जबलपुर के गुप्तेश्वर निवासी प्रवेश धीर को फेसबुक पर आर्थिक सहायता और ऋण उपलब्ध कराने से जुड़ा एक लिंक दिखाई दिया था। आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद में उन्होंने लिंक पर क्लिक किया। इसके कुछ समय बाद उनके मोबाइल पर चार अलग-अलग नंबरों से फोन आने लगे। फोन करने वालों ने खुद को विजय थलापति से जुड़ा हुआ बताया और दावा किया कि उन्हें एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दिलाई जा सकती है। आरोपियों ने मुख्यमंत्री के नाम का इस्तेमाल कर बुजुर्ग को भरोसे में लेने की कोशिश की। उनकी बातों में आकर प्रवेश धीर ने आरोपियों पर विश्वास कर लिया।इसके बाद ठगी का सिलसिला शुरू हुआ। आरोपियों ने आर्थिक सहायता दिलाने के नाम पर अलग-अलग चरणों में भुगतान करने को कहा। उन्होंने सात बार स्कैनर भेजे और बुजुर्ग से विभिन्न बैंक खातों में रुपये ट्रांसफर कराए। इस तरह कुल 7.52 लाख रुपये आरोपियों के बताए खातों में चले गए। बुजुर्ग को उम्मीद थी कि रकम जमा करने के बाद उन्हें वादा की गई आर्थिक मदद मिल जाएगी। लेकिन आरोपियों ने न तो आर्थिक सहायता दिलाई और न ही पैसे वापस किए। इसके बजाय वे लगातार नई कहानी बनाकर उनसे और रकम मांगने लगे।पुलिस के अनुसार आरोपियों ने पैसे लेने के बाद बुजुर्ग को बताया कि वे उनके लिए सोना लेकर आ रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने दावा किया कि रास्ते में पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया है और अब उन्हें छुड़ाने के लिए अतिरिक्त रकम की जरूरत है। इस बहाने आरोपियों ने 60 हजार रुपये और मांगे। लगातार भुगतान की मांग होने से प्रवेश धीर को संदेह हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी की जा रही है। इसके बाद उन्होंने गोरखपुर थाने पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब उन मोबाइल नंबरों की पड़ताल कर रही है जिनसे बुजुर्ग को फोन किए गए थे। इसके साथ ही रकम जिन बैंक खातों में ट्रांसफर की गई उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस लेनदेन के रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। थाना प्रभारी नितिन कमल के मुताबिक साइबर टीम की मदद से मामले की जांच की जा रही है।यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि आर्थिक सहायता दिलाने के नाम पर लोगों को किस तरह निशाना बनाया जा सकता है। सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने या फोन पर किए गए दावों पर तुरंत भरोसा करने से बचना जरूरी है। सरकारी सहायता या बड़ी रकम दिलाने के नाम पर अग्रिम भुगतान मांगने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति की ओर से भेजे गए क्यूआर कोड या स्कैनर को जांचे बिना भुगतान नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री या किसी सरकारी योजना का नाम लेकर पैसे मांगता है तो पहले संबंधित विभाग के आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत बैंक को सूचना देकर खाते से जुड़े लेनदेन पर कार्रवाई का अनुरोध करना चाहिए और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या आधिकारिक साइबर अपराध पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज करानी चाहिए। -

तेज धूप के बीच ग्वालियर में ठंडक का एहसास, सुबह तापमान में गिरावट, जानें दिन में कैसा रहेगा मौसम
ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शुक्रवार सुबह मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आया। ठंडी हवाओं के चलने से लोगों को पिछले कुछ दिनों से महसूस हो रही गर्मी से राहत मिली। सुबह धूप निकलने के बावजूद वातावरण में ठंडक बनी रही और मौसम सुहावना महसूस हुआ। गुरुवार की तुलना में न्यूनतम तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई। मौसम में आए इस बदलाव के कारण सुबह घरों से बाहर निकलने वाले लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली। हालांकि मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार न्यूनतम तापमान अभी सामान्य से थोड़ा अधिक बना हुआ है और दिन चढ़ने के साथ धूप तेज होने पर गर्मी का असर फिर बढ़ सकता है।शुक्रवार सुबह ग्वालियर में न्यूनतम तापमान 21.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सामान्य से 0.3 डिग्री अधिक रहा। मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार सुबह 5:30 बजे तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस और सुबह 8:30 बजे 22.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। तापमान में मामूली उतार-चढ़ाव के बीच ठंडी हवाओं ने सुबह के मौसम को अपेक्षाकृत आरामदायक बनाए रखा। पिछले कुछ दिनों से तेज धूप और गर्मी के कारण लोगों को परेशानी हो रही थी लेकिन शुक्रवार सुबह मौसम में आई नरमी ने राहत का एहसास कराया।मौसम में ठंडक महसूस होने के पीछे हवा में नमी की अधिक मात्रा भी एक अहम वजह रही। शुक्रवार सुबह सापेक्ष आर्द्रता 96 प्रतिशत दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यह पिछले रिकॉर्ड की तुलना में 27 प्रतिशत अधिक रही। हवा में नमी बढ़ने और ठंडी हवाएं चलने से सुबह के समय वातावरण में अलग तरह की ठंडक महसूस हुई। हालांकि अधिक आर्द्रता का मतलब यह नहीं है कि बारिश होना तय है। मौसम की स्थिति पर तापमान हवा की दिशा और अन्य मौसमी परिस्थितियों का भी असर पड़ता है।