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  • घरेलू रसोई गैस की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं, देशभर में उपभोक्ताओं को फिलहाल नहीं मिली बढ़ोतरी से राहत

    घरेलू रसोई गैस की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं, देशभर में उपभोक्ताओं को फिलहाल नहीं मिली बढ़ोतरी से राहत


    नई दिल्ली ।
    देशभर में रसोई गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए 14 अगस्त को राहत की खबर है। सरकारी तेल कंपनियों ने आज घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर के साथ 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम भी आज स्थिर रखे गए हैं। ऐसे में दिल्ली से पटना और मुंबई से हैदराबाद तक ग्राहकों को आज सिलेंडर के लिए वही कीमत चुकानी होगी जो पहले लागू थी।

    दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है। वहीं 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर का भाव 2,738 रुपये पर बना हुआ है। मुंबई में घरेलू सिलेंडर 941.50 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 2,691.50 रुपये में उपलब्ध है। नोएडा में घरेलू LPG की कीमत 939.50 रुपये, जबकि कमर्शियल सिलेंडर का भाव 2,738 रुपये है।

    जयपुर में घरेलू LPG सिलेंडर के लिए 945.50 रुपये देने होंगे। यहां 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2,765.50 रुपये है। हैदराबाद में घरेलू सिलेंडर का भाव 994 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 2,985 रुपये है। वहीं पटना में घरेलू LPG सिलेंडर 1,031.50 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 3,018 रुपये में मिल रहा है।

    चंडीगढ़ में 14.2 किलोग्राम घरेलू सिलेंडर की कीमत 951.50 रुपये है, जबकि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर का भाव 2,760 रुपये है। कोलकाता में घरेलू LPG सिलेंडर 968 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 2,872.50 रुपये में उपलब्ध है। अलग-अलग शहरों में कीमतों में अंतर स्थानीय करों और अन्य लागतों के कारण देखने को मिलता है।

    महीने की शुरुआत में कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में 192 रुपये की बड़ी कटौती की गई थी। इसके बाद 14 अगस्त को कीमतों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। घरेलू LPG की कीमतों को स्थिर रखने से आम परिवारों के मासिक रसोई खर्च पर फिलहाल अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ा है।

    वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच भारत LPG की आपूर्ति को लेकर भी अपनी रणनीति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए भारत अलग-अलग देशों से LPG आपूर्ति हासिल करने पर जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य किसी एक क्षेत्र या आपूर्तिकर्ता पर अत्यधिक निर्भरता कम करना है।

    अमेरिका से LPG आयात भी भारत की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस वर्ष अगस्त तक अमेरिका से भारत को करीब 3.9 मिलियन टन LPG की आपूर्ति हो चुकी है। भारत 2027 के लिए अमेरिकी LPG की दीर्घकालिक आपूर्ति बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहा है।

    सरकारी तेल कंपनियां संभावित आपूर्तिकर्ताओं और उनके प्रस्तावों का मूल्यांकन कर रही हैं। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और LPG की कीमतों, आयात लागत तथा वैश्विक परिस्थितियों के आधार पर घरेलू और कमर्शियल गैस की कीमतों में बदलाव हो सकता है। फिलहाल 14 अगस्त को देश के प्रमुख शहरों में LPG सिलेंडर के दाम स्थिर हैं और उपभोक्ताओं को किसी नई बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ रहा है।

  • मध्य प्रदेश में बारिश ने फिर बढ़ाई चिंता, पूर्वी हिस्से में तेज बारिश की चेतावनी; सतना में सड़क पर चढ़ा नदी का पानी

    मध्य प्रदेश में बारिश ने फिर बढ़ाई चिंता, पूर्वी हिस्से में तेज बारिश की चेतावनी; सतना में सड़क पर चढ़ा नदी का पानी


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश में शुक्रवार को बारिश का एक और दौर शुरू हो गया है और प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आ रहा है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सक्रिय मजबूत मानसूनी सिस्टम के कारण जबलपुर रीवा शहडोल और सागर संभाग के कई इलाकों में तेज बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक प्रदेश के 12 जिलों में भारी बारिश हो सकती है और कुछ स्थानों पर 24 घंटे के दौरान करीब 4 इंच या उससे अधिक पानी गिरने की संभावना है। आने वाले दिनों में भी बारिश का यह सिलसिला जारी रहने के आसार हैं।

    जिन जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट बताया गया है उनमें सागर नर्मदापुरम नरसिंहपुर बालाघाट मंडला डिंडौरी अनूपपुर शहडोल कटनी मऊगंज सीधी और सिंगरौली शामिल हैं। इसके अलावा भोपाल इंदौर उज्जैन ग्वालियर रीवा और सतना समेत कई जिलों में भी कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां ज्यादा प्रभावी रह सकती हैं जबकि प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी मानसून सक्रिय बना रहेगा।

    भारी बारिश का असर कई इलाकों में दिखाई देने लगा है। खरगोन जिले के गोगांवा क्षेत्र में लगातार बारिश के बाद साटक जलाशय पूरी क्षमता से भर गया और ओवरफ्लो हो गया। करीब 18.38 मिलियन क्यूबिक मीटर क्षमता वाला यह जलाशय स्पिलवे के ऊपर से बह रहा है। लंबे अंतराल के बाद जलाशय के इस तरह भरने से आसपास के इलाकों में भी लोगों की नजर जलस्तर पर बनी हुई है। साटक जलाशय इससे पहले भी बारिश के मजबूत दौर के दौरान ओवरफ्लो हो चुका है।

    सतना जिले में भी लगातार रुक रुककर बारिश हो रही है। खासतौर पर तराई क्षेत्र में पहाड़ी इलाकों से तेजी से पानी नीचे आने के कारण हालात प्रभावित हुए हैं। धारकुंडी आश्रम के पास झरना तेज बहाव के साथ बह रहा है और पानी आश्रम परिसर तक पहुंच गया है। कोटर नगर परिषद कार्यालय परिसर और आसपास की दुकानों में भी पानी भरने की स्थिति सामने आई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के वार्ड में पानी पहुंचने के बाद प्रसूताओं को जिला अस्पताल रेफर करना पड़ा। वहीं बिरसिंहपुर सेमरिया मार्ग पर मऊ नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने की जानकारी सामने आई है।

    मौसम में बदलाव की बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम भी माना जा रहा है। उपलब्ध मौसम रिपोर्टों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव क्षेत्र आगे बढ़कर डिप्रेशन में तब्दील हुआ है और इसके प्रभाव से मानसून ट्रफ सक्रिय रहने की संभावना है। इसके चलते मध्य प्रदेश सहित मध्य भारत के कई हिस्सों में आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

    प्रदेश में बारिश का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है हालांकि कई हिस्से अभी सामान्य बारिश से पीछे चल रहे हैं। ऐसे में यह नया मानसूनी दौर उन जिलों के लिए राहत लेकर आ सकता है जहां बारिश की कमी बनी हुई है। दूसरी ओर जिन क्षेत्रों में पहले से पर्याप्त बारिश हो चुकी है वहां तेज बारिश से जलभराव नदी नालों के जलस्तर में वृद्धि और यातायात प्रभावित होने जैसी स्थिति बन सकती है।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए नदी नालों और जलाशयों के आसपास रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। तेज बारिश के दौरान पुलिया या रपटे पर पानी बहने की स्थिति में उसे पार करने से बचना चाहिए। प्रशासन की ओर से भी संवेदनशील क्षेत्रों में जलस्तर और बारिश की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा। फिलहाल एमपी में मानसून का यह नया दौर आने वाले कुछ दिनों तक मौसम को सक्रिय बनाए रख सकता है।

  • सोने की कीमत में एक दिन में 2800 रुपये की बड़ी गिरावट, 24 कैरेट गोल्ड के भाव में फिर दिखा नरमी का असर

    सोने की कीमत में एक दिन में 2800 रुपये की बड़ी गिरावट, 24 कैरेट गोल्ड के भाव में फिर दिखा नरमी का असर


    नई दिल्ली ।
    सोने और चांदी की कीमतों में पिछले दिनों की तेजी के बाद अब नरमी का दौर देखने को मिल रहा है। दिल्ली के सर्राफा बाजार में 13 अगस्त को सोने के भाव में एक दिन में 2,800 रुपये प्रति 10 ग्राम की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। लगातार करीब एक सप्ताह तक तेजी रहने के बाद आई इस गिरावट ने बाजार में खरीदारी करने वाले ग्राहकों का ध्यान खींचा है। चांदी की कीमत में भी गुरुवार को भारी गिरावट दर्ज की गई और इसके भाव में करीब 6,000 रुपये प्रति किलोग्राम की कमी आई।

    गिरावट के बाद दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव 1,57,000 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में इसकी कीमत 1,59,800 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इस तरह एक ही दिन में सोने की कीमत में 2,800 रुपये की कमी आई। लगातार बढ़ रहे भाव के बीच यह गिरावट सोना खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    शुक्रवार को भी सोने की कीमतों में मामूली कमजोरी दिखाई दे रही है। उपलब्ध ताजा भाव के मुताबिक 24 कैरेट सोना 10 रुपये की गिरावट के साथ 1,53,590 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। इससे पहले इसका भाव 1,53,600 रुपये प्रति 10 ग्राम था। हालांकि एक दिन पहले की बड़ी गिरावट की तुलना में शुक्रवार की कमी काफी मामूली है।

    22 कैरेट सोने की कीमत भी 10 रुपये नीचे आई है। शुक्रवार को 22 कैरेट सोना 1,40,790 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर दर्ज किया गया। वहीं 18 कैरेट सोने की कीमत 1,15,190 रुपये प्रति 10 ग्राम है। इसमें भी पिछले कारोबारी भाव की तुलना में 10 रुपये की मामूली गिरावट दर्ज की गई है।

    सोने के साथ चांदी के भाव में भी नरमी बनी हुई है। शुक्रवार को चांदी की कीमत 10 रुपये प्रति किलोग्राम की मामूली गिरावट के साथ 2,54,900 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई है। इससे पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,55,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर थी। यानी एक दिन में मामूली कमी के बावजूद चांदी अब भी काफी ऊंचे भाव पर कारोबार कर रही है।

    वर्तमान भाव के हिसाब से चांदी की कीमत प्रति ग्राम 254.90 रुपये है। वहीं 8 ग्राम चांदी की कीमत 2,039.20 रुपये और 10 ग्राम का भाव 2,549 रुपये है। 100 ग्राम चांदी खरीदने पर इसकी कीमत करीब 25,490 रुपये बैठती है। इन कीमतों में स्थानीय बाजार, टैक्स, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क के कारण वास्तविक खरीद मूल्य अलग हो सकता है।