ग्वालियर में पिछले कुछ दिनों से दिन के समय तेज धूप के कारण गर्मी का असर बना हुआ था। सुबह और शाम के मुकाबले दोपहर में तापमान बढ़ने से लोगों को अधिक गर्मी महसूस हो रही थी। शुक्रवार सुबह चली ठंडी हवाओं ने इस स्थिति में कुछ राहत दी। सुबह की सुहावनी फिजा के बावजूद दिन में तापमान बढ़ने की संभावना बनी हुई है। धूप तेज होने के साथ वातावरण गर्म हो सकता है इसलिए सुबह की ठंडक को पूरे दिन के मौसम का संकेत मानना सही नहीं होगा।फिलहाल उपलब्ध मौसम जानकारी के अनुसार ग्वालियर में बारिश की संभावना के स्पष्ट संकेत नहीं हैं। ऐसे में मौसम में आया बदलाव मुख्य रूप से ठंडी हवाओं और हवा में नमी बढ़ने से जुड़ा नजर आ रहा है। सुबह और शाम के समय मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रह सकता है जबकि दोपहर में धूप के कारण गर्मी फिर महसूस हो सकती है। बदलते मौसम के बीच लोगों को दिन के समय धूप से बचाव और पर्याप्त पानी पीने का ध्यान रखना चाहिए। आने वाले समय में तापमान और हवा की स्थिति के आधार पर मौसम का मिजाज बदल सकता है। फिलहाल ग्वालियर के लोगों को सुबह के समय गर्मी से मिली राहत ने कुछ सुकून जरूर दिया है। -

अश्लील और आपत्तिजनक भाषा के आरोपों में हर्ष गुजराल और मधुर विरली को समन, महाराष्ट्र साइबर सेल ने 19 अक्टूबर को बुलाया
नई दिल्ली । स्टैंडअप कॉमेडियन हर्ष गुजराल और मधुर विरली को महाराष्ट्र साइबर सेल ने समन भेजकर 19 अक्टूबर 2026 को पूछताछ के लिए पेश होने को कहा है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने अपने कॉमेडी शो के दौरान अश्लील और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। यह कार्रवाई एक महिला की शिकायत मिलने के बाद की गई है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि शिकायत में किस विशेष चुटकुले या प्रस्तुति को लेकर आपत्ति जताई गई है।एक अधिकारी के मुताबिक, महिला की शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल ने मामले की पड़ताल शुरू की। दोनों कॉमेडियनों को निर्धारित तारीख पर जांच एजेंसी के सामने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। हालांकि, अभी तक शिकायत से संबंधित कथित आपत्तिजनक सामग्री का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है। हर्ष गुजराल और मधुर विरली की ओर से भी समन को लेकर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब स्टैंडअप कॉमेडी और डिजिटल मंचों पर प्रसारित होने वाली सामग्री को लेकर आपत्तियों तथा कानूनी जांच के मामले चर्चा में रहे हैं। महाराष्ट्र साइबर सेल इससे पहले भी विवादित कॉमेडी सामग्री से जुड़े मामलों में कार्रवाई कर चुका है। ऐसे मामलों में प्रस्तुतियों के दौरान की गई टिप्पणियों और उनकी भाषा को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।
फरवरी 2025 में कॉमेडियन समय रैना के यूट्यूब शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के एक एपिसोड में की गई टिप्पणियों को लेकर बड़ा विवाद हुआ था। उस प्रकरण के बाद शो की सामग्री की कानूनी जांच की गई और उसे लेकर व्यापक आलोचना भी हुई। इस मामले में प्रणित मोरे, अपूर्वा मुखिजा और रणवीर अल्लाहबादिया सहित कई कॉमेडियन और डिजिटल सामग्री निर्माताओं की टिप्पणियां भी जांच के दायरे में आई थीं। इन घटनाओं के बाद मनोरंजन सामग्री में इस्तेमाल होने वाली भाषा और संवेदनशील विषयों पर की जाने वाली टिप्पणियों को लेकर बहस तेज हुई।
हर्ष गुजराल स्टैंडअप कॉमेडी के अलावा फिल्मों और टेलीविजन कार्यक्रमों में भी काम कर चुके हैं। वर्ष 2025 में रिलीज हुई कॉमेडी फिल्म ‘मेरे हस्बैंड की बीवी’ में उन्होंने रेहान कुरैशी की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म में अर्जुन कपूर, भूमि पेडनेकर और रकुल प्रीत सिंह भी नजर आए थे। इसके अलावा गुजराल ‘द कपिल शर्मा शो’ और ‘मैडनेस मचायेंगे-इंडिया को हसायेंगे’ जैसे कार्यक्रमों में दिखाई दे चुके हैं। वह ‘द ट्रेटर्स’ और ‘खतरों के खिलाड़ी’ जैसे रियलिटी शो में भी हिस्सा ले चुके हैं।
मधुर विरली भी पहले अपनी एक स्टैंडअप प्रस्तुति को लेकर विवाद का सामना कर चुके हैं। जून 2026 में उनके शो ‘लव एंड लेटेक्स’ की एक पुरानी वीडियो क्लिप ऑनलाइन सामने आई थी। इसमें बलात्कार जैसे संवेदनशील विषय पर किया गया एक चुटकुला शामिल था, जिसकी काफी आलोचना हुई थी।
विवाद के बाद विरली ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी। उन्होंने कहा था कि प्रस्तुति के दौरान ही उन्हें एहसास हो गया था कि वह चुटकुला अनुचित था और उन्होंने उसी समय उस हिस्से को शो से हटा दिया था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि संवेदनशील विषयों पर बात करते समय अधिक सावधानी और समझदारी बरतना जरूरी है।
फिलहाल हर्ष गुजराल और मधुर विरली को भेजे गए समन के बाद जांच की अगली कार्रवाई का इंतजार है। 19 अक्टूबर को पूछताछ के दौरान दोनों से शिकायत से संबंधित सवाल किए जा सकते हैं। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। अभी तक यह सामने नहीं आया है कि मामले में आगे कौन-से कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
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कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले 9 पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि, 21 अक्टूबर को परिजनों से मिलेंगे CM, लंबित भुगतान के निर्देश