    सोने की कीमतों में अचानक आई बड़ी गिरावट के बाद अब बाजार की नजर आगे के कारोबार पर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की चाल, डॉलर की स्थिति, निवेशकों की मांग और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां घरेलू कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में लगातार तेजी के बाद आई यह नरमी ग्राहकों को कुछ राहत दे सकती है, लेकिन खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार का ताजा भाव और लागू शुल्क जरूर जांचना जरूरी है।

  • भारत में वित्त वर्ष 2027 में 95 अरब डॉलर तक आ सकता है पूंजी प्रवाह, मजबूत एफसीएनआर निवेश से भुगतान संतुलन होगा बेहतर

    भारत में वित्त वर्ष 2027 में 95 अरब डॉलर तक आ सकता है पूंजी प्रवाह, मजबूत एफसीएनआर निवेश से भुगतान संतुलन होगा बेहतर

    नई दिल्ली । भारत की अर्थव्यवस्था के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में बाहरी वित्तीय मोर्चे पर राहत की उम्मीद बढ़ गई है। मजबूत फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट बैंक यानी एफसीएनआर (बी) जमा प्रवाह और भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए किए गए नीतिगत उपायों के चलते देश में 90 से 95 अरब डॉलर तक पूंजी प्रवाह आने का अनुमान है। इससे भारत की बाहरी स्थिति मजबूत होने के साथ भुगतान संतुलन में भी उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।

    एक आकलन के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में भारत का भुगतान संतुलन यानी बैलेंस ऑफ पेमेंट्स करीब 64 अरब डॉलर के अधिशेष में रह सकता है। यह अनुमान पिछले वर्षों की तुलना में काफी बेहतर स्थिति को दर्शाता है। वित्त वर्ष 2026 में भारत का भुगतान संतुलन 23.6 अरब डॉलर के अधिशेष में रहा था, जबकि वित्त वर्ष 2025 में करीब 5 अरब डॉलर का घाटा दर्ज किया गया था।

    अनुमान के मुताबिक एफसीएनआर (बी) के जरिए करीब 80 अरब डॉलर का प्रवाह हो सकता है। इसके अलावा बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशी मुद्रा में बाहरी स्रोतों से मिलने वाली पूंजी से 10 से 15 अरब डॉलर अतिरिक्त आने की संभावना है। इन दोनों माध्यमों से आने वाले धन से देश के पूंजी खाते की स्थिति में भी बड़ा सुधार होने की उम्मीद है।

    पूंजी खाते का अधिशेष वित्त वर्ष 2027 में करीब 108 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह केवल लगभग 2 अरब डॉलर रहा था। यदि यह अनुमान वास्तविक प्रवाह में बदलता है तो भारत के विदेशी मुद्रा भंडार, वित्तीय स्थिरता और बाहरी भुगतान क्षमता को मजबूती मिल सकती है।

    विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए जून 2026 में घोषित नीतिगत उपायों का शुरुआती असर भी दिखाई दे रहा है। एफसीएनआर (बी) जमा, बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशी मुद्रा में बाहरी उधारी के लिए रियायती स्वैप व्यवस्था शुरू किए जाने के बाद विदेशी निवेशकों और बैंकों की ओर से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।

    5 जून से 31 जुलाई 2026 के बीच इन उपायों के माध्यम से कुल 40.8 अरब डॉलर की पूंजी आकर्षित होने का अनुमान है। इसमें एफसीएनआर (बी) जमा का हिस्सा 36.7 अरब डॉलर रहा, जबकि बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशी मुद्रा आधारित बाहरी उधारी से करीब 4.1 अरब डॉलर आए।

    एफसीएनआर जमा को आकर्षक बनाने में ब्याज दरों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। बड़े बैंक फिलहाल एफसीएनआर जमा पर लगभग 6 से 6.5 प्रतिशत तक ब्याज दे रहे हैं, जबकि कुछ छोटे और नए बैंक करीब 7 प्रतिशत तक की दर पेश कर रहे हैं। इससे प्रवासी भारतीयों और विदेशी मुद्रा रखने वाले निवेशकों के लिए भारतीय बैंकिंग प्रणाली में धन रखने की दिलचस्पी बढ़ सकती है।

    मजबूत पूंजी प्रवाह का असर घरेलू बैंकिंग प्रणाली की तरलता पर भी पड़ने की संभावना है। जुलाई में बैंकिंग प्रणाली में औसत तरलता करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये रही थी, जो अगस्त में अब तक बढ़कर लगभग 3 लाख करोड़ रुपये हो गई है। महीने के अंत में आने वाले विदेशी पूंजी प्रवाह ने भी तरलता बढ़ाने में योगदान दिया है।

    भारत के लिए यह स्थिति ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक बाजारों में आर्थिक और वित्तीय अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। मजबूत पूंजी प्रवाह से देश को विदेशी भुगतान दायित्वों को पूरा करने में मदद मिल सकती है और वैश्विक अस्थिरता के दौरान बाहरी झटकों से निपटने की क्षमता बेहतर हो सकती है। हालांकि पूंजी प्रवाह का वास्तविक स्तर वैश्विक ब्याज दरों, निवेशकों की धारणा और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

  • Shiprocket IPO से पहले सामने आए कानूनी विवाद, कंपनी पर चार आपराधिक मामले और 5.39 करोड़ रुपये की दावा राशि लंबित

    Shiprocket IPO से पहले सामने आए कानूनी विवाद, कंपनी पर चार आपराधिक मामले और 5.39 करोड़ रुपये की दावा राशि लंबित


    नई दिल्ली । ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स और शिपिंग प्लेटफॉर्म शिपरॉकेट शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की तैयारी कर रही है। कंपनी के प्रस्तावित आईपीओ से पहले सामने आए मसौदा दस्तावेज में कई कानूनी, कर और परिचालन जोखिमों का उल्लेख किया गया है। इनमें कंपनी और उसकी सहयोगी इकाइयों से जुड़े लंबित मामले भी शामिल हैं, जिनका संभावित असर कारोबार और वित्तीय स्थिति पर पड़ सकता है।

    दस्तावेज के अनुसार, शिपरॉकेट के खिलाफ चार आपराधिक मामले लंबित हैं। इन मामलों में कुल दावा राशि 5.39 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अलावा कंपनी के खिलाफ दो अन्य आपराधिक कार्यवाहियां और सात कर विवाद भी चल रहे हैं। सहयोगी कंपनियों के स्तर पर भी एक आपराधिक मामला और तीन कर संबंधी मामले लंबित हैं, जिनमें कुल दावा राशि 2.34 करोड़ रुपये बताई गई है।

    कंपनी के सामने मौजूद मामलों में वर्ष 2022 का एक प्रमुख मामला भी शामिल है। इसमें शिपरॉकेट के सह-संस्थापक साहिल गोयल और गौतम कपूर, निदेशक अर्जुन सेठी तथा मुख्य वित्तीय अधिकारी कुमार तनमय को नामजद किया गया है। मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे आरोप लगाए गए हैं। यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है और इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

    वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो शिपरॉकेट अभी लाभ में नहीं आई है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का शुद्ध घाटा 79.2 करोड़ रुपये रहा। इससे पिछले वित्त वर्ष में घाटा 74.4 करोड़ रुपये था। हालांकि वित्त वर्ष 2023-24 में दर्ज 595.1 करोड़ रुपये के घाटे की तुलना में कंपनी की वित्तीय स्थिति में काफी सुधार हुआ है।

    राजस्व के मोर्चे पर कंपनी ने लगातार वृद्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2025-26 में परिचालन से प्राप्त आय 24 प्रतिशत बढ़कर 2024.1 करोड़ रुपये हो गई। राजस्व में यह वृद्धि कंपनी के कारोबार के विस्तार का संकेत देती है, लेकिन बढ़ती आय के बावजूद लाभप्रदता हासिल करना अभी भी प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।

    कंपनी के अनुसार, व्यापारियों का आधार बढ़ाने, नए उत्पाद विकसित करने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमताओं में निवेश करने और नए कारोबारी क्षेत्रों का विस्तार करने पर खर्च निकट भविष्य में मुनाफे पर दबाव बनाए रख सकता है। ऐसे निवेश कंपनी की दीर्घकालिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनके कारण तत्काल लाभ में सुधार सीमित रह सकता है।

    शिपरॉकेट की एक अन्य महत्वपूर्ण निर्भरता तीसरे पक्ष के सेवा प्रदाताओं पर है। वित्त वर्ष 2025-26 में मर्चेंट सॉल्यूशन लागत कंपनी के कुल खर्च का लगभग 69.4 प्रतिशत रही। इस खर्च में शीर्ष 10 विक्रेताओं की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत से अधिक थी। इससे कुछ प्रमुख सेवा प्रदाताओं पर कंपनी की निर्भरता का जोखिम सामने आता है।

    कंपनी ने यह भी बताया है कि उसके अधिकांश लॉजिस्टिक्स साझेदारों के साथ विशेष समझौते नहीं हैं। ऐसी स्थिति में किसी साझेदार के साथ कारोबारी संबंध प्रभावित होने पर सेवा व्यवस्था, लागत और परिचालन क्षमता पर असर पड़ सकता है। बढ़ती परिचालन लागत और प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्मों द्वारा बेहतर शर्तें दिए जाने की स्थिति भी कंपनी के लिए चुनौती बन सकती है।

    ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में शिपरॉकेट को मार्केटप्लेस, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और तकनीकी एग्रीगेटर्स से प्रतिस्पर्धा मिलती है। कंपनी घरेलू बाजार के साथ क्रॉस-बॉर्डर ई-कॉमर्स कारोबार का विस्तार करना चाहती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अवसर अधिक हैं, लेकिन वहां नियामकीय आवश्यकताओं, लागत, संचालन और प्रतिस्पर्धा से जुड़े अतिरिक्त जोखिम भी मौजूद हैं।

    ऐसे में प्रस्तावित आईपीओ से पहले निवेशकों के लिए कंपनी की बढ़ती आय के साथ उसके घाटे, लंबित कानूनी मामलों, सेवा प्रदाताओं पर निर्भरता और विस्तार संबंधी खर्चों को समझना महत्वपूर्ण होगा। कंपनी की आगे की रणनीति का मुख्य लक्ष्य कारोबार बढ़ाने के साथ लाभप्रदता और परिचालन स्थिरता हासिल करना रहेगा।

  • स्वतंत्र माइक्रोफिन के 3000 करोड़ रुपये IPO से पहले सामने आए जोखिम, असुरक्षित कर्ज और नकदी बहिर्वाह ने बढ़ाई चिंता