भोपाल । मध्य प्रदेश में कर्तव्य निभाते हुए अपनी जान गंवाने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के परिवारों को राहत देने के लिए पुलिस मुख्यालय ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर 21 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों से मुलाकात करेंगे। इस कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने संबंधित अधिकारियों को अनुकंपा नियुक्ति और लंबित देयकों के भुगतान से जुड़े मामलों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी गई है ताकि प्रत्येक प्रकरण की समीक्षा की जा सके और परिवारों को मिलने वाली सहायता की स्थिति स्पष्ट हो सके।पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी पत्र के अनुसार 1 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 के बीच ड्यूटी के दौरान दिवंगत हुए नौ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय से प्राप्त हुई है। इन सभी के परिजनों को पुलिस स्मृति दिवस के कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाएगा। मुख्यालय ने निर्देश दिए हैं कि संबंधित परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति देने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और उनके लंबित भुगतान का निपटारा किया जाए। इस पहल का उद्देश्य उन परिवारों के मामलों को प्राथमिकता देना है जिन्होंने अपने परिजन को पुलिस सेवा के दौरान खोया है।सूची में भोपाल की 25वीं वाहिनी में पदस्थ निरीक्षक आशीष शर्मा का नाम शामिल है। इसके अलावा उज्जैन जिले के सब इंस्पेक्टर अशोक शर्मा सहायक उप निरीक्षक मदनलाल निनामा और महिला आरक्षक आरती पाल भी सूची में शामिल हैं। उमरिया के प्रधान आरक्षक ओम प्रकाश भवेदी राजगढ़ के प्रधान आरक्षक सर्जन सिंह भील मुरैना के प्रधान आरक्षक परिमाल सिंह तोमर सतना के आरक्षक विकास चतुर्वेदी और शहडोल के आरक्षक महेश प्रसाद पाठक ने भी ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाई थी। इन सभी पुलिसकर्मियों के परिजनों से संबंधित मामलों में नियुक्ति और बकाया राशि के भुगतान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।सूची में शामिल निरीक्षक आशीष शर्मा नक्सल विरोधी अभियान के दौरान शहीद हुए थे। वे मध्य प्रदेश हॉक फोर्स में पदस्थ थे और छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव क्षेत्र के जंगलों में संयुक्त पुलिस अभियान के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अभियान में मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की पुलिस टीमें शामिल थीं। जंगल में पेट्रोलिंग के दौरान नक्सलियों की ओर से फायरिंग की गई थी। इस घटना में घायल आशीष शर्मा ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उनका बलिदान नक्सल विरोधी अभियान में पुलिसकर्मियों के सामने आने वाले जोखिमों की याद दिलाता है।उज्जैन जिले के तीन पुलिसकर्मियों की जान सितंबर 2025 में एक सड़क हादसे में गई थी। जानकारी के अनुसार लापता लड़की से जुड़े मामले की जांच के दौरान सुराग का पीछा करते समय उन्हेल थाने की कार शिप्रा नदी में गिर गई थी। इस दुर्घटना में सब इंस्पेक्टर अशोक शर्मा सहायक उप निरीक्षक मदनलाल निनामा और आरक्षक आरती पाल की मृत्यु हो गई थी। वहीं अन्य पुलिसकर्मियों की मौत सड़क दुर्घटनाओं और ड्यूटी से जुड़े हादसों में हुई। सागर जिले में बांदरी के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड की वैन ट्रक से टकरा गई थी। इस दुर्घटना में प्रधान आरक्षक परिमाल सिंह तोमर शहीद हो गए थे।पुलिस स्मृति दिवस हर साल उन पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। इस दिन शहीद जवानों और अधिकारियों को याद करने के साथ उनके परिवारों के प्रति सम्मान और संवेदना भी व्यक्त की जाती है। मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 में शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों को एक करोड़ रुपये की सम्मान निधि देने की घोषणा की थी। इस बार कार्यक्रम से पहले अनुकंपा नियुक्ति और लंबित देयकों के भुगतान पर जोर दिया गया है। अब संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई रिपोर्ट और परिवारों से मुख्यमंत्री की मुलाकात पर नजर रहेगी। -

ग्वालियर में प्राइवेट वीडियो पति को भेजने पर भड़की महिला, एक्स बॉयफ्रेंड पर कैंची से किया हमला, 8 से 9 गहरे घाव से गंभीर हालत
मध्य प्रदेश। के ग्वालियर में निजी वीडियो और ऑडियो को लेकर हुए विवाद में एक महिला ने अपने पूर्व प्रेमी पर कैंची से हमला कर दिया। इस घटना में 40 वर्षीय धर्मेंद्र प्रजापति गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके शरीर पर कैंची से किए गए 8 से 9 गहरे घाव बताए गए हैं। घटना के बाद घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार चल रहा है। पुलिस ने आरोपी महिला को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।यह घटना ग्वालियर के कंपू थाना क्षेत्र की ललितपुर कॉलोनी में हुई। धर्मेंद्र प्रजापति यहां किराए के मकान में रहता था। बताया गया है कि महिला और धर्मेंद्र के बीच करीब ढाई साल तक प्रेम संबंध रहे थे। महिला के पहले पति बालवीर प्रजापति की मौत हो चुकी थी। इसके बाद वह धर्मेंद्र के संपर्क में आई और दोनों के बीच संबंध बन गए।कुछ समय बाद महिला ने धर्मेंद्र से दूरी बना ली और सिकंदर कंपू निवासी सोनू यादव से शादी कर ली।
आरोप है कि शादी के बाद भी धर्मेंद्र महिला से संपर्क बनाए हुए था और उसे परेशान कर रहा था। इसी बीच महिला और धर्मेंद्र के पुराने संबंधों से जुड़े निजी ऑडियो और वीडियो उसके पति सोनू यादव तक पहुंच गए। महिला का आरोप है कि धर्मेंद्र ने ये निजी सामग्री उसके पति को भेजी थी।निजी वीडियो और ऑडियो पति तक पहुंचने के बाद महिला और उसके पति के बीच विवाद होने की बात सामने आई है। इस घटनाक्रम से नाराज महिला कथित तौर पर धर्मेंद्र के घर पहुंची। वहां दोनों के बीच विवाद हुआ और महिला ने उस पर कैंची से हमला कर दिया। हमले में धर्मेंद्र गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा।
चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर एकत्र हो गए। स्थानीय लोगों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। इसके बाद घायल को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। उसके शरीर पर कई गहरे घाव होने के कारण घटना को गंभीर माना जा रहा है। पुलिस अब पूरे मामले के घटनाक्रम और हमले की परिस्थितियों की पड़ताल कर रही है।महिला ने लगाया ब्लैकमेलिंग का आरोप
पुलिस पूछताछ के दौरान महिला ने आरोप लगाया कि धर्मेंद्र उसे लगातार ब्लैकमेल कर रहा था और उसकी शादीशुदा जिंदगी में दखल दे रहा था। महिला के अनुसार, निजी वीडियो और ऑडियो उसके पति को भेजे जाने के बाद घर में विवाद की स्थिति पैदा हो गई थी। इसी बात से नाराज होकर उसने धर्मेंद्र पर हमला किया। हालांकि, महिला की ओर से लगाए गए ब्लैकमेलिंग के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।कंपू थाना पुलिस ने महिला को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस घायल धर्मेंद्र के बयान, घटनास्थल से मिलने वाले साक्ष्यों और दोनों पक्षों के आरोपों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।यह मामला निजी वीडियो और ऑडियो के कथित प्रसार से शुरू हुए विवाद के हिंसक रूप लेने से जुड़ा है। फिलहाल पुलिस का ध्यान हमले की परिस्थितियों, ब्लैकमेलिंग के आरोपों और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच पर है।
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मध्य प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी और तंज का दौर, आरक्षण पर विधायक की फजीहत, लाड़ली बहना पर कांग्रेस की चुप्पी और भाजपा में हलचल
शिवपुरी । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानबाजी तंज और सियासी घटनाक्रम चर्चा का विषय बने हुए हैं। कहीं भाजपा विधायक को आरक्षण के मुद्दे पर प्रदर्शन के दौरान असहज स्थिति का सामना करना पड़ा तो कहीं लाड़ली बहना योजना पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के जवाब ने सवाल खड़े कर दिए। इंदौर में जल संकट को लेकर बुलाई गई बैठक में मंत्रियों और विधायकों की गैरमौजूदगी भी चर्चा में रही। वहीं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के युवा संवाद कार्यक्रम को कांग्रेस ने राहुल गांधी की राजनीति से जोड़कर देखा है। इन घटनाओं ने प्रदेश की सियासत में बयान और जवाब के नए किस्से पैदा कर दिए हैं।शिवपुरी में भाजपा विधायक देवेंद्र जैन उस समय असहज स्थिति में आ गए जब उनकी ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे एक युवक से बहस हो गई। ओबीसी महासभा के कार्यकर्ता 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर रहे थे। विधायक देवेंद्र जैन वहां एक बैठक के सिलसिले में पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी प्रदर्शनकारियों से बातचीत शुरू हो गई। एक युवक ने अपनी बात रखते हुए कहा कि वह ग्रेजुएट है और पढ़ा लिखा है। इस पर विधायक ने जवाब में खुद को गधा कह दिया। युवक ने भी पलटकर कह दिया कि हां आप गधे हो। इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने हूटिंग शुरू कर दी और भाजपा सरकार मुर्दाबाद तथा शिवपुरी विधायक मुर्दाबाद के नारे लगाए। घटनाक्रम के दौरान विधायक ने अपने नाम पर भी मुर्दाबाद के नारे लगाए। इस पूरे मामले का वीडियो सामने आने के बाद घटना चर्चा में आ गई है।दूसरी ओर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी लाड़ली बहना योजना को लेकर पूछे गए सवाल पर चर्चा में आ गए। भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए कहा कि तीन हजार रुपये देने का वादा किया गया था जबकि महिलाओं को 1500 रुपये दिए जा रहे हैं। उन्होंने इसे वादे के अनुरूप राशि नहीं देने का मामला बताया। इसके बाद पत्रकारों ने उनसे पूछा कि यदि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो क्या लाड़ली बहना योजना जारी रहेगी और क्या राशि बढ़ाकर पांच हजार रुपये की जाएगी। इस सवाल पर पटवारी ने कहा कि इसका जवाब सही समय पर दिया जाएगा। उनके जवाब के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस का माहौल हल्का हो गया। हालांकि योजना को लेकर कांग्रेस की भावी नीति पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।इंदौर में जल संकट को लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की बैठक में भी सियासी चर्चा तेज हो गई। बैठक में जिले के नौ विधायकों में से केवल चार के पहुंचने की जानकारी सामने आई। मंत्री तुलसी सिलावट भी बैठक में मौजूद नहीं थे। जब विजयवर्गीय से बाकी जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि जो नहीं आए उनसे पूछा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि शायद उनके क्षेत्रों में पानी की समस्या नहीं होगी। उनके इस जवाब को लेकर राजनीतिक हलकों में तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि बैठक में कम उपस्थिति के पीछे किसी बड़े नेता की नाराजगी होने की बात को खबर में चर्चा और अटकल के रूप में ही देखा जा रहा है।