    स्वतंत्र माइक्रोफिन के 3000 करोड़ रुपये IPO से पहले सामने आए जोखिम, असुरक्षित कर्ज और नकदी बहिर्वाह ने बढ़ाई चिंता

    नई दिल्ली ।अनन्या बिरला और एंटीमैटर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रमोटेड स्वतंत्र माइक्रोफिन लिमिटेड ने 3000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम के लिए मसौदा दस्तावेज दाखिल किया है। कंपनी के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में कारोबार और संचालन से जुड़े कई जोखिमों का उल्लेख किया गया है, जिन पर संभावित निवेशकों की नजर रह सकती है।

    कंपनी के सामने सबसे प्रमुख जोखिमों में असुरक्षित माइक्रोफाइनेंस ऋणों पर अत्यधिक निर्भरता शामिल है। 31 मार्च 2026 तक स्वतंत्र माइक्रोफिन की कुल प्रबंधित परिसंपत्तियों में 88.56 प्रतिशत हिस्सा असुरक्षित माइक्रोफाइनेंस ऋणों का था। ऐसे ऋणों में किसी प्रकार की आर्थिक कमजोरी आने पर वसूली से जुड़ी चुनौती बढ़ सकती है।

    स्वतंत्र माइक्रोफिन मुख्य रूप से ऐसे परिवारों को ऋण उपलब्ध कराती है, जिनकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये तक है। कंपनी के अनुसार, इस आय वर्ग के ग्राहक रोजगार में बदलाव, आय में कमी और आर्थिक परिस्थितियों से अपेक्षाकृत अधिक प्रभावित हो सकते हैं। इससे ऋण भुगतान और वसूली पर असर पड़ने का जोखिम बना रहता है।

    कंपनी के कारोबार में नकद संग्रह भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। डिजिटल माध्यमों को बढ़ावा देने के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के कुल संग्रह का 79.22 प्रतिशत हिस्सा नकद भुगतान से आया। कंपनी ने स्वयं माना है कि नकद लेनदेन में धोखाधड़ी, चोरी, नकदी प्रबंधन की गलतियों और धन के दुरुपयोग जैसे जोखिम हो सकते हैं।

    नकदी प्रवाह से जुड़ा आंकड़ा भी कंपनी के लिए महत्वपूर्ण है। वित्त वर्ष 2025-26 में परिचालन गतिविधियों में इस्तेमाल हुई शुद्ध नकदी 5392.6 करोड़ रुपये रही, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में यह 427 करोड़ रुपये थी। इस तरह परिचालन नकदी बहिर्वाह में करीब 1160 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज हुई।

    कंपनी ने इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण ऋण वितरण में तेजी और लोन बुक के विस्तार को बताया है। साथ ही, भविष्य में कारोबार और ऋण पोर्टफोलियो बढ़ने के साथ परिचालन स्तर पर नकारात्मक नकदी प्रवाह जारी रहने की संभावना से भी दस्तावेज में अवगत कराया गया है।

    भौगोलिक एकाग्रता भी कंपनी के लिए जोखिम का विषय है। कुल प्रबंधित परिसंपत्तियों का करीब 68 प्रतिशत हिस्सा बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे पांच राज्यों में केंद्रित है। इन क्षेत्रों में आर्थिक, राजनीतिक या प्राकृतिक परिस्थितियों में प्रतिकूल बदलाव आने पर कंपनी के कारोबार और ऋण वसूली पर असर पड़ सकता है।

    कानूनी मोर्चे पर भी कंपनी से जुड़ी चुनौती सामने आई है। रत्नाफिन कैपिटल और रत्नाफिन एंटरप्राइज ने दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रेडमार्क और लोगो से जुड़े कथित उल्लंघन को लेकर स्वतंत्र माइक्रोफिन के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर किया है। याचिकाकर्ताओं ने रोक लगाने के साथ दो करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है।

    कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े जोखिम भी मसौदा दस्तावेज में दर्ज हैं। कंपनी ने बताया है कि उसके कॉरपोरेट प्रमोटर एंटीमैटर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के पास माइक्रोफाइनेंस कारोबार का पर्याप्त अनुभव नहीं है। यह पहलू निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि इस क्षेत्र में ऋण जोखिम, वसूली और संचालन की निगरानी अहम होती है।

    कर्मचारियों के पलायन की दर भी ऊंची बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में पूर्णकालिक कर्मचारियों की एट्रिशन दर 39.22 प्रतिशत रही, हालांकि यह पिछले वित्त वर्ष के 41.47 प्रतिशत से कम है। लगातार ऊंची एट्रिशन दर कंपनी के श्रम-प्रधान कारोबारी मॉडल के सामने मानव संसाधन से जुड़ी चुनौती को दर्शाती है।

    प्रस्तावित आईपीओ में 1500 करोड़ रुपये के नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि मौजूदा शेयरधारक 1500 करोड़ रुपये तक के शेयर ऑफर फॉर सेल के माध्यम से पेश करेंगे। कंपनी 300 करोड़ रुपये तक का प्री-आईपीओ प्लेसमेंट भी कर सकती है। यदि यह प्लेसमेंट होता है तो नए शेयरों के निर्गम का आकार उसी अनुपात में घटाया जा सकता है।

  • जुलाई में थोक महंगाई दर घटकर 9.78 प्रतिशत हुई, ईंधन कीमतों में नरमी के बावजूद खाद्य और विनिर्माण दबाव बढ़ा