इसी बीच केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का युवा संवाद कार्यक्रम भी चर्चा में है। 17 अक्टूबर को अशोकनगर में उनका युवा अनप्लग्ड कॉन्सर्ट प्रस्तावित है। इस कार्यक्रम के माध्यम से वे युवाओं से संवाद करेंगे और उनकी बात सुनने का प्रयास करेंगे। कांग्रेस ने इसे राहुल गांधी की युवाओं के बीच पहुंचने की रणनीति से जोड़कर तंज किया है। सिंधिया पहले कांग्रेस में रह चुके हैं लेकिन अब भाजपा में हैं। ऐसे में उनके युवा संवाद कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।प्रदेश की नौकरशाही में भी हालिया तबादला सूची के बाद चर्चाएं जारी हैं। खबर के मुताबिक एक महिला आईएएस अधिकारी को उम्मीद थी कि उन्हें कलेक्टर बनाया जा सकता है। उन्होंने निमाड़ क्षेत्र के एक जिले में पदस्थापना के लिए प्रयास किए थे लेकिन जारी सूची में उस जिले की जिम्मेदारी किसी अन्य अधिकारी को दे दी गई। हालांकि संबंधित अधिकारी का नाम और जिले का विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए इस घटनाक्रम को फिलहाल प्रशासनिक गलियारों में चल रही चर्चा के रूप में ही देखा जा रहा है। कुल मिलाकर आरक्षण विवाद से लेकर लाड़ली बहना योजना और जल संकट की बैठक तक मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानबाजी और सियासी संकेत लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं। -

MP में रबी सीजन से पहले बिजली कटौती ने बढ़ाई मुश्किलें, ग्रिडों का घेराव और चक्काजाम, ऊर्जा मंत्री ने दिए 10 घंटे बिजली के निर्देश
भोपाल । मध्य प्रदेश में अघोषित बिजली कटौती का मुद्दा अब गांवों से निकलकर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में पहुंच गया है। किसानों और ग्रामीणों की नाराजगी लगातार बढ़ रही है। पिछले एक सप्ताह के दौरान मंदसौर राजगढ़ सीहोर बड़वानी धार झाबुआ खंडवा आगर मालवा नर्मदापुरम और बुरहानपुर समेत 10 से ज्यादा जिलों में बिजली कटौती के खिलाफ प्रदर्शन हो चुके हैं। कहीं किसानों ने बिजली ग्रिडों का घेराव किया तो कहीं चक्काजाम लगाकर अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं। कई स्थानों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी विरोध प्रदर्शन करते हुए बिजली आपूर्ति नियमित करने की मांग उठाई है। खास बात यह है कि बिजली संकट को लेकर अब भाजपा के मंत्री और विधायक भी परेशान नजर आ रहे हैं और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से समस्या का समाधान कराने की गुहार लगा रहे हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है। रबी सीजन की तैयारियों के बीच सिंचाई के लिए बिजली की जरूरत बढ़ने लगी है। किसानों का कहना है कि समय पर बिजली नहीं मिलने से खेतों में सिंचाई प्रभावित हो रही है और फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ रही है। ग्रामीण इलाकों में रात के समय बिजली गुल होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। कुछ स्थानों पर दो से आठ घंटे तक बिजली कटौती होने की बात कही जा रही है। इससे खेती के साथ घरेलू कामकाज और आम जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है।मंदसौर जिले में बिजली कटौती के विरोध में कई जगह प्रदर्शन हुए। गरोठ सुवासरा बालागुड़ा और शामगढ़ में किसानों ने बिजली ग्रिडों का घेराव किया। गरोठ-भोपाल रोड पर करीब तीन घंटे तक चक्काजाम रहा। मंदसौर विधायक विपिन जैन के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बिजली विभाग के कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान विधायक और अधीक्षण यंत्री के बीच तीखी बहस भी हुई। प्रदर्शनकारियों ने बिजली आपूर्ति में सुधार की मांग करते हुए कहा कि किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।राजगढ़ जिले में भी बिजली कटौती को लेकर नाराजगी देखने को मिली। करेड़ी गांव और ढाबला जोड़ पर पूर्व विधायक बापू सिंह तंवर ने ग्रामीणों के साथ चक्काजाम किया। उन्होंने अधिकारियों से बिजली कटौती की शिकायत की और समस्या दूर नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी। नवरात्रि के दौरान आरती के समय बिजली कटने को लेकर भी सवाल उठाए गए। सीहोर जिले के बिलकिसगंज में ग्रामीणों ने विद्युत केंद्र का घेराव किया जबकि बड़वानी में किसानों ने कार्यकारी यंत्री कार्यालय पहुंचकर विरोध जताया। धार जिले के मनावर में विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने कलेक्टर को पत्र लिखकर बिजली समस्या की ओर ध्यान दिलाया।आगर मालवा में ग्रामीणों ने चक्काजाम किया तो झाबुआ और खंडवा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रैलियां निकालकर विरोध दर्ज कराया। नर्मदापुरम जिले के पिपरिया में ज्ञापन सौंपा गया जबकि बुरहानपुर में किसानों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर बिजली कटौती का मुद्दा उठाया। लगातार सामने आ रही शिकायतों के कारण मामला कैबिनेट बैठक तक पहुंच गया। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा समेत कई मंत्रियों ने अपने क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की समस्याएं बताईं। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अगली कैबिनेट बैठक में चर्चा कर समाधान निकालने का आश्वासन दिया।ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने अधिकारियों को रबी सीजन में किसानों को प्रतिदिन 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रमुख सचिव और बिजली उत्पादन ट्रांसमिशन तथा पावर मैनेजमेंट से जुड़ी कंपनियों के अधिकारियों को आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कहा है। ऊर्जा मंत्री के मुताबिक प्रदेश में बिजली की मांग में अचानक तेजी आई है। 11 अक्टूबर को मांग करीब 16 हजार मेगावाट तक पहुंच गई थी जबकि पिछले साल इसी तारीख को यह लगभग 11 हजार मेगावाट थी। यानी एक साल में मांग में करीब 38 से 40 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।सरकार के सामने अब बढ़ती मांग के बीच बिजली उत्पादन और आपूर्ति का संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। अधिकारियों को उत्पादन बढ़ाने कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने और स्थानीय स्तर पर आ रही बाधाओं को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। भारतीय किसान संघ ने भी दशहरे तक बिजली समस्या का समाधान करने का अल्टीमेटम दिया है। रबी की बुवाई का समय नजदीक होने के कारण आने वाले दिनों में बिजली की जरूरत और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में किसानों और ग्रामीणों की नजर सरकार के आश्वासन तथा ऊर्जा विभाग के निर्देशों के असर पर टिकी है। अब देखना होगा कि प्रदेश में बिजली कटौती पर रोक लगाने और गांवों में नियमित आपूर्ति बहाल करने के लिए सरकार कितनी जल्दी प्रभावी कदम उठाती है। -

इंडस्ट्रियल एरिया में मनमाने आवासीय निर्माण पर रोक, जमीन की कीमत ₹250 प्रति वर्गमीटर तय, पुराने निर्माण सुरक्षित
भोपाल । मध्य प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्रों में आवासीय परियोजनाओं के विकास और औद्योगिक जमीन के आवंटन को लेकर राज्य सरकार ने नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत अब औद्योगिक क्षेत्रों में नई आवासीय परियोजनाओं के लिए रो-हाउस और अलग-अलग आवासीय प्लॉट बनाने की अनुमति नहीं होगी। यहां केवल बहुमंजिला फ्लैट या समूह आवास परियोजनाएं ही विकसित की जा सकेंगी। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन के इस्तेमाल को व्यवस्थित करना और आवासीय निर्माण को तय मानकों के अनुरूप रखना है। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। नए नियम केवल नई परियोजनाओं पर लागू होंगे। पहले से संचालित आवासीय योजनाओं और मौजूदा निर्माण पर इनका असर नहीं पड़ेगा।नई व्यवस्था के अनुसार औद्योगिक क्षेत्रों में फ्लैट आधारित आवासीय परियोजनाओं के तहत सिंगल बेडरूम और डबल बेडरूम की इकाइयां बनाई जा सकेंगी। इसके अलावा छात्रावास और उनसे जुड़ी सामाजिक सुविधाओं के विकास की भी अनुमति होगी। ये प्रावधान अधिसूचित आवासीय भूमि पर विकसित होने वाली परियोजनाओं के साथ औद्योगिक इकाइयों को आवंटित जमीन पर बनाई जाने वाली कैप्टिव आवासीय सुविधाओं पर भी लागू होंगे। हालांकि किसी भी परियोजना का निर्माण शुरू करने से पहले सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी लेना जरूरी होगा। निर्माण कार्य मास्टर प्लान और विकास योजना के साथ भवन उपविधियों तथा भूमि आवंटन की शर्तों के अनुसार करना होगा। अग्नि सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी मानकों का पालन भी अनिवार्य रहेगा।सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन की कीमत तय करने का आधार भी निर्धारित किया है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विकसित या विकसित किए जाने वाले औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन का मूल्य संबंधित क्षेत्र की असिंचित कृषि भूमि के लिए निर्धारित कलेक्टर गाइडलाइन को 0.6 से भाग देकर निकाला जाएगा। हालांकि इस गणना के बाद भी जमीन की कीमत 250 रुपये प्रति वर्गमीटर से कम नहीं रखी जा सकेगी। यदि तय प्रक्रिया के अनुसार मूल्य इससे कम निकलता है तो मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम यानी एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक को संचालक मंडल की अनुमति से कीमत बढ़ाने का अधिकार होगा।भूमि आवंटन में निवेश की सीमा से अधिक जमीन मांगने वाली औद्योगिक इकाइयों के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। निर्धारित निवेश के आधार पर जितनी जमीन पर छूट मिल सकती है उससे अधिक आवंटित क्षेत्रफल पर छूट नहीं दी जाएगी। उदाहरण के तौर पर यदि कोई इकाई संयंत्र और मशीनरी में 200 करोड़ रुपये का निवेश करती है और उसे 25 हेक्टेयर जमीन आवंटित होती है तो 20 हेक्टेयर तक ही छूट मिलेगी। शेष पांच हेक्टेयर पर यह लाभ लागू नहीं होगा। नियमों में 40 हेक्टेयर तक भूमि आवंटन पर प्रीमियम की गणना के दौरान जमीन के मूल्य में 50 प्रतिशत छूट का भी उल्लेख है। अन्य औद्योगिक प्रयोजनों के लिए प्रीमियम की गणना में भी भूमि मूल्य पर 50 प्रतिशत छूट का प्रावधान दिया गया है।औद्योगिक इकाइयों को आवंटित जमीन का पूरा उपयोग नहीं होने पर अनुपयोगी हिस्से के हस्तांतरण की व्यवस्था भी तय की गई है। इसके तहत संचालित इकाई अपनी आवंटित जमीन में से अधिकतम 50 प्रतिशत या कम से कम 5000 वर्गमीटर तक अनुपयोगी भूमि को अलग सड़क मार्ग उपलब्ध होने की शर्त पर विभाजित कर दूसरे पक्ष को हस्तांतरित कर सकेगी। इसके लिए मूल आवंटी को हस्तांतरण की तारीख तक भू-भाटक और संधारण शुल्क समेत सभी बकाया राशि का भुगतान करना होगा। आवंटन अभिलेख में जरूरी संशोधन के साथ समर्पण अभिलेख निष्पादित और पंजीकृत कराना भी अनिवार्य होगा।