    जुलाई में थोक महंगाई दर घटकर 9.78 प्रतिशत हुई, ईंधन कीमतों में नरमी के बावजूद खाद्य और विनिर्माण दबाव बढ़ा

    नई दिल्ली ।भारत में थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में जुलाई 2026 के दौरान मामूली नरमी देखने को मिली। जुलाई में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर 9.78 प्रतिशत रही, जबकि जून में यह 9.87 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इस तरह मासिक आधार पर थोक महंगाई में हल्की कमी आई है, हालांकि कीमतों का दबाव अभी भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।

    2022-23 को आधार वर्ष मानकर जारी अनंतिम आंकड़ों के अनुसार जुलाई में सभी वस्तुओं का थोक मूल्य सूचकांक 110.0 रहा। जून में यह सूचकांक 110.2 दर्ज किया गया था। समग्र सूचकांक में मामूली गिरावट के बावजूद अलग-अलग श्रेणियों में कीमतों का रुझान एक जैसा नहीं रहा।

    प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर जुलाई में बढ़कर 8.52 प्रतिशत हो गई, जबकि जून में यह 7.00 प्रतिशत थी। इसका मतलब है कि इस श्रेणी की वस्तुओं की कीमतों में पिछले महीने की तुलना में अधिक दबाव रहा। प्राथमिक वस्तुओं का सूचकांक भी जून के 116.1 से बढ़कर जुलाई में 117.2 हो गया।

    विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली। जुलाई में इस श्रेणी की महंगाई दर 8.29 प्रतिशत रही, जबकि जून में यह 7.48 प्रतिशत थी। विनिर्मित उत्पादों का सूचकांक जून के 107.8 से बढ़कर जुलाई में 108.4 हो गया। इससे उत्पादन क्षेत्र में लागत और कीमतों से जुड़ा दबाव बने रहने का संकेत मिलता है।

    इसके विपरीत ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में महंगाई दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। जून में 27.41 प्रतिशत रही यह दर जुलाई में घटकर 20.05 प्रतिशत पर आ गई। हालांकि गिरावट के बावजूद इस श्रेणी में महंगाई अभी भी काफी ऊंची बनी हुई है। ईंधन और ऊर्जा का सूचकांक जून के 111.1 से घटकर जुलाई में 105.4 हो गया।

    जुलाई में थोक महंगाई को प्रभावित करने वाले प्रमुख क्षेत्रों में खनिज तेल और पेट्रोलियम उत्पाद, खाद्य वस्तुएं, बेसिक मेटल्स, गैर-खाद्य प्राथमिक उत्पाद, खाद्य उत्पादों का विनिर्माण तथा रसायन और रासायनिक उत्पाद शामिल रहे। इन क्षेत्रों में कीमतों की बढ़ोतरी का असर कुल थोक महंगाई के आंकड़े पर पड़ा।

    खाद्य क्षेत्र में भी कीमतों का दबाव बढ़ा है। जुलाई में डब्ल्यूपीआई फूड इंडेक्स आधारित महंगाई दर 6.65 प्रतिशत रही, जो जून के 6.14 प्रतिशत से अधिक है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का असर थोक बाजार के साथ आगे चलकर अन्य कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।

    इस बीच मई 2026 के थोक महंगाई आंकड़ों में भी संशोधन किया गया है। मई का अंतिम थोक मूल्य सूचकांक 109.9 के प्रारंभिक अनुमान से संशोधित होकर 110.1 हो गया। इसके साथ मई की थोक महंगाई दर भी 9.68 प्रतिशत के प्रारंभिक आंकड़े से संशोधित होकर 9.88 प्रतिशत हो गई।

    मई के अंतिम आंकड़े 98.14 प्रतिशत वेटेड रिस्पॉन्स रेट के आधार पर तैयार किए गए हैं। इसके अलावा आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स का मई का अंतिम आंकड़ा 109.6 के प्रारंभिक अनुमान से बढ़कर 109.9 हो गया है।

    विनिर्माण क्षेत्र के ऑल इंडिया ट्रायल इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स की बात करें तो जुलाई में यह 105.9 दर्ज किया गया। मई के इनपुट पीपीआई के अंतिम आंकड़े में भी संशोधन हुआ और यह शुरुआती 104.9 से बढ़कर 106.5 हो गया।

    कुल मिलाकर जुलाई में थोक महंगाई दर में मामूली राहत जरूर मिली, लेकिन प्राथमिक वस्तुओं, खाद्य पदार्थों और विनिर्मित उत्पादों में बढ़ता मूल्य दबाव अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। वहीं ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में आई नरमी ने समग्र महंगाई दर को नीचे लाने में मदद की है।

  • सावरकर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई खत्म, यूपी सरकार के अनुमति रिकॉर्ड पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

    सावरकर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई खत्म, यूपी सरकार के अनुमति रिकॉर्ड पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

    नई दिल्ली ।कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को विनायक दामोदर सावरकर से जुड़ी मानहानि शिकायत के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने लखनऊ की निचली अदालत से राहुल गांधी के खिलाफ जारी समन को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही मानहानि शिकायत और उससे जुड़े निचली अदालत के पुराने आदेशों को भी समाप्त कर दिया गया है।