नए नियमों में भूमि और भवन आवंटन के लिए एमपीआईडीसी के अधिकारियों के अधिकार भी निर्धारित किए गए हैं। औद्योगिक भवनों का आवंटन क्षेत्रीय कार्यालय के कार्यकारी संचालक के अधिकार क्षेत्र में रहेगा। औद्योगिक क्षेत्रों में आवासीय और व्यावसायिक प्रयोजन के लिए 10000 वर्गमीटर तक जमीन आवंटित करने का अधिकार क्षेत्रीय कार्यालय के कार्यकारी संचालक को दिया गया है जबकि इससे अधिक क्षेत्रफल के आवंटन का अधिकार प्रबंध संचालक के पास रहेगा। इसके अलावा सार्वजनिक निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल पर औद्योगिक आवास परियोजनाएं शुरू करने का प्रावधान भी किया गया है।सरकार ने निजी औद्योगिक पार्कों के साथ निर्यात पार्कों और प्लग-एंड-प्ले तथा लॉजिस्टिक पार्कों के लिए भी दिशा-निर्देश निर्धारित किए हैं। निजी डेवलपर को परियोजना का विकास अपने खर्च और जोखिम पर करना होगा। जरूरत पड़ने पर वह विशेष प्रयोजन वाहन यानी एसपीवी बना सकेगा और परियोजना की मान्यता तथा प्रोत्साहन संबंधी प्रावधानों के लिए एमपीआईडीसी के साथ समझौता कर सकेगा। कुल मिलाकर नए नियम औद्योगिक जमीन के उपयोग और आवंटन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में उठाया गया कदम हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इनका प्रभाव नई परियोजनाओं पर ही पड़ेगा और पहले से बने आवासीय परिसरों या वहां रह रहे लोगों को इससे प्रभावित नहीं किया जाएगा। -

भोपाल के हलालपुरा पटाखा मार्केट पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, हाईकोर्ट से स्टे हटते ही होगा शिफ्ट, तब तक 13 सख्त शर्तें लागू
भोपाल । भोपाल के हलालपुरा पटाखा मार्केट को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बैरागढ़ के एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव ने यहां संचालित 15 पटाखा दुकानों के खिलाफ आदेश जारी करते हुए उन्हें जनसुरक्षा के लिए खतरा माना है। प्रशासन की योजना है कि जबलपुर हाईकोर्ट से संबंधित मामलों में लगा स्थगन हटते ही इस बाजार को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा। तब तक कारोबारियों को सुरक्षा से जुड़ी 13 शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा। प्रशासन का कहना है कि पटाखों के कारोबार में लापरवाही से आग लगने और बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। ऐसे में लोगों की जान और संपत्ति की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।एसडीएम ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 152 के तहत इन दुकानों को लोक न्यूसेंस यानी जनसामान्य के लिए परेशानी और खतरे का कारण मानते हुए आदेश जारी किया है। इस मामले से जुड़े 12 रिट याचिका और आठ अवमानना प्रकरण जबलपुर हाईकोर्ट में लंबित हैं। अदालत ने इन मामलों में अपना आदेश सुरक्षित रखा है और फिलहाल स्थगन भी लागू है। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि न्यायालय का स्थगन हटने के बाद दुकानों को अन्य स्थान पर ले जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। तब तक मौजूदा दुकानदारों को निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।आदेश के अनुसार कारोबारियों को विस्फोटक अधिनियम के प्रावधानों का पूरी तरह पालन करना होगा। दुकानों में अग्नि सुरक्षा और विद्युत सुरक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। इसके साथ ही यातायात प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण पर भी ध्यान देना होगा। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के निर्देशों का पालन करना भी अनिवार्य होगा। तय ध्वनि सीमा से अधिक आवाज करने वाले पटाखों और कार्बाइड गन जैसे प्रतिबंधित सामान की बिक्री पर रोक रहेगी। दुकानदारों को अग्नि सुरक्षा की मॉक ड्रिल कराने के साथ फायर एनओसी और विद्युत सुरक्षा से जुड़े आवश्यक दस्तावेज एसडीएम न्यायालय में प्रस्तुत करने होंगे।प्रशासन ने आदेश के पालन की जिम्मेदारी संबंधित तहसीलदार नगर निगम के उपायुक्त और थाना प्रभारी को सौंपी है। आदेश में यह भी चेतावनी दी गई है कि निर्धारित शर्तों का उल्लंघन करने पर दुकान मालिक को छह महीने तक के कारावास का दंड भुगतना पड़ सकता है। इन प्रावधानों का उद्देश्य बाजार में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना और संभावित दुर्घटनाओं को रोकना है।एसडीएम ने अपने आदेश में 12 जून 2026 की रात सोनी पटाखा दुकान में लगी भीषण आग का भी उल्लेख किया है। इस दुकान के पास पेट्रोल पंप स्थित है और आग वहां तक पहुंचने की आशंका पैदा हो गई थी। प्रशासन के मुताबिक यदि यह हादसा दिन के समय होता तो बड़े स्तर पर जनहानि हो सकती थी। हलालपुरा मार्केट के आसपास पटाखा दुकानों के अलावा बसों का संचालन और चार्टर बसों का टर्मिनल भी है। ऐसे में आग लगने की स्थिति में यात्रियों और आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बन सकती है।हलालपुरा पटाखा मार्केट की सुरक्षा को लेकर चिंता नई नहीं है। वर्ष 2024 में हरदा पटाखा फैक्ट्री हादसे के बाद भोपाल में पटाखा दुकानों और गोदामों की जांच की गई थी। उस दौरान कुछ स्थानों पर तय सीमा से अधिक स्टॉक और सुरक्षा नियमों में खामियां सामने आई थीं। तत्कालीन बैरागढ़ एसडीएम आदित्य जैन ने भी हलालपुरा बाजार को खतरनाक बताते हुए दुकानों और गोदामों को शहरी सीमा से बाहर गैर आवासीय क्षेत्र में स्थानांतरित करने की जरूरत बताई थी। जांच में आसपास रहवासी इलाकों मैरिज गार्डन और पेट्रोल पंप की मौजूदगी को जोखिम का कारण माना गया था।बताया जाता है कि वर्ष 1997 से पहले भोपाल का थोक पटाखा बाजार कबाड़खाना क्षेत्र में था। वहां एक हादसे के बाद प्रशासन ने कारोबारियों को हलालपुरा में जगह दी थी। उस समय आसपास आबादी कम थी लेकिन अब क्षेत्र में रिहायशी बस्तियां और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ चुकी हैं। ऐसे में पटाखा बाजार की सुरक्षा और स्थानांतरण का मुद्दा फिर महत्वपूर्ण हो गया है। फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार है और तब तक प्रशासन ने कारोबारियों को सुरक्षा संबंधी सभी शर्तों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। -

जसप्रीत बुमराह न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से रह सकते हैं बाहर, टीम मैनेजमेंट ने टेस्ट क्रिकेट के लिए बनाई खास रणनीति
नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी पांच मैचों की वनडे सीरीज में खेलते नजर नहीं आ सकते हैं। उनके इस सीरीज से बाहर रहने की संभावित वजह चोट नहीं, बल्कि टीम मैनेजमेंट की रणनीति बताई जा रही है। बुमराह पूरी तरह फिट हैं और फिलहाल टेस्ट क्रिकेट की तैयारी पर ध्यान दे रहे हैं।भारतीय टीम उन्हें आगामी महत्वपूर्ण टेस्ट मुकाबलों के लिए तरोताजा और पूरी तरह तैयार रखना चाहती है।टीम प्रबंधन की योजना के अनुसार, बुमराह को वनडे सीरीज में उतारने के बजाय लाल गेंद से खेले जाने वाले क्रिकेट के लिए तैयार किया जा सकता है। वह अहमदाबाद में टेस्ट क्रिकेट की तैयारी शुरू कर चुके हैं। अक्टूबर के आखिर में उनके भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पहुंचने की संभावना है। इसके बाद वह न्यूजीलैंड रवाना हो सकते हैं। हालांकि, वनडे सीरीज में उनकी अनुपस्थिति को लेकर अंतिम स्थिति टीम की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
वर्कलोड मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान
लंबे अंतरराष्ट्रीय दौरे और लगातार होने वाले मुकाबलों को देखते हुए बुमराह के कार्यभार का प्रबंधन भारतीय टीम के लिए महत्वपूर्ण है। वह टीम के प्रमुख तेज गेंदबाज हैं और टेस्ट क्रिकेट में उनकी भूमिका काफी अहम मानी जाती है। ऐसे में टीम मैनेजमेंट उनकी फिटनेस को ध्यान में रखते हुए खेलने के कार्यक्रम की योजना बना रहा है।बुमराह को आगामी टेस्ट मुकाबलों से पहले मैच अभ्यास दिलाने के लिए इंडिया ए की टीम के साथ मैदान पर उतारने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। योजना के मुताबिक, उन्हें 6 नवंबर से शुरू होने वाले इंडिया ए के तीसरे मुकाबले में खेलने का मौका मिल सकता है। इससे उनके कार्यभार को धीरे-धीरे बढ़ाने और टेस्ट क्रिकेट के लिए लय हासिल करने में मदद मिल सकती है।इसके बाद 19 नवंबर से वेलिंगटन में शुरू होने वाले पहले टेस्ट मुकाबले से पहले उन्हें पर्याप्त आराम और तैयारी का समय मिल सकता है। टीम प्रबंधन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बुमराह महत्वपूर्ण टेस्ट मैचों में अपनी पूरी क्षमता के साथ गेंदबाजी कर सकें।
चोट के बाद टेस्ट क्रिकेट पर नजर
बुमराह को इस साल की शुरुआत में घुटने की चोट के कारण श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों से बाहर रहना पड़ा था। इसके बाद उनकी फिटनेस और आगामी मुकाबलों में उपलब्धता को लेकर टीम प्रबंधन सावधानी बरत रहा है। बुमराह ने पिछले साल घरेलू मैदान पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना पिछला बहुदिवसीय मुकाबला खेला था। ऐसे में टेस्ट प्रारूप में वापसी के लिए उनकी तैयारी को अहम माना जा रहा है।उनके खेलने के कार्यक्रम को लेकर टीम से जुड़े अधिकारियों के बीच कई दौर की चर्चा होने की जानकारी सामने आई है। इसका उद्देश्य यह तय करना है कि तेज गेंदबाज को किस तरह पर्याप्त अभ्यास, आराम और मैच खेलने का अवसर दिया जाए, ताकि लंबे प्रारूप में उनकी उपलब्धता बनी रहे।ऑस्ट्रेलिया सीरीज और विश्व टेस्ट चैंपियनशिप पर नजर
भारतीय टीम की रणनीति केवल न्यूजीलैंड दौरे तक सीमित नहीं है। अगले साल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली पांच टेस्ट मैचों की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी को भी ध्यान में रखा जा रहा है। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए बुमराह जैसे अनुभवी गेंदबाज की उपलब्धता महत्वपूर्ण होगी।इसी वजह से टीम मैनेजमेंट उन्हें हर द्विपक्षीय सीरीज में खिलाने के बजाय महत्वपूर्ण टेस्ट मुकाबलों के लिए सुरक्षित रखने की रणनीति अपना सकता है। वनडे सीरीज में उनकी संभावित अनुपस्थिति को इसी योजना से जोड़कर देखा जा रहा है।टीम चयन पर जल्द साफ होगी तस्वीर
भारत की वनडे और टेस्ट टीमों की घोषणा आने वाले दिनों में होने की संभावना है। चयनकर्ता हर्षित राणा, प्रसिद्ध कृष्णा और ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ियों की फिटनेस तथा उपलब्धता से जुड़ी जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। इन खिलाड़ियों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद टीम संयोजन को अंतिम रूप दिया जा सकता है। बुमराह के वनडे सीरीज में खेलने या आराम दिए जाने पर भी आधिकारिक घोषणा के बाद स्थिति साफ होगी।