    यह फैसला उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अदालत में दाखिल किए गए हलफनामे के बाद आया। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस मामले में मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक अनुमति से संबंधित कोई रिकॉर्ड उसके पास उपलब्ध नहीं है। अदालत ने इसी तथ्य को कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण आधार माना।

    मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार का हलफनामा पीठ के सामने रखा गया। इसमें मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक अनुमति के रिकॉर्ड के उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई थी।

    सुप्रीम कोर्ट ने माना कि जब आवश्यक अनुमति से संबंधित कोई रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है, तो इस आधार पर निचली अदालत में आगे की आपराधिक कार्यवाही जारी रखना उचित नहीं होगा। इसके बाद पीठ ने राहुल गांधी के खिलाफ जारी समन के साथ शिकायत और मजिस्ट्रेट द्वारा पहले पारित किए गए आदेशों को भी रद्द कर दिया।

    यह मामला वर्ष 2022 में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान दिए गए एक बयान से संबंधित है। 17 नवंबर 2022 को महाराष्ट्र के अकोला जिले में यात्रा के दौरान आयोजित एक जनसभा में राहुल गांधी ने सावरकर को लेकर टिप्पणी की थी। उनके बयान के बाद इस मामले को लेकर विवाद खड़ा हुआ और उनके खिलाफ मानहानि की शिकायत दाखिल की गई।

    शिकायतकर्ता वकील नृपेंद्र पांडे ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने सावरकर के बारे में टिप्पणी कर उनका जानबूझकर अपमान किया और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। इसके बाद लखनऊ की अदालत में मामले की कार्यवाही आगे बढ़ी और राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी किया गया।

    राहुल गांधी ने निचली अदालत की कार्रवाई और समन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। पिछली सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने उनके बयान को लेकर नाराजगी जताते हुए सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी के साथ बयान देने की आवश्यकता पर जोर दिया था। हालांकि, उसी दौरान निचली अदालत से जारी समन पर रोक लगाकर उन्हें अंतरिम राहत दी गई थी।

    अब उत्तर प्रदेश सरकार के हलफनामे में आवश्यक अनुमति का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की बुनियादी कानूनी स्थिति पर विचार किया। अदालत के ताजा आदेश के बाद इस शिकायत के आधार पर राहुल गांधी के खिलाफ लखनऊ अदालत में चल रही संबंधित कार्यवाही समाप्त हो गई है।

    सावरकर से जुड़े बयानों को लेकर राहुल गांधी पहले भी राजनीतिक और कानूनी विवादों का सामना करते रहे हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है। हालांकि, अदालत की कार्रवाई का आधार राजनीतिक विवाद के बजाय मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक अनुमति से संबंधित रिकॉर्ड का उपलब्ध नहीं होना रहा।

  • अमेरिका ने चीन के जरिए टैरिफ बचाने के आरोपों में भारत समेत 40 से अधिक व्यापारिक साझेदारों को जोखिम वाले देशों में रखा

    अमेरिका ने चीन के जरिए टैरिफ बचाने के आरोपों में भारत समेत 40 से अधिक व्यापारिक साझेदारों को जोखिम वाले देशों में रखा

    नई दिल्ली ।अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव के बीच ट्रंप प्रशासन ने भारत समेत 40 से अधिक देशों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि चीन अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए कुछ तीसरे देशों के रास्ते अपने सामान को अमेरिकी बाजार तक पहुंचा सकता है। इस प्रक्रिया को ट्रांसशिपमेंट के तौर पर चिन्हित किया गया है।

    अमेरिकी रिपोर्ट में भारत, कनाडा और यूरोपीय संघ के अलावा ताइवान, मैक्सिको, जापान, दक्षिण कोरिया और वियतनाम सहित कई व्यापारिक साझेदारों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन देशों में कुछ ऐसे क्षेत्र हो सकते हैं जहां चीन से आने वाले सामान की मामूली प्रोसेसिंग, पैकेजिंग या लेबल बदलकर उसके मूल स्रोत को अलग तरीके से प्रदर्शित किया जा सकता है।

    ट्रंप प्रशासन के मुख्य व्यापार सलाहकार पीटर नवारो की रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रांसशिपमेंट की गतिविधियों में 2018 के बाद बढ़ोतरी देखने को मिली। इसी अवधि में अमेरिका ने चीन के कथित अनुचित व्यापारिक तौर-तरीकों के खिलाफ सेक्शन 301 के तहत अतिरिक्त टैरिफ लागू किए थे। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इन शुल्कों के प्रभाव से बचने के लिए चीनी सामान को तीसरे देशों के जरिए भेजने की कोशिशें बढ़ी हैं।

    रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे मामलों में चीन से तैयार या निर्मित वस्तुओं को किसी तीसरे देश में भेजकर उनका री-लेबलिंग, री-पैकेजिंग, री-इनवॉइसिंग या मामूली स्तर का प्रसंस्करण किया जा सकता है। इसके बाद सामान को उस देश का उत्पाद दिखाकर अमेरिका में भेजने की कोशिश की जा सकती है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इस तरह सामान पर लागू होने वाले टैरिफ में अंतर का लाभ उठाया जा सकता है।

    अमेरिका ने इस पूरी व्यवस्था को अवैध ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क से जोड़ते हुए कहा है कि इससे व्यापार नियमों और सीमा शुल्क व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि चीनी कंपनियां ऐसे देशों और क्षेत्रों का इस्तेमाल कर सकती हैं जहां श्रम लागत अपेक्षाकृत कम हो, सीमा शुल्क निगरानी सीमित हो या मुक्त व्यापार क्षेत्रों में प्रक्रियात्मक लचीलापन उपलब्ध हो।

    इस मामले में अमेरिकी सरकार अब तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दे रही है। रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस और यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन मिलकर सीमा पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य संदिग्ध शिपमेंट की पहचान करना और यह पता लगाना है कि कहीं किसी वस्तु को तीसरे देश के माध्यम से भेजकर उसके वास्तविक मूल को छिपाने का प्रयास तो नहीं किया गया।

    भारत का नाम इस सूची में आने से अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर भी चर्चा बढ़ सकती है। हालांकि किसी देश का रिपोर्ट में उल्लेख होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वहां से होने वाला प्रत्येक व्यापार या शिपमेंट गैरकानूनी है। अमेरिकी प्रशासन ने मुख्य रूप से संभावित जोखिम और निगरानी की जरूरत पर जोर दिया है।

    ट्रंप प्रशासन का यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था में टैरिफ, सप्लाई चेन और चीन से जुड़े आयात को लेकर अमेरिकी नीतियां लगातार सख्त हो रही हैं। आने वाले समय में अमेरिकी सीमा शुल्क जांच और एआई आधारित निगरानी बढ़ने से उन देशों के निर्यातकों पर भी अतिरिक्त जांच का दबाव पड़ सकता है, जिनका नाम जोखिम वाले व्यापारिक साझेदारों में शामिल किया गया है।

  • जनगणना 2027 में जाति और कोविड टीकाकरण की जानकारी भी होगी दर्ज, डिजिटल प्रक्रिया के तहत जुटाए जाएंगे 40 सवालों के जवाब

    जनगणना 2027 में जाति और कोविड टीकाकरण की जानकारी भी होगी दर्ज, डिजिटल प्रक्रिया के तहत जुटाए जाएंगे 40 सवालों के जवाब

    नई दिल्ली । देश में जनगणना 2027 की प्रक्रिया का दूसरा चरण 17 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। इस चरण में पहली बार आजादी के बाद देशव्यापी स्तर पर जातिगत आंकड़े जुटाए जाएंगे। केंद्र सरकार ने जनगणना के लिए पूछे जाने वाले 40 सवालों की सूची अधिसूचित कर दी है। नागरिकों से उनकी सामाजिक, जनसांख्यिकीय और आर्थिक स्थिति से जुड़ी विभिन्न जानकारियां दर्ज की जाएंगी।

    जनगणना 2027 देश की 16वीं जनगणना होगी, जबकि स्वतंत्रता के बाद यह आठवीं जनगणना के रूप में आयोजित की जा रही है। इस बार की जनगणना कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें जाति से संबंधित जानकारी भी आधिकारिक तौर पर दर्ज की जाएगी। इससे देश में विभिन्न सामाजिक समूहों की जनसंख्या से जुड़े आंकड़े सामने आने की संभावना है।

    निर्धारित 40 सवालों में नागरिकों से जाति, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित जानकारी मांगी जाएगी। इसके अलावा कोविड-19 टीकाकरण से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। जनगणना के दौरान प्रत्येक परिवार और व्यक्ति से निर्धारित प्रश्नों के आधार पर जानकारी एकत्र की जाएगी।

    जनगणना दो चरणों में पूरी की जा रही है। पहले चरण में मकानों और आवास से संबंधित विवरण जुटाने की प्रक्रिया रखी गई है। दूसरे चरण में प्रत्येक नागरिक की जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक जानकारी दर्ज की जाएगी। इसी दूसरे चरण में जातिगत आंकड़ों को भी शामिल किया गया है।

    इस बार जनगणना को डिजिटल तरीके से संचालित किया जा रहा है। मोबाइल उपकरणों के माध्यम से आंकड़े दर्ज करने के साथ नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने की सुविधा भी दी गई है। इससे कागजी प्रक्रिया पर निर्भरता कम करने और आंकड़ों को डिजिटल रूप में संग्रहित करने में मदद मिलेगी।

    पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों के लिए जनगणना का कार्यक्रम अलग रखा गया है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले एवं असमान क्षेत्रों में जनगणना का दूसरा चरण 1 सितंबर से 30 सितंबर तक चलेगा। इन क्षेत्रों में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए समयसीमा अलग निर्धारित की गई है।

    इन क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को 17 अगस्त से 31 अगस्त तक स्वयं ऑनलाइन जानकारी दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध रहेगी। वहीं देश के अन्य हिस्सों में जनसंख्या की गणना फरवरी 2027 में की जाएगी। इस तरह अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप जनगणना का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।

    जनगणना 2027 की प्रक्रिया में जातिगत जानकारी शामिल किए जाने को सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे सरकार के पास विभिन्न सामाजिक वर्गों की जनसंख्या से संबंधित अधिक विस्तृत आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे। इन आंकड़ों का उपयोग भविष्य में नीतियों और योजनाओं के निर्माण में किया जा सकता है।

    यह जनगणना मूल रूप से वर्ष 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसकी प्रक्रिया निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सकी। अब कई वर्षों की देरी के बाद जनगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। डिजिटल व्यवस्था, ऑनलाइन स्व-पंजीकरण और पहली बार जातिगत आंकड़ों का समावेश इस जनगणना को पिछली जनगणनाओं से अलग बनाता है।